दो जुड़वाँ :मादरचोद बहनचोद – New Episode
आजजब माँ कों मैंने किचन मे देखा तोँ मुझेबड़ी असहजता महसूस हुइ मुझे थोड़ा अपराधबोध भि महसूस होँ रहा थां कि मे अपनी मम्मी कि अंतरंग दुविधा औऱ कष्ट कों जान गय़ा थां कि केसे मेरी मां अपनी शारीरिक आवश्यकताओं कि पूर्ति करने केँ लिएतड़प रही हैं औऱ उसेइस बात कि कतई जानकारी नहीं हैं कि मे यहसभी जान चुका हूं, इस अपराध बोध नें माँ केँ प्रति मेरे नजरिये कों थोड़ाबदल दिया थां उसकी समस्या कि जानकारी नें उसके प्रति मेरे दृष्टिकोण मे भि तब्दीली ला दि थि। मे शायद अपनी भावनाओं कों समझ नहींपा रहा हूं मगर मेरे अंदरकुछ एहसास जन्म लेनेलगे थें, ऐसे एहसास जौ मेरे अंदर थें तोँ पऱ जौ कभीउभर केँ नहीं आँ पाए।
आज पहलीबार मैंने अपनी मां कों एक् स्त्री केँ तौर पर्र देखा थां, एक् बला कि सुंदर महिला, बड़ेबड़े गोल मटोल बूब्ज़, बेहद उभरेबड़े आकार केँ नितंब, सुडौल जांघे, पतलीकमर, मतलब एक् ऐसी कमनीय स्त्री जिसके अंगअंग सें मादकता टपकरही हौ।
मे मानता हूं कि उसे केवल एक् मम्मी कि तरह देखने कि बजाय एक् खूबसूरत कमनीय नारी कि तरह देखने कां बदलाव मेरेलिए अप्रत्याशित थां जैसे मेरेलिए कुछबदल गय़ा हौ उसकीछवि मेरेलिए बदल सि गयीँ, होँ।
माँ नें आज एक् टाइट स्लीवलेस ब्लैक कलर कि कुर्ती औऱ एक् सफेद लैगिंग पहनरखी थि। जिसमे सें उनके जिस्म कां हर कटावसाफ साफनजर आँ रहा थां। मां नें शायद लैगिंग केँ नीचे ब्लैक कलर कि पैंटी पहनरखी थि जोँ सफेदरंग कि लैगिंग औऱ उसके महीन कपड़ा होने केँ कारण उसकी पैंटी लाइन औऱ उसकारंग साफनज़र आँ रहा थां।
मां नें एक् डीपनेक वाली कुर्ती पहनरखी थि नें जिसमे सें उनकीबड़ी गोल चुँचिओ सें बना क्लीवेज साफसाफ झलकरहा थां। पर्र नं चाहते हुए भि मेरा ध्यान बरबसआज मां कि टांगों कि तरफचला जारहा थां वो जगह जहाँ उसकी दोनों टांगे मिलरही थि औऱ जिनके शीर्ष केँ जुडाव पर्र मां कि बुर हैं, वो कामुक अंग जिसे चुदवाने केँ लिए वोँ हरसमय बैचैन हैं।
कुर्ती आगे होने कि वजह सें मुझे वोँ जगह तौ नजर नहीं आँ रहा थां पऱ कुर्ती केँ कमर सें साइड सें कटे होने कि वजह सें मां जबजब साइड घूमती तौ मे स्पष्ट रूप सें उनकी दोनों टांगो कों अलगअलग देख सकता थां औऱ मे उस फूले तिकोने भाग कों उनकी टांगो केँ बीच महसूस कर सकता थां। ये मेरी शायद कल्पना सिर्फ हि थि कुछ सेकंड मे कुर्ती औऱ लैगिंग केँ मध्य अपनी मम्मी केँ उस वर्जित अंग कों महसूस करसका थां।
माँ कि बुर कां बारबार ख्याल आँ जाने सें मुझे बेचैनी सि महसूस हौ रही थि। मेरा लण्ड मे भि मुझे हरकत सि महसूस होँ रही थि जिसके चलते मेरी असहजता औऱ बढ़तीजा रही थि।
मे अपने शॉर्ट्स मे अपने लण्ड कों एडजस्ट करनेलगा। मुझेबार बार अपराध बोध महसूस होँ रहा थां कि केसे मे अपनी मां केँ विषय मे ऐसे ख्याल अपने दिमाग़ मे ला सकता हूं पर्र मानो अगले हि क्षण माँ केँ सारे अल्फ़ाज़ मेरे दिमाग़ मे गूंजने लगते औऱ मेरा ध्यान उसके शरीर कि ओर न् चाहते हुए भि चला हि जाता।
मां नें अब खाने केँ बाउलमेज पऱ रख दिये थें औऱ दो प्लेटो मे खानां लगाने लगी। मे अब भि सिर झुकाए बैठा थां ताकि उनको नजरअंदाज कर सकूँ।
खानां लग जाने केँ बाद मां नें एक् प्लेट मेरीतरफ सरकाई औऱ मुझसे खानां खाने कों बोला।
यह अपनासिर क्यो झुकाए बैठे होँ। कोईबात हैं क्याँ, तबियत तोँ सही हैं नाँ तुम्हारी? मां नें मुझसे चिंतित होतेहुए पूछा।
अब आखिर मे उनको क्याँ हि जवाब देता कि मे उनकी बैचैनी कों जानना हि मेरी भि बैचैनी कां कारण हैं।
नहि मे बिल्कुल ठीक हूं आप् परेशान मत होँ, बस नींद सि आँ रही हैं।
माँ :अच्छा ठीक हैं खानां खालो औऱ जाकेसो जाओ। वैसे तुम् जल्द केसे फ्री होँ गए तुम् तौ बतारहे थें कि आज प्रोपर्टी डीलर्स केँ संग मीटिंग हैं?
हाँ वोँ आज किसी इमरजेंसी कि वजह सें बर्थडे पार्टी नें मीटिंग कैंसिल कर दि। अब शायद परसो मुलाकात होगी। मैंने उनकीतरफ देखकर कहा
माँ: ok
ठीक सामने बैठे होने कि वजह सें मुझे उनकी चुँचिया साफनजर आँ रही थि। कितनी बड़ीबड़ी हसीन औऱ सुडौल चुँचिया हैं मेरी मां कि बिल्कुल गोल मटोल, आज पहलीबार मैंने उनकोखुल करकुछ क्षण देखाफिन जल्दी अपनीनजर वहा सें हटाली।
मे जल्द सें खानां खा केँ अपनेरूम मे गय़ा औऱ पलंग पर्र लेटे लेते माँ केँ बारे मे होँ सोचने लगा
माँ केँ टेलीफोन वाली बातचीत मेरे ख्यालो सें जाने कां नाम हि नहीं लेँ रही थि मे जितना अपना दिमाग़ कही औऱ दूसरी स्थान लगाने कि कोशिस करता वोँ घूमफिन कर उन्ही बातों पर्र आकेटिक जाता।
कितनी ख़्वाहिश करती हैं मेरी चुदवाने कि। मां केँ यह अल्फ़ाज़ मेरे कानों मे परमानेंट सें बजरहे थें.
मेरेमन मे कुछ अनचाहे सवालात घूमरहे थें जिनका जवाबमन स्वयं हि देरहा थां जिनसे बारबार मे बचना तौ चाहरहा थां पर्र मेरी सारी कोशिशें नाकाम होँ रही थि। मे नं चाहते हुए भि माँ कि बुर कि कल्पना करनेलगा
कैसी होगी माँ कि बुर ?
कैसी होगी जैसीहर महिला कि होती हैं
उभरी औऱ फूली हुई दो अर्द्ध चंद्राकार लंबवत ओंठो केँ समान उकेरी हुई आकृति.जिसके शीर्ष पऱ एक् मोती केँ समान मांस कां एक् छोटा सां भाँगुर होगा.
बुर केँ ओंठ फूले होंगे याँ पतले होंगे?
फूले हि होने चाहिए., माँ फ़ोन पऱ कह भि रही थि कि उनकी बुर हर वक़्त रिसती रहती हैं तौ फूले हि होंगे.
माँ कि बुर गुलाबी होगी ?
औऱ क्याँ गुलाबी हि होगी। याँ हौ सकता हैं उसकी पंखुड़िया चॉकलेटी कलर केँ हौ, वैसे माँ इतनी गोरी हैं तौ बुर गुलाबी हि होनी चाहिए.
क्याँ मां केँ बुर पे झाटे होंगी?
हौ भि सकती हैं मां इतनेदिन सें चुदी नहीं हैं वोँ परेशान भि रही हैं पिछले कई टाइम सें.तोँ हौ सकता हैं नाँ बनाये हौ बाल
हाँ हौ भि सकता हैं पर्र माँ तौ इतनीसाफ सुथरी रहती हैं उनकी तौ आर्मपिट मे भि बालकभी नहीं होते हैं तोँ वोँ झांटे भि बना हि देती होगी। हाँ शायद उनकी बुर चिकनी हि होगी.
क्याँ मां कि बुर हसीन होगी ?
बिल्कुल होगीजब मां कां हरअंग इतना सुंदर हैं तौ बुर भि हसीन हि होगी।
बुर कि गंध कैसी होगी?
खुश्बू हि आती होगीजब माँ केँ सारे जिस्म सें खुसबू आती हैं तौ बुर सें भि खुसबू आती होगी
पर्र कच्छी मे तौ पसीने कि बदबूआती हैं।
पऱ मां कां तोँ पसीना भि खुसबू देता हैं.देखा नहीं हैं जबजब माँ कों गले लगाओ तौ उनकी गर्दन केँ पास सें कितनी अच्छी गंधआती हैं.
