आँचल की अय्याशियां - desi bahu – New Episode
चंडीगढ़ सें देल्ही वापस लौटने केँ बाद सुनील फैक्ट्री चला गय़ा। साम कों फैक्ट्री सें घऱ लौटने केँ बाद आलोक जोशी (ससुरजी) अपनी प्यारी बहू कों देखकर खुश हौ गय़ा। डिनर केँ वक्त उसने आँचल कों देखकर मुस्कुराहट बिखेरी मगर आँचल नें शरमाकर सर झुका लिया। ससुरजी सोचने लगा, यह तोँ पहले कां जैसा बिहेव कररही हैं, शरमारही हैं। फिन वोँ हमारी मोबाइल पे बातचीत कां क्याँ हुआ ?
अगलेकुछ दिनों मे ससुरजी नें महसूस किया कि आँचल उससेदूर हि रहने कि कोशिश कररही हैं, अकेले मे बात हि नहि होँ पारही। सुभह वोँ सुनील केँ संग फैक्ट्री चला जाता थां औऱ देरसाम कों हि लौटना होँ पाता थां। फैक्ट्री कि हालत डांवाडोल थि इसलिये सुनील केँ भरोसे छोड़ना भि ठीक नहीं थां।
चंडीगढ़ मे जस्सी केँ संग जमकर हुई चुदाई केँ बारे मे सोचकर आँचल केँ गाललाल होँ जाते थें, होठों पे मुस्कुराहट आँ जाती थि औऱ बुर गीली हौ जाती थि। आँचल कि उस चुदाई कि थकान उतरने मे हि कुछदिन लगगये। आँचल कों मालूम थां कि ससुरजी अकेले मे मिलना चाहरहे हें मगर उसने ससुरजी सें दूरी बनाएरखी। सासू माँ कि तबीयत भि अबकुछ सुधर गई, थि तौ सासू माँ केँ द्वारा पकड़े जाने कां भि डर थां। कुछदिन ऐसे हि चंडीगढ़ कि मीठी यादों मे गुजरगये।
सुनील भि अपने पुराने ढर्रे पऱ लौटआया थां। मनहुआ तौ किसीदिन आँचल कि चुदाई कर देता थां वरना करवट लेकरसो जाता थां।
ऐसे हि चार पाँच हफ्ते निकलगये। ससुरजी बेचैन थां कि आँचल कों केसे पटाऊँ। उधर आँचल भि कब तक चुदाई कि पुरानी यादों केँ भरोसे रहती, उसकी बुर भि खुजलाने लगी थि.
ऐसे मे एक् दिन ससुरजी कों एक् मौकाहाथ लग हि गय़ा।
हुआयह कि एक् दिन फैक्ट्री मे आलोक केँ एक् पुराने मित्र बलवंत कां मोबाइल आया कि मेरी बेटी कि विवाह हैं, अवश्य आनां हैं।
ससुरजी नें सोचा कि क्यूं नां सुनील कों विवाह मे भेजदूं ताकि आँचल सें अकेले मे मिलने कां मौकामिल जाए.
ससुरजी बोला, “ सुनील, चकरपुर सें बलवंत कां मोबाइल आया हैं, उसकी बेटी कि विवाह हैं। मे सोचरहा हूं कि तुम् विवाह मे होँ आओ। दुल्हन केँ लिए साड़ी औऱ एक् सोने कां हार तोहफा लेँ जानां। अधिक महंगा मत लेना, ठीक हैं ? पुरानां यार हैं इतना तोँ देना हि पड़ेगा। “
सुनील नें हामीभर दि.
साम कों घऱ लौटकर सुनील नें आँचल कों बताया, ”अगले सोमवार कों रौतेला अंकल कि बेटी सोनू कि विवाह हैं, पिताजी नें मुझसे जाने कों कहा हैं.”
आँचल नें पूछा, ”यह रौतेला अंकलकौन हें ?”
“रौतेला अंकल बापू केँ बहोत पुराने यार हें। नैनीताल डीएसबी कैंपस सें दोनों नें संग हि ग्रेजुएशन कि। फिन पिताजी देल्ही आँ गये। रौतेला अंकल सरकारी टीचरबन गये। “ सुनील नें बताया.
फिन सुनील नें आँचल सें भि संग चलने कों कहा.
“आँचल तुम् भि चलो, पहाड़ों कि ठंडीहवा कां मजालिए बहोत दिन होँ गये.वहा रिश्तेदारों सें भि मिल आएँगे औऱ विवाह भि अटेंड कर लेंगे। पहले हल्दवानी जाएँगे औऱ ताऊजी केँ घऱ रुकेंगे। फिन अल्मोड़ा चाचाजी सें मिल आएँगे। उसकेबाद हल्दवानी लौटकर विवाह अटेंड कर लेंगे.”
सुनील नें 4-5 दिन कां प्रोग्राम बना लिया। आलोक नें जब सुना कि बेटा, बहू कों भि संग लें जारहा हैं तोँ सरपीट लिया। इससे बढ़िया तौ मे हि मित्र केँ घऱ विवाह मे होँ आता.
सुनील औऱ आँचल वाहन सें हल्दवानी, फिन अल्मोड़ा जाकर रिश्तेदारों सें मिलआए औऱ उसकेबाद ताऊजी केँ पास हल्दवानी लौटआए.
सोमवार कों सुनील कां प्लान थां कि चकरपुर जाकर विवाह मे शामिल हौ जाएँगे औऱ रात मे हल्दवानी लौट आएँगे।
आँचल नें ऑरेंज कलर कि साड़ी औऱ मैचिंग ब्लाउज पहन लिया। बैकलेस ब्लाउज मे पीठ पऱ सिर्फ़ एक् स्ट्रिप थि इसलिये आँचल नें ब्रा नहीं पहनी.
“कैसीलग रही हूं ?”
“बहोत सुंदर “, आँचल कों अपनी बाँहों मे लेतेहुए सुनील बोला.
“मगर यह देल्ही नहीं हैं, हमें तौ छोटे सें कस्बे मे जानां हैं। कुछ ज्यादा हि मॉडर्न ड्रेस लगरही हैं.”
“दूसरी बदललूँ क्याँ ? “
“अरे रहनेदो दोस्त, पहले हि देर हौ रही हैं, फिन सें एक् घंटा औऱ लगाओगी.”
सुनील कों मालूम थां उसकी सुंदर पत्नि कि ऐसी ड्रेस पऱ लोगों कि निगाहें तोँ रहेंगी.
11 बजे सुभह सुनील औऱ आँचल रौतेला अंकल केँ घऱ पहुँच गये.वहा सुनील नें आँचल कों रौतेला अंकल औऱ उनकी पत्नि विमला आंटी सें मिलवाया। रिवाज़ केँ अनुसार आँचल नें दोनों केँ पांवछुए। उन्ही केँ संग
एक् 45 – 46 बरस कि स्त्री खड़ी थि, सुनील नें कहा, यह रावत आंटी हें। आँचल नें रावत आंटी केँ भि पांवछुए.
फिन रौतेला अंकल सुनील कों अपनेखास लोगों सें मिलाने लें गये औऱ रावत आंटी आँचल कों औरतों केँ पंडाल मे लें गई,।
“आँचल मेरेसंग आओ, सभी औरतें पंडाल मे हें। वहीं बैठते हें.”
रावत आंटी मिलनसार स्वभाव कि महिला थि, जल्द हि आँचल सें घुलमिल गई,। उसने आँचल कों कुछ औऱ औरतों सें भि मिलवाया।
रावत आंटी : यह आँचल हैं, देल्ही सें आई हैं। रौतेलाजी केँ यार कि बहू हैं.
“बाहर् सें आई हैं, वोँ तोँ इसके कपड़ों सें हि पताचल रहा हैं.” कोई मुँहफट महिला बोलि.
आँचल कों उसकीबात अच्छी नहींलगी, उसने मुँह बनाया, हुह ….होगीकोई गँवार.
फिन उनकेबीच आपस मे बातचीत होनेलगी.
रावत आंटी : “तौ आँचल कैसीचल रही हैं सुनील केँ संग तुम्हारी लाइफ ? अभि तक कोई मेहमान नहींआया, क्याँ बात ?”
आँचल : “आंटी अभि डेढ़साल हि तोँ हुआ हैं विवाह कों, उसकेलिए तौ अभि बहोत वक्त हैं.”
“तभी तौ इतना सेक्सी फिगर मेनटेन कियाहुआ हैं। इतना आसान थोड़ी हैं विवाह केँ बाद.”बगल मे बैठी स्त्री बोल पड़ी.
“अच्छा हुआ हमारे जैसे मर्द नहीं हें जौ कि एक् महीने मे हि सारा फिगर बिगाड़ देते हें। दबादबा केँ लटका देते हें.” रावत आंटी नें अपनी बड़ीमगर लटकी हुई चूचियों कि तरफ इशारा करतेहुए कहा.
आँचल शरमा गई,, अभि तोँ इन औरतों सें परिचय हुआ हैं औऱ यहऐसे बातें करनेलगी हें।
“बेचारी कों क्यूं तंगकर रही होँ। चलोकुछ काम नहीं हैं क्याँ ? “, विमला आंटी नें आकरउन औरतों कों चुपकरा दिया.
फिन रावत आंटी नें आँचल कों दुल्हन सें मिलवाया, ” सोनूयह हैं, आँचल। सुनील कि पत्नि। औऱ आँचलयह हैं हमारी सोनू। बहोत होशियार हैं पढ़ाई मे। हमेशा टॉप करती हैं.“
आँचल नें देखा सोनू दिखने मे खूबसूरत हैं। मासूम चेहरा, सफ़ेद रंग, पतलीनाक, बड़ी बड़ी आँखें.
उसकेबाद विमला आंटी नें आँचल कों विवाह कां अरैंजमेंट दिखाया, कहां पर्र मंडप हैं, कहां खाने कां इंतज़ाम हैं वगैरह। विवाह मे काफ़ी लोग आँ चुके थें पऱ आँचल केँ लिए वोँ अंजाने चेहरे थें। मर्दों कि निगाहें अपने जिस्म पर्र आँचल नें महसूस कि पर्र उसे इसकीआदत थि, वोँ अपने अंदाज़ मे इठलाती हुई इधरउधर घूमती रही।
“अरेकोई ऊपर जाकर देखोसभी ठीक सें सज़ा हैं कि नहीं ?” विमला आंटी नें आवाज़ लगाई.
