पिशाच की वापसी - body-focused teasing – New Episode
पिशाच कि वापसी – 13
"हम् दोनों ध्यान रखेंगे सबका, मे औऱ नहि सहनकर सकतीयह तन्हाई, मेरादिल बिखरता जारहा हैं अंशिका मे क्याँ करूँ, मे क्याँ करूँ"
नीलू नें बोलते हुए आँखें बंदकर ली, आँखों सें उन कीमती यादों कों बाहर् निकालने मे उसे बेहद तकलीफ होँ रही थि.
"हम् हैं तुम्हारे संग, प्लीज़ अपने आप् कों संभालो, सभीठीक हौ जाएगा"
अंशिका कां गला भारी होँ गय़ा थां, उसकी प्यारी सि आँखें असीमदुख कों बाहर् निकाल रही थि, कुछदेर वो बसऐसे हि नीलू केँ माथे कों सहलाती रही, कमरे मे सिर्फ़ उन मशीनो कि आवाज़ आँ रही थि जोँ लगी हुई थि, पऱ तभी नीलू नें आंखें खोली.
"मुझसे वादाकर अंशिका, प्रॉमिस कर, उसे कभीपता नहि चलना कहिए कि क्याँ हुआ हमारे संग, उसपरकभी उसकाअसर नहि पड़ने देगी, उसे कभी नहि पता चलने देगी कि वो कौन हैं, मे कौन हूं, उसकोइस स्थान सें इतनीदूर लेँ जानां कि कभीइस स्थान कां जिक्र नां हौ, मुझे प्रॉमिस कर अंशिका, प्लीज़, प्लीज़."
बोलते हुए नीलू कां गला भारी होनेलगा.
"नहि नीलू, मे नहि कर सकती, प्लीज़, मेरेपास इतनी ताक़त नहि हैं"
अंशिका नें अपनी गर्दन नाँ मे हिलाते हुएकहा,
"तुम्हें कुछ नहि होगा, यू हॅवटू लाइव, तुम् ऐसा नहि कर सकती"
अंशिका नें नीलू कों देखते हुएकहा.
"तुम्हें मुझसे यह प्रॉमिस करना होगा, उसकेलिए अंशिका, उसकेलिए, जिसने तुम्हें अपनी जीवन बनाया, उसकेलिए, जिसे तुम् प्रेम करती थि, प्रॉमिस करो मुझसे"
नीलू नें अंशिका कि तरफ अपना दूसरा हाथआगे बढ़ाया, अंशिका उसे देखते रोतीरही, कुछकह नहि पाई, बस उसने भि अपनाहाथ आगे बढ़ाया औऱ नीलू केँ हाथ केँ उपररख दिया, एक् ऐसा वादा लें लिया जिसेअब उसे निभाना थां, दोस्ती केँ लिए, प्रेम केँ लिए, खुशी औऱ जीवन केँ लिए.
"मे प्रॉमिस करती हूं नीलू, मे प्रॉमिस करती हूं, कभीकुछ नहि पता चलेगा, कभीकुछ नहि"
बोलते हुए अंशिका आगे बड़ी औऱ उसने नीलू केँ माथे पे अपने होंठसजा दिए, शायद अंतिम कुछसमय बेहद प्यारे होते हें किसी अपने केँ संग केँ, अंशिका जानती थि कि आने वालेकुछ हि पलों मे क्याँ होगा.
नीलू नें अपनी आँखें बंदकर ली,
"मे आँ रही हूं ‘हर्ष’, आँ रही हूं मे तेरेपास हमेशा केँ लिए, आँ रही हूं आअ"
एक् लंबी सांस भरतेहुए नीलू नें अपनी आँखें नहि खोली.
"नीलुऊऊ……."
रोतेहुए अंशिका ज़ोर सें चिल्लाई, नीलू कों हिलाने लगी, मगर उसेपता थां इस प्रेम केँ आगे जीवन नहि रही.
"अंशिका"कमरे केँ डोर पे खड़े होकर उसने आवाज़ लगाई, अंशिका जल्दी पीछे मुड़ी औऱ उसे देखकर भागते हुए उसकेगले जालगी.
"सीड, नीलूअहह… नीलू"
अंशिका इतना हि कहपाई औऱ फिन ज़ोर ज़ोर सें रोनेलगी.
सीड भि सामने देखरहा थां, जहाँ नीलू निढाल पडी थि, आँखें बंदकर केँ एक् बहोत गहरी नींदमें, एक् ऐसी नींद जहाँ सें कोईउठ केँ वापिस नहि आता, सीड कि आँखों सें भि आँसूछलक आए औऱ उसने अंशिका कों औऱ कस केँ अपने मे समेट लिया.