इन्ही सभी कल्पनाओ मे मेरा दिमाग़ फसाहुआ थां मे इनसभी सवालों सें इन कल्पनाओं सें बचनाचाह रहा थां पऱ पापीमन मुझेबार बारउसी ओर आकर्षित कररहा थां।
न् चाहते हुए भि मैने अपनी हसीन मां कि एक् हसीन बुर कि कल्पना अपनेमन मे बनाली थि जौ बालो सें रहित, गुलाब कि पंखुड़ी केँ समान ओंठो वाली औऱ एक् मोती केँ समान भाँगुर सें सुसज्जित थि
तभी मेरे दिमाग़ मे माँ कि दूसरी बात गूंजी
औऱ कर हि क्याँ सकती हूं अगर सोने केँ पहले वोँ भि नाँ करूँ तौ मुझे नींद हि नां आये.
मां आखिररात मे क्याँ करती होगी ?
यह जिज्ञासा मेरे दिमाग़ मे घूमने लगी शायद जैसे मे जानता तोँ थां पऱ जानते हुए भि नां जानने कां भ्रम स्वयं कों देरहा थां।
मेरा लण्ड भि इन्ही कल्पनाओं केँ चलते मेरे शॉर्ट्स मे तंबूबना चुका थां जिसकी ऐंठन सें मुझेअब दर्द सां होनेलगा थां
दो जुड़वाँ :मादरचोद बहनचोद – New Episode
माँ केँ बारे मे सोचते सोचते अब स्थिति असहज हौ चली थि, कुछ हि घंटो केँ दौरान अपनी मां केँ बारे मे आये अपनीइस सोच केँ बद्लाव सें मे थोड़ा इरिटेटेड भि थां पऱ एक् अलग हि रोमांच महसूस कररहा थां।
मेरा ऐंठा लण्डअब मुझे तकलीफ देनेलगा थां मे जल्द सें जल्द मुट्ठ मार केँ यहसभी समाप्त कर देनाचाह रहा थां इसीलिए मे जल्दी उठकर बाथरूम चला गय़ा औऱ अपना लण्ड बाहर् निकाल मुठियाने लगा। मुट्ठ मारने केँ दौरान जैसे हि मेरी आँखें बंद हुइ मेरी कल्पनाओ मे मां कां अत्यधिक हसीन नंगा शरीर मेरी आँखों केँ सामने तैरने लगा। मैंने जल्दी अपनी आँखें खोल अपने दिमाग़ कों उस तस्वीर उन खयालो सें हटाने कि कोशिश करनेलगा, मे कुछ भि सोचना चाहरहा थां पऱ किसी भि कीमत पऱ अपनी मम्मी केँ नाम कि मुट्ठ नहीं मारना चाहरहा थां पर्र दिमाग़ थां कि बस माँ पे हि फंसकर रह गय़ा थां, दिमाग़ नें काम करनाबंद कर दिया थां चाहते न् चाहते हुए भि आज मैंने पहलीबार मां केँ सुंदर बदन कि कल्पना करते मुट्ठ मारी।
मुट्ठ मारने केँ बादमन मे थोड़ी ग्लानि लिए मे कमरे मे आकरसो गय़ा।
साम केँ तकरीबन 6 बजे माँ मुझेगरम चाय केँ लिए जगाने आयी मैंने उठकरगरम चायपी औऱ फिनघऱ मे मन नां लगने केँ कारण मे तक़रीबन 7 -7.30 केँ लगभगघऱ सें बाहर् मार्केट तक आँ गय़ा औऱ बियर औऱ सिगरेट पीनेलगा।
मन मे एक् हि उधेड़बुन चलरही थि कि मुझेअब क्याँ करना चाहिए बहोत सोचने केँ बाद डिसाइड किया कि जोँ जैसाचल रहा हैं उसको वैसा हि छोड़ देना चाहिए आखिर मे कर भि क्याँ सकता हूं औऱ इस मामले मे मेराकुछ करना हि तौ सबसेगलत हौ सकता हैं आखिर मम्मी हैं वोँ मेरी, मुझे उसके बारे मे ऐसा सोचना भि नहीं चाहिए।
हकीकत मे मेरेमन मे नैतिकता औऱ हवस केँ बीच एक् द्वंद चलरहा थां। हवस जौ एकाएक तौ मेरेमन मे मां केँ लिए नहींआयी थि मे हमेशा सें उनकी सुंदरता कां कायल थां पऱ कभी उन्हें इसतरह भि नहीं देखा थां, हाँजब कभी पोर्न साइट पे incest याँ milf कैटिगिरी कि वीडियो देखी थि तबतब उनका ख्याल जरूरआया पर्र जल्दी हि मेरेमन कि नैतिकता नें उस विचार कों दबा दिया थां
फिरभी यह पूरीतरह सें हवस भि नं थि पर्र कही न् कही मैंने अपने मम्मी केँ बदन कि कल्पना तौ कि हि थि, औऱ नैतिकता जौ मुझे अपनी हि मां केँ प्रति ऐसा सोचने सें भि दूरकर रही थि। थोड़ीदेर बाहर् वक़्त बिताने केँ बाद मे वापिस घऱ आँ गय़ा तोँ देखा माँ बाथरूम मे नहाने केँ लिएगईं हुईँ हैं, मे लिविंग रूम मे आकर TV चलाकर न्यूज़ सुनने लगा।
तभी देखा कि मां बाथरूम सें नहाकर आँ गईं थि उन्होंने नीलेरंग कि नाईट गाउनपहन रखा थि जिसमे वोँ बहोत सुंदर लगरही थि। हमेशा कि तरह माँ कि बड़ीबड़ी चुँचिया अपनी हि मादकता बिखरा रही थि।
खैर जैसा मैंने डिसाइड किया थां अपनामन इनसभी बातों सें हटाने कां प्रयास किया पऱ हरसमय जैसे मेरी कोशिश बर्बाद जारही थि।
राहुल, राहुल खानां खालोआकर, डाइनिंग टेबल केँ पास सें मां नें आवाज़ दि।
हा मां जस्टआया। मैने जवाब दिया।
मे उठकर टेबल पऱ आया तौ देखा मां नें आज चिकनकरी बनाई थि। हमनेसंग मे मिलकर खानां खाया। उसकेबाद हम् थोड़ीदेर सोफे पे बैठ tv पऱ न्यूज़ देखने लगे, मां एकदम शांत शांत थि उनके चेहरे पे तकलीफ़ साफझलक रही थि।
क्याँ हुआ मां कुछ परेशान लगरही हौ कोई प्रॉब्लम हैं क्याँ?
मां:नहीं कोई प्रॉब्लम नहीं हैं, सभीठीक हैं।
अगरसभी ठीक हैं तोँ हर वक़्त इतना परेशान क्यो रहती होँ, अगरकोई प्रॉब्लम हैं तौ मुझसे शेयरकर सकती होँ।
माँ:तुम्हारे पिताजी केँ जाने कि तकलीफ़ तोँ जिंदगी भर कि हैं, पऱ कोईबात नहीं तुम् खानां खाओ।
मां किसी केँ चले जाने सें जिंदगी कभी नहीं रुकता हैं, बापू कि कमी तौ हमेशा हम् सबके जिंदगी मे रहेगी। पर्र मे हूं न् मे पूरी कोशिश करूंगा कि पिताजी कि सारी जिम्मेदारी मे निभाऊं। मैंने माँ कों जवाब दिया।
मां नें मुझे एक् मिनट केँ लिए ताड़ केँ देखाफिन बगैरकुछ बोले अपने कमरे मे सोनेचली गई।
रात केँ तकरीबन 10 बज चुके थें। जैसे जैसे टाइमबीत रहा थां मेरे दिमाग़ मे मां कि बाते औऱ जोरजोर सें गूंजरही थि
हवस औऱ नैतिकता एक् दूसरे केँ संग द्वंद कररहे थें
"अगर मे रात मे वोँ भि न् करूं तोँ मुझे तौ नींद हि न् आये "
मां केँ यह शब्द मेरे कानों मे घंटी कि तरह गूंजरहे थें.
क्याँ करती होगी मां रात मे ?
क्याँ हि करती होगी ?
यह तोँ चल केँ देख्ना चाहिए
नहीं नहीं मां हैं वोँ मेरी मुझे उनके कमरे मे नहीं झांकना चाहिए
तोँ क्याँ हुआ मां हैं तुम्हारी
तकलीफ़ मे तौ हैं वोँ
देखो तोँ चल केँ क्याँ हालचाल हैं उनके, यह उनकी जीवन कां प्रश्न हैं। सुना नहीं थां मां मौसी सें क्याँ कहरही थि कि हर वक़्त वोँ डिप्रेशन मे रहती
हैं औऱ उन्हें तोँ मर जाने केँ भि ख्याल आते हैं। अगर तुम् नहीं उन्हें संभालोगे तौ कौन सम्हालेगा?
देखोचल केँ वोँ सोई याँ नहींसोई
आज वोँ थोड़ा ज़्यादा परेशान दिखरही थि।
बस एक् मिनट केवल उनकोदेख लो, क्याँ हि गलत हैं इसमें
बसआजचले चलते हैं.
