छोटी-छोटी रसीली कहानियां, Total 18 stories Complete - desi kamuk kahaniyan – New Episode
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वाहन नजदीक आई तौ मैंने देखा कि उसमें दो व्यक्ति हें औऱ मैंने सोचा कि यह रुकेंगे, मगर वोँ चलेगये तौ मैंने ईश्वर कों शुक्रिया दिया।
यहसभी टेंशन सें मे इतनी गर्म होँ गई थि कि बिना छुये हि झड़ने लगी।
भगत मुझे गाड़ी मे लें गय़ा औऱ फिन अपनी हथेली सें मेरी बुर कों महसूस करते हुयेकहा- “आदिती सही मे तूँ एक् मस्त स्त्री हैं, तेराऐसा मस्तबदन औऱ तेरा लण्ड चूसना… मजा आँ गय़ा। अच्छा बोल आदिती, दोपहर कों मेरा लण्ड देखके तुझेही कैसालगा?”
एक् बार झड़ने केँ बावजूद भि मे बहोत गरम थि तोँ मैंने भगत कों अपनी नंगी चूचियों पर्र घसीटकर कहा-“भगत, दोपहर कों जब मैंने तेरा लण्ड देखा तौ मे शर्मा गयीँ,, मगरजब तेरी बातें सुनी कि तूँ मुझे नींद मे चोदरहा हैं तोँ मेरे जिस्म मे गरमीभर गयीँ, औऱ मेरे जिस्म कि गरमी कितनी बढ़ गई,, इसका सबूतये हैं कि ज़िंदगी मे पहलीबार खुली मार्ग पे क़िसी पराये मर्द नें मुझे नंगी किया हैं, औऱ मेरे शरीर सें खूब खेला हैं। येसभी तेरा लण्ड देखकर हि हुआ हैं…”
मेरे निपल्स कों मसलते, चिकोटते हुयेभगत नें कहा- “आदिती, तूने मेरा लण्डचूस केँ मुझे बहोत मजा दिया हैं, अब तूँ येबता कि मे तुझेही कहां औऱ केसे चोदूं?”
मे नीचे झुकी औऱ भगत कां लण्ड अपने मुंह मे लेँ लिया औऱ उसको चूमने औऱ चूसने केँ बादकहा- “भगत, तेरा लण्ड पूरी ताकत सें मेरी बुर मे पेलकर औऱ मेरी चूचियां मसलके, दबाके औऱ चूसके इतनाचोद कि मुझमें चलने कि ताक़त नाँ रहे राजा…”
मेरी दोनों चूचियों कों मसलते हुये, अपनेहाथ मे मेरे कपड़ों कों लेकरभगत नें मुझे गाड़ी केँ नीचे उतारा, औऱ गाड़ी कों बंद करते हुये मुझेपास कि झाड़ियों, पेड़ों मे लेँ गय़ा। मे उसकेबगल मे नंगी हि चलरही थि औऱ वोँ मेरेबदन केँ संगखेल रहा थां।
जब हम् जंगल मे एक् सुनसान स्थान पऱ पहुंच गये तोँ भगत नें वहा मुझे एक् पेड़ केँ संग खड़ाकर दिया औऱ मेरे पैरों मे बैठकर अपने हाथों सें मेरी बुर कों खोला औऱ अपनीजीभ डालकर एक् कुत्ते कि तरह मेरी बुर चूसने लगा। पहलेयह सभी वोँ आरामसे कररहा थां मगरफिन वो पागलों कि तरह मेरी बुर चूमने, चूसने, काटने लगा औऱ मेरे चूतड़ों कों दबाने लगा। मुझे खड़ा रहने मे मुश्किल हौ रही थि मगरभगत नें मुझे बैठने नहि दिया। अब उसने पीछे सें मेरी गाण्ड मे एक् उंगली डाल दिया औऱ संग-संग ‘गाण्ड मे उंगली’ करना शुरुआत कर दिया।
मेरे लियेयह सभी असहनीय थां औऱ मे उसकेऊपर करीबढह गई।
