छोटी-छोटी रसीली कहानियां, Total 18 stories Complete - desi kamuk kahaniyan – New Episode
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“डाल नाँ लण्ड पूरा… मादरचोद… तेरी मम्मी कों चोदूं मे… चोद बाबू मुझे… जल्द सें पूरा लण्ड अंदर डालकर चोद अपनी बेटी कों…”
“देखरी कामिनी… देख मेरा लण्ड तेरी बेटी कि बुर सें लगाहुआ हैं… देख रंडीअब केसे मेरा लौड़ा तेरी बेटी कि बुर केँ अंदर डालूंगा…” शंकर नें ये कहते हुये एक् हि जोरदार झटके सें अपना पूरा लण्ड अपनी बेटी रानी कि बुर मे डाल दिया। दादीमा केँ चूसने कि वजह सें रानी कि बुर अंदर तक चिकनी होँ रही थि, इसलिये शंकर कां लण्ड आसानी सें फिसलता हुआ अपनी बेटी कि बुर मे चला गय़ा।
“चोद… औऱ जोर सें चोद बाबू… फाड़दे मेरी बुर कों… उफमर गई मां… अर्रे चुद गई मे अपने बाप सें… देख मां चुदरही हैं तेरी बेटी तेरे सामने अपने बाप सें… आनंद आँ रहा हैं… चोद मुझे मादरचोद…”
“भारी कि बच्ची चुद मेरे लण्ड सें…” बाबू कि आवाज़ तेज-तेज निकलरही औऱ संग हि उसके धक्कों मे शिद्दत आँ गई थि- “रानी… तेरी मम्मी कों चोदूं… साली… तेरी मम्मी कि बुर… चुद बहनचोदी अपने बाप केँ लण्ड सें… तेरी बुर मे मनी निकालूँगा आज भड़वी… जिसमनी सें तुँ अपनी मां कि बुर सें पैदा हुइ थि… वहीमनी आज तेरी बुर मे निकालूँगा… फिन तेरी बुर सें बच्चा जनवाऊँगा… चुदवा मेरे लण्ड सें… मां कि बुर तेरी रानी… तेरी तौ मे मम्मी कों चोदूं…”
“मे छूटरही हूं बाबू…” रानी नें यह कहते हुये जोर-शोर सें अपनी गाण्ड पीछे बाप केँ लण्ड पर्र मारनी शुरुआत कर दि।
“मेरी भि मनी निकलने वाली हैं… हम्म… अयाया… निकलरही हैं… तेरी बुर मे…” औऱ शंकर अपनी बेटी कि गाण्ड कों कसकर दोनों हाथों सें पकड़कर पूरा लण्ड बुर मे घुसाकर झटके मारने लगा। शंकर कां पूरा जिश्म झटकेखा रहा थां। उसके लण्ड सें गर्म-गर्म मनी कि पिचकारियां अपनी बेटी कि बुर मे निकलरही थीं।
रानी भि छूटते हुये बुरीतरह काँपरही थि। उसकी गाण्ड झटकेमार रही थि- “बाबू, मनी निकलरही हैं मेरी बुर मे… क्या बात है मज़ा आँ रहा हैं… भर गई मेरी बुर तेरीमनी सें… मम्मी देख, मेरे बाप कि मनी मेरी बुर मे निकल गई… बच्चा जनूंगी बाबू तेरा…”
कामिनी, कामिनी कि मां औऱ शंकर कि मां सभीये नजारा देखते रहे।
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। *****THE END खत्म*****
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Thanks
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आदिती कि वाहन कि सर्विसिंग
दोस्तों नमस्ते,
मे आदिती, उम्र 32 साल, गोरी, लंबी, 36-28-38 कि फीगर हैं। अपनीजॉब ज्वाइन करने सें पहले, मेरे पति मेरेलिए एकदमनयी मारुती इस्टीम खरीदकर लाये। ये वाहन मेरेलिए बहोत उपयोगी बन गई,। मेरा पति नें मुझे ड्राइविंग सिखाया।
