पिशाच की वापसी - body-focused teasing – New Episode
लेखक:- अज्ञात/सतीश
भाइयो ये मेरी किस्सा नहीं हैं अच्छी लगी तोँ पोस्ट कररहा हु, अगर ये किस्सा किसी औऱ नाम सें इस फोरम पर्र होँ तौ बता दे.सतीश
पिशाच कि वापसी – 1
रात कां अंधेरा काला साया, खामोशी सें भरा, हल्की हल्की गिरती बारिश कि बूँदें। एक् पतली सि मार्ग औऱ उस मार्ग केँ दोनों तरफघना जंगल, बारिश कि वजह सें मार्ग गीली हौ चुकी थि, तभीउस सुनसान मार्ग पे एक् इंसान नज़रआया जौ धीरे-धीरे धीरे-धीरे आगेबढ़ रहा थां.
काले अंधेरे केँ साये मे वो व्यक्ति धीरे-धीरे धीरे-धीरे उस मार्ग पे आगेबढ़ रहा थां, उसने ब्लैक कलर कां लंबा सां कोट पहनाहुआ थां, गर्दन मे मोटा सां मफ्लर, हाथों मे ब्लैक कलर केँ ग्लव्स पहनरखे थें औऱ बारिश सें बचने केँ लिए उसने छतरीली हुई थि। मार्ग गीली होने कि वजह सें एक् अजीब सि आवाज़ उस व्यक्ति केँ चलने कि वजह सें आँ रही थि, अजीब सि आवाज़ … पकच.पकचह… पकचह……पकचह, उस स्थान पे इतनी शांति थि कि वो इंसान इस आवाज़ कों साफसाफ सुनपा रहा थां, अचानक वो व्यक्ति चलते चलतेरुक गय़ा औऱ उसने अपनी गर्दन पीछे कि तरफ घुमाई, उस इंसान नें आधे चेहरे पे कपड़ा बाँधरखा थां, उसकी आँखों सें देख केँ ऐसालग रहा थां मानो वो कुछ ढूँढरहा हौ, धीरे-धीरे धीरे-धीरे उसने अपनेहाथ सें चेहरे पे पहना मास्क हटाया, मगर पीछे देखने कां कोई फायदा नहि मिलरहा थां क्यूं कि पीछे सिर्फ़ अंधेरा थां औऱ कुछ नहि, उस व्यक्ति नें फिन सें अपनी नज़रे सामने कि औऱ कि फिन वो सामने चलनेलगा.
बारिश अब बहुत धीमी हौ चुकी थि, औऱ ठंडीहवा धीरे-धीरे धीरे-धीरे चलनेलगी, वो व्यक्ति चलते चलतेकभी अपने लेफ्ट देखता तौ कभी राइट, उसके चेहरे पे हल्की सि घबराहट दिखाई देरही थि.
माहौल हि कुछऐसा थां, काला अंधेरा, सुनसान स्थान, जहाँ सिर्फ़ एक् इंसान केँ अलावा कोई नां होँ ऐसे मे अगर इंसान डराहुआ हौ तोँ यहसमय बहुत होता हैं किसी कि भि दिल कि धड़कने तेज करने केँ लिए, यही हुआइस इंसान केँ संग भि, आगे तोँ वो धीरे-धीरे धीरे-धीरे बढ़रहा थां पऱ उसकेदिल कि धड़कने उसके चलने सें कई ज़्यादा गुनातेज चलरही थि.
“11 बजगये, मुझे जल्द पहुंच केँ सारेी बात अच्छे सें बतानी पड़ेगी"
उसनेसमय देखते हुए अपने आप् सें कहा औऱ बोलते हुएफिन आगे बढ़ने लगा कि तभीउसे ऐसा आभासहुआ मानो उसके पीछेकोई होँ औऱ उसकेसंग संग उसके पीछेचल रहा होँ, उस व्यक्ति कि दिल कि धड़कने औऱ तेज हौ गई,, चेहरे पे घबराहट कि लकीरें औऱ फैल गयीँ,, उसके माथे कि शिकनफैल गयीँ,, उसकी साँसें तेजचल रही थि, पऱ फिन भि वो चलेजा रहा थां, मगरकुछ हि सेकेंड वो आगेचला थां कि वो रुक गय़ा, क्यूं कि उसकेमन औऱ उसकेमन सें अभि तक वो डर नहि गय़ा थां, उस अभि तक लगरहा थां कि कोई उसके पीछेचल रहा हैं, वो रुकते हि पीछेघूम गय़ा औऱ एक् बारफिन सें उस काले अंधेरे मे देखने कि कोशिश करनेलगा, मगरजब उसेलगा कि कोई नहि हैं वो वापिस घूमके चलनेलगा.
