♡ एक् नया संसार ♡ (Full Storyd) – New Episode
Jabardast Update bhaii
Ajay singh n upri investigation kra के case बंद kra दिया
lekin ritu n reopen kra ke usse dra दिया
Ajay n बहुत Koisish की case ko phir से na reopen hu लेकिन ritu too piche padd gyii
Ab Ajay singh koshish karega की उसके karname ritu ke samne na aaye
Dekte hain aage क्या hotha hain
धन्यवाद भइया आपकीइस हसीन प्रतिक्रिया केँ लिए,,,,, अपनीराय औऱ सुझाव देते रहें.
Nice update bhay majaa ageya, ajay kee too poora wat laggeya, Viraj kam thaa kya joo Ritu bi pichey pargeyi naha dhokey, dekhtey hey kya hotha hey agey keep it up and as always waiting for
♡ एक् नया संसार ♡ (Full Storyd) – New Episode
Behad hi shandaar aur jabardast update bhay.
bhut khoob superb.
too Ritu ne kaman Apne hathon mai le li hain jisse Ajay की mmushkilen ghatne के bajay badhengi hi.
Sala Ajay aur Shiva in dono kaa कुछ n kuchh krna hi चाहिए.
Sale apni hi beti aur bahen की kha Jane wali nazro से dekh rahe hain chutiya sale.
Khair, dekhe क्या hotha h bhay ??
aur isilye,
Aage kaa intjar
♡ एक् नया संसार ♡ (Full Storyd) – New Episode
एपसोड.《 16 》
अब तक.
"चलतीहूॅ डैड। " सहसा रितू नें अपनी हसीन कलाई पऱ बॅधी एक् कीमती घड़ी पऱ नज़रें डालते हुए कहा__"मे आपका पुलिस स्टेशन मे इंतजार करूॅगी। " फिन उसनेअभय कि तरफ भि देखकर कहा__"चाचा जी आपका भि। "
इतना कहने केँ बाद हि वो सुंदर बला पलटी औऱ लम्बे लम्बे डग भरती हुई ड्राइंगरूम सें बाहर् निकल गई। लेकिन उसके जाते हि वहाॅ पऱ ब्लेड कि धार जैसा पैना सन्नाटा भि खिंच गय़ा।
अजय सिंह कां दिल जैसे धड़कना भूल गय़ा थां। उसे अपनी आंखों केँ सामने अॅधेरा सां नज़रआने लगा। जाने क्याँ सोचकर वो तनिक चौंका तथासंग हि घबरा भि गय़ा। फिन एक् ठंडी साॅस खींचते हुए, तथा अपनी आॅखों कों मूॅदकर सोफे कि पिछली पुश्त सें अपनापीठ वसिर टिका दिया। आॅख बंद करते हि उसे फैक्टरी केँ बेसमेंट मे बनेउस कारखाने कां मंज़र दिख गय़ा जहां पर्र मात्र औऱ मात्र ग़ैर कानूनी चीज़ें मौजूद थि। यहसभी नज़रआते हि अजय सिंह नें पट सें अपनी आंखें खोल दि तथा एक् झटके सें सोफे पऱ सें उठा औऱ अपने कमरे कि तरफ भारी कदमों सें बढ़ गय़ा।
अबआगे.
