आखिर पापा से मजा ले ही लिया मैंने - Desi sex story – New Episode
फिन मैंने कहा।
"पिताजी कमर पर्र हाथ रखने सें मुझे गुदगुदी होती हैं। आप् अपनाहाथ मेरे टांगों पऱ रखलो कहीं गुदगुदी सें मेराहाथ हिल गय़ा तौ स्कूटर गिर जायेगा। "
बापू नें अपनहाथ मेरे जाँघो पऱ रख लिया। पर्र अब मुझे नंगीकमर सें भि कम आनंद आँ रहा थां। क्योंकि टांगों पर्र तोँ मेरी फ्राक कां कपडा आँ रहा थां.
मैंने बापू केँ लन्ड पर्र अपनी गांड कों रगड़ते हुएकहा।
"बापू फ्राक केँ कपडे पर्र हाथठीक सें नहि रखाजा रहा। आप् ऐसाकरो कि फ्राक केँ अंदर सें टांगो पर्र हाथरख लो। "
पिताजी समझगए कि बेटी नंगी जाँघो पर्र अपने प्यारे पिताजी केँ हाथों कां आनंद लेना चाहती हैं.
बापू नें फ्राक केँ नीचे सें मेरी नंगी जाँघो पऱ ज्यों हि हाथरखा तोँ मेरी तोँ जैसेमजे सें ऑंखें हि बंद होनेलगी.
बापू भि समझरहे थें कि उनकी बेटी नादान बनने कां नाटककर रही हैं औऱ मजे लेँ रही हैं। पिताजी नें मेरी नंगी टांगों पर्र धीरे-धीरे धीरे-धीरे हाथ फेरते हुएउसे मेरी टांगों केँ जोड़ कि ओर लेँ जानां शुरुआत कर दिया.
मैंने ऐसाशो किया कि जैसे मुझेकुछ भि नहि पता औऱ मे मासूमियत कां प्रदर्शन करतेहुए स्कूटर चलाती रही.
थोड़ी हि देर मे पिताजी केँ हाथ मेरी पैंटी केँ पास पहुँच गए। मेरी तौ बुर सें पूरा पानीबह रहा थां। लगता थां कि पिताजी कों मेरी गीली पैंटी कां गीलापन महसूस होँ जाएगा.
मे बापू कों रोकना चाहती थि पर्र मेरामन मेरेबस मे हि नहि थां.
अब पिताजी कां हाथ मेरी कच्छी तोँ स्पर्श करने हि वाला थां कि मेरा विद्यालय आँ गय़ा.
मैंने सकून कि सांसली। क्योंकि वरना तौ पता नहि अभि क्याँ कुछ होँ जाता.
"पिताजी विद्यालय आँ गय़ा। "
मैंने कहा।
बापू बुर केँ इतनेपास आँ कर भि उसेटच न् करपाए थें तौ थोड़े दुःखी थें.
मे पिताजी कि तड़पन कां आनंद लेँ रही थि.
औऱ फिनइस तरह मस्ती करतेहुए मे विद्यालय पहुँच गयीँ,। फिन पिताजी कों जातेसमय मैंने एक् बारफिन सें किस किया। अब बापू शायद मुझे लेकरकुछ परेशान होँ गये थें औऱ मे मेरी तौ पूछोमत, मेरी हालत तोँ इतना करने मे हि बहोत खराब हौ गयीँ, थि औऱ मेरी पेंटी इतनी गीली होँ चुकी थि कि मुझेलग रहा थां मेरी स्कर्ट खराब नां हौ जाए।
फिन पूरेदिन विद्यालय मे मेरेमन मे बापू कां लन्ड हि घूमता रहा औऱ अब मेरादिल कररहा थां कि मे पिताजी केँ लन्ड पर्र हि बैठी रहूँ। अब पता नहि मुझे क्याँ होँ गय़ा थां? ऐसाकौन सां वासना कां तूफान मेरे अंदर थां कि मे पिताजी सें चुदने केँ लिए हि सोचने लगी थि। खैरआगे बढ़ते हैं, फिन मे चुदाई कि ख़्वाहिश औऱ गीली पेंटी लेकरघऱ पहुँची। अबउससमय करीब 3 बजरहे थें। अबघऱ मे कोई नहि थां, मां कहीं गई, हुइ थि औऱ पिताजी अपने दफ़्तर मे थें। ख़ैरफिन मे बाथरूम