धीरे-धीरे धीरे-धीरे चलरही हवातेज होनेलगी, हवा चलने कि वजह सें पेड़ों कि आवाज़ नें उस स्थान कों खामोशी सें बाहर् निकल लिया.
वो व्यक्ति कुछ बड़बड़ाते हुई आगेबढ़ रहा थां, उसके चेहरे पे घबराहट अभि तक बननी हुईँ थि.
"कौन हैं"
अचानक वो चलते चलतेरुक गय़ा औऱ एक् दम सें चिल्ला पड़ा,
“कौन हैं"
इधरउधर देखते हुए वो फिन सें एक् बार चिल्लाया। मगरकुछ नहि थां, हवा केँ चलने कि वजह सें वहां पेड़ों केँ पत्ते हिलरहे थें औऱ उसके अलावा कुछ नहि.
उस व्यक्ति नें अपने चेहरे कों अपने हाथों सें सहलाया,
"क्याँ होँ गय़ा मुझे, यह सभी सिर्फ़ उनसभी चीज़ों कि वजह सें होँ रहा हैं जौ 2 दिन सें मे सुनरहा हूं, देखरहा हूं, यहसभी उसी कां असर हैं"
अपने आप् सें कहतेहुए एक् बारफिन वो चलनेलगा औऱ कुछ सोचने लगा ….
दूसरी तरफ……
घऱ केँ हॉल मे बहोत सें व्यक्ति ज़मीन पे बैठे थें औऱ आपस मे बातें कररहे थें, उनकी आवाज़ सें उसहॉल मे अजीब सां हंगामा गूँजरहा थां कि तभी.
"अरे साहब आँ गये"
एक् व्यक्ति हाथ जोड़ केँ खड़े होतेहुए बोला, उसकेसंग मे सब खड़े हौ गये.
उन सभी केँ सामने एक् व्यक्ति खड़ा थां जोँ देखने मे लगभग 30-35 साल कां नॉर्मल सां इंसान लगरहा थां, गरम कपड़े पहनरखे थें, वो सीधा चलताहुआ आया औऱ कुर्सी पे आकरबैठ गय़ा.
"छोटू ज़राआग कों थोडा औऱ बड़ादे, ठंडकुछ ज़्यादा हि बढ़ गई, हैं"
उस व्यक्ति नें अपने नौकर सें अपनी वज़नदार आवाज़ मे कहा, औऱ फिन सामने सब कों देखने लगा.
"जी साहब, लकड़ियाँ पीछे वाले कमरे मे हैं, मे अभि लेकरआता हूं"
बोल केँ वो निकल गय़ा.
“आप् लोग खड़े क्यूं हैं बैठ जाइये"
उस व्यक्ति नें सामने खड़े लोगों कों बैठने केँ लिएकहा, सब ज़मीन पे बिछे कार्पेट पे बैठगये.
"कहिएऐसी क्याँ जरूरी बात करनी थि जोँ आप् सभीयहा तक आए वो भि इसठंड मे"
"हम् वहांकाम नहि कर सकते"
एक् व्यक्ति थोडा गुस्से मे खड़े होते हुईँ बोला.
“काम नहि कर सकते पऱ क्यूं, क्याँ वजह हैं"
कुर्सी पे बैठे व्यक्ति नें जवाब बड़ी नर्मी सें दिया.
"वजह नहि पता आपको, पिछले 2 दीनों मे क्याँ क्याँ हुआ हैं वहां उसके बारे मे आपकोकुछ नहि पता हैं, याँ फिनपता होतेहुए भि हमसे छुपाने कां नाटककर रहे हें"
फिन सें वो व्यक्ति थोड़ी ऊंची आवाज़ मे बोला.