उस वक़्त दोपहर केँ करीब साढ़े ग्यारह याँ बारह केँ आसपास कां वक्त थां जबअजय सिंह, प्रतिमा वअभय सिंह रितू केँ कहे अनुसार फैक्टरी पहुॅचे। इन लोगों केँ संगअजय सिंह कां बेटा शिवा भि आनां चाहता थां लेकिन अजय सिंहउसे अपनेसंग नहि लाया थां। उसेडर थां कि कहीं वो किसी वक्तऐसा वैसा न् बोल बैठे जिससे कोईबात बिगड़ जाए। शिवाइस बात सें अपने स्वभाव केँ चलते नाराज़ तौ हुआमगर पिता केँ द्वारा सख़्ती सें मनाकर देने पऱ वो मन मसोसकर रह गय़ा थां।
फैक्टरी केँ अंदर जाने सें पहले कि तरह हि कानूनन अभि प्रतिबंध लगाहुआ थां। हलाॅकि पहले हुईँ छानबीन केँ मुताबिक प्रतिबंध हटाया हि जारहा थां कि ऐन वक्त पर्र रितू केँ द्वारा जबकेस फिन सें रिओपेन होँ गय़ा तौ प्रतिबंध पूर्वत् लगा हि रहा। इसकेसंग हि जाने क्याँ सोचकर इंस्पेक्टर रितू नें वहाॅ कि सिक्योरिटी भि टाइट करवा दि थि।
अजय सिंह नें अपनीतरफ सें कोशिश तौ बहोत कि कि उसे एक् बार फैक्टरी केँ अंदर जाने दियाजाए मगर उसकी एक् नं चली थि। उसेइस बात नें भि बुरीतरह हैरान व परेशान कर दिया थां कि इसशहर कां पूरा पुलिस डिपार्टमेंट हि बदल दिया गय़ा हैं। ऊॅची रैंक केँ सब अफसरों कां तबादला हौ चुका थां एक् दिन पहले हि। सभी-इंस्पेक्टर सें लेकर कमिश्नर तक सबका तबादला कर दिया गय़ा थां। अजय सिंहइस बात सें बेहद परेशान हौ गय़ा थां, पुलिस कमिश्नर उसका पक्का दोस्त थां जिसके एक् इशारे पर्र उसकाहर काम चुटकियों मे होँ जाता थां। अजय सिंह अपनीहार न् मानते हुए प्रदेश केँ मुख्यमंत्री सें भि संबंध स्थापित करइसकेस कों रफादफा करने कां दबाव बढ़ाने कों कहा लेकिन मुख्यमंत्री नें यहकहकर अपने हाॅथ खड़ेकर दिये थें कि वो ऐसाचाह कर भि नहि कर सकता क्योंकि ऊपर सें हाई कमान कां शख्त आदेश थां कि इसकेस सें संबंधित किसी भि प्रकार कि बात किसी केँ द्वारा नहि सुनी जाएगी औऱ न् हि किसी केँ द्वारा कोई हस्ताक्षेप किया जाएगा। पुलिस कों पूरी इमानदारी केँ संगइस केस कि छानबीन करने कि छूट दि जाए।
प्रदेश केँ मुख्यमंत्री कि इसबात नें अजय सिंह कि रहीसही उम्मीद कों भि तोड़ दिया थां। उसकी हालतउस ब्यक्ति सें भि कहीं ज़्यादा गई गुज़री हौ गई थि जिसे चलने केँ लिएदो दो बैसाखियों कां भि मोहताज होना पड़ता हैं। अजय सिंह कि समझ मे नहि आँ रहा थां कि एक् हि दिन मे यह क्याँ होँ गय़ा हैं? शहर केँ सारे पुलिस डिपार्टमेंट कां क्यूं तबादला कर दिया गय़ा?? औऱ.औऱऐसा क्याँ हैं जिसके चलते प्रदेश केँ सीएम तक कों अपने हाॅथ मजबूरीवश खड़ेकर देने पड़े?लाख सिर खपाने केँ बाद भि यहसभी बातें अजय सिंह कि समझ मे नहि आँ रहीथीं। वो इतना अधिक परेशान व हताश हौ गय़ा थां कि उसेहर तरफ मात्र औऱ मात्र अॅधेरा हि अॅधेरा दिखाई देनेलगा थां। ऐसा लगता थां कि वो चक्कर खाकर अभि गिर जाएगा। हलाॅकि वोँ यहसभी अपने चेहरे पर्र सें ज़ाहिर नहि होने देना चाहता थां लेकिन वो इसका क्याँ करे कि लाख कोशिशों केँ बाद भि दिलो दिमाग़ मे ताण्डव कररहे इस तूफान कों वो अपने चेहरे पऱ उभरआने सें रोंक नहि पारहा थां।
इंस्पेक्टर रितु पुलिस कि वर्दी पहनेकुछ ऐसेपोज मे खड़ी थि कि अजय सिंह कों वो किसी यमराज कि तरह नज़र आँ रही थि।
