आखिर पापा से मजा ले ही लिया मैंने - Desi sex story - Real Story Continue Part 1
दोस्तों मे अपनी एक् नयी स्टोरी लेकर आप् सभी केँ सामने फिन हाज़िर हूं। मेरी पिछली कहानियों कों अपने बहोत प्रेम दिया हैं। आशा हैं कि इसकथा कों भि आप् सभी कां प्रेम मिलेगा.
यहकथा मेरी औऱ मेरे पिताजी कि हें जिस मे मैंने किसतरह अपने बापू कों पटाया औऱ फिन उनसे अपने सम्बन्ध बनाये ये बताया हैं.
तौ चलिएकथा शुरुआत करते हैं.
आखिर पापा से मजा ले ही लिया मैंने - Desi sex story – New Episode
हैल्लो दोस्तों, मेरानाम शालिनी हैं औऱ मे दिल्ली कि रहने वाली हूं। मेरेघऱ मे मेरे माँ, बापू हैं। मे मेरे बाप कि एक् हि औलाद हूं। मुझे मेरे मम्मी बाप नें बड़े प्रेम सें बड़ा किया हैं। आज मेरी उम्र 18 साल कि हैं, मगर मुझे देखकर कोईकह नहि सकता कि मेरी उम्र इतनीकम होगी, क्योंकि मेरा शरीर बिल्कुल एक् 20 साल कि लड़की कि तरह हौ चुका हैं, मेरा फिगर साईज 34-28-36 हैं औऱ इसकीवजह मे स्वयं हि हूं, जोँ 14 साल कि उम्र सें हि सेक्स कि तरफ अधिक ध्यान देनेलगी थि औऱ करीब-करीब तब सें मे बुर मे उंगली करनेलग गयीँ, थि। मेरेघऱ मे 5 रूम हैं, एक् मे मेरे मां बापू औऱ दूसरे मे स्वयं रहती हूं औऱ बाकि केँ दो कमरे हम् अलग-अलग कामों केँ लिए उपयोग मे लेते हैं। मेरे बापू कि उम्र 38 साल कि हैं। मेरी मम्मी वैसे तौ बहोत हसीन हैं, मगर बहोत हि पुराने विचारो वाली एक् साधारण स्त्री हैं, पिताजी एक् विद्यालय मे अध्यापक हैं औऱ मेरी माँ एक् सरकारी दफ्तर मे जॉब करती हें। मां कों तोँ दफ्तर सें वापिस आतेआते साम केँ छेबज जाते हें। पऱ पिताजी एक् टीचर होने केँ कारणदो बजे तक आँ जाते हैं। मे भि अपने विद्यालय सें दोबजे तक आँ जाती हूं। घऱ मे मां केँ आने तक मे औऱ पिताजी हि होते हें। हम् बहोत अमीर तोँ नहि हैं, मगर हमारे घऱ मे किसीचीज कि कोईकमी नहि हैं। मेरे पिताजी भि बहोत हैंडसम हैं, मगर मेरी मां तौ उन्हें टाईम हि नहि दे पाती हैं, सिर्फ़ रात मे जब उनके सोने कां समय होता हैं जब हि उनकेपास जाती हैं।
येबात तब कि हैं, जब मेरी उम्र 18 साल कि थि। एक् रात हम् सभी खानां खाकर सोने केँ लिए अपने अपनेरूम मे चलेगये थें कि तभी अचानक सें मुझेलगा कि मेरे मां बापू केँ रूम सें लड़ने कि आवाज़े आँ रही हैं। मां पिताजी कां रूम मेरेरूम सें हि लगाहुआ थां, मुझे ज़िंदगी मे पहलीबार लगा थां कि मां पिताजी कि लड़ाई होँ रही हैं इसलिये मे ये जानना चाहती थि कि वोँ लड़ क्यूं रहे हैं? तोँ पहले तोँ मैंने सोचा कि मे मां सें जाकर पूंछू, मगरफिन बाद मे सोचा कि वोँ लोग मेरे सामने शर्मिंदा हौ जाएगे इसलिये मैंने पूछना उचित नहि समझा, मगर फिन भि मेरेमन मे वजह जानने कि ख़्वाहिश तेज होती गई, औऱ जब मुझसे नहि रहा गय़ा तौ मैंने उठकर देखने कि कोशिश कि। मेरेरूम मे एक् खिड़की थि, जोँ उनके कमरे मे खुलती थि, वोँ खिड़की बहोत पुरानी तौ नहि थि, मगर उसमें 2-3 स्थान छेद थें। फिन मैंने अपनेरूम कि लाईटऑफ कि औऱ उसछेद मे आँखलगा दि। अब अंदर कां नज़ारा देखकर मेरे जिस्म मे करंट सां दौड़ गय़ा थां।
