शक कां अंजाम – New Episode
शक कां अंजाम
PART 3
UPDATE 37
देरी केँ लिए माफी चाहता हूं, भाग थोडा थोडे वक्तबाद मिलेगा। मगर स्टोरी जरूरी पूरी होगी। मूल लेखक नें यह कहानी जिस स्थान खत्म कि हैं। मेरा प्रयास हैं स्टोरी वही सें कों आगे बढ़ाने कां औऱ नए मौलिक एपसोड देने कि। एक् पाठक (जिन्हो अपनानाम नहि बताने केँ लिए अनुरोध किया हैं) औऱ मेरा मिलजुल कर प्रयास रहेगा इसकथा कों औऱ आगे लेँ कर जाने कां। लीजिये पेश हैं नयाभाग 3.
Part-3.
" नयाभाग"
प्रशांत नें नीरू कों एक् बारफिन खो दिया थां। नीरू सें उसका तलाक तोँ पहले हि हौ चुका थां मगर नीरू कों वापस पाने कि एक् उम्मीद थि अब वोँ भि नहि बहोत कमबची थीं। प्रशांत नें नीरू कों बहोत बार मोबाइल किया उसके आफिस केँ नीचे खड़ाहुआ मगर इसकाकोई फायदा नहि निकलरहा थां।
नीरूउसे देखती औऱ जल्दी हि मुंह घुमा लेती। प्रशांत कां मोबाइल तोँ वोँ उठाती हि नहि थि। नीरू नें केवल प्रशांत सें हि बात करनाबंद नहि किया थां बल्कि वोँ अपने जीजाजी सें भि बात नहि कररही थि। नीरज नें भि नीरू कों मनाने कि कोशिश कि थि। नीरज चाहता थां कि नीरू केँ संग जोँ नाता एक् बार कायम हौ गय़ा हैं वोँ आगे भि बनारहे। मगर नीरूअब अपने जीजाजी कि नियत कों समझ चुकी थि। इसलिये उसने नीरज सें दूरी हि बनाना सही समझा। प्रशांत कों नीरू केँ आफिस केँ बाहर् प्रतीक्षा करते करतेदो महीने हौ गए थें। अब नीरू कां पेट भि फूलने लगा थां। मगर नीरू कां क्रोध प्रशांत केँ उपर सें कम नहि होँ रहा थां। इसबीच नीरज कां मोबाइल जरूर प्रशांत केँ पास आँ जाता थां।
नीरज : अरे प्रशांत क्यो नीरू कों परेशान कररहे हें।
प्रशांत : मे कहा परेशान कररहा हूं जीजाजी?
नीरज : देखों अब हमारा नाताबदल गय़ा हैं तुम् नीरू केँ पति नहि हौ इसलिये जीजाजी छोडो नीरज हि कहो।
प्रशांत : जी नीरजजी
नीरज : देखअब नीरू तेरेपास कभी नहि आएगी उसका पीछा छोड़दो।
प्रशांत : देखिए मे नीरू सें बहोत प्रेम करता हूं औऱ उसे हासिल करके हि रहूंगा।
नीरज : यह जानते हुए भि कि नीरू कों मे चोद चुका हूं।
प्रशांत : वोँ गलती थि, औऱ शायदसजा भि जोँ भूलवश मेरे सें होँ गय़ा नीरू नें भि गुस्से मे कदमउठा लिया थां।
नीरज : गुस्से मे तौ उसदिन उठा लिया थां मगर उसकेबाद तोँ उसका क्रोध ठंडा हौ गय़ा होगा।
प्रशांत : मतलब आप् क्याँ कहना चाहते हें।
नीरज : यह हि कि नीरू केँ संग उसकेबाद चार पांचबार मे चुदाई औऱ कर चुका हूं।
प्रशांत : मे यह नहि मान सकता। नीरू तोँ आपकेघऱ भि जानां पसन्द नहि करती।
नीरज : अच्छा तोँ एक् कामकर कल तुँ स्वयं हि देख लेना। औऱ घऱआने कि बातकर रहे होँ तौ कल हि नीरू कों मे अपनेघऱ लेकर आउंगा। अब तुँ यहबता मे नीरू कों उसके आॅफिस सें स्वयं घऱ लेकरआउं याँ फिनउसे बुलालूं।
प्रशांत: नीरू आपकेघऱ नहि आएगी
नीरज : ठीक हैं तोँ कलदेख लेते हें।
प्रशांत कों क्रोध तोँ बहोत आँ रहा थां मगर वोँ शांत हि रहा। दूसरे दिन अचानक हि प्रशांत कों आफिस जाते वक़्त नीरजमिल जाता हैं
नीरज : अरे प्रशांत कहां इतनी जल्द मे जारहे हे
प्रशांत : गुस्से मे देखते हुएजी इस टाइम आफिसजा रहा हूं
नीरज : अच्छा अरे तुमसे मैंने कहाकहा थां नीरू कों बुलाने केँ लिएकल मे भूल गय़ा। अभि तुम् दिख तोँ ध्यान आँ गय़ा उसे मोबाइल कर लेता हूं औऱ नीरज प्रशांत केँ सामने मोबाइल निकलता हैं औऱ नीरू कां नाम सर्चकर मोबाइल घुमा देता हैं। मोबाइल कि घंटी बजती हैं औऱ जैसे हि उधर सें मोबाइल उठता हैं.
