इंतकाम की ज्वाला - desi daru – New Episode
गीता अंदर बाथरूम मे नहारही थि।
कुछदेर बाद बाथरूम सें गीता निकली उसने मात्र चड्डी पहनरखी थि औऱ नंगे स्तनों पऱ तौलिया ढकरखा थां।
बाहर् निकलकर गीता नें मुझे देखा औऱ होंट दबाते हुए बोलि- कल तोँ तुमने राखी कि मुनिया बड़ी मस्तबजा दि। सुभह जाते जातेकह रही थि कि भाभीकल जितना चुदने मे मजाआया, उतनाकभी नहि आया औऱ कहरही थि जल्द हि दुबारा चुदूँगी।
गीता नें मेरीतरफ पीठ कि औऱ तौलिया उतारकर अपने मम्मों हिलाते हुए अपनी जांघें पोंछने लगी पीछे सें उसकागरम जिस्म देखकर मुझसे रहा नहि गय़ा, मैंने पीछे सें गीता कि दोनों चूचियाँ हाथों मे पकड़कर उन्हें मसलने लगा औऱ बोला- राखी कि चुदाई मे तोँ मजा आँ गय़ा मगर तुम् इतना क्यूं तड़पा रही होँ?
गीता मुड़कर मुझसे चिपकते हुए बोलि- इतने उतावले क्यूं हौ रहे हौ? चोद लेना, बुर तोँ मेरी भि तुम्हारा लण्ड खाने कों मचलरही हैं। एक् बार लफड़ा हौ गय़ा थां इसलिये सावधानी बरतती हूं। अभि तुम् एक् अच्छे देवर जी कि तरहये मम्मों सुडौल रखने वालातेल मेरे स्तनों पऱ मलदो।
मे येसुन कर उत्तेजित होँ गय़ा।
गीता मेरीगोद मे आकर जाँघों पऱ बैठ गई औऱ मुझसे अपनी नंगी चूचियाँ पऱ तेल मालिश कराने लगी।
मम्मों कों चारों तरफ सें धीरे-धीरे धीरे-धीरे तेल सें मलतेहुए बीच मे चूचियाँ उमेठने मे मुझे गज़ब कां मजा आँ रहा थां।
मैंने मालिश करतेहुए पूछा- तुम् बारबार कहती होँ मेरा लफड़ा होँ गय़ा थां, लफड़ा क्याँ हुआ थां, ये तौ बताओ !
भाभी बोलि- ठीक हैं, तुम् मेरे अपनेबन गए होँ, तुम्हें बता देती हूं किसी कों बताना नहि।
भाभी नें बताया कि पहले वोँ बगल वालीचाल मे मुन्नी केँ पास वालेघऱ मे रहती थि। मुन्नी कि एक् सहेली कुसुम हैं जोँ उसके गाँव सें हि हैं, कुसुम रेलवे कॉलोनी केँ पास रहती हैं। मुन्नी कुसुम कों चाल मे घऱ दिलवाना चाहरही थि। कोईघऱ खाली नहि थां तोँ उसने मेराघऱ खाली करवाने केँ लिएचाल चली। इनका एक् साथी चिंटू हैं, उसकाऑफ बुधवार कों रहता थां, हम् दोनों मे हंसी मजाक बहोत टाइम सें हौ रहा थां, हर बुधवार वोँ मुझसे मिलने आँ जाता थां औऱ मौका पाकर वोँ मेरी चूचियाँ औऱ चूतड़ भि मसल देता थां।
एक् दिन मुन्नी औऱ कुसुम नें मिलकर एक् साज़िश रची।
पहले मुन्नी आई उसने मुझेखीर मे मिलाकर कोई कामोत्तेजना बढ़ाने वालीदवा खिला दि। उसदिन यहघऱ मे नहि थें, मेरी चूत बुरीतरह सें चुदने केँ लिए खुजला रही थि, एक् घंटेबाद चिंटू आँ गय़ा, चिंटू नें मेरा ब्लाउज खोल दिया औऱ मेरी नंगी चूचियाँ मलनेलगा, उसने मुझे बुरीतरह सें गरमकर दिया थां।
