इंतकाम की ज्वाला - desi daru – New Episode
कुसुम नें बाहर् कां द्वार (दरवाज़ा) खोल दिया कुतिया मुन्नी इसबीच जाकरचाल केँ मालिक मुकुंद सेठ कों बुलालाई, सबने छुपकर मेरी चुदाई कां मजा लिया औऱ चुदाई केँ बादसेठ नें मुझे पकड़ लिया औऱ घऱ खाली करने कों बोल दिया। मे सेठ केँ पैरों मे लोटीतब इतनातय हुआ असलीबात किसी कों कोई नहि बताएगा पर्र मुझेघऱ खाली करना पड़ेगा।
मुन्नी कों चुप रहने केँ लिए मुझेदो हजार रुपए देने पड़े। सेठ इतने मे मान जाता पर्र कुसुम नें सेठ सें मेरे सामने कहा- इसकी जवानी कां थोडा मजालूट लो, ऐसा मौकाबार बार नहि आता हैं।
सत्तर साल केँ सेठ मे चोदने कि ताकत तौ थि नहि मगर कुतिया कुसुम नें सेठ कों उकसा दिया तोँ उसका लंड मुझे चूसना पड़ा। हरामी कां पिचकू लंड बड़ी मुश्किल सें आधा घंटे मे खड़ाहुआ औऱ दद सेकंड मे हि मुँह मे पूरा वीर्य उसने छोड़ दिया।
कुसुम कुतिया नें इसबीच मेरी गांड मे मोमबत्ती डाल दि औऱ मुकुंद सेठ केँ हाथों सें मेरी गांड मोमबत्ती सें चुदवाती रही। दोनों हरामिनें तालीबजा बजाकर आधे घंटे तक मेरी लुटती जवानी कां मजा लेतीरही। इतना होने केँ बाद भि हमेंघऱ बदलना पड़ा वोँ तोँ पास मे हि राखी कि चाल मे येघऱ खालीहुआ थां, मुझेमिल गय़ा।
गीता नें इसबीच उठकर अपनी चड्डी उतार दि औऱ मेरी लुंगी भि उतरवा दि औऱ मेरा लंड तेल सें नहला दिया, अपनी टांगें फ़ैला कर बुर मेरेगरम औऱ मोटेआठ इंची लण्ड पर्र रख दि औऱ जाँघों पर्र लंड अंदर तक घुसवाते हुए मेरीतरफ मुँह करकेबैठ गई, मुस्कराते हुए बोलि चूचियों कि मालिश तौ तुमने कर दि अब मेरी बुर कि मालिश अपने लण्ड सें औऱ करदो।
गीता नें किस्सा जारीरखा, वोँ बोलि- सेठ नें कुसुम कों भि घऱ देने सें मनाकर दिया। कुतिया केँ चक्कर मे मेरी इज्ज़त कि अच्छी चुदाई होँ गई। मुझेकभी मौका मिला तोँ साली कों सबके सामने नंगा करूंगी औऱ दोनों कि जवानी लुटवाऊँगी।
मैंने गीता कि बुर कि चुदाई करतेहुए चूचियाँ दबाई औऱ बोला- भाभीजान, तुम् चिंता न् करो, कुतिया तुम्हारे सामने अपने हाथों सें चड्डी उतारेगी औऱ नंगी होगी। तुम्हारी बेइज्ज़ती कां पूरा बदला मे लूँगा।
गीता बोलि- मजाक करते होँ !
मैंने कहा- आप् संग दोगी तोँ एक् महीने मे मुन्नी कि मुनिया मे तुम्हारे सामने जिसका कहोगी उसका लंड डलवा दूँगा। आप् बस उससे थोड़ी दोस्ती बढ़ाओ।
गीता बोलि- ऐसा होगा तोँ बड़ामजा आँ जाएगा ! तुम् कहते होँ तौ मे उससे दोस्ती बढ़ाती हूं।
गीता कि बुर मे लंड गएआधा घंटा होँ गय़ा थां अब उसके वीर्य त्याग कां वक़्त आँ गय़ा औऱ मैंने पूरा वीर्य गीता कि बुर मे उतार दिया। इसकेबाद मे अपने दफ़्तर चला गय़ा।
कथा जारी रहेगी।
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अगलेदिन दोपहर कां वक़्त थां, मे पास केँ एक् काम्प्लेक्स मे खड़ा थां, तभी राखीउधर आई तोँ मुझे देखकर मुस्कराई, राखी सें मैंने पूछा-किस काम सें आई हौ?