नीरज : अरे कहां होँ साली साहिबा,। अरे नहि आपके चाहने वालेमिल गए थें रास्ते मे। अरे मैंने थोडे हि उन्हें रोका.चलो एक् बात सुनाआज साम कों तुम् मेरेघऱ पर्र आँ रही होँ। अरेसाम कों ऋतुघऱ पर्र नहि होगी.ऋतु रात 9 बजे तक आएगी। वैसे जल्द हि ऋतु कों भि मे अपने रिश्ते केँ बारे मे बता दूंगा। अरे वोँ रेडी हैं। उसी नें हमें दुबारा इतना लगभग लाया हैं। ठीक हैं सामठीक 6 बजे तुम् मेरेघऱ पहुंच जानां।
औऱ मोबाइल काटने केँ बाद अच्छा प्रशांत भइया आप् आफिस निकलिए मे भि चलता हूं। वैसे भि अब नीरू केँ संग चुदाई तौ कर नहि पाता क्योंकि बच्चे कि दिक्कत होँ गई हैं। मगर बाकीसभी काम तोँ हौ हि जाता हैं। नीरज तोँ चला जाता हैं मगर प्रशांत केँ मन मे कई प्रश्न छोड़ जाता हैं।
प्रशांत मन हि मन सोचता हैं क्याँ ऋतु दिदी भि इसखेल मे शामिल हें। नहि नहि उसदिन तोँ ऋतु दिदी नें नीरू कों बचाने कि कोशिश कि थि उसे समझाने कि भि कोशिश कि थि। मगर नीरज कों ऋतु दिदी नें यह क्यूं बताया कि हम् लोग चुदाई कर चुके हें। क्याँ नीरजसही कहरहा हैं कि ऋतु दिदी नें मुझे फंसाया थां। नहीं नहि ऋतु दिदी कों बीमारी थि। मगरयदि उन्हें बीमारी थि तौ वोँ सेक्स तोँ किसी औऱ सें भि कर सकती थि। उन्होंने मुझे हि क्यो चुना औऱ फिन नीरज कों भि बता दिया। इसका मतलबऋतु दिदी नें मुझे फंसाने केँ लिएयह सभीचाल चली थि। मगरऋतु दिदी कां फायदा क्याँ हौ सकता हैं इन सबके पीछे। प्रशांत केँ मन मे प्रश्न तोँ बहोत उठरहे थें मगरउसे जवाब नहि मिलरहा थां।
साम कों प्रशांत फिन नीरू केँ आफिस पहुंचता हैं आजउसे नीरज कि बात कां टेस्ट भि लेना थां। इसलिये वोँ नीरू केँ सामने नहि आता। नीरू आफिस सें निकलती हैं औऱ चारों ओर देखती हैं उसेआज प्रशांत दिखाई नहि देता। नीरू एक् बारफिन नजर डालती हैं मगर प्रशांत फिन भि नहि दिखता। फिन नीरू अचानक एक् आटो कों रोकने कां इशारा करती हैं औऱ उससेकुछ बातकर ऑटो मे बैठ जाती हैं। प्रशांत थोडा डिस्टेंस बनाकर ऑटो कां पीछा करता हैं प्रशांत आज अपने मित्र कि बाइक लेकरआया ताकि नीरूउसे पहचान नं सके।
आटो जैसे हि नीरज केँ घऱ कि ओर मुढता हैं प्रशांत केँ दिल कि धड़ने बढ़ जाती हैं। उसे लगता हैं कि नीरू प्रशांत केँ घऱ हि जारही हैं। औऱ प्रशांत केँ बुलाने पर्र हि जारही हैं। आटो प्रशांत केँ घऱ केँ सामने रूकता हैं प्रशांत अपनेघऱ कि बालकनी सें देखरहा थां नीरू कों उतरते हुए वोँ देखता हैं तभी उसकीनजर प्रशांत पऱ पड़ती हैं प्रशांत कों नीरज उसके कपड़ों सें पहचान लेता हैं औऱ मुस्कुरा देता हैं।
नीरूऑटो वाले कों पैसे देकरघऱ केँ अंदरचली जाती हैं औऱ प्रशांत भि थोडीदेर बाद वहां सें चला जाता हैं। प्रशांत मन हि मन सोचता हैं: इसका मतलब नीरजसही कहरहा हैं ऋतु दिदी कों सभी मालूम हैं औऱ अब नीरज औऱ नीरू कों पास लाने मे उन्हीं कां हाथ हैं। मगर क्योऋतु दिदी कां क्याँ फायदा हैं?