“चलो आँचलऊपर केँ कमरे देखते हें.” रावत आंटी बोलि.
रावत आंटी अपनेसंग आँचल कों फर्स्ट फ्लोर पे लेँ गई,। वहा उन्होने पहलारूम चेक किया, उसमेसभी ठीक सें सज़ा थां।
तभी नीचे सें विमला आंटी नें आवाज़ लगाई, “अलमारी कि चाभी कहां हैं ? मिल नहींरही …”
रावत आंटी बोलि, ”आँचल यहदो कमरेदेख लो। मे अभि चाभी देकरआती हूं.”
“ठीक हैं आंटी.”
आँचल नें दूसरा रूम देखा, वहा भि सभीठीक थां। फिन तीसरे कमरे मे गई,, वहाबेड पऱ चादर वगैरह ठीक सें नहीं बिछी थि तौ आँचल नें उसेठीक कर दिया.
तभी आँचल कों कुछ लोगों केँ बोलने कि आवाज़ सुनाई दि। उसने कमरे कि साइड वाली खिड़की सें बाहर् देखा तौ उसतरफ कि बालकनी मे तीनलोग आपस मे बातें कररहे थें.
“दोस्त अपनी तौ भाग्य हि खराब हैं, ऐसी भैंस जैसी पत्नि मिली हैं, चोदने कां मन हि नहीं करता.” पहला व्यक्ति बोला, जौ लगभग 40 – 42 कां होगा.
“हाँ दोस्त मेरी पत्नि केँ भि दूधलटक गये हें, अबमजा नहींआता। कोईनयी चीज़हाथ लगे तोँ मजाआए.” दूसरा व्यक्ति बोला, जौ लगभग 50 बरस कां होगा.
“दोस्त रावतजी, पुलिस कि जॉब मे मैंने बहोत औरतें चोदीं हें। जब भि छापेमारी मे कालगर्ल्स पकड़ता थां तौ बिना चोदे नहीं जाने देता थां। मगर सालाइसी चक्कर मे सस्पेंड हौ गय़ा.” तीसरा व्यक्ति दूसरे कि तरफ देखते हुए बोला, वोँ भि 50 बरस केँ आसपास कां हट्टा कट्टा व्यक्ति थां.
यानी कि दूसरे व्यक्ति कां नाम रावतजी हैं.
“अरे दारोगाजी ऐसा क्याँ कर दिया ? “, पहले व्यक्ति नें पूछा.
“वर्माजी होना क्याँ थां। एक् बड़े कस्टमर नें अपनेलिए देल्ही सें दो कालगर्ल्स कां इंतज़ाम किया। मुखबिर सें मुझेयह जानकारी मिल गयीँ,। मे अपनेखास बंदे लेकर होटेल पहुँच गय़ा, जहाँ वोँ रंगरेलियाँ मनारहा थां। मोटी आसामी हाथलगी थि। वोँ व्यक्ति कहनेलगा, मेरानाम खराब होँ जाएगा। 2 लाख लेकरउस व्यक्ति कों छोड़ दिया औऱ कालगर्ल्स कि जमकर चुदाई कि। अबबात यह हैं कि मुझे गांड मारने कां शौक़ हैं मगर वोँ लड़कियाँ गांड मरवाने कों राज़ी नहीं हुइ। ज़बरदस्ती करने मे एक् कि हालत खराब हौ गयीँ,। उस टाइम तौ मैंने डरा धमकाकर वाहन सें उन्हें भेज दिया पऱ वोँ रास्ते मे हालत बिगड़ने पऱ हॉस्पिटल मे भरती होँ गयीँ,। वहा सें यहबात फैल गई, औऱ दूसरे दिन अख़बार मे छप गई,। औऱ मुझे सस्पेंड कर दिया गय़ा.”
उसकी बातें सुनकर आँचलडर गई, यह तोँ बहोत खराब व्यक्ति लगता हैं।
“अबऐसे काम करोगे तोँ सस्पेंड तौ होना हि थां.” रावतजी हंसते हुए बोला.
“अरे उस ऑरेंज साड़ी वाली खूबसूरती कि परी कों देखा क्याँ ? साली कि चूचियाँ ब्लाउज फाड़ने कों रेडी हें.” पहला व्यक्ति वर्माजी बोला.
“हाँ, साली अधनंगी बन केँ आई हैं। पूरीपीठ नंगी हैं औऱ ब्रा भि नहीं पहनी हैं। उसकी चिकनी गोरीपीठ चाटने कां मनकररहा हैं। साली कां पति लगता हैं ज़ोर सें चूचियाँ दबाता नहींतभी तोँ तन केँ उठी हुईँ हें। मेरेहाथ लगे तोँ दो हफ्तों मे दबादबा केँ लटकादूं.” रावतजी कि आवाज़ थि.
“इतनी फैशनेबल लड़कीयहा कि नहीं लगती, कहीं बाहर् सें आई होगी। साड़ी तौ ऐसी पहनी हैं कि बलखाती हुईँ गांड देखकर कोई भि लार टपकादे.” वर्माजी बोला.
“किसकी बातकर रहे हौ दोस्त तुम् लोग.यह कौन खूबसूरती कि परी आँ गयीँ, यहा ?” दारोगा कि कुछसमझ नहींआया.
“सुभह सुभहपी ली हैं क्याँ जोँ ऐसी सुंदर लड़कीआँख नहींदिख रही.चलो नीचे चलते हें वहींदिख जाएगी.” रावतजी नें जवाब दिया.
आँचल अपने बारे मे उन लोगों कों ऐसेबात करते देखकर सन्नरह गई,। उसने सोचा सुनील नें ठीक हि कहा थां, बैकलेस ब्लाउज नहीं पहनना चाहिए थां, पर्र अब क्याँ हौ सकता थां।
फिनजब उसने सुना कि वोँ लोग नीचे जाने कि बातकर रहे हें तोँ वोँ तेज़ी सें कमरे सें बाहर् आकर नीचे आँ गई,।
कुछदेर बाद आँचल कों सुनील मिल गय़ा। उन्हें बात करतेहुए कुछ हि मिनटहुए होंगे तभी सुनील बोला, ” आँचलयह रावत अंकल हें, जौ आंटी सें पहले मिलाया थां नाँ, वोँ इनकी हि वाइफ हैं। औऱ यह मेरी पत्नि आँचल हैं.”
सुनील कि बात पऱ आँचल नें पीछे पलटकर देखा, ओह………….उसकी सांसरुक गई,। यहवही व्यक्ति थां जौ फर्स्ट फ्लोर मे उसके बारे मे अनाप शनापबक रहा थां।
आँचल कों झिझकते देखकर सुनील नें उसे पांव छूने कां इशारा किया।
आँचल नें उसकेपेर छुए.
उसने आँचल कि नंगी बाहों कों पकड़ते हुएऊपर उठा दिया.अपनी रसीले बाँहो मे रावत अंकल कि मजबूत पकड़ कों आँचल नें महसूस किया, कितना कस केँ पकड़रहा हैं, निशान बना देगा क्याँ। आँचल नें उसकी आँखों मे अपनेलिए हवस देखी।
“अरेबहू तुम्हारी स्थान पैरो मे नहीं हैं.” फिन सुनील सें बोला, “ सुनील तुम्हारी पत्नि तोँ बहोत सुंदर हैं.”
आँचल नें देखा इसकी नज़र मेरी चूचियों पर्र हि हैं। वोँ सोचने लगी सुनील इसकी इतनी रेस्पेक्ट कररहा हैं औऱ यहमुझ पर्र नज़रें गड़ाए हैं.
फिन आँचलउन दोनों कों छोड़कर पंडाल मे चली गयीँ,.
“अरे आँचल कहां चली गयीँ,, मे कब सें तुम्हें ढूँढरही हूं.” रावत आंटी उसको देखते हि बोलि.
“तुम्हारा व्यक्ति भि मुझे हि ढूँढरहा हैं.” आँचल नें धीरे-धीरे सें जवाब दिया.
“क्याँ कहा आँचल ? मुझे सुनाई नहीं दिया….“
“नहीं……कुछ नहीं.”
Chandigarh सें Delhi wapis lautne केँ बाद Sunil factory chala गय़ा। sham ko factory सें घऱ lautne केँ बाद Alok joshi (Sasur) apni pyari bahu ko dekhkar खुश hu गय़ा। dinner केँ time usne aanchal ko dekhkar muskurahat bikheri मगर aanchal ne sharmakar sar jhuka लिया। Sasur sochne laga, yeh too pahle kaa jaisa behave krr rahi h, sharma rahi h। फिन woh hamaari phone pe baatcheet kaa क्याँ हुआ ?
Agle कुछ dino मे sasur ne ehsaas किया कि Aanchal usse dur hi rehne कि koshish krr rahi h, akele मे बात hi नहि hu pa rahi। subah woh sunil केँ sath factory chala jata thaa औऱ der sham ko hi lautna hu ptaa thaa। factory कि halat dawadol thi इसलिये sunil केँ bharose chodna bi theek नहि thaa।
Chandigarh मे jassi केँ sath jamkar hoyi chudayi केँ bare मे sochkar aanchal केँ gaal laal hu jate the, hothon pe muskurahat aa jati thi औऱ chut gili hu jati thi। Aanchal कि us chudayi कि thakaan utarne मे hi कुछदिन lag gaye। Aanchal ko malum thaa कि sasurji akele मे milna chah rahe haen मगर usne sasur सें duri banaye rakhi। Saas कि tabiyat bi अबकुछ sudhar gai thi too saas केँ dwara pakde jane kaa bi dar thaa। Kuch दिन ayese hi chandigarh कि meethi yadon मे gujar gaye.
Sunil bi apne purane dharre पर्र laut आया thaa। mann हुआ too kisi दिन aanchal कि chudayi krr deta thaa वरना karwat लेकर so jata thaa।
ayese hi चार paanch hafte nikal gaye। Sasur baichain thaa कि aanchal ko kese pataun। Udhar aanchal bi कब tak chudayi कि purani yadon केँ bharose rehti, उसकी chut bi khujlane lagi thi.
ayese मे एक् दिन sasur ko एक् chance hath lag hi गय़ा।
huwa yeh कि एक् दिन factory मे Alok केँ एक् purane friend balwant kaa phone आया कि मेरी beti कि shaadi h, jaroor आनां h।
Sasur ne socha कि kyun na sunil ko shaadi मे bhej dun takii aanchal सें akele मे milne kaa chance mil jaye.