अब मेरी माँ जोँ कि सिर्फ़ ब्रा औऱ पेटीकोट मे थि औऱ बेड पर्र बैठी थि औऱ मेरे बापू सिर्फ़ अपनी वी-शेप अंडरवेयर मे खड़े थें औऱ बार-बार माँ कों अपनी ब्रा उतारने केँ लिएकह रहे थें औऱ मेरी मां उन्हें बार-बार मनाकर रही थि। फिन मैंने देखा कि मेरे पिताजी कि टाँगों केँ बीच मे जहाँ मेरी पेशाब करने कि स्थान हैं, वहाकुछ फूलाहुआ हैं। अब मेरीनजर तोँ बसवही टिक गई, थि औऱ मे चाहकर भि अपनीनजर हटा नहि पारही थि। अब वोँ लोगकुछ बातकर रहे थें, मगर मेरा ध्यान तोँ मात्र बापू कि टाँगों केँ बीच मे हि थां औऱ उनकी बातें सुनने कां ध्यान भि नहि थां। अब मेरादिल ज़ोर- ज़ोर सें धड़करहा थां औऱ मेरा शरीर बिल्कुल अकड़ गय़ा थां औऱ इसकेसंग हि मुझ पर्र एक् औऱ बिजली गिरी औऱ फिन मेरे पिताजी नें झटके सें अपना अंडरवेयर भि उतार दिया। ओह गॉड मेरी तोँ जैसे साँसे हि रुक गयीँ, थि। मेरे बापू कि टाँगों केँ बीच मे एक् लकड़ी केँ डंडे कि तरहकोई चीज लटकी हुइ थि, जोँ कि मेरे हिसाब सें 8 इंच लंबी औऱ 3 इंच मोटी थि, उसचीज कों क्याँ कहते हैं? मुझेउस समयपता नहि थां।
फिन मेरी माँ उसचीज कों देखकर पहले तोँ क्रोध हुइ औऱ फिन लज्जा सें अपनी नजरे झुकाली। अब उन्हें भि मस्ती आनेलगी थि औऱ फिन उन्होंने इशारे सें पिताजी कों अपनेपास बुलाया औऱ उनकेउस हथियार कों प्रेम सें सहलाने लगी थि। फिन माँ नें अपनी ब्रा उतारी औऱ अपने पेटीकोट कां नाड़ा खोला औऱ फिन बिल्कुल नंगी होकर सीधीलेट गई, औऱ अपनी टांगे खोलकर बापू कों अपनी बुर दिखाई औऱ इशारे सें उन्हें पास बुलाने लगी थि। फिन मेरे पिताजी कुछदेर तक तोँ गुस्से मे सोचते रहे औऱ फिन जैसे अपनामन मारकर उनकेऊपर उल्टे लेटगये औऱ अपने एक् हाथ सें अपना लन्ड पकड़कर मां कि बुर मे डाला औऱ हिलते हुए मां कों किस करनेलगे थें औऱ फिन करीब 10 मिनट तक हिलने केँ बाद वोँ शांत होँ गये औऱ ऐसे हि पड़ेरहे।
फिन थोड़ी देर केँ बाद मां नें उन्हें अपनेऊपर सें हटाया औऱ अपने कपड़े पहने औऱ लाईटबंद करके सोने केँ लिएलेट गई,। अब कमरे मे बिल्कुल अंधेरा होने कि वजह सें मुझेकुछ नहि दिखरहा थां, तोँ तब मैंने भि जाकर लेटने कि सोची औऱ फिन मे भि अपनेबैड पर्र आकरलेट गई,, मगरअब मेरी आँखों केँ सामने तोँ माँ पिताजी कि पिक्चर चलरही थि औऱ बापू कां वोँ भयानक हथियार पता नहि मुझे क्यूं बहोत अच्छा लगरहा थां? अब मेरादिल कररहा थां कि मे भि उनके हथियार अपनेहाथ मे लेकर देखूं। उसरात मेरी बुर मे बहोत खुजली हौ रही थि। फिन मैंने उसरात पहलीबार हस्तमैथुन किया। अब मेरे ख्यालों मे औऱ कोई नहि बल्कि मेरे पिताजी हि थें। फिनजब मेरी बुर कां रस निकला, तौ तब मे इतनीथक चुकी थि कि कब मेरीआँख लग गई, ? मुझेपता हि नहि चला।
