My Life @Jindgi Ek Safar Begana ( Action , , Thriller , Adult) (Full Storyd) (romance special) – New Episode
Update 135
वक्त गुज़रता रहा दोनो देशों केँ बीच रिस्ते सुधारने केँ प्रयास होतेरहे जोँ मेरे हिसाब सें सिर्फ दिखावा हि थां, खासतौर सें पाकिस्तान कि तरफ सें.
कुछ दिनोबाद वहा फ़ौजी हुकूमत केँ खिलाफ राजनीतिक पार्टियों औऱ अवाम नें मोर्चा खोल दिया औऱ मजबूरन उन्हें एलेक्षन मे जानां पड़ा औऱ नतिजन एक् नयी डेमॉक्रेटिक सरकार बन गयीँ,.
मगर हिन्दुस्तान केँ लिए उनकी नीतियों मे कोई बदलाव नां आनां थां औऱ नां हि आया।
आते हि यह सरकार भि बात-चीत केँ नाम पर्र कश्मीर कां राग अलापति रहती, जौ कि हिन्दुस्तान कि नाक हैं.
टाइम जैसाचल रहा थां वैसे हि चलतारहा… छिट - पुट घटनाओं कों छोड़कर ऐसाकोई वाकीया नहींहुआ जोँ लिखने लायक होँ.
पाकिस्तान मे फौज केँ अत्याचार थोड़े कम होँ गये थें, मगर दहशतगर्दी कां आलम अभि भि बदस्तूर जारी हि थां.
सीमा पऱ आतंकवादियों कि घुसपेठ केँ प्रयास बदस्तूर जारीरहे, जिसमें पाकिस्तानी फौज उनकी सहायता करती रहती,
आएदिन सीेज़फाइयर कां वाइयोलेशन होता रहता जिसका हिन्दुस्तान कि बीएसएफ माकूल जबाब देती रहती.
फिन एक् दिनऐसा आया कि जिसने मेरी पूरी जीवन कों हिलाकर रख दिया….
एक् दिनसाम कों मे सोफे पर्र बैठा शाकीना केँ आने कां प्रतीक्षा कररहा थां, रात केँ 9 बजगये, मगर वोँ नहींआई,
मैने उसकेघऱ पता कियावहा भि नहीं लौटी थि।
मुझे उसकी फिकर सताने लगी, मन मे बुरे-2 ख़याल आनां शुरुआत हौ गये,
उसका मोबाइल ट्राइ किया तौ वोँ स्विच ऑफ आँ रहा थां, सोच मे पड़ गय़ा कि अब मे करूँ तौ क्याँ करूँ।
दिमाग़ कां दही होताजा रहा थां प्रतीक्षा करते-2, 10 बजगये मगर नां उसका मोबाइल आया औऱ नां वोँ हि आई.
भय औऱ उत्तेजना मेरेउपर हाबी होतीजा रही थि, इतनी फिकरआज तक मैने किसी कि भि नहीं कि थि, जितनी मुझेआज शाकीना कि हौ रही थि…!
यह लड़की मेरेदिल कि गहराइयों मे उतर चुकी थि…, औऱ हौ भि क्यूं नाँ, आँख मूंदकर भरोसा जौ किया थां उसने मेरेउपर…
मैने एक् बार औऱ उसका मोबाइल ट्राइ किया तोँ इसबार रिंग बजनेलगी, 4-5 बार रिंग बजने केँ बादउधर सें मोबाइल उठाईकर लिया गय़ा.
मोबाइल उठाई करते हि उधर सें एक् मर्दाना आवाज़ सुनाई दि – हेलोकॉन.?
मे – हेलो ! यह शाकीना कां नंबर हि हैं नाँ.?
उधर सें – हां ! यहउसी कां नंबर हैं, आप् कॉन ?
मे उनका साथीबोल रहा हूं, वोँ अभि तक घऱ नहीं लौटी, उसकी अम्मी चिंता कररही हैं,
आप् बता सकते हें वोँ अभि तक क्यूं घऱ नहीं पहुँची औऱ उसका मोबाइल आपकेपास केसे हैं.?
उधर सें – मे यहा कां सेक्यूरिटी ऑफीसर बोलरहा हूं, वोँ अभि साब केँ संग बिज़ी हैं, औऱ उनके ऑफीस मे किसी कां पर्सनल मोबाइल लेँ जानां अलाउ नहीं हैं।
मे – मगररात केँ 10 सें उपर कां समय होँ गय़ा, इससमय आपकेसाब कों उससे क्याँ कामपड़ गय़ा, जौ अभि तक पूरा नहींहुआ.?
