पिशाच की वापसी - body-focused teasing – New Episode
पिशाच कि वापसी – 7
"वो तोँ अंत थां इस दर्दनाक शुरूवात कां"
टपकते खून सें ज़मीन पे यह शब्दछाप गये, जावेद नें इन शब्दों कों जबपढा औऱ बनते देखा तोँ उसकीरूह कांप गयीँ,, यहीहाल वीरा कां भि थां, दोनों इस लम्हा कों देख केँ बुरीतरह घबरागये.
“अभि तक वो समय मे नहि भूल पाया हूं, वो खून सें बनते शब्द मुख्तार साहब अभि तक वो दृश्य मेरी आँखों केँ सामने घूमरहे हें"
जावेद नें मुख्तार कि आँखों मे देखते हुएकहा.
“मगरफिन भि यह कहना हैं कि वहांकोई शैतान, याँ कोई आत्मा हैं, मुझेठीक नहि लगता”
"क्याँ आपको नहि लगता, कि पिछले दो दीनों मे कुछ बदला बदला सां हैं"
जावेद नें मुख्तार कि बात पे ध्यान नां देतेहुए उसके बिलकुल लगभगआकर कहना शुरुआत किया,
"क्याँ आपको नहि लगता पिछले 2 दीनों मे यहाठंड कुछ ज़्यादा बढ़ गयीँ, हैं, क्याँ आपको नहि लगतायहा कि हवा हमेंकुछ बताना चाहती हैं, क्याँ आपकोऐसा महसूस नहि होता कि मानोहर टाइमकोई आपकेसंग हैं, कोई हैं जिसे आप् देख नहि सकते पऱ ऐसा लगता हैं वो आपकेसंग होँ, औऱ आपकी जीवन सें खेलना चाहता हौ"
जावेद नें यहबात इस लिहाज़ सें करी कि मुख्तार कि साँसें थाम सि गई,.
"यह, यह तुम्हें क्याँ होँ गय़ा हैं जावेद, कैसी बातें कररहे होँ"
मुख्तार थोडा पीछे होतेहुए बोला.
"यह सभी मे नहि मुख्तार साहब, उन मजदूरों कां कहना हैं, उनकीयह बातें नाँ जाने क्यूं मेरे दिमाग़ मे घूमरही हैं"
जावेद नें इसबार नॉर्मल आवाज़ मे कहा.
"तुमने तौ डरा दिया थां एक् मिनट केँ लिए मुझे"
"मुख्तार साहब, बात इतनी छोटी नहि हैं जितनी दिखरही हैं, वीरा कों पैसे कां लालच थां इसलिये उसने किसी कों नहि बताया, औऱ बिना किसी कों पताचले हमने वो लाशें ज़मीन मे गडवा दि, पर्र अगरयह हादसे होतेरहे तोँ शायद अगलीबार बचना मुश्किल होगा, हमेंयह मौत केँ सिलसिले कों रोकना पड़ेगा"
"मे जानता हूं जावेद, पऱ तुम् तौ जानते हि हौ, कि यहकाम कितना जरूरी हैं, मेयर साहब जबानदे चुके हें, उसकेसंग संग करोडो रुपये भि लेँ चुके हें, अगरयह काम नहि हुआ तौ मेयर साहब हमारा पता नहि क्याँ करेंगे, मिस्टर विल्सन कां रुपया उन्होंने लें लिया हैं, अब उनको सिर्फ़ काम सें मतलब हैं, इसके अलावा औऱ कुछ नहि, वैसे भि यहा पे उसे हादसे केँ बाद, कुछ नहि बचा, मिस्टर विल्सन कि बदौलत अबयहा कुछ बनेगा तौ लोगों कि दिलचस्पी एक् बारफिन इस स्थान मे आँ जाएगी, नहि तोँ यहाकुछ नहि बचा थां सारा रुपया समाप्त हौ गय़ा थां, तुमसे बेहतर कोनजान सकता हैं यहबात"
मुख्तार नें एक् गिलास शराब कां भर केँ उसे समाप्त करते करते अपनीबात कही.
