mummy aur maira new rishte – New Episode
रात केँ करीब 8:00 बजे थें औऱ संगीता वापसघऱ आँ चुकी थि। संगीता बिल्कुल अपनी मम्मी पर्र गई थि बेहद हि हसीन औऱ मम्मी केँ जैसा हि सफ़ेद शरीर, गुलाबी हॉट, चेहरे पऱ मासूमियत। फिगर कि बात करें तौ नां अधिक मोटी नाँ अधिक पतली। उसकी12वीं कि परीक्षा आने वाली थि इसलिये वो देररात कभी-कभी जागकर कर पढ़ाई भि करती थि। मेरेमन मे उसका ख्याल नहि थां मेरी माँ कां थां। शुरुआत मे कुछ भि नहि थां पर्र रवि केँ संग बातें करने केँ बाद मेरी ख़्वाहिश मेरी मम्मी कि तरफ अधिक बढ़ने लगी। औऱ संग हि संग उसकानशा मेरेमन मस्तिष्क मे छानेलगा.
आजरात कुछऐसा हि हुआ हम् खानां खाने केँ बाद सोनेचले गए। संगीता आज पढ़ाई कररही थि रात कों जाकर। इसीलिए आजरात कुछ भि होना संभव नहि थां। बस पिछले दोदिन कि बात माँ केँ संग बिताए हुएकुछ लम्हों कों याद करके मेरा लन्ड खड़ा हौ रहा थां। मे दोनों पांव केँ बीच अपने लन्ड कों दबाकर औऱ करवट लेकर सोने कि कोशिश कररहा थां पऱ क्योंकि कमरे मे मे औऱ संगीता थें, वो पढ़ाई कररही थि औऱ मे मोबाइल भि चलरहा थां औऱ उसेबीच मे देख भि रहा थां। उसका फ्रॉक घुटने तक उठाहुआ थां। उसकी गोरी पैरों देखकर मां कि पांवयाद आनेलगी.
पर्र मैंने एक् चीज नोटिस किया केँ जिसको घऱ कि औरतें पसन्द आने लगती हैं उसे अधिकतर बाहरी लड़कियों याँ औरतों मे उतनामन नहि लगता -क्याँ ऐसा आपकेसंग भि हुआ हैं याँ केवल मेरेसंग हौ रहा थां? पहले तौ मे मेरे माँ केँ बारे मे ऐसाकभी सोच भि नहि सकता थां कि मे उसके नंगेबदन कों देखने कि ख़्वाहिश रखूंगा याँ महसूस करने कि.
तभीफिन सें मैंने सोचा कि बाहर् जाकर देखता हूं मां क्याँ कररही हैं। बाहर् बाथरूम जाने केँ बहाने गय़ा तोँ देखा कि माँ नीचेसो रही थि औऱ पिताजी ऊपरबेड पर्र। मां कि साड़ी थोड़ी ऊपरउठी हुईँ थि क्योंकि गर्मियों कां दिनचल रहा थां। हौ सकता हैं नींद कि वजह सें उसने ध्यान नहि दिया होगा। हल्के अंधेरे मे उसकी गोरी जांघसाफ दिखरहे थें। सभीकुछ शांत थां बस बाहर् कूलर कि हवा कि आवाज़ थोड़ी तेज थि.