अजय सिंह अपनी हि बेटी सें बुरीतरह भयभीत हुआजा रहा थां। बारबार वो अपने रुमाल सें चेहरे पऱ उभरआते पसीने कों पोछरहा थां।
"मे आप् सबकोयह बताना चाहती हूॅ कि फैक्टरी कि इसके पहले हुइ छानबीन सें मेराकोई मतलब नहि हैं। " रितु नें अजय सिंह केँ संगआए बाॅकी सभी पऱ एक् एक् नज़र डालने केँ बादअजय सिंह सें कहा__"अब क्योंकि यहकेस फिन सें मेरे द्वारा रिओपेन हुआ हैं तोँ इसकेस कि छानबीन मे शुरुआत सें औऱ नए सिरे सें हि करूॅगी। उम्मीद करतीहूॅ कि आपकोइस सबसेकोई ऐतराज़ नहि होगा बल्कि इस छानबीन मे आप् स्वयं पुलिस कां पूरा पूरा सहयोग देंगे। "
"तुमने बेकार हि इसकेस कों रिओपेन किया हैं बेटी। " अजय सिंह नें नपे तुलेभाव सें कहा__"मे तौ कहताहूॅ कि अभि भि कुछ नहि हुआ हैं, अभि भि इसकेस कि फाइलबंद कि जा सकती हैं। कोई ज़रूरत नहि हैं इस सबकी, क्योंकि इससे वोँ सभीकुछ मुझे वापस तौ मिलने सें रहा जौ जलकर खाक़ होँ गय़ा हैं। "
"अबयहकेस रिओपेन होँ चुका हैं ठाकुर साहब। " रितु नें अपने हि बाप कों ठाकुर साहबकह कर संबोधित किया। अजय सिंहइस बात सें हैरान रह गय़ा, जबकि रितुकह रही थि__"औऱजब तक इसकेस सें संबंधित कोई रिजल्ट सामने नहि आतातब तक यहकेस क्लोज नहि होँ सकता। केस कों क्लोज करना मेरेबस मे नहि हैं बल्कि यहऊपर सें हि आदेश हैं कि केस कों अब अच्छी तरह सें हि किसी नतीजे केँ संगबंद कियाजाए। "
"ठीक हैं रितु बेटी। " सहसा प्रतिमा नें कहा__"तुम् अपनी ड्यूटी निभाओ, हम् भि देख्ना चाहते हें कि इस सबके पीछे किसका हाॅथ हैं?"
"मुआफ़ कीजिये, इससमय मे आपकी बेटी नहि बल्कि एक् पुलिस आॅफिसर हूॅ औऱ अपनी ड्यूटी कररही हूॅ। " रितु नें सपाट लहजे सें कहा__"एनीवे, तोँ शुरुआत करें ठाकुर साहब??"
रितु कि बात सें जहाॅ प्रतिमा कों एक् झटका सां लगा वहींअजय सिंह कि घबराहट बढ़ने लगी थि।
"मेरा सबसे पहला प्रश्न। " रितु नें कहा__"फैक्टरी मे आग लगने कि सूचना सबसे पहले आपको केसे हुइ?"
अजय सिंह क्योंकि समझ चुका थां इसलिए अब उसने भि अपने आपकोइस केस सें संबंधित किसी भि प्रकार कि छानबीन याँ तहकीकात केँ लिए सजधजकर कर लिया।
"फैक्टरी मे आग लगने कि सूचना उसरात करीब-करीब तीनबजे मेरेपीए केँ द्वारा मुझे मिली। "अजय सिंह नें कहा__"मे अपनी पत्नि केँ संग अपने कमरे मे उस टाइम सोयाहुआ थां, जब मेरेपीए कां मोबाइल आया थां। उसने हि बताया कि हमारी फैक्टरी मे आगलग गई हैं। "
"इसकेबाद आपने क्याँ किया?" रितू नें पूछा।
"मैनेवही किया। "अजय सिंहकह रहा थां__"जौ हर इंसान इन हालातों मे करता हैं। अपनेपीए केँ द्वारा मोबाइल पर्र मिली सूचना केँ जल्दी बाद हि मे वहां सें शहर केँ लिए निकल पड़ा। जब सुभह केँ प्रहर मे यहाॅ पहुॅचा तोँ सभीकुछ तबाह हौ चुका थां। "
"फैक्टरी पहुॅच कर आपने क्याँ ऐक्शन लिया?" रितू नें पूछा।
"किसी प्रकार कां ऐक्शन लेने कि हालत हि नहि थि उससमय मेरी। "अजय सिंह बोला__"अपनी आॅखों केँ सामने अपनासभी कुछ खाक़ मे मिल गय़ा देखहोश हि नहि थां मुझे। कुछ समझ मे हि नहि आँ रहा थां कि क्याँ करूॅ क्याँ न् करूॅ? वोँ तौ मेरेपीए नें हि बताया कि फैक्टरी मे आग लगने केँ बाद उसनेइस संबंध मे क्याँ क्याँ किया हैं?"