फिन अचानक प्रशांत केँ मन मे उठरहे सवालों कां जवाबउसे स्वयं हि मिल जाता हैं। कही नीरू कां बच्चा तोँ नहि। नहि नहि ऋतु दिदी कों एक् बच्चा तौ दे चुकी हैं। मगरफिन भि। हांयह हि हौ सकता हैं इसलिये ऋतु दिदी नें नीरू कों मुझसे अलग करने कि योजना बनाई नीरज केँ संग मिलकर। औऱ अब मुझसे मोबाइल पऱ बातकर पताकर रही हैं कि मे नीरू कों वापस लेने कि क्याँ कोशिश कररहा हूं। नहि अब मे ऋतु दिदी सें कभीबात नहि करूंगा औऱ इसकेबाद प्रशांत अपना मोबाइल उठता हैं औऱ ऋतु कां नम्बर ब्लॉक कर देता हैं।
जारी रहेगी
bhay aapki puri kahani mai subse jyada wrong niru hi.q kee pati kaa trust cheak krne k liye kisi or insan k saath so jaogi.presant too victim huwa.too uske saath justice hnaa chiye or niru ko punishment tbhi kahani shi hog I
baat sai haen ye hu shakta haen. halanki point haen prashant ko fir say waisa hee dikhaya ja raha haen. jaisa pahle thaa matlab itne thokar lagne k baad thoda toh maturity aayee hee hongi. ye uske charachter kaa repaat hee hu raha haen.
bhut badhiya update Aamir mitr … halanki aapne prashant ko ek dam chutiya hee dikha diya iss update mai bi . Isko thora smart banao Neeraj ko bi jalil karo thora . bechare hero kee itni naa lo …
शक कां अंजाम – New Episode
फिर से wahee game hu raha haen। neeru janti haen neeraj ki mansha फिर bi woh उसके घर ja rahi haen। shauhar से बात na krr taqat haen लेकिन jeeja jee के घर jaroor jayegi। akhir kyun जब nafrat the unse तो। और फिर prashant shaq kyun na kare woh khud saare karan de rahi haen shaq karne के बाद में kahe ki tm galt hu kahan से woh galt haen। bhale hi jeeja game raha hu बात kuchh और hu। hu shakta haen उसका beta beemar hu ya और bi कोई reason de के bulaya hu। लेकिन बात wahee haen के woh ritu didi के gairmaujoodgi में kyun gayee.
और yehan pe sabse bari बात prashant ko फिर से wiasa hee dikhaya ja raha haen.akhir itne saare jhatke khane के बाद woh thoda तो sambhal jata ye फिर से waisa hee dikhana like ye repat hu raha haen फिर से hoyi ghatnao kaa।
khair waiting for more update।
शक कां अंजाम – New Episode
शक कां अंजाम
PART 3
UPDATE 38
मूल लेखक नें यह कहानी जिस स्थान ख़त्म कि हैं। मेरा प्रयास हैं कथावही सें कों आगे बढ़ाने कां औऱ नए मौलिक एपसोड देने कि। एक् पाठक (जिन्हो अपनानाम नहि बताने केँ लिए अनुरोध किया हैं) औऱ मेरा मिलजुल कर प्रयास रहेगा, इस किस्सा कों औऱ आगे लेँ कर जाने कां। लीजिये पेश हैं भाग 3 Update 38.