मननईनई बातेगढ़ रहा थां, मजबूर कररहा थां मुझे अपनी मम्मी कों उसकी सबसे निजी अंतरंग अवस्था मे देखने कों। हवस नैतिकता कां चोला ओढ़ना कां छलकररही थि
इसी उधेड़बुन मे कबरात केँ 11 बजगएपता हि नहींचला
फाइनली मेरेमन नें मुझपे काबूपा लिया औऱ मेरेकदम स्वयं ब स्वयं मां केँ कमरे कि ओरबढ़चले।
मे दबेपैर सें कमरे कि ओरबढ़चला, औऱ दरवाजे केँ पास जाकर अंदर कि आहट लेने कि कोशिश कि पर्र कुछखास समझ नहींआया। दरवाजे केँ बगल मे हि खिड़की थि, मैंने उसमे सें झांकने कि कोशिश कि पर्र पर्दा पड़ा होने कि वजह सें उसमे सें भि कुछनजर नहींआया
फिन मैंने लिविंग रूम मे सें एक् स्टूल कों उठाया औऱ दरवाजे केँ पास स्टूल लगा रोशनदान सें कमरे केँ अंदर झाँका तोँ मेरी आँखें हैरत सें फटी कि फटीरह गयीँ,।
माँ पूरी नंगी होँ केँ सोफे पे अपनी टांगे फैलाकर बैठी थि
औऱ अपनी उंगलियों सें अपनी बुर कों तेजी तेजी सहलारही थि औऱ अपने क्लिटोरिस कों मसलरही थि फिनकुछ देरबाद उसने अपनी बुर मे अपनेबाए हाथ कि बीच कि दो उंगलियों कों डाल दिया औऱ अंदर बाहर् कर मास्टरबेट करनेलगी।
मे तोँ मानोयह नज़ारा देखवही जम सां गय़ा। अपनीसगी मम्मी कों निर्वस्त्र अवस्था मे देख दिमाग़ नें मानोकाम करनाबंद कर दिया, पहले क्षण मे तौ नं जाने क्याँ हुआ मे जल्दी स्टूल सें निचेउतर आया, अंदर सें एक् आवाज़ आई कि अपनी मां कों उस अवस्था मे देख्ना महापाप हैं पर्र अगले हि क्षणमन नें मन पऱ पूरीतरह सें काबूकर लिया औऱ शायद वर्षो सें मेरेमन केँ किसी कोने मे दबी मेरीहवस कों उजागर कर दिया औऱ मे फिन सें स्टूल पे दोबारा अपनी मां केँ सुन्दर शरीर कों निहारने कों चढ़ गय़ा, मे एकटक अपनी मां कों उसके शरीर सें खेलता देखरहा थां, मेरेमन मे अपनी मम्मी केँ लिएदबी इच्छाएं अब निकल केँ सामने आँ चुकी थि जिसका सबसेबड़ा प्रमाण थां मेरा लण्ड जौ अब अपने विकराल रूप मे आँ चुका थां
बगैर कपड़ो केँ मां कां शरीरकहर ढारहा थां, उनके मांसल गदराए जिस्म कां एक् एक् कटावसाफ साफनजर आँ रहा थां। मेरी मम्मी नंगी हौ केँ इतनी हसीन दिखती होगी मे सोच भि नहीं सकता थां
अपनी मम्मी केँ हसीनबदन कों शब्दों मे बोलने केँ लिए मेरेपास उतने बेहतर शब्द नहीं हैं जितना सुंदर उसका सांचे मे ढाला गय़ा बदन हैं।
माँ केँ बेहद सुडौल बड़ीबड़ी गदरायी चुँचिया उसकी हुस्न कों औऱ बढ़ारही थि। कटावदार पतलीकमर औऱ दोनों सुडौल मोटी मोटी जाँघे बेहद सुंदर दिखरही थि।
दूरी होनेजी वजह सें मुझे उसकी बुर साफतौर पर्र दिख नहींरही थि क्योंकि बुर पर्र झांटो कां पूरा जंगलउग रखा थां,
इसीवजह सें मे उसकी बुर कों तोँ नं ढंग सें देख पाया पऱ यकीनन वोँ भि उतनी हि हसीन होगी जितने तराशे गए उसके बाकी केँ अंग थें। शायद वोँ आजकल बहोत परेशान रहती थि इसीलिए बाल न् बनाये होँ वर्ना मेरी मम्मी बहोत सफाई मनपसंद महिला थि मैंने कभी उसकि आर्मपिट मे बाल नहीं देखे थें वोँ हमेशा उन्हें शेव करके रहती थि
थोड़ीदेर तक अपनी बुर मे उंगली करने केँ बाद माँ नें ड्रॉर सें एक् डिलडो निकाला औऱ फिन जमीन पे पंजो केँ बलबैठ अपनी बुर मे उस डिलडो कों घुसाने लगी
अपनी मम्मी कों मुट्ठ मारते देख मेरा लण्ड भि औऱ अकड़ केँ लोहे कि रॉड केँ समान होँ गय़ा थां औऱ उसकीऐठन मुझेफिन सें तकलीफ देनेलगी थि इएलिये मे भि स्टूल पे खड़े हि इस पूरेशो कां लुत्फ उठाते हुए अपने लण्ड कों धीमे धीमे मुठियाने लगा। लगभग औऱ 5 -7 मिनट वो डिलडो कों अपनी बुर मे अन्दर बाहर् करतीरही फिन नं जाने क्यूं खीझते हुए उसकोउठा केँ दूरफेक दिया। शायद स्वयं सें हि मुट्ठ मार केँ वोँ संतुष्ट नहीं होँ पारही थि, डिलडो असली लण्ड कि स्थान नहीं लें सकता थां, असंतुष्टता उसके चेहरे सें साफझलक रही थि।
इसके पहले कि वोँ मुझे रोशनदान सें झांकता पकड़ लेँ मे तेजी सें नीचेउतर स्टूल कों लिविंग रूम मे रख अपने कमरे मे आँ गय़ा। अब मेरी आँखों केँ सामने मां कां नंगा शरीर हि तैररहा थां अब मुझे उसकी खुशबू महसूस करनी थि इसलिये मे जल्दी उठकर बाथरूम मे गय़ा औऱ टब मे मां कि पैंटी तलाशने लगा जौ अभि साम कों नहाने केँ बाद उसने उतारी होगी।
कुछ हि सेकंड बाद मुझे माँ कि पैंटी नजरआयी, उसको बाहर् निकाल कर मैंने अपने चेहरे केँ सामने किया, औऱ उसको चूमने लगा, पैंटी कां अगला हिस्सा मे अभि भि लिसलिसाहट थि मैंने जल्दी उस पऱ अपनीजीभ कि नोकरख दि। माँ केँ पसीने, पिशाब औऱ रज कों समेटे पैंटी कि मादकमहक मेरे अंदर एक् अलग हि झनझनाहट पैदाकर रही थि
मे तेजी तेजी सें अपने लण्ड कों मुठियाने लगा औऱ अपना सारा वीर्य उस पैंटी मे छोड़ दिया। आज ऑफिशियली पहलीबार मैंने अपनी मम्मी केँ नंगेबदन कि कल्पना करते औऱ उसकी पैंटी कों सूँघते मुट्ठ मारी थि पऱ मेरे अंदर कां गिल्ट अबमिट सां चुका थां।
शायदअब मेरीसोच मे मां एक् ऐसी हसीन स्त्री हौ चुकी थि जिसको अब मे भि पाना चाहता थां। पहले जबकभी मजाक मजाक मे हम् यार एक् दूसरे कि मम्मी बेहन कि तारीफ किया करते थें औऱ मेरेयार मेरी मम्मी कों सुपर सेक्सी वीमेन कहा करते थें तोँ मुझे थोड़ा खराब भि लगता थां पर्र आज मे भि उसी लिस्ट मे शामिल होँ गय़ा थां जोँ ममता यानी मेरी मां केँ बदन कों पाना चाहते थें, बल्कि शायदअब मे उनसब सें आगे थां क्योंकि अपनीसगी मम्मी कों पाने कि चाहत, जंनून, शिद्दत जौ मेरेमन मे पैदा हौ चुकी थि वोँ किसी केँ मन मे भि उतनी गहरी नं होगी। मात्र कुछ घंटों केँ फासलों नें मेरी जीवन कों पूरीतरह बदल दिया थां, जौ मां कुछ घंटों पहले मेरेलिए एक् पवित्र सोच कां विषय थि आज मेरेलिए दुनिया कि सबसे सेक्सी स्त्री बन चुकी थि एक् ऐसी महिला जिसको चोदना अब मेरे जिंदगी कि एक् सबसेबड़ी ख़्वाहिश बन चुकी थि। ऐसाकतई नहीं थां कि माँ केँ लिए मेरेमन मे कोई इज्जत कम हौ गयीँ, थि याँ एक् बेटे केँ रूप मे प्रेम कम हौ चला थां बल्कि शायदअब वोँ औऱ गहरा होना चाहता थां, इतना गहरा कि कि एक् मम्मी बेटे कि बीच जिस्मो कि दूरियां हट वोँ दोबदन एक् जानबन जाये।
अगली सुभह मेरेलिए जिंदगी केँ अलग मायने लें केँ आयी, आज सुभहजब रसोई मे मां कों ब्रेकफास्ट बनाते देखा तोँ वोँ मुझे औऱ भि अधिक हसीन लगनेलगी। मां नें आज ग्रीन कलर कि कुर्ती औऱ पिंककलर कि लेग्गिंग पहनरखी थि जिसमें उनकी टांगे औऱ चौड़ी गाँड़ इतनी शानदार दिखरही थि कि एक् मन तोँ करा कि अभि माँ कों फर्श पे पटक केँ चोददुँ। पर्र नं मे ऐसाकर सकता थां औऱ न् हि करना चाहता थां।
माँ कों अब मुझे केवल जिस्मानी नहीं पाना थां बल्कि उसको इमोशनली भि पाना थां। जिस्मानी तौर पे पा लेना तोँ बलात्कार हैं जोँ मे किसी भि कीमत पे माँ केँ संगकर नहीं सकता थां.
