♡ एक् नया संसार ♡ (Full Storyd) – New Episode
Behad hi shandaar aur jabardast update bhay.
bhut khoob superb.
Kya likha hain aapne bhay waah.
Ritu aur police commissioner की batcheet dilchasp rahi.
Ritu ekdam imandari purvak duty nibha rahi hain.
Nidhi की harkte masoomiyat से bhari hoyi लेकिन baten badi hi gambhir.
kaalej kaa joo scene dikhaya aapne to good yara.
pehle hi dim hu hi gyi nilam aur raj की mulakat.
Dekhne wali बात hongi की क्या krti hain अब nilam ??
Kya yeh बात vo apne gharwalon ko batayegi ??
Aapne itne behtareen tana bnaa buna hain shabdon kaa की pta hi नहीं chala की kb update samapt hu gya.
Besabri से.
aur अब,
Aage kaa intjar
♡ एक् नया संसार ♡ (Full Storyd) – New Episode
♡ एक् नया संसार ♡
भाग.《 38 》
अब तक,,,,,,,,,
उन लोगों केँ जाने केँ बाद मे वापस पलटा। मैनेउस लड़की कि तरफ देखा। वोँ दूसरी तरफसिर झुकाए खड़ी थि। उसका दुपट्टा मेरे सामने कुछ हि दूरी पऱ जमीन मे पड़ाहुआ थां। मे आगेबढ़ कर उसका पीलेरंग कां दुपट्टा उठाया औऱ उस लड़की कि तरफबढ़ गय़ा।
"यह लीजिए मिस। " मैने पीछे सें उसे उसका दुपट्टा देतेहुए बोला___"आपका दुपट्टा। "
"जी शुक्रिया आपका। " उसने मेरे हाॅथ सें दुपट्टा लिया, औऱ फिन मेरीतरफ पलटते हुए बोलि____"अगर आप् नहि आते तौ वोँ न् जाने मेरे सां.। "
उसका वाक्य अधूरा रह गय़ा। मुझ पर्र नज़र पड़ते हि उसकीऑखे फैल गई। वो आश्चर्यचकित भाव सें मुझे देखने लगी। मेरा भि हालकुछ वैसा हि थां। जैसे हि वो मेरीतरफ पलटी तोँ मेरी नज़र उसके चेहरे पऱ पड़ी। औऱ मे उसका चेहरा देखकर उछल हि पड़ा थां।
"नी.लम???" मेरेमुख सें लरजता हुआ स्वर निकला।
"रा.ज। " उसकेमुख सें अविश्वसनीय भाव सें निकला।
"ओह साॅरी। " मैने एकदम सें स्वयं कों सम्हालते हुए कहा___"आपका दुपट्टा। "
मैनेउसे उसका दुपट्टा पकड़ाया औऱ जल्दी पलट गय़ा। मे उसकेपास रुकना नहि चाहता थां। मे तेजतेज चलतेहुए उस स्थान सें दूरचला गय़ा। जबकि नीलमबुत बनी वहीं पऱ खड़ीरह गई।
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अबआगे,,,,,,,,,,
उधर रितू अपने फार्महाउस पर्र पहुॅची। हरिया काका सें उसनेउन चारों कां हालचाल पूछा औऱ फिन अपने कमरे कि तरफबढ़ गई। कमरे मे पहुॅच कर उसने दरवाजा बंद किया औऱ कमरे मे एक् तरफरखी आलमारी कि तरफ बढ़ी। आलमारी कों खोलकर उसनेउस बैग कों निकाला जिसे वो चौधरी केँ फार्महाउस सें लेकरआई थि। बैग कों बेड पर्र रखकर उसने उसमें सें कई सारी चीज़ें निकाल करबेड पर्र रखा।
कुछ फोटोग्राफ्स थें उसमें, कुछ लेटर्स औऱ कई सारी पेनड्राइव्स। रितू नें उठकर आलमारी सें अपना लेपटाॅप निकाला। उसेऑन किया। कुछ देरबाद जब वो ऑन हौ गय़ा दिया तौ रितू नें उसमें एक् पेनड्राइव लगाया। कुछ हि समय मे लेपटाॅप कि स्क्रीन पर्र पेनड्राइव कों ओपेन करने कां ऑप्शन आया। रितू नें उस पर्र क्लिक किया। पर्र भर मे हि स्क्रीन पऱ उसे बहोत सारी फोटोज औऱ वीडियोज दिखने लगी।
फोटोज देखकर रितू कां दिमाग़ खराब होनेलगा। वोँ सारी फोटो न्यूड रूप मे कई सारी लड़कियों कि थि। रितूउन लड़कियों कों पहचानती तोँ नहि थि मगर फोटो मे उन लड़कियों केँ पोज सें उसेपता चलरहा थां कि इन लड़कियों कि मर्ज़ी सें हि यह फोटोज खींचे गए थें। रितू केँ चेहरे पर्र उन लड़कियों केँ प्रति नफ़रत औऱ घ्रणा केँ भावउभर आए।
उसकेबाद उसने एक् वीडियो पर्र क्लिक किया। क्लिक करते हि वोँ वीडियो चालू होँ गई। इस वीडियो मे जौ लड़का थां वो रोहित थां। वोँ किसी लड़की केँ संग सेक्स कररहा थां। लड़की अपनी दोनो टाॅगों कों कैंची शक्ल देकर रोहित कि कमर पऱ जकड़ा हुआ थां। रितू नें जल्दी हि वीडियो कों बंदकर दिया औऱ दूसरी वीडियो कों ओपेन किया। इस वीडियो मे अलोक लड़की कि चूॅतचाट रहा थां। रितू नें जल्दी हि वीडियो बंदकर दिया। उसके अंदर क्रोध बढ़ने लगा थां।
एक् एक् करके रितू नें सारे वीडियो देखलिए। वोँ सारे वीडियो इन चारो लड़कों केँ हि थें जौ अलगअलग लड़कियों केँ संग बनाएगए थें। रितू नें लेपटाॅप सें पेनड्राइव निकाल करअलग साइड पर्र रखा औऱ दूसरा पेनड्राइव लेपटाॅप पऱ लगा दिया। कुछ हि देर मे उसने देखा कि इस पेनड्राइव मे भि यही चारो लड़के किसी नं किसी लड़की केँ संग सेक्स कररहे थें। रितू नें उस पेनड्राइव कों भि अलगरख दिया। इसी तरह रितू एक् एक् पेनड्राइव कों लेपटाॅप पऱ लगाकर देखती रही। कुछ पेनड्राइव्स मे उसने देखा कि इन चारों लड़कों नें लड़कियों कों उनकी बेहोशी मे उनके सारे कपड़े उतारे औऱ फिन उनकेसंग अलगअलग पोजीशन मे सेक्स किया थां। रितूसमझ सकती थि कि इन लड़कियों केँ संगइन लोगों नें धोखे सें यहसभी किया थां। अधिकतर पेनड्राइव्स मे इन लड़कों केँ हि वीडियोज थें।
रितू नें एक् औऱ पेनड्राइव लेपटाॅप पर्र लगाया। इस पेनड्राइव मे कई फोल्डर बनेहुए थें। जिन पर्र नाम डालाहुआ थां। एक् फोल्डर पर्र लिखा थां "डैडी"। रितू नें जल्दी हि इस फोल्डर कों ओपेन किया। स्क्रीन पर्र कई सारे वीडियोज आँ गए। एक् वीडियो पऱ क्लिक किया रितू नें। क्लिक करते हि वीडियो चालू होँ गई। वीडियो मे सूरज कां बाप दिवाकर चौधरी किसी लड़की केँ संग सेक्स कररहा थां। यह वीडियो मात्र एक् हि एंगल सें लिया गय़ा थां। मतलबसाफ थां कि कहीं पर्र वीडियो कैमरा छुपाया गय़ा थां औऱ दिवाकर चौधरी कों इसबात कां पता हि नहि थां। वरना वोँ अपनीऐसी वीडियो बनाने कि सोचता भि नहि।