राखी बोलि- मेरे पति कों अगले महीने ट्रक पऱ जानां हैं, मालिक एक् बार ट्रक पऱ जाने केँ लिए ट्रक केँ खर्चे केँ पच्चीस हजार देता हैं कल मालिक कां नौकर अगलेटूर केँ लिए मुझे औऱ मुन्नी कों रुपएदे गय़ा हैं। अभि 15 दिन हें जाने मे तौ पैसे बैंक मे जमाकर देती हूं, घऱ मे चोरी कां डर रहता हैं। मुन्नी तोँ पैसे अपनेघऱ मे हि रखती हैं।
इसकेबाद राखी धीरे-धीरे सें बोलि- तुमसे चुदने कां मनकररहा हैं।
मैंने कहा- नेकी औऱ पूछपूछ ! साम कों भाभी केँ घऱ पर्र आँ जानां, मुझे भि ख़ुशी होगी तुम्हें चोदकर ! उसरात तौ मजा आँ गय़ा थां।
राखी बोलीं- मेरा पति शक्की हैं, उसदिन तौ मेहमान आँ गए थें इसलिये मौकामिल गय़ा थां। कहीं बाहर् चलकर मज़े करते हें।
हम् दोनों नें दोदिन बाद एक् स्थान मिलने कां वादाकर लिया। दो दिनबाद राखी कों लेकर मे एक् अड्डे पऱ चला गय़ा जहाँदो सौ रुपए मे दो घंटे कों रूम मिलता थां। राखी औऱ मैंने चुदाई कां मजा लिया।
इसकेबाद राखी मेरीगोद मे बैठकर बतियाने लगी तौ मैंने कुसुम औऱ मुन्नी कि बात छेड़ दि।
बातों बातों मे राखी नें बताया कि दोदिन पहले मेरे जाने केँ बाद कुसुम पोस्ट दफ़्तर केँ पास मिली थि काफ़ी रुपएमनी आर्डर कररही थि। रेलवे कलोनी मे एक् केँ घऱकाम करती हैं उससे पच्चीस हजार रुपए उधारलिए थें। कुसुम केँ भइया औऱ बाप जेल मे हें, गाँव मे एक् लफड़ा होँ गय़ा थां, उसके भइया नें एक् व्यक्ति कों मार दिया थां समझौते केँ लिए पचास हजार कि बात हुई हैं। पच्चीस हजार कि औऱ जरूरत बतारही थि। मुझसे ट्रक वाले रुपए मांगने लगी। मैंने कान पकड़े औऱ वहा सें भागली।
उसने मुझे मुन्नी औऱ कुसुम केँ बारे मे कई बातें बताई, उसने बताया कि एक् बार मुन्नी कां हाथटूट गय़ा थां तोँ 15 दिन कुसुम नें मुन्नी केँ यहा खानां बनाया थां। मैंने राखी कि निप्पल उमेठते हुएकहा- तुम् कुसुम सें कहो कि मुन्नी केँ पास रुपये हें, लेँ लेँ।
राखी हँसते हुए बोलीं- मुन्नी कां पति उसकागला दबा देगाअगर उसने ट्रक केँ पैसे कुसुम कों देदिए। सौ-सौ रुपए केँ लिएपीट देता हैं मुन्नी कों।
मैंने राखी केँ होंट चूसते हुएकहा- तुम् उसे एक् बारबता दो कि मुन्नी केँ पास पैसेरखे हें, बदले मे यह 500 रुपएरखो !