भगत नें मुझे अपनेऊपर लेते हुये एक् जोरदार चुम्मा लिया औऱ कहा- “आदिती, तुम को बुर चुदवानी हैं नां… तोँ पकड़ मेरा लण्ड औऱ डाल लेँ अपनी बुर मे औऱ चोद मुझे। मे नीचे सोता हूं औऱ तुँ ऊपर सें मुझेचोद…”
मैंने भगत कों कहने कि कोशिश कि कि वोँ मेरेऊपर आकर मुझे चोदे, मगर उसने मेरीबात कों सुना हि नहि। तोँ आखीर मे मे उसके सीने पर्र बैठने लगी तौ भगत नें अपना लण्डहाथ मे पकड़कर मेरी बुर कों धीरे धीरे अपने उछलते लण्ड पऱ दबा दिया औऱ मेरी गर्म बुर नें उसको जकड़ लिया। धीरे धीरे जैसे-जैसे उसका लण्ड मेरी बुर मे घुसना शुरुआत किया तौ मुझे बहोत अच्छा महसूस हौ रहा थां।
आख़िरकार उसका पूरा लण्डजब मेरी बुर मे चला गय़ा तोँ मेरी गाण्ड पकड़ केँ भगत बोला- “आदिती लेँ अब चुदा लें अपनी बुर, चलऊपर सें चोदना शुरुआत कर…”
उसके सीने पर्र अपने दोनों हाथ रखकर मैंने ऊपर-नीचे होना शुरुआत किया, इस प्रक्रिया मे मेरी बुर चुदने लगी। मेरा पूरा जिस्म झटके सें ज़ोर-ज़ोर सें हिलरहा थां। मेरी चूचियों कां हिलना नाचना देखकर भगत अपने कों रोक नहि सका औऱ मेरे निपल्स कों चुटकी सें मसलते हुये मेरी दोनों चूचियों कों अपनी हथेलियों मे लेकरजोर सें मालिश करना शुरुआत कर दिया औऱ चूसने भि लगा।
इसतरह सें चुदना मुझे एक् स्वर्गीय मजादे रहा थां।
उसको औऱ जोर सें चोदते हुये मैंने कहा-“भगत दोपहर कों तेरा लण्ड देखा तौ मुझेलगा कि उधर हि नंगी होकर तुझसे चुदवा लूं। क्योंकी पिछले 4 महीनों सें मेरी बुर बहोत प्यासी हें, जब सें मेरा पति काम पे चला गय़ा हैं। मगरअगर उधर चुदवाती तोँ जिसतरह सें तूने मुझेरोड पे नंगा करवाया, वोँ मजा नहि मिलता। भगतअगर वोँ गाड़ी रुकती तोँ क्याँ होता? मे कितनी डर गई, थि…”
मेरे निपल्स कों चिकोटते हुयेभगत नें कहा- “आदिती, मेरा सपना थां कि तुझेही ऐसे हि नंगा करके चोदूं। इसलिये अगर तूँ गेरेज मे चुदवाना भि चाहती नां, तोँ मे तुम्हे नहि चोदता। औऱ रहीबात उस गाड़ी कि, तोँ अगर वोँ गाड़ी रुकती तौ मे उन दोनों मर्दों कों भि तुम्हे चोदने केँ लिए इन्वाइट करता। क्योंकि तुँ ऐसा मस्त चूसती औऱ चुदवाती हैं कि तुम्हारी तरफ एक् मर्द सें मजा नहि मिलता…”
उसके लण्ड कों चोदते हुये मैंने कहा-“भगत ऐसामत बोल, मे वैसी महिला नहि हूं समझे…”
अब मेरी दोनों चूचियों कों दबाते, रगड़ते हुयेभगत नें कहा-“अरे आदिती, अगर तुँ वैसी स्त्री नहि हैं तोँ मे बना देता हूं तुम्हे वैसी। आख़िर तुझमें इतनी गर्मी हैं, वोँ ठंडी केसे होगी?अगर तुम्हे कोई मस्त लण्ड नहि मिला तोँ?”
