शक कां अंजाम – New Episode
शक कां अंजाम
PART 3
UPDATE 46
मूल लेखक नें यह किस्सा जिस स्थान खत्म कि हैं। मेरा प्रयास हैं स्टोरी वही सें कों आगे बढ़ाने कां औऱ नए मौलिक एपसोड देने कि। एक् पाठक (जिन्हो अपनानाम नहि बताने केँ लिए अनुरोध किया हैं) औऱ मेरा मिलजुल कर प्रयास रहेगा, इस किस्सा कों औऱ आगे लें कर जाने कां। लीजिये पेश हैं भाग 3 Update 46। ( New-10)
प्रशांत उसकेबाद नीरज कों बेटे निशंक कां फोटो भेजने केँ लिए शुक्रिया करता हैं औऱ फ़ोनबंद कर देता हैं।
प्रशांत कों जब सें नीरज नें नीरू कि चुदाई कि रिकॉर्डिंग मोबाइल पर्र सुनवाई थि, उसकेबाद प्रशांत कों पूरा भरोसा हौ गय़ा थां कि नीरूअब पूरीतरह सें नीरज कि हौ चुकी हैं। मगर वोँ अपने बच्चो कों लेकर जरूर थोडा परेशान थां। पहला बच्चा तोँ ऋतु कों दे दिया थां। अब दूसरा बच्चा कों भि क्याँ वोँ उसेदेख नहि पाएगा। प्रशांत जब भि नीरू कों फ़ोन करता थां उसे नीरज हि उठाता थां इसलिये उसकेबाद वोँ नीरू केँ नंबर पऱ भि बात करना भि बहोत कमकर देता हैं। महीने मे बामुश्किल एक् बार हि वोँ नीरज केँ मोबाइल कों उठाता हैं। वोँ भि तबजब नीरज कां व्हाट्ऐप पर्र मैसेज आता हैं कि जरूरी बात करनी हैं। इससे नीरज कों भि लगता हैं कि प्रशांत कां काँटा करीब निकल हि गय़ा हैं.
फिन प्रशांत केँ वापिस लौटने केँ करीब२ महीने पहले एक् दिन प्रशांत केँ फ़ोन मे कुछ खराबी आँ जाती हैं तोँ वोँ फ़ोनठीक करवाने जाता हैं.
मेकानिक : सर इसमें बहोत सारी ऑडियो रेकॉर्डिंग पड़ी हुइ हैं। जिसके कारण इसमें डाटा स्पेस ख़त्म हौ गय़ा हैं। आप् केँ फ़ोन मे आप् जौ भि बाते करते हौ सबकी रिकॉर्डिंग हौ जाती हैं क्योंकि उसमेऑटो रिकॉर्डिंग कां फीचरडला हुआ हैं। आप् कहें तौ उनको डिलीट करदू। स्थान होँ जायेगी तोँ फ़ोनठीक हौ जाएगा।
प्रशांत : नहि डिलीट मतकरो। उनका बैकअप एक् अलग डाटा कार्ड मे करदोफिन डिलीट कर देना
मेकानिक वैसा करकेफ़ोन ठीककर देता हैं.
घऱ मे आकर प्रशांत कंप्यूटर मे लगाकर चेक करता हैं उसमे नीरज सें सारी बातचीत कि रिकॉर्डिंग भि थि। वोँ सभी सुनता हैं औऱ नीरज सें बातचीत कि कुछ रिकॉर्डिंग ऋतू कों भेज देता हैं औऱ संग मे मैसेज करता हैं औऱ नीरू कों भि फ़ोन मिलाता हैं औऱ घंटी कि आवाज़ नीरज कि अलमारी सें आँ रही होती हैं। ऋतूउसे निकाल कर देखती हैं तौ उसमे नीरू केँ पुराने नंबर वालेसिम केँ संग एक् फ़ोनमिल जाता हैं। जिसमे प्रशांत कां काल थां औऱ तब तक फ़ोनकट जाता हैं। ऋतूउस फ़ोन कों चेक करती हैं।
मगर उसकेबाद भि ऋतू कां कोई जवाब नहि आता हैं औऱ प्रशांत कां शक पुख्ता होँ जाता हैं कि ऋतू भि नीरज कां संगदे रही हैं औऱ यहबात उसने नीरज केँ मुँह सें भि एक् दोबार सुनी थि कि सभीऋतू कि सहमति सें हौ रहा हैं इसलिये उसनेकभी उसकेबाद ऋतू कों संपर्क करने कि कोशिश भि नहि कि बल्कि इसगम मे अकेले हि घुलता रहता हैं
टाइम अपनीगति सें बीतरहा थां बच्चा एक् साल कां होँ जाता हैं।
ऋतु : आज छोटू कां बर्थडे हैं, आज तौ प्रशांत कों जरूर आनां चाहिए।
नीरू : दिदी इसे छोटूमत कहाकरो, इसकानाम निशंक हैं।
ऋतु : वोँ ठीक हैं मे ते छोटू हि कहूंगी। वैसे प्रशांत सें बात हुईँ याँ नहि डेढसाल सें अधिक कां टाइम हौ गय़ा हैं।
नीरू : नहि दिदी सालभर सें कोईबात नहि हुईँ हैं।
जिसदिन प्रशांत केँ बेटे कां जन्मदिन थां प्रशांत नें उसीदिन इंडिया लौटने कि तैयारी कि औऱ दुसरे दिन प्रशांत इंडिया लौटआता हैं। प्रशांत सबसे पहले अपनेघऱ जाता हैं जहां वोँ अपने मां बापू सें मिलता हैं।