अब मे अकेले हि गाड़ी ड्राइव करके बाजार, अपने बच्चों कों विद्यालय औऱ सब अन्य स्थानों केँ लिए जाती हूं। सच बोलूं तोँ इस गाड़ी नें मेरी आजादी औऱ ज्यादा बढ़ा दि। हमारे घऱ केँ सामने एक् गेराज थां। वहांभगत नाम कां एक् मैकेनिक, 25 साल कां जवान लड़का थां। वो मेरे पति कां बहोत ज़्यादा सम्मान करता हैं क्योंकि मेरे पति नें गैरेज केँ लिए उसकी बहोत अधिक सहायता कि थि। जब भि मे अपनी गाड़ी केँ लिए उसके गेराज मे जाती हूं तोँ वो मेरेसंग ठीक सें बर्ताव करता हैं।
मगरजब मेरे पति अपनेकाम केँ लिएचले गये तौ मैंने मेरे प्रति भगत केँ बर्ताव मे कुछ बदलाव देखा। मे जब भि वहां जाती तौ उसने मेरेसंग मजाक करना शुरुआत कर दिया। मे जब भि बोनट पर्र झुकती तोँ वो मेरी मेरी पोशाक केँ अंदर, ब्रा केँ अंदर देखने कि कोशिश करता। मे उसका इरादा समझी जरूरमगर इससभी पऱ ध्यान नहि दिया।
मे जब उसकीतरफ देखरही होती तोँ अक्सर वोँ पैंट केँ ऊपर सें खुलेतौर पर्र अपने लण्ड कों मसलता। मैंने सोचा कि इसमें कोइ नुकसान हैं औऱ कुछ भि नहि कहा। इससे उसकी हिम्मत औऱ बढ़ गई औऱ काम केँ दौरान वोँ मेरेबदन कों छूने भि लगा। मैंने निर्णय लिया कि अब मे उसके गैरेज मे नहि जाऊंगी औऱ एक् नया गेराज तलाश करूंगी।
तभी मेरे दोस्तों नें तय किया कि हमलोग रविवार कों बाहर् सैर केँ लिए जायेंगे। क्योंकी मेरे ग्रुप मे सिर्फ मेरेपास वाहन थि, इसलिये मैंने अपनी गाड़ी लें जाने कि पेशकश कि, ये शुक्रवार कि सुभह थि। तब मुझेयाद आया कि गाड़ी कां ए॰सि॰ काम नहि कररहा थां औऱ हेडलाइट कि भि समस्या थि। अब मेरेपास कोई विकल्प नहि थां, सिवाय भगत केँ पास मरम्मत केँ लिएकार लेँ जाने केँ। मैंने उसे समस्यायें बताई औऱ यदि आवश्यक होँ तौ हेडलाइट कों बदलने केँ लिएकहा।
इस टाइम केँ दौरान मैंने अपने सारे जिस्म पऱ उसकी आंखों कों महसूस किया। उसनेकहा कि वाहन 3:00 बजे तक ठीक होँ जाएगी, औऱ मुझे उसकेबाद वाहन लें जाने केँ लिएकहा। मे सहमत होतेहुए अपनेघऱ चली गयीँ,। मे ठीक 3:00 बजे उसके गैरेज मे पहुँच गई,। ये एक् शुक्रवार थां, इसलिये वोँ अपने गैरेज मे अकेला थां। मुझेभगत कहीं भि नहि मिला। मैंने उसे 4-5 बार आवाज़ दि, मगरकोई जवाब नहि मिला, तौ अंत मे मे उसके कार्यालय-सह-कमरे मे चली गई।
वहां मैंने उसे मात्र एक् लुंगी औऱ टी-शर्ट मे फर्श पऱ सोते हुये पाया। मे उसेफिन सें आवाज़ देने वाली थि कि मैंने देखा कि उसकी लुंगी एक् तरफहट गई थि औऱ उसकालणड बाहर् निकला हुआ थां, जिसने मुझेरोक दिया। मेरी आवाज़ मेरेगले मे फँस गई औऱ मेरी धड़कन बढ़ऩी शुरुआत हौ गई। उसका लण्ड एक् झंडे कि तरह खड़ा थां जोँ लंबा औऱ मोटा थां औऱ उसका सुपाड़ा प्री-कम सें चमकरहा थां।
