दो जुड़वाँ :मादरचोद बहनचोद – New Episode
भाइयो आपके समक्ष पेश हैं स्टोरी कां नयाभाग। आशा करता हूं कि आप् लोगो कों पसन्द आएगा, अगर आप् लोगो कों एपसोड मनपसंद आये तौ कृपया कमेंट ज़रूर करे। दोस्तों यह आपकी प्रतिक्रिया हि होती हैं जौ औऱ भि अच्छा भाग देने केँ लिए मोटीवेट करती हैं
दो जुड़वाँ :मादरचोद बहनचोद – New Episode
टाइम बीतते देर नहीं लगती, करीब 15 दिन औऱ बीत चुके थें पर्र अभि तक ज़मीन कां सौदा नहीं हौ पाया थां। राहुल कां भि पूरा फोकस प्रॉपर्टी केँ सौदे औऱ अपनी पढ़ाई पर्र थां। जीवन अपने हि रूटीन पर्र चलरही थि.
कहते हैं वक़्तबड़े बड़ेघाव भर देता हैं पऱ कुछघाव ऐसे होते हैं जोँ वक़्त केँ संग औऱ गहराते चले जाते हैं.ठीक जिंदगी कि इसी दुविधा सें गुज़ररही थि ममता
ममता जौ नं केवल अपने पति मोहित केँ गुज़र जाने केँ कारण मानसिक द्वंद औऱ अकेलेपन सें गुज़ररही थि उसकी एक् लड़ाई शारीरिक स्तर पर्र भि चलरही थि जोँ हर गुज़रते दिन केँ संग औऱ भि ज़्यादा उसकोजला रही थि।
उम्र केँ चौथे पड़ाव मे पहुंच चुकी ममता जौ कि एक् कुशल गृहणी होने केँ संगसंग एक् आदर्श पत्नि औऱ मां होने केँ संगसंग रतिक्रिया मे अत्यधिक रुचि रखने वाली स्त्री थि जिसके जिस्म कि आग उम्र बढ़ने केँ संगसंग औऱ भि अधिक प्रबल हौ रही थि।
नित्य प्रति रात मे सोने सें पूर्व अपने पति केँ संग भिन्न भिन्न आसनों केँ संग अपनी चुदाई करवाना ममता कि दिनचर्या मे शामिल थां। कामक्रीड़ा केँ पूर्व अपनी बुर चटवाना औऱ फिन अपने पति कों पुरस्कार स्वरूप अपनी गाढ़ीरज चटवाना भि उसके पसंदीदा कार्यो मे सें एक् कार्य थां।
परंतु पिछले ढाई सालो सें ममता कों अपनी शारीरिक आवश्यकताओं कों कुचलना पड़रहा थां जिसका कारण थां उसके पति मोहित कां ब्लड कैंसर सें जूझना, डॉक्टरों औऱ अस्पतालों केँ चक्कर काटते काटते ममताइन बीते दिनों मे सदैव अपनी शारीरिक आवश्यकताओं कों दबाती रही परंतु जबसे उसके पति कां निधन होँ गय़ा उसकी तौ मानो उम्मीदों कि पूरी दुनिया हि उजड़ गयीँ,।
अबहर लम्हा ममता कों एक् मित्र कि जरूरत महसूस होती रहती थि औऱ हर गुज़रता दिन उसकी कामाग्नि मे औऱ बढ़ोतरी कर देता थां परंतु उसकी पूर्ति केँ लिएउसे कोई साधनकोई हलउसे नजर नं आँ रहा थां औऱ यहीबात उसकी बेचैनी कों औऱ बढ़ारही थि।
(आगे कि स्टोरी राहुल कि जुबानी)
वक्त बीतता जारहा थां। घऱ पे मात्र दोलोग हि बचे थें मे औऱ मां.घऱ मे हर वक़्त एक् सन्नाटा सें छाया रहता थां। हम् दोनों कि भि लिमिटेड बातचीत हि हुआ करती थि। पिताजी केँ जाने केँ बाद मां तोँ मानोचुप सि हि हौ गई, थि।। हर वक़्त तकलीफ़ औऱ बैचैनी उनके चेहरे सें साफ झलकती थि, बीच बीच मे जैसे नाश्ते, खाने केँ अलावा बहोत कम टाइम हि हमारी बातचीत होती थि अधिकतर हर वक़्त वोँ अपने कमरे मे हि रहती थि, बसकभी कभीसाम कों घऱ केँ पीछेबने गॉर्डन मे गुमसुम सि झूले पर्र बैठी रहती थि।
मेरा भि अधिकतर टाइम पढ़ाई मे औऱ बचा वक़्त प्रॉपर्टी डीलर्स औऱ खरीददारों केँ संग मीटिंग मे हि जाता थां, सौदों कि अच्छी खासी बातचीत चलरही थीं जल्द हि उम्मीद थि कि फार्महाउस औऱ खेती कां सौदा जल्द हि हौ जाएगा।
ऐसे हि एक् दिनजब मे किसीकाम सें बाहर् गय़ा हुआ थां, मां सें मे साम तक आने केँ लिएबोल गय़ा थां पऱ मेराकाम दोपहर जल्द हि समाप्त हौ गय़ा क्योंकि जौ बर्थडे पार्टी हमारी खेती खरीदने मे इंट्रेस्टेड थि उसकोआज मीटिंग केँ लिए आनां थां पऱ किसी इमरजेंसी केँ कारण उन्होंने मीटिंग कों ऐनसमय कैंसिल कर दिया जिसकी वजह सें मे तकरीबन 1 बजे केँ लगभग हि फ़्री होँ गय़ा तौ मे घऱ वापिस आँ गय़ा।