रितू नें जल्दी हि वोँ वीडियो काॅपी कर एक् अलग सें फोल्डर बनाकर उसमें डाल दिया। उसकेबाद रितू नें एक् एक् करकेसब वीडियो देखे। सब वीडियों मे दिवाकर चौधरी लड़की केँ संग सेक्स कररहा थां। रितू नें दूसरा फोल्डर खोला। उसमें भि वीडियोज थें। रितूसमझ गई कि यहउन लोगों केँ काले कारनामों केँ वीडियोज हें जिनका संबंध दिवाकर चौधरी सें हैं।
उन चारो लड़कों बापों केँ वीडियोज भि इसमें थें। रितू केँ लिएयह बहुत मसाला थां दिवाकर चौधरी कों काबू मे करने केँ लिए। उसनेउन चारो लड़कों केँ बापों कां एक् एक् वीडियो अपने लैपटाॅप मे बनाएगए उस फोल्डर मे डाल लिया।
सारे सामान कों वापसबैग मे भरकर उसनेउस बैग कों वापस आलमारी मे रखकर आलमारी कों लाॅककर दिया। इसकेबाद वो पलटी औऱ एक् तरफरखे उस छोटे सें थैले कों उठाया जिसमें आज कां खरीदा हुआफोन मोबाइल औऱ सिम थां। उसने थैले सें मोबाइल कि डिब्बा निकाला औऱ उसे खोलने लगी। फोन निकाल कर उसनेफोन केँ चार्जर कों भि निकाला। चार्जर मे एक् अलग सें केबल थि। उसनेउस केबल कों फोन मे लगाया औऱ दूसरा सिरा लैपटाॅप मे। जल्दी हि लैपटाॅप कि स्क्रीन पर्र एक् ऑप्शन आया। फोन कि स्क्रीन पऱ भि शोहुआ। रितू नें सेटिंग सही कि औऱ फिनउन वीडियोज कों काॅपी करफोन केँ स्टोरेज पर्र पेस्ट कर दिया। चारो वीडियोज कुछ हि देर मे फोन मे अपलोड हौ गई।
इसकेबाद रितू नें केबल निकाल कर वापसफोन केँ डिब्बे पऱ रख दिया। एक् नज़र उसनेफोन कि बैटरी पर्र डाली तौ पताचला कि फोन पऱ अभि 27% बैटरी हैं। रितू नें जल्दी हि चार्जर निकाल करफोन मोबाइल कों चार्जिंग पऱ लगा दिया। इसकेबाद वो कमरे कां दरवाजा खोलकर बाहर् निकल गई।
बाहर् आकर उसने काकी सें काका कों बुलवाया। थोड़ी हि देर मे हरिया काका रितू केँ पास आँ गय़ा।
"कां बात हैं बिटिया?" काका नें कहा__"ऊ बिंदिया नें हमसेकहा कि तुम् हमका बुलाई होँ। "
"हाॅ काका। " रितू नें कहा___"मैने सोचा कि एक् नज़र मे भि देखलूॅ उन चारो पिल्लों कों। वैसेउन सबकी खातिरदारी मे कोईकमी तोँ नहि कि न् आपने?"
"अइसनहोई सकत हैं कां बिटिया?" हरिया काका नें अपनी बड़ी बड़ी मूॅछों पर्र ताव देतेहुए कहा___"तुम्हरे हर आदेश कां हम् बहुतै अच्छी तरह सें पालन कियाहूॅ। ऊ ससुरन केर अइसन खातिरदारी कियाहूॅ कि ससुरन केर नानीमा कां नानीमा केर नानीमा भि याद आँ गई रहे। "
"अगर ऐसीबात हैं तोँ बहोत अच्छा किया हैं आपने। " रितू नें कहा___"उनकी खातिरदारी करने कि जिम्मेदारी आपकी हैं। उनकी खातिरदारी केँ लिए आप् शंकर काका कों भि बुला लीजिएगा। "
"अरे नाँ बिटिया। " हरिया काका नें झट सें कहा___"ऊ ससुरे शंकरवा केर कौनव जरूरत नाँ हैं। हम् खुदै बहुतहूॅ ऊ ससुरन केर खातिरदारी करैंकेर खातिर। ऊ कां हैं नाँ बिटिया ऊ शंकरवा सें ईकामहोई नहि सकत हैं। ईता हम् हूॅ जोँ यतनी अच्छी तरह सें खातिरदारी करसकत हूॅ। "
"ओह ऐसीबात हैं क्याँ?" रितू मुस्कुराई।
"अउर नहि ता कां। " काका नें सीनातान कर कहा___"हम् ताई काममा बहुतै एकसपरट हूॅ बिटिया। "
"काका वोँ एकसपरट नहि बल्कि एक्सपर्ट होता हैं। " रितू नें हॅसते हुएकहा।
"हाॅहाॅ ऊहै बिटिया। " हरिया काका नें झेंपते हुए कहा___"ऊहै एक्सपरट हूॅ। "
"अच्छा चलिएअब। " रितू नें कहा___"मे भि तौ देखूॅ कि आपने कैसी खातिरदारी कि हैं उन लोगों कि?"
"बिलकुल चला बिटिया। " काका नें बड़े हि आत्मविश्वास केँ संग कहा___"ऊ लोगन कां देख केँ तुम्हरे समझमा जरूर आँ जई कि हम् खातिरदारी करैंमा केतना एकसपरट हूॅहाॅ। "
रितू, काका कि बात पऱ मुस्कुराती हुइ तहखाने मे पहुॅची। तहखाने कां नज़ारा पहले कि अपेक्षा ज़राअलग थां इस टाइम। उन चारों कि हालत बहोत ख़राब थि। उन लोगों सें ठीक सें खड़े नहि हुआजा रहा थां। सबसे ज़्यादा सूरज चौधरी कि हालत खराब थि। वो बिलकुल बेजान सां जान पड़ता थां। बाॅकी तीनों उससेकुछ बेहतर थें। उनसब कि गर्दनें नीचे झुकी हुईँ थि। जबकि उनके सामने वाली दीवार पऱ बॅधे दोनो गार्ड्स कि हालत खराब तोँ थि पऱ उन चारो जैसी दयनीय नहि थि। इसकीवजह यह थि कि हरिया याँ रितू नें उन पऱ किसी भि तरह सें हाॅथ नहि उठाया थां। वोँ तोँ बस बॅधेहुए थें।
"काका एक् बातसमझ मे नहि आई। " रितू नें उन चारों कों ध्यान सें देखते हुए कहा__"इन चारों मे सें सबसे ज़्यादा इस मंत्री केँ हरामी बेटे कि हालत खराब क्यूं हें जबकि बाॅकी यह तीनों इससे तौ ठीकठाक हि नज़र आँ रहे हें। "
रितू कि यहबात सुनकर हरिया काका बुरीतरह हड़बड़ा गय़ा। उससे जल्दी कुछ कहते न् बना। भला वो केसे बताता रितू कों कि उसने सूरज चौधरी कि गाॅडमार करऐसी बुरी हालत कि थि जबकि बाॅकी वोँ तीनो तौ उसेदेख देखकर हि अपनी हालत ख़राब कर बैठे थें। हरिया नें उन तीनों कि अभि गाॅड नहि मारी थि। उसने सोचा थां कि एक् दिन मे एक् कि हि तबीयत सें गाॅड मारेगा।
"ऊ कां हैं नं बिटिया। " हरिया काका नें झट सें कहा___"हम् ई सोचतरहे कि ई ससुरन केर एक् एक् करके खातिरदारी करूॅगा। कलता हम् ई ससुरे कि खातिरदारी कियाहूॅ अउरआज दुसरे केर नम्बर हायराम। "
"ओह तौ यहबात हैं। " रितू नें कहा__"चलो ठीक हैं जैसे आपकोठीक लगे वैसा खातिरदारी करिये। बस इतना अवश्य ध्यान दीजिएगा कि इनमें सें कोईमर न् जाए। "
"चिन्ता नाँ करा बिटिया। " काका नें कहा__"ई ससुरे बिना हमरी इजाजत केँ मर नाहीं सकत। जब तक हम् इनसभी केरपेल न् लूॅगा तब तक ई कउनव ससुरे मर नाहीं सकत हें। "
"क्याँ मतलब?" रितू कों समझ नं आया।
"अरे हम् ईकहरहा हूॅ बिटिया कि जब तक हम् ई ससुरन केर अच्छे सें खातिरदारी न् कर लूगाॅ। " काका नें बात कों सम्हालते हुए कहा___"तब तक ई ससुरे कउनव नाहीं मरसकत। काहे सें केँ ई हमरी ख्वाईश केरबात हैं हाॅ। "
"ख्वाहिश केँ बात?" रितू चौंकी___"इसमें आपकीकौन सि ख्वाहिश कि बात हैं काका?"