प्रशांत लौटआया हैं नीरज कों इसकी जानकारी नहि थि मगर नीरज कों यह जरूरपता थां कि प्रशांत अब जल्द हि इंडिया लौटेगा। जिससेे नीरज जरूर चिंतित दिखने लगता हैं। क्योंकि उसने सोचा थां कि डेढसाल मे वोँ नीरू कों फिन सें अपनेजाल मे फंसा लेगामगर ऐसा नहि हुआ औऱ नीरू नें उसेमाफ नहि किया। नीरू कों नीरज कि मंशासमझ मे आँ चुकी थि इसलिये वोँ नीरज सें दूर हि रहती हैं।
प्रशांत नें भि नीरज कों यह नहि बताया थां कि वोँ इंडिया कबजारहा हैं। क्येंकि वोँ नहि चाहता थां कि नीरजउसे अपनी औऱ नीरू कि प्रेमलीला लाइव दिखाए। इंडिया आने केँ बाद प्रशांत नें सोचा कि एक् बार अपने बच्चों कों देख लियाजाए। शायद नीरूउसे अपनेसंग आफिस लाती हौ।
प्रशांत एक् दिनसाम केँ वक़्त एक् बारफिन नीरू केँ आफिस केँ बाहर् पहुंच जाता हैं। अपनी गाडीसड़क किनारे खडीकर प्रशांत टहलने लगता हैं थोडीदेर बादउसे आफिस सें नीरूआती दिखाई देती हैं मगर उसकेहाथ मे बच्चा नहि थां। प्रशांत केँ मन मे कई विचार आने लगता हैं क्याँ नीरू नें बच्चा किसी कों दे दिया हैं। याँ फिन दूसरा बच्चा भि ऋतु केँ हि पास हैं। नीरूऑटो कां प्रतीक्षा कररही थि एक् बार उसकीनजर प्रशांत पऱ भि पडीमगर वोँ प्रशांत कों दूर सें पहचान हि नहि पाई। क्योंकि दाडीमूछ औऱ मजबूत हाइट काठी मे नीरू नें प्रशांत कों कभी देखा हि नहि थां। प्रशांत नीरू कों एकटक देखता रहता हैं तभी एक् ऑटोआता हैं औऱ नीरू उसमें बैठकर चली जाती हैं।
दोतीन दिनयह हि चलता रहता हैं। नीरू कि नजर प्रशांत पऱ पडती हैं मगर वोँ उसेनजर अंदाज हि करती हैं। नीरूयह समझती हैं कि यह युवक कहीं आसपास हि रहता होगा। दाडी मूछे औऱ मजबूत हाइट काठीदेख नीरू कों उससे उल्टा डर हि लगता हैं।
दूसरी ओर प्रशांत केँ मन मे उथल पुथलमची हुई थि। इंडिया मे उसे कंपनी मे ज्वैइन करने कां वक़्त आँ गय़ा थां। जिसशहर मे नीरूजॉब करती थि वहां प्रशांत कि कंपनी कि ब्रांच भि थि। मगरउसे दूसरे शहर कि मैन ब्रांच कों संभालना थां। इसकेलिए उसे एक् दिनबाद हि जानां थां। नीरू सें मिलने मे उसे ज़्यादा इट्रेस्ट नहि थां वोँ अपने बच्चे कों देख्ना चाहता थां।
प्रशांत सोचता हैं कि आज नीरू कां पीछा करके देखाजाए कि यह जाती कहां हें क्योंकि दोदिन नीरू केँ ऑटो मे बैठती हि प्रशांत दूसरे रास्ते सें नीरज केँ घऱ पहुँचा मगरउसे नीरू नीरज केँ घऱ जातेहुए नहि दिखी। जबकि नीरज सें जब भि उसकी मोबाइल पऱ बात होती थि तौ नीरजयह हि कहता थां कि नीरूअब उसी केँ घऱ मे शिफ्ट हौ गई हैं औऱ वोँ, नीरू औऱ ऋतु एक् हि विस्तर पऱ सोते हें।
नीरज केँ घऱ पऱ जब नीरू नहि मिलती हैं तौ प्रशांत अब नीरू कां हि पीछा करने कि सोचता हैं। रोज कि तरह नीरूआज भि ऑटो सें अपनेघऱ जारही थि। प्रशांत थोडी दूरी बनाते हुएऑटो कां पीछाकर रहा थां। जैसे जैसेऑटो कुछदूर जाने केँ बाद रूकता हैं औऱ नीरू उसमें सें उतरकर एक् घर-मकान मे जाती हैं मगर थोडीदेर बाद हि वापस आँ जाती हैं। अब उसकीगोद मे एक् बच्चा थां। प्रशांत बिल्डिंग कि ओर देखता हैं औऱ देखते हि समझ जाता हैकियह कोई क्रेच हैं। औऱ नीरू यहां बच्चा छोडकर जॉब करने केँ लिए जाती हैं। प्रशांत जल्द सें फोन निकलता हैं औऱ बच्चे केँ फोटो लेने कि कोशिश करता हैं औऱ बच्चे कां कोई फोटो क्लीयर नहि आता। अब प्रशांत केँ मन मे हि कई प्रश्न उठने लगते हैं।
नीरूयदि नीरज केँ संग रहती हैं तौ वोँ अपना बच्चा क्रेच मे क्यो छोडती हैं। औऱ नीरज केँ घऱ पर्र तोँ यह नहि होती हैं यह तोँ साफ हैं। क्योंकि तीनचार दिन सें मे लगातार देखरहा हूं। औऱ जिसओर नीरू अभि गई हैं नीरज कां घऱ भि उसओर नहि हैं। तभी प्रशांत कों ध्यान आता हैं कि उससे झगड़े केँ बादजिस घऱ मे शिफ्ट हुइ थि वोँ घऱउसी ओर थां जिसओर नीरू कों ऑटो गय़ा थां। प्रशांत एक् बारफिन गाडी मे बैठता हैं औऱ नीरू केँ पुराने घर-मकान कि ओर अपनी गाडी दौडा देता थां। प्रशांत बहोत देर तक नीरू केँ घर-मकान केबाहर अपनी गाडी मे बैठा रहता हैं। वोँ यह क्लीयर करना चाहता थां कि नीरू क्याँ अभि भि यहीं रहती हैं। बहुतदेर तक उस बिल्डिंग सें कोई बाहर् नहि निकलता तोँ प्रशांत अपनेघऱ चला जाता हैं।