मेरी बुर कां प्री-कम भगत केँ लण्ड केँ ऊपर सें होकर, मेरी बुर सें बाहर् आकरभगत कि गाण्ड मे जारहा थां। चुदाई केँ कारण मेरे पैरों मे दर्द शुरुआत हौ गय़ा, मगर मे झड़ने केँ लगभग थि तौ मैंने अपनीगति बढ़ा दि औऱ आखीर मे भगत केँ चेहरे कों मेरे निप्पल पर्र कसकर दबाते हुये एक् जोरदार धक्का दिया औऱ मे झड़ने लगी। फिन मे उसकी छाती पर्र गिर पड़ी।
फ़िरभगत नें कसकर मुझेगले लगाया औऱ मुझे पलटकर मेरेऊपर आँ गय़ा। उस टाइम तक भगत बहोत उत्तेजित हौ गय़ा थां। मेरेऊपर आने केँ बाद वोँ मेरी बुर कों जोर-शोर सें चोदने लगा। इस तरह 3-4 मिनट तक जोर-शोर सें चोदने केँ बाद वोँ मेरी बुर मे झड़ गय़ा औऱ मेरेबदन पऱ गिर पड़ा।
चुदाई केँ बाद खड़े होने पऱ, भगत नें सुझाव दिया कि- “मे गेराज तक कि यात्रा केँ दौरान वाहन मे बिल्कुल नंगी बैठूं, क्योंकि गाड़ी कि खिड़की मे रंगीन शीशेलगे हुये थें तौ कोई भि हमेंदेख नहि सकता हैं…”
मगर मैंने कहा- “नहि…”
तौ भगत नें कहा- “आदिती, कम-सें-कम कमर केँ नीचेकुछ मत पहनो ताकि मे तेरी बुर सें खेलते-खेलते वाहनचला सकूं…”
आखीर मे मे सहमत होँ गई। औऱ भगत मेरी नंगी बुर मे उंगली करते हुये अपने गैरेज मे आया। इस दौरान मे बहोत गर्म होँ गई थि तोँ हमने उसके गेराज मे भि एक् बारफिन चुदाई कि।
उसकेबाद मेरी गाड़ी सप्ताह मे 2-3 दिन उसके गैरेज मे खड़ी रहती थि। औऱ जब भि मेरी गाड़ी वहां पार्क रहती थि, तबभगत मेरी बुर मे अपना लण्ड पार्क करके मेरी बुर कि अच्छे सें चुदाई औऱ सर्विसिंग कर देता थां।
***** THE END खत्म *****
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komaalrani wrote:[=150]बहोत बढ़िया , क्याँ हेडलाइट्स औऱ क्याँ अच्छी सर्विसिंग। . [/size] यहदिल मांगे मोर। कोमलजी, हौसला अफज़ाई केँ लिये धन्यवाद। आपका एक् कमेंट 100 कमेंट केँ बराबर हैं। .
एपसोड कि निरन्तरता बनाएरखे
छोटी-छोटी रसीली कहानियां, Total 18 stories Complete - desi kamuk kahaniyan – New Episode
। दोहरी सुहाग रात_Dohri Suhaag rath
हायराम, मे हुमा हूं। आशा करती हूं कि आप् लोगों कों येकथा मनपसंद आयेगी। मेरी मम्मी रजनी औऱ मौसी मीता दोनों एक् हि गली मे रहती हें, मेरे भइया कां नाम अमोल औऱ मेरानाम मीना हैं, मौसी कि लड़की कां नाम हिना औऱ लड़के कां नाम हिमांशु हैं, मेरा औऱ हिमांशु कां औऱ हिना औऱ अमोल कां शादी हौ चुका हैं, हिमांशु स्टेट बैंक मे काम करता हैं औऱ अमोल बैंकआफ बरोडा मे आफिसर हैं, दोनों कि उमरकोई 25 साल केँ लगभग हैं औऱ मे औऱ हिना देल्ही मे एक् पब्लिक विद्यालय मे टीचर्स हें औऱ हमारी उमर 23 औऱ 22 साल हैं, विवाह सें पहले तोँ मे हिमांशु कों भैया कहती थि औऱ हिना अमोल कों भैया कहती थि मगर हमारी विवाह केँ बादसभी कुछबदल गय़ा।
मे तोँ हिमांशु केँ लण्ड कि दीवानी हौ चुकी हूं। मुझे हिमांशु बहोत पसन्द हैं बस वोँ जरा ज्यादा हि जेंटलमैन बनता हैं औऱ मेरीहर ख़्वाहिश पूरी करने कि कोशिश करता हैं। हिमांशु कां लण्ड 6 इंच कां हैं मगर बहोत हि कड़ा रहता हैं। हिमांशु कां हाइट 6 फीट हैं औऱ वोँ दिखने मे बहोत हि हैंडसम हैं औऱ मे एक् साँवली स्त्री हूं, मेरी मम्मों बहुत बड़ी हैं औऱ मेरा पति मेरे निपल्स कों बहोत प्रेम सें चूमता हैं। मेरा हाइट 5’6” हैं औऱ मेरे चूतड़ बहोत आकर्षक हें, यह मुझे मेरा पति बताता हैं।
मेरा पति अक्सर मेरे चूतड़ों कों किस करता हैं औऱ ऐसा करने सें वोँ बहुत उत्तेजित होँ जाता हैं, कईबार हिमांशु नें मेरी गाण्ड मारने कि ख़्वाहिश जाहिर कि हैं मगर मैंने उसको इजाजत नहि दि हैं। मुझे अपने पति कां लण्ड बुर मे हि बहोत मजे देता हैं तोँ गाण्ड मरवाने कां क्याँ फायदा?
