हम् जौ धीरे-धीरे धीरे-धीरे खोगए। – New Episode
अध्याय 8: पापपूर्ण समर्पण कां एक् दिन
सुभह केँ सूरज कि हल्की सुनहरी रोशनी, जौ पर्दों सें छनकर आँ रही थि, मे मेरी आँखें आहिस्ता खुलीं। सबसे पहली चीज़ जौ मैंने महसूस कि, वो थि एक् नंगे शरीर कि गरमाहट जोँ मेरे जिस्म सें सटाहुआ थां। सलोनी दिदी। मेरी सुंदर चचेरी बेहन मेरी बाहों मे लेटी हुइ थि, पूरीतरह नंगी, बिल्कुल मेरीतरह। उसके रसीले, भारी बूब्ज़ मेरी छाती सें दबेहुए थें, औऱ उसकी चिकनी जांघें पतली चादर केँ नीचे मेरी जांघों सें उलझी हुइ थीं।
मे कुछदेर तक वहीं लेटारहा, बसउसे निहारता रहा। मेरी उंगलियों नें धीरे-धीरे सें उसके लंबे, घुंघराले काले बालों कों सहलाया, औऱ कुछ लटों कों उसकेपरी जैसे चेहरे सें हटाया। उसके भरे-भरे होंठ थोड़े सें खुलेहुए थें, औऱ उसकी लंबी पलकें उसके गालों पऱ शांति सें टिकी हुइ थीं। वो एक् हि वक़्त पऱ इतनी मासूम औऱ फिन भि इतनी कामुक लगरही थि। जैसे हि मैंने उसकी बेदाग हुस्न पऱ अपनी नज़रें फिराईं, मेरादिल एक् 'वर्जित प्रेम' औऱ गहरीहवस सें भर गय़ा।
फिन उसकी आँखें धीरे-धीरे सें खुलीं।
जिस लम्हा हमारी आँखें मिलीं, उसके होंठों पर्र एक् हल्की, नींदभरी मुस्कान तैर गई। बिनाकुछ कहे, वो औऱ लगभग सरकी औऱ अपनी बाहें कसकर मेरे चारों ओर लपेटलीं, औऱ मुझे एक् गरम, प्रेम भरी झप्पी मे खींच लिया। ऐसा करते वक्त, उसके विशाल, रसीले बूब्ज़ मेरे चेहरे सें कसकरदब गए। उसकीगरम, नंगी त्वचा कां मेरी त्वचा सें छूना मेरे पूरे जिस्म मे एक् सिहरन दौड़ा गय़ा।
उसने मेरे माथे पर्र प्रेम सें चूमा, औऱ उसके होंठकुछ सेकंड तक वहीं टिकेरहे। फिन वो बस इतना पीछेहटी कि मुझे दोबारा देखसके; उसकी आँखें सुभह केँ प्रेम औऱ बढ़ती हुइ चाहत सें भरी हुईँ थीं।
हम् कुछदेर तक वैसे हि रहे, बस एक्-दूसरे कों थामेहुए। फिन धीरे धीरे, स्वाभाविक रूप सें, हमारे चेहरे एक्-दूसरे केँ लगभगआए।
हमारे होंठ सबसे कोमल तरीके सें मिले — शुरुआत मे एक् पंख जैसा हल्का सां स्पर्श। बस एक् शरारती सां छूना। एक् बार। दो बार। मैंने अपने होंठों सें उसके निचले होंठ केँ किनारे कों छुआ, औऱ उसकी नरमी कां खुशी लिया। सलोनी दिदी नें भि वैसा हि जवाब दिया; उसके साँसों कि गरमाहट औऱ मिठास मेरे मुँह पऱ महसूस हौ रही थि। हमारे होंठ बहुतदेर तक इसीतरह खेलते रहे — आरामसे, शरारती अंदाज़ मे, छूतेहुए, हल्के सें दबाते हुए, पीछे हटतेहुए, औऱ फिन सें एक् संगआते हुए।
मेरादिल पहले सें हि मेरी छाती मे ज़ोरों सें धड़करहा थां।
मैंने अपनी उंगलियाँ उसकेघने, घुंघराले बालों मे फिराईं, औऱ धीरे-धीरे सें उन्हें थामते हुए उसकासिर थोडा सां ऊपर उठाया। उसने एक् हल्की सि अहहभरी औऱ वैसा हि किया; उसकी उंगलियाँ मेरे बालों मे उलझगईं। हमारी साँसों कि लय एक्-दूसरे सें मिलने लगी — वे औऱ गहरी, औऱ भारी होतीगईं।
फिन वो चुंबन औऱ भि गहरा हौ गय़ा। मैंने उसके निचले होंठ कों अपने होंठों केँ बीचदबा लिया औऱ आरामसे चूसने लगा। सलोनी नें मेरे मुंह मे हल्की सि अहहभरी औऱ बदले मे मेरे ऊपरी होंठ कों चूसने लगी। हमारे मुंह औऱ चौड़े खुलगए। जैसे हि हमारी जीभें छूईं, हम् दोनों मे बिजली सि दौड़ गई।
उसकीजीभ गरम, गीली औऱ बेहद कोमल थि। मैंने उसका स्वाद चखा - एक् मीठा, हल्का पुदीने जैसा सुभह कां स्वाद, जिसमें सलोनी कि शुद्ध खुशबू मिली हुइ थि। पहले तौ हमारी जीभें शरमाते हुए मिलीं, एक्-दूसरे केँ चारों ओर घूमती रहीं, छूती रहीं, सहलाती रहीं। फिन भूख हावी होँ गई।
चुंबन जोशीला हौ गय़ा। भूखा। गीला।
हमारी जीभें गहराई सें उलझगईं, धीरे धीरे, कामुक स्पर्शों सें एक्-दूसरे पर्र फिसलती रहीं। जैसे हि हम् एक्-दूसरे केँ मुंह कों चूमने लगे, लार मिलने लगी। मे उसकीलार कां स्वाद चख सकता थां, गरम औऱ मीठी, औऱ मुझेपता थां कि वो मेरीलार कां स्वाद चखरही हैं। हमारे चुंबन कि गीली आवाज़ें शांत सुभह केँ कमरे मे गूंज उठीं - कोमल, कामुक औऱ बेहद उत्तेजक।
हमने चुंबन तोड़े बिना अपनी स्थिति बदलली।
सबसे पहले, मे उसकेऊपर लेट गय़ा औऱ उसे गद्दे पर्र दबा दिया। उसके पांव अपने आप् खुलगए, जिससे मेरा जिस्म उनकेबीच मे समा गय़ा। हमारे नंगे सीनेआपस मे रगड़खा रहे थें, उसके सख्त निप्पल मेरी त्वचा सें टकरारहे थें। मैंने उसे औऱ ज़ोर सें, औऱ बेताबी सें चूमा, मेरीजीभ उसके मुंह मे ऐसेघुस गई मानो मे उसकेहर इंच पऱ अपना अधिकार जमाना चाहता थां। वो ज़ोर सें कराहउठी औऱ मेरीजीभ चूसने लगी, लालच सें मेरीलार पीरही थि।
फिन उसने मुझेपीठ केँ बल लिटा दिया औऱ मेरेऊपर चढ़कर मेरीकमर पऱ बैठ गई। उसके भारी बूब्ज़ मेरे चेहरे केँ ऊपरलटक रहे थें जब वो मुझेफिन सें चूमने केँ लिए झुकी। इस बार चुंबन धीमा, गहरा औऱ ज़्यादा कामुक थां। उसने मेरीजीभ कों अपने मुंह मे लें लिया औऱ उससे खेलने लगी, अपनीजीभ कों मेरीजीभ केँ चारों ओर घुमाते हुए, लार कि गाढ़ी धारें आपस मे बांटरही थि। हमारे मिलेहुए थूक कि एक् पतली लकीर हमारे होंठों कों जोड़रही थि जब वो थोडा पीछेहटी औऱ फिन सें चुंबन करनेलगी।
मेरेहाथ उसके पूरेबदन पऱ घूमने लगे— उसकी चिकनी पीठ पऱ फिसलते हुए, उसके कोमल, गोल नितंबों कों पकड़ते हुए, उसकीकमर कों दबाते हुए, फिन ऊपर जाकर उसके स्तनों कों थाम लिया। जब मैंने उसके निप्पल्स कों धीरे-धीरे सें दबाया तौ वो कांपउठी।
हमनेफिन सें पोजीशन बदली। वो मेरे सामने करवट लेकरलेट गई, एक् पेर मेरीकमर पर्र रखाहुआ थां। हमनेइस तरह बहुतदेर तक चुंबन किया— पहले धीरे धीरे औऱ जोश सें, फिनतेज औऱ बेताब होकर। हमारी जीभें नाचती, लड़ती औऱ एक्-दूसरे कों सहलाती रहीं। उसकेथूक कां स्वाद मुझे पागलकर रहा थां। मुझे औऱ चाहिए थां। मैंने उसकी ज़बान कों भूखे कि तरह चूसा, उसकाथूक निगल लिया, औऱ उसने भि मेरेसंग वैसा हि किया।
अब हमारे दिल कि धड़कनें तेज़ी सें दौड़रही थीं। मे महसूस कर सकता थां कि उसकादिल मेरी छाती सें टकराकर ज़ोर-ज़ोर सें धड़करहा थां, बिल्कुल मेरी हि तरह। वो चुंबन बेतरतीब, गीला औऱ अश्लील हौ गय़ा थां—मगर सबसे हसीन तरीके सें। जब हम् एक्-दूसरे कों पूरीतरह सें चूमरहे थें, तौ हमारे ठुड्डी सें थूक कि लकीरें टपकरही थीं। हम् अपनीनाक सें ज़ोर-ज़ोर सें साँस लें रहे थें, औऱ साँस लेने केँ लिए भि उस चुंबन कों तोड़ने कों रेडी नहि थें।
मैंने उसे औऱ भि लगभग खींच लिया, उसके जिस्म कों अपनेबदन सें कसकरदबा दिया। मेरा एक् हाथ उसकी गर्दन केँ पीछे थां, जबकि दूसरा हाथ उसके कूल्हों कों सहलारहा थां; मे उसकी योनि कों अपने कड़े लिंग सें औऱ भि कसकरसटा रहा थां, जौ हमारे शरीरों केँ बीच फंसाहुआ थां। वो धीरे धीरे मेरेबदन सें रगड़खा रही थि, औऱ मेरे मुंह मे हि कराहरही थि, जबकि हमारी जीभों केँ बीच एक् जोशीली जंग जारी थि।
हम् फिन सें पलटे। इस बार वो एक् बारफिन मेरे नीचे थि। मैंने अपने दोनों हाथों सें उसका चेहरा थामा औऱ उसेऐसे चूमा, मानो मे उसकेलिए भूखा-प्यासा हौ गय़ा हूं। गहरा। अधिकार-जताने वाला। कामुक। हमारी जीभें एक्-दूसरे पऱ लंबे औऱ कामुक अंदाज़ मे फिसलरही थीं। मैंने सीधे उसके मुंह सें उसकीलार चूसली, औऱ वो सुख कि अनुभूति मे हल्की सि कराहउठी, औऱ मुझे औऱ लार पिलाने लगी।
चुंबन कां ये सिलसिला चलता हि रहा — कभी कोमल औऱ प्रेम भरा, तोँ कभी उग्र औऱ जंगली। हमनेतब भि चुंबन कियाजब वो मेरीगोद मे बैठी थि, जब मे पीछे सें उसे अपनी बाहों मे भरेहुए थां, जब वो मेरेऊपर लेटी थि, औऱ जब मैंने उसे अपने नीचेदबा रखा थां। हर एक् मुद्रा नें हमारे जुनून मे एक् नया हि स्वाद भर दिया।
जब आखिरकार हमने चुंबन तोड़ा, तौ हम् दोनों हि हाँफरहे थें; हमारे होंठ सूजेहुए थें औऱ लार सें चमकरहे थें। हमारी मिली-जुली लार कि एक् मोटी लड़ी अभि भि हमारे होठों कों आपस मे जोड़े हुए थि। उसकी आँखें कामवासना सें भरी हुइ थीं, गाल गुलाबी हौ गए थें, औऱ उसके घुंघराले बाल हुस्न सें बिखरे हुए थें।
सलोनी दिदी नें हाँफते हुए मुस्कुराया औऱ मेरे गीले होठों केँ पास फुसफुसाया,
“मुझे तुम् फिन सें चाहिए। अभि इसीसमय। ”
मैंने एक् गीली'चप' कि आवाज़ केँ संग अपनेउस बिखरे हुए, लार सें सराबोर चुंबन कों तोड़ा; हमारी मिली-जुली लार कि एक् मोटी लड़ी अभि भि हमारे सूजेहुए होठों कों आपस मे जोड़े हुए थि। सलोनी दिदी ज़ोर-ज़ोर सें साँसें लें रहीथीं, औऱ उनकी आँखों मे गहरी कामवासना साफझलक रही थि। मैंने एक् भि शब्द नहि कहा। मे बस नीचे कि ओर बढ़ने लगा, औऱ रास्ते मे उसके जिस्म केँ हर एक् इंच कों चूमता औऱ चाटता गय़ा।
मैंने उसकी गर्दन कों चूसा, औऱ वहा एक् गीला निशान छोड़ दिया;फिन मे उसके भारी स्तनों कि ओर बढ़ा। मैंने उसके एक् कड़े निप्पल कों अपने मुंह मे लें लिया औऱ ज़ोर सें चूसने लगा, जबकि मेरा दूसरा हाथ उसके दूसरे मम्मों कों सहलारहा थां। वो जल्दी हि सुख कि अनुभूति मे कराहउठी।
“मम्मह्ह। आह्ह्ह। हाँ, बेबी.”
मे औऱ नीचे उतरता गय़ा; उसके कोमलपेट कों चूमता हुआ, अपनीजीभ उसकी नाभि मे डुबोता गय़ा। उसका पूराबदन तीव्र कामवासना कि प्रत्याशा मे काँपरहा थां। जब आखिरकार मे उसकी चिकनी जांघों केँ बीच पहुंचा, तौ मैंने उन्हें ज़ोर सें फैला दिया;ऐसा करने पऱ उसकी हसीन योनि, जोँ पहले सें हि काम-रस सें टपकरही थि, पूरीतरह सें मेरे सामने अनावृत होँ गई।
सलोनी कि योनि उसके अपने काम-रस सें चमकरही थि। उसके बाहरी होंठ सूजेहुए औऱ फूलेहुए थें, औऱ अंदर केँ होंठ बाहर् झाँकरहे थें — चमकीले औऱ गुलाबी। उसकी क्लिट पहले सें हि अपनीहुड सें बाहर् झाँकरही थि, औऱ ध्यान खींचने केँ लिए बेताब थि। उसकी उत्तेजित बुर कि कस्तूरी जैसी, मीठीगंध नें मेरी इंद्रियों कों भर दिया औऱ मेरे लन्ड मे दर्दभरी कसक पैदाकर दि।
मैंने ठीक वैसे हि शुरुआत कि, जैसा वो हकदार थि — धीरे धीरे औऱ छेड़ते हुए।
मैंने सबसे पहले उसकी जांघों केँ अंदरूनी हिस्से पऱ चूमा; दोनों तरफनरम, गीले चुंबन दिए, औऱ आहिस्ता उसकी बुर केँ औऱ लगभग पहुँचता गय़ा, मगर अभि तक उसेछुआ नहि थां। मैंने उसकी त्वचा पर्र अपनीजीभ सें लंबी-लंबी लकीरें बनाईं, औऱ उसे अपनीलार सें पूरीतरह भिगो दिया।
“अहह… अभिर… मुझेमत तड़पाओ… प्लीज़…” वो सिसकी, उसकी आवाज़ मे अब चाहत कि भारीपन साफझलक रहा थां।
मैंने उसकेपेट केँ निचले हिस्से पऱ, ठीक उसकी बुर केँ ऊपर चूमा, औऱ उसनरम त्वचा कों धीरे-धीरे सें चूसा। फिन मे नीचे कि ओर बढ़ा औऱ सीधे उसके बाहरी होंठों पर्र एक् लंबा, गीला चुंबन अंकित कर दिया। सलोनी केँ कूल्हे झटके सें हिलउठे।
मैंने अपना मुँह खोला औऱ अपनीजीभ बाहर् निकाली; उसकी बुर केँ निचले सिरे सें लेकरऊपर तक आरामसे चाटा, औऱ उसकी गीलापन औऱ अपनीलार कों एक् संग फैला दिया। मैंने जान-बूझकर खूब सारीलार कां इस्तेमाल किया, जिससे उसकी पूरी बुर लसलसी औऱ चमकीली हौ गई।
“म्मम्ह… ओह…शिट… अभिर… तुम्हारी जीभ कितनी अच्छी लगरही हैं…” वो कराहउठी, उसकी आवाज़ धीमी औऱ भारी थि।
मैंने अपनीजीभ केँ चपटे हिस्से सें उसके बाहरी होंठों कों चाटा, औऱ उन्हें पूरीतरह सें अपनीलार सें ढक दिया। फिन मैंने धीरे-धीरे सें उसके एक् मोटे बाहरी होंठ कों अपने मुँह मे खींच लिया;उसे नरमी सें अंदर खींचते हुए, मेरीजीभ उसकेसंग खेलरही थि। मैंने दूसरी तरफ भि ठीक वैसा हि किया, औऱ मुँह सें गीले, अश्लील चूसने कि आवाज़ें निकालीं।
सलोनी कि कराहें अब औऱ तेज़ होतीजा रहीथीं।
“अहह…हाँ… अपनी दिदी कि बुर चाटो… बिल्कुल ऐसे हि… हम्मम!”
मैंने अपने अंगूठों सें उसकी बुर केँ होंठों कों फैला दिया, जिससे उसके गुलाबी, रस टपकाते अंदरूनी हिस्से साफ दिखाई देनेलगे। मैंने अपना चेहरा औऱ गहराई तक उसकी बुर मे गड़ा दिया, औऱ उसकी अंदरूनी होंठों कों लंबी, धीमी औऱ भूखीचाल सें चाटना शुरुआत कर दिया। मेरीलार उसके मीठेरस केँ संगमिल गई, जिससे एक् लसलसा, रसीला नज़ारा बन गय़ा। मे ज़ोर-ज़ोर सें चूसने कि आवाज़ें निकालते हुए, उसका सारारस पी गय़ा।
“ओहगॉड! अभिर…अहह… अहह… तुम् मुझे कितनी अच्छी तरह सें खारहे हौ… शिट!”
उसकी कराहें अब औऱ भि ज्यादा उग्र होतीजा रहीथीं। मे महसूस कर सकता थां कि मेरेसिर केँ चारों ओर उसकी जांघें कांपरही थीं।
मैंने अपनीजीभ उसकेकसे हुएछेद केँ अंदर डाली, औऱ आरामसे उससेउसे चोदने लगा। जैसे हि मे अपनीजीभ अंदर-बाहर् कररहा थां, उसकी बुर मेरीजीभ केँ चारों ओरकस गई, औऱ मे उसकी अंदरूनी दीवारों कों चाटरहा थां। मैंने जीभ बाहर् निकाली औऱ उसकी स्थान अपनीदो उंगलियां डालदीं; उन्हें गहराई तक खिसकाते हुए, मेरा मुंहऊपर कि ओर बढ़ने लगा।
अब मैंने अपना पूरा ध्यान उसकी क्लिट पऱ लगा दिया।
शुरुआत मे, मे बहोत कोमल थां। मैंने अपनीजीभ कि नोक सें उसकी सूजी हुई क्लिट केँ चारों ओर आहिस्ता, इत्मीनान सें गोल-गोल घुमाया। सलोनी कि सांसें तेज औऱ बेकाबू होँ गईं।
“Mmm… mmmhh… बिल्कुल वहीं… आहिस्ता… बसऐसे हि… ahhh!”
मैंने अपनीलय बदल दि। मैंने अपनीजीभ कि नोक सें उसकी क्लिट कों तेजी सें ऊपर-नीचे झटके देना शुरुआत कर दिया। उसकी प्रतिक्रिया जल्दी औऱ बेहद जोशीली थि।
“OHHH SHIT! Abhir! हाँ!हाँ! औऱ तेज… रुकोमत… ahhhhhh!!”
मैंने अपने होंठों सें ‘O’ कां आकार बनाया औऱ उसकी क्लिट कों अपने मुंह मे खींच लिया; मे उसे धीरे-धीरे सें चूसरहा थां, जबकि मेरीजीभ अंदर लगातार झटकेदे रही थि। मैंने खूब सारीलार कां इस्तेमाल किया, औऱ जब मे उसके सबसे संवेदनशील हिस्से कों पूरीतरह सें अपने मुंह मे भररहा थां, तब मुंह सें गीली, जोर-शोर सें चूसने कि आवाजें आँ रहीथीं।
सलोनी पूरीतरह सें पागल हौ गई।
“फूउउक! हे ईश्वर… तुम् मेरी क्लिट कों कितनी अच्छी तरहचूस रहे होँ… मे तोँ पागल होँ रही हूं… हाहा… हाहा… आआआआ!!”
अब उसकी आहें तेज़, बेशर्म औऱ पूरीतरह हवस सें भरी हुई थीं। उसने मेरे बालों कों ज़ोर सें पकड़ा औऱ मेरे चेहरे कों अपनी टपकती हुइ बुर मे औऱ ज़ोर सें दबा दिया। मुझेकोई बुरा नहि लगा। मे तोँ उसमें डूब जानां चाहता थां।
मैंने दबाव बढ़ा दिया। मैंने उसकी क्लिट कों तेज़ी सें, छोटे-छोटे गोल घेरों मे चाटा, फिन अपनीजीभ केँ सपाट हिस्से सें लंबे, चौड़े स्ट्रोक्स देनेलगा। हरबार जब वो ज़ोरदार प्रतिक्रिया देती, तौ मे उसीलय मे जम जाता।
मैंने अपनी उंगलियाँ भि शामिल करलीं — दो उंगलियाँ उसकी बुर कों एक् स्थिर, गहरीलय मे चोदरही थीं, जबकि मे किसी जुनून मे डूबे इंसान कि तरह उसकी क्लिट कों चूस औऱ चाटरहा थां। अब उसकेरस तेज़ी सें बहरहे थें, मेरी ठुड्डी पर्र लगरहे थें औऱ नीचे उसकी गांड तक टपकरहे थें। मेरे चेहरे कां पूरा निचला हिस्सा भीग चुका थां।
“अभीर!ओह फ़क… मे झड़रही हूं… रुकोमत… मेरी बुर कों औऱ ज़ोर सें खाओ…हाँ… हाँ… हाँआआआ!!”
उसकी आहेंअब करीब-करीब चीखों मे बदलरही थीं — आक्रामक, हवस मे डूबी हुई औऱ बेहद कामुक। कमरे मे गूंजती उसकी आवाज़ नें मुझे औऱ भि अधिक जंगली बना दिया।
उसकी क्लिट चूसते हुए मैंने अपनासिर दाएँ-बाएँ हिलाना शुरुआत कर दिया, जिससे ज़ोरदार कंपन पैदाहुआ। उसी टाइम, मैंने अपनी उंगलियाँ उसके अंदर मोड़ीं औऱ उसके जी-स्पॉट कों रगड़ने लगा।
सलोनी कां जिस्म ज़ोर सें कमान कि तरहतन गय़ा।
“आआआआआआ! फ़क!ठीक वहीं! मे झड़रही हूं… मे तुम्हारी जीभ पर्र झड़रही हूं… ओह्ह्ह्ह्ह ईश्वर!!”
जैसे हि एक् ज़ोरदार चरमसुख कि लहर उसके जिस्म सें गुज़री, उसकी बुर नें मेरी उंगलियों कों ज़ोर सें जकड़ लिया। गरम रस तेज़ी सें बाहर् निकले औऱ मेरा मुँहभर दिया। मे लालच सें उसे चाटता औऱ चूसता रहा, हर एक् बूँद पीतारहा, जबकि वो छटपटाती औऱ चीखती रही।
मगर मे रुका नहि।
उसके पहले चरमसुख केँ बाद भि, मैंने अपना मुँह उसकी बुर सें चिपकाए रखा;अब मे आहिस्ता चाटरहा थां, मगरफिन भि उसीभूख केँ संग, अपनीजीभ केँ लंबे स्ट्रोक्स सें उसे साफ़कर रहा थां।
“अभीर… बेबी… ओह्ह्ह… तुम् मेरी बुर केँ लिए कितने भूखे होँ…” वो हाँफते हुए बोलि, उसकाबदन अभि भि कांपरहा थां। मैंने ऊपर उसकीतरफ देखा, मेरा चेहरा उसके वीर्य औऱ मेरीलार सें चमकरहा थां। "मेरा अभि काम पूरा नहि हुआ हैं, दिदी। "
मे औऱ भि ज्यादा ज़ोर-हंगामा सें फिन सें उसमें डूब गय़ा।
इसबार मैंने उसे एक् भूखे जानवर कि तरह खाया। कमरे मे ज़ोरदार, गंदी औऱ अश्लील आवाज़ें गूँज उठीं — चूसने, चाटने औऱ रगड़ने कि आवाज़ें। मैंने अपनीजीभ सें उसकीछेद कों ज़ोर सें रगड़ा, फिन उसकी क्लिट कों चूसा, औऱ फिन उसकी पूरी दरार कों बार-बार चाटा। मे औऱ नीचे गय़ा औऱ उसके कड़े गुदाद्वार केँ चारों ओर चाटा, जिससे वो औऱ भि ज़ोर सें चीख पड़ी।
"ओह माय फ़किंग गॉड! अभिर। तुम् मेरी गांड भि चाटरहे होँ। तुम् कितने गंदे लड़के होँ। आह्ह्ह्ह। मुझेये बहोत मनपसंद हैं। रुकोमत। अपनी दिदी कि छेदों कों खाजाओ। हांह्ह्ह। हांह्ह्ह। म्म्म्न्नन्नन्नन्न!!"
उसका दूसरा ऑर्गेज़्म औऱ भि ज्यादा ज़ोरदार थां। उसने अपने दोनों हाथों सें मेरासिर पकड़ लिया, औऱ अपनी पूरीतरह गीली बुर कों मेरे चेहरे सें ज़ोर-ज़ोर सें रगड़ने लगी, ठीक वैसे हि जैसेकोई कामुक वेश्या कराहती हैं।
"फ़ूऊऊऊक! मुझेफिन सें ऑर्गेज़्म होँ रहा हैं। आह्ह्ह्ह्ह्ह!!"
जैसे हि उसे ज़ोरदार ऑर्गेज़्म हुआ, उसकी जांघें मेरेसिर केँ चारों ओरकसगईं, औऱ एक् बारफिन मेरा मुँह उसके वीर्य सें भर गय़ा। मैंने जितना हौ सका, उतना निगल लिया; बाकी मेरेगले सें नीचे टपकने लगा।
जब आखिरकार मे पीछेहटा, तब तक सलोनी पूरीतरह सें कांपरही थि औऱ कराहरही थि। उसकी छाती तेज़ी सें ऊपर-नीचे होँ रही थि, उसके घुंघराले बाल बिखरे हुए थें, औऱ उसकी आँखें ऑर्गेज़्म केँ बाद मिलने वालेपरम सुख सें आधीबंद थीं। उसकी बुर लाल, सूजी हुईँ औऱ पूरीतरह सें गीली थि — एक् सुंदर, रसीली कलाकृति जोँ मेरीलार औऱ उसके वीर्य सें लथपथ थि।
सलोनी दिदी अभि भि बेतहाशा हांफरही थीं, उनकी छातीऐसे ऊपर-नीचे होँ रही थि जैसे उन्होंने अभि-अभि मैराथन दौड़ लगाई हौ। उनका सुंदर चेहरा गहरालाल हौ गय़ा थां, उनके घुंघराले बाल पूरीतरह बिखरे हुए थें औऱ पसीने सें तर माथे पर्र चिपके हुए थें। उनकी आंखें आधीबंद थीं, बेकाबू कामुकता सें जलरही थीं। वो पूरीतरह सें मदहोश लगरही थीं।
“अबीर…धत् तेरे कि… मुझे तुम्हारी बहोत ज़रूरत हैं…” उन्होंने धीमी, कर्कश आवाज़ मे फुसफुसाया, उनकी आवाज़ मे ज़रूरत झलकरही थि।
मे स्वयं कों रोक नहि पाया। मेरा लिंग एकदम सख्त हौ गय़ा थां, गुस्से सें धड़करहा थां, नसें उभरी हुईँ थीं, लिंग कां अगला हिस्सा वीर्य सें चमकरहा थां। मे आक्रामक रूप सें ऊपर कि ओर बढ़ा, उनकेबदन पर्र चढ़ गय़ा जब तक कि मेरे घुटने उनके कंधों केँ दोनों ओर नहि आँ गए। मेरा भारी लिंग उनके चेहरे केँ ठीकऊपर मंडरा रहा थां, उनके कोमल गालों सें टकरारहा थां।
बिना किसी चेतावनी केँ, मैंने अपने लिंग केँ निचले हिस्से कों पकड़ा औऱ आगे कि ओर धकेला। मैंने सूजेहुए अगले हिस्से कों उनके होंठों पर्र ज़ोर सें दबाया।
“अपना मुंह खोलो, दिदी, ” मे गुर्राया।
सलोनी कों अपने होंठ खोलने कां भि टाइम नहि मिला थां कि मैंने ज़ोर सें अपने कूल्हे आगे धकेलदिए। मेरा मोटा लिंग एक् हि झटके मे उसकेगरम मुँह मे घुस गय़ा, जिससे उसके होंठ मेरे लिंग केँ चारों ओरफैल गए।
“मम्फ्ह्ह्ह—!!” उसनेदबी हुइ, हैरान करने वाली आवाज़ निकाली जब मे उसकेगले मे बहोत गहराई तक औऱ बहोत तेज़ी सें घुस गय़ा।
उसकी आँखें चौड़ी हौ गईं। कुछ सेकंड केँ लिए वो असहज होँ गई। उसकेहाथ अनायास हि मेरी जांघों पऱ चलेगए औऱ उन्हें कसकर पकड़ लिया। उसकी आँखों केँ कोनों मे आँसू आँ गए क्योंकि वो मेरे लिंग केँ चारों ओर धीरे-धीरे सें घुटरही थि।
मगर मे पीछे नहि हटा। मे अंदर तक हि रहा, उसे अपने आकार केँ अनुसार ढलने दिया।
धीरे धीरे, उसकीजीभ चलनेलगी। वो मुझे चूसने लगी, उसके कोमल होंठ मेरे लिंग केँ चारों ओर औऱ कसकर लिपटगए। उसकेहाथ मेरे अंडकोष तक गए, धीरे-धीरे सें उन्हें अपनी उंगलियों सें सहलाते औऱ गुदगुदी करतेहुए, मेरी रीढ़ कि हड्डी मे बिजली सि दौड़ गई।
“हाँ, बिल्कुल… बसयही, दिदी… मेरा लिंग चूसो, ” मे कराहउठा।
मैंने दोनों हाथों सें उसकासिर पकड़ लिया औऱ उसके घुंघराले बालों कों कसकर पकड़ लिया। फिन मैंने उसके मुंह मे आक्रामक तरीके सें संभोग करना शुरुआत कर दिया। लंबे, गहरे झटके। मैंने तब तक पीछे खींचा जब तक कि मात्र उसकासिर उसके होंठों केँ अंदर नहि रह गय़ा, फिन ज़ोर सें आगे बढ़ाया, उसकेगले केँ पिछले हिस्से तक।
“ग्लक… ग्लक… ग्लक… मम्फ्ह्ह!!” जैसे हि मैंने उसके चेहरे कां इस्तेमाल किया, उसके मुँह सें गीली, गंदी औऱ घुटनभरी आवाज़ें निकलने लगीं।
उसकी गालों सें आँसूबह रहे थें, मगरअब उसकी आँखों मे सिर्फ़ हवस नज़र आँ रही थि। उसेइस तरह इस्तेमाल होना अच्छा लगरहा थां। हरबार जब मे पीछे हटता, तोँ उसकी ज़बान मेरी लन्ड केँ चारों ओर बेताबी सें घूमती, औऱ उसे अपनीगरम लार सें भिगो देती। उसके खुलेहुए मुँह केँ कोनों सें लार कि मोटी-मोटी लकीरें टपककर उसकी ठुड्डी औऱ फिन उसके भारी स्तनों पऱ गिररही थीं।
“आह्ह्ह… तुम्हारे मुँह कां एहसास बहोत हि ज़बरदस्त हैं, ” मैंने कराहते हुएकहा, औऱ उसी वक्त उसके दोनों निप्पल्स कों ज़ोर सें दबा दिया।
“MMMMMPHHHH!!! Mmmnnnghhh!!” सलोनी नें मेरे लन्ड केँ चारों ओर चीखते हुएकहा; इस कंपन सें मेरे पूरेबदन मे सुख कि लहरें दौड़गईं।
मैंने औऱ तेज़ी सें, औऱ भि बेरहमी सें धक्के मारना शुरुआत कर दिया। उसकासिर तकिये सें सटाहुआ थां, औऱ मे पूरीहवस केँ संग उसके मुँह मे ज़ोर-ज़ोर सें धक्के माररहा थां। हरबार जब वो ज़ोर सें चूसती, तोँ उसकेगाल अंदर कि ओरधँस जाते।
जब मे उसके मुँह कों पूरीतरह सें इस्तेमाल कररहा थां, तभी मैंने अपना एक् हाथ पीछे कि ओर बढ़ाया औऱ उसकी गीली बुर कों टटोला। बिना किसी चेतावनी केँ, मैंने अपनीदो मोटी उंगलियाँ उसकी बुर केँ अंदर तक डालदीं।
“AAAAHHHHH—!!” मेरे लन्ड केँ चारों ओर चीखते हुए उसनेकहा; उसका पूरा जिस्म ज़ोर सें काँपउठा।
उसकी बुर पूरीतरह सें गीली थि, आग कि तरहगरम थि, औऱ मेरी अंदर जाती हुईँ उंगलियों कों उसने कसकर जकड़रखा थां। मैंने उसकी बुर मे उंगलियाँ औऱ तेज़ी सें चलाना शुरुआत कर दिया, औऱ अपनी उंगलियों कि गति कों अपने लन्ड कि गति सें मिला दिया—जौ उसके मुँह केँ अंदर-बाहर् होँ रहा थां। उसकी बुर सें निकलने वाली गीली, चिपचिपी आवाज़ें उसकेगले सें निकलने वाली अश्लील, घुरघुराती आवाज़ों केँ संग घुल-मिल गईं।
हर बारजब मे अपनी उंगलियों कों मोड़कर उसके G-spot पर्र रगड़ता, तौ सलोनी मेरे लन्ड पर्र पूरीतरह सें बेकाबू हौ जाती।
“MMMMPHHH!! Mmmmnnnggghhh!! Hhhnnnggg!!”
