छोटी-छोटी रसीली कहानियां, Total 18 stories Complete - desi kamuk kahaniyan – New Episode
गैंगबैंग_ज़ारा कां (Zara kaa Gangbang)
लड़कियां दोवजह सें रखैल बनती हें। एक् यह कि उनकोयह सभी अच्छा लगता हैं याँ दूसरी वजहयह कि उनको रुपया चाहिए होता हैं। जबकि मेरीऐसी कोई मजबूरी नहि। मे एक् अमीर खानदान सें हूं, औऱ मुझे अपने गुरूर कि सजा मिली हैं।
यहसभी तब शुरुआत हुआजब मैंने एम॰काम॰ केँ बाद प्राइवेट कालेज मे लेक्चररशिप शुरुआत कि, क्योंकी मुझे पढ़ाना अच्छा लगता हैं। अरे मैंने अपना पूरा परिचय दिया हि नहि। मेरा पूरानाम “ज़ारा जब्बार” हैं, मेरारंग सफ़ेद औऱ मेरा फिगर 38-32-40 हैं, औऱ मे लाहोर कि रहने वाली हूं, औऱ इस वक़्त मेरीउमर 28 साल हैं औऱ मे अविवाहित हूं।
मेरेघऱ मे सिर्फ़ अब्बू हें। क्योंकी मेरी अम्मी कां मेरे बचपन मे हि इंताकल होँ गय़ा थां। जिस टाइम मैंने एम॰काम॰ कियाउस समय मेरीउमर 23 साल कि थि औऱ मेराफिग 34-28-36 थां… औऱ मुझमें गुरूर कूट-कूटकर भराहुआ थां। क्योंकी मे नाज़ों सें पली बढ़ी हूं। औऱ मेरीहर फरमाइश बिना माँगे पूरी कि जाती हैं। अब सोचती हूं कि काश… मुझमें यह गुरूर नाँ होता तौ आज मे इतनी बड़ी मुसीबत मे होती।
एम॰काम॰ मुकम्मल करने तक कई लड़कों नें मुझसे बात करने कि कोशिश कि औऱ दोस्ती केँ लिए भि हाथआगे बढ़ाया मगर मैंने किसी कों लिफ्ट नहि दि। औऱ एम॰काम॰ केँ बाद मैंने जाब करने कां फैसला किया औऱ पिताजी नें भि मेरी हिमायत कि। सो मे एक् अच्छे सें कालेज मे पढ़ाना शुरुआत कर दिया जौ कि अब्बू केँ एक् साथी कां थां। कालेज बहुत बड़ा हैं औऱ दो गार्ड जोँ कि पठान हें उनकेनाम ‘हामिद खान’ औऱ ‘जुनेद खान’ हें। वोँ कालेज कि चोकीदारी करते हें, औऱ अंकल केँ बहोत भरोसेमंद व्यक्ति हें।
उस टाइम मे ग्रॅजुयेशन तक केँ स्टूडेंट्स कों अकाउंटिंग पढ़ाती थि। 6 महीने ठीक गुजरगए मगर एक् रोज एक् ऐसा वाकिया हुआ कि जिसने मुझे क्रोध दिला दिया। मेरे एक् स्टूडेंट नें 14 फरवरी (रोजडे) पे मेरी क्लास कि एक् फीमेल कों कालेज कैंपस मे सबके सामने किसकर दि (उसने अपने दोस्तों सें इसकी शर्त लगाई थि जोँ मुझेबाद मे पताचला। ) वोँ लड़की रोती हुई वहा सें निकल गई।
मुझेउस लड़के पे बहोत क्रोध आयाहुआ थां औऱ मैंने प्रिन्सिपल सें बात करके उसको कालेज सें निकलवा दिया। जिससे उसका एक् साल जाया होँ गय़ा। उसने मुझसे औऱ प्रिन्सिपल सें माफी माँगने कि बहोत कोशिश कि। मगर मे उसकीकोई बात सुनने कों रेडी नहि थि औऱ मैंने यह तक कह दिया कि इस कालेज मे याँ तोँ मे रहूंगी याँ यह रहेगा। सो उसको कालेज सें निकाल दिया।