बढ़िया उपडेट तुस्सी छागएबॉस अगले एपसोड कां इंतजार रहेगा
संगबने रहने केँ लिये आप् सभी कां बहोत आभारी हूं
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पिशाच की वापसी - body-focused teasing – New Episode
पिशाच कि वापसी – 2
"देखो मुझेकुछ नहि पता हैं, तुम् क्याँ कहना चाहते हौ साफसाफ बताओ"
नर्मी सें एक् बारफिन सें जवाबआया.
"यहचुप होँ जा, बडे साहब सें बात करने कि तुझेही तमीज हैं कि नहि"
दूसरे व्यक्ति नें उसकाहाथ पकड़ केँ उसेकहा.
"माफ करना साहब, जवानखून हैं जोश मे थोडा ऊंचाबोल गय़ा, यह नहि ध्यान रहा कि मजदूर औऱ मालिक मे बहोत फर्क होता हैं"
उस व्यक्ति नें सामने हाथ जोड़ केँ माफी माँगी
"कोईबात नहि, तुम् यहसभी छोड़ो औऱ यह बताओ आख़िर क्याँ हुआ हैं, जौ तुम् सभी इतने घबराए हुएलग रहे होँ मुझे”
"बात हि कुछऐसी हैं साहब कि जिसेसुन औऱ देख केँ घबराहट कि लहर हम् सब केँ जिस्म मे दौड़रही हैं"
उस व्यक्ति नें थोड़ी धीमी आवाज़ मे कहा, उसनेआगे कहना शुरुआत करा औऱ कहते कहते उसके चेहरे केँ भाव बदलने लगे.
"जिस स्थान पे हम् कामकर रहे हें साहब, वहांकुछ बहोत गलत चीज़ हैं, कोई हैं जोँ हमेंकाम करने देना नहि चाहता, कोई हैं जोँ हमें चेतावनी देरहा हैं वहां सें चले जाने कि"
“कोन हैं वो"?
कुर्सी पे बैठे व्यक्ति नें भि धीमी आवाज़ मे पूछा.
"शायदकोई शैतान हैं साहब, क्यूं कि एक् शैतान हि ऐसेकाम कर सकता हैं”
"केसेकाम कि बातकर रहे होँ तुम्, क्याँ हुआ हैं वहां”
"मौत, मौत हुई हैं वहां, वो भि कोईआम मौत नहि साहब, दर्दनाक मौत"
मौत कां नाम सुनते हि कुर्सी पे बैठे व्यक्ति कि आँखें बड़ी होँ गयीँ,, मानोउसे बहोत बड़ा झटका दिया होँ अभि.
“मौत, शैतान, क्याँ बोलरहे हौ रघु तुम्, मुझे अभि तक कुछसमझ नहि आया, आख़िर हुआ क्याँ हैं मुझेसाफ साफ क्यूं नहि बतारहे होँ तुम् लोग"
इस बार थोड़ी ऊंची आवाज़ मे कहा.
एक् समय केँ लिए वहां शांति हौ गयीँ,, रघु भि चुप थां, कुर्सी पे बैठा व्यक्ति औऱ ज़मीन पे बैठे सारेे व्यक्ति रघु कि तरफदेख रहे थें औऱ रघु अपनीबात कों कहने केँ लिए शब्द ढूँढरहा थां.
आख़िर उसने कहना शुरुआत किया……….
"साहबकल कि बात हैं जब हम् सभी वहांकाम केँ लिए पहुंचे ………."
रघु नें आगे बताना शुरुआत किया….
सुभह कां वक़्त, अच्छा ख़ासा दिन निकलरहा थां, सूरज नें उस स्थान पे अपनी अच्छी छापछोड रखी थि.
खुली स्थान, स्थान कि हालत बहुत बिगड़ी हुईँ थि, औऱ शायदतभी उस बड़ी सि स्थान पे हंगामा हौ रहा थां, काम होने कां हंगामा.