उसकी कराहें औऱ भि तेज़, औऱ भि बेताब होतीजा रही थीं—भले हि मेरे मोटे लन्ड कि वजह सें उसका मुँह पूरीतरह सें भराहुआ थां औऱ उसकी आवाज़ दबरही थि। उसने मुझे औऱ भि ज़ोर-ज़ोर सें चूसना शुरुआत कर दिया; मेरे धक्कों कां संग देने केँ लिए वो अपनासिर आगे-पीछे कररही थि, औऱ उसकी ज़बान मेरे लन्ड केँ नीचे तेज़ी सें चलरही थि।
“साली… तुम्हें अपना मुँह औऱ बुर, दोनों एक् संग इस्तेमाल करवाना बहोत पसन्द हैं, हैं नां दिदी?” मैंने गुर्राते हुएकहा, औऱ उसकी बुर मे उंगलियाँ औऱ तेज़ी सें चलाते हुए उसके बाएँ निप्पल कों औऱ भि ज़ोर सें दबा दिया।
“AAAAAHHHHHHH!!! Mmmph— mmmph— mmmph—!!”
उसकी चीखें अब लगातार, टूटी-फूटी औऱ हवस सें भरी हुई आवाज़ों मे बदल चुकीथीं। आँखों सें आँसू लगातार बहरहे थें, जोँ उसकेथूक केँ संग मिलकर उसकी ठुड्डी सें नीचेटपक रहे थें। मगर उसकीकमर मेरेहाथ केँ ऊपर ज़ोर-ज़ोर सें उछलरही थि, औऱ वो औऱ ज्यादा कि गुज़ारिश कररही थि।
मैंने उसकीकसी हुईँ बुर मे अपनी तीसरी उंगली भि डाल दि, जिससे वो औऱ अधिक खिंच गई।
“आह्ह्ह्ह!!! ओह्ह्ह फ़फ़फ़— म्म्म्प्फ़्ह्ह्ह!!!”
सलोनी कां ज़ोरदार ब्लो-नौकरी अब करीब-करीब जंगली सां हौ गय़ा थां। वो किसी जुनून मे डूबी स्त्री कि तरह मेरा लन्ड चूसरही थि — ज़ोर-ज़ोर सें चूसने कि आवाज़ें आँ रहीथीं, उसकेगाल अंदर कि ओरधँस रहे थें, वो अपनीजीभ सें मेरे लन्ड केँ हरइंच कि मालिश कररही थि, जबकि उसकेहाथ लगातार मेरे अंडकोष कों सहला औऱ मसलरहे थें।
रूम गीली औऱ गंदी आवाज़ों सें भर गय़ा थां:
ग्लक-ग्लक-ग्लक-ग्लक
स्क्वेलच-स्क्वेलच-स्क्वेलच
औऱ उसकी लगातार, टूटी-फूटी कराहें:
“आह्ह्ह… म्म्म्प्फ़्ह्ह्ह… हांह्ह्ह… न्न्न्घ्ह्ह… म्म्म्न्न्न्न्घ्ह्ह!!”
मे महसूस कर सकता थां कि मेरे अंडकोष कसतेजा रहे थें। वो एहसास तेज़ी सें बढ़रहा थां।
“मे झड़ना वाला हूं, दिदी… फ़क… मे तुम्हारे गले केँ अंदर हि झड़रहा हूं!”
मैंने अपना लन्ड जितना होँ सका, उतना अंदर तक धकेल दिया औऱ झड़ गय़ा।
गाढ़ी, गरम वीर्य कि धारें सीधे उसके मुँह मे जा गिरीं। सलोनी कि आँखें हैरानी सें चौड़ी होँ गईं, औऱ वो उसे निगलने कि कोशिश मे जूझने लगी, मगर मे लगातार ज़ोर सें झड़ता रहा। उसमें सें कुछ वीर्य बहकर बाहर् आँ गय़ा.
कुछ उसके होंठों केँ कोनों सें बह निकला, औऱ उसकी ठुड्डी पऱ टपकने लगा। मे अंतिम समय मे बाहर् निकला औऱ अंतिम दो ज़ोरदार फुहारें उसके सुंदर चेहरे पर्र छोड़दीं — एक् उसकेगाल पर्र गिरी, औऱ दूसरी उसके होंठों औऱ नाक पर्र।
“उफ़्फ़… अभिर…!” वो हाँफते हुए बोलीं, खाँसरही थि औऱ ज़ोर-ज़ोर सें साँस लें रही थि। वो अपने चेहरे पऱ येसभी पाकरखुश तोँ नहि लगरही थि, मगर उसकी आँखें अभि भि ज़बरदस्त हवस सें भरी हुईँ थीं।
मैंने उसे सँभलने याँ शिकायत करने कां कोई मौका नहि दिया।
मे जल्द सें फिन सें उसके पैरों केँ बीच नीचेचला गय़ा। उसकी बुर सूजी हुई, लाल औऱ गीली थि। मैंने अपनीतीन उंगलियाँ ज़ोर सें फिन सें उसके अंदरडाल दीं औऱ पूरी तेज़ी औऱ ज़ोर केँ संगउसे उंगलियों सें चोदना शुरुआत कर दिया।
“हे ईश्वर!!! आआआआआह्ह्ह्ह्ह!!” सलोनी ज़ोर सें चीखी, औऱ उसकीपीठ खाट सें ऊपरउठ गई।
अब उसकी आहें औऱ चीखें पूरीतरह बेकाबू होँ चुकीथीं।
“फ़क!!! अभिर!!!हाँ!!! मुझे औऱ ज़ोर सें उंगलियों सें चोदो!!! आआआआआह्ह्ह्ह्ह!!”
मैंने अपनी उंगलियों कों सही तरीके सें मोड़ा, बार-बार उसके G-spot पऱ वार किया, जबकि मेरा अंगूठा उसकी सूजी हुइ क्लिट कों तेज़ी सें गोल-गोल रगड़रहा थां।
“हाआआआह्ह्ह्ह!!! ओहशिट… ओहशिट… मे फिन सें झड़ना वाली हूं… रुकोमत… प्लीज़ रुकोमत… म्मम्मन्नन्नन्नघ्ह्ह्ह्ह!!!”
उसकी चीखें औऱ ऊँची होतीजा रहीथीं, औऱ ज्यादा बेताब, औऱ अधिक जंगली।
“आआआआआह्ह्ह्ह्ह— फ़क!!!ठीक वहीं!!!ठीक वहीं!!! मे झड़रही हूं… मे झड़रही हूं!!!”
उसका पूराबदन ज़ोर-ज़ोर सें काँपने लगा। उसकी जांघें मेरी बाँह केँ चारों ओरकसगईं, जैसे हि एक् ज़बरदस्त चरमसुख कि लहर उसके पूरे जिस्म मे दौड़ गई। उसकी बुर कां गरमरस मेरी उंगलियों केँ चारों ओर सें बाहर् बह निकला, औऱ हर ज़ोरदार धक्के केँ संग थोडा-थोडा उछलरहा थां।
“हे ईश्वर!!! हाआआआह्ह्ह्ह!!! म्मम्मन्नन्नन्नघ्ह्ह्ह्ह!!! आआआआआह्ह्ह्ह्ह!!”
मे उसके चरमसुख केँ दौरान भि उसे उंगलियों सें चोदता रहा, एक् लम्हा केँ लिए भि धीमा नहि हुआ। उसकी चीखें टूटती हुई, सिसकती हुइ आहों मे बदलगईं, जोँ बेहिसाब खुशी सें भरीथीं। “हाह्ह्ह… हाह्ह्ह… आह्ह्ह्ह… न्न्न्घ्ह्ह… फक… म्म्म्ह्ह्ह… आह्ह्ह… आह्ह्ह… आह्ह्ह्ह्ह!!”
उसका दूसरा ऑर्गेज्म (चरम-सुख) हल्का पड़ने केँ बाद भि, मे उसकी क्लिट कों रगड़ता रहा औऱ अपनी उंगलियों कों उसकी गीली बुर केँ अंदर-बाहर् करतारहा, जिससे उसके जिस्म मे हल्के-हल्के झटके उठतेरहे।
“बहोत अधिक… बहोत अधिक सेंसिटिव… अभिर… बेबी… ओह्ह्ह म्म्म्ह्ह्ह… ह्न्न्न्घ्ह्ह!!”
उसका जिस्म लगातार फड़कता औऱ कांपता रहा। बेहिसाब खुशी केँ ताज़े आँसू उसके चेहरे पर्र बह निकले, जोँ मेरे वीर्य केँ संगमिल गए; मेरा वीर्य अभि भि उसकेगाल औऱ होठों पऱ लगाहुआ थां।
आखिरकार मैंने अपनीगति धीमीकर दि, औऱ धीरे-धीरे सें अपनी उंगलियों कों उसकी टपकती हुइ, धड़कती बुर सें बाहर् निकाल लिया। सलोनी पूरीतरह सें पलंग पऱ ढह गई; उसकी साँसें ऐसेचल रहीथीं जैसे वो डूबरही हौ, उसका पूरा जिस्म पसीने सें भीगाहुआ थां, औऱ उसका चेहरा आँसुओं, लार औऱ मेरे वीर्य सें सनाहुआ थां।
मगर अपनीइस थकी-हारी हालत मे भि, उसनेउन हवस सें भरी आँखों सें मेरीतरफ देखा औऱ साँस रोककर धीरे-धीरे सें फुसफुसाया:
हम् दोनों उस बिखरे हुएखाट पर्र एक्-दूसरे केँ बगल मे ढहगए; हमारे बदन पसीने औऱ वीर्य सें चिपचिपे होँ रहे थें। मे ज़ोर-ज़ोर सें साँस लेँ रहा थां, मेरी छाती ऊपर-नीचे होँ रही थि, मगर सलोनी दिदी किसी दूसरी हि दुनिया मे खोई हुई थीं। उनकी साँसें बहोत तेज़, उखड़ी हुइ औऱ बेकाबू थीं — मानो वो अभि-अभि किसी तूफ़ान सें बचकर निकली हों। हर गहरी साँस केँ संग उनकी विशाल छातियाँ ऊपर-नीचे होँ रहीथीं, औऱ उनके निप्पल अभि भि कड़े औऱ चमकीले थें।
मे करवट लेकर उसकीतरफ मुड़ा औऱ उसे अपनी बाहों मे भर लिया। उसने अपनासिर मेरे सीने पऱ रख दिया, औऱ उसके घुंघराले बाल मेरे कंधे पऱ फैलगए। हम् कई मिनटों तक उसीतरह लेटेरहे, बिनाकुछ कहे;बस अपने दिलों कि धड़कनों कों आरामसे शांत होने दिया। उसकाहाथ आहिस्ता मेरे सीने कों सहलारहा थां, जबकि मेराहाथ उसकी नंगीपीठ औऱ गोल-मटोल गांड कों सहलारहा थां। करीब-करीब पंद्रह मिनट कि शांति केँ बाद, मैंने उसकेसिर पर्र किस किया औऱ धीरे-धीरे सें कहा, "दिदी, अब हमेंउठ जानां चाहिए। "
उसनेआलस मे सिर हिला दिया। हम् आरामसे खाट सें उठे औऱ हल्के-फुल्के कपड़े पहनलिए। मैंने सिर्फ़ एक् शॉर्ट्स पहना, जबकि सलोनी दिदी नें एक् बड़ी साइज़ कि टी-शर्ट पहनी जोँ मुश्किल सें उनकी जांघों तक पहुँच रही थि; उस पतले कपड़े केँ नीचे सें उनके निप्पल हल्के-हल्के दिखाई देरहे थें। उसेइस हाल मे देखकर—अभि-अभि सेक्स केँ बाद, चमकती हुईँ औऱ अधनंगी—मेरा लन्ड फिन सें फड़कने लगा।
हमने मिलकर घऱ केँ काम करना शुरुआत कर दिया। उसने रसोई साफ़ किया, जबकि मैंने कपड़े तयकिए औऱ लिविंग रूम कों ठीक किया। बीच-बीच मे, हम् एक्-दूसरे कों चोरी-छिपे देखते औऱ मुस्कुराते रहते। बर्तन धोते टाइम, मे उसके पीछे गय़ा, उसे पीछे सें गले लगाया औऱ उसकी गर्दन पर्र प्रेम सें किस किया। वो शरारत सें हँसी औऱ अपना कूल्हा पीछे कि ओर मेरी तरफ़ धकेल दिया।
जब काम करीब ख़त्म होँ गय़ा, तौ मैंने कहा, "दिदी, आज आप् अपनी क्लास क्यूं नहि छोड़ देतीं? चलो कहीं बाहर् चलते हें। सिर्फ़ आप् औऱ मे। "
सलोनी दिदी जल्दी मेरी तरफ़ मुड़ीं; उनकी आँखों मे खुशी कि चमक थि। उनके चेहरे पर्र एक् बड़ी औऱ प्यारी मुस्कान फैल गई।
"सच मे? तुम् मुझे बाहर् लेँ जानां चाहते होँ?" उसने बड़े उत्साह सें पूछा।
"हाँ। चलो, आज कां पूरादिन हम् संग मे बिताते हें, " मैंने उसकीकमर कों हल्के सें दबाते हुए जवाब दिया।
वो बहोत खुशलग रही थि। उसने जल्द सें बचाहुआ काम समाप्त किया, औऱ काम करतेहुए वो करीबनाच हि रही थि। जब साराकाम होँ गय़ा, तोँ हम् फ्रेश होनेचले गए। मैंने पहले जल्द सें नहाया, फिन उसने नहाया। जब वो बाहर् आई, तोँ वो बहोत सुंदर लगरही थि — उसने एक् टाइट आसमानी-नीला टॉप पहना थां जौ उसके स्तनों पऱ एकदम स्लिम बैठरहा थां, औऱ एक् लंबी फूलों वाली स्कर्ट पहनी थि जौ उसकी सुडौल काया कों उभाररही थि।
वो मेरे सामने एक् बार घूमी औऱ शरमाते हुए पूछा, "मे कैसीलग रही हूं?"
मैंने उसे अपनीओर खींचा औऱ उसके होठों पऱ धीरे-धीरे सें चूमा।
"एकदमसही। "
फ्रेश होने औऱ कपड़े पहनने केँ बाद, हम् घऱ सें बाहर् निकले; हमेंऐसा लगरहा थां जैसे हम् कोई युवा जोड़ा हों जोँ किसी सीक्रेट डेट पर्र जारहा होँ। सलोनी दिदी अपनी आसमानी-नीली सलवार-कमीज़ मे बेहद हसीनलग रहीथीं। दुपट्टा उनके सीने पर्र ढीला-सां पड़ा थां, मगर वो उनके भरे-भरे स्तनों कि बनावट कों छिपा नहि पारहा थां। मैंने एक् कैज़ुअल शर्ट औऱ जींस पहनी थि। हम् पास केँ मॉल जाने केँ लिए एक् टैक्सी मे बैठगए।
जैसे हि हम् मॉल मे दाखिल हुए, उसका चेहरा खुशी सें खिलउठा। हम् एक्-दूसरे कां हाथ थामेचल रहे थें, औऱ कभी-कभी चलतेहुए एक्-दूसरे सें टकरा भि जाते थें। थोड़ी देर घूमने-फिरने, विंडो शॉपिंग करने औऱ जबकोई नहि देखरहा होता थां तब एक्-दूसरे कों प्रेम सें चूमने केँ बाद, मैंने सुझाव दिया कि हमेंकोई फ़िल्म देखनी चाहिए।
"चलो, 'जब हैरीमेट सेजल' देखते हें, " मैंने कहा।
उसकी आँखें चमक उठीं। "मे तोँ बहोत वक्त सें ये फ़िल्म देख्ना चाहरही थि!"
हमने अंतिम लाइन मे कोने वाली सीटें बुककीं — जोँ प्राइवेसी केँ लिए एकदमसही थीं। थिएटर मे ज्यादा भीड़ नहि थि, जिससे सभीकुछ औऱ भि अच्छा लगरहा थां। जैसे हि लाइटें धीमी हुईं औऱ फ़िल्म शुरुआत हुइ, सलोनी दिदी खिसककर मेरे औऱ लगभग आँ गईं। शुरुआती पंद्रह मिनटों केँ अंदर हि, वो करीब-करीब मेरीगोद मे हि आँ बैठीथीं। उसका रसीले, गोल-मटोल कूल्हा मेरी जांघों केँ बीच धीरे-धीरे टिकाहुआ थां, औऱ उसकीपीठ मेरे सीने सें लगी हुईँ थि।
मैंने अपनी एक् बाँह उसकीकमर केँ चारों ओर लपेटी औऱ उसे औऱ भि लगभग खींच लिया। उसके शैम्पू औऱ जिस्म कि जानी-पहचानी गंध, थिएटर कि उस अंधेरी औऱ ठंडीहवा केँ संग मिलकर, मुझे मदहोश कररही थि।
स्क्रीन पऱ, शाहरुख खान औऱ अनुष्का शर्मा अपने प्यारे-प्यारे समय साझाकर रहे थें। जब भि कोई रोमांटिक सीनआता, तोँ मुझे महसूस होता कि सलोनी दिदी औऱ भि अधिक मेरे आगोश मे सिमटती जारही हें। मेरा दाहिना हाथ आहिस्ता ऊपर कि ओर बढ़ा औऱ उसने सलवार केँ ऊपर सें हि उसके भारी-भरकम बाएँ मम्मों कों धीरे-धीरे सें अपनी हथेली मे थाम लिया। मैंने उसे ज़ोर सें नहि दबाया — बस प्रेम भरे, कोमल स्पर्श दिए, औऱ आहिस्ता उसकी रसीले देह कों अपनी हथेली मे महसूस किया। “हम्म…” उसने एक् छोटी सि, संतोष भरीअहह भरी औऱ अपनासिर पीछे कि ओर झुकाकर मेरे कंधे पर्र टिका दिया।
मैंने उसकी गर्दन केँ एक् तरफ धीरे-धीरे सें चूमा औऱ उसकेकान मे फुसफुसाया, “आराममिल रहा हैं, दिदी?”
“बहोत आराममिल रहा हैं, ” उसने भि फुसफुसाकर जवाब दिया, उसकी आवाज़ मीठी औऱ शर्मीली थि। “मुझे तुम्हारे संगऐसे बैठना बहोत मनपसंद हैं। ”
मेरी उंगलियाँ आरामसे, शरारत भरे अंदाज़ मे उसे टटोलती रहीं। मैंने कपड़ों केँ ऊपर सें उसके निप्पल केँ चारों ओरगोल घेरे बनाए, औऱ महसूस किया कि मेरे स्पर्श सें वो आरामसे कड़ा हौ रहा हैं। मैंने उसके बूब्ज़ कों धीरे-धीरे सें दबाया, फिन छोड़ दिया, औऱ फिन सें दबाया — आरामसे औऱ एक् लय मे, ठीक वैसे हि जैसे फ़िल्म मे बजरहा रोमांटिक म्यूज़िक चलरहा थां।
सलोनी दिदी नें अपना चेहरा थोडा सां घुमाया औऱ मेरी ठुड्डी पऱ, फिन मेरेगाल पऱ चूमा। उसके होंठगरम औऱ प्रेम भरेलग रहे थें। मैंने अपनासिर घुमाया औऱ उसके होंठों कों एक् नरम, देर तक चलने वाले चुंबन मे कैदकर लिया। ये सुभह कि तरह भूखा नहि थां — ये कोमल, रोमांटिक औऱ स्नेह सें भराहुआ थां। हमारे होंठ एक्-दूसरे सें धीरे धीरे टकरारहे थें, जबकि मेराहाथ प्रेम सें उसके मम्मों केँ संग खेलता रहा।
“तुम् कितनी नरम होँ, दिदी, ” मैंने उसके होंठों केँ पास फुसफुसाया।
वो मुस्कुराई औऱ शरारत भरे अंदाज़ मे जवाब दिया, “औऱ तुम् कितने शरारती होँ… एक् थिएटर मे अपनी कज़िन केँ मम्मों दबारहे हौ। ”
मे धीरे-धीरे सें हँसा औऱ उसके बूब्ज़ कों थोडा औऱ ज़ोर सें दबाया, जिससे उसे अपनीअहह दबाने केँ लिए अपने होंठ काटने पड़े। उसकाहाथ मेरेहाथ केँ ऊपरआया, औऱ उसे अपनी छाती सें औऱ ज़ोर सें दबाया, मानो मुझे औऱ आगे बढ़ने केँ लिए उकसारही हौ।
जैसे-जैसे फ़िल्म आगे बढ़ी, हम् एक्-दूसरे सें चिपके रहे। अब वो करीब-करीब पूरीतरह सें मेरीगोद मे बैठी थि, उसका जिस्म पूरीतरह सें ढीला औऱ मुझ पऱ भरोसा करताहुआ थां। मैंने अपना एक् हाथ उसके बूब्ज़ पर्र रखा, औऱ कभी-कभी उसे दूसरे बूब्ज़ पर्र लेँ जातारहा, जबकि मेरा दूसरा हाथ उसकी जांघ पऱ टिका थां, औऱ कपड़ों केँ ऊपर सें उसे धीरे धीरे सहलारहा थां।
एक् बहोत हि भावुक दृश्य केँ दौरान, सलोनी दिदी नें अपनेबदन कां ऊपरी हिस्सा मेरीओर घुमाया औऱ मुझे कसकरगले लगा लिया, अपना चेहरा मेरी गर्दन मे छिपा लिया। मैंने उसके माथे पऱ, फिन उसके गालों पऱ, औऱ फिन उसके होंठों केँ कोनों पर्र चूमा। हम् बहुतदेर तक वैसे हि रहे — एक्-दूसरे सें लिपटे हुए, आरामसे मीठी बातें फुसफुसाते हुए, औऱ उस अंधेरे कोने मे एक्-दूसरे कों नरम चुंबन देतेहुए।
“आज मे बहोत खुश हूं, अभिर, ” उसने फुसफुसाया। “ऐसालग रहा हैं जैसे हम् सचमुच किसीडेट पऱ आएहों। ”
“हम् सचमुच हि एक् डेट पर्र हें, ” मैंने जवाब दिया, औऱ उसके कपड़ों केँ ऊपर सें उसके निप्पल कों धीरे-धीरे सें चिमटी काटा। “औऱ तुम् इस पूरे थिएटर मे सबसे हसीन लड़की हौ। ”
वो शरमा गई औऱ धीरे-धीरे सें हँसते हुए अपना चेहरा मेरी छाती मे छिपा लिया। उसकी हँसी कि थरथराहट मुझे महसूस हुई, जिससे मेरे चेहरे पर्र मुस्कान आँ गई।
बाकी पूरी फ़िल्म केँ दौरान, हम् दोनों अपनी हि एक् छोटी सि रोमांटिक दुनिया मे खोएरहे। मेराहाथ अधिकदेर तक उसके सीने सें अलग नहि हुआ—कभी वो अधिकार जताते हुए वहीं टिका रहता, तौ कभी आहिस्ता उसे छेड़ता। जब भि उसकामन करता, वो मेरी गर्दन औऱ गाल पर्र प्रेम भरी छोटी-छोटी किस करती रहती। बीच-बीच मे वो मेरीगोद मे बैठी अपनीकमर कों थोडा सां हिलाती, औऱ अपने नीचे मेरे बढ़ते हुए उभार कों छेड़ती।
जब फ़िल्म समाप्त हुइ औऱ थिएटर कि लाइटें जलीं, तब तक हम् दोनों केँ चेहरे पऱ प्रेम औऱ दबी हुइ चाहत कि चमक साफ़ दिखाई देरही थि। सलोनी दिदी नें चमकती आँखों सें मेरी तरफ़ देखा औऱ धीरे-धीरे सें फुसफुसाया,
“ये मेरी ज़िंदगी कां सबसे अच्छा मूवी अनुभव थां… तुम्हारी वजह सें। ”
खड़े होने सें पहले, मैंने उसे अंतिम बारकिस किया।
जैसे हि हम् थिएटर सें बाहर् निकले, मॉल कि तेज़ रोशनी औऱ साम कि भीड़ नें हमारा स्वागत किया। सलोनी दिदी अभि भि हमारे अंतरंग मूवी वक़्त कि वजह सें दमकरही थीं, उनकेगाल थोड़े लाल हौ गए थें। मैंने उसकाहाथ कसकर पकड़ा औऱ उसके पारंपरिक सलवार-कमीज़ कों देखा।
“दिदी, तुम् बहोत खूबसूरत लगरही हौ… मगरआज मे तुम्हारा एक् अलगरूप देख्ना चाहता हूं, ” मैंने धीरे-धीरे सें कहा, उसे अपनीओर खींचते हुए। “चलो शॉपिंग पर्र चलते हें। मे चाहता हूं कि तुम् कुछ मॉडर्न, कुछ बोल्ड पहनो। आज बाकीदिन सलवार नहि। ”
सलोनी नें घबराहट औऱ उत्साह केँ संग मेरीओर देखा। “अभीर…अगर किसी नें मुझेदेख लिया तौ? मैंने कभीऐसे मॉडर्न कपड़े नहि पहने हें। ”
“यहा हमेंकोई नहि जानता, ” मैंने उसे भरोसा दिलाया, उसकीकमर कों हल्के सें दबाते हुए। “औऱ मे चाहता हूं कि मेरी खूबसूरत कज़िन स्वयं कों जवान, सेक्सी औऱ चाही हुइ महसूस करे। चलो भि… आओ, इसदिन कों यादगार बनाते हें। ”
थोड़ी हिचकिचाहट केँ बाद, वो शरमाते हुए मुस्कुराई औऱ सिर हिलाया। “ठीक हैं… सिर्फ़ तुम्हारे लिए। ”
हम् एलिवेटर सें बड़े फ़ैशन फ़्लोर पर्र गए औऱ एक् बड़े, मशहूर कपड़ों केँ स्टोर मे घुसे, जहाँ कैज़ुअल कपड़ों सें लेकर लॉन्जरी तक सभीकुछ थां। जैसे हि हम् अंदर घुसे, रंग-बिरंगे डिस्प्ले देखकर सलोनी कि आँखें हैरानी सें चौड़ी हौ गईं।
हमने जींस सें शुरुआत कि।
मैंने तीन हाई-वेस्टेड, बट-लिफ़्टिंग स्टाइल चुने — क्लासिक ब्लैक, हल्का नीला औऱ गहरा नीला। सब मे वो स्ट्रेची, बॉडी कों शेप देने वाला कपड़ा थां।
“यह तुम्हारी हिप्स कों ज़बरदस्त दिखाएँगी, ” मैंने उसकेकान मे फुसफुसाया।
वो बहोत अधिक शरमा गई। “अभीर! इतनी ज़ोर सें मतकहो। ”
मैंने सबसे पहलेउसे काली वाली जींस दि। “जाओ, इसे पहनकर देखो। ”
सलोनी दिदी नें जींसली औऱ ट्रायल रूम मे चलीगईं। कुछ मिनटबाद, उसने घबराहट केँ संग झाँका औऱ बाहर् निकली, ठीक मेरे सामने लगे शीशे केँ आगे खड़ी होँ गई।
“हे ईश्वर…” मैंने धीरे-धीरे सें कहा।
काली हाई-वेस्टेड जींस उसकेबदन सें दूसरी त्वचा कि तरह चिपकी हुईँ थि। उसने उसकीभरी हुइ, सुडौल हिप्स कों पूरीतरह सें ऊपर उठाया औऱ गोल आकार दिया, जिससे वे औऱ भि बड़ी औऱ कसी हुइ लगरही थीं। जींस कां कमरबंद ऊपर तक थां, जौ उसकी सुडौल कमर औऱ हिप्स कों औऱ भि उभाररहा थां। सलोनी धीरे-धीरे सें घूमी, औऱ हर एंगल सें स्वयं कों देखने लगी। “ये कैसालग रहा हैं, अभिर? क्याँ ये ज्यादा टाइट तौ नहि हैं?”
“ये एकदमसही हैं, ” मैंने कहा, मेरी आँखें उसकी गांड पर्र टिकी हुइ थीं। “तुम्हारी गांड पहलेकभी इतनी सेक्सी नहि लगी। फिन सें घूमो। ”
वो घूमी, औऱ मेरे रिएक्शन कां साफ़-साफ़ मजा लें रही थि। उसके चेहरे पर्र एक् छोटी सि, उत्साहित मुस्कान आँ गई। “येसच मे मेरे हिप्स कों उभाररहा हैं… मुझे बहोत अलग महसूस होँ रहा हैं। बहोत… हॉट। ”
हमने हल्के नीले औऱ गहरे नीलेरंग कि जींस केँ संग भि यही किया। हर बारजब वो बाहर् आती, तोँ उसका आत्मविश्वास औऱ बढ़ जाता; वो थोडा पोज़ देती, घूमती, औऱ मेरीराय पूछती। उसे गहरे नीलेरंग वाली जींस सबसे ज्यादा पसन्द आई।
“मे यह तीनों लें रही हूं, ” उसने शरमाते हुए मुस्कराते हुएकहा।
इसकेबाद बारीआई टॉप्स कि।
मैंने कई गुलाबी रंग केँ क्रॉप टॉप चुने — कुछ टाइट थें, कुछ पतली स्ट्रैप वाले थें, औऱ एक् कां गला (V-neck) काफ़ी गहरा थां। सलोनी एक्-एक् करके उन्हें ट्रायल रूम मे लेँ गई औऱ मुझेहर टॉप दिखाया।
जब वो पहले गुलाबी क्रॉप टॉप औऱ काली जींस मे बाहर् आई, तोँ मे अपना रिएक्शन छिपा नहि पाया। वो टॉप बहोत अधिक छोटा थां; वो उसके भारी स्तनों केँ ठीक नीचे समाप्त होँ रहा थां, जिससे उसकी रसीले, गोरीकमर कां एक् बड़ा हिस्सा साफ़ दिखाई देरहा थां। उसकी गहरी नाभि बेहद लुभावनी लगरही थि।
“अभिर…ये बहोत अधिक छोटा हैं, ” उसने शिकायत करतेहुए कहा, मगर उसकी आँखों मे चमक थि। “मेरा पूरापेट दिखाई देरहा हैं। लोग घूरेंगे। ”
“उन्हें घूरने दो, ” मैंने कहा, औऱ उसके लगभग जाकर, उसके नंगेकमर पऱ अपनेहाथ रखदिए। “तुम् सच मे बहोत ज़बरदस्त लगरही हौ। इसटॉप मे तुम्हारे मम्मों बहोत बड़े औऱ कमर बहोत पतलीलग रही हैं। ”
उसने अपने होंठों कों दाँतों तले दबाया औऱ शीशे केँ सामने दाएँ-बाएँ घूमी। “मे सच मे अधिक जवानलग रही हूं… औऱ थोड़ी सेक्सी भि, हैं नां?”
