शक कां अंजाम – New Episode
शक कां अंजाम
PART 3
UPDATE 49मूल लेखक नें यह किस्सा जिस स्थान खत्म कि हैं। मेरा प्रयास हैं कथावही सें कों आगे बढ़ाने कां औऱ नए मौलिक भाग देने कि। एक् पाठक (जिन्होने अपनानाम नहि बताने केँ लिए अनुरोध किया हैं) औऱ मेरा मिलजुल कर प्रयास रहेगा, इस किस्सा कों औऱ आगे लेँ कर जाने कां। लीजिये पेश हैं भाग 3 Update 49। ( New-13)
नीरू अगली सुभह आफिस केँ लिए निकली, उसकेमन मे कई प्रश्न थें कि क्याँ प्रशांत आज भि उसके आफिस केँ बाहर् उसका प्रतीक्षा करेगा। प्रशांत डेढसाल तक क्यो नहि आयायह तोँ समझ मे आँ गय़ा क्योंकि वोँ इंडिया मे हि नहि थां। मगर मे उसे पहचान क्यो नहि पाई। विवाह मे भि उसे नहि पहचान पाई वोँ तोँ अच्छा थां कि विवाह मे मे प्रशांत केँ सामने नहि गई नहि तोँ वोँ तौ एक् झटके मे हि मुझे पहचान लेता।
आफिस मे नीरू कां मन नहि लगरहा थां वोँ सोचरही थि कि साम जल्द होँ साम कों नीरू आफिस सें निकलती हैं औऱ फिन आफिस केँ बाहर् चारों ओर देखती हैं। मगरउसे प्रशांत कहीं दिखाई नहि देताफिन सोचती हैं कि प्रशांत केँ घऱ मे विवाह कि खुशियां मनाईजा रही हें शायद वोँ इसलिये नहि आया हौ। नीरू स्वयं कों समझाती हें। मगर उसकेमन मे बेचैनी बनी रहती हैं। पऱ उसमे अभि प्रशांत सें सीधेबात करने कों झिझक थि औऱ वोँ सीधेबात करने औऱ प्रशांत कों फ़ोन करने कि हिम्मत नहि जुटासकी।
इसतरह चारदिन बीत जाते हें। नीरूरोज आफिस सें निकलने केँ बाद थोडा देर रूकती थि औऱ चारों ओर देखती थि। मगर नीरू कों यह अभि तक जानकारी नहि थि कि प्रशांत कां आफिस दूसरे शहर मे हें। उसकी ब्रांच जरूरइस शहर मे थि औऱ वोँ प्रशांत केँ अंडर मे हि थि। मगर प्रशांत इस ब्रांच कां काम भि अपने आफिस सें हि देखरहा थां। वोँ अब मात्र शनिवार कों हि नीरू केँ आफिसआता थां।
प्रशांत कां मकसदअब नीरू सें मिलना नहि बल्कि अपने बच्चे कों देख्ना थां। क्योंकि अभि तक प्रशांत यह हि मानरहा थां। कि नीरू औऱ नीरज केँ बीच जिस्मानी रिश्ते कायम हौ चुके हें। क़िस्मत कां खेल भि अजीब होता हैं शनिवार साम कों प्रशांत नीरू केँ आफिस केँ बाहर् पहुचता हैं मगरउसी दिनऋतु कां मोबाइल नीरू केँ पासआता हैं कि वोँ आज दोपहर कों उसकेघऱ आएगी। इसलिये नीरू दोपहर का खाना केँ बाद आफिस सें छुट्टी लेँ लेँ। नीरू लञ्च केँ बाद हि घऱ केँ लिए निकाल जाती हैं औऱ साम कों जब प्रशांत नीरू केँ दफ़्तर पहुंचता हैं तोँ वहांउसे नीरू नहि मिलती
। ऋतु लगातार नीरू सें प्रशांत केँ बारे मे मोबाइल पऱ पूछती रहती थि मगर नीरू कां हरबार जबाव एक् हि होता थां कि प्रशांत आज भि नहि आया।
ऋतु : नीरूऐसा तोँ नहि कि तेरी हि नजर प्रशांत पर्र नहि पडरही हौ वोँ आता हौ मगर कहीं छिपा हौ।