मे चाहता तौ नहि थां पर्र अपने आप् कों रोक भि नहि पाया। मेरामन हुआ कि मे माँ केँ जांघों केँ अंदर देखूं। पर्र केसे, तभी मुझे आइडिया आया। मे फिन सें कमरे मे आया। संगीता नें ध्यान नहि दियामुझ पऱ वो अपनी पढ़ाई मे लगी हुई थि। मैंने धीरे-धीरे सें अपना मोबाइल उठाया। औऱ दरवाजे कों बाहर् जाकर हल्का बंदकर दिया। मोबाइल कों साइलेंट करने केँ बाद उसका कैमरा चालू किया औऱ कैमरे मे वीडियो ऑन करने केँ बाद मोबाइल कों उसकी दोनों जांघों केँ बीच लें जाने कि कोशिश कि जिससे कि अंदर कां कुछ हसीन नजारा दिखसके। वो गहरी नींद मे थि। मेरे मोबाइल कां फ्लैश उसकी जांघों केँ बीच थां। तभीऐसा लगा कि उसेकुछ एहसास हुआ औऱ उसने करवट बदली। मे डर गय़ा औऱ झट सें मोबाइल हटा लिया। पर्र करीब 20 सेकंड कां वीडियो रिकॉर्ड हौ गय़ा। मे फिन मां कों देखा तोँ वो करवट लेकर दोनों पैरों कों दबाकर सोई हुईँ थि। मे येकह सकता हूं कि अभि भि वो गहरी नींद मे हि थि। कोई तरीका नहि थां फिन सें देखने कां। रिकॉर्ड कि हुईँ वीडियो देखने केँ लिए मे जल्दी बाथरूम मे गय़ा औऱ देखा तोँ अंदरये दिखा कि उसनेलाल रंग कि पेंटी पहनी थि। मुझे यकीन नहि होँ रहा थां येवही पेंटी थां जौ एक् दिन पहले मैंने बाथरूम मे देखा थां औऱ उसकी खुशबू भि सुंघा थां। येदेख मेराफिन सें खड़ा होँ गय़ा। मेरा दिमाग़ काम नहि कररहा थां मे सोच मे पड़ गय़ा कि काशये चीज केसे भि बस एक् बार मुझेमिल जाए। मे अपने लन्ड कों मसलने लगा। वीडियो कों बार-बार रिपीट करकेदेख रहा थां। उसकी जांघों केँ अंदर एक् छोटा सां तिल भि थां। येदेख मेरामन तौ हौ रहा थां कि केसे भि उसेचूम लूं औऱ अपने लन्ड कों हिलाया जारहा थां। इतने मे सभीकुछ कंट्रोल केँ बाहर् हौ गय़ा। मेरी आंखों केँ आगे अंधेरा हौ गय़ा औऱ मेरे लन्ड सें वीर्य कि धार निकलरही थि।
बाथरूम सें बाहर् निकाला फिन देखा तौ मां वैसे हि सोरही थि। मे चुपचाप अपने कमरे मे चला गय़ा। संगीता इनसभी चीजों सें अनजान थि, फिनउसे क्याँ पता थां उसका भइया उसकी मम्मी कां दीवाना थां औऱ मेरी भि हिम्मत थोड़ी बड़ी हुईँ थि मां केँ इतने लगभगआने केँ बाद। मुझेलगा कि कल शायदकुछ अच्छा हि होगा कोशिश करता रहूंगा।
संगीता औऱ मे साथी कि तरह थें हम् बातें नॉर्मल हि किया करते थें। वो बोलने मे भि तेज थि। नाँ मे उसकी बातों कां कभी बुरा मानता थां.
तभी संगीता मुझसे बोलि।
संगीता: आपको नींद नहि आँ रही हैं क्याँ?
मे: देखो नाँ। कोशिश तोँ कररहा हूं सोने कि पऱ नहि आँ रही.
संगीता: पर्र ऐसा क्यूं?
मे: पता नहि।
संगीता: क्याँ कॉलेज मे कोई पसन्द आँ गई क्याँ।
मे: नहि तोँ औऱ तुम्हें ऐसा क्यूं लगता हैं।
संगीता: अरे भैया क्याँ पता आपने कहीं मेरेलिए कोई भाभी ढूंढली हौ इसीलिए आपको उसकीयाद मे नींद भि नहि आँ रही होँ। (हंसते हुए मजाक मे)
मे: अरेऐसा कुछ नहि हैं कम सें कम मुझे पढ़ाई तौ पूरीकर लेनेदो। तुम् ढूंढ देना मेरेलिए।
संगीता: हांहां ठीक हैं। बोलकरो फिन सें पढ़ने लगी।
तब मेरीकब आंखलग गई कबसो गय़ा पता नहि चला।
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अगलेदिन सुभह अचानक माँ कि आवाज़.