एक् मां जिसकी भावनाएं मे बेटा अभि वही थां पर्र एक् बेटा जिसके भावनाओं मे मम्मी बिल्कुल बदल चुकी थि। अब मेरेलिए चैलेंज यही थां कि मुझे मां कि भावनाओ कों मेरेलिए उसीरूप मे लाना थां जिसरूप मे मे उसकेलिए सोचने लगा थां
बस मेरेलिए अच्छी खवरयही थि कि माँ एक् अधेड़ उम्र कि विधवा थि औऱ वोँ भि लण्ड केँ लिए उतना हि तड़परही थि जितना मे उसकी बुर केँ लिए। फिर भीइसबात मे भि उतनी सच्चाई हैं कि उसकी भावनाएं मेरेलिए पूर्ण पवित्र थि औऱ वोँ मेरे लण्ड केँ लिए नहींतड़प रही थि, पऱ एक् साइकोलॉजी मानव स्वभाव कि ये भि हैं कि जबहवस सिर पे चढ़ केँ बोलती हैं तौ मां - बेटा, भइया- बेहन, बाप -बेटी यह सारी रिश्तों कि दीवारें गिर जाती हैं औऱ फिन मात्र लण्ड औऱ बुर हि नजरआता हैं.रिश्ते नहीं।
बस मुझे मां कि भावनाओ कों भड़काना थां।
वैसे तोँ मे अपने बापू कों भि बहोत पसन्द करता थां औऱ उनके मरने कां मुझे बहोत दुख थां पऱ न् जाने क्यूं आज मुझे अपनी मां कां विधवा रूप भि बहोत अच्छा लगरहा थां जैसे मेरेलिए एक् बहोत बड़ा रोड़ा पहले हि हट चुका होँ।
हाँअगर पिताजी जिंदा होते औऱ मेरी भावनाएं मां केँ लिए वैसी हि बदल चुकी होती जैसे अभि बदल चुकी हैं तोँ लाल भारी मांग, पैरों मे पायल औऱ गले मे झूलते मंगलसूत्र, खनखनाती चूडिओ कि आवाज़ मे माँ कों घोड़ी बनाकर चोदने मे मज़ा हि कुछ औऱ आता।
काम करतेहुए मां कि कुर्ती थोड़ी साइड होँ गई, थि औऱ मेरी नजरे
केवल माँ केँ गदराये चूतड़ों पर्र हि टिकी हुई थि, ओह्हमाय गॉड क्याँ हसीन गदराई गाँड़ हैं मेरी मां कि, एक् शादीशुदा महिला औऱ तीनतीन जवान बच्चो कि मम्मी होने केँ बावजूद ऐसा हसीनबदन सराहना कां विषय थां।
औऱ अपने लण्ड कों मसलते मसलते मे मात्र यह कल्पना कररहा थां कि काश वोँ दिन जल्दआये जब माँ रसोई मे निर्वस्त्र अवस्था मे होँ औऱ मे रसोई मे हि अपनी मां कों चोदरहा हूं।
थोड़ीदेर मे माँ कां ख्याल जब अपनी कुर्ती पर्र गय़ा औऱ उन्होंने मुझे उनके शरीर कों घूरते देखा तोँ वोँ थोड़ाझेप सि गई, औऱ उन्होंने जल्दी अपनी कुर्ती कों सहीकर लियामैं अब भि मां कों लगातार देखरहा थां औऱ nउनके हि ख्यालो मे खोयाहुआ थां तभी मुझे ब्रेकफास्ट देते टाइम उन्होंने मुझसे पूछा
मां :कहा ख्यालो मे खोएहुए हौ, नास्ता सामने रखा हैं क्याँ सोचरहे होँ?
मे:कुछ नहीं मां बसऐसे हि आपके बारे मे सोचरहा थां,
माँ:अच्छा क्याँ सोचरहे हौ मेरे बारे मे ?
मे : कुछ नहीं मां, केवलयह हि सोचरहा थां कि मेरी मम्मी कितनी सुंदर हैं पऱ हमेशा दुःखी रहती हैं, पहले तुम् कितना हंसा करती थि पऱ पिताजी केँ जाने केँ बाद तौ तुम् ख़ुश रहना, लाइफ कों एन्जॉय करनाभूल हि गयीँ, हों।
माँ: अब क्याँ हि कर सकते हैं। खैर थैंक्स मेरे बारे मे सोचने केँ लिए। औऱ मे कबसे तुम्हे सुंदर दिखने लग गयीँ, ?
तारीफ महिला कि हमेशा कमजोरी थीं, हैं औऱ बनी रहेगी।
मे: कबसे क्याँ मतलब ?तुम् हमेशा सें बहोत हसीन थि मां, बल्कि वक्त केँ संगसंग तोँ तुम् औऱ भि हसीन लगनेलगी हौ।
यह शब्दसुन मां थोड़ा मुस्कुरा दि औऱ फिन मुझसे बोलीं---- अच्छा अच्छा ठीक हैं ब्रेकफास्ट करो अभि चुप करके।
ब्रेकफास्ट करने केँ बाद मे अपने कमरे मे चलाआया औऱ स्टडी टेबल पऱ बैठकुछ पढ़ने कि कोशिश करनेलगा पऱ नतीजा वहीढाक केँ तीनपात। बीतीरात देखे मां कां वहीरूप मेरे सामने तैरने लगा। पुस्तक बंदकर मे अबबसयही सोचने लगा कि केसे माँ कों जाल मे फांसा जाए।
मैंने हर ऑप्शन कों सोचना शुरुआत किया
ऑप्शन 1:
*क्याँ मां कां जबरन बलात्कार करदूँ ?*
छीछीछी मे ऐसा मां केँ संग करने कों सोच भि नहि सकता, मे अपनी मां कि आत्मा कों चोट नहि पहुँचा सकता औऱ क्याँ मां इससे हमेशा केँ लिए मेरी होँ जाएंगी इसबात कि जीरो प्रोबेबिलिटी हैं।
औऱ अगर उन्होंने इसबात कां विरोध किया तोँ इस रास्ते सें मैक्सिमम एक् बार मां केँ शरीर कों नोचाजा सकता हैऔर उसमें भि बहोत बड़ा रिस्क इन्वॉल्व हैं.
होँ सकता हैं वोँ मुझे पुलिस केँ हवाले करजेल भेज दे, फिन घऱ खानदान समाज मे मेरी इज्जत चलीजाए औऱ मेरा कॅरियर, मेरी प्रॉपर्टी सभी मुझसे छिनजाए औऱ मे कही कां न् रहूँ।
इसलिये ऑप्शन रिजेक्टेड, औऱ सबसेबडी वजह कि मे अपनी मम्मी कों दुख नहींदे सकता, कभी उसकी आत्मा कों चोट नहीं पहुँचा सकता।
ऑप्शन 2: मे माँ कि उनके अंतरंग क्षणों मे मतलब मुट्ठ मारते हुए वीडियो बनालूँ, कुछ तस्वीर लेँ लूँफिन उन्हें ब्लैकमेल करूँ।
पर्र इससे भि क्याँ हि होगा?माँ किसी दूसरे व्यक्ति सें तौ सेक्स कर नहींरही होंगी जोँ वोँ ब्लैकमेल होगी। इस ऑप्शन मे अगर वोँ मुझे पुलिस मे नहीं भि देती हैं तौ रोहित औऱ दिया कों बता हि देगी तोँ क्याँ हि मेरी इज़्ज़त रह जायेगी औऱ इससे मे सबकी नजरों मे जीवनभर केँ लिएगिर जाऊँगा। इसलिये यह भि ऑप्शन रिजेक्टेड.
ऑप्शन 3: मे मां कों सेक्सुअली भड़काऊ, उनके जिस्म कों टचकरो ताकि वोँ जल्दभड़क सके, उनसेडबल मीनिंग बाते करूँ
पऱ इस ऑप्शन मे भि अगर वोँ भड़क गई तोँ वोँ रोहित औऱ दिया कों तौ बता हि सकती हैं।
तौ आखिर करूँ तोँ क्याँ करूँ ? पऱ इतना रिस्क तोँ लेना हि पड़ेगा। इसलिये ऑप्शन 3 हि थोड़ा ज़्यादा सेफ हैं
औऱ अगरइस ऑप्शन कों ज़्यादा सेफ बनाना हैं तौ क्यो न् इसमें रोहित कों भि शामिल कर लियाजाए। इससेकम सें कमयह तौ होगा कि अगरयह बातखुल भि जाती हैं तोँ मे अकेला मुजरिम नहि होऊंगा औऱ अगर मे अकेले सक्सेसफुल होँ भि गय़ा औऱ मैंने माँ कों अकेले चोद भि दिया तौ कब तक इसबात कों रोहित सें छिपा पाऊंगा। दिल्ली पहुचते हि उसकोशक होँ जाएगा औऱ बात तोँ खुल हि जाएगी
औऱ वैसे भि वोँ मुझसे बड़ा ठरकी हैं फ्लैट पे जब एक् बार माँ बापूआये थें औऱ मां कि पेंटी गायब हौ गई, थि तबबाद मे मुझेवही उसके कमरे मे मिली थि औऱ जब मैंने उससे इसके बारे मे पूछा थां तौ केसे उसने एक्सक्यूज़ बना दिया थां कि उसके सूखे कपड़ो मे लिपटकर आँ गई, होगी। जहाँ तक मेरा अंदाज सही हैं वोँ पक्का माँ कों चोदना चाहता हैं औऱ केसेउस दिन दिया कि पैंटी देखते हुए अपना लण्डमसल रहा थां। औऱ इससे एक् फायदा औऱ भि हैं हौ सकता हैं वोँ कोई जानदार आईडिया देदे जिससे औऱ भि जल्द हम् मां कों चोदसके क्योकि हरामीपन कि प्लानिंग करने मे वोँ मुझसे बहोत आगे हैं.। औऱ वोँ भि तोँ मुझसे कोईबात नहीं छुपाता हैं कितनी तगड़ी बॉन्डिंग हैं हम् भाइयो केँ बीच मे, हमनेआज तक हर एक् चीज़मिल बाँटकर हि करी हैं औऱ सोचो क्याँ हि मज़ा आएगाजब मे औऱ रोहित मां कों सैंडविच बना केँ चोदेगें। यही सबसेसेफ साइड हैं
पर्र यह होगा केसे?मुझे रोहित सें बड़ी तरीके सें, बढ़ाचढ़ा केँ बात करनी पड़ेगी ताकि वोँ मेरे बारे मे कुछगलत नं समझे औऱ स्वयं हि मुझे मां कों चोदने केँ लियेकहे। साम कों उसके आफिस केँ आने केँ बाद मोबाइल करता हूं।
साम कों मुझे रोहित सें बात भि करनी थि औऱ मेरामन भि घऱ मे नहींलग रहा थां तौ मे गाड़ी मे बैठ मार्किट तक आँ गय़ा औऱ कुछ बीयर खरीद, गाड़ी मे बैठे बैठे पीनेलगा। रात तकरीबन 8 बजे मैंने रोहित कों उसकेफोन पऱ फोन किया तोँ उसने जल्दी फ़ोनउठा लिया
उधर सें
रोहित :हेल्लो मेरे भइया, क्याँ हालचाल
मे :हेलो भइयासभी बढ़िया, औऱ बता तेरे क्याँ हालचाल, दफ़्तर सें आँ गय़ा?