नीरू : नहि दिदी मे आमतौर पर्र आफिस सें निकलती औऱ सीधेआटो लेकर पहले क्रेच जाती औऱ वहां सें घऱ, मगर पिछले पांच दिनों सें मे आफिस केँ बाहर् पांचदस मिनिट प्रशांत कां प्रतीक्षा करती हूं मगर वोँ दिखाई हि नहि देता। अब वोँ छिपकर मुझेदेख रहा हैं तोँ बातअलग हैं मगर अभि तक प्रशांत नें कभी भि मुझसे छिपने कि कोशिश नहि कि हैं।
ऋतु : अब इसके पीछे क्याँ हैं यह तौ प्रशांत हि जाने मे क्याँ कह सकती हूं।
नीरू : हां, आपकीबात भि सही हैं मगर दिदी उसदिन जौ बात आपने अधूरी छोडी थि उसे पूरा कीजिए।
ऋतु : कौन सि बात
नीरू : वोँ आखिर अविनाश आपकी इतनी सहायता क्यूं कररहा हैं। जहां तक मैंने सुना हैं वैसे आपने हि बताया थां कि उसकी आप् केँ उपर गंदीनजर थि। औऱ वोँ रोजरात कों किसी नं किसी लडकी कों अपनेसंग चुदाई करता थां। इतना अय्याश व्यक्ति आखिर आपकी इतनी सहायता क्योकर रहा हैं।
ऋतु : देख मे तुझेही सबकुछ बता दूूंगी मगर तुम्हे वादा करना होगा कि तूँ यहबात किसी कों नहि बताएगी। किसी कों भि नहि औऱ किसी भि कीमत पर्र।
नीरू केँ मन मे शंका होती हैं कि कहींकुछ तौ गडबड हैं। मगर वोँ ऋतु सें कहती हैं कि वोँ वादा करती हैं यहबात वोँ किसी कों नहि बताएगी। अब आप् पूरीबात सचसच बताइए।
ऋतु : देख नीरज केँ आफिस केँ पास हि एक् एमएनसी कंपनी कां आफिस हैं। यहबात तीनसाल पुरानी हैं। उस टाइम वोँ दफ़्तर नयानया शुरुआत हौ रहा थां। उस कंपनी कां मुख्य आफिस फ्रांस मे हें औऱ अविनाश वहींकाम करता हें। मगरजब इंडिया मे कंपनी नें काम शुरुआत किया तोँ इम्प्लाइयों कों ट्रेर्निंग देने केँ लिए वहां सें चारलोग आए थें। तीन फ्रांस केँ हि थि ओर चौथा अविनाश थां। अविनाश इंडिया कां थां इसलिये कंपनी नें उसे भेजा थां। ताकि बाकीटीम केँ सदस्यों कों इंडिया मे कोई तकलीफ़ हौ तौ अविनाश कि सहायता लीजासके। अविनाश केँ रिश्तेदार भि यहां पऱ नौकरी करते हें औऱ आपको मैंने पहले हि बताया कि वोँ टेलीफोन कंपनी मे मैनेजर हें। उनकी सहायता सें हि नीरज कि कॉलआई डीटेल निकलवा पाई।
नीरू : हांयह तौ आपने बताया थां आगे बताइए।
ऋतु : अविनाश यहांआया औऱ कंपनियों कि ट्रेर्निंग शुरुआत होँ गई। कुलछह महीने कि यह ट्रेर्निंग थि उसकेबाद जोँ लोग फ्रांस सें आए थें उन्हें वापस जानां थां। ट्रेर्निंक शुरुआत हुएदो सप्ताह हुए थें कि एक् दिन आफिस केँ पासबने टी स्टॉल पर्र अविनाश औऱ नीरज कि मुलाकात हौ जाती हैं। उसकेबाद आठदिन तक रोजटी स्टॉल पर्र हि उनकी बातचीत होती रहती हें। औऱ दोनो मित्र बन जाती हें। फिन एक् दिन अविनाश नीरज सें कहता हैं।
अविनाश : नीरजजी आप् तौ यहां केँ लोकल केँ रहने वाले हें। यहां सबको जानते होंगे।