नीरज अच्छे सें शक केँ बीज कों प्रशांत केँ मन मे डालने मे कामयाब हौ गय़ा थां तथाउस शक कों साबित करने केँ लिए उसने अपनीबात कों भि साबित कर दिया थां जिसका मुख्य कारण थां प्रशांत कां शक्की स्वभाव कां होना। उसे इसके कारण ठोकर भि लगी थि पर्र कोई भि आदत चाहे अच्छी होँ याँ बुरी इतनी जल्द नहि जाती हैं।
नीरज नें ऐसी परिस्थिति रेडीकर दि थि कि अबशक केँ बीज प्रशांत केँ मन मे फिन अंकुरित हौ गए थें औऱ आँखो सें देखते हुए वो दुबारा शक करने पऱ मजबूर होँ गय़ा थां। वैसेअब उसकाकोई फायदा नहि थां क्योंकि नीरू उससेअलग हौ गयीँ, थि औऱ वो पछता भि रहा थां औऱ नीरू सें मिलने कां लगातार प्रयास भि कररहा थां पर्र नीरू नें कभी भि उसेअब मौका नहि दिया।
वोँ एक् काम ज़रूरकर सकता थां वो निरु कों ख़तभेज सकता थां। पर्र अबख़त लिखने कां रिवाज़ तोँ रहा नहि तौ यह आईडिया उसके दिमाग़ मे आया हि नहि.
नीरज केँ घऱ मे नीरू पहुँच जाती हैं। नीरू कों देखते हुएऋतु उसकेगले मिलती हैं।
नीरू: हैप्पी बर्थडे दिदी !
ऋतु: थैक्यू
आजऋतु कां बर्थडे थां औऱ उस घटना केँ लगभगदो महीने बाद नीरू पहलीबार ऋतु केँ घऱ मे आई थि। हालाँकि निरु नें उस घटना केँ बाद सें जीजाजी औऱ ऋतु दिदी सें भि बात करनाबंद कर दिया थां। पर्र आज बर्थडे पऱ आने केँ लिएऋतु नें उसे बहोत मनाया थां।
ऋतु: औऱ कैसाचल रहा हैं प्रशांत सें बात होती हैं।
नीरू: दिदी उसका तोँ नाम भि मतलो, पहले तौ मे सिर्फ़ यह मानती थि कि वो मुझ पर्र शक करता हैं मगरजब यहपता चला कि जोँ शख्स मेरेउपर शककररहा हैं वो आपकेसंग। छी: मुझे तोँ सोचकर हि र्श्म आती हैं।
नीरज: चलोंउन बातों कों भूलजाओ नीरू।
नीरज नीरू कों गले लगने केँ आगे बढता हैं। मगर नीरू नीरज कों बीच मे हि रोक देती हैं। यह पहलीबार थां जब नीरू नें अपने जीजाजी कों गले लगने सें रोका थां, नहि तौ इससे पहले नीरज केँ एक् इशारे पर्र हि नीरू दौडकर जीजाजी केँ गले लिपट जाती थि। नीरज भि समझ जाता हैं कि नीरू अभि भि उससे नाराज हैं। मगरमन हि मन सोचता हैं कि उसे जल्द नहि हैं जब नीरू कों चोदने मे उसने वर्षों इंतजार किया तौ दुबारा चोदने मे कुछ वक्त इंतजार औऱ कर लेगा वैसे भि नीरू केँ पेट मे बच्चा लम्हा रहा हैं तौ चुदाई तोँ वैसे भि नहि हौ पाएगी। मगर पहले प्रशांत औऱ ऋतु कां कुछ करना होगा। नीरजऋतु सें कहता हैं कि उसे थोडा बाहर् जानां हैं अभि आँ रहा हैं औऱ नीरज बाहर् ऐसी स्थान देखता हैं जहाँ दूर-दूर तक कोई नं हौ औऱ फिन नीरज फ़ोन लगता हैं।
नीरज:हाँ प्रशांत केसे होँ
प्रशांत: ठीक हूं जीजाजी
नीरज:अरे इस वक्त नीरू मेरे हि घऱ पर्र हैं ऋतु कों मैंने पहले हि बाहर् भेज दिया थां। काश तुम् भि यहा होते तौ देख लेते तेरी बीबी मेरा लन्ड केसे चूसती हैं। मगर तुझेही मायूस होने कि ज़रूरत नहि हैं तूँ बस फ़ोन पर्र बने रहनाकुछ मे तेरीकुछ सुनाता हैं। फ़ोन मे सोफे पऱ साइड मे रखरहा हैं ठीक हैं तुँ अपनीओर सें कुछमत केहना औऱ फिन फ़ोन पर्र सिर्फ़ नीरज कि ओर सें आवाजे आती हैं।