दूसरे दिन प्रशांत दूसरे शहरचला जाता हैं। जहांउसे जॉब ज्वैइन करनी थि। कंपनी कि ओर सें उसेघऱ, गाडी, नौकरसब सुविधाएं दि गई थि।
एक् महीने तक प्रशांत कों वक़्त नहि मिलता। इसबीच नीरज कां मोबाइल भि दोबार आता हैं मगर प्रशांत उससेयह हि कहता हैं कि अभि वोँ कनाडा मे हि हैं। तीनचार महीने लग सकते हें आने मे। प्रशांत कों अबशक होने लगता हैं कि नीरज उसकेसंग कोईबडा गेमखेल रहा हैं। औऱ ऋतु उसकासंग देरही हैं। प्रशांत केँ घऱ लौटते हि उसकेघऱ वालेउस पऱ दूसरी विवाह कां दबाव बनाना शुरुआत कर देते हें।
प्रशांत केँ चाची औऱ मम्मी बोलते हें बेटा अब तूँ विवाह कर लेँ।
प्रशांत : नहि माँ अब मे विवाह वादी करने केँ मूढ मे नहि हूं। विवाह एक् बार कि जाती हैं जौ आप् लोगों कि मनपसंद सें कि थि।
प्रशांत कि चाची : बेटा ऐसेकाम केसे चलेगा एक् तूँ हें जिसका अपनी पत्नि सें तलाक होँ गय़ा हैं औऱ एक् मेरा बेटा हैं जिसकी पत्नि हादसे मे मारी गई हैं। मेरा बेटा भि विवाह केँ लिए रेडी नहि हैं।
प्रशांत : अरे सूरज (प्रशांत केँ चाचा कां बेटा) कों समझाइएगा।
प्रशांत कि मम्मी : बेटे सूरज भि तुझ पर्र गय़ा हैं आखिर हैं तोँ एक् हि खानदान कां खून।
प्रशांत : मम्मी मे सूरज कों समझाने कि कोशिश करूंगा।
इसकेबाद प्रशांत सूरज कों बहोत समझाता हैं औऱ प्रशांत केँ समझाने पऱ सूरज विवाह केँ लिए सजधजकर होँ जाता हैं। सूरज भि प्रशांत सें कहता हैं मगर प्रशांत उससेकह देता हैं कि वोँ अभि दोतीन साल विवाह केँ मूढ मे नहि हैं क्योंकि इंडिया मे उसे बहोत काम हैं दोतीन सालबाद विवाह केँ बारे मे सोचूंगा। प्रशांत किसी भि तरह सूरज कों टालना चाहता थां। पर्र प्रशांत केँ मां बाप उसके पीछेपड़े हि रहते हें कि वोँ दुबारा विवाह कर लेँ औऱ घऱबसा लेँ.
प्रशांत फिनजॉब पर्र चला जाता हैं। ऋतु केँ मन मे उथल पुथलमची हुइ हैं। क्योंकि उसने नीरज केँ बारे मे जोँ कुछ सुना थां उससेउसे बडा झटकालगा थां। मगर अभि तक उसकेपास इसकाकोई सबूत नहि थां। औऱ उसनेअब जोँ कुछ सुना उसकी सच्चाई कि पडताल मे जुट जाती हैं।
इसबीच एक् दिनऋतु, नीरजमॉल घूमने कां प्रोग्राम बनाते हें।
ऋतु : एक् कामकरो नीरू कों भि संग मे लेँ चलते हें।
नीरज : लें चलोमगर वोँ जाने कों रेडी नहि होगी।
ऋतु : देखते हें, वैसेऋतु कों भि पता थां नीरू नीरज केँ संगमॉल जाने कों शायद सजधजकर नहि होगी। मगर फिन भि उसे हल्की सि उम्मीद दिखती हैं तोँ वोँ नीरज सें कहती हैं मॉल तौ नीरू केँ घऱ केँ पास मे हि हें। एक् काम करते हें पहलेउसी केँ घऱ पऱ चलते हें। शायद हमारे संग चलने कों रेडीहने जाए। नीरू केँ घऱ पऱ पहुंचने केँ बाद जाते हें औऱ ऋतु जबरदस्ती नीरू कों भि अपनेसंग चलने कों कहती हैं मगर नीरूसाफ साफमना कर देती हैं। मगरतभी नीरज कों किसी जरूरी काम सें जानां पड़ जाता हैं। तौ नीरजऋतु कों नीरू केँ घऱ छोडकर चला जाता हैं।
ऋतु : चलअब तोँ फटाफट सजधजकर हौ जा हम् लोग घूमने चलरहे हें।
नीरू : नहि दिदी मेरामन नहि हैं कहीं जाने कां।
ऋतु : दोस्त अब तौ नीरज भि चला गय़ा मुझे मालूम हैं तुम्हें नीरज सें अब प्रोब्लम हैं। मे भि नीरज केँ संग चलने पर्र तुझ पऱ कभीजोर नहि डालती हूं। क्योंकि मुझेउस पर्र कोई भरोसा नहि हैं। आज तुम्हारी जौ हालत हैं उसके पीछे भि नीरज हि जिम्मेदार हैं।
