♡ एक् नया संसार ♡ (Full Storyd) – New Episode
♡ एक् नया संसार ♡
एपसोड.《 59 》
अब तक,,,,,,,,
"यह तोँ बहोत हि अच्छा किया हैं आपने। "अजय सिंह केँ चेहरे पर्र एकाएक हि रौनक आँ गई___"इसका मतलबयह हुआ कि हम् पूरीतरह सें हारे नहि हें। बल्कि बाज़ी अभि भि हमारे हाॅथ मे हें। "
"बिलकुल। " चौधरी नें मुस्कुरा कर कहा___"बस जासूस केँ मोबाइल आने कि देर हैं। जैसे हि उसका मोबाइल आया औऱ उसने हमें बताया वैसे हि हम् यहाॅ सें चल पड़ेंगे। "
"वाउ चौधरी साहब। "अजय सिंह केँ चेहरे पऱ खुशी कि चमक आँ गई___"मानना पड़ेगा आपको। आपने भि ऐसा कारनामा कररखा हैं जिसके बारे मे वोँ लोगसोच भि नहि सकते हें। "
अजय सिंह कि बात पऱ चौधरी बस मुस्कुरा कररह गय़ा। कुछदेर उन दोनो केँ बीच औऱ भि कुछ बातें हुईं उसकेबाद अजय सिंह चौधरी सें इजाज़त लेकर उसके आवास सें अपने गाॅव हल्दीपुर केँ लिए निकल लिया। चौधरी नें उसे जाने केँ लिए अपनी एक् जीपदे दि थि।
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अबआगे,,,,,,,
आदित्य केँ संगजब मे नीचेआया तौ देखा ड्राइंग रूम मे केशवजी बैठे थें। हम् दोनो कों देखते हि उनके होठों पर्र मुस्कान उभरआई। उसकेबाद उन्होंने मुझसे नीलम केँ बारे मे पूछातथा यह भि कहा कि वोँ स्वयं उसे देख्ना चाहते हें। अतः मे उन्हें अपनेसंग ऊपर नीलम केँ कमरे मे लें गय़ा। कमरे मे पहुॅच कर उन्होंने सबके सामने हि नीलम कों देखा औऱ फिन बड़े प्रेम सें उससे उसकी तबीयत कां पूछा। उनके पूछने पर्र नीलम नें भि बड़ी शालीनता सें अपनी तबीयत केँ बारे मे उन्हें बता दिया। उसकेबाद वोँ कमरे सें बाहर् आँ गए औऱ मेरेसंग हि नीचे आँ गए। नीचेआकर मे आदित्य केँ संग बैठा हि थां कि रितू दिदी भि आँ गईं।
"उस जासूस कां क्याँ हुआ मौसाजी?" नीचेआते हि रितू दिदी नें केशवजी कि तरफ देखते हुए भावहीन स्वर मे पूछा___"क्याँ आप् उसे पकड़ने मे कामयाब हुए?"
"हमारी भाग्य बहोत अच्छी थि रितू बेटा। " केशवजी नें कहा___"जिसके तहत वोँ हमारे हाॅथलग गय़ा। मेरा वोँ व्यक्ति जिसने हमें उसके बारे मे मोबाइल पर्र बताया थां उसकानाम निरंजन वर्मा हैं। उसने बड़ी बहादुरी कां काम किया हैं। उसने मुझे बताया कि अगरउस जासूस कि बाइक केँ अगले पहिये कि हवा न् निकली होती तौ वोँ हमारे हाथ न् लगता। "
"यह आप् क्याँ कहरहे हें मौसाजी?" रितू दिदी केँ संगसंग हम् सभी भि हैरान हौ गए, फिन दिदी नें कहा___"उस जासूस कि बाइक कि वजह सें वोँ हमारे हाॅथलगा हैं?"
रितू कि इसबात पऱ केशवजी नें निरंजन औऱ उस जासूस कि सारीराम कथा बताई। सारीबात सुनने केँ बाद हम् तीनों हि चकितरह गए थें। कुछदेर तक कोईकुछ न् बोला।
"यह तोँ बड़े हि आश्चर्य कि बात हैं मौसाजी। " मैने सोचने वालेभाव सें कहा___"उस जासूस कि बाइक केँ अगले पहिए मे हवा नहि थि इसलिए वोँ उतने वक़्त तक वहाॅ रुकारहा। आपका वोँ व्यक्ति भि वाकई मे बड़ाकाम कां साबित हुआ। उसनेउस जासूस कों पकड़ने मे अपनीजान तक दाॅव पर्र लगा दि। वरनाअगर वोँ जासूस हाॅथ सें निकल जाता तौ यकीनन हमारे लिए बहोत बड़ा संकट हौ सकता थां। "
"बेशक। " केशवजी नें कहा___"अगर उसके बारे मे हमेंपता नं चलता तोँ वोँ हमारा पीछा करता हि रहता औऱ फिनजब उसे तुम् लोगों केँ इस ठिकाने कां पताचल जाता तोँ वो जल्दी हि मंत्री कों सभीकुछ बता देता। उसकेबाद मंत्री क्याँ करता इसका तुम् बखूबी अंदाज़ा लगा सकते होँ। "
"अबइस मंत्री कां खेल ख़त्म करना हि पड़ेगा। " सहसा रितू दिदी नें कठोरभाव सें कहा___"मेरी चेतावनी केँ बावजूद इसने इतना बड़ा दुस्साहस किया औऱ हमारे पीछे किसी जासूस कों भि लगाया। अब तोँ इसका किस्सा ख़त्म करना हि पड़ेगा। बहोत हौ गय़ा अब। "
"मेरा भि यही ख़याल हैं दिदी। " मैने कहा___"कम सें कम इससे इसकीतरफ सें तौ हम् बेफिक्र हौ जाएॅगे औऱ फिनखुल करतथा बेझिझक बड़े पिताजी सें मुकाबला कर सकेंगे। "
"सहीकहा तूने। " रितू दिदी नें कहा___"लेकिन उससे पहले हमेंउस जासूस सें मिलना भि होगा। उसे हम् ऐसे हि नहि छोंड़ सकते हें। उसका भि कोई न् कोई इंतजाम करना पड़ेगा हमें। "
"मेरे ख़याल सें उसे हम् तब तक अपनेपास रखते हें जब तक कि मंत्री कां किस्सा ख़त्म नहि होँ जाता। " सहसा आदित्य कह उठा___"उसके बाद हम् उसे छोंड़ सकते हें। जब मंत्री हि नहि रहेगा तोँ वोँ किसके लिए हमारे पीछेलग कर जासूसी करेगा?"
"आदी कि बात एकदम करेक्ट हैं दिदी। " मैने कहा__"ऐसा हि करना चाहिए हमें। "
"आपका क्याँ कहना हैं मौसाजी?" रितू दिदी नें सहसा केशव कि तरफ देखते हुए कहा___"यह तोँ सच हैं कि हम् उस जासूस कों मौजूदा हालात मे छोंड़ नहि सकते हें औऱ नाँ हि उसेजान सें मारने कां सोच सकते हें। क्योंकि वोँ निर्दोष हैं। उसनेवही किया हैं जोँ एक् जासूस कों करना चाहिए थां। यह उसका पेशा हि हैं, अतः आप् भि अपनीराय दीजिए कि क्याँ कियाजाए?"
"देखो मे तौ एक् हि बात जानता हूॅ बेटा। " केशवजी नें कहा___"कि ऐसेहर उस व्यक्ति कों ख़त्म करदो जिससे हमें किसी प्रकार केँ ख़तरे कां अंदेशा होँ। लेकिन मामला चूॅकि एक् जासूस कां हैं इसलिए उसे समाप्त करना ग़लत होगा। अतः मे भि आदित्य कि बात सें सहमतहूॅ। यानी कि उसेतब तक यहाॅकैद करकेरखा जायजब तक कि मंत्री कां कल्याण नहि हौ जाता। मगर,
"मगर क्याँ मौसाजी?" रितू दिदी केँ माथे पर्र शिकन उभरी।
"मगर मुझे एक् बातसमझ नहि आई। " केशवजी नें सोचने वाले अंदाज़ मे कहा___"औऱ वोँ यह कि जब मंत्री केँ खिलाफ़ तुम्हारे पासऐसा डायनामाइट जैसा सबूत हैं तोँ उसेअब तक छोंड़ क्यूं रखा थां तुमने? जबकि होना तौ यही चाहिए थां कि उसे जल्दी हि कानून कि चपेट मे लें लिया जाता। "
"आपका सोचना बिलकुल सही हैं मौसाजी। " रितू दिदी नें कहा___"लेकिन मंत्री कों अब तक छोंड़े रखने केँ दो कारण थें। पहलायह कि उसे एहसास कराना थां कि जब उसके स्वयं केँ बच्चों केँ संग बहोत बुरा होता हैं तब कैसा महसूस होता हैं? दूसरा कारणयह कि उसके संबंध ऐसेऐसे लोगों सें हें जिनकी पूर्ण जानकारी हमारे पास अभि भि नहि हैं। यह तोँ करीबसभी जानते हें कि वोँ केसे केसे ग़ैर कानूनी धंधा करता हैं लेकिन पुलिस केँ पास उसके खिलाफ़ ऐसेकोई सबूत नहि हें जिसकी वजह सें उसे गिरफ्तार कियाजा सके। मेरेपास भि उन वीडियोज केँ अलावा औऱ कुछ नहि हैं। मे चाहती थि कि यह वाला मामला निपट जाने केँ बाद मंत्री केँ खिलाफ मौजूद उन सबूतों कां पता करूॅगी। यहीवजह थि कि मंत्री केँ मैटर कों इतना लम्बा खींचना पड़ा। लेकिन अबऐसा लगता हैं कि मंत्री कों सबक सिखाना हि पड़ेगा। उसके सामने खुलकर जानां हि पड़ेगा औऱ फिन उसकी ऑखों मे ऑखेंडाल करउसे बताना पड़ेगा कि वोँ हमारा कुछ नहि कर सकता हैं जबकि हम् चाहें तौ उसकाकुछ भि कर सकते हें। "
"ओहआई सि। " केशवजी नें कहा___"तौ यहबात हैं। ठीक हैं फिन, जैसा तुम्हें बेहतर लगे वैसाकरो। लेकिन हाॅ उससे पहलेचलो उस जासूस सें भि तोँ मिललो तुम् लोग। संभव हैं कि उससे भि कोई महत्वपूर्ण जानकारी मिलजाए। "
केशवजी कि इसबात सें हम् सभी सोफों सें उठकर खड़े हौ गए औऱ फिन केशवजी केँ संग हि बाहर् कि तरफचले गए। बाहर् आकर हम् सभी केशवजी कि गाड़ी मे बैठगए। आदित्य केशवजी केँ बगल मे आगे कि सीट पर्र बैठ गय़ा थां जबकि मे औऱ रितू दिदी पिछली सीट पर्र बैठगए थें। हम् सबके बैठते हि केशवजी नें वाहन कों आगे बढ़ा दिया।
करीब पाॅच मिनटबाद हि केशवजी नें वाहन कों एक् घर-मकान केँ पास लेँ जाकर रोंका। गाड़ी केँ रुकते हि हम् सभी गाड़ी सें बाहर् आँ गए। हम् सबकी नज़रउस घर-मकान पर्र पड़ी जिसके सामने केँ पोर्च पऱ एक् लकड़ी कां तखतरखा हुआ थां औऱ उसमेचार साॅवले रंग केँ व्यक्ति बैठकर ताशखेल रहे थें। वाहन कि आवाज़ सें हि उनका ध्यान हमारी तरफ गय़ा थां। जिससे उन चारों नें ताश खेलना बंद करकेतखत सें उतरगए थें।
हम् तीनों केशवजी केँ पीछे पीछे घर-मकान केँ पोर्च मे आँ गए। पोर्च मे रुककर केशवजी नें अपने एक् व्यक्ति सें कहासभी ठीक हैं न्? जवाब मे व्यक्ति नें बड़ेअदब सें हाॅ मे सिर हिलाया। उस व्यक्ति कि हाॅदेख कर केशवजी घर-मकान केँ अंदर कि तरफबढ़ चले। उनकेसंग हम् तीनों भि बढ़चले थें।
यह घर-मकान यूॅ तौ पक्का हि थां लेकिन इसकी हालतदेख करतथा केशवजी कि छविदेख करयही लगता थां कि इस घर-मकान पर्र केशवजी अपने आदमियों कों रखते थें। याँ फिन उनके रहने कि स्थान हि यही थि। हलाॅकि सोचने वालीबात तौ यह भि थि कि केशवजी कां कैरेक्टर ऐसा क्यूं थां कि उनके अंडर मे ऐसेऐसे लोग थें औऱ उनकाहर कहा भि मानते थें? इस बारे मे हम् सबके दिमाग़ मे प्रश्न तोँ उभरा थां लेकिन केशवजी सें इस बारे मे पूछने कां याँ तौ वक़्त हि नहि मिला थां हमें याँ फिन हम् उनकी निजी ज़िंदगी मे कोई हस्ताक्षेप हि नहि करना चाहते थें। हमारे लिएयही बहोत थां कि वोँ हमारी सहायता कररहे थें।
घर-मकान केँ अंदर भि कुछलोग नज़रआए हमें जोँ कि अलगअलग जगहों पऱ इस टाइम खड़ेदिख रहे थें। बाहर् सें अंदरआते हि सबसे पहले एक् छोटा सां हाल थां उसकेबाद दोनोतरफ तीनतीन कमरेबने हुए थें। सामने कि तरफऊपर केँ फ्लोर मे जाने केँ लिए चौड़ी सीढ़ी थि। उस सीढ़ी केँ अगलबगल भि एक् एक् रूम थां। केशवजी केँ संग हम् तीनो सीढ़ी केँ दाहिने साइड वाले कमरे कि तरफबढ़ गए।
केशवजी केँ कहने पऱ हि एक् व्यक्ति नें उस कमरे कां ताला खोला औऱ फिन उसकेबाद दरवाजा भि खोला। यह देखकर हमें समझते देर नं लगी कि केशवजी इस मामले मे बहुत होशियारी सें काम लेँ रहे थें। ख़ैर कमरे केँ अंदर हम् सभी दाखिल हुए तौ बाॅए साइड हि दीवार सें सटकर खड़ेउस जासूस पर्र हमारी नज़र पड़ी। उसके दोनो हाॅथऊपर कि तरफ एक् संग मोटी रस्सी सें बॅधे थें। इतना हि नहि उसकेमुख पर्र एक् टेप भि चिपका हुआ थां ताकि वो चीखे चिल्लाए नं। उसके दोनो हाॅथ तौ ऊपर कि तरफ रस्सी सें बॅधेहुए थें हि संग हि उसके दोनो पांव भि अलगअलग दिशा मे फैलेहुए रस्सी सें बॅधे थें।
यहरूम अंदर सें एकदम खाली थां। जासूस कि स्थित देखकर यह समझना ज़रा भि मुश्किल नहि थां कि केशवजी नें उसका तगड़ा इंतजाम किया थां। उसेइस हालत मे देखकर मे केशवजी कि समझदारी कां कायल होँ गय़ा।
"आपने तोँ मेहमान कां बहोत अच्छे तरीके सें स्वागत कररखा हैं मौसाजी। " मैंने जासूस कि तरफ एक् नज़र डालने केँ बाद केशवजी सें कहा___"ख़ैर कोईबात नहि। इनकेमुह सें ज़रायह टेप तोँ हटाइए। इन महानुभाव कि मनमोहक आवाज़ सुनने कां बहोत दिलकर रहा हैं। "