मैंने उसे अपने लण्ड कों सहलाते हुयेकुछ फुसफुसाते सुना, तोँ मे ध्यान लगाकर सुनने लगी कि वोँ क्याँ कहरहा थां औऱ जोँ मैंने सुना, उसे सुनकर मे चौंक गई।
भगतकह रहा थां- “ओह्ह्ह्ह… आदिती, औऱ चूस मेरा लण्ड, ज़ोर-ज़ोर सें चूस इसको, बहोत दिनों सें मे, मेरा लण्ड तुझसे चुसवाना चाहता थां औऱ बाद मे तेरी गुलाबी बुर चोदना चाहता थां। आज तूँ मिली हैं तोँ पूरी भड़ास निकालूँगा इस शरीर पे आदिती…”
इसका मतलब थां कि भगत ड्रीम्स मे मुझसे सेक्स रहा थां। उसकी कार्रवाई औऱ शब्दों नें मुझेगरम करना शुरुआत कर दिया। अब मैंने समझा औऱ महसूस किया कि मेरे बारे मे उसके क्याँ विचार थें। भगतअब अपनेहाथ सें अपना लण्ड सहलारहा थां।
उसका खड़ा लण्ड देखकर मेरी बुर गर्म होनेलगी औऱ चूचियों मे खून तेज़ दौड़ने लगा। मैंने पाया कि मेरे निपल्स खड़े हौ गये हें। मैंने आपने हाथों सें पैंट केँ ऊपर सें अपनी बुर सहलाई। मुझेऐसा लगा कि मे अभि जाकरभगत कां लण्ड आपने हाथों मे लेकर उसको सहलाकर चूस डालूं।
मगर बहोत देर तक उसको घूरने केँ बाद मे अपनेहोश मे आई तौ कमरे सें बाहर् चली गई औऱ फिनउसे बुलाना शुरुआत कर दिया।
मैंने कमरे सें कुछ आवाज़ सुनी, इसका मतलब कि भगतजाग गय़ा हैं। अंत मे भगतउसी पोशाक मे बाहर् आया, मुझे देखकर मुस्कुराया औऱ कहा- “सारी आदितीजी, आज छुट्टी हैं नां तोँ काम करने केँ बाद मुझे नींदलग गई,। मगर आपकी वाहन केँ ए॰सि॰ कां काम मैंने कर दिया हैं। आपको अधिक वक्त तोँ नहि रुकना पड़ा नाँ आदितीजी?”
उसकी लुंगी केँ नीचे खड़े लण्ड कों देखने सें अपने आपको रोकते हुये मैंने कहा- “नहि भगत, मैंने बस 2-3 बार तुमको आवाज़ दि। अच्छा ये बताओ कि ए॰सि॰ मे क्याँ प्राब्लम थि?”
भगत नें कहा- “ए॰सि॰ केँ संगगैस कि समस्या थि, औऱ कहा कि ए॰सि॰ कां एक् परीक्षण करने केँ बाद वोँ हेडलाइट कि जाँच करेगा…”
मे भि कोई समस्या नहि चाहती थि इसलिये मे एक् टेस्ट ड्राइव केँ लिए सहमत होँ गई। वो अपने कपड़े बदलने गय़ा, एक् शार्टस औऱ टी-शर्ट पहनकर आया औऱ वो ड्राइवर कि सीट मे बैठ गय़ा औऱ मुझेबगल कि सीट मे बैठने केँ लिएकहा। फिन खिड़कियां बंद करके गाड़ी स्टार्ट कि। उसने गाड़ी गेराज केँ बाहर् निकाली औऱ मुझसे पूछा कि हमलोग किधर औऱ कहां तक ड्राइव करें।
मैंने कहा- “कहीं भि, जब तक मे ठंडा महसूस न् करूं…” मे एक् लालटाप औऱ नीली जींस मे थि। शुक्रवार होने केँ नाते सड़कें खालीथीं तौ शहर सें बाहर् आने केँ लिएभगत कों कोई वक़्त नहि लगा। मे अब अच्छी तरह सें ठंडा महसूस कररही थि।
निरुद्देश्य इधर-उधर ड्राइव करते, मेरीतरफ देखते हुयेभगत नें कहा- “आदितीजी एक् बात बोलू… आपके दोनों हेडलाइटस तोँ मुझे एकदम अच्छे लगते हें मगर मुझे उनको ज़राखूब ध्यान सें चेक करना हैं औऱ खराबी ढूँढ़नी हैं। अभि चेककरू हेडलाइट?”