मे गई, औऱ गंदे कपड़ो मे सें पिताजी कि अंडरवेयर ढूंढकर अपनी बुर पर्र रगड़ते हुए हस्तमैथुन किया। अब मुझे बहोत मजाआया थां औऱ फिन मे सो गयीँ,। फिन मेरीआँख खुली तोँ साम केँ 5 बजरहे थें। फिन मैंने नहा धोकर कपड़े पहने औऱ मैंने कपड़े भि उसदिन कुछ सेक्सी दिखने वाले पहने थें, मैंने एक् शॉर्ट स्कर्ट औऱ फिटिंग टी-शर्ट पहनी थि। अब पिताजी केँ आने कां टाईम हौ गय़ा थां, मगर मां कां कोईपता नहि थां।
आखिर पापा से मजा ले ही लिया मैंने - Desi sex story – New Episode
फिनसाम केँ 6 बजे पिताजी नें घंटी बजाई तौ मे दौड़ती हुई गयीँ, औऱ दरवाजा खोला। फिन बापू मुझे देखकर थोड़े मुस्कुराए औऱ मुझेगले लगाकर मेरे गालों पर्र किस करतेहुए बोले कि बेटा आज तौ बहोत स्मार्ट लगरही होँ। अब मुझे इतनी खुशी हुई थि कि मे बापू कों फंसाने मे धीरे धीरेसफल होतीजा रही थि। फिन अंदरआकर बापू नें गरमचाय कां ऑर्डर कर दिया तौ मे रसोई मे जाकरगरम चाय बनाने लगी। फिन पिताजी भि फ्रेश होकर रसोई मे आँ गये औऱ इधरउधर कि बातें करनेलगे थें। फिन थोड़ी देर मे बापू मेरी गोरी जांघो देखकर गरम हौ गये औऱ मेरे पीछे खड़े होकर अपना लन्ड मेरी गांड सें सटाने कि कोशिश करनेलगे थें। तब मे भि अपनी गांड कों उनके लन्ड पऱ रगड़ने लगी। अब मुझे तोँ ऐसालग रहा थां कि जैसे मे जन्नत मे हूं औऱ बसऐसे हि खड़ी रहूँ।
ख़ैर अबगरम चायबन चुकी थि औऱ फिन मैंने बापू सें डाइनिंग रूम मे जाकर बैठने कों कहा औऱ गरमचाय वहा सर्व करके बाथरूम मे जाकरफिन सें उंगली करनेलगी थि। फिन मे झड़ने केँ बाद बाहर् आई, तोँ तब तक मां भि आँ चुकी थि। मुझे मां पर्र बहोत क्रोध आया, क्योंकि मुझे पिताजी सें अभि औऱ मजा लेना थां औऱ मां केँ सामने मे कुछ नहि कर सकती थि। अब बापू भि माँ केँ आने सें थोड़े दुखी होँ गये थें, क्योंकि नां तोँ वोँ कुछ करती थि औऱ नाँ हि उन्हें कुछ करने देती थि। अब पिताजी मुझे देखकर बार-बार अपना लन्ड लुंगी केँ ऊपर सें हि सहलारहे थें औऱ मुझे भि उन्हें सताने मे बहोत मजामिल रहा थां। फिन खानां खाने केँ बाद पिताजी मुझसे बोले कि बेटी चल थोडा घूमकर आते हैं औऱ मुझे लेकरघऱ केँ बाहर् आँ गये। फिन बाहर् आकर उनकामूड चेंजहुआ औऱ मुझसे बोले कि चल बेटा पिक्चर देखने चलते हैं। तौ तब मुझे बापू पर्र इतना प्रेम आया कि बापू मेरेसंग अकेला रहने कि कितनी कोशिश कररहे हैं? खैरफिन हम् एक्टिवा पर्र सवार होकर एक् सिनिमा मे पहुँच गये औऱ रास्ते मे हि मां कों मोबाइल कर दिया कि हम् पिक्चर देखने जारहे हैं। जब सिनिमा मे कोई पुरानी मूवीलगी होने कि वजह सें अधिक भीड़ नहि थि, पूरेहॉल मे करीब 30-40 लोग हि होंगे।