"अरे हमरा मतबल हैं बिटिया कि खातिरदारी करैंकेर ख्वाईश वालीबात। " काकामन हि मन स्वयं पऱ गुस्साते हुए औऱ खिसियाते हुए बोला___"ई ता तुमको भि पता हैं बिटिया कि हमका केहूकेर खातिरदारी करैं कां केतना शौक हैं। उहैबात हम् करथैं। "
तहखाने मे इन लोगों कि आवाज़ गूॅजते हि उन चारों कों होशआया। दरअसल वोँ उस हालत मे हि ऊॅघरहे थें। इन लोगों कि आवाज़ काॅनों मे टकराने सें उन लोगों कों होश सां आया थां। उन चारों नें सिरउठा कर रितू औऱ काका कि तरफ देखा। काका कों देखकर वोँ चारो बुरीतरह घबरागए। मगर जैसे हि उनकी नज़र रितू पर्र पड़ी तोँ उनमें उम्मीद कि कोईआसा नज़रआई।
"इ इंस्पेक्टर इंस्पेक्टर। " अलोक नें मरीमरी सि आवाज़ मे चिल्लाते हुए कहा___"हमें यहाॅ सें निकालो प्लीज़। हमें छोंड़ दो इंस्पेक्टर, हमे यहाॅ जानेदो वरनायह व्यक्ति हमारी जान लेँ लेगा। "
"हाॅ हाॅ इंस्पेक्टर हमे जल्द सें यहाॅ सें निकालो। यह व्यक्ति बहोत खतरनाॅक हैं। " रोहित मेहरा गिड़गिड़ा उठा___"इसने सूरज कि बहोत बुरी हालतकर दि हैं। प्लीज़ इंस्पेक्टर हमेंइस व्यक्ति सें बचालो। हम् तुम्हारे आगे हाॅथ जोड़ते हें। तुम्हारे पांव पड़ते हें। हमें छोड़दो प्लीज़। "
"अबेचुप। " हरिया काकाइस तरहउन चारों कि तरफदेख कर गरजा थां जैसेकोई शेर दहाड़ा हौ___"हम् कहताहूॅ चुपकर ससुरे वरना हमकाता जानगए हौ नं। ससुरे टेंटुआ दबा दूगा हम् तुम् सबकेर। "
हरिया कि दहाड़ कां जल्दी असरहुआ। उन चारों कि बोलती इसतरह बंद होँ गई जैसे बिजली केँ स्विच सें बटनबंद कर देने पऱ बजतेहुए टेपरिकार्डर कां बजनाबंद हौ जाता हैं। मगर वोँ चुप अवश्य हौ गए थें मगरउन सबकी ऑखों मे करुण याचना औऱ विनती करने जैसेभाव स्पष्टरूप सें दिखरहे थें।
"तुम् लोगों केँ लिएअब कोईरहम नहि होँ सकता समझे?" रितू नें कठोरता सें कहा___"तुम् लोगों नें जौ पाप किया हैं औऱ जौ भि अपराध किया उसकेलिए तुम् सबकोअब यहींसमय लम्हा मरना हैं। "
"हमें मारना हि हैं तोँ एक् हि बार मे हमारी जान लेँ लो इंस्पेक्टर। " निखिल नें कहा__"पऱ इस व्यक्ति केँ हवाले मतकरो हमे। यह व्यक्ति बहोत बेरहम हैं। इसने सूरज केँ संग बहोत बुरा किया हैं। "
"चिन्ता मतकरो। " रितू नें कहा___"अभि इससे भि बुरा होगा तुम् सबकेसंग। दूसरों कि बेहन बेटियों कि इज्ज़त लूटने कां बहोत शौक हैं नं तुम् लोगों कों तोँ अब स्वयं भि भुगतो। तुम् सबका वोँ हाल होगा जिसकी कभी किसी नें कल्पना भि न् कि होगी। "
"ई लोगन कां कां करना हैं बिटिया?" काका नें उनदो गार्डों कि तरफ देखते हुए कहा__"हमका लागत हैं ई ससुरे फालतू मा ईहाॅ कस्ट उठायरहे हें। "
"इन दोनो कों छोंड़ नहि सकते हें। " रितू नें कहा___"क्योंकि यह दोनो हमारा काम खराबकर देंगे। इसलिए इन लोगों कों यहीं पऱ रहनेदो। बसइन पऱ हाॅथ नहि उठाना। इन्होने कोई अपराध नहि किया हैं। "
"हम् किसी सें कुछ नहि कहेंगे बेटी। " एक् गार्ड नें कहा___"हम् अपनेबाल बच्चों कि शपथ खाकर कहते हें कि हम् किसी सें भि आपके औऱ इन लोगों केँ बारे मे कुछ नहि बताएॅगे। हम् इसशहर सें हि बहोत दूरचले जाएॅगे। ताकिइन लोगों केँ बाप हमें ढूॅढ़ हि नं पाएॅ। "
"हम् आप् दोनो पर्र केसे यकीन करें?" रितू नें कहा___"आप् स्वयं सोचिए कि अगर आप् हमारी स्थान होते तोँ क्याँ करते?"