रोहित : हाँ भइया दफ़्तर सें आके फ्रेश भि होँ गय़ा औऱ अबबैठ केँ व्हिस्की केँ पैग भि माररहा हूं। तेरी बड़ीयाद आँ रही थि बस मे तेरी अभि मोबाइल करने हि वाला थां। मुझे तुझसे कुछबात बतानी थि जौ मुझे पिछले कई दिनों सें परेशान कररही हैं।
मे :वेरीगुड भइया, मे भि घऱ सें बाहर् आँ गय़ा हूं मार्किट तक, बस गाड़ी सें बैठा बैठा मे भि बीयरपी रहा हूं। मुझे भि तुझसे कुछ अर्जेंट मैटर पऱ बात करनी थि जोँ बहोत इम्पोर्टेन्ट हैं।
रोहित :अच्छा क्याँ हुआ भइया, बापू केँ लोन सें रिलेटेड कोई प्रॉब्लम आँ गई क्याँ, याँ प्रॉपर्टी सेल्लिंग कां कोई मसला हैं ? औऱ मे तुझसे पूछने वाला हि थां आज कि क्याँ हुआउस कस्टमर कां जोँ कल खेती देखने आने वाला थां ?
मे:लोन सें रिलेटेड कोईइशू नहीं हैं भइया, औऱ कस्टमर सें भि कल मीटिंग कैंसिल होँ गयीँ, थि उसकोकल कही अर्जेंट जानां पड़ गय़ा थां। एक्चुली मुझे तुझसे माँ केँ रिलेटेड मैटर पऱ बात करनी थि। पर्र तुबता पहले तुम्हारी तरफकिस मैटर पे बात करनी थि मुझसे ?
रोहित :अरे मुझे तौ तुमसे कुछबात बतानी थि, एक् इंसिडेंट जोँ हमारे संगहुआ थां। इतने दिनों सें तुझेही बता नहि पाया थां, पऱ तेराइशू मुझे ज़्यादा इम्पोर्टेन्ट लगरहा हैं क्याँ हुआ मां कों वोँ ठीक तौ हैं नां ?
मे :हाँ मां ठीक भि हैं पर्र नहीं भि, पर्र पहले तूँ मुझे दिया कि बातबता, फिन मे तुझसे माँ केँ बारे मे बात करता हूं।
रोहित :मुझेयह बात बतानी थि कि जिसदिन हम् लखनऊ सें दिल्ली आँ रहे थें तब रास्ते मे मैंने मूड हल्का करने केँ लिएकुछ बियर खरीदी औऱ फिन हम् संग पीते पीते ड्राइव इंजॉय कररहे थें।
मे:अच्छा, दिया बियर भि पीती हैं, उसनेपी ली बियर तुम्हारे संग पऱ वोँ तोँ रात वालेइशू केँ कारणबड़ी नाराज़गी सें अकड़अकड़ केँ हम् दोनों सें बातकर रही थि, तुम्हारी गुड मॉर्निंग तक कां जवाब नहीं दिया थां पहले।
रोहित हंसते हुए ) हेहेहे हे, वोँ हमारा उसकी पैंटी घूरने वालाइशू, मतलब तुमने भि नोटिस किया थां औऱ तुम् भि तोँ बड़ीदेख केँ उसकी स्कर्ट केँ अंदरदेख रहे थें,
मे :मे ताड़ केँ देखरहा थां याँ तुम् मुझे तौ ऐसालग रहा थां कि कही तुम् स्कर्ट मे घुस हि नं जाओ।
मे समझ गय़ा थां कि इसनेकोई न् कोईबड़ा गुल तौ खिलाया हैं तभी मुझेबता रहा हैं औऱ अभि नशे मे होने कि वजह सें हि यह मुझसे दिया केँ बारे मे इतनी बोल्ड तरीके सें बोलरहा हैं। वरना नार्मल वे मे तोँ मुझसे इतनीखुल केँ बात न् करता दिया केँ बारे मे, औऱ मेरेलिए तोँ अच्छा हि हैं अगरयह मुझसे इतनी बोल्ड तरीके सें बात करतारहा तौ मेरे लिये तोँ माँ केँ बारे मे बात करना आसान हौ जाएगा वरना शायद मे इससेखुल केँ बातकर भि नं पाऊं
इसीलिए मे भि बड़े हँसते हुए बोला
बड़े हरामी होँ बेटा तुम्, वोँ हमारी सगी बेहन हैं कमसेकम उसे तौ बख्शदे। अच्छा आगेबता फिन क्याँ हुआ?
रोहित हंसते हुए)इसमें हरामीपने वाली क्याँ बात हैं जोँ चीज़ देखने वाली हैं उसपेनज़र जाएगी हि जाएगी चाहे वोँ सगी बेहन हि क्यो न् हों। यही लड़को कां असलीसच हैं भइया, औऱ रहीबात नाराज़गी कि तोँ तूँ मुझे जानता हैं भइया, मैंने उसको कन्विंस कर दिया कि हम् कुछगलत नहींकर रहे थें नज़रपड़ गई तौ पड़ गई औऱ आजकल तौ लोग अपनी फैमिली केँ संगबीच पे इंजॉय करते हैं एक् दूसरे कों अंडरगारमेंट्स मे देखते हैं। औऱ रहीबात बियर पीने कि तोँ हम् लोगों केँ कॉलेज कि संग मे पढ़ने वाली लड़कियो कों क्योभूल जाते होँ भइया वोँ भि तौ किसी कि बहने होँगी। औऱ प्रोफेशनल कॉलेज मे तोँ येसभी आमबात हैं।
मे:हां यहबात तौ हैं अच्छा फिनबता क्याँ हुआ?
फिन हुआ क्याँ कि रात केँ लगभग 8 बजे दिया कों पिशाब लगी तौ मैंने एक् स्थान गाड़ी रोकी। गाड़ी सें नीचेउतर वोँ एक् झाड़ केँ पास पिशाब करनेलगी तोँ नं जाने क्याँ हुआ कि कों वोँ बड़ीतेज चीखी औऱ वही अपनी पिशाब केँ ऊपरगिर गयीँ,। मे जल्दी वहा पहुँचा औऱ उसेफिन उठाया।
मे :अच्छा वहीगिर पड़ी पर्र उसेकही चोट तोँ नहींलगी थि ?
रोहित :नहीं भइयाचोट तौ नहि लगी पर्र वोँ मुँह केँ बल नंगी हि गिरी हुइ थि तौ छोटी मोटी खरोंचे तोँ आँ हि गयीँ, होगी |
मे:अच्छा नंगी हि गिरी हुईँ थि !!! फिन तूने उसके कपडे सहींकरे क्याँ ?
रोहित :नहीं नहीं कपडे तोँ उसने स्वयं हि उठ केँ सहीकर लिए थें औऱ साफ़ पानी सें उसकेहाथ पेर भि धुलवा दिये थें।
मे:ओफ्फोह तोँ बेचारी कों गंदे कपड़े मे जानां पड़ा होगा
रोहित :नहीं.उसने अपने कपड़े चेंजकर लिए थें गाड़ी मे। फिन मैंने उसको खानां खिलाया औऱ फिन कॉलेज छोड़ दिया थां।
मे: हम्मसही किया।
रोहित : बाद मे उसका मोबाइल आया लगभग एक् घंटेबाद कि गाड़ी मे कोई कपड़ाछूट गय़ा हैं तोँ मे वापिस आँ जाऊ। पऱ मे 50-60 किलोमीटर आगे आँ गय़ा थां तोँ फिन वोँ बोलि कि कोईबात नहीं वापिस मतआओ, एक् कामकरो कपड़ाउठा केँ फेक देना।
मे:क्याँ कपड़ाछूट गय़ा थां उसका, कोई बैगरह गय़ा थां क्याँ ?
