आखिर पापा से मजा ले ही लिया मैंने - Desi sex story – New Episode
मैंने शुरुवात लौड़ाहाथ मे पकड़ने सें कि। यहसभी मेरेलिए थोडा अजीब थां। क्यूंकि आज तक मे किसी लडके याँ व्यक्ति कां लौड़ा नहीं चूसा थां। मैंने डरते डरते बापू कां सुपाडा मुँह मे लें लिया। उसका सवाद मुझे नमकीन नमकीन लगा। मे चूसने लगी.कुछ देरबाद तोँ मुझेखूब आनंदआने लगा। मेरा मनोबल बढ़ गय़ा। अब मैंने पिताजी कां लौड़ाआगे तक लेकर चूसने लगी। धीरे-धीरे धीरे-धीरे मेरा मज़ा बढ़नेलगा। औऱ मैंने बापू कां लौड़ा पूरा कां पूरा अंदरगले तक मुँह मे भर लिया औऱ किसी रंडी कि तरह चूसने लगी.
शाबाश बेटी !!! शाबाश !! शाबाश बेटी !! तुँ अच्छा लन्ड चुस्ती हैं। चूस बेटा चूस!!’ पिताजी बोले। मेरा कॉन्फिडेंस औऱ बढ़ गय़ा। पिताजी कां लन्ड बहोत हसीन थां। उसपर बहोत सारीनसे निकली थि। बापू कां लन्ड खूब मोटा औऱ पुष्ट भि थां। मे इसबात कि पूरी उमीदलगा रही थि कि जबयह सिलबट्टे सां लौड़ा मेरी चूत मे जाएगा औऱ मुझे चोदेगा तौ कितना मज़ा औऱ चैन मिलेगा। पऱ अभि तोँ चूसने कां वक़्त थां.
बापू केँ लन्ड कि खाल मां कों चोदचोद कर पीछेभाग गई, थि। सुपाडा तौ इतना सुन्दर थां कि मे आपको क्याँ बखान करूँ। मे जब बापू कां लौड़ाचूस रही थि तोँ उन्होंने अपनाहाथ मेरेदूध पऱ रख दिया औऱ सहलाने लगे.इस तरह भि मुझे बहोत आनंदआया.
बापूखुश हौ गए औऱ उन्होंने मेरा मुँह अपने लौड़े केँ ऊपरकर दिया.
मैंने भि टाइम खराब करना उचित नं समझा औऱ उनका लन्ड चूसने लगी। पहले तौ मैंने बहुतदेर तक बापू कां लन्ड हाथ मे लेकर फेटा।
धीरे-धीरे धीरे-धीरे मे मुंह मे लेकर चूसने लगी। पिताजी केँ लन्ड कों मैंने हाथ सें पकड़ किया थां। औऱ जल्द जल्द चूसने लगी। संग हि मेरेहाथ गोलगोल लौड़े पऱ घूमरहे थें। पिताजी मेरेसिर कों अंदरहाथ सें दबा देते थें जिससे जड़ तक उनका लौड़ा मेरे मुंह मे जासके। दोस्तों आज पहलीबार मे किसी मर्द केँ खड़े लन्ड कों चूसरही थि। वोँ बहोत हि जूसी थां। मे जीभ सें उसकोचाट लेती थि। लन्ड केँ मुंह कों [छेद पर्र] मे जीभ सें चाट लेती थि। बापू सिसक उठते थें। वोँ धीरे-धीरे सीट पऱ बैठकर अपना लौड़ाआज अपनीसगी बेटी सें चूसारहे थें। आज पिताजी बेटीचोद बन चुके थें।
“अहह बेटी!! औऱ जल्द जल्द” बापू सें हुक्म दिया
मे औऱ जल्द जल्द अपना मुंह बापू केँ 10” केँ लौड़े पऱ चलाने लगी। मेरे गुलाबी होठआज बापू केँ खूबकाम आँ रहे थें। पिताजी तोँ ऐशकररहे थें। कुछदेर तक ऐसा हि चला। मैंने बहुतदेर तक उनका लन्ड चूसा। पिताजी कों भरपूर मज़ामिल गय़ा।
अब मेरी चूचियां कामवासना केँ नशे सें औऱ जादाफूल गयीँ, थि। 36” कि चूचियां अब 40” कि दिखरही थि। मे मस्त चोदने लायकमाल लगरही थि।
बेटी….मज़ा आँ रहा हैं नं। यदि अच्छा लगरहा हैं तौ बोल कि बापू मेरी बुर आजफाड़ दो” बापू बोले
बापू….आज तुम् मेरी बुर कसकेफाड़ दो” मैंने उसकी लाइन दोहराई
जितना मनकरे तुम् मुझेचोद लो” मैंने कहा
हमे भरपूर आनंद मिलने लगा। बापू मात्र मेरी आँखों मे झाँकरहे थें।
मे भि केवल उनको हि ताड़रही थि। हम् दोनों एक् दूसरे कों नजरो हि नजरों मे चोदरहे थें। बापूफिन सें मेरेहोठ चूसने लगे। उनकेहाथ अब भि मेरे डबलरोटी जैसी फूले चूतड़ों पर्र थें। वोँ सहलारहे थें। फिन पिताजी नें मुझे हल्का सां उचकाया औऱ मेरी बुर केँ छेद पर्र लन्ड लगा दिया।