“बहोत अधिक सेक्सी, ” मैंने जवाब दिया, औऱ उसकी नंगी त्वचा पऱ धीरे-धीरे सें अपनी उंगलियाँ फिराईं।
उसने बाकी क्रॉप टॉप भि पहनकर देखे। हर नए आउटफिट केँ संग, जौ वो मुझे दिखाती, उसका आत्मविश्वास औऱ बढ़ता गय़ा। उसने प्यारे-प्यारे पोज़ देना शुरुआत कर दिया — एक् हाथकमर पऱ रखना, सीना थोडा आगे कि ओर उभारना, औऱ अपनी गांड दिखाने केँ लिए घूमना। हम् दोनों हँसरहे थें औऱ उस लम्हा कां मजा लेँ रहे थें।
इसकेबाद, हम् कोर्सेट औऱ रैप टॉप्स कि तरफ बढ़े। नीलेरंग केँ कोर्सेट खासतौर पऱ काफ़ी बोल्ड थें। जब सलोनी एक् क्रॉप टॉप औऱ जींस केँ ऊपर गहरे नीलेरंग कां कोर्सेट पहनकर बाहर् आई, तौ उसके बूब्ज़ बहोत अधिकऊपर उठगए थें, जिससे एक् ज़बरदस्त औऱ दिलकश क्लीवेज बन गय़ा थां।
“अभीर…ये तोँ कुछ अधिक हि होँ गय़ा!” उसने फुसफुसाते हुएकहा, औऱ अपने हाथों सें अपनी छाती ढकने कि कोशिश कि। “मेरे बूब्ज़ तोँ करीब बाहर् हि निकलरहे हें। इसमें मे एकदम छिनाल जैसीलग रही हूं। ”
“तुम् तोँ एक् देवी जैसीलग रही हौ, ” मैंने उसेठीक करतेहुए कहा। “एक् बहोत हि हॉट, बहोत हि कामुक देवी। इन्हें ढकोमत। मुझे देखने दो। ”
उसने आहिस्ता अपनेहाथ नीचेकिए, उसका चेहरा लज्जा सें लाल हौ रहा थां, मगर मे उसकी आँखों मे उत्साह साफ़देख सकता थां। वो बहुतदेर तक आईने मे स्वयं कों निहारती रही, कभी बाईंओर मुड़ती तौ कभी दाईंओर; ये साफ़ ज़ाहिर थां कि वो स्वयं कों इतना उत्तेजक देखकर बहुत कामुक महसूस कररही थि।
हमनेदो कोर्सेट औऱ तीनहरे रंग केँ रैपटॉप खरीदे।
फिन मे उसे शॉर्ट्स वाले सेक्शन मे लें गय़ा औऱ वहा सें कई कालेरंग केँ 'हॉट पैंट' शॉर्ट्स चुने — जोँ बेहद छोटे, खुले औऱ एकदम टाइट थें।
“इन्हें पहनकर देखो, ” मैंने कहा।
सलोनी हिचकिचाई। “यह तौ बहोत हि छोटे हें, अभीर… इनसे तोँ मेरी गांड भि ठीक सें नहि ढकेगी। ”
“असलीमजा तोँ इसी मे हैं। ”
वो अंदर गई औऱ एक् पहनकर बाहर् आई। हॉट पैंट इतनी छोटी थि कि उसके कूल्हों केँ निचले उभार साफ़ दिखाई देरहे थें। वो घबराहट मे बार-बार उसे नीचे खींचरही थि।
"मे इसेघऱ केँ बाहर् पहनकर नहि जा सकती, " उसने शर्मिंदा होतेहुए कहा।
"तुम्हें पहनना भि नहि हैं। तुम् इसे मेरेलिए घऱ पर्र पहनोगी, " मैंने जवाब दिया, उसके खुलेहुए कूल्हों कों दबाते हुए। "तुम् बेहदहॉट लगरही हौ। "
उसनेघऱ मे पहनने केँ लिएकुछ औऱ छोटे कपड़े आज़माए — माइक्रो शॉर्ट्स केँ संग छोटे टैंकटॉप, बिना आस्तीन वाली ड्रेस जौ मुश्किल सें जांघों केँ बीच तक पहुँच रहीथीं। हरबार जब वो मुझे दिखाती, तोँ औऱ ज्यादा चंचल होँ जाती; खिलखिलाती औऱ अपनी अदाओं सें मुझे छेड़ती।
जब हम् सारे बाहरी कपड़े चुनकर खरीद चुके, तौ मे उसे स्टोर केँ सबसे आखिर मे बने इनरवियर सेक्शन मे लेँ गय़ा। जिस लम्हा सलोनी नें थोंग्स, स्ट्रिंग्स, ट्रायंगल ब्रा औऱ लॉन्जरी सें भरेरैक देखे, उसका चेहरा लज्जा सें लाल हौ गय़ा।
"अभीर। नहि। प्लीज़। यहा नहि, " उसने मेरी बांह कसकर पकड़ते हुएदबी आवाज़ मे कहा। "ये बहोत शर्मिंदगी वालीबात हैं। मे तुम्हारे संगयह सभी नहि खरीद सकती। "
"मे इन्हें खरीदे बिनायहा सें नहि जाऊँगा, " मैंने मज़बूती सें, मगर प्रेम सें कहा। "अब सें तुम् सिर्फ़ सेक्सी इनरवियर हि पहनोगी। जाओ औऱ इन्हें आज़माकर देखो। मे यहीं इंतजार करूँगा। "
वो कुछ मिनट तक बहस करतीरही, साफ़तौर पर्र शर्मिंदा थि, मगर आखिर मे उसने मेरे चुनेहुए कपड़ों कां ढेर उठाया औऱ ट्रायल रूम मे चली गई।
ट्रायल रूम केँ अंदर, सलोनी पूरे हाइट वाले शीशे केँ सामने खड़ी थि, उसकादिल ज़ोरों सें धड़करहा थां।
सबसे पहले, उसने कालीरंग कि स्ट्रिंग थोंग आज़माई। जब उसनेउसे ऊपर खींचा, तौ पतली सि डोरी उसकेगोल कूल्हों केँ बीच पूरीतरह सें छिप गई, जिससे वो पीछे सें करीब नंगी हि लगरही थि। सामने कां छोटा सां ट्रायंगल उसके गुप्तांग केँ होंठों कों मुश्किल सें हि ढकपारहा थां।
वो हैरानी सें स्वयं कों घूरती रही।
"हे ईश्वर। मे कितनी 'स्लटी' (बेशर्म) लगरही हूं, " उसने शीशे मे दिखरही अपनी हि परछाई सें दबी आवाज़ मे कहा। लज्जा सें उसकेगाल जलरहे थें, मगर वो अपने जिस्म मे दौड़रही सिहरन कों नज़रअंदाज़ नहि करपारही थि। उसके निप्पल साफ़तौर पऱ कड़े हौ गए थें।
वो घूमी औऱ अपने कूल्हों कों देखा। स्ट्रिंग कहीं दिखाई नहि देरही थि। ऐसालग रहा थां जैसे उसनेकुछ पहना हि न् हौ। उसने अपने नंगे कूल्हों पऱ हाथ फेरे, औऱ उसे एक् अजीब सि उत्तेजना महसूस हुइ।
"अभीर मुझे मजबूर कररहा हैं। मगरये सभी इतना। 'गंदा' औऱ अच्छा क्यूं लगरहा हैं?" उसने सोचा। उसने अलग-अलग रंग केँ थोंग्स ट्राई किए — लाल, सफ़ेद औऱ गुलाबी स्ट्रिंग थोंग्स। हर एक् कों पहनकर, वो शीशे मे चुपके सें अपने जिस्म कों निहारते हुए ज्यादा टाइम बिताती। वो थोडा आगे कि ओर झुकी, ये देखने केँ लिए कि वो कितनी अधिक खुली हुई दिखरही हैं। उसने अपनेपेर भि थोड़े फैलाए औऱ उस छोटे सें कपड़े केँ ऊपर सें स्वयं कों हल्के सें छुआ, ये महसूस करने केँ लिए कि वो कितनी गीली हौ गई थि।
इसकेबाद बारीआई ट्रायंगल ब्रा कि। उसने एक् थोंग केँ संग एक् छोटी सि लाल ट्रायंगल ब्रा पहनी। उसके भारी बूब्ज़ मुश्किल सें हि ब्रा मे समापा रहे थें — किनारों औऱ नीचे केँ उभार बाहर् कि ओर निकलरहे थें। उसके निप्पल उस पतले कपड़े केँ नीचे सें साफ़ उभरेहुए दिखरहे थें।
उसने अपनेहाथ सें अपना मुँहढक लिया। “मुझे यकीन नहि हौ रहा कि मे इस बारे मे सोच भि रही हूं। मे तोँ बिल्कुल एक् वेश्या जैसीदिख रही हूं। ”
मगर वो लगातार स्वयं कों घूरती रही। वो बाएँ-दाएँ घूमी, अपने स्तनों कों आपस मे दबाया, औऱ इसबात पऱ हैरान हुई कि वो कितनी अधिक 'स्लटी' औऱ सेक्सी दिखरही हैं। उसके अंदर एक् अजीब सि, मना कि हुईँ उत्तेजना जागरही थि।
आखिर मे, उसने एक् पारदर्शी काली 'बेबीडॉल नाइटी' ट्राई कि। उस पारदर्शी कपड़े सें उसकाबदन बिल्कुल भि नहि छिपरहा थां। उसके गहरेरंग केँ निप्पल औऱ उसकी योनि कि परछाई साफ़-साफ़ दिखाई देरही थि।
सलोनी काफ़ी देर तक वहीं खड़ीरही, बस स्वयं कों निहारती रही। उसे लज्जा औऱ झिझक महसूस होँ रही थि, औऱ संग हि वो ज़बरदस्त तरीके सें उत्तेजित भि हौ रही थि। ये सोचकर कि अभिरउसे यह 'स्लटी' चीज़ें खरीदने केँ लिए मजबूर कररहा हैं, उसकी योनि मे एक् अजीब सि कसक उठनेलगी।
उसने स्वयं सें फुसफुसाते हुएकहा, “वो चाहता हैं कि मे उसकेलिए ऐसे कपड़े पहनूँ। औऱ मेरेमन कां एक् हिस्सा भि यही चाहता हैं। ”
सभीकुछ अकेले मे ट्राई करने केँ बाद, उसने वापस अपने पुराने कपड़े पहनलिए, एक् गहरी साँसली, औऱ बाहर् आँ गई। उसके चेहरे पऱ अभि भि लज्जा कि लालीछाई हुई थि।
“क्याँ तुम्हें वे पसन्द आए?” मैंने शरारती मुस्कान केँ संग पूछा।
“मैंने। मैंने उन्हें ट्राई किया, ” उसने धीरे-धीरे सें कहा, औऱ मुझसे नज़रें मिलाने सें बचतीरही। “वे बहोत ज्यादा खुलेहुए हें। बहोत हि अधिक। ”
“मगर तुम् उन्हें खरीदरही होँ, हैं नाँ?”
वो करीब-करीब एक् मिनट तक हिचकिचाती रही, औऱ अपने होंठ ज़ोर सें चबाती रही। फिन, बहोत हि धीमी औऱ शर्मिंदा आवाज़ मे, उसनेसिर हिलाकर हाँ मे जवाब दिया।
“हाँ। क्योंकि तुम् यही चाहते हौ। ”
हमनेसभी कुछ खरीद लिया — कई सारे स्ट्रिंग थोंग्स, ट्रायंगल ब्रा, वो बेबीडॉल नाइटी, औऱ एक् पूरालाल रंग कां लॉन्जरी सेट।
जब हम् शॉपिंग बैग्स सें भरे हाथों केँ संग दुकान सें बाहर् निकले, तोँ सलोनी दिदी नें मेरेहाथ कों कसकर पकड़ लिया। वो चुप थि, मगर मे उसके अंदर कि उत्तेजना औऱ गहरी लज्जा केँ मिले-जुले एहसास कों साफ़ महसूस कर सकता थां। “मुझे यकीन नहि होँ रहा कि मैंने अभि-अभि क्याँ खरीदा हैं, ” उसने फुसफुसाते हुएकहा। “स्ट्रिंग पैंटी… ट्रांसपेरेंट नाइटी… मुझेअब स्वयं कों एक् ‘डर्टी गर्ल’ जैसा महसूस हौ रहा हैं। ”
मैंने उसके माथे पऱ किस किया औऱ फुसफुसाते हुए जवाब दिया, “अब तुम् मेरी ‘डर्टी गर्ल’ हौ, दिदी। औऱ मे घऱ पहुँचकर तुम्हें उनसब कपड़ों मे देखने कां बेसब्री सें इंतजार कररहा हूं। ”
उसनेकोई जवाब नहि दिया, मगर जिसतरह सें उसने मेराहाथ ज़ोर सें दबाया, उससे मुझेसमझ आँ गय़ा कि वो थोड़ी घबराई हुई भि थि औऱ संग हि आगे क्याँ होने वाला हैं, उसका बेसब्री सें इंतजार भि कररही थि।
घऱ वापस जाते वक्त टैक्सी कां सफ़र हँसी-मज़ाक औऱ उत्साह सें भरारहा। सलोनी दिदी चमकती आँखों सें शॉपिंग बैग्स कों देखती रहीं, औऱ बीच-बीच मे मेराहाथ भि दबाती रहीं।
“मुझेअब भि यकीन नहि होँ रहा कि मैंने ऐसे ‘स्लटी’ कपड़े खरीदे हें, ” उसने मेरे कंधे पऱ अपनासिर टिकाते हुए हँसकर कहा। “मगर मे खुश हूं… सच मे बहोत खुश हूं। ”
हम् दोपहर ढलने केँ टाइमघऱ पहुँचे। जैसे हि हमारे पीछे द्वार (दरवाज़ा) बंदहुआ, माहौल बदल गय़ा। मैंने उसे अपनी तरफ़ खींचा औऱ उसे एक् गहरा चुंबन दिया।
“अब, दिदी। अब वक़्त आँ गय़ा हैं कि तुम् वोँ पहनो जौ मैंने तुम्हारे लिए खरीदा हैं, ” मैंने पक्के इरादे सें कहा।
सलोनी एक् लम्हा केँ लिए हिचकिचाई, मगरफिन उसनेसिर हिलाकर हाँकर दि। मैंने उसे काली स्ट्रिंग वाली थोंग औऱ लालरंग कां ट्रांसपेरेंट लॉन्जरी सेटथमा दिया। वो लिविंग रूम मे ठीक मेरे सामने खड़ी हौ गई औऱ आरामसे अपने कपड़े उतारने लगी।
उसने अपना सलवार-कमीज़ उतारा, फिन अपनी ब्रा औऱ आम पैंटी। उसके भारी बूब्ज़ आज़ाद होकर उछलने लगे, औऱ उसकीगोल, रसीली गांड पूरीतरह सें सामने आँ गई। वो उस छोटी सि स्ट्रिंग थोंग कों उठाने केँ लिए थोडा झुकी, जिससे मुझे उसकी नंगी बुर औऱ गांड कां एकदम साफ़ नज़ारा मिल गय़ा।
थोंग पहनते हुए उसने शरमाकर मेरी तरफ़ देखा। “अभीर। इससेकोई फ़र्क नहि पड़ता कि मे इसे पहनूँ याँ पूरीतरह नंगी रहूँ। ये तौ कुछ भि नहि छिपारही हैं। ”
वो पतली काली स्ट्रिंग उसकी गांड केँ मोटे गालों केँ बीच गायब होँ गई, जिससे पीछे सें वो करीब नंगी हि लगरही थि। सामने वाला छोटा सां तिकोना कपड़ा उसकी बुर केँ होंठों कों बस ज़रा सां हि ढकपारहा थां।
मे उसके पीछे गय़ा औऱ उसकी नंगी गांड केँ गालों कों ज़ोर सें भींच दिया।
“बिल्कुल सही। मगर मे चाहता हूं कि तुम् इसे पहनो। इसे पहनकर तुम् मेरी अपनी छोटी सि 'स्लट' (कामुक लड़की) जैसी लगती होँ, ” मैंने उसकी गर्दन पऱ चुंबन देतेहुए फुसफुसाकर कहा। “अब सें, घऱ पर्र, तुम् सिर्फ़ इसीतरह केँ कपड़े पहनोगी। अबकोई बोरिंग कपड़े नहि। समझी?”
मेरी बातें सुनकर सलोनी सिहरउठी, मगर धीरे-धीरे सें उसनेसिर हिलाकर हाँकर दि। मे देख सकता थां कि उसके निप्पल कड़े होँ रहे थें।
“क्याँ तुम् सच मे चाहते हौ कि मे सिर्फ़ तुम्हारे लिए हि ऐसे कपड़े पहनूँ?” उसने धीरे-धीरे सें पूछा।
“हाँ। मे घऱ पऱ हर रोज़ अपनी सेक्सी कज़िन कों इसीरूप मे देख्ना चाहता हूं। तुम्हारा बदन इतनाहॉट हैं। इसेठीक सें दिखाया जानां चाहिए। ”
वो लज्जा सें लाल हौ गई, मगर मुस्कुराई। “ठीक हैं। तुम् जोँ चाहोगे, मे वही पहनूँगी। मगर, सिर्फ़ घऱ केँ अंदर हि। ”
फिन उसने वो लाल लॉन्जरी सेट पहना — वो छोटी सि ब्रा जोँ उसके स्तनों कों मुश्किल सें हि ढकपारही थि, औऱ उसकेसंग कि मैचिंग स्ट्रिंग थोंग। उसकेबाद, उसने एक् नई कालीहॉट पैंट औऱ एक् टाइट गुलाबी क्रॉप टॉपपहन लिया। हॉट पैंट इतनी छोटी थि कि उसकीआधी गांड दिखाई देरही थि, औऱ क्रॉप टॉप सें उसका पूरापेट औऱ कमर साफ़ नज़र आँ रहा थां।
वो बेहदहॉट लगरही थि।
हम् रात कां खानां बनाने केँ लिए रसोई मे चलेगए। जब वो सब्ज़ियाँ काटरही थि, तौ मे उसके पीछे खड़ा थां, अपना जिस्म उसकेबदन सें सटाएहुए। मेरेहाथ लगातार उसके कूल्हों सें खेलरहे थें — उन्हें दबाते हुए, हल्के सें थप्पड़ मारते हुए, औऱ उसकी थोंग कि डोरी पर्र अपनी उंगलियाँ फेरते हुए।
“हम्म… अभिर, बस करो, ” वो धीरे-धीरे सें कराहते हुए बोलीं, मगर उसने अपने कूल्हे पीछे कि ओर मेरी तरफ़ धकेलदिए। “अगर तुम् मुझेइस तरह छूते रहोगे तोँ मे खानां केसे बनाऊँगी?”
“इन शॉर्ट्स मे तुम् बहोत हि ज्यादा सेक्सी लगरही होँ, ” मैंने जवाब दिया, औऱ उसके कूल्हों कों ज़ोर सें दबाया। “मे स्वयं कों रोक नहि पारहा हूं। ”
वो खिलखिलाकर हँसी औऱ खानां बनाती रही; साफ़ ज़ाहिर थां कि उसे मेरा लगातार छूना अच्छा लगरहा थां। हरकुछ मिनट मे मे अपनाहाथ उसकेहॉट पैंट केँ अंदर डालता औऱ उसकी छोटी सि थोंग केँ ऊपर सें उसकी बुर कों सहलाता। वो औऱ भि अधिक गीली होतीजा रही थि।
हमनेसंग बैठकर मेज़ पऱ रात कां खानां खाया; एक्-दूसरे कों निवाले खिलाते हुए, हँसते-बोलते हुए — बिल्कुल एक् असली प्रेमी-जोड़े कि तरह। माहौल बहोत हि अपनापन भरा औऱ प्रेम सें लबरेज़ थां, संग हि उसमें एक् अजीब सां कामुक तनाव भि घुलाहुआ थां।
रात केँ खाने केँ बाद, हम् थोड़ी देर सोने केँ लिए बेडरूम मे चलेगए। सलोनी नें अपना क्रॉप टॉप उतार दिया औऱ सिर्फ़ अपनेहॉट पैंट औऱ लाल ब्रा मे हि पलंग पऱ लेट गई। मैंने उसे अपनी बाहों मे भर लिया औऱ पीछे सें उसे अपनीगोद मे समेट लिया। जब हम् एक्-दूसरे सें लिपटरहे थें, तौ उसके रसीले कूल्हे मेरे गुप्तांग सें सटगए।
कुछ मिनटों कि चैनभरी खामोशी केँ बाद, उसने अपना चेहरा मेरी तरफ़ घुमाया।
“अभिर… क्याँ तुम् मुझसे नाराज़ नहि हौ?” उसने धीरे-धीरे सें पूछा।
“मे तुमसे नाराज़ क्यूं होऊँगा?”
“आज हमने करीबसभी कुछकर लिया… तुमने मेरी बुर चाटी, मैंने तुम्हारा लन्ड चूसा, तुमने मुझेकई बार चरम-सुख तक पहुँचाया… मगरफिन भि तुमने मेरेसंग ठीक सें सेक्स नहि किया। जब भि तुमने अंदर डालने कि कोशिश कि, मैंने तुम्हें हरबार रोक दिया। क्याँ तुम्हें इससे झुंझलाहट नहि होती?”
मैंने उसके माथे पऱ प्रेम सें एक् चुंबन दिया औऱ उसकीकमर कों सहलाया।
“ये तुम्हारा बदन हैं, दिदी। तुम्हारी मर्ज़ी। मे तब तक इंतजार करूँगा जब तक तुम् पूरीतरह सें रेडी नहि होँ जाती। मे तुम्हें इसकेलिए ज़बरदस्ती नहि करना चाहता। ”
वो प्रेम सें मुस्कुराई औऱ उसने मुझेचूम लिया। आरामसे वो चुंबन औऱ भि गहरा होता गय़ा। हमारी ज़बानें एक्-दूसरे सें मिलीं, औऱ हम् कुछ मिनटों तक पूरी शिद्दत सें एक्-दूसरे कों चूमते रहे;फिन वो पीछेहट गई, औऱ उसकी साँसें तेज़ी सें चलने लगीं।
“अब मुझे नींद आँ रही हैं, ” उसने प्यारी सि मुस्कान केँ संग फुसफुसाते हुएकहा। “चलो, अब सो जाते हें। ”
वो फिन सें दूसरी तरफ़घूम गई, अपने कूल्हों कों मेरे जिस्म सें सटाया, औऱ अपनी आँखें बंदकर लीं। कुछ हि मिनटों केँ अंदर, उसकी साँसें धीमी औऱ एक् लय मे चलने लगीं। वो सो गई थि।
मे थोड़ी देर तक वहीं लेटारहा, आरामसे उसके जिस्म पर्र हाथ फेरता रहा। फिन मैंने पलंग केँ पासरखी मेज़ पऱ सें अपना फ़ोन उठाया।
आकांक्षा केँ दो मिस्ड फोन औऱ कई मैसेज आएहुए थें।
आकांक्षा: तुम् कहां हौ? आज तुम् क्लास मे नहि आए। आकांक्षा: सभीठीक हैं नाँ? आकांक्षा: जवाब तौ दो। मे तुम्हारा इंतजार कररही हूं।
मैंने जल्द सें जवाब टाइप किया:
मे: कुछ भि गंभीर नहि हैं। घऱ पऱ थोडा काम थां। साम कों तुम्हारे घऱ आऊँगा।
मैंने अभि मैसेज भेजा हि थां कि मुझे अपनेबगल मे कुछ हलचल महसूस हुइ।
Nice Job apna Abhir sabhi ladkiyon kaa Hero h mein too Abhir k alawa kisi aur male character ko kisi bi ldki k sath nahee dekhna chahta baki aapki kahani h too marji bi aapki hi chalegi waiting for next
हम् जौ धीरे-धीरे धीरे-धीरे खोगए। – New Episode
अध्याय 9:- वर्जित पुष्प कि चिंगारियाँ
साम केँ सूरज कि नरम सुनहरी किरणें पतले सफ़ेद पर्दों सें छनकर बेडरूम मे एक् गरम, सपनों जैसानूर बिखेर रहीथीं। आधी खुली खिड़की सें एक् हल्की हवा सरसराती हुईँ अंदरआई, जोँ बाहर् बगीचे सें चमेली कि हल्की खुशबू अपनेसंग लें आई थि। कमरे केँ अंदर, अभि भि सुभह कि शांत अंतरंगता छाई हुईँ थि — बैड कि सिलवटें, पिछली रात केँ बिखरे हुए कपड़े, औऱ उनदो शरीरों कि बची हुई गर्माहट जोँ अंधेरे मे एक् होँ गए थें।
मे धीरे-धीरे सें हिला, औऱ आँखें खोलते हि मेरेबगल मे एक् बेहद मनमोहक नज़ारा दिखा। सलोनी दिदी शांति सें सोरही थीं, उनकाबदन आधा मेरी तरफ़ मुड़ा हुआ थां। पतली रेशमी चादर उनकीकमर तक नीचे खिसक गई थि, जिससे उनकी नंगीपीठ कि चिकनी बनावट औऱ उनके स्तनों कां नरम उभार साफ़दिख रहा थां। उनके घुंघराले बाल तकिये पर्र रेशम कि काली, जंगली नदियों कि तरह फैलेहुए थें, जोँ उनकेपरी जैसे चेहरे कों घेरेहुए थें। उस लम्हा, वो सपनों औऱ हकीकत केँ बीच फँसी हुई किसी देवी जैसीलग रहीथीं — मेरी सुंदर, वर्जित चचेरी बेहन, वो महिला जौ अब मेरेदिल कि हर धड़कन पर्र राज करती थि।
मे पूरीतरह उनकी तरफ़ मुड़ गय़ा, औऱ अपनी एक् कोहनी कां सहारा लेकरउठ बैठा। मेरी नज़र उनकीहर नाज़ुक अदा पर्र ठहर गई: उनकी भौंहों कि हल्की सि गोलाई, उनकी गालों पर्र टिकी लंबी पलकें, औऱ वे भरे-भरे, कुदरती गुलाबी होंठ जिनसे कुछ हि घंटे पहले मेरानाम सिसकियों मे निकला थां। मेरे अंदर प्रेम औऱ तारीफ़ कि एक् गहरीलहर दौड़ गई। मैंने हाथ बढ़ाया, मेरी उंगलियाँ धीरे-धीरे सें उनकेनरम, घुंघराले बालों मे समागईं; मे आरामसे बालों कि एक् लट अपनी उंगली पऱ लपेटते हुए उनके रेशमी एहसास कां मजा लें रहा थां। नींद मे उन्होंने एक् हल्की सि अहहभरी — एक् छोटी सि, मासूम आवाज़ जिसने मेरी रगों मे गर्मी दौड़ा दि।
बेहद प्रेम सें, मैंने अपनी उंगलियों कों उनके चेहरे पऱ फेरा — उनकी कनपटी कों छुआ, उनके जबड़े कि बनावट कों महसूस किया, औऱ उनके गालों कि नरमी कों सहलाया। मेरे छूने पर्र उनकी त्वचा मखमल जैसीगरम औऱ रसीले लगी। अब स्वयं कों रोक न् सका, मे उनकी तरफ़ झुका औऱ अपने होंठ धीरे-धीरे सें उनके होंठों पर्र रखदिए।
वो चुंबन एक् प्रार्थना कि तरह शुरुआत हुआ — धीमा, पवित्र औऱ चाहत सें भराहुआ। उनके होंठ भरे-भरे औऱ गरम थें, पिछली रात केँ हमारे जुनून कि वजह सें अभि भि थोड़े सूजेहुए थें। शुरुआत मे, येबस एक् हल्का सां स्पर्श थां — प्रेम औऱ चाहत कां एक् खामोश इज़हार। फिन, जैसे सपनों मे भि मुझे महसूस कर लिया होँ, सलोनी थोड़ी सि हिलीं। उनके होंठ हल्के सें खुले, औऱ मुझे औऱ लगभगआने कां न्योता दिया। मैंने उसके निचले होंठ कों अपने होंठों केँ बीचदबा लिया, उसे धीरे-धीरे सें चूसा, औऱ उसकी मिठास कां मजा लिया—ठीक वैसे हि जैसे वसंतऋतु मे अमृत कि पहली बूँद कां लिया जाता हैं।
तब वो पूरीतरह जाग गई; जैसे हि हमारा चुंबन गहराहुआ, उसके मुँह सें एक् हल्की सि अहह मेरे मुँह मे समा गई। जोँ एक् हल्की-फुल्की सुभह कि चुम्मी केँ तौर पऱ शुरुआत हुआ थां, वो देखते हि देखते एक् बेहद जोशीले औऱ गहरे चुंबन मे बदल गय़ा। हमारे होंठ एक्-दूसरे केँ संग पूरीतरह तालमेल मे थें—धीरे-धीरे, गहरे औऱ एक्-दूसरे कों पूरीतरह अपने मे समेट लेने वाले। हमारी ज़बानें एक् कामुक नृत्य मे मिलीं—एक्-दूसरे कां स्वाद चखती हुईँ, छेड़ती हुई औऱ बिना किसी जल्दबाज़ी केँ एक्-दूसरे कों टटोलती हुइ। मैंने अपने दोनों हाथों सें उसका चेहरा थाम लिया, उसकासिर थोडा सां ऊपर उठाया औऱ उस चुंबन मे अपना सारा प्रेम उड़ेल दिया। उसने भि उतनी हि शिद्दत सें जवाब दिया; उसकी उंगलियाँ मेरे बालों मे उलझगईं औऱ उसने मुझे औऱ लगभग खींच लिया। टाइम जैसेथम सां गय़ा। वहाबस हमारे होंठों कां गीला, गरम स्पर्श थां; हल्की आहेंथीं; दिल कि तेज़ धड़कनें थीं; औऱ उसके मुँह कां नशीला स्वाद थां।
करीब-करीब पाँच बेहद सुखद मिनटों तक, हम् एक्-दूसरे मे पूरीतरह खोए रहे—इस तरह चुंबन करतेरहे, मानो बाहर् कि दुनिया कां कोई वजूद हि न् हौ। येसमय किसी कविता जैसा, करीब पवित्र थां। हमारी ज़बानों कां हर स्पर्श एक्-दूसरे पऱ अधिकार जतारहा थां, औऱ हर हल्की सि काट एक् गहरे जुनून कि दास्तान सुनारही थि।
आखिरकार, साँसें थमी हुई थीं, औऱ हम् एक्-दूसरे सें अलग होँ गए। हमारे होंठों केँ बीचलार कां एक् पतला सां धागाकुछ लम्हा केँ लिए जुड़ा रहा, औऱ फिनटूट गय़ा। उसकी आँखें धीरे-धीरे सें खुलीं—प्रेम औऱ अधूरी चाहत कि खुमारी सें भरी हुईँ।
"मुझे जानां होगा, " मैंने उसके होंठों केँ लगभग फुसफुसाते हुएकहा; मेरी आवाज़ प्रेम कि वजह सें भारी होँ गई थि। "मेरा मित्र बार-बार फ़ोनकर रहा हैं। मे रात केँ खाने सें पहले वापस आँ जाऊँगा, वादा करता हूं। "
सलोनी मुस्कुराई—वो प्यारी, दमकती हुइ मुस्कान, जौ हमेशा मुझे पिघला देती थि। "जल्द वापस आनां, " उसने धीरे-धीरे सें कहा; नींद औऱ चुंबन कि वजह सें उसकी आवाज़ थोड़ी भारी औऱ मदहोश सि लगरही थि।
मे अंतिम बार उसकीओर झुका औऱ उसके माथे पऱ एक् प्रेम भरा चुंबन दिया, औऱ उसकीगंध कों अपनी साँसों मे भर लिया। बड़े भारीमन सें, मैंने स्वयं कों उसकी गर्माहट सें अलग किया, कपड़े पहने औऱ कमरे सें बाहर् निकल गय़ा—मन हि मनउन घंटों कों गिनने लगा, जब मे वापस उसकी बाहों मे लौट सकूँगा।
जैसे हि मे कमरे सें बाहर् निकला, द्वार (दरवाज़ा) मेरे पीछे 'क्लिक' कि आवाज़ केँ संगबंद होँ गय़ा—सलोनी दिदी कों गरम चादरों मे लिपटा हुआ औऱ हमारे साम केँ चुंबन कि खुमारी मे डूबाहुआ छोड़कर। मेरेदिल पऱ अजीब सां भारीपन महसूस हौ रहा थां। मेरा एक् हिस्सा अभि भि उसकीगंध मे, उसके स्पर्श मे औऱ पिछली रात कि उसकी हल्की आहों मे खोयाहुआ थां। जबकि मेरा दूसरा हिस्सा मुझेआगे कि ओर खींचरहा थां—आकांक्षा कि ओर।
गलियारा आजकुछ ज्यादा हि लंबालग रहा थां। हॉस्टल केँ उस हिस्से कि खिड़कियों सें सूरज कि रोशनी छनकर आँ रही थि, औऱ नीचे टाइल्स वाले फ़र्श पऱ सुनहरे रंग केँ हसीन नक़्श उकेररही थि। मे आहिस्ता चलरहा थां, मेरे कदमों कि आहट हल्की-सि गूँजरही थि। हरकदम केँ संग, कल कि यादें मेरे ज़हन मे उमड़आईं — जिसतरह आकांक्षा नें हमारे किस करने सें पहले मेरीतरफ देखा थां, उसकी आवाज़ मे वोँ काँपती हुई कमज़ोरी, औऱ जिसतरह उस चोरी-छिपे समय मे उसके होंठ मेरे होंठों केँ आगेझुक गए थें।
मे क्याँ कररहा हूं? मैंने सोचा। सलोनी दिदी मेरी कज़िन हैं। एक् गुनाह भरा नाता। औऱ आकांक्षा। वो तोँ एकदम परफेक्ट लगती हैं।
सबसे पहले मुझे पायल कि हल्की, मीठी छनछनाहट सुनाई दि — एक् ऐसी आवाज़ जिसने मेरे सीने कों प्रेम सें भर दिया। फिन पैरों कि हल्की-हल्की आहट सुनाई दि। ताला 'क्लिक' करके खुला, औऱ द्वार (दरवाज़ा) खुल गय़ा।
हमारी आँखें मिलीं।
एक् समय केँ लिए, दुनिया थम सि गई। हम् दोनों केँ चेहरों पऱ एक् धीमी, अपने-आप् आने वाली मुस्कान खिलउठी। आकांक्षा मेरे सामने खड़ी थि; उसने एक् ढीली-ढाली सफ़ेद टी-शर्ट पहनी थि जौ उसके एक् कंधे सें नीचे खिसक गई थि, जिससे उसकी ब्रा कि पतली-सि पट्टी दिखाई देरही थि, औऱ संग मे बहोत छोटी काली शॉर्ट्स पहनी थि जौ उसकी सुडौल जाँघों सें चिपकी हुई थि। उसके लंबेबाल ढीले-ढाले बँधे थें, औऱ कुछ लटें उसके चेहरे पर्र बिखरी हुईँ थीं। वो बिना किसी बनावट केँ बेहद हसीनलग रही थि — एकदमसहज, असली, औऱ थोड़ी-सि घबराई हुइ।
"अंदर आँ जाओ, " उसने धीरे-धीरे सें कहा, औऱ एक् तरफहट गई।
मे अंदरचला गय़ा। पूरे कमरे मे उसकीगंध फैली हुईँ थि — सिट्रस बॉडीवॉश औऱ वनीला कि एक् हल्की-सि मिली-जुली खुशबू। मे उसके करीने सें लगेबैड केँ किनारे बैठ गय़ा, जबकि वो कमरे केँ छोटे सें पेंट्री एरिया मे चली गई। कुछ हि मिनटों बाद, वो नींबू पानी केँ दो ठंडे गिलास लेकर वापसआई; गिलासों मे बर्फ़ केँ टुकड़े आपस मे टकराकर हल्की-सि आवाज़ कररहे थें।
"धन्यवाद, " मैंने कहा, औऱ उसकेहाथ सें एक् गिलास लेँ लिया। हमारी उंगलियाँ एक्-दूसरे सें छूगईं, औऱ हम् दोनों केँ जिस्म मे एक् हल्की-सि सिहरन दौड़ गई।
कुछदेर तक हम् चुपचाप नींबू पानी पीतेरहे। कमरे मे एक् अजीब-सां तनाव महसूस होँ रहा थां। मे महसूस कर सकता थां कि वो चोरी-छिपे मेरी तरफ़देख रही हैं।
आखिरकार, उसने अपना गिलास नीचेरखा औऱ अपनीउन बड़ी-बड़ी, भावुक आँखों सें मेरी तरफ़ देखा।
"अभीर। क्याँ कुछ गड़बड़ हैं?" उसने धीरे-धीरे सें पूछा।
मैंने हल्की-सि त्योरियाँ चढ़ाईं। "तुम्हें ऐसा क्यूं लगता हैं?"