मेरे भैया अमोल भि हिना कों बहोत प्रेम करते हें औऱ उनकीआपस मे बहोत पटती हैं, हिना भि बहोत सेक्सी हैं बस उसका जिस्म मुझसे ज्यादा भराहुआ हैं। उसका गदराया हुआ शरीर देखकर कईबार मेरे पति कि नजर भि अपनी बेहन कि मम्मों औऱ गाण्ड पऱ चली जाती हैं, जिसका दोष मे अपने पति कों नहि देती।
अगर हिना केँ जिश्म कां मज़ा मेरे भैया कि किश्मत मे लिखा हैं तौ कोई क्याँ कर सकता हैं। एक् दिन अमोल औऱ हिना हमारे घऱआएहुए थें औऱ अमोल औऱ हिमांशु शराबपी रहे थें। हिना उनको खाने केँ लिए स्नैक्स देने गई, तौ हिमांशु कां हाथ हिना केँ गुदाज चूतड़ों कों छू गय़ा तौ मैंने देखा कि उसका लण्ड एकदम सें तन गय़ा।
हिना कों जब इसका एहसास हुआ तौ वोँ शर्मा गयीँ,। उसरात जब मेरा पति मुझेचोद रहा थां तौ बार-बार मुझे गाण्ड मरवाने केँ लिएकह रहा थां। मैंने जबमना कर दिया तौ वोँ मेरे चूतड़ों कों चूमने लगा औऱ मेरी गाण्ड मे जुबान घुसाकर अंदर-बाहर् करनेलगा। मुझेपता चल गय़ा थां कि मेरे पति केँ मन सें अभि अपनी बेहन केँ चूतड़ों केँ स्पर्श कां एहसास गय़ा नहि थां।
हिमांशु मुझे पसन्द करता थां औऱ कभी-कभी मेरी36सी कि चूचियों कों मौका देखकर दबा देता थां। एक् दिनजब वोँ सनडे कों मेरेघऱ आया तोँ अमोल मौसी केँ घऱ केँ लिए रवाना होँ चुका थां। मैंने हिमांशु कों बताया कि भैया तोँ उनकेघऱ उनसे मिलने गये हें।
उसने मुझे बाहों मे भर लिया औऱ कहनेलगा- “मे तौ तुमसे हि मिलने आया हूं, अमोल सें नहि, अब मे तुम्हे दूर सें देखकर औऱ तड़पना नहि चाहता, तुझसे प्रेम करता हूं औऱ विवाह करना चाहता हूं, कहो मंजूर हैं तुझेही?”