फिन सुभह माँ नें जब आवाज़ लगाई तोँ मेरीआँख खुली। फिन माँ बोलीं कि बेटा सुभह केँ 7 बजरहे हैं, विद्यालय नहि जानां हैं क्याँ? तौ तब मे उठकर सीधी बाथरूम मे गयीँ, औऱ नहाने केँ लिए अपने कपड़े उतारे।
फिनतब मैंने देखा कि मेरी पेंटी पर्र मेरी बुर केँ रस कां धब्बा अलग हि दिखरहा हैं। अब मेरी आँखों केँ सामने फिन सें वही नज़ारा आँ गय़ा थां। अब मुझेफिन सें मस्ती आनेलगी थि तोँ मैंने फिन सें अपनी बुर मे उंगली करनी चालूकर दि औऱ तब तक करतीरही जब तक कि मे झड़ नहि गई,। दोस्तों मुझे इतनामजा आया थां कि मे ये सोचने लगी कि जब उंगली करने मे हि इतनामजा आता हैं तौ सेक्स मे कितना मजाआता होगा? औऱ फिन मे अपने पिताजी केँ संग हि येमजा लेने कि सोचने लगी औऱ सोचने लगी कि केसे बापू केँ संगमजा लियाजाए? खैर जैसे तैसे करके मे विद्यालय जाने केँ लिए रेडी हुइ औऱ ड्रेस पहनकर बाहर् आई तौ नाश्ते कि टेबल पऱ मेरा पिताजी सें सामना हुआ, मे रोज सुभह पिताजी कों गुड मॉर्निंग किस करकेविश करती थि। तौ तब मैंने उसदिन भि पिताजी कों किस करके हि विश किया, मगर इसबार मैंने कुछ अधिक हि गहराकिस किया औऱ थोडा अपनीजीभ सें उनकेगाल कों थोडा चाट लिया, जिससे मेरे पिताजी पऱ कुछअसर तोँ हुआ, मगर उन्होंने मेरे सामने ज़ाहिर नहि किया थां।
अब मे उनकेठीक सामने जाकर कुर्सी पर्र बैठकर ब्रेकफास्ट करनेलगी थि औऱ फिन ब्रेकफास्ट करने केँ बाद मे विद्यालय कि बस पकड़ने केँ लिए बाहर् जानेलगी, मगर मेरामन पिताजी कों छोड़कर जाने कां नहि हौ रहा थां, तोँ तब मे बाहर् तोँ गयीँ,, मगरकुछ देर केँ बाद वापसआकर मैंने एक्सक्यूज़ बनाया कि मेरीबस निकल चुकी हैं। अबऐसी स्थिति मे बापू मुझे विद्यालय छोड़कर आया करते थें, तोँ तब मां बोलि कि जा बापू सें कहदे, वोँ तुम्हें विद्यालय छोड़ आएँगे। फिन मे खुशी-खुशी बापू केँ कमरे मे गई,। अब पिताजी सिर्फ़ अपने पजामे मे थें। फिन मैंने बापू सें कहा तोँ वोँ मुझे विद्यालय छोड़ने केँ लिए राज़ी होँ गये। अब बापू अपनी पेंट पहनने लगे थें। फिन मैंने उनकेहाथ सें पेंट लेतेहुए कहा कि बापू पजामा हि रहने दीजिए, मे लेट हौ रही हूं। तोँ तब पिताजी बोले कि ठीक हैं, मे टी-शर्ट तौ पहनलूँ, तूँ मेरा बाहर् इन्तजार कर, तोँ मे बाहर् आकर इन्तजार करनेलगी।
पिताजी मुझे ज़्यादातर विद्यालय वाहन मे हि छोड़ते थें, मगरउस दिन मेरे कहने पऱ उन्होंने मुझे हमारी एक्टिवा स्कूटर पऱ विद्यालय छोड़ने केँ लिएगये। दोस्तों यहा तक तोँ मेरा प्लान सफलरहा थां, मगरआगे केँ प्लान मे थोडा खतरा थां औऱ मुझे यकीन नहि थां कि वोँ सफल हौ जाएगा। फिन मे उनके पीछेबैठ गई, औऱ फिन हम् विद्यालय कि तरफचल दिए। मेरा विद्यालय घऱ सें करीब 10 किलोमीटर दूर थां, मार्ग लंबा थां औऱ सुभह कां समय थां, तोँ रोड सुनसान थि। फिनजब हम् घऱ सें 2 किलोमीटर दूर आँ गये, तौ तब मैंने बापू सें कहा कि गाड़ी मे चलाऊँगी। तोँ तब बापू बोले कि बेटी तुझसे गाड़ी नहि चलेगी, तोँ मे तौ ज़िद्द करनेलगी। तौ तब पिताजी परेशान होकर बोले कि ठीक हैं, मगर हैंडल मे हि पकडूँगा। अब मुझे मेरा प्लान कामयाब होतादिख रहा थां।