बहुत सारे व्यक्ति वहांलगे हुए थें काम मे, कोई पेड़काट रहा थां तोँ कोई एक् तरफ खुदाई कररहा थां, कोई मिट्टी उठाउठा केँ ट्रक मे डालरहा थां, सभी अपनाकाम कररहे थें, कोईउस आधेघने जंगल मे कामकर रहा थां, जहाँ बहुतकम पेड़बचे थें, तौ कुछलोग एक् कुछ खुदायी कां कामकर रहे थें …
यहसभी करतेहुए सुभहसाम मे कब बदलीपता हि नहि चला, एक् एक् कर केँ उस स्थान सें सारे व्यक्ति जानेलगे, उस स्थान पे चलरहा हंगामा, धीरे-धीरे धीरे-धीरे कम होनेलगा, मगरअब भि कोई थां जिसने उस स्थान पे अपनाकाम जारी रखते हुइ उस हंगामा कों बनारखा थां …
ककचह…….ककचह……ककचह…….ककचह…….ककचह……….ककचह… ककककचह…….ककककचह……ककककचह……कककचह……ककचह…। लगातार एक् केँ बाद एक् प्रहार ज़मीन पे करताहुए एक् मजदूर अपनेकाम मे लगाहुआ थां, मिट्टी खोदते खोदते उसकाआधा जिस्म इस वक़्त उस गढ्ढे मे थां जोँ वो खोद केँ बना चुका थां.
"अरे कालू वक्त होँ गय़ा हैं"
थोड़ी दूर सें एक् व्यक्ति चील्लाया
"हाँपता हैं बस 5 मिनटदे, इसे पूराकर लू"
चील्लाते हुए उसने एक् बारफिन ज़मीन पे जब मारा तौ इसबार मिट्टी कि नहि किसी औऱ चीज़ कि आवाज़ आई.
कालू नें उस स्थान पे दुबारा मारा तौ फिनवही आवाज़ आई, फिन वो झुका औऱ उसने अपनेहाथ सें उस स्थान कि मिट्टी हटाने लगा, जैसे जैसे उसने मिट्टी हटानी शुरुआत कि वैसे वैसे उसकी आँखों केँ सामने उसेकुछ चमकता हुआ नज़रआने लगा…
मिट्टी हटते हि उसके सामने चमकदार चीज़ आँ गयीँ,, जोँ सूरज कि रोशनी मे औऱ अधिकचमक रही थि, कालू केँ चेहरे पे बड़ी सि मुस्कान आँ गई, जब उसनेउस चमकती चीज़ कों देखा, फिन उसने धीरे-धीरे धीरे-धीरे अपनेहाथ उस चीज़ कि तरफ बड़ाये, धीरे-धीरे धीरे-धीरे वो हाथउस चीज़ पे पहुंच रहे थें
"अरेचल भि साम होने कों आई, घऱ जाते जातेदेर हौ जायेगी"
फिन सें दूर सें एक् व्यक्ति कि चिल्लाने कि आवाज़ आई.
"तुँ चल मे आँ रहा हूं"
कालू नें गर्दन घुमा केँ कहा औऱ फिनउस चमकदार चीज़ कों देखने लगा, औऱ अपनेहाथ कों उसतरफ लें जानेलगा, आख़िर उसनेउस चमकदार चीज़ कों अपने हाथों सें पकड़ा औऱ उठा लिया, जैसे हि उसनेउस उठाया ……….
"आआआआआआआआआआआआआआआआआआआआआआआआआआ………."
एक् दर्दनाक आवाज़ नें उस स्थान कों घऱ लिया…….
ककचह…….ककचह……ककचह…….ककचह…….ककचह……….ककचह… ककककचह…….ककककचह……ककककचह……कककचह……ककचह…। लगातार एक् केँ बाद एक् प्रहार ज़मीन पे करतेहुए एक् मजदूर अपनेकम मे लगाहुआ थां, मिट्टी खोदते खोदते उसकाआधा बदनइस समयउस गढ्ढे मे थां जौ वो खोद केँ बना चुका थां.
"अरे कालूसमय होँ गय़ा हैं"
थोड़ी दूर सें एक् व्यक्ति चिल्लाया,
"हाँपता हैं बस 5 मिनटदे, इसे पूराकर लू"
चील्लाते हुए वो एक् बारफिन काम मे लग गय़ा.
जैसे हि उसने दुबारा खोदना स्टार्ट किया, अचानक हि वहां केँ वातावरण मे बदलाव होने लगा, धीरे-धीरे धीरे-धीरे हवा केँ हंगामा नें वहांकदम रख लिया, एक् तरफ कालू मिट्टी हटा केँ गढ़ा खोदने मे लगाहुआ थां, दूसरी तरफहवा आवाज़ करतेहुए तेज चलनेलगी.