मेरीबात पऱ केशवजी मुस्कुराए औऱ फिन राणे केँ मुख सें टेप निकाल दिया। टेप केँ हटते हि राणे गहरी गहरी साॅसें लेनेलगा। यद्यपि टेप तोँ केवल उसकेमुख पऱ हि चिपकाया गय़ा थां, साॅस लेने केँ लिए उसकी नाॅक तोँ खुली हि थि।
"हाॅ तौ मिस्टर डिटेक्टिव। " मैनेउस जासूस केँ बिलकुल पासआते हुए कहा___"आप् इज्ज़त सें स्वयं हि सभीकुछ बताएॅगे याँ फिन मुझे आपकेमुख सें कुछ भि उगलवाने केँ लिएकोई दूसरा हथकंडा इस्तेमाल करना पड़ेगा? हलाॅकि मुझे उम्मीद हैं कि आप् स्वयं हि सभीकुछ बता देंगे। क्योंकि आप् जासूस हें औऱ आपकोपता हैं कि ऐसी परिस्थितियों मे क्याँ होता हैं? ख़ैर, मे आपकी जानकारी केँ लिएबता दूॅ कि जिस मंत्री केँ लिए आप् जासूसी कररहे थें वोँ इस प्रदेश कां निहायत हि घटिया ब्यक्ति हैं। ऐसाकोई कुकर्म तथाऐसा कोई जुर्म नहि हैं जोँ वोँ करता न् होँ। यहाॅ तक कि दूसरों कि बहू बेटियों केँ संग ग़लत तोँ करता हि हैं संग हि उनका सौदा भि करता हैं। मे यहसभी बातें आपसेइस लिएबता रहाहूॅ ताकि आपको भि पता होना चाहिए कि आप् जिसके लिए हमारा बेड़ा गर्क करनेचले हें वोँ कैसा इंसान हैं? अपने ज़मीर कों जगाइये जासूस महोदय। जिंदगी मे पैसा रुपया कमाने केँ लिए औऱ भि कई अच्छे रास्ते हें। जासूस कां मतलबयह नहि होता कि आप् किसी केँ लिए भि काम करना शुरुआत करदें। बल्कि उस ब्यक्ति केँ लिएकाम करें जिसे आप् समझते हों कि यह अच्छा ब्यक्ति हैं तथाइसे किसी बुरे इंसान नें सताया हैं। "
मेरीयह बातें सुनकर वोँ जासूस कुछ नं बोला। बस मेरीतरफ देखता रहा। उसके चेहरे पऱ ऐसेभाव उभरआए थें जैसे एकाएक हि वो किन्हीं विचारों केँ आधीन होँ गय़ा हौ। मे कुछदेर तक उसे देखता रहा।
"आपकोपता हैं यहकौन हें?" मैने रितू दिदी कि तरफ इशारा करकेउस जासूस सें कहा___"यह मेरी बड़ी बेहन हें औऱ पुलिस मे इंस्पेक्टर हें। इन्होंने जबयह जानां कि कानूनन यह मंत्री केँ खिलाफ कोई कार्यवाही नहि कर सकती हें तौ इन्होंने कानून कों अपने हाॅथ मे लें लिया। इन्होंने इसबात कि ज़रा भि परवाह नहि कि कि इसकेलिए इन्हें कानून स्वयं कठोर सज़ादे सकता हैं तथाअगर यह मंत्री जैसे राक्षस इंसान केँ पकड़ मे आँ गईं तोँ मंत्री इनका क्याँ हस्रकर सकता हैं। कहने कां मतलबयह कि अपनीजान कों जोखिम मे डालकर इन्होंने मंत्री केँ खिलाफ बिगुल बजाया हुआ हैं। मात्र इसलिए कि इस प्रदेश सें मंत्री दिवाकर चौधरी जैसे लोगों कि गंदगी दूर हौ सकेतथा ऐसे लोगों सें मासूम व निर्दोष जनता कों निजात मिलसके। पैसा रुपया सबकी ज़रूरत हैं जासूस महोदय लेकिन उससेबढ़ कर अपनीजान भि प्यारी होती हैं। हम् सभी सच्चाई कि राह पर्र चलने वाले वोँ इंसान हें जिनके सिर पऱ क़फन बॅधाहुआ हैं। "
"यहसभी तुम् क्याँ बातें सुनारहे हौ मित्र। " सहसा आदित्य नें कहा___"क्याँ तुम् समझते हौ कि तुम्हारी इन बातों सें इस जासूस केँ विचार बदल जाएॅगे। नहि भइया, इन्हें तौ केवल पैसों सें मतलब हें। इन्हें इसबात सें कोई मतलब नहि हैं कि प्रदेश मे आम इंसानों केँ संग क्याँ अत्याचार होँ रहा हैं? मे तोँ कहताहूॅ कि इससेकुछ पूछना हि बेकार हैं। हमारे पास जोँ भि सबूत मंत्री केँ खिलाफ हैं उसी केँ आधार पर्र हम् उसेधर लेंगे। "
"आप् लोग क्याँ जानना चाहते हें मुझसे?" सहसा जासूस गंभीर भाव सें बोल पड़ा___"पूछो, मे सभीकुछ बताने कों रेडीहूॅ। मुझे भि इसबात कां अंदेशा हैं कि मंत्री केँ खिलाफ़ स्वयं पुलिस विभाग गुप्त रूप सें लगाहुआ हैं। मुझेपता हैं कि मंत्री तथा उसके मित्र बहोत हि अपराधी किस्म केँ इंसान हें। तुमने मुझे एहसास करा दिया हैं कि वाकई मे ग़लत ब्यक्तियों कां संगदे रहा थां। तुमने बिलकुल सहीकहा भइया कि जिंदगी मे रुपया हि सभीकुछ नहि होता हैं। "
"तोँ फिन बताइये। " मैनेमन हि मन हैरान होतेहुए कहा___"कि मंत्री नें आपकोकिस किसकाम केँ लिए हमारे पीछे लगाया थां?"
"आप् लोगों नें मंत्री कों तथा उसके साथियों कों इस लायक छोंड़ा हि नहि हैं कि वोँ स्वयं इस मामले मे कोई ऐक्शन लें सके। " जासूस नें कहा___"इस लिए उसनेइस काम केँ लिए मुझे हायर किया। एक् औऱ महत्वपूर्ण बात हैं जौ कि तुम्हारे लिए जानना बेहद ज़रूरी हैं। वोँ बातयह हैं कि मंत्री आपके ताऊ अजय सिंह केँ संग भि मिलाहुआ हैं। मे अजय सिंह केँ हि पीछेलगा थां औऱ उसी कां पीछा करतेहुए मे आजउस स्थान पहुॅचा थां जहाॅ तुम्हारा औऱ अजय सिंह कां आमना सामना होँ रहा थां। मैनेउस सबकी सूचना मोबाइल द्वारा मंत्री कों दि थि। मंत्री कों मैनेकहा भि थां कि वोँ अगर चाहें तौ इस मौके पर्र स्वयं भि आकर तुम् लोगों केँ संगकुछ भि कर सकते हें। मगर मंत्री नें शायदयह सोचकर इसकेलिए बाद मे मनाकर दिया कि संभव हैं कि उस सूरत मे तुम्हारे द्वारा उसके बच्चों कां कुछ अहित हौ जाता। इस लिए उसने मुझसे बसयही कहा कि मे तुम् लोगों केँ पीछेलग कर तुम्हारे ठिकाने कां पता करूॅ। जैसे हि मेरे द्वारा उसे तुम् लोगों केँ ठिकाने कां पताचल जाता वैसे हि वोँ अपने दलबल केँ संग तुम् लोगों केँ ठिकाने पर्र धावाबोल देता। "
हरीश राणे कि बातसुन कर हम् सभी बुरीतरह हैरान रहगए थें। हम् सभीयह जानकर चौंके थें कि अजय सिंह मंत्री सें मिलाहुआ हैं। इसतरफ तोँ हमने सोचा हि नहि थां औऱ यकीनन यह हमारी सबसे बड़ी ग़लती भि थि। ख़ैरअब तौ जासूस द्वारा हमेंइस बात कां पताचल हि चुका थां।
"एक् औऱ बात। "तभी राणे नें फिन कहा___"जब मैने मंत्री सें मोबाइल पर्र बात कि थि तौ यह प्रश्न भि उभरा थां कि संभव हैं कि अजय सिंहउसे धोखादे रहा हौ। क्योंकि उसने मंत्री कों बताए बिना हि तुम् सबको पकड़ने केँ लिए वोँ सभी किया थां। जबकि मंत्री सें हुई दोस्ती केँ अनुसार उसेउस सबके बारे मे मंत्री सें बताना चाहिए थां। इसबात पर्र मंत्री नें कहा थां कि अगरअजय सिंह सचमुच उसे धोखादे रहा हैं तौ वोँ उसे इसकेलिए सज़ा अवश्य देगा। लेकिन अगर उसनेयह सभीयह सोचकर किया हैं कि बाद मे वोँ हमें अपने भतीजे कों तथा अपनी बेटी कों हमारे सामने लेँ आएगा औऱ अपनी दोस्ती कां प्रमाण देगा तोँ यकीनन हम् उसेजेल सें भि छुड़ाएॅगे। मंत्री कि इसबात सें तुम् लोगसमझ सकते हौ कि अजय सिंहजेल सें उसके द्वारा छूट भि सकता हैं। अगरयह कहूॅ तौ भि ग़लत नं होगा कि वोँ अब तक छूट हि गय़ा होगा। "
"ऐसा केसेकह सकते होँ तुम्?" केशवजी नें पूछा।
"सीधी सि बात हैं। " राणे नें कहा___"बात चाहे जोँ भि होँ लेकिन मंत्री एक् बारअजय सिंह सें मिलना अवश्य चाहेगा औऱ मिलकर यह भि जानना चाहेगा कि उसने वोँ सभी कारनामा उसको बिना बताए केसे अंजाम दिया थां? क्याँ इसके पीछे उसकी गद्दारी थि याँ फिनकुछ औऱ? मंत्री कि इसबात पर्र अजय सिंह अवश्य यही कहेगा कि वोँ यहसभी करके अपने भतीजे औऱ अपनी बेटी कों उसके सामने लें आकरउसे सरप्राइज केँ रूप मे तोहफा देना चाहता थां। लेकिन ऐसा हौ न् सका। अजय सिंह कि यहबात सुनकर मंत्री कों भि लगेगा कि अजय सिंह वास्तव मे उसकेलिए यहसभी पाक़ भावना सें करना चाहता थां। अतःयह सोचकर मंत्री उसेजेल सें अवश्य छुड़ाएगा। जिस वक्त मैनेउसे मोबाइल पऱ अजय सिंह कों पुलिस द्वारा लेँ जाने केँ बारे मे बताया थां। उस वक़्त औऱ अब केँ टाइम केँ बीचकई घंटों कां फर्क़ होँ चुका हैं। इसलिए यह संभव हैं कि अब तक मंत्री नें अजय सिंह कों जेल सें छुड़ा हि लिया होगा। "
"हम् भि तोँ यही चाहते हें जासूस महोदय। " मैने मुस्कुराते हुए कहा___"कि वोँ जेल सें छूटकर फिन सें बाहर् आँ जाए औऱ इसीलिए रितू दिदी नें उसकेछूट जाने कां इंतजाम भि कियाहुआ थां। "
"क्याँ मतलब। " हरीश राणे बुरीतरह चौंका___"भला तुम् लोगऐसा क्यूं चाहते हौ? बातकुछ समझ मे नहि आई। यहसभी क्याँ चक्कर हैं?"
"मंत्री कों औऱ अजय सिंह कों अगरजेल मे सड़ाना हि होता। " मैने कहा___"तौ यहकाम तोँ हम् बहोत पहले हि कर चुके होते। मगर ऐसा किया नहि क्योंकि इनके गुनाहों कि सज़ा हम् अपने तरीके सें हि देना चाहते हें। रितू दिदी नें पुलिस कमिश्नर सें जब पुलिस प्रोटेक्शन कि बात कि तभीयह तय होँ गय़ा थां कि अजय सिंह कों सबकेसंग पकड़कर लेँ तौ जाएॅगे मगरउस पर्र कोईकेस नहि बनाया जाएगा। केस नं बनने सें अजय सिंह कां जेल सें छूट जानां आसान हि हौ जानां थां। वरना आप् स्वयं सोचिए जासूस महोदय कि उसने तोँ अपनी हि बेटी कों जान सें मारने कि कोशिश कि थि वोँ भि एसीपी केँ रिवाल्वर सें। उस सूरत मे तौ वोँ लम्बे सें नप सकता थां। एसीपी रमाकान्त शुक्ला तोँ गुस्से मे आकरअजय सिंह पर्र केस बनाने केँ लिए सजधजकर भि होँ गय़ा थां लेकिन कमिश्नर साहब नें इसकेलिए उसेमना कर दिया। वरनाअगर केसबन जाता तौ मंत्री इतनी सहजता सें अजय सिंह कों छुड़ा न् पाता। उसकी पहुॅच कां भि कोईअसर नं होता। क्योंकि एसीपी कोई मामूली ब्यक्ति नहि थां। उसे केन्द्र सें भेजा गय़ा हैं, इसलिए उसकेकाम मे किसी कि भि दखलअंदाज़ी नहि चलती। "
"अगर ऐसीबात हैं। " राणे नें कहा___"तौ फिन वोँ इस सबकेलिए राज़ी केसे होँ गय़ा? मेरे कहने कां मतलबयह हैं कि जैसा कि तुमने कहा कि एसीपी कों केन्द्र सरकार नें भेजा हैं तथा उसकेकाम मे कोई हस्ताक्षेप भि नहि कर सकता तोँ फिनयह केसे हौ गय़ा कि उसनेअजय सिंह पर्र कमिश्नर केँ मनाकर देने पऱ केस हि नहि बनाया? जबकि उसे तोँ इस मामले मे शख्त सें शख्त कार्यवाही हि करनी चाहिए थि। "
"वोँ यहाॅ शख्त कार्यवाही केँ लिए हि आया थां। " रितू दिदी नें हस्ताक्षेप किया___"लेकिन कमिश्नर साहब नें उसे यहाॅ केँ सारे हालातों केँ बारे मे बताया, यह भि कि केसे मे अपने हि माॅ बाप केँ खिलाफ हूॅ औऱ केसे मंत्री कां काम तमाम करने केँ काम पर्र लगी हुइ हूॅ? सारे हालातों पर्र ग़ौर करने केँ बाद वोँ इसकेलिए रेडी होँ हि गय़ा। दूसरी बातयह भि थि कि उसे यहाॅ भेजा हि इसलिए गय़ा हैं कि वोँ मंत्री जैसे लोगों कि गंदगी कों इस प्रदेश सें मिटासके औऱ यहकाम तौ मे कर हि रहीहूॅ। उसे तौ इस प्रदेश कि गंदगी मिटाने सें मतलब हैं फिन चाहे वोँ किसी भि तरीके सें मिटाई जाए। "
"ओह तौ यहबात हैं। " राणे कों जैसेसभी कुछसमझ आँ गय़ा थां, फिन बोला___"लेकिन शुरुआत मे मैने महसूस किया थां कि मैनेजब मंत्री औऱ अजय सिंह केँ एक् होने कि बात बताई तौ तुम् सभीउस बात सें हैरान हौ गए थें। इसका मतलबयह हुआ कि तुम् लोगों कों इसबात कां अंदेशा तक नहि थां कि अजय सिंह औऱ मंत्री आपस मे मिले भि हौ सकते हें?"