"हम् सभी समझते हें बिटिया। " दूसरे गार्ड नें कहा___"मगर यकीन तोँ करना हि पड़ेगा न् बिटिया। क्योंकि हम् अगर चाहें भि तोँ यकीन नहि दिला सकते। हमारे पासकोई सबूत भि नहि हैं जिसकी वजह सें हम् आपको यकीन दिला सकें। पर्र आपको सोचना चाहिए बेटी कि कोई बाप अपनेबाल बच्चों कि झूॅठी क़सम नहि खाया करता। अधर्मी सें अधर्मी व्यक्ति भि अपनी औलाद कि झूठीशपथ नहि खाता। हम् तोँ गरीब व्यक्ति हैं बेटी। दो पैसे केँ लिए इनके यहाॅकाम करते थें। मंत्री नें हमारे हाॅथ मे बंदूखें पकड़ा दि। हम् तौ उन बंदूखों कों चलाना भि नहि जानते थें। "
दोनो गार्डों कि बातें सुनकर रितू औऱ हरिया सोच मे पड़गए। वोँ दोनो हि इन्हें सच्चे लगरहे थें। उनकी बातों मे सच्चाई कि झलक थि। मगर हालात ऐसे थें कि उन्हें छोंड़ना भि नीति केँ खिलाफ़ थां। मगरफिन भि रितू नें यहसोच कर उनको छोंड़ देने कां फैसला लिया कि जिनसे यहलोग बताएॅगे वोँ लोग तोँ स्वयं हि बहोत जल्दइसी तहखाने मे आने वाले हें।
ठीक हैं। " रितू नें कहा___"हम् तुम् दोनो कों छोंड़ रहे हें। मात्र इसलिए कि तुम् दोनों नें अपने बच्चों कि शपथखा करकहा हें तुम् लोग यहाॅ केँ बारे मे याँ इन चारों केँ बारे मे किसी सें कुछ नहि कहोगे। "
"ओह शुक्रिया बेटी। " गार्ड नें खुश होतेहुए कहा___"हम् सचकहरहे हें हम् किसी सें कुछ नहि कहेंगे। हम् आज हि अपनेगाव अपने प्रदेश चले जाएॅगे। काम हि तोँ करना हैं कहीं भि कर लेंगे। "
"काकाइन दोनो कों छोंडदो। " रितू नें हरिया सें कहा___"औऱ यहाॅ सें इन्हें लेँ जाकर शंकर काका केँ पास लें जाओ। काका सें कहना कि इन्हें नहला धुलाकर तथा अच्छे सें खानां खिलाकर रेलवे स्टेशन लें जाएॅ औऱ इनके राज्य कि तरफ जाने वाली ट्रेन मे बैठाआएॅ। "
"ठीक हैं बिटिया। " हरिया नें कहा___"हम् अभि इनका छोंड़ देताहूॅ। " कहने केँ संग हि हरिया आगे बढ़ा औऱ फिनकुछ हि देर मे उन दोनो कों रस्सियों केँ बंधन सें मुक्त कर दिया। उन दोनो केँ हाॅथ अकड़ सें गए थें। नीचे लाने मे थोड़ी तक़लीफ़ हुइ।
"बेटी एक् चीज़ कि इजाज़त चाहते हम्। " एक् गार्ड नें रितू सें कहा थां।
"बोलो क्याँ चाहते होँ?" रितू नें कहा।
"इन चारों कों एक् एक् थप्पड़ लगाना चाहते हें हम्। " उस गार्ड केँ लहजे मे एकाएक हि आक्रोश दिखा___"यह अधर्मी व दुराचारी लोग हें। इन लोगों कि वजह सें सच मे कितनी हि मासूम लड़कियों कि जिदगी बरबाद होँ गई। "
रितू नें उन्हें इजाज़त दे दि। इजाज़त मिलते हि दोनोउन चारों कि तरफ बढ़े औऱ फिन खींचकर एक् थप्पड़ उन चारों केँ गालों पऱ रसीदकर दिया। चारों केँ हलक सें चीखें निकल गई। ऑखों सें पानीछलक पड़ा।
"शुक्रिया बेटी। " दूसरे गार्ड नें कहा__"इन लोगों केँ संग बदतर सें बदतर सुलूक करना। हरिया भइया, आप् बिलकुल ठीककर रहे हें। "
इसकेबाद हरिया उन दोनो कों लेकर तहखाने सें बाहर् निकल गय़ा। रितू स्वयं भि तहखाने सें बाहर् आँ गई थि। तहखाने कां गेटबंद कर वोँ अपने कमरे कि तरफबढ़ गई।
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नीलम कों उसका दुपट्टा पकड़ा कर मे एक् झटके सें पलटकर कालेज कि कंटीन कि तरफ बढ़ता चला गय़ा थां। इस टाइम मेरेमन मे तूफान चालू थां। मे सोच भि नहि सकता थां कि आज कालेज मे नीलम सें मेरीइस तरह सें मुलाक़ात होगी। नीलम कों देखकर मेरी ऑखों केँ सामने फिन सें पिछली ज़िंदगी कि ढेर सारी बातें किसी चलचित्र कि मानिन्द दिखती चली गई थि। जिनमें प्रेम थां, घ्रणा थि, धोखा थां। मेरा दिलो दिमाग़ एकदम सें किसी भवॅर मे फसताहुआ महसूस हुआ मुझे।
कंटीन मे पहुॅच कर मे एक् कुर्सी पर्र चुपचाप बैठ गय़ा औऱ अपनी ऑखेंबंद करली। मुझे अपने अंदर बहोत बेचैनी महसूस होँ रही थि। मुझेकुछ भि अच्छा नहि लगरहा थां। मेरादिल रहरहकर दुखी होताजा रहा थां। मेरी ऑखों मे ऑसुओं कां सैलाब सां उमड़ता हुआलगा मुझे। मैने अपने अंदर केँ जज़्बात रूपी तूफान कों बड़ी मुश्किल सें रोंका हुआ थां। मे नहि जानता कि मेरे वहाॅ सें चलेआने केँ बाद नीलम पऱ क्याँ प्रतिक्रिया हुइ।
मुझे नहि पता कि मे उस हालत मे कंटीन पर्र कितनी देर तक बैठारहा। होशतब आयाजब किसी नें पीछे सें मेरीपीठ पर्र ज़बरदस्त तरीके सें वार किया। उस वार सें मे कुर्सी समेत जमीन पर्र मुह केँ बल पछाड़ गय़ा। अभि मे उठ भि नं पाया थां कि मेरेपेट पऱ किसी केँ जूतों कि ज़ोरदार ठोकरलगी। मे उछलते हुएदूर जाकर गिरा।
मगर गिरते हि उछलकर खड़ा हौ गय़ा मे। मेरी नज़र मेरे सामने सें आते एक् हट्टे कट्टे व्यक्ति पऱ पड़ी। उसकी ब्वाडी किसी भि मामले मे किसी रेसलर सें कम नं थि। मुझेसमझ न् आया कि यहकौन हैं, कहाॅ सें आया हैं औऱ मुझ पऱ इसतरह अटैक क्यूं कियेजा रहा हैं।
"हीरो बनने कां बहोत शौक हैं न् तेरी?"उस व्यक्ति नें अजीबभाव सें कहा___"साले मेरे छोटे भइया पर्र हाॅथ उठाया तूने। तुम्हे इसका अंजाम भुगतना हि पड़ेगा। ऐसीऐसी स्थान सें तेरी हड्डियाॅ तोड़ूॅगा कि दुनियाॅ कां कोई डाॅक्टर तेरी हड्डियों कों जोड़ नहि पाएगा। "
"ओह तौ तुम् उस हराम केँ पिल्ले केँ बड़े भइया होँ। " मैने कहा___"औऱ मुझसे अपने छोटे भइया कां बदला लेनेआए होँ। अच्छी बात हैं, लेना भि चाहिए। मगर, मेरी एक् फरमाइश हैं भइया। "
"क्याँ बकरहा हैं तुँ?" वोँ व्यक्ति शख्ती सें गुर्राया___"कैसी फरमाइश?"