औऱ मैंने राखी कों 500 रुपएदे दिए।
राखी बोलि- ठीक हैं, कल हि बोल देती हूं।
उसकेबाद एक् बार हमने चुदाई कां खेल औऱ खेला औऱ अपनेघऱ कों वापस होँ लिए।
मेरेकहे अनुसार भाभी नें मुन्नी सें दोस्ती करली। मैंने भाभी सें कहा- मेरी पहचान भि मुन्नी सें करादो, तभी कुतिया सें तुम्हारी बेइज्ज़ती कां बदला लियाजा सकेगा।
गीता नें एक् दिन मुन्नी कों गरमचाय पर्र बुला लिया। जब मे दफ़्तर सें आया मुन्नी औऱ गीतागरम चायपी रहीथीं। गीता नें मेरा परिचय मुन्नी सें कराया औऱ बोलीं- ये इनका चचेरा भइया हैं।
मे मुन्नी कां जिस्म ताड़देख कर देखने लगा, पूरानई नवेली स्त्री जैसा थां। जवानी कां रसटपक रहा थां ब्लाउज केँ अंदर सें सफ़ेद ब्रादिख रही थि।
मुन्नी कों चोदने केँ लिए मेरा लण्ड परेशान होनेलगा थां।
मुन्नी सें मेरी भि बातचीत होनेलगी मैंने मुन्नी कों बताया- मुंबई मे पच्चीस हजार कि जॉबकर रहा हूं।
इसबीच मैंने अपनीजेब सें एक् सौ कि गड्डी निकाली औऱ आँख दबाते हुए बोला- भाभी, यह दस हजार रुपए हें, रख देनाजरा।
5-6 दिनबाद साम कों भाभी नें बताया- आज मुन्नी परेशान सि घूमरही थि। राखीबता रही थि कि किसी नें इसके पच्चीस हजार रुपए चुरालिए हें।
गीता भाभीखुश थीं, बोलीं- बड़ामजा आया ! रंडी सबसे उधार मांगरही हैं, कोईसौ रुपल्ली देने कों भि सजधजकर नहि हैं। इसचाल मे भि आई थि औऱ मेरे सामने सें भि निकली थि, रोतेहुए बोलि कि उसने एक् लिफाफे मे पैसेरखे थें, चोरी हौ गएदोदिन बादयह आएँगे तोँ पीटपीट कर बुरी हालतकर देंगे।
मैंने मौका देखकर गीता केँ चूतड़ दबाए औऱ बोला- भाभी, अब मेराखेल देखो। राखी सें बोलो वोँ मुन्नी कों बोले कि राकेश भैया सें पैसे उधार मांगे तोँ मिल सकते हें।
गीता बोलीं- तुम् क्यूं दोगे?
मैंने बूब्ज़ दबाते हुए एक् पप्पी गीता कों दि औऱ बोला- इसकी बुर जोँ आपके सामने मारनी हैं ! आपको बदनाम किया थां नं इसने ! औऱ आपकेदो हजार भि तोँ वापस दिलाने हें।
भाभी नें राखी सें मुन्नी कों कहला दिया कि अगर राकेश भैया सें पैसे मांगे तौ मिल सकते हें।
अगलेदिन रविवार थां, भाभी अकेले हाटचली गई थि, योजना केँ मुताबिक राखी नें मुन्नी कों बता दिया कि मे घऱ पऱ अकेला हूं।
मौका देखकर मुन्नी अंदर आँ गई, आज अच्छी तरहसजी थि, नाभी केँ बहुत नीचे उसने पेटीकोट बांधरखी थि पूरा चिकना पेट औऱ गर्भ प्रदेश दिखरहा थां, मुझे देखकर बोलीं- भाभी नहि हें?
मैंने कहा- आँ रही होंगी, आप् बैठो !
वोँ सामने पड़ी बिस्तर पऱ बैठ गई।
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मे पुस्तक पढ़ने कां नाटक करनेलगा। इसबीच उसने बड़ी मीठी आवाज़ मे कहा- भैया, आप् मेरी सहायता करदो नं।
मैंने अनजान बनतेहुए उसकीतरफ देखा औऱ कहा- कैसी सहायता?
