शक कां अंजाम – New Episode
ritu ye sachhai बहुत pahle से hi janti thee लेकिन फिर bi woh neeru ko prashant ki galatfehmi kaa sacch naheen bata rahi thee। uss vaqt tak bi usne naheen बोला जब shadi ki बात hu rahi thee। अगर usse apni behen की fikr hee hoty तो woh pahle na bata taqat thee। neeru ki drishti में तो prashant hi shadi krr raha haen। sayad neeru समय rahte उसकी galatfehmi दूर krr deta।
new charachter avinash लेकिन ye तो london में rahta haen तो फिर ritu से milne कब aata thaa। khair ch##t ki khoosboo saat samandar paar से bi kheench laati hongi। लेकिन क्या अब prashatn neeru pe biswas karega। उसकी najro में तो neeru एक giri hoyi stri hu chuki haen। अब ye biswas kese dilati haen ye dekhne waali बात haen।
और फिर neeraj kaa bi तो hissab hoga। khair pehli baar kisi charachter ne neeraj के alawa samajhdari dikhai haen।
शक कां अंजाम – New Episode
bhay aapne too iss kahani ko star plus kaa serial bna dia hain। loug yha sex kahaniyan pdne आते hain lekin yeh seriously serial bn gya hain। Ab aapse request hain niru aur prashant kaa milan krwayo aur उसका shq ko khtm krke khani ko alg disha दो। Please अब कोई aur turn mt le आना की abi bi yeh लोग sath na aa paye।
बहोत बहोत बहोत बढ़िया एपसोड अब निरु औऱ प्रशांत मिल केँ नीरज कों आनंद चखाऐ
बहोत हि शानदार एपसोड हैं । गलतफहमियां दूर हौ रही हैं अब नीरूओर प्रशांत दोनोफिन सें मिल जाएंगे
शक कां अंजाम – New Episode
शक कां अंजाम
PART 3
UPDATE 48
मूल लेखक नें यह कहानी जिस स्थान ख़त्म कि हैं। मेरा प्रयास हैं स्टोरी वही सें कों आगे बढ़ाने कां औऱ नए मौलिक एपसोड देने कि। एक् पाठक (जिन्होने अपनानाम नहि बताने केँ लिए अनुरोध किया हैं) औऱ मेरा मिलजुल कर प्रयास रहेगा, इसकथा कों औऱ आगे लेँ कर जाने कां। लीजिये पेश हैं भाग 3 Update 48। ( New-12)
ऋतु : यह एक् लम्बी स्टोरी हैं अभि समय होँ रहा हैं मुझेघऱ जानां होगा क्योंकि यदिलेट हौ गई तोँ नीरजकई प्रश्न करनेलग जाएगा। मगर एक् बातयाद रखना तूँ किसी कों प्रशांत कि विवाह मे चलरही हैं याँ नहि।
नीरू : दुःखी होतेहुए दिदी अपनी बर्बादी कों अपनी आंखों सें देखने कि अब हिम्मत नहि हैं।
ऋतु : देख अभि भि वक्त हैं यदि प्रशांत कों सबकुछ सहीसही पताचल जाता हैं तोँ शायद तुम् दोनों कि गलत फहमीदूर होँ जाए।
नीरू : नहि दिदी अब बहोत देर हौ चुकी हैं। परसो विवाह हैं यदिइस टाइम हम् कोईकदम उठाएंगे तौ उस लडकी केँ बारे मे भि सोचिए जिसकी प्रशांत सें विवाह होने वाली हैं।
ऋतु : मगर तेरा क्याँ होगा, क्याँ प्रशांत कि विवाह होने केँ बाद तूँ किसी औऱ सें विवाह करने कों रेडी हैं।
