♡ एक् नया संसार ♡ (Full Storyd) – New Episode
एपसोड.《 15 》
अब तक.
"देखते हें क्याँ होता हैं?" जगदीश नें कहने केँ संग हि पहलू बदला__"वैसे अबआगे कां क्याँ करने कां विचार हैं?"
"अभि औऱ कुछ नहि करना हैं। " सहसा गौरी नें हस्ताक्षेप किया__"अपनी पढ़ाई पर्र भि ध्यान देनाकुछ, यहकाम तौ होता हि रहेगा। "
"गौरी बेहनसही कहरही हैं राज। " जगदीश नें अपनेपन सें कहा__"कुछ दिन मे तुम्हारा काॅलेज भि शुरुआत होँ जाएगा इसलिए अपनेमन कों थोडा शान्त भि रखो। "
"मे भि यहीसोच रहाहूॅ। " विराज नें मुस्कुरा कर कहा__"कुछ दिनअजय सिंह कों भि अपनी हालत पर्र काबूपा लेना चाहिए। वर्ना कहींऐसा न् हौ कि हादसे पर्र हादसे देखकर वो हार्ट अटैक सें हि मरजाए। फिन किससे मे अपने तरीके सें इंतकाम लें सकूॅगा?"
"एक् केँ मर जाने सें क्याँ होता हैं भाई?" निधि नें कहा__"सभी उसके जैसे हि तोँ हें, उनका भि वहीहाल करना, हाॅ नहि तोँ। "
निधि कि बात पर्र सभी मुस्कुरा कररहगए।
अबआगे.
अजय सिंह कि हवेली मे इस टाइम बड़ा हि अजीब सां माहौल थां। ड्राइंगरूम मे रखे सोफों पऱ इस टाइम परिवार केँ करीबसब सदस्य बैठेहुए थें। अजय सिंह, प्रतिमा, शिवा, अभय सिंह, करुणा, दिव्या तथाअभय व करुणा कां दिमाग़ सें डिस्टर्ब बेटा शगुन। शगुन अपनीमाॅ करुणा केँ संग कि इस वक़्त शान्त बैठा थां कदाचित सभीकोई खामोश व गुमसुम बैठेहुए थें इसलिए उन सबको देखकर वो भि चुपचाप बैठा थां वर्ना आमतौर पर्र वो कोई न् कोई विचित्र सि हरकतें करता हि रहता थां। इन लोगों केँ बीच परिवार केँ दो सदस्य अभि अनुपस्थित थें, औऱ वोँ थींअजय सिंहव प्रतिमा कि दोनों बेटियाॅ। अजय कि छोटी बेटी नीलम मुम्बई मे हैं, हलाॅकि उसे फैक्टरी मे लगीआग कि वजह सें हुए भारी नुकसान कि सूचना दे दि गई थि औऱ वो मुम्बई सें निकल भि चुकी थि यहाॅआने केँ लिए। जबकि अजय सिंह कि बड़ी बेटी रितू सुभह पुलिस स्टेशन चली गई थि, क्योंकि आजउसे चार्ज सम्हालना थां। रितू कों अपने पिता केँ संगहुए हादसे कां दुख तौ थां मगर वोँ कर भि क्याँ सकती थि? हाॅयह अवश्य उसके दिमाग़ मे थां कि इसकेस कि छानबीन वोँ बारीकी सें स्वयं करेगी तथा इसकेसंग हि येपता भि लगाएगी कि यहसभी केसेहुआ??
(आप् सबको बताने कि ज़रूरत नहि हैं कि यहसभी लोगइस तरह गुमसुम सें क्यूं बैठेहुए थें। फिन भि बताना तौ हर लेखक कां फर्ज़ होता हैं कि वोँ हरबात कों विस्तार सें अपने पाठकों कों बताए भि औऱ समझाए भि। )
"क्याँ कुछपता चला भैया कि फैक्टरी मे किसवजह सें आगलगी थि?" सहसा वहाॅ पर्र फैलेइस सन्नाटे कों अभय सिंह नें अपनेकथन सें चीरते हुए कहा__"आपने तोँ कहा थां न् कि पुलिस औऱ फाॅरेंसिक डिपार्टमेंट केँ लोग इसकी बारीकी सें छानबीन कररहे थें?"