"मे अच्छी तरह सें जानता हूं, कि यहकाम कितना जरूरी हैं"
"इसलिये कहरहा हूं, किसी भि तरहइस काम कों कारवांओ, पुलिस कि चिंता मतकरो उसेे मे संभाल लूँगा तुम् बसइन मजदूरों कों संभालो, अगरयह बात कि अफवाबन गई, तौ कोई नहि आएगायहा"
"हम्म, आप् बेफ़िक्र रहिए मुख्तार साहब, अब मे इसबात कों जानकर रहूँगा कि आख़िर क्याँ होँ रहा हैं यहसभी, मे आजरात जाऊंगा वहां, आख़िर देखूं तौ सही कि इस राज़ केँ पीछे असलियत क्याँ छुपी हैं"
जावेद नें माथे पे शिकन लातेहुए कहा.
बारिश बंद हौ चुकी थि, पर्र ठंड बहोत जबरदस्त थि, जावेद रोड पे धीरे-धीरे धीरे-धीरे देररात अकेले उसे रास्ते पे चलरहा थां, दिल मे एक् खौफ औऱ दिमाग़ मे घूमरहा डरावाना मंजर किसी भि इंसान कों डराने पे मजबूर कर हि देता हैं, पर्र कहते हें कि विश्वास उसेडर कों ख़त्म करता हैं, मगरइस टाइम जावेद केँ चेहरे पे वो डर कि बनावट औऱ चिंता भरी शिकन माथे पे दिखाई देरही थि, वो धीरे-धीरे धीरे-धीरे चलताहुआ उसे सुनसान मार्ग पे आख़िर वाहन वहां पहुंच गय़ा.
सामने वही मंजर जहाँदिन मे जोरों शोरों सें काम होता हैं, पऱ इससमय सिर्फ़ सन्नाटा थां, अंधेरा औऱ वो खामोशी थि, जिसे सुनाजा सकता थां, दिल कि धड़कने इस वक़्त सहमी हुइ थि शायदआने वालेसमय केँ डर सें, याँ फिनइस खौफनाक खामोशी सें……….
जावेद नें अपनेकदम धीरे-धीरे धीरे-धीरे उठाए औऱ जंगल कि तरफ बड़ादिए……। जावेद, मुख्तार केँ घऱ सें निकल केँ उसेतरफ चल पड़ा, जहाँ शायद उसेे नहि जानां चाहिए, उसे स्थान पे जहाँइस टाइमकोई हैं, जौ कुछ चाहता हैं, शायद जीवन……
चलते चलते थोड़ी देर मे जावेद उसे स्थान पे पहुंच गय़ा…….
जावेद नें अपनेकदम धीरे-धीरे धीरे-धीरे उठाए औऱ जंगल कि तरफ बड़ादिए, जेब सें छोटी सि टॉर्च निकल केँ ऑन कि, तोँ कुछ उजाला होँ गय़ा आँखों केँ सामने, उसने टॉर्च कों सामने कि जिसकी रोशनी सें बस थोड़ी बहोत आधी अधूरी चीज़ दिखाई देरही थि औऱ चल पड़ाआगे कि तरफ धीरे-धीरे धीरे-धीरे.
जैसे जैसे वो आगेबढ़ रहा थां वैसे वैसे जावेद केँ दिल कि धड़कन बढ़रही थि, माथे पे एक् शिकन थि, आँखें आधी खुली हुइ थि, वो चल हि रहा थां कि तभी उसकापेर किसी चीज़ पे पड़ा औऱ पांव पडतेहे वो वहांरुक गय़ा, क्यूं कि उसेसमझ आँ गय़ा थां कि उसकेपेर केँ नीचे मिट्टी नहि कुछ औऱ हैं, कुछ सेकेंड वो वैसे हि खड़ारहा उसकेबाद उसने वो कदम पीछे खीचा, औऱ धीरे-धीरे धीरे-धीरे टॉर्च कों नीचे कि तरफ करनेलगा जैसे हि टॉर्च कि रोशनी नीचेपडी, उसकी साँसें थम गई,, नीचे एक् व्यक्ति लेटाहुआ थां जिसने ब्लैक कलर केँ कपड़े पहनेहुए थें, वो पेट केँ बल पड़ा थां इसलिये उसका चेहरा नहि दिखरहा थां, जावेद एक् लम्हा केँ लिएसोच मे पढ़ गय़ा वो घुटनों केँ बल बैठा औऱ अपनेहाथ धीरे-धीरे धीरे-धीरे लें जाकर उसके कंधे पे रख केँ उसको हिलाया, मगर वो नहि हिला
"इतनीरात कों एक् व्यक्ति यहा पड़ा हैं, कोन हौ सकता हैं यह कहींमर तोँ नहि गय़ा, आप् ठीक तौ हें"
बोलते हुइ जावेद नें फिन सें उसके कंधे कों हिलाया, इसबार हिलने पर्र वो बदन हिला, तोँ जावेद केँ जान मे जानआई.