मां: उठ क्याँ अब पूरादिन सोता हि रहेगा (कड़े शब्दों मे)। ये बोलकर वो चली गई।
मेरीआंख खुली तोँ मैंने देखा कि माँ केँ बाल अभि बिखरे हुए हें औऱ गीले हें। इससेये लगा कि वो अभि-अभि नहाकर आई हैं औऱ उसके चेहरे पर्र एक् अजीब सि नाराजगी कि थि। मुझेयाद आया कि दोदिन बाद मेरा कॉलेज शुरुआत होने वाला हैं औऱ मुझे जानां होगा। क्याँ 2 दिन मे कुछनया हौ पाएगा? मे उठकर बाथरूम मे गय़ा तभी मुझेलगा कि माँ अभि जल्दी यहां सें नहाकर गई हैं। होना होँ कलरात वाली पेंटी उसनेयही खोली होगी। मैंने पूरे बाथरुम मे देखा पर्र मुझे वो कहीं नहि मिली। मे सोचकर रहा थां कि आज उसने क्याँ पहना होगा।
अपना ब्रश करकेनहा करजब ब्रेकफास्ट करनेआया। तौ माँ नें मेरेआगे खानां रख दिया पऱ मुझसे बात नहि कि औऱ मुड़कर चली गई। ये तेवर देखकर मुझे एहसास हुआ कि शायद अभि मूडसही नहि हैं उसका औऱ सही होँ भि तौ केसे आखिर उसके बेटे नें उसकेसंग इतनाकुछ जौ कर दिया। वो पिताजी केँ पास जाकरबैठ गई औऱ दोनों आपस मे बातें करनेलगे। उनकापेर अभि भि चोट केँ वजह सें अच्छा नहि थां इसीलिए उठकर खड़ा भि नहि हौ पारहे थें। वो तौ शुक्र हैं कि उनकी कंपनी अच्छी थि घऱ बैठे भि पेमेंट मिल जाया करता थां पऱ शायद उन्हें ठीक होने मे औऱ वक़्त लगता। माँ बापू कों लेकर परेशान थि। औऱ मुझेये बातें अजीबलग रही थि कि तकलीफ़ तौ ठीक हैं पऱ मेरे बारे मे वो नहि सोचरही हैं। दोपहर कां वक्त थां संगीता भि अपने क्लासेस केँ लिए निकल चुकी थि औऱ पिताजी आरामकर रहे थें। माँ अभि भि उनकेपास हि बैठे हुइ थि। मुझेकुछ समझ मे नहि आँ रहा थां आखिरबात करूं तौ करूं केसे। मे बहाने सें पूछा कि बिस्कुट कहां पऱ हैं।
माँ: ड्रॉ मे होगा रसोई केँ।
मे: (बहाने सें बोला) मुझे नहि मिलरहा आप् आकर बताओ नाँ कहां पर्र हैं।
माँ: रुकआती हूं.
माँ नें वाइटरंग कां ब्लाउज औऱ पिंककलर कि साड़ी पहनी थि, पासआते हैं उनके फूलों जैसी खुशबू नें मेरामन फिन सें तरोताजा कर दिया। मे वक़्त न् बर्बाद हुए जल्दी कहां।
मे: आपसेकुछ बात करना हैं, ऊपर सीढ़ियो वालेघऱ मे चलो नां.