"अचानक सें इतनीहवा"
दूसरा व्यक्ति जंगल सें बाहर् निकलरहा थां, उसे भि उस ठंडीहवा कां एहसास होनेलगा, उसने अपने जिस्म पे हाथ बाँधलिए जिससे वो हवा सें बचसके.
ककचह … कककच…। कालू अपनेकाम मे लगाहुआ थां, गढ्ढा गहरा होताजा रहा थां, हवा भि तेज होतीजा रही थि.
"अरे। कां…लू। चलआजा"
उस दूसरे व्यक्ति नें कपकपाते स्वर मे कहा, उसे अपने शरीर पे वो ठंडीहवा अब चुभने लगी थि, उसका जिस्म कांपरहा थां, उसने अपनी नज़रे आसमान कि तरफ कि, तौ उसने पाया कि धीरे-धीरे धीरे-धीरे ढलता सूरज नीले बादलों मे खोताजा रहा थां, नीलेघने बदलआगे कि तरफ बढ़ने लगे.
पिशाच की वापसी - body-focused teasing – New Episode
पिशाच कि वापसी – 3
“हाँबस हौ गय़ा, आया"
बोलने केँ लिए कालू रुका औऱ फिन उसनेहाथ उप्पर उठाकर ज़मीन पे दे मारा, मगर इसबार मिट्टी कि आवाज़ नहि किसी औऱ चीज़ कि आवाज़ आई, कालूकुछ सेकेंड ऐसे हि खड़ाकुछ सोचता रहा, उसने एक् बारफिन हाथ उठाया औऱ उस स्थान पे दुबारा मारा तौ फिनवही आवाज़ आई, आवाज़ सें उसके चेहरे पे थोड़ी शिकन आँ गयीँ,, वो झुका औऱ हाथ सें मिट्टी कों हटाने लगा, जैसे जैसे उसने मिट्टी हटानी शुरुआत कि वैसे वैसे उसकी आँखों केँ सामने उसकुछ चमकता हुआ नज़रआने लगा…
इधर वो व्यक्ति आसमान मे देखरहा थां, जहाँ अभि साफ मौसम थां अब वहांघने नीले बादलों नें उस स्थान पे क़ब्ज़ा कर लिया थां, हवा भि जोरों सें चलरही थि, यहसभी देख केँ उस व्यक्ति कि शकल पे थोड़ी सि घबराहट उभरआई थि.
इधर कालू नें मिट्टी हटा दि औऱ उसके सामने एक् चमकदार चीज़ आँ गयीँ, जिसेदेख केँ, कालू केँ चेहरे पे बड़ी सि मुस्कान आँ गई,, फिन उसने धीरे-धीरे धीरे-धीरे अपनेहाथ उस चीज़ कि तरफ बड़ायह, धीरे-धीरे धीरे-धीरे वो हाथउस चीज़ पे पहुंच रहे थें, जारहे थें औऱ जैसे हि उसनेउस चीज़ कों छुआ,
कड़दड़… कड़कड़कड़….कद्द्द्दद्ड…कड़कड़कड़……। वहां ज़ोरदार बिजली कड़कने लगी, बादलों कि वजह सें जौ अंधेरा वहांहुआ थां, अब बिजली कि वजह सें रोशनी हौ रही थि, यह दृश्य देख केँ दूर खड़े व्यक्ति कि तोँ हालत बुरी हौ गयीँ,, उसकाहलक सुखरहा थां, औऱ यहीहाल कालू कां भि थां वो भि एक् लम्हा केँ लिएसहम गय़ा इस अजीब सि बिजली कि कड़कने कि आवाज़ सुन केँ.
"अरेचल भि कालू, देख नहि रहा, लगता हैं कोई बहोत बड़ा तूफान आने वाला हैं जल्दकर मुझे बहोत घबराहट हौ रही हैं"
वो व्यक्ति जैसे तैसेकर केँ कांपती आवाज़ मे चिल्लाया.
"हाँहाँ बस हौ गय़ा"
कालू नें चिल्ला केँ कहा, औऱ जिस चीज़ पे उसने अपनाहाथ रखाहुआ थां उस चीज़ कों उठा लिया, जैसे हि उसनेउसे उठाया, एक् ज़ोरदार कड़कड़ाती हुइ बिजली चमकी, जिसकी रोशनी मे कालू कां चेहरा औऱ उसकेहाथ मे वो चीज़ भि चमकउठी.