उसनेगलत कुछ भि नहि कहा, मुझेकुछ भि गलत नहि लगा, मगर मैंने पूछा कि वोँ चलती वाहन मे उन्हें केसे जाँच करेगा?”
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उसनेकहा कि वोँ वाहन पार्क करेगा औऱ जाँच करेगा, जिसके लिये मे सहमत हौ गई। उसने वाहन एक् सूनसान मार्ग पऱ रोकी औऱ उतर गय़ा, हेडलाइट कि जाँच करने केँ लिये बोनट खोला। गलती सें मेरी आँखें उसके लण्ड पर्र चलीगईं जोँ शार्ट केँ अंदर अभि भि खड़ा थां। मेरी आँखें उस पऱ गड़ीथीं औऱ मे अपनी बुर मे उत्तेजना होने कां संकेत महसूस कररही थि। हेडलाइट कि जाँच केँ बादभगत मेरीतरफ आया औऱ मुझे नीचे झुकने केँ लिएकहा औऱ ढीलेतार कों दिखाया।
ढक्कन बंद करने केँ बादभगत नें कहा- “आदितीजी यह हेडलाइटस कों मैंने चेककर दियामगर अभि भि आपकेदो हेडलाइटस बाकी हें। आप् बोलो तौ मे उनको भि चेक करूं?”
मे कुछ समझी नहि कि कौन सि दो औऱ हेडलाइटस हें जिसके बारे मे वोँ बातकर रहा थां तोँ मैंने उससे पूछा- “तुम् कौन सि दो हेडलाइट कि बातकर रहे हौ भगत? तुम्हारा दिमाग़ तौ ठीक हैं नां? औऱ कौन सि दो हेडलाइट हें मेरेपास, जौ तुम् चेक करना चाहते हौ?”
जवाब मे भगत मेरेपास आया औऱ मेरे स्तनों कि ओर इशारा करते हुयेकहा- “आदितीजी, मे इन हेडलाइटस कि बातकर रहा थां। मेरीये बहोत दिनों कि तमन्ना हैं कि मे आपकी शर्ट उतार केँ औऱ ब्रा खोलके आपको अपने हाथों सें नंगा करके अच्छी तरहचेक करूं। बोलिए आदितीजी, चेक करूं, मे इनको अब्भी यहा?यहा तोँ हम् दोनों केँ सिवाकोई नहि हैं। मे बड़े इतमीनान सें इनकोचेक कर सकता हूं…”
ऐसा कहने केँ दौरान भगत नें मेराहाथ उसकेहाथ मे कसकर पकड़ लिया थां औऱ हल्के-हल्के सहलारहा थां। मे दंगरह गयीँ,, कुछ भि जवाब नहि देपाई, औऱ इसी टाइम मे भगत नें अपने दोनों हाथ मेरे स्तनों पऱ रख दिये औऱ धीरे धीरेमगर मजबूती सें उन्हें सहलाने लगा।
अपनेहोश मे वापसआते हि मे वाहन कि ओर वापसचली गई औऱ कहा-“भगत क्याँ कररहे हौ? मेरे शरीर सें अपनेहाथ हटाओ। भगत इस सुनसान स्थान पे मुझे लेकर आनां औऱ ऐसा करनायही तेरा मक़सद थां क्याँ? चलोअब मुझे जानेदो…” असल मे मे उसके लण्ड कों देखने केँ बादगरम भि थि, मगर मे स्वयं सें कह नहि पाई।
मगर इससेभगत रुका नहि औऱ वोँ आगेआया औऱ फिन मेरे स्तनों केँ संग खेलना शुरुआत कर दिया औऱ कहा- “आदिती, आज तौ तूने भि मुझे नंगा देखा हैं तोँ मुझे भि तेरा नंगा शरीर देख्ना हैं। कैसा थां मेरा लण्ड? तुझेही पसन्द आया क्याँ? तुम कोपता नहि मे कबसे तुम्हें चोदना चाहता हूं…”
तब मुझे एहसास हुआ कि भगत नें सोने कां बहाने बनाया थां। मात्र मुझे अपना लण्ड दिखाने औऱ मुझेगरम करने केँ लिए।
