दो जुड़वाँ :मादरचोद बहनचोद – New Episode
अगलेदिन सुभहसब लोग नाश्ते केँ लिए डाइनिंग टेबल पे मिलते हैं। सबलोग पहले हि आँ चुके होते हैं, दिया सबसे लास्ट मे आती हैं, दिया कां मूडरात वालीबात कों लेकर उखड़ा उखड़ा सां होता हैं।
रोहित औऱ राहुल दिया कों गुडमार्निंग बोलते हैं।
पर्र दिया राहुल औऱ रोहित कों देख केँ देखती हैं औऱ कोई जवाब नहीं देती हैं।
दिया कों ऐसा देखकर रोहित कंधे उचकाकर ममता औऱ राहुल कों देखता हैं औऱ फिन एक् स्माइल पासकर देता हैं।
ममता: दिया क्याँ हुआ बेटा इतनी डिस्टर्ब क्योलग रही होँ, तुमने भैया लोगो कों गुडमार्निंग भि नहीं बोला, बताओ तौ क्याँ बात हैं?
दिया:कुछ नहीं मां कोईबात नहीं हैं वोँ शायद मे सुन नहीं पाई। गुडमार्निंग माँ, गुडमार्निंग भैया, दिया अनमने मन सें जवाब देती हैं।
ममता :गुडमार्निंग बेटा, चलोकोई बात नहीं ब्रेकफास्ट करो।
सब लोग ब्रेकफास्ट करने लगते हैं।
रोहित:दिया पैकिंग फिनिश हौ गई, तुम्हारी?
दिया:नहीं भैया अभि तौ नहीं वैसे मे सींचरही हूं कि कल स्लीपर बस सें निकल जाऊं?
ममता: क्योबस सें क्यो जाओगी ?जब रोहित जारहा हैं तौ उसी केँ संग क्यो नहीं निकल जाती, जबरदस्ती कलबस मे परेशान होती फिरोगी।
दिया:ओके माँ, भैया केँ संग हि निकल जाती हूं।
रोहित :गुड़, तौ अब नाश्ते केँ बाद जल्द सें पैकिंग करलो हम् तकरीबन 2 बजे केँ लगभग निकलेंगे।
दिया:ओके भैया
(दिया भि अब अपने आप् धीरे-धीरे धीरे-धीरे रिलैक्स करती हैं पऱ अब भि उसके खयालातों मे दोनों भाइयों केँ विशाल तंबूतैर हि जाते थें जिसकी वजह सें उसकेमन मे थोड़ा क्रोध औऱ जिस्म मे झुरझुरी दौड़ हि जाती थि)
दोपहर मे लञ्च केँ बाद रोहित औऱ दिया चलने केँ लिए ममता सें मिलते हैं
रोहित:ओके मां फिनअब निकलते हैं, औऱ मे यहा राहुल सें प्रोपर्टी केँ सारे प्रॉसेस केँ सिलसिले मे टच मे रहूंगा अगर मेरीकोई भि जरूरत यहा पड़ती हैं तौ मे जल्दी दफ़्तर सें छुट्टी लेँ केँ यहा आँ जाऊंगा। आप् कतई फिकर नं करना।
ममता:हाँ बेटा अब तुम्हे औऱ राहुल नें मिलकर हि इसघऱ केँ सारेकाम संभालने हैं (कहती हुई ममता रुआंसी हौ जाती हैं)
रोहित :कतईरो मत मां, हम् सभी हैं नां आपकोकभी हम् अकेले नहीं छोड़ेंगे। कहतेहुए रोहित मां कों गलेलगा लेता हैं।
दिया : (ममता कों गले लगाते हुए )
जी माँ, आप् कतईमत परेशान होँ, मे आपकोरोज फोन करूँगी औऱ जैसे हि मेरी क्लासेस ऑफ होती हैं मे जल्दी आपकेपास आँ जाऊंगी। औऱ जब आप् दिल्ली आँ जायेगी तब मे हर वीकेंड पे घऱआया करूँगी।
ममता:हाँ मेरे बच्चों अब तुम् लोग हि मेरी ताक़त हौ.