मां: मुझे पहले हि समझ जानां चाहिए थां। तेरेमन मे यहीसभी चलरहा हैं।
मैंने हाथ पकड़ केँ शांत करने कि कोशिश कि। तब तक उसने गुस्से मे हाथझटक दिया।
माँ: हरामी कहीं कां तेरे जैसा लड़का तौ किसी कां नहि होगा। औऱ वहां सें चली गई।
मे मानो अंदर सें डर चुका थां। मेरी क़िस्मत अच्छी थि कि उसने बापू सें कुछ नहि कहा। जोँ मे एक् नई उम्मीद लेकर रुका थां, आजउनसभी पऱ पानीफिन गय़ा। मुझेलगा थां इतनासभी होने केँ बादअब वो मान जाएगी धीरे धीरे। किस्सा पूरी उल्टी थि, वो बिल्कुल भि सजधजकर नहि थि इन चीजों केँ लिए औऱ मैंने देखा कि उसने मुझसे बात भि करनाबंद कर दिया।
जब मेरे कॉलेज जाने कां वक़्त आया तौ मे घऱ सें जाते टाइम अपने बापू कां पेरछुआ मगरमन मे हिचक हिचक थां कि मां कां पांव केसेछू। उसकेसंग तोँ न् जाने मे क्याँ-क्याँ किया हैं। फिन भि हिम्मत करके मे आगे बड़ा उसका पांव छूने केँ लिएमगर मैंने देखा उसने गुस्से सें अपना पांवहटा लिया। पिताजी नें सभी नोटिस नहि किया क्योंकि वो हाल मे थें औऱ मम्मी दरवाजे पर्र खड़ी थि। मे नजर झुकाए चुपचाप कैब मे बैठ गय़ा। स्टेशन कि तरफचला गय़ा।
हॉस्टल पहुंच कर मुझे माँ कि बहोत याद आँ रही थि। औऱ दुख भि होँ रहा थां कि उसने मुझसे बात भि नहि किया वो मुझसे इसकदर नाराज हैं। मैंने हिम्मत करके एक् बारफिन सें उसे मोबाइल लगाया, उसने मेरा मोबाइल नहि उठाया। फिन मैंने व्हाट्सएप पर्र मैसेज भि किया हेलो लिखकर। उसका भि कोई रिप्लाई नहि आया.कुछ तीन-चार दिनबीत चुके थें, मेरामन बिल्कुल भि नहि लगरहा थां। मे बहोत परेशान थां कि क्याँ माँ केँ लिएसभी चीज इतनी तकलीफ़ वाली हैं कि वो अपनी पतिव्रता होने कां पूरा धर्म निभारही हैं। इसका मतलब पोर्न फिल्मों मे औऱ सेक्स किस्सा मे कोई सच्चाई नहि होती। एक् माँ अपने बेटे केँ संग सेक्स करवाने केँ लिएकभी रेडी नहि होँ सकती।
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कुछ दिनों तक ऐसा हि चला। मे सारी उम्मीद खो चुका थां.अचानक एक् दिन माँ कां मैसेज आया व्हाट्सएप पर्र.
मां: हेलो बेटा कैसा हैं।
मेरी खुशी कां तौ ठिकाना हि नहि थां, मैसेज देखकर मुझे इतना तोँ अंदाजा होँ गय़ा कि माँ कि हिम्मत मुझसे डायरेक्ट बात करने कि नहि हैं वो भि मैसेज कररही हैं।
मे: ठीक हूं आप् कैसी हौ।
मां: बस तेरी फिक्र होती हैं। तूँ ठीक तोँ हैं नां।
मे: आप् झूठबोल रही हौ। मे जब वहां सें आया थां तब तौ आपने मेरीतरफ देखा भि नहि थां।
मां: राहुल तुँ जानता हैं इनसभी कि वजह, गलती तेरी थि।
मैंने सोचाअगर उस टॉपिक कों औऱ डिसकस करूंगा तोँ माँ फिन सें नाराज नाँ होँ जाए इसीलिए मैंने बात कों घुमा दिया।
