पिशाच की वापसी - body-focused teasing – New Episode
पिशाच कि वापसी – 10
“शीट, नेटवर्क नहि हैं"
बोलते हुए जावेद जंगल सें बाहर् निकाला इस उम्मीद मे कि शायद सिग्नल मिलजाए, मगर बाहर् निकल केँ भि सिग्नल नहि आया, जावेद कि तकलीफ़ फिनबढ़ गयीँ,,
"शीट, यहा भि नहि हैं, रघु सिग्नल नहि आँ रहा हैं"
"साहब, मुझे वहांकुछ मिला भि हैं, आप् चलकरदेख लीजिए एक् बार, क्याँ पता वहां आपको सिग्नल मिलजाए"
रघु नें वहीं खड़े आवाज़ लगाई.
"नहि, रघु मे वहां नहि जानां चाहता, फिन सें नहि"
जावेद अपनीबात पे अटलरहा
"मे समझता हूं साहब, मगर मुख्तार साहब कों सबूत दिखाना पड़ेगा उन्हें मनाने केँ लिए औऱ शायद मुझे जोँ मिला हैं वो आपकेकाम आँ जाए"
रघु नें आहिस्ता समझाया.
"हाँयह बात भि हैं, रघुठीक कहरहा हैं, मुख्तार साहब कों दिखाने केँ लिए सबूत चाहिये, हाँ पर्र, पर्र मे दुबारा नहि जानां चाहता, मुझेयहा सें निकलना हैं, पऱ केसे, केसे निकलूं यहा सें, शायदरघु केँ सहारे हि निकलपाऊ, हाँ, शायद मुझेरघु कि बात माननी चाहिये"
जावेद कुछ मिनट अपने आपसे हि बातें करतारहा,
"ठीक हैं रघुचलो"
बोलते हुए उसने मोबाइल पे समय देखा तौ 3 बजरहे थें, फिन भारीमान सें जंगल केँ अंदरउसे खामोशी भरे अंधेरे मे खो गय़ा.
कुछदेर दोनों यूँ हि चलतेरहे, रघुआगे थां औऱ जावेद पीछे, दोनों मे सें किसी कि कोईबात नहि हुइ कुछदेर, आख़िर चलते चलते बहुतदेर होँ गयीँ, तब जावेद अपने आप् कों नहि रोक पाया.
“कितनी देर लगेगी हमें, बहोत देर सें चलरहे हें"?
"बस पहुंचने हि वाले हें साहब"
रघु नें इतनाकहा औऱ एक् बार दोनों चलनेलगे.
"मार्ग ख़त्म क्यूं नहि होँ रहा हैं, हम् दोनों कब सें चलेजा रहे हें"?
जावेद अपने आप् सें इतना हि कहपता हैं कि तभीउसे कुछ महसूस होने लगता हैं, उसे बड़ीजलन सि होने लगती हैं, उसका शरीर अजीब तरीके सें हिलने लगा, चेहरे पे तकलीफ़ सि आनेलगी, उसेऐसा लगनेलगा मानोकोई चीज़जल रही हौ.
“आँ… यह क्याँ हौ रहा हैं। बहोत जलरहा हैं आआहह"
फिन एक् ज़ोरदार चीख उसके मुंह सें निकली औऱ उसने बिना टाइम गंवाए जल्द सें अपना पहनाहुआ कोट उतार केँ नीचे फेंक दिया, उसकी साँसें तेजचल रही थि उसे अपने शरीर केँ कुछ हिस्सों मे जलन महसूस होनेलगी, जब उसने अपनी अंदर पहनी हुई शर्ट हटाई तोँ देखा कि उसके शोल्डर कां कुछ हिस्सा जलाहुआ हैं, वो इसबात कों समझता कि उससे पहलेजब उसने सामने देखा तौ उसका सारा दर्द गायब होँ गय़ा, सामने फेंका हुआ उसकाकोट भलभला केँ जलउठा। तभी उसके सामने नज़र गई तौ उसेरघु भि दिखाई नहि दिया, वो कुछकदम आगेचला हि कि उसे.
"आआआआआआआआआआआआआआआआआआआआआआआआअ……"
एक् दर्दनाक आवाज़ कानो मे पडी.
