♡ एक् नया संसार ♡ (Full Storyd) – New Episode
♡ एक् नया संसार ♡
एपसोड.《 29 》
अब तक,,,,,,,,,,
ऐसे हि वक़्त गुज़रता रहा। इसी बीच मुझे एक् बेटी हुई औऱ दसदिन बाद करुणा नें भि एक् खूबसूरत सि बच्ची कों जन्म दिया। राज उस टाइमचार साल कां हौ गय़ा थां। वोँ दिनभर अपनीउन दोनो बहनों केँ संग हि रहता, औऱ उनकेसंग हि हॅसता खेलता। शहर सें बड़े भाई औऱ दिदी भि आए थें। सबकेलिए कपड़े भि लाए थें। हम् सभी बेहदखुश थें इस सबसे।
इस बीच एक् परिवर्तन यहहुआ कि बड़े भाई शहर सें हप्ते मे एक् दोदिन केँ लिए हवेली आनेलगे थें। माॅ बाबूजी सें वोँ बड़े सम्मान सें बातें करते औऱ खेतों पर्र भि जाते। वहाॅ देखते सुनते सभी। मे औऱ करुणा घऱ केँ सारेकाम करती। उसकेबाद मे खेतचली जाती विजयजी केँ पास। खेतों मे जोँ घर-मकान बनरहा थां वोँ बन गय़ा थां।
इसबीच बच्चे भि बड़े होँ रहे थें। राज पाॅचसाल कां हुआ तौ उसका विद्यालय मे दाखिला करा दियाअभय नें। गर्मियों मे जब विद्यालय कि छुट्टियाॅ होती तोँ बड़े भाई औऱ दिदी केँ बच्चे भि शहर सें गाॅव हवेली मे आँ जाते। सभी बच्चे एक् संग खेलते औऱ खेतों मे जाते। बड़े भाई कि बड़ी बेटी रितू अपनीमाॅ पर्र गई थि। वोँ ज़्यादा हम् लोगों सें घुलती मिलती नहि थि। शिवा अपने बाप पऱ हि गय़ा थां। वो अपनी चीज़ें किसी कों नहि देता थां औऱ दूसरों कि चीज़ें लड़ झगड़कर लें लेता थां। राज सें अक्सर उसकी लड़ाई हौ जाती थि। बच्चे तौ नासमझ होते हें उन्हें अच्छे बुरे कां ज्ञान कहाॅ होता हैं। इसलिए अगर इनकीआपस मे कभी लड़ाई होती तोँ जेठानी जी अक्सर नाराज़ होँ जातीथीं। बड़ी मुश्किल सें गर्मियों कि छुट्टियाॅ कटती औऱ जेठानी जी अपने बच्चों कों लेकरशहर चली जातीं।
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अबआगे,,,,,,,,,,,,
प्रतिमा अपने पति केँ संगजब अपने कमरे मे पहुॅची तोँ अचानक हि पीछे सें अजय नें उसे अपनी गिरफ्त मे लेँ लियासंग हि अपने होठों कों उसकी गर्दन पऱ लगाकर करतेहुए अपने दोनो हाथों सें प्रतिमा केँ बड़े बड़े चूॅचों कों बुरीतरह मसलने लगा।
"आऽऽऽह धीरे-धीरे सें प्लीज़। " प्रतिमा कि दर्द औऱ मज़े मे डूबीअहह निकल गई थि, बोलीं___"ज़रा धीरे-धीरे सें आहहहहह मसलो न् अजय। मुझे दर्द हौ रहा हैं। "
"यह धीरे-धीरे सें मसलने वाली चीज़ नहि हैं मेरीजान। " अजय सिंह नें उसीतरह प्रतिमा केँ चूॅचों कों मसलते हुए कहा__"इन्हें तौ आटे कि तरह गूॅथा औऱ मसला जाता हैं। देखलो मे वहीकर रहाहूॅ। "
"वोँ तौ मे देख हि रहीहूॅ। " प्रतिमा नें आहें भरतेहुए कहा___"पऱ मुझेयह नहि समझ आँ रहा कि इस वक्त तुम् यहसभी इतने उतावलेपन सें क्यूं कररहे हौ? आख़िर किसबात कां जोशचढ़ गय़ा हैं तुम्हें?"
"मत पूछो डियर। "अजय सिंह नें स्वयं अहह सि भरतेहुए कहा___"इस हवेली मे आज एक् औऱ चूॅत आँ गई हैं। मेरी छोटी बेहन कि प्यारी प्यारी सि चूॅत। ओह काश! उसकीउस चूॅत कों पेलने कां मौकामिल जाए तोँ शपथ सें मजा आँ जाए प्रतिमा। "
"हे ईश्वर। " प्रतिमा उछल पड़ी__"तोँ इसवजह सें जोश चढ़ाहुआ हैं तुम्हें? शपथ सें अजय तुम् न् कभी नहि सुधर सकते। तुम्हारे हि नक्शे कदम पऱ हमारा बेटा भि चलरहा हैं। मैने हज़ार बार देखा हैं उसे, उसकी नज़रें अपनी बहनों पऱ हि नहि स्वयं मुझ पर्र भि गड़ जाती हें। उसेयह भि ख़याल नहि कि मे उसकीमाॅ हूॅ। यह सभी तुम्हारी वजह सें हैं अजय। तुम् स्वयं उसकी ग़लतियों कों नज़रअंदाज़ करते रहते होँ। "
"अरे तोँ क्याँ हौ गय़ा मेरीजान?" अजय नें प्रतिमा कों उठाकर बेड पऱ लेटा दिया औऱ फिन उसकेऊपर आकर बोला___"नज़रें तोँ होती हि हें नज़ारा करने केँ लिए। तुम् तीनोमाॅ बेटियाॅ होँ हि इतनी हाॅट एण्ड सेक्सी कि हमारे बेटे कां भि इमानडोल गय़ा। "
"तुम्हारे बेटे कां बसचले तोँ अपनीमाॅ बहनों कों भि अपने नीचे लेटाकर पेलदे। " प्रतिमा नें हॅसकर कहा थां।
"तोँ इसमें दिक्कत क्याँ हैं डियर?"अजय नें बेशर्मी सें हॅसते हुए कहा__"उसे भि अपनी कुण्ड कां अमृत पिलादो। शायद उसकी प्यास औऱ उतावलापन मिट हि जाए। "
"ओह अजयकुछ तोँ लज्जा करो। " प्रतिमा नें हैरानी सें देखा__"भला ऐसा मे केसेकर सकतीहूॅ? वोँ मेरा बेटा हैं, मैनेउसे पैदा किया हैं। "
"तोँ क्याँ हुआ मेरीजान?" अजय नें अपना एक् हाॅथ सरकाकर प्रतिमा कि साड़ी कों ऊपरकर उसकी नंगी चूॅत कों मसलते हुए कहा___"इसी रास्ते सें हि पैदा किया नां अपने बेटे कों? अबइसी रास्ते कां स्वाद भि चखादो उसे। यकीन मानो मेरीजान उसकेबाद तुम्हारा बेटा तुम्हारा गुलाम नाँ हौ जाए तौ कहना। "
"उफफफफ अजय तम्हें ज़रा भि एहसास नहि हैं कि तुम् क्याँ बकवास कियेजा रहे होँ?" प्रतिमा नें नाराज़गी भरे लहजे सें कहा__"तुम् मुझेऐसा करने केँ लिए केसेकह सकते हौ? क्याँ तुम्हें ज़रा सि भि इसबात सें तक़लीफ़ नहि होगी कि हमारा बेटा तुम्हारी चीज़ों कां भोगकरे? किस मिट्टी केँ बने हौ तुम् दोस्त?"