"कमिश्नर साहब नें मोबाइल पऱ मुझेयह अवश्य बताया थां। " रितू दिदी नें कहा___"कि मंत्री नें उन्हें मोबाइल किया थां तथा मोबाइल पर्र वोँ ऐसे प्रश्न जवाबकर रहा थां जैसेयह जानना चाहता हौ कि पुलिस गुप्त रूप सें कहीं उसके पीछे तौ नहि लगी हुइ हैं। उसने बातों बातों मे इसबात कों भि पूछा थां कि हल्दीपुर केँ ठाकुर अजय सिंह कों पुलिस पकड़कर लें गई हैं तोँ यहसभी क्याँ चक्कर हैं? उसने कमिश्नर सें घुमा फिराकर यह भि कहा कि सुना हैं कि अजय सिंह कि बेटी पुलिस मे हैं औऱ अपने बाप केँ खिलाफ भि हैं। मंत्री केँ पूछने पऱ कमिश्नर साहब नें यहीकहा कि यहसभी पारिवारिक मामला हैं अतः उन्हें इस बारे मे ज़्यादा पता नहि हैं। कहने कां मतलबयह कि यह तौ समझ मे आया कि मंत्री नें कमिश्नर सें अजय सिंह कां ज़िक्र कियामगर उसकी बातें ऐसी थि कि उससेइस बात कां अंदेशा उससमय मुझे नं होँ पाया थां कि वोँ अजय सिंह सें वास्तव मे मिलाहुआ हि हौ सकता हैं। दूसरी बातयह कि मेरे मुखबिरों नें भि ऐसी किसीबात कां ज़िक्र नहि किया। जबकि मैने तोँ दोनो केँ हि पीछे मुखबिर लगाएहुए थें। "
"कमाल कि बात हैं। " राणे मुस्कराया___"केसे मुखबिर थें जोँ यह भि न् पतालगा सके कि अजय सिंह औऱ मंत्री कब कहाॅ किससे मिलते हें? जैसा कि तुमने बताया कि तुमने इन दोनो केँ पीछे मुखबिर लगाया हुआ थां तौ यह केसे हौ सकता हैं कि तुम्हारे मुखबिरों कों इन दोनो कि गतिविधियों कां पता हि न् चलसके? अजय सिंह केँ पीछेलगा हुआ मुखबिर बड़ी आसानी सें पतालगा सकता थां कि वो कब कहाॅ जाता हैं? यानीअगर वोँ मंत्री सें मिलने उसके आवास पर्र जाता तौ क्याँ यहसभी उस मुखबिर नें अपनी ऑखों सें नहि देखा होता? इसका तौ यही मतलबहुआ कि तुम्हारे मुखबिरों नें अपनाकाम इमानदारी सें किया हि नहि बल्कि तुम्हें धोखे मे हि रखा। "
राणे कि इसबात सें रितू दिदी जल्दी कुछबोल न् सकीं थि। मैने भि हैरानी सें उनकीतरफ देखा थां। रितू दिदी केँ चेहरे पऱ कईतरह केँ भावआए औऱ चले भि गए। सहसा उनके चेहरे पर्र कठोरभाव उभरआए।
"यकीनन ऐसा हि हैं। " फिन उन्होंने गहरी साॅस लेकर कहा___"मेरे मुखबिरों नें अपनाकाम सही सें नहि किया। इसकेलिए उन्हें कठोरदंड अवश्य मिलेगा। दोनोतरफ कि घटनाओं सें इसबात कि तरफ मेरा ध्यान भि नहि गय़ा। दूसरी बात मुझे अपने मुखबिरों सें इसबात कि उम्मीद भि नहि थि कि वोँ कमीने ऐसी लापरवाही करेंगे। "
"चलोकोई बात नहि रितू बेटा। " सहसा केशवजी नें कहा___"माना कि तुम्हारे मुखबिरों नें इसकाम मे थोड़ी नहि बल्कि बहोत हि अधिक लापरवाही दिखाई लेकिन इससे हमें नुकसान तोँ नहि हुआ न्? अतःइस बात कों छोंड़ो औऱ अबयह सोचो कि आगे क्याँ करना हैं?"
"मे भि यह कहना चाहता हूॅ कि। " रितू दिदी केँ बोलने सें पहले हि राणेबोल पड़ा____"अब आप् लोगों कों भि मुझे यहाॅ सें जाने देना चाहिए। आप् लोगों कों मैने पूरी इमानदारी सें सारी बातें सचसचबता दि हें। अतःअब मुझेइस तरह यहाॅकैद करके रखने कां तौ कोई मतलब नहि बनता न्। "
"ज़्यादा होशियारी दिखाने कि कोशिश मतकरो जासूस महोदय। " मैने कहा___"माना कि आपने हमें सारी बातें सचसचबता दि हें। मगर मौजूदा हालात मे इसके बावजूद हम् आपको यहाॅ सें जाने नहि दे सकते। क्योंकि इतना तौ हम् भि सोच सकते हें कि आपनेयह सभीयह सोचकर बता दियाहमे कि सभीकुछ सुनने केँ बाद हमेंयही लगे कि अब आप् हमारे हि हक़ मे हें औऱ हमारा किसी भि तरह कां नुकसान नहि कर सकते हें। इसलिए हम् आपको छोंड़ देंगे। जबकि यहाॅ सें छूटते हि आप् पुनः अपनारंग बदल सकते हें औऱ हमारा काम तमाम करवा सकते हें। इसलिए जासूस महोदय आपको छोंड़ देने कां काम तोँ फिलहाल हम् किसी भि सूरत मे नहि कर सकते। अतः आप् अपने दिमाग़ सें छूटने कां ख़याल निकाल दें। लेकिन हाॅ हम् यह वादा करते हें कि यहाॅ आपकोकोई तक़लीफ नहि होने देंगे औऱ जैसे हि मंत्री कां काम तमाम हौ जाएगा वैसे हि आपको भि यहाॅ सें आज़ाद कर दिया जाएगा। "
"सबसे पहलीबात तौ तुम् मुझे जासूस महोदय कहनाबंद करो। " राणे नें कहा___"मेरा नाम हरीश राणे हैं। अतः मुझे राणेकह कर संबोधित कर सकते हौ। दूसरी बात तुम् बेवजह हि यहशककर रहे होँ कि यहाॅ सें चूटते हि मे ऐसा वैसाकुछ कर दूॅगा। मेरा यकीनकरो यंगमैन, मुझे रियलाइज होँ चुका हैं कि मे जोँ कुछ भि अब तक मंत्री केँ लिएकर रहा थां वोँ उचित नहि थां। मुझेपता हैं कि मंत्री औऱ उसकेसब दोस्त जुर्म व अपराध करने वाले महान पापी हें। इसलिए अब मे उनकेलिए कोईकाम नहि करूॅगा। बल्कि यहाॅ सें छूटने केँ बाद मे वापस अपनेशहर लौट जाऊॅगा। "
"होँ सकता हैं कि आपकी बातें सच हि हों मिस्टर राणे। " मैने कहा___"मगर चूॅकि आप् एक् जासूस हें अतः आप् भि समझ सकते हें कि मौजूदा हालात मे हम् आपको छोंड़ देने कां जोखिम नहि उठा सकते। इस लिए आप् इसकेलिए हमे क्षमा करें औऱ यहीं रहें। "
मेरीबात सुनकर राणे बेबसभाव सें मुझे देखता रह गय़ा। फिन एकाएक हि उसके होठों पऱ मुस्कान उभरआई, बोला___"सही कहते हौ भइया। मे समझ सकताहूॅ कि ऐसे हालात मे तुम् मुझे यकीनन छोंड़ देने कां जोखिम नहि उठा सकते। ख़ैरकोई बात नहि, जैसा तुम्हें अच्छा लगेकरो। औऱ हाॅ मेरीतरफ सें बेस्ट ऑफलक इसकेलिए। "
राणे कि यहबात सुनकर हम् सभी मुस्कुराए औऱ फिन केशवजी केँ इशारे पऱ एक् व्यक्ति नें पुनः राणे केँ मुख मे टेप चिपका दिया। उसकेबाद सब आदमियों कों कुछ ज़रूरी हिदायतें देकर हम् सभी वहाॅ सें बाहर् कि तरफचल पड़े।
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उधरअजय सिंहजब हवेली पहुॅचा तौ साम केँ चारबज चुके थें। अजय सिंह कों प्रतिमा ड्राइंग रूम मे हि बैठी मिली थि। उसके चेहरे सें साफपता चलरहा थां कि वोँ अपने पति केँ लिए कितनी चिंतित व परेशान थि। उसने अपनी वकील साथी अनीता ब्यास सें मोबाइल पऱ बात कि थि। अनीता केँ पूछने पर्र उसने संक्षेप मे कुछ बातें बताई थि उसे। उसकीउस साथी नें उसे आश्वस्त किया थां कि वोँ चिंता न् करे, वोँ उसके पति कों छुड़ाने कि पूरी कोशिश करेगी। उसने प्रतिमा सें कहा थां कि वोँ साम कों उससे मिलने भि आएगी।
इधर अजय सिंह जैसे हि ड्राइंग रूम मे दाखिल हुआतथा प्रतिमा केँ बगल वाले सोफे पऱ बैठा वैसे हि कहींखोई हुइ प्रतिमा कां ध्यान अजय सिंह कि तरफ गय़ा। उसे पहले तौ यकीन नहि हुआ लेकिन फिन एकाएक हि उसके चेहरे पर्र पहले हैरानी केँ भाव उभरे उसकेबाद जल्दी हि खुशी केँ भावों नें उसका मुरझाया हुआ चेहरा ताज़े खिले गुलाब कि मानिन्द खिला दिया।
"ओह अजय तुम् आँ गए। " खुशी सें फूली नं समाती हुईँ प्रतिमा नें मुस्कुराते हुएकहा थां लेकिन जल्दी हि उसके चेहरे पऱ हैरानी व उलझन केँ भाव भि उभरआए, बोलीं___"मगर तुम् वहाॅ सें आँ केसेगए अजय? तुम्हें तोँ पुलिस कां वोँ एसीपी गिरफ्तार करके लेँ गय़ा थां नं? फिन तुम् पुलिस सें छूटकर आँ केसेगए? क्याँ पुलिस नें तुम्हें यूॅ हि छोंड़ दिया याँ फिन तुमने कुछऐसा वैसा किया हैं?"
"मैनेकुछ भि ऐसा वैसा नहि किया हैं प्रतिमा। " अजय सिंह नें सपाट लहजे मे कहा___"बल्कि मुझे मंत्री जी नें पुलिस सें ज़मानत पर्र छुड़ाया हैं। मगर.। "
"मगर क्याँ अजय??" प्रतिमा केँ माॅथे पर्र बल पड़ा।
"यही कि मंत्री कां तोँ नाम हि हैं कि उसने मुझे पुलिस सें छुड़ाया हैं। " अजय सिंह नें सोचने वालेभाव सें कहा___"सच तोँ यह कि पुलिस मुझे स्वयं हि छोंड़ देना चाहती थि। "
"यह.यह क्याँ कहरहे हौ तुम्?" प्रतिमा हैरान___"भला पुलिस तुम्हें क्यूं छोंड़ना चाहेगी? औऱ.औऱऐसा भला तुम् केसेकह सकते हौ?"
"बेवकूफी भरे प्रश्न मतकरो प्रतिमा। " अजय सिंह नें नाराज़गी केँ संग कहा___"साधारण मामला होता तोँ सोचा भि जा सकता थां कि पुलिस नें मामूली बात पर्र पकड़ा औऱ फिन छोंड़ भि दिया। लेकिन यह मामला साधारण नहि थां। मैने एसीपी कां रिवाल्वर छीनकर उसके सामने हि नीलम कों गोली मारी थि। इसलिए इस अपराध केँ लिए तौ मुझे लम्बे सें नप जानां चाहिए थां। मुझ पऱ साफसाफ अटेम्प्ट टू मर्डर कां केस लगता। तुम् अच्छी तरह जानती हौ कि इसकेस केँ तहत मेरा कानून सें छूटना उस सूरत मे तौ नामुमकिन हि थां जबकि उस संगीन अपराध कां चश्मदीद गवाह स्वयं एसीपी हि थां। इतने बड़े अपराध केँ बावजूद वोँ मंत्री मुझे बड़ी आसानी सें छुड़ा लाया। वोँ साला समझता होगा कि यहसभी उसके रुतबे तथा दबदबे कां कमाल हैं जबकि ऐसा हैं नहि। बल्कि सच्चाई यही हैं कि पुलिस स्वयं चाहती थि कि मे सहजता सें छूट जाऊॅ। इसका मतलबयह भि हुआ कि उस संगीन अपराध केँ लिए एसीपी नें मुझ पर्र कोईकेस हि नहि बनाया हैं। "
"बात तोँ तुम्हारी यकीनन सौ पर्शेन्ट सही हैं। " प्रतिमा केँ चेहरे पऱ सोचने वालेभाव उभरे___"लेकिन प्रश्न यह हैं कि पुलिस ऐसा क्यूं चाहेगी कि तुम् उसकी गिरफ्त सें आसानी सें छूटजाओ? दूसरी बात, अगर पुलिस कों तुम्हें इसतरह सहजता सें छोंड़ हि देना थां तोँ उससमय उसने तुम्हें गिरफ्तार हि क्यूं किया थां?"
"कमाल हैं। " अजय सिंह नें हैरानी सें प्रतिमा कि तरफ देखा, फिन बोला___"यह सभी तुम् पूछरही हौ प्रतिमा? जबकि तुम् तोँ छोटी सि छोटीबात कों पकड़कर उलझी हुई बातों कों सुलझाने मे माहिर हौ। "
"हाॅमगर। " प्रतिमा नें कहा___"तब जबमन मे तुम्हारे प्रति ऐसी चिंता नहि होती। हलाॅकि सोच तौ मे अभि भि सकतीहूॅ। लेकिन तुम् स्वयं हि बतादो तौ क्याँ बुराई हैं?"