“आप् ठीक तौ हैं, आप् इतनीरात मे यहा क्याँ कररहे हें"
बोलते हुये जावेद नें उसके कंधे कों उपर कि तरफ खींचा, जैसे हि उसे कंधे कों उपर कि तरफ खींचा, वो कंधाउस जिस्म मे सें अलग होताहुआ जावेद केँ हाथ मे आँ गय़ा, मानो किसी गुड़िया केँ जिस्म सें उसकाहाथ निकाल लिया होँ, जावेद उपर सें लेकर नीचे तक कांपउठा, उसके मुंह सें हल्की सें चीख निकल गई, औऱ वो पीछे कि तरफहुआ, उसके पीछे कि तरफ होते हि उस जिस्म नें अपना चेहरा उपर उठाया औऱ जावेद कि तरफ देखने लगा, उसका चेहरा देख केँ जावेद कि रूह कांपउठी, चेहरा इतना भयनक थां कि इस कालीरात मे देखने वालाकोई भि इंसान कांपउठे
Dhansu update bhay bhut hi Shandar औऱ lajawab ekdum jhakaas mind-blowing. Keep going We will wait for next update
संगबने रहने केँ लिए आप् सभी कां बहोत शुक्रिया
बढ़िया उपडेट तुस्सी छागएबॉस अगलेभाग कां इंतजार रहेगा
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पिशाच की वापसी - body-focused teasing – New Episode
पिशाच कि वापसी – 8
चेहरे पे अजीब सें खुदे हुये बड़े बड़े निशान, मानो किसी नें चेहरे कों नोंच लिया होँ, खून कि बहतीपरत औऱ अंदर कि हड्डियाँ तक दिखाई देरही थि, आधे होंठ गायब थें औऱ आधीनाक कटती हुई थि, आँखें एक् दमहरी होँ चुकी थि, पर्र सबसे अधिक हैरान औऱ रूह कों हिला देनी वालीबात यह थि कि वो जिस्म किसी औऱ कां नहि बल्कि स्वयं जावेद कां थां, जावेद तौ थोडा पीछे होकर एक् लम्हा केँ लिए अकड़ हि गय़ा थां उसेबदन कों देख केँ, मगरउसे होश तोँ तबआया जब वो लाश गुराते हुईँ उसकीतरफ बड़ी.
"उहह एयाया….ईएहह…
करतेहुए वो लाशआगे बड़ी, जिसेदेख केँ जावेद तेजी सें पीछे मिट्टी मे घिसटने लगा, वो जिस्म अपने एक् हाथ कि सहायता सें आगे भि बढ़ने लगा, जावेद पीछे होनेलगा, पऱ अचानक हि जावेद एक् स्थान जाकररुक गय़ा वो पीछे नहि होँ पाया, पीछे ट्रक खड़ा थां औऱ जावेद ठीकउस ट्रक केँ टायर केँ आगे आँ चुका थां, वो जिस्म गुराते हुई आगेतरफ रहा थां औऱ बिलकुल लगभग पहुंच चुका थां, वो गुराया, इधर जावेद चीलाया, उसबदन नें अपना वो एक् हाथउपर उठाया औऱ जावेद कि तरफ बड़ा, जावेद एक् बार ज़ोर सें चीलाया.
"नहियीईईईईईईईईईईईईई.!
औऱ फिनउस खामोश स्थान पे एक् बारफिन खामोशी छा गई,.