उसने हिचकिचाते हुए अपने नीचे वाले होंठ कों दाँतों तले दबाया। "कल। वो किस। वो सभीकुछ इतना अचानक हुआ, इतना ज़ोरदार थां। मे पूरीरात औऱ आज सुभह सें उसी केँ बारे मे सोचरही हूं। मुझेपता हैं कि हम् दोनों हि उस वक्त बहोत भावुक थें। शायद वो सभीउस लम्हा कि वजह सें हुआ होँ। उन भावनाओं कि वजह सें। मे नहि चाहती कि तुम् इस रिश्ते कों। याँ जोँ कुछ भि ये हैं। आगे बढ़ाने केँ लिए स्वयं पर्र कोई दबाव महसूस करो। सिर्फ़ इसलिये कि वो सभी होँ गय़ा थां, तुम्हें किसी भि तरह कि ज़िम्मेदारी निभाने कि ज़रूरत नहि हैं। "
आखिर मे उसकी आवाज़ थोड़ी-सि भर्रा गई।
मैंने अपना गिलास एक् तरफ़रखा औऱ पूरीतरह सें उसकी तरफ़ मुड़ गय़ा।
"नहि, आकांक्षा। बात बिल्कुल भि वैसी नहि हैं, " मैंने कहा। "असल मे, अगर किसी कों चिंता करनी चाहिए, तोँ वो मे हूं। मे आज क्लास मे इसलिये नहि आया क्योंकि मे सचमुच किसीकाम मे फँसाहुआ थां, इसलिये नहि कि मे तुमसे बचरहा थां। "
उसने अपनी नज़रें नीचे, अपने हाथों पर्र गड़ादीं। “फिन भि… मुझे लगता रहता हैं कि शायद मैंने कोईहद पारकर दि। श्रेया केँ संग तुम् पहले हि बहोत कुछझेल चुके हौ। मे तुम्हारी ज़िंदगी मे एक् औऱ मुश्किल नहि बनना चाहती। ”
तभी मेरे अंदरकुछ टूट सां गय़ा।
मैंने आगे बढ़कर उसकाहाथ थाम लिया, औऱ अपने दोनों हाथों केँ बीचउसे कसकर पकड़ लिया। मेरा अंगूठा धीरे-धीरे सें उसकी उंगलियों केँ जोड़ों पर्र फिरा।
“आकांक्षा… मेरीबात सुनो, ” मैंने कहा, मेरी आवाज़ भावनाओं सें भर्रा गई थि। “तुम्हें अंदाज़ा भि नहि हैं कि तुम् मेरेलिए क्याँ मायने रखती हौ। मेरी मम्मी तब गुज़र गईंजब मे सिर्फ़ तेरहसाल कां थां। उसकेबाद, सभीकुछ बदल गय़ा। ज़िंदगी नाना केँ घऱ औऱ हॉस्टलों केँ एक् कभी नं ख़त्म होने वाले सिलसिले मे बदल गई। मेराकभी कोई अपनाघऱ नहि रहा। कभी कोईऐसा नहि मिला जौ सचमुच मेरा हौ। जज़्बाती रिश्ते… सच्चे रिश्ते… वे हमेशा मुझे एक् ऐसी विलासिता लगे जिसे मे अफ़ोर्ड नहि कर सकता थां। ”
मेरी आँखों मे आँसूभर आए। मैंने उन्हें रोका नहि।
“इसीलिए मे अपने दोस्तों सें इतना जुड़ा हुआ हूं। तुम् सभी मेरा परिवार बनगए। औऱ जब श्रेया केँ संगबात नहि बनी, तौ मे पूरीतरह टूट गय़ा। सिर्फ़ इसलिये नहि कि मे उससे प्रेम करता थां, बल्कि इसलिये कि मैंने आखिरकार किसी कों अपनी ज़िंदगी मे आने दिया थां… औऱ उसबात नें मुझे तोड़कर रख दिया। ”
मैंने काँपती हुईँ साँसली।
“मगरकल, जब हमनेकिस किया…जब तुमने इसतरह स्वयं कों मेरे सामने खोलकर रख दिया… तौ मुझेकुछ ऐसा महसूस हुआ जौ मैंने सालों सें महसूस नहि किया थां। उम्मीद। एक् सच्ची, चैन देने वाली उम्मीद। मे सोचता रहा…काश श्रेया कि स्थान शुरुआत सें तुम् होतीं? हमारी कथा कैसी होती? क्याँ हम् अधिकखुश होते? क्याँ मे इतना टूटाहुआ नं होता?”
अब आकांक्षा कि आँखों सें आँसू बहनेलगे। उसने उन्हें पोंछा नहि।
उस बेहद भावुक औऱ नाज़ुक लम्हा मे, वो आगे झुकी औऱ अपने दोनों हाथों सें मेरा चेहरा थाम लिया।
“अभीर…” उसने फुसफुसाया, उसकी आवाज़ काँपरही थि।
हमारे होंठमिल गए।
येकोई भूखा, बेताब किस नहि थां। ये धीमा, पवित्र औऱ बेहद जज़्बाती थां। हमारे होंठ पहले धीरे-धीरे सें एक्-दूसरे कों छुए, आँसुओं कां खारापन चखा। फिन वे एक् गहरी, मीठीकसक केँ संग एक्-दूसरे सें जुड़गए। मैंने उसे औऱ लगभग खींच लिया, औऱ हम् दोनों पीछे कि ओर पलंग पर्र लुढ़क गए। उसका शरीर धीरे-धीरे सें मेरे शरीर सें सट गय़ा।
हमनेइस तरहकिस किया, जैसेदो ज़ख्मी रूहें एक्-दूसरे केँ ज़ख्म भरने कि कोशिश कररही हों। मेराहाथ आरामसे उसकीपीठ पर्र फिरा, पतली टी-शर्ट केँ नीचे उसकी रीढ़ कि हड्डी कों महसूस करतेहुए, उसकी त्वचा कि गरमाहट कों छुआ। उसने अपनी उंगलियाँ मेरे बालों मे फिराईं, उन्हें प्रेम सें सहलाया, जबकि हमारे होंठ एक् काव्यात्मक लय मे थिरकरहे थें — कोमल चूमन, हल्की-फुल्की काट, औऱ ज़ुबानों कां एक् प्यारा सां नाच। हर अहह, हर छोटी सि सिसकी, बरसों कि अनकही चाहत सें भरी हुइ थि।
हम् कई लंबे मिनटों तक उस चुंबन मे खोएरहे। टाइम कां कोई मतलब नहि रह गय़ा थां। वहाबस हमारे मुँह कि गीली गरमाहट थि, हमारे दिलों कि तेज़ धड़कनें थीं, औऱ इसबात कां चैन थां कि हमें सचमुच समझाजा रहा हैं।
जब आखिरकार हम् अलगहुए, तौ हम् दोनों हि ज़ोर-ज़ोर सें साँस लें रहे थें। आकांक्षा नें अपना चेहरा मेरी गर्दन मे छिपा लिया औऱ मुझे कसकरगले लगा लिया। मैंने अपनी बाहें उसके चारों ओर लपेटलीं, औऱ उसे जितना होँ सके अपने लगभग खींच लिया। हम् वहीं वैसे हि लेटेरहे — एक्-दूसरे मे उलझेहुए, पूरीतरह सें खुलेहुए, औऱ सुरक्षित।
"तुम् बहोत हसीन होँ, " मैंने उसके बालों मे फुसफुसाते हुएकहा। "सिर्फ़ बाहर् सें हि नहि। तुम्हारी हर चीज़। तुम्हारा दिल। तुम्हारी दयालुता। जिसतरह तुम् मुझे अकेला महसूस नहि होने देती। मे तुम्हें अपनी ज़िंदगी मे चाहता हूं, आकांक्षा। सच मे चाहता हूं। "
उसने मुझे औऱ कसकर पकड़ लिया।
हम् काफ़ी देर तक ऐसे हि रहे, बस एक्-दूसरे कों थामेहुए, एक् आरामदायक चुप्पी मे; कभी-कभी एक्-दूसरे केँ माथे, गालों औऱ होंठों पर्र हल्के-फुल्के चुंबन देतेहुए। हमारी बातचीत कां भावनात्मक बोझ अभि भि महसूस होँ रहा थां, मगरअब वो हल्का लगरहा थां — जैसे वो बोझअब बँट गय़ा होँ।
कुछदेर बाद, उसने अपनासिर उठाया औऱ मेरीतरफ देखा।
“अभीर… तुम्हारे औऱ श्रेया केँ बीचअसल मे क्याँ हुआ थां?” उसने धीरे-धीरे सें पूछा।
मैंने गहरी साँसली औऱ उसके बालों पऱ हाथ फेरा।
“ये एक् लंबी किस्सा हैं। औऱ सच कहूँ तौ… येसही टाइम नहि हैं। मे उस अँधेरे कों यहा, हमारे बीच नहि लाना चाहता। आज तोँ बिल्कुल नहि। ”
उसने समझते हुएसिर हिलाया। “ठीक हैं। जब भि तुम् रेडी होँ। ”
मे धीरे-धीरे सें उठकरबैठ गय़ा। “मुझेअब जानां चाहिए। रोहन मुझे फ़ोनकर रहा हैं। कुछ प्लानिंग वगैरह केँ बारे मे बात करनी हैं। ”
“हाँ… वो क्लास मे भि तुम्हारे बारे मे पूछरहा थां, ” उसने धीरे-धीरे सें मुस्कुराते हुएकहा।
हम् खड़े होँ गए। मेरे जाने सें पहले, उसने मुझे अंतिम बार अपनीतरफ घसीटकर एक् चुंबन दिया — गहरा, देर तक रहने वाला, औऱ वादों सें भराहुआ।
मे अपनेदिल मे तूफ़ान लिए अपने कमरे कि तरफ़लौट आया।
सलोनी दिदी… आकांक्षा…
दो औरतें। दो बिल्कुल अलगतरह कां प्रेम। दोनों हि मेरीरूह कों अपनी तरफ़ खींचरही थीं।
आखिर मे ये क्याँ कररहा हूं? क्याँ मे सच मे दोनों कों पा सकता हूं? याँ मे अपनी ज़िंदगी कि हर सुंदर चीज़ कों तबाह करने वाला हूं?
जैसे हि मे अपने कमरे मे वापसआया, दिनभर कां बोझ मेरे सीने पर्र भारीपड़ गय़ा। आकांक्षा केँ चुंबन कां स्वाद अभि भि मेरे होंठों पर्र बाकी थां, जबकि आज सुभह सलोनी दिदी केँ गरम, नंगे जिस्म कि यादें मिटने कां नाम हि नहि लेँ रहीथीं। दो औरतें। दोदिल। दोनों हि मुझे अलग-अलग दिशाओं मे खींचरहे थें। मेरे अंदर अपराधबोध औऱ चाहत एक् ऐसे तूफ़ान कि तरह उमड़-घुमड़ रहे थें जिससे मे बच नहि सकता थां।
अपने दिमाग़ मे चलरही उथल-पुथल कों शांत करने केँ लिए, मैंने जल्द सें रोहन कां नंबर मिलाया। फ़ोनदो बारबजा, फिन उसनेउठा लिया।
“यो, अभीर! क्याँ हाल हैं, भइया?आज तुम् थें कहां, दोस्त?” रोहन कि जोशीली आवाज़ स्पीकर सें गूँजउठी।
मैंने ज़बरदस्ती एक् हल्की-फुल्की हँसी हँसी। “अधिकसो गय़ा थां, दोस्त। रात काफ़ी भारी गुज़री थि। सॉरी, क्लास मिस हौ गई। ” “अरे, कोई बात नहि। वैसे, मे तुम्हें हर स्थान ढूँढ़ रहा थां। मे अपने ग्रुप केँ संग एक् ट्रिप प्लान कररहा हूं — एग्ज़ाम केँ बादबस एक् छोटा सां ब्रेक। कल कॉलेज आनां, हम् सभीकुछ ठीक सें डिस्कस करेंगे। ”
“बढ़िया, ” मैंने जवाब दिया, अपनी आवाज़ मे थोड़ी एक्साइटमेंट लाने कि कोशिश करतेहुए। “मे अवश्य आऊँगा। ”
“बहोत बढ़िया। तोँ फिनकल मिलते हें। ”
मैंने फ़ोनकाट दिया औऱ उसे अपनीजेब मे डाल लिया, औऱ एक् गहरी साँसली। इस चीज़ सें मेरा ध्यान तौ बँटा, मगर बस थोडा सां हि।
मैंने अपने कमरे सें लगी छोटी सि किचन कां द्वार (दरवाज़ा) खोला। हवा मे घऱ केँ बने खाने कि गंधफैल गई — दाल, चावल औऱ तली हुइ सब्ज़ियाँ। सलोनी दिदी काउंटर केँ पास खड़ीथीं, औऱ किचन केँ अंतिम काम निपटा रहीथीं। वो कालेरंग केँ छोटे सें शॉर्ट्स मे बेहद आकर्षक लगरही थीं; शॉर्ट्स उनके चिकने जांघों कों मुश्किल सें हि ढकपारहे थें, औऱ एक् छोटा सां सफ़ेद टॉप उनके भरे-भरे स्तनों सें चिपका हुआ थां। उनकी सुडौल कमर पूरीतरह सें खुली हुइ थि; किचन कि गरम रोशनी मे उनकीकमर औऱ नाभि कां कोमल उभारचमक रहा थां। उनके घुंघराले बाल बेतरतीब ढंग सें बंधेहुए थें, औऱ बालों कि कुछ लटें उनकी गर्दन कों छूरही थीं।
जैसे हि उन्होंने मुझे देखा, उनका चेहरा उस हसीन औऱ प्रेम भरी मुस्कान सें खिलउठा।
"अरे। तुम् वापस आँ गए, " उन्होंने धीरे-धीरे सें कहा, औऱ तौलिए सें अपनेहाथ पोंछे। "तुम्हारी साम कैसीरही?"
मे उनके औऱ लगभग गय़ा; मेरी आँखें अपने आप् हि उनकी खुलीकमर औऱ उनके हिलने-डुलने पऱ ऊपर सरकते हुए शॉर्ट्स पऱ टिकगईं। "हाँ। अच्छी रही, " मैंने अपनी आवाज़ कों स्थिर रखतेहुए जवाब दिया।
वो मेरी तरफ़ बढ़ीं; उनके जिस्म कि गंध औऱ किचन केँ मसालों कि खुशबू मिलकर मेरी धड़कनों कों तेज़कर रहीथीं। "तुम् थोड़े थकेहुए लगरहे हौ। चलो, खानां खा लेते हें। मैंने तुम्हारी पसंदीदा दाल बनाई हैं। "
हम् दोनों छोटी सि डाइनिंग टेबल पऱ संग बैठकर खानां खानेलगे। खानां सादा थां, पऱ बहोत चैन देने वाला। खानां खाते टाइम, सलोनी दिदी बीच-बीच मे चोरी-छिपे प्रेम भरी नज़रों सें मुझे देखती रहीं, औऱ कभी-कभी टेबल केँ नीचे उनके पांव मेरे पैरों सें टकरा जाते थें। माहौल बहोत गर्मजोशी भरा, अंतरंग औऱ एक् अजीब सि बेचैनी सें भराहुआ थां। मैंने खाने पऱ ध्यान लगाने कि कोशिश कि, मगर मेरामन बार-बार भटकरहा थां — कभी उनकी प्रेम भरी मुस्कान कि तरफ़, तौ कभीकुछ घंटे पहले आकांक्षा केँ संग बिताए पलों औऱ उस भावनात्मक कमज़ोरी कि तरफ़, जोँ मैंने उसके सामने ज़ाहिर कि थि।
अभि केँ लिए, मैंने उनकेसंग इससमय कां खुशी लेने कां फ़ैसला किया। चम्मचों कि खनक, मेरे बेतुके मज़ाकों पर्र उनकी हल्की हँसी, औऱ हमारे बीच कां वो ज़बरदस्त आकर्षण — इन सबने मिलकर उस शांत कमरे कों भर दिया थां।
रात कां खानां समाप्त होने केँ बाद, हमने एक् आरामदायक चुप्पी केँ बीच प्लेटें साफ़कीं; हमारे बीच कि हवा मे एक् अनकही चाहत घुली हुइ थि। सलोनी दिदी कि खुलीकमर औऱ किचन मे घूमते वक्त उनकीकमर कां वो लचकना — इन सबने मेरे अंदर कहीं गहरेकुछ जगा दिया थां। आकांक्षा केँ संग बिताए पलों कां अपराधबोध अभि भि मेरेमन केँ किसी कोने मे छिपाहुआ थां, मगर जैसे हि मे वापस बेडरूम मे पहुंचा, सलोनी कि नज़रों कि तपिश केँ आगे वो सारा तूफ़ान शांत हौ गय़ा। मे खाट केँ किनारे बैठा थां, अपने फ़ोन पऱ बिना सोचे-समझे स्क्रॉल कररहा थां, औऱ अपनी साँसों कों काबू करने कि कोशिश कररहा थां। मेरे पीछे द्वार (दरवाज़ा) धीरे-धीरे सें खुला। सलोनी दिदी कमरे मे आईं, औऱ चाबी कों धीरे-धीरे सें घुमाकर द्वार (दरवाज़ा) बंदकर दिया। बिनाकुछ कहे, वो सीधे मेरी तरफ़ बढ़ीं; उनके नंगेपेर फ़र्श पर्र कोई आवाज़ नहि कररहे थें। उनकी आँखों मे शरारत औऱ चाहत साफ़झलक रही थि।
इससे पहले कि मे कोई प्रतिक्रिया दे पाता, उनकाहाथ बेझिझक नीचे गय़ा औऱ मेरी पैंट केँ ऊपर सें हि मेरे लन्ड कों पकड़ लिया, औऱ उसे ज़ोर सें दबा दिया। मेरे होंठों सें एक् तेज़अहह निकली।
“आजरात कोई बहोत हि शरारती होँ रहा हैं, ” मैंने धीरे-धीरे सें कहा, मेरी आवाज़ पहले सें हि भारी हौ चुकी थि।
उन्होंने मुस्कुराते हुए अपनी निचली होंठ कों दाँतों तले दबाया। “तुम् आजकलकुछ अधिक हि शरीफ़ बनगए हौ। इसलिये मुझे हि बागडोर अपने हाथों मे लेनी पड़ी। ”
ये कहते हि, वो एक् हि सहज हरकत मे मेरे पैरों केँ बीच घुटनों केँ बलबैठ गईं। जब उन्होंने अपनीउन मादक, आधी झुकी हुईँ आँखों सें मेरी तरफ़ देखा, तौ उनके घुंघराले बाल उनके चेहरे केँ चारों ओर बिखरे हुए थें। उनकी उंगलियाँ तेज़ी सें, मगर शरारती अंदाज़ मे कामकर रहीथीं; उन्होंने मेरी पैंट कि ज़िप खोली औऱ उसे, संग हि मेरे बॉक्सर कों भि, नीचे खिसका दिया। मेरा लन्ड आज़ाद होकर बाहर् आँ गय़ा; वो पहले सें हि आधा खड़ा थां औऱ उनकी भूखी नज़रों केँ नीचे फड़करहा थां।
सलोनी दिदी नें अपनी कोमल उंगलियाँ मेरे लन्ड केँ निचले हिस्से पर्र लपेटीं, औऱ उसे आरामसे, जान-बूझकर सहलाना शुरुआत किया। उन्होंने अपने अँगूठे सें उसके संवेदनशील सिरे केँ चारों ओर घेरा बनाया, औऱ उस 'प्री-कम' (काम-रस) कि बूँद कों फैला दिया जौ पहले हि बन चुकी थि। उनका स्पर्श बिजली जैसा थां। जब वो मेरेसंग खेलरही थीं, तोँ मेरेगले सें एक् धीमी सि कराह निकली — आरामसे, आलसभरे अंदाज़ मे घेरे बनाना, उसकेछेद कों छेड़ना, औऱ फिन उसके मोटेतने कों नीचे कि ओर इतने दबाव केँ संग सहलाना कि मेरे कूल्हे फड़क उठें।
“हम्म। ज़रा तुम्हें देखो, ” उन्होंने फुसफुसाते हुएकहा; उनकीगरम साँसें मेरे लन्ड केँ गीले सिरे पर्र पड़रही थीं। “मेरेलिए तुम् कितने संवेदनशील होँ। ”
वो औऱ लगभगझुक गईं। पहले शुरुआत हुईँ छेड़छाड़। उनकी कोमल, गीली ज़बान बाहर् निकली, औऱ उन्होंने मेरे लन्ड केँ सूजेहुए सिरे केँ चारों ओर धीरे धीरे एक् घेरा बनाया। उस गर्माहट औऱ गीलेपन सें मेरेबदन मे सिहरन दौड़ गई। उन्होंने ऐसाफिन किया, इस बार औऱ भि धीरे-धीरे; अपनी ज़बान कों नीचे सें ऊपर तक, पूरेतने पऱ फेरते हुए, मेरे स्वाद कां मजा लिया। उनकेगले सें एक् कोमल, चाहतभरी गुनगुनाहट गूँजउठी।
“अहह.शिट, सलोनी, ” मे कराहउठा; मेराहाथ अपने आप् हि उनके घुंघराले बालों कि तरफ़बढ़ गय़ा।
अपने भरे-भरे होंठों कों खोलने सें पहले, उन्होंने एक् शरारती मुस्कान केँ संग मेरी तरफ़ देखा। उसने पहले सिर्फ़ मेरे लिंग कां अगला हिस्सा अपने मुँह मे लिया—गरम, गीला औऱ बेहद रसीले। उसकीजीभ मुँह केँ अंदर उसके चारों ओरघूम रही थि, आरामसे चाटरही थि औऱ चूसरही थि, जिससे कमरे मे कामुक गीली आवाज़ें गूँजरही थीं।
स्लर्प… मम्फ…
उसका चूषण एकदमसही थां। उसने अपने गालों कों अंदर कि ओर दबाया औऱ मुझे आहिस्ता अंदर लें लिया, उसका मुँह मेरे मोटेपन कों चारों ओर फैलारहा थां। मे उसकीजीभ कि हर उभार, उसके मुँह केँ ऊपरी हिस्से कि हर रसीले उभार कों महसूस कर सकता थां। वो आरामसे अपनासिर हिलारही थि, अपना वक़्त लेँ रही थि, मुझेऐसे मज़े सें चखरही थि जैसे मे उसकी पसंदीदा मिठाई हूं।
“हे ईश्वर… तुम्हारा मुँह कितना अद्भुत हैं, ” मे कराहउठा, मेरी उंगलियाँ उसके घुंघराले बालों मे कसगईं।
जवाब मे उसने मेरे लिंग केँ चारों ओर एक् गहरी, थरथराती हुई अहहभरी — एक् गहरा, थरथराता हुआ "Mmmmm" जिसने मेरे पूरेबदन मे खुशी कि लहरें दौड़ा दीं। वो आवाज़ एक् हि वक्त पऱ अश्लील औऱ हसीन दोनों थि। सलोनी दिदी औऱ आगे बढ़ीं, मुझे औऱ अंदर तक लेतीगईं, जब तक कि मेरा लिंग उनकेगले केँ पिछले हिस्से सें जा टकराया। उन्हें हल्की-सि हिचकी आई, आवाज़ गीली औऱ गले सें निकली हुई थि — ग्लक — मगर वो पीछे नहि हटीं। इसके बजाय, वो वहीं रुकी रहीं; मेरी मंज़ूरी पाने केँ लिएजब उन्होंने ऊपर मेरीतरफ देखा, तौ उनकी आँखों मे हल्के-सें आँसू आँ गए थें।
मैंने धीरे-धीरे सें उनकासिर नीचे कि ओर दबाया औऱ उन्हें मार्ग दिखाया। उन्होंने खुशी-खुशी स्वयं कों मेरे हवाले कर दिया औऱ मुझेगति तय करने दि। मैंने अपने दोनों हाथ उनकेघने, घुंघराले बालों मे फँसाए औऱ आरामसे, सोच-समझकर किएगए स्ट्रोक्स केँ संग उनकेसिर कों अपने लिंग पऱ ऊपर-नीचे करना शुरुआत कर दिया।
स्लर्प… ग्लक… स्लर्प…
रूम उनके मुँह सें निकलने वालीउस अश्लील, गीलीधुन सें भर गय़ा, जौ मेरेबदन पऱ कामकर रहा थां। सलोनी कि लार मेरे लिंग पर्र टपकरही थि औऱ हरबार जब वो मुझे औऱ गहराई तक लेतीं, तौ मेरी अंडकोषों कों भि गीलाकर देती थि। उन्होंने अपनेहाथ कां इस्तेमाल उस हिस्से कों सहलाने केँ लिए किया जौ उनके मुँह मे नहि आँ पारहा थां; वो उसे धीरे-धीरे सें मरोड़ रहीथीं, जबकि उनकीजीभ मेरे लिंग केँ निचले हिस्से पऱ दबावडाल रही थि।
मे खाट पर्र पीछे कि ओरटिक गय़ा, खुशी केँ मारे मेरी आँखें आधीबंद थीं। "बिल्कुल ऐसे हि… धीरे धीरे…हाँ, बेबी। कमाल हैं, तुम्हारा मुँह कितना गरम औऱ गीला हैं। "
जवाब मे उन्होंने औऱ ज़ोर सें अहहभरी; उस थरथराहट सें मेरे पैरों कि उंगलियाँ भि सिकुड़ गईं। Mmmph… mmm… ग्लक-ग्लक। उनकासिर एक् कामुक लय मे हिलरहा थां — लंबे, धीमे स्ट्रोक्स, जिनसे मुझे अपने लिंग कां हरइंच उनके होठों केँ बीच फिसलते हुए महसूस होँ रहा थां। कभी-कभी वो पीछेहट जातीं, जब तक कि उनके मुँह मे सिर्फ़ लिंग कां अगला हिस्सा (सुपारी) हि बाकी न् रह जाता;तब वो ज़ोर सें चूसतीं औऱ उनकीजीभ लिंग केँ अगले हिस्से केँ नीचे मौजूद संवेदनशील स्थान पऱ तेज़ी सें थिरकती, औऱ फिन वो फिन सें नीचे कि ओरझुक जातीं, जब तक कि उनकीनाक मेरे पेल्विस (कमर केँ निचले हिस्से) सें जा नं टकराती।
उनकी आँखों मे मेहनत केँ आँसूचमक रहे थें, मगर वो रुकी नहि। उनका दूसरा हाथऊपर उठा औऱ मेरेपेट कि मांसपेशियों कों सहलाने लगा;फिन वो हाथ नीचे कि ओर गय़ा औऱ धीरे-धीरे सें मेरी अंडकोषों कि मालिश करनेलगा, उन्हें अपनी हथेली मे हल्के सें घुमाने लगा। उन तमाम संवेदनाओं कां मेल — उनकागरम मुँह, घूमती हुईँ जीभ, कसा हुआगला औऱ उनके माहिर हाथ — मुझे पागलबना रहा थां।
अब मैंने उनके बालों कों औऱ भि ज़ोर सें पकड़ लिया — सख्ती सें नहि, बल्कि मज़बूती सें — औऱ उनकेहर मूवमेंट कों गाइड करनेलगा; संग हि, मेरीकमर भि आहिस्ता हिलने लगी औऱ मे धीमे, गहरे झटकों केँ संग उनके मुँह केँ संग संभोग करनेलगा। सलोनी दिदी मेरे लन्ड केँ आस-पास सिसकरही थीं औऱ आहेंभर रहीथीं; साफ़लग रहा थां कि उन्हें इसतरह इस्तेमाल होना बहोत पसन्द आँ रहा हैं। उनकी अपनी उत्तेजना साफ़दिख रही थि — मे उनकीनाक सें निकलती भारी साँसें औऱ हरबार जब मेरा लन्ड उनकेगले केँ पिछले हिस्से सें टकराता, तौ उनके मुँह सें निकलने वाली कोमल, बेताब आवाज़ें सुन सकता थां।
“तुम् इसमें बहोत हि ज्यादा माहिर हौ, ” मैंने हाँफते हुएकहा, मेरी आवाज़ खुशी केँ मारे काँपरही थि। “मेरे लन्ड कों इतना अंदर तक लेँ रही होँ। अपने कज़िन केँ लिए कितनी शरारती लड़की हौ तुम्। ”
उन्होंने औऱ ज़ोर सें चूसकर जवाब दिया, गति कों थोडा सां बढ़ाया, मगरउसे कामुक औऱ गीला हि बनाएरखा। आवाज़ें औऱ तेज़ हौ गईं — गीली चूसने कि आवाज़ें, गले मे अटकने कि आवाज़ें, आहें — जोँ मेरी अपनी धीमी कराहों औऱ भारी साँसों केँ संगमिल रहीथीं। मेरे हाथों कि वजह सें उनके घुंघराले बालअब बिखरे हुए थें, बालों कि लटें उनके सुर्ख गालों सें चिपकी हुइ थीं।
मे आहिस्ता बढ़ता हुआ दबाव महसूस कर सकता थां, जोँ बहोत हि सुखद थां। उनके होठों कां हर धीमा सरकना, उनकीजीभ कां हर घुमाव, उनकी आहों कां हर कंपन मुझेचरम सीमा केँ औऱ लगभग लेँ जारहा थां, मगर मैंने स्वयं कों रोककर रखा, क्योंकि मे इस कामुक पूजा कां खुशी जितना हौ सके, उतने लंबे वक्त तक लेना चाहता थां।
उस ज़ोरदार, गीले ब्लो-नौकरी केँ बाद, सलोनी दिदी आहिस्ता पीछे हटीं; गाढ़ी लार केँ तार अभि भि उनके सूजेहुए, चमकते होठों कों मेरे धड़कते हुए लन्ड सें जोड़रहे थें। उन्होंने नम आँखों औऱ एक् संतुष्ट, शरारती मुस्कान केँ संग मेरीतरफ देखा, औऱ ज़ोर-ज़ोर सें साँसें लेँ रहीथीं। मे अब औऱ इंतजार नहि कर सकता थां।
मे खड़ाहुआ, उन्हें घसीटकर पैरों पऱ खड़ा किया, औऱ अपनी बाहों मे उठा लिया। जब मे उन्हें बैड पर्र लें गय़ा औऱ धीरे-धीरे सें नरम गद्दे पर्र लिटाया, तौ उनके मुँह सें खुशी कि एक् चंचलचीख निकली। वो खिलखिलाकर हँसीं, औऱ उनके घुंघराले बाल तकिये पर्र बेतरतीब ढंग सें फैलगए।
इससे पहले कि वो ठीक सें लेट पातीं, मे उनकेऊपर चढ़ गय़ा औऱ बेरहमी सें उनकीकमर केँ किनारों पऱ गुदगुदी करनेलगा। सलोनी दिदी ज़ोर-ज़ोर सें हँसने लगीं, औऱ मेरे नीचे छटपटाने औऱ करवटें बदलने लगीं।
“आह्ह्ह! अभिर!रुक जाओ— हाहाहा— तुम् बेवकूफ़!” वो हँसी केँ दौरों केँ बीचचीख रहीथीं, औऱ उनकाबदन कामुक अंदाज़ मे मचलरहा थां।
जब वो हँसी-मज़ाक मे खोई हुईँ थीं, तोँ मैंने उससमय कां फ़ायदा उठाकर धीरे धीरे उनके कपड़े उतारदिए। मेरी उंगलियाँ उनके क्रॉप टॉप केँ निचले किनारे केँ नीचेगईं औऱ उसेऊपर कि ओर सरका दिया, जिससे उनकेभरे हुए, भारी बूब्ज़ औऱ उनके गहरे, कड़े निप्पल साफ़ दिखाई देनेलगे। मैंने फिन सें उनकी पसलियों पर्र गुदगुदी कि, जिससे उन्होंने अपनीपीठ कों ऊपर कि ओर मोड़ा औऱ अपने स्तनों कों ऊपर कि तरफ उभार दिया। मैंने उनकाटॉप पूरीतरह सें उतार दिया औऱ उसे एक् तरफ फेंक दिया। इसकेबाद, मैंने उसके छोटे शॉर्ट्स केँ कमरबंद पऱ हमला किया। मैंने उसकीकमर औऱ जांघों कों गुदगुदाते हुए शॉर्ट्स कों उसकी चिकनी टांगों सें नीचे खींच दिया, संग हि उसकी भीगी हुइ पैंटी भि। कपड़ा उसकी उत्तेजना सें भीगाहुआ थां। अब वो मेरे नीचे पूरीतरह नग्न थि - उसका सुडौल जिस्म गुलाबी होँ गय़ा थां, निपल्स उभरेहुए थें, औऱ उसकी मुंडी हुईँ योनि गीलेपन सें चमकरही थि।
हमारी आँखें मिलीं।
मज़ाकिया गुदगुदी समयभर मे तीव्र भूख मे बदल गई। मैंने आक्रामक, अधिकारपूर्ण चुंबन केँ संग अपने होंठ उसके होंठों पर्र रखदिए। हमारे होंठआपस मे टकराए, जीभें बेतहाशा लड़रही थीं, लार बेतरतीब ढंग सें मिलरही थि जैसे हम् एक्-दूसरे कों खारहे हों। चुंबन गीला, शोरगुल भरा औऱ बेताब थां। कमरे मे ज़ोरदार आवाज़ें गूँज उठीं - म्वाहा। मम्फ। स्लर्प.