उधर सें – यह हम् नहींबता सकते…! औऱ नां हि हमें जानने कि पर्मीशन हैं.!
मे – मगर वोँ उनकेपास कब्से हैं ? इतना तोँ बता सकते हौ…!
उधर सें – वोँ साम 6 बजे सें हि उनकेपास हैं…! अधिक परेशान होने कि ज़रूरत नहीं हैं, सुभह तक घऱ पहुँच जाएगी,
उसकी अम्मी कों खबरकर देना…! इतना बोलकर उधर सें मोबाइल कट होँ गय़ा.
मे अपनासर पकड़कर बैठ गय़ा, सालाजिस बात कां डर मुझे औऱ शाकीना कों सतारहा थां वहीहुआ, आज खालिद कि वासना आख़िर हाबी हौ हि गई,.
याँ ऐसा तोँ नहीं कि उसकाभेद खुल गय़ा होँ.? अगरऐसा हुआ तोँ…सोचकर मेरीरूह काँप गई, …!
फिनउस सेक्यूरिटी ऑफीसर केँ शब्दयाद आए, कि सुभह तक घऱ पहुँच जाएगी…,
इसका मतलब वोँ इस वक़्त मुसीबत मे हैं, अवश्य खालिद उसकेसंग मनमानी कररहा होगा…
बहोत देर तक मे यूँही सोच मे डूबेहुए बैठारहा, आख़िर मे मैने एक् कड़ा फ़ैसला लेँ हि लिया,
अब खालिद सें सीधे-2 टकराने कां टाइम आँ हि गय़ा थां.
मैने अपनासभी ज़रूरी समानपॅक करके एक् बॅग मे डाला,
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Update 136
खालिद केँ ऑफीस केँ एक् दो मुख्य-2 सिक्यॉरटी वालों केँ फेस मास्क जौ मैने बनवाके रखे थें वोँ लिए,
उसके सेक्यूरिटी गार्ड कि यूनिफॉर्म पहनकर अपनी बाइक लेकर निकल पड़ा.
हेड क्वॉर्टर सें पहले हि मैने अपनेबॅग औऱ बाइक कों एक् सेफ स्थान देखकर छुपा दिया औऱ मेनगेट सें हटकेवहा कां जयजा लेनेलगा.
हेड क्वॉर्टर मेनरोड सें हटकरकोई 500 मीटर अंदर एक् सिंगल रोड सें कनेक्टेड थां।
थोड़ी देर वहीं छिप्कर बैठा मे आस-पास कि गति विधियों कां जायज़ा लेतारहा,
मगर ऐसी-वैसी कोई हल-चल नहीं दिखी जिससे कोई अनुमान लगाया जासके कि अंदर
कुछ अनहोनी जैसी घटित हुइ होँ।
कोईआधा घंटा मे ऐसे हि पड़ारहा औऱ फिनमेन गेट कि तरफ बढ़ने लगा.
मेन गेट सें लेकररोड केँ दोनोतरफ घने उँचे पेड़ों कि कतार जैसीमेन रोड तक थि,
मे उन्ही पेड़ों कि आड़ लेताहुआ मेनगेट केँ लगभग तक पहुँच गय़ा।
अभि मे औऱ आगेकुछ करता कि तभी मैने एक् कार कि हेड लाइट कों मेनरोड सें इसरोड पर्र मुड़ते देखा.
मे जल्दी ऐसी स्थान छिप गय़ा जहाँ हेडलाइट नाँ पड़सके।
देखते-हि देखते एक् जीप मेरे सामने सें गुज़री, जिसमें केवल एक् ड्राइवर औऱ उसके बाजू मे बैठा एक् सेक्यूरिटी गार्ड हि थां.
जीपमेन गेट पऱ आकर रुकी औऱ उसमें सें वोँ गार्ड निकलकर गेट कि तरफ बढ़ा,
सही मौका देखकर मे उसजीप केँ नीचेसरक गय़ा औऱ दोनो व्हील केँ बीच केँ एक्सल कों पकड़कर चिपक गय़ा.
थोड़ी हि देर मे वोँ जीपगेट सें होकर बिल्डिंग केँ अंदरचली गई, औऱ आगे केँ लॉन सें गुजरती हुईँ मेन बिल्डिंग केँ पोर्च मे जाकर रुकी.
थोड़ी देर मे यूँही उससे चिपका रहा, कुछ मिनटों मे जीपफिन आगे बढ़ी औऱ घूमकर साइड मे बने पार्किंग कि ओरबढ़ गयीँ,.