दूसरी तरफ वो व्यक्ति जंगल केँ बाहर् खड़ा थां, अचानक उसकुछ आभासहुआ,
"एका एक् इतनीठंड केसेबढ़ गई, "
उसने अपने आप् सें कहा, औऱ अपनेहाथ मसलते हुइ सामने देखने लगा औऱ तभी उसकी आँखों केँ सामने एक् बहोत हि अजीब वाक्य दिखाई दिया ….
सामने खड़े ट्रक पे धीरे-धीरे धीरे-धीरे बर्फ कि कठोर चादर सि बिछने लगी, उसके देखते देखते ट्रक कां शीशा बर्फ कि कठोर चादर मे अकड़ गय़ा, यहदेख केँ उस व्यक्ति कि सांस हि फंस गई, एक् समय केँ लिए.शायद यह अभि कुछ नहि थां, तभी उसके कानों मे कुछ अजीब सि आवाज़ पडी, वो जल्दी पीछे घुमा औऱ फिन जौ उसने देखा उसकेकदम स्वयं बीए स्वयं पीछे हटतेचले गये, उसके सामना वाला पेड़एका एक् अजीब सि आवाज़ करते हुइ ज़मने लगा, औऱ यहीहाल उसकेबगल वाले पेड़ों कां भि हुआ, बहोत हि अजीब औऱ एक् लम्हा केँ लिएदिल दहला देने वाला दृश्य थां उसकेलिए, पर्र शायद अभि इसे भि ज़्यादा होना बाकी थां.
उधर कालूउस चीज़ पे सें अच्छी तरह सें मिट्टी हटा चुका थां, औऱ उस चीज़ कों देख केँ उसके चेहरे पे एक् बड़ी सि मुस्कान आँ गई,,
"सोने कां लगता हैं, क्याँ पताकुछ औऱ भि मिलजाए"
कालू कि आँखों मे लालच दिखाई देरहा थां.
उसनेउस चीज़ कों अपनेकमर केँ अंदर अच्छे सें फँसा लिया, औऱ फिन मिट्टी हटाने लगा, कुछ हि सेकेंड हुए थें उसे मिट्टी हटाए कि उसके चेहरे केँ भावबदल गये, उसकी चेहरे कि मुस्कान गायब हौ गयीँ,, माथे कि शिकनबढ़ केँ गहरी होतीचली गई,, औऱ उसकी आँखें बिलकुल बड़ी होकर फटने कों होँ गई, औऱ तभी बिजली कि कड़कड़ने कि आवाज़ मे कालू कि एक् भयंकर चीख निकली ……। “आआआआआआआआआआआआ”
यह आवाज़ उस स्थान पे एक् समय केँ लिए गूँजउठी,
"यह तोँ कालू कि आवाज़ हैं"
उस व्यक्ति नें अपने आप् सें कहा,
"कालू, कालू, "
वो चीलाया, मगरफिन कोई आवाज़ नहि आई,
"यहसभी क्याँ हौ रहा हैं, मुझेलग हि रहा थां कोई गड़बड़ हैं, कालू क्याँ हुआ"
वो चीलाया पऱ कोई जवाब नहि आया, फिन वो स्वयं हि जंगल केँ अंदर घुसने लगा.
इधर कालू गढ्ढे मे सें निकल केँ, भागने लगा, वो बोल्ना चाहरहा थां पऱ उसके मुंह सें आवाज़ नहि निकलरही थि, वो भागरहा थां, मगर जंगल समाप्त नहि होँ रहा थां, उधर वो व्यक्ति उसकेपास जाने कि कोशिश कररहा थां, पर्र पहुंच हि नहि पारहा थां, कालू पागलों कि तरहभाग रहा थां कि तभी उसका पांव मुडा औऱ वो नीचेगिर गय़ा, ज़मीन पे गिरकर वो उठा औऱ फिन भागने लगा, भागता रहा, मगर उस जंगल केँ बाहर् कां मार्ग नां मिला, वो भागता रहा, भागता रहा, अचानक उसका बैलेन्स फिन बिगड़ा औऱ वो सीधे एक् गढ्ढे मे जा गिरा.
