क्या मेरी मम्मी एक रंडी है? - एक कहानी - desi chudai mom son - Episode 1
नोट - यह एक् काल्पनिक किस्सा हैं, औऱ इसका किसीमृत याँ जीवित सें कोई सम्बन्ध नहि हैं|
मेरी अम्मी आयेशा खान एक् पाकीज़ा स्त्री हें, औऱ दुनिया उन्हें एक् बहोत हि साफ़दिल, औऱ महज़बी समझते हें, मगरयह केवल मुझे हि पता हैं कि मेरी अम्मी जोँ दुनिया कों दिखाती हैं, वोँ असलियत नहि हैं, मगर मेरी अम्मी कों सीधे रंडी कहना भि सही नहि होगा क्युकी मैंने उनकी जीवन कि सफर देखि हैं, भले उन्होंने बहोत गलतकाम किये हें, मे रेहान खान आपके समक्ष अपने अम्मी कि यात्रा रखूँगा, औऱ आप् स्वयं हि फैशला कीजिये कि क्याँ मेरी अम्मी एक् रंडी हैं याँ मजबूरी मे दफन एक् मजबूर स्त्री |
नोट - एक् स्टोरी मे इन्सेस्ट, अडुल्टेरी, औऱ जबरदस्ती सें रिलेटेड चीज़े होंगी, आप् अगरइन सभी कों पसन्द नहि करते हें, तौ आप् इसी वक़्तरुक जाएये |
आयेशा खान - उम्र अभि ४६साल हैं
pr abi tak aapne clear nahee kia kuch bi ( sayad ap aage k liye suspense rakhna chahte hu ) kee abbu kehta h woh kisiko khusu nahee krr sakta fir pregnent kese kia dusri ldki ko ??
क्या मेरी मम्मी एक रंडी है? - एक कहानी - desi chudai mom son – New Episode
०१।
'सही सें बॉलडाल साले, स्कोर बहोत काम हैं', मैंने अपने मित्र आकाश कों बोला, अभि हमलोग क्रिकेट खेलरहे थें कि पीछे सें कोई मुझे आवाज़ लगता हैं,
'रेहान रेहान' मे पीछेमुड केँ देखता हूं, वहा पीछे मेरेघऱ कां माली मुझे आवाज़दे राहा थां,
'क्याँ हुआ पठान बाबा, जरुरी काम हैं क्याँ अभि थोड़ा बिजी ' मेरेघऱ कां काम करने वाला पठान बाबा मेरे लगभग आँ जाता हैं औऱ मेराहाथ पकड़ लेता हें,
'आप् घऱ जल्द चलिए बाबा', पठान बाबा केँ सर पे आये पसीने कों देख मे आगेकुछ नहि बोलता हूं, मुझेसमझ मे आँ गय़ा थां कि घऱ मे कुछ गड़बड़ हैं,
'आकाश भइया मुझे अभि जल्दी घऱ जानां पड़ेगा, तूँ आगे संभाल ' औऱ मे पठान बाबा केँ संग निकल जाता हूं, मे पठान बाबा केँ तरफ देखता हूं, वोँ बहुत चिंतित दिखरहे थें, मगर मुझेडर सें पूछने कि हिम्मत नहि हुइ, घऱ पहुंचता हूं तोँ चारोतरफ सन्नाटा पसराहुआ थां, औऱ मे इस सें औऱ डर गय़ा, वहाकोई नहि थां,
'बाबा बाकिलोग कहां हें, यहा तोँ बिल्कुन सन्नाटा हैं, कुछ बहोत ख़राब तोँ नहि हौ गय़ा हैं, ' औऱ मेरे अंदर कां डर बढ़ाते जारहा थां,
'रेहान बाबा आपके वालिद औऱ वालिदा मे बहोत बड़ा लड़ाई होँ गय़ा हैं, '
'क्यू केसे ' औऱ मे घऱ केँ कुर्सी पे बैठ जाता हूं,