पार्किंग मे जीप खड़ी होते हि मे उसके नीचे सें निकला अभि वोँ ड्राइवर जौ स्वयं भि एक् सेक्यूरिटी गार्ड हि थां,
वोँ जीप सें उतरकर बिना उसकी चाबी निकाले एक् तरफ कों बने अपने क्वॉर्टर कि तरफबढ़ गय़ा।
इस वक़्त रात केँ 11:30 कां वक़्त हौ रहा थां, चारों तरफ सन्नाटा पसरा हुया थां,
इक्का-दुक्का सेक्यूरिटी गार्ड इधर-उधर खड़ा बीड़ी फूँकरहा थां।
वक्त बर्बाद नाँ करतेहुए मैने अपने कपड़ों मे सें एक् मास्क निकाला जोँ उसके सेक्यूरिटी चीफ कां थां, पहना औऱ ऑफीस केँ मुख्य गेट कि तरफचल दिया.
चीफ कि आवाज़ मे मोबाइल पर्र सुन हि चुका थां, आवाज़ बदलने कि अपनीकला कां उपयोग मे भली भाँति करना जानता थां.
गेट पर्र एक् गार्ड खड़ा थां, मुझे देखते हि वोँ कुछ चोन्का फिन सलाम करतेहुए उसने मेरेलिए गेटखोल दिया.
मैने उसको पुछा, अभि जोँ गार्ड बाहर् सें आया थां वोँ किधर गय़ा, उसने मेरीतरफ आशंका भरी नज़रों सें देखा,
मैनेउसे झिड़कते हुए पुछा- जबाब क्यूं नहीं देते…?
उसने हड़वाड़ाकर अपनी उंगली उठाकर एक् तरफ कों इशारा कर दिया।
मे बिनाकुछ बोलेउस तरफ कों जाने वाली गॅलरी मे बढ़ गय़ा.
गॅलरी केँ दोनोतरफ लाइन सें कमरेबने हुए थें, अभि मे गॅलरी मे कुछ हि दूरचला थां कि सामने सें किसी केँ आने कि आहट सुनाई दि,
मे झट सें एक् पास केँ हि कमरे मे घुस गय़ा औऱ आने वाले कि आहट लेनेलगा.
यहवही गार्ड थां जोँ उसजीप सें आया थां, जैसे हि वोँ मेरे वालेगेट सें आगे बढ़ा मैने पीछे सें निकलकर उसे आवाज़ दि…
मे – आए सुनो…!
वोँ अपनेचीफ कि आवाज़ सुनकर पलटा, मगर अपनानाम मेरे मुँह सें नां सुन वोँ पहले चोन्का फिन बोला – जी जनाब.!
मे – इधर इतनीरात गये कहां सें आँ रहे हौ.?
वोँ बुरीतरह चोन्कते हुए बोला - क्याँ जनाब ! आपको नहींपता मे कहां सें आँ रहा हूं.?
मे उसके प्रश्न पऱ गड़बड़ा गय़ा… मगरफिन बात संभालते हुए बोला – नहीं वोँ मेरे दिमाग़ सें निकल गय़ा थां,
वैसे तुम्हें तोँ बाहर् भेजा थां नाँ, फिनइधर सें कहां सें आँ रहे होँ ?
वोँ – बाहर् सें तौ कब सें लौटआया जनाब ! औऱ खालिद साब कां डिन्नर भि उनके ऑफीस मे पहुंचा दिया, अभि वहीं सें आँ रहा हूं.
मैनेमन हि मन सोचा, तौ यह उसका डिन्नर लेने गय़ा थां, फिन प्रत्यक्ष मे अपने चेहरे पऱ मुस्कान लातेहुए पुछा – अभि खालिद साब क्याँ कररहे हें.?
वोँ हंसते हुए बोला - अरे जनाब ! वोँ अपनीनयी माशुका कों मनाने मे लगे हें, ताकिउसे खानां खिला सकें,
मगरपता नहीं वोँ क्यूं बेसूध सि पड़ी हैं, उनकीबात हि नहींसुन रही, पता नहीं क्यूं इतनी ड्रामेबाज़ी मे लगी हुइ हैं.
मे – वैसे वोँ ठीक तोँ हैं याँ जनाब नें उसेकुछ अधिक हि…। मे अपनीबात अधूरी छोड़कर हँसने कि आक्टिंग करतेहुए बोला.
वोँ- पता नहीं जनाब मुझे तोँ वोँ कुछ बेहोशी जैसी हालत मे लगी.
मैनेकहा ठीक हैं तुम् अपनाकाम करो, कुछ होगा तोँ खबर करता हूं.