"मे आपकेपीए कां बयान लेना चाहती हूॅ। " रितू नें कहा__"आप् उन्हें बुला दीजिए प्लीज। "
अजय सिंह कों बुलाने कि ज़रूरत हि नहि पड़ी क्यूं पीए वहीं थां, औऱ पीए हि बस क्यूं बल्कि फैक्टरी केँ स्टाफ कां करीब-करीब हर ब्यक्ति वहाॅ मौजूद थां। सबकोपता हौ चुका थां कि फैक्टरी कि दुबारा छानबीन हौ रही हैं इसलिए हर ब्यक्ति उत्सुकतावश वहाॅ मौजूद थां।
अजय सिंह नें इशारे सें पीए कों बुलाया। वो जल्दी हि हाज़िर होँ गय़ा।
"आपकानाम?" रितु नें पीए केँ हाज़िर होते हि प्रश्न किया।
"जी मेरानाम दीनदयाल शर्मा हैं। " पीए नें बताया।
"ठाकुर साहब कि फैक्टरी मे कब सें ऐजअपीए कामकर रहे हें?" रितू नें पूछा।
"जी करीबछः साल होँ गए। "दीन दयाल नें कहा।
"छः साल बहुत लम्बा वक़्त होता हैं यह तोँ आप् भि जानते होंगे?" रितु नें अजीबभाव सें कहा__"कहने कां मतलबयह कि इनछः सालो मे आपको अपने मालिक औऱ उनकेकाम केँ बारे अच्छी तरह जानकारी होगी। "
"जी शायद। " दीनदयाल नें अनिश्चित भाव सें कहा__"शायद शब्दइस लिएकहा कि छःसाल अपने मालिक केँ नजदीक रहकर भि यहबात मे दावे केँ संग नहि कह सकता कि मे उनके औऱ उनकेकाम केँ बारे मे पूरीतरह हि जानता हूॅ। बहोत सि बातें ऐसी होती हें जोँ कोई भि मालिक अपने किसी नौकर कों बताना ज़रूरी नहि समझता। "
"आपने बिलकुल ठीककहा। " रितू नें कहा__"खैर, तौ अब आप् बताइये कि उसरात क्याँ क्याँ औऱ किसतरह हुआ?"
"जजी क्याँ मतलब?" दीनदयाल चकराया।
"मेरे कहने कां मतलब हैं कि जिसरात फैक्टरी मे आगलगी थि। " रितू नें कहा__"उस रात कि सारी बातें आप् विस्तार सें बताइए। "
दीनदयाल नें कुछ लम्हा सोचाफिन वोँ सभी बताता चला गय़ा जोँ उसरात हुआ थां। उसनेवही सभी बताया जौ हवेली मे अभय सिंह सें पूछने पर्र अजय सिंह नें उसे बताया थां औऱ उधर मुम्बई मे निधि नें सबको अखबार केँ माध्यम सें बताया थां। (दोस्तो, आप् सबको भि पता हि होगा)
सभी कुछ सुनने केँ बाद रितू नें गहरी साॅसली औऱ वहीं पर्र चहलकदमीं करतेहुए कहा__"तौ आपकी औऱ पुलिस कि छानबीन केँ बाद रेडी कि गई रिपोर्ट केँ अनुसार फैक्टरी मे आग लगने कि मुख्य वजह मात्र सार्ट शर्किट हि हैं?"