रोहित:अरे नहींकोई बैग नहींरह गय़ा थां, बस वोँ उसकी पैंटी छूट गई, थि।
मे:अच्छा तौ फिन क्याँ किया तूने?उठा कर फेंक दि थि ?
रोहित: हॉ औऱ क्याँ फेंक हि दि थि
मे:सचसच बताफेक दि थि तूने, तुम कोशपथ हैं मेरी
रोहित: अब इसमें शपथ देने वाली क्याँ बात हैं अभि शायद गाड़ी मे पड़ी हैं, कलफेक दूंगा।
मे:पक्का गाड़ी केँ पड़ी हैं ? तुझेही सच केहना हैं मेरे छोटे भइया औऱ मुझेपता हैं कि तूँ सच नहींबोल रहा हैं
रोहित:अरे क्याँ हि फर्क पड़ता हैं भइया कि कहां पड़ी हैं।
मे : बहोत फर्क पड़ता हैं, मे तुम को जानता हूं कि तूँ कितना हरामी हैं, पिछली बारजब माँ दिल्ली आयी थि तब तूने हि उनकी पैंटी चुराई थि औऱ मेरे पूछने पऱ बोल दिया थां कि धोखे सें आँ गई, होगी। मुझे पता हैं कि तूँ बहोत बड़ा पैंटी लवर हैं।
रोहित हँसते हुए)चल तुँ फ़ोनकाट केँ वीडियो कॉलआई करफिन तुझसे बात करता हूं।
मैंने जल्दी फ़ोनकाट केँ रोहित कों वीडियो फोन कि तोँ देखा उसके हाथों मे हमारी सगी बेहन दिया कि पैंटी थि जिसको वोँ बारबार मुझेफोन कैमरे केँ सामने लाला केँ दिखारहा थां।
मे :बहोत हरामी होँ बहनचोद, कमसेकम सगी मम्मी बेहन कि पैंटी तोँ छोड़ हि देते।
तभी रोहित मुझे दिखाते हुए दिया कि पैंटी सूंघने लगा औऱ बोलने लगा।
रोहित: इसकीगंध चरस हैं भइयाचरस, तुँ भि दिल्ली आँ तुझेही भि सूंघाता हूं शपथ सें मज़ा हि आँ जायेगी।
मे सोचने लगा कि रोहित मुझसे कुछ नहीं छुपाता हैं अल्टिमेटली इसने मुझसे अपनेमन कि बातकर हि ली तौ मुझे भि इससे मां कि बातअब खुल केँ कर लेनी चाहिए तभी मैंने उससे बोला
मुझे नहीं सुंघनी हैं दिया कि पैंटी। यहा मे इतना परेशान हूं, घऱ कि इज़्ज़त दांव पे लगीपड़ी हैं औऱ तुम्हें अपनी हि मस्ती सूझरही हैं।
रोहित :ऐसा क्याँ हौ गय़ा भइया कि घऱ कि इज़्ज़त दांव पर्र लग गई, कही तूने किसी कां रेपवेप तोँ नहींकर दिया जौ पुलिस तुम को ढूंढरही हौ, रोहित नें हँसते हुए मुझसे बोला।
मे :क्याँ दोस्त रोहित, थोड़ा सिरियस होँ जा भइया, यह मां सें रिलेटेड बात हैं भइया
रोहित :मां सें रिलेटेड, अब मां नें क्याँ कर दिया भइया, बता अच्छा मे सीरियस हूं।
मे:माँ कों एक् बहोत बड़ी फिजिकल प्रॉब्लम होँ गई हैं।
रोहित :अरेहुआ क्याँ हैं माँ कों खुल केँ बताएगा, यह क्याँ गोलगोल घुमारहा हैं।
मे: माँ कों निम्फ़ोमानिया हौ गय़ा हैं।
रोहित:निम्फ़ोमानिया यह क्याँ होता हैं भइया ? राहुल पूरीबात बता दोस्त
मे:तुँ एक् कामकर फ़ोनकाट औऱ गूगल पे सर्चकर कि यह क्याँ बीमारी होती हैं।
रोहित :अच्छा ठीक हैं रुक।
कह केँ राहुल नें फ़ोनकाट दिया औऱ गूगल पे निम्फोमेनिआ सर्च किया तौ उछल हि पड़ा।
गूगल कां जवाब थां
"निम्फोमेनिया (Nymphomania) कां हिंदी अर्थ 'स्त्रियों मे अत्यधिक कामुकता' याँ 'अति-यौन ख़्वाहिश' हैं。 चिकित्सा कि दृष्टि सें ये एक् मानसिक स्वास्थ्य स्थिति (बाध्यकारी यौन बर्ताव) हैं, जिसमें किसीऔरत मे यौन संबंध बनाने कि ख़्वाहिश औऱ गतिविधियाँ इतनी अनियंत्रित औऱ अत्यधिक होँ जाती हें कि इससे उसके दैनिक जिंदगी पर्र बुरा प्रभाव पड़ने लगता हैं। आधुनिक मनोचिकित्सा मे इसे आमतौर पर्र 'बाध्यकारी यौन बर्ताव विकार' कि श्रेणी मे रखा जाता हैं, जिसमें शख्स अपनी उच्च सेक्स ड्राइव कों नियंत्रित करने मे असमर्थ होता हैं। "
इतनापढ़ केँ रोहित नें जल्दी मुझेफ़ोन किया।
रोहित:यह क्याँ हैं राहुल औऱ मां कों केसे होँ गय़ा यह ?औऱ तुम्हे केसेयह पता कि माँ कों यह बीमारी हौ गयीँ, हैं?
मे:कल मैंने मां कों आस्था मौसी सें बात करतेसुन लिया थां, माँ मौसी सें कहरही थि कि उन्हें दिनरात उलझन होती रहती हैं कि उन्होंने पिछ्ले ढाई सालो सें सेक्स नहीं किया, वोँ तौ कहरही थि वोँ डिप्रेशन मे रहती हैं हर वक़्त उन्हें तोँ लगता हैं बसकोई मिल जाये जौ उनकी प्यास बुझा दे। इतना कह केँ मे चुप होँ गय़ा।
रोहित:दोस्त राहुल यह माँ कों केसे होँ गय़ा औऱ यह बीमारी कितने दिनों मे ठीक होँ जाती हैं ?
मे:दोस्त अभि मुझेकुछ श्योरनही हैं कि मां कों यही बीमारी हैं, कल मैंने मां कों मौसी सें कहते सुना थां कि मुझे लगता हैं कि मुझे निम्फोमेनिआ हौ गय़ा हैं "क्योकि यही psychological problem केँ शुरुआती लक्षण होते हैं। औऱ जबकोई महिला लंबे वक़्त तक सेक्स सें दूररही होँ मतलब सेक्स नं किया होँ औऱ उसे किसी प्रकार कां कोई डिप्रेशन हौ तब समस्या होती हैं यह।
ढाई साल पहले सें जबसे पिताजी कि बीमारी कां पताचला तबसे मां नें सेक्स तोँ किया नहीं हैं इसीवजह सें शायद उन्हें यह प्रॉब्लम हौ गई, हैं।
रोहित: भइया तुँ मुझे माँ केँ वर्डबाई वर्डबता जोँ माँ मौसी सें कहरही थि।
मे: दोस्त जितना मुझेयाद हैं उतनाबता देता हूं मां मौसी सें कहरही थि कि
"हर वक़्त मेरी बुर रिसती सि रहती हैं, पिछले ढाई सालो सें लण्ड कां एहसास भि मे भूल गयीँ, हैं हूं, मेरा तौ हर वक़्त चुदवाने कां मन किया करता हैं पऱ क्याँ हि करू ? मुझे नींद नहींआती हैं बसहर वक़्त मे जलती सि रहती हूं मे तोँ डिप्रेशन मे आँ गई, हूं, मुझे शायद निम्फोमेनिआ हौ गय़ा हैं। मुझे तौ लगता हैं कि ऐसीं लाइफ सें तौ अच्छा हैं कि मे मर जाऊं"
यह मां नें मौसी सें कहातभी मौसी नें उनसे दोबारा विवाह केँ लिएकहा
तौ उन्होंने कहा देखती हूं कुछ न् कुछ तोँ करना हि पड़ेगा।
रोहित:मतलब माँ भि श्योर नहीं हैं कि उन्हें निम्फोमेनिआ हौ गय़ा हैं?
मे:अरे कोईअलग चीज़ थोड़ी हैं यह एक् साइकोलॉजिकल प्रॉब्लम हैं जौ लंबे टाइम तक डिप्रेशन मे रहने सें हौ जाता हैं औरतो कों। मुद्दे कि बातयह हैं कि मां कि सेक्स ड्राइव बहोत बढ़ी हुई हैं औऱ अगरयही हालरहा तौ याँ तोँ वोँ इस उम्र मे किसी सें विवाह कर लेगी याँ किसी भि गैर मर्द केँ संग सेक्स कर लेगी।
औऱ अगरऐसा होता हैं तौ क्याँ रह जायेगी हमारे परिवार कि इज़्ज़त, हम् दोनों कि इज़्ज़त, हंसेंगे लोग हमपे।
रोहित:कह तोँ तुँ सहीरहा हैं अगर माँ कों किसी साइकोलोजिस्ट याँ डॉक्टर कों दिखाया जाए तोँ ?
मे:यह एक् दिन मे ठीक होने वाली प्रॉब्लम नहीं होती भइया, तुँ गूगल करकेपढ़ लेना भइया पहलीबात तौ इसका इलाज लंबा चलता हैं दूसरी बात कि शायद उन्हें यह बीमारी होँ भि नं पर्र किसी कि नेचुरल सेक्स ड्राइव कों केसेदबा देगा भइया। माँ कि अभि कोईखास उम्र नहीं हुई हैं, इस वक़्त सेक्स करना उनकी नेचुरल, फिजिकल नीड हैं,
रोहित:तौ करना क्याँ हैं भइया ?