घऱ पर्र मेनडोर खुलाहुआ थां शायदकाम वालीबाई अभि अभि झाड़ू पोछा करके गयीँ, होगी क्योकि यही उसके जाने कां वक़्तहुआ करता थां औऱ मां नें अभि तक दरवाजा बंद नहीं किया थां।
अंदरआकर मैंने फ्रिज सें एक् बॉटल निकाल कर पानी पियाफिन सीधा अपनेरूम मे गय़ा औऱ कपड़े चेंज करके मां केँ कमरे कि तरफबढ़ा ताकि उनसे खानां परसने केँ लिएबोल दूं। खानां खाने केँ बाद मे सीधेसो जानां चाहता थां ताकि एक् दो घंटे आराम करने केँ बाद मे अपनी पढ़ाईकर सकूं।
बहोत हि शानदार लाजवाब औऱ जानदार अद्भुत रमणिय भाग हैं भइया आनंद आँ गय़ा
दो जुड़वाँ :मादरचोद बहनचोद – New Episode
मां कों अभि तक अंदाजा नहींहुआ थां कि मे घऱ वापिस आँ चुका हूं। मे जैसे हि उनके कमरे कि ओरबढ़ा कमरे सें मुझे माँ कि किसी सें फ़ोन पे किसी सें बात करने कि आवाज़ सुनाई दि,
क्याँ बताऊँ मेरी तोँ जीवन हि बर्बाद हौ गयीँ,, हर वक़्त मेरा जिस्म जलता रहता हैं अब तौ मे लण्ड केँ स्पर्श कों भि मानोभूल सि गयीँ, हूं। हर वक़्त मेरी बुर रिसती सि रहती हैं पऱ मुझे तौ समझ नहींआता कि मे क्याँ हि करूँ ?,
पहलेपहल तोँ मुझे अपने कानों पे भरोसा नहींहुआ कि मैंने यह क्याँ सुन लिया शायद मैंने हि कुछगलत सुन लिया पऱ, मां केँ मुँह सें यह अल्फ़ाज़ सुन मेरा तौ रोवाँ रोवाँ खड़ा होँ गय़ा थां अब मैंने ध्यान देकरअब उनकी बातों कों सुनने लगा ताकियह विश्वास कर सकूं कि मैंने हि कुछगलत सुन लिया थां।
थोड़ीदेर कि चुप्पी केँ बाद माँ कि आवाज़ फिन सें आनेलगी.
पिछले ढाई सालो सें मे हर वक़्तमर सि रही हूं मोहित कि बीमारी केँ बाद सें हि मैंने सेक्स नहीं किया, औऱ अब तौ उम्मीद हि ख़त्म हौ गयीँ,, मे तोँ दिनरात जलती रहती हूं हर वक़्त मेरी बुर मे आग सि लगी रहती हैं। कभीकभी तौ इतनी ख़्वाहिश करती हैं चुदवाने कि मुझे पूरी पूरीरात नींद नहीं पड़ती हैं पर्र क्याँ हि बताऊं। मे आखिरकर हि क्याँ सकती हूं। मे तोँ डिप्रेशन मे चलरही हूं, ऐसेघुट घुट केँ जीने सें तौ मरना अच्छा हैं, इससे अच्छा हैं कि मरजाऊ, माँ नें करीब रोतेहुए बोला
फिन थोड़ीदेर एक् लंबी खामोशी बसबीच बीच मे हाँ हूं केँ अलावा माँ कुछ नहींबोल रही थि पऱ उसकेबाद फिन मां नें बोला.अब उसके अलावा मे कर हि क्याँ सकती हूं एक् वोँ हि तौ मार्ग बचा हैं जबतक सोने सें पहले वोँ नं करलूँ मुझे तोँ नींद हि नहीं पड़ती हैं।
औऱ वैसे भि अब कहां मुझे नींद हि आती हैं, रात 12 -1 केँ पहले नींद हि नहींआती हैं फिन सुभह 5-6 बजे नींदखुल जाती हैं, सुभह सुभह तौ मानोपेट नुचता सें रहता हैं थोड़ीदेर अगर योगा न् करूं तौ वोँ भि दिमाग़ कों शांति नं मिले
फिन मां फ़ोन पे कुछ सुनने लगी
फिन बोलि.अरे कैसी बातेकर रही हौ बच्चे बड़ेबड़े हौ गए हैं अब क्याँ हि विवाह करना.औऱ उसपेयह भि तोँ नहींपता कि मुझे सैटिस्फैक्शन मिलेगा भि याँ नहीं। देखोकुछ सोचती हूं।। कुछ तौ सोचना हि पड़ेगा
पर्र आस्था मे तोँ पागल सि हुइ जारही हूं उधर बेचारा राहुल भि हर वक़्त परेशान सें रहता हैं। अभि तक कोई सौदा नहींहुआ हैं औऱ हमारे सिर पर्र कर्जा वैसा कां वैसा हि चढ़ा हैं। मेरे जिंदगी मे तोँ जैसे एक् संग सारी दिक्कतें आँ गई, हैं.