'रहन बाबा, वोँ आपके वालिद साहब दूसरा निकाह कि बात लेकेआये थें उसी सें लड़ाई सुरू हुई हें, मे आपको लाने गय़ा तब तक यहलोग सायद कहीं बहारचले गए हें ' मुझेयह सुन बहोत हैरानी होती हें, मेरे अम्मी अब्बू औऱ दूसरा निकाह ऐसा नहि होँ सकता, मेरे अब्बू तौ मेरे अम्मी सें बहुत मुहब्बत करते हें, फिनयह दूसरा निकाह कि बात,
'बाबायह दूसरा निकाह कां क्याँ चक्कर हैं, अचानक यहसभी '
'रेहान बाबा आपके दादीमा जान नें रिस्ता लेकेआये हें, बाकि तोँ मुझे भि नहि मालूम ' औऱ पठान बाबाउठ केँ अपनेकाम कों चला जाता हैं, औऱ वही मे बैठ केँ सोचने लगता हूं कि आखिर मेरी अम्मी औऱ अब्बू गए कहां, औऱ मे अपनेफ़ोन सें अब्बू अम्मी कां नंबर लगाता हूं, मगरकोई जवाब नहि देता, औऱ दादीमा जान सें बात करने कां मन नहि कररहा थां, औऱ मे वही पे सर पीछेकर सोनेलगा, औऱ वही मुझे नींद सि आनेलगी,
'भइयामैच जीतगए, चल बर्थडे पार्टी करते हें ' यह आवाज़ मेरे कानो मे जाती हैं, औऱ मेराआँख खुल जाता हैं, वहा पे मेरेसंग क्रिकेट खेलेने वालेकुछ मित्र थें, औऱ उन्हें देख मेरे अंदर कां डर औऱ क्रोध थोड़ाकम हुआ,
'चल चलते हें ' औऱ हम् तीनो साथीकुछ चिनी खाने केँ लिए निकलते हें, औऱ मे अपने दोस्तों केँ बातो मे मसगुल होँ जाता हूं, मगर मेरे दिमाग़ घऱ मे हुएइस तकलीफ़ पे अटकाहुआ थां, औऱ बारबार मे उसी चिंता मे खोजारहा थां,
'रेहान तेरा तबियत सही हैं नं, कहा ध्यान हैं तेरा ' मे अपनासर उठा केँ देखता हूं,
'भइयालोग मे चलता हूं मेराआज दिल हि नहि लगरहा हैं ' औऱ मे वहा सें अपनेघऱ केँ तरफयह उम्मीद लगाए कि सभीलोग घऱकाम सें काम पहुँच गए होंगे, मे जैसे हि वो सें निकालता हूं मेरा एक् औऱ साथी पीछे सें मेरेपास अत हैं, औऱ मुझेपकड़ लेता हैं,
'भइया तेरी क्याँ हुआ हैं, तेरा मुँह इतना क्यूं लटकाहुआ हैं, खेलते वक़्त भि तुम् अचानक चलेगए थें ' औऱ मुझसे बातें करने कि कोसिस करने लगता हैं, मगर मेरामन बहोत ख़राबलग रहा थां औऱ मे घऱ जानां चाहता थां,
'कुछ नहि हुआ हैं ' औऱ मे अपनेघऱ केँ तरफ जाने लगता हूं, मेरादिल बहोत ख़राब थां औऱ मेरे अंदर मेरे अब्बा पे भि बहोत क्रोध आँ रहा थां, इतना उम्र मे दूसरा निकाह, औऱ मे घऱ पहुँच गय़ा, घऱआया तौ वो पे मेरे दादाजी दादीमा औऱ अब्बू मौजूद थें, औऱ उन्हें देख मुझे थोड़ा क्रोध आँ गय़ा, मगर मे उस गुस्से कों पी गय़ा, मगर मे वहाचल रहे बातों कों सुनरहा थां, औऱ उसी सें मुझे मालूम पड़ा कि मेरे अब्बू निकाह नहि करनाचाह रहे थें औऱ उन्होंने मेरी अम्मी कि बहुत दलील दि, मगर उनके वालिद यह निकाह