मे: औऱ बापू कां पेर कैसा हैं।
माँ: पहले सें बहुतठीक हैं। देख्ना कोशिश करना अगले महीने छुट्टी लेकर आँ जानां।
मे: क्यूं क्याँ हुआ।
मां: अरे तेरी मौसी कि बेटी नीतू कां विवाह हैं।
मे: औऱ कौन-कौन चलरहा हैं।
मां: देख्ना मुझे औऱ तुझेही चलना होगा। क्योंकि संगीता कां तोँ एग्जाम हैं वो यही रहेगी, तेरे पिताजी कां भि पेरठीक नहि हैं। मे: आप् तौ कहरहे थें उनका पर्र अबठीक हैं।
माँ: अरे मेरा मतलब दर्द आराम हैं पर्र चोट तौ अभि भि वैसा हि हैं उठ नहि पाते हें। दो-तीन दिन कि बात हैं जाकर आँ जाएंगे।
मां कि बातें सुनकर लगरहा थां वो सारी पुरानी बातें भूल चुकी हैं अबनई शुरुआत करना चाहती हैं। औऱ अब मे भि पूरीतरह सें सजधजकर थां इसनई शुरुआत केँ लिए।
मे: हां मे जरूर आऊंगा।
माँ: ठीक हैं अपना ख्याल रखना।
इतने सें हि मेरे कलेजे कों ठंडकपड़ गई औऱ मे सोचना शुरुआत कर दिया.अब मेराहर काम मे मनलगरहा थां। जैसे-जैसे दिन लगभग आँ रहे थें मेरेदिल कि धड़कन तेज हौ रही थि। मुझे मम्मी सें मिलने कां बहोत प्रतीक्षा थां। मे जिसदिन घऱ पहुँचा। उसेदिन मां नें दरवाजा खोला तोँ मैंने देखाठीक वही मासूम चेहरा वही चेहरे कि चमक औऱ हुस्न। जी तौ कररहा थां अपने सीनेलगा लूं।
येबात तौ सभीठीक हैं उसके चेहरे पऱ भि यहीहवा थां कि उसका बेटा अब सुधर चुका हैं। मां कां तौ पता नहि पर्र संगीता मेरेगले सें आकर लिपट गई।
संगीता: भैया इतने दिनों बाद। आप् तौ मुझेमिस भि नहि करते।
मे: ऐसीबात नहि हैं तुम्हें भला केसेभूल सकता हूं।
उसके शरीर कि गर्मी मे महसूस कर सकता थां। उसके मम्मों मेरे सीने सें चिपके हुए थें। मां अंदर मेरा सामान रखरही थि। उसने मुझेगले लगाते हुए नहि देखा संगीता कों। मैंने धीरे-धीरे सें उसकेकमर पऱ अपनेहाथ करउसे अपनी औऱ तेजी सें खींचा औऱ जोर सें गले सें चिपका लिया। उसके शरीर कि गर्माहट सें तन जिस्म मे आगलगरही थि। मैंने नोटिस किया कि मेरे लन्ड मे सनसनाहट सें पैदा होनेलगा। तभी मां लौटकर रूम सें बाहर् आँ रही थि तौ उसके देखने सें पहले मैंने उसे छोड़ दिया.
मां: जल्द सें नहा लेँ औऱ फिन खानां खा लेँ औऱ आरामकर कल सुभह हमें जल्द निकलना होगा।
मे: जी माँ।
मे जैसे बाथरूम मे गय़ा वहां देखा। ब्लैक कलर कि पेंटी टंगी हुइ हैं जिस पऱ सफेदडॉट बनेहुए थें औऱ एक् नीली पेंटी थि। वो पुरानी यादें फिन सें ताजा हौ गई। मे जल्द सें दोनों पेंटी कों अपनेहाथ मे लिया। औऱ ध्यान सें देखा, एक् पेंटी कां साइज दूसरे वाले सें थोडा छोटा थां। मे समझ गय़ा कि इसमें सें छोटी वाली संगीता कि हैं औऱ एक् माँ कि। आज तौ सोने पर्र सुहागा होँ गय़ा। मम्मी औऱ बेहन दोनों कि पेंटी सें एक् संग। मे उसे जैसे अपनानाक केँ पास लें गय़ा क्याँ खुशबू थि। मेरे लन्ड नें एक् सेकंड भि नहि लियाउस खुशबू कों पहचानने मे औऱ जल्दी खड़ा होँ गय़ा। उसे अपनेनाक सें दबाकर मैंने अपने लन्ड कों हिलाना शुरुआत किया.