अब मुझेयह तौ पताचल गय़ा थां कि मां मौसी सें बातकर रही हैं पर्र अब मेरे मस्तिष्क मे तोँ वही बातेघूम सि रही थां मेरी तोँ मानो बुद्धि सुन्न सि हौ गई, थि
मैंने मां कों कभी भि कामोत्तेजक शब्दों केँ संग नहीं जोड़ा थां। वोँ मेरेलिए एक् ऐसीऔरत थि जिसके विषय मे मे कभीइस दृष्टिकोण सें सोच भि नहीं सकता थां।
मम्मी केँ संग बुर औऱ, चुदाई ऐसे शब्द थें जौ कभी भि मेरेलिए एक् लाइन मे नहीं आँ सकते थें। मैंने तोँ कभी सोचा भि नहीं थां कि पिताजी नें कभी मां कि चुदाई कि होगी उनकी बुर मे अपना लण्ड भि डाला होगा।
वैसे तोँ हम् सब जानते हैं कि हम् सब केँ पिता हमारी माँओ कों चोदते होंगे तभी हम् सबका जन्महुआ औऱ यह किसी भि पति पत्नि केँ बीच सामान्य सि निरंतर चलने वाली प्रक्रिया हैं पऱ सामान्य परिस्थितियों मे हम् कभी भि इस विषय कों सोचना तौ दूर अपने दिमाग़ मे कभी इसका ख्याल भि नहीं लाते हैं।
मुझे अच्छे सें याद हैं मेरीनजर जबजब मेरी मम्मी केँ हसीन स्तनों पऱ गई, तबतब मैंने जल्दी अपनी नज़रो कों वहा सें हटाया।
मेरेलिए तौ बस मेरी मां मात्र मम्मी थि जिसके बदन केँ संदर्भ मे मैंने कभी अपने विचारों कों स्वतंत्रता नहीं दि थि। पर्र उसकी बातचीत सें पताचला कि उसकेपास एक् बुर भि हैं जिसको चुदवाने केँ लिए वोँ दिनरात तड़परही हैं।
बस मे कुछ औऱ सुनना नहीं चाहता थां। मेरी तौ भूखमर सि गई, थि औऱ आंखों सें नींद भि उड़ चुकी थि मे जल्दी वपिस पलटा औऱ अपनेरूम मे आकेलेट गय़ा। मां केँ शब्द मानो मेरे कानों मे गूंज सें रहे थें। मे खाट पर्र लेटे केवल करवटे बदलरहा थां। तभी थोड़ीदेर बाद मेरेरूम कां दरवाजा खुलने कि आवाज़ हुई औऱ मां दरवाजे केँ पास हि खड़ेखड़े मुझसे बात करनेलगी।
राहुल तुम् कबआये मुझे तौ पता हि नहींचला जब गाड़ी देखी तोँ पताचला कि तुम् आँ गए होँ।
जी मां बस जस्ट अभि अभि आया हूं मैंने दूसरी तरफ करवटलिए हुए हि जवाब दिया।
अच्छा ठीक हैं, हाथ मुँहधो केँ डाइनिंग टेबल पर्र आँ जाओ मे खानां गरमकर देती हूं आके खानां खालो।
नहीं मां मुझे अभि भूख नहीं हैं.मे रुककर खानां खाऊंगा। पता नहीं क्यो पऱ मे माँ कों अभि फेस करना नहींचाह रहा थां।
क्यो बाहर् कुछखा लिया हैं क्याँ?माँ नें जल्दी मुझसे पलटकर पूछा।
नहीं माँ बाहर् तौ कुछ नहीं खाया थां।
तोँ फिन आँ जाओ, वक्त सें आके खानां खालो चाहेकम हि खानां, सुभह भि तुमने सिर्फ 2 पीस ब्रेड मक्खन हि खाये थें। आँ जाओ खानां लगा देती हूं। कहते हुए मां दरवाजा बंद करकेचली गईं।
मे दोपहर का खाना करने जानां तोँ नहींचाह रहा थां पऱ अनमने मन सें उठकर बाहर् चला हि आया।
मेरेघऱ मे ओपन रसोईबना हुआ थां, औऱ रसोई केँ ठीकबाद हि डाईनिंग टेबलपड़ी हुईँ थि। साइड मे वॉश बेसिन लगा थां। वॉश बेसिन पे हाथधुल केँ मे जैसे हि मे कुर्सी पऱ बैठा मेरीनजर मां पर्र गई, जौ कि रसोई मे सब्जी गरमकर रही थि।
दो जुड़वाँ :मादरचोद बहनचोद - Next part mein bada twist
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