सें पीछे नहि हैटरहे थां, मुझेसमझ मे नहि आँ रहा थां कि मेरे अब्बू केँ वालिद इस दूसरे निकाह केँ लिए इतना जिद्द क्यूं कररहे हें, औऱ घऱ पे उसी वक़्त मेरे अम्मी केँ वालिद, वलिदान औऱ कुछ रिस्तेदार पहुंचे औऱ मामला देखते हि देखते बहुत गर्म हौ गय़ा औऱ पठान बाबा मुझे वो सें बहार जानेलिए बोलदिए, घऱ कां माहौल बहुत ख़राब होँ गय़ा थां, औऱ मुझेसमझ मे नहि आँ रहा थां कि आखिर हमारे घऱ मे ऐसी स्थिति केसे होँ गयीँ,, मुझेलगा थां सायद मेरा परिवार मिलजल केँ रहने वाला होगामगर सायद सचाई बहुतअलग निकलरहा थां, औऱ अभीतक अम्मी कां कोईआता पता नहि चला थां, औऱ मुझे बहुत चिंता होनेलगी, मे वही बहारखड़ा होँ घऱ कां बहस बेहसि सें दूर जाने कि कोसिस कररहा थां, बहार मोहल्ले केँ भि बहुतलोग तमाशा देखने जुटेहुए थें, औऱ मेरा दिमाग़ ख़राब हौ गय़ा,
'तुम् लोगो कों औऱ कोईकाम नहि हैं, घऱ संभाला नहि हैं, जाओयहा सें ' औऱ मैंने वहा सें सबकोभगा दिया, औऱ वही पे दीवाल पे बैज गय़ा ताकि औऱ भीड़जमा न् होँ, मगरघऱ मे सोर भढ़ता हि जारहा थां, औऱ मे उठ केँ अपनेयार केँ घऱ जानेलगा, मगरसरे साथी मेरेकही न् कही व्यस्त थें, औऱ मुझे बहोत अकेला अकेला महसूस होँ रहा थां, औऱ मे बाजार मे इधरउधर घूमने लगा, मुझे आंटी ताड़ना बहोत मनपसंद थां, मगरआज उसमे भि मन नहि लगरहा थां, औऱ कुछ घंटे मे दुकान बंद होनेलगे औऱ बहोत भरी पेअर सें मे अपनेघऱ केँ तरफ जानेलगा, वहा पे सभी सांतपड़ा हुआ थां, औऱ मेरी अम्मी कां परिवार वापसचला गय़ा थां, मगर उनकाखु कुछआता पता नहि लगरहा थां, औऱ मुझे स्वयं गुस्से औऱ डर सें घऱ वालो सें पूछने कां मन नहि कररहा थां, वो पे मेरे अब्बू अपनासर झुकाये बैठेहुए थें औऱ मे उनकेपास गय़ा,
'अब्बू यह क्याँ सभी हैं, दूसरा निकाह आपको क्याँ होँ गय़ा हैँ ' मेरे अब्बू अपनासर ऊपर करते हें,
'मम्मी बेटा जी, मगर यहाकोई दूसरा निकाह नहि कररहा, मे आपकी अम्मी नहि संभल पाटा हूं, दूसरा कहां सें सम्भालूंगा' औऱ हँसाने लगते हें, उनकायह बात सुनके मुझे भि चैन मिलता हैं,
'अब्बू अम्मी कहां हें, औऱ कब वापस आएँगी '
'बेटा जी अभि अम्मी आपकी मायके मे हें औऱ कुछ हि दिनों मे वापस आँ जाएगी '
'जब आपने आपनेमना कर दिया दूसरा निकाह कां तोँ वोँ क्यूं नहि आँ रही हैं, अब्बू मे उनसेबात करूँ '
'नहि बेटा जी, आप् अपनाकाम कीजिये वोँ कुछ दिनों मे वापस आँ जाएगी' मे वहा सें उठ अपने कमरे मे चला जाता हूं, अपने अब्बू कि बात सुनकर मुझे थोड़ी राहत मिली, औऱ मे अगलेदिन अपने अम्मी कों स्वयं वापस लाने कां फैसला करता हूं, मुझेरात कों चैनभरा नींदआया,