उसनेउठ कर द्वार (दरवाज़ा) बंद किया औऱ जानबूझ कर साड़ी कां पल्लू नीचे गिरा दिया, पूरी चूचियाँ नंगीदिख रहीथीं, ब्रा उसने पहनी नहि थि, पारदर्शी ब्लाउज कां मात्र एक् बटनलगा थां। उसकी काली निप्पल औऱ उसकेतने हुए स्तनों नें तौ मेरे लोड़े मे आगलगा दि।
मुन्नी बोलि- राखीकह रही थि कि आप् मुझे रुपएदे सकते हें, प्लीज़ मुझे पच्चीस हजार उधारदे दीजिए न्, आप् हि मुझेअब बचा सकते हें।
अपनीगोल नाभि मे उंगली घुमाते हुए बोलि- आप् जौ कहेंगे वोँ मे करने कों राज़ी हूं।
मुर्गी फंसने वाली थि, मैंने आँख मारते हुए उसके स्तनों कि तरफ इशारा करतेहुए कहा- आपके संतरे बहोत हसीन हें।
उसने अपने ब्लाउज कां एकमात्र बटन भि खोल दिया औऱ बोलि- आप् चूसकर देखिये नं बहोत मजा आएगा।
मस्त मम्मों मेरे सामने खुलेहुए थें, मे अपने कों रोक नहि पाया औऱ आगे बढ़कर उन्हें अपने हाथों मे भर लिया।
उसकी नंगी चूचियाँ कसकर दबाते हुए दोनों चूचियाँ बारी बारी सें मुँह मे भरकरकई बार चूसीं।
मुन्नी 25-26 साल कि जवान गर्म महिला थि, उसने मेरा लण्ड गीलाकर दिया थां।
चूचियाँ दबाने केँ बाद मैंने उसकी नाभि औऱ पेट कों होंटों सें चाटा औऱ बोला- आप् जैसी सुन्दर रसभरी स्त्री कों मना तौ नहि कर सकता पऱ अभि मेरेपास मात्र पांच हजारजमा हें।
मुन्नी रोने कां नाटक करती हुईँ बोलि- आप् मुझे पच्चीस कां इंतजाम करादो बदले मे आप् मेरा पूरारस पी लेना, पूरामजा आपको दूँगी, आप् कहोगे तोँ मुँह मे भि लें लूँगी।
मेरामन ख़ुशी सें उछलउठा, मैंने कहा-सच? जल्द सें मुँह मे लो, अबरहा नहि जारहा, आज तक किसी नें मेरा लंड नहि चूसा हैं।
आगे बढ़कर मुन्नी नें चेन खोलकर मेरा लंड पैंट सें बाहर् निकला औऱ बिनादेर किये अपने मुँह मे भर लिया औऱ बड़े प्यार सें चूसने लगी।
इस बीच मैंने उसकी साड़ी पीछे सें उठाकर नंगे चूतड़ दबाने शुरुआत करदिए, उसकी गांड मे एक् उंगली भि घुसा दि, बड़ी टाईट गाण्ड थि।
मुन्नी बड़े प्रेम सें दस मिनट तक लण्ड चूसती रही, मुझे उसने पूरामजा दिया। उसकेबाद वोँ पूरारस मुँह मे गटक गई।
मैंने उसे उठाकर अपने सें चिपकाया औऱ बोला- अभि तुम् यह पांचरखो औऱ कल मुझे लोकल स्टेशन पर्र 12 बजे मिलो, वहा ठीक सें बात करते हें।
मुन्नी पाँच हजार रुपए लेकरवहा सें चली गई।
अगलेदिन स्टेशन पर्र जब मे 12 बजे पहुंचा तोँ मुन्नी सजीधजी साड़ी मे खड़ी थि, मुझेदेख कर मुस्कराई, हम् दोनों एक् कोठी मे चलेगए।
कोठी मे मेरे जानकार गार्ड नें दोसौ रुपए लेकर हमें एक् प्राइवेट स्थान पर्र खुले मे बैठा दिया औऱ एक् चटाई बैठने केँ लिएदे दि औऱ मुझसे बोला- जोँ मन मे आए, वोँ करलो, एक् घंटे तक आसपास कोई नहि आएगा।
