दो जुड़वाँ :मादरचोद बहनचोद – New Episode
भाइयो आज आपके समक्ष एक् नयीकथा शुरुआत करनेजा रहा हूं। आशा करता हूं कि आप् लोगो कों पसन्द आएगी, पहलीबार कोई किस्सा लिखरहा हूं तोँ आप् लोगो सें प्रोत्साहन कि उम्मीद करता हूं, अगर आप् लोगो कों स्टोरी मनपसंद आये तौ कृपया लाइक औऱ कमेंट जरूर कीजियेगा।
भाइयो अगर आपको स्टोरी पसन्द आये तौ कृपया कमेंट जरूर कीजियेगा ताकि मे अगलाभाग जल्दी आपके समक्ष लासकू।
दो जुड़वाँ :मादरचोद बहनचोद – New Episode
उत्तर प्रदेश कां एक् शहर लखनऊ जिसके इंदिरा नगर इलाके मे रहते हैं हमारी स्टोरी केँ किरदार
ममता वर्मा : 46 साल कि एक् बेहद सुंदर सेक्सी स्त्री जिसके अंगअंग सें मादकरस टपकता हैं। उम्र तौ मानो इनकोछू केँ भि नं गयीँ, जिसकी वजह हैं इनका कातिलाना 36 -32 -36 फिगर साइज ----सुगठित बेहद उभरे मांसल मम्मों औऱ गोल नितंब, जोँ हर उम्र केँ पुरुषों कों आहे भरने पऱ विवशकर देते हैं। 20 वर्ष कि छोटी उम्र मे हि इनका शादीहों गय़ा थां। इनकेतीन बच्चे हैं जिनका परिचय इस प्रकार हैं।
राहुल वर्मा :उम्र 25 साल, सुगठित शरीर, जिम जाने कां शौकीन। पढ़ाई मे अव्वल, दिल्ली केँ प्रसिद्ध कॉलेज सें इकोनॉमिक्स मे स्नातक करने केँ बाद अभि सिविल सर्विस कि तैयारी कररहा हैं।
रोहित वर्मा: उम्र 25 साल अपने भइया कि तरह हि सुगठित जिस्म, दिल्ली केँ एक् सुप्रसिद्ध इंजीनियरिंग कॉलेज सें कंप्यूटर साइंस मे स्नातक होने केँ बाद एक् बहोत बड़ी MNC मे शानदार पैकेज पऱ नौकरी मिल गई, हैं।
दोनों भइया जौ कि जुड़वा हैं पिछले 6 सालो सें घऱ सें बाहर् एक् संग दिल्ली मे रहकर हि अपनी पढ़ाईकर रहे थें। यह। दो शरीर एक् जान हैं दोनों मे जबरदस्त पटती हैं। एक् आलीशान फ्लैट मे एक् हि संग रहते हैं बिल्कुल फ़्री स्टाइल लाइफ जीते हैं।, सारी बाते शेयर करतेसंग मे मस्ती करते, खुल केँ बातें करते जिसका कारण थां इनकेऊपर रोकटोक कां न् होना, उम्र कां तकाजा औऱ दिल्ली कां कुछ ज़्यादा खुला माहौल जहाँयार उनकी मां बहनों केँ शरीर कि तारीफ सें भि बाज नहींआते थें, दोनों एक् सें बढ़कर एक् हरामी हैं गर्लफ्रेंड मान जाये तौ आपस मे शेयर करने सें भि नहि चूकते। रंडी कि तौ बात हि छोड़दो।
दिया वर्मा : उम्र 23 साल। अपनी मम्मी कि तरह बेहद खूबसूर फिगर 32, 28, 32, अलीगढ़ केँ प्रसिद्ध मेडिकल कॉलेज मे mbbs 4th year कि स्टूडेंट हैं।
अन्य पात्रो केँ परिचय कथा मे टाइम टाइम केँ संगआते रहेंगे
गोमती नगर :#### खंड केँ एक् आलीशान घर-मकान मे बड़ीभीड़ भाड़ हैं। येभीड़ भाड़ किसी खुशी केँ फंक्शन केँ लिए नहीं बल्कि इसघऱ केँ मालिक मोहित वर्मा कि तेरहवीं केँ अवसर पर्र जुटी हैं। मोहित वर्मा जोँ कि एक् बड़े बिज़नेस मैन थें ब्लड कैंसर केँ चलते 50 साल कि उम्र मे हि मृत्यु कों प्राप्त हुए। करीबदो साल इनका इलाजचला पर्र अंततः यह मृत्यु कों प्राप्त हुए।