"यह तौ साबित हौ चुका हैं कि। " अजय सिंह नें कहा___"विराज मुझसे कानूनी रूप सें कोई बदला नहि लेना चाहता। क्योंकि अगरउसे इस तरीके सें लेना हि होता तोँ वोँ यहकाम पहले हि कर लेता। यानी कि मेरे खिलाफ उसकेपास जोँ सामान हैं उसे वोँ पुलिस कों सौंप देता औऱ बता देता कि यहसभी उसके ताऊ यानी कि मेरा हैं। बसखेल ख़त्म। लेकिन उसनेऐसा नहि किया। मतलबसाफ हैं कि वोँ जौ कुछ भि करेगा अपने तरीके सें तथा अपने बलबूते पर्र करेगा। नीलमव सोनम कों यहाॅ सें लेँ जाने वाला वाक्या जब सामने आया तौ उसे बखूबी पता थां कि हम् उसके मंसूबों कों नाकाम करने कि जी तोड़ कोशिश करेंगे। यहसोच कर उसने भि अपने पक्ष कों मजबूत किया। रितू नें उसे सुझाव दिया होगा कि अगर इसके बावजूद उसका पलड़ा कमज़ोर पड़ता हैं तौ उस सूरत मे वोँ पुलिस कां सहारा लेगी। पुलिस फोर्स केँ आँ जाने सें सारा मामला हि उलट जाएगा औऱ फिन वोँ बड़ी आसानी सें नीलमव सोनम कों अपनेसंग लें जाएॅगे औऱ कोईकुछ कर भि नहि पाता। ऐसा हुआ भि। लेकिन उसेयह उम्मीद नहि थि कि इस सबकेबीच नीलम कों मेरे द्वारा गोली भि मार दि जाएगी। उनका मकसद तोँ इतना हि थां कि पुलिस केँ आने केँ आने केँ बादजब मे औऱ मेरे व्यक्ति कुछ नहि कर पाएॅगे तोँ वोँ बड़े धीरे-धीरे नीलमव सोनम कों लेँ जाएॅगे औऱ मेरे माॅथे पऱ एक् औऱ हारव नाकामी कि मुहरलगा जाएॅगे। लेकिन नीलम कों गोली लगने सें मामला थोडा बिगड़ गय़ा। उसेलगा कि सबकेसंग मुझे गिरफ्तार तौ होना हि थां औऱ फिनबाद मुझे छोंड़ हि दिया जानां थां, लेकिन नीलम कों गोलीमार देने सें केसबन जाने वालीबात होँ गई थि। केसबन जाने कि सूरत मे मेरा पुलिस सें छूटना मुश्किल होँ जाता। जौ कि विराज हर्गिज़ भि नहि चाहता थां। तब उसने रितू सें कहा होगा कि वोँ कुछऐसा करे कि मुझ पऱ कोईकेस हि न् बने। उस सूरत मे फिनजब कोई मुझे ज़मानत पर्र छुड़ाने आएगा तोँ मे आसानी सें छूट जाऊॅगा। विराज केँ इस सुझाव कों याँ यूॅ बोलो कि उसकीइस ख़्वाहिश कों रितू नें जल्दी मान लिया होगा औऱ फिन उसनेऐसा हि कोई इंतजाम कर दिया होगा। जिसका नतीजा यह निकला कि बाद मे मंत्री मुझे बड़ी आसानी सें छुड़ाने मे कामयाब होँ गय़ा। दैट्स आल। "
"ओह तोँ यहबात हैं। " प्रतिमा नें कहा___"वैसे कमाल कि बात हैं कि आज तुम्हारा दिमाग़ भि बहुत शार्प साबित हुआ जोँ इतनी बारीकी सें यहसभी सोचा औऱ इस सबकाजूस निकाल कर भि रख दिया। मगर.। "
"अब क्याँ हुआ??"अजय सिंहबोल पड़ा।
"तुमने नीलम कों जान सें मारने कि कोशिश क्यूं कि अजय?" प्रतिमा नें सहसा गंभीर होकर कहा___"उसने तोँ हमारे संगऐसा वैसाकुछ भि नहि किया थां। उस टाइम भि उसने तुमसे उस लहजे मे केवलइसी लिएबात कि क्योंकि तुमने उससेबात हि ऐसे गंदे तरीके सें कि थि। तुम् स्वयं सोचोअजय कि तुमने जीत केँ अहंकार तथा आवेश मे आकर कितना ग़लत ब्यौहार किया थां। सबके सामने तुम्हें अपनी हि बेटी सें उस तरीके सें बात नहि करनी चाहिए थि। क्योंकि इसकाअसर हमारे हि आदमियों पऱ पड़ेगा। वोँ सोचेंगे कि जौ इंसान सबके सामने अपनी हि बेटी केँ संगऐसी अश्लीलता औऱ ऐसी कूरता कर सकता हैं वोँ वास्तव मे कितना घटिया होगा। हाॅ अजय, इससे हमारी हि इमेज ख़राब होती हैं। कोई भि सभ्य लड़कीयह बर्दाश्त नहि कर पाएगी कि सबके सामने उसका हि बाप उससेऐसी अश्लीलता सें बात करकेउसे जलीलव शर्मसार करे। "
"यकीनन सचकहरही होँ तुम्। " अजय सिंह नें गहरी साॅस लेकर कहा___"बाद मे मुझे भि एहसास हुआ कि मुझेऐसा नहि करना चाहिए थां। मगरउस टाइम हालात हि ऐसेबन गए थें कि मे आपे सें बाहर् हौ गय़ा थां। एक् तौ मे उस हरामज़ादे कि बातों सें तथाउसे देखकर पागलहुआ जारहा थां जिसने अब तक मुझे शिकस्त हि दि थि। सालाऐसे ऐसे डाॅयलाग बोलरहा थां कि मेरे अंदरउन डायलाग कों सुनकर उन्हें सहने कि शक्ति हि नहि बची थि। मुझेलग रहा थां कि उस हराम केँ पिल्ले कों केसे भि करके समाप्त करदूॅ औऱ ऐसा होता भि अगर वहाॅ पुलिस फोर्स न् आँ गई होती तोँ। मे अंदर हि अंदर एक् औऱ हारव नाकामी सें पागलव ब्यथित हुआजा रहा थां ऊपर सें मेरी दोनो बेटियों नें सामने आकर जौ कुछकहा उसने मेरे गुस्से कों औऱ भि बढ़ा दिया थां। रहीसही कसर नीलम नें सबके सामने मुझे थप्पड़ मारकर पूरीकर दि थि। बस उसकेबाद मैंने अपनाआपा खो दिया औऱ वोँ सभीकर बैठा। तुम् स्वयं अंदाज़ा लगा सकती होँ प्रतिमा कि उससमय मे किस मानसिक हालत मे रहा होऊॅगा?"
"चलोयह सुनकर अच्छा लगा कि तुम्हें नीलम कों गोली मारने वालीबात पऱ अपनी ग़लती कां एहसास हुआ। " प्रतिमा नें कहा___"लेकिन क्याँ तुम्हारे मन मे यह विचार भि उठा हैं कि तुम्हें एक् बार नीलम कां हालचाल जान लेना चाहिए? कुछ भि होँ आख़िर वोँ हैं तोँ हमारी बेटी हि। "
"नहि प्रतिमा। " अजय सिंह कां चेहरा एकाएक कठोर होँ गय़ा, बोला___"मेरे लिए मेरी दोनो बेटियाॅ अबमर चुकी हें। इस दुनियाॅ मे अब तुम्हारे औऱ हमारे बेटे केँ अलावा मेराकोई नहि हैं। एक् बात औऱ आज केँ बाद तुम् मुझसे उन दोनो केँ बारे मे कोई भि बात नहि करोगी। यह मेरी पहली औऱ आख़िरी वार्निंग हैं। "
"मर्दकभी नहि समझ सकता एक् महिला कि पीड़ा कों। " प्रतिमा नें सहसा भारी स्वर मे कहा___"मगर मुझे तुमसे उम्मीद थि अजय कि तुम् मेरी पीड़ा कों समझोगे। "
"कहना क्याँ चाहती होँ तुम्?" अजय सिंह नें अजीबभाव सें प्रतिमा कि तरफ देखा।
"तुम् जानते होँ अजय कि मे आज भि तुमसे उतना हि प्रेम करतीहूॅ जितना पहले करती थि। " प्रतिमा नें कहा___"औऱ मे जाने कितनी बार तुम्हें अपने बेपनाह प्रेम कां सबूत भि दे चुकीहूॅ। तुम्हारे मात्र एक् इशारे पर्र मे पराए मर्द केँ नीचे खुशी खुशीलेट गई। कभी इसकेलिए तुमसे शिकायत नहि कि औऱ नाँ हि तुमसे नाराज़ हुईँ। तुम्हारी हर खुशी मे मैने अपनी खुशी देखी। तुम्हारी तरह सबकेलिए कठोर भि बन गई। मगर मे एक् महिला केँ संगसंग एक् माॅ भि हूॅअजय। औलाद चाहे जैसी भि होँ वोँ अपनीमाॅ केँ लिए सबसे खूबसूरत व सबसे अनमोल होती हैं। मुझेअब तक इतनी अधिक परेशानी नहि हुइ थि लेकिन इस हादसे सें हुईँ हैं। मे मानती हूॅ कि मेरी दोनो बेटियों नें हमारे खिलाफ जाकर ग़लत किया हैं मगरजब यह सोचती हूॅ कि उन दोनो नें ऐसा क्यूं कियातब इस क्यूं केँ जवाब कों सोचकर हि दिलदहल जाता हैं। आख़िर अपने सामने तौ इस सच्चाई कों हमें भि मानना हि पड़ेगा न् कि हमने अपनी हि बेटियों केँ संगतथा बाॅकी सबकेसंग ग़लत सोचा औऱ ग़लत किया भि। "
"इनसभी बातों कों कहने कां क्याँ मतलब हैं?" अजय सिंह नें कहा___"औऱ.औऱ आज अचानक यह बातें हि क्यूं? नहि प्रतिमा, अबइनसभी बातों कों सोचने कां कोई मतलब नहि हैं औऱ सोचना भि नहि। क्योंकि अबबात बहोत आगे निकल चुकी हैं। अब तौ इसका फैसला दो पक्षों मे सें किसी एक् पक्ष केँ समाप्त होँ जाने पऱ हि होगा। उसके पहले तौ कुछ हौ हि नहि सकता। इसके पहले तोँ यह थां कि मैंने यहसभी अपने पत्नि बच्चों केँ लिए किया लेकिन अबयह भि हैं कि जिन चीज़ों कि ख्वाहिश थि उसेहर हाल मे पूरा करना हैं। अगर मेरे द्वारा वोँ सभी बरबाद हुए हें तोँ उनके द्वारा मेरा भि तोँ बहोत कुछ नुकसान हुआ। इस लिएअब ऐसी बातें अपने ज़हन मे मतलाओ। ख़ैर छोंड़ो, मुझे भि ज़रा फ्रेश होना हैं। एक् बात औऱ, चिंता कि कोईबात नहि हैं। विराज भले हि मुझे शिकस्त देकरचला गय़ा हैं मगर बहोत जल्द उसका भि किस्सा समाप्त होने वाला हैं। क्योंकि मंत्री नें उसके पीछे जासूस लगाया हुआ हैं। वोँ जासूस बहोत जल्द उसके ठिकाने कां पता मंत्री जी कों देगा उसकेबाद मंत्री विराज केँ ठिकाने पऱ धावाबोल देगा। उस साले विराज केँ संगसंग तुम्हारी दोनो बेटियों कां भि खेल समाप्त होँ जाएगा। "
यहसभी कहने केँ बादअजय सिंहउठा औऱ अंदर कमरे कि तरफबढ़ गय़ा। जबकि उसकी बातें सुनने केँ बाद प्रतिमा पहले तौ हैरान हुई फिन सामान्य हौ कर बैठीरही। चेहरे पऱ कईतरह केँ भावआते जातेरहे।
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उससमय रात केँ दोबजरहे थें।
गुनगुन स्थित मंत्री दिवाकर चौधरी केँ बॅगले केँ पिछले भाग पऱ जहाॅ कि अशोकव देवदार जैसे पेड़लगे हुए थें दो कालेसाए अॅधेरे मे छिपे खड़े थें। दोनो केँ हि जिस्मों पऱ काला स्याह लबादा थां। यहाॅ तक कि दोनो केँ चेहरे तथा हाॅथ तक काले कपड़ों सें ढॅकेहुए थें। चेहरे वसिर पर्र चढ़े काले मास्क सें मात्र उनकी ऑखें हि झाॅकरही थि याँ फिनयह भि कि जब वोँ दोनोबात करने केँ लिएमुह खोलते तौ उनके दाॅतचमक उठते थें। कहने कां मतलबयह कि वोँ दोनो हि सिर सें लेकर पाॅव तक काले लेकिन चुस्त दुरुस्त कपड़ों सें ढॅकेहुए थें।
बॅगले केँ चारोतरफ बाउण्ड्री वाल थि जिसमें थोड़ी थोड़ी दूरी पर्र रोशनी केँ लिए मध्यम साइज केँ एलईडी बल्बलगे हुए थें। बाउण्ड्री वाल केँ अंदरतथा बाहर् दोनोतरफ हाॅथों मे गनलिए गार्ड्स भि खड़े नज़र आँ रहे थें। रात केँ इतने वक्त भि वोँ सभी मुस्तैदी सें खड़े थें। उनसब केँ जिस्मों पर्र भि काले हि कपड़े थें तथासिर पर्र कालीकैप थि।
बॅगले कां मुख्य दरवाजा जौ कि खालिश स्टील कां हि थां। उस दरवाजे केँ पास भि दोनोतरफ गनमैन तैनात थें। ख़ैर हम् बातकर रहे थें उनदो रहस्यमय सायों कि। यह दोनो हि साए क़रीब दस मिनट सें उन पेड़ों केँ पास अॅधेरे मे छिपे खड़े थें। बारहफीट ऊॅची बाउण्ड्री वाल कों दोनो नें बड़ी हि दक्षता सें लाॅघ लिया थां। जिसके लिए उन्हें रस्सी कि सहायता लेनी पड़ी थि। उनकी चारो ऑखें बड़ी बारीकी सें चारोतरफ कां अध्ययन कररही थीं। दोनो नें एक् बातनोट कि कि जितने भि गनमैन वहाॅ तैनात थें वोँ सभी अपनी स्थान पऱ हि कायम थें। यानी वोँ सभी अपनी पोजीशन नहि बदलते थें। मात्र दो हि ऐसे गनमैन थें जौ हर पाॅच मिनट मे इसतरफ आते थें औऱ फिनइधर उधर सरसरी सि नज़रडाल कर वापसलौट जाते थें।
बाउण्ड्री वाल सें बॅगले कि इमारत कि दूरी करीबबीस फुट थि। नीचे ज़मीन पऱ चारोतरफ विदेशी घाॅसउगी हुई थि। बाउण्ड्री वाल कि तरफ हि यह सारे पेड़लगे हुए थें। हलाॅकि बीचबीच मे ऐसे छोटे छोटे पौधे भि लगेहुए थें जोँ अक्सर बाग़ों कि शोभा बढ़ाने केँ उपयोग मे आते थें। लेकिन यह पौधेदो तरफ हि दिखरहे थें। सामने कि तरफ विदेशी घाॅस तोँ थि हि संग हि बीचोबीच सफेद मारबल लगाहुआ थां जोँ कि मुख्य दरवाजे तक थां।
इसबार जब वोँ दोनो गनमैन आकर वापस लौटे तौ उन दोनो सायों कि नज़रें आपस मे मिलीं औऱ फिन दोनो हि बारी बारी पेड़ केँ पास सें निकलकर बड़ी तेज़ी सें इमारत कि दीवार कि तरफउस हिस्से कि तरफ बढ़े जहाॅ पर्र करीब-करीब पंद्रह फुट कि ऊॅचाई पऱ एक् शीशे कि खिड़की थि तथाउस खिड़की केँ सामने हि छोटी सि बालकनी थि। खिड़की पर्र देखने सें ऐसा प्रतीत होता थां जैसे अंदर अॅधेरा होँ। बालकनी मे भि स्टील कि रेलिंग लगी हुईँ थि। यह हिस्सा बॅगले केँ बाएॅ साइड थां।
बालकनी केँ नीचे पहुॅचते हि एक् साए नें जल्दी हि अपने हाॅथ मे ली हुई रस्सी कों एक् हाॅथ सें गोलगोल घुमाया औऱ फिन तेज़ी सें ऊपर कि तरफ उछाल दिया। रस्सी बड़ेवेग सें लहराती हुईँ ऊपर कि तरफ गई औऱ रेलिंग केँ ऊपरीभाग सें ऊपरउठ कर वापस नीचे कि तरफआने कों हुईँ तौ वोँ रेलिंग केँ दूसरे हिस्से सें पऱ फॅस गई। हलाॅकि रस्सी केँ छोर पर्र लगे लोहे केँ मामूली सें राॅड सें आवाज़ हुई लेकिन वोँ आवाज़ बहोत धीमी हुइ थि। क्योंकि वोँ राॅड स्टील मे लगने केँ संग हि नीचे सें ऊपर कि तरफउठा तौ वोँ बीच सें निकलकर नीचे दीवार पऱ टकरा गय़ा थां।