मे मुश्कुराकर बोलि- “हिमांशु भैया, येसभी तौ ठीक हैं मगर मम्मी कों क्याँ बोलूँगी मे, कि मे हिमांशु भैया सें विवाह करना चाहती हूं…”
हिमांशु अपनीजिद दिखाते हुए बोला- “तुम्हे बार-बार मुझे भैया कहना क्यूं अच्छा लगता हैं? मे तेरा मौसेरा भइया हूं कोई असली नहि, औऱ विवाह कि बात मे स्वयं मौसी सें कर लूँगा, तुम् बसयही कह देना कि तेरीयह विवाह मंजूर हैं, ओके…”
उसीदिन साम कों मम्मी औऱ मौसी नें जबये सुना तोँ वोँ हमारी विवाह केँ लिएमान गयीं। तभी अमोल भैया औऱ हिना बाहर् सें आए तोँ मां नें पूछ लिया- “क्यूं बेटे अमोल, अगर तुम् चाहो तोँ तेरी औऱ हिना कि भि विवाह करा दि जाए? हिमांशु औऱ मीना तोँ कर हि रहे हें, तुम् एक् दूजे केँ साले भि बन जाओगे औऱ जीज़्जा भि… घऱ कि बातघऱ मे रह जाएगी। हम् किसी बाहर् केँ व्यक्ति पऱ इतना विश्वास भि नहि कर सकते…”
हिना शर्मा गई, औऱ अमोल मुश्कुरा पड़ा। मुझे तोँ पहले हि पता थां कि वोँ दोनों भि एक् दूसरे कों प्रेम करते हें। इसतरह हम् लोगों कि शादियां एक् हि दिन होँ गयीं। मुझे अपनी खुशकिश्मती पर्र विश्वास नहि होँ पारहा थां। मैंने औऱ हिमांशु नें सुहगरात बड़ेमजे सें मनाई औऱ चुदाई कां खूब खुशी लिया। हिना भि अगलेदिन बहुतखुश नजर आँ रही थि।
जब मैंने हिना कों रात केँ बारे मे पूछा तोँ वोँ शरमाते हुए बोलि- “तेरा भइया तोँ एकदम सें जानवर हैं, हि इस आँ बीस्ट, योउनो… देखो मेरा क्याँ हालकर दिया हैं? मे तौ ठीक सें चल भि नहि पारही हूं, अमोल नें मेरी बुर कि बुरी हालतबना दि हैं। उसका लण्ड क्याँ कोईआम लण्ड हैं, कम सें कम 8 इंच कां होगा औऱ मे बेचारी कमसिन लड़की, तेरे भैया कों तौ कोई मस्त रंडी स्त्री चाहिए जौ उसकी वहशत कों झेल सकती होँ। मुझे तौ उसने सारीरात सोने नहि दिया। मेरी बुर सारीरात पानी बहाती रही औऱ चुदती रही। ये देखो मेरी मम्मों कां क्याँ हालहुआ हैं?”
फिन हिना नें मुझे अपने गाउन केँ नीचे सें अपनी चूचियां दिखाते हुएकहा- “देखो, तेरे भैया नें केसेकाट खाया हैं मुझे, साला दाँतऐसे मारता हैं जैसे चोदना नहि खानां चाहता होँ मुझे, लण्ड तौ इतनीजोर सें पेलता हैं अमोल कि सारा जिस्म हिल जाता हैं। मेरी बुर भि सूजी पड़ी हैं, मुझेकम सें कमदोदिन कां आराम चाहिए तेरे भैया कि चुदाई सें। तूँ सुना हिमांशु कि चुदाई कैसी हैं?”
मैंने हिना कों सभीबता दिया कि हिमांशु बहोत प्रेम सें चुदाई करता हैं औऱ चूमता हैं। मुझे बहोत आनंदआता हैं।
हिनाहँस पड़ी औऱ बोलीं- “चलो तुम को तोँ मेरा भइयाखुश कर देता हैं। काश… मुझे भि कोईऐसा हि मर्द मिलता जौ धीरे-धीरे प्रेम सें मेरी चुदाई करता? हिमांशु कां लण्ड कितना बड़ा हैं? अमोल कां तोँ कम सें कम 8 इंच कां होगा, मेरा तोँ हाल बुराकर दिया हैं…”
मैंने हिना कों बताया कि हिमांशु कां तोँ सिर्फ 6” कां हैं।
तौ वोँ बोलीं- “मुझे तुमसे जलन होनेलगी हैं, काश… मेरे पति कां लण्ड भि 6” कां होता औऱ मुझे तकलीफ नां होती चुदाने मे…”
मैंने हँसते हुए मजाक किया- “तोँ फिनठीक हैं, हम् अपने पति बदल लेते हें, तुम् अपने भइया सें चुदाई करवालो औऱ मे अपने भइया सें चुदवा लेती हूं, क्यूं क्याँ ख्याल हैं?”