"यह तोँ रघु केँ चिल्लाने कि आवाज़ हैं"
जावेद बुरीतरह सें घबरा गय़ा, उसेसमझ नहि आँ रहा थां कि अब क्याँ करना हैं."
"याँ अल्लाह सहायता कर, कोई तोँ मार्ग दिखाइस मुसीबत सें निकलने कि, बक्षदे अपनेइस बच्चे कों, कोई तोँ मार्ग होगा, मोबाइल हाँ, मोबाइल, मोबाइल देखता हूं"
जावेद नें अपने आप् सें कहा औऱ जेब मे सें मोबाइल निकाला, पर्र आज शायद अल्लाह कि कोई रहमत नहि थि, मोबाइल मे सिग्नल नहि थां.
“शीट, सिग्नल अभि तक नहि मिलरहा हैं"
बोलते हुए जावेद नें अपनेहाथ कों झटका, तभी उसेकुछ महसूस हुआ, मानो उसनेकुछ देखा होँ औऱ उसपर ध्यान नाँ दिया होँ, उसने जल्दी अपना मोबाइल देखा, मोबाइल कि स्क्रीन कों देखते हि उसकीरूह, उसकी अंतर आत्मा हिल गयीँ,, जब मोबाइल कि स्क्रीन पे समय देखा तौ उसेपर 2 बजरहे थें, जबकि वो जंगल मे घुसातब 3 बजरहे थें, वो आगेकुछ सोचपता कि तभीउसे सामने सें कुछआता हुआ दिखाई दिया.
सामने सें आती हुईँ चीज़ कों देख केँ जावेद केँ हाथ सें मोबाइल गिर गय़ा, सामने उसआग कि रोशनी मे जौ अभि तक थि उस जॅकेट केँ जलने कि वजह सें उसे रोशनी मे जोँ सामने जावेद नें देखा वो बस देखता हि रह गय़ा, सामने सें हवा मे उड़ता हुआरघु कां जिस्म उस कि तरफ आँ रहा थां, जावेद वहां सें हट पाता इतनीदेर मे वो बदन उसकेउपर आँ गिरा, ढम्म्म्म ज़ोर सें आवाज़ आई औऱ दोनों ज़मीन पे गिरेहुए थें, एक् समय केँ लिए जावेद कि आँखें बंद हौ गई,, उसने जैसे हि आँखें खोली तोँ उसके सामने रघु कि लाश उसकेउपर पडी थि, जिसका सरबीच मे सें कटाहुआ थां, एक् हिस्सा एक् साइड पे तौ दूसरा एक् साइड पे थां, अंदर केँ मास मे खूनरिस रहा थां, इतना हि नहि जावेद केँ देखते देखते उसे चेहरे सें एक् आँख निकल केँ नीचेगिर गई,, जिसेदेख केँ जावेद अपनीचीख नहि रोक पाया
"आआआआआआआआआ…."
चिल्लाता हुआ उसनेलाश कों साइड मे फैंक दिया, वो उठता उससे पहलेउस खामोश पड़े जंगल मे मोबाइल बजउठा.
जावेद मोबाइल कि आवाज़ सुन केँ चौंक गय़ा, उसने जल्दी मोबाइल उठाया, देखा तौ उसपर मुख्तार कां नाम फ्लश हौ रहा थां, उसने बिना वक़्त गंवाए आन्सर किया.
"हेलो, हेलो मुख्तार साहब, यहा बहोत बड़ी गड़बड़ हैं यहाकोई हैं, जौ जौ"
जावेद इतना हि कह पाया कि दूसरी बढ़ सें आवाज़ आई.
"कोई नहि, मे हूं, मे, खीखीखीखीखीखीखीखी"
भारी औऱ भयानक आवाज़ जावेद केँ कानों मे पडी जिसेसुन केँ उसकादिल धड़कना बंद हौ गय़ा औऱ उसकेहाथ सें मोबाइल नीचेगिर गय़ा, उसके चेहरे सें यहसाफ हौ गय़ा थां कि अबउसे समझ आँ चुका हैं कि उसकी जीवन, शायदमौत मे बदलने वाली हैं.
उसनेलाश कों साइड मे फैंक दिया, वो उठता उससे पहलेउस खामोश पड़े जंगल मे मोबाइल बजउठा.