"मम्फ्ह्ह। हाहा." वो मेरे मुँह मे कराहउठी, मेरीजीभ कों आक्रामक रूप सें चूसते हुए।
मैंने उसके निचले होंठ कों ज़ोर सें काटा, उसे अपने दाँतों केँ बीच खींचते हुए। वो हाँफउठी औऱ मुझे औऱ भि ज्यादा जोश सें चूमने लगी; उसकेहाथ मेरेसिर केँ पीछे पहुँच गए औऱ उसके नाखून मेरी खोपड़ी मे गड़गए।
जब हमारे मुँहइस गीली, लार सें भरी लड़ाई मे उलझेहुए थें, तभी मेरा दाहिना हाथ उसकेबदन पर्र नीचे कि ओरसरक गय़ा। मैंने उसकी भीगी हुईँ बुर कों अपनी हथेली मे थाम लिया, अपनी हथेली पऱ उसकी तेज़ गरमी औऱ चिकनाहट कों महसूस करतेहुए। वो पूरीतरह सें गीली हौ चुकी थि।
मैंने आहिस्ता शुरुआत कि।
सबसे पहले, मैंने अपने अँगूठे सें उसकी सूजी हुई क्लिट कों छेड़ा, उस पऱ धीरे धीरे गोल-गोल घुमाते हुए। सलोनी केँ कूल्हे ज़ोर सें हिले।
“आह्ह्हन…!” वो ज़ोर सें कराहउठी, एक् लम्हा केँ लिए चुंबन तोड़ा औऱ फिन सें उसमें डूब गई।
मैंने अपनी एक् उँगली उसकीकसी हुईँ, मखमली बुर केँ अंदरडाल दि। वो अविश्वसनीय रूप सें गीली थि — मेरी उँगली एक् कामुक 'श्लिक' कि आवाज़ केँ संग आसानी सें अंदरसरक गई। उसकी अंदरूनी दीवारें जल्दी मेरी उँगली केँ चारों ओरकसगईं।
“ओह्ह्ह… अभिर…” वो मेरे होंठों सें सटकरदबी आवाज़ मे बोलि।
मैंने उस एक् उँगली कों धीरे धीरे अंदर-बाहर् करना शुरुआत किया, उसे ऊपर कि ओर मोड़कर उसकी संवेदनशील अगली दीवार कों सहलाया। उसकी कराहें औऱ भि तेज़ औऱ साँसों सें भरी होतीगईं।
“म्मम… आह्ह्ह… आह्ह्ह… हाँ… बिल्कुल ऐसे हि…”
कुछ मिनटों तक गहरे, कामुक सहलाने केँ बाद, मैंने दूसरी उँगली भि डाल दि। खिंचाव महसूस होते हि उसकी आँखें हैरानी सें चौड़ी हौ गईं। मैंने दोनों उँगलियों कों उसके अंदर तक धकेल दिया, उन्हें धीरे धीरे कैंची कि तरह चलाते हुए, उसे औऱ खोल दिया।
“फूऊऊक… अभिर!हे ईश्वर…” वो ज़ोर सें चिल्लाई, उसकी आवाज़ काँपरही थि।
श्लिक… श्लिक… श्लिक…
मेरी उँगलियों केँ उसकी गीली बुर मे अंदर-बाहर् होने कि गीली आवाज़ें बेहद तेज़ औऱ कामुक थीं। उसके जिस्म कां रस मेरेहाथ पऱ लिपट गय़ा औऱ नीचे चादर पऱ टपकने लगा। मैंने गति थोड़ी बढ़ा दि, दो मोटी उँगलियों सें उसे चोदते हुए, जबकि मेरा अँगूठा लगातार उसकी क्लिट कों तड़पाता रहा।
सलोनी कि कराहें अब शुद्ध खुशी कां एक् मधुर म्यूज़िक बन चुकीथीं:
“आह्ह्ह! आह्ह्ह! म्ममफ्ह्ह्ह… ओह्ह्ह फूक… औऱ गहरा… हाआआह… न्न्ग्ह्ह्ह!”
मैंने चुंबन तोड़ दिया औऱ अपना मुँह उसकी गर्दन कि ओर लें गय़ा, इतनी ज़ोर सें चूसा कि वहा निशान पड़गए, जबकि मेरी उँगलियाँ अपना ज़ोरदार काम लगातार करती रहीं। वो हाँफरही थि, कराहरही थि, औऱ किसी जुनून मे डूबी स्त्री कि तरह मेरेहाथ पऱ अपनेबदन कों रगड़रही थि।
कई मिनटों तक दो उँगलियों सें ज़ोरदार चोदाई करने केँ बाद, मैंने तीसरी उँगली भि डाल दि। “तीन… मे तुम्हारे अंदरतीन डालरहा हूं, बेबी, ” मैंने उसकेकान केँ पास गुर्राते हुएकहा।
सलोनी कि आँखें थोड़ी सि ऊपर कि ओरघूम गईं। “हाँ… प्लीज़… मुझे फैलाओ…”
मैंने अपनीतीन उंगलियाँ उसकीकसी हुइ बुर केँ अंदरडाल दीं। खिंचाव बहोत मज़ेदार थां। उसकी अंदरूनी दीवारें एक् लम्हा केँ लिए तौ रुकीं, मगरफिन एक् गीली, सप्प-सप्प करती आवाज़ केँ संग मेरी उंगलियों कों अपने अंदरसमा लिया। वो मज़े मे चीख पड़ी।
“आआआआह्ह्ह्ह! फ़क!ये कितना भरा-भरा लगरहा हैं… हे ईश्वर… अभिर!”
अब मैंने उसे औऱ ज़ोर सें औऱ गहराई तक उंगलियों सें चोदना शुरुआत कर दिया — तीन मोटी उंगलियाँ उसकी टपकती हुईँ बुर केँ अंदर-बाहर्, लंबे औऱ धीमे झटकों केँ संगजा रहीथीं। हर झटके केँ संग एक् ज़ोरदार, अश्लील सि ‘श्लिक-श्लिक-श्लिक’ कि आवाज़ आती थि। उसकारस बेहिचक बहरहा थां, जिससे मेरा पूराहाथ औऱ कलाई लथपथ हौ गई थि।
मैंने अपनी उंगलियों कों ज़ोर सें मोड़ा, औऱ बार-बार उसके G-spot पर्र चोट कि।
उसकी कराहें अब जंगली चीखों मे बदलगईं:
“आह्ह्ह! वहा!ठीक वहीं! न्न्न्घ्ह्ह… हाआआह… म्म्म्फ़… ओहशिट… मे झड़रही हूं… रुकोमत… प्लीज़ रुकोमत!”
मे नहि रुका। मैंने तीन उंगलियों सें उसे औऱ ज़ोर सें चोदा;हर झटके केँ संग मेरी हथेली उसकी क्लिट (clit) पऱ थप्पड़ कि तरह लगती थि। सलोनी कां जिस्म बेकाबू होकर काँपरहा थां। हर ज़ोरदार झटके केँ संग उसके बूब्ज़ उछलते थें। उसकी त्वचा पर्र पसीना चमकरहा थां। उसके घुंघराले बाल पूरीतरह सें बिखरे हुए थें।
उसकी आवाज़ें बेहद कामुक औऱ अलग-अलग तरह कि थीं:
“ओह्ह्ह… ओह्ह्ह… आह्ह्ह… आह्ह्ह… फ़क… म्म्म्म्म्… हाआआह… न्न्न्घ्ह… हाँ…हाँ… औऱ गहरा… आआआआह्ह्ह! अभिर! मे झड़रही हूं… मे बहोत ज़ोर सें झड़रही हूं!”
जैसे हि उसे पहला चरमसुख (orgasm) मिला, उसकी बुर नें मेरी तीनों उंगलियों कों ज़ोर सें जकड़ लिया। वो ज़ोर सें चीखी; उसकीपीठ खाट सें ऊपर कि ओरउठ गई औऱ पैरों कि उंगलियाँ मुड़गईं। उसकारस तेज़ी सें बाहर् निकला, औऱ मेरी उंगलियों केँ आस-पास थोडा सां छलक गय़ा।
मगर मैंने अपनी उंगलियाँ बाहर् नहि निकालीं।
उसके चरमसुख केँ दौरान भि मे उसे उंगलियों सें चोदता रहा — अब थोडा धीमे, मगर औऱ भि ज्यादा गहराई तक — ताकिउसे मिलने वालेसुख कि हर अंतिम लहर कों निचोड़ सकूँ। वो सिसकती रही औऱ काँपती रही; वो पूरीतरह सें उत्तेजित औऱ संवेदनशील होँ चुकी थि। “बहोत अधिक…हा… हम्म…अहह… तुम् बहोत अच्छे होँ… फ़क…”
मैंने उसेफिन सें चूमा — ज़ोरदार, बेतरतीब औऱ थूक सें भराहुआ — जबकि मेरी उंगलियाँ उसकी टपकती हुइ बुर पऱ अपना धीमा, कामुक हमला जारीरखे हुएथीं। रूम उंगलियों केँ गीले-गीले हंगामा, उसकी भारी साँसों औऱ लगातार निकलती सुंदर आहों सें भर गय़ा थां।
मे अभि उसकेसंग पूरीतरह सें निपटा नहि थां।
सलोनी दिदी कां पूराबदन, अपने ज़ोरदार चरम-सुख केँ बाद भि, अभि तक बेकाबू होकर काँपरहा थां। उसकी जांघें ज़ोर-ज़ोर सें थरथरा रहीथीं; उसका निचला जिस्म फड़करहा थां औऱ काँपरहा थां, जैसेसुख कि लहरें उसके पूरे शरीर मे दौड़रही हों। उसकी छाती ऊपर-नीचे हौ रही थि, निप्पल पत्थर जैसे कड़े होँ गए थें, औऱ मंद रोशनी मे उसकी भीगी हुई बुर, उसके अपने रसों सें चमकरही थि।
मे उसकेऊपर चढ़ गय़ा, अपने जिस्म कों उसके कांपते हुएबदन सें सटा दिया। हमारी पसीने सें भीगी त्वचा एक्-दूसरे सें चिपक गई, तभी मैंने उसके होंठों कों एक् गहरे, मदहोश कर देने वाले चुंबन मे कैदकर लिया। हमने आरामसे, कामुकता सें चुंबन लिया; हमारी जीभें एक् गीली, मदमस्त लय मे एक्-दूसरे केँ संगनाच रहीथीं। हमारे आपस मे जुड़े होंठों केँ बीच सें हल्की-हल्की आहें निकलरही थीं।
“Mmm… haaah…” उसने मेरे मुँह मे साँस छोड़ी, अभि भि वो उस लम्हा सें उबरने कि कोशिश कररही थि।
मे थोडा पीछेहटा औऱ उसकी आँखों मे देखा; हम् दोनों केँ चेहरे पऱ मुस्कान थि। फिन मैंने उसके जिस्म पऱ नीचे कि ओर चुंबन कि एक् लकीर बनाना शुरुआत किया—गर्दन, कॉलरबोन, औऱ अंत मे उसके ऊपर-नीचे होतेहुए स्तनों तक पहुंचा। मे एक् भूखे बच्चे कि तरह उसके बाएँ बूब्ज़ सें लिपट गय़ा, उसे गहराई तक अपने मुँह मे घसीटकर चूसने लगा। मेरीजीभ उसके कड़े निप्पल केँ चारों ओर घूमने लगी—उसे छेड़ते हुए, उसे गुदगुदाते हुए—औऱ फिन मैंने औऱ ज़ोर सें चूसना शुरुआत कर दिया, जिससे गीली औऱ ज़ोरदार चूसने कि आवाज़ें आने लगीं।
Slurp… mmm… slurp…
“Ohhh… Abhir…” सलोनी नें अहहभरी, अपनीपीठ कों ऊपर कि ओर मोड़ा औऱ अपने मम्मों कों मेरे मुँह मे औऱ गहराई तक धकेल दिया।
मेरा दायाँ हाथ उसके दाएँ मम्मों केँ संगखेल रहा थां—उसे दबाते हुए, मसलते हुए, नोचते हुए औऱ उसके निप्पल कों शरारत भरे अंदाज़ मे खींचते हुए। मे उसके कोमल, भारी स्तनों मे पूरीतरह खो गय़ा थां; मे उसके बाएँ मम्मों कों पूरी तन्मयता सें चूस औऱ चाटरहा थां, जबकि मेरा दायाँ हाथ उसके दाएँ मम्मों केँ संग शरारत कररहा थां। मे कभी हल्के चुंबन लेता, तोँ कभी भूखे अंदाज़ मे काटता—जिससे उसकी त्वचा पर्र हल्के लाल निशान उभरआए थें।
सलोनी साँस रोककर हँसी—उसकी हँसी औऱ उसकी आहें एक्-दूसरे केँ संग बेहद हुस्न सें घुल-मिल गई थीं।
“Ahh… haha… oh my baby… तुम् कितने लालच सें चूसरहे हौ… Mmm! बिल्कुल उस छोटे बच्चे कि तरह, जिसका मम्मी केँ दूध सें पेट हि नहि भरता। ”
उसकेइन शब्दों नें मेरी कामुकता कों औऱ भि ज्यादा बढ़ा दिया। मैंने औऱ ज़ोर सें चूसना शुरुआत किया—अश्लील औऱ गीली आवाज़ें निकालते हुए—जैसे मे उसके बाएँ मम्मों कों पूरीतरह सें निगल हि जाऊँगा। मैंने उसके दाएँ बूब्ज़ कों मज़बूती सें दबाया, उसके निप्पल कों अपनी उंगलियों केँ बीच घुमाया, औऱ फिनउसे हल्के सें खींचा।
“Haha… ahhn! ज़रा संभलकर, तुम् शरारती लड़के!” वो फिन सें हँसी—मगर उसके कूल्हे मेरेबदन सें रगड़खा रहे थें; ये साफ़ ज़ाहिर थां कि उसेये सभी बहोत मनपसंद आँ रहा थां।
मैंने अपनी स्थान बदली—अब उसके दाएँ बूब्ज़ कों अपने मुँह मे लिया औऱ उसी जुनून केँ संगउसे चूसने लगा—जबकि मेरा बायाँ हाथ उसके गीले, लार सें सनेहुए बाएँ मम्मों केँ संगखेल रहा थां। मैंने उसके निप्पल कों हल्के सें काटा, औऱ फिन अपनीजीभ सें उसे सहलाया। सलोनी कि हँसी औऱ उसकी आहें—दोनों एक् संग मिलकर एक् बेहद कामुक औऱ मादक माहौल बनारही थीं। “ओह्ह्ह फ़क…हाँ, बेबी… औऱ ज़ोर सें चूमो… म्म्म्फ़! हाहाहा… तुम् आजरात इन्हें खा हि जाओगी!”
मैंने काफ़ी देर तक उसके स्तनों कि पूजा कि — उन्हें प्रेम सें चाटा, चूसा, काटा औऱ दबाया। रूम गीले चूसने कि आवाज़ों, उसकी साँसों मे घुली हँसी औऱ लगातार निकलती आहों सें भर गय़ा थां। उसकेहाथ मेरे बालों मे हि रहे, कभी वो मुझे अपनीओर खींचती, तौ कभी हँसते हुए शरारत मे मुझे पीछे धकेल देती।
करीबदस मिनट तक स्तनों केँ संग ज़ोरदार खेल खेलने केँ बाद, मे आख़िरकार उससेअलग हुआ; मेरी साँसें तेज़ी सें चलरही थीं औऱ मेरे होंठलार सें भीगे औऱ सूजेहुए थें। मे उसकेबगल मे हि ढह गय़ा, मेरा सीना तेज़ी सें ऊपर-नीचे होँ रहा थां।
सलोनी दिदी नें मेरीओर देखा औऱ प्यारी सि हँसी हँसी; उसकी आँखों मे शरारत औऱ प्रेम दोनों चमकरहे थें।
“आहा… मेरा बेचारा बेबी अभि सें थक गय़ा?” उसने मुझे छेड़ा।
इससे पहले कि मे कोई जवाबदे पाता, उसने मुझेपीठ केँ बल लिटा दिया औऱ मेरेऊपर चढ़ गई। जब वो मेरीओर झुकी, तौ उसके घुंघराले बाल मेरे सीने पर्र बिखरगए। उसने आहिस्ता मेरे निप्पल कों चाटना शुरुआत किया; उसकीगरम औऱ गीली ज़बान उसके चारों ओर गोल-गोल घूमरही थि। फिन उसनेउसे अपने मुँह मे लेँ लिया औऱ हल्के सें चूसा।
“मम्म्…” मे अहह भरतेहुए बोला।
उसने शरारती नज़रों सें मेरीओर देखा औऱ मज़ाक मे मेरे निप्पल कों काट लिया।
“अहह! फ़क!” मे हँस पड़ा।
सलोनी ज़ोर सें हँसी औऱ उसनेफिन वही किया — चाटना, चूसना औऱ हल्के-हल्के, शरारती अंदाज़ मे काटना। फिन वो दूसरे निप्पल कि ओर बढ़ी औऱ उसे भि वैसा हि प्रेम भरा, कामुक एहसास दिया। उसके दाँत मेरे संवेदनशील निप्पल कों छूरहे थें, जबकि उसका दूसरा हाथ दूसरे निप्पल केँ संगखेल रहा थां।
आहों औऱ कामुक एहसासों केँ बीच हम् दोनों हँसने लगे। कमरे कां माहौल बेहद चंचल, कामुक औऱ अंतरंग हौ गय़ा थां।
“हाहा… सलोनी! तुम् कितनी गंदी लड़की हौ, ” मे धीमी, भारी आवाज़ मे हँसते हुए बोला।
उसने थोडा औऱ ज़ोर सें काटा, औऱ फिन अपनी ज़बान सें उस स्थान कों सहला दिया। “सिर्फ़ तुम्हारे लिए, मेरे बेबी… मम्म्… तुम्हें अच्छा लगता हैं नां, जब मे तुम्हारे निप्पल ऐसे काटती हूं?”
“हाँ…फ़क, बहोत अच्छा लगता हैं, ” मे अहह भरतेहुए बोला, औऱ संग हि हँस भि रहा थां।
वो मेरे सीने कों चाटती औऱ चूसती रही; बीच-बीच मे शरारत मे काट भि लेती, जिससे हम् दोनों बार-बार ज़ोर सें हँस पड़ते। जैसे-जैसे वो हिलती-डुलती, उसके भारी मम्मों मेरेपेट सें दबते औऱ उसके कड़े निप्पल मेरी त्वचा कों छूते। उसकी हल्की-हल्की हंसी, गीली चाटने कि आवाज़ें, औऱ मेरीदबी हुईँ आहों कां मेल एक् ऐसा ज़बरदस्त मिश्रण बनारहा थां जिसमें शरारत औऱ मजा, दोनों थें।
बहुतदेर तक हम् ऐसे हि रहे — हंसते हुए, एक्-दूसरे कों छूतेहुए, चाटते हुए औऱ प्रेम सें काटते हुए। पहले वालाजोश अब एक् सुंदर, हल्का-फुल्का मगर गहरा कामुक एहसास बन गय़ा थां।
आखिरकार सलोनी नें अपनासिर मेरे सीने पऱ रख दिया, औऱ अभि भि धीरे धीरेहंस रही थि।
“जब तुम्हारी सांसफूल जाती हैं, तोँ तुम् कितनी प्यारी लगती होँ, ” उसने फुसफुसाते हुएकहा, औऱ अपनी उंगली सें मेरी त्वचा पर्र गोल-गोल घेरे बनाने लगी।
मैंने उसे औऱ लगभग खींच लिया, उसकेसिर केँ ऊपर चूमा; हम् दोनों मुस्कुरा रहे थें औऱ खुशीभरी थकान मे एक् संग सांस लेँ रहे थें।
मे सलोनी दिदी केँ नंगे जिस्म कों नीचे ताड़रहा थां जौ पलंग पऱ लेटाहुआ थां; उसके भारी बूब्ज़ ऊपर-नीचे हौ रहे थें, औऱ उसकी मोटी जांघें थोड़ी सि खुली हुईँ थीं। मेरा लन्ड पत्थर जैसा सख्त थां, औऱ अपनी हि चचेरी बेहन केँ लिए एक् कच्ची, हरामहवस सें धड़करहा थां। मे अब औऱ इंतजार नहि कर सकता थां।
“पलटजा, कुतिया, ” मैंने गुर्राते हुएकहा।
मैंने उसकी चौड़ी कमर कों पकड़ा औऱ ज़ोर सें उसेपेट केँ बल लिटा दिया। जब मैंने उसकी गांड कों ऊपर कि ओर खींचा तोँ सलोनी केँ मुँह सें हैरानी भरी एक् अहह निकली। मैंने उसे एकदमसही 'डॉगी स्टाइल' पोज़ मे सेट किया — उसके घुटनों कों ज़बरदस्ती फैलाया, उसके सीने औऱ चेहरे कों तकिये मे नीचे कि ओर दबाया, औऱ उसकी बड़ी, रसीली गांड कों हवा मे ऊँचा उठाकर रखा। उसकीपीठ गहरेचाप कि तरह मुड़ी हुइ थि, उसकी गांड केँ मोटेगाल अपने आप् फैलगए थें, जिससे उसकी पूरीतरह सें गीली बुर औऱ छोटा, कसा हुआ गुदा (asshole) साफ दिखाई देरहा थां।
“धत् तेरे कि। ज़राइसे देखो, ” मैंने बुदबुदाते हुए, अपने दोनों हाथों सें उसके रसीले नितंबों कों चौड़ा करके फैलाया।
सलोनी ज़ोर सें काँपउठी, उसकी आवाज़ पहले सें हि थरथरा रही थि। “अभीर। तुम् क्याँ कररहे होँ, बेटा?”
मैंने शब्दों मे कोई जवाब नहि दिया। इसके बजाय, मैंने अपनी हथेली ज़ोर सें उसकी गांड केँ दाहिने गाल पर्र मारी।
धप्प!
“आआआईईईई!” वो चीख पड़ी, उसका पूरा जिस्म झटके केँ संगआगे कि ओर उछला।
“चुप रह, कुतिया। आजरात ये गांड मेरी हैं, ” मैंने कहा, औऱ उसकी गांड केँ बाएँगाल पर्र औऱ भि ज़ोर सें थप्पड़ मारा।
धप्प! धप्प!
“ओह्ह्ह धत् तेरे कि!!” सलोनी चीख पड़ी, उसकी आवाज़ एक् ऊँची, सुरीली अहह मे बदल गई। हर ज़ोरदार थप्पड़ केँ संग उसकी गांड मे एक् खूबसूरत सि लहरउठी, औऱ वो गहरे गुलाबी रंग कि होँ गई।
मे आगे कि ओर झुका औऱ अपना चेहरा उसकी मोटी, गरम गांड केँ बीच मे गड़ा दिया। उसकी गांड कि कस्तूरी जैसी मीठीगंध मेरीनाक मे भर गई, जब मैंने अपने होंठ सीधे उसके सिकुड़े हुए गुदा पर्र दबाए औऱ उसे एक् लंबा, गीला औऱ भूखा चुंबन दिया।
“मम्मफ्ह्ह्ह.” मैंने उसकी गांड मे हि कराहते हुए आवाज़ निकाली।
“हाआआंन्ह्ह्ह!!! अभीर्र्र!” सलोनी ज़ोर सें कराहउठी, उसकी जांघें पहले सें हि काँपरही थीं।
मैंने उसे ज़ोर-हंगामा सें चाटना शुरुआत कर दिया। मेरीजीभ चपटी होँ गई औऱ उसकी सूजी हुईँ 'क्लिट' (clit) सें लेकर उसकी गीली बुर केँ होंठों तक, फिन उसके 'पेरिनियम' (perineum) केँ ऊपर सें गुज़रते हुए, औऱ सीधे उसकेकसे हुए गुदा तक — लंबे औऱ गीले स्ट्रोक्स मे फिसलती चली गई। मैंने इसे बार-बार दोहराया, औऱ अपनीलार सें उसकी गांड कि पूरी दरार कों गीलाकर दिया।
“हे ईश्वर। तुम् दिदी कि गांडचाट रहे होँ। हाआआह्ह्ह। हाआआह्ह्ह!!” वो दबी आवाज़ मे बोलि।
चाटते हुए हि मैंने उसकी गांड पऱ फिन सें ज़ोरदार थप्पड़ मारा।
धप्प! धप्प! धप्प! “आह्ह्ह्ह!!! अभिर… दर्द हौ रहा हैं… पऱ रुकना मत… ओह्ह्ह मुझे अपनी कुतिया बनालो!!” वो चीखी।
उसे स्वयं कों ‘कुतिया’ कहते सुनकर मेरे लन्ड मे एक् सिहरन सि दौड़ गई। मैंने उसके कूल्हों कों औऱ भि अधिक फैला दिया औऱ अपनी ज़बान कों सीधा उसके कसकरबंद छेद मे घुसा दिया।
“फकककक!!! तुम्हारी ज़बान मेरे गांड केँ अंदर हैं… आइईईई!!!” सलोनी नें एक् दिल दहला देने वालीचीख मारी, औऱ उसका पूराबदन ज़ोर सें कांपने लगा।
मैंने अपनी ज़बान औऱ अंदर तक धकेल दि, औऱ ज़ोरदार, लयबद्ध झटकों केँ संग उसकेछेद कों चोदने लगा। मैंने अपने होंठ उसकेछेद केँ चारों ओर कसकरजमा दिए औऱ ज़ोर सें चूसा; अंदर ज़बान घुमाते हुए गीली औऱ गंदी आवाज़ें निकलने लगीं।
“मम्फ्ह्ह्ह… मम्फ्ह्ह्ह…” मैंने उसकेछेद मे हि कराहते हुए आवाज़ निकाली, जिसकी थरथराहट सें वो बेकाबू होकर कांपने लगी।
“अभिर बेटा… ओह्ह्ह मेरे ईश्वर… तुम् मेरी गांड कों कितनी गहराई तक चाटरहे हौ… हाँ…हाँ… अपनी कज़िन कि गंदी गांड चाटो!!” वो बेशर्मी सें कराहने लगी।
मे एक् लम्हा केँ लिए पीछेहटा, औऱ फिनथूक कां एक् गाढ़ा लुआब सीधे उसके कांपते हुएछेद पऱ थूक दिया, औऱ उसे अंदर टपकते हुए देखा। फिन मे औऱ भि ज्यादा आक्रामकता केँ संग वापसउस पऱ टूट पड़ा। मैंने एक् भूखे कुत्ते कि तरह उसके कूल्हों कों चाटा — लंबे, चौड़े औऱ गीले-गीले स्ट्रोक्स केँ संग; उसके रसीले मांस कों काटा, औऱ फिन वापसआकर अपने होंठों औऱ ज़बान सें उसकी गांड कों चाटने लगा।
धप्प! धप्प! धप्प!