नीरू : नहि दिदी अब मे किसी औऱ सें विवाह नहि करूंगी ऐसे हि अपनी जीवन गुजार दूगी वैसे भि निशंक तोँ मेरेपास हैं हि, कम सें कम जीने कां एक् मकसद तौ होगा।
ऋतु : तौ तुँ नहि चलरही इसका मतलब
नीरू : नहि दिदी मुझमें हिम्मत नहि हैं।
ऋतु : एक् बार प्रशांत कों नहि देखेगी, उसे उसका बच्चा नहि दिखाएगी। देख जौ होगा वोँ देखा जाएगा। प्रशांत तुझेही गलत समझता हैं औऱ इसीलिए विवाह केँ लिए सजधजकर हुआ हैं। तूँ चाहती हैं कि प्रशांत नए सिरे सें अपनी जीवन शुरुआत करें औऱ खुशरहे तोँ तुँ उसेसच मत बताना। वोँ तुम कोगलत समझेगा औऱ तुझेही खाने कां उसेगम नहि होगा। मगर तूनेउसे सच्चाई बताई याँ उसे कहीं औऱ सें पताचली तौ बेचारा घुटता रहेगा।
नीरू: तोँ मे क्याँ करूं
ऋतु : हम् लोग विवाह मे चलेंगे। मगर एक् बातयाद रखना
नीरू : क्याँ,
ऋतु:देख जौ कॉलआई रिकॉर्डिग मैंने तुम्हे सुनाई वोँ पांचदिन पुरानी हैं। औऱ नीरज औऱ प्रशांत कि बातों सें यहलगरहा हैं कि नीरज कों यह नहि मालूम कि प्रशांत इंडिया आँ चुका हैं वोँ यह हि समझरहा हैं कि प्रशांत अभि भि कनाडा मे हि हैं।
नीरू : इससे क्याँ होगा।
ऋतु : दोस्त विवाह मे हम् दोनों हि जाएंगे नीरज कों इस बारे मे बताएंगे भि नहि।
नीरू : वैसे भि मे तौ जीजाजी सें बात हि नहि करती, उनकी भि हिम्मत नें हि जौ मुझसे फालतू कि बातें करें। उन्होंने मेरा भरोसा तौ तोडा हि हैं औऱ अभि भि उनके दिमाग़ मे मेरे प्रति जोँ गंदगी भरी हुइ हैं। उसे सुनने केँ बाद तौ मे उनकी सूरत सें भि नफरत करनेलगी हूं।
ऋतु : देख नीरज पऱ भडककर तूँ अपना हि नुकसान मतकर लेना। तेरा तौ पता नहि मगर मेराबसा हुआघऱ तबाह होँ जाएगा। प्लीज नीरज कों ऐसीकोई बातमत बताना जोँ मैने तुम्हारी तरफ बताई हैं।
नीरू : ठीक हैं मगर आप् आएंगी केसे, जीजाजी शक नहि करेंगे जौ आप् रातभर गायब रहेंगी। औऱ वैसे भि कल शनिवार औऱ परसो रविवार दोनों दिन जीजाजी घऱ पऱ हि होंगे।
ऋतु :तुँ यहसभी मेरेउपर छोडदो। बस तुँ सजधजकर रहना।
नीरू : ठीक हैं दिदी, कल कां हि दिनबीच मे हें।
ऋतु : हां औऱ वहां रोनी सूरत बनाकर नहि जानां हैं समझ गई।
नीरू : फीकी मुस्कान केँ संग कहती हैं ठीक हैं। औऱ इसकेबाद ऋतु नीरू केँ घऱ सें अपनेघऱ चली जाती हैं।
नीरू केँ मन मे अबउथल पुथलमची हुइ थि। वोँ समझ चुकी थि कि उसके जीजाजी नें हि प्रशांत औऱ उसकेबीच मे दूरियां बढ़ाई हैं। प्रशांत कां उस पर्र शक करना तोँ गलत थां मगर प्रशांत नीरज कि मंशा पहले हि भांप गय़ा थां। जिस कारण वोँ मुझे लगातार ताने देता थां। मगर मेरा अपने औऱ जीजाजी केँ उपर जोँ भरोसा थां उस कारण मैंने प्रशांत पऱ कभी ध्यान हि नहि दिया। मैंने प्रशांत सें प्रेम तोँ कियामगर उस पर्र भरोसा नहि करपाई औऱ इसीबात कां फायदा जीजाजी नें उठा लिया। मगर अब होँ भि क्याँ सकता हैं प्रशांत कि तौ दूसरी विवाह होने वाली हैं औऱ अब इतना वक़्त भि नहि बचा हैं कि कुछ हौ सके। घऱ केँ लोग तोँ विवाह केँ कार्यक्रम मे शामिल होँ चुके हें। औऱ यह सोचते हुए नीरू कि आंखों मे आंसू औऱ तेजी सें बहने लगते हें।