"सिग्नल नहि मिला, चचचच"
फिन सें वो भारी खौफनाक आवाज़ सुन केँ जावेद कां कलेज़ा मुंह कों आँ गय़ा, क्यूं कि इसबार यह आवाज़ उसे बहोत लगभग सें महसूस हौ रही थि.
जावेद नें घबराते हुए अपने पांव पीछे कि बढ़ मोडे औऱ पीछे कां नज़ारा देख केँ उसके पांव लडखड़ा गये औऱ वो नीचेगिर गय़ा, आज सें पहलेऐसा नज़ारा उसने ख्वाब मे कभी नहि देखा थां वो नज़ारा आज उसके सामने थां, एक् ऐसा खौफनाक दृश्य जौ उस काली अंधेरी रात मे औऱ भि ज़्यादा भयानक लगरहा थां
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पिशाच की वापसी - body-focused teasing – New Episode
पिशाच कि वापसी – 11
तभी वहां ज़ोरदार बिजली कड़कने लगी, कड़दड़…। कद्दद्ड…… कद्द्दद्ड…… कद्द्दद्ड……… कड़दड़…,
जिसकी रोशनी सें जब सामने कां दृश्य औऱ ज़्यादा चमका तोँ जावेद कि रूह नें एक् लम्हा केँ लिए उसकासंग छोड हि दिया, सामने वो बीच मे सें कटेसर कां बदन खड़ा थां बिलकुल उसेी स्थिति मे जैसे वो कटाहुआ थां, चेहरे कां एक् हिस्सा एक् तरफ औऱ दूसरा हिस्सा दूसरी तरफ, शायद सिर्फ़ दिखावे सें संतुष्टि नहि मिली कि उसने अपनी खौफनाक हँसी कों उस स्थान मे फैला दिया.
"आआआहा.आहहा.अहहा…."
वो भयानक हँसी उसकेउसे कटेहुए चेहरे पे इतनी खौफनाक नज़र आँ रही थि कि जावेद नें अपनी आँखें बंदकर ली, उसके वो आधे होंठ एक् तरफ हंसते हुए नज़र आँ रहे थें तोँ सेम दूसरी तरफ भि ऐसा हि थां, उसकेबाद कुछसमय केँ लिए शांति हौ गयीँ,, जावेद कों तोँ मन हि मनलगरहा थां कि किसी भि समय उसपर हमला होगा औऱ वो अंतिम साँसें गिनरहा होगा, मगर जबकुछ लम्हा केँ लिएकुछ नहि हुआ तौ उसने आँखें खोली, पऱ कोई फर्क नहि थां वो भयानक मंजर वैसे हि थां, बल्कि अब औऱ भयानक होनेजा रहा थां.
सामने खड़ेउसे बदन नें अपनेहाथ धीरे-धीरे धीरे-धीरे उपर उठाने शुरुआत किए औऱ अपने चेहरे केँ दोनों अलग हिस्से पे लें आया, औऱ धीरे-धीरे धीरे-धीरे उन हिस्सों कों पास लानेलगा, कुछ हि सेकेंड मे वो दोनों आपस मे मिलगये औऱ जुड़गये, जावेद यह दृश्य देख केँ बेहोश होने हि वाला थां कि तभीपास मे पड़ा उसका मोबाइल बजउठा, मगर जावेद तौ अपनी हि दुनिया मे थां वो दृश्य देखने केँ बाद, आँखें खुली थि, दिलचल रहा थां, पऱ उसकीरूह कहीं औऱ हि थि, मगरतभी
"उठा लेँ मोबाइल क्याँ पता मुख्तार कां होँ आआहाहा…अहहहः"
सामने खड़ेरघु केँ जिस्म नें फिन सें भयनक आवाज़ मे हंसते हुएकहा, जावेद अपनी दुनिया सें बाहर् आया औऱ कुछ सेकेंड वो पहले सामने खड़ी अपनीमौत कों देखता रहाफिन उसनेफोन कि तरफ देखा जोँ उसकेबगल मे हि गिराहुआ थां औऱ वो बजरहा थां, उसने अपने कपकपाते हुएहाथ सें मोबाइल कों उठाया, उसने सबसे पहले सिग्नल देखा जौ कि फूल थां फिननाम देखा जौ अननोन थां, उसकाहलक सुखरहा थां, जावेद नें अपने काँपते अंघुटे सें अन्सर कॉलआई कों स्लाइड किया औऱ अपनेकान सें लगाया.