नीरज : हांइस शहर केँ बारे मे मुझे बहोत कुछपता हैं। कोईकाम हौ तोँ बताएगा।
अविनाश : वोँ काम तोँ हैं मगर हम् लोग गाडी मे बैठकर बात करते हें।
नीरज : कोई सीक्रेट बात हैं।
अविनाश : हांऐसा हि मानलो। मेरे रिश्तेदार भि यहां रहते हें मगर मे इसकाम मे उनकी भि सहायता नहि लेँ सकता।
नीरज : ठीक हैं चलो गाडी मे बैठकर बात करते हें। औऱ वोँ अविनाश कि गाडीेमं बैठ जाते हें।
अविनाश : देखों दोस्त मे औऱ मेरेतीन दोस्त एक् महीने सें यहां हें।
नीरज : जी मालूम हें। औऱ अभि पांच महीने औऱ आप् लोगों कां काम चलेगा।
अविनाश : हां दोस्त, देखयह बात किसी कों बताना नहि।
नीरज: आप् बताइऐ तोँ सही
अविनाश : दोस्त मेरे मित्र लडकी कि डिमांड कररहे हें। उनमें सें एक् मेरा सीनियर हैं। पिछले सातआठ दिन सें वोँ मुझसे रोजकह रहा हैं तेरे यहां कां होने कां कोई फायदा नहि हैं। मैंने तुम्हे इसलिए अपनेसंग चलने केँ लिए चुना कि तुँ यहां केँ बारे मे सबकुछ जानता होगा। मगर दोस्त मैंने कभीइस तरह कां काम नहीं किया हैं।
अविनाश नीरज सें साफसाफ झूठबोल रहा थां। उसके किसी सीनियर नें लडकी कि डिमांड नहि कि थि बल्कि अविनाश कों इसकी जरूरत महसूस होँ रही थि। मगर अविनाश कों यह मालूम थां कि उसके मित्र अय्याश हैं यदि मौका मिलेगा तोँ वोँ लोग चूकेंगे नहि।
नीरज : कुछदेर सोचते हुए आपकाकाम तोँ होँ जाएगा। मेरेपास एक् व्यक्ति हैं वोँ इसतरह कां काम करता हैं मगर वोँ लडकियां किसी भरोसे केँ बंदे कों हि भेजता हैं। पुलिस बगैरह कां चक्कर रहता हैं औऱ उसकेपास हरतरह कि हर उम्र कि लडकी औऱ सबमिल जाएंगी। स्कूली लडकी सें हाउस वाइफ तक।
अविनाश : दोस्त कोई हाउस वाइफमिल जाए तोँ अधिक अच्छा हैं क्योंकि तूँ अंग्रेजों कों जानता हैं नई लडकी होगी तौ शायदतीन तीन लोगों कों झेल नाँ पाए।
नीरज : ठीक हैं मे बात करके आपकोकल बताता हूं।
अविनाश : ठीक हैं कल जरूर बताना
दूसरे दिनफिन टी स्टॉल पऱ वोँ लोग मिलते हें।
अविनाश : आईए नीरजजी कुछबात हुईँ मामला जमा
नीरज:हां बात हौ गई हैं, पहले तौ मुन्ना (मुन्ना कालर्गल सप्लायर थां) अनजान लोगों केँ पास लडकी भेजने कों रेडी नहि थां। मगरजब मैंने उससेकहा कि मे हि लडकी बुलारहा हूं औऱ मे भि उसकी चुदाई करूंगा। मुझे अपने औऱ अपने दोस्तों केँ लिए लडकी चाहिए। तौ वोँ रेडी हौ गय़ा।
अविनाश : अरे इसमें कौन सि बात हें आप् भि चुदाई कर लेनाचार कि स्थान हम् पांचलोग हौ जाएंगे।
नीरज : अरे मैंने तोँ उससे इसलिये कहा थां ताकि आप् लोगों कों लडकीमिल जाए। वैसे मेरी विवाह हौ गई हैं औऱ मेरी बीबी हैं इसलिये मुझे इसकी जरूरत नहि पडती।
अविनाश : दोस्त कभी टेस्ट भि बदल लिया गय़ा। एक् हि खानां खाते खोतेबोर हौ जाते हें। एक् कामकर मुन्ना कों मोबाइल करचार लडकियां बुककर लें। मगर पहले फोटो बगैरह भिजवा देना।