नीरू : दिदी केवल जीजाजी हि जिम्मेदार नहि हैं प्रशांत भि जिम्मेदार हैं जिसने कभी मुझे समझा नहि हमेशा शक हि करतारहा। औऱ आज भि शक करता हैं।
ऋतु : प्रशांत केँ शक करने केँ कुछ तौ कारणरहे होंगे। कोईऐसे हि किसी पऱ शक नहि करता।
नीरू : कोई कारण नहि थां मात्र मे जीजाजी पऱ अंध भरोसा करती थि, यदिउसे जीजाजी पऱ शक थां तोँ चलोमान भि लूंमगर वोँ मुझ पर्र भि शक करता हैं सालभर पहलेजब मेराफोन उस केँ चक्कर मे खराबहुआ थां उस टाइम उसने जोँ बोला थां वोँ शब्द तोँ मे दुहरा भि नहीं सकती।
ऋतु : यह हि बात तौ मुझे परेशान कररही हैं वोँ कौन हैं जौ प्रशांत केँ मन मे अभि भि शक केँ बीजबो रहा हैं। अबयहसभी बातें छोड़ नीरज हैं नहि तूँ मेरेसंग चलरही हैं।
नीरू : ठीक हैं आप् इतनाकह रही हैं तौ चलतीहंू औऱ नीरू थोडीदेर मे रेडी हौ जाती हैं। इसबीच ऋतु नीरज कों नीरू केँ सामने हि मोबाइल लगाकर कहती हैं कि नीरू कहीं जाने कों सजधजकर नहि हौ रही हैं वोँ दोतीन घंटे नीरू केँ घऱ पऱ हि रूकेगी औऱ फिनऑटो सें अपनेघऱ चली जाएगी। ऋतु औऱ नीरूमॉल मे घूमरहे थें औऱ बच्चों केँ दोस्त भि खेलरहे थें। तभी अचानक नीरू कि नजर एक् दुकान पर्र पडती हैं औऱ नीरू वहींरूक जाती हैं।
ऋतु : अरे क्याँ हुआ यहां क्योखडी रह गई।
नीरू : वोँ देखउस दुकान मे
ऋतु : अरे वोँ तोँ कपडो कि दुकान हैं, मगर छोटे केँ कपडे तोँ वहां मिलेंगे नहि।
नीरू : दिदी मे कपडो कि बात नहि कररही हें दुकान मे सामने जोँ दो महिलाएं बैठी हें मे उनकीबात कररही हूं।
ऋतु : दुकान कि ओर देखते हुए तोँ इसमें क्याँ हैं।
नीरू : उनमें सें जौ नीली साडी पहनेहुए हें वोँ प्रशांत कि मम्मी हें औऱ दूसरी वाली शायद उसकी चाची हैं। वोँ देहात मे रहती हैं उनसे मे अधिक नहि मिली इसलिये उनके बारे मे श्योर नहि हुईँ मगर नीली साडी मे तोँ प्रशांत कि माँ हि हें। मगरयह इतनी खरीददारी किसके लिएकर रही हें।
ऋतु : दोस्त तूँ क्योंं चिंता कररही हैं, खरीदरहे होंगे अपनी किसीबहू केँ लिए याँ बेटी केँ लिए।
नीरू : नहि दिदी, प्रशांत अपने माँ-बाप कां इकलौता लडका हैं। ऐसे मे प्रशांत कि मम्मी अरे उसके पापा भि आएहुए हें। उन पऱ नजर हि नहि गई। यहलोग यहां रहते भि नहि हैं।
ऋतु : एक् कामकर तुँ थोडा आगेजा बच्चों कों लेकर मे पता करकेआती हूं कि माजरा क्याँ हैं। औऱ नीरू बच्चों कों लेकर थोडेआगे चली जाती हें जबकि ऋतु दुकान केँ अंदर जाकर प्रशांत कि माँ केँ पास हि बैठ जाती हें।
दुकनऋतु कों पूछता हैं तोँ वोँ उसेकुछ साडी दिखाने केँ लिए बोलता हैं। थोडीदेर मे ऋतु हि अपनीओर सें बात शुरुआत करती हैं।
ऋतु : आंटी आपको मैंने कहीं देखा हैं।
प्रशांत कि माँ : अरे बेटी मे तोँ इसशहर मे हि नहि रहतीआज हि आई हूं तूने कहां देख लिया।
ऋतु : अच्छा मुझेलगा कहीं देखा हैं। असल मे मेरा मित्र थां उसकी माँ कि शक्ल हूबहू आपसे मिलती हैं। इसलिये धोखाखा गई।
प्रशांत कि मम्मी : कोईबात नहि बेटी होँ जाता हैं।
ऋतु : वैसे आप् यह साडियो अपनी बेटे केँ लिए खरीदरही हें।
प्रशांत कि माँ : अरे मेरे तौ बेटी हि नहि हैं साडियां तौ अपनीबहू केँ लिए लेँ रही हूं।
ऋतु : अच्छा तौ घऱ मे विवाह हैं। आपके बेटे कि।
प्रशांत कि माँ : हां बेटी बडी मुश्किल सें बेटा सजधजकर हुआ हैं पहली बीबी तौ उसेबीच रास्ते मे हि छोड गई। अब अगले सप्ताह विवाह हैं।
ऋतु कों बहोत बड़ा झटका लगता हैं। वोँ सोचती हैं कि प्रशांत कि अगले सप्ताह विवाह होने वाली हैं। थोडीदे बाद वोँ पूछती हैं आंटी विवाह तौ आप् देहात सें हि करोगी।
प्रशांत कि मम्मी : नहि बेटा विवाह केँ होटल डीवीएस बुककर लिया हैं। 16 तारीख कों विवाह होनी हैं। बेटी तूँ कहीं आसपास रहती हैं क्याँ।