दूसरे दिनऋतु केँ घऱ
ऋतु : सुनो एक् काम थां आपसे
नीरज : हांकहो,
ऋतु : वोँ क्याँ हैं कि नीरू केँ आफिस मे एक् लडकीकाम करती हैं उसकी विवाह हैं। वोँ नीरू सें अपनी विवाह मे आने कां दबावबना रही हैं। मगर नीरू कां कहना हैं कि वोँ अकेले नहि जाएगी। उसका मेरेपास मोबाइल भि आया थां। वैसे भि तोँ वोँ कहींआती जाती नहि हैं। मेरे विचार सें उसे जानां चाहिए।
नीरज : हां जानां तौ चाहिए मगर तुम्हारी बेहन बहोत जिदï्दी हैं। दोसाल होने कों हें मगरआज भि वोँ मुझसे सीधी मुंहबात हि नहि करती। सीधी मुंह कां वोँ तौ बात हि नहि करती।
ऋतु : वोँ इस घटना कों भूल नहि पा रहीं हैं संग हि नीरज भि उससेदूर चला गय़ा हैं। खैरउन बातों कों छोडो। मैंने भि नीरू सें कहा थां कि उसे जानां चाहिए। मगर वोँ अकेले होने केँ कारण जाने कों रेडी नहि हैं। मे सोचरही थि कि मे उसे अपनेसंग लें जाउं। जिससे विवाह मे उसके अकेलापन भि फील नहि होगा।
नीरज : हांयह ठीक हैं ऐसा करता हूं मे भि चलता हूं।
ऋतु : नहि नहि आप् जाएंगे तौ फिन नीरू किसी भि कीमत पर्र चलने कों रेडी नहि होगी।
नीरज : दोस्त तुम् हि उसे मनाओ, ऐसे क्रोध करने सें कोई फायदा थोडे हि हैं।
ऋतु : देखों अभि एकदम सें तोँ उसे सजधजकर नहि कर पाउंगी मगर धीरे-धीरे धीरे-धीरे कोशिश करूंगी ताकि वोँ आपकेसंग फिन सें बातचीत शुरुआत कर सकेे।
ऋतु कि बात सें नीरजमन हि मनखुश होता हैं औऱ सोचता हैं कि एक् बार नीरू सें पहले जैसी बातचीत शुरुआत हौ जाए तौ फिन वोँ नीरू कों किसी न् किसीतरह अपनेजाल मे फंसा हि लोगा। औऱ नीरजऋतु कों जाने कि इजाजत दे देता हैं।
नीरज : ठीक हैं तुम् नीरू केँ संगचली जानां, बच्चे कों मेरेपास छोड देना, उसे अपनेसंग मत लें जानां क्योंकि नीरू कां बच्चा तोँ होगा हि वैसे विवाह कब कि हैं।
ऋतु : कल कि हि हैं मे साम कों नीरू केँ घऱचली जाउंगी। औऱ रात कों उसी केँ घऱरूक जाउंगी।
नीरज : नहि तुम् जब विवाह सें लाौटो तौ मुझे मोबाइल कर देना मे तुम्हें लेने आँ जाउंगा।
ऋतु : ठीक हैं मे लौटकर नीरू केँ घऱ हि आँ जाउंगी आप् मुझेउसी केँ घऱ सें लेँ लेना। जैसे हि हम् लोग विवाह वाले स्थाान सें निकलेेंगे आपको मोबाइल कर देंगे।
इसकेबाद ऋतु नीरू कों मोबाइल करबता देती हैं कि नीरज कों उसने रेडीकर लिया हैं।
रविवार सुभह सें हि नीरू कां मन बहोत ज़्यादा बेचैन थां। उसेसमझ मे नहि आँ रहा थां कि उसकेसंग जीवन कैसाखेल खेलरही हैं। अब तक वोँ प्रशांत कों हि पूरीतरह सें गलत समझती थि। मगरअब वोँ समझ चुकी थि कि प्रशांत भोला औऱ मन कां साफ हैं इसलिये वोँ नीरज कि बातों मे जल्द आँ जाता हैं। उसका मेरेउपर शक करने कि बातयदि छोड दि जाए तौ उसने जोँ भि कहा वोँ सच हि कहा थां। नीरज केँ बारे मे उसकीकही हरबात बाद मे सच साबित हुई।