Sasur बोला, “ Sunil, chakarpur सें balwant kaa phone आया h, उसकी beti कि shaadi h। me सोच raha hoon कि tm shaadi मे hu aao। Dulhan केँ liye saree औऱ एक् sone kaa haar gift le jana। Jyada mahanga mat लेना, theek h ? प्राचीन friend h, itna too देना hi padega। “
Sunil ne haami bhar di.
Sham ko घऱ lautkar Sunil ne Aanchal ko bataya, ”agle somwar ko Rautela uncle कि beti Sonu कि shaadi h, papa ne mujhse jane ko कहा h.”
Aanchal ne pucha, ”yeh Rautela uncle कौन haen ?”
“Rautela uncle Papa केँ बहोत purane friend haen। Nainital DSB campus सें dono ne sath hi graduation कि। फिन papa delhi aa gaye। Rautela uncle sarkari teacher ban gaye। “ Sunil ne bataya.
fir Sunil ne Aanchal सें bi sath chalne ko कहा.
“Aanchal tm bi chalo, paharon कि thandi hawa kaa majaa liye बहोत दिन hu gaye। Wahan ristedaron सें bi mil aayenge औऱ shaadi bi attend krr lenge। pahle haldwani jayenge औऱ tauji केँ घऱ rukenge। fir Almora chachaji सें mil aayenge। उसकेबाद haldwani lautkar shaadi attend krr lenge.”
Sunil ne 4-5 दिन kaa program bnaa लिया। Alok ne जब suna कि beta, bahu ko bi sath le jaa raha h too sar peet लिया। Isse badiya too me hi friend केँ घऱ shaadi मे hu aata.
Sunil औऱ Aanchal gaadi सें haldwani, फिन Almora jakar rishtedaron सें mil aaye औऱ उसकेबाद tauji केँ pass haldwani laut aaye.
Somwar ko Sunil kaa plan thaa कि chakarpur jakar shaadi मे shamil hu jayenge औऱ rath मे haldwani laut aayenge।
Aanchal ne orange color कि saree औऱ matching blouse pahan लिया। Backless Blouse मे peeth पऱ sirf एक् strip thi इसलिये Aanchal ne bra नहि pahni.
“kaisi lag rahi hoon ?”
“बहोत haseen “, Aanchal ko apni banho मे lete hue Sunil बोला.
“मगर yeh delhi नहि h, हमें too chote सें kasbe मे jana h। कुछ jyada hi modern dress lag rahi h.”
“dusri badal lun क्याँ ? “
“are rehne दो yar, pahle hi der hu rahi h, फिन सें एक् ghanta औऱ lagaogi.”
Sunil ko malum thaa उसकी haseen biwi कि aisi dress पर्र logon कि nigahe too rahengi.
11 baje subah Sunil औऱ Aanchal Rautela uncle केँ घऱ pahunch gaye। Wahan Sunil ne Aanchal ko Rautela uncle औऱ unki biwi Vimla aunti सें milwaya। Riwaz केँ anusaar Aanchal ne dono केँ pair chue। Unhi केँ sath एक् 45 – 46 baras कि stri khadi thi, Sunil ne कहा, yeh Rawat aunti haen। Aanchal ne Rawat aunti केँ bi pair chue.
fir Rautela uncle Sunil ko apne khaas logon सें milane le gaye औऱ Rawat aunti Aanchal ko aurton केँ pandaal मे le gai।
“Aanchal मेरे sath aao, sab aurtein pandal मे haen। Wahin baithte haen.”
Rawat aunti milansaar swabhav कि stri thi, juldi hi aanchal सें ghul mil gai। Usne Aanchal ko कुछ औऱ aurton सें bi milwaya।
Rawat aunti : yeh Aanchal h, delhi सें aayi h। Rautelaji केँ friend कि bahu h.
“बाहर् सें aayi h, woh too iske kapdon सें hi ptaa chl raha h.” कोई munhfat stri boli.
Aanchal ko उसकीबात achchi नहि lagi, usne munh banaya, huh….hongi कोई ganwar.
fir unke beech aapas मे baatcheet hone lagi.
Rawat aunti : “too Aanchal kaisi chl rahi h Sunil केँ sath tumhari life ? abi tak कोई mehmaan नहि आया क्याँ बात ?”
Aanchal : “aunti abi dedh साल hi too हुआ h shaadi ko, उसके liye too abi बहोत waqt h.”
“तभी too itna sexy figure maintain कियाहुआ h। itna aasan thodi h shaadi केँ बाद.” Bagal मे baithi stri bol padi.
“अच्छा हुआ humare जैसे mard नहि h joo कि एक् mahine मे hi sara figure bigaad dete haen। Daba daba केँ latka dete haen.” Rawat aunti ne apni badi मगर latki hoyi chuchiyon कि tarf ishara karte hue कहा.
Aanchal sharma gai, abi too in aurton सें parichay हुआ h औऱ yeh ayese baatein karne lagi haen।
“bechari ko kyon tang krr rahi hu। Chalo कुछकाम नहि h क्याँ ? “, Vimla aunti ne aakar un aurton ko khamosh kara दिया.
fir Rawat aunti ne Aanchal ko dulhan सें milwaya, ” Sonu yeh h, Aanchal। Sunil कि biwi। or Aanchal yeh h hamaari Sonu। bhut satark h padai मे। hammesha top krti h। “
Aanchal ne देखा Sonu dikhne मे beautiful h। masum चेहरा, gora rang, patli naak, badi badi aankhe.
Uske बाद Vimla aunti ne Aanchal ko shaadi kaa arrangement dikhaya, kahan पऱ mandap h, kahan khane kaa intzaam h wagerah। shaadi मे kaafi लोग aa chuke the पऱ Aanchal केँ liye woh anjane chehre the। Mardon कि nigahe apne badan पर्र Aanchal ne ehsaas कि पऱ use iski aadat thi, woh apne andaaz मे ithlati hoyi idhar udhar ghumti rahi।
“aree कोईऊपर jakar dekho sab theek सें saja h कि नहि ?” Vimla aunti ne awaz lagayi.
“chalo aanchal ऊपर केँ kamre dekhte haen.” Rawat aunti boli.
Rawat aunti apne sath aanchal ko first floor pe le gai। वहा unhone pehla kamraa check किया, usme sab theek सें saja thaa।
Tabhi नीचे सें vimla aunti ne awaz lagayi, “almari कि chabhi kahan h ? mil नहि rahi …”
Rawat aunti boli, ”Aanchal yeh दो kamre dekh lo। me abi chabhi देकर aati hoon.”
“theek h aunti.”
Aanchal ne dusra kamraa देखा, वहा bi sab theek thaa। फिन tisre kamre मे gai, वहा bed पर्र chaddar wagerah theek सें नहि bichi thi too aanchal ne use theek krr दिया.
Tabhi Aanchal ko कुछ logo केँ bolne कि awaz sunayi di। usne kamre कि side wali khidki सें बाहर् देखा too us tarf कि balkani मे तीनलोग aapas मे batein krr rahe the.
“yar apni too taqdeer hi bura h, aisi bhains jaisi biwi mili h, chodne kaa mann hi नहि krta.”pehla व्यक्ति बोला, joo kareeb 40 – 42 kaa hoga.
“ha yar मेरी biwi केँ bi dudh latak gaye haen, अब majaa नहि aata। koy nayee cheej hath lage too majaa aaye.” Dusra व्यक्ति बोला, joo kareeb 50 baras kaa hoga.
“yar Rawatji, police कि naukri मे maine बहोत aurtein chodi haen। jb bi chapemari मे callgirls pakadta thaa too bina chode नहि jane deta thaa। mgr saala isi chakkar मे suspend hu गय़ा.” tisra व्यक्ति doosre कि tarf dekhte hue बोला, woh bi 50 baras केँ aas pass kaa hatta katta व्यक्ति thaa.
Yani कि doosre व्यक्ति kaa nam rawatji h.
“Are darogaji aesa क्याँ krr दिया ? “, pahle व्यक्ति ne pucha.
“Vermaji hnaa क्याँ thaa। एक् bade customer ne apne liye delhi सें दो callgirls kaa intzaam किया। mukhbir सें muze yeh jankari mil gai। me apne khaas bande लेकर hotel pahunch गय़ा, jahan woh rangreliyan mana raha thaa। moti assami hath lagi thi। woh व्यक्ति kehne laga, मेरा nam bura hu jayega। 2 lakh लेकर us व्यक्ति ko chod दिया औऱ callgirls कि jamkar chudayi कि। Ab बात yeh h कि muze gand marne kaa shauq h मगर woh ladkiyan gand marwane ko raji नहि hoyi। Jabardasti karne मे एक् कि halat bura hu gai। us वक़्त too mene dara dhamka krr gaadi सें unhe bhej दिया पऱ woh raste मे halat bigadne पऱ hospital मे bharti hu gai। वहा सें yeh बात fail gai औऱ doosre दिन akhbaar मे chap gai। औऱ muze suspend krr दिया गय़ा.”
Uski batein sunkar Aanchal dar gai yeh too बहोत bura व्यक्ति lagta h।
“अब ayese काम karoge too suspend too hnaa hi thaa.” Rawatji hanste hue बोला.
“are us orange saree wali husn कि pari ko देखा क्याँ ? saali कि chuchiyan blouse fadne ko taiyaar haen.” Pehla व्यक्ति vermaji बोला.
“ha, saali adhnangi ban केँ aayi h। poori peeth nangi h औऱ bra bi नहि pahni h। उसकी chikni gori peeth chatne kaa mann krr raha h। saali kaa shauhar lagta h jor सें chuchiyan dabata नहि तभी too tan केँ uthi hoyi haen। Mere hath lage too दो hafton मे daba daba केँ latka dun.” Rawatji कि awaz thi.