"किसी कों कोई सुराग़ नहि मिला छोटे। "अजय सिंह नें गंभीरता सें कहा__"सबका यही कहना हैं कि शार्ट सर्किट कि वजह सें फैक्टरी मे आगलगी थि। उसदिन क्योंकि अवकाश थां इसलिए फैक्टरी मे काम करने वाले वर्कर्स नहि थें। फैक्टरी केँ अंदरकोई नहि थां औऱ जौ वहाॅ पऱ गार्ड्स वगैरा थें वोँ सभी तौ बाहर् हि रहते हें इसलिए किसी कों पता हि नहि चला कि फैक्टरी केँ अंदरकब क्याँ हुआ?जब तक पताचला तब तक फैक्टरी केँ अंदरभरे कपड़ों केँ स्टाक मे आग पकड़ चुकी थि। फैक्टरी कां इन्ट्री गेट बाहर् सें लाॅक थां जिसकी चाभी मैनेजर केँ पास थि उसरात। मैनेजर किसीकाम सें बाहर् थां, तौ आनन फानन मे लाॅक तोड़ने कि कोशिश कि गई। लाकऐसा थां कि दरवाजे केँ अंदर सें कनेक्टेड थां जिसेखोल पाना आसान न् थां इस लोहे केँ दरवाजे कों फिन किसीतरह ट्रक द्वारा तोड़ना पड़ा। इस काम मे टाइमलग गय़ा जिसवजह सें आग नें उग्ररूप धारणकर लिया। फिन फायर ब्रिगेड वालों कों सूचित किया गय़ा। जब तक दमकल कि गाड़ियाॅ वहाॅ पहुॅची तब तक फैक्टरी केँ अंदरलगी आग बेकाबू होँ चुकी थि औऱ फिनसभी कुछ खाक़ होँ गय़ा। "
(आप् लोगसमझ हि गए होंगे कि अजय सिंहयह सभी बातें अपने सें बनाकर हि अभय सें कही थि। भला वोँ औऱ क्याँ बताता उन लोगों सें?)
"मे इसबात कों नहि मानती डैड। " सहसातभी ड्राइंगरूप मे इंस्पेक्टर कि वर्दी पहनेहुए अजय सिंह कि बेटी इंस्पेक्टर रितू नें दाखिल होतेहुए कहा।
पुलिस इंस्पेक्टर कि वर्दी मे बला कि सुंदर लगरही थि रितू। ऐसा लगता थां जैसेयह पुलिस कि वर्दी जन्म जन्मांतर सें बनी हि उसकेलिए थि। उसेइस रूप मे देखकर वहाॅ बैठेसभी लोगों कि आॅखें फटी कि फटीरह गईं। एकटक, अपलक देखते हि रहगए थें सभीलोग उसे। वर्दी कि टाइट फिटिंग मे उसके शरीर केँ वोँ सभी उभार स्पष्ट नज़र आँ रहे थें जिससे उसके भरपूर जवान हौ जाने कां पताचल रहा थां। अजय सिंहतथा शिवा कि आंखें कुछअलग हि नज़ारा कररही थि। यहबात किसी नें महसूस कि होँ याँ न् कि हौ लेकिन उन बाप बेटों कि फितरत सें बाखूबी परिचित प्रतिमा नें साफतौर पर्र महसूस किया। औऱ अभयव करुणा कि मौजूदगी कों ध्यान मे रखतेहुए उसने जल्दी हि उन बाप बेटों कों उनकी वास्तविक स्थित मे लें आने कि गरज सें लेकिन सावधानी सें कहा__"वाउ मेरी बेटी पुलिस कि वर्दी मे कितनी सुन्दर लगरही हैं, कहीं किसी कि नज़र नं लगजाए तुम्हे। चल मे तेरेकान केँ नीचे नज़र कां काला टीकालगा देतीहूॅ। "
"इसकीकोई ज़रूरत नहि हैं माॅम। " रितु नें हॅसकर कहा__"यहाॅ पऱ सभी अपने हि तौ बैठे हें। भला अपनों कि भि कहीं नज़र लगती हैं क्याँ?"