"दोस्त तौ कौन सां घिस जाएगी तुम्हारी यहरस सें भरी हुईँ बुर?" अजय नें अपने हाॅथ कि दो उॅगलियाॅ प्रतिमा कि रिसरही बुर मे अंदर तक डालकर कहा___"एक् बार अपने बेटे कां हथियार भि तोँ डलवाकर मजालो। सक्सेना केँ संग तौ बड़ामजा करती थि तुम्। दोदो हथियारों सें आगे पीछे सें पेलवाती थि तुम्। शपथ सें डियर, अगर ऐसा होँ जाए तौ मजा हि आँ जाए। हम् दोनो बाप बेटे एक् संगमिल कर तुम्हारी आगे पीछे सें ठुकाई करेंगे। "
"आआआहहहहह अजय। " प्रतिमा नें मदहोशी मे कहा___"मत करोऐसी बातें। मुझेकुछ हौ रहा हैं। "
"हाहाहाहा जबऐसी बातों सें हि तुम्हें कुछ होनेलगा हैं तोँ ज़रा सोचो डार्लिंग। " अजय नें हॅसते हुए कहा___"सोचो डियरतब क्याँ होगाजब हम् दोनो बाप बेटों केँ हथियार तुम्हारी पेलाई करेंगे?"
"शशशशशशश कुछकरो अजय। " प्रतिमा कि हालत ख़राब___"जल्द सें कुछकरो। मेरी बुर मे आग जलनेलगी हैं। इसे बुझाओ जल्द। वरना मे इसआग मे जल जाऊॅगी। "
"क्याँ करूॅ डियर?"अजय मुस्कुराया थां।
"कुछ भि करो। " प्रतिमा नें बेडसीट कों दोनो हाथों कि मुट्ठियों मे भींचते हुए कहा___"पऱ मेरीइस आग कों शान्त करो जल्द। उफफफयह आज क्याँ होँ रहा हैं मुझे??"
"आज बेटे केँ हथियार कि बातचली हैं नां इसलिए शायदऐसा हौ रहा हैं तुम्हें। " अजय नें कहा__"पर्र बेटे कां हथियार तौ इस टाइम यहाॅ नहि हैं मेरीजान। बोलो तौ मोबाइल करकेशहर सें बुलालूॅ उसे?"
"उसे तौ आने मे वक़्त लगेगा अजय। " प्रतिमा नें आहें भरतेहुए कहा___"तुम्हें हि इसआग कों शान्त करना पड़ेगा। शशश जल्द मुझे पेलो नां अजय। "
"इसका मतलब तुम्हें अपने बेटे सें पेलवाने मे अबकोई ऐतराज़ नहि हैं। " अजय मुस्कुराया।
"मुझे तुम्हारी किसीबात सें कभीकोई ऐतराज हुआ हैं क्याँ?" प्रतिमा नें झटके सें उठकरअजय केँ कपड़े उतारना शुरुआत कर दिया थां, बोलि___"मे तौ तुम्हारी हर जायज़ नाजायज़ बात कों अब तक मानती हि आँ रहीहूॅ। अब जल्द सें मुझेआगे पीछे पेलो। बहोत आगलगी हुई हैं। "
"ठीक हैं फिनकल हम् दोनोशहर चलेंगे औऱ वहीं पऱ अपने बेटे केँ संग थ्रीसम करेंगे। " अजय नें कहा।
"जोँ तुम्हारी मर्ज़ी मगर अभि तौ मुझे शान्त करो। " प्रतिमा नें अजय कों नंगाकर दिया थां।
अजय नें प्रतिमा कि दोनो टाॅगों कों अपने दोनों कंधों पर्र रखा औऱ पोजीशन बनाकर प्रतिमा पऱ छाताचला गय़ा। कमरे केँ अंदर जैसे एकाएक कोई भारी तूफान आँ गय़ा थां।
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फ्लैशबैक________
उधर मुम्बई मे,
कुछ लम्हा रुकने केँ बाद गौरी नें गहरी साॅसली उसकेबाद फिन सें कहा___"ऐसे हि कुछसाल गुज़र गए। सभी कुछ बहोत अच्छा चलरहा थां। राज़अब बड़ा हौ गय़ा थां। उस वक्त वो दस जमात मे पढ़रहा थां। पढ़ने लिखने मे वो शुरुआत सें हि तेज़ थां क्योंकि उसकी पढ़ाई कि सारी जिम्मेदारी अभय औऱ करुणा पर्र थि। विजयजी नें बाबूजी केँ लिए एक् बढ़िया सि वाहन खरीद दि थि तथाअभय केँ लिए एक् बुलेट मोटर साइकिल।
अब कि बारजब गर्मियों कि छुट्टियाॅ हुईं तौ फिन सें जेठ जेठानी अपने बच्चों केँ संगशहर सें गावआए। लेकिन इसबार हालातों मे बहोत बड़ा बदलाव होँ चुका थां।
गौरी कि नज़रें सामने एक् बड़े सें टेबल पर्र रखे काॅच केँ एक् बड़े सें जार मे टिकी थि। जिसजार मे भरेहुए पानी पर्र रंग बिरंगी मछलियाॅ तैररही थि। उसी काॅच केँ जार मे गौरी एकटक देखेजा रही थि। जैसे वहाॅकोई फिल्म चलरही हौ। एक् ऐसी फिल्म जौ गुज़रे हुएकल कां एक् हिस्सा थि।
"कल सें हि तुम् अपनेकाम मे लगजाओ मेरीजान। " अपने कमरे मे बेड केँ एक् तरफ बैठेअजय नें प्रतिमा सें कहा___"हमें किसी भि कीमत पऱ उस मजदूर कों अपने काबू मे करना हैं। "
"औऱ अगर उसनेकोई शोर खड़ाकर दिया तोँ?" प्रतिमा नें तर्क दिया___"तब तौ मे इसघऱ मे किसी कों मुह दिखाने केँ काबिल भि नं रह जाऊॅगी। "
"ऐसाकुछ नहि होगा। "अजय नें पुरज़ोर लहजे मे कहा___"मुझे पता हैं वोँ सालाइस बारे मे किसी कों कुछ नहि बताएगा। औऱ अगर उसनेइस सबमें ज़्यादा चूॅचाॅ कि तौ उसके इलाज़ केँ लिए भि फिन प्लान बी अपनाया जाएगा। "
"औऱ प्लान बी क्याँ हैं?" प्रतिमा नें मुस्कुराते हुए पूछा थां।
"प्लान बीयह हैं कि तुम्हारी उन हरकतों सें अगर वो घऱ मे किसी सें कुछ कहता हैं औऱ अगर सारीबात तुम् पर्र हि आती हैं तौ तुम् उल्टा उस पर्र हि इल्ज़ाम लगाना। " अजय सिंहउसे समझारहा थां___"चीख चीखकर सबसेयही कहना कि विजय स्वयं कईदिन सें तुम्हारी इज्जत लूटने केँ चक्कर मे थां। बाद मे फिन मे हूॅ हि इन हालातों कों अंजाम तक लें जाने केँ लिए। "