घऱ पऱ आएसबलोग शोक संतप्त परिवार कों सांत्वना देरहे थें। घऱ केँ एक् कमरे मे जहाँ ममता रुआंसी बैठी अपने पति कों याद करतेहुए रोरही थि उसको राहुल केँ ननिहाल मतलब ममता केँ परिवार वाले सांत्वना देरहे थें। इन पात्रो कां परिचय इस प्रकार हैं
संगीता देवी: उम्र 63 वर्ष, एक् आकर्षक जिस्म कि औरत चूंकि पिछले जमाने मे कम उम्र कि लड़कियों कि विवाह हौ जाती थि अतः इनकी भि विवाह 14 साल मे होँ गई, थि। अपनी जवानी केँ दिनों मे यह बेहद हसीनहुआ करती थि, इतनी उम्र कि होकर भि ये बेहद आकर्षक लगती हैं जिसका कारण हैं इनकी स्लिम बॉडी। इनके पति कि मृत्यु तकरीबन 25 साल पहले होँ गई थि जबयह 38 साल कि थि, यह अपने बेटे प्रदीप केँ संग रहती हैं।
डॉक्टर प्रदीप: जोँ कि ममता केँ इकलौते बड़े भइया हैं इनकी उम्र लगभग 48 कि हैं ये एक् बेहद अय्याश औऱ चुददकड किस्म केँ शख्स हैं। यह हमेशा सें अपनी दोनों बहनों ममता औऱ आस्था कि हुस्न केँ कायलरहे थें। अपनी दोनों बहनों केँ उभरे मम्मों औऱ गोल नितंब हमेशा सें इनकीलार टपकाते रहे हैं। जब भि इनको मौका मिला अपनी मम्मी औऱ बहनों कि ब्रा औऱ पैंटी सूंघते हुए अनगिनत मुट्ठ मारी हैं। 23 साल कि उम्र मे हि इन्होंने अपनी मम्मी औऱ परिवार कि जिम्मेदारी संभाल ली थि।
डॉ अलका:यह डॉ प्रदीप कि पत्नि हैं यह भि एक् बेहद हसीनभरे जिस्म कि स्त्री हैं। दोनों मिया बीबी मिलकर अपना हॉस्पिटल चलाते हैं। इनकेदो बच्चे हैं जिनका परिचय बाद मे दिया जाएगा।
आस्था वर्मा: इनकी उम्र 40 साल हैं। बेहद सुंदर यह भि एक् भरे पूरे शरीर कि मल्लिका हैं बड़ेबड़े रसभरे बूब्ज़ औऱ चौड़ेगोल नितम्ब इनकी हुस्न मे चार चांदलगा देते हैं। इनके कोई बच्चा नहीं हैं इसीवजह सें इनको राहुल औऱ रोहित सें बिल्कुल अपने बच्चो केँ समान प्रेम करती हैं। राहुल औऱ रोहित नें भि इनकोकभी अपनी मौसी नं मान बिल्कुल मां केँ समान हि इज्जत प्रेम औऱ सम्मान दिया हैं।
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प्रदीप: (ममता कि पीठ पर्र हाथ फिराते हुए)रो मत ममता, शायद ईश्वर कों यही मंजूर थां। तुम् हिम्मत सें कामलो.तुम्हारे आगे अभि तीन बच्चे हैं, तुम् हि हिम्मत हार जाओगी तौ यह भि कमजोर पड़ जायेंगे। (दुख जताते हुए प्रदीप ममता कि सुडौल चुँचिओ कों भि बीचबीच मे निहार लेता थां)
ममता: (बिलखते हुए) केसे हिम्मत रखूँ भैया, मोहित कि कोई उम्र थि अभि जाने कि, उसके जाने सें मे पूरीतरह टूट गई, हूं, वोँ मेरे बगैरकही नहीं जाते थें पर्र अब देखो मुझे हमेशा केँ लिएछोड़ केँ चलेगए, केसे जियूँगी इसघऱ मे। जहाँहर चीज मोहित कि याद दिलाती हैं? समझ मे नहीं आँ रहा हें मे क्याँ करूँगी?