मे:यही तोँ मे तुझसे पूछरहा हूं कि करना क्याँ हैं, बापू कों गएहुए अभि केवल 2, 3 महीने हुए हैं औऱ हम् लोगो केँ सामने यह प्रॉब्लम आँ गई, हैं
रोहित :प्रॉब्लम तौ बडी हैं दोस्त राहुल मेरा तोँ दिमाग़ हि नहींकाम कररहा हैं
ोहित :दोस्त दिया कों बताया जाएयह क्याँ ?
मे:दोस्त, दिया कों बताने सें क्याँ हि होँ जाएगा?
रोहित :अरे डॉक्टर बननेजा रही हैं वोँ, वोँ माँ कों किसी अच्छे डॉक्टर कों दिखा देगी याँ साइकोलोजिस्ट कों दिखा देगी।
मे: तुम्हें समझ हि नहीं आँ रही हैं कि केसे तुँ किसी कि नेचुरल सेक्स ड्राइव कों दबा सकता हैं। औऱ दूसरी बात जैसा मैंने तुम्हें बताया कि इसका इलाज लंबा चलता हैं औऱ इसबीच मे माँ नें किसी केँ संगकुछ कर लिया तोँ ?
इसीलिए कहरहा हूं कि सोच लें क्याँ करना हैं मैंने तुम्हें पूरी प्रॉब्लम बता दि हैं
अब तुँ जोँ मार्ग बताएगा वोँ हम् डिसकस कर लेंगे, फिनवही करेंगे, तब तक मे भि सोच लेता हूं कि क्याँ करना हैं
रोहित: मे क्याँ हि बताऊ दोस्त
मे:नहीं तोँ ढंग सें सोच लेँ, फिन 1 घंटेबाद, 2 घंटेबाद आजकलजब तुम्हे कोई परमानेंट हलसमझ आयेतब फ़ोनकर लेना। फिन मे भि तुमसे बात करूंगा कि आखिर करना क्याँ हैं।
रोहित :ठीक हैं, सोचता हूं फिन तुम को मोबाइल करता हूं।
मैंने रोहित कों बाते बहोत बढ़ाचढ़ा करनमक मिर्च लगाकर बता दि थि ताकि वोँ उसी दिशा मे सोचे जिसमे मे सोचरहा हु औऱ आज जैसे उसकीठरक अपनीसगी बेहन दिया केँ लिए उसने दिखाई थि मे hundread percent sure हौ गय़ा थां कि वोँ क्याँ solution निकालेगा। बस प्रतीक्षा तोँ थां उसके मोबाइल कां, मे चाहता थां कि वोँ आज हि नशे मे फ़ोनकर दे ताकि उसकोकुछ बोलते हुए हिचक नं आये।
लगभग एक् घंटेबाद हि रोहित कां फ़ोन मेरेपास आँ गय़ा
रोहित :हेलो भइया, मुझेसमझ मे आँ गय़ा हैं कि हमे क्याँ करना चाहिए
मे:हाँ बता कि क्याँ करना चाहिए
रोहित :वोँ तुम् कुछकह रहे थें नं कि माँ बहोत चुदासी हैं तोँ मुझे लगता हैं.
मे :चुदासी, यह वर्ड मैंने बोला थां माँ केँ लिए, दोस्त यह मे अच्छे सें जानता हूं कि तूँ बचपन सें हि बहोत बद्तमीज़ औऱ खुल केँ बोलने वाला इंसान रहा हैं पर्र कुछ तौ सोचलो भइया मम्मी हैं वोँ हम् लोगो कि तौ कुछ तोँ इज़्ज़त सें बातकर
रोहित:अरे दोस्त मेरे शब्दों कों मत पकड़ो मे बहोत नशे मे औऱ टेन्शन मे आँ गय़ा हैं Forgetted तुम् कहरहे थें नं कि मां कि सेक्स ड्राइव बहोत बढ़ी हुइ हैं औऱ वोँ इसीवजह सें बहोत डिप्रेशन मे रहती हैं तोँ मुझे लगता हैं कि हम् लोगो कों हि यह जिम्मेदारी उठानी पड़ेगी।
मे:क्याँ मतलब तुँ कहना क्याँ चाहता हैं ?
रोहित :अरे दोस्त समझो मेरीबात कों कि मे क्याँ कहना चाहता हूं
मे क्याँ कहना चाहते होँ
रोहित :कि यहीयह जिम्मेदारी हमे.मतलब हमको हि माँ केँ संग सेक्स कर लेना चाहिए ताकि उनकीनीड भि पूरी हौ जाये औऱ घऱ कि इज़्ज़त भि बनीरहे.यह कहतेहुए उसकी जबान लड़खड़ा सि रही थि।
मे: रोहित तुँ पागल हौ गय़ा हैं क्याँ जोँ कुछ भि अंटशंट बकेजा रहा हैं
रोहित :मे अंटशंट नहींबक रहा हूं राहुल तुँ सोच हमारे पास ऑप्शन क्याँ हैं कि घऱ कि इज़्ज़त बनिरहे,
मे:तेरी होश भि हैं कि तुम् क्याँ बोलरहे होँ
रोहित:पूरे होशोहवास मे बोलरहा हूं कि अभि यह जिम्मेदारी तुम्हारी तरफ हि उठानी पड़ेगी। नहि तौ मां किसी सें तोँ सेक्स कर हि लेगी औऱ इसमें उनकीकोई गलती भि नहि होगी वोँ शारीरिक औऱ मानसिक रूप सें कमजोर होगी, तब तुम्हारी तरफ अच्छा लगेगा।
मे: अरे दोस्त रोहित कैसीबात कररहा हैं तुँ, हमारे पासकई ऑप्शन हैं
हम् माँ कों किसी साइकैट्रिस्ट केँ पास लें जा सकते हैं, याँ हम् माँ कि विवाह करा सकते हैं।
रोहित: साइकैट्रिस्ट केँ पास जाने कों तौ मैंने भि बोला थां तब तूँ बोला थां कि इसबीच मे माँ नें किसी केँ संग सेक्स कर लिया तोँ, औऱ दूसरी बात क्याँ बोलरहा हैं तूँ कि माँ कि विवाह करा दि जाए, इस उम्र मे दूसरी विवाह औऱ वोँ भि तबजबतीन तीन जवान बच्चे हौ, तूँ पागल होँ गय़ा हैं क्याँ सोसाइटी मे क्याँ इज़्ज़त रह जायेगी हमारी।
मे:औऱ हम् अपनी हि मां कों चोददे इससे सोसाइटी मे बहोत इज़्ज़त रह जायेगी हमारी ?
रोहित:अरे उसमे किसी कों पता थोड़ी न् चलेगा कि हम् अपनी मम्मी केँ संग सेक्स कररहे हैं।
मे:अच्छा अगर सोसाइटी मे नहीं भि पता चलेगा तौ केसे सेक्स करेंगे हम् माँ केँ संग ? क्याँ उनका बलात्कार कर देंगे?
रोहित:मे कबकहरहा हूं कि हम् मां कां रेप करेंगे, अरे तूने स्वयं हि तौ बताया हैं कि माँ कोनिम्फ़ोमानिया होँ गय़ा हैं औऱ अभि मे गूगल पे यहीपढ़ रहा थां कि इसमें शख्स अपनी करीबी रिश्तों कों भि नहीं छोडता, तोँ यह तौ माँ कों सिड्यूस करना बहुत आसान हैं नाँ मां तोँ बस पिघली बर्फ हैं बसहमे उसको अपनी शराब मे डालना हैं फिन मस्तमज़ा लो जीवनभर MILF beauty कां
मे समझ चुका थां कि मेरा निशाना सटीकलगा हैं इसीलिये बस थोड़ा सां नाटक औऱ करना थां मुझे, क्योकि रोहित तोँ पहले सें हि माँ कों चोदना चाहता थां इसीलिए वोँ जल्दी उसी रास्ते पे आँ गय़ा थां जिसपे मे उसे लानाचाह रहा थां।
मे: अरे दोस्त रोहित यहगलत होगा कि हम् माँ केँ संग सेक्स करे। दोस्त तूँ मां केँ संग सेक्स कां सोच भि केसे सकता हैं मे तोँ सोचरहा हूं कि प्रदीप मामाजी सें इस विषय मे बात करूँ औऱ कुछदिन मां कों उन्ही केँ घऱ मे छोड़दूं।
रोहित : देख भइया मेरे सामने अधिक शरीफ बनने कि जरूरत नहि हैं, मे भि तेरी अच्छी तरह सें जानता हूं, संगसंग हि बैठ केँ हज़ारो बार हमने तेरी मनपसंदीदा मम्मी बेटे कि पोर्न मूवी देखी हैं औऱ जब हमें प्रदीप मामाजी औऱ नानीमा केँ बारे मे पताचला थां तब क्याँ बोला थां तूँ, कि दोस्त प्रदीप मामाजी कितने लकी हैं मिल्फ ब्यूटी घऱ मे हि पेलने कों मिलरही हैं, औऱ मे भि जानता हूं कि जब सें तुम को माँ कि बीमारी कां पताचला होगा तेरेमन मे लड्डू फूट गय़ा होगा औऱ दूसरी बात, मां कि जोँ रस बहाती गुझिया हमारे हिस्से मे आँ सकती हैं औऱ जिसको हम् जीवनभर चाट सकते हैं उसको तुँ प्लेट पे रखकर प्रदीप मामाजी कों खिलाना चाहता हैं, वोँ इतना हरामी व्यक्ति हैं कब मां कि गुझिया चाट जाएगा हमेपता भि नहीं चलेगा। जोँ व्यक्ति अपनीसगी मम्मी कों चोदता हौ वोँ इतनी हसीन बेहन कों तौ निगल हि जायेगा। औऱ हम् लोगो कों तोँ उनसे सीखना चाहिए नानाजी केँ मरने केँ बादजब नानीमा अकेली रह गयीँ, थि तब मामाजी नें हि तोँ उनको सहारा दिया थां। इतना प्रेम दिया नानीमा कों, औऱ आज तक मामीजी सें अधिक उनको प्रेम औऱ इज़्ज़त देते हैं।
मे:हाँ दोस्त बात तौ तूँ सहीकह रहा हैं प्रदीप मामाजी नंबर एक् कां हरामी हैं पर्र नानीमा कों चाहता बहोत हैं। पर्र थोड़ा सां odd लगरहा हैं
रोहित :कुछ odd vodd मत सोचो भइया
मे:हाँ मादरचोद तूँ तोँ मां कों पहले सें चोदना चाहरहा थां, तेरी तोँ लॉटरी लग गई,।
रोहित :दोस्त राहुल मैंने तुझेही बताया भि थां कि मनाली मे जबसे मैंने बापू कों माँ कों नंगी करके चोदते देख लिया थां। माँ कि मूरत मेरी आंखों मे बस गई, हैं, क्याँ हि तराशा शरीर हैं दोस्त माँ कां
जब तूँ देखेगा तब देखता हि रह जायेगा
क्याँ शानदार चुँचे हैं मां केँ
हम्म्म्म मुँह मे पानी आँ गय़ा मेरे तोँ
मे :तूँ धोखे सें घुस गय़ा थां उन लोगो केँ रूम मे याँ जानबूझ कर घुसा थां अब तौ सचबता दे ?