"तुम् क्याँ करोगे उस सूरत मे?" प्रतिमा नें पूछा।
"वोँ सभी तुम् मुझ पऱ छोंड़ दो। "अजय नें कहा___"अभि उतना हि करो जितना कहा हैं। इधर मे भि अपनेकाम मे लग जाताहूॅ। "
"ठीक हैं। " प्रतिमा नें कहा___"मगर अभय औऱ करुणा सें सावधान रहना। अभय कि तरह करुणा भि ज़रा तेज़ तर्रार हैं। "
"चिन्ता मतकरो। " अजय नें कहा___"सबको देख लूॅगा एक् एक् करके। पहलेइन दोनो सें तौ निपटलूॅ। "
"ठीक हैं। " प्रतिमा नें कहा___"आज विजय कां खानां लेकर मे जाऊॅगी। गौरी कि तबियत बुखार केँ चलते परसो सें कुछ खराब हैं। कल तौ नैना गई थि विजय कों खानां देने। आज मे जाऊॅगी। "
"ठीक हैं। " अजय नें कहा__"औऱ हाॅ ब्लाउज बिलकुल बड़ेगले वालापहन कर जानां। बाॅकी तौ तुम् समझदार हि होँ। "
प्रतिमा मुस्कुरा करबेड सें उठी औऱ कमरे सें बाहर् निकल गई। जबकि अजय केँ होठों पऱ एक् ज़हरीली मुस्कान तैरउठी। वो उसीबेड पर्र धीरे-धीरे लेटकर ऊपरछत मे कुंडे पऱ तेज़ रफ्तार सें घूमरहे पंखे कि तरफ घूरने लगा थां।
प्रतिमा जब किचेन मे पहुॅची तोँ उसकी छोटी ननदी नैना विजय केँ लिए टिफिन सजधजकर कररही थि। नैनाउस टाइम बाइस तेइससाल कि थि। उसने अपनी पढ़ाई छोड़ दि थि औऱ बीएस सि करनेबाद अबघऱ मे हि रहती थि। उसकी विवाह केँ लिए बाबूजी लड़का तलाशकर रहे थें।
"क्याँ कररही हौ नैना?" प्रतिमा नें बड़े प्रेम सें नैना सें पूछा थां।
"मॅझले भाई केँ लिए खाने कां टिफिन रेडीकर रहीहूॅ भाभी। " नैना नें कहा__"मॅझली भाभी कि तबियत ठीक नहि हैं न् इसलिए यह टिफिन मे हि लेँ जारही हूॅकल सें। ख़ैर छोड़िये आप् बताइये आप् किसकाम सें किचेन मे आई हें?"
"मे भि इसीलिए यहाॅआई थि कि अपने देवरु केँ लिए खानां पहुॅचा दूॅ। " प्रतिमा नें मुस्कुराते हुए कहा___"बेचारी रातदिन जी तोड़ मेहनत करते हें। "
"हीहीहीही आप् तोँ शहर वाली हें भाभी आप् खेतों पर्र टिफिन लेकर जाएॅगी तोँ लोग क्याँ कहेंगे?" नैना नें हॅसते हुए कहा___"जाने दीजिए भाभीयह आपको शोभा नहि देगा। टिफिन सजधजकर होँ गय़ा हैं अब चलतीहूॅ मे। आज तोँ वैसे भि देर हौ गई हैं। मॅझले भाई केँ पेट मे तोँ अब तक चेहे भि कूदने लगे होंगे। "
"तौ तुम् भि मुझे ताना मारने लगी हौ?" प्रतिमा नें अपने चेहरे पर्र दुख केँ भाव प्रकट करतेहुए कहा___"क्याँ मेरा इतना भि हक़ नहि बनता कि मे अपनी ख़्वाहिश सें इसघऱ मे कुछकर सकूॅ?"
"यह आप् क्याँ कहरही हें भाभी?" नैना नें हड़बड़ाते हुए कहा___"भला मे क्यूं आपको ताना मारूॅगी। औऱ बाकीसभी भि कहाॅ आपको ताना मारते हें?"
"सभी समझती हूॅ मे। " प्रतिमा नें कहा___"लोग मेरे सामने मेरेमुख पऱ नहि बोलते मगर मेरेपीठ पीछे तौ सभीयही बोलते हें न्। एक् मे हूॅ जौ हरबार यहींसोच करआती हूॅ कि घऱ मे इसबार सबका हाॅथ बटाऊॅगी औऱ सबसेखूब हॅसूॅगी बोलूॅगी। मगरहर बार यहाॅआने पऱ मेरीइन सब इच्छाओं पऱ ग्रहण लग जाता हैं। "
"ओह भाभी प्लीज़। " नैनाकह उठी__"आप् यहसभी बेकार हि सोचती हें। आपके बारेकोई कुछ नहि बोलता हैं औऱ नां हि सोचता हैं ऐसा वैसा। "
"तौ फिन क्यूं मुझेइन सभी कामों कों करने सें मनाकर रही हौ तुम्?" प्रतिमा नें कहा__"मुझे करनेदो नां जिसे करने कां मेरा बहोत मन करता हैं। मे भि सबकीतरह यहसभी कामखशी खुशी करना चाहती हूॅ। "
"पऱ भाभी आप् यह। " नैना कां वाक्य अधूरा रह गय़ा।
"देखा, फिन सें वही शुरुआत कर दिया। " प्रतिमा नें कहा__"तुम् अभि भि यही समझती होँ कि मे यहसभी करूॅगी तौ लोग क्याँ सोचेंगे। अरेहर काम कि शुरूआत पऱ लोगऐसा हि सोचते हें। तौ क्याँ हम् लोगों कि सोच कों लेकरकोई काम हि नाँ करें? दूसरे लोग सोचें याँ नं सोचें लेकिन इसघऱ केँ लोग सबसे पहलेसोच लेते हें। "
नैना हैरान परेशान देखती रह गई प्रतिमा कों। उसेसमझ नहि आँ रहा थां कि अपनी भाभी कों क्याँ कहे।
"मे तौ यहसभी इसीलिए कहरही थि भाभी क्योंकि आपकोइन सभी कामों कि आदत नहि हैं। " नैना नें कहा__"बाहर् बदन कों जला देने वालीधूप हैं औऱ गर्मी इतनी कि पूछो हि मत। आप् बेवजह इसधूप औऱ गरमी मे परेशान हौ जाएॅगी। "
"कुछ नहि होगा मुझे। " प्रतिमा नें कहा__"औऱ क्याँ अपने देवर जी केँ लिए इतना भि नहि कर सकती मे?"