यहा सें असल किस्सा शुरुआत होती हैं। मैंने उसको तौ निकलवा दियामगर यहभूल गई कि इनका पूरा ग्रूप कालेज मे पढ़ता हैं याँ काम करता हैं। कुछदिन ठीक गुजरे औऱ उसकेबाद जौ कुछहुआ, वोँ बहोत बुराहुआ।
क्याँ हुआ थां? आइए मे आपको बताती हूं।
वोँ दिन बाकी दिनों सें अलग थां। उसदिन मौसम बहोत सुंदर थां, एकदम रोमँटिक। मैंने कालेरंग कि शलवार-कमीज औऱ मैचिंग ब्रा अंडरवेर पहना थां। उसदिन तोँ मेरा भि दिलकर रहा थां कि इस मौसम मे कोई मेरेसंग भि होता। कालेज मे एग्ज़ॅम्स चलरहे थें औऱ उसदिन सटर्डे थां। मेरे अब्बू ुबईगए हुये थें औऱ उन्होंने मंडे कों वापस आनां थां। दोपहर तक सभी स्टूडेंट्स चलेगए थें। अब कालेज मे सिर्फ़ टीचर्स औऱ लैब स्टाफ थां। साम 4:00 बजे तक पूरा कालेज खाली होँ गय़ा सिर्फ़ मेरे अब्बू केँ मित्र अली (प्रिन्सिपल), मे औऱ लैब स्टाफ रह गय़ा थां।
औऱ यहीं सें उनका प्लान शुरुआत हुआ। उन्होंने कालेज केँ हर एरिया मे कैमरे स्लिम किए हुये थें। जोँ कि अंकल नें हि कहा थां लैब असिस्टेंट कों। 4 लोग कंप्यूटर लैब मे काम करते थें। अंकल नें मुझेसंग लेकर जानां थां क्योंकी उस दिनमैं अपनीकार मे नहि आई थि।
उन्होंने मेरा पूछा तौ लैब असिस्टेंट नें कह दिया कि मे जा चुकी हूं मगर मे अपने केबिन मे बैठी पेपर्स चेककर रही थि औऱ बेखबर थि कि क्याँ होँ रहा हैं। अंकलचले गए औऱ मुझेपता भि नहि चला।
5 बजेलैब असिस्टेंट मेरेरूम मे आया औऱ कहा- “ज़ारा अबबसकरो औऱ चलो बाहर् चलो। मिलकर मौसम एंजाय करते हें…”
मे उससे बेताकल्लूफ नहि थि तोँ मैंने उसको झिड़क दिया औऱ बाहर् जाने कों कहा। उसने जल्दी अपना लहजाबदल लिया औऱ बोला- “गश्ती तुम्हारी तरफ एक् बार मे बातसमझ मे नहि आती?”
मुझे तौ झटकालगा। मैंने जोर सें एक् तमाचा उसके मुँह पे मार दिया। उसकी आँखें गुस्से सें लाल हौ गईं। मे भागकर बाहर् निकली औऱ अंकल केँ आफिस मे गई। वोँ वहा नहि थें। मे जल्द सें वहा सें भागने लगी, मगर मेरी किश्मत कि वोँ 4 लैब असिस्टेंट दरवाजे मे खड़ेहुए थें औऱ मेरीतरफ घूरकर देखरहे थें। मेरा तोँ डर केँ मारेगला खुश्क होँ गय़ा। अब वोँ चारों हँसरहे थें। उन चारों केँ नामयह हें जमील, इमरान, इरफान, सैफ। मैंने इमरान कों थप्पड़ मारा थां।
इमरान मेरे लगभगआने लगा।
मे- देखो, मेरे लगभगमत आओ। तुम् जानते होँ नाँ कि मे किसकी बेटी हूं। अगर मुझेकुछ किया तौ तुम् जानते हौ कि तुम् बच नहि पाओगे। वोँ मेरीबात सुनकर औऱ जोर सें हँसने लगा। मेरा तोँ गला खुश्क हौ गय़ा डर केँ मारे। मैंने उनको पैसों कि आफर भि कि मगर वोँ नहि माने।
तभी इरफान बोला- “साली, तूने हमारे जिगरी मित्र साहिल कों कालेज सें निकलवाया हैं। आज तोँ तुम्हें नहि छोड़ेंगे…”