अपनेहाथ सें अपना चेहरा छुपाया, जावेद वहीं खड़ा थां उसकी टॉर्च नीचे गिरी हुइ थि, उसकी साँसें तेजचल रही थि, वो वहीं खड़ा थां कुछ मिनटबाद उसने अपने चेहरे सें हाथ हटाया, उसके चेहरे पे पसीने कि बोंदें इतनीठंड मे उभरआई थि, डर चीज़ हि ऐसा हैं जिसे महसूस करके जिस्म औऱ आत्मा संगछोड देती हैं, जावेद नें इधरउधर देखा औऱ फिन नीचे गिरी टॉर्च कों उठाया.
"वो सभी क्याँ थां, कोई सपना हि होगा, हकीकत तौ नहि होँ सकती, पर्र जोँ भि थां इतना भयानक आज तक मैंने कभी महसूस नहि किया थां"
जावेद नें अपने आप् सें कहा औऱ जंगल कि तरफ भि बढ़ने लगा, वो आगे निकल गय़ा पर्र शायद जौ उसने महसूस किया वो सच थां, ट्रक सें थोड़ी दूरवही हाथ पड़ा थां जिसे जावेद नें फेंका थां.
जावेद जंगल केँ अंदरघुस चुका थां, अंदर घुसते हि जावेद नें महसूस किया कि ठंड बहोत हि अधिक हैं यहा, उसको अचानक हि सांस लेने मे दिक्कत होनेलगी, वो गहरी गहरी सांस खींचने लगा, मगर उसको सांस नहि आँ रहा थि, तभी उसने अपनीनाक पे कुछ महसूस किया, उसने अपनी उंगली सें अपनीनाक कों छुआ तौ उसने पाया कि उसकीनाक केँ अंदरूनी सिरे मे बर्फजम गयीँ, हैं, उसने जल्दी उसे बर्फ कों अपनीनाक सें हटाया तब जाकरउसे सांसआई.
वो आगेकुछ करता कि तभी उसके कानों मे कुछ आवाज़ पड़ा, किसी केँ खांसने कि आवाज़, जावेद पीछे घुमा औऱ उसनेउसे तरफ टॉर्च मर्री, मगरउसे टॉर्च मे उसेकोई नहि दिखा,
"कौन हैं"
बड़ी मुश्किल सें उसने आवाज़ निकली.
"उन्हुंण… उन्हुंण…."
एक् बारफिन किसी केँ खांसने कि आवाज़ आई, वो धीरे-धीरे धीरे-धीरे उसे आवाज़ कों ढूंढ़ने आगे कि तरफचल पड़ा, जैसे जैसे वो आगे बढ़ता वैसे वैसेउसे वो आवाज़ तेज होती जाती थि, वो कुछ मिनट तक उसे खामोश जंगल मे आगे बढ़ता रहा कि तभीउसे कोई दिखा, जौ ठीक उसके सामने पेड़ केँ सहारे खड़ा थां, अपनासर झुकाए, जावेद नें अपनी टॉर्च कि रोशनी उस कि तरफकरी हुईँ थि, उसकीजान, उसकाबदन इससमय ठंड सें ज़्यादा डर सें कांपरहा थां.
“कोन हौ तुम्"
जावेद नें उस इंसान सें थोडा दूर खड़ेरह कर प्रश्न किया.
"मार्ग भटक गय़ा हूं, ठंडलगी हैं, औऱ भूख भि बहोत लगी हैं"
उसेतरफ सें आवाज़ आई.
"पर्र तुमने अपनासर क्यूं झुकारहा हैं, मेरीतरफ देखो"
जावेद नें वहीं खड़े रहना उचित समझा
"नहि उठा सकता"
"अच्छा, तौ फिनआओ मेरेपास मे तुम्हारी सहायता करूँगा, आओ"
जावेद नें उसे अपनेपास बुलाने केँ लिएकहा.