"जल्दकरो। " दूसरे साए नें धीमी आवाज़ मे उस पहलेसाए सें कहा जिसने रस्सी कों ऊपर बालकनी कि तरफ उछाला थां, बोला___"हमें पाॅच मिनट सें पहलेऊपर पहुॅचना होगा। वरना वोँ दोनो गनमैन फिन सें इधर आँ जाएॅगे। "
"बस होँ हि गय़ा हैं। " पहलेसाए नें ऊपर देखते हुए अपने एक् हाॅथ कों हल्का सां झटका दिया। परिणामस्वरूप दीवार केँ पास हि झूलरहा वोँ मामूली सां राॅड तेज़ी सें नीचे सरका औऱ कुछ हि पलों मे पहले वालेसाए केँ हाॅथ मे आँ गय़ा। राॅड केँ हाॅथ मे आते हि उसने दूसरे साए कि तरफदेख कर बोला___"गो। "
पहलेसाए कि बात सुनते हि दूसरा साया तेज़ी सें आगे बढ़ा औऱ रस्सी केँ दोनो भागों कों पकड़कर पहलेउसे हल्का सां अपनीतरफ खींचा। जैसेचेक कररहा हौ कि सभीठीक हैं कि नहि। उसकेबाद वोँ दोनों हाॅथों सें रस्सी कों थोडा औऱ ऊपर सें पकड़ा औऱ फिनझूल गय़ा। कुछ हि पलों मे वोँ रस्सी मे झूलता हुआऊपर बालकनी केँ पास पहुॅच गय़ा। नीचे खड़ा पहला साया चारोतरफ देखरहा थां। तभीऊपर पहुॅच गए साये नें रस्सी कों झटका दिया तौ नीचे खड़ेसाए नें उसकीतरफ देखा। ऊपर पहुॅच चुकेसाए नें हाॅथ केँ इशारे सें उसेऊपर आने कों कहा।
उसका इशारा मिलते हि पहला वाला साया भि रस्सी कों पकड़कर ऊपर झूलते हुएकुछ हि पलों मे पहुॅच गय़ा। उसके पहुॅचते हि दूसरे साए नें रस्सी कों ऊपर खींच लिया। तभी पहले वालेसाए नें नीचे देखा, वोँ दोनोगन मैनइसी तरफ आँ रहे थें। यहदेख कर दोनोसाए वहीं बालकनी पऱ बैठकर छिपगए। थोड़ी हि देर मे उन्होंने देखा कि वोँ दोनोगन मैन वापसजा रहे हें तौ यह दोनो भि उठगए।
"चलो अबकाम पऱ लगजाओ। " दूसरे साए नें धीमी आवाज़ मे कहा___"लेकिन सावधानी सें। "
"जौ हुकुम। " पहलेसाए नें अदब सें सिर कों हल्का सां खम करतेहुए धीमी आवाज़ मे कहा।
पहले वालेसाए नें पलटकर खिड़की कों देखा। उस खिड़की पऱ शीशालगा हुआ थां तथादो पल्लों कि खिड़की थि। पहलेसाए नें खिड़की मे हाॅथलगा करउसे अंदर कि तरफ हल्के सें पुश किया तोँ कुछ नं हुआ। मतलबसाफ थां खिड़की केँ दोनो पल्ले अंदर सें बंद थें।
"यह अंदर सें बंद हैं। " पहले वालेसाए नें पलटकर दूसरे साए सें कहा___"शुकर हैं कि हम् काॅच काटने वाला हीरा लेकरआए थें, लाओउसे। "
"ऐसेकाम केँ लिए। " दूसरे साए नें धीरे-धीरे सें कहा___"ऐसी चीज़ कि ज़रूरत तोँ पड़ती हि हैं। "
दूसरे साए नें कहा औऱ अपने काले लबादे सें हीरा निकाल कर पहले वालेसाए केँ हाथ मे दे दिया। हीरा लेकर पहला साया वापस मुड़ा औऱ दाहिने पल्ले मे एक् हाॅथजमा कर हीरे सें पल्ले पऱ लगे शीशे कों खास तरीके सें काटना शुरुआत कर दिया। उसके दूसरे हाॅथ मे एक् अजीब सि चीज़ थि जोँ कि शीशे सें हि चिपकी हुई थि। कुछ हि देर मे शीशे कां एक् आयताकार टुकड़ा कट गय़ा। पहलेसाए नें अपने दूसरे हाॅथ कों अपनीतरफ बहोत हि सावधानी सें खींचा। नतीजा यहहुआ कि वोँ कटाहुआ टुकड़ा उस अजीब सि चीज़ सें चिपका हुआ अपनी स्थान सें बाहर् आँ गय़ा।
अभि पहला सायाउस टुकड़े कों खींचा हि थां कि दूसरे साए नें धीरे-धीरे सें कहा कि जल्द सें लेकिन सम्हल करबैठ जाओ, क्योंकि नीचे वोँ दोनोगन मैनइस तरफ वापस आँ गए हें। अगर हम् दोनो बालकनी मे खड़े रहेंगे तोँ संभव हैं कि वोँ ऊपर देखें औऱ फिन उनकी नज़र हम् दोनो पऱ पड़जाए। साये कि बातसुन कर दोनो हि वहीं पर्र दुबककर बैठगए थें। ख़ैरकुछ हि देरबाद जब वोँ दोनोगन मैन वापसचले गए तौ यह दोनोसाए भि उठकर खड़े हौ गए।
पहले वालेसाए नें काॅच कां वोँ टुकड़ा बैठे टाइम हि बालकनी मे एक् तरफरख दिया थां। अतःअब उसने खिड़की केँ कटेहुए हिस्से मे अपना दाहिना हाॅथ सावधानी सें डाला औऱ फिन अंदर सें हि नीचे कि तरफ लाकर उसने खिड़की कि कुण्डी कों तलाशा औऱ उसेऊपर उठाकर खोल दिया। उसकेबाद उसने अंदर सें हि दूसरे पल्ले कि कुण्डी कों भि खोल दिया। साये कों अंदर कि तरफ पर्दा लगा होने कां भि पताचला। ख़ैर, अपना हाॅथ सावधानी सें बाहर् निकाल कर उसने खिड़की केँ दोनो पल्लों कों अंदर कि तरफपुश किया तोँ हल्की सि आवाज़ हुई लेकिन दोनो हि पल्ले अंदर कि तरफ खुले नं। पहले साये कों समझते देर न् लगी कि पल्लों केँ अंदर कि तरफऊपर भि कुण्डियाॅ हें जौ कि बंद हें। अतःसाए नें फिन सें उसीकटे हुएभाग सें अंदरहाथ डाला औऱ फिनऊपर हाॅथ करकेऊपर कि कुण्डी कों नीचे कि तरफ हल्के सें खिसका दिया। ऐसा हि उसने दूसरे पल्ले पर्र भि किया।
थोड़ी हि देर मे खिड़की केँ दोनो पल्ले अंदर कि तरफपुश किये जाने सें खुलते चलेगए। यहदेख कर दोनो सायों केँ होठों पर्र मुस्कान उभरआई। जैसा कि पहले हि बताया जा चुका हैं कि खिड़की केँ अंदरऐसा प्रतीत होँ रहा थां जैसे कि अॅधेरा थां। हलाॅकि खिड़की मे अंदर कि तरफ पर्दे लगे होने कि वजह सें भि अॅधेरे कां आभास होँ सकता थां। अतः पहलेसाए नें पल्ले खोलने केँ बाद अॅधेरे मे डूबे पड़े कमरे कि तरफ अपनेकान लगा दिया। कदाचित इसलिए कि वोँ अंदर कि किसी भि चीज़ कि आहट कों सुन सकें। लेकिन अंदर सें कोई भि बारीक सें बारीक आवाज़ नहि आँ रही थि। मतलबसाफ थां कि रूम पूरीतरह खाली थां। उसमें किसी भि व्यक्ति कां कोई वजूद नहि थां।
पहलेसाए नें एक् छोटी सि पेंसिल टार्च अपने लबादे सें निकाली औऱ कमरे केँ अंदर कि तरफ एक् हाॅथ सें पर्दे कों हटाकर उसे रौशन किया। पेंसिल टार्च केँ प्रकाश कां हल्का सां फोकस कमरे केँ अंदर कि हर चीज़ पर्र साए केँ द्वारा हाॅथ सें घुमाने पर्र घूमने लगा। कमरे केँ बाएॅतरफ हि एक् आलीशान बेड नज़रआया। उसकेकुछ हि फाॅसले पऱ दो सोफेरखे नज़रआए। खिड़की केँ नीचे करीबतीन फुट कि दूरी पऱ कमरे कां फर्स थां जिसमें बेहतरीन टाइल्स लगी हुई नज़रआई। सारी चीज़ों कों देखने केँ बाद पहला साया आहिस्ता पर्दा हटाकर खिड़की केँ रास्ते कमरे मे आँ गय़ा। उसकेबाद दूसरा साया भि आँ गय़ा।
कमरे मे आते हि दूसरे साए नें खिड़की केँ दोनो पल्ले बंद किये औऱ फिन सावधानी सें पर्दा खींच दिया। उसकेबाद पेंसिल टार्च कि सहायता सें हि हर स्थान कों बारीकी सें देखने लगे। दीवार पर्र लगी पेंटिंग्स सें हि पताचला कि यहरूम मंत्री केँ बेटे सूरज चौधरी कां हैं। दीवार पऱ कई स्थान उसकी स्वयं कि भि फोटोलगी हुइ थि संग हि कई स्थान ऐसी पेंटिंग्स भि लगी हुईँ थि जौ कि लड़कियों व औरतों कि नग्नता कों उजागर कररही थि।
"ज़राचेक करो कि कमरे कां दरवाजा अनलाॅक हैं याँ नहि। " दूसरे साए नें धीरे-धीरे सें कहा___"औऱ अगर अनलाॅक हैं तोँ तुम् यहाॅ सें उस कमरे मे जाने कि कोशिश करो जौ रूम स्वयं मंत्री कां होँ। वहाॅजा कर बारीकी सें हर चीज़ कों देखो। इस समय मंत्री अपनेइस आवास पऱ नहि हैं। किसी ज़रूरी काम सें बाहर् गय़ा हुआ हैं। फिन भि ज़रा सावधानी सें काम लेना। अब जाओ। "
दूसरे साए कि बातसुन कर पहला साया कमरे केँ दरवाजे कि तरफ बढ़ा। दरवाजे केँ पास पहुॅच कर उसने दरवाजे केँ हैण्डल कों पकड़कर घुमाया मगर वो घूमा नहि। इसका मतलबरूम बाहर् सें लाॅक थां। बात भि जायज़ थि, मंत्री कां बेटा तोँ यहाॅ थां नहि इसलिए मंत्री नें याँ फिन उसके किसी कर्मचारी नें इस कमरे कों बाहर् सें लाॅककर दिया होगा। ख़ैर, दरवाजे कों लाॅकजान कर वोँ सायापलट कर दूसरे साए केँ पासआया औऱ उसे बताया कि दरवाजा बाहर् सें लाॅक हैं। उसकीबात सुनकर दूसरे साए नें अपने लबादे सें निकाल उसके हाॅथ मे कोई चीज़ दि।
पहलेसाए नें पेंसिल टार्च कि रोशनी मे उस चीज़ कों देखा तोँ अनायास हि उसके होठों पऱ मुस्कान उभरआई। दरअसल वोँ चीज़ "मास्टर कि" थि। फिन क्याँ थां, मास्टर कि लेकर पहला साया जल्दी दरवाजे केँ पास गय़ा औऱ दरवाजे पऱ लगे हैण्डिल केँ कीहोल मे उस मास्टर कि कों डाला औऱ विपरीत दिशा मे घुमा दिया। नतीजा यहहुआ कि दरवाजा अनलाॅक हौ गय़ा। यहदेख कर वोँ साया एक् बारफिन मुस्कुराया औऱ फिन दरवाजे कों अपनीतरफ सावधानी सें खींचा। दरवाज़े केँ बाहर् गैलरी थि जोँ कि एलईडी ट्यूब लाइटतथा बल्बों केँ प्रकाश सें रौशन थि।
बाहर् बल्बों कां प्रकाश देखकर साया अपनी स्थान रुक गय़ा। कदाचित वोँ सोचने लगा थां कि रोशनी मे वोँ आगे केसे बढ़े? लेकिन शायद बढ़ना ज़रूरी थां। अतः उसने दरवाजे सें अपनासिर बाहर् निकाल कर गैलरी केँ दोनों तरफ देखा। गैलरी पूरीतरह सुनसान पड़ी थि। हलाॅकि गैलरी बहोत लम्बी नहि थि, बल्कि कुछ हि दूरी पऱ वोँ विपरीत दिशा मे मुड़ गई थि। साये नें कुछदेर सोचने मे लगाया औऱ फिन बड़ी सावधानी सें दरवाजे सें बाहर् गैलरी मे आँ गय़ा। सनसान गैलरी पऱ सावधानी सें चलतेहुए वोँ मोड़ तक आँ गय़ा। मोड़ पर्र ठिठककर उसने दूसरी तरफ कि किसी भि आहट कों सुनने केँ लिए दीवार केँ किनारे कि तरफ अपनाकान सटा दिया।
थोड़ी हि देर मे वो अपनी स्थान सें हिला औऱ गैलरी केँ मोड़ पऱ मुड़ गय़ा। लेकिन थोड़ी हि दूर जाने केँ बादउसे वापस लौटना पड़ा क्योंकि आगे गैलरी खत्म थि। आगेकोई मार्ग नहि थां। साये कों समझ आँ गय़ा कि वो दूसरी तरफ आँ गय़ा हैं। तभी तोँ उसे यहाॅ पर्र कहींकोई दूसरे कमरे कां दरवाजा नहि दिखा थां। ख़ैर, वापसउसी स्थान आकर वो दूसरी साइड वाली गैलरी कि तरफबढ़ चला। आठ दसकदम चलने केँ बाद हि उसे अंदर कि तरफ वाली बालकनी कि रेलिंग नज़रआई। रेलिंग केँ पास पहुॅच कर उसने देखा कि बालकनी दोनोतरफ थि करीब-करीब बीसकदम कि दूरी पऱ उसे नीचे जाने केँ लिए सीढ़ियाॅ नज़रआई। रेलिंग केँ दूसरी तरफ नीचे बहुत बड़ा ड्राइंगरूम नज़रआया। अपनेजगह पर्र खड़ा सायाकुछ देर तक कुछ सोचता रहाफिन वो बाएॅ साइड कि तरफबढ़ चला। कुछ हि दूरी पऱ उसे एक् औऱ गैलरी नज़रआई। उसने गैलरी कि तरफ देखा तौ उसे एक् कमरे कां दरवाजा नज़रआया। द्वार (दरवाज़ा) देखकर वो तेज़ी सें उसकीतरफ बढ़ा। थोड़ी हि देर मे वोँ दरवाजे केँ पास पहुॅच गय़ा। दरवाजे केँ हैण्डिल कों पकड़कर उसनेउसे घुमाया तौ पताचला कि वोँ लाॅक हैं। यहदेख कर उसने जल्दी हि अपने लबादे सें वोँ मास्टर कि निकाली औऱ कि होल मे चाभीडाल कर घुमा दिया। दरवाजा हल्की सि आवाज़ केँ संगखुल गय़ा।
उसने बहोत हि आहिस्ता सें दरवाजे कों अंदर कि तरफपुश किया तौ पताचला अंदर अॅधेरा हैं। सायाकुछ देर तक किसीतरह कि आवाज़ कों सुनने कि कोशिश करतारहा मगरकोई आवाज़ उसे अंदर कि तरफ सें सुनाई नहि दि। यह महसूस कर उसने लबादे सें पैंसिल टार्च निकाली औऱ उसके प्रकाश कों कमरे केँ अंदर कि तरफ फोकस किया। फोकसजिस चीज़ पऱ पड़ा वोँ बेड थां। लेकिन बेड पऱ कोई इंसान सोयाहुआ नज़र नं आया। साया बेख़ौफ अंदर दाखिल हौ गय़ा। कमरे केँ अंदरहर चीज़ कों उसने पैंसिल टार्च कि रोशनी मे देखा। मगर उसेऐसा कुछ नज़र नं आया जिसे शायदउसे तलाश थि।
करीब-करीब दस मिनटबाद वो कमरे सें वापस बाहर् आँ गय़ा। अभि वो दरवाजे सें बाहर् निकला हि थां किसी सें टकरा गय़ा। किसी दूसरे ब्यक्ति केँ होने कि आशंका सें हि वो बुरीतरह हड़बड़ा गय़ा। लेकिन जैसे हि टकराने वाले पऱ उसकी नज़र पड़ी तोँ सामान्य होँ गय़ा। टकराने वाला वोँ दूसरा साया थां जौ उसकेसंग हि यहाॅइस तरहआया थां।
"क्याँ हुआ?"उस दूसरे साये नें धीमी आवाज़ सें पूछा___"कुछ मिला क्याँ??"