“चाहती बहोत हूं तुम्हे इसलिये यह जीवन भि बेकार लगरही हैं, प्रेम कों मिलने मे आँ रही हूं, जीवन कों छोड केँ"
नीलू कि डायरी मे अंतिम लाइन लिखी हुई थि जोँ साइड मे रखी टेबल पे खुली हुई थि.
2 सालबाद …………। साल 2010
सुभह हौ चुकी थि, बितीरात जौ भि हुआ, उसके बारे मे शायदयह कुदरत हि जानती थि, उसके अलावा कोई नहि, समय नें माहौल अभि भि वैसा हि बनारखा थां, बिलकुल खामोश, जैसेकुछ नां हुआ होँ, ऐसी खामोशी बहोत बड़ी तबाई कों दस्तक देती हैं.
मौसम खामोश थां औऱ वहां खड़ेलोग भि खामोश थें, मुख्तार खड़ा थां हाथ मे हाथ बांधे चेहरे पे उसके टेन्शन थि, उसके सामने कुछ मजदूर खड़े थें, कुछ इंजीनियर खड़े थें.
"क्याँ करना हैं साहब"
उनमें सें एक् नें कहा.
"देखो, काम तौ बंद नहि होगा, तुम् नहि करोगे कोई औऱ करेगा, पऱ मे तुम्हें विश्वास दिलाता हूं कि घबराने वालीबात नहि हैं, किसी भि मजदूर कों कुछ नहि होगा, यहा कोई आत्मा वातमा नहि हैं, सुना तुम् सभी नें, यहाकुछ नहि हैं"
मुख्तार चील्लाते हुए बोला, उसकी आवाज़ पूरी स्थान पे गूंजने लगी.
उसके इतना कहते हि, अचानक सें हवा चलनेलगी, पेड़ हिलने लगे औऱ उसेहवा मे कुछ अजीब सि आवाज़ थि, मानोकुछ कहना चाहती हौ.
"सुना साहब अपने, सुना, यह आवाज़ हवा मे कुछ कहना चाहती हैं, मेरीबात मानिए साहबयहा.”
"चुपरहो तुम्"
मुख्तार गुस्से मे बोला,
"कुछ नहि हैं ऐसायहा, हवा मे कुछ हैं क्याँ हैं इसहवा मे, ब्लडी ईडियट्स.!"
गुस्से मे मुख्तार चिल्लाया.
"अगरकुछ नहि हैं तोँ फिनरघु औऱ जावेद साहब कहां गायब हैं, क्यूं नहि आए वो दोनों"
उनमें सें एक् नें कहा.
"जावेद कों जरूरी काम सें शहर जानां पड़ा, रही बात तुम्हारे रघु कि तोँ वो भघोड़ा निकला भाग गय़ा कलरात हि, यहशहर छोड केँ"
मुख्तार नें भड़कते हुए एक् बारफिन कहा.
“देखिए आप् सभी, यहा डरने कि जरूरत नहि हैं, आप् सभी अपने अपनेकाम पे लगजाए, हमेंयह काम वक़्त पे पूरा करना हैं “
वहां खड़े एक् इंजीनियर नें सबको समझाया.
"यह आप् बहोत गलतकर रहे हें मालिक, यहाकोई पिशाच बस्ती हैं, यह आप् अच्छी तरह जानते हैं, अगर अभि भि काम नहि रुका तोँ नाँ जाने कितना खून बहेगा, फिनउस खून कां हिसाब कोई नहि रख पायेगा आप् भि नहि, क्यूं कि शायद आप् भि नाँ बचे"
उनमें सें एक् मजदूर नें गुर्राते हुएकहा.
मुख्तार कुछ नहि बोलाबस उसे देखता रहा औऱ फिन अपनी वाहन मे बैठ केँ वहां सें निकल गय़ा.
"देखो मुझेहर बात कि खबर चाहिए, कौन क्याँ कररहा हैं, केसेकर रहा हैं, हर एक् डिटेल मुझे चाहिए समझरहे हौ नां तुम् सभी"
मुख्तार अपने सामने खड़ेकुछ आदमियो सें बातें कररहा थां.
"जीसर, आप् बेफिक्र रहिए"
"एक् बात औऱ जोँ सबसे अधिक जरूरी हैं, कोई भि घटना घटती हैं, याँ कोई भि मौत होती हैं तोँ उसके बारे मे किसी कों कुछपता नहि चलना चाहिए, कुछ भि नहि"
मुख्तार नें गंभरी चेहरा बनाते हुएकहा.