"हेलो, जावेद साहब, आप् ठीक हैं नाँ, साहब, मेरी मानिए वहाउस स्थान पे मत जानां, नहि जानां साहब"
दूसरी तरफ सें आवाज़ आई, जिसेसुन केँ जावेद बच्चों कि तरह रोतेहुए जवाब देनेलगा.
"रघु, रघु तुँ हि हैं नाँ, मुझेबचा लें रघु मुझेबचा लें, मे मरना नहि चाहता बचा लें मुझे"
"साहब आप् चिंता मत कीजिए, आपकोकोई तकलीफ नहि होगी, अभि कुछदेर पहले हि मुझेमौत मिली हैं अब आपको वो मौत मिलेगी"
सामने सें जबयह बातें सुनी तोँ जावेद नें मोबाइल कोन सें हटा लिया, मोबाइल पे समय देखा तौ उसमें 3 बजरहे थें, मोबाइल हाथ सें गीर गय़ा, औऱ जावेद सामने खड़ेउस रघु केँ बदन कों देखने लगा, उसे सभीकुछ समझ मे आँ गय़ा कि यहसमय कां क्याँ खेलहुआ अभि अभि, रघुकभी उसकेसंग आया हि नहि, वो हि शैतान हि थां जौ हरसमय उसकेसंग थां, वो रघु थां जोँ 2 बजेमरा.
“खीखीखीखीखी"
सामने वो गर्दन उठा केँ ज़ोर ज़ोर सें हँसने लगा, इस हँसी कों देखकर अब जावेद समझ गय़ा कि उसकायह अंतिम वक़्त हैं, मगर वो मरना नहि चाहता थां, कोई इंसान ऐसे मरना नहि चाहेगा जिसके मरने कां किसी कों कुछपता भि नाँ चले.
"मुझेमत मारो, मे तुम्हारे हाथ जोड़ता हूं, क्यूं मारना चाहते होँ मुझे, क्याँ बिगाड़ा हैं मैंने तुम्हारा"
अक्सर इंसान मरने सें बचने केँ लिएयह करता हैं, फिन उसकीमौत कोई इंसान लेँ रहा होँ याँ फिनकोई शैतान, जोँ इस वक़्त जावेद कररहा थां.
"मौत सें क्याँ घबराना, मौत मे जौ आनंद हैं वो मज़ा तोँ जीवन भि नहि देती"
भयानक आवाज़ मे उसने अपनेकटे फटे होठों सें कहा.
"मगर, मगर इंसान कों मार केँ क्याँ मिलेगा, क्याँ कहते होँ तुम्"
जावेद फिन सें गिड़गिडया.
"क्यूं कि मुझे वो चाहिए, चाहिए वो मुझे"
भयानक पिशाच सें निकलती भयंकर आवाज़ नें जावेद कों तौ हिला केँ रख दियासंग संग वहां कां वातावरण बदल गय़ा, पेड़ तेजी सें हिलने लगे, आसमान मे बादल इकट्ठा होकरआपस मे लड़ने लगे, ज़ोर ज़ोर सें बिजली कड़कने लगी.
जावेद उसकी बातों कों समझ नहि पारहा थां, वैसे भि मौत औऱ डर नें उसकोघेर लिया थां.
"यह स्थान मेरी हैं, यह ज़मीन मेरी हैं, यह आसमान मेरा हैं औऱ जल्द हि मे इंसानियत कां नाशकर केँ इस पूरे ब्रम्हांड कों शैतान कां घऱ बनाउंगा, शैतान कां घऱ आहहहहहााआ.आँ…."
जावेद नें जबउस शैतान कि इस आवाज़ कों सुनातब वो समझ गय़ा कि उन्होंने कितनी बड़ी गलती कि हैं औऱ इंसानो केँ उपर कितना बड़ा खतरा मंडरा रहा हैं, जोँ शायद पूरी इंसानियत केँ लिए घातक होगा.