नीरज: नीरू, नीरू दोस्त कितना देर लगाओगी जल्दआओ नां.आई दो मिनिट रूकिए। वाउ क्याँ जबरदस्त दिखाई देरही हौ। आप् भि नां जीजाजी। अरे दोस्त। अरेयह आप् क्याँ कररहे हैं। प्लीज पूरे कपडेमत उतारिए। नहि नीरू कपडों मे मजा नहि आता.अरे सिर्फ़ लन्ड चूसने कि बात हुईँ थि औऱ आपनेइसे साफ़ भि नहि किया हैं। पहले साफ़ करकेआइए। अरे रूको-रूको औऱ फिन सिसकियों कि आवाजें आने लगती हैं। हाँ नीरूऐसे हि ऐसे हि। चूसती रहोबस दो मिनिट औऱ। मेरा होने वाला हें औऱ फिन थोडा गूं-गूं कि आवाजेें आती हैं। जीजाजी आप् बहोत बदमाश हैं मुंह मे हि निकाल दिया।
पूरे पांच मिनिट होँ गए थें। नीरज फ़ोन कि तरफ़ देखता हैं जौ अभि भि कटा नहि थां।
नीरज: प्रशांत सुन लिया तूने। वैसे तुझेही भरोसा होगा भि नहि। मगरयह सच हैं अबऋतु यहा होती तौ उसी सें पूछवा देता। घऱ मे नीरूछोड औऱ कोई दूसरा हें नहि।
प्रशांत: मुझे भरोसा नहि होँ रहा कि नीरूयह कर सकती हैं औऱ प्रशांत फ़ोनकाट देता हैं।
प्रशांत जल्दी हि ऋतु कों फ़ोन लगता हैं। वैसे प्रशांत नें ऋतु कां नम्बर ब्लॉक कररखा थां। मगर वो अपनीओर सें तोँ फ़ोनलगा हि सकता हैं। थोडीदेर बादऋतु कां फ़ोन रिंग होने लगता हैं। ऋतु जैसे हि फ़ोन उठाती हैं तौ स्क्रीन पऱ प्रशांत कां नाम लिखा थां। यह नीरू औऱ नीरज दोनों हि देख लेते हें।
ऋतु:अरे प्रशांत इस टाइम मुझे क्यो फ़ोनकर रहा हैं। कोई लफडा तोँ नहि हुआ।
नीरज: दोस्त मुझे क्याँ मालूम एक् काम करों तुम् फ़ोन स्पीकर पर्र करलो देखों क्याँ कहरहा हैं।
ऋतु: हैलो प्रशांत, अरे तुम् हौ कहां तुम्हें मे कुछ दिनों सें ट्राई कररही हूं मगर तुम्हारा फ़ोन हि नहि लगता।
अब प्रशांत केसे बताता कि फ़ोन तोँ उसके ब्लैक लिस्ट मे डालरखा हैं।
प्रशांत: वो दिदी फ़ोन खराब हौ गय़ा थां। इस कारण वैसेइस वक़्त आप् कहां हें मुझे आपसे मिलना थां।
ऋतु:सोच मे पड जाती हैं।
नीरज: दोस्त इस टाइम नीरूयहा हें यदि प्रशांत यहा आएगा तोँ लफड़ा होँ सकता हैं। तूँ उसे टरकादे।
ऋतु:अरे इस वक़्त मिलने कि क्याँ हड़बड़ी हैं। सुभहमिल लेना।
प्रशांत: जी वैसेइस टाइम आप् कहां हें।
ऋतु: वो मे नीरज केँ संग एक् रिश्तेदार केँ घऱ पऱ आई हूं।
प्रशांत: अच्छा नीरज सें बातकरा देंगी।
ऋतु:अरे क्याँ होँ गय़ा हैं तुम्हें, तुम् तोँ नीरज सें बात करने केँ नाम पऱ भागते थें। चलोबता कराती हैं मगरऋतु देखती हैं तौ नीरजवहा नहि थां। वो नीरज कों आवाज़ देती हैं मगर नीरज जवाब नहि देता। अरे नीरज अभि यहीं थां मगर लगता हैं कहींचला गय़ा हैं। आएगा वैसे हि तुमसे बताकरा दूंगी। ठीक हैं औऱ ऋतु फ़ोनकाट देती हैं।
मोबाइल कटने केँ बाद प्रशांत कों यह भरोसा हौ जाता हैं कि ऋतु उससेझूठ बोलरही हैं। वो घऱ पऱ नहि हैं यह तौ साफ़ हैं मगरऋतु कों यह कहने कि क्याँ ज़रूरत हैं कि नीरज भि उसकेसंग हैं। क्याँ सच मे नीरू नीरज कां लन्ड चूसरही थि। यह सोचकर प्रशांत कि आंखों मे आंसू आँ जाते हें। तभी प्रशांत केँ कंधे पर्र एक् हाथआता हैं वो पलटकर देखता हैं।
प्रशांत: अरे नीरजजी आप्
नीरज:हाँ मे देखरहा थां कि तुँ बहोत देर सें खडा हैं। कब तक यहाखडा रहेगा नीरूआज पूरीरात यहा रूकने वाली हैं। देखअब तुँ उसेभूल जाइसी मे तेरी औऱ नीरू कि भलाई हैं।
प्रशांत: सॉरी जीजाजी, प्लीज जीजाजी एक् बार मेरी नीरू सें बात करवादो। बस एक् बार!