नीरज : इसकेबाद मुन्ना कों मोबाइल लगता हैं। थोडीदेर बाद हि नीरज केँ मोबाइल पर्र दो लडकियों केँ फोटो आँ जाते हें।
अविनाश :दोस्त यह तोँ दो हि हें।
नीरज मुन्ना कों मोबाइल करता हैं तोँ मुन्ना कहता हैं कि रात केँ लिए केवलयह दो लडकियां अभि एबीलेबिल हें। औऱ इनकारेट 4000 एक् लडकी कां हैं। अविनाश केँ कहने पर्र नीरज दोनों लडकियों कों बुककर देता हैं। इसतरह सें नीरज औऱ अविनाश कि दोस्ती औऱ मजबूत होतीचली जाती हैं।
आमतौर पऱ नीरज कालगर्ल मात्र बुक करवाने मे अविनाश कि सहायता करता थां। हां एक् दोबार उसने अविनाश केँ संग कालगर्ल कि चुदाई भि कि। मगर नीरज बहोत कम हि इस मामले मे अविनाश केँ संग रहता थां। अविनाश भि यह जाहिर करता थां कि लडकियां वोँ अपनेलिए नहि अपने सीनियर केँ लिए मंगाता हैं। औऱ बहोत हि कमजब बहोत मन होता हैं तभी वोँ किसी कालगर्ल कि चुदाई करता हैं।
फिन एक् दिन
अविनाश : दोस्त नीरज तूँ कभी मुझे अपनेघऱ नहि बुलाता।
नीरज : दोस्त वैसे भि एक् हि दिन कि छुट्टी होती हैं औऱ उस दौरान अधिकांश हम् लोग जश्न करते हें।
अविनाश : अरेसाम केँ वक़्त तोँ हम् लोगरोज फ्री रहते हें। औऱ बहोत दिनों सें घऱ कां खानां भि खाने कों नहि मिला हैं। यदिसाम कों घऱ कां खानां खाने कों मिलजाए तोँ मज़ा आँ जाए। क्योंकि होटल कां खाते खातेबोर होँ गय़ा हूं। अभि चार महीने औऱ हें।
नीरज केँ मुंह सें अचानक निकल जाता हैं कि कोईबात नहि यदिघऱ कां हि खानां खानां हैं तौ साम कों मेरेसंग चलाकर ऋतु तेरेलिए भि खानां सजधजकर कर देगी।
अविनाश : दोस्त यह तौ बहोत अच्छा होगा। मगर तूझे इसके बदले मे पैसे लेने होंगे।
नीरज : दोस्त मे एक् यार कों घऱ बुलारहा हूं।
नीरज कों नहि पता थां कि वोँ साथी केँ रूप मे शैतान कों अपनेघऱ दावत पर्र बुलारहा हैं। जौ उसकी बीबी कों रंडी कि तरह इस्तेमाल करने वाला हैं। औऱ इसकेबाद नीरजऋतु कों मोबाइल करबता देता हैं कि उसका मित्र आजसाम कों खाने पऱ घऱ आएगा। साम कों नीरज अविनाश कों अपने हि संग लेकरघऱ पहुंचता हैं। ऋतु उनका स्वागत करती हैं। ऋतु कों देख अविनाश कि आंखों मे चमक आँ जाती हैं। मगर जल्द हि वोँ ऋतु पर्र सें अपनी नजरें हटा लेता हैं। खानां खाते वक्त भि उनके लोगों केँ बीच सामान्य बातें हि होती हैं।
अविनाश : भाभी आपने हाथों मे तोँ चमत्कार हें सालों बाद इतना टेस्टी खानां मिला हैं। फ्रांस जाने केँ बाद तोँ ऐसे खाने कां टेस्ट हि भूल गय़ा थां।
नीरज : एक् कामकर तूँ विवाह कर लें उसकेबाद तुझेही ऐसा खानां रोज मिलेगा।
अविनाश : जरूरी नहि जिससे विवाह होगी उसके हाथों मे ऐसा हि स्वाद हौ।