“itni fashinable ldki यहा कि नहि lagti, kahi बाहर् सें aayi hongi। Saree too aisi pahni h कि matakti hoyi gand dekhkar कोई bi laar tapka de.” Vermaji बोला.
“kiski bat krr rahe hu yar tm लोग। yeh कौन husn कि pari aa gai यहा ?” daroga कि कुछ samajh नहि आया.
“subah subah pi li h क्याँ joo aisi haseen ldki आंख नहि dikh rahi। Chalo नीचे chalte haen wahin dikh jayegi.” Rawatji ne jawab दिया.
Aanchal apne baare मे un logon ko ayese बात karte dekhkar sann rha gai। usne socha sunil ne theek hi कहा thaa, backless blouse नहि pahanna चाहिए thaa, पऱ अब क्याँ hu sakta thaa।
फिनजब usne suna कि woh लोग नीचे jane कि बात krr rahe haen too woh teji सें kamre सें बाहर् aakar नीचे aa gai।
कुछ der बाद Aanchal ko Sunil mil गय़ा। unhe बात karte hue कुछ hi min hue honge तभी Sunil बोला, ” Aanchal yeh Rawat uncle haen, joo aunti सें pahle milaya thaa na, woh inki hi wife h। औऱ yeh मेरी biwi Aanchal h.”
Sunil कि बात पर्र Aanchal ne piche palatkar देखा, ohoooo…….उसकी sans rukh gai। yeh vahi व्यक्ति thaa joo first floor मे उसके baare मे anaap shanap bak raha thaa।
Aanchal ko jhijhakte dekhkar Sunil ne use pair chune kaa ishara किया।
Aanchal ne उसके pair chue.
Usne aanchal कि nangi bahon ko pakdte hue ऊपर utha दिया.Apni mulayam banho मे Rawat uncle कि majboot pakad ko aanchal ne ehsaas किया, kitna kas केँ pakad raha h, nishaan bnaa dega क्याँ। Aanchal ne उसकी aankho मे apne liye hawas देखी।
” are bahu tumhari स्थान pairo मे नहि h.” फिन Sunil सें बोला, ” Sunil tumhari biwi too बहोत haseen h.”
Aanchal ne देखा iski nazar मेरी chuchiyon पऱ hi h। woh sochne lagi Sunil iski itni respect krr raha h औऱ yeh mujh पर्र nazrein gadaye h.
fir Aanchal un dono ko chodkar pandaal मे chali gai.
“are aanchal kahan chali gai, me kabse tumhe dhoondh rahi hoon.” Rawat aunti usko dekhte hi boli.
“tumhara व्यक्ति bi muze hi dhoondh raha h.” aanchal ne dhire सें jawab दिया.
“क्याँ कहा aanchal ? muze sunai नहि दिया…….“
“नहि ……कुछ नहि.”
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sai....
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मस्ती कि पराकाष्ठा कों छूती हुइ स्टोरी ..............
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आँचल की अय्याशियां - desi bahu – New Episode
ससुरजी निश्चिंत थां कि जब आँचल चंडीगढ़ सें लौटकर आएगी तौ अवश्य उसको चोदने देगी। मोबाइल मे तौ कहरही थि कि देल्ही वापसआकर आपकेसंग प्यास बुझाऊँगी। पर्र उसे क्याँ पता थां कि आँचल तोँ जस्सी केँ संग हि अपनीजी भरके प्यास बुझाआई थि।
अगलेकुछ दिनों मे ससुरजी नें महसूस किया कि आँचल उससेदूर हि रहने कि कोशिश कररही हैं। ससुरजी कों आँचल सें ऐसे बर्ताव कि उम्मीद नहीं थि। वोँ तोँ सोचरहा थां कि आँचल केँ वापसआते हि उसकेसंग चुदाई कां प्लान बनाएगा पऱ यहा तोँ आँचल उससे नॉर्मली बिहेव कररही थि, पहले केँ जैसे।
ससुरजी अनुभवी व्यक्ति थां उसेशक़ होँ गय़ा कि आँचल अवश्य चंडीगढ़ मे किसी नाँ किसी केँ संग चुदाई केँ मज़े लें केँ आई हैं तभी शांत होँ रखी हैं औऱ मुझेभाव नहींदे रही। चेहरा भि खिला खिला हैं, पूर्ण संतुष्टि केँ भाव हें। लगता हैं खूब अपनेमन कि करकेआई हैं। हँसती खिलखिलाती रहती हैं, यहा मेरा कलेजा जलरहा हैं.
अकेले मे बात भि नहीं होँ पारही थि। सुभह वोँ सुनील केँ संग फैक्ट्री चला जाता थां औऱ देरसाम कों हि लौटना हौ पाता थां। फैक्ट्री कि हालत डाँवाडोल थि इसलिये सुनील केँ भरोसे छोड़ना भि ठीक नहीं थां। ख़ान केँ दिएलोन सें जैसे तैसेकाम चलरहा थां.
आँचल जानती थि कि देल्ही वापसआने केँ बाद ससुरजी उसे चोदने कां कोई मौकाहाथ सें जाने नहीं देंगे। मगर जस्सी नें उसे इतना चोदा थां कि उसकी प्यास कुछ दिनों बुझीरही। चंडीगढ़ मे जस्सी केँ संग जमकर हुई चुदाई केँ बारे मे सोचकर आँचल केँ गाललाल होँ जाते थें, होठों पे मुस्कुराहट आँ जाती थि औऱ बुर गीली होँ जाती थि। आँचल कि उस चुदाई कि थकान उतरने मे हि कुछदिन लगगये।
सेक्सुअली सैटिस्फाइड होने केँ बाद आँचल कों कुछदिन तक पतिव्रता होने कां सुर चढ़ा रहता थां। उसने ससुरजी सें पहले कि तरह दूरी बनाएरखी। वैसे भि घऱ मे इतने लोगो केँ होने सें ससुरजी कों आँचल सें अकेले मे अपनेमन कि बात करने कां मौका नहींमिल पारहा थां। सासू माँ कि तबीयत अबठीक थि, उसके द्वारा पकड़े जाने कां डर भि थां।
आँचल केँ अगलेकुछ दिनऐसे हि चंडीगढ़ कि मीठी यादों मे गुजरगये। सुनील भि अपने पुराने ढर्रे पऱ लौटआया थां। रिया केँ आने सें उसकी लाइफ मे जोँ एक्साइट्मेंट आई थि वोँ भि अब नहींरही। मनहुआ तोँ किसीदिन आँचल कि चुदाई कर देता थां वरना करवट लेकरसो जाता थां, फैक्ट्री कि टेंशन मे हि ज्यादा रहता थां.
ऐसे हि दोतीन हफ्ते निकलगये। सासू माँ अब अपनेकाम स्वयं कर लेती थि तोँ उसने सुनीता कि छुट्टी कर दि। ससुरजी बेचैन थां सुनीता भि गई,, आँचल कों केसे पटाऊँ। अपनीतरफ सें पूरी कोशिश करता थां, नाश्ते औऱ डिनर कि टेबल पर्र आँखों हि आँखों मे इशारे करता थां पर्र आँचल शरमाकर सर झुका लेती थि। ससुरजी कों पता थां सुनील आँचल कों संतुष्ट नहींकर पाता हैं। कुछदिन इंतजार करना पड़ेगा.
पऱ आँचल भि कब तक चुदाई कि पुरानी यादों केँ भरोसे रहती, उसको भि रगड़ केँ चुदाई कि ख़्वाहिश होनेलगी। रियाबता रही थि ससुरजी नें मोटे लन्ड सें चोदकर बहोत मज़ेदिए। पूरेतीन दिन मेरे ससुरजी केँ संग मज़े करके गई, औऱ मुझेखबर तक नहींलगी।
लिविंग रूम मे सुनीता कों चोदते हुए तौ मैंने भि देखा थां उसरात कों। उफ कितनी रगड़ केँ चुदाई कररहे थें उसकी अपने मोटे लन्ड सें ससुरजी। मुझे भि वैसे हि चोदेंगे ससुरजी ? आँचल कि बुर गीली हौ गयीँ, …….
नहीं नहींयह ठीक नहीं होगा …। … किसी औऱ मर्द कि बातअलग हैं पर्र सुनील केँ बाप केँ संग ? उसका दिमाग़ कहरहा थां यह ग़लत होगा.मगर सुनील मुझे सेक्सुअली सैटिस्फाई नहींकर पाता तोँ मे क्याँ करूँ ? अजीब सि दुविधा थि.
धीरे-धीरे धीरे-धीरे उसने ससुरजी कों रेस्पॉन्स देना शुरुआत कर दिया। उसकेहाव भाव सें ससुरजी कों भि पताचल गय़ा अब लाइनदे रही हैं। ससुरजी नें आँचल कि आँखों मे प्यास देखी.हाँ, अबसही मौका हैं। अब इसको कहीं बाहर् लेँ जाकर चोदता हूं। ससुरजी आगे कां प्लान बनाने लगा.
कुछ दिनों बाद एक् सुभह नाश्ते केँ वक़्त ससुरजी कों मौकामिल गय़ा।
सुनील ब्रेकफास्ट करकेउठ गय़ा थां.टेबल पऱ आँचल औऱ उसके सासू ससुरजी थें। आँचल कि नज़रें ससुरजी सें मिलती हें, वोँ ब्रेकफास्ट करतेहुए उसी कों देखरहा थां। आँचल शरमा जाती हैं औऱ चुपचाप ब्रेकफास्ट करने लगती हैं। फिन सासू उठी औऱ अपनी प्लेट लेकर रसोई मे जानेलगी। आँचल नें भि ब्रेकफास्ट कर लिया थां वोँ उठकर जाने लगती हैं। जैसे हि ससुरजी कि चेयर केँ पास सें गुजरती हैं तोँ ससुरजी पीछे सें उसकी बायीं बाँह पकड़ लेता हैं। बाँह पकड़ने सें आँचलघूम जाती हैं औऱ उसका मुँह ससुरजी कि तरफ होँ जाता हैं.
"छोड़िए नां …….सासूजी देख लेंगी." आँचल फुसफुसाती हैं.
"मुझे मालूम हैं तूँ तड़परही हैं। सहीकह रहा हूं नां ?” ससुरजी भि धीरे-धीरे सें बोलता हैं.
" जाने दीजिए नां."