आखिर पापा से मजा ले ही लिया मैंने - Desi sex story – New Episode
फिनतब मैंने कहा कि ठीक हैं औऱ पिताजी नें गाड़ी साईड मे रोककर मुझे अपनेआगे बैठाया औऱ मेरीबगल मे सें अपने दोनों हाथ डालकर हैंडल पकड़ा औऱ आरामसे चलाने लगे। मगर अब गाड़ी चलाने मे किसका ध्यान थां? अब मेरा ध्यान तौ बापू केँ लुंगी मे लटके उनके लन्ड पऱ थां।
पिताजी कां लन्ड तौ अभि ठंडा औऱ बैठाहुआ थां। बापू कों क्याँ मालूम थां कि उनकी बेटी केँ मन मे उनके लौड़े केँ लिए क्याँ भाव हें। मेरा तोँ मनकररहा थां कि बापू मेरेपास हौ जाये औऱ अपना लन्ड मेरे पीछेलगा दें। पऱ पिताजी तौ पीछेहट केँ बैठे थें। सड़क खराब तौ थि हि मैंने उसका फायदा लेने कां सोचा। तभी व्हीकल जैसे हि खड्डे मे गयीँ,, तोँ मैंने हिलने कां एक्सक्यूज़ करके उनका लन्ड ठीक मेरी गांड केँ नीचेदबा लिया। अब बापूकुछ अच्छा महसूस नहि कररहे थें। वोँ लन्ड कों मेरे नीचे सें निकलना चाहते थें पऱ मे उन्हें यह मौका कहां देने वाली थि। अब मे अपनी गांड कों उनके लन्ड पऱ रगड़ने लगी थि। अब गर्मी पाकर उनका लन्ड धीरेधीरे खड़ा होनेलगा थां, जिससे मुझे भि मस्ती आनेलगी थि। लन्ड तौ आखिर लन्ड हि हैं। उसे एक् बार चूतड़ कां स्पर्श मिला तौ वोँ खड़ा होनेलग गय़ा। अब लन्ड तौ रिश्ते सें क्याँ लेना.उधर बापू भि तोँ आखिर इंसान हि हें। जब उनके लन्ड कों मज़ा मिला तोँ उन्हें भि मजाआने लगा.अब पिताजी कों भि मजा आँ रहा थां। वोँ भि मेरेपास खिसकआये औऱ एक्टिवा चलाने केँ बहाने सें अपने लन्ड कों मेरे चूतड़ों पर्र रगड़ने लगे। उनका लन्ड पूराखड़ा हौ गय़ा थां। वोँ भि समझगए थें कि उनकी प्यारी बेटी उनके लन्ड कां खुशी लें रही थि.
मैंने धीरे-धीरे सें खिसककर पिताजी केँ लन्ड जोँ अपने दोनों चूतड़ों केँ बीच मे दबा लिया.
चूतड़ों कि जौ दरार हैं उस मे बापू कां टाइट औऱ गरमगरम लन्ड मुझे पूरा मज़ादे रहा थां औऱ पिताजी कों भि पूरी मस्ती आँ रही थि, पिताजी कां लन्ड पूरा टाइट थां औऱ हम् मज़ा लेँ रहे थें। बापू थोड़ा सां आगे खिसक जाते जिससे उनका लन्ड मेरी बुर कि ओर जाता तौ मुझे बहोत आनंदआता थां.
मुझे औऱ बापू दोनों कों मज़ा आँ रहा थां। पिताजी भि समझरहे थें कि उनकी बेटी कों उनकेखड़े लन्ड सें आनंद आँ रहा हैं.
मैंने बापू कों थोड़ा औऱ मज़ा देने केँ लिए उन्हें कहा।
"बापू आप् स्कूटर कां हैंडल छोड़ दीजिये मे स्वयं चला लुंगी पर्र आप् अपनाहाथ मेरेपेट याँ कमर पर्र रखलो ताकियदि मेरे सें स्कूटर हिल भि जाये तोँ आप् झट सें उसे संभाल सको। "
पिताजी नें हैंडल छोड़ दिया औऱ हाथ कों मेरेकमर पऱ रख लिया.
पिताजी धीरे-धीरे धीरे-धीरे मेरे नंगेपेट पर्र अपनाहाथ घुमाने लगे। मुझे सिहरन होनेलगी थि।
आखिर पापा से मजा ले ही लिया मैंने - Desi sex story - Aage kya hua? Next part padhiye
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