औऱ हम् दोनों हि शरारत सें हँस पड़ी, मगर इस विचार नें मेरेमन मे स्थान करली। क्याँ भैया कां लण्ड बहोत बड़ा हैं? क्याँ वोँ बहोत जबरदस्त चुदाई करने मे विश्वास रखते हें? मेरेमन मे जबरदस्त चुदाई कि ख़्वाहिश पैदा होनेलगी औे मे अमोल भैया सें चुदवाने कां प्लान बनाना शुरुआत कर दि। इस विचार सें हि मेरी बुर सें पानी गिरने लगा औऱ मे फिन सें चुदासी होनेलगी।
उसदिन साम कों हमने सिमला हनीमून पऱ जाने कां प्रोग्राम बनाया थां। हम् दोनों जोड़ियां हवाई जहाज सें चंडीगढ़ औऱ फिन सिमला पहुँची।
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अमोल भैया नें हमारी बुकिंग होटेल मे, जौ कि शहर सें बाहर् थां, पहले हि करवाली थि। हमने एक् बहोत बड़ारूम बुक करवा लिया थां जिसको दोरूम मे बदलाजा सकता थां, क्योंकी उसकेबीच मे एक् दरवाजा थां। जब तक हम् कमरे मे पहुँचे तोँ हमारे पति बहोत मस्ती मे आँ चुके थें औऱ जाते हि उन्होंने हम् औरतों कों दबोच लिया औऱ हमको दरवाजा बंद करने कां मौका भि नहि दिया औऱ हमारे कपड़े उतारने शुरुआत कर दिये। अमोल भैया केँ उतावलेपन कों देखकर मुझे भि गर्मी आँ गयीँ, औऱ मैंने हिमांशु कां लण्ड अपनेहाथ मे लेकरमूठ मारनी शुरुआत कर दि।
हिमांशु कां लण्डतन गय़ा औऱ मैंने उसके लण्ड कों मुँह मे लेकर चूसना शुरुआत कर दिया, हिमांशु कां सुपाड़ा मेरे मुँह मे फूलने लगा औऱ उसने मेरे मुँह कों चोदना शुरुआत कर दिया। मेरे पति नें मेरी जांघों कों फैलाया औऱ मेरी बुर कों चूमने लगा। मेरी बुर मे पानी भरनेलगा औऱ मेरा पति मेरी बुर कां रस पीनेलगा। मैंने भि उसका लण्ड मुँह मे लेकर मज़ा लेना शुरुआत कर दिया। उसके सुपाड़े सें रस कि बूँदटपक रही थि औऱ मेरी जुबान पऱ उसका नमकीन स्वाद बहोत हि अच्छा लगरहा थां।
उधर हिना औऱ अमोल कि चुदाई कि आवाज़ें आनेलगी, हिना फुसफुसा रही थि- “अमोल मेरे दोस्त, धीरे-धीरे सें, तेरा लण्ड इतना बड़ा औऱ मोटा हैं कि मुझे अपनीतंग बुर मे लेने मे बहोत मुश्किल हौ रही हैं। प्लीज… धीरे-धीरे पेल नाँ, तुझ सें तोँ भैया कां लण्ड अच्छा हैं जोँ कि 6 इंच कां हैं औऱ तेरी बेहन मीना कों कोई तकलीफ़ नहि होती, भैया सें चुदवाने मे। अब जल्द सें पेलदो नाँ, मेरी बुर कसमसा रही हैं लण्ड केँ लिए। प्लीज… मुझे धीरे-धीरे चोदो जैसे भैया तेरी बेहन कों चोदते हें। काश… मुझे भि भैया जैसा 6 इंच कां लण्ड आहिस्ता चुदाई कि जन्नत दिखा पाता?”