ममता :रोहित गाड़ी अच्छे सें ड्राइव करना। जल्द पहुंचने केँ चक्कर मे बहोत तेजमत चलाना।
रोहित :जी माँ, मे आहिस्ता चलाऊंगा।
सबलोग एक् दूसरे सें गले मिलते हैं फिन रोहित औऱ दिया गाड़ी मे बैठचल देते हैं।
रोहित आराम आहिस्ता गाड़ी ड्राइव कररहा होता हैं। गाड़ी मे सन्नाटा पसरा होता हैं। दोनों भइया बहनों मे सें कोई किसी सें बात नहींकर रहा होता हैं। गाड़ी मे हल्का हल्का म्यूजिक चलरहा होता हैं।
दिया नें एक् जीन्स पैंट, एक् डीपनेक स्लीवलेस टीशर्ट औऱ लांगबूट पहने होते हैं जिसमे वोँ बहोत सेक्सी सि दिखरही होती हैं।
ड्राइव करतेहुए रोहित कि नजरबीच बीच मे दिया कि मांसल चुँचिओ केँ जुड़ाव सें बने गहरे क्लीवेज औऱ सुड़ौल जांघो पे चली हि जाती थि जिससे उसके अंदर पिछली रातहुए वाकिया याद आँ हि जाता थां जिसमे उसने अपनी बेहन दिया कि हसीन तरीन बुर कां कां करीब-करीब दीदार किया थां।
तभी रोहित खामोशी तोड़ते हुए दिया सें कहता हैं।
रोहित:इज दिएरऐनी प्रॉब्लम दिया?
तुम् इतना शांत शांत क्यो बैठी हौ, तुम् सुभह सें थोड़ा डिस्टर्ब लगरही हौ
कोईबात होँ तौ बताओ, एट लीस्ट जब तक हम् डिसकस नहीं करेंगे तब तक
केसे चीज़े नॉर्मल हौ पाएगी।
दिया शांत रहती हैं रोहित कि बात कां कोई जवाब नहीं देती।
रोहित:दिया मे तुमसे हि बातकर रहाहुँ
दिया :क्याँ बोलू भैया, आप् जानते हैं कि मे क्यो नाराज हूं।
रोहित: वही तौ पूछरहा हूं कि क्यो हि नाराज़ होँ, ऐसा क्याँ हि होँ गय़ा हैं जिसकी वजह सें तुम् अपना मुँह फुलाये बैठी होँ।
दिया : क्याँ हि होँ गय़ा हैं भैया, कल आप् औऱ राहुल भैया कों मेरी पैंटी घूरने केँ पहले सोचना चाहिए थां।
रोहित :अरे किसने देखी तुम्हारी पैंटी, कलअगर धोखे सें हम् लोग कि नज़रवहा चली गई, औऱ वोँ भि केवलइस वजह सें कि तुम् ग़लत तरीके सें बैठे हुई थि, तों इसमें कौन सि कोई इतनीबड़ी बात होँ गई, बल्कि आजकल तोँ यहसभी नॉर्मल बात हैं आजकललोग beeches पर्र तौ फुल फैमिली बिकनी मे घूमते हैं, उसका क्याँ ?
इसकायह मतलबकतई मत समझना कि मे कल केँ इंसिडेंट कों जस्टिफाई कररहा हूं मे तोँ बस मात्र इतनाकह रहा हूं कि यह इतनीबड़ी बात नहीं हैं जौ इसका इतनातूल देरही होँ तुम्।
Jabardast shuruaat h बहोत हि उम्दा औऱ बेहतरीन एपसोड दिया हैं ! अगलेभाग कि इंतज़ार मे हैं !
दो जुड़वाँ :मादरचोद बहनचोद – New Episode
रोहित अब चीज़ों कों नारमलाइज़ करने कि कोशिश कररहा थां। वोँ कही सें भि अपनी गलती कों मानना नहीं चाहता थां
क्योकि पहले तौ उसकीनज़र मे यह इतनीबड़ी बात थि नहीं दूसरा अगर गलतीमान ली तौ वोँ जानता थां कि हमेशा उसेदब केँ हि रहना पड़ेगा
दिया:बिल्कुल ठीककहा लोगफुल फैमिली बिकनी मे औऱ शॉर्ट्स मे घूमते हैं मगरउन लड़कियों केँ भइयागधे ऐसालन। कहते कहते दियारुक जाती हैं।
रोहित हंसते हुए दिया कों देखने लगता हैं क्योंकि वोँ जान गय़ा थां कि दियायह कहना चाहती हैं कि उनके भइयागधे ऐसा लण्ड फुला केँ नहीं घूमते हैं।
दिया भि रोहित कों अपनेआधे अधूरे शब्द पे हँसता देख शरमा सि जाती हैं औऱ झेंपते हुए दूसरी तरफ मुँह करके मुस्कुराने लगती हैं।
दिया भि अबइस विषय कों अधिक खिंचना नहीं चाहती थि क्योंकि अब उसकेपास दो हि ऑप्शन थें पहला याँ तौ वोँ इसबात कों इनडिफिनट खिंचती हि रहे, दूसरा वोँ अबइसबात कों यही ख़त्म कर ताकि वोँ भि रिलैक्स करसके।
औऱ वोँ कुछऐसा करे कि अब रोहित कों नचासके, इसलिये उसने दूसरा ऑप्शन चुनना अधिक उचित समझा।
रोहित :चलो बढ़िया, तुम् हंसी तोँ सही अच्छा अबयह बताओ ठंडी ठंडी बियर पियोगी?, क्योकि हम् हाईवे पे आने हि वाले हैं, इसलिये मे तोँ अपनेलिए लेने वाला हूं।
दिया : जी नहीं, मुझेकोई बीयर शियर नहीं पीनी हें।
रोहित:ओह नो, अबयह मतकह देना कि तुम् बियर पीती नहीं हौ, मे अच्छे सें जानता हूं तुम् डॉक्टर लड़कियो कों.