"क्याँ पता?" प्रतिमा नें एक् सरसरी सि नज़र अपने पति व बेटे पऱ डालीफिन बोलि__"लग भि सकती हैं। "
अजय सिंह औऱ शिवा दोनो हि प्रतिमा कि इसबात पर्र चौंके औऱ सम्हल करबैठ गए। यहदेख प्रतिमा मन हि मन मुस्कुराई थि।
"बहोत बहोत बॅधाई होँ रितू। " करूणा नें मुस्कुराकर कहा__"आज सें तुम् पुलिस वालीबन गई हौ। "
"शुक्रिया चाची जी। " रितू नें कहातथा एक् हाॅथ मे पकड़े हुए पुलिस रुल कों अपने दूसरे हाॅथ कि हॅथेली पर्र हल्के सें मारते हुए कहा__"मे आपकीइस बात कों नहि मानती डैड कि आपकी फैक्टरी मे लगीआग किसी शार्ट सर्किट कि वजह सें लगी हैं। "
"यह तुम् क्याँ कहरही होँ बेटी?" अजय सिंहमन हि मन उसकीइस बात सें चौंका थां लेकिन चेहरे पर्र उन भावों कों उजागर न् करतेहुए प्रत्यक्ष मे कहा__"अगर आग शार्ट सर्किट कि वजह सें नहि लगी हैं तोँ फिनकिस वजह सें लगी हैं? जबकि पुलिस औऱ फाॅरेंसिक डिपार्टमेंट केँ लोग अपनीछान बीन मे इसीबात कि पुष्टि करकेगए थें?"
"यही तोँ हैरानी कि बात हैं डैड। " रितू नें चहलकदमी करतेहुए कहा__"वोँ लोगउस बात कि पुष्टि करगए जिसका कहींकोई वजूद हि नहि थां, जबकि उसतरफ उन लोगों नें ज़रा भि ग़ौर नहि कियाजिस तरफ किसीबात केँ प्रमाण मिल जाने केँ किसीहद तक चान्सेस थें। "
"क्याँ मतलब हैं तुम्हारा?" अजय सिंहइस बारलाख कोशिशों केँ बाद भि अपने चेहरे पऱ बुरीतरह चौंकने केँ भाव न् छिपासका। वो तोँ चकित भि होँ गय़ा थां कि उसकी बेटी जोँ अब तक साधारण सि थि वोँ अबइसरूप मे ऐसी बातें भि करनेलगी थि। उसेसमझ नं आया कि उसकी बेटी केँ अंदरकौन सां जासूसी कीड़ा समा गय़ा हैं?
"मेरा मतलब तौ स्वीमिंगपुल मे भरे पानी कि तरहसाफ हि हैं डैड। "उधर रितू अजीब सें अंदाज़ मे अपने हि बाप कि धड़कने बढ़ाते हुएकह रही थि__"मुझे तौ ऐसा लगता हैं जैसे फैक्टरी मे छानबीन करनेआए पुलिस तथा फाॅरेंसिक डिपार्टमेंट केँ लोगछान बीन कि महज औपचारिकता निभाकर चलेगए हें। वर्ना इतने भीषण काण्ड कि इतनी मामूली सि वजहबता कर नहि चले जाते बल्कि कुछ औऱ हि पता करते। "
अजय सिंह अपनी पुलिस कि वर्दी पहने बेटी कों मुॅहबाए देखता रह गय़ा। कानों मे कहींदूर सें हथौड़े कि चोंट कां एहसास करनेलगा थां वोँ। फिन सहसा जैसेउसे वस्तुस्थित कां ख़याल आया तोँ बोला__"मतलब क्याँ हैं बेटी? क्याँ तुम् यह कहना चाहती हौ कि तुम्हारे हि पुलिस डिपार्टमेंट केँ लोगों नें अपनीछान बीन मे ग़लत रिपोर्ट दि हैं? जबकि तुम्हारे अनुसार उनकीइस रिपोर्ट केँ उलटकुछ औऱ हि रिपोर्ट निकल सकती थि? इससे तोँ यही ज़ाहिर होता हैं कि तुम्हें अपने हि पुलिस डिपार्टमेंट कि इसछान बीन केँ फलस्वरूप बनाई गई रिपोर्ट पर्र शक हैं?"