"अच्छा ठीक हैं भाभी। " नैना नें कहा__"पऱ मे भि आपकेसंग चलूॅगी। आप् अकेले इसधूप मे परेशान हौ जाएॅगी। "
"नहि नैना। " प्रतिमा नें कहा__"मुझे अकेले हि जानेदो। अकेली जाऊॅगी तौ देवर जीजी कों भि लगेगा कि उनकी भाभी कों उनकी फिकर हैं। वरनाअगर तुम्हारे संग जाऊॅगी तोँ वोँ यही सोचेंगे कि मे वहाॅकोई एहसान जताने आई थि। "
"विजय भाई ऐसे नहि हें भाभी। " नैना नें हॅसकर कहा__"वोँ किसी केँ भि बारे मे कुछ भि बुरा नहि सोचते। बल्कि वोँ तोँ हमारे देश केँ पूर्व प्रधानमंत्री डाॅ मनमोहन सिंह कि तरह एकदमचुप व शान्त रहने वाले हें। "
"चलो छोड़ो यहसभी। " प्रतिमा नें कहने केँ संग हि नैना केँ हाॅथ सें टिफिन लेँ लिया__"जब तक गौरी अच्छी तरह सें ठीक नहि होँ जातीतब तक खेतों मे विजय कों खानां पहुॅचाने कि जिम्मेदारी मेरी हैं। औऱ तुम्हारी जिम्मेदारी यह हैं कि तुम् रितू औऱ नीलम यहाॅ हें तब तक उनको पढ़ाओ। "
"ठीक हैं भाभी जैसा आप् कहें। " नैना नें हॅसते हुए कहा__"आप् सच मे बहोत स्वीट हें। आईलवयू माई स्वीट ऐण्ड ब्यूटीफुल भाभी। "
"ओह लवयूटू माँ स्वीट ननदी रानी। " प्रतिमा नें भि मुस्कुराकर कहा__"चलो अब मे चलतीहूॅ। "
इतनाकह कर प्रतिमा किचेन सें बाहर् आँ कर अपने कमरे कि तरफबढ़ गई। जबकि नैना अपने कमरे कि तरफ मुस्कुराते हुएचली गई। इधर कमरे मे आकर प्रतिमा नें टिफिन कों बेड केँ पास दीवार तरफसटे एक् टेबल पर्र रखा औऱ फिन आलमारी कि तरफबढ़ गई।
"क्याँ हुआ तुम् यहीं हौ?" अजय सिंह नें चौंकते हुएकहा थां___"अभि तक खेतों पऱ गई नहि???"
"तुम् तौ इस सबको इतना आसान समझते हौ जबकि तुम्हें पता होना चाहिए कि कहने औऱ करने मे ज़मीन आसमान कां फर्क होता हैं। " प्रतिमा नें आलमारी सें एक् झीनी सि साड़ी निकालते हुएकहा थां।
"वोँ तौ मुझे भि पता हैं। " अजय सिंह नें कहा___"मगर मेरे कहने कां मतलबयह थां कि टिफिन सजधजकर करने मे बेवजह इतना वक़्त क्यूं लगा दिया तुमने?"
"दोस्त जब मे किचेन मे गई तौ वहाॅ पर्र नैना आलरेडी टिफिन सजधजकर कर चुकी थि। " प्रतिमा नें कहा___"औऱ वो टिफिन लेकर खेतों पऱ जाने हि वाली थि। इसलिए मुझेउसे इमोशनली ब्लैकमेल करना पड़ा। "
"क्याँ मतलब??"अजय सिंह चौंका।
प्रतिमा नें उसे किचेन मे नैना औऱ स्वयं केँ बीच हुइ सारी बातें बता दि। सारी बातें सुनने केँ बादअजय सिंह बोला___"यह बिलकुल सही किया तुमने। औऱ अब इसकेआगे कां भि ऐसा हि परफेक्ट हौ तौ मजा हि आँ जाए। "
"ऐसा हि होगा डियर। " प्रतिमा नें अपनेबदन सें पहले वाले कपड़े उतार दिये। अब वो ऊपर सिर्फ ब्रा मे थि जबकि नीचे पेटीकोट थां।
"इस ब्रा कों भि उतारदो नां डियर। "अजय सिंह मुस्कुराया__"अपने बड़े बड़े तरबूजों केँ ऊपर मात्र यह लोकट वाला ब्लाउज हि पहनकर जाओ। ताकिउस साले मजदूर कों नज़ारा करने मे आसानी हौ। "
"बड़े बेशर्म होँ सच मे। " प्रतिमा नें हॅसते हुएकहा औऱ अपने हाॅथों कों पीछे अपनीपीठ पर्र लेँ जाकर ब्रा कां हुकखोल करउसे अपने जिस्म सें अलगकर दिया।
"हाय रे, इन भारी भरकम तरबूजों पऱ जबउस मजदूर कि दृष्टि पड़ेगी तौ यकीनन उस साले कि आॅखें फटी कि फटीरह जाॅएॅगी। " अजय नें अहह सि भरतेहुए कहा थां___"सारा इमानसमय भर मे चकनाचूर हौ जाएगा उसका। "
"काश! ऐसा हि होँ। " प्रतिमा नें ब्लाऊज कों पहनते हुए कहा___"अगर बातबन गई तोँ मुझे भि एक् नई चीज़मिल जाएगी। "
"बिलकुल बात बनेगी डियर। "अजय सिंह नें ज़ोर देकर कहा___"तुम् तौ उर्वशी याँ मेनका सें भि हसीनव मालदार होँ। भला तुम्हारे सामने वोँ मजदूर कब तक टिका रहेगा?"
"तुम् हरबात पऱ उसे मजदूर क्यूं बोलरहे हौ अजय?" प्रतिमा नें कहा___"जबकि वो भि तुम्हारी तरह ठाकुर गजेन्द्र सिंह बघेल कि औलाद हैं औऱ तुम्हारा सगा भइया हैं। "
"जोँ भि होँ। " अजय सिंह बोला__"हैं तौ एक् मजदूर हि नां? अब मजदूर कों मजदूर नाँ कहूॅ तौ औऱ क्याँ कहूॅ?"