जावेद अपनी स्थान पे खड़ाहुआ, जैसे हि खड़ाहुआ उपर सें कुछ उसके सामने आँ गिरा, वो थोडा घबराते हुए पीछे होँ गय़ा,
"आअहह"
उसके मुंह सें डर कि चीख निकल गयीँ,, जैसे हि उसने सामने कां नज़ारा ढंग सें देखा तौ उसको उबकाई सि आँ गयीँ,, सामने रघु कि असलीलाश उल्टी लटकी हुइ थि, उसकेपेट मे सें उसकी अंतड़ियां बाहर् निकली हुई थि, गलाकटा हुआ थां उसेमें सें खूनबह रहा थां, उसकी रिब्ब्स उसकेबदन सें बाहर् निकलरही थि, औऱ उसकी आँखों मे सें खून निकलरहा थां, तभी सामने सें वो पिशाच चल केँ आया औऱ उसने अपने बड़े बड़े नाखून सें रघु केँ जिस्म मे सें उसकी निकली अंतड़ियां बाहर् निकली औऱ उसे चबाने लगा, जावेद यहसभी देख केँ अपने आप् कों रोक नहि पाया औऱ उसने वहां उल्टी करनी शुरुआत कर दि, फिनजब उसने सामने देखा कि वो शैतान खाने मे लगा हुवा हैं, उसने वहां सें भागने कि सोची, पऱ वो जैसे हि आगे थोडा निकला, उसके कानों मे वही शैतानी पिशाच कि हँसीपडी.
"खीखीखीखीखीखी, जब तक मे नाँ कहूँ, तब तक यहा सें कोई नहि जा सकता"
उस रूह नें अपनी भारी आवाज़ मे एक् बारफिन सें कहा, जिसेसुन केँ जावेद वहांरुक गय़ा औऱ पीछेघूम केँ उस शैतानी पिशाच कों देखने लगा, दोनों एक् दूसरे केँ आमने सामने खड़े थें.
"मे इस धरती कां सभीकुछ हूं, मे हूं अबइस धरती कां मालिक, मे, आआहाहहाः"
हाथ फैला केँ भारी आवाज़ मे उसे पिशाच नें गुराते हुइ कहा, औऱ उसके गुराते हि आसमान मे लड़रहे बादलो नें दम तोड़ दिया औऱ उसमें सें बहता पानी धरती पे जोरों सें गिरने लगा, एक् हि समय मे वहां ज़ोर सें बारिश शुरुआत हौ गई,.
"उपर वाले कि ताक़त सें बड़ाकोई नहि होताइस पूरे ब्रम्हांड मे"
जावेद नें बहोत ठहरेहुए लबज़ों मे कहा, मानोडर उसकेबदन सें ख़त्म हि होँ गय़ा हौ.
"जोँ कुछ भि हैं सिर्फ़ मे हूं, सिर्फ़ मे, आज तुँ अपनीमौत केँ सामने खड़ा हैं, अगर मेरे सें बड़ाकोई हैं तोँ तुम्हें बचा केँ दिखाए"
बोलते हुए वो पिशाच धीरे-धीरे धीरे-धीरे आगे बढ़ने लगा, औऱ जावेद नें आजफिन कुदरत कि शैतानी ताक़त कों देखा, आगे बढ़ते बढ़ते उस पिशाच कां जिस्म जोँ इससमय रघु कां थां, वो धीरे-धीरे धीरे-धीरे बदलते हुए जावेद कां हौ गय़ा.
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पिशाच की वापसी - body-focused teasing – New Episode
पिशाच कि वापसी – 12
"तुम् इंसान कुछ नहि बिगाड़ सकते मेरा, कुछ नहि"
भारी आवाज़ मे बोलते हुएउस पिशाच नें अपनाहाथ उपर किया औऱ उसनेऐसे हि इशारा किया मानो अपने नाखून सें कुछ कुरेद रहा हौ, हुआ भि यही जैसे हि उसनेहाथ सें इशारा किया वैसे हि जावेद केँ हाथ उसकेगले पे चलेगये, उसकी आँखें बाहर् निकलने कों हौ गई,, उसकेहाथ केँ पीछे सें खून कि धारा बहनेलगी, जावेद कों सांस लेने मे तकलीफ होनेलगी,
वो पिशाच आगे बढ़ता जारहा थां, उसने अपनेहाथ सें एक् बारफिन इशारा किया औऱ जावेद केँ ठीक पीछे ज़मीन सें मिट्टी हटनेलगी औऱ कुछ हि सेकेंड मे एक् गहरा गढ़ाबन गय़ा, फिनउसे रूह नें हाथ सें एक् ऐसा इशारा किया मानो धक्का दिया होँ, जावेद सीधेउसे गढ्ढे मे जा गिरा.