रसोई मे पानी गिरने कि आवाज़ आँ रही हैं। सासूजी नें सिंक कां नलखोल दिया।
“देख, आज 11 बजे तुँ ब्राइट होटेल मे आँ जानां। वहीं तेरी प्यास बुझाऊंगा। आएगी नाँ ?”
आँचल नें कोई जवाब नहीं दिया.हाथ छुड़ाने कि हल्की कोशिश करतीरही। उसकी नज़र रसोई कि तरफ हैं, सासूजी किसी भि समय बाहर् आँ जाएगी औऱ यहा ससुरजी हाथ नहीं छोड़रहे.
ससुरजी नें देखा, यहऐसे नहीं मानेगी। अब ससुरजी नें आँचल कां हाथ अपने पैंट केँ ऊपर सें लन्ड पर्र रख दिया औऱ दबाएरखा.
"देखयह भि तेरेलिए बेचैनी रहा हैं."
रसोई मे पानी गिरना बंद हौ गय़ा। सासूजी नें नलबंद कर दिया। आँचल कि घबराहट बढ़ गयीँ,.
"उन्न्नह.ससुरजी.क्याँ करते हें। सासूजी आँ जाएँगी.छोड़िए मेराहाथ."
“पहलेहाँ बोल……। आएगी नाँ ?”
“जी…….आऊँगी….” आँचल कों अपनीजान छुड़ाने केँ लिए कहना हि पड़ता हैं.
ससुरजी आँचल कां हाथ छोड़ देता हैं। उसी वक्त सासू भि रसोई सें बाहर् आँ जाती हैं औऱ आँचल ससुरजी सें पीछा छुड़ाकर रसोई मे चली जाती हैं.
फिन ससुरजी सुनील केँ संग फैक्ट्री चला गय़ा। वहीं सें उसने ब्राइट होटेल मे एक् रूमबुक करवा लिया।
आँचल भि नाश्ते केँ बाद अपने बेडरूम मे चली गयीँ,.
ससुरजी फैक्ट्री सें आँचल कों मोबाइल करता हैं। आँचल आँ रही हैं नाँ, कन्फर्म करने केँ लिए।
“होटेल मे रूमबुक करवा दिया हैं। आँ रही हैं नां ?”
“यहसही नहीं हैं, ससुरजी….”
“तुँ डरमत। किसी कों पता नहीं चलेगा। सही ग़लतकुछ नहीं। मे तेरी बहोत मजा दूँगा.”
“उम्म्म….”
“शर्माती क्यूं हैं ? मे हूं नां तुम्हें खुश करने केँ लिए.चल अब रखता हूं। तूँ रेडी हौ जानां.”
आँचल नहाने केँ लिए बाथरूम चली जाती हैं। नहाने केँ बाद होटेल जाने केँ लिए रेडी होने लगती हैं.
आँचल अपना वॉर्डरोब खोलती हैं। क्याँ पहनूं ? जिससे ससुरजी रीझ जाएँ.फिन वोँ एक् ब्लैक कलर कि साड़ी औऱ मैचिंग ब्लाउज निकालती हैं। संग मे ब्लैक पेटीकोट औऱ ब्लैक पैंटी। नेट वाली पैंटी थि बोयशॉर्ट टाइप कि, जौ V शेप कि बजाय स्ट्रिप शेप कि होती हैं औऱ नितंबों कां सिर्फ़ ऊपरी हिस्सा ढकती हैं। ब्लाउज बैकलेस थां जिसमे पीठ पऱ एक् पतली स्ट्रिप औऱ एक् डोरी थि। बैकलेस ब्लाउज होने सें उसने ब्रा नहीं पहनी। ब्लाउज मे बिना ब्रा केँ उसकी बड़ी चूचियों कां शेपसाफ दिखरहा थां। ब्लाउज केँ ऊपर साड़ी केँ पल्लू सें चूचियों कों ढककर आँचल अपने कों मिरर मे देखती हैं। अच्छी लगरही हूं। स्वयं हि अपनेरूप पर्र मोहित हौ जाती हैं। फिन हल्का मेकअप करती हैं, परफ्यूम डालकर बेडरूम सें बाहर् आँ जाती हैं.
रेडी होतेहुए आँचल कों अजीब सां रोमांच हौ रहा थां। उसकादिल जोरो सें धड़करहा थां। कुछ घबराहट सि भि होँ रही थि। कुछ ग़लत जैसा भि उसे महसूस हौ रहा थां। इसी कां रोमांच भि थां।
सासू माँ कों शॉपिंग केँ लिएजा रही हूं बोलकर, 10:30 बजे आँचल गाड़ी सें ब्राइट होटेल केँ लिए निकल गई,.
उधर ससुरजी भि फैक्ट्री मे सुनील सें बैंक मे कुछकाम हैं कहकर होटेल केँ लिए निकल गय़ा। होटेल पहुँचकर ससुरजी आँचल कां इंतजार करनेलगा। कुछ हि टाइमबाद आँचल भि वहा पहुँच गई,.
जब आँचलआई तोँ ससुरजी देखते रह गय़ा, ब्लैक साड़ी औऱ बैकलेस ब्लाउज मे गोरेरंग कि आँचलगजब कि हसीनलग रही हैं। ससुरजी कां मन प्रसन्न हौ गय़ा, आज तौ धन्य हौ जाऊँगा.
“बहोत सुंदर लगरही होँ बहू….”
फिन ससुरजी नें रिसेप्शन सें रूम कि चाभीली औऱ दोनों लिफ्ट सें ऊपररूम मे चलेगये। रिसेप्शन मे स्टाफ नें देखा, हसीन लड़की हैं 25-26 सें अधिक कि नहीं होगी औऱ संग मे 54 – 55 कां बड़ीउमर कां व्यक्ति हैं। इन दोनों कां नाता क्याँ हैं ? बुड्ढे नें कहां सें पटायी यह अप्सरा ?
रूम मे आने केँ बाद ससुरजी नें ……….
Sasur nischint thaa कि जब aanchal chandigarh सें lautkar aayegi too jaroor usko chodne degi। Phone मे too keh rahi thi कि delhi wapis aakar aapke sath piyas bhujhaungi। pr use क्याँ ptaa thaa कि aanchal too jassi केँ sath hi apni jee bharke piyas bujha aayi thi।
Agle कुछ dino मे sasur ne ehsaas किया कि Aanchal usse dur hi rehne कि koshish krr rahi h। Sasur ko aanchal सें ayese vyavhaar कि umeed नहि thi। woh too सोच raha thaa कि aanchal केँ wapis आते hi उसके sath chudayi kaa plan banayega पऱ यहा too aanchal usse normaly behave krr rahi thi, pahle केँ जैसे।
sasur anubhavi व्यक्ति thaa use shaq hu गय़ा कि aanchal jaroor chandigarh मे kisi na kisi केँ sath chudayi केँ maze le केँ aayi h तभी shant hu rakhi h औऱ muze bhav नहि de rahi। face bi khila khila h, purn santushti केँ bhav haen। Lagta h khoob apne mann कि karke aayi h। Hansti khilkhilati rehti h, यहा मेरा kaleja jal raha h.
Akele मे बात bi नहि hu pa rahi thi। subah woh sunil केँ sath factory chala jata thaa औऱ der sham ko hi lautna hu ptaa thaa। factory कि halat dawadol thi इसलिये sunil केँ bharose chodna bi theek नहि thaa। Khan केँ diye loan सें जैसे taise काम chl raha thaa.
Aanchal janti thi कि delhi wapis aane केँ बाद sasurji use chodne kaa कोई chance हाथ सें jane नहि denge। halanki Jassi ne use itna choda thaa कि उसकी piyas कुछ dino bujhi rahi। Chandigarh मे jassi केँ sath jamkar hoyi chudayi केँ bare मे sochkar aanchal केँ gaal laal hu jate the, hothon pe muskurahat aa jati thi औऱ chut gili hu jati thi। Aanchal कि us chudayi कि thakaan utarne मे hi कुछदिन lag gaye।
Sexually satisfied hone केँ बाद aanchal ko कुछदिन tak pativrata hone kaa sur chada rehta thaa। Usne sasur सें pehle कि prakaar duri banaye rakhi। Waise bi घऱ मे itne logo केँ hone सें sasur ko aanchal सें akele मे apne mann कि बात karne kaa chance नहि mil pa raha thaa। Saas कि tabiyat अब theek thi, उसके dwara pakde jane kaa dar bi thaa।
Aanchal केँ agle कुछदिन ayese hi chandigarh कि meethi yadon मे gujar gaye। Sunil bi apne purane dharre पर्र laut आया thaa। riya केँ aane सें उसकी life मे joo excitement aayi thi woh bi अब नहि rahi। mann हुआ too kisi दिन aanchal कि chudayi krr deta thaa वरना karwat लेकर so jata thaa, factory कि tension मे hi jyada rehta thaa.
ayese hi दोतीन hafte nikal gaye। Saas अब apne काम khud krr leti thi too usne sunita कि chutti krr di। Sasur baichain thaa sunita bi gai, aanchal ko kese pataun। Apni tarf सें poori koshish krta thaa, nashte औऱ dinner कि table पऱ aankho hi aankho मे ishare krta thaa पर्र aanchal sharmakar sar jhuka leti thi। Sasur ko ptaa thaa Sunil aanchal ko santusht नहि krr ptaa h। कुछदिन intzaar krna padega।
pr Aanchal bi कब tak chudayi कि purani yadon केँ bharose rehti, usko bi ragad केँ chudayi कि iccha hone lagi। Riya bata rahi thi sasurji ne mote loda सें chodkar बहोत maze diye। Poore tin दिन मेरे sasurji केँ sath maze karke gai औऱ muze samachar tak नहि lagi। living kamara मे sunita ko chodtay hue too mene bi देखा thaa us rath ko। Uff kitni ragad केँ chudayi krr rahe the उसकी apne mote loda सें sasurji। muze bi waise hi chodenge sasurji ? Aanchal कि chut gili hu gai।
नहि नहि yeh theek नहि hoga …। … kisi औऱ mard कि बात alag h पर्र sunil केँ baap केँ sath ? उसका dimag keh raha thaa yeh galt hoga, मगर sunil muze sexually satisfy नहि krr ptaa too me क्याँ karu ? ajib si duvidha thi।
Dhire dhire usne Sasur ko respone देना suru krr दिया। Uske haav bhav सें sasur ko bi ptaa chl गय़ा अब line de rahi h। Sasur ne aanchal कि aankho मे piyas देखी। ha, अब sai chance h। अब isko kahi बाहर् le jakar chodta hoon। Sasur aage kaa plan banane laga.