नीरज:देख वैसे तौ मुश्किल हैं मगरफिन भि मे कोशिश करूंगा मगर तूँ मेरे औऱ नीरू केँ बीच मे नहि आएगा।
प्रशांत: देखिए नीरू कि जोँ मर्जी होगी वो उसे करने केँ लिए आजाद हैं। वैसे भि अब मेराउस पर्र कोई अधिकार नहि हैं। आप् मेरीबात करा देंगे तोँ आपका एहसान होगा।
नीरज:ठीक हैं कोशिश करता हूं। दोचार दिन मे तेरीबात कराने कि मगर अभि तूँ यहा सें जा। क्योंकि यदि नीरू नें देख लिया तौ तेरेलिए हि मुश्किल हौ जाएगी औऱ हाँ अभि दोचार दिन तुँ नीरू केँ सामने मत आनां।
इसकेबाद प्रशांत चला जाता हैं। दोतीन दिन प्रशांत नीरू केँ आफिस नहि जाता। नीरू समझती हैं कि प्रशांत यहीं कहीं छिपा होगा। एक् ओर प्रशांत कां दिलयह मानने कों रेडी नहि थां कि नीरू नीरज कां लन्ड चूसरही होगी। दूसरी ओर दिमाग़ कहता थां कि जीजाजी नें नीरू केँ अकेले होने कां इसबार ज़रूर फायदा उठाया होगा। उसकेपेट मे बच्चा हैं औऱ इस वक्त नीरू कों भावनात्मक रूप सें भि किसी केँ सहारे कि ज़रूरत हैं औऱ इसी कां फायदा ऋतु दिदी औऱ जीजाजी नें उठाया होगा।
प्रशांत यहसोच हि रहा थां कि उसके फ़ोन कि घंटी बजती हैं। फ़ोन पऱ नम्बर डिस्प्ले हौ रहा हैं। प्रशांत फ़ोन पऱ कुछदेर तक बात करता हैं औऱ उसकी चेहरे पऱ हल्की-सि ख़ुशी दिखाई देती हैं। मगरसंग हि उसके चेहरे पर्र चिंता कि लकीरें भि गहरी हौ जाती हैं। प्रशांत मन हि मन सोचता हैं कि उसकाअब नीरू सें मिलना बहोत ज़रूरी हैं। क्योंकि अब भि वो नीरू सें बात नहि कर पाया तौ फिन शायद नीरूउसे ज़िन्दगी भर न् मिलजाए यह सोचकर प्रशांत अपनामन पक्का कर लेता हैं।
सातआठ दिन लगातार प्रशांत नीरू केँ आफिस केँ बाहर् खडा होता हैं मगर नीरूउसे दिखाई नहि देता। प्रशांत कि मायूसी बढतीजा रही थि। प्रशांत कों यहपता नहि थां कि नीरू कि तबीयत खराब होने केँ कारण वो आफिस नहि आँ रही थि। मगर प्रशांत रोज़साम केँ टाइम ज़रूर नीरू केँ दफ़्तर केँ बाहर् खडा होता थां।
प्रशांत मन हि मनयदि आज भि नीरू नहि आई तोँ फिन उससे मुलाकात नहि होँ पाएगी। मगर वो आफिस क्यूं नहि आँ रही हैं। कहीं उसने अपना ट्रांसफर तौ नहि करा लिया। नहि-नहि नीरूइस शहर कों छोडने कों रेडी नहि थि तोँ ट्रांसफर तोँ नहि कराया होगा। ज़रूरकोई औऱ बात हि होगी। प्रशांत यहसभी सोचरहा थां तभी नीरूउसे आफिस सें बाहर् निकलती दिखाई देती हैं-प्रशांत जल्दी हि नीरू केँ पास पहुँच जाता हैं।
प्रशांत: नीरू मुझे तुमने ज़रूरी बात करनी हैं।
नीरू: देखों मुझे तुमसे किसीतरह कि बात करने मे कोई इंट्रेस्ट नहि हैं।
प्रशांत: मे मानता हूं ऋतु दिदी केँ संग मैंने जोँ किया वो सही नहि थां। मगर उसमें मेरी गलती नहि थि। मैंने कभी उन्हें उस नज़र सें नहि देखा।
