शक कां अंजाम – New Episode
शक कां अंजाम
PART 3
UPDATE 39
मूल लेखक नें यह किस्सा जिस स्थान ख़त्म कि हैं। मेरा प्रयास हैं किस्सा वही सें कों आगे बढ़ाने कां औऱ नए मौलिक एपसोड देने कि। एक् पाठक (जिन्हो अपनानाम नहि बताने केँ लिए अनुरोध किया हैं) औऱ मेरा मिलजुल कर प्रयास रहेगा, इसकथा कों औऱ आगे लेँ कर जाने कां। लीजिये पेश हैं भाग 3 Update 39। ) ( New-3)
प्रशांत कों समझ मे नहि आँ रहा थां कि वो क्याँ करे कनाडा जाने कां मौकाछोड दे। याँ फिन नीरू कों भूलजाए। आख़िर उसकी ज़िन्दगी कां प्रश्न थां। उसे मालूम थां जौ मौकाआज उसे मिला हैं वो फिनकभी नहि मिलेगा। नीरू सें उसकी मुलाकात भि नहि हौ पारही हैं रोज़ 30-40 बारउसे फ़ोन करता हूं मगर वो फ़ोन नहि उठाती। बहोत सोचने केँ बाद प्रशांत तयकर लेता हैं कि वो कनाडा जाएगा।
कोशिश करेगा कि जाने सें पहलेकम सें कम फ़ोन पर्र नीरू सें बात होँ जाए। वैसे भि डेढसाल कि बात हैं। डेढसाल तोँ यूं हि निकल जाएंगे। मगर नीरज कां क्याँ कियाजाए। नीरू कों इसी नें मुझसे दूर किया औऱ ख़ुद नीरू कों चोदने मे सफल भि होँ गय़ा। अब एक् बारयह नीरू केँ फिन लगभग हौ गय़ा हैं। नीरू कि डिलेवरी होगी उसकेबाद क्याँ फिन सें नीरज नीरू कों छोड़ेगा औऱ हौ सकता हैं प्रेगनेंट भि कर देगा। नहि-नहि नीरू इसकेलिए कभी रेडी नहि होगी। वो मुझसे तलाक लें चुकी हैं ऐसे मे दूसरी विवाह केँ बिना वो प्रेगनेंट किसी क़ीमत पऱ नहि होगी। मगर नीरज उसकी चुदाई तोँ कर हि सकता हैं। हाँयह हौ सकता हैं औऱ जिसतरह सें आज नीरू नीरज कां लन्ड चूसने कों सजधजकर हौ गई हैं। उससेयह तौ साफ़ हैं कि वो नीरज कों तब भि नहि रोकेगी जब नीरज उसकी चुदाई करेगा।
ऋतु दिदी नें भि हमेशा उन लोगों कां संग दिया। ख़ुद जबरदस्ती मेरेसंग सेक्स किया औऱ फिन नीरज कों इसके बारे मे बता दिया। मुझसे डबलगेम खेल दिया। अपनाघऱ बचा लिया औऱ नीरज कों जौ चाहिए थां वो दिला दिया। मेरे सामने ऐसा नाटककर रहीं थि जैसे वो मेरी साइडहों मगरजब पूरागेम सोचो तोँ साफ़साफ लगरहा हैं ऋतु दिदी नें हि मुझे फंसाने कां पूरा प्लान बनाया हैं औऱ जब नीरू, ऋतु औऱ नीरज तीनों हि मेरे खिलाफ हैं तौ मे यहा रहकर भि क्याँ कर लूंगा।
नीरू तौ मुझ सें बात हि नहि करती हैं औऱ पता नहि अगरबात भि होँ जायेगी तौ भि मेरीबात पर्र यक़ीन करेगी याँ नहि। इसकी हि सम्भावना ज़्यादा हैं कि वो अपनी दिदी औऱ जीजाजी कि हि बात मानेगी। इससे अच्छा हैं मे कनाडा हि चला जाउं क्योंकि जोँ मौकाआज मिला हैं वो ज़िन्दगी मे एक् बार हि आता हैं।
प्रशांत एक् बारफिन नीरू कों फ़ोन लगता हैं मगरआज भि नीरू प्रशांत कां फ़ोन नहि उठाती। प्रशांत फिन कनाडा चला जाता हैं। कनाडा पहुँचकर भि प्रशांत लगातार नीरू कों फ़ोन करता हैं। मगर नीरू कां क्रोध अभि भि कम नहि हुआ थां।