“आआआआहह"
उसके मुंह सें एक् जोरदार चीख निकली, जावेद पीठ केँ बालउसे मिट्टी केँ गढ्ढे मे गिराहुआ थां औऱ उसकेगले सें खूनबह रहा थां, बारिश कां पानीउस गढ्ढे मे भरनेलगा, जावेद कि आँखें आधी खुली हुईँ थि, उसे सांस लेने मे भि तकलीफ हौ रही थि, उसकी आँखें बंद होती उससे पहले उसनेउस काले साये कों देखा जोँ हवा मे उड़ता हुआआया औऱ सीधे जावेद केँ घुटनों पे जा गिरा …
तड्द्ड़…तद्द्द्द्द्द्दद्ड। कर केँ जावेद कि हड्डियाँ चूरचूर होँ गयीँ, औऱ उसके मुंह सें एक् ज़ोरदार चीख निकलपडी, उसका चेहरा ज़मीन सें बहुतउपर उठ गय़ा, आँखों सें आँसू निकल केँ साइड मे गिरने लगे.
"यह वक़्त मेरा हैं, तुम् इंसान मेरे गुलाम हौ गुलाम"
वो पिशाच एक् बारफिन अपनीउस खौफनाक आवाज़ मे चिल्लाया औऱ आसमान मे एक् बारफिन बिजली नें कड़कड़ाना शुरुआत कर दिया, उसनेहाथ सें इशारा किया औऱ एक् संगढेर सारेी मिट्टी उसे गढ्ढे मे भरनेलगी, जावेद कां बदन मिट्टी मे धसनेलगा वो अपनी गर्दन उपरकर रहा थां जिससे सांस लेँ पाए, उसकी आँखें आधी खुली थि जिसमें वो उस पिशाच कों थोडा थोडा देखपा रहा थां, मौत उसके लगभग थि, दहशत उसकी आँखों केँ सामने थां मगरफिन भि जबान पे वो अनमोल शब्द थें,
"अल्लाह बक्श देनाइसे"
जावेद इतना हि कह पाया कि उसरूह नें अपनाहाथ उठाया औऱ जावेद कि छाती केँ बीचों बीच घुसा दिया जावेद कि साँसें वहींरुक गयीँ,, मगर भड़के हुए पिशाच कों अभि कुछ औऱ चाहिए थां, उसने अपनेहाथ कों पीछेखिच केँ उस छाती केँ मास कों फाड़ डाला औऱ अपनाहाथ डाल केँ उसमें सें जावेद केँ लंग्ज़ कों उखाड़ केँ बाहर् निकल लिया.
"याआआआआआअ…। अहहहहहहा, अल्लाह सें बड़ा हैं शैतान, शैतान अहाहाहहाह। मे आँ गय़ा हूं वापिस, हा, आँ गय़ा हूं मे, आहाहहा."
वो आसमान कि तरफदेख केँ गुर्राता रहा, उसकी आवाज़ मे एक् खौफ थां, एक् क्रोध थां औऱ एक् मेसेज थां कि इंसान अब शैतान कां गुलाम बनेगा, उस गढ्ढे मे पानी औऱ मिट्टी भरती गई,, औऱ कुछ हि पलों मे वहांकुछ नहि बचा नाँ हि जावेद औऱ नां हि वो पिशाच.
"खीखीखीखीखीखीखीखीखी"
बारिश कि हँसी केँ संगउस पिशाच कि आवाज़ पूरे जंगल मे गूँजउठी, शायदयह हँसीआने वाले वक़्त मे तड़पते हुए इंसानो कि मौत कि हँसी थि.