Kuch dino बाद एक् subah nashte केँ टाइम Sasur ko chance mil गय़ा.
Sunil nashta karke uth गय़ा thaa। table पऱ aanchal औऱ उसके saas sasur the। aanchal कि nazre sasur सें milti haen, woh nashta karte hue usi ko dekh raha thaa। aanchal sharma jati h औऱ chupchap nashta kane lagti h। फिन saas uthi औऱ apni plate लेकर kichen मे jane lagi। aanchal ne bi nashta krr लिया thaa woh uth krr jane lagti h। जैसे hi sasur कि chair केँ pass सें gujarti h too sasur piche सें उसकी bayi banh pakad leta h। Banh pakadne सें aanchal ghoom jati h औऱ उसका munh sasurji कि tarf hu jata h.
"chodye na ….sasuji dekh lengi." Aanchal fusfusati h.
“muze malum h tu tadap rahi h। sai keh raha hoon na ?” sasur bi dhire सें bolta h.
" jane dijiye na."
Kitchen मे paani girne कि awaz aa rahi h। sasuji ne sink kaa nal khol दिया।
“dekh, आज 11 baje tu bright hotel मे aa jana। Wahin tairi piyas bujhaunga। Aayegi na ?”
aanchal ne कोई jawab नहि दिया.hath chudane कि halki koshish krti rahi। Uski nazar kitchen कि tarf h, sasuji kisi bi time बाहर् aa jayegi औऱ यहा sasurji hath नहि chod rahe.
Sasur ne देखा, yeh ayese नहि manegi। अब sasur ne aanchal kaa hath apne pant केँ ऊपर सें loda पऱ रख दिया औऱ dabaye rakkha.
"dekh yeh bi tere liye tadap raha h."
Kitchen मे paani girna बंद hu गय़ा। sasuji ne nal बंद krr दिया। Aanchal कि ghabrahat bad gai.
"unnnh.sasurji.क्याँ karte haen। Sasuji aa jayengi….chodye मेरा hath."
“pahle ha bol……। aayegi na ?”
“ji….Aaungi….” aanchal ko apni jan chudane केँ liye kehna hi padta h.
Sasur aanchal kaa hath chod deta h। usi वक़्त saas bi kitchen सें बाहर् aa jati h औऱ aanchal sasur सें picha chudakar kitchen मे chali jati h.
fir Sasur Sunil केँ sath factory chala गय़ा। wahin सें usne bright hotel मे एक् kamara book karwa लिया.
Aanchal bi nashte केँ बाद apne bedroom मे chali gai.
Sasur factory सें aanchal ko phone krta h। aanchal aa rahi h na, confirm karne केँ liye.
“hotel मे kamara book karwa दिया h। aa rahi h na?”
“yeh sai नहि h, sasurji……”
“tu dar mat। Kisi ko ptaa नहि chalega। sai galt कुछ नहि। me tuze बहोत majaa dunga.”
“ummm…”
“sharmati kyun h ? me hoon na tuze खुश karne केँ liye….chl अब rakhta hoon। Tu taiyar hu jana.”
Aanchal nahane केँ liye batroom chali jati h। nahane केँ बाद hotel jane केँ liye taiyar hone lagti h।
Aanchal अपना wardrobe kholti h। क्याँ pahnu ? jisse sasurji reejh jayen। fir woh एक् black color कि saree औऱ matching blouse nikalti h। sath मे black petticoat औऱ black panty। Net wali panty thi boyshort type कि, joo V shape कि bajay strip shape कि hoty h औऱ nitambon kaa sirf upari hissa dhakti h। Blouse backless thaa jisme peeth पर्र एक् patli strip औऱ एक् dori thi। backless blouse hone सें usne bra नहि pahni। blouse मे bina bra केँ उसकी badi chuchiyon kaa shape saaf dikh raha thaa। Blouse केँ ऊपर saree केँ pallu सें chuchiyon ko dhakkar Aanchal apne ko mirror मे dekhti h। achchi lag rahi hoon। Khud hi apne roop पऱ mohit hu jati h। फिन halka makeup krti h, perfume dalkar bedroom सें बाहर् aa jati h.
taiyar hote hue Aanchal ko ajib sa romanch hu raha thaa। उसका dill ❤️ joro सें dhadak raha thaa। कुछ ghabrahat si bi hu rahi thi। कुछ galt jaisa bi use ehsaas hu raha thaa। isi kaa romanch bi thaa।
Saas ko shopping केँ liye jaa rahi hoon bolkar, 10:30 baje Aanchal gaadi सें bright hotel केँ liye nikal gai.
Udhar sasur bi factory मे sunil सें bank मे कुछकाम h kehkar hotel केँ liye nikal गय़ा। hotel pahunchkar sasur aanchal kaa intzaar karne laga। Kuch hi टाइमबाद aanchal bi वहा pahunch gai.
jb Aanchal aayi too sasur dekhte rha गय़ा, black saree औऱ backless blouse मे gore rang कि aanchal gajab कि haseen lag rahi h। sasur kaa mann prasann hu गय़ा, आज too dhanya hu jaunga.
“बहोत haseen lag rahi hu bahu…”
fir sasur ne reception सें kamara कि chabhi li औऱ dono lift सें ऊपर kamara मे chale gaye। Reception मे staff ne देखा, haseen ldki h 25-26 सें jyada कि नहि hongi औऱ sath मे 54 – 55 kaa badi umar kaa व्यक्ति h। in dono kaa rishte क्याँ h ? buddhe ne kahan सें patayi yeh apsara ?
kamara मे aane केँ बाद sasur ne …….
ससुरजी लोडू कां न्. पुरेशहर केँ बाद हि आएगा
Mast update
thanks mitro
वासनामय एपसोड ..........अति हसीन
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आँचल की अय्याशियां - desi bahu – New Episode
होटेल केँ रूम मे आने केँ बाद ससुरजी नें आँचल कों अपनी बाँहों मे भर लिया.कुछ लम्हा उसके सुंदर चेहरे कों एकटक देखता रहा। उसको विश्वास नहीं होँ रहाआज उसकीदिल कि तमन्ना पूरी होनेजा रही थि। कितनी खूबसूरत हैं मेरीबहू …
आँचल नें ससुरजी कों प्रेम भरी नज़रों सें अपने चेहरे कों देखते पाया, शरमाकर उसने अपनी नज़रें झुकाली। फिन ससुरजी धीरे-धीरे सें अपना चेहरा झुकाते हुए आँचल केँ होठों केँ लगभग अपने होंठ लाया। चुंबन कि अपेक्षा मे आँचल केँ होंठ कंपकपाने लगे। ससुरजी आँचल केँ मुलायम होठों सें रस चूसने लगा। आँचल नें आँखें बंदकर ली। उसके होठों कों ऐसे हि कुछसमय तक चूसने केँ बाद ससुरजी नें आँचल केँ होठों केँ बीचजीभ डाल दि। आँचल नें अपना मुँहखोल दिया औऱ ससुरजी कि जीभ सें अपनीजीभ मिला दि। कुछ पलों तक दोनों कि जीभ एक् दूसरे सें लिपटी रहीफिन चुंबन नें तेज़ी पकड़ली। फिन ससुरजी नें आँचल कि साड़ी केँ पल्लू केँ अंदर ब्लाउज पऱ दायां हाथरख दिया औऱ उसकी बिना ब्रा कि चूचियों कों सहलाने लगा। धीरे-धीरे धीरे-धीरे चूचियों पऱ दबाव बढ़ाकर ब्लाउज केँ बाहर् सें हि उनको दबाने लगा।
आँचल केँ मुँह सें घुटी घुटी सिसकारियाँ निकलने लगीं.
“उंगग्गग…….उग्गग……”.
ससुरजी अपनीजीभ आँचल केँ मुँह मे घुमाने लगा औऱ हाथ सें आँचल कि बड़ी औऱ नरम चूचियों कों पतले ब्लाउज केँ बाहर् सें मसलने लगा। आँचल केँ कड़े होँ चुके निपल्स ससुरजी नें अंगुलियों सें महसूस किए.
कुछ देरबाद दोनों केँ होंठअलग होँ गये। दोनों कि साँसें गहरे चुंबन सें भारी हौ गई, थि।
अब ससुरजी आँचल कि साड़ी उतारने लगा। साड़ी उतरने केँ बादअब आँचल सिर्फ़ काले रंगे केँ पेटीकोट औऱ बैकलेस पतले ब्लाउज मे थि। उस पतले ब्लाउज मे आँचल कि बड़ी बड़ी चूचियां बाहर् आने कों मचलरही थि.
ससुरजी अपनी कमीज़ केँ बटन खोलने लगता हैं। आँचल ब्लाउज औऱ पेटीकोट मे खड़ी हैं। ससुरजी कों कपड़े उतारते हुए देखती हैं पर्र अपने कपडे नहि खोलती। ससुरजी पैंट भि उतार देता हैं औऱ अब वोँ सिर्फ़ बनियान औऱ अंडरवियर मे हैं। आँचल कि नज़रें उसके अंडरवियर पऱ हें जिसके अंदर ससुरजी कां अधखड़ा लन्ड अंडरवियर केँ कपड़े कों बाहर् कों तानेहुए हैं.
फिन ससुरजी आँचल केँ पीछे जाता हैं औऱ उसका ब्लाउज उतार देता हैं। ब्लाउज उतरते हि आँचल कि गोरी बड़ी चूचियाँ नंगी हौ जाती हें। आँचल कां कमर सें ऊपर कां गोरा नंगा शरीर नीचे काला पेटीकोट होने सें औऱ भि ज्यादा मादकलग रहा हैं.