"मैंने यहकबकहा डैड कि मुझे अपने डिपार्टमेंट द्वारा सजधजकर कि गई रिपोर्ट पर्र शक हैं?" रितू नें कहा__"मैंने तोँ मात्र अपनीबात रखी हैं इस सिलसिले मे कि अगर औपचारिकता कि बजायठीक तरह सें छानबीन कि जाती तौ शायद निष्कर्श कुछ औऱ हि निकलता। "
"तुम्हारे कहने कां मतलब तोँ वहीहुआ बेटी। " अजय सिंह जाने क्याँ सोचकर लम्हा भर कों मुस्कुराया थां, फिन बोला__"तुम्हें लगता हैं कि तुम्हारे डिपार्टमेंट वालों नें अपनीछान बीन मे महज अपनी औपचारिकता निभाई हैं। इसका मतलब तोँ यहीहुआ कि उन्होंने तुम्हारी नज़र मे गंभीरता सें छानबीन हि नहि कि। "
"बिलकुल। " रितू नें कहा__"पऱ यहउन पर्र मेराकोई आरोप नहि हैं डैड। क्योंकि मुझेपता हैं सबका अपना अपना दिमाग़ होता हैं, औऱ सभी अपनेउसी दिमाग़ कि वजह सें किसी भि चीज़ कां रिजल्ट निकालते हें। जिसका जितना दिमाग़ चलता हैं वोँ उतना हि बता पाता हैं, मगर ज़रूरी नहि होता कि कोईसच उतने हि दिमाग़ सें निकलने वालासच कहलाए। ख़ैर जाने दीजिए.मे आपकोयह खुशख़बरी सुनाने आईहूॅ कि इसकेस कों मैंने रिओपेन किया हैं जिसके लिए मैंने कमिश्नर सें बड़ी मिन्नते कि थि। मुझे अंदेशा हैं कि मेरे डिपार्टमेंट नें ठीकतरह सें छानबीन नहि कि। इसलिए अबयहकेस मैंने स्वयं अपने हाॅथ मे लिया हैं औऱ अब मे स्वयं इसकी छानबीन करूॅगी। "
"क क्याँ????" अजय सिंहउछल पड़ा, चहरे पर्र पसीने कि बूॅदे झिलमिला उठीं। फिन जल्द हि उसने स्वयं कों सम्हालते हुए कहा__"भला इसकी क्याँ ज़रूरत थि बेटी? मेरा मतलब हैं कि मानलो यहपता लग भि जाए कि फैक्टरी मे आग वास्तव मे किसवजह सें लगी थि तोँ भि क्याँ होगा? क्याँ इससे वोँ सभी वापसमिल जाएगा जोँ जलकर खाक़ मे मिल चुका हैं?"
"मे मानती हूॅडैड कि अब वोँ सभीकुछ नहि मिल सकता जौ जलकर खाक़ हौ गय़ा हैं। " रितु नें कहा__"मगर छानबीन सें हकीक़त कां पता भि तोँ चलना चाहिए। आखिरपता तोँ चलना हि चाहिए कि फैक्टरी मे आग स्वयं लगी थि याँ किसी केँ द्वारा लगाई गई थि?"
"किसी केँ द्वारा?" सहसाइस बीचअभय नें कहा__"इसका क्याँ मतलबहुआ रितू बेटी?"
"मतलबसाफ हैं चाचा जी। " रितू नें अभय सें मुखातिब होकर कहा__"फैक्टरी मे आगअगर स्वयं नहि लगीरही होगी तोँ ज़ाहिर हैं किसी केँ द्वारा आग लगाई गई थि। उस सूरत मे प्रश्न यही उठता हैं कि किसने औऱ किसवजह सें फैक्टरी मे आग लगाई? आप् हि बताइए क्याँ यह जानना ज़रूरी नहि हैं कि हम् ऐसे इंसान कां पता लगाएं जिसने हमारी फैक्टरी कों आगलगा कर हमारा सभीकुछ बरबाद कर दिया?"
"बिलकुल बेटा। " अभय नें कहा__"अगर छानबीन मे यहीसच सामने आता हैं तोँ इसकापता तौ चलना हि चाहिए कि किसने यहसभी किया औऱ क्यूं किया?"
अजय सिंह केँ काॅनों मे सीटियाॅ सि बजनेलगी थि। उसकीसमझ मे नहि आँ रहा थां कि अब वो ऐसा क्याँ करे कि उसकी बेटी फैक्टरी कि दुबारा छानबीन न् करे? क्योंकि उसेपता थां कि अगर रितू नें दुबारा छानबीन शुरुआत कि तोँ वोँ सच्चाई भि सामने आँ जाएगी जिसको वो किसी भि कीमत पर्र सामने नहि लाना चाहता। पहले जोँ छानबीन हुई थि उसमें अजय सिंह नें ऊपरऊपर सें हि फैक्टरी कि छानबीन करवाई थि वोँ भि मात्र औपचारिकता केँ लिए। सभी उसके हि व्यक्ति थें, पुलिस भि औऱ फाॅरेंसिक डिपार्टमेंट केँ लोग भि। लेकिन अबयहकेस फिन सें रिओपेन होँ गय़ा, वोँ भि उसकी अपनी हि बेटी केँ द्वारा। उसेसमझ नहि आँ रहा थां कि अपनी बेटी कों दुबारा सें छानबीन करने सें केसे रोंके?