काशउस दिन मैंने हि घऱ नं छोडा होता। मगर प्रशांत नें भि तौ नहि रोका। उसे रोकना चाहिए थां। यदिऋतु दिदी केँ संग उसकी ख़्वाहिश केँ खिलाफ वोँ सभीहुआ थां तौ उसे बताना चाहिए थां। यदि वोँ रोक लेता तौ शायद मे अपना फैसला बदल देती।
दूसरी ओर प्रशांत केँ घऱ मे उसकी माँ कहती हैं।
प्रशांत कि मम्मी : बेटेआज विवाह होने हि आज तोँ कम सें कमढंग सें सजधजकर हौ जा।
प्रशांत : माँ क्याँ कमी हैं सही तोँ लगरहा हूं।
प्रशांत कि माँ : क्याँ सहीलग रहा हैं यहबड़े बडेबाल, लम्बी दाडी, मूछे। मूछ तौ चलोचल भि जाएगी मगरबाल औऱ दाडी तौ आजसाफ करा लें।
प्रशांत : माँ आप् भि मे ऐसा हि ठीक हूं औऱ प्रशांत वहां सें चला जाता हैं।
साम कों ऋतु नीरू केँ घऱबैग लेकर पहुंच जाती हैं। औऱ पहले वोँ नीरू कों सजधजकर करती हैं औऱ फिन स्वयं रेडी होती हैं।
नीरू : दिदी आपने अविनाश वालीबात नहि बताई, वोँ आपकी सहायता क्योकर रहा हैं।
ऋतु : दोस्त तूँ जानकर क्याँ करेगी।
नीरू : नहि दिदी मुझे जानना हैं कि जीजाजी कां मित्र उनके खिलाफ आपकी सहायता कररहा हैं। औऱ वोँ जीजाजी कों बता भि नहि रहा। जबकि होना इसका उल्टा चाहिए थां। उसका करेक्टर भि सही नहि थां। उसके बारे मे मैंने जोँ भि कुछ सुना वोँ उल्टा हि सुना।
ऋतु: देख अभि हम् लोग विवाह मे चलरहे हें। वहां सें लौटेंगे औऱ वक़्त होगा तौ इस पऱ चर्चा कर लेंगे। क्योंकि अभि बात शुरुआत कि तोँ फिन जानेकब समाप्त होगी।
नीरू : आप् प्रोमिस करो कि आप् पूरीबात सचसच मुझे बताओगी।
ऋतु : दोस्त जबकह दिया हैं तोँ तेरी भरोसा नहि हैं।
नीरू : ठीक हैं दिदी अब तौ मात्र आप् पऱ हि भरोसा बचा हैं। बाकी तौ जिस पऱ भि भरोसा किया उसने भरोसे कों तोड़ा हि हैं।
ऋतु : ठीक हैं जब तुझसे कह दिया तौ तुम्हें जरूर बताउंगी अविनाश मेरी सहायता क्योकर रहा हैं। औऱ फिन लगभग 9 बजे नीरू औऱ ऋतु जहां सें विवाह होँ रही थि वहां पहुंच जाते हें। बारात आँ चुकी थि। औऱ वरमाला कां कार्यक्रम मैदान केँ जिस हिस्से मे रखा गय़ा थां अभि तक नीरू औऱ ऋतुउस ओर नहि गए थें। नीरू औऱ ऋतू नें अपना चेहरा थोड़े सें घूंघट मे ढकाहुआ थां ताकिकोई आसानी सें पहचान न् सके। औऱ सभीलोग रस्मो कार्यक्रमों मे इतना व्यस्त थें केँ उनकेऊपर किसी कां ख़ास ध्यान नहि जाता हैं। तभी नीरू कि नजर वहां एक् लडकी पऱ पडती हैं जोँ किसी सें बातकर रही थि।
नीरू : दिदी वोँ सामने आप् देखरही हैं पीलेसूट मे एक् लडकी हैं जोँ नीलासूट पहनेहुए व्यक्ति सें बातकर रही हैं।
ऋतु : हां दिखाई देरहा हैं कौन हैं यह
नीरू : यह शायद प्रशाांत केँ मामाजी कि लडकी हैं, औऱ यह दाडी वाला व्यक्ति इसे मैंने कहीं देखा हैं हांयाद आयाइसे अभि कुछ दिनों पहले हि मैंने साम केँ वक़्त अपने आफिस केँ सामने देखा थां। चार पांचदिन लगातार दिखाई दिया थां। मगर उसकेबाद गायब होँ गय़ा। कलसाम कों भि दिखाई दिया थां। लगता हैं प्रशांत कां कोई मित्र होगा जोँ मुझ पऱ नजर रखने केँ लिएआया हैं।