पिंकसूट मे भागती हुइ वो सीडिया चढ़रही थि, हाथों मे पहनी चूड़ियां भागने कि वजह सें छनछनकर रही थि, उसकेसूट कि चुन्नी नीचे ज़मीन पे घिसती हुइ जारही थि, चेहरे पे मासूमियत बिखररही थि मगरसंग हि संग उसपर चिंता औऱ तकलीफ़ कि लकीरें भि थि, भागती हुइ वो एक् कमरे केँ सामने रुकी जिसका दरवाजा बंद थां, उसने अपने काँपते हुएहाथ आगे बड़ा केँ डोर कों खोला, डोर खुलते हि अंदर सें एक् नर्स उसकीतरफ देखती हुई बाहर् निकल गई,, उसने सामने देखा तोँ बिस्तर पे वो सोरही थि बड़ी शांति सें, मानो दुनिया कि कोईखबर हि नां होँ, उसकी आँखें बंद थि, चेहरे पे ऑक्सिजन मास्क लगाहुआ थां, डोर सें सामने कां नज़ारा देख केँ उसकी आँखों सें आँसू कि बूंदे बाहर् छलकआई, धीरे-धीरे धीरे-धीरे कदमों सें वो रूम मे एंटर हुईँ औऱ बेड केँ पासआकर बैठ गई, ….
उसने अपनेहाथ आगे बढाये औऱ उसके माथे पे रख केँ उसने अपनी प्यारी सि बेहद धीमी आवाज़ मे उसकानाम पुकारा.
"नीलू “………। अंशिका नें नीलू केँ माथे पे हाथ फेरते हुएकहा, कुछ सेकेंड बाद नीलू नें धीरे-धीरे धीरे-धीरे आँखें खोली औऱ अंशिका कि तरफदेख केँ मुस्कुराईं, अंशिका भि उसेदेख केँ मुस्कुराईं पऱ उसके चेहरे पे अभि भि एक् तकलीफ़, दुख दिखाई देरहा थां.
"नीलूसभी ठीक हौ जाएगा, प्लीज़ तुम् हिम्मत रखो"
बोलते हुए अंशिका कां गला भारी हौ गय़ा.
अंशिका कि बातसुन केँ नीलू कि आँखों सें आँसू निकल केँ साइड सें होता कहींखो गय़ा, नीलू नें अपने काँपते हाथों सें फेस पे लगा मास्क हटा दिया.
"हा……."
नीलू नें एक् गहरी सांसली औऱ फिन अंशिका कों देखती हुईँ उसके चेहरे पे हल्की सि मुस्कान आँ गई,.
"अंशिका"
नीलू नें इतना हि कहा कि उसे सांस लेने मे तकलीफ होनेलगी, "
"नीलू, डॉक्टर.!!
अंशिका चिल्लाई.
"नहि, नहि प्लीज़ अंशिका अब नहि, मुझे तुझसे हि बात करनी हैं, अधिक वक्त नहि हैं मेरेपास"
बोल केँ नीलू अंशिका कों घूरने लगी, अंशिका केँ कानों मे नीलू कि कही हुइ बातें घूमने लगी
"नहि नीलूयह क्याँ बोलरही हौ, तुम्हें कुछ नहि होगा प्लीज़ ऐसामत कहो"
बोलते हुए उसने नीलू कां हाथ पकड़ लिया, उसकी आँखों सें आँसू एक् बारफिन बाहर् आनेलगे.
"नहि अंशिका, शायदयह सही वक़्त हैं, वो मुझेयाद कररहा हैं बहोत औऱ उसे अधिक मे."
बोलते हुएउसे प्यारे चेहरे पे दुख कि परछाई छा गई, औऱ आँखों सें वो प्रेम केँ कुछ अनमोल याद बाहर् आँ गई,, शायददुख थां, बिछड़ने कां.
"नहि नीलू वो कभी नहि चाहेगा, कि तूँ उसकेपास आये, हि ऑल्वेज़ वांटेड यूटूबी हॅपी, प्लीज़ तूँ ऐसामत कर, प्लीज़ हम् सभी कां क्याँ होगा नीलू प्लीज़"
रोतेहुए अंशिका नें नीलू कों समझाया.
पिशाच की वापसी - body-focused teasing - Aage kya hua? Next part padhiye
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