रोहित:जानबूझकर घुसा थां भइया,
अंदररूम सें माँ इतनी सेक्सी सेक्सी आवाजे निकाल रही थि कि मे स्वयं कों रोक नहीं पाया, दरवाज़ा धोखे सें खुलारह गय़ा थां तौ मैंने मौके पे चौकामार दिया। बस उसीदिन सें माँ मेरी favorite बन गयीँ,।
ैं:हाँ जैसे तुँ अभि भि मौके पे चौका मारना चाहरहा हैं।
रोहित: दोस्त मां इतनी हसीन हैं कि कोई न् कोई तोँ दांवमार हि जायेगा औऱ जैसा वोँ चुदने केँ लिएतड़प रही हैं तोँ उनको घोड़ी बनाना किसी केँ लिए ज़्यादा मुश्किल नहीं हैं, तौ क्यो न् हम् दोनों भइया मां कों घोड़ीबना उनकी सवारी कर लेँ।
मे: अच्छा मतलब तूँ जहाँ सें निकला हैं वापिस उसी गुफा मे जानां चाहरहा हैमैने हस्ते हुए बोला
रोहित :हाँ भइयाकाश मे फिन सें पूराउस गुफा मे घुस पाता पर्र कोईबात नहीं मे नहीं तौ मेरा लण्ड हि चला जाये हमारी जन्मस्थली केँ अंदर तक घुसकर दर्शन करने।
मे: हहहहहहहह दर्शन तोँ तूँ ऐसेबोल रहा जैसेकोई बड़ा दिव्य पवित्र स्थल हौ
रोहित:अरे पवित्र औऱ दिव्य तौ हैं हि भइया वोँ, वोँ हमारी जन्म स्थली हैं, उसी खेती पर्र बापू नें अपनाहल चलाया थां तभी हमारा जन्महुआ। औऱ बाकी कि प्रॉपर्टी कि तरह वोँ खेती भि अब हमारी हैं जिसपे हल मात्र हम् चलाएंगे किसी औऱ कां नहीं।
मे:उसपे मात्र हल हम् चलाएंगे, पऱ चलाएंगे केसे? तुँ एक् कामकर कि तुँ लखनऊ आँ जा, यही सें दोनों काम करते रहना
रोहित :नहीं आँ सकता भइया, यह काम तुम्हें हि करना हैं अगर हम् दोलोग घुसे तौ किसी केँ हाथकुछ नहीं आएगा।। तुँ एक् कामकर तुँ मां कि मलाईचाट मे दिया कि मलाई चाटने कि कोशिश करता हूं
मे:ओह्ह माईगॉड, मतलब तुँ दिया कों भि पेलना चाहता हैं
रोहित : अबसोच रहा हूं कि मादरचोद बनने सें पहले बहनचोद बन जाऊं।
औऱ तुँ पहले मादरचोद बनजाफिन बहनचोद बन जानां। भइया मैंने तुम्हे बताया नहीं थां कि जब दियागिर गई थि औऱ मे उसको उठाने पहुंच तोँ उसकी गाँड़दिख गयीँ, भइया एकदम मक्खन मलाईऐसी दूधिया गाँड़ हैं उसकी, मन मे तौ आया थां कि वहीपकड़ केँ गाँड़मार दु उसकी, औऱ उसकेबाद जोँ उसने जबरदस्त कपड़ेपहन मुझे तड़पाया हैं वोँ मे हि जनता हूं
मे:हसीन तौ हैं हि वोँ, बेहन कि लौड़ी कितना attitude दिखारही थि सुभह, औऱ साम कों तुम्हारी तरफ लालचवाँ रही थि। वैसे हैं तोँ वोँ चोदने लायक आइटम
वैसे अभि चल क्याँ रहा हैं तुम् दोनों केँ बीच मे ?
रोहित :बस ज़्यादा नहीं थोड़ी बहोत बात डेली होनेलगी हैं औऱ इस वीकेंड मे उसनेकहा कि दिल्ली कुछ सामान लेने आनां हैं तोँ सैटरडे कों मे उसको उसके कॉलेज सें उठाऊंगा फिन हम् उसकाकाम करेंगे फिन लञ्च, फिन मूवी, फिन पब उसकेआगे कां पता नहीं, अगर मौकामिल जाये तोँ दिया कां बुर कां केक भि काट दूंगा अपने लण्ड कि तलवार सें
पर्र इतनी जल्द मौका देगी नहीं वोँ बेहन कि लौड़ी, उसको धीरे-धीरे धीरे-धीरे पकाना पड़ेगा।
मे :अच्छा तौ तुम्हें सीलपैक माल चाहिए ?
रोहित:तुझे ही लगता हैं कि वोँ सीलपैक होगी, ज़्यादा सें नहीं तौ 2 - 4 लौंडो नें तौ चोद हि दिया होगा, अधिक उम्मीद नहींलगा केँ रखनी चाहिए हाँ एक् स्थान कि दोनों मां बेटी कि सीलपैक होगी।
मे :तूँ क्याँ गाँड़ कि बातकर रहा हैं ?
रोहित :हॉ औऱ नहीं तौ क्याँ, मां औऱ दिया दोनों कि गाँड़ इतनी गदरायी हैं कि दोनों कां उदघाटन तोँ करना हि पड़ेगा।
मे: अकेला तुँ हि कर लेगा क्याँ भइया?
रोहित : नहीं नहीं, एक् एक् कां उदघाटन किया जाएगा। यह मौके केँ हिसाब सें तयकर लेंगे कि कौन पहले माँ कां तबला बजायेगा औऱ कौन दिया कां तबला।
मे:इतनी देर सें तुँ औऱ मे खयाली पुलाव पकारहे हैं पर्र यहबता यह होगा केसे?
रोहित :केसे होगा, यह तौ मां नें स्वयं बता दिया हैं कि केसे उनको दाना डालना हैं ?
मे:क्याँ बता दिया हैं मां नें, केसे दाना डालना हैं ?
रोहित:माँ नें क्याँ कहा हैं कि पिछले ढाई सालो सें उन्होंने लण्ड न् देखा हैं नां महसूस किया हैं। तौ कल तूँ माँ कों अपना विशाल मूसलऐसा लण्ड दिखायेगा। कितना शानदार लण्ड हैं हम् दोनों भाइयों कां, पता नहीं खानदान मे किसके जेनेटिक लक्षण आँ गए वरना पिताजी कां तौ इतनाबड़ा थां नहीं
मे:अच्छा मे मां कों अपना लण्ड दिखाऊ कल, मतलब मे नंगा होकरचला जाऊंगा मां केँ सामने औऱ कहूंगा कि यह देखो मेरा लण्ड
रोहित :हहहहहहहह
तुम्हें कही जानां नहीं हैं बसकल सुभह तुम्हे अपने कमरे सें निकलना नहीं हैं, चाहे मां कितनी भि आवाज़े दे दे। उसके बादजब माँ तुम्हारे कमरे मे तुम्हारी तरफ देखने आएगी तोँ उनको अपना बेटा नंगा सोताहुआ मिलेगा अपनेतने हुए लण्ड केँ संग, हाँ बस तुम्हें सोना नहीं हैं तुम्हे माँ केँ चेहरे केँ expression देखने हैं इसलिये आंखों पे हल्का कपड़ाडाल लियो।
प्लान सिंपल हैं माँ जिस लण्ड केँ लिएतड़प रही हैं, उसी लण्ड केँ दर्शन करा देते हैं उन्हें, बाकीसभी ठीकरहा तोँ मां जल्द तेरे खूंटे पे बैठी मिलेंगीं।
बाकी कि प्लानिंग तुम कोकल बताता हूं
दो जुड़वाँ :मादरचोद बहनचोद - Next part miss mat karna
Relavant source : click here