अगलेदिन मे घऱ सें बसपकड़ केँ अपने अम्मी कों वापस लेने अपने ननिहाल जाता हूं, औऱ सफर करीब-करीब तीन घंटे कां थां, मे बस मे अपना हैडफ़ोन लगा केँ खिड़की केँ पासबैठ जाता हूं, औऱ बस निकल पड़ती हें मेरे ननिहाल केँ तरफ जौ लगभग१०० मिल कां मार्ग थां, मुझे नींद आँ जाता हैं, औऱ मेरा नींद खुलता हैं, जबबस कां तेज झटका लगता हैं, मे अपने ननिहाल वाले छोटे सें सहर पहुंच गय़ा थां, औऱ मेरासफर लगभग२० मिनट कां बचाहुआ थां, औऱ मे खिड़की सें बहार झांकने लगा, औऱ मेरीनजर पड़ती हैं, मेरी अम्मी पे जौ एक् मिठाई केँ दुकान पे खड़ी थि, औऱ मे झट सें बस रुकवा केँ उतर जाता हूं, औऱ अपने अम्मी केँ पास जाने लगता हूं, मे आवाज़ देने हि वाला थां कि, मेरी अम्मी केँ पास एक् अनजान व्यक्ति आँ जाता हैं, औऱ अम्मी उसकेसंग एक् गाड़ी मे बैठ जाती हैं, मैंने उस व्यक्ति कों पहलेकभी नहि देखा थां, औऱ मे वो सें एक् ऑटोपकड़ उस गाड़ी कां पीछे करने लगता हूं, वोँ गाड़ी एक् पतलीसड़क पे घूम जाता हैं, जिसपे ऑटो वाला जाने सें मनकर देता हैं, मगर मे झट सें उतर जाता हूं, औऱ उस रस्ते सें आगे पैदल हि बढ़ने लगता हूं, मुझे अबदार सें ऐसा लगाने लगा थां कि वोँ कोई औऱ हैं, मेरी अम्मी नहि, मगर मुझे अंदर सें यह भि डर थां कि, वोँ असली मे मेरी अम्मी न् हौ, कुछदूर आगे बढ़ने पे वो पे वाहनलगा मिलता हैं, औऱ मे चिप केँ वहा पे जाता हूं, औऱ अंदर मुझे एक् नक़ाबपॉश स्त्री औऱ एक् व्यक्ति दिखता हैं, औऱ वोँ नक़ाब वाली आंटीउस व्यक्ति कों चुमरही थि, मे खिड़की केँ सामने डायरेक्ट नाँ जाकेबगल मे सें सुनने लगता हूं, अंदर सें चपचप बहोत आवाज़ आँ रही थि, औऱ मेरा सरीरऐसे जकाँम्प रहा थां जैसे किसी सम्प नें काट लिया होँ, तभी अचानक सें आवाज़आता हैं,
'सोफ़िया लुंड मुँह मे लें नं ' औऱ यहसुन मेरा दिमाग़ चलता हैं, मेरी अम्मी कां नाम सोफ़िया तौ हैं हि नहि, औऱ मे हिम्मत कर केँ सरउठा केँ अंदर देखता हूं, वोँ व्यक्ति अपनेसर कों पीछेकर आहेंभर रहा थां, औऱ सोफ़िया नमक खातून उसका लुंडचूस रही थि, मगर वोँ मेरी अम्मी नहि थि, मुझे ग़लतफ़हमी हौ गई, थि, मेरामगर यहदेख लण्डखड़ा हौ गय़ा थां, औऱ मे वही गाड़ी केँ पासबैठ मुठ मरनेलगा, कुछ लम्हा केँ लिए मेरे अंदर सें डर भि निकल गय़ा थां, औऱ अपनामाल वही गिरा केँ मे वापससड़क पे गाड़ी ढूंढने औऱ अपनी अम्मी कों वापस लाने केँ मुहीम पे वापस निकल गय़ा।
क्या मेरी मम्मी एक रंडी है? - एक कहानी - desi chudai mom son – New Episode
०२.