उसके जाने केँ बाद मुन्नी मेरी गोदी मे उछलकर बैठ गई, उसका ब्लाउज मैंने खोल दिया औऱ उसके उभारों पऱ हाथ फेरते हुए बोला- पहले थोडा प्रेम होँ जाए।
मुन्नी नें मेरे होंटों मे होंटलगा दिए औऱ हम् दोनों एक् दूसरे केँ मुँह मे जीभ घुसाकर एक् दूसरे कों चूसने लगे।
मुन्नी केँ होंट चूसते हुए मैंने मुन्नी कि चूचियाँ दबादबा केँ कड़ीकर दीं, मुन्नी नें भि मेरी पेंट खोलकर लंड बाहर् निकाल लिया औऱ उसे सहलाने लगी, अहह भरती हुई बोलीं- आपका तोँ बहोत मोटा हैं।
मेराहाथ उसकी साड़ी केँ अंदरघुस गय़ा थां, उसकी चड्डी मे हाथ डालते हुए मे उसकी चिकनी बुर सहलाने लगा, संग हि संग उसकी बुर कां दाना रगड़ने लगा, उन्माद मे बोला-वाउ, क्याँ चिकनी औऱ फूली हुइ बुर हैं रानी।
मुन्नी सिसकारियाँ लेती हुईँ बोलि- निगोड़ी कों चोद दीजिए नं ! आज सुभह उठकर आपकेलिए हि चिकनी करी हैं।
मैंने कहा- मुन्नी जान, पहलीबार जब भि मे किसी महिला कों चोदता हूं तौ वोँ अपनी बुर स्वयं खोलती हैं, अब जल्द सें अपनी चड्डी उतारो औऱ अपनी बुर कों चौड़ा करो, फिन तुम्हें जन्नत कां मजा दूँगा।
मुन्नी चटाई पऱ लेट गई औऱ अपनी चड्डी उतारकर उसने साड़ी औऱ पेटीकोट ऊपर तक उठा दिया, सामने उसकीपाव भाजी कि तरह फूली हुइ गुदाज़ बुर दिखने लगी, अब अपने पर्र काबू रखना मुश्किल थां, मैंने लण्ड उसकी बुर केँ मुँह पऱ रख दिया।
मुन्नी पूरी गर्म थि, बिनादेर किये उसने नीचे सरकते हुए लण्ड बुर मे डलवा लिया औऱ सिसकारियाँ भरतेहुए बोलि- अहह, चोदो नं ! बड़ा अच्छा लगरहा हैं, क्याँ मोटा लण्ड हैं।
उसकी बुर मे लण्डपेल कर मैंने चुदाई शुरुआत कर दि। वोँ गरम आहेंभर रही थि औऱ चुदने कां पूरामजा लें रही थि। खुले मे मुन्नी कि चुदाई कां अलग हि मजा आँ रहा थां।
थोड़ी देरबाद उसने अपनी टांगें मेरीपीठ पऱ मोड़लीं औऱ ढेर सारा पानी छोड़ दिया, उसकी चूत झड़ गई थि।
मैंने उसेउठा दिया, मेरा लण्ड अभि गरम थां, अबकी मैंने उसेआधा लेटाकर घोड़ी बना दिया औऱ उसकी बुर मे पीछे सें अपना लंड लगा दिया, दोनों चूचियाँ हाथों सें दबाते हुए खुले मे उसकी चोदने लगा, वोँ मस्ती भरीउह… अहह…ऊई… सें अपनी ख़ुशी जाहिर करनेलगी।
कुछदेर चोदने केँ बाद मैंने वीर्य उसकी बुर मे भर दिया।
कपड़े सही करने केँ बाद मुन्नी मुझसे चिपक गई औऱ बोलि- आप् मुझे उधार पैसेदे दो, मे हर महीने हज़ार हजार करके चुका दूंगी। मैंने उसकाहाथ दबाते हुएकहा- मुझे क्याँ फायदा होगा?