वोँ – जी जनाब ! बेहतर औऱ इतना बोलकर वोँ वहा सें चला गय़ा…, उसके जाते हि मैने राहत कि साँसली…
मे कुछदेर वहींसोच मे डूबा खड़ारहा फिनसर कों झटककर उसीतरफ बढ़ गय़ा जिधर सें वोँ आया थां.
आगे जाकर वोँ गॅलरी दोतरफ कों जाती थि, अब मे वहीं खड़ा सोचने लगा कि किधरजाउ.?
सारे कमरे याँ तोँ बंद थें याँ फिन अंधेरे मे डूबेहुए थें.
कुछसोच कर मे एक् तरफ कों बढ़ गय़ा, भाग्यवस थोडा आगे जाते हि मुझे एक् कमरे मे रोशनी कां एहसास हुआ औऱ किसी केँ बड़बड़ाने कि आवाज़ें सुनी.
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Update 137
मे उस कमरे केँ सामने पहुंचा, कमरे केँ शानदार गेट पऱ खालिद केँ नाम कि प्लेट लगी थि, शक कि अबकोई गुंजाइश हि नहीं थि, यहवही रूम थां.
मैने दरवाजे पऱ हाथ रखकर हल्का सां दबाब दिया, दरवाजा खुलाहुआ थां, यह दूसरा सौभाग्य थां मेरेलिए,
मैने धीरे-धीरे सें उसेपुश किया औऱ थोड़ी सि झिरी बनाकर अंदर कां जायज़ा लेनेलगा.
अंदर कां दृश्य देखकर मेरी आँखें फटी कि फटीरह गयीँ, औऱ मारे गुस्से केँ मेरी आँखें औऱ कानलाल होँ गये मेरी मुत्ठियाँ अपने आप् कस गई,,
गुस्से सें मेरा चेहरा भट्टी कि तरह धधकने लगा….!
दरवाजे मे स्थान बनाकर मैने जैसे हि अंदर झाँका, मेरी नज़र सामने सोफे पर्र बेसूध पड़ी शाकीना पर्र पड़ी,
उसकेबदन पर्र कपड़े कां एक् रेशा तक नहीं थां,
स्थान-2 नोचने खसोटने केँ निशान बनेहुए थें जौ उसकेदूध जैसे जिस्म पर्र सॉफ दिखाई देरहे थें.
उसकेबगल कि सोफा चेयर पऱ केवल अंडरवेर मे बैठा खालिद, खाने मे लगाहुआ थां औऱ संग मे शराब भि पीरहा थां,
उसकी हालतबता रही थि कि वोँ इस टाइमकुछ ज्यादा हि नशे मे हैं.
कमरे कां सीनदेख कर मेरी आँखें गुस्से सें जलनेलगी, जी मे आया, कि अभि केँ अभि इस हरम्जादे कों शूटकर दूँ,
मगर मेरे विवेक नें काम किया औऱ सोचा - यह तौ इसकेलिए बहोत आसान सि मौत होगी, औऱ गोली चलते हि, हम् यहींघिर सकते हें…
इसलिये मैने चुपके सें गेट कों खोला, अंदर गय़ा औऱ उसे अंदर सें लॉककर दिया.
लॉक करने सें हल्की सि आवाज़ हुइ तोँ उसने मेरीतरफ मुड़कर देखा, औऱ नशे केँ झोंक मे दहाडा, - ओयेअब क्याँ लेनेआया हैं यहा…जा डिस्टर्ब नां कर। जाकेसो जा.
मे उसकीबात अनसुनी करतेहुए उसकीतरफ बढ़ता रहा, औऱ सामने जाकर खड़ा हौ गय़ा.
वोँ शराब कां ग्लास होठों सें लगाकर चुस्की लेतेहुए बोला-कोई काम थां.?
मे – हां जनाब ! काम तोँ थां, औऱ वोँ भि बहोत ज़रूरी.!
वोँ – क्याँ हैं ? जल्दबोल औऱ निकलयहा सें…
मे - आपकी थोड़ी खातिर तबज्ज़ो करनी थि…!
वोँ नशे कि झोंक मे ठहाका लगाते हुए बोला – हाहाहा… अरे दोस्त तुम् हमारी क्याँ खातिर तबज्जो करोगे, अब तोँ हमें अपनीइस जानेमन कि खातिर करनी हैं.
देखो तौ कैसी बेसूध पड़ी हैं, लगता हैं अबयह सुभह तक होश मे आने वाली नहीं हैं,
हमनेइसे बहोत समझाया मगरयह नहीं मानी, आख़िरकार हमें वोँ करना पड़ा जोँ हम् नहीं करना चाहते थें इसकेसंग,
बहोत कड़कमाल थि साली, कितने दिनों सें सबरकिए हुए थें कि शायद अपनी मर्ज़ी सें हि हमारी बाहों मे आजाए,
मगर नां जानेकिस मिट्टी कि बनी थि यह, हरबार किसी मछलि कि तरहहाथ सें फिसल जाती थि.