कुसुम साज़िश केँ तहत किचन मे छिपी हुइ थि। इसकेबाद मे औऱ चिंटू नंगे होकर बाथरूम मे चलेगए। चिंटू मुझे बाथरूम मे चोदने लगा।
कुसुम नें बाहर् कां द्वार (दरवाज़ा) खोल दिया कुतिया मुन्नी इसबीच जाकरचाल केँ मालिक मुकुंद सेठ कों बुलालाई, सबने छुपकर मेरी चुदाई कां मजा लिया औऱ चुदाई केँ बादसेठ नें मुझे पकड़ लिया औऱ घऱ खाली करने कों बोल दिया।
मे सेठ केँ पैरों मे लोटीतब इतनातय हुआ असलीबात किसी कों कोई नहि बताएगा पर्र मुझेघऱ खाली करना पड़ेगा।
मुन्नी कों चुप रहने केँ लिए मुझेदो हजार रुपए देने पड़े। सेठ इतने मे मान जाता पऱ कुसुम नें सेठ सें मेरे सामने कहा- इसकी जवानी कां थोडा मजालूट लो, ऐसा मौकाबार बार नहि आता हैं।
सत्तर साल केँ सेठ मे चोदने कि ताकत तोँ थि नहि मगर कुतिया कुसुम नें सेठ कों उकसा दिया तौ उसका लंड मुझे चूसना पड़ा। हरामी कां पिचकू लंड बड़ी मुश्किल सें आधा घंटे मे खड़ाहुआ औऱ दद सेकंड मे हि मुँह मे पूरा वीर्य उसने छोड़ दिया।
कुसुम कुतिया नें इसबीच मेरी गांड मे मोमबत्ती डाल दि औऱ मुकुंद सेठ केँ हाथों सें मेरी गांड मोमबत्ती सें चुदवाती रही। दोनों हरामिनें तालीबजा बजाकर आधे घंटे तक मेरी लुटती जवानी कां मजा लेतीरही। इतना होने केँ बाद भि हमेंघऱ बदलना पड़ा वोँ तोँ पास मे हि राखी कि चाल मे येघऱ खालीहुआ थां, मुझेमिल गय़ा।
गीता नें इसबीच उठकर अपनी चड्डी उतार दि औऱ मेरी लुंगी भि उतरवा दि औऱ मेरा लंड तेल सें नहला दिया, अपनी टांगें फ़ैला कर बुर मेरेगरम औऱ मोटेआठ इंची लण्ड पऱ रख दि औऱ जाँघों पऱ लंड अंदर तक घुसवाते हुए मेरीतरफ मुँह करकेबैठ गई, मुस्कराते हुए बोलि चूचियों कि मालिश तोँ तुमने कर दि अब मेरी बुर कि मालिश अपने लण्ड सें औऱ करदो।
इंतकाम की ज्वाला - desi daru – New Episode
गीता नें किस्सा जारीरखा, वोँ बोलीं- सेठ नें कुसुम कों भि घऱ देने सें मनाकर दिया। कुतिया केँ चक्कर मे मेरी इज्ज़त कि अच्छी चुदाई हौ गई। मुझेकभी मौका मिला तोँ साली कों सबके सामने नंगा करूंगी औऱ दोनों कि जवानी लुटवाऊँगी।
मैंने गीता कि बुर कि चुदाई करतेहुए चूचियाँ दबाई औऱ बोला- भाभीजान, तुम् चिंता न् करो, कुतिया तुम्हारे सामने अपने हाथों सें चड्डी उतारेगी औऱ नंगी होगी। तुम्हारी बेइज्ज़ती कां पूरा बदला मे लूँगा।
गीता बोलीं- मजाक करते हौ !