"मेरी फरमाइश यह हैं कि एक् एक् करकेआने कां कोई मतलब नहि हैं। " मैने कहा__"ऐसे मे मात्र वक़्त कि बर्बादी होगी। इस लिए एक् कामकरो। तुम्हारे पास जितने भि व्यक्ति होंउन सबको यहीं पर्र बुलालो। उसकेबाद मुकाबला करें तोँ थोडा मजा भि आए। "
"साले बहोत बोलता हैं तूँ। " वोँ व्यक्ति मेरीतरफ बढ़ते हुए बोला___"तेरे लिए मे हि बहुतहूॅ। अभि तेरी हड्डियों कां चूरमा बनाता हूॅरुक। "
वोँ मेरेपास आते हि मुझ पऱ अपनी बलिस्ट भुजा कां वारकर दिया। मे तौ पहले सें हि चौकन्ना होँ गय़ा थां औऱ जानता भि थां कि अगर इसका एक् वार भि मुझेलग गय़ा तोँ मेरी हालत खराब हौ जानी थि। ख़ैर, जैसे हि उसने तेजी सें अपना दाहिना हाथ घुमाया, मे जल्दी हि नीचेझुक गय़ा। उसकाहाथ मेरेऊपर सें निकल गय़ा। उसके सम्हलने सें पहले हि मैनेउछल कर एक् फ्लाइंग किक उसकी कनपटी पर्र जड़ दि। वोँ धड़ाम सें जमीन पऱ गिरा। मुझे हैरानी हुइ मगर मुझे उसके गिरने कां कारणसमझ आँ गय़ा। गुस्से मे यही होता हैं। मुझे मारने केँ लिएजब उसने गुस्से सें अपनाहाथ घुमाया थां तौ मे झुक गय़ा थां। उसकाहाथ जैसे हि मेरेसिर सें निकला वैसे हि उछलकर मैने ज़ोरदार फ्लाइंग किक उसकी कनपटी पर्र जड़ी थि। वोँ सम्हल नहि पाया थां। अपने हि प्रहार केँ वेग मे वो मेरे प्रहार केँ लगते हि धड़ाम सें गिरा थां।
उसके गिरते हि मैंने उछलकर उसकेऊपर जंप मारीमगर वो पलट गय़ा। जैसे हि मेरे दोनोपेर जमीन पर्र आए उसकी एक् टाॅगघूम गई औऱ मेरी एक् टाॅग पऱ लगी। नतीजा यहहुआ कि मे पिछवाड़े केँ बलगिर गय़ा मगर लम्हा भर मे हि उछलकर खड़ा भि होँ गय़ा। औऱ सच कहूॅ तोँ यह मेरा किस्मत हि अच्छा थां कि मे उछलकर खड़ा होँ गय़ा थां। क्योंकि जैसे हि मे गिरा थां वैसे हि उसने तेज़ी अपनी दाहिनी कोहनी कां वार मेरी छाती कि तरफ किया थां। मगर मेरेउछल कर खड़े हौ जाने पर्र उसका वोँ वार जमीन पर्र तेजी सें लगा। कोहनी कां तीब्र वारजब पक्की ज़मीन सें टकराया तोँ उसकेहलक सें चीख निकल गई। अपनी कोहनी कों दूसरे हाथ सें जल्द जल्द सहलाने लगा थां वो। ऐसा अवसर छोंड़ना निहायत हि बेवकूफी थि। मैने अपनी दाहिनी टाॅग पूरी शक्ति सें घुमा दि। जोँ कि उसकी कनपटी पर्र लगी। वोँ दूसरी कनपटी केँ बल ज़मीर पर्र गिर गय़ा। उसकासिर ज़ोर सें ज़मीन सें टकराया थां। उसकेमुख सें घुटी घुटी सि चीख़ निकल गई। निश्चित हि उसकी ऑखों केँ सामने कुछसमय केँ लिए अॅधेरा छा गय़ा होगा।
अब मैने रुकना मुनासिब न् समझा। मे एकदम सें पिल पड़ाउस पर्र। लात घूॅसों सें उसकी जमकर ठोकाई कि मैने। वोँ बचने केँ लिएइधर उधर हाॅथपेर माररहा थां। जबकि मे बिजली कि स्पीड सें उस पऱ वार कियेजा रहा थां। अचानक हि उसकेहाथ मे मेरी टाॅग आँ गई। उसने मेरीउस टाॅग कों पकड़कर पूरी शक्ति सें उछाल दिया। मे हवा मे झूलते हुए एक् टेबल पऱ गिरा। मेरीपीठ पर्र टेबल कां किनारा बड़ी तेज़ी सें लगा। मे चाहकर भि उस दर्द सें निकलने वालीचीख कों रोंक न् सका। तभी मेरी नज़र सामने पड़ी औऱ मे पलक झपकते हि दर्द कों बरदास्त करके टेबल सें हट गय़ा। नतीजा यहहुआ कि मेरे हटते हि टेबल पर्र कुर्सी कां तेज़ प्रहार पड़ा औऱ टेबलव कुर्सी दोनो हि टूटती चली गई।
इधर प्रहार करने केँ बाद वोँ व्यक्ति सम्हल भि न् पाया थां कि एक् कुर्सी उठाकर मैने बड़ी तेज़ी सें उसकेसिर पर्र वारकर दिया। वार ज़बरदस्त थां। हाॅथ मे टूटी हुई कुर्सी लिए वो सामने टूटी हुइ हि टेबल पर्र मुह केँ बलगिर गय़ा। सिर सें भल्ल भल्ल करकेखून बहनेलगा थां उसके। मुझे समझते देर न् लगी कि उसकासिर फट गय़ा हैं। वो बुरीतरह चीखा थां। कंटीन मे उसकीचीख गूॅज गई थि। मगर मे रुका नहि। मैंने वही कुर्सी एक् बारफिन सें अपनेसिर सें ऊपर तक उठाकर उस पऱ पटक दि। इसबार उसकीपीठ पर्र कुर्सी लगी थि। लकड़ी कि कुर्सी थि वोँ। उसकेदो पाए चटाक सें टूटगए। वोँ व्यक्ति धड़ाम सें वहीं पर्र पसर गय़ा।
अभि मे उस पऱ फिन सें वार करने हि वाला थां कि मैंने देखा कि वोँ व्यक्ति एकदम सें सिथिल पड़ गय़ा थां। मैने अपने हाॅथ मे ली हुइ कुर्सी फेंक दि। झपटकर मे उसके पऱ पहुॅचा। वोँ बुरीतरह खून मे नहाये जारहा थां। उसकेमुख सें कराहटें निकलरही थि। मुझेलगा साला कहींमर हि नं जाए। वरना पंगा हौ जाएगा।
मैने देखा उसकी ऑखेंबंद होतीजा रही थि। मे यहदेख कर बुरीतरह घबरा गय़ा। इधरउधर देखा तौ चौंक गय़ा। पूरी कंटीन मे लड़के लड़कियों कि भीड़जमा थि। सभीलोग फटीफटी ऑखों सें देखेजा रहे थें।
"भाईऽऽऽ। " तभीउस भीड़ सें आशू राना चीखते हुएआया, बुरीतरह रोनेलगा थां वो___"यह क्याँ हौ गय़ा भइया तुम्हें? उठो भइया, मेरीतरफ देखो नां भइया। "
"देखोइस तरह रोने सें कुछ नहि होगा समझे। " मैने कहा___"इसे जल्द सें हास्पिटल लें जानां पड़ेगा वरनायह मर जाएगा। "
"तुमने मारा हैं मेरे भइया कों तुमने। " आशू राना नें बिफरे हुए लहजे मे कहा___"अगर मेरे भइया कों कुछ भि हुआ तोँ आगलगा दूॅगा मे इस पूरे काॅलेज मे। "
"देखोयह सभी बातें तुम् बाद मे भि कर लेना भइया। " मैने उसके भइया कि हालत कों देखते हुए कहा___"पहले एम्बूलेंस कों बुलाओ। "
"एम्बूलेंस कि ज़रूरत नहि हैं। " आशू राना नें रोतेहुए कहा___"मेरा भइया अपनी वाहन सें आया थां। बाहर् खड़ी हैं। "
"ओहठीक हैं फिन। " मैने कहा___"इसे कार तक लेँ चलने मे मेरी सहायता करो। यह बहोत भारी हैं मे अकेले इसे केसे लें जाऊॅगा?"