मेरे वापस जाने केँ लिएकोई स्थान नहि थि इसलिये मे अभि भि खड़ी थि। फिनभगत नें मेरेटाप केँ तीनों बटनों कों खोलना शुरुआत कर दिया। उसकेबाद उसे मेरी क्लीवेज़ दिखी। फिन भगत नें मेरी ब्रा मे हाथडाल दिया औऱ मेरे स्तनों सें खेलना शुरुआत कर दिया। मैंने मेरी जर्सी सें भगत केँ हाथों कों दूर करने कि कोशिश कि मगरभगत नें मेरी जर्सी केँ अंदर एक् हाथ डालकर मेरी जर्सी कों ऊपरउठा दिया, जिससे मेरी ब्रा दिखने लगी। फिन मे कुछ करूं उससे पहले हि भगत नें मेरी जर्सी कों पूरीतरह सें निकाल दिया।
मैंने अपने हाथों सें अपनी चूचियों कों ढका औऱ गाड़ी मे जाने कि कोशिश कि मगरभगत नें मुझे पीछे सें पकड़ लिया औऱ वाहन केँ दरवाजे पे मुझे धक्का दिया औऱ मेरे भारी स्तनों कां स्पष्ट नग्न दृश्य प्राप्त करने केँ लिए मेरी ब्रा केँ सामने केँ हुकखोल दिये।
भगत नें तब जल्द सें मेरेबदन सें मेरी जर्सी औऱ ब्रा कों निकाल दिया औऱ कमर तक मुझे नंगाकर दिया, इतनी जल्द कि कुछ भि करने केँ लिए मेरेपास टाइम हि नहि थां। मेरे नग्न बूब्ज़ पऱ उसके स्पर्श नें मुझे भि गरमकर दिया औऱ सेक्स केँ लिए उत्सुक बना दिया थां।
फ़िरजब उसने मेरी चूचियों कों चूसना शुरुआत किया, तब मे अपनेहोश मे आई औऱ कहा-“भगत, प्लीज़… रास्ते मे ऐसामत करो। कई कारें यहा सें आती जाती हें, मुझे कितनी शरम होगीअगर क़िसी नें मुझेऐसा देखा तोँ? प्लीज़… कम सें कम गाड़ी मे तौ चलो…”ये कहने केँ संग मैंने ये स्पष्ट कर दिया कि मे उससे चुदवाने कों सजधजकर हूं।
मगर मेरीबात सुनने केँ बजाय उसने मेरी जीन्स औऱ बेल्ट खोलना शुरुआत कर दिया औऱ कहा- “इसका मतलब हैं आदिती कि तुँ भि मुझसे चुदना चाहती हैं… मेरे लण्ड नें तेरी बुर मे चुदाई कि ख़्वाहिश पैदा कि हैं, हैं नां आदिती?”
उसकाहाथ पकड़े हुए मैंने हाँकहा।
भगत नें अपने हाथों कों छुड़ाया औऱ कहा- “आदिती, तेरी चोदूंगा तोँ गाड़ी मे हि मगर मेरी तमन्ना हैं कि तुम्हारी तरफरोड पे नंगा करकेजी भरके देखूं औऱ फिन तुम्हें चोदूं…”
मैंने उसकाहाथ पकड़कर निवेदन करने कि कोशिश कि, मगरभगत नें मेरी एक् नाँ सुनी औऱ मेरी जीन्स कां बेल्ट खोलकर बटन औऱ ज़िपखोल डाला जिसकी वजह सें मेरी जीन्स पूरीउतर गयीँ,। फिन नीचे बैठकर भगत नें मेरी सैंडल औऱ मेरी जींस कों निकाल दिया। अब मे मात्र अपनेलाल जाँघिये केँ संग मार्ग केँ बीच मे खड़ी थि।
जब मैंने अपनी नग्नता कों अपने हाथों सें छिपाने कि कोशिश कि तौ भगत नें मेरे जाँघिये कि इलास्टिक मे अपनी उंगलियां डालकर उन्हें नीचे खींच दिया औऱ कहा- “आदिती, तुँ नंगी होने मे जितना ज्यादा समय लगाएगी उतना अधिकसमय तुम कोरोड पे नंगी खड़ा रहना पड़ेगा। तूँ जल्द-जल्द नंगी हौ जा ताकि तुम्हें वाहन मे सुला केँ मे चोद सकूं…”