मैंने कहा- मे उसका अड्मिशन दोबारा करवा दूँगी। औऱ माफी भि माँगूँगी, मगर प्लीज़ मुझे जानेदो…”
मगर वोँ कहां मानने वाले थें। तभी मैंने देखा कि वहा 6 लोग औऱ आँ गए जौ कि इसी कालेज क स्टूडेंट्स थें। जिनमें साहिल भि शामिल थां। मैंने सबके सामने हाथ जोड़दिए, मगर उसकाकोई फायदा नहि हुआ।
साहिल- “अरे मेडम… हमें पैसे नहि आप् चाहिए… तभी तौ मेरे बदला पूरा होगा। औऱ आप् हें कि मुझे अड्मिशन दिलवाओगी। देख्ना…”
मैंने उससे माफियां माँगी मगर वोँ कुछ सुनने कों सजधजकर हि नहि थां।
साहिल- “मेडम एक् डील करते हें। आप् हम् सबके सामने नाचें औऱ मेरे लण्ड कों चूसकर उसका पानी निकलदें, तभी हम् आपको जाने देंगे…”
मे तौ सुनकर चकितरह गई। मैंने उसे मनाने कि बहोत कोशिश कि।
मगर वोँ नहि माना औऱ बोला- “देखो मेडम, अगर आप् ऐसा नहि करोगी तोँ हमें मजबूरन आपकारेप करना पड़ेगा, औऱ उसमें आपका अपना हि नुकसान हैं…”
मे- “ठीक हैं… मगर मेरी शर्त हैं कि बाकीसभी लोग बाहर् जायेंगे, औऱ यहा केँ सब कैमरे कों बंदकरो…”
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007 wrote:जौनपुर भइया आपने तोँ लट्ठगाढ दिया बहोत मस्त कहानियाँ पोस्ट कि हें आपने Thanks bro, aapko khani पसन्द aaii, achcha lga. .
छोटी-छोटी रसीली कहानियां, Total 18 stories Complete - desi kamuk kahaniyan – New Episode
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उसने इनकार कर दिया-“अरे मेडम, हम् सभी इकट्ठे एंजाय करेंगे आपका डान्स, औऱ रहीबात वीडियो कि तोँ वोँ इसलिये बनेगी कि भविष्य मे आप् हमारे विरुद्ध कोई शिकायत नां करदें…”
सभीलोग मेरे आस-पास सोफे पे बैठगए औऱ मे कमरे केँ बीच मे खड़ी थि। गाना शुरुआत हुआमगर मे नाचने मे हिचकिचा रही थि।
साहिल बोला-“आए गश्ती… अगर तूने 5 गिनने तक नाचना शुरुआत नहि किया तोँ हम् सभी तेरे कपड़े फाड़कर तुम्हे यहीं चोदना शुरुआत कर देंगे- 1… 2… 3… 4…
औऱ मैंने नाचना शुरुआत कर दिया। मुझे नाचना तौ नहि आता थां मगर मैंने अपनीकमर औऱ चूतड़ों कों सेक्सी तरह सें हिलना शुरुआत कर दिया। 5 मिनटबाद दूसरा गानाचला। इसतरह मैंने 5 गानों पे डान्स किया। मैंने देखा कि सभी अपने लण्ड बाहर् निकालकर हिलारहे हें।
यह देखते हि मेरी तोँ बुर गीली हौ गई।
साहिल नें मुझे अपनेपास बुलाया- “ओ गश्ती… इधर आँ औऱ मेरा लण्ड मुँह मे लेँ…”
मे उसकीतरफ जानेलगी।
तौ वोँ बोला- “साली, चारों हाथों-पैरों पे कुतिया कि तरह आँ…”
मे चारों हाथों-पैरों पे कुतिया बनकर उसकीतरफ गई। उसके लण्ड कों हाथ मे पकड़ने लगी।
तभी उसनेजोर सें मेरे मुँह पऱ थप्पड़ मार दिया औऱ बोला- “साली, तुझेही किसने बोला लण्ड कों हाथ लगाने कों?”