"नहि। " पहले वाले नें कहा___"अभि तोँ यही नहि पताचल रहा कि मंत्री कां निजीरूम कौन सां हैं? वोँ यहाॅऊपर हैं याँ फिन नीचे हैं। "
"पता तोँ करना हि पड़ेगा। " दूसरे साए नें कहा___"मंत्री केँ परिवार मे उसकेदो बच्चे हि हें। पत्नि कुछसाल पहले हि परमेश्वर कों प्यारी हौ चुकी हैं। ख़ैर, इस टाइम क्योंकि मंत्री अपने आवास पर्र नहि हैं इसलिए यह बॅगला अंदर सें खाली हि हैं। बाहर् गनमैन तैनात हें। हमें जल्द सें जल्द मंत्री केँ कमरे कों ढूॅढ़ना होगा। "
"ठीक हैं। " पहले वाले नें कहा___"मे नीचे कि तरफचेक करताहूॅ। "
"ओके। " दूसरे वाले नें कहा___"अगर तुम्हें याँ मुझे मंत्री कां रूम मिलता हैं तौ जल्दी मोबाइल पर्र मिसकाल देना हैं। मोबाइल बाइब्रेशन पर्र हैं अतः बाइब्रेशन सें हि पताचल जाएगा। अबजाओ तुम्। "
दूसरे साए कि बातसुन कर पहला साया सीढ़ियों कि तरफ तेज़ी सें बढ़ गय़ा। आख़िर बहुत मसक्कत केँ बाद मंत्री कां रूममिल हि गय़ा। मंत्री कां रूम नीचे हि थां। पहले साये नें दूसरे साये कों मोबाइल पर्र मिसकाल देकर सूचित कर दिया। थोड़ी हि देर मे वोँ दोनो मंत्री केँ कमरे मे थें।
मंत्री चूॅकि बॅगले मे नहि थां इसलिए बॅगले केँ अंदरकोई थां हि नहि। बॅगले केँ बाहर् गनमैन अवश्य तैनात थें लेकिन उनमें सें किसी कों भि इसबात कां अंदेशा नहि थां कि बॅगले केँ अंदरदो चोर बड़ी सफाई सें उनकी ऑखों मे धूल झोंककर घुस चुके हें। ख़ैर, दोनो सायों नें मंत्री केँ कमरे मे जाकर सबसे पहले तोँ दरवाजे कों अंदर सें बंद किया उसकेबाद जिसकाम केँ लिएआए थें उसकाम मे लगगए। कमरे मे पहले सें हि नाइट बल्बजल रहा थां। लेकिन पहले वालेसाए नें तेज़ रोशनी केँ लिएमेन बल्ब भि जला दिया। अब कमरे मे तेज़ प्रकाश थां तथा कमरे मे रखीहर चीज़ स्पष्ट नज़रआने लगी थि।
दोनो नें बहोत हि बारीकी सें हर चीज़ कों देख्ना शुरुआत कर दिया। दोनो केँ हावभाव सें ऐसालग रहा थां जैसे वोँ इसकाम मे बहुत माहिर हों। करीब-करीब बीस मिनट कि मेहनत केँ बाद वोँ दोनो हि इसतरह एक् दूसरे केँ पास खड़े हौ गए जैसे किसी चीज़ केँ नं मिलने सें बेहद चिंतित व परेशान होँ गएहों।
"लगता हैं यहाॅकुछ नहि हैं। " पहलेसाए नें धीमी आवाज़ सें कहा___"मंत्री नें उन चीज़ों कों अवश्य किसीऐसी स्थान छुपाया होगा जहाॅ पर्र वोँ चीज़ें किसी बाहरी व्यक्ति कों किसी सूरत मे नं मिल सकें। "
"वोँ चीज़ें ऐसी हें भि नहि जोँ इतनी आसानी सें हमेंमिल जाएॅगी। " दूसरे साये नें कहा___"ऐसी चीज़ों कों तोँ हर इंसान सात तिज़ोरियों केँ अंदर हि छुपाकर रखता हैं। इसलिए हमेंऐसी हि किसी स्थान कों तलाश करना होगा जहाॅ पऱ हमारी नज़रें पड़ी तोँ हों लेकिन हमनेउस स्थान कों अंजाने मे नज़रअंदाज़ कर दिया होँ। "
"हाॅयह भि सहीकहा। " पहलेसाए नें इधरउधर नज़रें घुमाते हुए कहा___"तौ ठीक हैं एक् बारफिन सें हम् हर स्थान बारीकी सें चेक करते हें। संभव हैं कि इसबार हमारे हाॅथकुछ लग हि जाए। "
पहलेसाए कि बातसुन कर दूसरे साए नें सहमति मे सिर हिलाया औऱ फिन सें वोँ हर स्थान कां बारीकी सें मुआयना करने मे लग गय़ा। कमरे मे मौजूद हर चीज़ बेसकीमती थि। फिन चाहे वोँ मंत्री कां बेड हौ, सोफेहों, फर्श मे बिछा कालीन होँ याँ फिन दीवारों पर्र लगी पेंटिंग्स।
पहला सायाबेड केँ दाहिने साइड कि दीवार कि तरफदेख रहा थां। उस दीवार पर्र हर दीवार कि तरह ऊॅचाई पऱ पेंटिंग्स लगी हुई थि लेकिन पेंटिंग्स केँ नीचे दीवार पऱ नीचे सें करीबछः फुट कि ऊॅचाई पऱ ऐसे नक्काशी कि गई थि जैसे किसी बड़े सें आदम हाइट शीशे केँ फ्रेम पऱ हसीन नक्काशी कि हुईँ होती हैं। दरअसल दीवार पऱ वोँ एक् फ्रेम जैसा हि कुछबना हुआ थां। लेकिन फ्रेम केँ अंदर कां भाग खाली थां। यानी कि उसमें कोई चित्र वगैरह नहि बनाहुआ थां। बल्कि ऐसा लगता थां जैसे कि किसी बड़ी सि चीज़ कां मात्र फ्रेम बना दिया गय़ा होँ। पहला साया दीवार मे बनेउस खाली फ्रेम कों बड़े ध्यान सें देखने लगा। एकाएक हि उसकी ऑखें सिकुड़ीं। उसने जल्दी हि दीवार केँ इधरउधर किसीखास चीज़ कि तलाश मे अपनी नज़रें दौड़ाईं।
दीवार पर्र बनेउस फ्रेम केँ बाईंतरफ एक् मध्यम साइज़ कि पेंटिंग लगी हुई थि। पहला साया जाने क्याँ सोचकर उस पेंटिंग कि तरफ बढ़ा। पेंटिंग केँ पास पहुॅच कर उसने अपने एक् हाॅथ सें पेंटिंग केँ फ्रेम कों पकड़कर बाईंतरफ किया। पेंटिंग केँ निचले भाग केँ बाईंतरफ होते हि जौ चीज़ नज़रआई उसेदेख कर साये कि ऑखें पहले तौ हैरत सें फटींफिन एकाएक हि उनमें चमक आँ गई। उसने जल्दी हि पलटकर दूसरे साये कों धीमी आवाज़ देकर अपनेपास बुलाया।
दूसरे साये केँ पासआते हि उसनेउस साये कों भि पेंटिंग केँ पीछे दीवार पर्र नज़र आँ रहीउस चीज़ कों दिखाया। दरअसल वोँ चीज़ एक् छोटे सें कम्प्यूटर केँ माॅनीटर जैसी थि। ऊपरीतरफ दीवार सें चिपकी हुईँ स्क्रीन औऱ स्क्रीन केँ नीचे कीबोर्ड। स्क्रीन केँ ऊपरीभाग पर्र दोकलर कि बत्तियाॅ थीं। जिनमें सें एक् हरीतथा दूसरी लालकलर कि थि। लालकलर वाली बत्ती इस वक़्त रौशन थि। स्क्रीन पर्र लिखा थां "प्लीज इन्टर योर पासवर्ड"।
"मुझे लगता हैं कि। " पहलेसाए नें धीमे स्वर मे कहा___"यह किसीऐसी स्थान केँ लिए हैं जहाॅ पर्र जाने केँ लिए इसमें सबसे पहले पासवर्ड डालना पड़ता हैं। "
"बिलकुल ठीककहा तुमने। " दूसरे साये नें दीवार पऱ इधरउधर नज़र दौड़ाते हुए कहा____"लेकिन यहाॅ पर्र ऐसा तोँ कुछ नज़र नहि आँ रहा जिससे ऐसा प्रतीत होता होँ कि यहाॅ सें कहीं दूसरी स्थान जाने कां कोई मार्ग होँ। "
"ज़राइस चीज़ कों देखिए। " पहलेसाए नें दाहिनी तरफ दीवार पऱ नज़र आँ रहेउस खाली फ्रेम कि तरफ इशारा करतेहुए कहा___"इस दीवार पऱ यहछःफीट ऊॅचातथा साड़े तीनफीट चौड़ा फ्रेम भलाकिस उद्देश्य सें बनवाया गय़ा होगा?अगर यहमान कर चलें कि यह दीवार पऱ महज शोभा बढ़ाने केँ लिए बनवाया गय़ा हैं तोँ फिनइसी तरह केँ सेम फ्रेम दोतरफ कि दीवारों पऱ भि बने होने चाहिए थें। एक् तरफ तोँ कमरे कां दरवाजा हैं। अतःउस तरफ नाँ भि बनवाया जाता तौ कोईबात नं थि। लेकिन ऐसा फ्रेमनुमा डिजाइन मात्र इसी एक् तरफ कि दीवार पऱ क्यूं बनवाया गय़ा हौ सकता हैं?"