मैंने कहा- आप् संग दोगी तौ एक् महीने मे मुन्नी कि मुनिया मे तुम्हारे सामने जिसका कहोगी उसका लंड डलवा दूँगा। आप् बस उससे थोड़ी दोस्ती बढ़ाओ।
गीता बोलि- ऐसा होगा तोँ बड़ामजा आँ जाएगा ! तुम् कहते होँ तोँ मे उससे दोस्ती बढ़ाती हूं।
गीता कि बुर मे लंड गएआधा घंटा हौ गय़ा थां अब उसके वीर्य त्याग कां वक्त आँ गय़ा औऱ मैंने पूरा वीर्य गीता कि बुर मे उतार दिया। इसकेबाद मे अपने दफ़्तर चला गय़ा।
3872लेट गई औऱ अपना पेटीकोट उठाकर बोलीं- एक् बारचोद हि दो ! फिन दोस्ती पक्की होँ जाएगी।
मे बोला-नेक काम मे देरी क्यूं !
औऱ उनकी बुर पऱ लण्डलगा दिया। लण्ड पूरा अंदर तक एक् बार मे हि घुस गय़ा। गीता कि अहह कमरे मे गूंजउठी। हम् दोनों अब चुदाई कां खेलखेल रहे थें। लौड़ा बहोत देर सें अंगड़ाई लें रहा थां, उसने थोड़ी देर मे हि हारमान ली औऱ 18-20 धक्कों मे ढेर हौ गय़ा।
मैंने गीता कों अपनी बाँहों मे चिपकाते हुएकहा- दूसरे राउंड मे मजा ज़्यादा आएगा।
गीता नें मुझे हटाते हुए अपना मुँह मेरे लण्ड पऱ रखकर एक् लण्ड पप्पी दि औऱ बोलीं- अब तौ इसकी दोस्ती मेरी फ़ुद्दी सें हौ गई हैं। आज इतने सें हि कामचला लो, वक्त मिलने पर्र पूरामजा करेंगे। यहा एक् बार लफड़ा होँ चुका हैं इसलिये सावधान रहना पड़ता हैं।
मुझेमन मारकर उठना पड़ा। हम् दोनों सजधजकर होकरहाट मे घऱ कां सामान खरीदने चलेगए।
हाट सें हम् लोगजब वापसआए तोँ रास्ते मे दो खूबसूरत औऱ भरे जिस्म कि औरतें बातकर रहीथीं। उनमें सें एक् गीता सें बोलि- दिदी, मुझे आपसेबात करनी हैं, मे अभि आपके कमरे मे आती हूं।
दूसरी स्त्री कों देखकर गीता नें गंदा सां मुँह बनाया। गीता मुझसे बोलीं- ये राखी हैं जौ आने कों कहरही हैं, मेरी सहेली हैं। दूसरी मुन्नी हैं, इस कुतिया मुन्नी केँ कारण हि मेरा लफड़ा हुआ थां। दोनों केँ पति ट्रक पऱ काम करते हें दोनों कां मालिक एक् हि हैं। पन्द्रह पन्द्रह दिन कों बाहर् चले जाते हें।
मैंने गीता सें कहा- दोनों मस्तमाल हें।
गीताआँख मारते हुए बोलीं- चोदने कां मनकररहा हैं?
मे बोला-मिल जाए तौ मजा आँ जाए।
गीता होंट दबाते हुए बोलि- राखी कि दिलवा दूँगी।
मैंने पूछा- मुन्नी सें तुम्हारा क्याँ लफड़ा हैं?