"नहि आँ सकता, आप् आँ जाओ मेरेपास, मे बहोत तकलीफ मे हूं, मेरी सहायता कीजिए, प्लीज़ मेरी सहायता कीजिए"
सामने सें फिन धीरे-धीरे धीरे-धीरे रोने कि आवाज़ आनेलगी, जावेद नें एक् बार तोँ एक् कदमआगे बढाया औऱ फिन वो अचानक सें रुक गय़ा औऱ वो कुछ सोचने लगा, उसके माथे पे शिकन औऱ गहरी होतीचली गई,, उसकी आँखें उसकेकुछ सोचने पऱ बड़ी होतीचली गयीँ,, उसने पाया कि अभि थोड़ी देर पहले जोँ भि उसे व्यक्ति केँ संगबात हुईँ उसेमें एक् फर्क थां वो यह कि जौ मे बोलरहा हूं वो आवाज़ यहा गूँजरही हैं, पर्र जब वो बोलरहा हैं तोँ वो आवाज़ नहि गूँजरही ऐसे केसे, इतनासोच हि रहा थां कि अगलेसमय उसके दिमाग़ नें ज़ोर डाला औऱ तब उसनेरूह कों हिला देना वालासच पाया.
"यह तौ मेरी हि आवाज़ हैं, जोँ वो इंसान बोलरहा हैं"
जावेद नें इतनाकहा औऱ कुछकदम पीछे कि तरफ होँ गय़ा.
"आप् मेरी सहायता नहि करेंगे"?
सामने सें बोलते हुये अचानक उसबदन नें अपनी गर्दन उपरउठा ली, जिसेदेख केँ जावेद कि साँसें उखड़ने लगी, सामने उस चेहरे कि हालत हि खौफनाक थि, चेहरा आधाजला हुआ थां औऱ उसजले हुये चेहरे कि चमडी नीचे छोटे छोटे टुकड़ों मे गिररही थि मानोगल गयीँ, औऱ चेहरे सें फिसलरही हौ, दूसरी तरफ बड़े बड़े गढ्ढे हौ रहे थें औऱ उसेमें सें खूनरिस रहा थां, आँखों केँ नाम पे सफेदरंग केँ पत्थर दिखाई देरहे थें.
जावेद बुरीतरह सें कांपउठा उसेदेख केँ वो इसबार भि कोई औऱ नहि उसी कां चेहरा थां जौ इससमय इतना भयानक दिखाई देरहा थां, वो बदन जावेद कि तरफ बढ़ने लगा, जैसे हि उसने बड़ना शुरुआत किया.
“सहायता करो मेरी, सहायता करो"
इतना बोलते हुईँ आगे बड़ा कि उसका लेफ्ट पांव घुटनों केँ नीचे सें टूट केँ अलग हौ गय़ा, वो बदन टेडा हौ गय़ा, पर्र फिन भि जावेद कि तरफआने लगा, थोडा आगेचला कि उसका दूसरा पेर भि घुटने केँ नीचे सें टूट केँ अलग होँ गय़ा औऱ वो बदन नीचेगिर गय़ा, मगरफिन भि वो नहि रुका वो जिस्म घिसट घिसट केँ जावेद कि तरफआने लगा, जावेद कुछ लम्हा उसेबदन कों ऐसे हि देखता रहामगर फिन एक् ज़ोरदार चीख उसके मुंह सें निकल गयीँ,.
"नहियीईईईई…."
बोलते हुई वो वहां सें भागने लगा, उसके कानों मे बारबार यही आवाज़ आँ रही थि
"सहायता करो, सहायता करो"
लेकीन जावेद नहि सुनरहा थां वो बस भागेजा रहा थां, भागते भागते वो थक गय़ा मगर जंगल समाप्त नहि हुआ, थक हार केँ वो एक् पांव केँ सहारे खड़ा होँ गय़ा औऱ हांफने लगा.
"यह जंगल समाप्त क्यूं नहि होँ रहा, यहा जरूरकुछ गड़बड़ हैं, मुझे मुख्तार साहब सें मिलना हि होगा, उन्हें सभीकुछ बताना होगा, यहा पे कुछ हैं जोँ ठीक नहि हौ रहा हैं"
जावेद हांफते हुए अपने आप् सें बोल हि रहा थां कि तभीउसे कुछ आवाज़ आई, अजीब सि चटकने कि आवाज़, तभीउसे उसके हाथों पे कुछ महसूस हुआ, उसने महसूस किया जौ हाथ उसका पेड़ पे थां उसेहाथ पे कोईवजन हैं उसनेउसे हाथ कि तरफ देखा, तोँ उसे एक् औऱ झटकालगा जौ कि यहाआने केँ बाद नाँ जाने कितनी बारलग चुका थां.