मेरा दिमाग़ घूम गय़ा। उसने मुझे बालों सें पकड़कर खींचा तोँ मेरीचीख निकल गई औऱ मेरी आँखों मे आँसू आँ गए।
उसने मुझे अपने लण्ड पे झुकाया तोँ मैंने अपना पूरा मुँहखोल दिया औऱ उसके लण्ड कां टोपा मुँह मे लेकर चूसने लगी। उसने मेरा मुँह पकड़कर अपने लण्ड पे दबा दिया। उसका लण्ड मेरेगले तक चला गय़ा। अभि आधा लण्ड हि गय़ा थां औऱ मेरी तौ तोँ साँसरुक गई थि। उसने मुझे बालों सें पकड़कर अपना लण्ड मेरे मुँह मे अंदर-बाहर् करना शुरुआत कर दिया। 5 मिनट मे हि मेरे जबड़े दर्द करनेलग गए।
उसके मुँह सें- “ऊऊऊओह… आआअह्ह… साल्ली… क्याँ गर्म मुँह हैं तेरा? छिनाल्ल…” कि आवाजें निकलरही थीं, औऱ जब वोँ लण्ड मुँह मे डालता तौ थोड़ी देररुक जाता। जब बाहर् निकालता तौ मे साँस लेती औऱ उसकेबाद जब उसका लण्ड मुँह केँ अंदर जाता तोँ मेरी साँसरुक जाती।
तभी उसने अपना लण्ड मेरे मुँह सें निकाल लिया। मेरे मुँह सें उसके लण्ड तक प्री-कम कि वजह सें तार सि बनी हुई थि। चल साली मेरी गोटियां चूस… औऱ मेरेसिर कों अपनी गोटियों सें लगा दिया।
एक्-एक् करके मैंने उसकी दोनों गोटियां चूसनी शुरुआत करदीं। मुझे तोँ उबकाई आँ रही थि। मगर मे कर भि क्याँ सकती थि।
बाकी 9 लोगइस शो कों एंजाय कररहे थें। उसने मेरे बालों सें पकड़कर अपने चेहरे केँ लगभग किया औऱ मुझे रंडी कि औलाद, साली, गश्ती आदि गालियां देनेलगा। तभी उसने मेरा मुँह जोँ कि आधा खुला थां, मे अपनीथूक फेंकी औऱ मुझे घुटने पे झुका दिया। मे थूक बाहर् निकालने लगी तोँ उसने जबरदस्ती मेरा मुँहबंद कर दिया। मजबूरन मुझे उसको निगलना पड़ा। उसने मेरे मुँह मे एक् औऱ बार थूका औऱ दोबारा मुझे अपने लण्ड पे झुका दिया। तभी उनमें सें किसी नें मेरेहाथ पीछे खींचलिए। मे यह नाँ देखसकी कि वोँ कौन हैं। औऱ उन्होंने मेरे दोनों हाथ बाँधदिए। इधर साहिल तेजी सें मेरे मुँह कों चोदरहा थां।
बाकी लोगों नें भि अपने कपड़े निकाल दिए, औऱ मेरे आस-पास घेरा बनाकर मूठ मरनेलगे। मे देख तोँ नहि सकती थि पऱ सबकी आवाजें सुन सकती थि। उन्होंने एक् कैंची निकाली औऱ मेरी कमीज कों काटना शुरुआत कर दिया। मे विरोध करनाचाह रही थि, मगर मुँह कि चुदाई औऱ हाथ बँधे होने कि वजह सें कुछ नां करसकी। थोड़ी देर मे मे अपनी ब्रा मे थि औऱ सभीलोग सीटियां मारने लगे औऱ आवाजें कसनेलगे- “हाए गश्ती, इसकी मां कों चोदूं, भोसड़ी कि, छिनाल आदि गालियां भि देनेलगे।
मे साहिल कां लण्ड मुँह सें निकालना चाहरही थि मगर उसकी मजबूत पकड़ नें ऐसा नहि करने दिया। तभी मुझे महसूस हुआ कि कोई मेरी शलवार काटरहा हैं। मे बचनाचाह रही थि मगर मेरे मुँह सें सिवाए ‘म्म्म्मह… न्नहिँ’ केँ सिवाकुछ नहि निकलसका। फिन उन्होंने यहीहाल मेरी ब्रा औऱ पैंटी केँ संग किया। अब मे बिल्कुल नंगीउन 10 लोगों केँ सामने थि। मे हिल भि नहि पारही थि।