मेराहाल बहोत ख़राब हौ गय़ा थां उस गाड़ी वाले घटना कों देख केँ, मैंने पहले सेक्स चुदाई कि बातें सुनी बहोत थि, मगरआज तक मात्र ब्लू फिल्म देखा थां, औऱ मुझेयह पहलीबार देखने कां मौका मिला थां, मगरमुठ मर लेने केँ बाद मेरा दिमाग़ हल्का होँ गय़ा थां, औऱ मुझे अपने जरुरी काम करना थां, औऱ मे अपनी अम्मी केँ तरफ कां बसपकड़ केँ निकल गय़ा, औऱ मेरेमन मे वोँ बुर्के वाली स्त्री आनेलगी,
.क्याँ ऐसे पूरा बुरका वाली स्त्री ऐसे हरकतकर सकती हैं, वोँ तौ उसका।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।। चूस रही थि, मुझे यकीं नहि हुआ जौ मैंने देखा, औऱ मे अपनासर हिलने लगा, औऱ अचानक हि मेरे आँखोने केँ सामने मेरी अम्मी आयी जौ उसी गाड़ी मे लण्डचूस रही थि, औऱ मेराखून ठंडा होँ गय़ा।
कुछदेर मे मेराबस मेरे ननिहाल केँ चौक पे पहुँचा दिया, औऱ मे तेज कदमो केँ संग अपने नानीमा केँ घऱ केँ तरफ जानेलगा, यह एक् मामूली सां छोटेसहर कां कॉलोनी थां, औऱ मे अपनी अम्मी कों घऱ वापस लाने कों औऱ तेज़ हौ गय़ा, औऱ मे अपने नानीमा केँ घऱ पहुँच गय़ा, औऱ वो भि वैसे हि सन्नाटा थां जैसे मुझे अपनेघऱ पे उसे पिछली रात मिला थां, औऱ मे थोड़ा घबरा गय़ा, मुझे मालूम थां कि कल मेरे अम्मी केँ परिवार औऱ अब्बू केँ वालिद वालिदा सें बहोत झगड़ा भि हुआ थां, मे डरतेहुए अपने अम्मी केँ कमरे मे गय़ा औऱ वहा पे मेरी अम्मी बैठी हुइ थि, औऱ उन्हें देखकर मैंने सुकून कि साँसली, मेरे अम्मी बैड पे किसी मुर्दे कि तरह लेती हुइ थि, उनका चेहरा दूसरी तरफ थां औऱ मुझेदिख नहि रहा थां,
'अम्मी अम्मी' मेरी अम्मी वही केँ वही किसी मुर्दे कि तरह पारी हुईँ थि, औऱ अचानक मुझेडर लगा कि कहीं खुदखुशी तोँ नहि कर लिया, यह सोच मेरे सरीर कों झकझोर दिए औऱ मे अम्मी केँ पासजा उन्हें जोरजोर सें हिलने लगा,
'अम्मी अम्मी उठो अम्मी '
'क्याँ हुआ ' अम्मी चीखते हुए मुझे बोलती हैं, मे उनकी आवाज़सुन खुस होँ गय़ा औऱ उन्हें गलेलगा लिया, औऱ अम्मी भि मुझेगले लगा लिया, औऱ मे इसी सें खुस होँ गय़ा, जब मे अम्मी कों छोरा तौ मेरानज़र उनके चेहरे पे गई,, ऐसालग रहा थां उनके चेहरे कां नूर किसी जिन्न नें निकल लिया होँ, औऱ उनके चेहरे मे अंशु केँ बहोत गहरे निशान थें,
'मेरा शेरा बेटा ' औऱ मेरी अम्मी मेरासर पे हाँथ फेरने लगी,
'अम्मी मे आपको लें जानेआया हूं, अभि अपना सामान पैक कीजिये औऱ अभि निकलते हें अपनेघऱ केँ लिए '
'क्यूं रेयह तेराघऱ नहि हैं क्याँ ' औऱ अम्मी मेरेसर पे अपना हाँथ फेरेना जारी रखती हैं,
'अम्मी चलो नाँ'
'नहि बेटा मे अबउसघऱ मे कभीकदम नहि रखूंगी' मे यहसुन चौंक गय़ा,