नीरू: मुझेइस मैटर पऱ अबकोई बात नहि करनी हैं।
प्रशांत: प्लीज मेरीबात सुनलो मुझेबस दस मिनिट कां वक्तदे दो।
नीरू: हमारे रास्ते अलग होँ चुकेहैँ, इसलिये बेहतर हैं कि तुम् अपना टाइम खराबमत करो।
प्रशांंत नीरू कां हाथ पकडते हुए प्लीज नीरू मानता हूं मुझसे बडी गलती हुईँ हैं मगर तुमने जौ किया
नीरू प्रशांत कि ओर गुस्से सें देखती हैं औऱ अपनाहाथ झटके सें छुडा लेती हैं। देखोयहा यदि तुम् तमाशा करना चाहते होँ तोँ कर सकते हें। मगर मे तुम्हारी कोईबात सुनने कों सजधजकर नहि हूं। तुम् मुझ पर्र अपनेसब अधिकार खो चुके हें। हाँ मेरेपेट मे जोँ बच्चा हैं उसे ज़रूर मे तुम्हारा नाम दूँगी। इसके अलावा हमारे रिश्ते मे अबकुछ भि नहि बचा हैं।
प्रशांत औऱ नीरू केँ बीचयह सब बातें सडक पर्र हौ रही थि दोनों केँ बीचचल रही तकरार कों देखते हुएकुछ लोग भि वहा एकत्रित होना शुरुआत होँ जाते हें। यहसभी देख एक् बुज़ुर्ग व्यक्ति कहता हैं अरे भाईसाहब क्यो लडकी कों छेडरहे हौ।
प्रशांत: जीयह मेरी मित्र हैं
नीरू:जी नहि मे आपकी साथी नहि हूं औऱ आपसेकोई बात भि नहि करना चाहती।
तभी एक् औऱ व्यक्ति आता हैं औऱ प्रशांत कों धक्का देतेहुए कहता हैं कि देख शक्ल सें तौ तूँ शरीफलग रहा हैं मगर तेरी नीयतसही नहि लगारही तभी एक् औऱ व्यक्ति प्रशांत केँ गाल पर्र जोरदार तमाचा मार देता हैं। प्रशांत केँ गाल पर्र पडे तमांचे सें प्रशांत तौ हिलता हैं संग हि नीरू भि हैरान हौ जाती हैं। उसेयह उम्मीद बिल्कुल नहि थि कि ऐसा भि होँ सकता हैं। प्रशांत केँ गाललाल होँ जाते हें यहदेख नीरू केँ चेहरे पऱ तकलीफ़ झलकने लगती हैं। नीरूकुछ कहतीतभी एक् गाडी उसकेपास मे आकर रूकती हैं। औऱ उसमें सें ऋतु औऱ नीरज उतरते हें।
नीरज : अरे क्याँ होँ रहा हैं औऱ तुम् प्रशांत कितनी बारकहन हैं कि यहांमत आयाकरो।
बुजुर्ग : आप् जानते हें इसे
नीरज : हां जानता हूं हमारे परिचित कां हैं औऱ यह लडकी मेरी रिश्तेदार हें। मेरी साली हैं।
बुजुर्ग : ठीक हैं फिन आप् हि इसे समझाईए यह लडकाइस लडकी कों परेशान करन्रहा थां।
दूसरी ओरऋतु नीरू कों लेकर गाडी केँ अंदरबैठ जाती हैं। नीरज प्रशांत कों लेकर थोडीदूर जाता हैं।
नीरज : देखयदि मे चाहता तौ यहांइन लोगों सें तेरी वोँ हाल करवा सकता थां कि तुँ सोच भि नहि सकता थां। मगर नीरू केँ सामने मे कोई तमाशा नहि चाहता। तुँ यहसोच लेँ कि तुँ अपने पैरों पर्र खडाहुआ हैं तौ इसीलिए कि नीरू यहां हें। औऱ तुम्हारी तरफ आखिरी बारबता रहा हूं। मेरे औऱ नीरू केँ बीच मे अब तुँ आने कि सोच भि मत। नीरूइस बच्चे कों जन्मदे दे उसकेबाद मे उसे अपने बच्चे कि मम्मी बनाउंगा।
प्रशांत : देखिए जीजाजी
नीरज : जीजाजी नहि केवल नीरज !