तभी राखीऊपर आँ गई औऱ गीता सें बात करनेलगी। उसके जाने केँ बाद गीता नें मुझे बताया- राखी केँ यहा मेहमान आएहुए हें, वोँ आजरात हमारे यहा सोएगी।
मेराहाथ दबाते हुए गीता बोलीं- चुदने कों राजी हैं, हाजार रुपए लेगी, आज रात कों हि चोद लेना।
रात कों रेखा, गीता, मोहन भैया औऱ मे एक् लाइन मे सोए। रात कों फिन मोहन गीता कों चोदने लगा। मेरामन भि चोदने कां कररहा थां मे अपना लण्ड सहलाने लगा मैंने देखा राखी भि जगरही थि औऱ येसभी देखकर अपनी साड़ी उठाकर बुर मे उंगली कररही थि। मनकररहा थां दबोचलूँ साली कों।
चुदाई केँ बाद मोहन खराटे भरनेलगा। गीता नें करवटली औऱ राखी केँ कान मे फुसफुसाई औऱ बोलीं- जाकर राकेश केँ पासलेट लेँ, येबार बार बुर मे उंगली क्याँ कररही हैं, आहिस्ता चुद, इनकी चिंता मतकर, इनको कों तोँ अबदो डंडे भि मारोगे तब भि नहि उठेंगे।
राखी चुपचाप उठकर मेरेपास आकरलेट गई। मैंने मुड़कर अपनाहाथ उसकी नाभि पऱ रख दिया। थोडा सहलाने पर्र राखी नें हाथ उठाकर अपनी चूचियों मे घुसवा लिया। राखी कि चूचियाँ रसीले औऱ कसी हुईँ थीं मैंने उन्हें दबाना शुरुआत कर दिया। राखी नें ब्लाउज केँ बटनखोल दिए औऱ मुझसे चिपट गई, उसने लुंगी खोलकर मेरा खड़ा लंड अपनेहाथ मे पकड़ लिया, मोटा लिंग सहलाने सें उसकी साँसें गरम होँ रहीथीं।
मैंने उसकी चूचियों कि निप्पल उमेठ उमेठकर खड़ीकर दीं थि। मेरा लंड दबाते हुए राखी बोलीं- बड़ामजा आँ रहा हैं। इसे बुर मे लगाओ नं। जल्द सें चोददो औऱ मत तड़पाओ।
मैंने राखी कि चूचियों कों हॉर्न कि तरह बजाते हुएकहा- पहलीबार जब भि मे किसी स्त्री कों चोदता हूं तोँ वोँ अपनी बुर स्वयं नंगी करती हैं। जल्द सें अपनी बुर कों खोलकर टांगें चौड़ी करो, तुम्हें चुदाई कां वोँ मजा दूँगा कि हमेशा मुझसे चुदवाने कों पागल रहोगी। राखी नें अपना पेटीकोट उतार दिया औऱ मुझे अपनीतरफ खींचते हुए बोलि- अब तौ डालो न् ! बड़ीआग लगरही हैं।
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अब वोँ पूरी नंगी होँ चुकी थि। मैंने अपनाहाथ उसकी बुर पर्र रख दिया, क्याँ पाव रोटी जैसी फूली हुइ बुर थि। मे उसकी बुर कां दाना रगड़ने लगा वोँ अहहउह कि आहें भरनेलगी। उसने मेरी बनियान भि उतरवा दि औऱ मुझसे चिपक गई औऱ बुर लण्ड केँ मुँह पऱ लगाने लगी, पूरीगरम हौ रही थि। लण्ड उसकी बुर केँ मुँह पर्र छुलरहा थां। वोँ मेरे होंटों पर्र होंट लगतेहुए लंड अंदर लेने कि कोशिश कररही थि।
उसके चूतड़ों कों दबाते हुए मैंने लण्ड उसकी गीली बुर मे घुसा दिया, एक् तेजअहह कि आवाज़ गूंजउठी। हम् दोनों केँ शरीर एक् दूसरे सें रगड़ खानेलगे रूमअहह… उह… कि आवाज़ों सें गूंजने लगा। राखी कों मैंने अपने नीचे लेटा लिया औऱ उसकेऊपर चढ़कर उसे चोदना शुरुआत कर दिया। दोनों चूचियों कि मसलाई औऱ होंटों केँ स्वाद नें चुदाई कां मजा बढ़ा दिया थां। एक् नई महिला केँ स्वाद कां पूरामजा आँ रहा थां।