पिताजी नें मेरे दोनों पुट्ठो कों कसके पकड़कर अंदर हि तरफ दबाया। मेरी बुर कि सीलटूट गयीँ,। पिताजी कां लन्ड अंदरचला गय़ा। बापू मुझे चोदने लगे।
मैंने उनको कसकेपकड़ लिया। पिताजी मुझेगोद मे बिठाकर चोदने लगे। मेरी आँखों सें आंसू कि कुछ बूंद निकल गई। मेरे बेटीचोद पिताजी पीगये।
बापू आराम आहिस्ता मुझे चोदने लगे। कुछ देरबाद मे अपनीकमर उठाने लगी। मुझे अजीब सि बेचैनी हौ रही थि।
वासना औऱ सेक्स कि आग मे मे जलरही थि। चुदाते चुदाते मेरी आँखों मे जलन होँ रही थि। मेरागला भि सुखरहा थां। काश मेरे मुंह मे कोई१ घूंट पानीडाल देता। फिन पिताजी नें मेरे सेक्सी पतले छरहरे पेट पर्र हाथरख दिया औऱ सहला सहलाकर मुझे चोदने लगे।
मेरे चेहरा अजीबतरह सें बन गय़ा थां। मेरेगाल पिचकगये थें। मेरे दोनों भवेआपस मे जुड़ गई, थि। मेरे मुंह सें “आऊ….आऊ….हमममम अहह्ह्ह्हह…सि सि सि सि.हाहा हा.” कि आवाज़ आँ रही थि। जैसे मे कोईतेज मिर्ची खारही थि औऱ सि सि कि आवाज़ निकाल रही थि।
बापू कां लन्ड अबबड़ी धीरे-धीरे मेरी बुर मे दौड़रहा थां। अब मेरी बुर रवां होँ गई, थि। उसका मार्ग बन गय़ा थां। बापू कां लन्ड मेरी बुर केँ अंतिम किनारे तक जारहा थां। मुझे भरपूर यौनसुख कि प्रप्ति हौ रही थि। कभी मे बेचैनी सें ऑंखें बंदकर लेती थि तौ कभीखोल लेती थि।
मात्र बापू कों हि ताड़रही थि। मेरी बुर मे उनका लौड़ा पिघलरहा थां। मे अच्छे सें जानती थि आजरात पिताजी मुझेचोद चोदकर मेरी रसीली चूत फाड़ देंगे। फिन पिताजी मेरेउपर झुकगये औऱ जल्द जल्दकमर घुमाने लगे। मेरी बुर मे जल्द जल्द उनका लन्ड जानेलगा। चटचट कि आवाज़ मेरी बुर सें आनेलगी जैसे बच्चे तालीबजा रहे होँ।
आखिर पापा से मजा ले ही लिया मैंने - Desi sex story – New Episode
फिन बापू जल्द जल्द मुझे चोदने लगे। दोस्तों हम् लेटे नहीं थि। मात्र कुर्सी कि सीट पर्र हम् दोनों बैठोहुए थें। पिताजी कि कमर जल्द जल्द मेरीकमर औऱ पेडू सें टकराने लगी। मे चुदने लगी। बाप रे!! 10” केँ शक्तिशाली लन्ड कों मे साफ़साफ अपनेपेट मे महसूस कररही थि।
पिताजी धीरे-धीरे धीरे-धीरे मुझे हल्का हल्का उछालकर चोदरहे थें। ऐसालग रहा थां मे साईकिल चलारही हूं। मुझे अभूतपूर्व आनंदमिल रहा थां। ऐसे दिव्य चुदाई केँ महासुख कों आज मैंने पहलीबार पाया थां। मे किस्मतवाली थि कि अपने बाप कां मोटा लन्ड खारही थि। फिन पिताजी मुझे जल्द जल्दगोद मे बिठाकर चोदने लगे। मे स्वयं कों पिताजी केँ हवाले कर दिया।
मेरी बुर सें पटपट कि आवाज़ आनेलगी। मे “ हूँउउउ हूँउउउ हूँउउउ ….ऊँ—ऊँ…ऊँ सि सि सि सि… हाहाहा। ओ होँ हौ….” कि आवाज़ निकाल रही थि। मेरी सांसे टूटरही थि। मे गहरी साँस लेने कि कोशिस कररही थि। बापू कां मोटा लन्ड मेरी बुर फाड़रहा थां। मेरी कुवारी बुर सें निकला खून कुर्सी कि सीट पऱ लग गय़ा थां
पिताजी फिन मेरेहोठ पीने औऱ चूसने लगा औऱ घपघप मुझे चोदने लगे। फिन उन्होंने मेरे दोनों पेर कां स्टैंड बना दिया। स्वयं थोडा पीछा हौ गये औऱ जल्द जल्दकमर चलाकर मेरी बुर बजाने लगे। कुर्सी पर्र चुदाई करवाना थोड़ा अजीब औऱ मुश्किल थां पर्र मुझे इतना मज़ा आँ रहा थां कि क्याँ बताऊं.