तभी साहिल कां लण्ड मेरे मुँह मे फूलने लगा औऱ उसकी आवाज़ आई- “साली रंडी, अगर एक् भि बूँद नीचे गिरी तोँ हम् तेरी गाण्ड मे 2-2 लण्ड घुसेड़ेंगे औऱ वोँ भि बिनातेल केँ… पीजा मेरा पानी… साली रांड…” इसकेसंग हि 1… 2… 3… 4… 5…
इसकेआगे तौ मे भूल गई औऱ उसके पानी कों जल्द-जल्द गले सें नीचे उतारने लगी। 5 मिनट तक उसनेकम सें कम 20-25 पिचकारियां छोड़ी होंगी। शायद वोँ बहोत अरसे सें नहि झड़ा थां। मेरा तौ पेट बिल्कुल भर गय़ा थां। ऐसालग रहा थां कि जैसे मैंने खूब डटकर खानां खाया हौ। उसनेफिन भि लण्ड मेरे मुँह सें नहि निकाला औऱ अगले 5 मिनट तक धक्के मारता रहा। उसकेबाद उसने लण्ड बाहर् निकाला तोँ मुझे बहोत जोर सें खाँसी आनेलगी। फिन उसके कहने पे मैंने उसका लण्ड चाट-चाटकर साफकर दिया।
इसबीच इन 10 लोगों मे सें कोई मुझेकिस कररहा थां, कोई मेरे चूतरदबा रहा थां, कोई गाण्ड मे उंगली कररहा थां, कोई चूचियों केँ संगखेल रहा थां। मतलबयह कि मेरे जिश्म कां कोई हिस्सा ऐसा नहि थां जौ मसला नाँ गय़ा हौ औऱ मे घुटनों केँ बल जमीन पे बैठी थि… याँ ऐसे कहूँ कि उन्होंने मुझे जबरदस्ती बिठा दिया थां औऱ मुझे मुँह खोलकर जबान बाहर् निकालने कों कहा।
मैंने इनकार किया तोँ एक् जोरदार थप्पड़ मेरे गालों कों लालकर गय़ा औऱ मुझेदिन मे तारेनजर आनेलगे। मजबूरन मुझे उनकीबात माननी पड़ी।
अब बाकी 9 लोग मेरे इर्द-गिर्द खड़े होकरमूठ माररहे थें। थोड़ी देरबाद सभी नें झड़ना शुरुआत कर दिया। सभी लोगझड़ रहे थें औऱ मुझे कुतिया, रांड़, आदि बोलते जारहे थें। औऱ अपना पानी मेरे जिश्म पर्र निकालते गए। मे सबके पानी सें पूरीतरह गीली होँ चुकी थि। मेरे जिश्म कां कोई हिस्सा ऐसा नहि थां जिस पे उन लोगों कां पानी नां लगा होँ। मे अपनी आँखें भि नहि खोल सकती थि। जबसभी लोग फारिघ होँ गए तोँ मुझे देखकर हँसने लगे औऱ मेरादिल कररहा थां कि अभि जमीनफट जाए औऱ मे उसमें समा जाऊँ।
अब उन्होंने मेरेहाथ खोलदिए, औऱ मुझे उठाकर अंकलअली केँ आफिस केँ अटैच बाथरूम मे लें गए। औऱ मेरे जिश्म कों अच्छी तरह रगड़-रगड़कर धोया। मेरी बुर औऱ गाण्ड मे उंगलियां भि कीं। फिन हम् सभी बाहर् आँ गए। मैंने वक्त देखा तोँ 9:00 बजरहे थें। इसका मतलब कि मुझेयह सभी करते 4 घंटे होँ चुके थें। मेरेगले औऱ जबड़ों मे बहोत दर्द होँ रहा थां।
बड़ी मुश्किल सें मैंने उनसेकहा- “प्लीज़… अब तौ मुझे जानेदो। जौ कुछ तुमने कहा, वोँ मैंने किया हैं। प्लीज़ अब मुझे जानेदो…”
तभी इमरान बोला- “मेरी रांड़… इतनी भि क्याँ जल्द हैं… अभि हमें अपने जिश्म सें जी भरके खेलने तोँ दे। हमारे पासआज कि पूरीरात औऱ कल कां पूरादिन हैं। लेट्स एंजाय…”
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rajaarkey wrote:यार आपका बहोत दिन सें प्रतीक्षा थां आप् आए बहारआई धन्यवाद इतनी अच्छी कहानियाँ पढ़ने कों देने केँ लिएअब तोँ आपकीनई कहानियों कां शोर शुरुआत होँ चुका हैं बहोत मजा आएगा Thanks rajaarkey bro for warm welcome. One request: Please make provision of replying multiple responses in a single post, too save waqt and be able too reply all comments. This will also madad readers too find kahani content quickly. Thanks