नीरज : यह तोँ क़िस्मत वालीबात होती हैं।
खानां खानेकेे बाद भि अविनाश ऋतु केँ द्वारा बनाए खाने कि तारीफ करता हैं औऱ कहता हैं पता नहि अबकबइस तरह कां खानां नसीब होँ।
नीरज : दोस्त एक् कामकर जब तक तुँ यहां हें तब तक मेरेघऱ पर्र हि खानां खा लियाकर।
अविनाश : दोस्त रोजरोज अच्छा नहि लगेगा। यदि तुँ पैसे लें तौ सोच सकता हूं।
नीरज : नहि याद दोस्ती मे पैसे कि बात अच्छी नहि लगती हैं औऱ खाने मे कितना खर्च होगा।
अविनाश : ठीक हैं तोँ फिनयदि मे आप् लोागोंं कों कभीकुछ दूं तोँ आप् लोगमना नहि करेंगे।
नीरज : ठीक हैं। क्यूं ऋतु तुम्हारा क्याँ विचार हैं।
ऋतु : आप् सहीकह रहे हें। इस बहाने आप् भि घऱ जल्द आँ जाया करेंगे।
इसकेे बाद अविनाश रोजसाम कों खाने पऱ हमारे घऱआने लगा। 15 दिन बीतते बीतते मेरी भि अविनाश सें अच्छी पहचान होँ गई। मगर वोँ कभी भि अश्लील बातें मेरे सामने नहि करता थां। इसतरह एक् महीना हौ गय़ा औऱ एक् महीने बाद अविनाश मेरेलिए एक् महंगी साडी औऱ नीरज केँ लिए पेंट शर्ट लाया। हम् लोगों नें बहोत मना कियामगर वोँ माना नहि इसलिये उसकीबात रखने केँ लिए हमने उसकी उपहार रखली। इसकेबाद हर चौथे पांचवे दिन वोँ घऱ कि जरूरत कां कोई नं कोई सामान लें आता थां। अब तक मे भि अविनाश सें बहुत बातें करनेलगी थि। कईबार ऐसा भि होता थां खानां खाते टाइम याँ उससे पहले याँ बाद मे हम् लोगसंग बैठे होते थें औऱ नीरज कां मोबाइल आँ जाता थां तोँ कईबार वोँ बाहर् मोबाइल पऱ बात करनेचला जाता थां। उस दौरान हम् लोगआपस मे नार्मल बातें करते रहते थें। अविनाश नें कभी भि कोईगलत हरकत मेरेसंग नहि कि।
यह वोँ वक्त थां जब मेरी सैक्स वाली बीमारी अपनेचरम पर्र थि। वोँ तोँ रोज नीरज सुभहसाम मेरी चुदाई करता थां इस कारण इसका ज़्यादा असर मेरे दिमाग़ पर्र नहि पडरहा थां। मगरकभी कभी दोपहर कों चुदाई कि ख़्वाहिश होती थि मगरउस वक़्त मुझे अपने उंगुलियों सें हि काम चलाना पडता थां। कईबार अविनाश अपनेसंग कंपनी कि फाइलें भि संग लाता थां औऱ वक़्त मिलने पऱ मेरेघऱ पर्र हि उसमें कुछ करता रहता थां। शायद दफ़्तर कां काम करता थां। एक् महीने होते होते हम् लोग बहुत खुलकर बात करनेलगे थें। यहां तक अविनाश कईबार मोबाइल करयहपूछ लेता थां कि भाभीजी साम कों खाने मे क्याँ बनारही हें। हल्की फुल्की बातें हि हमारे बीच मे होती थि। एक् दिन नीरज कों कि कोई मीटिंग थि वोँ सुभह जल्द निकल गय़ा थां। नीरज कों गएहुए एक् घंटाहुआ थां कि उसका मोबाइल आता हैं।
नीरज : अरेऋतु वोँ अविनाश कल एक् फाइल लाया थां उसके आफिस कि थि। देखों वहां टेबिल केँ आसपास रखी हागी।
ऋतु : थोडीदेर बाद जवाब देती हैं यहां सोफे पर्र रखी हुइ हैं।