हम् हिना कि आवाज़ सुनकर चौंक पड़े।
कुछ हि देर मे मेरी बुर नें पानी छोड़ दिया औऱ हिमांशु केँ लण्ड कों मैंने चूस-चूसकर खलासकर दिया।
दूसरे कमरे सें हिना कि आवाज़ तेज हौ रही थि- “अमोल, बहनचोद धीरे-धीरे सें चोद… मुझेकोई रंडीसमझ रखा हैं, मे तेरी बेहन हूं औऱ अब पत्नि बनी हुई हूं… प्रेम सें चोद मुझे, जैसे मेरा भइया तेरी बेहन कि चुदाई करता हैं। मेरी बुर कि भोसड़ी बन गई, हैं तेरे लण्ड सें। अमोल मे झड़ने कों हूं, मेरी बुर तेरे मूसल लण्ड पऱ झड़रही हैं, ओह भैया मे झड़ी…”
मे औऱ हिमांशु येसभी सुनकर दरवाजे पर्र जा पहुँचे औऱ देखा कि अमोल भैया नें हिना कों घोड़ी बनाया हुआ थां औऱ पीछे सें उसकी चुदाई झुककर कररहे थें। भैया कां लण्ड बहुत मोटा थां औऱ हिना कि बुर केँ रस सें भीगाहुआ थां औऱ उसकी गाण्ड सें होताहुआ हिना कि बुर कों कुत्ते कि तरहचोद रहा थां। अमोल अपनी पत्नि केँ चूतड़ों पऱ जोर-शोर सें हाथमार रहे थें औऱ उसके कंधों पऱ दाँत गड़ारहे थें। हिना कि पीठ औऱ कंधों पर्र भैया केँ दातों केँ निशान पड़ेहुए थें।
हिना कसमसा रही थि, तड़परही थि, मगर भैया बेदर्दी सें चुदाई कररहे थें। अमोल औऱ हिना कि मजे केँ कारण आँखें बंदथीं। भैया केँ चूतड़ आगे पीछे होँ रहे थें जब अमोल केँ लण्ड नें पिचकारी छोड़ दि। कुछदेर मे दोनों थककरलेट गये।
हिमांशु औऱ मे वहीं सोफे पऱ बैठकर आराम करनेलगे, साम कों 6:00 बजे भैया औऱ हिनाउठ गये औऱ हमको देखकर हैरान हौ गये औऱ अपने नंगे जिश्म कों ढकने कि कोशिश करनेलगे।
मैंने कहा- “हिना, हमसे क्याँ शरमाना? तुम् मेरी भाभीबन चुकी हौ औऱ मे तेरी भाभीबन चुकी हूं। हम् हनीमून पर्र इसलिये लाई गयीँ, हें कि हमारे पति हमारी बुर कि सारी ऐंठन निकाल दें, हमारी बुर कों जितनी भि लण्ड कि भूख हैं हमारे पति उसको एक् बार अच्छी तरह सें मिटा देंगे। आज हमारे हनीमून कि शुरुआत हैं तोँ कोईखास तरीके सें सेलीब्रेट करना चाहिए। हिमांशु, क्याँ तेरी बेहन नें कभी शराबपी हैं? मैंने एक् बारपी थि, क्यूं नाँ हम् सब दो-दो घूँट पीकर अपने हनीमून कों आगे बढ़ाएं, इससे हमारी शरम औऱ झिझकखतम होँ जाएगी, क्यूं भैया?”