"यकीनन तुम्हारी बात मे प्वाइंट हैं। " दूसरे साए नें दीवार पऱ बनेउस फ्रेम कि आकृति कों गौर सें देखते हुए कहा___"अगर इस स्क्रीन सें यहपता चलता हैं कि यह किसी चीज़ केँ लिए पासवर्ड माॅगरहा हैं तोँ यह भि हौ सकता हैं कि यहाॅ पर्र कोईऐसी स्थान होँ सकती हैं जहाॅ जाने केँ लिए हमें इसमें पासवर्ड डालना होगा। इसका मतलबयह हुआ कि यहाॅ पऱ कहींकोई दूसरी स्थान भि हैं जहाॅ जाने कां मार्ग बना होगा। जोकि फिलहाल हमें नज़र नहि आँ रहा। हलाॅकि ऐसा भि होँ सकता हैं कि यह माॅनीटर सिस्टम किसी औऱ हि चीज़ केँ लिए होँ। "
"बिलकुल हौ सकता हैं। " पहलेसाए नें कहा___"लेकिन इस कमरे मे ऐसेखास सिस्टम कां उपयोग भलाकिस चीज़ केँ लिए होँ सकता हैं? मुझे लगता हैं कि यह इलेक्ट्रिक सिस्टम लगाया हि इस लिये गय़ा हैं कि इसके माध्यम सें हि हमें कहीं जाने कां मार्ग नज़रआए। कहने कां मतलबयह कि अगर हम् इस स्क्रीन पऱ सही पासवर्ड डालदें तोँ मुमकिन हैं कि किसी स्थान जाने कां मार्ग नज़र आँ जाए याँ फिन मार्ग हि बनजाए। याँ फिनऐसा भि होँ सकता हैं कि कुछ औऱ हि होँ जाए। "
"हाॅ यहसही कहा तुमने। " दूसरे साए नें कहने केँ संग हि दीवार पऱ बनेउसी फ्रेम कि तरफ पुनः देखा___"कहीं ऐसा तोँ नहि कि यह फ्रेम हि वोँ मार्ग होँ। बेशकऐसा हि हौ सकता हैं क्योंकि यह फ्रेम नीचे फर्श सें ऊपर कि तरफ हैं। दूसरी बात इसका साइज बिलकुल वैसा हि हैं जैसे किसी दरवाजे कां होता हैं। वरना सोचने वालीबात हैं कि अगरऐसा कोई फ्रेम केवल कमरे कि शोभा बढ़ाने केँ लिए बनाया गय़ा होता तौ यह फर्श सें लगाहुआ नहि होता बल्कि फर्श सें एक् याँ दोफीट कि ऊॅचाई सें बनाहुआ होता। तीसरी बातयह बनाया हि इसतरह गय़ा हैं कि आम इंसान इसेदेख करयही समझेगा कि यह मात्र एक् फ्रेम हि हैं जोँ कि कमरे कि शोभा बढ़ाने केँ लिए एक् तरफ कि दीवार पर्र बनाया गय़ा हैं। "
"इसका मतलब कि यह साबित होताहुआ नज़र आँ रहा हैं कि यह फ्रेम कहीं जाने कां दरवाजा हि हैं। " पहले साये नें कहा___"औऱ यहतभी खुलेगा जब हम् इस इलेक्ट्रिक सिस्टम मे पासवर्ड डालेंगे?"
"करेक्ट। " दूसरे साये नें कहा____"अब प्रश्न यह हैं कि इसका पासवर्ड क्याँ होगा?"
"इसका कीबोर्ड बिलकुल वैसा हि हैं जैसे किसी कम्प्यूटर कां होता हैं। " पहले साये नें उस स्क्रीन सें लगे हि कीबोर्ड कि तरफ देखते हुए कहा___"इसका पासवर्ड किसी केँ नाम सें अथवा किन्हीं संख्याओं सें भि होँ सकता हैं। "
"बेशक होँ सकता हैं। " दूसरे साए नें कहा___"औऱ यह हमारे लिए बहुत चिंता कां विषय भि होँ गय़ा हैं। क्योंकि अगर हमें इसकासही पासवर्ड न् मिला तौ यह दरवाजा नहि खुलेगा। मुझे पूरा यकीन हैं कि इस दरवाजे केँ पार हि ऐसी वोँ स्थान हैं जहाॅ पऱ हमें वोँ चीज़ें मिल सकती हें जिसके लिए हम् यहाॅआए हें। हलाॅकि यह केवल हमारा अंदेशा हि हैं कि यहाॅ पर्र कोई दरवाजा होँ सकता हैं जहाॅ पऱ जाने केँ लिएयह इलेक्ट्रिक सिस्टम लगाया गय़ा हैं। ऐसा भि होँ सकता हैं कि इसका उपयोग इसके अलावा भि किसी औऱ चीज़ केँ लिए होँ। लेकिन एक् बारचेक तौ करना हि चाहिए हमें। संभव हैं कि वैसा हि हौ जैसे कां हमें अंदेशा हैं। "
"कुछ भि हौ सकता हैं। मगरचेक तौ यकीनन करना हि पड़ेगा। ख़ैर, क्याँ ऐसा नहि हौ सकता कि इसका पासवर्ड यहीं कहीं मौजूद हौ?" पहले साये नें कहा___"मेरे कहने कां मतलब हैं कि इसका पासवर्ड मंत्री नें आलमारी मे हि कहीं छुपाकर रखाहुआ होँ। मे ऐसायह सोचकर कहरहा हूॅ कि जबयह सिस्टम लगवाया गय़ा होगातब इसका सबकुछ नयानया हि रहा होगा। शुरुआत शुरुआत मे किसी भि चीज़ कां पासवर्ड हमें इतना जल्दयाद नहि होता औऱ अगरयाद हौ भि गय़ा तौ उसकेभूल जाने केँ चान्सेस ज़्यादा रहते हें। ऐसा हम् सबकेसंग होता हैं। इसलिए ऐसा मुमकिन हैं कि जैसे हम् किसी चीज़ कां पासवर्ड अलग सें लिखकर उसे सम्हाल कररख लेते हें वैसे हि मंत्री नें भि किया हौ। "
"सहीकहा तुमने। " दूसरे साये नें कहा___"ऐसा हौ सकता हैं। मंत्री नें इसका पासवर्ड यहीं कहीं छुपाकर रखा होगा। अतः हम् कमरे मे रखीइन आलमारियों कि तलाशी लेते हें। "
दूसरे साये कि बातसुन कर पहले साये नें हाॅ मे सिर हिलाया औऱ फिन दोनो हि कमरे मे रखीतीन तीन आलमारियों कि तरफ बढ़े। उन तीन आलमारियों मे एक् अनलाॅक थि जबकि बाॅकी कि दो आलमारियाॅ लाॅक थि। दोनो नें एक् एक् लाॅक आलमारी कों सम्हाल लिया। मास्टर कि सें दोनो आलमारियों कों अनलाॅक किया औऱ फिन उसके अंदर तलाशी अभियान शुरुआत कर दिया।
दोनो हि आलमारियों मे कईतरह केँ काग़जात भरे पड़े थें। जिन्हें उलटपलट कर वोँ दोनो हि साये बारीकी सें देखरहे थें। लेकिन उन कागजातों मे उन्हें उस सिस्टम कां पासवर्ड जैसाकुछ नं मिला। आलमारी केँ अंदर हि एक् औऱ लाॅकर थां जोकिबंद थां। उन दोनों नें उन लाॅकरों कों भि मास्टर कि सें खोला। अंदर वाले लाॅकर्स मे बहुत सारी ज्वेलरी तथा बैंक कि काॅपी पासबुक वगैरह थि तथा बहुत सारे नोटों केँ बंडल भि थें।
तभी दूसरे साये कों उस लाॅकर सें कुछ मिला जिसे उसने लाॅकर सें बाहर् निकाला। वोँ एक् डायरी थि। दूसरे साये नें उस डायरी कों खोलकर उसकेहर पेज कों बारीकी सें देख्ना शुरुआत कर दिया। उसमें बहुतकुछ चीज़ें लिखी हुई थि। बहुत सारे पेज़ देखने केँ बाद सहसा एक् पेज पर्र साये कि नज़रठहर गई।
"मिल गय़ा। " साये केँ मुख सें ज़रा ऊॅची आवाज़ निकल गई। मारे खुशी केँ उसेहोश हि नहि रह गय़ा थां कि वोँ दोनोइस वक़्त मंत्री केँ बॅगले मे चोर कि हैंसियत सें आएहुए हें। वोँ तोँ शुकर थां कि बॅगले केँ अंदरकोई थां नहि वरना उसकीइस आवाज़ सें अवश्य किसी न् किसी कों पताचल जाता। ख़ैर उसकी आवाज़ सें औऱ तौ किसी कों पता नं चला लेकिन पहला साया अवश्य चौंककर उसकीतरफ देखने लगा थां। दूसरे साये कों भि जल्दी हि ख़याल आँ गय़ा थां कि खुशी केँ आवेश मे उसकेमुख सें कुछ ज़्यादा हि ऊॅची आवाज़ निकल गई थि। दोनो हि कुछदेर अपनी साॅसें रोंके खड़ेरहे।
पहला साया दूसरे वाले केँ पासआया औऱ फिन उसकीतरफ देखकर बोला___"बाहर् जोँ गनमैन तैनात हें उन्हें यहाॅ बुलाना हैं क्याँ?"
"साॅरी। " दूसरा साया बोला___"मारे खुशी केँ याद हि नहि रह गय़ा थां कि हम् यहाॅचोर बनकरआए हुए हें। ख़ैर, यह देखो। हमें जिसकी तलाश थि वोँ इस डायरी मे हैं। तुम्हारा कहना बिलकुल सही थां कि मंत्री नें उस सिस्टम कां पासवर्ड अलग सें कहींलिख कर छुपाया हुआ होगा। "
"तोँ फिनदेर किसबात कि हैं?" पहले साये नें धीमें स्वर मे मुस्कुराते हुए कहा___"हमें यहाॅ पऱ आएहुए बहुत वक्त हौ गय़ा हैं। इसलिए अब हमें जल्द जल्द अपनेकाम कों अंजाम देना होगा। ऐसा नं हौ कि मंत्री वापसलौट आए यहाॅ। साला दुर्भाग्य कों कोई नहि जानता कि कब किसके सिर पऱ आँ धमके। "
"सही कहा तुमने। " दूसरे साये नें कहा___"आओ फिन शुरुआत करते हें। "
कहने केँ संग हि दूसरा सायाउस सिस्टम कि तरफबढ़ चला, उसके पीछे पीछे हि पहला साया भि बढ़चला थां। सिस्टम केँ पास पहुॅच कर दूसरे साये नें डायरी पऱ लिखे पासवर्ड कों सिस्टम पऱ बड़ी सावधानी सें डाला औऱ फिन इंटर कां बटनदबा दिया। इन्टर कां बटन दबाते हि स्क्रीन केँ ऊपरलगी हरी बत्ती जलउठी संग हि स्क्रीन पऱ "वैलकम" लिखा नज़रआया। यहदेख कर वोँ दोनो साये अभि मुस्कुराये हि थें कि तभी उनके दाहिनी तरफ हल्की सि आवाज़ हुई। दोनो नें पलटकर उसतरफ देखा।
दीवार मे जिस स्थान वोँ फ्रेम बनाहुआ थां उसी फ्रेम केँ बीचों बीच सें एक् दरवाजा खुलता हुआ अंदर कि तरफ जानेलगा थां। वोँ एक् हि पल्ले कां मोटा सां दरवाजा थां। जोँ बंद होने पऱ बिलकुल दीवार कि तरह हि नज़रआता थां। कुछ हि पलों मे वोँ दरवाजा पूराखुल कर दाहिने साइड हौ गय़ा। दरवाजे केँ उसतरफ अॅधेरा थां जौ कि इसतरफ केँ उजाले सें थोडा दूर हौ गय़ा थां। दोनो हि साये दरवाजे केँ पासआकर खड़े हौ गए। दरवाजे सें आगे करीब-करीब तीनफीट पर्र फर्श थां उसकेबाद नीचे जाने केँ लिए सीढ़ियाॅ नज़र आँ रहीथीं।
"कमाल हैं। " पहला सायाबोल पड़ा___"यह तौ बेसमेंट लगता हैं। कोईसोच भि नहि सकता थां कि यहाॅ पर्र ऐसाकुछ हौ सकता हैं। "
"ऐसेलोग। " दूसरे साये नें कहा____"ऐसे कामों केँ लिएऐसी हि जगहों कां अधिकतर चुनाव करते हें औऱ इससे सेफ्टी भि रहती हैं। वरना स्वयं सोचो कि कोई दूसरा यहाॅ तक केसे पहुॅच जाएगा? ख़ैर छोंड़ो, आओ इसके अंदर चलते हें। "
"मुझे लगता हैं कि। " पहले साये नें कहा___"हम् मे सें किसी एक् कों हि अंदर जानां चाहिए जबकि किसी एक् कों यहीं पऱ रहना चाहिए। क्योंकि ऐसा भि होँ सकता हैं कि बाहर् तैनात गनमैनों मे सें कोई बॅगले केँ अंदरयह सोचकर आँ जाए कि एक् बार अंदर कि तरफ कां हालचाल भि देख लियाजाए। अतःअगर ऐसी वैसीकोई बात होती हैं तौ कम सें कम हम् मे सें कोई एक् यहाॅरह करउसे सम्हालने कि कोशिश तौ करेगा। "
"यह भि सहीकहा तुमने। " दूसरे साये नें कहा___"तौ ठीक हैं तुम् यहींरहो। इसके अंदर जाने कां कामअब मेरा हैं। "
"ओके बेस्ट ऑफलक। " पहलेसाए नें कहने केँ संग हि अपने दाहिने हाॅथ कां अॅगूठा दिखाया उसे___"मगर हाॅ ज़रा सम्हाल कर। "
दूसरे साये नें हाॅ मे सिर हिलाया औऱ दरवाजे केँ उसपार बढ़चला। उसपार केँ फर्श पर्र आकर वो ठिठका औऱ दोनोतरफ देखा तोँ उसे बाईंतरफ दीवार पर्र एक् स्विच नज़रआया। उसनेउस स्विच कों पहले ध्यान सें देखा उसकेबाद उसने हाॅथ बढ़ाकर स्विच कां बटनदबा दिया। परिणामस्वरूप सीढ़ियों केँ ऊपरलगी एक् ट्यूबलाइट रौशन होँ गई। अब वहाॅ पऱ बहुत प्रकाश थां।
दूसरा साया सामने कि तरफ मुड़कर बड़ी सावधानी सें सीढ़ियों पऱ उतरता चला गय़ा। जबकि कमरे मे दीवार केँ पास हि खड़ा पहला सायाउसे जातेहुए देखता रहा। उसकेदिल कि धड़कनें अनायास हि बढ़गईं थि। उधरकुछ हि पलों मे दूसरा साया सीढ़ियाॅ उतरकर बेसमेंट मे पहुॅच गय़ा। नीचे कि लास्ट सीढ़ी सें थोंड़ी हि दूरी पऱ दाहिनी तरफ कि दीवार मे एक् औऱ स्विच नज़रआया। साये नें उस स्विच कां बटनऑन कर बेसमेंट कि लाइटजला दि। लाइट केँ जलते हि बेसमेंट मे तीब्र प्रकाश फैल गय़ा।
तीब्र रौशनी मे बेसमेंट कि हर चीज़ स्पष्ट नज़रआने लगी थि। लेकिन जिसखास चीज़ पऱ साये कि नज़र पड़ीउसे देखकर उसकी ऑखेंफटी कि फटीरह गईं। बेसमेंट बहुत बड़ा थां। ऐसा लगता थां जैसेयह कोई लम्बा चौड़ा हाल हौ। चारोतरफ कि दीवारों पऱ अलगअलग चीज़ों कां क्रमशः स्टाक थां यहाॅ। लेकिन सबसेखास चीज़यह थि कि हाल केँ सामने आखिरी छोर केँ फर्स पऱ हि एक् बड़ी सि ट्राली थि जिसके ऊपरदो हज़ार केँ तथा पाॅचसौ केँ नोटों केँ बंडल नीचे सें ऊपर कि तरफरखे हुए थें। यहसभी न्यू करेन्सी थि। जोकि पाॅलिथिन मे बंद थि। इतने सारे रुपये कों देखकर किसी कि भि ऑखेंफटी कि फटीरह जातीं। उस ट्राली केँ आगे दीवार सें सटे स्टील केँ खाॅचे बनेहुए थें जिनके दो खाॅचों मे चमचमाते हुए गोल्ड केँ बिस्किट रखेहुए थें। बिस्किट केँ वोँ दोनो हि खाॅचे पारदर्शी शीशे सें बंद थें। बाॅकी केँ खाॅचों मे लकड़ी केँ बाक्स थें। फर्श पर्र भि बहुत सारे बाॅक्स रखेहुए थें।