हां वोँ अलगबात हैं कि तुम् आउटडेटेड हौ
दिया:जी नहीं मे कतई आउटडेटेड नहीं हूं। मे पीती हूं कभीकभी, बस तुम्हारे संग नहीं पीनी हैं।
रोहित :ओहहो मेरेसंग नहीं पीनी हैं
अरेअब क्रोध वुस्सा छोड़ो, आज मेरेसंग भि पीलो। कहतेहुए रोहित हाईवे केँ पहले हि एक् बियरशॉप केँ आगे गाड़ीलगा केँ 6-7 ठंडी ठंडी बियर औऱ कुछ नमकीन केँ पैकिट लें लेता हैं।
रोहित :यहलो मेरी प्यारी बहना ठंडी ठंडी बियरफॉर यु ओनली, रोहित मुस्कुराते हुए दिया कों एक् बियरऑफर करता हैं।
दिया भि मुँह बनाते हुए उसकेहाथ सें बियर लें लेती हैं। दोनों भइया बेहन बियर कां मजा लेते लेते लांग ड्राइव कां मज़ा लेने लगते हैं।
नशे मे आँ जाने केँ बादअब दिया भि बिल्कुल कूल बिहैव कररही थि बल्कि वोँ तौ अबबीच बीच मे रोहित केँ संगखेल भि रही थि इसीलिए बीचबीच मे वोँ अपनेटॉप कों थोड़ा औऱ नीचे खींच अपने क्लीवेज कां नज़ारा रोहित कों करवा देती थि ताकि रोहित औऱ तड़पे।
अब बताती हूं बच्चे, बहोत खेलरहे थें न् मेरेसंग, अब मे तुम्हे नाच नचाती हूं। दिया मन हि मन सोचते हुएखुश हौ रही थि।
रात केँ लगभग 8 बजरहे होते हैं गाड़ी अंधेरे मे हाईवे पे दौड़ती चलीजा रही थि। दोनों भइया बेहनआपस मे बाते करतेचले शुरुर मे चलेजा रहे थें। दिया भि अब रोहित कां संग एन्जॉय करती हुईँ मस्ती मे म्यूजिक सुनती चलीजा रही होती हैं तभी.
दिया: भैया मुझे बहोत जोरो कि टॉयलेट लगी हैं, प्लीज कही गाड़ी रोकिये न्!