"जी पुलिस नें तौ अपनीयही रिपोर्ट छानबीन केँ बाद रेडी करके दि थि। " दीनदयाल नें कहा।
"क्याँ आपनेइस बात पऱ विचार नहि किया याँ फिन क्याँ आपनेइस नज़रिये सें नहि सोचा कि फैक्टरी मे आग किसी केँ द्वारा लगाई गई भि होँ सकती हैं?" रितू नें पूछा थां।
"इस बारे मे नं सोचने कि भि वजह थि इंस्पेक्टर। " सहसाअजय सिंह नें कमान सम्हालते हुए कहा__"दरअसल जिसदिन फैक्टरी मे आगलगी थि उसदिन सब वर्कर्स केँ लिए अवकाश थां। इसलिए उसरात फैक्टरी मे कोई थां हि नहि। औऱ जबकोई थां हि नहि तोँ भलाइस बारें मे केसेकह सकते थें किसी अन्य केँ द्वारा फैक्टरी मे आगलगी?"
"चलिएमान लिया कि उसरात अवकाश केँ चलतेकोई भि वर्कर फैक्टरी मे नहि थां। " रितू नें कहा__"लेकिन प्रश्न यह हैं कि अवकाश केँ चलते क्याँ कोई भि फैक्टरी मे नहि थां? जहाॅ तक मुझेपता हैं तौ इतनी बड़ी फैक्टरी मे अवकाश केँ चलतेहर कोई फैक्टरी सें नदारद नहि हौ सकता। मतलब फैक्टरी कि सुरक्षा ब्यवस्था केँ लिए वहाॅ गार्ड्स मौजूद होते हें औऱ बहोत मुमकिन हैं कि फैक्टरी केँ स्टाफ मे सें भि कोई नं कोई फैक्टरी मे मौजूद रहता हैं। "
"बिलकुल इंस्पेक्टर। " अजय सिंह नें कहा__"हप्ते मे एक् दिन फैक्टरी बंद रहती हैं इसलिए फैक्टरी मे काम करने वाले मजदूरों कों अवकाश दे दिया जाता हैं। मगरउस अवकाश वालेदिन ऐसा नहि होता कि पूरी फैक्टरी सुनसान हौ जाती हैं, बल्कि फैक्टरी कि देखरेख औऱ उसकी सुरक्षा ब्यवस्था केँ लिए वहाॅ पऱ चौबीसों घंटे सिक्योरिटी गार्ड्स रहते हें तथा फैक्टरी स्टाफ केँ भि कई मेंबर फैक्टरी मे रहते हें। " इतना कहने केँ बादअजय सिंह एक् समय रुकाफिन कुछसोच कर बोला__"अगर तुम्हारा ख़याल यह हैं इंस्पेक्टर कि इन्हीं सभी लोगों मे सें हि किसी नें फैक्टरी मे आग लगाई हौ सकती हैं तौ तुम्हारा ख़याल ग़लत हैं। क्योकि यहसभी मेरे सबसे ज़्यादा फरोसेमंद व्यक्ति हें जिनकी ईमानदारी पर्र मुझेलेस सिर्फ भि शक नहि हैं। "
"अपने आदमियों पऱ भरोसा करना बहोत अच्छी बात हैं ठाकुर साहब। " रितू नें कहा__"मगर अंधा विश्वास करनाकोई सबझदारी नहि हैं। ख़ैर, तौ आपके कहने कां मतलब हैं कि फैक्टरी सें रिलेटेड किसी भि ब्यक्ति नें फैक्टरी मे आग नहि लगाई हौ सकती?"