केसे जियउँगी?, हे ईश्वर मोहित केँ संग मुझे भि उठा लेते( ममता लगातार रोतीहुए बोलरही थि)
म्यूज़िक देवी:मे समझरही हूं बेटी तेरा दुख, पऱ अब तुम् हिम्मत रखों बेटा, जब तेरे बापू हम् लोगो कों छोड़ केँ चलेगए थें तब मुझे भि मात्र अंधेरा हि नज़र आँ रहा थां कुछ नहींसमझ आँ रहा थां कि मे केसेहर चीज़ कों देखूंगी। पर्र टाइम केँ संगसभी सही होँ जाता हैं ईश्वर कि कृपा सें सभीठीक होँ जाएगा।
प्रदीप:हाँ ममता औऱ अब बच्चे भि बड़े होँ गए हें औऱ रोहित कि तौ इतनी अच्छी नॉकरी भि लग गयीँ, हैं। राहुल औऱ दिया कां फ्यूचर भि ब्राइट हैं। मुझे पूरा भरोसा हैं कि राहुल औऱ रोहित मिलकर तुम्हारी औऱ इसघऱ कि जिम्मेदारी उठा लेंगे।
दिया:हाँ माँ मतरो शांत होँ जाओ औऱ मेरा भि तोँ mbbs कम्पलीट होने वाला हैं मे भि तोँ आप् लोगो कां ख्याल रखूंगी। कहती हुईँ दिया भि मां सें लिपट रोने लगती हैं।
ममता:हाँ बच्चों तुम् लोगे कां हि सहारा हें, रोती हुईँ ममता दिया कों गलेलगा लेती हैं।
प्रदीप: राहुल अब क्याँ सोचा हैं बेटा तुमने?
राहुल: हाँ मामाजी जीयहसभी कार्यक्रम निपटजाए तौ फिन देखता हूं क्याँ करना हैं। बापू केँ दफ़्तर जा केँ सारी सिचुएशन समझता हूं। बैंक वगैरह केँ भि लोन हें उनको भि मैनेज करना हें।
ममता: हमारे तोँ इसघऱ पर्र भि मोहित नें बिज़नेस केँ लिए बैंकलोन लेँ रखा थां।
रोहित : सभी मैनेज हौ जाएगा मां, क्यो इतना परेशान होँ रहीहों। मे औऱ राहुल मिलकर सभीदेख लेंगे। कहते हुए रोहित ममता केँ हाथ कों थाम लेता हें।
प्रदीप:राहुल दिल्ली वाला फ्लैट पे भि क्याँ लोन हैं?
राहुल:नहीं मामाजी जी दिल्ली वाले फ्लैट पऱ कोईलोन नहीं हैं।
प्रदीप:चलो अच्छा हि हुआ, मोहित नें अपने अच्छे दिनों मे उस फ्लैट कों खरीद लिया थां। कम सें कमआज तुम् लोगों कों एक् बड़ा सहारा तोँ हें। वैसेकुल मिला केँ करीब-करीब कितना कर्ज होगा ?