इसबीच नीरू कां आफिस जानां बनाहुआ थां। नीरू आफिस सें निकलते वक्त एक् बार ज़रूर आसपास देखती थि। उसेयह महसूस होता थां कि प्रशांत कहीं आसपास छिपकर उसेदेख रहा हैं। नीरू कां यह सिर्फ़ भ्रम थां क्योंकि प्रशांत तोँ इंडिया मे हि नहि थां। नीरूमन हि मन कहती हैं प्रशांत मेरे दिमाग़ सें खेलने कि कोशिश कररहा हैं। सोचरहा हैं कि वो मुझे दिखाई नहि देगा तौ मे परेशान होँ जाउंगी औऱ उसकी बातों मे आँ जाउंगी। मगरयह सभी प्रशांत कि भूल हैं। यदि वो मेरेसंग गेमखेल रहा हैं तौ खेलता रहे। उसकी इन्हीं हरकतों केँ कारण मुझे उससे तलाक लेनापडा हैं। ऐसे व्यक्ति केँ संग तोँ मे बात करना भि पसन्द नहि करूंगी।
इसबीच नीरू केँ डिलेवरी कां वक्त लगभगआता जाता हैं तोँ ऋतुउसे जबरदस्ती अपनेघऱ पर्र शिफ्ट होने केँ लिए मनाने कि जुट जाती हैं। मगर नीरज केँ संग हुइ पुरानी घटना कों याद करतेहुए नीरू किसी भि क़ीमत पर्र ऋतु केँ घऱ जाने कों सजधजकर नहि हुइ थि। नीरज नें भि नीरू कों मनाने कि कोशिश तौ बहोत कि थि। मगर नीरू किसी भि क़ीमत पऱ नीरज केँ घऱ जाने कों सजधजकर नहि थि। कभी कभार ज़्यादा ज़ोर देने पर्र वो उनकेघऱ चली तोँ जाती थि मगर एक् दो घंटेबाद वापस अपनेघऱ आँ जाती थि।
नीरू कों अभि भि भरोसा नहि हौ रहा थां कि नीरज केँ मन मे उसे चोदने कि ललक वर्षों सें थि। इसबीच नीरज बीच-बीच मे प्रशांत सें फ़ोन पऱ बात करता रहता थां। कभी-कभी वो नार्मल बात करता तोँ कभी अपने औऱ नीरू केँ बीच होने वालेऑरल सेक्स केँ बारे बताता। प्रशांत मे नीरज कि बातों मे आकरइस तरह केँ सीन इमेजिन करनेलगा थां जिसमें नीरू नीरज कां लन्ड चूसरही हौ। इसबीच एक् दिनऋतु नीरू केँ घऱ पहुँचती हैं।
ऋतु:देख नीरूअब तेरे गर्भ कों छह महीने होँ चुके हें। तेरी देखभाव कि ज़रूरत हैं यहा तुँ अकेले रहती हैं। कभी भि डॉक्टर कि ज़रूरत पडे तोँ किससे सहायता मांगेगी।
नीरू: नहि दिदी मे सभी संभाल लूंगी।
ऋतु:देख अब पुरानी बातें भूलजा, मे भि भूल चुकी हैं पुरानी बातों कों यादकर अपना हि नुक़सान होता हैं।
नीरू: केसेभूल जाउं दिदी, जिस पर्र भरोसा कियाउसी नें धोखा दिया। जीजाजी पर्र मे कितना भरोसा करती हैं अंधा विश्वास करती थि औऱ उन्होंने हि मुझेचोद दिया।
ऋतु: मगरयह बता उन्हें कमरे मे बुलाया किसने थां, उनके सामने कपडे उतारने कि शुरूआत किसने कि थि? गलती अकेले नीरज कि नहि हैं तेरी भि हैं।
नीरू: दिदी मे तोँ सिर्फ़ प्रशांत केँ शक कों दूर करने केँ लिएयह सभीकर रही थि। प्रशांत केँ शक कि आदत सें मे परेशान थि। मैंने कभी भि प्रशांत केँ करेक्टर पऱ शक नहि किया। मगर वो मेरे करेक्टर पऱ शक करता थां। क्याँ प्रशांत सही थां। जोँ अपने बीबी पर्र भरोसा नहि करता थां।
ऋतु:देख मे यह नहि कहरही कि नीरजसही हैं याँ फिन प्रशांत सही हैं। कहीं न् कहीं दोनों ग़लत थें। मगर तुँ भि सही नहि थि तेरी नीरज कों रोकना चाहिए थां।