ऋतु:अब तुझसे मे प्रशांत केँ शक करने वाली आदतें आनेलगी हें। होँ सकता हैं वोँ वहीं रहता हौ। याँ फिनकोई औऱ होँ जिसे तूने देखा होँ।
नीरू : हांयह हौ सकता हैं वैसे भि मैंने उस व्यक्ति कों ज़्यादा गौर सें नहि देखा थां।
ऋतु : तुँ शक करनाबंद करदे किसी केँ बारे मे भि कुछ भि सोचने लगती हैं।
तब तक जौ व्यक्ति बातकर रहा थां वोँ वहा सें जाने लगता हैं लडकीउसे रोकने कि कोशिश करती हैं मगर वोँ रूकता नहि हैं।
नीरू : विचित्र व्यक्ति हैं मगरयह शशि इससे इतना चिपक क्योरही हैं।
ऋतु: तुँ शशि कि पूरी फैमिली केँ जानती हैं क्याँ
नीरू : नहि
ऋतु : तेफिन ज़्यादा दिमाग़ मतलगा उसकाकोई रिश्तेदार हि होगा नहि तौ रिश्तेदारों कि इतनीभीड़ मे वोँ इसतरह हाथपकड कर किसी कों रोकने कि कोशिश नहि करती।
नीरू : मुस्कुराते हुएहां सहीकहा आपनेतभी शशि केँ पासकुछ लडकिया आती हैं औऱ कहती हैं कि वारमाला कां कार्यक्रम शुरुआत होने वाला हैं जल्द सें स्टेज पर्र चल। औऱ शिशि वहां सें चली जाती हैं।
ऋतु : चलो हम् भि चलते हें प्रशांत कि दुल्हन कों भि देख लेंगे।
नीरू : बेमन सें जानां जरूरी हैं।
ऋतु : अब आँ गए हें तोँ वहां चलने मे क्याँ दिक्कत हैं अरे स्टेज पर्र नहि जाएंगे औऱ ऋतु नीरू कां हाथपकड कर अपनेसंग लें आती हैं।
स्टेज पर्र नीरू कि जैसे हि नजर पडती हैं। उसका मुंह सें निकल जाता हैं। सूरज
ऋतु नीरू केँ मुंह सें निकले शब्दसुन नहि पाती औऱ कहती हैं कि यह तौ प्रशांत नहि लगरहा हम् कहींगलत स्थान तौ नहि आँ गए।
नीरू : नहि हम् लोगसही स्थान पर्र जाए हें।
ऋतु : मगरयह व्यक्ति तोँ कोई औऱ हैं
नीरू : हांयह कोई औऱ हि हैं यह प्रशांत केँ चाचा कां लडका सूरज हैं।
ऋतु: विकास मगर प्रशांत कि माँ तौ बोलरही थि कि उसके बच्चे कि विवाह हैं उसकी पहली बीबीबीच रास्ते मे हि छोड गई तौ फिन वोँ क्याँ थां क्याँ प्रशांत कि माँ झूठबोल रही थि।
नीरू : नहि वोँ झूठ नहि कह रहीं थि। दरअसल सूरज कों भि वोँ अपना बेटा हि मानती हें। औऱ सूरज कि पत्नि कि एक् हादसे मे मौत हौ गई थि। वोँ दूसरी विवाह केँ लिए सजधजकर नहि होँ रहा थां। मगर लगता हैं कि घऱ वालों केँ दबाव मे बाद मे मान गय़ा होगा। औऱ प्रशांत कि माँ नें जौ कहा थां वोँ सही हि थां। नीरू केँ चेहरे पर्र अब राहत दिखाई देरही थि।
औऱ ऋतु भि यह देखकर खुश थि कि अभि भि उम्मीद बची हुई थि। मगर प्रशांत कहां हैं यदि प्रशांत केँ भइया कि विवाह हैं ऋतु नीरू सें पूछती हैं।
नीरू : अरेइस प्रश्न कां जवाब मे केसेदे सकती हूं। एक् कामकर तुँ शशि सें पूछ लेँ।
ऋतु : अरे मे उससे केसेबात करूंगी। मे तोँ उसे जानती भि नहि हूं।
नीरू : एक् कामकरो आप् उससे कहना हैं कि आप् प्रशांत केँ संगकाम करती हौ। वैसेशशि भि शायद हि मुझे पहचान पाए क्योंकि मैंने उसे मात्र फोटो मे हि देखा थां। क्योंकि हमारी विवाह मे वोँ आई नहि थि। शायद मुझे पहचान नं सके।