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मैंने इनकार करना चाहामगर मेरे ‘नां’ बोलने सें पहले हि मेरेगाल पे एक् जोरदार थप्पड़ लग चुका थां। तभी एक् चौकीदार हामिद खान अंदरआया (जिनदो कां पहलेऊपर जिकर किया हैं, उनमें सें एक्) औऱ अंदर कां नजारा देखकर हैरतज़दा हौ गय़ा। पहले उसने सबको गुस्से सें देखा तौ मेरीजान मे जान आँ गई कि शायदअब मे बच जाऊँमगर यह मेरीभूल थि।
अबआगे चलते हें।
हामिद खान कि मुश्कुराहट कों देखकर मे परेशान हौ गई, औऱ बाकीसभी खुश होँ गए। वोँ मुझे उठाकर स्टाफ रूम मे लेँ आए।
मैंने बहोत कोशिश कि उनसे छूटने कि मगरकुछ फायदा नहि हुआ। इतनीदेर मे जुनेद खान भि आँ गय़ा औऱ मुझे देखकर पहले हैरान हुआ औऱ फिन बहोत खुशहुआ। वोँ सभी मेरे आस-पास खड़ेहुए थें।
साहिल बोला- “गश्ती… चलअबदेख तेरे 12 दोस्त तुम्हारी तरफ केसे चोदेंगे? छिनाल…”
मेरी आँखों मे आँसू आँ गये। मगर उनपे इसकाअसर नहि हुआ। मे अपने हाथों सें अपने जिश्म कों ढकने कि नाकाम कोशिश कररही थि। अब कमरे मे 12 लोग थें। उनकेनाम बतादूँ- साहिल, जमील, इमरान, इरफान, सैफ, बाकी 5 लोग जमाल, अल्फ़ा, कामरन, काशिफ, माज औऱ दो पठान जिनके लण्डइन सबसे बड़े औऱ मोटे थें- हामिद औऱ जुनेद।
मे सोचरही थि कि मेरेसंग क्याँ होगा।
फिन साहिल आगेआया औऱ उसने मुझे पकड़कर अपनेसंग चिपटा लिया, औऱ मेरे होंठ चूसने लगा।
मेरे मुँह सें सिर्फ़ “म्म्म्ममह… उउम्म्म्ममह…” कि आवाज़ निकलसकी।
सभीलोग मेरे आस-पास खड़े होँ गए औऱ मुझे चूमने लगे। मेरे जिश्म कां अंग-अंग उन्होंने चूमा चूसा। मेरे जिश्म पऱ हर स्थान पे निशान पड़गए। मेरा जिश्म गर्म हौ गय़ा थां। मे उनसभी कों रोकना चाहरही थि मगर साहिल मेरे होंठ नहि छोड़रहा थां।
मेरे मुँह सें सिर्फ़ “न्नहीं म्म्ममम… प्लीज़… म्म्म्ममह…” कि आवाजें निकलरही थीं। जब कि मेरा जिश्म मेरासंग नहि देरहा थां।
इतनीदेर मे हामिद मेरी बुर कों हाथ सें सहलाने लगा। मेरी बुर सें पानीबह रहा थां। यह देखकर वोँ बोला- “साली छिनाल कों मज़ा आँ रहा हैं। ऐसे हि नखरेकर रही हैं…” औऱ वोँ सभी हँसने लगे।
जबकि मे शरम सें पानी पानी होँ गई।
तभी साहिल नें मुझे टेबल पे लिटा दिया औऱ कहनेलगा- “मेडम कों सबसे पहले मे चोदूँगा क्योंकी मेडम सें मैंने बदला लेना हैं…”
सभीमान गए।
उसने मेरी बुर पे अपना लण्डरखा औऱ उसको रगड़ने लगा। मेरी तौ हालत पतली होँ गई। मे चाहती थि कि वोँ जल्द सें अंदरडाल दे। इसलिये मैंने अपनीकमर उचकानी शुरुआत कर दि। यह देखकर उसने अपना लण्ड पीछे खींच लिया। उसने 2-3 दफाऐसा किया।
फिन आखिर मे बोल पड़ी- “आआअह्ह… प्लीज़्ज़… डालदो नां… आआअह। ह…”
साहिल- क्याँ डालूँ, मेरी गश्ती?