रोहित:ओके अभि अगरकोई अच्छा होटल, ढाबा याँ कोई पैट्रोल पंप पड़ता हैं तोँ वही रोकता हूं।
दिया:ओके भैया
दिया थोड़ीदेर तौ पेशाब रोके बैठी रहती हैं पऱ जब उसकेपेट मे दर्द होने लगता हैं औरउससे बर्दाश्त नहीं होतातब वोँ रोहित सें हाईवे पे हि कहीपेड़ केँ पास गाड़ी रोकने कों बोलती हैं।
रोहित गाड़ी कों एक् पेड़ केँ पास रोकता हैं, घुप्प अंधेरा छाया होता हैं वोँ दिया सें अधिकदूर न् जाने केँ लिए बोलता हैं।
दिया गाड़ी सें उतरती हैं औऱ पेड़ कि ओट मे जाकर अपनी जीन्स औऱ पैंटी कों नीचे सरकाकर उकड़ूबैठ पिशाब करने लगती हैं, नशे कि वजह सें उसका बैलेंस सही सें नहींबन पारहा होता हैं तभी उसको अपने पीछेकोई चूहा याँ सांप कि सरसराहट महसूस होती हैं जिससे वो डरकर चीखती हुइ जल्दी उठने कि कोशिश करती हैं।
पर्र एक् तौ दोदो बियर कां नशा दूसरा जीन्स औऱ पैंटी घुटनो केँ नीचे होने केँ कारण वो लड़खड़ा अपनी हि पिशाब मे गिर जाती हैं जिससे उसके कपड़े खराब हौ जाते हैं।
उधर दिया कि आवाज़ सुन रोहित जल्दी पेड़ कि ओर गाड़ी सें उतार भागता हैं तोँ देखता हैं कि दिया जमीन मे मुह केँ बल गिरी होती हैं औऱ उसकी जीन्स घुटनों मे फंसी होती हैं जिसकी वजह सें उसकी दूधिया गाँड़साफ साफनजर आँ रही होती हैं, रोहित दिया कों उठाने कि कोशिश करता हैं तभी नं चाहते हुए भि उसका उल्टा हाथ दिया कि गाँड़ सें टच हौ जाता हैं औऱ वो हाथ कों दिया कि गाँड़ कि दरार मे महसूस करता हैं। वो तेजी सें अपनाहाथ वहा सें हटा लेता हैं मगरउस मखमली एहसास नें उसको झकझोर केँ रख दिया होता हैं। दिया नें भि रोहित सें कुछ नहि कहा, बस लज्जा सें उसकी साँसे तेज होँ जाती हैं।
दिया जल्द जल्द अपने कपड़ेसही करने लगती हैं। अंधेरा होने कि वजह सें रोहित कों दिया कि बुर कि एक् झलक तोँ मिल जाती हैं पर्र साफसाफ नहींनजर आती हैं हाँ पऱ दिया कि गाँड़ केँ मखमली एहसास औऱ गदराए चूतड़ों केँ पाटो नें उसके लण्ड मे खलबली जबरदस्त मचा दि होती हैं।
उधर दिया भि इस वाकिये सें शरमा जरूर जाती हैं मगरइस बारउसे अपने भइया पऱ क्रोध कतई नहींआता कि उसके भइया नें उसकी गाँड़ केँ दर्शन औऱ छूना दोनों करलिए थें।
दिया:ओह शिट। मेरे सारे कपड़ें खराब हौ गए, मुझेअब कपड़े बदलने पड़ेंगे वो अपनी हि पिशाब मे सन जाने केँ कारण हुइ गंदगी केँ मारे झुल्ला केँ बोलती हैं।
रोहित :ओकेओके रिलैक्स रिलैक्स
पहलेयह बताओ तुम्हे कहीचोट तौ नहींलगी?
दिया:नहीं मुझें कोईचोट नहींआई बस मेरे सारे कपड़े गंदे हौ गए हैं, मुझे कपड़े चेंज करने पड़ेंगे।
रोहित: बिल्कुल पर्र पहले मे गाड़ी सें पानी निकलवा तुम्हारे हाथ पे पानीडाल देता हूं, जहाँ जहाँ गंदगी लगी हैं पहले उसकोधो लोफिन कपड़े चेंजकर लेना
फिन रोहित गाड़ी सें पानी निकाल दिया केँ हाथ पे पानीडाल उसको धुलवा देता हैं फिन दियाबैग सें कपड़े निकाल गाड़ी कि पिछली सीट पे बैठ कपड़े चेंज करने केँ लिए जाती हैं।