"बिलकुल। " अजय सिंह नें जोर देकर कहा__"इन पर्र मेरायह भरोसा हि हैं वर्ना अगर भरोसा नहि होता तौ मे पहले हि इनसभी पर्र इस सबकेलिए शक ज़ाहिर करता औऱ तुम्हारे पुलिस डिपार्टमेंट सें इस बारे मे तहकीकात करने कि बात कहता। औऱ एक् समय केँ लिएअगर मे यहमान भि लूॅ कि मेरे आदमियों मे सें हि किसी नें यहकाम किया हौ सकता हैं तब भि यह साबित नहि होँ सकता। क्योकि अवकाश वालेदिन फैक्टरी मे तालालगा होता हैं औऱ बाकी केँ फैक्टरी स्टाफ मेंबर फैक्टरी सें अलग अपनी अपनी डेस्क याँ केबिन मे होते हें। यहाॅ पर्र अगरयह तर्क दियाजाए कि अवकाश सें पहले हि याँ फैक्टरी मे ताला लगने सें पहले हि किसी नें ऐसाकुछ कर दिया होँ जिससे फैक्टरी केँ अंदरआग लगजाए तब भि यह तर्कसंगत नहि हैं। क्योकि यह तौ हर स्टाफ मेंबर जानता हैं कि फैक्टरी मे हुए किसी भि हादसे सें सबसे पहले उन्हीं पर्र हि शक किया जाएगा, उस सूरत मे उन पऱ कड़ी कार्यवाही भि कि जाएगी औऱ अंततः वोँ पकड़े हि जाएॅगे। इसलिए कोई भि स्टाफ मेंबर जानबूझ कर अपने हि पांव मे कुल्हाड़ी मार लेने वालाकाम करेगा हि नहि। "
"आपके तर्क अपनी स्थान बिलकुल ठीक हें ठाकुर साहब। " रितु नें एक् हाॅथ मे पकड़े हुए पुलिसिया रुल कों अपने दूसरे हाॅथ कि हॅथेली पऱ हल्के सें मारते हुए कहा__"अब इसीबात कों अपने फैक्टरी स्टाफ केँ नज़रिये सें देखकर ज़रा ग़ौर कीजिए। कहने कां मतलबयह कि मान लीजिए कि मे हि वोँ फैक्टरी कि स्टाफ मेंबर हूॅ जिसने फैक्टरी मे आग लगाई हैं औऱ मे यहबात अच्छी तरह जानती हूॅ कि मेरे द्वारा किएगए काण्ड सें आपकाशक सबसे पहलेमुझ पर्र हि जाएगा जोँ कि स्वाभाविक हि हैं, इसलिए आपके मुताबिक मे यहकाम नहि कर सकती, क्योंकि सबसे पहलेमुझ पऱ हि शक जाने सें मे फॅस जाऊॅगी, यह आप् सोचते हें। जबकि मैंने आपकीसोच केँ उलटयह कामकर हि दिया हैं औऱ आप् सोचते रहें कि मैंने यहकाम नहि किया होँ सकता। "
"दिमाग़ तोँ तुमने काबिले-तारीफ़ लगाया हैं इंस्पेक्टर। " अजय सिंह नें मुस्कुराकर कहा__"यकीनन तुमने दोनो पहलुओं केँ बारे मे बारीकी सें सोचकर तर्कसंगत विचार प्रकट किया हैं मगरयह एक् संभावना केवल हि हैं, कोई ज़रूरी नहि कि इसमें कोई सच्चाई हि हौ। "
"सच्चाई कां हि तौ पता लगाना हैं ठाकुर साहब। " रितु नें कहा__"औऱ उसकेलिए हर किसी केँ बारे मे दोनों पहलुओं पऱ सोचना हि पड़ेगा। ख़ैर, मुझेऐसा लगता हैं कि आप् हि इस प्रकार सें सोच विचार नहि करना चाहते, जबकि ऐसा होना नहि चाहिए। यह सोचने वालीबात हैं। "
अजय सिंहयह सुनकर एक् समय केँ लिए गड़बड़ा सां गय़ा। फिन जल्दी हि सहलकर बोला__"ऐसा कुछ नहि हैं इंस्पेक्टर। मे तौ बसइसलिए नहि सोच विचार कररहा क्योंकि मेरे हिसाब सें इस सबका रिजल्ट पहले निकाला जा चुका हैं। "