हर ज़ोरदार थप्पड़ केँ संग उसकीचीख औऱ भि तेज़ होती गई।
“ओह्ह्ह शिट्ट्ट!!! औऱ ज़ोर सें, अभिर… अपनी कुतिया कों औऱ ज़ोर सें थप्पड़ मारो, जब तुम् उसकी गांडचाट रहे होँ… आह्ह्ह्ह!!!”
अब उसके पांव पागलों कि तरह कांपरहे थें। मे देख सकता थां कि उसकी बुर कां रस धागों कि तरह उसकी जांघों पऱ नीचेबह रहा थां। मैंने अपना चेहरा औऱ अंदर तक धकेल दिया; मेरीनाक उसके कूल्हों केँ बीच गड़ी हुई थि, औऱ मेरी ज़बान जितनी तेज़ी सें होँ सकता थां, उसकी गांड कों चोदरही थि।
सलोनी कि कराहें अब टूटती हुई, बेकाबू चीखों मे बदल चुकीथीं। “फूऊऊक… फूऊऊक… फूऊऊक… तुम्हारी ज़बान दिदी कि गांड मे कितनी अंदर तक हैं… मुझेआने वाला हैं… मुझे आँ रहा हैं… आआआआह्ह्ह्ह्ह!!! ओह्ह्ह मायगॉड, मुझे अपनी गांड सें आँ रहा हैं!!!”
जबउसे ज़ोरदार ऑर्गैज़्म आया, तौ उसका पूराबदन ज़ोर सें कांपउठा। मे रुका नहि। मे उसके ऑर्गैज़्म केँ दौरान भि उसकीकसी हुईँ गांड कों चूसता, चाटता औऱ अपनी ज़बान सें चोदता रहा, जिससे उसकी चीखें औऱ भि तेज़ औऱ कामुक होतीगईं।
“हाआआंह्ह्ह… हाआआंह्ह्ह… हाआआंह्ह्ह… अभिरrrr… तुम् तौ मुझे पूरीतरह सें बर्बाद कररहे हौ… मे तुम्हारी गंदी छोटी कज़िन कुतिया हूं… चाटते रहो… प्लीज़ रुकना मत… ओह्ह्ह फ़क, मुझे अभि भि आँ रहा हैं!!”
मे उसे पूरीतरह सें चाटते हुए, उसकी सुर्ख लाल गांड पऱ बार-बार थप्पड़ मारता रहा।
थप्पड़! थप्पड़! थप्पड़! थप्पड़!
“आआआआइईईई!!! हाँ… अपनी कुतिया कों सज़ादो… मेरी गांड कों खाजाओ… औऱ अंदर तक… औऱ अंदर तक… ओह्ह्ह माय फ़किंग गॉड!!!”
मैंने उसकी गांड केँ दोनों हिस्सों कों जितना होँ सके उतना चौड़ा करके फैलाया औऱ पूरी आक्रामकता केँ संग उसकेछेद पर्र टूट पड़ा — उसके किनारे कों चूसते हुए, उसे हल्के सें काटते हुए, अपनी ज़बान कों अंदर घुमाते हुए, औऱ फिन उसके मुलायम कूल्हों केँ हरइंच कों चाटते हुए। मेरी लगातार ज़बान सें कि गई चुदाई कि वजह सें, उसकी गांड कां छेदअब चमकरहा थां औऱ थोडा सां खुलाहुआ थां।
सलोनी कांपरही थि, कराहरही थि औऱ पूरीतरह सें बेहाल थि। उसकी आवाज़ बैठ गई थि, मगर चीखों केँ बीच भि वो लगातार गंदी-गंदी बातें बोलती जारही थि।
“अभिर… मेरी गांड कों इतने अच्छे सें चाटरहा हैं… मे तौ तेरी कुतिया बन गई हूं… हाआआह्ह्ह… हाआआह्ह्ह… मुझे औऱ थप्पड़ मारो…जब तुम् मेरी गांडचाट रहे हौ, तोँ उसेलाल करदो… आआआआह्ह्ह्ह!!!”
मैंने उसकी गांड केँ पास गुर्राते हुए, उसे अब तक केँ सबसे ज़ोरदार थप्पड़ मारे।
थप्पड़! थप्पड़! थप्पड़!
उसकी चीखें एक् नए हि स्तर पर्र पहुँच गईं — एकदम कच्ची, जानवरों जैसी औऱ पूरीतरह सें टूटी हुई।
“फक!!! मुझेफिन सें ऑर्गैज़्म हौ रहा हैं। तुम्हारी ज़बान मेरी गांड मे मुझे इतनी ज़ोर सें ऑर्गैज़्म देरही हैं। आआआह। हाआआंह। हे ईश्वर!!!”
उसका जिस्म बेकाबू होकर काँपता रहा, जांघें थरथरा रहीथीं, औऱ उसकी गांड ज़ोर-ज़ोर सें मेरे चेहरे पऱ पीछे कि ओर धक्के माररही थि। मे किसी जुनून मे डूबे व्यक्ति कि तरह उसकी गांड चाटता रहा — लंबी-लंबी चाटें, छोटी-छोटी हरकतें, ज़बान केँ गहरे धक्के, औऱ उसके संवेदनशील छेद पर्र ज़ोरदार चूसने वाले चुंबन।
इसीतरह मिनटबीत गए। रूम मेरी ज़बान औऱ उसकी गांड केँ गीले-गीले हंगामा सें, मेरी हथेली केँ उसकी मोटी गांड पऱ पड़ने कि तेज़ आवाज़ सें, औऱ सलोनी दिदी कि कभी न् समाप्त होने वाली आहों औऱ चीखों सें भर गय़ा थां।
“अभीर.अब मे औऱ बर्दाश्त नहि कर सकती.मगर रुकना मत। अपनी कुतिया कि गांड औऱ चाटो। मुझे अपनी'एनल स्लट' (गांड मरवाने वाली रखैल)बना लो.ओहहाँ। हाँ.हाँ। हाआआंह!!!”
आखिरकार मैंने अपना चेहरा थोडा पीछे हटाया; मेरी ठुड्डी औऱ होंठलार सें पूरीतरह भीगेहुए थें। उसकी गांड कां छेदलाल, गीला औऱ थोडा खुलाहुआ थां, जौ कामुक अंदाज़ मे फड़करहा थां। सलोनी ज़ोर-ज़ोर सें हाँफरही थि; वो अभि भि एकदमसही 'डॉगी' पोज़िशन मे थि — गांडऊपर उठी हुई औऱ बदन काँपता हुआ।
मैंने उसकी गांड पऱ अंतिम बार ज़ोरदार थप्पड़ मारा औऱ फुसफुसाते हुएकहा,
“ये तौ बस शुरुआत हैं, मेरी कुतिया। ”
बेडरूम कि हवा भारी होँ गई थि — हमारे पसीने कि कच्ची महक औऱ सलोनी कि टपकती हुई गीली बुर कि गाढ़ी, चिपचिपी गंध सें भरी हुई। हम् दोनों विशाल बैड पऱ पूरीतरह नंगे लेटे थें; हमारे बदन अभि भि पहले राउंड केँ असर सें सिहररहे थें। मेरा लन्ड फिन सें पत्थर जैसा कड़ा हौ गय़ा थां — गुस्से मे धड़कता हुआ, नसें उभरी हुईँ, औऱ उसका मोटा-बैंगनी सिर किसीनल कि तरह 'प्री-कम' (कामोत्तेजक द्रव) टपकारहा थां। सलोनी मेरेबगल मे लेटी थि; उसकी 'कैरामल' रंगत वाली त्वचा चमकरही थि, उसके भारी बूब्ज़ औऱ उनके गहरे निप्पल गोलियों कि तरह कड़े हौ गए थें, औऱ उसकीशेव कि हुई बुर सूजी हुईँ औऱ चमकदार लगरही थि, जिससे काम-रस धीरे धीरे उसकी जांघों केँ अंदरूनी हिस्से पऱ बहरहा थां।
मैंने उसकीकमर पकड़ी औऱ उसे अपनीओर खींच लिया, किसी जंगली जानवर कि तरह गुर्राते हुए। “मेरेऊपर आँ जा, ओ मेरी गंदी, छोटी-सि 'कज़िन स्लट' (चचेरी बेहन-रखैल)। मे चाहता हूं कि तेरी गीली बुर मेरे चेहरे पर्र होँ, जबकि तुँ मेरे मोटे लन्ड कों अपनेगले मे उतारकर चूसरही हौ। 'सिक्स्टी-नाइन' (69) पोज़िशन। अभि। ” सलोनी कामुकता सें कराहउठी, उसकी आँखें हवस सें चमकरही थीं। “हाँ, भैया… मे आपकी ज़बान पऱ बैठना चाहती हूं औऱ संग हि आपके गंदे परिवार वाले लन्ड कों चूसना चाहती हूं। ”
उसने अपनापेर मेरेऊपर सें घुमाया। मैंने देखा कि जैसे हि वो नीचे झुकी, उसके कूल्हों केँ खूबसूरत उभारफैल गए। उसकी गुलाबी, रस टपकाती बुर ठीक मेरे मुँह केँ ऊपर थि, औऱ उसका गुदा उसकेठीक ऊपर झाँकरहा थां। उसकीगंध नशीली थि — कस्तूरी जैसी, मीठी औऱ गंदी, सभी एक् संग। मैंने उसकी मोटी जाँघों कों कसकर पकड़ा औऱ उसे ज़ोर सें नीचे खींच लिया।
जिस समय उसकी गीली बुर मेरे चेहरे सें टकराई, मे जंगली बन गय़ा।
“फूउउक!” मे उसकी बुर मे दहाड़ा; मेरी आवाज़ दब गई क्योंकि मैंने अपनी ज़बान उसकीकसी हुईँ, मखमली गुफा मे बहोत अंदर तक डाल दि थि। उसका स्वाद एकदमपाप जैसा थां — नमकीन-मीठा अमृत मेरे मुँह मे भर गय़ा। मैंने एक् भूखे जानवर कि तरहउसे चाटा, चूसा औऱ अपनी ज़बान सें उसकी बुर कों ऐसे भेदा कि ज़ोर-ज़ोर सें चूसने औऱ गीली, अश्लील आवाज़ें आने लगीं।
ठीक उसी वक़्त, सलोनी नें दोनों हाथों सें मेरा मोटा लन्ड पकड़ लिया औऱ उसकेतने कों ज़ोर-ज़ोर सें सहलाने लगी। “ओह्ह्ह भैया… आपका लन्ड कितना बड़ा हैं, ” वो दबी आवाज़ मे बोलि, फिन उसने अपना मुँह चौड़ा खोला औऱ मेरे लन्ड कों अपने मुँह मे लें लिया।
उसकेगले कि गीली गरमी नें मुझे पूरीतरह सें घेर लिया। “मम्मफ!” वो ज़ोर सें घुर्राई जब मेरा लन्ड उसकेगले केँ पिछले हिस्से सें टकराया। वो पीछे नहि हटी। इसके बजाय, उसने औऱ अंदर तक धकेला, जिससे उसे मेरे लन्ड सें घुटन होनेलगी; उसके मुँह केँ कोनों सें लारबह निकली औऱ मेरे अंडकोषों पर्र टपकने लगी।
हम् एकदमसही '69' कि मुद्रा मे फँसेहुए थें — उसकी बुर मेरे चेहरे पऱ रगड़खा रही थि, मेरी ज़बान उसकी बुर मे घुसकर उसकी सूजी हुइ भगशेफ (clit) कों छेड़रही थि, जबकि वो पागलों कि तरह मेरे लन्ड पऱ अपनासिर ऊपर-नीचे कररही थि, औऱ उसे एक् वैक्यूम कि तरहचूस रही थि।
मैंने उसकी बुर मे गुर्राया, जिससे पैदा हुईँ थरथराहट सें वो ज़ोर सें काँपउठी। “बसयही, ओ गंदी कज़िन-रंडी… अपने भैया कां लन्ड खा। इसे ऐसे निगल कि तुम्हे घुटन हौ जाए, ठीक वैसी हि गंदी परिवार वाली रंडी कि तरह जैसी तूँ हैं। ”
सलोनी नें एक् जंगली, लन्ड सें दबी हुइ चीख केँ संग जवाब दिया: “ह्ह्हन्नन्गघ्ह्ह—गलक-गलक-गलक!” उसकेगले कि मांसपेशियाँ मेरे लन्ड केँ चारों ओरकसगईं जब वो बेरहमी सें मेरे लन्ड कों अपनेगले मे उताररही थि; उसकीनाक मेरे अंडकोषों सें सटी हुईँ थि, उसे घुटन औऱ उल्टी जैसा महसूस होँ रहा थां, मगर उसने रुकने सें साफ़मना कर दिया। मैंने पागलों कि तरह उसकी क्लिटोरिस पर्र हमला किया, उसे अपने होठों केँ बीच दबाकर ज़ोर सें चूसा औऱ जीभ सें तेज़ी सें सहलाया। उसी वक़्त, मैंने अपनीदो मोटी उंगलियाँ उसकी गीली योनि मे डालीं, उन्हें मोड़कर उसके जी-स्पॉट कों छुआ, जबकि मेरीजीभ उसकी क्लिटोरिस कों सहलारही थि।
सलोनी कां बदन बेतहाशा हिलउठा। उसने एक् समय केँ लिए मेरा लिंग मुझसे अलग किया, गाढ़ी लार कि धारें उसके होठों कों मेरे चमकदार लिंग सें जोड़रही थीं, औऱ वो एक् चुड़ैल कि तरह चीखी:
“आह्ह। उसकागला मेरे लिंग कों सहलारहा थां, हरबार ऊपर खींचने पऱ उसकीजीभ लिंग केँ सिरे केँ चारों ओरघूम रही थि, औऱ वो सीधे मेरेछेद सें वीर्य चूसरही थि। मेरे अंडकोष कसगए। मे दबाव बढ़ता हुआ महसूस कर सकता थां।
मगर मे चाहता थां कि वो पहले अपनाआपा खोदे।
मैंने अपनी तीसरी उंगली भि डाल दि, उसकी बुर कों चौड़ा करतेहुए, उसे बेरहमी सें उंगलियों सें चोदरहा थां, औऱ संग हि उसकी क्लिट कों ऐसेचूस रहा थां जैसेउसे घसीटकर अलग हि कर देना चाहता हूं। मेरा दूसरा हाथऊपर उठा औऱ मैंने उसके कूल्हों पऱ ज़ोरदार थप्पड़ मारा — धड़ाम! धड़ाम! धड़ाम!
“मेरेलिए झड़जा, तुँ incest करने वाली छोटी कुतिया!” मैंने उसकी बुर मे गुर्राते हुएकहा।
सलोनी कां पूरा जिस्म बेकाबू होकर कांपने लगा। उसकी जांघें मेरेसिर केँ चारों ओर शिकंजे कि तरहकस गईं। उसनेफिन सें मेरे लन्ड कों अपने मुँह सें निकाला, उसके मुँह सें लारटपक रही थि, औऱ उसने एक् लंबी, टूटी हुईँ, जानवरों जैसीचीख मारी:
“ऊऊऊह्ह्ह्ह माआआआआ फ़ककककक!!! मे झड़रही हूं!!! आआआआआआआह्ह्ह्ह्ह्ह्ह—ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह!!!”
उसकी बुर फट पड़ी। लड़की कि गरम-गरम काम-रस कि धार मेरे पूरे चेहरे पर्र बह निकली, मेरा मुँह, नाक औऱ आँखें सभी उसमें डूबगए। वो ज़ोरदार तरीके सें स्क्वर्ट कररही थि, ऐसे कांपरही थि जैसेउसे दौरेपड़ रहेहों, औऱ उसकी चीखें ऊँची, टूटी हुईँ कराहों मे बदलगईं:
“फ़क—फ़क—फ़क—भैया—भैया—आआआआआ!!! मे मररही हूं। तुम्हारी ज़बान मुझेमार रही हैं!!!”
मैंने हर एक् बूंदपी ली, एक् जानवर कि तरह चाटते औऱ चूसते हुए, एक् भि बूंद ज़ाया नहि होने दि। उसका ऑर्गेज़्म कभी नं समाप्त होने वालालग रहा थां। वो अपनी कांपती हुईँ बुर कों मेरे चेहरे पर्र रगड़ती रही, मेरी ज़बान पऱ सवार होकर एक् केँ बाद एक् काम-सुख कि लहरों कां मजा लेतीरही।
मगर मेरा अभि काम पूरा नहि हुआ थां।
जब वो अभि भि झड़रही थि, मैंने हम् दोनों कि पोज़िशन थोड़ी बदली ताकि मे '69' पोज़िशन मे ऊपर आँ जाऊँ, औऱ मेरा लन्ड उसकेगले मे औऱ भि गहराई तक उतर गय़ा। मैंने एक् जंगली जानवर कि तरह उसके चेहरे कों चोदना शुरुआत कर दिया — लंबे, गहरे झटके, औऱ मेरे भारी अंडकोष उसके माथे सें टकरारहे थें।
“लेँ इसे, सलोनी! अपने कज़िन केँ लन्ड कों अपनेइस रंडी जैसेगले मे उतार लें!” मैंने दहाड़ते हुएकहा।
वो मेरे लन्ड केँ चारों ओरबस गीली, घुटी हुइ, गुड़गुड़ाती हुई चीखों सें हि जवाबदे पारही थि:
“ग्लूऊऊक—ह्ह्ह्हक—मम्ममफ—गाआआआह्ह्ह्ह!!!”
उसके चेहरे सें आँसूबह रहे थें, मस्कारा फैल गय़ा थां, मगर उसकी आँखें परमानंद मे पीछे कि ओरपलट गई थीं। उसके कूल्हे मेरे मुँह सें लगातार टकरारहे थें, औऱ वो अपनी टपकती हुई बुर कों मेरे मुँह मे औऱ ज्यादा डालरही थि। मुझे महसूस होँ रहा थां कि मेरा अपना ऑर्गेज्म एक् मालगाड़ी कि तरह ज़ोर पकड़रहा हैं। उसकागला मेरे लन्ड सें औऱ भि अधिकभर गय़ा।
“मे तुम्हारा पेट अपने वीर्य सें भर दूँगा, ओ कमीनी कज़िन, वीर्य कि डंपिंग साइट!” मैंने गुर्राते हुएकहा।
सलोनी मेरे लन्ड केँ चारों ओर ज़ोर सें कराहउठी, औऱ उस कंपन नें मुझेचरम सीमा तक पहुंचा दिया।
एक् जंगली दहाड़ केँ संग, मैंने अपना लन्ड उसकी गेंदों तक अंदर घुसा दिया औऱ फट पड़ा।
“फक!!! सभीकुछ लें लें!!!”
वीर्य कि गाढ़ी, गरम धाराएँ सीधे उसकेगले मे उतरगईं। मे लगातार धक्के मारता रहा, औऱ ऐसालगा जैसे मैंने लीटरभर गाढ़ा वीर्य उसके अंदर उड़ेल दिया हौ। उसे हिचकी आई औऱ उल्टी जैसा महसूस हुआ, मगर उसने लालच सें सभी निगल लिया, औऱ उसकेगले सें गीली, बेताब निगलने कि आवाज़ें आने लगीं।
जब मैंने आखिरकार अपना लन्ड बाहर् निकाला, तोँ वो साँस लेने केँ लिए हाँफने लगी; उसके मुँह सें वीर्य औऱ लार केँ गाढ़े तारटपक रहे थें, औऱ उसका चेहरा पूरीतरह सें गंदा होँ चुका थां।
मगर वो एक् बेशर्म, कामुक महिला कि तरह मुस्कुरा रही थि।
हम् '69' कि पोज़िशन मे हि रहे, औऱ धीरे धीरे एक्-दूसरे कों चाटकर साफ़ करनेलगे — यह बहोत हि कोमल, आलसी औऱ कामुक 'आफ्टरकेयर' (बाद कि देखभाल) वाली चाटें थीं। मेरे लन्ड सें निकले झटकों केँ कारण उसकी बुर मेरीजीभ केँ ऊपर फड़करही थि। मेरा लन्ड भि उसके मुँह मे लगातार फड़कता रहा।
वो धीरे-धीरे सें फुसफुसाई, “भैया। येअब तक कि सबसे गंदी, औऱ सबसे बेहतरीन चीज़ थि। मे हररात आपकेसंग '69' करना चाहती हूं। ”
मैंने उसकी सूजी हुईँ क्लिट (भगशेफ) कों बड़े प्रेम सें, मगर कामुक अंदाज़ मे चूमा। “शाबाश, अच्छी लड़की। अब तुम्हारे कज़िन कि जीभ औऱ लन्ड कां इस बुर पऱ पूराहक़ हैं। ”
हम् दोनों एक्-दूसरे केँ बगल मे ढीलेपड़ गए; हमारी साँसें तेज़चल रहीथीं, औऱ हमारे जिस्म पसीने, वीर्य औऱ बुर केँ रस सें लथपथ थें — औऱ हम् पहले सें हि अपनेइस 'बेशर्म पारिवारिक मजे' केँ अगलेदौर कि योजना बनाने लगे थें।
जैसे हि परमानंद कि अंतिम लहरें हम् पर्र छागईं, मैंने सलोनी दिदी कों कसकरगले लगा लिया; हमारे जिस्म एक्-दूसरे केँ संग पूरीतरह सें तालमेल बिठाते हुए काँपरहे थें। जैसे हि मे आहिस्ता उसकी गर्माहट सें अलगहुआ, मेरादिल उसकी छाती सें टकराकर ज़ोरों सें धड़करहा थां, औऱ हम् दोनों केँ मुँह सें हल्की, काँपती हुईँ साँसें निकलरही थीं। एक् गहरी, आनंदमयी खामोशी मखमल कि तरह हमें अपने आगोश मे लेँ चुकी थि। हवा मे हमारे प्रेम कि मीठी औऱ अंतरंग गंध घुली हुई थि — एक् ऐसा प्रेम जौ बिल्कुल सच्चा, जोशीला औऱ पूरीतरह सें पवित्र थां।
मैंने उसके सुर्ख चेहरे कि ओर देखा, जौ सुनहरे लैंप कि रोशनी मे दमकरहा थां। उसकी आँखें आधीबंद थीं, औऱ संतुष्टि सें भरी हुई थीं; उसके होंठ एक् स्वप्निल मुस्कान केँ संग हल्के सें खुलेहुए थें। उसके रेशमी बालों कि लटें उसके पसीने सें भीगे माथे पर्र चिपकी हुई थीं, जिन्हें मैंने अपनी उंगलियों सें धीरे-धीरे सें हटा दिया। वो बेहद सुंदर थि — मेरी सलोनी दिदी, दमकती हुईँ औऱ नाज़ुक, इस चोरी-छिपे लम्हा मे पूरीतरह मेरी।
बिनाकुछ कहे, वो पूरीतरह मेरीतरफ मुड़ गई, उसके कोमलअंग मेरेबदन सें पूरीतरह सटगए। मैंने अपनाहाथ उसकेसिर केँ नीचे डाला औऱ उसे औऱ भि लगभग खींच लिया, जब तक कि हमारे बीच ज़रा भि स्थान न् रह गई। उसके मम्मों मेरी छाती सें गरमाहट केँ संगदबे थें, उसके पांव मेरे पैरों सें उलझेहुए थें, औऱ उसकी साँसें मेरी गर्दन पऱ धीरे धीरे थिरकरही थीं। मैंने अपनी दूसरी बाँह उसकीकमर केँ चारों ओर लपेट दि, मेरी हथेली उसकीपीठ कि चिकनी गोलाई पऱ टिकी थि, औऱ मे उसकी साँसों केँ आरामसे ऊपर-नीचे होने कों महसूस कररहा थां।
उस आलिंगन मे, वक़्त जैसेथम सां गय़ा थां। बाहरी दुनिया कां कोई वजूद हि नहि रह गय़ा थां। वहाबस उसकी त्वचा कि चैन देने वाली गरमाहट थि, उसकेदिल कि धड़कन कि नाज़ुक लय जौ मेरी धड़कन सें ताल मिलारही थि, औऱ एक् गहरी शांति कां एहसास जौ मेरी आत्मा कि गहराइयों मे उतर गय़ा थां। मैंने उसके माथे पऱ देर तक चुंबन लिया, हमारे जुनून केँ हल्के सें खारेपन कों चखा;फिन उसकीबंद पलकों पऱ, औऱ अंत मे उसके होठों पऱ — एक् धीमा, कोमल चुंबन, जोँ अनकहे प्रेम औऱ कृतज्ञता सें भरा थां।
“मे तुमसे प्रेम करता हूं, दिदी, ” मैंने उसके बालों केँ बीच फुसफुसाया।
वो औऱ भि गहराई सें मेरी छाती मे सिमट गई, उसकी उंगलियाँ मेरेदिल केँ ऊपर धीरे धीरेगोल घेरेबना रहीथीं। उसके होठों सें एक् कोमल, संतुष्ट अहह निकली, औऱ वो आरामसे नींद कि आगोश मे चली गई।
मैंने उसे औऱ कसकरथाम लिया; हमारी साझा गर्माहट केँ घेरे मे, उसकी मौजूदगी उस शांतरात मे एक् चैन देने वालीलौ जैसी थि। उसकी बाहों मे, मैंने स्वयं कों पूरा, प्रिय औऱ हमेशा केँ लिए सुरक्षित महसूस किया। उसकी कोमल साँसों कों अपनी लोरी बनाते हुए, मैंने अपनी आँखें मूँदलीं औऱ अपने जिंदगी कि सबसे हसीन नींद केँ हवाले स्वयं कों कर दिया — पूरीतरह सें उस महिला कि आगोश मे लिपटी हुई, जिसे मे बेहद प्रेम कर।
हम् जौ धीरे-धीरे धीरे-धीरे खोगए। – New Episode
अध्याय 10: वानाहिल पऱ फुसफुसाहट
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मेरेपास लिपटे हुए एक् जाने-पहचाने बदन कि हल्की गर्माहट सें मेरी नींद खुली। मेरी हसीन कज़िन, सलोनी दिदी, मेरी बाहों मे शांति सें सोरही थीं; उनकासिर मेरी छाती पर्र टिका थां। सुभह कि हल्की रोशनी पर्दों सें छनकर आँ रही थि औऱ उनकी बेदाग त्वचा पऱ सुनहरी चमक बिखेर रही थि। उन्होंने सिर्फ़ एक् नाज़ुक लाल लॉन्जरी सेट पहना थां, जिसमें उनके भरे-पूरे गोल ब्रेस्ट मुश्किल सें समारहे थें औऱ जौ उनके कूल्हों केँ आकर्षक कर्व कों कसकर पकड़े हुए थां। रात मे पतलेलेस वाले कपड़े केँ खिसक जाने सें उनके क्लीवेज कां उभार औऱ उनकी जांघों कि रसीले, मखमली त्वचा दिखरही थि, जौ मेरी टांग पर्र टिकी हुई थीं।
ये नज़ारा देखते हि मेरा लिंग जल्दी उत्तेजित होँ गय़ा। सोतेहुए भि वो किसी हसीन गुनाह जैसीलग रहीथीं — उनके लंबे कालेबाल तकिए पऱ फैले थें, होंठ हल्के सें खुले थें, औऱ वो लाललेस उन्हें किसीऐसे तोहफ़े जैसा दिखारहा थां जिसे मे बार-बार खोलकर देख्ना चाहता थां। मैंने उन्हें औऱ लगभग खींचा औऱ उनके जिस्म कि गर्माहट कों अपनेबदन मे महसूस किया। उनके ब्रेस्ट मेरी छाती सें हल्के सें दबरहे थें, औऱ पतले कपड़े केँ आर-पार उनके निप्पल्स कां हल्का सां कड़ापन मुझे महसूस होँ रहा थां।
मे कुछदेर तक बसउसी एहसास मे खोयारहा। मेराहाथ धीरे धीरे उनकीपीठ औऱ रीढ़ कि हड्डी केँ घुमाव पर्र फिसलता हुआ उनके भरे-पूरे कूल्हों पऱ जा टिका। मैंने उन्हें हल्के सें दबाया, औऱ वो नींद मे हल्की सि कराह केँ संग हिलीं, जिसकी आवाज़ सीधे मेरे निचले हिस्से मे हलचल पैदाकर गई।
नां चाहते हुए भि, मे पलंग सें बाहर् निकला। कॉलेज केँ लिए निकलना ज़रूरी थां, भले हि मेरामन पूरी सुभह उनकी जांघों केँ बीच हि रहने कां थां। मैंने कमरे केँ कोने मे अपनी रोज़ाना कि कसरत कि — पुश-अप्स, स्क्वाट्स औऱ कुछकोर एक्सरसाइज़ — औऱ इस दौरान मे बीच-बीच मे उन्हें सोताहुआ देखता रहा। हर बारजब मे हिलता, तौ मेरी नज़रें उनके सांस लेने केँ संग ऊपर-नीचे होते ब्रेस्ट याँ उनके सुडौल कूल्हों केँ बीच गायब होतेलाल थोंग पऱ टिक जातीं।
अच्छी-खासी कसरत केँ बाद, मे जल्द सें फ्रेश हुआ औऱ ब्रेकफास्ट बनाने केँ लिए रसोई मे चला गय़ा। सादा आमलेट, टोस्ट, ताज़ा जूस औऱ कॉफ़ी। खानां बनाते वक्त पूरे अपार्टमेंट मे उसकी खुशबू फैल गई। जबसभी कुछ रेडी होँ गय़ा, तोँ मे नहाने चला गय़ा। गरम पानी मेरेबदन पर्र गिररहा थां औऱ पसीना धोरहा थां, मगर सलोनी नें मेरे अंदर जौ लगातार ख़्वाहिश जगाई थि, उसे ठंडा करने मे वो पानी नाकाम रहा। मे बाथरूम सें बाहर् निकला, कमर पऱ बस एक् सफ़ेद तौलिया लपेटा हुआ थां; मेरी छाती औऱ एब्स पर्र पानी कि बूंदें चमकरही थीं। सलोनी अबआधी जगी हुइ थि औऱ खाट केँ हेडबोर्ड केँ सहारे बैठी थि; उसके बिखरे बालउसे औऱ भि सेक्सी दिखारहे थें। लाल लॉन्जरी उसके जिस्म पऱ दूसरी त्वचा कि तरह चिपकी हुई थि।
मे अलमारी केँ पास गय़ा औऱ कॉलेज केँ लिए कैज़ुअल कपड़े पहनने लगा — एक् फिटेड काली टी-शर्ट जौ मेरी बॉडी कों उभाररही थि औऱ आरामदायक जींस। जैसे हि मैंने तौलिया हटाया औऱ अपनाआधा खड़ा लिंग थोड़ी देर केँ लिए खुला छोड़ा, मुझे महसूस हुआ कि वो मुझेदेख रही हैं।
"क्याँ तुम्हें आज कॉलेज नहि जानां हैं?" मैंने अपने बॉक्सर पहनते हुए पूछा।
सलोनी नें आलस सें अंगड़ाई ली, जिससे उसके ब्रेस्ट लेस केँ अंदर खिंचने लगे। भारी औऱ नींदभरी आवाज़ मे उसने जवाब दिया, "नहि। हमारे पहलेदो पीरियड खाली हें। मे बाद मे प्रिया केँ संग आऊंगी। "
मैंने अपनी जींस केँ बटन लगाते हुए मुस्कुराकर कहा, "ठीक हैं, आरामकरो दिदी। तुम् अभि बहोत ज्यादा हॉट औऱ आकर्षक लगरही हौ। "
कपड़े पहनने केँ बाद मे बैड कि ओर झुका। मैंने उसके माथे पऱ एक् हल्का सां किस किया, मगर सलोनी कों बस इतना हि नहि चाहिए थां। उसने अपनी बाहें मेरेगले मे डालीं औऱ मुझे घसीटकर एक् गहरी, जुनूनी फ्रेंच किस करनेलगी। उसकीजीभ जल्दी मेरे मुँह मे आँ गई, गरम औऱ बेताब। मैंने उसके होंठों पऱ कराहते हुए उसकी मिठास महसूस कि, जबकि हमारी जीभें तेज़ी सें आपस मे मिलरही थीं। मेराहाथ उसके भारी ब्रेस्ट मे सें एक् कों पकड़ने केँ लिए नीचे गय़ा, औऱ मेरे अंगूठे नें लेस केँ ऊपर सें हि उसके सख्त निप्पल कों छुआ। उसने मेरे मुँह मे हि कराहते हुए अपनीपीठ कों मोड़ा औऱ स्वयं कों मुझसे सटा लिया।
किस औऱ भि अधिक बेबाक औऱ जोशीली होती गई। सलोनी नें मेरी ज़बान चूसी, मेरे निचले होंठ कों हल्के सें काटा औऱ फिन वापसकिस करनेलगी। मुझे महसूस हुआ कि उसकाहाथ मेरी छाती सें नीचे खिसकरहा हैं, औऱ वो मेरेउस अंग केँ खतरनाक हद तक लगभग पहुँच गय़ा थां जोँ मेरी जींस केँ अंदर पूरीतरह सख्त होँ चुका थां। एक् समय केँ लिए तौ मेरामन किया कि कॉलेज-वॉलेज छोड़दूँ औऱ वहीं उसकेसंग मिल जाऊँ।
मगर मे पीछेहट गय़ा, ज़ोर-ज़ोर सें साँसें लेँ रहा थां। उसके होंठसूज गए थें औऱ आँखों मे हवस साफ़झलक रही थि।
"मेरे जाने केँ बाद अच्छे सें रहना, " मैंने उसके होंठों केँ कोने पर्र अंतिम बारकिस करतेहुए धीरे-धीरे सें कहा।
उसने मुझे कसकरगले लगाया, उसकेनरम ब्रेस्ट मेरी छाती सें दबरहे थें। "जल्द वापस आनां, " उसने धीरे-धीरे सें कहा, उसकी आवाज़ मे एक् वादा थां।
मे अपार्टमेंट सें निकला, मेरे होंठों पर्र अभि भि उसका स्वाद थां औऱ मेराअंग उतावलापन रहा थां।
जब मे पहुंचा तोँ कॉलेज कैंपस मे हमेशा कि तरह चहल-पहल थि। मे लेक्चर हॉल मे गय़ा औऱ जल्दी अपने दोस्तों कों देख लिया। रोहन अपनी गर्लफ्रेंड अवनी केँ बगल मे बैठा थां, उसकाहाथ धीरे-धीरे उसके कंधों पर्र थां। मैंने उसेहाथ हिलाकर इशारा किया। वो मुस्कुराया औऱ मेरेपास आँ गय़ा।
"क्याँ हाल हैं, ब्रो?" मैंने उससे पूछते हुए हल्के सें मुक्का मिलाया (फिस्ट बंप किया)।
"आखिरकार! तुम् कल क्यूं नहि आए?" रोहन नें भौंहें ऊपर उठाते हुए पूछा।
"ज्यादा सो गय़ा थां, " मैंने कंधे उचकाते हुए लापरवाही सें जवाब दिया। "क्याँ बात करनी थि?"