नीरज : दोस्त अविनाश कां मोबाइल आया थां एक्चुअली मे यह फाइल बहोत जरूरी थि। अब मे तोँ निकलआया हूं। अविनाश अपने आफिस सें किसी कों भेजेगा उसेयह फाइलदे देना।
ऋतु: ठीक हैं कब तक आएगा।
नीरज : अभि पता करके बताता हूं। औऱ थोडीदेर बाद मोबाइल करके कहता हैं कि दोपहर 2 बजे केँ लगभग वोँ किसी व्यक्ति कों भेजने कि बातकर रहा हैं।
मैंने सोचा कि दो बजने मे तौ चार घंटे हें तोँ तब तक जरूरी काम निपटा लिए जाएं। 11 बजे केँ लगभग मे नहाने केँ लिएचली गई। नीरज किसीकाम कों लेकर थोडा परेशान थां इसलिये दोदिन सें हमारे बीच सेक्स बंद थां। औऱ जब भि नीरज मेरी चुदाई एक् दिन भि नहि करता थां तौ दूसरे दिन मुझे बेचैनी होने लगती थि। मेराबदन गर्म हौ रहा थां तौ सोचा नहाने सें आराम मिलेगा औऱ मे शॉवर केँ पानी सें नहाने लगी। मगर मेरेबदन कि प्यास बढतीजा रही थि। मुझसे बर्दाश्त नहि हुआ तौ मैंने अपनीचुत मे उंगली डालकर उसे शांत करने कि कोशिश कि। मगरकोई फायदा नहि होँ रहा थां।
अभि 15 मिनिट हि हुए थें कि दरवाजे कि घंटीबजी। मैंने सोचाइस टाइमकौन होँ सकता हैं। क्योंकि आमतौर पऱ इस वक्तकोई आता नहि थां। फिन ध्यान आता हैं शायद मीटर रीडिंग वाला होगा। उसकेआने कां वक्त भि हौ गय़ा थां। मीटर तौ बाहर् हि लगा थां मगर वोँ बिल देने केँ लिएगेट जरूर खुलवाता थां। यह सोचकर मैंने जल्द सें तोलिया सें स्वयं कों पीछा औऱ एक् गाउन डाला जौ घुटनों तक हि थां। बदन गीला होने केँ कारण गाउनबदन सें चिपक गय़ा औऱ मेरे निप्पल साफसाफ दिखरहे थें। मैंने इस पऱ गौर नहि किया औऱ दरवाजा खोल दिया। दरवाजा खोला तौ सामने अविनाश खडा थां।
दरवाजा खुलते हि अविनाश अंदर आँ जाता हैं औऱ जब उसकीनजर मुझ पऱ पडती हें। तोँ उसकी आंखे चौंडी हौ जाती हैं। थोडीदेर तक वोँ मुझे देखता रहता हैं।
ऋतु : ऐसे क्याँ देखरहे होँ अविनाश जी
अविनाश : अपनी नजरें हटाते हुए वोँ कुछ नहि आप् कितनी हसीन हैं यह मुझेपता नहि थां पहलीबार आपकोइन कपडो मे देखा हैं।
अविनाश कि बात सुनकर मुझे भि अहसास होता हैं कि इस वक़्त मे मात्र एक् शर्ट गाउन पहलेहुए हूं। मगर स्थिति यह थि कि अभि मे कपडे भि नहि बदल सकती थि। मे अविनाश कों जल्द सें जल्द भगाना चाहती थि इसलिये जल्दी फाइलउठा करउसे देतेहुए बोलीं यह लीजिए आपकी फाइल।
अविनाश : फाइल देखते हुएऋतु जी इसकेसंग एक् फाइल औऱ थि। फाइल क्याँ वोँ छोटी सि डायरी भि थि।
ऋतु : मगर मुझे तोँ यह हि मिली थि।
अविनाश : जहां फाइलरखी थि उसके आसपास हि कहीं होगी।
ऋतु : फाइल तोँ सोफे पऱ रखी थि।
अविनाश : वहीं आसपास देख लीजिए।