'अम्मी यह क्याँ बोलरही होँ, वोँ अपनाघऱ हैं, अब्बू हें वो पे ' अब्बू कां नाम सुनते हि मैंने अपने अम्मी केँ आँखों मे एक् गुस्से सें भराचमक आँ जाता हैं,
'नहि बेटा अब मेराउस स्थान सें कोई रिस्ता नहि हैं, औऱ वैसे भि तेरे अब्बू तोँ तेरेलिए नहि अम्मी ला हि रहे हें '
'अम्मी मैंने अब्बू सें बातकर ली हें, कोई दूसरा निकाह नहि होने वाला, आप् चलिए नं सभीसही होँ गय़ा हैं ' मेरी आवाज़ टूटने केँ कगार पे थि,
'तुँ अभि बच्चा हैं रे, तेरे अब्बू कों बोलने सें क्याँ होगा उन्होंने कांड हि ऐसा किया हैं, तुँ कुछ खाएगा बेटा ' मेरी अम्मी उठ केँ किचन केँ तरफ जाने लगती
'अम्मी आप् एक् बार अब्बू सें बात तौ करो, अब्बू नें वालिद साहब कों मनाकर दिया हैं निकाह सें ' मगर अम्मी मेरेबात कों अनसूना कर किचन मे घुस जाती हैं, औऱ मे सोचने लगता हूं कि मेरे अब्बू नें ऐसा क्याँ कर दिया हैं कि अम्मी बात भि नहि करना चाहती हैं, औऱ तोँ औऱ वोँ इतना पक्का केसेकह सकती हैं कि दूसरा निकाह होगाजब अब्बू नें स्वयं उसे बोलै हैं कि वोँ दूसरा निकाह नहि करेंगे, मुझेकुछ समझ मे नहि आँ रहा थां, उधर मेरी अम्मी मेरेलिए खानां लेके आँ गई,, औऱ मुझ खानां देकेवहा सें बाहर् निकल जाती हैं, औऱ मे अपने अम्मी केँ पीछे खानां चोर केँ भागता हूं,
'अम्मी प्लीज अम्मी चलो नं घऱ प्लीज आप् वो चलोगे तोँ बातचीत सें सभीसही होँ जायेगा, प्लीज अम्मी ' मेरे आँखों मे आँशुआने लगे थें, औऱ मेरी अम्मी नें मुझे देखा औऱ औऱ मेरेसर कों अपने सीने मे लगा लिया,
'बेटा मे नहि चल सकती, तुँ समझ नहि रहा हैं'
'तौ आप् समझाओ नं अम्मी, आप् इतना पक्के सें केसेकह सकती हें कि अब्बू दूसरा निकाह करेंगे जब उन्होंने मनकर दिया हैं ', ैमे अम्मी कों यहचीख केँ बोलै औऱ मेरी अम्मी फिन रोनेलगी औऱ मुझे बहोत बुरालगा कि मे ेबेवजह होना आवाज़ उठाया, तभी पीछे सें एक् तेज आवाज़आती हैं,
'पेट सें हें वोँ, ' पीछे मेरा मामाजी जानखड़ा थां, औऱ मुझे उसकीबात समझ मे नहि आयी,
'क्याँ मतलब '
'भइया आप् संत हौ जाओ, प्लीज खुदा केँ लिए ' मेरी अम्मी गिड़गड़े लगाती हैं, औऱ मे भि वही अम्मी केँ संगबैठ जाता हूं,
'क्यूं सांत हौ जाऊ, यह अब१८ कां हैं, बच्चा नहि हैं, तेरे बाप नें उस लड़की कों पेट सें कर दिया हैं, प्रेग्नेंट हैं वोँ, ' मे यहसुन चौंक गय़ा, मुझेयह मालूम हि नहि थां, औऱ मेरी अम्मी रोतेहुए अपनेबैड पे रोने लगाती हैं, औऱ मे वाही स्तब्ध खड़ा थां, औऱ मे क्याँ बोलता मे भि अपनी अम्मी केँ संग अंशु बहाने लगा, औऱ मेरा मामाजी गुस्से सें बाहर् चला गय़ा, मेरी अम्मी वही पे रोटीरही औऱ मे बगल मे लेतारहा, कुछदेर मे मेरी अम्मी नींद मे चली जातीै, औऱ मे भि सफर सें थक गय़ा थां औऱ मुझे नींद आँ जाती हें,
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