नीरू: दिदी मे उस टाइमसमझ हि नहि पाई थि कि मेरेसंग हौ क्याँ रहा हैं। जीजाजी वो सभी मेरेसंग कर सकते हें जोँ उन्हों नें किया। आज भि मुझे भरोसा नहि हौ रहा औऱ फिनजब जीजाजी नें आपकी औऱ प्रशांत कि चुदाई कि बात बताई तौ मे अपनेआपे मे नहि रही।
ऋतु: मैंने तुझसे पहले हि कहा थां कि तूँ जोँ कररही हैं उससे तुम्हारी तरफबाद मे पछताना पडेगा। खैरअब जौ बीत गय़ा उसेभूल जा औऱ नए सिरे सें ज़िन्दगी बिताने कि कोशिश करे। वैसे एक् बातबता तेरे दफ़्तर केँ सामने झगडा होने कि घटना केँ बाद क्याँ प्रशांत नें फिनकभी तुझसे मिलने कि कोशिश कि।
नीरू: दिदी प्रशांत वहाआता ज़रूर होगा वो बातअलग हैं पर्र अब वो मेरे सामने नहि आता। उसका फ़ोन तोँ मेरेपास आता रहता हैं। मगर मे हि उससेबात नहि करती। वो आपको भि फ़ोन करता होगा।
ऋतु: नहि प्रशांत कां फ़ोन मेरेपास भि नहि आता। मैंने कईबार ट्राई किया थां। मगर प्रशांत नें शायद मेरा फ़ोन ब्लेैक लिस्ट मे डाल दिया हैं।
नीरू: क्याँ आपका फ़ोन ब्लैक लिस्ट मे, उसका दिमाग़ तोँ खराब तोँ नहि होँ गय़ा याँ फिन आप् कों कोई गलतफहमी हुइ हैं।
ऋतु: नहि कोई ग़लत फहमी नहि हैं एक् बार मैंने अपने पडोसी केँ फ़ोन सें प्रशांत कों फ़ोन लगाया थां। उसने फ़ोन उठाया मगर जैसे हि मैंने कहा कि मे ऋतुबोल रहीं हूं। उसनेयह कहतेहुए फ़ोनकाट दिया कि उसे मुझसे कोईबात नहि करनी।
नीरू:मगर वो आपसेबात क्यो नहि करना चाहता। उसका दिमाग़ खराब होँ गय़ा हैं।
ऋतु: नहि मुझे लगता हैं कि उसेइस बात कां शक हैं कि मैंने उसकी अपनेसंग चुदाई कि बात जानबूझकर बताई थि।
नीरू:यह व्यक्ति कभी नहि भि नहि सुधर सकता। हमेशा शक करता रहेगा।
ऋतु:चलो जौ हुआउसे भूलजाओ, उसे तौ मे बाद मे समझा दूंगी। मगर तुँ उसे क्षमा करदे। वैसे गलती तूने भि कि हैं।
नीरू: मैने गलती गुस्से मे कि थि औऱ जीजाजी नें भि मेरा भरोसा तोडा थां। मे एक् बार प्रशांत कों क्षमा भि कर सकती हूं। मगर जीजाजी कों कभी भि क्षमा नहि करूंगी।
ऋतु:चलो अब ज़्यादा क्रोध मत होँ औऱ यदि प्रशांत कां अब फ़ोनआए तौ एक् बार उससेबात कर लेना औऱ यदि होँ सके तौ तूँ हि अपनीओर सें फ़ोनलगा लेना।
नीरू: क्यो मे क्यो फ़ोन लगाउं।
ऋतु:देख प्रशांत कितना झुक गय़ा हैं अपनी गलती पर्र वो पछता भि रहा हैं जौ उसनेतुझ पर्र शक किया। यदि तेरी उससे बिल्कुल भि प्रेम नहि हैं तौ तूँ अपनीओर सें फ़ोनमत लगाना। नहि तोँ एक् बारबात कर लेँ।
नीरू:ठीक हैं दिदी यदिआज प्रशांत कों फ़ोन नहि आया तौ मे कल उससेबता करूंगी।