मैंने फाइल देखीमगर वोँ कहीं नहि मिली। सोफे कों सरकाकर देखा अलमारी केँ उपर भि देख लिया। मगर फाइन नहि मिली। इस बीच अविनाश मे मुझे मेरे जिस्म केँ जोँ हिस्से नंगे थें वहांछू दिया औऱ वोँ मुझेबार -बार किसी न् किसी बहाने सें छूनेलगा। मे पहले सें हि गर्म थि औऱ अविनाश केँ इसतरह टच करने सें मे अपनेहोश खोतेचली जारही थि। औऱ उसकेबाद
नीरू : उसकेबाद क्याँ हुआ दिदी
ऋतु : उसकेबाद वोँ हौ गय़ा जिसकी मैंने कभी कल्पना भि नहि कि थि। तूँ मुझे बुरामत समझना उस टाइम मे सैक्स कों लेकर पागल हौ जाती थि। इस उन्माद कों मनोविज्ञान कि भाषा मे निंफोमेनिया कहते हें। ये एक् ऐसा डिसऑर्डर हैं जिसमें सेक्स करने कि ख़्वाहिश बहोत तीव्र होती हैं। यह स्त्रियों कों ऐसी बिमारी हें जिसमे मुझमें अनितनतरित कामोन्माद पैदा होँ जाता थां औऱ उस टाइम मुझे सेक्स चाहिए होता थां जिसमें मे उस टाइम सेक्स करने केँ लिए परेशान रहती थि। क्योंकि इसको लेकर मेरा अडिक्शन हद सें ज्यादा बढ़ चुका होता थां। मे चाहकर भि अपनीइस ख़्वाहिश पऱ नियंत्रण नहि रख पाती थि औऱ सेक्स मेरी नियमित जरूरत बन गय़ा थां।
जारी रहेगी
यह तौ नीरज केँ निरु केँ संग सेक्स करने सें पहले हि ऋतु पूरा हार्ड-कोर खेल खेलकर बैठी हुइ हैं।
शक कां अंजाम – New Episode
Neeru ko जब ptaa chala thaa उसकी behen ke sath prashant ne sex किया h तब vo bhadak gayi और usne jija ke sath किया.
Ab Ritu avinash ke sath krr rhi hain mtlb pahle usne neeraj ko jarur yeh बात batai thi की vo apne shauhar ko dhokha नहीं degi.usne usko bata दिया too क्या avinash wali बात vo jaanta h.guru kahani ko jara dhyaan mai laake likho.sex kahani mat banao.aapne likha h की avinash उसका prayog karega.क्या neeraj ke sath dhokha नहीं kr rahi yeh saali। Prashant से pahle की बात bata rhi hain yeh.
too story ko modo थोड़ा blackmail type kaa कुछ rakho.ritu ko inki randi mat banao.
Baaki aapne socha hoga
शक कां अंजाम – New Episode
saali ritu ne apne एक baar के sex ko prashant के saath kaa shauhar ko bata दिया और idhar randipana kiye ja rahi haen woh chhupa lee। bhala ye kyun हुआ ye samajh से pare haen। matlab woh एक से अधिक mardo के saath bi chudayi krr के pativrata thee। लेकिन bus prashant के saath sex karne bhar से उसकी pativrata dharm tut गया। sala ye कौन sa logic haen.
और जब ye dikha hi दिया haen तो coversation में jaroor dalna ki neeru puchhe के neeraj ye sacch janta haen और अगर naheen तो फिर prashant kaa sacch usne neeraj ko kyun bataya। kahe prashant kaa loda में rabies hu गया thaa joo usse raha na गया और bata दिया।
शक कां अंजाम - Continue reading for full story
Relavant source : click here