प्रशांत : नीरजजी प्लीज आम समझने कि कोशिश कीजिए मे नीरू केँ बिना नहि रह सकता। औऱ मुझे उससेआज मिलना बहोत जरूरी हैं।
नीरज : अच्छा ऐसा भि क्याँ हैं जौ तुम्हारी तरफ उससेआज मिलना इतना अधिक जरूरी हैं।
प्रशांत : नीरजजी मेरीजॉब दूसरी कंपनी मे लग गई हैं। कंपनी मुझेडेढ साल केँ लिए कनाडा भेजरही हैं। मुझेकल हि निकलना हैं। मैंने आठनौदिन सें नीरू सें मिलने कि कोशिश कररहा हूं मगर वोँ आज आफिसआई हैं। मेरेपास केवलआज कां हि टाइम हैं।
नीरज : मन मे इसेयह पता नहि हैं कि नीरू छुटटी पऱ थि। चलो मेरेलिए तोँ अच्छा हि हैं। औऱ अबडेढ साल केँ लिएयह कांटा निकलरहा हैं। देखों प्रशांत नीरू मे औऱ ऋतु सप्ताह भर केँ लिए घूमने केँ लिएगए थें। इसलिये वोँ आफिस नहि आई थि वैसे हम् लोगों नें बहोत मस्ती कि थि। नीरू मेरेसंग बहोत खुश हैं। वोँ माँ बनने वाली हैं इसलिये मे उसे अधिक सें ज़्यादा खुशी देनी कि कोशिश कररहा हूं मगर तुम् उसे रुलारहे हों। अब मुझेफिन सें उसकामूढ सही करना पडेगा।
प्रशांत : जीजाजी सॉरी नीरजजी प्लीज आप् मेरीबात तोँ समझने कि कोशिश कीजिए।
नीरज : दोस्त क्याँ समझू। अब तुम्हारी भलाईइसी मे कि तुम् यहां सें चलेजाओ वैसेउस दिन तुमने सुना तोँ होगा नीरूकिस तरह सें मेरा लन्ड चूसरही थि। आजरात कों भि इसे अपना लन्ड चुसवाउंगा। अभि इसेचोद तोँ नहि पाउंगा। मगर बच्चा हौ जाएफिन तुम् देख्ना तुम्हें भि लाइव दिखा दूंगा। वैसे भि नीरू कों मुझसे चुदते हुए देखने कि तुम्हारी भि ख़्वाहिश होती हैं। औऱ तुम् देख भि चुके हौ। मगर नीरू कि चुदाई मे तुम्हें एक् हि शर्त पर्र दिखांउगा तुम् शांति सें हमें चुदाई करतेहुए देख्ना यदिबीच मे आओगे तौ तुम्हें यह मौका मे नहि दे सकता।
प्राांत : प्लीज नीरजजी आप् नीरू कों छोड दीजिए।
नीरज : नहि प्रशांत अब नीरू कि मुझेआदत होँ गई हैं।
प्रशांत : आपकेपास आपकी बीबी हैं फिन भि आप्
नीरज : ठीक हैं नीरू एक् बार मेरा बच्चा अपनेपेट मे लेँ लेँ तोँ उसकेबाद सोचूंगा। औऱ नीरज प्रशांत सें विदा होकर अपनी गाडी मे बैठता हैं औऱ नीरू औऱ ऋतु कों लेकर निकल जाता हैं। प्रशांत सड़क पऱ खडारह जाता हैं।
जारी रहेगी
शक कां अंजाम - Continue reading for full story
bhay Aamir Please ab hero kee or na lo usey kuch akal aati huyi dikhao or neeru ko bi thora jaleel karao. Neeru k rape kee koshish honi chahiye neeraj dwaara tab jaakar sayad neeru kuch samajh jaaye.
Relavant source : click here