"रितू दिदी ठीक हि कहरही हें डैड। " सहसाइस बीच बहुतदेर सें चुपचाप बैठा शिवा भि अपने अंदाज़ मे कह उठा__"फैक्टरी कि दुबारा सें छानबीन तोँ होनी हि चाहिए। कम सें कम असलियत तोँ सामने आँ हि जाए कि किसने यहसभी किया हैं? शपथ सें डैड.जिसने भि यह किया होगा उसको छोड़ूॅगा नहि मे। कुत्ते सें भि बदतरमौत मारूॅगा उसे। "
"खामोशशशशश। " अजय सिंह करीब चीखते हुएकहा थां__"चुपचाप बैठो, नहि तोँ कमरे मे जाओ अपने। तुम्हें बीच मे बोलने कि कोई ज़रूरत नहि हैं समझे??"
"पर्र डैड मैंने ऐसा क्याँ ग़लतकह दिया?" शिवा नें बुरा सां मुॅह बनाते हुए कहा__"जिसकी वजह सें आप् मुझेइस तरह डाॅटकर चुपकरा रहे हें। "
अजय सिंह कां जी चाहा कि वो अपनेइस नालायक बेटे कों गोलीमार दे, लेकिन फिन बड़ी मुश्किल सें अपने गुस्से कों काबू मे किया उसने।
"मे तौ कहताहूॅ बेटी कि बेवजह हि तुम् इसकेलिए परेशान हौ रही हौ। " अजय सिंह नें बात कों किसीतरह सम्हालने कि गरज सें कहा__"क्योंकि अगरयह पताचल भि गय़ा कि फैक्टरी मे आग स्वयं नहि लगी थि बल्कि किसी केँ द्वारा लगाई गई थि तोँ तब भि यह केसेपता लगाओगी कि किसने यहसभी किया? वोँ जौ कोई भि रहा होगा वोँ इतना बेवकूफ नहि रहा होगा कि इतना बड़ा काण्ड करनेबाद अपने पीछे अपने हि खिलाफ कोई सबूत याँ कोई सुराग़ छोंड़ गय़ा होगा। क्योकि यह तोँ उसे भि भली भाॅति पता होगा कि इतनाकुछ करने केँ बादअगर वो पकड़ा जाएगा तोँ उसकेलिए अच्छा नहि होगा, बल्कि पकड़े जाने पर्र जेल कि सलाखों केँ पीछे पहुॅचा दिया जाएगा। "
"जुर्म चाहे जितनी होशियारी याँ सफाई सें कियाजाए डैड। " रितु नें कहा__"वो कहीं न् कहीं किसी नं किसीरूप मे ऐसा सबूत याँ सुराग़ अवश्य छोंड़ जाता हैं जिसकी बिना पर्र जुर्म करने वाले कों कानून केँ हाॅथों पकड़कर जेल कि सलाखों केँ पीछे पहुॅचा दियाजा सके। मुझे पूरा यकींन हैं डैड.जिसने भि यहसभी किया हैं वोँ अपने पीछे अपने हि खिलाफ सबूत याँ सुराग़ अवश्य छोंड़ कर गय़ा होगा। आप् स्वयं सरकारी वकीलरह चुके हें इसलिए यहबात आप् भि अच्छी तरह जानते हें कि मुजरिम केँ खिलाफ जबकोई एक् सबूत याँ सुराग़ कानून केँ हाॅथलग जाता हैं तौ फिन अधिक वक्त नहि लगताउस मुजरिम कों पकड़कर जेल कि सलाखों केँ पीछेडाल देने मे। "
अजय सिंह हैरान भि थां औऱ परेशान भि। हैरान इसलिए कि उसकी बेटी केँ मुख सें जिसतरह केँ डायलाॅग निकलरहे थें उसकी उसने कल्पना तक न् कि थि औऱ परेशान इसलिए कि अपनी हि बेटी द्वारा इस छानबीन कों करने सें वो किसी भि तरीके सें रोंक नहि पारहा थां। अपनी बेटी द्वारा छानबीन करने कि उसकी ज़िद कों देख उसकादिल बैठाजा रहा थां। हलाॅकि वो चाहता तौ बेटी कों ठेस लहजे मे कहकर इसकेलिए मनाकर देता लेकिन तब हालात औऱ बात दोनो हि बिगड़ जाते। उसकी बेटी केँ मन मे यह बिचार अवश्य उठता कि उसका बाप उसके द्वारा इस छानबीन कों न् करने पऱ इतना ज़ोर क्यूं देरहा हैं? बेटी क्योंकि अब पुलिस वालीबन चुकी थि इसलिए अब उसके सोचने कां नज़रिया बदल चुका थां। उसे तोँ अबहर व्यक्ति मे एक् मुजरिम नज़रआने लगा थां जिससे उसकी निगाह अब सबकोशक कि दृष्टि सें देखने लगी थि। इसलिए अजय सिंहअब यह किसी कीमत पऱ भि नहि चाह सकता थां कि किसी भि वजह सें उसके प्रति उसकी बेटी केँ सोचने कां नज़रिया बदलजाए।