“अहह"
उसके मुंह सि हल्की सि चीख निकली, गिरने कि वजह सें गढ्ढे मे धूलफैल गई,, इसलिये कुछ सेकेंड वो कुछ नहि देख पाया,
इधर वो व्यक्ति अंदर घुसता चलाजा रहा थां, उसकादिल इस वक़्त बुरीतरह सें डराहुआ थां, अभि भि उसकी आँखों केँ सामने एक् एक् कर सारे पेड़ बर्फ कि चादर कों ओढेजा रहे थें, बड़ी मुश्किलों सें वो आवाज़ निकाल पारहा थां
"कालू… कहां हैं"
वो कहताहुआ आगेतरफ रहा थां।
“आख़िर मुझे मार्ग क्यूं नहि मिलरहा हैं"?
जबकुछ मिनट तक चलने केँ बाद भि उस व्यक्ति कों मार्ग नहि मिला तोँ उसने अपने आप् सें कहा, वो फिन वहीं एक् स्थान खड़ा होँ गय़ा, औऱ वहीं सें वो कालू कों आवाजें लगाने लगा.
जबकि, असल मे उसके औऱ कालू केँ बीच सिर्फ़ कुछ हि मीटर कि दूरी थि, मगर नां दोनों एक् दूसरे कों देखपा रहे थें नां हि सुनपा रहे थें.
कालू गढ्ढे मे गिराहुआ थां, जब वहां कि धूलबैठ गई, तोँ उसने नज़रे उठा केँ इधरउधर देखा तौ उसकी आँखें फट गयीँ,, उसकेबगल मे उसी कां वो समानरखा थां, जहाँ वो थोड़ी देर पहले खुदाई कररहा थां, उसने जल्दी अपने नीचे देखा जिसेदेख केँ उसकीदिल कि धड़कन बंद होँ गई,, वो वहींजम गय़ा, वो कुछकर पता उससे पहले, वो हवा मे उप्पर कि तरफ उड़ते हुई गढ्ढे सें बाहर् निकला औऱ फिन ….
“आआआआआआआआआआआआआआआआआआआआआआआआआआआ"
एक् चीख केँ संग कालू जंगलों कि गहराइयों मे खोताचला गय़ा, औऱ इधर जौ गढ्ढा खुदाहुआ थां, उसमें अपने आप् मिट्टी भरनेलगी, इतनी तेजी सि मिट्टी भरनेलगी कि कुछ हि सेकेंड मे वो गढ्ढा भर गय़ा, औऱ बिलकुल पहले जैसी ज़मीन हौ गई,.
"यह तौ कालू कि चिल्लाने कि आवाज़ हैं, हे ईश्वर क्याँ होँ रहा हैं यह, कालू, कालू"
वो चिल्लाता हुआइधर उधर देखने लगा औऱ भागता हुआ जंगल कि गहराई मे खोताचला गय़ा.
"कालू मिला कि नहि"?
कुर्सी पे बैठे व्यक्ति नें बडे हि चिंता जनक स्वर मे कहा
"नहि साहब, कालू कां कुछ नहि पता वो कहां गय़ा, अभि तक कुछ भि नहि"
उस व्यक्ति नें हल्की आवाज़ मे कहा
कोई कुछकह पाता उससे पहले,
“कडाअक्ककककक”,
एक् आवाज़ हॉल मे हुईँ, हॉल मे बैठेसब एक् लम्हा केँ लिएसहम गये, पर्र
"साहब लकड़ियाँ ख़त्म होँ गयीँ, हैं, बस इतनी हि मिली"
दरवाजे पे खड़े नौकर नें कहा.
“अच्छा ठीक हैं, कलयाद सें लें आनां, अभि इसेजला दे"
कुर्सी पे बैठे व्यक्ति नें राहत कि सांस लेतेहुए कहा.
"जी"
बोलते हुए वो लकड़ियाँ लेकर अपनेकाम मे लग गय़ा.
“वैसे वो व्यक्ति जोँ कालू केँ संग थां, वो कहां हैं"?
बात कों आगे बढ़ाते हुयेउस व्यक्ति नें कहा
"वो यहीं हैं साहब, यह रहा"
उस व्यक्ति नें एक् व्यक्ति कि तरफ इशारा किया, जिसने अपने चेहरे कों आधाढका हुआ थां.
पिशाच की वापसी - body-focused teasing - Next part miss mat karna
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