"जीसर, किसी कों कुछपता नहि चलेगा"
इंसान जितनी चाहे कोशिश कर लेँ बचने कि, टाइमहर मुसीबत कां सामना करा हि देता हैं, पर्र शायद वक़्त नें एक् बदलाव लेँ लिया थां, कुछदिन काम बिना किसी रुकावट केँ बढ़ता जारहा थां, पऱ एक् दिन कां कामतीन दिन मे पूरा होँ रहा थां, उसके पीछेकुछ वजह थि, पहलीवजह यह कि काम कां टाइम सिर्फ़ 12 सें 4 बजे तक होँ पारहा थां, क्यूं कि उसकेबाद ठंडउस स्थान पे ऐसे पड़ती थि कि वहां खड़ा होना करीब-करीब नामुमकिन सां होनेलगा थां, उसके अलावा एक् बहोत हि अजीब सें हादसे हौ रहे थें, जिसका कोई इंसानी तालूक़ तौ नहि थां, पऱ इसेकोई दूसरा नाम भि नहि दे सकते थें, हादसों मे कईबार कोई मजदूर अपनीशकल कां दूसरा व्यक्ति देख लेता जौ उसकेसंग हि कमकररहा होता थां, किसी भि इंसान केँ लिएयह एक् बेहद डरावनी बात होती हैं जब वो स्वयं पहले सें डराहुआ होँ, कभीकभी काम करते करते मजदूर ज़मीन पे गिर जाता औऱ अजीब अजीब सि आवाज़ निकालने लगता अपने आप् कों नोचने लगते, इसमें कुछ मजदूर घायल भि हुए, पर्र मुख्तार नें बात कों हमेशा दूसरी तरफ मोड़ केँ उसे समाप्त कर दिया, पर्र एक् दिन.
Superb,,,,,,,,,,,
बढ़िया भाग केँ लिए बहोत बहोत शुक्रिया अगले एपसोड कां इंतजार रहेगा
बढ़िया उपडेट तुस्सी छागएबॉस अगले एपसोड कां इंतजार रहेगा
पिशाच की वापसी - body-focused teasing – New Episode
पिशाच कि वापसी – 14
एक् मजदूर अपनी पूरी मेहनत सें कामकर रहा थां, खच्चच …। खच्चच, एक् स्थान हल्की सि खुदाई कां काम करना थां उसे, वो अपनेकाम मे मग्न थां वहां केँ हालत कों भूल केँ, कि तभी उसने ज़मीन पे कुछ देखा, ज़मीन पे हल्का सां पानीभरा हुआ थां जिसे उसने उसके अंदरकुछ देखा वो सोचने लगा कि क्याँ हैं, फिन उसने अपनेहाथ आगे बढाया धीरे-धीरे धीरे-धीरे उस पानी कि तरफ, धीरे-धीरे धीरे-धीरे वो हाथआगे बढारहा थां औऱ जैसे हि उसनेउस पानी कों चूहा.
"आआआआआआआअ….!!
एक् आवाज़ जोँ चीखने कि थि वो अचानक घुट केँ रही गयीँ,, जिसेकोई औऱ सुन नहि पाया.
रोज़ कि तरहकाम हौ रहा थां, आज कां मौसमकुछ अजीब थां बाकी दीनों सें, कुछअलग हि माहौल, मानो एक् अजीब सि शांति जोँ नाँ तौ इंसान कों भारही थि औऱ नां हि उस स्थान सें दूरभेज रही थि, ऐसालग रहा थां मानोउस स्थान नें वहां पे सबको जकड़ा हुआ थां, बेमन सें हि सही पर्र सभी अपनेकाम मे लगेहुए थें.
दोपहर कां वक़्त थां, कुछलोग आगे केँ हिस्से मे कामकर रहे थें तौ कुछ वहांबनी उस उजड़े हुए कब्रिस्तान केँ उपर, पर्र एक् अकेला ऐसा मजदूर थां जौ जंगल कि गहराई मे कामकर रहा थां, स्थान स्थान गढ्ढे खुदेहुए थें, बारिश कि वजह सें पानीभरा हुआ थां.
"खच्चच …। खच्चच, आवाज़ केँ संग वो मिट्टी उठा केँ साइड मे डालरहा थां, उसकाकाम करीब-करीब ख़त्म पऱ हि थां, कि उसने गढ्डे मे भरे पानी केँ अंदरकुछ देखा, उसकी आँखें बड़ी होँ गयीँ, औऱ उसकेहाथ उसके स्वयं केँ चेहरे पे घूमने लगे, मानो चेहरे सें कुछ हटाना चाहरहा हौ, तभी उसने अपने चेहरे सें हाथ हटाया औऱ फिन दुबारा पानी मे देखा, इस बारउसे राहत कि सांसआई क्यूं कि उसका चेहरा अब नॉर्मल दिखाई देरहा थां मगरतभी …
देखते हि देखते उसका चेहरा उसकेचीन सें काला होनेलगा, मानो धीरे-धीरे धीरे-धीरे जलरहा हौ, उसेमें छाले पड़ने लगे, वो जलता गय़ा औऱ धीरे-धीरे धीरे-धीरे उपरबढ़ गय़ा औऱ कुछ हि पलों मे वो आधा चेहरा अपनाजला हुआदेख रहा थां, एक् बारफिन उसको झटकालगा.