पूरा पेड़ बर्फ कि चादर केँ नीचे थें, पऱ उसकेलिए चिंता कि यहबात थि कि उसकेहाथ पे बर्फ जमनेलगी थि, जावेद नें जल्दी उसे पीछे खींचने कि सोची, पर्र वो चिपक गय़ा थां इसलिये खिच नहि पाया।
“आँ….आहह-आहह"
वो ताक़त लगारहा थां पऱ नहि खिचपा रहा थां, तभी उसके कानों मे फिनवही आवाज़ पड़ी,
"मदतकरो"
जौ जंगल केँ अंधेरे मे सि आँ रही थि, जावेद कि जान सूखने लगी, उसने पूरादम लगाया औऱ हाथ पीछे कि तरफ खींचा, जैसे उसकाहाथ पेड़ सें अलग होँ गय़ा औऱ पीछे कि तरफजा गिरा, पऱ ज़ोर ज़ोर सि चिल्लाते हुई छटपटाने लगा,
"आहह-आहह …। एयाया…आस…."
दर्द मे करहता हुआ जावेद किसीतरह खड़ाहुआ, उसकेहाथ सें खूनबह रहा थां, उसके हाथों मे बेहदजलन होँ रही थि, उसकी हतेली कां मास उसकेहाथ मे नहि थां, खींचने केँ चक्कर मे उसकीखाल पेड़ पे हि चिपकी रही गयीँ,.
कुछ मिनट तक वो ऐसे हि छटपटाता रहा, पऱ जैसे हि उसे वो आवाज़ औऱ लगभग सें आनेलगी तौ वो फिन सें भागने लगा बाहर् कि तरफ, औऱ इसबार वो जंगल सें बाहर् निकल गय़ा.
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पिशाच की वापसी - body-focused teasing – New Episode
पिशाच कि वापसी – 9
"मुझे जल्द सें यहा सें निकल केँ जानां होगा, हाँ अहह."
दर्द मे करहते हुए जावेद अपनेहाथ कों दूसरे हाथ सें पकड़ा हुआ थां, शायदइसे दर्द मे कुछकमी महसूस होँ रही थि.
तभी जावेद नें सामने ट्रक खड़ाहुआ देखा वो उसे ट्रक कि बढ़भगा… जल्द सें उसेमें बैठा, पऱ उसेमें चाबी नहि थि, उसने अपना एक् हाथ स्टेरिंग वील पे मारा, औऱ एक् बारफिन उसे हैरानी कां सामना करना पड़ा जिसे उसकेदिल कि धड़कने बढ़ गई,, वील पे हाथ मारते हि ट्रक हंगामा करते हुई अपने आप् स्टार्ट हौ गय़ा, कुछ सेकेंड जावेद ऐसे हि सोचता रहामगर फिन गियरडाल केँ ट्रक कों वहां सें निकाल लेँ गय़ा.
"मुझे जल्द पहुचना होगा, हाँ…"
बोलते हुई जावेद तेजी सें ट्रकचला रहा थां, मार्ग तेजी सें पार होँ रहा थां, कुछदेर कि ड्राइविंग मे जावेद नें ट्रक पे ब्रेक लगाया, उसके खिड़की सें देखा तौ सामने मुख्तार कां घऱ थां उसने ट्रक कों ऐसे हि खुलाछोड, दरवाजा सें बाहर् निकल गय़ा औऱ जैसे हि उसकेकदम ज़मीन पे पड़े औऱ कुछकदम आगेगये, उसे एक् बड़ा हिला देने वाला झटकालगा जिसे उसके मुंह सें एक् ज़ोरदार चीख निकल गयीँ,
“नहियीईईईईईईईईईईई……."
जावेद सामने कि तरफदेख केँ चिल्ला पड़ा, क्यूं कि सामने वही स्थान, वही खामोशी औऱ वही अंधेरा जंगल.