रोहन नें अपनी आवाज़ थोड़ी धीमी कि। "अगले हफ़्ते नया जूनियर बैच आँ रहा हैं। मे सोचरहा थां कि उससे पहले हमेंकुछ मज़ेदार करना चाहिए। वानाहिल याद हैं? हम् फर्स्ट ईयर मे वहा हाइकिंग केँ लिएगए थें। मे एक् ग्रुप ट्रिप प्लान करना चाहता हूं — सिर्फ़ हम् सीनियर्स केँ लिए। "
मैंने सिर हिलाया। "बढ़िया आइडिया हैं। तुम् औऱ अवनीजा रहे हौ?"
"हाँ, मगर वो अपनेघऱ पऱ कहरही हैं कि वो अपने सहेलियों केँ ग्रुप केँ संगजा रही हैं। इसीलिए मे इसे एक् मिक्स्ड ग्रुप ट्रिप बनाना चाहता हूं। ताकिबात ज्यादा सचलगे। "
मे हँस पड़ा। "तुम् औऱ तुम्हारे चालाक प्लान। मे रेडी हूं, हालाँकि मुझे इतनाझूठ बोलने वालीबात पूरीतरह सही नहि लगरही। "
रोहन कां चेहरा खिलउठा। "बहोत बढ़िया! तोँ लड़के: तुम्, मे, कबीर औऱ अंशुल। लड़कियाँ: अवनी, आकांक्षा औऱ कुछ औऱ। कुल मिलाकर करीब 10 लोग। मजा आएगा। "
मैंने भौंहें ऊपर उठाईं। "क्याँ तुम् सलोनी कों बुलारहे हौ?"
रोहन मुस्कुराया। “तुम् उसे क्यूं नहि बुलाते? वो तुम्हारे बापू केँ साथी कि बेटी हैं नं? EE ब्रांच सें। वो बहोत हॉट हैं, दोस्त। लड़कों कों मजा आँ जाएगा। ”
मे एक् लम्हा केँ लिए रुका। असल मे सलोनी मेरी कज़िन थि, मगर मैंने सबसेझूठ बोला थां कि वो मेरे बापू केँ पुराने यार कि बेटी हैं। इससेसभी कुछ सेफ़ रहता थां।
“ठीक हैं, ” मैंने थोड़ी देरबाद कहा। “मगर कोईउसे छेड़ेगा नहि। खासकर तुम्, रोहन। ”
वो हँसा। “टेंशन मत लें, ब्रो। मे लड़कों कों बता दूँगा। कबीर तोँ शरीफ़ हैं, औऱ अंशुल वैसे भि बहोत भोला-भाला हैं। ”
हमनेहाथ मिलाया औऱ अपनी सीटों पर्र वापसचले गए, तभी प्रोफ़ेसर अंदरआए। लेक्चर शुरुआत हुआ, औऱ हॉल मे नोटबुक कि सरसराहट औऱ धीमी-धीमी बातचीत कि आवाज़ें गूँजने लगीं।
कुछ मिनटबाद, द्वार (दरवाज़ा) फिन खुला। आकांक्षा अंदरआई, हमेशा कि तरह बहोत सुंदर लगरही थि। वो ऐसी लड़की थि जिसे देखकर मेरेदिल कि धड़कनें अलगतरह सें तेज़ हौ जातीथीं — चमकती आँखें, कॉन्फिडेंट चाल, औऱ ऐसा जिस्म जोँ हर किसी कां ध्यान खींच लेँ। उसके टाइटटॉप मे उसके उभरेहुए ब्रेस्ट साफ़दिख रहे थें, औऱ जींस मे उसके लंबे पांव औऱ सुडौल हिप्स औऱ भि आकर्षक लगरहे थें।
“सॉरीसर, ट्रैफ़िक मे फँस गई थि, ” उसने प्रोफ़ेसर सें प्रेम सें कहा।
उन्होंने उसे अंदरआने कां इशारा किया। आकांक्षा नें पूरे कमरे पऱ नज़र डाली औऱ मेरेबगल मे खालीसीट देखकर मुस्कुरा दि। वो अपने हिप्स कों नैचुरली मटकाते हुए मेरेपास आई औऱ सीट पर्र बैठ गई।
“हे, ” उसने धीरे-धीरे सें कहा औऱ मुझे एक् प्यारी, थोड़ी फ़्लर्टी मुस्कान दि, जिससे मेरी धड़कनें तेज़ हौ गईं।
“हे, ” मैंने भि धीरे-धीरे सें जवाब दिया औऱ मुस्कुराते हुएउसे देखा।
प्रोफ़ेसर पढ़ाते रहे, मगर मेरा ध्यान भटकरहा थां — एक् तरफ़आज सुभह देखी सलोनी कि लाल लॉन्जरी मे आधी-नंगी बॉडी कि याद थि, तौ दूसरी तरफ़ आकांक्षा इतनीपास बैठी थि कि मुझे उसके मीठे परफ़्यूम कि खुशबू आँ रही थि। दिन अभि शुरुआत हि हुआ थां, औऱ हवा मे एक् अजीब सि उत्तेजना महसूस हौ रही थि।
लेक्चर अपनी रफ़्तार सें चलतारहा, मगर मेरा ध्यान बार-बार मेरेबगल मे बैठी लड़की कि ओरजारहा थां। आकांक्षा अपनी नोटबुक खोलकर बैठी थि, कभी-कभी कुछ नोट्स लिखरही थि, जबकि डेस्क केँ नीचे उसका घुटना हल्के सें मेरे घुटने सें छूरहा थां। उनकी मौजूदगी मे एक् अलग हि आकर्षण थां — उनकी हल्की-सि खुशबू, एक् कंधे पऱ गिरे उनकेबाल, औऱ जब भि वे मेरी तरफ़ देखतीं, तोँ उनकी आँखों मे दिखने वाली वो चमक।
एक् शांतसमय मे मे थोडा औऱ लगभग झुका औऱ धीरे-धीरे सें कहा, "आज तुम् बहोत फ्रेश लगरही हौ। कलरात देर तक जागरही थीं क्याँ?"
आकांक्षा नें अपनासिर घुमाया, उनके होंठों पऱ एक् शरारती मुस्कान आँ गई। "नहि, ऐसाकुछ नहि। बसजमा होँ रहे असाइनमेंट्स केँ बारे मे सोचकर नींद नहि आँ रही थि। औऱ तुम्? तुम् थोड़े। खोए-खोए सें लगरहे होँ। "
उसकी आवाज़ हल्की औऱ मज़ाकिया थि। मे धीरे-धीरे सें हँसा। "शायद हूं। लेक्चर्स औऱ बाकी चीज़ों केँ बीच, मेरा ध्यान कहीं औऱ थां। " मैंने इसबात कां ज़िक्र नहि किया कि केसे मे सलोनी केँ नरम, लॉन्जरी पहने जिस्म केँ संगउठा थां, याँ केसे उसकी गहरी फ्रेंच किस नें मुझेआधी सुभह तक उत्तेजित रखा थां।
उसने अपनी भौंहें ऊपर उठाईं औऱ अपनी आवाज़ धीमी करके मेरी आवाज़ सें मिलाई। "कहीं औऱ? ये तोँ रहस्यमयी लगरहा हैं, अभीर। क्याँ बताओगे?"
"शायदबाद मे, " मैंने जवाब दिया, औऱ उसकी आँखों मे ज़रूरत सें एक् लम्हा अधिकदेर तक देखा। "तुम्हें पता हि हैं — कॉलेज लाइफ़। "
उसकेबाद हमारी बातचीत आसानी सें आगे बढ़ी — आने वाले टेस्ट केँ बारे मे हल्की-फुल्की बातें, प्रोफ़ेसर कि एक् जैसी आवाज़ कि शिकायतें, औऱ पीछे कि लाइन मे बैठे दोस्तों पर्र हल्के-फुल्के मज़ाक। आकांक्षा कि हँसी धीमी औऱ सच्ची थि, औऱ जब भि वो अपनीसीट पर्र हिलती-डुलती, उसका कंधा मेरे कंधे सें छू जाता, जिससे मुझे एक् हल्की सि सिहरन महसूस होती। हमारे बीच हमेशा कुछ अनकहा सां रहता थां, एक् ऐसी चिंगारी जोँ महीनों सें पनपरही थि।
कॉलेज कां बाकीदिन अपने जाने-पहचाने अंदाज़ मे गुज़रा — लगातार लेक्चर्स, गपशप औऱ हँसी-मज़ाक सें भरे छोटे-छोटे ब्रेक्स, औऱ कैंटीन मे हमेशा वाली भीड़-भाड़। अंतिम पीरियड ख़त्म होने पर्र, मेरी नज़रफिन सें रोहन पऱ पड़ी।
"ठीक हैं, मे ट्रिप कि डिटेल्स तयकर लूँगा औऱ सबको मैसेज कर दूँगा, " मैंने उससेकहा।
रोहन मुस्कुराया। "बढ़िया। मे आजसाम ग्रुप चैटबना लूँगा। पक्का करना कि सलोनी भि उसमें शामिल हौ। "
मैंने सिर हिलाया औऱ बाहर् निकल गय़ा। जब मे मेनगेट कि ओरजारहा थां, तोँ मैंने सलोनी कों बीच रास्ते मे इंतजार करतेहुए देखा; वो अपने कैज़ुअल सलवार सूट मे बहोत प्यारी लगरही थि। मुझे देखते हि उसका चेहरा खिलउठा।
हम् संग-संग चलनेलगे, हमारे हाथ कभी-कभी एक्-दूसरे सें छू जाते थें। "आपकादिन कैसारहा, दिदी?" मैंने पूछा।
"तुम्हारे बिना बोरिंग थां, " उसने थोडा मुँह बनाते हुए जवाब दिया। "प्रिया औऱ मैंने बस पहले हाफ़ मे आराम किया। "
मे मुस्कुराया औऱ उसे वानाहिल पर्र जाने कि योजना केँ बारे मे बताया। "रोहन अगले हफ़्ते एक् ग्रुप ट्रिप ऑर्गनाइज़ कररहा हैं — ट्रेकिंग, तीनदिन औऱ दोरात कि कैंपिंग। तुम्हें भि चलना चाहिए। "
सलोनी कि आँखें जल्दी चमक उठीं। "सच मे? ये तोँ बहोत बढ़िया लगरहा हैं! क्याँ प्रिया भि आँ सकती हैं?"
"बिल्कुल, " मैंने बिना किसी हिचकिचाहट केँ कहा। “जितने ज्यादा लोगहों, उतना हि मजा आएगा। मे तुम् दोनों कों भि शामिल कर लूँगा। ”
हम् बहोत अच्छे मूड मे घऱ पहुँचे। रसोई मे हमनेसंग मिलकर लंच बनाया — दाल, चावल, सब्ज़ी औऱ ताज़ी रोटियाँ। उसकेसंग बिताए इन घरेलू पलों मे एक् चैन थां। सलोनी केँ हरकाम मे एक् नज़ाकत थि, औऱ मे उसकीकमर कि हल्की-हल्की हरकत याँ जब वो ऊपर कि शेल्फ़ सें कुछ उठाने केँ लिएहाथ बढ़ाती तौ उसकेभरे हुए स्तनों पऱ चिपके टॉप कों देखने सें स्वयं कों रोक नहि पाता थां।
साम जल्द हौ गई। मे अपनी डेस्क पर्र बैठा औऱ ध्यान सें ट्रिप कां प्लान बनाया। हम् सुभह-सुभह वानाहिल केँ सबसेपास वाले स्टेशन केँ लिए ट्रेन पकड़ेंगे, फिन ट्रेकिंग शुरुआत करेंगे। हमारा मकसदसाम तक कैंपसाइट पहुँचना, टेंट लगाना औऱ तीनदिन घूमना-फिरना थां — ट्रेकिंग ट्रेल्स, पास कां झरना औऱ रात मे तारे देख्ना। तीसरे दिनसाम कों वापसी। मैंने रोहन कों मोटा-मोटा प्लान मैसेज कर दिया।
उसने जल्दी जवाब दिया: ग्रुप बना दिया हैं। सबको जोड़ दिया हैं। सलोनी औऱ प्रिया भि शामिल हें।
मैंने उस वक्त सदस्यों कि पूरी लिस्ट देखने कि ज़हमत नहि उठाई। मे थकाहुआ थां औऱ रोहन कि समझ पर्र भरोसा करता थां।
अगलादिन बिना किसीखास घटना केँ गुज़रा — रेगुलर क्लास, आकांक्षा केँ संग थोड़ी-बहोत फुसफुसाहट औऱ ट्रिप केँ लिए फ़ाइनल कन्फर्मेशन। रात मे, सादे खाने केँ बाद, बैग पैक करतेहुए मैंने ग्रुप चैट खोली। ज़्यादातर नामवही थें जिनकी उम्मीद थि: मे, सलोनी, प्रिया, आकांक्षा, कबीर, अंशुल, रोहन, अवनी, समृद्धि औऱ रिया। सभी नॉर्मल थां।
तभी मेरी नज़रदो नामों पर्र पड़ी जिनसे मेरा चेहरा गुस्से सें तन गय़ा — श्रेया औऱ वैभव।
क्रोध जल्दी भड़कउठा। मैंने अपना फ़ोन उठाया औऱ रोहन कों कॉलआई किया।
“यह क्याँ बकवास हैं, दोस्त? श्रेया औऱ वैभव ग्रुप मे क्यूं हें?” मैंने धीमीमगर तीखी आवाज़ मे पूछा।
दूसरी तरफ़ रोहन नें अहहभरी। “भइया, सॉरी। मे तुम्हें क्रोध नहि दिलाना चाहता थां, मगरइसे पूरीतरह टाला नहि जा सकता थां। ”
“इसमें मेरी क्याँ गलती हैं?” मैंने चिढ़कर कहा।
“तुमने हि तौ अवनी औऱ श्रेया कों उस टाइमयार बनाया थां, ” रोहन नें मुझेयाद दिलाया। “औऱ अवनी कि मम्मी अभि भि श्रेया केँ परिवार केँ संपर्क मे हें। अवनी उन्हें बिनाशक पैदाकिए आने सें मना नहि कर सकती। अगर हम् उन्हें अभि बाहर् रखेंगे तौ ये अजीब लगेगा। ”
मैंने अपना माथामला, श्रेया केँ संग पहलेसाल मे हुएउस बुरे ब्रेकअप कि यादें ताज़ा हौ गईं — वोँ झगड़े, वोँ कड़वाहट, औऱ केसे मेरे हटने केँ बाद वैभव नें क्लास रिप्रेजेंटेटिव कि स्थान लेँ ली थि। वहा औऱ भि बहोत कुछहुआ थां, मगर मे आजरात उन बातों कों फिन सें याद नहि करना चाहता थां।
“ठीक हैं, ” मैंने अनिच्छा सें कहा। “मगर सभीकुछ ठीक-ठाक रखना। मे इस ट्रिप पर्र कोई ड्रामा नहि चाहता। ”
पैकिंग जारीरही। मैंने सलोनी कि ओर देखा, जोँ अपने कपड़े छाँटरही थि। “दिदी, पक्का करना कि तुम् वोँ नए कपड़े पैककरो जोँ तुमने खरीदे थें। औऱ कुछ अच्छे इनरवियर भि। वहा एक् झरना हैं। सभीलोग स्विमिंग करेंगे औऱ मजा करेंगे। तुम् पुराने, रूढ़िवादी कपड़े पहनकर पीछे नहि रहना चाहोगी। ”
वो हिचकिचाती हुई लगरही थि, अपने होंठकाट रही थि। “पता नहि, अभीर। मुझे पक्का नहि पता। ”
मे उसकेपास गय़ा औऱ धीरे-धीरे सें उसका चेहरा अपने हाथों मे लिया। “मुझ पऱ भरोसा करो। हर लड़की आरामदायक औऱ मॉडर्न कपड़े पहनेगी। अगर तुम् ऐसा नहि करोगी तोँ तुम्हें लगेगा कि तुम् सबसे अलग-थलग होँ। तुम् बहोत सुंदर लगोगी, औऱ मे चाहता हूं कि तुम्.
हरसमय खुशी। ”
धीरे-धीरे सें मनाने केँ बाद, उसने आखिरकार सिर हिलाया औऱ अपनेबैग मे कुछ सेक्सी लॉन्जरी औऱ स्विम-फ्रेंडली इनरवियर डाललिए। हमने आहिस्ता चुपचाप पैकिंग पूरी कि। फिरभी हमारे बीच कां माहौल चार्ज्ड थां, मगरउस रात हमनेकुछ भि इरॉटिक नहि किया। हमें ट्रेन केँ लिए जल्द उठना थां।
अगली सुभह, हम् दोनों नें प्रैक्टिकल ट्रैक सूट पहने — मेरा काला औऱ फिटेड, उसका सॉफ्ट लैवेंडर रंग कां जौ फिन भि उसके कर्व्स कों हुस्न सें उभाररहा थां। हम् वक्त पऱ रेलवे स्टेशन पहुँच गए। हमारे ग्रुप केँ पहले सें हि इकट्ठा होने सें प्लेटफॉर्म पऱ चहल-पहल थि।
रोहन औऱ अवनी कबीर औऱ अंशुल सें बातें कररहे थें। आकांक्षा स्पोर्टी औऱ फ्रेश लगरही थि, उसी चमकदार मुस्कान केँ संग मुझेहाथ हिलारही थि। प्रिया सलोनी केँ बगल मे खड़ी थि, एक्साइटेड औऱ लगातार बातें कररही थि। समृद्धि औऱ रिया सेल्फी लेँ रहीथीं। औऱ फिन श्रेया औऱ वैभव थें — थोडा दूर खड़े थें, उनकी मौजूदगी सें हि एक् हल्का सां टेंशन पैदा होँ रहा थां जिसे मे अपने सीने मे महसूस कर सकता थां।
सबने एक्-दूसरे कों नमस्कार किया, ट्रेन केँ आने कि अनाउंसमेंट होते हि प्लेटफॉर्म पऱ हंसी गूंजउठी। ट्रिप ऑफिशियली शुरुआत हौ गई थि।
जैसे हि हमारा ग्रुप इकट्ठा हुआ, प्लेटफॉर्म सुभह कि एनर्जी सें भर गय़ा। एक्-दूसरे कों नमस्कार करने कां सिलसिला शुरुआत हौ गय़ा—हंसी, एक्साइटेड बातें, औऱ कभी-कभी आगे केँ एडवेंचर केँ बारे मे चिढ़ाने वाली बातें। सलोनी मेरेपास खड़ी थि, उसका लैवेंडर ट्रैकसूट उसके सुडौल फिगर कों टाइटकर रहा थां, जबकि प्रिया उसकेबगल मे मस्ती सें बातें कररही थि। आकांक्षा नें मुझेफिन सें वही चमकदार स्माइल दि, औऱ रोहन नें मुझे थम्स-अप दिया। श्रेया औऱ वैभव नें भि दूरी बनाएरखी, फिरभी उनकी मौजूदगी एक् अनचाहे साये कि तरहबनी रही।
ट्रेन एक् मेटल जैसी कराह केँ संग रुकी। जैसा कि उम्मीद थि, ये एक् जनरल डिब्बा थां—पहले सें हि पैसेंजर सें भराहुआ। हम् एक् संगघुस गए, भीड़ नें हमेंकोच केँ एक् कोने मे दबा दिया। कोई सीट नहि बची थि, इसलिये हम् दरवाज़े केँ पास खड़े हौ गए, तंग स्थान मे जिस्म एक्-दूसरे सें टकरा हि रहे थें। सफ़र सिर्फ़ सत्तर सें अस्सी मिनट कां थां, मगरइस गर्मी औऱ भीड़ मे, ये सबसे खतरनाक तरीके सें अपनापन महसूस होँ रहा थां।
ट्रेन आगे बढ़ी। मे पीछे थां। अवनी, रोहन कि गर्लफ्रेंड। अचानक हुईँ इस हलचल सें हम् सबका बैलेंस बिगड़ गय़ा। जैसे हि डिब्बा हिला, मेरी छाती हल्के सें उसकीपीठ सें दब गई। उसने फिटेड मैरून ट्रैकसूट टॉप औऱ काली लेगिंग्स पहनी हुई थीं जौ उसकेगोल, मज़बूत कूल्हों सें दूसरी स्किन कि तरह चिपकी हुई थीं। कपड़ा पतला थां, जिससे हर शानदार कर्व औऱ उभररहा थां।
ट्रेन नें स्पीड पकड़ी, औऱ भीड़फिन सें खिसक गई। मैंने स्थान बनाने कि कोशिश कि, मगरये नामुमकिन थां। जैसे हि ट्रेन मे झटकालगा, मेरे कूल्हे अपने आप् आगेबढ़ गए, औऱ मेरे मोटे, सख्त होते लिंग कां हिस्सा उसके कूल्हों केँ बीच कि रसीले, मोटी घाटी सें सट गय़ा।
अवनी थोड़ी अकड़ गई मगर पीछे नहि हटी। उसके जिस्म कि गर्मी कपड़ों कि पतली परतों सें निकलरही थि। मेरा लिंग, जौ सुभह सलोनी कि यादों सें पहले सें हि आधा सख्त होँ गय़ा थां, तेज़ी सें फूल गय़ा, औऱ ज़ोर सें उस पर्र दबावडाल रहा थां। ट्रेन कि हर खड़खड़ाहट औऱ हिलने केँ संग, मेरा लिंग आहिस्ता, अनजाने मे उसके कूल्हों कि दरार सें रगड़खा रहा थां। ये रगड़ पागलकर देने वाली थि—उसकी भरेहुए, जूसी नितंब मेरी धड़कती कठोरता केँ खिलाफ नरममगर मजबूती सें झुकरहे थें।
लेगिंग्स केँ ऊपर सें मुझे उसकी पैंटी कि आउटलाइन महसूस हौ रही थि। मेरेमन मे गंदे ख्याल आनेलगे। मैंने सोचा कि यहीं उसकी लेगिंग्स नीचे खींचूँ, उसके कूल्हों कों फैलाऊँ औऱ अपना मोटा लन्ड उनकेबीच घुसाकर उसकी नंगी त्वचा पऱ रगड़ूँ। अवनी कि साँसें तेज़ होँ गईं। उसने धीरे-धीरे सें अपना वज़न बदला औऱ करीब-करीब बिनापता चले हि मुझे पीछे कि तरफ़ धकेला। इस हरकत सें मेरा लन्ड औऱ ज़ोर सें धड़कने लगा, उसका सूजाहुआ सिरा उसके कूल्हों केँ बीच औऱ गहराई मे घुसने लगा।
"फ़क." मैंने धीरे-धीरे सें कहा, ट्रेन कि आवाज़ मे मेरी आवाज़ मुश्किल सें सुनाई देरही थि।
उसके कूल्हे बहोत गरम औऱ रसीले थें। हरबार जब ट्रेन कों झटका लगता, मेरा कड़ा लन्ड उसकी मज़ेदार दरार पर्र ऊपर-नीचे होता; मेरी ट्रैक पैंट कां कॉटन भि ये नहि छिपापा रहा थां कि मे कितना ज्यादा उत्तेजित थां। मे उसकी जाँघों केँ बीच गीलापन महसूस कर सकता थां—उसका जिस्म प्रतिक्रिया देरहा थां, भले हि उसका दिमाग़ इसका विरोध कररहा होँ। अवनी नें ऊपरलगी रेलिंग कों कसकर पकड़रखा थां, उसकी उंगलियों कि पोरें सफ़ेद पड़ गई थीं। उसके होंठों सें एक् धीमी, दबी हुई अहह निकली जब मेरा लन्ड फिन सें उसके कूल्हों सें टकराया; इसबार वो उसके कूल्हों केँ निचले हिस्से औऱ ठीकउस स्थान पर्र दबा जहाँ उसकी योनि मे दर्द हौ रहा होगा।
हमारे आस-पास कि भीड़ बेखबर थि, लोग ठूँस-ठूँसकर भरेहुए थें। सलोनी प्रिया केँ संग थोडा आगे खड़ी होकर आरामसे बातें कररही थि। आकांक्षा औऱ दूर थि। कोई नहि देख सकता थां कि केसे मेरा भारी, नसों वाला लन्ड इस भीड़-भाड़ वाली ट्रेन केँ बीच अवनी केँ बेहतरीन कूल्हों पर्र बेशर्मी सें रगड़खा रहा थां।
मे थोडा आगे झुका, मेरी साँसें उसकी गर्दन केँ पिछले हिस्से कों छूरही थीं। "सॉरी। भीड़ हैं, " मैंने कामुक आवाज़ मे धीरे-धीरे सें कहा। मगर मे पीछे नहि हटा। इसके बजाय, एक् औऱ झटके नें मुझे औऱ ज़ोर सें आगे कि ओर धकेला। मेरा लन्ड अब पूरीतरह सें उसके कूल्हों केँ बीचसमा गय़ा थां, उसकी लंबाई उस स्वर्गीय घाटी मे फंसी हुईँ थि औऱ ज़रूरत सें धड़करही थि। मे कपड़ों कि परतों केँ बावजूद उसकी योनि केँ होंठों कि गर्मी महसूस कर सकता थां। अवनी कि जाँघें आपस मे भिंचगईं, उसके कूल्हों कि एक् छोटी सि, अनैच्छिक हरकत मेरे अगले धीमे धक्के सें मिली।
ये एहसास एक् तरह कि प्यास थि—धीमा, गंदा औऱ असहनीय रूप सें कामुक। मेरे लन्ड सें निकलने वालातरल (प्री-कम) निश्चित रूप सें मेरी पैंट पऱ दाग छोड़रहा थां, औऱ मैंने कल्पना कि कि ये रिसकर उसकी लेगिंग्स पर्र भि निशान बनारहा होगा। मे चाहता थां कि मे पीछे सें हाथ बढ़ाकर उसकी कमरबंद केँ अंदरहाथ डालूँ औऱ उसकी गीली योनि मे उंगलियाँ घुमाऊँ, जबकि मेरा लन्ड उसके कूल्हों पऱ रगड़ता रहे। इस कल्पना नें मुझे औऱ भि अधिक उत्तेजित कर दिया। अवनी कि साँसें उखड़ने लगीथीं, जैसे वो हाँफरही होँ। उसके कूल्हे हल्के सें मेरेबदन सें रगड़खा रहे थें औऱ मेरे लिंग कों बहोत हि मज़ेदार तरीके सें भींचरहे थें।
वक़्त जैसेथम सां गय़ा थां। उस सत्तर मिनट केँ सफ़र कां हर लम्हा स्वयं पर्र काबू रखने कि एक् मुश्किल कसरत जैसा थां। मेरा लिंग लगातार रगड़खा रहा थां, फिसलरहा थां औऱ दबावडाल रहा थां—कभी उसकी दरार पर्र लंबे, धीमे स्ट्रोक, तोँ कभी उसके सबसे संवेदनशील हिस्से पर्र छोटे, तेज़ धक्के। हमारे बीच गर्मी इतनीबढ़ गई थि कि ऐसालग रहा थां जैसे हम् दोनों बसकुछ हि लम्हा मे अपनाआपा खो बैठेंगे।
तभी मैंने कुछऐसा देखा जिससे मेराखून खौलउठा। समृद्धि, जौ हमारे ग्रुप कि शांत लड़कियों मे सें एक् थि, पचास-पचपन साल केँ एक् बुज़ुर्ग व्यक्ति केँ पास खड़ी थि। ट्रेन केँ हिलने-डुलने कि वजह सें वो उस व्यक्ति सें सट गई थि। पहले तोँ ये इत्तेफ़ाक लगा, मगर मैंने देखा कि उस व्यक्ति कि कोहनी जानबूझकर उसके भरे-पूरे स्तनों केँ किनारे पर्र दबावडाल रही थि। वो फिन सें थोडा हिला, औऱ इसबार अपनी पोज़िशन ठीक करने केँ बहाने आहिस्ता गोल-गोल घुमाते हुए उसकेनरम, भारी स्तनों कों रगड़ने लगा।
समृद्धि कां चेहरा बेचैनी सें लाल होँ गय़ा। उसनेदूर हटने कि कोशिश कि, मगर भीड़ मे फंसी हुईँ थि। उस बूढ़े हवस केँ मारे व्यक्ति कि कोहनी औऱ ज़ोर सें दबी, जिससे साफ़पता चलरहा थां कि वो उसके स्तनों कां आकार महसूस कररहा हैं, यहा तक कि उसकेटॉप केँ ऊपर सें उसके निप्पल केँ किनारे कों भि छेड़रहा थां।
मे कोईशोर नहि खड़ा करना चाहता थां—चिल्लाने सें पूरा सफ़र खराब होँ जाता औऱ बेवजह कां ड्रामा होता। इसके बजाय, मैंने लोगों कि भीड़ केँ बीच सें सावधानी सें मार्ग बनाया औऱ विनम्रता सें आगे बढ़ा। मैंने स्वयं कों समृद्धि औऱ उस बुज़ुर्ग व्यक्ति केँ बीच खड़ाकर लिया, ताकि मेरे चौड़े कंधे एक् सुरक्षा कवच कां कामकर सकें। उस बूढ़े हवसी नें मुझे नाराज़गी भरी नज़र सें देखा, मगर लोगों कां ध्यान अपनीओर खींचे बिना वो कुछ नहि करसका। समृद्धि नें मुझे शुक्रगुज़ार औऱ राहतभरी नज़रों सें देखा औऱ बिना आवाज़ केँ होंठ हिलाकर "थैंकयू" कहा।
मे सफ़र केँ बाकी वक़्त तक वहीं खड़ारहा औऱ उसकी हिफ़ाज़त करतारहा।
आखिरकार ट्रेन कि रफ़्तार धीमी होनेलगी। सफ़र समाप्त होने पऱ सबने राहत कि साँस ली—औऱ मेरेलिए, ये अधूरी उत्तेजना कि एक् तकलीफ़देह टीस जैसा थां। हम् सभी छोटे सें स्टेशन पर्र उतरे; पहाड़ कि ताज़ी हवाउस घुटनभरे डिब्बे केँ मुकाबले बहोत चैन देने वाली थि।
वहा सें हमनेदो ऑटोकिए औऱ ट्रेकिंग ट्रेल केँ शुरुआती पॉइंट कि ओरचल पड़े। ग्रुप फिन सें इकट्ठा हुआ, सबने अपने पांव फैलाए औऱ बैकपैक ठीककिए। हमारे सामने पहाड़ शान सें खड़े थें—हरे-भरे औऱ अपनीओर बुलाते हुए। जब हम् हाइक कि तैयारी कररहे थें—टेंट, सामान औऱ आगेतीन दिन कां रोमांच—तोँ सबमें उत्साह कि लहर दौड़ गई।
मगर मेरा ध्यान अभि भि ट्रेन वालीबात पऱ हि अटका थां। अवनी नें मुझसे नज़रें चुराईं, उसकेगाल अभि भि हल्के गुलाबी थें। सलोनी मेरेबगल मे खड़ी थि, उसेकुछ पता नहि थां, जबकि अवनी केँ कूल्हों सें मेरे लिंग केँ इतने लगभग सें छूने कि याद मेरी रगों मे गर्मी पैदाकर रही थि।
ट्रेक शुरुआत होने वाला थां।
सुभह कि धूप नें वानाहिल केँ निचले हिस्से कों हल्की सुनहरी रोशनी सें नहला दिया थां, जब हमारा ग्रुप ट्रेलहेड केँ पास इकट्ठा हुआ। हवा ताज़ी औऱ स्फूर्तिदायक थि, जिसमें चीड़ औऱ जंगली फूलों कि गंध घुली हुई थि। ट्रेन केँ भीड़-भाड़ वाले सफ़र केँ बाद, हर कोई असली रोमांच शुरुआत करने केँ लिए बेताब थां। हमनेकुछ सामान निकाला औऱ एक् सादामगर पेट भरने वाला ब्रेकफास्ट रेडी किया — सैंडविच।
संग मे चीज़ औऱ सब्ज़ियाँ, उबले अंडे, ताज़े फल, एनर्जी बार औऱ पोर्टेबल स्टोव पर्र बनीगरम गरमचाय थि।
सलोनी मेरेपास बैठी थि, उसने मुझे प्लेट देते वक़्त अपना कंधा मेरे कंधे सें छुआया। प्रिया उत्साह केँ संग समृद्धि औऱ रिया सें बातें कररही थि। आकांक्षा नें घेरे केँ दूसरी तरफ़ सें मुझे देखकर मुस्कुराया, उसकी नज़रें सामान्य सें कुछ अधिकदेर तक मुझ पऱ टिकी रहीं। रोहन औऱ अवनी अपनी हि दुनिया मे खोएहुए थें, मज़ाकिया फुसफुसाहट केँ संग एक्-दूसरे कों फल खिलारहे थें। कबीर औऱ अंशुल मैपदेख रहे थें, जबकि श्रेया औऱ वैभव अपने मे हि मगन थें।
मैंने स्वाभाविक रूप सें ज़िम्मेदारी लेतेहुए कहा, "सभी लोग अच्छे सें खाओ। ट्रेक मुश्किल होने वाला हैं। हमें एनर्जी कि ज़रूरत हैं। "
नाश्ते केँ दौरान हल्की-फुल्की बातचीत औऱ मज़ाक-मस्ती होतीरही। कॉलेज कि पिछली ट्रिप्स कि कहानियाँ सुनाते हुए हँसी-मज़ाक गूँजरहा थां। आकांक्षा कि नज़रें फिन मुझसे मिलीं, औऱ ग्रुप केँ हंगामा-शराबे केँ बीच हमने एक्-दूसरे केँ संग खामोशी सें जुड़ाव महसूस किया। उसकी मुस्कान गर्मजोशी भरी औऱ कोमल थि, जिसने मेरेदिल मे महज़ आकर्षण सें कहीं ज्यादा गहरी भावना जगा दि।
जल्द हि, हमने अपने बैकपैक उठाए औऱ चढ़ाई शुरुआत कर दि। मार्ग धीरे धीरे शुरुआत हुआ, घने हरे-भरे जंगलों सें होताहुआ, जहाँ पेड़ों कि घनी पत्तियों केँ बीच सें छनकरआती धूप ज़मीन पऱ पड़रही थि। शुरुआत मे, सभी बहोत उत्साहित थें। रोहन औऱ अवनी एक्-दूसरे कां हाथ थामेचल रहे थें, बिल्कुल लवबर्ड्स कि तरह — रोहन कां हाथ उसकीकमर पऱ थां, औऱ कभी-कभी वो नीचे खिसककर उसके हिप्स कों दबाता थां। अवनी खिलखिलाकर हँसती औऱ उससे सटकर चलती, उनकेबदन एक् तालमेल मे हिलरहे थें।
कबीर, रोहन औऱ मैंने सबसेआगे रहकर तेज़ रफ़्तार बनाएरखी। हम् सबसे ज्यादा फ़िट थें — सालों कि जिम औऱ आउटडोर एक्टिविटीज़ नें हमें ज़बरदस्त स्टैमिना दिया थां। जैसे-जैसे मार्ग ढलान वाला औऱ मुश्किल होता गय़ा, बाकी ग्रुप कों तकलीफ़ होनेलगी। सबसे पहले समृद्धि औऱ रिया नें शिकायत करना शुरुआत किया, उनकी साँसें फूलने लगीथीं।
सिर्फ़ बीस मिनटबाद हि समृद्धि नें शिकायत करतेहुए कहा, "ये बहोत अधिक होँ रहा हैं। क्याँ हम् थोडा आरामकर सकते हें?"