मेरे कहने पर्र आशू राना नें अपने भइया कों एक् तरफ सें पकड़ा, दूसरी तरफ सें मैंने उसे पकड़ा। बहुत मेहनत केँ बाद आखिर मे औऱ आशू राना उसके भइया कों वाहन तक लेँ आकरउसे गाड़ी कि पिछली सीट पऱ लेटा दिया।
"गाड़ी कि चाभीदो मुझे। " मैनेआशू राना सें कहा___"तुम् अपने भइया कों लेकर पीछेबैठ जाओ। मे वाहन कों जल्द सें हास्पिटल लें चलताहूॅ। "
"पहले तोँ मेरे भइया कों मारकर इस हालत मे पहुॅचा दिया औऱ अबउसे हास्पिटल भि लें जारहे हौ। " आशू राना नें गुस्से मे कहा__"यह बहोत अच्छा कररहे हौ तुम्, हैं नं? मगरयाद रखना कि इसका हिसाब तुम्हें देना होगा। "
"हाॅ ठीक हैं दोस्त लें लेना हिसाब। " मैने उसकेहाथ सें चाभी खींचते हुए कहा___"पहले जौ ज़रूरी हैं वोँ तौ करनेदो। "
मे गाड़ी कि ड्राइविंग सीट पर्र बैठकर वाहन केँ इग्नीशन मे चाभी लगाया औऱ घुमाकर उसे स्टार्ट किया। मैने देखा कि काॅलेज केँ बहुत सारे लड़के लड़कियाॅ बाहर् आँ गए थें। उनमें एक् चेहरा नीलम कां भि थां। वो मुझे देखकर हैरान थि। मैने उससे नज़र हटाई औऱ गाड़ी कों एक् झटके सें आगे बढ़ा दिया।
ऑधी तूफान बनी वाहन बहोत जल्द हास्पिटल केँ सामने आकर खड़ी हौ गई। मे झट सें गेटखोल कर बाहर् आया। पिछला गेटखोल कर मैनेआशू राना कों बाहर् आने कों कहा। मैने नज़र घुमाकर देखा तोँ दोलोग एक् खाली स्ट्रेचर कों लिएजा रहे थें। मैंने झट सें उनको आवाज़ दि। वोँ मुड़कर मेरीतरफ देखने लगे।
"अरे जल्द स्ट्रेचर लेँ आओ। " मैने चिल्लाते हुए कहा___"इट्स अर्जेन्ट। "
मेरीबात सुनकर वोँ जल्दी हि हमारी तरफ दौड़ते हुएआए। हम् चारों नें आशू राना केँ भइया कों सीट सें निकाल कर स्ट्रेचर पर्र लिटाया। हास्पिटल वाले व्यक्ति उसेउठा कर लें जानेलगे। मे औऱ आशू राना भि उनके पीछे हौ लिए।
कुछ हि देर मे वोँ लोगआशू केँ भइया कों ओटी मे लें गए। इधर आशू राना ऑखों मे ऑसूलिए हास्पिटल कि गैलरी मे इधर सें उधर बेचैनी औऱ तकलीफ़ मे टहलने लगा।
"उम्मीद हैं कि बहोत जल्द तुम्हारा भइया पहले केँ जैसा हौ जाएगा। " मैनेआशू राना कि तरफदेख करकहा थां।
"बातमत करो तुम् मुझसे। " आशू राना अजीबभाव सें गुर्राया___"मेरे भइया कि इस हालत केँ तुम् हि जिम्मेदार होँ। "
"देख भइया, यह जोँ कुछ भि हुआ हैं न् उसका जिम्मेदार मात्र तूँ हैं समझा?" मैने भि शख्तभाव सें कहा___"तूने कालेज मे उस लड़की कि इज्ज़त पर्र हाथ डाला। इस लिए मैनेउस लड़की कि इज्ज़त बचाने केँ लिएतुझ पर्र हाथ उठाया। औऱ तूने क्याँ किया? तुँ गय़ा तोँ अपने बड़े भइया कों बुला लाया अपनीहार औऱ अपनीमार कां बदला लेने केँ लिए। इस लिएयह तौ होना हि थां। हम् दोनो मे सें किसी एक् केँ संग तोँ यह होना हि थां। समय औऱ हालात कि बात हैं। मेरा दाॅवचल गय़ा औऱ मैने तेरे भइया कि यह हालतबना दि। वरनाकोई नहि सोच सकता थां कि तेरेउस मुस्टंडे भइया सें मे बचूॅगा। "
अभि आशू रानाकुछ बोलने हि वाला थां कि सहसा हमारे पास डाॅक्टर आँ गय़ा।
"देखिये सिर पऱ गहरी चोंटलगी हैं। " डाक्टर कहरहा थां___"सिर फट गय़ा हैं जिसकी वजह सें खून बहुत मात्रा मे निकल गय़ा हैं। हमने ब्लड टेस्ट किया तोँ उनके ग्रुप कां ब्लड हमारे हास्पिटल मे इस टाइम अवायलेवल नहि हैं। जबकि उनको बल्ड चढ़ाना बहोत ज़रूरी हैं। वरना उनकीजान भि जा सकती हैं। "
"डाक्टर आप् मेराखून लेँ लीजिए। " आशू राना नें कहा___"मगर मेरे भइया कों बचा लीजिए प्लीज़। "
"ठीक हैं आइये। " डाक्टर नें कहा___"मे पहले आपके ब्लड कां टेस्ट लूॅगा अगर उनके ब्लड सें मैच होँ गय़ा तौ आपका हि ब्लड उनको चढ़ा देंगे। "
डाक्टर आशू राना कों लेकरचला गय़ा। जबकि मे तकलीफ़ कि हालत मे आँ गय़ा थां। मे ईश्वर सें दुआ करनेलगा कि राना केँ भइया कों कुछ न् होँ। थोड़ी देर मे हि डाक्टर केँ संगआशू राना बाहर् आँ गय़ा।
"क्याँ हुआ डाक्टर साहब?" मैंने हैरानी सें देखते हुए कहा___"आप् इसे बाहर् क्यूं लें आए?"