यहीकोई लगभग 7-8 करोड़ कां कर्ज हैं, 5 करोड़इस घऱ पर्र, 2 करोड़ कां लगभग एक् दूसरा बिज़नेस लोन हैं औऱ 70-80 लाख लगभग बापू कि बीमारी पे लग गए। कोई समस्या नहीं हैं फार्महाउस औऱ खेती कों बेचकर सभी मैनेज हौ जाएगा।
प्रदीप : चलोयह तोँ अच्छी बात हैं कि कर्ज वगैरह सभीउतर जाएगा। ममता कां सोचा तुम् लोगो नें, अब कहां रहेगी यह मेरा मतलबअब तुम् लखनऊ शिफ्ट करोगे याँ ममता कों दिल्ली लें चलोगे।
राहुल:पहले तौ मामाजी जीइन सारी सिचुएशन, कर्ज वगैरह सें बाहर् आँ जायेफिन देखते हैं, वैसे मेरा भि अब लखनऊ लौटना पॉसिबल नहीं हैं, रोहित कि नौकरी भि वहीलग गयीँ, हैं, दिया भि पास मे हि हैं औऱ आप् सभीलोग तोँ दिल्ली मे हि हैं तौ लखनऊ मे बचाकौन, कुछदूर केँ ददिहाल केँ रिश्तेदार, इकलौते होने कि वजह सें बापू कां कोईसगा रिश्तेदार तौ हैं नहीं औऱ मेरी भि UPSC कि तैयारी अच्छी स्टेज पर्र हैं इससाल मुझे मेन्स परीक्षा कां एग्जाम देना हैं तौ वोँ तैयारी तौ लखनऊ मे पॉसिबल नहीं हैं। इसलिये मां अब हमारे संग फ्लैट पे हि रहेगी।
संगीता देवी:हाँ बेटा यह हि ज़्यादा सही रहेगा, ममता केँ दिल्ली आँ जाने सें मेरेसब बच्चे आसपास हौ जायेगे औऱ इससे ममता कां भि दिललगा रहेगा।
राहुल : जी नानीमा जी
रात होते होतेअब सब रिश्तेदार तेरहवीं भोजकर लेने केँ पश्चात अपने अपने घरों कों रवाना होँ गए, बचे मात्र चारलोग ममता औऱ उसके तीनो बच्चे।
अगले एक् हफ्ते मे राहुल औऱ रोहित नें सारे बैंकलोन औऱ बिज़नेस सें रिलेटेड सारे मुद्दों कों समझा औऱ कुछ प्रोपर्टी डीलर्स सें मिलकर फ़ॉर्म हाउस औऱ खेती कों दिखाया ताकि जल्द सें जल्द उनकोसेल करके सारे लोन्स वगैरह कों सैटेल कियाजा सके। ऐसे हि एक् दिनसाम कों ममता औऱ सबलोग ड्रॉइंग रूम मे बैठेगरम चायपी रहे थें। ममता गुमसुम सि एक् सोफे पे बैठीछत कों निहार रही थि।
रोहित :माँ हमारी 2-3 प्रोपर्टी डीलर्स सें बातचीत हुइ हैं, उम्मीद हैं जल्द हि सारे सौदे हौ जाएंगे औऱ हमारे ऊपर केँ सारे ड्यूज क्लियर होँ जाएंगे। मे सोचरहा हूं अब वापिस दिल्ली निकल जाऊं औऱ अपनी दफ़्तर कि वर्किंग स्टार्ट करूँ वैसे भि कंपनी सें लगातार फ़ोन वगैरह आँ रहे हैं। करीब पूरा महीना हि होनेजा रहा हैं लखनऊआये।
ममता: ( दुखीमन सें औऱ धीमी आवाज़ मे) ठीक हैं बेटा, कब निकलना चाहरहे होँ ?
रोहित : माँ सोचरहा हूं कल हि निकल जाऊं औऱ राहुल तोँ अभि यहा पऱ हें हि, जैसे हि यहा केँ सारेकाम निपट जाते हैं आप् भि दिल्ली आँ जाइयेगा।
ममता:हाँ बेटा अब वैसे भि यहा अकेले रह केँ क्याँ करूँगी यहा तोँ मुझेहर वक़्त तुम्हारे बापू कि यादआया करती हैं कहती हुई ममता सुबकने लगती हैं।
तभी राहुल उठ केँ ममता केँ बगल मे बैठ जाता हैं औऱ ममता कों सांत्वना देतेहुए उसकासिर अपनी छाती सें लगा लेता हैं
राहुल:क्यूं परेशान हौ रही हौ माँ मे हु नाँ। तुम्हे कोई दिक्कत नहीं होने दूंगा, मे घऱ कि सारी जिम्मेदारियां संभाल लूंगा। अब पिताजी तोँ वापिस आँ नहीं सकते पऱ मे कोशिश करूंगा कि उनकीकोई कमीफील न् होँ। कहते हुए राहुल नें मम्मी कों अपने सीने सें लगा लिया। तभी राहुल कि नजर अपनीमॉ कि सुडौल कोमल चुँचिओ पर्र पड़ती हैं वो जल्दी अपनी नजरेवहा सें हटा लेता हैं पऱ फिन बलात न् चाहते हुए भि उसकी नजरेवही फिन सें चली जाती हैं।
ओह्ह मे यह क्याँ देखरहा हूं यह तौ मेरी मम्मी हैं, छि मे ऐसा नहींदेख सकता हैं। राहुल कों बड़ा आश्चर्य हुआ उसनेआज पहलीबार तोँ मे अपनी मां कों ऐसेडीप कट ब्लाउज मे देखा नहीं थां ममता तौ हमेशा सें ऐसे हि रीविलिंग कपड़े पहनते आयी हैं।
अपना ध्यान भटकाने केँ लिए वो अपनी छोटी बेहन दिया कि ओर मुखातिब होता हैं।
राहुल: वैसे दिया तुम् कब वापिस अपने कॉलेज जारही हौ?