प्रिया नें भि हाँ मे हाँ मिलाई, "मेरे पैरों मे तोँ अभि सें जलन होँ रही हैं!"
अंशुल भि संग चलने कि कोशिश तौ कररहा थां, मगर साफ़तौर पऱ थकरहा थां। श्रेया नें "बेमतलब केँ एडवेंचर" केँ बारे मे कुछ बड़बड़ाया, जबकि वैभवचुप रहामगर उसकी रफ़्तार काफ़ी धीमी हौ गई। यहा तक कि सलोनी भि, जौ काफ़ी दृढ़ थि, ज़ोर-ज़ोर सें साँस लेनेलगी; उसकी गर्दन औऱ क्लीवेज पऱ पसीने कि बूँदें चमकरही थीं।
मैंने पीछे मुड़कर देखा, मेरी आवाज़ मज़बूत मगर हौसला बढ़ाने वाली थि। “हमेंआगे बढ़ना होगा। साम होने सें पहले कैंपसाइट पहुँचना हैं ताकिठीक सें सभी सेट-अप कर सकें। कोई भि अंधेरे मे रास्ते पऱ फँसना नहि चाहता। चलो, बस थोड़ा औऱ चलना हैं, फिन अगला ब्रेक लेंगे। ”
रोहन औऱ कबीर नें मेरासंग दिया औऱ कभी-कभी धीरे-धीरे चलने वालों केँ बैग उठाने मे सहायता कि। बार-बार रुकना आमबात हौ गई थि — हर पंद्रह-बीस मिनट मे कोई नं कोई ब्रेक केँ लिए कहता। पानी कि बोतलें एक्-दूसरे कों दि जातीं औऱ हल्का-फुल्का ब्रेकफास्ट शेयर किया जाता। रोहन औऱ अवनीइन पलों कां इस्तेमाल चोरी-छिपे किस करने औऱ प्रेम भरी बातें फुसफुसाने मे करते, अपनी हि दुनिया मे खोए रहते।
सूरजऊपर चढ़ता गय़ा औऱ पथरीले रास्तों औऱ तंग पगडंडियों कि वजह सें ट्रेक औऱ मुश्किल होता गय़ा। ग्रुप केँ ज़्यादातर लोगथक चुके थें, चेहरे लालपड़ गए थें औऱ पांव काँपरहे थें। फिन भि हम् तीनों — रोहन, कबीर औऱ मे — मज़बूती सें आगे बढ़तेरहे औऱ दूसरों कां हौसला बढ़ाते रहे।
तभी एक् घटना हुइ। आकांक्षा, जोँ मेरेठीक पीछेचल रही थि, अचानक तेज़ आवाज़ मे चिल्लाई औऱ लड़खड़ा गई। एक् ढीले पत्थर पर्र उसका टखनामुड़ गय़ा औऱ उसके हसीन चेहरे पऱ दर्द कि लकीरें उभरआईं।
“आकांक्षा!” मे जल्दी उसकेपास पहुंचा औऱ घुटनों केँ बलबैठ गय़ा। पूरा ग्रुप उसके आस-पास जमा होँ गय़ा।
जब उसनेउस पांव पर्र वज़न डालने कि कोशिश कि तौ वो दर्द सें कराहउठी। “मुड़ गय़ा हैं। बहोत दर्द हौ रहा हैं। ”
मैंने धीरे-धीरे सें उसके टखने कि जाँच कि; मेरी उंगलियाँ उसकी रसीले त्वचा पऱ सावधानी सें मगर मज़बूती सें टिकीथीं। हल्की सूजन थि मगर हड्डी टूटी हुईँ नहि लगरही थि। “सभीलोग आगेबढ़ो, ” मैंने कहा। “जब तक दर्द थोड़ाकम नहि होँ जाता, हम् यहीं रुकेंगे। कबीर, तुम् उन्हें साइट तक लेँ जाओ औऱ कैंप लगाना शुरुआत करो। हम् बाद मे आँ जाएँगे। ”
लोगों नें चिंता ज़ाहिर कि, मगर थोड़ी हिचकिचाहट केँ बाद ग्रुप आगेबढ़ गय़ा। सलोनी नें प्रिया केँ संगआगे बढ़ने सें पहले मुझे समझदारी भरीनज़र सें देखा औऱ सिर हिलाया।
अबबस आकांक्षा औऱ मे हि बचे थें, जोँ ऊँचे पेड़ों कि छाँव मे एक् बड़े, समतल पत्थर पऱ बैठे थें। हमारे आस-पास कां जंगल पक्षियों कि चहचहाहट औऱ हल्की हवा सें जीवंत हौ उठा थां। मैंने सावधानी सें उसका जूता उतारा; मेरेहाथ कुछदेर केँ लिए उसकी सुडौल पिंडली पऱ ठहरेरहे।
“क्याँ बहोत तेज़ दर्द होँ रहा हैं?” मैंने धीरे-धीरे सें पूछा, मेरी आवाज़ मे सच्ची चिंता थि।
आकांक्षा नें मेरीओर देखा, उसकी चमकती आँखों मे नरमी आँ गई थि। “धड़कन जैसा दर्द होँ रहा हैं, मगर। तुम्हारे यहा होने सें बेहतर लगरहा हैं, अभीर। ”
हम् संग बैठेरहे औऱ धीरे धीरे बातें करतेरहे। उसने बताया कि केसेइस ट्रेक नें उसे अपने परिवार केँ संग बचपन कि यात्राओं कि याद दिला दि, औऱ मैंने उसे बाहर् घूमने-फिरने केँ अपनेशौक केँ बारे मे बताया। हमारी बातचीत बिना किसी रुकावट केँ चलतीरही — कॉलेज कि यादों सें लेकर भविष्य केँ सपनों तक। मैंने फर्स्ट-एड किट सें दर्दकम करने वाली क्रीम लेकर आहिस्ता उसके टखने कि मालिश कि; मेरे मज़बूत हाथों नें बड़ी कोमलता सें उसकी मांसपेशियों पर्र काम किया। हर स्पर्श मे एक् बिजली सि दौड़रही थि। मेरी उंगलियां उसकी पिंडली सें ऊपर कि ओर बढ़ीं, फिन घुटने तक गईं, औऱ ट्रैक पैंट केँ ऊपर सें भि उसकी त्वचा कि गर्माहट महसूस हुईँ।
"तुम् हमेशा सबका ख्याल रखते हौ, " उसने धीरे-धीरे सें कहा औऱ अपनाहाथ मेरेहाथ पऱ रख दिया। "तुम्हारी यहीबात मुझे सबसे ज्यादा मनपसंद हैं। "
मेरादिल भरआया। ये सिर्फ़ शारीरिक आकर्षण नहि थां — हमारे बीच सच्चा लगावपनप रहा थां। मैंने उसकी आँखों मे देखा, जहाँ मुझे कोमलता औऱ अपनापन दिखाई दिया। "मे तुम्हारी परवाह करता हूं, आकांक्षा। जितना तुम् सोचती होँ, उससे कहीं ज्यादा। "
कुछदेर बाद, दर्दकम होँ गय़ा.
हल्की-फुल्की चोट थि, मगर चलनाफिन भि मुश्किल थां। मैंने पक्के इरादे सें कहा, "मे तुम्हें उठा लूँगा। "
इससे पहले कि वो मना करती, मैंने उसे अपने कंधों पर्र 'फायरमैन कैरी' पोज़िशन मे उठा लिया — उसका जिस्म मेरे दाहिने कंधे पर्र लटकाहुआ थां। एक् हाथ सें मैंने उसकेपेर थामेहुए थें, औऱ मेराहाथ उसकी जांघ कि रसीले, चिकनी त्वचा पऱ थां जहाँ सें उसकी पैंटऊपर खिसक गई थि। ये पोज़िशन बहुत करीबी थि; उसके ब्रेस्ट मेरीपीठ सें सटेहुए थें औऱ उसकीगरम साँसें मेरी गर्दन पर्र महसूस होँ रहीथीं।
जैसे हि मैंने फिन सें चढ़ना शुरुआत किया, मेरेहाथ कि पकड़ अपने आप् बदल गई। वो ऊपर कि ओर खिसका औऱ उसके कूल्हों केँ भरे-पूरे, गोल उभार कों थाम लिया। आकांक्षा नें एक् शब्द भि नहि कहा। वो चुपरही, मगर मैंने महसूस किया कि उसका जिस्म मेरेसंग ढीलापड़ रहा थां, मानो पिघलरहा होँ। मैंने धीरे-धीरे सें दबाया; पतले कपड़े केँ ऊपर सें मेरी उंगलियाँ उसके भरे-पूरे मांस कों महसूस कररही थीं। ये एहसास कामुक औऱ अधिकार-जताने वाला थां — उसके जिस्म कि गर्मी मेरी हथेली मे महसूस हौ रही थि।
मैंने भारी आवाज़ मे पूछा, "आरामदायक हैं?"
उसने धीरे-धीरे सें जवाब दिया, "हम्म.हाँ, " औऱ उसकी आवाज़ मे थोड़ी घबराहट याँ उत्तेजना कि झलक थि।
चढ़ाई जारीरही; मेरे मज़बूत पैरों नें बिना किसी शिकायत केँ हम् दोनों कां वज़नउठा रखा थां। मेराहाथ उसके कूल्हों कों टटोलता रहा — चलते-चलते मे आरामसे औऱ जान-बूझकर उन्हें दबाता औऱ सहलाता रहा। मे उसकी पैंटी कि आउटलाइन महसूस कर सकता थां औऱ ये भि कि हरकदम केँ संग उसके कूल्हे हल्के सें हिलरहे थें। कभी-कभी, मेरी उंगलियाँ शरारत भरे अंदाज़ मे उसकी जांघों केँ बीच जातीं औऱ उसकी गर्माहट कों छूतीं। आकांक्षा कि साँसें तेज़ हौ गईं, मगर उसनेकभी विरोध नहि किया। बल्कि, उसने थोडा सां हिलकर अपने कूल्हों कों मेरे स्पर्श केँ औऱ लगभगसटा लिया।
उस कामुक खिंचाव केँ बीच भि, हमारी बातचीत हल्की-फुल्की औऱ मज़ेदार रही। उसने मेरे "हीरो कॉम्प्लेक्स" कां मज़ाक उड़ाया, औऱ मैंने कहा कि इसकेबाद उसे मुझे एक् अच्छा सां 'थैंक-यू डिनर' देना होगा। हमारी हंसी औऱ हमारे बीच बढ़ती गर्माहट आपस मे घुल-मिल गई थि। मैंने उसे बताया कि केसे उसकी मुस्कान नें हमेशा मेरे कॉलेज केँ नीरस दिनों कों रोशन किया थां, औऱ उसने माना कि मेरी शांत मज़बूती उसे सुरक्षित महसूस कराती थि।
कामुक स्पर्श, सच्ची परवाह औऱ पनपते प्रेम केँ संग हुस्न सें घुल-मिल गए थें। उसके कूल्हों कों दबाने केँ संग-संग मे हौसला बढ़ाने वाली बातें भि कहतारहा। मैंने धीरे-धीरे सें कहा, "तुम् बहोत अच्छा कररही होँ। बस थोडा औऱ। " हरबार ज़ोर सें दबाने केँ बाद मेराहाथ उसे सहलाता औऱ मेरी उंगलियाँ उसकी जांघ पर्र हल्के-हल्के गोल घेरे बनातीं।
मुझ पर्र आकांक्षा केँ भरोसे नें हमारे बीच कि नज़दीकियों कों औऱ गहराकर दिया। उसने अपनागाल मेरे कंधे पर्र टिकाया, उसकी उंगलियां कभी-कभी मेरे बालों सें खेलरही थीं। हमारे आस-पास कां जंगल हमारी अपनी दुनिया जैसालग रहा थां — पत्तों सें छनकरआती धूप, मिट्टी औऱ उसके परफ्यूम कि खुशबू मुझे घेरेहुए थि। मुझे एक् संग सुरक्षा कां एहसास, उत्तेजना औऱ गहरा जुड़ाव महसूस होँ रहा थां।
एक् बहोत लंबी औऱ सुखद बेचैनी केँ बाद, हम् कैंपसाइट कि खुली स्थान पऱ पहुँचे। मैंने धीरे-धीरे सें आकांक्षा कों उसके पैरों पर्र खड़ा किया। उसने अपने टखने कों आज़माया औऱ सावधानी सें कुछकदम उठाए। "अब ये बहोत बेहतर हैं। शुक्रिया, अभीर। "
हमने अंतिम पाँच मिनटसंग मे तयकिए, मैंने सहारा देने केँ लिए अपनाहाथ उसकीकमर पर्र रखा थां। कबीर नें टेंट लगाने कां काम बहोत अच्छे सें किया थां — खुली स्थान पर्र टेंट कि कतारें शान सें खड़ीथीं।
"टखना कैसा हैं?" हमारे पास पहुँचते हि कबीर नें पूछा।
"अब ठीक हैं, अभीर कि वजह सें, " आकांक्षा नें शुक्रगुजार मुस्कान केँ संग जवाब दिया।
ग्रुप वहाजम चुका थां। हम् सभीमैट पऱ लेटगए औऱ अपनेथके हुएबदन कों आराम देनेलगे, जबकि दोपहर कि धूप ढलनेलगी थि।
साम होते हि हमने एक् ज़ोरदार कैम्पफ़ायर जलाया। आग कि लपटें चटकरही थीं औऱ सबकी चेहरों पऱ सुनहरी रोशनी बिखेर रहीथीं। कुछ शिकायतें फिन सें सामने आईं — समृद्धि औऱ रिया नें मांसपेशियों मे दर्द औऱ छालों केँ बारे मे शिकायत कि, प्रिया नें लंबी ट्रेक कां ज़िक्र किया, औऱ श्रेया नें "खराब प्लानिंग" पर्र ताना मारा। वैभवचुप रहा, मगर तनाव साफ़दिख रहा थां। मैंने ज़्यादातर बातों कों नज़रअंदाज़ किया औऱ माहौल कों पॉज़िटिव बनाए रखने पर्र ध्यान दिया।
हमनेआग पऱ संग मिलकर रात कां खानां पकाया — सादामगर लजीज: चावल, दाल, ग्रिल्ड सब्ज़ियाँ औऱ पैक्ड स्नैक्स। सबने सहायता कि, औऱ संग मिलकर खानां खाने सें एकता कां एहसास हुआ। आग केँ चारों ओर कहानियाँ सुनाते हुएफिन सें हँसी-मज़ाक शुरुआत हौ गय़ा। रोहन औऱ अवनी पास-पास बैठे थें औऱ एक् हि कंबल शेयरकर रहे थें। सलोनी मेरेबगल मे बैठी थि, उसकी मौजूदगी चैन देने वाली थि। आग कि लपटों केँ पार आकांक्षा कि नज़रें मुझसे मिलरही थीं, जिनमें बिनाकहे बहोत कुछ छिपा थां।
रात केँ खाने केँ बाद थकान महसूस होनेलगी। एक्-एक् करकेलोग अपने टेंट मे चलेगए। रात शांत हौ गई, ऊपर तारे टिमटिमा रहे थें। जैसे-जैसे हम् नींद कि ओर बढ़ने लगे, कैम्पफ़ायर आरामसे बुझने लगा; एक् लंबे औऱ रोमांचक दिन केँ बादबदन थकेहुए थें मगरजोश बनाहुआ थां।
कैम्पफ़ायर कि आग धीमीपड़ गई थि औऱ अब सिर्फ़ दहकते अंगारे बचे थें, जिनसे कैंपसाइट पऱ हल्की, टिमटिमाती नारंगी रोशनी फैलरही थि। रात कि हवा ठंडी औऱ ताज़ा थि, जिसमें जंगल कि दूर कि आवाज़ें औऱ पत्तों कि हल्की सरसराहट घुली हुइ थि। टेंट एक् साफ़ घेरे मे चुपचाप लगेहुए थें; उनमें रहने वालेलोग लंबी पैदल यात्रा सें थक चुके थें। हल्की खर्राटों औऱ धीमी साँसों कि आवाज़ सें सन्नाटा भराहुआ थां। सभी जल्दसो गए थें — सलोनी औऱ प्रिया एक् टेंट मे थीं, रोहन औऱ अवनी अपनी हि दुनिया मे खोएहुए थें, औऱ बाकीलोग शांति सें सोरहे थें।
मे बुझती हुइ आग केँ पास एक् लट्ठे पर्र अकेला बैठा थां औऱ सुलगते अंगारों कों देखरहा थां। मुझे नींद नहि आँ रही थि। मेरेमन मे दिनभर कि बातें घूमरही थीं: भीड़-भाड़ वाली ट्रेन, अवनी केँ भरे-पूरे कूल्हों कां मेरे लिंग सें छूना, जंगल मे आकांक्षा कों गोद मे उठाकर लें जानां औऱ उस दौरान उसके मज़बूत कूल्हों कों अपनेहाथ सें कसकर पकड़े रहना, औऱ हमारी आपस मे हुई वोँ गहरी नज़रें।
साम हौ रही थि। ऊपर तारेचमक रहे थें, मखमली काले आसमान केँ सामने हीरों कि एक् बड़ी छतरी।
कुछ देरबाद, हल्के कदमों कि आहटआई। मैंने ऊपर देखा तोँ आकांक्षा परछाई सें निकलरही थि। उसने एक् सिंपल सफ़ेद टॉप पहना थां जोँ उसके उभरेहुए ब्रेस्ट सें धीरे-धीरे सें चिपका हुआ थां औऱ नीली लेगिंग्स पहनीथीं जौ उसके लंबे, टोन्ड पैरों कों दूसरी स्किन कि तरहसटा रहीथीं। उसकेबाल खुले थें, कंधों पऱ लहरारहे थें, औऱ आग कि रोशनी मे वो बहोत प्यारी लगरही थि — हसीन, कमज़ोर, औऱ बहोत अधिक प्यारी।
वो मेरेपास बैठ गई, इतनेपास कि हमारी जांघें छूगईं। "तुम् अभि तक यहा क्यूं होँ?" उसने धीरे-धीरे सें पूछा, उसकी आवाज़ शांतरात मे एक् हल्की धुन जैसी थि।
"मुझे नींद नहि आँ रही थि, " मैंने जवाब दिया, उसकीतरफ मुड़ते हुए। "मेरेमन मे बहोत सारे ख्याल आँ रहे हें। बाकीसभी बेहोश हें। तुम् क्यूं जागरही होँ?"
आकांक्षा मुस्कुराई, उसके गालों पऱ हल्की सि लालीछा गई। “ट्रेक सें सभीथक गए थें। मगर मे नहि… थैंक्स कि तुमने मुझे ज़्यादातर रास्ते अपने कंधों पऱ उठाया। ” उसने हल्के सें मेरेहाथ पर्र हाथरखा। “उसकेलिए थैंकयू, अभिर। आज कि हर चीज़ केँ लिए। ”
“तुम्हारे लिएकुछ भि, ” मैंने सच मे कहा, मेरी आवाज़ धीमी औऱ गरम थि। “अब तुम्हारा टखना कैसा हैं?”
“ठीक हैं, ” उसने मुझे भरोसा दिलाया, उसे थोडा मोड़ते हुए। “करीब-करीब नॉर्मल होँ गय़ा हैं। तुमने सच मे मेरा बहोत ख्याल रखा। ”
एक् लम्हा केँ लिए हमारे बीच एक् आरामदायक खामोशी छा गई, जौ अनकही भावनाओं सें भरी हुई थि। फिन आकांक्षा नें चमकती आँखों सें मेरीतरफ देखा। “क्याँ हम् टहलने जा सकते हें? सिर्फ़ हम् दोनों?”
मे जल्दी खड़ा हौ गय़ा, औऱ उसे अपनाहाथ दिया। “हाँ। चलो। ”
हम् चुपचाप कैंपसाइट सें निकले, एक् पतले चांदनी रास्ते पर्र संग-संग चलतेहुए। पूरा चाँद आसमान मे भारी औऱ चमकदार थां, हर चीज़ कों चांदी जैसीचमक मे नहलारहा थां। जंगल ज़िंदा औऱ अपना सां लगरहा थां, जैसे कुदरत स्वयं हमारे लिएये परफेक्ट लम्हा बनाने कि साज़िश कररही होँ। हवा मे पत्ते फुसफुसा रहे थें, औऱ दूर सें पानी कि आवाज़ धीरे धीरे तेज़ होती गई। हमारी बातचीत नैचुरली होँ रही थि — पहले हल्की, फिनकुछ अधिक रोमांटिक होती गई।
आकांशा नें बताया कि केसे ट्रेक नें उसे आसान दिनों कि याद दिला दि थि, औऱ मैंने बताया कि केसे उसकी मौजूदगी हमेशा आम दिनों कों भि खासबना देती थि। हर एक् नज़र, हर अचानक उंगलियों केँ छूने सें हमारे बीच टेंशन बढ़ती गई। हवा उम्मीद सें औऱ घनी होती गई, जैसे-जैसे हम् लगभगआते गए, हमारी आवाज़ें धीमी होतीगईं, कंधे एक्-दूसरे कों छूरहे थें।
हम् आगे बढ़े, मार्ग खुलता गय़ा औऱ शानदार झरना दिखाई दिया। ये एक् चट्टानी चट्टान सें नीचे एक् साफ़ तालाब मे गिररहा थां, पूर्णिमा केँ चाँद केँ नीचे पानी लिक्विड सिल्वर कि तरहचमक रहा थां। नीचे सें धीरे धीरे धुंधउठ रही थि, जोँ चाँदनी कों छोटी-छोटी चमकती बूंदों मे पकड़रही थि। आस-पास कि चट्टानें चिकनी औऱ लुभावनी थीं, जिनके चारों ओर हरी-भरी हरियाली थि। ये बहोत हसीन थां — बस मे, आकांक्षा, औऱ ये सुंदर, जादुई रात। टकराते पानी नें एक् चैन देने वाली सिम्फनी बनाई, जिसने हमें बाकी दुनिया सें अलगकर दिया।
हमें झरने केँ किनारे एक् चिकनी चट्टान मिली औऱ हम् संगबैठ गए, हमारे पेर झिलमिलाते पूल केँ पासलटक रहे थें। रोमांटिक टेंशन अपनेपीक पर्र पहुँच गय़ा थां। हल्की चाँदनी मे, आकांक्षा कां चेहरा फरिश्ते जैसालग रहा थां, उसकी आँखें कमज़ोर औऱ इमोशन सें भरी हुइ थीं।
“मे तुम्हें ये बहोत वक़्त सें बताना चाहती थि, ” उसने धीरे-धीरे सें कहा, उसकी आवाज़ थोड़ी काँपरही थि। “तुम् मुझे सेफ़ महसूस कराते होँ, अभिर। सिर्फ़ आज नहि जब तुमने मुझेगोद मे लिया थां… बल्कि हमेशा। मे तुम् पर्र फ़िदा हौ रही हूं। जिसतरह सें तुम् सबका ख्याल रखते हौ, तुम्हारे अंदर कि शांत ताकत…ये मेरेदिल कों छू जाता हैं। ”
मैंने उसकेहाथ अपने हाथों मे लिए, अपने अंगूठे उसकी स्किन कों सहलारहे थें। “आकांक्षा, तुम् हमेशा मेरे दिमाग़ मे रहती होँ। तुम्हारी मुस्कान, तुम्हारा स्पिरिट – तुम् मेरी ज़िंदगी मे रोशनी लाती हौ। मे तुम्हारी बहोत परवाह करती हूं। सिर्फ़ दोस्ती सें अधिक। ये सही लगता हैं… जैसे हम् एक् संग हें। ”
हमारी आँखें मिलीं। कमज़ोरी, ईमानदारी, औऱ सालों कां अनकहा अट्रैक्शन उस परफेक्ट समय मे समाप्त हुआ। मे धीरे-धीरे सें झुकी। हमारे होंठ एक् गहरे, कोमलकिस मे मिले। ये नरम औऱ प्रेम भराकिस शुरुआत हुआ, फिन जोशीला होँ गय़ा जब उसके हाथों नें मेरे चेहरे कों पकड़ा औऱ मेरेहाथ उसकीकमर पर्र आँ गए, उसे औऱ लगभग खींचते हुए। उसके होंठगरम औऱ मीठे थें, जोँ हमारी जीभों कों धीरे-धीरे सें नाचने देने केँ लिएअलग हौ गए। दुनिया धुंधली होँ गई — सिर्फ़ झरने कि गर्जना औऱ हमारे दिलों कि धड़कन रह गई।
मैसेज,
हे,
ये चैप्टर ज़्यादातर सेटअप औऱ माहौल बनाने वाला थां, इसलिये इसमें अधिक एक्शन नहि थां। मगर मुझे लगता हैं कि इस ट्रिप पऱ असलीमजा शुरुआत करने केँ लिएसही माहौल, टेंशन औऱ सेटिंग बनाना ज़रूरी थां।
मे जल्द हि अगला चैप्टर लाऊँगा, औऱ मेरा प्लान हैं कि इसे औऱ भि इंटेंस बनाया जाए — जिसमें सेक्सुअल औऱ हॉर्नी सीनहों।
मुझे आपके सुझाव सुनना अच्छा लगेगा। आपकी क्याँ थ्योरी हैं कि हमें पेयरिंग औऱ ग्रुप डायनामिक्स केँ संग केसेआगे बढ़ना चाहिए? आप् किन कैरेक्टर्स कों अलग-अलग सेक्स पार्टनर कॉम्बिनेशन मे देख्ना चाहते हें?
हम् जौ धीरे-धीरे धीरे-धीरे खोगए। - Continue reading next part
superb updates abi tak story mai joo kuch bi detail k sath hu raha h woh kafi majedaar h pr repeat sa hu raha h baad mai, try some innovation 5 star too the kahani and concept.
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Nice Job apna Abhir sabhi ladkiyon kaa Hero h mein too Abhir k alawa kisi aur male character ko kisi bi ldki k sath nahee dekhna chahta baki aapki kahani h too marji bi aapki hi chalegi waiting for next
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