ऋतु : हां मेरापास मे हि घऱ हैं। अच्छा आंटी चलती हूं
इसकेबाद ऋतुकोई प्रश्न नहि करती औऱ दुकान सें बाहर् आँ जाती हैं। औऱ नीरू केँ पास पहुंचती हैं।
नीरू : यहलोग यहांकिस लिएआए हें दिदी
ऋतु : चलो पहलेघऱ चलते हें उसकेबाद बात करेंगे।
नीरू : कुछ गडबड हैं दिदी क्याँ।
ऋतु : तूँ चल तोँ सहीकुछ भि गडबड नहि हैं।
नीरू : तोँ बताइए यहलोग क्यो यहांआए हें औऱ इतनी खरीददारी किसलिए होँ रही हैं।
ऋतु : पहलेघऱ चलफिन वहींबात करेंगे। नीरू कां मन भि बेचैन हौ रहा थां। वोँ ऋतु केँ संगघऱ आती हैं।
नीरू : अब बताइये क्याँ बात हैं।
ऋतु : एक् बातबता प्रशांत कां कोई भइया हैं क्याँ।
नीरू : नहि प्रशांत अपने माँ बाप कां इकलौता लडका हैं। बात क्याँ हैं।
ऋतु : देख तूँ शायदसहन नहि कर पाएगी। मैने भि प्रशांत कों ऐसा नहि समझा थां। मे समझती थि कि वोँ तुझसे प्रेम करता हैं।
नीरू : बात क्याँ हैं औऱ रहीबात प्रेम कि तोँ मुझे मालूम हैं प्रशांत मुझसे कितना प्रेम करता हैं। प्रेम करता होता तौ बच्चे कों देखने जरूरआता। खैर वोँ छोडोयह बताओबात क्याँ हैं।
ऋतु:देख प्रशांत दूसरी विवाह कररहा हैं।
नीरू : क्याँ
ऋतु : हां औऱ अगले सप्ताह 16 तारीख कों उसकी विवाह हैं। यहींपास मे डीवीएस होटल सें यह विवाह होगी।
प्रशांत कि विवाह कि बात सुनकर नीरू विस्तर पर्र गिर पडती हैं उसकी आंखों मे नमी आँ जाती हैं।
ऋतु : अरे तुम को क्याँ हुआ, तूँ तौ प्रशांत केँ नाम पऱ भडकती थि। मुझे मालूम हैं तूँ आज भि प्रशांत सें प्रेम करती हूं। उसेआज भि भूल नहि पाई हैं। शायद तुम को अपने फैसले पर्र पछतावा हौ रहा हैं।
नीरू : अपनी आंखों मे आए आंसू कों पोछते हुए। नहि दिदी मुझे अपने फैसले पऱ कोई पछतावा नहि हैं। उल्टे आज मुझे अपने फैसले पऱ गर्व हौ रहा हैं कि मैनेसही टाइम पऱ सही फैसला लिया। हां प्रशांत सें मेरी विवाह हुईँ थि इसलिये उसकेलिए मन मे थोडी स्थान अभि भि हैं। भले हि उसकेमन मे मेरेलिए कोई स्थान नं होँ। मगर मे न् तोँ उसके जैसी हूं औऱ न् हि होँ सकती हूं्र।
ऋतुसमझ जाती हैं कि नीरू कों प्रशांत कि विवाह कां दुख बहोत हैं मगर शायद वोँ स्वयं कों संत्वना देने कि कोशिश कररही हैं।
नीरू : वैसे आपने तारीख कौन सि बताई थि विवाह कि।
ऋतु : क्यो जानां हैं क्याँ तुम्हे भि विवाह मे
नीरू : नहि मे वैसे हि पूछरही थि।
ऋतु : 16 फरवरी
नीरू : जानती होँ दिदी यहकौन सि तारीख हैं।
ऋतु : हां तेरी औऱ प्रशांत कि विवाह भि इसीदिन हुइ थि। औऱ शायद प्रशांत नें इसीलिए इसीदिन कां चुना हैं।
नीरू : फीकी मुस्कान केँ संग शायद आप् सहीकह रही होँ। आपने पूछा थां नाँ कि क्याँ मे प्रशांत कि विवाह मे जाउंगी। तोँ हां मे प्रशांत कि विवाह मे जरूर जाउंगी। उस बेवफा कां आखिरी बार चेहरा देखने जरूर जाउंगी।
ऋतु : ठीक हैं मगर तुँ अकेले नहि जाएगी मे भि संग चलूंगी।
नीरू : ठीक हैं आप् चलनामगर जीजाजी कों संगमत लाना।
ऋतु: मुझे मालूम हैं, उन्हें लाकर मे भि कोई बखेडा खडा नहि करना चाहती।
इसकेबाद ऋतु अपनेघऱ चली जाती हैं। औऱ नीरू विस्तर पर्र गिरी हुइ बहुतदेर तक रोती रहती हैं। उसेसमझ मे नहि आँ रहा थां कि उसे रोना क्यो आँ रहा हैं। जबउसे प्रशांत केँ संग रहना नहि थां तौ भि प्रशांत कि विवाह सें उसे तकलीफ़ क्याँ थि। शायद नीरू प्रशांत कों किसी औऱ केँ संग देखने कि संभावना सें हि टूट गई थि।
प्रशांत कि विवाह कों दोदिन बचे थें नीरू कि दिल कि धडकने बढी हुईं थि। तौ दूसरी ओरऋतु किसी औऱ चीज कों लेकर परेशान थि। वोँ समझ नहि पारही थि कि उसके रहते नीरू केँ संग इतनाबड़ा धोखा केसे होँ गय़ा। वोँ नीरू कों केसे बताए। नीरजकाम मे निकलने कि तैयारी मे थां औऱ जल्दबाजी मे निकल जाता हैं.