मे- “प्लीज़्ज़… अब औऱ नाअ तड़पाओ…”
साहिल- “तूँ जब तक नहि कहेगी कि तुम्हें क्याँ चाहिए? मुझे कैसापता चलेगा?”
मे- “प्लीज़… आआअह्ह… अपना लण्ड म्म्म्मेरी बुर मेंई डालोनाअ… ऊऊऊईई…”
मेरीबात पूरी होते हि उसने एक् बहोत जोर कां धक्का मारा थां औऱ उसका लण्ड 4 इंच तक मेरी बुर मे घुस गय़ा थां औऱ मेरे मुँह सें बहोत जोर कि चीख निकल गई।
इसपे वोँ बोला- “साली 4 इंच घुसने मे इतना चिल्ला रही हैं। जब पूरा अंदर जाएगा तौ फिन क्याँ होगा?”
मेरी बुर सें खून निकलरहा थां। अब मे लड़की सें महिला बन चुकी थि। मे उसकोपरे ढकेलने कि कोशिश कररही थि, मगर उसकाकोई फायदा नहि हौ पारहा थां। उसने 3 बहोत जोरदार धक्के मारे औऱ पूरा लण्ड मेरी बुर केँ अंदर थां। मुझेऐसे लगरहा थां कि जैसे मे मार जाऊँगी मगर मुझेमौत भि तौ नहि आँ रही थि। औऱ बुर मे उठने वाला दर्द नां काबिल-ए-बर्दाश्त थां।
अब मुझमें चीखने कि हिम्मत भि नहि थि। वोँ पूरा लण्ड अंदर डालकर थोड़ी देर रुका औऱ फिन बाहर् करनेलगा। मेरी सिसकियां फिन सें निकलने लगीं। ऐसे लगरहा थां कि जैसे मेरी बुर मे मिर्चें डाल दि हौ किसी नें। आहिस्ता-आहिस्ता मेरा दर्द जातारहा औऱ मुझे आनंदआने लगा। मेरी बुर गीली होँ गई औऱ कब मेरी टांगें उसके गिर्द लिपटगईं, मुझेपता भि नहि चला। अब वोँ तेज़-तेज़ धक्के माररहा थां औऱ मे मजे सें हवाओं मे उड़रही थि।
मेरी आवाजें निकालने लगी- “ऊऊऊओह… उउफफफ्फ़… मां… सस्स्स्स्स्स्स्शह… प्लीज़्ज़… औऱ जोर सें… आआअह्ह… एसे हि… हाआईयी…” औऱ मे पहलीबार लण्ड बुर मे जाने केँ बाद झड़ने लगी। औऱ नाँ जाने कितनी देर तक झड़ती रही, औऱ उसकेबाद सुस्त पड़ गई।
मगर साहिल केँ धक्कों मे कोईकमी नहि आई थि। वोँ मुझे लगतार उसी रफ्तार सें चोदता रहा औऱ गालिया देतारहा- “साली छिनाल, रंडी…मजे लें रही हैं…” औऱ तेज़-तेज़ सें मुझे चोदता रहा।
मे फिन सें गर्म होँ गई औऱ अपने आप् कमर हिलाने लगी।
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