अजय सिंह कि इसबात सें रितू नें कुछ न् कहा बल्कि बड़े ग़ौर सें अपने पिता केँ चेहरे कि तरफ देखती रही। ऐसा लगा जैसे कि वो अपने पिता केँ चेहरे पर्र उभररहे कईतरह केँ भावों कों समझने कि कोशिश कररही हौ। वहींअजय सिंह नें जब अपनी बेटी कों अपनीतरफ इसतरह गौर सें देखते हुए देखा तौ उसे बड़ा अजीब सां महसूस हुआ। उससे नज़रें मिलाने मे उसकी हिम्मत जवाब देनेलगी। उसेलगा कहींऐसा तोँ नहि कि उसकी बेटी उसके चेहरे केँ भावों कों पढ़कर हि सारासच जान गई हौ। इस एहसास नें उसे अंदर तक कॅपकॅपा कररख दिया। बड़ी मुश्किल सें उसने स्वयं कों सम्हालते हुए कहा__"क्याँ हुआ इंस्पेक्टर, इसतरह क्यूं देखरही हौ मुझे? अपनी कार्यवाही कों आगे बढ़ाओ। "
"देखरही हूॅ कि आपके चेहरे पर्र उभरते हुए अनगिनत भावकिस बात कि गवाही देरहे हें?" रितू नें अजीब सें भाव सें कहा।
"क क्याँ मतलब??"अजय सिंह बुरीतरह चौंका थां।
"जाने दीजिए। " रितू नें कहा__"देखिए फारेंसिक डिपार्टमेंट वाले भि आँ गए। आइए फैक्टरी केँ अंदर चलते हें। "
अजय सिंह एकाएक अंदर हि अंदर बुरीतरह घबरा सां गय़ा। उसे तोँ लगनेलगा थां कि बातें अब तक उसके पक्ष मे हि हें औऱ इतनी पूछताॅछ केँ बाद कार्यवाही बंदकर दि जाएगी। मगरउसे अब महसूस हुआ कि यहसभी तौ महज एक् औपचारिक पूछताॅछ थि असली छानबीन तौ अब शुरुआत होगी।
फाॅरेंसिक डिपार्टमेंट कि टीम आँ चुकी थि तथा खोजी दस्ता भि। गाड़ियों सें निकलकर सभी बाहर् आँ गए। अजय सिंहउस समय औऱ बुरीतरह चौंका जब गाड़ियों केँ अंदर सें कुछ कुत्ते बाहर् निकले। अजय सिंह कों समझते देर नं लगी कि यह कुत्ते इस सबकी छानबीन मे उन सबकीमदद केँ लिए हि हें।
समयभर मे हि अजय सिंह कि हालत ख़राब हौ गई। इस सबके बारे मे उसने सपने तक मे नं सोचा थां। आज पहलीबार उसेलगा कि अपनी बेटी रितू कों पैदा करके उसने बहोत बड़ीभूल कि थि।
दोस्तो भाग हाज़िर हैं.
मुआफ़ करना मैंने यहीं पऱ कुछ सोचते हुएइस एपसोड कों विराम दे दिया हैं। अपनीराय औऱ सुझाव देते रहिए,,,,,,
कुछ प्रश्न हें आप् सबकेलिए,,
क्याँ लगता हैं आपकोइस छानबीन कों अजय सिंह रोंक पाएगा याँ नहि????
क्याँ इंस्पेक्टर रितू कों यहपता चलेगा कि किसवजह सें फैक्टरी मे आगलगी थि?????
छानबीन केँ दौरान केसे हालात बनेंगे?????
छानबीन मे अजय सिंह कि असलियत सामने आएगी कि नहि.औऱ अगर आएगी तोँ क्याँ सीन होगाउस टाइम???
असलियत कां पता चलने केँ बादअभय सिंह कां क्याँ रियेक्शन होगा????
अजय सिंह कि असलियत स्वयं उसकी पत्नि प्रतिमा कों पता हैं कि नहि?????
ऐसे बहोत सें प्रश्न हें दोस्तो.आप् भि अपना अपना विचार ब्यक्त कीजिए औऱ अगले एपसोड सें अपने विचारों कां मिलान कीजिए कि आपके विचार कहाॅ तक सही थें।
शुक्रिया,,,,,
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