उसकीबात सुनने केँ अलावा मेरेपास अन्यकोई विकल्प नहि थां, इसलिये मैंने मम्मों सें मेरेहाथ हटा लिये। तब तक भगत नें मेरी पैंटी निकालकर मुझे पूरा नंगाकर दिया थां। फिन उसने मुझे उससे थोड़ी दूर खड़ा करके मुझे छूना औऱ मेरे नग्नबदन पऱ टिप्पणी करना शुरुआत कर दिया।
आप् इस दृश्य कि कल्पना करें कि, एक् जवान हसीनमगर नंगी शादीशुदा स्त्री मार्ग पे वाहन केँ बगल मे खड़ी हैं औऱ एक् जवान लड़काउस स्त्री केँ मस्त शरीर कों छूकर औऱ मसलकर उसको औऱ उत्तेजित कररहा हैं।
मेरे पीछे खड़े होकरभगत नें मेरे चूतड़ों कों थपथपाया औऱ मेरी गाण्ड कि दरार मे अपनी उंगली फिराई औऱ कहा-“हाय रे आदिती, ये तेरी गाण्ड केसेउछल रही हैं, औऱ ये चूचियां देख केसेतन केँ खड़ी हें, मुझसे चुसवाने औऱ मसलवाने केँ लिए। आदिती, मुझे तेराये जवान जिस्म 4 महीनों सें सतारहा हैं। तेरा शरीर देखकर तौ मे होशखो देता थां। तुँ जब भि गेरेज मे आती थि नां तोँ दिल करता थां कि तुम्हें वहीं पे नंगा करकेचोद डालूं। तेरी चूचियां देखके तौ मेरा लण्ड बेकाबू होँ जाता थां। आज तोँ मे इतने दिनों कि प्यास तुम को चोदके बुझाऊँगा…” इस वक़्त केँ दौरान भगत मेरे जिस्म कों देखरहा थां, मेरी गाण्ड, चूचियां औऱ बुर कों महसूस कररहा थां।
मे मात्र इस उलझन मे खड़ी थि कि मे क्याँ करूं?
फिन भगत नें अपनी पैंट खोली औऱ अपने अंडरवियर कों नीचे करके अपनेगरम लण्ड कों नंगाकर दिया औऱ अपने पैरों कों वाहन केँ बाहर् निकालकर पीछे कि सीट पर्र बैठ गय़ा। फिन मुझे अपने पैरों केँ बीच मे खींच लिया औऱ कहा- “आदिती, ये लें मेरा लण्डचूस पहले, बाद मे मे तेरी बुर चोदूंगा…”
मे जानती थि कि मेरे कहने कां कोईअसर होने वाला नहि हैं, इसलिये मे मार्ग पर्र नंगी घुटनों केँ बलबैठ गई औऱ उसका विशाल लण्ड अपने हाथों मे लेकर सहलाने लगी औऱ अपने मुँह सें उसके लण्ड कों चूमने औऱ चाटने लगी।
उसका लण्ड भि बहोत बड़ा थां जौ मेरे मुंह मे पूरीतरह सें नहि जारहा थां। भगत नें मेरेसिर कों पकड़ लिया औऱ अब नीचे सें मेरे मुँह कों चोदने लगा औऱ कहा-“हाय राम आदिती, तेरा लण्ड चूसना तोँ तेरे शरीर जैसा मादक हैं। लगता हैं बहोत लण्ड चूसे हें तूने, लें औऱ अंदर लेँ मेरा लण्ड औऱ चूस-चूस केँ मेरा पानी निकाल…”
मैंने चूसना शुरुआत कर दिया औऱ बहुतदेर तक तेज-तेज चूसती रही। तभी मैंने एक् वाहन केँ आने कि आवाज़ सुनी तोँ मैंने वाहन मे जाने केँ लिये उठने कि कोशिश कि, मगरभगत नें मुझे कसके पकड़ लिया औऱ कहा- “चूसती रहो, चिंता मतकरो…”
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छोटी-छोटी रसीली कहानियां, Total 18 stories Complete - desi kamuk kahaniyan - Kahani ab aur interesting hogi
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