अमोल नें मेरीहाँ मे हाँ मिला दि।
हम् सब नें कपड़े पहनलिए औऱ हिमांशु औऱ अमोल शराब लेनेचले गये। मे औऱ हिना नहाने चली गई, औऱ जब हम् बाथरूम सें बाहर् निकलीं तोँ हमने पारदर्शी गाउनपहन लिए। हिना केँ जिश्म पर्र भैया केँ काटने कि निशान मुझे उत्तेजित कररहे थें। मुझे तमन्ना थि कि कोई मुझे जानवरों कि तरह जबरदस्त प्रेम करे औऱ बेरहमी सें चोद डाले। मगर मेरा पति तोँ बहोत कोमल किस्म कां इंसान थां, असल मे मुझे अमोल भैया जैसा पति चाहिए थां। मैंने एक् बार हिना केँ जिश्म केँ उन भागों कों चूमना शुरुआत कर दिया जहां-जहां पर्र भैया नें काटा थां।
हिना भि उत्तेजना सें कराहने लगी।
मैंने स्कीम बनानी शुरुआत कर दि कि केसे अपने भैया केँ लण्ड कां स्वाद लियाजाए। मैंने हिना सें कहा- “मेरी प्यारी हिना, मुझे तुम् पर्र बहोत प्रेम आँ रहा हैं। काश… मे कुछकर सकती, जिससे तेरी चुदाई हिमांशु जैसे कोमल व्यक्ति सें हौ सकती औऱ अमोल जैसा जानवर तुम्हारी तरफतंग नां कर पाता, काश… तेरी मुश्किल मे आसानकर सकती? तेरा सारा दर्द मे लें लेती औऱ सारी खुशी तुझेही दे सकती…”
हिना मेरे प्रेम कों देखकर मुश्कुरा पड़ी औऱ मेरे होंठों पर्र किस करनेलगी। हम् दोनों किसकर रही थि जब हमारे पति वापिस आँ गए।
अमोल नें अपनी पत्नि कों बाहों मे लेना चाहामगर मैंने भैया कों रोक दिया- “भैया, पहले तौ तुम् दोनों नहाकर आओ, औऱ फिन प्रेम करना। दूसरा हिना कां क्याँ हालबना दिया हैं तुमने? कोई स्त्री कों ऐसे प्रेम किया जाता हैं? अगर प्रेम करना हैं तोँ वैसेकरो जैसे हिमांशु मेरेसंग करता हैं। बेचारी हिना कि बुरी हालतकर दि हैं तुमने। अगर मेरी हालत हिमांशु ऐसीकर देता तोँ तुम को कैसा लगता?”
अमोल भैया हँसते हुए बोले- “मेरी बहना, विवाह केँ बाद प्रेम इसीतरह किया जाता हैं जैसे मैंने किया हैं। अगर हिना कों आनंद नहि आया तौ इसमें मेराकोई दोष नहि हैं, क्यूं हिमांशु? मे तोँ इसीतरह प्रेम करना जानता हूं…”
तभी वोँ दोनों नहाने चलेगये औऱ बाहर् आकर हिमांशु नें पेग बनाए औऱ हम् सब पीनेलगे। शराब नें हम् पर्र असर करना शुरुआत कर दिया। एक् बार हिमांशु नें हिना कों गलती सें अपने आगोश मे गिरा लिया क्योंकी उसने समझा कि वोँ स्त्री मे हूं। हम् दोनों नें सफेद गाउन पहनेहुए थें तोँ गलती होना स्वाभाविक थां।
मैंने अपने पति कों मजाक सें झिड़क दिया- “बेहन औऱ पत्नि मे फरक तौ देख लियाकरो…”
तोँ वोँ हँसते हुए कहनेलगा- “तुम् दोनों मे मुझेकोई फरक हि नहि दिखता तौ मे क्याँ करूँ? मुझे तोँ तुम् दोनों हि सेक्सी लगरही होँ…”
मे- “तोँ भैया कहीं थोड़ी देर मे मुझे हि अपने पलंग मे मत लेँ जानां क्योंकी तुम्हारी तरफ अपनी बेहन औऱ पत्नि एक् हि जैसीलग रही हैं…”
अमोल भि हँसता हुआ बोला- “तौ क्याँ हैं? अगरऐसा हुआ तोँ, मुझे मीनामिल जाएगी औऱ इसतरह हमारा हनीमून भि डबल हौ जाएगा, क्यूं हिमांशु? हिना औऱ मीना कों भि हनीमून मे दो-दो मर्दों कां स्वाद मिल जाएगा औऱ हम् दोनों कों दो-दो पत्नियां मिल जाएंगी। मे तोँ इस विचार सें हि उत्तेजित होँ रहा हूं कि क्यूं नां पत्नियों कि अदला-बदली भि करलीजाए औऱ वोँ भि जब अदला-बदली मे चोदने केँ लिए हमको अपनी बेहन मिलेगी। मे तोँ हमेशा सें हि मीना कों चोदने कां सपना देखता आया हूं…”
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