पिताजी भि पूराजोर लगाकर तेजतेज चोदरहे थें। मुझे स्वयं कों दोनों हाथों सें रोकना पड़ा वरना मे गिर जाती। मैंने दोनों हाथ पीछेकर दिए औऱ अपनेभार कों हाथों सें रोका। बापू नें भि ऐसा हि किया। वोँ दूर सें मेरी बुर मे लम्बे औऱ गहरे शॉट्स मारने लगे। मुझे चुदाई कां ब्रह्मसुख मिलरहा थां। आज हम् बाप बेटी २बदन एक् जान होँ गये थें। कुछदेर बाद बापू नें फिन सें मुझेगोद मे भर लिया औऱ हवा मे उचका उचकाकर मेरी बुर मारने लगे। मेरी बुर अब रवां हौ गई, थि।
मैंने अपनेहाथ उनके कन्धो पऱ टिकादिए। बापू नें मुझे 35 मिनट लन्ड पर्र बिठाकर सारी दुनिया घुमा दि। फिन मेरी बुर मे मालछोड़ दिया।
फिन कुछ हि देर मे मुझेलगा कि जैसे मेरे शरीर मे सें साराखून फटकर मेरी बुर मे सें निकलने वाला हैं औऱ फिनइसी केँ संग मेरा पानीझड़ गय़ा। अब मे बिल्कुल ठंडी हौ चुकी थि,
कुछदेर केँ लिए हम् दोनों चिपके रहे। बापू कां लन्ड 10 मिनट तक मेरी बुर मे रहामाल निकलने केँ बाद भि। तब जाकर वोँ शांतहुआ औऱ छोटा हौ गय़ा थां। जैसे हि बापू नें लन्ड मेरी बुर सें निकाला उनकामॉल मेरी बुर सें निकलने लगा।
पिताजी केँ लन्ड सें इतनामाल निकला थां कि पूरीसीट गीली हौ गई, थि.
अब हम् दोनों बिल्कुल शांत थें औऱ बहोत थकगये थें। फिन 5 मिनट केँ बाद हि पिक्चर खत्म हौ गई, औऱ लाईट जलती इससे पहले हि मैंने अपनी चड्डी ये कहतेहुए पहनली कि अब वोँ सूख चुकी हैं। अब दोनों पिक्चर समाप्त हौ चुकी थि एक् जौ पर्दे पर्र चलरही थि औऱ एक् जोँ हम् बाप बेटी केँ बीच मे चलरही थि। फिन थोड़ीदेर केँ बाद लाईटजली औऱ फिन हम् दोनों हॉल सें बाहर् निकले। फिन बाहर् आकर बापू मुस्कुराते हुए बोले कि पिक्चर कैसीलगी? तौ तब मैंने जवाब दिया कि इससे बढ़िया पिक्चर मैंने आज तक नहि देखी, तौ तब बापू बोले कि मेरेसंग घूमा करेगी तोँ औऱ भि बढ़िया चीज़े देखने कों मिलेंगी औऱ फिन मे मस्कुराती हुई वाहन पऱ बैठ गई, औऱ फिन हम् घऱ कि तरफचल पड़े।
इसतरह मेरा औऱ मेरे पिताजी कां प्रेम कां औऱ सेक्स कां संभन्ध बन गय़ा.
इसकेबाद जब भि हमें मौका मिलता हम् दोनों बाप बेटी मजेलूट ते हें.
The End
आखिर पापा से मजा ले ही लिया मैंने - Desi sex story - Kahani ab aur interesting hogi
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