ऋतु औऱ नीरू केँ बीचबात होँ रही थि जिससे एक् व्यक्ति तकलीफ़ मे दिखरहा थां औऱ वो थां नीरज जोँ थोडीदेर पहले हि आया थां उसनेबस इतना सुना थां कि यदिआज प्रशांत नीरू कों फ़ोन नहि करता हैं तौ नीरूकल प्रशांत कों फ़ोन करेगी। मगरफिन अचानक नीरज कों एक् आइडिया आता हैं औऱ वो मुस्कराने लगता हैं नीरज जैसेआया थां वैसे हि वापललौट जाता हैं। हक़ीक़त मे ऋतु नें हि नीरज सें कहा थां कि वो नीरू केँ घऱजाए औऱ उसे मनाये औऱ नीरज नीरू केँ घऱ इसलिये आया थां ताकि नीरू कों मनाया जासके।
मगर नीरज अपने हरामीपण सें बाज नहि आया हैं औऱ अब नीरज एक् नईचाल चलने केँ लिए रेडी थां औऱ नीरज अपनी गाडी मे बैठकर प्रशांत कों फ़ोन करता हैं। पांचछह घंटी जाने केँ बाद प्रशांत फ़ोन उठता हैं।
प्रशांत: हाँ नीरजजी केसे हें।
नीरज: दोस्त मे हि तुम्हे फ़ोन करता हूं तूँ कभी भि मुझे फ़ोन नहि करता।
प्रशांत: जी वो बिजी रहता हैं औऱ मन हि मन कहता हैं कि आप् भि मुझे फ़ोनमत किया करें।
नीरज: दोस्त देख मुझेअब तुझसे तरसआने लगा हैं, मे तेरी सहायता करने केँ लिए सजधजकर हूं।
प्रशांत: खुश होतेहुए कैसी सहायता नीरजजी
नीरज:देख तूँ नीरू कों हासिल करना चाहता हैं मे इसमें तेरी सहायता करूंगा।
प्रशांत: थैक्यू नीरजजी
नीरज:मगर दोस्त एक् तकलीफ़ हैं।
प्रशांत: क्याँ
नीरज: मे तीनचार दिन सें नीरू पर्र प्रेशर बनारहा हूं कि वो तुम को क्षमा करदे। मगर वो सजधजकर नहि होँ रही।
प्रशांत: हाँ मुझे मालूम हैं वो बहोत जिद्दी हैं।
नीरज:मगर तूँ मुझे भि जानता हैं एक् बार जोँ ठान लेता हूं वो हासिल कर लेता हूं। नीरू कों हि देखलो एक् बार तेरे सामने चोद चुका हूं औऱ अब अपना लन्ड कितनी बार चुसा चुका हूं इसकी तोँ अब गिनती भि मुझेयाद नहि हैं।
प्रशांत: ठंंडी अहह भरतेहुए जी
नीरज:देख नीरज एक् शर्त पऱ तुम्हें क्षमा करने कों रेडी हैं।
प्रशांत: कैसी शर्त
नीरज: नीरू नें कहा हैं कि यदि तुँ मेरे औऱ नीरू केँ सम्बंधों कों स्वीकार कर लेता हैं तौ वो तेरेपास आने कों रेडी हैं। जानता तेरे सें बात करने केँ लिए मुझे अपनेघऱ केँ बाहर् आनांपडा हैं।
प्रशांत: हाँ मुझे गाडियों कि आवाजें सुनाई देरही हें।
नीरज:अब तूँ इसबात कां जबाव नीरू कों हि दे देना कि तुम्हारी तरफ मेरे औऱ नीरू केँ सम्बंधों सें कोई आपत्ति नहि हें। वैसे नीरू तुम्हे कल फ़ोन करकेयह बताएगी। तूँ अपना फ़ैसला बता देना औऱ हाँ जौ भि फ़ैसला हौ एक् बार नीरू कों बता ज़रूर देना औऱ नीरज फ़ोनकाट देता हैं औऱ खुलकर हंसने लगता हैं।
दूसरी ओर प्रशांत कि आंखों मे आंसू निकलने लगते हें। उसेसमझ मे नहि आँ रहा थां कि नीरज केँ प्रस्ताव पऱ वो क्याँ जबावदे। नीरज खुलकर प्रशांत सें नीरू कि चुदाई कि अनुमति मांगरहा हैं। इसकेबाद नीरज पहलीबार ज़िन्दगी मे शराब मंगाता हैं औऱ पहली हि बार मे पूरी बोतलपी जाता हैं। शराब केँ नशे मे हि वो कब नींद केँ आगोश मे चला जाता हैं उसेपता हि नहि चलता।