यह सारी चीज़ें देखकर साये कि ऑखेंफटी हुईँ थि। लेकिन जल्द हि उसने स्वयं कों मानो सम्हाला औऱ आगे कि तरफबढ़ चला। लकड़ी केँ एक् बाक्स केँ पास पहुॅच कर उसने बाक्स केँ ऊपरलगे लकड़ी केँ हि ढक्कन रूपी पटरे कों पकड़कर अपनीतरफ खींचकर उसे निकाला। ढक्कन केँ हटते हि बाक्स मे रखी हुईँ जोँ चीज़ नज़रआई उसेदेख कर साये कि ऑखें एक् बार पुनः हैरत सें फैलीं। बाक्स मे एक् जैसीकई सारीगन रखी हुइ थि। मतलबसाफ थां कि यहाॅ पर्र जितने भि ऐसे बाक्स थें उनसभी मे तरहतरह कि गन्स हि थीं।
साये नें चारोतरफ नज़र घुमाकर बारीकी सें देख्ना शुरुआत कर दिया। दाएॅतरफ एक् केबिन जैसाबना हुआ थां। सायाउस तरफबढ़ गय़ा। केबिन मे पहुॅच कर उसने देखा कि यह एक् छोटा सां केबिन हैं जिसमें एक् तरफ ऊॅची सि मेज थि तथामेज केँ ऊपर एक् कम्प्यूटर रखाहुआ थां। मेज मे कई सारे दराज थें। साये नें एक् एक् करकेसब दराज कों खोलकर देखा। उन सभी मे कईतरह कि रसीदव काग़जात थें तथाकई सारी फाइलें भि थीं। साये नें उनसब फाइलों कों बारीकी सें देख्ना शुरुआत कर दिया।
फाइलों मे सें कुछ फाइलों कों उसनेअलग करके एक् तरफरखा। उसकेबाद उसने एक् नज़र कम्प्यूटर पर्र डाली। कुछ देर तक वो उसे देखते हुए सोचता रहा। फिन वो अलग कि हुईँ फाइलों कों लेकर केबिन सें बाहर् आँ गय़ा। जैसा कि बताया जा चुका हैं कि बेसमेंट बहुत बड़ा थां। सायाहर स्थान जाजाकर बारीकी सें देखने लगा। तभी एक् तरफउसे एक् बड़ा सां दरवाजा नज़रआया। यह दरवाजा ठीक वैसा हि थां जैसा कि बेसमेंट मे आने केँ लिएउस कमरे मे थां। इस दरवाजे केँ बाईंतरफ वैसा हि एक् औऱ सिस्टम लगाहुआ थां। जिसमें पासवर्ड डालने केँ लिए स्क्रीन पऱ "प्लीज इन्टर योर पासवर्ड" लिखाहुआ थां। साये नें कुछ सोचते हुए अपने लबादे सें एक् छोटा सां फोन निकाला औऱ उसमें सें हराबटन दबाया। हराबटन दबाते हि उसमें डायलकाल कि लिस्ट मे एक् हि नंबर दिखा जिसे उसने पुनःहरा बटनदबा कर डायलकर दिया। डायल करते हि फोन कों कान सें लगा लिया उसने, कुछ हि सेकण्ड मे दूसरी तरफ सें काल रिसीव किया गय़ा।
"यहाॅ पर्र वैसा हि एक् औऱ दरवाजा हैं। " काल रिसीव किये जाने पऱ साये नें जल्दी बिना किसी भूमिका केँ धीमे स्वर मे कहा___"अतः तुम् उस डायरी मे देखो कि क्याँ इसका भि पासवर्ड उसमें हैं याँ फिनइन दोनो दरवाजों कां एक् हि पासवर्ड हैं। जल्द सें देखकर मुझे बताओ। "
उधर यकीनन पहला वाला साया हि थां। दूसरे साये कों अपनेकान मे कुछदेर सुरसराहट कि आवाज़ आतीरही उसकेबाद कुछकहा गय़ा। जिसके जवाब मे साये नें कहा___"ओह एक् मिनट। "
कहने केँ संग हि यह साया दरवाजे केँ बाएॅ साइड दीवार पऱ लगे सिस्टम केँ पास तेज़ी सें गय़ा। सिस्टम केँ पास पहुॅचते हि बोला___"हाॅ अब बताओ। "
उधर सें शायद पहला वाला सायाइस साये कों पासवर्ड बतारहा थां जिसेयह वाला साया उसके बताने केँ संग हि कीबोर्ड पर्र अपनी एक् उॅगली सें पंच करताजा रहा थां। थोड़ी हि देर मे साये केँ द्वारा "इन्टर" कां बटन दबाए जाते हि सिस्टम पर्र लगीहरी बत्ती जलउठी। बत्ती केँ जलते हि वोँ दरवाजा हल्की आवाज़ केँ संगइस तरफ हि खुलता चला गय़ा। दूसरी तरफ अॅधेरा थां जोकिइधर कि रौशनी सें हल्का सां दूर हौ गय़ा। हल्की रोशनी होते हि सामने सींढ़ियाॅ नज़रआईं जोँ कि ऊपर कि तरफजा रही थि। सायाउन सीढ़ियों कों देखकर पहलेकुछ देरकुछ सोचाफिन आगेबढ़ करउन सीढ़ियों पर्र चढ़ता चला गय़ा। सीढ़ी केँ ऊपरआकर उसने देखा कि सामने एक् औऱ दरवाजा हैं लेकिन यह दरवाजा लोहे कां थां। दरवाजे केँ निचले भाग कि दरार मे हल्की रोशनी दिखरही थि। मतलबसाफ थां दरवाजे केँ दूसरी तरफकुछ औऱ भि थां लेकिन क्याँ? इस प्रश्न कां जवाब तौ उसतरफ पहुॅच कर हि मिल सकता थां।
साये नें देखा कि दरवाजा इसतरफ सें हि बंद हैं। क्योंकि मोटा सां ताला कुण्डे पर्र झूलरहा थां। ऐसा ताला साये नें पहलीबार हि देखा थां। कुण्डे केँ पास हि एक् छिद्र थां, वोँ छिद्र ऐसा थां जैसे कीहोल होँ। यानी कि यह दरवाजा दोतरह सें लाॅक थां। साये नें झुककर कीहोल सें अपनी एक् ऑखसटा दि। दूसरी तरफ बहुत उजाला थां तथाउस उजाले मे हि उसेऐसा नज़रआया जैसेउस तरफकोई फैक्ट्री होँ। कुछलोग भि उसतरफ नज़रआए। जिनमें कुछआम आदमियों केँ संगसंग हाॅथों मे गनलिए कुछ गार्ड्स भि थें।
उसतरफ कां नज़ारा देखकर साये नें कीहोल सें अपनीऑख हटाली। उसकेबाद वो एक् लम्हा केँ लिए वहाॅ नहि रुका बल्कि पलटकर वापसचल दिया। बेसमेंट मे आकर उसने दरवाजे कों बड़ी सावधानी सें बंद किया। दरवाजा जैसे हि पूराबंद हुआ वैसे हि बगल सें दीवार पऱ लगेउस सिस्टम केँ स्क्रीन पऱ "डोरहैज बीन क्लोज्ड" लिखा नज़रआया औऱ संग हि ऊपरलगी लाल बत्ती जलउठी। लाल बत्ती केँ जलते हि स्क्रीन पर्र फिन सें "प्लीज इन्टर योर पासवर्ड" लिख गय़ा।
कुछ हि देर मे बेसमेंट सें चलताहुआ वोँ साया सीढ़ियों केँ पासआया औऱ फिन सीढ़ियाॅ चढ़ते हुए कमरे मे पहले वाले साये केँ पास आँ गय़ा। दरवाजे कों बंद करने केँ बाद उसने पहले गहरी गहरी साॅसें ली। उसकेबाद उसने पहलेसाए कि तरफ देखा तोँ हल्के सें चौंका।
"यह क्याँ हैं?" दूसरे साये नें पहले साये केँ हाॅथ मे बैगदेख कर पूछा।
"इसमें मंत्री कां लैपटाॅप हैं। " पहले साये नें कहा___"यह मुझेइस बेड केँ नीचेबने बाक्स मे मिला हैं। मैनेइसे अभि देखा नहि हैं। होँ सकता हैं कि इसमें भि पासवर्ड वाला चक्कर होँ इसलिए इसे हम् अपनेसंग हि लें चलेंगे। "
"यह बहोत अच्छा हुआ। " दूसरे साए नें कहा___"मंत्री केँ लैपटाॅप मे भि बहुतकुछ मसाला मिल सकता हैं। ख़ैर, इन फाइलों कों भि इसबैग मे डाललो। उसकेबाद हमें जल्दी यहाॅ सें निकलना हैं। अब यहाॅ पऱ ज़्यादा देर रुकना ठीक नहि हैं। "
"ठीक हैं। " पहलेसाए नें कहने केँ संग हि बैग कों बेड पऱ रखा औऱ दूसरे साये सें फाइलें लेकरबैग मे डाल लिया।
उसकेबाद यह दोनो हि शातिर चोरजिस तरह छुपते छुपाते हुए यहाॅ बड़ी होशियारी सें आए थें वैसे हि यहाॅ सें निकल भि गए। बालकनी सें जब दोनो नीचे ज़मीन पर्र उतरआए तौ बालकनी मे इनकी वोँ रस्सी हि फॅस गई। वोँ तौ शुकर थां कि इसतरफ आने वाले वोँ दोनो गनमैन इसतरफ आए हि नहि। वरना उन्हें बालकनी कि रेलिंग सें झूलती हुई यह रस्सी अवश्य दिख जाती औऱ यह दोनो भि। ख़ैर दोनो नें किसीतरह उस रस्सी कों निकाल हि लिया औऱ फिनउसी रस्सी केँ द्वारा बाउण्ड्री वाल केँ उसपार भि चलेगए। थोड़ी हि देर मे वोँ दोनो अॅधेरे कां लाभ उठाते हुए कहीं गायब सें होँ गए।
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दोस्तो, आप् सबके सामने मेगा एपसोड हाज़िर हैं। आशा करताहूॅ कि आप् सबको पसन्द आएगा।
आप् सबकी प्रतिक्रिया कां बेसब्री सें इन्तज़ार रहेगा।
शुभम भइयाआज भाग कि कोई उम्मीद हैं ? इंतेजार कां एक् एक् लम्हा बहोत हि कठिन हैं ।।
बहोत बहोत धन्यवाद भइया आपकीइस हसीन प्रतिक्रिया केँ लिए,,,,,,,,,,भाग दे दिया हैं भइया,,,,,,,,
बहोत बहोत धन्यवाद भइया आपकीइस सुंदर प्रतिक्रिया केँ लिए,,,,,,,,,,भाग दे दिया हैं भइया,,,,,,,,
बहोत बहोत धन्यवाद भइया आपकीइस हसीन प्रतिक्रिया औऱ शानदार रिव्यू केँ लिए,,,,,,,,,, एपसोड दे दिया हैं भइया,,,,,,,,पेज नंबर 490 पऱ,
बहोत बहोत धन्यवाद भइया आपकीइस हसीन प्रतिक्रिया केँ लिए,,,,,,,,,, एपसोड दे दिया हैं भइया,,,,,,,,पेज नंबर 490 पर्र,
बहोत बहोत धन्यवाद भइया आपकीइस सुंदर प्रतिक्रिया केँ लिए,,,,,,,,,, एपसोड दे दिया हैं भइया,,,,,,,,पेज नंबर 490 पऱ,
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♡ एक् नया संसार ♡ (Full Storyd) – New Episode
Aapke likhawat aur kahani kaa kayal too pehle से hi thaa। halanki aapne jis trah har scene ko describe karte h.iss trah कोई बहुत hi अच्छा writter krr sakta h। Apka aur apki kahani ke lye too कोई ward hi nahii mil raha h.
Fantastic kahani sir jeeeeee
Keep updating।
बहोत बहोत धन्यवाद विक्रान्त भइया आपकीइस सुंदर प्रतिक्रिया औऱ शानदार रिव्यू केँ लिए,,,,,,,,,,भाग दे दिया हैं भइया,,,,,,,,पेज नंबर 490 पर्र,
mai 100% kehta ho woh dono saye ritu aur viraaj hi the joo mantri kee band bajane aye the super yar thank you is haseen update k liye
awesome fabulous update bhay yeh update bhot jabardast hain lagta hain mantri kee watt lagne wali hain yeh jarur viraj or aditaya hoga mantri k ghrr
♡ एक् नया संसार ♡ (Full Storyd) – New Episode
Halat ko madde nazar rakhte huye yeh बात kahin ja sakti h की abi tak palda biraj और ritu tarf hi bhari h। Pehli बात। jasush rane से एक bohot hi mahatpurn बात malum हुआ inlogo ko की ajay, chaudhary से मिला हुआ h। dusri biraj और ritu rath के andhere mai mantri के घर ghus। ayese chije dhund लिया tatha sath mai un chijo ko leke rath के andhero mai hi gayab hu gaye। yeh chije jarur mantri dwara kiye gaye Kale chithe के sabut sabit hoga।
hmm moorti mai अब bi apni betio के liye fikar h। yahi too mummy की mamta h। ajay क्या samjhega joh apne hi mata pita kaa accident karwa दिया। apne kukarm ko chupane के liye। ush से bi badi बात moorti ko अब mehsoos hu jana चाहिए की की bijay marne के बाद kitne aghat pahunche honge उसके mata pita dill ❤️ पर। और too और जब unhe sachhai kaa gyat हुआ की mara नहीं unkah beta balki maar दिया गया thaa.तब क्या beet rahi hongi un पर। time, time की बात h आज moorti bi ushi daur से guzar rahi h जब ushe yeh malum हुआ की ajay ne neelam pe goli chala di। Khair।
Let's see biraj और ritu aglaa step क्या lete h।
Brilliant update Shubham ji.great going
♡ एक् नया संसार ♡ (Full Storyd) - Next part miss mat karna
Jaisi apki marji Shubham dear. hamare request karne ya gaali dene say apko fark padta too. Isi story pr. iss dusri forum mai bi. main apki iss pratikriya ko nahee padh raha hotha. Ok. Do as you wish. Best regards from mai
Shubham bhay me yeh nahee kahunga kee gaaliyan nahee dunga itni achi kaha jb ap bech m rokke jaa rahe hu tho dukh tho hoga hi halanki ap koshish tho krr sakte hu na kee kahani ko samapt karne kee baki apki marji
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