"चलतीहूॅ डैड। " सहसा रितू नें अपनी हसीन कलाई पऱ बॅधी एक् कीमती घड़ी पर्र नज़रें डालते हुए कहा__"मे आपका पुलिस स्टेशन मे इंतजार करूॅगी। " फिन उसनेअभय कि तरफ भि देखकर कहा__"चाचा जी आपका भि। "
इतना कहने केँ बाद हि वो सुंदर बला पलटी औऱ लम्बे लम्बे डग भरती हुईँ ड्राइंगरूम सें बाहर् निकल गई। लेकिन उसके जाते हि वहाॅ पर्र ब्लेड कि धार जैसा पैना सन्नाटा भि खिंच गय़ा।
अजय सिंह कां दिल जैसे धड़कना भूल गय़ा थां। उसे अपनी आंखों केँ सामने अॅधेरा सां नज़रआने लगा। जाने क्याँ सोचकर वो तनिक चौंका तथासंग हि घबरा भि गय़ा। फिन एक् ठंडी साॅस खींचते हुए, तथा अपनी आॅखों कों मूॅदकर सोफे कि पिछली पुश्त सें अपनापीठ वसिर टिका दिया। आॅख बंद करते हि उसे फैक्टरी केँ बेसमेंट मे बनेउस कारखाने कां मंज़र दिख गय़ा जहां पर्र केवल औऱ केवल ग़ैर कानूनी चीज़ें मौजूद थि। यहसभी नज़रआते हि अजय सिंह नें पट सें अपनी आंखें खोल दि तथा एक् झटके सें सोफे पऱ सें उठा औऱ अपने कमरे कि तरफ भारी कदमों सें बढ़ गय़ा।
एपसोड हाज़िर हैं दोस्तो,,,,,,
आप् सबकी प्रतिक्रिया कां इंतजार रहेगा।
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शानदार भाग भइया
शुभ प्रभात।।।।।
मुश्किल वक्त कां सबसे बड़ा सहारा हैं “उम्मीद” जोँ एक् प्यारी सि मुस्कान देकर कानों मे धीरे-धीरे सें कहती हैं, "सभी अच्छा होगा"। इसी उम्मीद केँ संग कि नएसाल मे सभी अच्छा होगा.आप् सब कों नव वर्ष कि एक् बारफिन शुभकामनाएँ।
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Superbb.fantastic.mind blowing update bro
iss update ko padh krr बड़ा mazaa आया bro। Ritu ne police inspector के roop mai apne baap की haalat kharaab krr di। uskah policiya andaaj lajawab thaa,
Ab देखना hoga की ritu ko apne baap की asaliyat ptaa chalti h की नहीं ya phir उसका baap कोई jugaad karke iss chhanbeen ko rukwa dega। or अगर ritu ko apne baap की asaliyat ptaa chl gai too phir kaisa behave karegi woh apne baap के sath????
Ajay singh kaa beta shiva too nikamma hi nikal गया
And now waiting for the next update
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धन्यवाद भइया,,,,, आपको भि नयासाल मुबारक होँ तथादिल सें यह दुवा हैं कि आपकोहर समयढेर सारी खुशियाॅ औऱ कामयाबी मिले।
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