अब मुझे पिताजी कि समझदारी पऱ बहोत खुशी हुईँ थि, वोँ चाहते तौ मुझे किसी बढ़िया पिक्चर दिखाने लेँ जाते, मगर उन्हें शायदकुछ ज्यादा मज़े लेने थें। फिन उन्होने सबसे महेंगे टिकटलिए औऱ फिन हम् लोग बालकनी मे जाकरबैठ गये। हमारा नसीब इतना बढ़िया चलरहा थां कि बालकनी मे सिर्फ़ हमारे अलावा सिर्फ़ एक् हि लड़का थां, जिसकी उम्र करीब-करीब 18 साल थि औऱ वोँ भि आगे कि सीट पर्र बैठ गय़ा थां। अब तोँ हम् दोनों कों औऱ भि आराम होँ गय़ा थां। फिन पिक्चर चालू हुई, मगर पिक्चर पऱ तोँ किसका ध्यान थां? अब मेरा दिमाग़ तोँ पिताजी केँ लन्ड कि तरफ थां औऱ पिताजी भि तिरछी नजर सें मेरी छोटी-छोटी चूचीयों कि तरफदेख रहे थें। अबबस शुरुआत करने कि देर थि कि कौनकरे? अब मे तौ बापू कां स्पर्श पाने केँ लिए वैसे हि मरीजा रही थि औऱ फिनउसी समय जैसे बिल्ली केँ भागों छिका टूटा हौ, मेरेपेर पर्र किसी जानवर नें काटा हौ, मे उउउइई करती हुईँ खड़ी होँ गई,।
फिनतब पिताजी नें घबराते हुए पूछा कि क्याँ हुआ? तौ तब मैंने बताया कि मेरे पांव पर्र किसी कीड़े नें काटा हैं। तौ तब बापू बोले कि बैठजा औऱ अब काटे तौ तुम् मेरीसीट पर्र आँ जानां। तौ मे बैठ गयीँ, औऱ फिन 5 मिनट केँ बादफिन सें उछलती हुईँ खड़ी होँ गई,, मगरइस बार मुझे किसी नें काटा नहि थां बल्कि मे जानबूझकर खड़ी हुई थि। खैरफिन बापू हंसते हुए बोले कि तुँ मेरीसीट पर्र आँ जा। फिन तब मे बोलीं कि बापूकोई बात नहि जैसेउस कीड़े नें मुझे काटा हैं, ऐसे हि आपको भि काट लेगा। तोँ तब बापू बोले कि तूँ एक् कामकर मेरीगोद मे बैठजा। अब मे तोँ पहले सें हि सजधजकर थि तौ बापू केँ बोलते हि मे उनकीगोद मे बैठ गयीँ, औऱ पर्दे कि तरफ देखने लगी थि। अब मे उनकीगोद मे बैठी हुइ बिल्कुल छोटी सि लगरही थि, मेरी उम्रउस वक्त 18 साल हि तोँ थि।
आखिर पापा से मजा ले ही लिया मैंने - Desi sex story – New Episode
अब बापू मेरी गर्मी पाकरगरम होनेलगे थें। अब उनका लन्ड फिन सें खड़ा होनेलगा थां। अब मुझे भि उनके लन्ड पऱ बैठना बहोत अच्छा लगरहा थां, वैसे तोँ हमारी नजर पर्दे कि तरफ थि, मगर ध्यान सिर्फ़ अपनी-अपनी टाँगो केँ बीच मे थां। अब मेरा तोँ शरीर जैसे किसी भट्टी कि तरहतप रहा थां। अब मेरी स्कर्ट मे मेरी चड्डी बिल्कुल गीली होँ रही थि। अब पिताजी कां लन्ड ठीक मेरी गांड केँ छेद पऱ थां औऱ पिताजी आरामसे मेरापेट सहलारहे थें। अब मेरामन कररहा थां कि बापू अपना लन्ड ज़ोर-ज़ोर सें मेरी बुर पऱ रगड़दे, मगरऐसा नहि होँ सकता थां, क्योंकि हम् दोनों हि एक् दूसरे सें शर्मा रहे थें। खैरफिन कुछदेर तक ऐसे हि बैठे रहने केँ बाद मैंने अपनेहाथ मे पानी कि बोतल थि वोँ नीचे गिरा दि औऱ फिन उसको उठाने केँ लिए झुकी तौ पिताजी कां लन्ड बहाने सें अपनी बुर पर्र सेट किया औऱ फिन सीधी बैठकर मज़े लेनेलगी। अब 1 घंटा 30 मिनट निकलगये थें औऱ हमेंपता हि नहि चला कि कब इंटरवेल हुआ?