"खीखीखीखीखीखीखीखी………."
तभी जावेद केँ कानो मे एक् अजीब सि भारी आवाज़ मे किसी कि हँसी सुनाई दि, जिसेसुन केँ उसकीरूह मे एक् बारफिन कपकपि कि लहर दौड़ गयीँ,.
"कौन हैं, कौन हैं"?
जावेद इधरउधर अपनी गर्दन कों घुमा केँ चिल्लाता हैं, मगर उसका जवाब देने वालाउसे कोई नहि दिखा, रात केँ उसे अंधेरे मे जब सर्दहवा केँ संग, जीवनमौत सें टकरारही हौ तब जौ चेहरा किसी इंसान कां होता हैं इस वक़्त उसे इंसान यानि कि जावेद कां थां, साँसें उखड़ी जारही थि, हाथ औऱ चेहरा इतना ठंडा हौ गय़ा थां कि वो नीलापढ़ चुका थां, जावेद हैरान परेशान वहां खड़ाकुछ सोचने मे लगाहुआ थां, मगरऐसे वक़्त मे दिमाग़ संगछोड देता हैं, सुनाई देता हैं तौ सिर्फ़ वो डर जोँ अपनीतरफ खीचे इंसान कों औऱ खिंचता हैं, शायदइस समय भि डर हि जीत गय़ा थां.
"खीखीखीखीखीखीखी"
हवा कि लहर केँ संग एक् अजीब सि भारी औऱ बेहद धीमी आवाज़ जावेद कों सुनाई दि.
"कौन हैं, कौन हैं वहां, सामने आँ, आँ सामने"
इसबार जावेद अपनेडर कों काबू करतेहुए ज़ोर सें चीलाया औऱ उसकेपेर स्वयं ब स्वयं जंगल कि तरफचल पड़े, उसे गीली मिट्टी पे चलरहे जूतों कि आवाज़ भि इस टाइमडर कि लहरबदन मे छोडरही थि
"कौन हैं वहां, सामने आँ जा, जोँ भि हौ"
बोलते हुए जावेद जंगल केँ अंदरघुस गय़ा, पर्र फिन चलते चलतेरुक गय़ा, सामने कुछ नहि थां, नाँ कोई रोशनी, नां कोई इंसान औऱ नाँ हि कोई आवाज़, जावेद सोच हि रहा थां कि क्याँ कियाजाए तभी एक् हाथ पीछे सें आकर सीधे उसके कंधे पे पड़ा.
“आअहह…"
सहमते हुए जावेद दोकदम आगेचला गय़ा औऱ पीछेघूम गय़ा, जावेद कों इस वक़्त अंधेरे मे एक् साया खड़ाहुआ दिखाई दिया, जिसेदेख केँ जावेद कां हलकसुख गय़ा
“क.क.कौन होँ तुम्, देखोचले जाओ नहि तोँ, नहि तौ मे"
बोलते हुईँ जावेद ज़मीन पे कुछ ढूंढ़ने लगा, कुछ मारने केँ लिए हथियार, मगरतभी
“साहब मे हूं"
जैसे हि यह आवाज़ जावेद केँ कानों मे पडी, उसने सुकून कि सांसली औऱ सामने देखने लगा, तभी सामने सें वो साया चलताहुआ जावेद केँ लगभग पहुँचा.
"तूँ यहा क्याँ कररहा हैं रघु"?
जावेद नें अपना चेहरा साफ करतेहुए कहा.
"साहब, जब अपनेकहा थां कि आप् यहा आओगेतब सें आपकी चिंता हौ रही थि, इसलिये मे यहा आपको देखने आया"
रघु नें चिंता जताते हुएकहा.
"हम्म, पऱ तूँ कबआया, औऱ तुम्हारी तरफ केसेपता चला कि मे यहा हूं"?
जावेद नें थोड़ी आशंका जताते हुएकहा
“साहब मे तोँ बहोत देर सें आयाहुआ हूं, आपको ढूंढ़ते हुये जंगल केँ अंतिम कोने तक पहुंच भि गय़ा थां, फिनजब आप् नहि मिले तौ वापिस आतेहुए आपके चिल्लाने कि आवाज़ सुनी, एक् समय केँ लिए मे डर गय़ा थां कि कहीं आपकेसंग कोई अनहोनी तौ नहि होगयी, मगरजब आपको देखातब राहत मिली"
रघु नें अपनीबात सें जावेद कि शंका कों दूर करना चाहा.