आख़िरकार हमेंइसे आयेपॉडिस कां तगड़ा सां डोज देना हि पड़ातब जाकरहाथ आई साली, वैसे हैं बहोत गर्ममाल।
वोँ जैसे जैसेयह सभी बातें बताता जारहा थां, मेरे अंदर केँ गुस्से मे इज़ाफा होताजा रहा थां,
जब मेरी बर्दास्त करने कि हद खत्म हौ गई,, तौ स्वतः हि मेरेगले सें गुर्राहट सि निकली - फिन भि तोँ तुँ इससेहार हि गय़ा नाँ सुअर कि औलाद…!
वोँ मेरे मुँह सें यह शब्द सुनकर चोंक पड़ा, औऱ अपनी लाल-लाल आँखों सें मुझे घूर्ने लगा…!
उसे यह विश्वास हि नहीं हौ रहा थां, कि उसकी सेक्यूरिटी केँ चीफ मे इतनी शराफ़त कहां सें आँ गयीँ,,
कि एक् लड़की केँ उपर हौ रहे अनाचार सें इसकदर दुखी होँ जाए कि अपने हि बॉस सें इसतरह बात करनेलगे…!
उसेदाल मे कुछकला नज़रआने लगा, वोँ लड़खड़ा कर खड़ा होँ गय़ा औऱ लाल -2 नशे सें बोझिल आँखों कों जबदस्ती सें फाड़ते हुए बोला- क.क.क्याँ कहा तूने…?
तुँ इस अदना सि लड़की सें हार गय़ा कुत्ते… एक् मामूली सि लड़की नें तुम कोहरा दिया, रंडी कि औलाद.
वोँ - तूँ नशे मे तोँ नहीं हैं शकील, यह क्याँ बकवास कररहा हैं, जानता नहीं किससे बातकर रहा हैं हरम्खोर… मे तेरीखाल खिचवा सकता हूं।
तूँ ठहर, … तेरी हिम्मत केसे हुईँ मदर्चोद मुझसे इसतरह बात करने कि.
इतना कहकर वोँ लड़खड़ाता हुआ जैसे हि वोँ मेरीतरफ बढ़ा, मैने फ़ौरन उसकागला अपनेहाथ मे जकड लिया औऱ अपनी पूरी ताक़त सें एक् घूँसा उसके थोबडे पऱ जड़ दिया.
खालिद कों इसबात कां तोँ कतयि गुमान नहीं थां, कि मे उसकेसंग ऐसा भि कर सकता हूं…
वोँ बुरीतरह चिंघाड़ता हुआदस फुटदूर जाकर गिरा, उसके मुँह सें खून निकलने लगा.
स्वयं कों संभालकर वोँ उठ खड़ाहुआ औऱ अब वोँ अपने पूरे होशो हवास मे दिखने लगा थां,
अब वोँ समझ चुका थां, कि उसके सेक्यूरिटी चीफ केँ भेष मे मे कोई औऱ हूं, इसलिये अपनी खूनी नज़रों सें मुझे घूरते हुए बोला – कॉन हैं तुँ.?
मे - तूँ मुझे अपनेलिए मौत कां फरिस्ता समझ रंडी कि औलाद…,
तूनेइस मासूम लड़की केँ संग वहशियात दिखाकर अपनीमौत कों दावत दि हैं हराम्जादे.
वोँ - तूँ यहा सें बचके जाएगा तब नां। देखता जा मे तेरा क्याँ हाल करता हूं। औऱ इतनाकह कर उसने अपने टेबल कि तरफ छलान्ग लगा दि,
इससे पहले कि वोँ उसके दराज कों खोलकर उसमें रखे अपने रिवॉल्वर कों निकाल पाता,
मैनेहवा मे जंप लगाते हुए अपने पांव कि ठोकर उसकी टेबल कि दराज पर्र दे मारी।
उसकाहाथ बुरीतरह सें दराज मे दबकररह गय़ा, वोँ दर्द सें चीख पड़ा, उसका वोँ हाथ बुरीतरह ज़ख्मी होँ चुका थां.
फिन मैने उसकागला पकड़कर हवा मे उठाया औऱ पूरी ताक़त सें फर्श पऱ दे मारा,
उसकासर इतनी ज़ोर्से फर्श सें टकराया कि वोँ पीछे सें तरबूज कि तरहखुल गय़ा.
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