कुछ लम्हा केँ लिए सारी बातें यादआने लगी जैसे माँ केँ होंठ कों चूमना। उसकीलाल पेंटी कों देख्ना औऱ आज अपनी बेहन कों अपनीगले सें लगाना उसके स्तनों कों महसूस करना। लन्ड अपनी पूरीजोर लगारहा थां। मेरेहाथ भि औऱ तेज चलनेलगे औऱ वीर्य कि धार बाथरूम कि दीवारों पऱ गिर गई। मैंने गहरी सांसली औऱ अपने आप् कों सांत किया औऱ नहाने केँ बाद बाहर् निकला।
फिन हम् सभी नें मिलकर संग बैठकर खानां खाया। खानां खाते टाइम मेरा ध्यान अचानक पिताजी कि औऱ गय़ा तोँ मैंने देखा वो हाल मे नहि थें। मैंने जल्दी पूछा।
मे: माँ बापू कहां हैं।
मां: वो तोँ ड्यूटी पऱ गए हें।
मे: आपने मुझे बताया क्यूं नहि।
माँ: क्याँ नहि बताया।
मे: उनकापेर कबसही हुआ।
माँ: अरेबस दोदिन पहले कि बात हैं वो अच्छा महसूस कररहे थें चल सकते थें। तौ उन्होंने कहाघऱ बैठकर क्याँ करूंगा। जानां भि जरूरी हैं ड्यूटी।
मे: तौ क्याँ वो भि विवाह मे आँ रहे हें।
माँ: नहि उन्हें ड्यूटी पर्र जानां रहेगा क्योंकि ऐसे हि बहोत अब्सेंट होँ चुका हैं।
मे निश्चिंत होँ गय़ा। अब केवल मे औऱ मेरी माँ हि संग मे जारहे थें। नीतू केँ घऱ कां मार्ग करीब 3 घंटे कि दूरी पऱ थां तौ मैंने कहा क्यूं नाँ हम् बाइक सें हि चले।
मां: बाइक सें तोँ हम् बहुत परेशान होँ जाएंगे नाँ।
मे: कुछ नहि होगाबस 3 घंटे कां हि तौ मार्ग हैं।
मां: तुम कोकोई दिक्कत तौ नहि होगी नाँ चलाने मे।
मे: नहि मां मुझ पऱ भरोसा रखो। संगीता तुम् भि चलो नाँ।
संगीता: नहि भैया मेरा एग्जाम हैं आप् तौ जानते होँ। नहि तौ मे कहां पीछे रहने वाली हूं इनसभी चीजों मे।
औऱ फिनरात कों बापूघऱ आए।
पिताजी: अरे राहुल तुँ कबआया।
मे: बसआज दोपहर कों पिताजी।
बापू:कल सुभह तुम् दोनों कां टिकट करवादूं जाने केँ लिए। मे: नहि बापू मे औऱ माँ बाइक पर्र जाएंगे।
पिताजी: अरे बाइक सें क्यूं जाओगे मौसम भि तोँ देखोकभी धूप हौ रहा हैं कभी बारिश जैसा मौसम हौ जारहा हैं।
मे: नहि पिताजी चलेगा 3 घंटे कां हि तोँ मार्ग हैं।
पिताजी: ठीक हैं।
अगलेदिन सुभह पिताजी कों घऱ सें जाने केँ बाद। मां औऱ मेरी बारी थि जाने कि। माँ भि तैयार होँ चुकी थि। उसने ब्लैक कलर कां ब्लाउज औऱ मेहरून साड़ी पहनी थि। साड़ी मे उसकीचमक देखते हि बनती थि। जैसेकोई अप्सरा हौ। मां नें एक् कपड़े कां बैग लिया थां हाथ मे।
मे: लाओ मां मुझेदे दो मे सें आगेरख लेता हूं।