किस्सा जारी रहेगी।
Ab lagta h ritu or Prashant kaa dimaag chalne laga h iss liye undone chaanbeen shuru krr di or Prashant nein bi sai kara jhoot bol krr k wo abi Canada main hi h.
Mast kahani bus mein kirdar ko jayada hi stupid dikha rhe h, thoda change say story mast hu jayegi please try it, incest+adultery kaa alag hi mja h
शक कां अंजाम – New Episode
update में kuchh तो deemag दिया prshant ko लेकिन फिर neeru ko nira chutiya dikha दिया। akhir itne दिन एक aadmi ko dekhne पर bi usse andaja na hoga ki woh usse janti haen। sareer badal लिया haen लेकिन चेहरा pe sirf baal aa jaane से itni baar dekhne पर bi pehchan na paye ye hu naheen shakta haen। और neeru abi tak prashant ne calla naheen किया uspe atki hoyi haen। एक baar bi usne dobra call karne ki kosis na ki। और na hi usne ye socha ki usne number badal लिया haen। had haen yar ye तो kisi के deemag में aa jayega। itne lambe antral tak sochne पर.
और जब ritu ko shab sacch dikha दिया तो usne kyun na bataya। और अब bharka rahi haen ki prashant bewafa haen saali। अब तो jaroor lagta haen ki isne jan bujh के neeru kaa घर barbad किया haen। और jabardasti kaa drama ghused दिया aapne। prashant ki mummy bhatija bi bol taqat thee। लेकिन naheen beta hi bolegi। ye point laga ki drama extend karne के liye haen। और prashant ki mummy ne कभी ritu ko देखा na hoga। bhay rishtedari में larki ki behen too bari famous hoty haen और aurate एक dusre ko bari juldi pehchan leti haen। फिर से aapne एक betuka point dikhaya haen yehan।
khair अब kuchh और kehne से fayda hi naheen haen ap humare reviews तो padhte na hu। so दो it jaisa ap chahte hu।
शक कां अंजाम – New Episode
शक कां अंजाम
PART 3
UPDATE 47
मूल लेखक नें यह कहानी जिस स्थान खत्म कि हैं। मेरा प्रयास हैं कथावही सें कों आगे बढ़ाने कां औऱ नए मौलिक एपसोड देने कि। एक् पाठक (जिन्हो अपनानाम नहि बताने केँ लिए अनुरोध किया हैं) औऱ मेरा मिलजुल कर प्रयास रहेगा, इस किस्सा कों औऱ आगे लेँ कर जाने कां। लीजिये पेश हैं भाग 3 Update 47। ( New-11).
कुछदेर बादऋतू फिन नीरू कों फ़ोन करती हैं.
नीरू : हां दिदी केसे मोबाइल किया।
ऋतु : अभि तुँ क्याँ कररही हैं।
नीरू : कुछ नहि दिदी आफिस निकली हूं। निशंक कों क्रेच मे छोडूंगी औऱ फिन आफिस जाउगी।
ऋतु : एक् कामकर मे तेरेघऱ पहुंच रही हूं। तुँ मुझे अपने हि घऱमिल औऱ छोटू कों भि तुँ घऱ हि लेँ आँ।
नीरू: क्याँ बात हैं आफिस केँ लिएफिन लेट होँ जाउंगी।
ऋतु : तुँ आफिसबोल दे कि तेरी तबियत ठीक नहि हें। तुँ आज नहि आँ पाएगी।
नीरू : इतनी जरूरी क्याँ बात हैं दिदी जौ आप् मुझसे आफिस कि छुटï्टी कि बातकर रही हैं।
ऋतु : देख नीरू तेरी जीवन केँ बारे मे हि यहबात हैं औऱ बहोत बडीबात हैं इसलिये तुझसे कहरही हूं तूँ घऱ पहुंच मे भि आँ रही हूं। औऱ ऋतु मोबाइल काट देती हैं।
नीरू : ऐसी क्याँ बात हैं जौ दिदी मुझसे आज आफिस जाने केँ लिएमना कररही हैं। आज तक तोँ ऐसा नहि हुआ थां। वोँ मेरेघऱ पऱ भि आँ रही हैं जरूरकोई बहोत बडीबात होगी। औऱ नीरू अपनेघऱ वापस आँ जाती हैं। थोडी हि देरबाद ऋतु भि आँ जाती हैं।
नीरू : क्याँ बात हैं दिदी कोई बुरीखबर तोँ नहि हैं।
ऋतु : लम्बी सांस भरतेहुए, बुरी नहि बहोत बुरीखबर हैं।
नीरू : चिंतित होतेहुए, क्याँ बात हैं दिदी
ऋतु : मे नीरज कों जितना कमीना समझती थि वोँ उससे भि अधिक कमीना हैं। वोँ तेरी जीवन कों बर्बाद करने पऱ तुला हैं।
नीरू : अब वोँ क्याँ मेरी जीवन बर्बाद करेंगे मे अब नं तौ उन पऱ भरोसा करती हूं औऱ नं हि उनसेबात हि करती हूं।