ससुरजी बेड मे नीचे पांव करकेबैठ जाता हैं औऱ आँचल कों साइड पोज़ मे अपनीगोद मे बिठा लेता हैं। बाएंहाथ कों आँचल कि नंगीपीठ केँ पीछे सें लें जाकर उसकी बायीं बाँह कों पकड़ लेता हैं औऱ दायीं हथेली कों उसकी बायीं मम्मों केँ ऊपररख देता हैं औऱ हल्के हल्के सहलाने लगता हैं। फिन अपना मुँह आँचल केँ दाएंगाल केँ लगभग लाता हैं औऱ उसकागाल चूमता हैं, फिन दाएंकान कों होठों सें चूमता हैं औऱ कान केँ निचले हिस्से कों दांतों सें खींचता हैं.
आँचलगोद मे बैठेहुए सिसकती हैं, “ओह्ह …………….उन्न्नज्ज्ग….”
फिन ससुरजी अपने होठों कों कान सें नीचे कों लाता हैं औऱ आँचल कि गोरी गर्दन कों चूमता हैं, जीभ लगाकर चाटता हैं। आँचल उसकीइस हरकत सें सनसना जाती हैं औऱ अपनी गर्दन हटाने कि कोशिश करती हैं.
ससुरजी अपने होंठ औऱ नीचे लाता हैं औऱ आँचल केँ दाएं कंधे कों चूमता हैं औऱ हल्के सें दाँत गड़ा देता हैं। आँचल आँखें बंदकिए हुएउहह…। अहह ….करतेहुए सिसकती हैं। ससुरजी केँ हाथ दोनों चूचियों कों दबाते औऱ सहलाते रहते हें।
फिन दायीं मम्मों केँ निप्पल कों अपने अंगूठे औऱ दूसरी अंगुली केँ बीच मे पकड़कर मरोड़ता हैं औऱ घुमाता हैं, ऐसा हि बायीं मम्मों पऱ भि करता हैं.
आँचल सें बर्दाश्त नहीं होँ रहा हैं। सिसकते हुए उसके होंठ सूखने लगते हें। वोँ होठों पऱ जीभ फिराकर गीला करती हैं.
ससुरजी आँचल केँ दाएंहाथ कों अपने कंधे पर्र डालता हैं औऱ उसकी दायीं मम्मों कों हाथ सें पकड़कर अपने मुँह मे भरने कि कोशिश करता हैं। बड़ी मम्मों हैं फिन भि जितना होँ सके मुँह मे भर लेता हैं औऱ बच्चे केँ जैसे चूसता हैं। बहोत रसीले मम्मों हैं। उसके मम्मों चूसने सें आँचल पागल हुईँ जारही हैं। उसकी बुर सें रस बहने लगता हैं। ऐसे हि दोनों चूचियों औऱ उनके निप्पल कों चूसता हैं। कामातुर होकर ससुरजी आँचल कि नरम चूचियों पऱ ज़ोर सें दाँत गड़ा देता हैं। आँचल दर्द सें तड़पती हैं ……आआहह……
गोरी मम्मों पर्र निप्पल केँ चारो औऱ हल्के भूरेरंग केँ ऐरोला कों ससुरजी जीभ सें चाटता हैं औऱ निप्पल कों जीभ सें छेड़ता हैं, आँचल सें सहन नहीं होता औऱ वोँ ससुरजी कि गोद मे हि उचकने लगती हैं.
जी भरकर आँचल कि चूचियों सें खेलने केँ बाद ससुरजी आँचल कों गोद सें उतार देता हैं। फिन स्वयं भि खड़ा होँ जाता हैं औऱ अपना अंडरवियर उतार देता हैं। उसका लन्ड तनाहुआ तोँ हैं पर्र अभि अपनी पूरी लंबाई मे नहींआया हैं।
आँचल कि नज़र ससुरजी केँ मोटे औऱ बड़े लन्ड पऱ पड़ती हैं। उत्तेजना सें उसके होंठसूख जाते हें वोँ अपनीजीभ फिराकर होठों कों गीला करती हैं।
ससुरजी देखता हैं बहू मेरे लन्ड कों देखरही हैं। वोँ आँचल केँ कंधे पर्र हाथ रखकर उसको नीचे झुकाता हैं। आँचलसमझ जाती हैं औऱ नीचे बैठकर ससुरजी केँ लन्ड कों पकड़ लेती हैं। फिन सुपाड़े कों जीभ लगाकर चाटती हैं। सुपाड़े केँ नरम माँस पर्र आँचल कि जीभ लगने सें ससुरजी सिसकता हैं। आँचल एक् नज़रऊपर करके ससुरजी कों देखती हैं फिन सुपाड़े कों मुँह मे लेँ लेती हैं। औऱ अपना मुँहआगे पीछे हिलाकर लन्ड चूसने लगती हैं। ससुरजी कों मजा आँ रहा हैं। वोँ आँचल केँ सर केँ पीछे अपनेहाथ रख देता हैं। थोड़ी देर तक चूसने केँ बाद आँचल लन्ड कों बाहर् निकाल लेती हैं औऱ लार सें गीलेहुए लन्ड कों अपनेहाथ सें आगे पीछे करकेतेज तेजमूठ मारती हैं। लन्ड अब काफ़ी मोटा औऱ कड़ा होँ चुका हैं। आँचलफिन सें लन्ड कों मुँह मे भर लेती हैं औऱ चूसने लगती हैं। एक् हाथ सें उसने लन्ड कों जड़ पऱ पकड़ा हुआ हैं दूसरे हाथ सें ससुरजी कि लटकती गोलियों कों सहलाने लगती हैं। फिन लन्ड कों मुँह सें निकाल देती हैं औऱ लन्ड ऊपर कों करकेजड़ पऱ चाटती हैं औऱ गोलियों कों चूमती हैं।
ससुरजी पगलाए जारहा हैं। आअहह…….क्याँ चूसती हैं साली……….कहां सें सीखी हैं पता नहीं……….बहोत एक्सपर्ट हौ गई, हैं।
“आहह-आहह……….बहोत मजादे रही होँ बहू.” ससुरजी सिसकता हैं.
आँचल तारीफ सें खुश होती हैं, सिसकते हुए ससुरजी कों देखती हैं। उसके होठों मे मुस्कान आँ जाती हैं। फिन वोँ औऱ भि ज़ोर सें लन्ड कों चूसने लगती हैं। ससुरजी अपनी बनियान उतार देता हैं। अब पूरा नंगा हौ गय़ा हैं। आँचल अभि भि पेटीकोट पहनेहुए हैं.
ससुरजी हाथ नीचे लें जाकर आँचल कि चूचियों कों मसलता हैं.
आँचल इतने मज़े सें लन्ड चूसती हैं कि कुछदेर बाद ससुरजी कों लगता हैं यह तोँ पानी निकाल देगी। ससुरजी आँचल केँ मुँह सें लन्ड बाहर् निकालने कि कोशिश करता हैं। पर्र आँचल लन्ड नहीं छोड़ती औऱ फिन ससुरजी कां पानी निकल जाता हैं। मगरतब तक ससुरजी लन्ड कों आँचल केँ मुँह सें बाहर् निकाल रहा होता हैं। वीर्य कि धारकुछ आँचल केँ मुँह केँ अंदर जाती हैं, कुछ उसके चेहरे औऱ गले मे पड़ जाती हैं। आँचल ससुरजी केँ अंडरवियर सें अपना चेहरा औऱ गला पोंछ लेती हैं।
अब ससुरजी आँचल कि पेटीकोट कां नाड़ा खोल देता हैं औऱ पेटीकोट फर्श पऱ गिर जाता हैं। आँचल अपने पैरों कों उठाकर पेटीकोट निकाल देती हैं। ससुरजी देखता हैं आँचल नें तोँ फैंसी पैंटी पहनी हुइ हैं। वोँ औऱ भि एक्साइटेड हौ जाता हैं.
ससुरजी आँचल कों बेड मे लिटा देता हैं औऱ स्वयं उसकेऊपर आँ जाता हैं। आँचल केँ होठों कों चूमता हैं फिन नीचे कों खिसकने लगता हैं। उसकी गर्दन चूमता हैं औऱ फिन चूचियों कों चूसने लगता हैं। निप्पल कों चूसता हैं। आँचल सिसकारियाँ लेने लगती हैं.
“उनन्ं……आअहह……। ओह्ह ….”
फिन नीचे कों खिसकता हैं औऱ आँचल केँ रसीले गोरेपेट कों चूमता हैं। उसकी गहरी नाभि कों चूमता हैं फिनजीभ डालकर घुमाता हैं। आँचल तड़पने लगती हैं.
फिन औऱ नीचे खिसक जाता हैं। आँचल केँ बाएं पांव केँ अंगूठे कों अपने मुँह मे भरकर चूसता हैं। ऐसे हि दाएंपेर केँ अंगूठे कों भि चूसता हैं। काम कि देवी केँ शरीर केँ हर हिस्से कों चूमना चाहता हैं। उसकी गोरी टांगों कों चूमता हैं, घुटनों कों चूमता हैं। फिन उसकी मांसल जाँघों कों चूमता हैं। पैंटी केँ नीचे जाँघों केँ अंदरूनी हिस्से कों जीभ सें चाटता हैं। सेन्सिटिव भाग पऱ जीभ लगने सें आँचल गनगना जाती हैं औऱ अपनी जाँघें हटाने कि कोशिश करती हैं.
अब ससुरजी पैंटी केँ ऊपर सें बुर पर्र मुँहलगा देता हैं। आँचल कि बुर कि मादकमहक उसे महसूस होती हैं। कस्तूरी तौ यहा छुपी हैं। वोँ पैंटी केँ बाहर् सें हि बुर कों मुँह मे लेने कि कोशिश करता हैं। फिन दोनों हाथों सें पैंटी नीचे कों खींचता हैं। आँचल अपनी गांड उठाकर पैंटी उतारने मे सहायता करती हैं। ससुरजी आँचल कि टाँगों सें पैंटी उतारकर फर्श मे डाल देता हैं। अब आँचल पूरी नंगी होँ गयीँ,.
पहलीबार ससुरजी आँचल कि बुर कों देखता हैं। आँचल कि पावरोटी जैसी फूली हुइ गुलाबी बुर देखकर ससुरजी कामवासना सें पागल हौ जाता हैं। क्याँ फूली हुइ बुर पाई हैं ! ऐसी तोँ पहलेकभी नहीं देखी। बुर केँ ऊपर छोटे छोटेबाल हें। शायदकुछ हि दिन पहलेशेव किया हैं। ससुरजी जल्दी अपना मुँह बुर पऱ लगा देता हैं औऱ फूलेहुए होठों कों चाटने लगता हैं। आँचल कि क्लिट कों जीभ सें छेड़ देता हैं.