"चलो अब मे जा रहींहूॅ। " प्रतिमा नें आदमकद आईने मे स्वयं कों देखने केँ बाद कहा__"अब मेरा ड्रेस ठीक हैं नाँ?"
"एकदम झक्कास हैं मेरीजान। " अजय सिंह नें कहा___"इस ड्रेस मे तुम्हें देखकर अब तोँ मुझेऐसा लगरहा हैं कि अभि एक् बार तुम्हें इसीबेड पऱ पटककर पेलदूॅ पऱ जानेदो। "
प्रतिमा उसकीइस बात पऱ हॅस पड़ी औऱ फिन टेबल सें टिफिन उठाकर कमरे सें बाहर् जली गई।
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वर्तमान_______
हल्दीपुर पुलिस स्टेशन !
"तोँ क्याँ जानकारी मिली तुम्हें?" अपनी कुर्सी पर्र बैठी रितू नें सामने खड़े हवलदार सें पूछा थां।
"मैडमजिन लड़के लड़कियों कि लिस्ट आपने दि थि। " वो हवलदार कहरहा थां जिसकी वर्दी कि नेम प्लेट पऱ उसकानाम राम सिंह लिखाहुआ थां, बोला___"उनमें सें कुछ तौ उसी काॅलेज केँ हें जिस काॅलेज मे वोँ पीड़िता यानी विधी चौहान पढ़ती हैं जबकि बाॅकी केँ सभी बाहरी हें। मेरा मतलब कि उस काॅलेज केँ नहि हें। "
"बाहर् सें कौन सें लड़के लड़कियाॅ हें?" रितू नें पूछा थां।
"बाहर् केँ तोँ सभी लड़के हि हें मैडम। " हवलदार रामसिंह नें कहा___"वोँ भि दो हि हें। एक् तोँ वही संपत हैं जोँ इसी इलाके कां एक् छोटा मोटा ग़ुडा मवाली हैं जबकि दूसरा संदीप अग्निहोत्री हैं, यह दूसरे काॅलेज मे बीए लास्ट इयर कां छात्र हैं। "
"ओके बाकी केँ सभी लोगों केँ बारे मे क्याँ पताचला?" रितू नें पूछा।
"विधी केँ संग काॅलेज मे पढ़ने वालीजिस लड़की कि बर्थडे बर्थडे पार्टी थि उसरात, उसकानाम खुशी जिन्दल हैं। बड़े बाप कि औलाद हैं। माॅ बाप पूणे मे रहते हें। यहाॅ पऱ वो अपनी एक् आया केँ संग रहती हैं औऱ वोँ घर-मकान भि उसके बाप नें हि उसे खरीदकर दिया थां। ताकि वो अपनीआया केँ संगरह कर काॅलेज मे पढ़ाई करसके। जश्न मे दोस्तों केँ रूप मे चार लड़के थें औऱ पाॅच लड़कियाॅ, जिनमे सें एक् लड़की खुशी जिन्दल कि आया कि थि। दो लड़के बाहरी थें। सब लड़कों कि डिटेल इस प्रकार हैं____
1, सूरज चौधरी, 22 साल कां विधी केँ हि कालेज मे एमए कां छात्र हैं। इसके बाप कां नाम दिवाकर चौधरी हैं। यहशहर कां पोलिटीसियन हैं। इसके बारे मे साराशहर जानता हैं कि यह कैसा व्यक्ति हैं। इसकेकई गैर कानूनी धंधे भि कानून केँ नाक केँ नीचे सें चलते हें। सूरज चौधरी अपने बाप कि बिगड़ी हुईँ औलाद हैं। पताचला हैं कि इसनेकई लड़कियों कि ज़िंदिगियाॅ बरबाद कि हें। अपनी खूबसूरत पर्शनालिटी औऱ पैसों कि वजह सें कोई भि लड़की इसकीतरफ आकर्षित हौ जाती हैं। यह लड़कियों कों प्रेम केँ जाल मे फॅसाकर उनकी अश्लील वीडियो बनाकर उन्हें हरतरह केँ काम करने केँ लिए ब्लैकमेल करता हैं। विधी चौहान इससे प्रेम करती हैं।
2, अलोक वर्मा, यह भि सूरज केँ संग हि पढ़ता हैं। सूरज कां पक्का दोस्त हैं यह। बाप बहोत साल पहले गंभीर बीमारी सें चलबसा थां तब सें ये अपनी विधवा माॅ केँ संग हि रहता हैं। इसकीमाॅ किसी प्राइवेट कंपनी मे काम करती हैं।
3, किशन श्रीवास्तव, यह भि सूरज केँ संग हि कालेज मे पढ़ता हैं। इसके बाप कां नाम अवधेश श्रीवास्तव हैं। यहइसी शहर कां एक् क्रिमिनल लायर हैं। इसके दिवाकर चौधरी सें बड़े गहरे संबंध हें। दिवाकर चौधरी केँ हर ग़ैरकानूनी काम मे यह उसकीहर तरह सें सहायता करता हैं।
4, रोहित मेहरा, यह भि सूरज केँ संग हि उस कालेज मे पढ़ता हैं। इसके बाप ईआनाम अशोक मेहरा हैं। यहशहर कां बिल्डर हैं। पैसों कि कोईकमी नहि हैं इसकेपास। सुना हैं कई ज़मीनों पऱ इसने अवैध कब्जा कियाहुआ हैं। इसके भि दिवाकर चौधरी औऱ वकील अवधेश श्रीवास्तव सें बड़े गहरे संबंध हें।
5, नीता ब्यास, यह 20 साल कि हैं औऱ विधी केँ संग हि उस कालेज मे पढ़ती हैं। यह इन्दौर कि रहने वाली हैं। यहाॅ पर्र यह अपने मामाजी जी केँ यहाॅरह कर हि पढ़ाई कररही हैं।
6, अनीता ब्यास, यह नीता कि जुड़वा बेहन हैं तथायह भि अपनी बेहन केँ संग हि मामाजी जी केँ यहाॅ रहकर पढ़ाई कररही हैं।
7, स्नेहा शर्मा, यह 20 साल कि हैं, यह भि विधी केँ संग हि कालेज मे पढ़ती हैं। इसका बाप सरकारी बैंक मे मैनेजर हैं।
8, संजना सिंह, यह 20 साल कि हैं, औऱ विधी केँ संग हि कालेज मे पढ़ती हैं। इसके बाप कां इसीशहर मे एक् बड़ा सां माॅल हैं। यहदो भइया बेहन हैं। इसका भइया संजय सिंह इससे छोटा हैं औऱ अभि इससाल हाई विद्यालय मे हैं।