ऋतु : मगर नीरज तेरेलिए पागल हैं,
नीरू : क्याँ आप् क्याँ कहरही हें।
ऋतु : नीरज अभि भि चाहता हैं कि तुम् उसकेसंग संबंध फिन सें बनालो।
नीरू : आप् पागल तोँ नहि होँ गई दिदी जोँ इसतरह कि बातें कररही हें। प्रशांत भि इसीतरह कि बातें करता थां।
ऋतु : प्रशांत जोँ बोलता थां उसके पीछेकोई कारण होता थां।
नीरू : क्याँ बोलरही होँ आप् मतलब वोँ मुझ पर्र शक करता थां औऱ आप् कहरही हें कि प्रशांत केँ पास इसके कारण थें।
ऋतु : हां, मे सहीकह रही हूं। प्रशांत तुझ पऱ शक करता थां तोँ इसके पीछे कारण भि थां।
नीरूऋतु कों गुस्से सें देखते हुएअब आप् भि मुझ पऱ शककररही हें।
ऋतु : नहि मे तुझ पऱ कोईशक नहि कररही। मुझे मालूम हैं एक् घटना कों छोड दियाजाए जोँ स्टेप तूने नीरज केँ भरोसे औऱ गुस्से मे उठाया थां। उसके अलावा तूनेकभी भि कोईगलत काम नहि किया हैं। औऱ मुझेयह भि मालूम हैं तुम्हे अपनीउस गलती कां आज भि पछतावा हैं।
नीरू : तौ फिन आप् प्रशांत कि तरफदारी क्योकर रही हें।
ऋतु : यदि तुँ सुनेगी तौ तुँ भि कहेंगी कि शायद प्रशांत गलत नहि थां।
नीरू : क्याँ, ऐस क्याँ हैं जोँ आप् मुझे बताना चाहती हैं।
ऋतु : एक् बातबता तेरा मोबाइल जब खराबहुआ थां तोँ उसमें तेरीसिम भि लगी थि नां।
नीरू : हांलगी थि मगर वोँ खराब होँ गई थि। मे स्वयं उसे बदलवाने गई थि। मगर आईडी प्रशांत कि थि इसलिये मुझेसिम बदलना पडी थि।
ऋतु : तेरीसिम कहीं भि खराब नहि हुई थि। वोँ बिल्कुल सही थि।
नीरू : आप् कैसी बातें कररही हें। मैने स्वयं अपने हाथों सें उससिम कों बदलवाने कि कोशिश कि थि। उसेदो तीन मोबाइल मे भि लगाके देखा थां वोँ किसी मोबाइल मे काम नहि कररही थि। औऱ आप् कहरही हें वोँ सिमसही थि।
ऋतु : मे यह नहि कररही कि जौ सिम तेरेपास थि वोँ सही थि। मे यहकहरही हूं कि तेरीसिम सही थि।
नीरू : आप् पहेलिया बुझारही होँ।
ऋतु : एक् कामकर अपने मोबाइल सें उस नम्बर कों डायलकर तेरी सारीगलत फहमिया दूर होँ जाएंगी।
नीरू : ठीक हैं अभि करती हूं औऱ नीरू अपना हि पुरानां नम्बर डायल करती हैं। उसेयह देखकर झटका लगता हैं जब मोबाइल रिंग होने लगता हैं औऱ आवाज़ ऋतु केँ बैग केँ अंदर सें आँ रही थि।
ऋतु : चौंक क्योरही हैं, यह हि बात मे तुम्हारी तरफबता रही हूं तुम्हे जोँ सिम दि गई थि वोँ खराब थि औऱ वोँ सिम तेरी थि भि नहि। बल्कि तेरीसिम कों बदल दिया गय़ा थां।
नीरू : मगरयह किया किसने
ऋतु : सिर झुकाते हुए नीरज नें
नीरू : क्याँ जीजाजी नें मगर क्यो
ऋतु : ताकि प्रशांत तुझसे बात नं करपाए।
नीरू : जीजाजी ऐसा भि कर सकते हें !
ऋतु : तौ तूँ हि बता तेरेसिम कार्ड कां इस्तेमाल वोँ क्योकर रहे थें। औऱ यह मोबाइल वोँ हमेशा स्विच आफ क्यो रखते हें। यदि इसकी जरूरत नहि हैं तौ यहआज भि क्योचल रहा हैं। औऱ सबसेबडी बातयह कि इस मोबाइल सें मात्र एक् आदमी कों मोबाइल किया जाता हैं।
नीरू : धबराते हुए किसको दिदी
ऋतु : प्रशांत कों
नीरू : क्याँ
ऋतु : हां, औऱ उसेयह बताया जाता हैं कि तूँ नीरज केँ पास हें क्योकि इस मोबाइल सें प्रशांत सें बात नीरज हि करता होगा।
नीरूमगर आप् यह दावा केसेकर सकती हें कि नीरज प्रशांत सें हि बात करता होगा।
ऋतु : मुझे भि पहलेइस पर्र डाउट थां। तौ मैंने अविनाश सें बात कि। वैसे वोँ इस वक्त इंग्लैंड मे हें।
नीरू : अविनाश कौन वोँ जीजाजी कां मित्र
ऋतु : नीरज कां मित्र नहि बल्कि मतलब कां दोस्त
नीरू : कुछ भि समझलो मगर वोँ थां तोँ जीजाजी कां साथी हि। मुझे भि वोँ बहोत हि गंदा व्यक्ति लगता थां। आप् केसेउसे अपनेघऱ आने देतीथीं। मुझे तौ वोँ बहोत गलत व्यक्ति लगता थां।
ऋतु : हां वोँ व्यक्ति हि गलत थां।
नीरू : तोँ फिन आपने उससे क्योबात कि।
ऋतु : क्योंकि उसके रिश्तेदार यहां मोबाइल कंपनी मे थें। उसकी सहायता सें मे इस मोबाइल कि डिटेल निकलवाई थि। औऱ जानती होँ मोबाइल कि डिटेल मे क्याँ आया।