ऋतु : ठीक हैं संग मे हि चलते हें। मे उससेबात कर लूंगी। औऱ थोडीदेर बादजब वारमाला कां कार्यक्रम ख़त्म हौ जाता हैं औऱ शशि खाने केँ लिए जाती हैं तौ वहांऋतु औऱ नीरू भि पहुंच जाते हें।
ऋतु: आप् लडकी वालों कि तरफ सें हें।
शशि : नहि हम् लडके वालों कि ओर सें हें। वैसे आप् किसओर सें हैं
ऋतु : जी मे किसीओर सें नहि हूं दरअसल प्रशांत केँ संग मे काम करती थि।
शशि : अच्छा पहले करती होगी
ऋतु : हांमगर तुमने केसेसमझ लिया कि पहले करती होंगी।
शशि : इसलिये क्योंकि भैया डेढसाल तौ कनाडा मे हि रहेें हैं एक् महीने पहले हि वहां सें लौटे हें औऱ अब लडकियों केँ नाम पऱ ऐसा बिदकते हें जैसेकोई भूखाशेर उनके सामने आँ गय़ा होँ जौ उन्हें खा जाएंगे।
ऋतु : हंसते हुए, अच्छा वैसे बहोत दिनों सें उनसे मुलाकात नहि हुईँ थि। वैसे प्रशांत हैं कहां दिखाई नहि दिया।
शशि : अरे क्याँ बताउं भैया कों बडी मुश्किल सें तौ फूफी नें रेडी किया। वोँ यहांआए अभि आधा घंटे पहलेचले गए मैंने उन्हें रोकने कि बहोत कोशिश कि।
नीरू : अभि जोँ नीलेसूट मे थें उनकी हि बातकर रही हौ।
शशि : हां वोँ हि थें। आब आप् बताओं यह भि कोईबात होती हैं घऱ कि विवाह मे बेगानों जैसे शामिल हुए। वैसे आप् कौन हें अपको कहीं देखा सां लगरहा हैं।
ऋतु : अरेयह मेरी बेहन हैं घऱआई हुईँ थि इसलिये अपनेसंग लें आई। अच्छा पहलेकुछ खा लेते हें फिनबाद मे मिलते हें। औऱ ऋतु नीरू कों लेकर वहां सें दूरहट जाती हैं। नीरू तेरीकुछ समझ मे आया।
नीरू : क्याँ दिदी
ऋतु : तूँ क्याँ बोलि थि कि यह व्यक्ति तुम्हारी तरफ अपने आफिस केँ आसपास कुछदिन पहले दिखाई दिया हैं। उससे पहले नहि। जब वोँ इंडिया मे हि नहि थां तौ तेरे आफिस केसेआता। औऱ मोबाइल पऱ बात तौ तूँ स्वयं हि समझ सकती हैं। तुम्हे मे परसो सबकुछ बता चुकी हूं।
नीरू : दिदी अब प्रशांत तोँ यहां आएगा नहि तोँ हम् लोग भि अपनेघऱ चलते हें।
ऋतु : ठीक हैं औऱ वोँ घऱ कि ओर निकल जाते हें ऋतु भि नीरज कों मोबाइल कर देती हैं कि वोँ आँ जाए।
नीरू : दिदी आजकुछ हल्का हल्का लगरहा हैं।
ऋतु : नीरू एक् बात तौ मानले कि जिसतरह तुम्हें जब प्रशांत सें नफरत थि तब भि तेरेमन मे उसकेलिए कहीं नं कहीं प्रेम थां। उसीतरह प्रशांत केँ मन मे तेरे प्रति इस वक़्त भले हि कुछ भि होँ मगर वोँ तुझसे आज भि प्रेम करता हैं। शशि नें हि कहा थां लडकियों केँ नाम पर्र तौ ऐसा उछलता हैं जैसा भूखाशेर देख लिया होँ।
नीरू : ठीक हैं दिदी मगर आपको अपना प्रॉमिस याद हें नाँ।
ऋतु : याद हैं वोँ किस्सा मे तुम्हें कल बताउंगी। मगर पहलेयह पताकरो प्रशांत काम कहां करता हैं। उसने विवाह नहि कि हैं यह तोँ साफ।
नीरू : दिदी अब मे यह केसेपता कर पाउंगी।
ऋतु: उसकी चिंता तूँ मतकर वोँ सभीकाम मे देखती हूं।
जारी रहेगी
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