फिन बापू मुझे पैसे देतेहुए बोले कि कैंटीन सें जाकरकुछ लेँ आओ तोँ मे बाहर् गयीँ, औऱ कैंटीन सें कुछ खाने कि चीज़े खरीदी औऱ फिन टॉयलेट मे चली गई, औऱ फिनजब तक वापसआई तोँ पिक्चर चालू हौ चुकी थि। फिन मैंने पिताजी कि गोद मे बैठते हुएकहा कि बापू मुझे आपकीगोद मे बैठने मे अधिकमजा आँ रहा हैं। फिनतब बापू बोले कि तोँ फिन 1 मिनटरुक औऱ बैठेहुए हि अपने लन्ड कों सेट करनेलगे थें। अब मुझे अंधेरे मे कुछ नहि दिखरहा थां औऱ फिनजब उन्होंने मुझे बैठने कों कहा, तौ उन्होंने अपनाहाथ कुछइस तरह सें मेरी स्कर्ट पर्र लगाया कि मेरी स्कर्ट ऊपर होँ गई, औऱ मे उनकीगोद मे फिन सें बैठ गयीँ,। फिन थोड़ी देर केँ बाद मुझे अहसास हुआ कि पिताजी नें अपना लन्ड अपनी लुंगी मे सें बाहर् निकाल रखा हैं औऱ इस अहसास केँ संग हि जैसे मेरे शरीर नें एक् तगड़ा झटका लिया औऱ अब मेरा भि मन अपनी चड्डी उतारकर पिताजी कां लन्ड मेरी बुर सें चिपकाने कां करनेलगा थां।
फिन उसकेलिए मैंने फिन सें एक् प्लान बनाया औऱ मेरेहाथ मे कोल्डड्रिंक कां जोँ गिलास थां, उसे अपनी जांघों पऱ उल्टा दिया तौ सारी कोल्डड्रिंक मेरे पैरो औऱ चड्डी पर्र गिर गयीँ,, तौ तब बापू चौंकते हुए बोले कि ये क्याँ किया? तौ तब मैंने कहा कि सॉरी पिताजी गलती सें हौ गय़ा, मे तोँ पूरी गीली हौ गयीँ, औऱ मेरे कपड़े भि गीले हौ गये। तौ तब कपड़ो कां मतलब समझते हुए बापू बोले कि जा औऱ टॉयलेट मे जाकरसाफ कर आँ औऱ कपड़े ज्यादा गीले होँ तोँ उतारकर आँ जानां, जल्दसूख जाएँगे। अब मेरामन पिताजी कों छोड़ने कां नहीँ थां, तौ मैंने वहीं खड़े होकर मेरी चड्डी उतारी औऱ दूसरी सीट पऱ रखी औऱ फिन सें बापू केँ लन्ड पऱ बैठकर बापू केँ लन्ड कों अपनी दोनों टाँगों केँ बीच मे लें लिया। अब उनका लन्ड बिल्कुल मेरी बुर पऱ थां। अब मुझेऐसा लगरहा थां कि जैसेकोई गरम लोहे कि रोड मेरी जांघों मे दबी पड़ी हैं। अब तोँ मेरामन कररहा थां कि जल्द सें बापू अपना लन्ड मेरी बुर मे डालकर ज़ोर सें रगड़दे, मगर हम् ऐसा नहि कर सकते थें।
पिताजी कां लन्ड खड़ा हौ चूका थां औऱ क्योंकि वोँ लुंगी सें बाहर् थां औऱ इधर मैंने अपनी पैंटी उतार दि थि तौ मेरी नंगी बुर औऱ बापू केँ खड़े लन्ड केँ बीच मे कोई भि रुकावट नं थि। हम् दोनों हि नंगे बुर औऱ लन्ड कां मज़ा लें रहे थें पर्र ऐसे दिखावा कररहे थें कि जैसेकुछ भि असामान्य नं हौ रहा हौ.
जब मैंने कुछ भि प्रत्युतर न् दिया तोँ पिताजी समझगए कि आज उनकालकी दिन हैं औऱ उन्हें बहोत मज़ाआने वाला हैं.
पिताजी धीरे-धीरे अपना लन्ड मेरी चूतड़ों कि दरार मे रगड़ते जारहे थें.
हम् दोनों बाप बेटी केँ सम्बन्ध केँ कारणखुल कर मज़ा नहि लें सकते थें पर्र हम् दोनों हि अब जानते थें केँ क्याँ होँ रहा हैं.
अब मेरी बारी थि। फिन मेरामन अपनी बुर कों उनके लन्ड पऱ रगड़ने कां हुआ तौ तब मे अपनी चड्डी उठाने केँ लिए झुकी औऱ ज़ोर सें अपनी बुर पिताजी केँ लन्ड पऱ रगड़ दि औऱ फिनऐसे हि 3-4 बार ज़ोर सें रगड़ी, तौ तब मुझेऐसा लगा कि जैसे मेरा पानी निकल जाएगा। अब मे कभीकिस बहाने सें तोँ कभीकिस बहाने सें हिलती औऱ अपनी बुर बापू केँ लन्ड पऱ रगड़ देती थि। अब पिताजी समझगये थें कि मेरामन रगड़ने कां होँ रहा हैं। तब पिताजी नें मेरेपेट पर्र अपना एक् हाथ रखकर दबाया औऱ अपना जूता खोलने केँ बहाने सें कभी खुजाने केँ बहाने सें अपना लन्ड रगड़ने लगे थें।
बापू केँ लन्ड कां सुपाड़ा मेरी बुर कि दरार मे रगड़रहा थां। आज एक्टिवा चलाते हुए हम् दोनों नें जौ मस्ती कि थि, उस सें पिताजी कों पूरा यकीं थां कि उनकी भाग्य जागने वाली हैं। शायदइसी लिए तौ वोँ इसतरह कि पुरानी फिल्म देखने आये थें जिसेकोई नहि आता।
आखिर पापा से मजा ले ही लिया मैंने - Desi sex story - Next part miss mat karna
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