रोहित गाड़ी केँ बाहर् खड़े होकर दिया केँ कपड़े चेंजकर लेने कां वेट करने लगता हैं पऱ जबसे उसने दिया कि चिकनी गाँड़ देखी थि तबसे उसका विशाल लण्ड फड़फड़ा केँ खड़ा हौ जीन्स मे हि गुम्बद कां आकार लेँ लेता हैं जिसको दिया नें आलरेडी नोटिस कर लिया होता हैं पऱ इसबार उसकेमन मे रोहित केँ लिएकोई क्रोध नहींआता।
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दिया गाड़ी मे पिछली सीट पऱ बैठ अपने कपड़े चेंज करने केँ लिएबैग मे सें कपड़े निकालने लगती हैं तभी उसकेमन मे अपने भइया सें खेलने कां ख्याल आता हैं। अब इसको बियर कां शुरुर कहे याँ कुछ औऱ दियाबैग मे सें एक् हाफ जीन्स पैंट औऱ एक् बहोत डीपनेक वालाटॉप निकाल उसेपहन लेती हैं जिससे उसकी चुँचिया, पेट औऱ जांघे रोहित कों साफसाफ नजरआए, फिन वोँ कपड़ेबदल लेती हैं औऱ अपने गंदे कपड़ो कों पीछे वालीसीट पे हि छोड़ गाड़ी कि आगे वालीसीट पे आँ हॉर्न बजा रोहित कों गाड़ी मे आने कां इशारा करती हैं।
इधर रोहित कां अपनी बेहन कों इतनेहॉट कपड़े मे देख लण्ड फड़फडाने लगता हैं। वो अब खुलकर दिया कि चुँचिओ औऱ जांघो कों देखरहा थां।
रास्ते मे एक् स्थान रुककर दोनों खानां खाते हैं, खानां खाने केँ दौरान भि रोहित कि निगाहें लगातार दिया केँ क्लीवेज पर्र हि ज़मी रहती हैं औऱ वो रुकरुक कर अपने लण्ड कों जीन्स केँ ऊपर सें हि सहला लेता थां।
अपने भइया कि ऐसी हालतदेख दिया कों बड़ामज़ा आने लगता हैं तभी उसकी निगाह रोहित केँ जीन्स मे फुले गुम्बद पे जाती हैं जिससे उसकी बुर मे भि चींटिया सि रेंगने लगती हैं औऱ उसे भि अपनी पैंटी मे गीलापन सां महसूस होता हैं।
कल तक जौ दिया अपने भाइयो केँ उसकी स्कर्ट मे झांकने कों लेकर गुस्से मे थि आजवही लड़की अपना शरीर उघाड़ अपने भइया कों दिखारही थि।
लगभग 2 घंटेबाद गाड़ी हॉस्टल गेट पे रुकती हैं। दिया गाड़ी सें उतर पिछली सीट सें अपनेबैग कों निकालती हैं औऱ फिन अपने गंदे कपड़ो कों भि उठाने लगती हैं तभी नं जाने उसको क्याँ शरारत सूझती हैं वोँ अपने कपड़ो केँ तौ उठा लेती हैं पऱ थोड़ीदेर पहले उतारी अपनी पैंटी कों गाड़ी मे हि छोड़ देती हैं।
दिया:ओके बाय भैया एंड थैंक्यू फ़ॉर बियरएंड डिनर
रोहित :ओकेबाय टेक केअर
दिया कों छोड़ रोहित भि अब अपने डेस्टिनेशन दिल्ली कि ओरचल देता हैं
गाड़ी मे बैठ सबसे पहले तौ वो अपनेखड़े लण्ड कों एडजस्ट करता हैं जोँ उसकी बेहन कि वजह सें अकड़ापड़ा थां, बारबार उसकीज़हन मे दिया कि मक्खन सि चिकनी गाँड़ हि घूमरही थि।
लगभग एक् घंटेबाद रोहित केँ फ़ोन पे दिया कां फोनआती हैं।
रोहित:हेलो दिया क्याँ हुआसभी ठीक तौ हैं नां?
दिया: वोँ भैया क्याँ आप् वापिस आँ सकते हैं सिर्फ 5 मिनट केँ लिए
रोहित: पऱ हुआ क्याँ कुछ बताओ तोँ आखिर क्यूं बुलारही होँ मुझे, वैसे भि मे बहोत दूर निकलआया हूं, आखिर बताओ तोँ मुझे?
दिया: वोँ भैया एकचुली मेरेकुछ कपड़े गाड़ी मे रहगए हैं बसवही लेनी थि।
रोहित :पर्र तुमने अपनेबैग उठा तोँ लिए थें तौ फिन तुम्हारे कौन सें कपडेरह गए?