मुन्नी बोलीं- आप् जौ कहोगे वोँ करने कों मे तयार हूं। अगर मुझे पैसे नहि मिले तौ मे बर्बाद होँ जाऊँगी।
उसने केहना जारीरखा, वोँ बोलि- किचन मे मैंने संभाल करदाल केँ डिब्बे मे पैसेरखे थें, पता नहि कौन लें गय़ा। जबदोदिन पहले मैंने देखा तोँ खाली लिफाफा रखा थां।
‘तुम् किसी उधार देने वाले साहूकार सें उधार क्यूं नहि लेँ लेतीं?’
मुन्नी रोतेहुए बोलीं- साहूकार तोँ बुरीतरह लूट लेते हें, एक् बार इन्होंने दो हजारलिए थें, पूरे पांच हजार लौटने पड़ेकुछ हि महीने बाद। सबकोये भि पता हैं कि हम् पऱ पैसों कि तंगी हैं। मेरी एक् सहेली अंजना तोँ दस हजार केँ उधार केँ चक्कर मे इतनी बुरी फंसी कि उसके पति नें हि उससे परेशान होकरउसे कोठे पऱ बेच दिया। इन्हें पताचल गय़ा तोँ यह भि मुझे कोठे पऱ बेच देंगे, पहले भि एक् बार मे इन्हें पाँच हजार कां चूनालगा चुकी हूं। बाप रे ! रंडी बनने सें तोँ अच्छा हैं आपसे हि चुदलूँ। मे वादा करती हूं आपको अभि जैसामजा दिया उससे भि ज़्यादा जब भि आप् कहोगे, तब दूंगी औऱ पैसे भि लौटा दूंगी।
मुन्नी कों झूठी सहानभूति दिखाते हुए मैंने कहा-दस हजार रुपए भाभी केँ पासरखे हें, बाकी रुपए मुझे उधार लेने पड़ेंगे। मे पैसे कां तोँ इंतजाम कर दूंगा मगर तुम्हारा विश्वास केसे करूँ?
मैंने कहा- भाभी नें मुझे तुम्हारे बारे मे सभीबता दिया हैं किसतरह सें तुमने उन्हें बेइज्ज़त करकेचाल सें निकलवा दिया थां।
मुन्नी रोतेहुए बोलीं- हाँ, मुझसे गलती हौ गई थि। गीता केँ चिंटू सें सम्बन्ध बहोत पहले सें हें। गीता उससे चुदती रहती थि। मे कुसुम कों अपनेपास रूम दिलवाना चाहती थि। उसदिन हमने औऱ कुसुम नें प्लान करके रंगे हाथों चुदते हुए पकड़ लिया। उधर सें मुकुंद सेठ आँ गए औऱ उन्होंने घऱ खाली करने कों कह दियासंग हि संगचुप रहने केँ बदले अपना लंड भि गीता कों हम् दोनों केँ सामने चुसवाया। दो हजार रुपए मैंने भि चुप रहने केँ लें लिए थें, मे उन्हें वोँ दो हजार रुपए वापसकर दूंगी।
मैंने कहा- भाभी मुझे इतने प्रेम सें रखती हें, उनकी सहमति केँ बिना मे औऱ पैसे तुम्हें नहि दूंगा औऱ अपनी प्यारी भाभी कि बेइज्ज़ती कां बदला तौ लेना हि पड़ेगा। भाभी कि कुछ शर्तें हें, अगर तुम् उनकीबात मान लोगी तोँ मे तुम्हें पैसे केँ संगसंग एक् खूबसूरत इनाम भि दूँगा, तुम् खुश हौ जाओगी। साम कों तुम् मोहन भैया केँ आने सें पहले भाभी सें मिलो।
मुन्नी बुझेहुए चेहरे केँ संग बोलीं- ठीक हैं, साम कों आती हूं।
स्टोरी जारी रहेगी।
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