"इनका ब्लड ग्रुप उनके ब्लड ग्रुप सें मैच नहि कररहा हैं। " डाक्टर नें कहा___"हमने मोबाइल द्वारा दूसरे हास्पिटलों मे भि पताकर लिया हैं मगरइस टाइम यहाॅआस पास केँ किसी भि हास्पिटल मे उस ग्रुप कां ब्लड उपलब्ध नहि हैं। "
"डाक्टर साहब मेरा ब्लड भि चेककर लीजिए न्। " मैने कहा___"शायद मैच हौ जाए। "
"ठीक हैं चलिए। " डाक्टर नें कहा___"आपका भि देख लेते हें। "
मे डाक्टर केँ संगचला गय़ा। अंदर डाक्टर नें मेरा ब्लड टेस्ट किया औऱ आश्चर्यजनक रूप सें मेरा ब्लडमैच कर गय़ा। डाक्टर औऱ मे दोनो हि खुश हौ गए।
"ओह वैरीगुड यंगमैन। " डाक्टर नें कहा__"यह तौ कमाल होँ गय़ा। आपका ब्लड इनके ब्लड सें मैचकर रहा हैं। "
"तौ फिनदेर किसबात कि हैं डाक्टर?" मैने कहा___"जल्द सें इसको मेराखून चढ़ा दीजिए। "
"ओहयस यंगमैन। " डाक्टर नें कहा__"आइये मेरेसंग। "
मे उस कमरे सें निकलकर डाक्टर केँ संगउस कमरे मे गय़ा जहाॅ पऱ राना केँ भइया कों बेड पर्र लिटाया गय़ा थां। वहाॅदो नर्सें मौजूद थि।
"अंकिता। " डाक्टर नें एक् नर्स सें कहा___"इस यंगमैन कां ब्लड ग्रुप इनके ग्रुप सें मैचकर रहा हैं इसलिए जल्दी प्रोसेस शुरुआत करो। "
उसकेबाद मुझे भि राना केँ भइया केँ बगल वालेबेड पऱ लेटा दिया गय़ा। मैंने ईश्वर कां धन्यवाद अदा किया औऱ अपनी ऑखेंबंद करली। कुछ हि देर मे मुझे अपने हाॅथ मे सुई चुभती महसूस हुईँ।
करीबदो घंटेबाद !
डाक्टर नें आकर बताया कि आशू कां भइयाअब ठीक हैं। मेरे जिस्म सें खून कि उचित मात्रा लेने केँ बाद मुझे डाक्टर नें बाहर् भेज दिया थां। मुझे कमज़ोरी कां एहसास हौ रहा थां। मगरदिल मे यह खुशी थि कि मेरेखून सें आशू केँ भइया कि जानबच गई थि।
आशू राना जौ अब तक मुझसे चिढ़ा चिढ़ा सां थां अब वो मुझसे बड़े सलीके सें बातकर रहा थां। उसनेयह स्वीकार किया कि इस सबकेलिए सच मे वही जिम्मेदार थां। डाक्टर नें आशू राना केँ भइया केँ सिर पऱ टाॅके लगाकर उस पर्र पट्टी कर दि थि।
मे आशू राना केँ संगउस हास्पिटल मे तब तक रहाजब तक कि उसके भइया कों होश नहि आँ गय़ा थां। डाक्टर नें आकर बताया कि राना केँ भइया कों होश आँ चुका हैं तोँ हम् दोनो खुशी खुशी उससे मिलने गए।
कमरे मे पहुॅच करआशू राना अपने भइया कों ठीकठाक देखकर बेहदखुश हुआ। मे आगेबढ़ कर उसके भइया सें बोला___"केसे हौ भइया?"
"अब तौ ठीकहूॅ। " उसने कहा___"मुझे डाक्टर नें बताया कि तुमने मुझे बचाने केँ लिए अपनाखून मुझे दिया। ऐसा क्यूं किया तुमने भइया?भला क्याँ लगता थां मे तुम्हारा जौ तुमने अपनाखून देकर मुझे मरने सें बचाया?"
"कोई नं कोई नाता तौ बन हि गय़ा थां हम् दोनो केँ बीच मे। " मैने कहा___"फिन चाहे वोँ दुश्मनी कां नाता हि क्यूं न् हौ। सभी जानते थें कि मे तुम्हारे सामने एक् लम्हा केँ लिए भि टिक नहि पाऊॅगा मगरयह मेरी भाग्य थि कि मुझेकुछ नहि हुआ बल्कि मैने स्वयं कों कुछ होने सें बचा लिया। मगर तुम्हारी भाग्य मे यहसभी होना थां सो हौ गय़ा औऱ मजे कि बात देखो कि मेरे हि खून सें तुम्हें जीवित भि बच जानां थां। "
"सचकहा तुमने। " राना केँ बड़े भइया नें कहा___"यह भाग्य हि तोँ थि। मैने भि तौ यही उम्मीद कि थि कि दो मिनट केँ अंदर तुम्हारी हड्डियाॅ तोड़कर कालेज सें चला जाऊॅगा। मगर क्याँ पता थां कि उल्टा मुझे हि इसहाल मे पहुॅच जानां होगा। मे हैरान थां कि एक् मामूली सां लड़का मुझेइस तरह केसेमात देरहा थां। मतलबसाफ हैं कि तुम् भि कम नहि थें। "
"चलो छोड़ो उसबात कों। " मैने कहा___"सबसे अच्छी बातयह हैं कि तुम् सही सलामत होँ भइया। "
"भइयाइस सबका जिम्मेदार मे हूॅ। "आशू राना नें दुखीभाव सें कहा___"सारे फसाद कि शुरुआत तोँ मैने हि कि थि। मे उस लड़की कि रैगिंग कररहा थां। मेरीकुछ बातों सें उस लड़की कों क्रोध आया औऱ उसने मुझे सबके सामने थप्पड़ मार दिया थां। उसके थप्पड़ मारने कि वजह सें हि मुझे क्रोध आयाहुआ थां जिसकी वजह सें मे उसकेसंग वोँ सभीकर रहा थां। तभीयह भइयाआया औऱ मुझे मारने लगा थां। इससेमार औऱ मातखा कर हि मे तुम्हारे पासआया थां कि तुम् इसेसबक सिखाकर मेरा बदलालो। मगरकुछ औऱ हि हौ गय़ा भइया। "
"तुमने ग़लत किया औऱ उस ग़लती मे मुझे भि शामिल करवा लिया। " राना केँ भइया नें कहा__"इसका नतीजा यह तोँ होना हि थां छोटे। कितनी बार तुझेही समझाया हैं कि ऐसेकाम मत कियाकर बल्कि पढ़ाई कियाकर। मगर तूँ तोँ पिताजी पर्र गय़ा हैं नं। कहाॅ किसी कि सुनोगे?"