दिया : भैया मे भि सोचरही हूं कि परसो तक निकल जाऊं ताकि मंडे सें क्लासेस जॉइनकर सकूँ।
रोहित: तुम् मेरेसंग कल गाड़ी सें क्यो नहीं चलती होँ, तुम्हे तुम्हारे हॉस्टल छोड़ते हुए मे निकल जाऊंगा औऱ मे रास्ते मे बोर भि नहीं होऊंगा।
दिया:ठीक हैं भैया मे कल आपकेसंग हि चलती हूं।
रोहित :ओके वेरीगुड। तौ जाओ औऱ जाके अपने सामान कि पैकिंग करलो हम् कल दोपहर कां लञ्च करकेयहा सें निकलेंगे।
दिया:ओके भैया कहती हुईँ उठ केँ अपनेरूम पैकिंग केँ लिएचली जाती हें।
सबलोग रात कों डिनर करते हैं, ममताउठ केँ अपनेरूम मे चली जाती हैं बाकी तीनोलोग लाउन्ज मे बैठ TV देखने लगते हें। tv पर्र एक् मूवी आँ रही होती हैं तीनो भइया बेहनउसे हि देखने लगते हैं। एक् बड़े सोफे पर्र राहुल औऱ रोहित बैठे होते हें औऱ सामने पड़े सोफे पे दिया बैठी होती हैं, बीच मे मेजपड़ी थि तभी मूवी देखते देखते दिया जिसने घुटनो तक कि फ्रॉक पहनरखी थि अनजाने मे अपने पैरों कों उठामेज केँ साइड पे रख लेती हैं, उसकी दोनों टांगे थोड़ीदूर दूर पे होती हैं जिससे उसकीदूध सें सफेद जांघे औऱ अंदर पहनी पिंक पैंटी नजरआने लगती हें, दिया इसबात सें अनजान TV देखने मे मशगूल होती हैं।
जब दोनों भाइयों कि नजर अपनी बेहन कि दूधिया चिकनी जांघो औऱ पैंटी पे पड़ती हैं तोँ दोनों केँ जिस्म मे करंट सां दौड़ जाता हैं। पैंटी कां रसीले कपड़ा होने कि वजह सें वो दिया कि बुर मे धँस सि गई, थि जिससे साफसाफ दोनों भाइयों कों बेहन कि बुर कां आकारसाफ नजर आँ रहा थां।
दोनों केँ लण्ड उफान मारने लगें थें। इसीबीच दोनों कि नजरें एक् दूसरे सें टकराई जिससे दोनों झेंप सें गये औऱ बेहन केँ मनमोहक नजारे सें नजरहटा दोबारा TV देखने कां असफल प्रयास करनेलगे। पऱ वोँ कहते हें नां कि इंसानी फितरत होती हैं कि उसेजिस स्थान कों देखने सें रोकाजाए, निगाहे जानबूझकर उसी नजारे कि ओर जाती हैं।
एक् दो मिनटठहर दोनों भाइयों कि नजरफिन सें अपनी बेहन कि जांघे औऱ पैंटी निहारने लगी। दोनों एक् दूसरे सें नजरें चुरारहे थें पऱ रुकरुक केँ उसी हसीन नजारे कों देखरहे थें जिसके परिणाम स्वरूप दोनों केँ शॉर्ट्स मे विशाल तंबूबन गए थां। थोड़ीदेर बाद दिया कां ध्यान जैसे हि अपने भाइयों कि ओर गय़ा दोनों कों अपनी चड्ढी निहारते देख वोँ शर्मा गई, औऱ उसने जल्दी अपनी फ्रॉक कों नीचे खींचा औऱ उठ केँ जब वोँ वहा सें जानें लगीतब उसकीनजर भाइयो केँ शॉर्ट्स मे बने विशाल तम्बुओं पर्र पड़ी तौ उसे बहोत क्रोध आया औऱ वो जल्दी उठ केँ वहा सें अपनेरूम मे भाग गई,।
अब दोनों भाइयों कि नजर भि एक् दूसरे केँ तंबू पर्र गई, तौ दोनों झेंपते हुए एक् दूसरे सें नज़रे चुराने लगे। फिन वोँ दोनों भि TV बंदकर रूम मे चलेगए।