कुछ मिनट कि चुदाई केँ खेल केँ बाद हम् दोनों नें चरम सीमा कां आनन्द एक् संग उठाया। इसकेबाद एक् दूसरे सें चिपककर हम् सोगए।
अगलेदिन सुभहजब मे उठातब मोहनजा चुके थें। मेरे जिस्म पऱ केवल लुंगी बंधी हुईँ थि। गीता अंदर बाथरूम मे नहारही थि। कुछदेर बाद बाथरूम सें गीता निकली उसने केवल चड्डी पहनरखी थि औऱ नंगे स्तनों पर्र तौलिया ढकरखा थां। बाहर् निकलकर गीता नें मुझे देखा औऱ होंट दबाते हुए बोलीं- कल तोँ तुमने राखी कि मुनिया बड़ी मस्तबजा दि। सुभह जाते जातेकह रही थि कि भाभीकल जितना चुदने मे मजाआया, उतनाकभी नहि आया औऱ कहरही थि जल्द हि दुबारा चुदूँगी।
गीता नें मेरीतरफ पीठ कि औऱ तौलिया उतारकर अपने मम्मों हिलाते हुए अपनी जांघें पोंछने लगी पीछे सें उसकागरम जिस्म देखकर मुझसे रहा नहि गय़ा, मैंने पीछे सें गीता कि दोनों चूचियाँ हाथों मे पकड़कर उन्हें मसलने लगा औऱ बोला- राखी कि चुदाई मे तौ मजा आँ गय़ा मगर तुम् इतना क्यूं तड़पा रही होँ?गीता मुड़कर मुझसे चिपकते हुए बोलीं- इतने उतावले क्यूं होँ रहे हौ? चोद लेना, बुर तौ मेरी भि तुम्हारा लण्ड खाने कों मचलरही हैं। एक् बार लफड़ा होँ गय़ा थां इसलिये सावधानी बरतती हूं। अभि तुम् एक् अच्छे देवर जी कि तरहये बूब्ज़ सुडौल रखने वालातेल मेरे स्तनों पर्र मलदो।
मे येसुन कर उत्तेजित होँ गय़ा।
गीता मेरीगोद मे आकर जाँघों पर्र बैठ गई औऱ मुझसे अपनी नंगी चूचियाँ पऱ तेल मालिश कराने लगी। मम्मों कों चारों तरफ सें धीरे-धीरे धीरे-धीरे तेल सें मलतेहुए बीच मे चूचियाँ उमेठने मे मुझे गज़ब कां मजा आँ रहा थां।
मैंने मालिश करतेहुए पूछा- तुम् बारबार कहती होँ मेरा लफड़ा हौ गय़ा थां, लफड़ा क्याँ हुआ थां, ये तोँ बताओ !
भाभी बोलि- ठीक हैं, तुम् मेरे अपनेबन गए होँ, तुम्हें बता देती हूं किसी कों बताना नहि।
भाभी नें बताया कि पहले वोँ बगल वालीचाल मे मुन्नी केँ पास वालेघऱ मे रहती थि। मुन्नी कि एक् सहेली कुसुम हैं जौ उसके गाँव सें हि हैं, कुसुम रेलवे कॉलोनी केँ पास रहती हैं। मुन्नी कुसुम कों चाल मे घऱ दिलवाना चाहरही थि। कोईघऱ खाली नहि थां तोँ उसने मेराघऱ खाली करवाने केँ लिएचाल चली। इनका एक् यार चिंटू हैं, उसकाऑफ बुधवार कों रहता थां, हम् दोनों मे हंसी मजाक बहोत वक्त सें होँ रहा थां, हर बुधवार वोँ मुझसे मिलने आँ जाता थां औऱ मौका पाकर वोँ मेरी चूचियाँ औऱ चूतड़ भि मसल देता थां।
एक् दिन मुन्नी औऱ कुसुम नें मिलकर एक् साज़िश रची। पहले मुन्नी आई उसने मुझेखीर मे मिलाकर कोई कामोत्तेजना बढ़ाने वालीदवा खिला दि। उसदिन यहघऱ मे नहि थें, मेरी चूत बुरीतरह सें चुदने केँ लिए खुजला रही थि, एक् घंटेबाद चिंटू आँ गय़ा, चिंटू नें मेरा ब्लाउज खोल दिया औऱ मेरी नंगी चूचियाँ मलनेलगा, उसने मुझे बुरीतरह सें गरमकर दिया थां। कुसुम साज़िश केँ तहत किचन मे छिपी हुई थि। इसकेबाद मे औऱ चिंटू नंगे होकर बाथरूम मे चलेगए। चिंटू मुझे बाथरूम मे चोदने लगा।
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