"अब सें मात्र तुम्हारी हि बात सुनूॅगा भइयाशपथ सें। " आशू नें कहा___"मे वोँ सभी ग़लतकाम छोड़ दूॅगा। "
"यहसभी तौ तुमने पहले भि जाने कितनी बार मुझसे कहा थां छोटे। "आशू केँ भइया नें कहा___"मगर क्याँ तुम् कभी अपने फैसले पऱ अटलरहे? नहि नं? रह भि नहि सकते छोटे। तुम् बिलकुल पिताजी कि तरह हौ जैसे उन्हें अपने गुरूर मे किसी कि परवाह नहि थि। उसी कां नतीजा थां कि आज हम् बिनामाॅ केँ हें। तुम् भि उनकीतरह हि हौ छोटे। आज अगर मे मर भि जाता तोँ तुम् पऱ औऱ बापू पर्र कोईअसर नहि होता। "
"नहि भइयाऐसा मत बोलो प्लीज। " आशूरो पड़ा थां, बोला___"मुझे याद हैं भइया कि आज तक तुमने केसे मेरीमाॅ बनकर मुझे पाला पोषा हैं। पिताजी नें तोँ कभी ध्यान भि नहि दिया कि उनके बेटेकिस हालें हें। मे आपकीशपथ खाकर कहताहूॅ भइया कि मे अब सें आपका एक् अच्छा भइयाबन कर दिखाऊॅगा। "
"चलमान ली तेरीयह बात भि। " आशू केँ भइया नें कहा___"औऱ अगर सचमुच ऐसा हौ गय़ा तोँ मे तहेदिल सें तुम्हारा शुक्रगुजार हूॅयार कि तुमने मेरीआज यह हालतकर दि। वरनाभला केसे मेरा भइयासही रास्ते पर्र चलने कि बात करता। "
"बड़े बुजुर्ग कहते हें कि जोँ कुछ भि होता हैं अच्छे केँ लिए हि होता हैं। " मैने मुस्कुराते हुए कहा___"होँ सकता हैं यह जौ कुछ भि हुआआज वोँ इसी अच्छे केँ लिएहुआ होँ। "
"हाॅ साथी। "आशू केँ भइया नें कहा___"आज सें तुम् मेरे सबसे अच्छे यार होँ औऱ मेरेइस नालायक भइया केँ भि। इसे अपनेसंग हि रखना। औऱ अगर कहीं ग़लती करे तोँ वहीं पऱ इसकी धुनाई भि कर देना। मे कुछ नहि बोलूॅगा। "
"भइयायह आप् क्याँ कहरहे हें?" आशू राना कि ऑखेंफैल गईं___"मुझे इसकेसंग रहने कों कहरहे हें? यहहर रोज़ मेरी कुटाई करेगा भइया। प्लीज ऐसामत कीजिए। "
"दोस्त तुम् ऐसा क्यूं सोचते हौ कि मे तुम्हारी कुटाई करूॅगा?" मैने कहा___"तुम् आज सें मेरे साथी होँ। हम् सभीसंग मे हि पढ़ेंगे। मगर एक् बात अवश्य याद रखना कि भूल सें भि किसी केँ संगकोई बुरा व्यवहार नहि करोगे। वरनासुन हि लिया हैं नं कि भूषण भइया नें क्याँ कहा हैं। ख़ैर, मे तुमसे यह कहना चाहता हूॅ कि एक् ऐसा इंसान बनोआशू जिससे हर ब्यक्ति केँ दिल मे तुम्हारे लिए इज्ज़त होँ, प्रेम हौ औऱ सम्मान हौ। किसी कां बुरा करने सें याँ सोचने सें कभी भि तुम् लोगों कि नज़र मे अच्छे नहि बन सकते। तुम् स्वयं सोचो कि तुमने अपने ग़लत दोस्तों कि शोहबत मे अपनी क्याँ इमेजबना ली हैं सबकेबीच? सभीलोग तुमसे दूर भागते हें। कोई भि अच्छा ब्यक्ति तुमसे किसीतरह कां ताल्लुक नहि रखना चाहता। लोग तुमसे तुम्हारे ग़लत ब्यौहार कि वजह सें कतराते हें। किसी कों डरा धमकाकर तुम् यह समझते होँ कि लोगों केँ बीच तुम्हारा दबदबा हैं। जबकि ऐसीसोच सिरे सें हि ग़लत हैं। क्योंकि वोँ लोग तुमसे डरते नहि हें बल्कि तुम् जैसे बुरे इंसान केँ मुह नहि लगना चाहते। इसलिए वोँ सभी तुमसे दूर भागते हें। इसलिए मित्र ऐसा इंसान बनो जिसमें हरकोई तुम्हारे पास स्वयं आने केँ लिएरात दिन सोचे। औऱ यहसभी तभी होगाजब तुम् सबकेलिए अच्छा सोचोगे। किसी कों अपने सें कमज़ोर नहि समझोगे। "
"वाउ साथी। " भूषण राना प्रसंसा केँ भाव सें कह उठा___"कितनी गहरी बातें कही हैं तुमने। काश तुम्हारी यह बातें मेरेइस छोटे कों समझ आँ जाएॅ औऱ यहउसी राह पऱ चल पड़ेजिस राह पर्र चलने सें यह एक् अच्छा इंसान बनजाए। "
"मे चलूॅगा भइया। "आशू रानाकह उठा__"अब सें आपकोकोई शिकायत कां मौका नहि दूॅगा। इस भइया कि बात मेरीसमझ मे आँ गई हैं। मुझे एहसास हौ रहा हैं भइया कि इसने जौ कुछ भि मेरे बारे मे कहा वोँ एक् कड़वा सच हैं। सच हि तोँ कहा हैं भइया नें कि सभीलोग मेरे बुरे आचरण कि वजह सें मुझसे दूर भागते हें। मगरअब ऐसा नहि होगा भइया। मे इसकेसंग रहकर एक् अच्छा इंसान बनूॅगा औऱ अवश्य बनूॅगा। "
"यह हुईँ नं बात। " मैने कहा___"चल आजाइसी बात पऱ गलेलग जा मेरे। कितनी बड़ीबात हैं कि आज काॅलेज केँ पहले हि दिन मे पहले दुश्मनी हुईँ औऱ फिन दोस्ती भि हौ गई। "
आशू मेरेगले लग गय़ा। मैने देखाबेड पर्र पड़े भूषण राना कि ऑखों मे खुशी केँ ऑसूॅ थें। कुछदेर औऱ वहाॅ पऱ रुकने केँ बाद मैने भूषण राना सें जाने कि इजाज़त माॅगी तोँ उसने पहले मुझसे मेरा मोबाइल नंबर लिया औऱ मैने भि उसका लिया। फिन भूषण केँ कहने पर्र आशू मुझे भूषण कि गाड़ी सें काॅलेज तक छोंड़ा। पूरे रास्ते आशू राना कां चेहरा खिला खिला नज़रआया मुझे। मे समझ गय़ा कि यहअब अवश्य सुधर जाएगा।
काॅलेज केँ गेट केँ पास उतारकर आशू वापसलौट गय़ा जबकि मे पार्किंग कि तरफबढ़ गय़ा अपनी बाइक कों लेने केँ लिए। पार्किंग सें अपनी बाइक पर्र सवार होकर अभि मैने बाइक कों स्टार्ट करने केँ लिए सेल्फ पऱ अॅगूठा रखा हि थां कि मेराफोन मोबाइल बजउठा। मैने पैंट कि जेब सें फोन निकाल कर स्क्रीन पर्र फ्लैश कररहे नंबर कों देखा तौ मेरे चेहरे पर्र सोचने वालेभाव उजागर हौ गए।
भाग हाज़िर हैं दोस्तो,,,,,,,,,,
bhay kahani too gajab kee h. bus ek sujhaw h kee dono bhay k beech pyaar waise hi rakho lekin physical relation mat banana or life partner doosre character ko introduce krna. Baaki lekhak kee marzi woh jaisa chahe.
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Awesome update shubham bhay,
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bhay aapka update padhne के बाद too dill ❤️ hi nahii bharta h, mann krta h bas ayese hi padhte jau,
yeh kahani मेरी favorite kahaniyan mai से एक ban gai h,
ritu ne saare proof ko ikattha krr लिया h, और kuchh videos mobile mai bi usne transfer krr लिया h,
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rana के bade bhay के sath raj की fighting lajawab thi bhay,
और raj ne manavta kaa parichay dete hue na sirf unhe hospital mai bharti karwaya h balki unhe अपना rakt bi दिया h,
और अब उसकी rana के sath dosti bi hu gai h,
Dekhte h की अब aage क्या hotha h,
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