नीरू कों प्रशांत केँ फ़ोन कां इंतजार थां। मगर प्रशांत तोँ शराब पीकर दूसरी हि दुनिया मे थां। सुभह प्रशांत उठता हैं औऱ रोज़ कि तरहजिम जाता हैं औऱ फिन सजधजकर होकर आफिसचला जाता हैं। कनाडा मे प्रशांत कां यह डेली कां रूटीन बन गय़ा थां वो जिम ज़रूर जाता थां। जिस कारण उसका जिस्म गठीला बनताजा रहा थां। कनाडा मे सुभह हौ रही थि औऱ इंडिया मे उस वक्तरात कां वक्त थां। नीरू कों नींद नहि आँ रही थि। वो प्रशांत केँ फ़ोन कां देररात तक इंतजार करतीरही औऱ कब उसकीआँख लगीउसे पता भि नहि चला।
सुभह नीरू आफिसचली गई। उसेपता थां आफिससमय पर्र प्रशांत कभी फ़ोन नहि करता थां। इसतरह सें वो दिन भि बीत जाता हैं। रात कों 9 बजे केँ लगभग नीरू प्रशांत कों फ़ोन करने कां फ़ैसला करती हैं। दूसरी ओर प्रशांत केँ मन मे खलबली मची हुईँ थि। थोडीदेर पहले हि नीरज कां फ़ोनआया थां औऱ उसनेकहा थां कि नीरूको उसने फ़ोन करने केँ लिए सजधजकर कर लिया हैं। वो थोडीदेर मे उससेबात करेगी। मगर नीरू नें साफ़साफ कह दिया हैं कि तुझेही हमारे सम्बंधों कों रजामंदी देनी होगीतभी वो आगे बढेगी।
प्रशांत कों लगरहा थां कि नीरजझूठ बोलरहा हैं। उसकेमजे लेँ रहा हैं। कहां नीरूचार महीने सें उसका फ़ोन नहि उठारही हैं औऱ कहां नीरजकह रहा हैं कि नीरू मुझे फ़ोन करने वाली हैं। लगता हैं वो मुझे अभि भि चुतिया हि समझता हैं। प्रशांत इसीसोच मे थां कि तभी उसके फ़ोन कि घंटी बजती हैं औऱ जैसे हि उसकी नज़र फ़ोन कि स्क्रीन पऱ पडती हैं उसकी आंखें चौडी हौ जाती हैं कि क्योंकि यह फ़ोन नीरू कां थां।
प्रशांत: इसका मतलब नीरजसच कहरहा थां। नीरू नीरज केँ संग हि रहना चाहती हैं औऱ नीरज केँ कहने पर्र हि वो मुझे फ़ोनकर रही हैं। यह सोचकर प्रशांत कि आंखों मे आंसू आँ जाते हें। प्रशांत कांपते हाथों सें फ़ोन उठता हैं औऱ हैलो बोलता हैं। दूसरी ओर
नीरू: हैलो केसे हौ प्रशांत
प्रशांत: ठीक हूं।
नीरू: मुझे तुमसे एक् बात करनी थि बात बहोत ज़रूरी हैं। अबसमझ नहि आँ रहा केसे करूंगा। वो उसदिन जीजाजी केँ संग नीरू इतना हि कहपाई कि प्रशांत कां क्रोध फुटपड़ा।
प्रशाांत: यह हि तुम् अब अपनी जीजाजी केँ संग अपने सम्बंध बनाए रखना चाहती हैं औऱ मुझसे इसकी इजाज़त मांगरही होँ।
नीरू: प्रशांत यह तुम् क्याँ बकरहे होँ।
प्रशांत: अच्छा मे बकरहा इस वक़्त भि तुम् नीरज केँ घऱ पर्र हि हौ औऱ उसका लन्ड चूसरही हौ। उसी केँ कहने पऱ मुझसे बातकर रही हौ। मे सचकहरहा हूं नां।
नीरू: गुस्से मे तुम् कभी भि नहि सुधरोगे प्रशांत। मैंने सोचा थां कि शक कां कीड़ा तुम्हारे दिमाग़ सें निकल गय़ा होगा। मगर तुम् पागल होँ चुके हें। मे अपनेघऱ पऱ हि हूं औऱ जीजाजी अपनेघऱ पर्र।
प्रशांत: मुझसे क्योझूठ बोलरही होँ। मैंने कईबार तुम्हें जीजाजी केँ घऱ जाते देखा हैं औऱ वो भि उस वक़्त जबऋतु दिदी घऱ पर्र नहि होती हैं।