नीरू : घबराते हुए क्याँ
ऋतु : नीरज नें मात्र एक् शख्स कों मोबाइल किया थां औऱ वोँ भि महीने मे दोतीन बार वोँ औऱ शख्स थां प्रशांत। अब तुँ स्वयं समझ सकती हैं तेरे नम्बर सें नीरजयदि प्रशांत सें बातकर रहा होगा तोँ वोँ प्रशांत सें क्याँ बातकर रहा होगा।
नीरू : दिदी वोँ कुछ औऱ भि तौ बातकर सकते हें। मगरअब नीरू भि समझरही थि कि उसकेसंग बहोत बडृाखेल हौ चुका हैं।
ऋतु : मुझे भि यहलगा शायद नीरज तुम् दोनों कों मिलाने कि कोशिश कररहा हौ। मगरजिस तरह सें प्रशांत तुझ पर्र भडका थां उससेसाफ लगरहा थां नीरज प्रशांत कों समझा नहि रहा थां उसे भडकारहा थां। औऱ इसका भि मेरेपास सबूत हैं।
नीरू कि आंखों मे अब आंसू आँ जाते हें औऱ वोँ कहती हैं क्याँ
ऋतु: मैने अविनाश सें कहकर तेरायह नम्बर टेप करवाया थां। औऱ अब जौ रिकार्डिग मिली हैं। वोँ तुँ स्वयं सुन लें। औऱ फिनऋतु अपने मोबाइल मे सें एक् ओडियो स्टार्ट कर देती हें। यह ऑडियो नीरज औऱ काजल कि चुदाई कां थां। जिसमें काजल नीरू कां रोल प्लेकर रही थि। ओडियो सुनकर नीरू कां चेहरा गुस्से सें लाल होँ जाता हैं। क्योंकि कोई भि आदमीइस ओडिया कों सुनकर यह हि समझेगा कि नीरज औऱ नीरू चुदाई कररहे हें।
ऋतु : अब तुँ बता प्रशांत पऱ क्याँ बीतती होगी। डेढ साल सें वोँ इसी कों झेलरहा हैं औऱ इसका सबूत हैं तेरे मोबाइल कि पिछले एक् साल कि यह डिटेल औऱ प्रशांत केँ मोबाइल कि भि मैने डिटेल निकलवाई हें। अपने मोबाइल सें भि उसनेकई बार प्रशांत सें बात कि हैं। प्रशांत नें सभीकुछ कियामगर एक् काम नहि किया।
नीरू : रोतेहुए क्याँ
ऋतु : तुँ स्वयं हि प्रशांत कि व्हाटऐप चेटपढ करदेख लेँ। प्रशांत नें हि मुझेयह सभी रिकॉर्डिंग भेजी हैं औऱ मैंने अविनाश कि सहायता सें इसकी पुष्टि भि करवाली हैं।
नीरू : यहकब हि हैं
ऋतू : नीरूकब तुम्हारी प्रैगनेंसी आखिरी वक़्त पऱ चलरही थि यहउसी वक़्त कि रिकॉर्डिंग हैं। मुझेबार बारशक होता थां क्योंकि जब नीरू कि डिलेवरी कां टाइम जैसे जैसे नजदीक आँ रहा थां वैसे वैसे प्रशांत नीरज कों बहोत बहोत ज़्यादा करनेलगा थां। नीरज प्रशांत सें बातमुझ सें छिपकर करता थां इसलिये जब भि प्रशांत कां मोबाइल आता तोँ वोँ मोबाइल लेकरकभी छत पर्र तौ कभी लॉबी मे चला जाता थां। मोबाइल मे पासवर्ड लगाकर लॉक करनेलगा थां।
इससे पहले तोँ मुझेलगा कि नीरज कि जीवन मे कोई दूसरी लडकी आँ गई हैं। मे नीरज केँ मोबाइल तक पहुंचना चाहती थि इसलिये मैंने नीरज केँ मोबाइल कों अविनाश कि मदद सें ट्रैक करवाया। मगर अविनाश नें बताया कि किसी लड़की केँ संगऐसे कोईख़ास चककर नहि हैं तोँ उस टाइम मे उसेभूल गयीँ, औऱ रिकार्डिंग अविनाश सें नहि ली। मगरजब प्रशांत नें मुझे नीरज कि सब रिकर्डिंग भेजी तोँ मुझे भि यादआया कि मैंने भि उसकाफ़ोन टेप करवाया थां औऱ फिनजब मुझेयह पताचला कि नीरू कां पुराणा मोबाइल नम्बर भि एक्टिव हैं तोँ मैंने नीरू तुम्हारे पुराने केँ मोबाइल कि भि डिटेल निकलवा ली। औऱ फिनऋतू रोने लगती हैं।
नीरू जैसे हि उसे खोलकर देखती हैं उसके आंखों सें भि आंसू औऱ तेजी सें बहने लगते हें। क्योंकि प्रशांत नें नीरज सें कईबार रिक्वेस्ट कि थि कि उसे उसके बच्चे कां फोटोभेज दे। नीरज नें एक् फोटो भेजा भि थां मगर वोँ किसी औऱ केँ बच्चे कां थां। नीरू कि समझ मे पूरी पिक्चर क्लीयर होतीचली जाती हैं। मगरफिन वोँ ऋतु सें पूछती हैं। दिदी यह अविनाश तोँ जीजा कां मित्र हैं फिन आपकी इतनी सहायता क्योकर रहा हैं।
ऋतु : वोँ मैंने उससेकई बार रिक्वेस्ट कि तोँ।
नीरू : सचसच बताईए दिदी कुछ तोँ गडबड हैं। आप् मुझसे छिपारही हैं। मे अविनाश कि फितरत सें बाकिफ हूं। उसके बारे मे मैंने बहोत कुछ सुना थां।
जारी रहेगी
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