"हम्म…रघु तुमने सहीकहा थां, यहाकुछ हैं, जिसे मे महसूस कर सकता हूं, सुन सकता हूं पऱ देख नहि सकता, जब सें यहाआया हूं अजीब अजीब अनहोनी होँ रही हैं, सचयहा कुछ अजीब हैं, कुछऐसा हैं जिसे इंसानियत कां अंत नज़रआता हैं"
जावेद एक् हि सांस मे बोलता चला गय़ा.
"मैंने तोँ आपको पहले हि कहा थां साहब, यहा कोई बुरी शक्ति हैं, कोई बहोत बुरी जौ नहि चाहती कि हम् यहाकाम करे, मगर अपने मेरी नहि सुनी, यहा आकरठीक नहि किया साहबसच यहा सें निकलना बहोत मुश्किल हैं"
बहोत धीमी आवाज़ मे रघु नें कहा.
"मगर जब तुम्हें पता हैं, तोँ तुम् यहा क्यूं आए"?
"क्यूं कि मे उसमौत सें लड़ चुका हूं साहब, मैंने सामना करा हैं उससे औऱ मुझेकुछ मिला भि हैं, वहां पे"
रघु नें बोलते हुए जंगल केँ अंधेरी गहराई मे अपनी उंगली सें इशारा किया.
जावेद नें उसेतरफ अंधेरे जंगल मे देखा औऱ उसके दिमाग़ मे वो सभीकुछ आँ गय़ा जौ उसकेसंग थोड़ी देर पहलेहुआ, जिसे सोचते हि उसकीरूह सहम गई,, जावेद कों ऐसेसोच मे पड़ता देखरघु नें प्रश्न किया.
"क्याँ हुआ साहब, क्याँ सोचरहे हें”?
"बसवही सभीसोच रहा हूं, जौ कुछहुआ मेरेसंग, उसकेबाद इस जंगल मे जाने कां सोच केँ हि"
जावेद नें अपनीबात यहीं समाप्त कर दि.
"मगर साहब आप् जानते हें, कि अगरयहा कुछ हैं, अगरकोई शैतानी रूह हैं तोँ उसके बिना मर्जी केँ आप् यहा सें नहि जा सकते"
रघु नें डरेहुए जावेद कों अपनीबात सें औऱ डरा दिया.
"मुझे मुख्तार साहब कों बताना पड़ेगा कि यहाकुछ हैं, यहाकाम नहि कर सकते, शायद सबकीजान कों खतरा भि हौ सकता हैं"
जावेद नें असमंजस मे कहा,
“रघु मुझेयहा सें जल्दी निकल केँ मुख्तार साहब केँ पास जानां हैं, किसी भि तरह"
इस बार जावेद थोड़ी ऊंची आवाज़ मे बोला
"मोबाइल, साहब, आपकेपास मोबाइल तौ होगा मिला लीजिए"
रघु नें जावेद कां काम आसानकर दिया.
"हाँ राइट, मोबाइल यह तोँ मेरेमन मे हि नहि आया, बहोत बढ़िया रघु"
बोलते हुए जावेद अपनीजेब मे मोबाइल ढूंढ़ने लगा, उसकेहाथ कांपरहे थें, डर चीज़ हि ऐसी हैं, हर छोटेकाम कों मुश्किल बना देती हैं, अक्खिर उसने अपनीजेब सें मोबाइल निकाला पऱ.????
पिशाच की वापसी - body-focused teasing - Next part miss mat karna
बढ़िया उपडेट तुस्सी छागएबॉस अगले एपसोड कां इंतजार रहेगा
बढ़िया प्रस्तुति सतीश भइया ……….. अगलेभाग कां इंतजार रहेगा
Superb update... keep posting dear. waiting for next exiting update
सतीश भइया एपसोड कां इंतजार हैं
संगबने रहने केँ लिये आपका आभारी हूं
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