“आअहह……। ओह्ह ….” आँचल सिसकने लगती हैं.
फिन ससुरजी आँचल कि बुर केँ अंदरजीभ घुसा देता हैं औऱ अंदर बाहर् करने लगता हैं। आँचल कि बुर गीली होँ रखी हैं। ससुरजी कि जीभ कों उसके चूतरस कां स्वाद आता हैं। वोँ जीभ सें चूतरस चाटने लगता हैं। कामोत्तेजित होकर आँचल ज़ोर सें सिसकारियाँ लेने लगती हैं औऱ तड़पकर इधरउधर सर हिलाती हैं। अपने हाथों सें चादर कों कस केँ पकड़ लेती हैं औऱ अपने नितंबों कों ससुरजी केँ मुँह पर्र उछाल देती हैं.
“मजा आँ रहा हैं बहू ?” आँचल कों उछलते देख ससुरजी मुस्कुराता हैं.
कोई औऱ होता तौ अब तक आँचल उसकासर पकड़कर बुर पऱ दबा देतीमगर ससुरजी कि शरम सें वोँ ऐसा नहींकर पाती हैं। फिन ससुरजी बुर सें जीभ बाहर् निकाल लेता हैं औऱ दो अँगुलियाँ बुर मे डालकर तेज़ी सें अंदर बाहर् करने लगता हैं। आँचल बहोत उत्तेजित हौ जाती हैं औऱ नितंबों कों ऊपर उछालने लगती हैं। कुछ हि देर मे बुर सें रस बहाते हुए वोँ झड़ जाती हैं.
“आअहह…….ओह …………ओइईईईईई…… माँआआ ….अहह…….”
अब ससुरजी नें आँचल कि बुर सें अँगुलियाँ बाहर् निकाल ली। दोनों अँगुलियाँ आँचल केँ चूतरस सें भीगी हुई थीं। ससुरजी नें आँचल कों दिखाते हुए अपनी गीली अंगुलियों कों चाट लिया.
उसकेबाद ससुरजी नें आँचल कि टाँगों कों घुटनों सें मोड़ लिया औऱ उसकी बुर केँ छेद मे अपने मोटे लन्ड कां सुपाड़ा लगाया। पहला झटका दिया मोटा सुपाड़ा अंदरघुस गय़ा.
“आआआअहह ……ओइईईईईईईईईईईईईई………….माँआम्म्म्माआआआआआआ….”मोटा सुपाड़ा टाइट बुर मे घुसते हि आँचल चिल्लाई.
उसका चिल्लाना देखकर ससुरजी रुक गय़ा।
“तेरी बुर तोँ बहोत टाइट हैं ”, धीरे-धीरे धीरे-धीरे लन्ड कों औऱ अंदर डालने कि कोशिश करतेहुए ससुरजी बोलता हैं.
“आआआअहह…….” मोटे लन्ड सें आँचल कों दर्द हौ रहा थां.
ऐसा करते करतेकुछ देरबाद ससुरजी अपना पूरा लन्ड जड़ तक बुर केँ अंदर घुसाने मे सफल हौ गय़ा। पूरा लन्ड घुसने केँ बाद ससुरजी कुछ लम्हा रुकारहा। आँचल कि गर्म औऱ टाइट बुर नें ससुरजी केँ मोटे लन्ड कों बुरीतरह जकड़ लिया.
अब ससुरजी धीरे-धीरे धीरे-धीरे लन्ड अंदर बाहर् करके बुर पऱ धक्के लगाने लगा। आँचल कों ऐसालगा जैसे ससुरजी केँ मोटे लन्ड नें उसकी टाइट बुर कों पूराभर दिया हैं।
मोटे लन्ड केँ बुर कि दीवारों मे रगड़ खाने सें आँचल कि सिसकारियाँ निकलने लगी.
“आअहह……….उंगग्गग…………। ओह्ह ….”
“अबमजा आँ रहा हैं नां ? ”, आँचल कों सिसकारियाँ लेतेहुए देखकर ससुरजी बोलता हैं.
“आअहह ……….बहोत मजा आँ रहा हैं….ससुरजी……ओइईईईई …” उत्तेजना मे आँचल बेशरम होकर अपने नितंबों कों ऊपर उछालने लगी औऱ ससुरजी कों नीचे सें धक्के मारने लगी.
आँचल कों मज़े मे अपनी गांडऊपर उछालते देखकर ससुरजी भि हैरान हुआ.बहू तोँ बहोत कामुक हैं। इसे तोँ पूरी मस्ती चढ़ गयीँ, हैं।
अब ससुरजी भि जोश मे आँ गय़ा औऱ उसने आँचल कि बुर मे तेजतेज धक्के लगाने शुरुआत करदिए। उसकी गोलियाँ आँचल कि उठी हुई गांड सें टकराने लगी। पूरे कमरे मे ठपठपठप कि आवाज़ गूंजने लगी.
तेज धक्कों सें आँचल कां पूरा शरीर हिलने लगा। उसकी बड़ी चूचियाँ छाती पर्र ऊपर नीचे हिलने लगी.
“ऊऊउीईईई…….ओह…….आआअहह….उईईई…….माँआम्म्माआ….” ससुरजी केँ तेज धक्कों सें आँचल चिल्लाने लगी औऱ फिन उसको ओर्गास्म आँ गय़ा औऱ वोँ दूसरी बारझड़ गयीँ,.
आँचल कों झड़ते देखकर ससुरजी नें धक्के लगाना कमकर दिया औऱ झड़ती हुइ आँचल केँ चेहरे केँ बदलते भावों कों देखते हुए मज़े लेनेलगा। कुछदेर बाद उसनेफिन सें स्ट्रोक लगाने शुरुआत किए औऱ गीली बुर मे लन्ड केँ अंदर बाहर् जाने सें कमरे मे फचफचफच कि आवाज़ गूंजने लगी।
आँचल नें मदहोशी मे देखा, ससुरजी धक्के पऱ धक्के लगाएजा रहा हैं। ससुरजी आँचल कि बड़ी गोरी चूचियों कों दोनों हाथ सें मसलते हुए धक्के लगाते रहा। आँचलथक चुकी थि पर्र ससुरजी एक् बार झड़ने केँ बाद चुदाई कों लंबा खींचरहा थां.
आँचल अपनेमन मे सोचती हैं, ससुरजी तौ थक हि नहि रहेइस उम्र मे भि बहोत स्टेमिना हैं.
कुछदेर बाद ससुरजी नें आँचल कि बुर मे वीर्य कि धार छोड़ दि औऱ उसे लबालब भर दिया। आँचल नें अपनी बुर मे ससुरजी केँ गर्म वीर्य कों महसूस किया.
झड़ने केँ बाद ससुरजी थककर आँचल केँ बगल मे लेट गय़ा। दोनों केँ शरीर पसीने सें भीगगये थें औऱ साँसें उखड़ी हुइ थि.
आँचल अपने नंगे जिस्म पऱ चादरडाल लेती हैं। ससुरजी नंगा हि पड़ा रहता हैं।
कुछदेर बाद ससुरजी नें आँचल कि तरफ करवटली औऱ उसके चेहरे सें बालों कि लट हटाते हुए बोला, ”मजा आया नाँ ?”
“हाँ ……ससुरजी….” आँचल धीमी आवाज़ मे जवाब देती हैं.
“अब तुम्हारी तरफ फिकर करने कि ज़रूरत नहीं। मे तुम्हारी तरफऐसे हि मजा दूँगा। ठीक हैं …?” आँचल केँ गुलाबी गालों पऱ प्रेम सें हाथ फेरते हुए ससुरजी बोला.
“ओह्ह ….ससुरजी….”
ससुरजी कों मालूम थां कि बस एक् बार आँचल उससेचुद जाएगी तौ फिनमना नहीं करेगी।
ससुरजी नें आँचल कों भि अपनीतरफ करवट पे कर लिया औऱ दोनों केँ मुँह एक् दूसरे कि तरफ हौ गये.फिन ससुरजी नें आँचल केँ जिस्म सें चादरकमर तक खिसका दि औऱ उसको आलिंगन मे लेकर उसकी नंगीपीठ पर्र हाथ फिराने लगा। औऱ उसके होठों, नाक औऱ गालों कों चूमने लगा। आँचल नें अपने रसीले बड़े नितंबों पर्र ससुरजी केँ खुरदुरे हाथ घूमते हुए महसूस किए.
ससुरजी औऱ आँचलदो बार झड़कर कामतृप्त होँ गये थें। 15 मिनटऐसे हि लेटे रहने केँ बाद ससुरजी बेड सें उठ गय़ा औऱ अंडरवियर पहनने लगा। उसको कपड़े पहनते देख आँचल भि उठ गयीँ, औऱ फर्श सें उठाकर पैंटी पहनली औऱ पेटीकोट बाँध लिया.फिन ब्लाउज पहनकर साड़ी पहनने लगी.
कपड़े पहनकर दोनों होटेल सें बाहर् आँ गये। दोनों केँ चेहरे पर्र परम संतुष्टि केँ भाव थें। ससुरजी कों अपनी मादकबहू केँ जिस्म कां रस पीने कों मिला थां, औऱ आँचल कों ससुरजी केँ मोटे लन्ड सें चुदने कां मजा मिला थां.
दोनों हि जानते थें अब उनकीआपस मे एक् दूसरे सें हि कामसुख कि प्राप्ति होते रहेगी।
रिसेप्शन मे होटेल स्टाफ नें ससुरजी केँ संग आँचल कों आतेहुए देखा.दो घंटे चुदाई करकेआये हें यह दोनों।
“क्याँ मस्तमाल चोदा हैं बुड्ढे नें ?”
फिन ससुरजी फैक्ट्री चला गय़ा औऱ आँचलघऱ मे दिखाने केँ लिए छोटी मोटी शॉपिंग करनेचली गई,.
आँचल की अय्याशियां - desi bahu - Next part miss mat karna
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thanks mitro
mast update
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