दिया:वोँ भैया क्याँ बताऊं मुझे तौ आपको बोलने मे भि लज्जा आँ रही हैं वोँ.वोँ एकचुलि.एकचुलि मेरी पैंटी गाड़ी मे छूट गयीँ, हैं बसवही लेनी थि।
हक़ीक़त मे दिया कों वो अपनी पैंटी वापिस नहीं चाहिए थि उसे तौ बस रोहित कों थोड़ा औऱ तड़पाना थां।
रोहित:ओहहो फ़ॉरगॉड सेक, दिया मे 50-60 किलोमीटर आगे आँ चुका हूं अब एक् पैंटी केँ लिए वापिस इतनीदूर लौटकर आनांकहा कि अक्लमंदी हैं।
अच्छा मे एक् काम करता हूं उसे गाड़ी कि डिक्की मे डाल दूंगा जब तुम् मिलोगी तोँ उठा लेना।
दिया : अरे नहीं नहीं भैया उसे गाड़ी मे रखियेगा मत, आप् उसे किसीचीज़ सें उठा केँ अभि रास्ते मे हि फेंक दीजिये।
रोहित:ओके ओके मे उसे फेंक दूंगा।
दिया:ओके भैया मे मोबाइल रखती हूं ( कहकर दियाफ़ोन काट देती हैं)
रोहित नें जबसे दिया केँ मुंह सें सुना थां कि उसकी पैंटी गाड़ी मे हि छूट गई, हैं उसकी तोँ मानो हालत हि खराब हौ गयीँ, थि उसका लण्ड इतनाअकड़ गय़ा कि ऐठन कि वजह सें उसमे दर्द सां महसूस होनेलगा।
उसने जल्दी अपनी गाड़ी रोकी औऱ पीछेसीट पऱ झांक केँ देखा तौ पिछ्ली सीट पऱ दरवाजे केँ पास उसको दिया कि पिंककलर कि पैंटी नजर आँ जाती हैं वो जल्दी हाथबढ़ा करउस पैंटी कों उठा लेता हैं।
पैंटी कों हाथ मे लेते हि उसकेजहन मे अजीब सि द्वंद कि स्थिति आँ जाती हैं औऱ उसको मानो स्वयं मे हि कुछ आवाजे सुनाई देने लगती हैं।
रुकजा रोहित यह क्याँ कररहा हैं यह तेरी बेहन कि पैंटी हैं। फेंकदे इसे, यह गलत हैं
क्याँ कररहा हैं रोहित सूंघइसे सूंघ इसमें दिया कि बुर कि खुश्बू होगी, क्याँ सुंदर माल हैं दिया
दिया कि बुर नं सहीकम सें कम उसकी पैंटी सें तौ मज़ेलूट लेँ
फेंकदे रोहित
सूंघ लें रोहित
पऱ मानव स्वभाव हैं नाँ जब इंसान कों बुर कि प्यास लगी होती हैं तौ सबसे पहले वोँ अपने दिमाग़ कि आवाज़ सुननी बंदकर देता हैं।
रोहित भि अब अपनेमन कि आवाज़ नज़रअंदाज़ कर दिया कि पैंटी कों हाथ मे पकड़ अपनीनाक केँ पास लाता हैं तोँ पैंटी सें उठने वाली दिया कि चुत कि भीनी भीनी मादकमहक उसके नथुनों कों जकड़ने लगती हैं |हाय दिया। क्याँ खुश्बू हैं तुम्हारी चुत कि। उफ्फ्फ। वो उस कच्छी कि गंध मे दिया कि बुर कां एहसास करने लगता हैं जिसको अभि कुछदेर पहले हि उसकी बेहन नें अपनी हसीन मादक बुर सें अलग किया थां।
हाय दिया क्याँ खुश्बू हैं तुम्हारी बुर कि
इसकेआगे तोँ हर इत्र बेकार हैं
तभी रोहित कों पैंटी केँ अगले हिस्से मे जहाँ दिया कि बुर थि कुछ लिसलिसा लिसलिसा सां महसूस होता हैं
ओह्ह माँ गॉड, क्याँ यह दिया कि बुर कि मलाई हैं, रोहित अपनीजीभ केँ नुकीले हिस्से कों उस लिसलिसी रज पर्र टिका उसका स्वाद लेने लगता हैं
उफ्फ क्याँ स्वाद हैं इसका, काश दिया मे तुम्हारी बुर चाट पाता, तुम्हे चोद पाता, तुम्हारी चिकनी गाँड़मार पाता.ओह्ह दिया.ओह मेरी प्यारी बहना., काश तुम् मुझेमिल जाओ। उसकी आँखें बंद होँ जाती हैं। दिमाग़ मे बस दिया कि गोरी जांघें, भीगी बुर औऱ मोटी गाँड़ घूमने लगती हैं।
दिया कों सोचते हुए वोँ लंबी लंबी सांसे भरउस खुसबू कों औऱ महसूस करने लगता हैं
औऱ एक् स्थान सन्नाटे मे गाड़ीरोक गाड़ी मे बैठे बैठे अपने विशाल लण्ड कों जीन्स सें बाहर् निकाल लेता हैं औऱ पैंटी सूँघते सूँघते अपने लण्ड कों मुठियाने लगता हैं।
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