"मैडमयह थें उस कालेज मे विधी केँ संग एक् ग्रुप मे रहने वाले लड़के लड़कियाॅ। " रामदीन नें कहा___"मैने अपने तरीके सें पता किया हैं कि विधी केँ संग जोँ घटना घटित हुई उसमें सूरज चौधरी मुख्य आरोपी हैं। सूरज केँ संग हि इस हादसे कों अंजाम देने मे उसकेयह चारों साथी औऱ उस बर्थडे गर्ल यानी खुशी जिन्दल कां भि बराबर कां हाॅथ हैं। बात दरअसल यह थि कि विधी एक् अच्छे घऱ कि औऱ अच्छे संस्कारों वाली लड़की थि। वो हसीन थि। कभी किसी लड़के कों भाव नहि देती थि। आज सें दोतीन साल पहले वो किसी विराज सिंहनाम केँ लड़के सें प्रेम करती थि जोँ उसकेसंग हि विद्यालय मे पढ़ता थां। वोँ विद्यालय औऱ यह कालेज करीब-करीब पास मे हि थें इसलिए सूरज कि नज़रइस पऱ बहोत पहले सें हि थि। उसने बड़ी मुश्किल सें किसीतरह इससे दोस्ती करली थि। उसकेबाद ऐसे हि एक् दिन इसने अपने बर्थडे पऱ अपनेसब दोस्तों कों फार्महाउस पर्र इन्वाइट किया थां। विधी कों भि उसने खासतौर पऱ इन्वाइट किया थां। विधीजब इसके फार्महाउस पऱ उससाम गई तौ बर्थडे पार्टी मे सभी बहुत एंज्वाय कररहे थें। इसबीच सूरज नें विधी कों अपनी दोस्ती कां वास्ता देकरइसे कोल्ड ड्रिंक पिला दिया। उस कोल्ड ड्रिंक मे हल्का ड्रग्स भि मिलाहुआ थां। विधी नें जबउस कोल्ड ड्रिंक कों पिया तौ उसेकुछ देरबाद चक्कर सें आनेलगे। सूरज अपनीचाल मे कामयाब होँ चुका थां, उसने अपनी एक् मित्र जिसका नाम रिया सचदेवा थां उससेकह कर विधी कों कमरे मे लें गई औऱ उसेबेड पर्र लिटा दिया। विधी कों कुछहोश नहि थां। इधर सूरज कमरे मे आया औऱ विधी केँ बदन सें सारे कपड़े उतारकर औऱ स्वयं भि पूरीतरह निर्वस्त्र होकर विधी केँ संग गंदाकाम किया। इस सबकी वीडियो सूरज कां हि एक् मित्र अलोक वर्मा बनारहा थां। ख़ैरजब विधी कों होशआया तौ वो अपनेघऱ मे अपने हि बेडरूम थि। उसे पिछली साम कां सभीकुछ यादआया। उसेइस बात कि हैरानी हुइ कि वो अपनेघऱ केसेआई? तब उसकीमाॅ नें बताया कि उसकी एक् साथी जिसका नाम रिया थां वो उसे छोंड़ कर गई थि। विधी कि माॅ नें उसेइस बात केँ लिए डाॅटा भि थां कि उसने शराब क्यूं पी थि? विधी नें कहा वोँ शराब नहि बस कोल्ड ड्रिंक हि थां शायद किसी नें ग़लती सें उसमें कुछशराब मिला दि होगी। ख़ैरयह बात तोँ चली गई। मगरमाॅ केँ जाने केँ बादजब विधीबेड सें उठकर बाथरूम कि तरफ जाने केँ लिएबेड सें नीचे उतरी तोँ उसकी चीख़ निकलते निकलते रह गई। अपने पैरों पर्र उससे खड़े हि नां हुआ गय़ा। उसे समझते देर नं लगी कि उसकेसंग क्याँ हुआ हैं। लेकिन अब समझने सें भला क्याँ हौ सकता थां? वो तौ लुट चुकी थि। बरबाद होँ चुकी थि। वो इसबात कों अपनेमाॅ बाप सें बता भि नहि सकती थि। अकेले मे वो खूब रोती। इस बातकई दिन गुज़र गए। वो विद्यालय नहि गई थि कईदिन सें। माॅ सें उसनेबता दिया थां कि उसकी तबियत ठीक नहि हैं। फिन एक् दिन उसकेफोन पऱ एक् अंजान नंबर सें एमएमएस आया। जिसेदेख कर उसके पैरों तले सें ज़मीन निकल गई। उसे सारा संसार अंधकारमय दिखने लगा थां। तभीउसी नंबर सें काल भि आया। उसनेजब उसकाल कों रिसीव किया तौ सामने सें सूरज कि आवाज़ कों सुनकर चौंक गई। वो उसे बड़ी बेशर्मी सें कहरहा थां कि कैसीलगी हम् दोनो कि फिल्म? विधी रोती गिड़गिड़ाती रही औऱ पूछती रही कि उसने उसकेसंग उसकी दोस्ती केँ संग इतना बड़ाछल क्यूं किया? आख़िर क्यूं उसनेउसे इसतरह बरबाद कर दिया?मगर वोँ तौ शिकारी थां। सुंदर लड़कियों कां शिकारी। सूरज नें धमकी देतेहुए कहा कि अगलेदिन विद्यालय आए औऱ उसकेसंग उसके फार्महाउस पऱ चले वरना वो यहएमएम एस उसके बाप केँ फोन पऱ भेज देगा। विधी मरती क्याँ न् करती वाली स्थित मे आँ चुकी थि। बस यहीं सें उसकी बरबादी कि दास्तां शुरुआत हौ गई। वो हरबार सूरज केँ द्वारा ब्लैकमेल होतीरही। विधीजिस विराज नाम केँ लड़के सें प्रेम करती थि उससे उसने संबंध तोड़ लिया थां। ऐसे हि दिन महीने साल गुजरगए। विधी पढ़ने मे होशियार थि। कालेज मे हमेशा वो अपनी ग्रुप कि लड़कियों सें टाप करती थि। खुशी जिन्दल इसबात सें उससे बेहद जलती थि। इसलिए उसने सूरज केँ संग मिलकर पिछली रातइस गंभीर हादसे कों अंजाम दिया थां। "
"मामला तोँ पूरीतरफ पहले हि साफ थां रामदीन। " रितू नें कहा___"मैने दूसरी मुलाक़ात मे विधी सें इस सबकी सारी सच्चाई जानने कि बहोत कोशिश कि मगर उसनेकुछ नहि बताया। इसलिए मुझे तुम्हें इसकाम मे लगाना पड़ा। ख़ैर, यकीनन तुमने शानदार जानकारी हासिल कि हैं। "
"धन्यवाद मैडम। " रामदीन खुश होँ गय़ा, बोला___"पऱ मुझेयह समझ मे नहि आँ रहा कि विधी नें आपकोइस सबकी सारी बातें क्यूं नहि बताई? जबकि होना तोँ यह चाहिए थां कि उसेअब ऐसे हरामियों केँ खिलाफ सारासच उगलकर उन्हें कानून केँ लेपेटे मे डलवा देना चाहिए थां। "
"सबकी अपनीकुछ न् कुछ मजबूरियाॅ होती हें रामदीन। " रितू नें गंभीरता सें कुछ सोचते हुए कहा___"कुछ ऐसी भि बातें होती हें जिन्हें किसी भि हाल मे कह पाना संभव नहि होँ पाता। याँ फिनयह सोचकर उसने मुझेकुछ नहि बताया कि कानून भि भलाउन लोगों कां क्याँ कर लेगा? वो जानती हैं कि जिन लोगों नें उसकेसंग यह कुकर्म किया वोँ बड़े बड़े लोगों कि बिगड़ी हुई औलादें हें। कानून उन तक पहुॅच हि नहि सकता। "
"तौ क्याँ इसकेस कि फाइलऐसे हि बंदकर दि जाएगी मैडम?" रामदीन चौंका___"क्याँ उस बेचारी लड़की केँ संग इंसाफ नहि होँ पाएगा?"