नीरू: गुस्से सें पागल हौ जाती हैं औऱ कहती हैं हाँ जाती हूं औऱ तुम् बोलरहे थें नाँ उनका लन्ड चूसती हूं तोँ मे कहती हूं कि मे रोज़ उनका लन्ड चूसती हूं औऱ इस वक़्त जीजाजी केँ बेडरूम मे हि हूं।
प्रशांत: हंसते हुए आख़िर सच कबूलकर हि लिया नां। तुम् सोचरही हौ मुझेकुछ नहि मालूम मुझे सबकुछ पता हैं।
इधर नीरू गुस्से मे अपना फ़ोनपटक देती हैं औऱ रोने लगती हैं। दोदिन नीरू आफिस भि नहि जाती। इस बीचऋतु लगातार नीरू कों फ़ोन करती हैं मगर नीरू कां फ़ोन गिरने केँ कारण खराब हौ गय़ा थां। इसलिये फ़ोन लगता नहि हैं। वहीं प्रशांत भि सोचता हैं कि उसने कहीं नीरू सें ज़्यादा तौ नहि बोल दिया। वैसेयदि बोल भि दिया होँ तोँ क्याँ अब मुझे नीरू केँ संग वैसे भि रहना नहि हैं।
जारी रहेगी
हा साथीये कथा औऱ जबरदस्त हौ सकती हें, जब इसमे प्रशांत revenge लेने आएगा अपने नीरज जीजा सें, तब स्टोरी मे मज़ा आएगा
bhay es story ko es prakaar badhao kee Neeraj say revenge le sake or ritu or Neeru Neeraj say nafrat kare.Neeru ko apni galti kaa ehsas hu. Great going bhay.Superb
शक कां अंजाम – New Episode
hu क्या raha haen story में kuchh bi samajh na aa raha haen। prashant chutiya thaa और अब और jyada chutiya hu गया haen। woh neeraj से बात hi kyun krr raha haen। ritu kaa no block list में dala हुआ haen लेकिन neeraj से lagatar contact में haen। sara samasya ki jar तो neeraj hee haen लेकिन फिर bi ye उसकी baate mann raha haen। neeraj ne bol दिया mein help karoonga और ye maan bi गया। ki woh help karega। neeru aadmi hee haen एक baar bi उसके घर ja के ye बात na krr shakta thaa joo office के बाहर hi wait krta thaa जब itna hi urgent बात krna thaa तो। और जब isse shaq haen तो chhor kahe na deta haen jhanjhat hi khatm। अब कल ko bole ki muze ye rishte bi manjoor haen.
और ye joo phone call lagatar canada से aa raha haen। अब mana prashant chutiya haen लेकिन neeru bi तो na thee। usse na ptaa ki ye international phone call haen। और जब phone laga rahi thee तब hi ptaa chl jana thaa ki phone international ja raha haen। bhay sara logic neeraj के liye hi rakhha haen kuchh prashant और neeru के liye bi laga दो।
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bhay
Kya chutiyapa h bhay aapse request h की ya too neeru और Prashant ko कुछ akal dedo taaki wo कुछ सोच sakein और कुछ aage badhein वरना sidhe sidhe neeru ko neeraj की rakhail banwao और neeraj neeru kaa istemal एक Randi की prakaar karein khud bi chosen और sab से chudwaaye.
Warna bhay अब kahani में interest आना बंद hu raha h
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