माँ: नहि तूँ धीरे-धीरे चलाना मे इसे पकड़कर बैठ जाऊंगी। मे: ओ माँ मेरे होतेहुए आप् क्यूं तकलीफ करती होँ।
मैबैग कों अपनेआगे रखा औऱ मां कों पीछे स्थान दि बैठने केँ लिए।
मे: आप् अच्छे सें तौ बैठ गई होँ नां
मां: (कंधे पऱ हाथ रखतेहुए) हां बेटेचलो।
उसके हाथों केँ गर्माहट सें मेरामन शांत होँ गय़ा। हम् जिस रास्ते सें जारहे थें वो देहात कां मार्ग थां जौ हरतरफ हरियाली थि। रास्ते मे माँ अपनी औऱ अपनी बेहन यानी कि मेरी मौसी कि बातें सुनाया करती थि बचपन केँ। मे भि उसकेहां मे हां मिलारहा थां।
मां: औऱ बता तेरी पढ़ाई कैसीचल रही हैं।
मे: अच्छी चलरही हैं मां।
मां: गलत चीजों पर्र तोँ ध्यान नहि देता हैं नां।
मे: कैसीगलत चीज मां (चौंकते हुए)।
मां: जोँ पिछली बार तूने हरकत कि थि वो सभी कहां सें सीखा थां।
ये सुनते हि मे तौ हक्का-बक्का रह गय़ा। मुझेलगा मां शायदइस बातों कों भूल चुकी हैं।
मां: देख बेटा मे जौ भि बोलरही हूं तेरे भलाई केँ लिएबोल रही हूं। अभि तेरी उम्र पढ़ाई कि हैं। येसभी गलत चीजों कि नहि।
मे भि मौका देखकर झूठबोल दिया।
मे: वो क्याँ हैं नाँ मां मैंने एक् किस्सा मे पढ़ा थां वो सभी। मां: क्याँ।
मे: कि एक् बेटा अपनी माँ कों केसे संतुष्ट करता हैं.
माँ: राहुल काररोक।
मे: क्याँ हुआ मां।
मां: मैंने कहा नां काररोक बेशर्म। तुझेही जरा सि भि लज्जा नहि आती हैं सारीचीज पढ़ते हुए।
मे: आज मे आपसे खुलकर बातें करना चाहता हूं। एक् औऱ मेरी पूरीबात सुनलो औऱ आपको भि जोँ कहना हौ उससे बोलो।
माँ: देख एक् बातसमझ लें। तेरी औऱ मेरेबीच एक् मम्मी बेटे कां संबंध हैं औऱ इस संबंध कों तोड़ना बहोत बड़ापाप होता हैं। मे: पऱ ऐसा क्यूं हैं माँ।
माँ: देख नां तौ समाज इसकी इजाजत देता हैं औऱ नाँ हि कोई माँ।
मम्मी कि आंखों मे मुझे भि थोडा क्रोध नजरआया। मैंने देखा गहरी सांस लेँ रही थि। जिससे कि उसका मम्मों कभीऊपर कभी नीचे हौ रहा थां। मन तौ कररहा थां ब्लाउज खोलकर उसेचूम लूं।
माँ: औऱ कहां सें मिलीऐसी पुस्तक।
मे: वो मे ऑनलाइन पढ़ा थां।
माँ: (गाल पऱ एक् चांटा लगाते हुए)यही सभी पड़ता हैं नालायक। आज केँ बाद मुझेये सभी नहि सुनना हैं। अपनी माँ कि इज्जत नहि कर सकता तुँ अपनी बेहन कि भि नहि करेगा तोँ।
मे: ऐसीबात नहि हैं मां। मुझेमाफ करदो।
माँ: देख बेटा। तेरी माँ हूं इसलिये समझारही हूं। येसभी बातें अपनेमन सें निकाल दे औऱ अपने करियर पऱ ध्यान दें.चल अबदेर हौ जाएगा.
मुझे उनकी बातें तोँ समझ मे आँ गई औऱ मे अपने आप् कों भि शांत किया पऱ प्रश्न ये थां कि आखिरकब तक।
mummy aur maira new rishte - Kahani ab aur interesting hogi
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