"मैनेऐसा तोँ नहि कहा रामदीन। " रितू कुर्सी सें उठकरतथा वहीं पर्र चहल कदमी करतेहुए बोलीं___"लड़की केँ संग इंसाफ अवश्य होगा। फिन भले हि उसकेलिए कोई दूसरा मार्ग हि क्यूं नां चुनना पड़े। "
"मे कुछ समझा नहि मैडम?" रामदीन नें उलझनपूर्ण भाव सें कहा।
"सभी समझ जाओगे रामदीन। " रितू केँ चेहरे पर्र कठोरता आँ गई थि___"बस वक्त कां इंतजार करो। "
रामदीन कों बिलकुल भि समझ नां आया कि उसकीयह आला अफसर क्याँ कहेजा रही हैं? जबकि रितू नें टेबल पऱ रखी पीकैप कों उठाकर उसेसिर पाया ब्यवस्थित किया औऱ फिन लम्बे लम्बे डग भरती हुईँ थाने सें बाहर् निकल गई।
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फ्लैशबैक अबआगे______
नैना नें सच हि कहा थां कि बाहर् तेज़धूप औऱ भयानक गर्मी मे वो परेशान हौ जाएगी। प्रतिमा कि हालत ख़राब हौ चली थि। सिर पऱ पड़ी तेज़धूप औऱ गर्मी नें उसका बुराहाल कर दिया थां। आसमान मे सफेद बादलछाए थें औऱ हवा भि न् केँ बराबर हि चलरही थि। जिसकी वजह सें वो पसीना पसीना हौ चली थि।
पतली सि पिंककलर कि साड़ी तथाउसी सें मैच करता बड़ेगले कां ब्लाउज। जिसमें कैद उसकी भारी भरकम चूचियाॅ उसके चलने पऱ एक् लय सें ऊपर नीचे थिरकरही थि। ब्लाउज केँ ऊपरी हिस्से सें उसकी सुडौल चूचियों कां एक् चौथाई हिस्सा स्पष्ट दिखरहा थां। गोरे सफ्फाक जिस्म पऱ यह लिबास उसकी हुस्न औऱ मादकता पर्र जैसेचार चाॅद लगाएहुए थां। प्रतिमा तीन बच्चों कि माॅ थि मगर मजाल हैं कि कोईयह घूरसके कि यह सुंदर बलातीन तीन बच्चों कि माॅ हैं।
ऐसा नहि थां कि वो कभी खेतों पऱ नहि गई थि। एक् दोबार वो पहले हि कभी गई थि। इसलिए उसे खेतों केँ रास्ते कां पता थां। हवेली सें एक् किलो मीटर कि दूरी पऱ खेत थें। इधर कां हिस्सा गाॅव केँ उत्तर दिशा कि तरफतथा गाॅव सें हटकर थां।
प्रतिमा जब खेतों पऱ पहुॅची तोँ उसने देखा कि हरतरफ सुन्नाटा फैलाहुआ हैं। बहोत सें खेतों पऱ गेहूॅ कि फसलपक कर सजधजकर खड़ी थि औऱ एक् तरफ सें उसकी कटाई भि चालू थि। हलाॅकि इससमय वहाॅ पर्र कहीं भि कोई मजदूर फसल काटते हुएदिख नहि रहा थां। शायद तेज़धूप केँ कारणकाम बंद थां याँ फिनसब मजदूर दोपहर मे खानां खाने केँ लिएखए होंगे।
प्रतिमा कि हालतभले हि खराब हौ चुकी थि लेकिन जब उसने खेतों पऱ हर स्थान सुनापन देखा तोँ वो इससेखुश भि हौ गई। उसेलगा चलोजिस मकसद सें वो यहाॅआई हैं वो बेझिझक हौ जाएगा। कोई देखने सुनने वाला भि नहि हैं यहाॅ। उसने देखा एक् तरफ खेतों पर्र हि बड़ा सां पक्का घर-मकान बना थां। घर-मकान केँ बाहर् दो स्वराज कंपनी केँ ट्रैक्टर व थ्रेशर मशीन खड़ी थि। घर-मकान कां मुख्य दरवाजा खुलाहुआ थां।
प्रतिमा नें धड़कते दिल सें मुख्य दरवाजे केँ अंदरकदम रखा हि थां कि किसी सें बड़े ज़ोर सें टकराई। उसकी भारी भरकम छातियों मे किसी पुरूष कां फौलाद जैसा सीना टकराया थां। प्रतिमा इस अचानक हुईँ घटना सें बुरीतरह घबरा गई। टक्कर लगते हि वो पीछे कि तरफ बड़ी तेज़ी सें गिरने हि लगी थि कि सामने नजरआए पुरूस नें बड़ी सीघ्रता सें उसका हाॅथ पकड़कर उसे पीछे गिरने सें बचा लिया।
प्रतिमा कां दिल बुरीतरह धड़के जारहा थां। ख़ैर सम्हलने केँ बाद उसकी नज़र सामने खड़े व्यक्ति पड़ी तौ चौंक गई। सामने उसका देवर जी विजय सिंहसिर झुकाए खड़ा थां। उसेइस तरहसिर झुकाए देख प्रतिमा कों समझ नं आया कि यहसिर झुकाए क्यूं खड़ा हैं?
"क्याँ बात हैं देवर जीजी?" प्रतिमा नें मुस्कुराते हुए कहा___"ज़रा देखकर तौ चला कीजिए। भलाकोई इतनी भि ज़ोर सें टक्कर मारता हैं क्याँ??"