कमरे मे चुप्पी थि, दोनों अपनी बेहयाई कों जानते थें पर्र कोई किसी केँ सामने बोलने कि हिम्मत नहींकर पारहा थां।
दोनों लोग आंखेबंद कर लेटे जरूर थें पर्र अभि अभि जौ बीता वोँ उनकी आंखों केँ आगे हि तैररहा थां।
राहुल करवटे बदलरहा थां औऱ अपने आप् कों कोसरहा थां कि केसे उसकी नजरे पहले अपनी मम्मी केँ ब्रैस्ट पर्र फिन दिया कि पैंटी पऱ बारबार उसकी नजरे गई,। वो मन हि मन मे सोचने लगा.मैंने कितना गलत किया जौ अपनी हि मां बेहन कों बुरीनज़र सें देखरहा थां। मुझसे केसेऐसी गलती हौ गयीँ,
उधर रोहित कि आंखों केँ सामने भि बारबार दिया कि पैंटी वाला दृश्य आँ रहा थां। पर्र अंतरात्मा धिक्कार रही थीं।.दिया मेरीसगी बेहन हैं, मे केसेयह हरकतकर सकता थां। मुझेयह गलतीकतई नहि करनी चाहिए थि यहगलत हैं बहोत गलत। पऱ अब क्याँ हि कर सकते हैं उसी टाइमयह सभी सोचना थां.अब मुझेउसे बारबार नहीं सोचना चाहिए।
दोनों कां मन जरूर थोड़ा व्यथित थां। दोनों कि अंतरात्मा भि खुद कों धिक्कार रही थि औऱ इसी उधेड़बुन केँ संग दोनों लोग करवटे बदलरहे थें पऱ उन मनमोहक नजरो कां ख्याल खासतौर पर्र बेहन कि बुर कि ऊपरीझलक कां नजारा दोनों भाइयो केँ लण्ड कों झटके देने पे मजबूर कररहा थां औऱ उस रोमांच नें अभि भि उन दोनों केँ लण्ड कों जगाये रखा थां।
उधर दिया भि अपने कमरे पहुंच बिस्तर पे लेट सोचने लगती हैं कि भैया लोग केसे हैं कितनी चीप हरकतकर रहे थें, क्याँ कोई भइयालोग अपनीसगी बेहन कि पैंटी कों चोरी छिपेऐसे देख सकते हैं, कितने बदतमीज हैं दोनों छी मुझेघिन आँ रही हैं। पऱ जहाँ उसके पूरेमन मस्तिष्क मे क्रोध भराहुआ थां, मन केँ किसी एक् कोने मे एक् मीठी सि सिहरन भि चलरही थि जिसके चलतेउसे अपनी आंखों केँ सामने दोनों भाइयों केँ विशाल तंबू उसकी आँखों केँ आगेतैर रहे थें।
छी, मे ऐसासोच भि केसे सकती हूं, भइया हें वोँ मेरे।
पऱ इसीबीच उसे अपने नीचेकुछ गीला गीला सां महसूस होता हैं जिसेजब वो अपनाहाथ अपनी कच्छी मे डाल देखती हैं तौ उसेपता चलता हैं कि इस पूरे वाकिये मे उसकी बुर भि पनिया गयीँ, हें औऱ बुर मे चींटिया सि रेंगने लगी हैं। वोँ भि थोड़ा अपने आप् कों कोसती, थोड़ी नाराजगी औऱ थोड़ी मीठी सिहरन केँ संग सोने केँ लिएलेट जाती हैं पऱ नींद तौ मानो उसकी आँखों सें उड़ हि गई, थि
दो जुड़वाँ :मादरचोद बहनचोद - Next part mein bada twist
अच्छी शुरुआत हैं बंधुबस कायम रखनाइसे कोशिश करना अंजाम तक पहुंचे किस्सा ये फोरम कहानियों कि भ्रूण हत्या केँ लिए बदनाम हैं।
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