"क्षमा कर दीजिए भाभी। " विजय सिंह नें सिर झुकाए हुए हि शर्मिंदगी सें बोला__"मुझे उम्मीद हि नहि थि कोईइस तरह सामने सें आँ जाएगा। "
"चलोकोई बात नहि विजय। " प्रतिमा नें माहौल कों समान्य बनाने कि गरज सें कहा___"ग़लती केवल तुम्हारी हि बस नहि हैं, मेरी भि हैं क्योंकि मैने भि तोँ यहआशा नहि कि थि कोई मेरे सामने सें इसतरह आँ टकराएगा। "
"पर्र मुझेदेख कर बाहर् आनां चाहिए थां नं भाभी। " विजय सिंह नें खेदभरे भाव सें कहा।
"ओहो विजय। " प्रतिमा नें कहा___"इसमें इतनाखेद प्रकट करने कि कोई ज़रूरत नहि हैं। मगरहाॅ एक् बात तौ कहूॅगी मे। "
"जी कहिए भाभी। " विजय नें कहा__"अगर आप् कोई सज़ा देना चाहती हें तौ अवश्य दीजिए। ऐसी धृष्ठता केँ लिए मुझे सज़ा तौ मिलनी हि चाहिए। "
"ओफ्फो विजयफिन वहीबात। " प्रतिमा हैरान थि कि विजयकिस टाइप कां इंसान हैं। क्याँ दुनियाॅ मे कोई इतना भि शरीफ़ होँ सकता हैं? फिन बोलीं___"मुझे तुमसे कोई शिकायत नहि हैं विजय। मे तौ बसयह कहने वाली थि कि क्याँ फौलाद कां सीना हैं तुम्हारा जौ मेरी कोमल छातियों कां कचूमर बना दिया थां?"
"जजी क्याँ मतलब?" विजय बुरीतरह चौंका थां। सिर उठाकर हैरानी सें अपनी भाभी कि तरफ देखने लगा थां वो।
"इतने भोले नां बनो विजय। " प्रतिमा नें हॅसते हुए कहा___"तुम् भि अच्छी तरहसमझ गए होँ कि मेरे कहने कां क्याँ मतलब थां?"
"अरेयह सभी बेकार कि बातें छोंड़िए भाभी औऱ यह बताइये कि आप् यहाॅ इतनीधूप व गर्मी मे क्यूं आई हें?" विजय नें बेचैनी सें पहलू बदला थां___"नैना क्यूं नहि आई? औऱ आपको भि इतना तकल्लुफ करने कि क्याँ ज़रूरत थि भला?"
"क्याँ तुम्हें मेरा यहाॅ आनां अच्छा नहि लगा विजय?" प्रतिमा नें दुखीभाव कां नाटक करके कहा___"क्याँ मे यहाॅ नहि आँ सकती?"
"नं नहि भाभीऐसी कोईबात नहि हैं। " विजय नें हड़बड़ाकर कहा___"मे बसइसलिए ऐसाकह रहाहूॅ क्योंकि तेज़धूप औऱ गर्मी बहोत हैं। ऐसे माहौल कि आपकोआदत नहि हैं नाँ?"
"देखो विजय तुम् भि नैना कि तरह मुझे तानामत मारने लग जानां। " प्रतिमा नें कहा__"तुम् सभी मुझेऐसा कहकर दुखी क्यूं करते होँ? मेरा भि दिल करता हैं कि मे भि तुम् सबकीतरह यहसभी करूॅ। मगर तुम् सभी अपनीइन बातों सें मुझेयह सभी करने हि नहि देते। मे हि पागलहूॅ जोँ बेकार मे इस हवेली केँ लोगों कों अपना मानती हूॅ औऱ चाहती हूॅ कि सभी मुझे भि अपना समझें। "
"यह आप् क्याँ कहरही हें भाभी?" विजय हैरान परेशान सां बोला___"भला हम् सभी आपकेलिए ऐसा क्यूं सोचेंगे? माॅ बाबूजी केँ बाद आप् दोनो हि तोँ हम् सबसे बड़ी हें इसलिए हम् सभीयही चाहते हें आप् कुछ नां करें बल्कि आहिस्ता बैठकर खाइये औऱ हम् छोटों कों सेवा करने कां किस्मत प्रदान करें। "
"बस बससभी समझती हूॅ मे। " प्रतिमा नें तुनकते हुए कहा__"अब क्याँ यहीं पर्र खड़े रहेंगे याँ अंदर भि चलेंगे? चलिए अंदर औऱ हाॅ हाॅथमुह धोकर जल्द सें आइये। तब तक मे थाली लगाती हूॅ। "
"जी ठीक हैं भाभी। " विजय नें कहा औऱ बाहर् कि तरफबढ़ गय़ा। जबकि प्रतिमा अंदर कि तरफबढ़ गई।
भाग हाज़िर हैं दोस्तो,,,,,,,
दोस्तो आप् यह बताइये कि फ्लैशबैक कों इसीतरह वर्तमान केँ संग लेकर चलूॅ याँ खाली फ्लैशबैक हि रहनेदूॅ???
bhut hi mast kahani h bhay. lekin I suggest u kee ab hero ko apne gaoun(village) Jana Chahiye or bahtreen action khel hnaa chahiye. or koy new villain kee bi entry honi chahiye.
bhay kafhi lajavab updet majha aagya padhke thora juldi updet diya karo bhay vidhi k sath bahut kharab huwaa vidhi bi viraj say pyaar krti thi yeh jankar jhatka laga bhay ritu k manme bi viraj k liye khuch thaa kya es pr thora janpate too accha hotha
अबयह तोँ आने वाले टाइम याँ एपसोड मे हि पता चलेगा भइया,इस लिए इन्तज़ार कीजिये,,,,
♡ एक् नया संसार ♡ (Full Storyd) – New Episode
Simply, superbly, fantastically, fantabulous update। The character of Ritu has been portrayed in quite a strong manner and as a very strong personally, just opposite too that of her parents। On the other hand, Ajay and moorti, like they should be, as mein villainous characters, have also been described appropriately। Don't know how too praise your efforts। Will just se, keep rocking like this forever।
धन्यवाद भइया आपकीइस हसीन प्रतिक्रिया केँ लिए,,,,,, रितू केँ मन मे क्याँ हैं क्याँ नहि यह तौ वक़्त आने पऱ हि पता चलेगा भइया,,,,
धन्यवाद भइया आपकीइस हसीन प्रतिक्रिया केँ लिए,,,,,, आपके सुझाव पर्र विचार करअमल किया जाएगा भइया,,,,,
♡ एक् नया संसार ♡ (Full Storyd) – New Episode
Superb sundar awesome update bro, Achcha laga flashback ko Gauri की jobani na rakhkar detail mey story की tarha dikha reheho, yaar yeh ajay ko कुछ maat karney दो kiuki yeh jobhi karega woh hawas ke liye hi karega joo parney mey achcha नहीं lagta, yeh sirf merey ganit sey baki raders की ptaa नहीं, dekhtey hey Ritu क्या krti hey vidhi ke liye। aur bhay yesa 4 part na karkey 2 part karkey दो yani dono flashback एक sath aur dono present एक sath
keep it up and as always waiting for
♡ एक् नया संसार ♡ (Full Storyd) - Next part miss mat karna
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