"आआहह."
वो हलके सें चिल्लाते हुआ थोडा पीछेहुआ औऱ अपने चेहरे पे हाथ लगाने लगा, मगर उसेफिन महसूस हुआ कि उसका चेहरा बिलकुल ठीक हैं, उसकेदिल कि धड़कने बढ़रही थि, साँसें इतनी जबरदस्त चढी हुई थि मानो वो मिलोदूर सें भागकर आया हौ, चेहरे पे एक् डरउभर केँ उसके चेहरे पे निखररहा थां, उसकेहाथ पाव एक् लम्हा केँ लिएफूल गये, हिम्मत तोँ नहि होँ रही थि कि वो आगे बड़े पर्र फिन भि वो आगे बड़ा, इंसान कि लालसा उससेहर वो काम करने कि तरफ खिंचती हैं जिसे नहि करना चाहिए, वो काँपते हुएपेर कों उठा केँ थोडा सां आगे गय़ा औऱ वहा जाकर अपनीशकल एक् बारफिन पानी मे देखी.
"मुझे हि धोका होँ रहा हैं, हरिया सही कहता थां, यह स्थान हि अजीब हैं, मुझेयहा सें निकल जानां चाहिए, नहि तोँ मे पागल हौ जाऊंगा"
कहते हुई वो व्यक्ति वहां सें जाने लगता हैं कि तभी उसके कानों मे उसेकोई जानी पहचानी आवाज़ सुनाई देती हैं.
उसे आवाज़ कों सुन केँ वो वहींरुक गय़ा, मगरफिन वो आवाज़ भि आनीबंद हौ गई,,
"इस स्थान मे जरूरकोई गड़बड़ हैं"
बोलते हुए वो आगे बड़ा कि उसे एक् बारफिन जानी पहचानी आवाज़ सुनाई पडी, आवाज़ सुन केँ वो वहींरुक गय़ा पऱ इसबार वो आवाज़ नहि रुकी, वो उस आवाज़ कों ध्यान सें सुनने लगातभी उसे महसूस हुआ कि वो कोन चिल्ला रहा हैं.
"यह आवाज़ तोँ हरिया कि हैं"
बोलते हुए वो पीछे मुडा, मगर उसके पीछेकोई नहि थां, थि तोँ सिर्फ़ वो आवाज़ जिसमें उसकानाम थां, मंगलू, मंगलू, बसयही आवाज़ आँ रही थि.
"हरिया, हरिया, कहां हैं तुँ"
मंगलू आगे कि तरफ बढ़ता हुआ चिल्लाया.
"मे यहीं हूं, तेरे सामने, मुझेबचा लेँ भइया, मे यहाफँस गय़ा हूं बचा लें मुझे"
हरिया कि घबराई हुई आवाज़ सुन केँ मंगलू केँ माथे पे शिकन आँ गयीँ, औऱ उसके जिस्म मे डर कि एक् लहर दौड़ गयीँ,.
"पऱ मुझे तूँ क्यूं दिखाई नहि देरहा, कहां हैं तूँ"
आगे बढ़ते हुए वो उसेी स्थान पे पहुंच गय़ा थां जहाँ सें वो चला थां, वो जंगलो कि गहराइयो मे देखने कि कोशिश कररहा थां मगरउसे कुछ भि दिखाई नहि देरहा थां, कोहरा इतनाघना थां कि अधिकदूर सें आँखों कि रोशनी सें देख्ना नामुमकिन थां.
"मेरे भइयादेख मे तेरे पीछे हि हूं जल्दकर"
तभी मंगलू केँ कानो मे आवाज़ पडी तौ वो जल्दी पीछे मुडा औऱ सामने कां नज़ारा देख वो पूरीतरह सें चौंक गय़ा, उसका जिस्म कांपउठा.
"हरियाआआ….”
मंगलू ज़ोर सें चिल्लाया, उसके सामने हरिया उसेी गढ्ढे मे पानी केँ अंदर थां औऱ बारबार पानी पे हाथमार केँ बाहर् निकलने कि कोशिश कररहा थां, पऱ निकल नहि पारहा थां.
"हरिया, तुँ, तुँ अंदर केसे, हे ईश्वर यह क्याँ देखरहा हूं मे"?
मंगलू इससमय कों देख केँ बिलकुल कांप चुका थां, उसे यकीन नहि होँ रहा थां कि यह उसकी आँखें क्याँ देखरही हैं, उसका जिस्म डर सें कांपरहा थां वहीं अपने मित्र कों उसे स्थान पे ऐसेदेख कि पूरीतरह सें चिंता मे थां.
"वो सभीमत पूछ, मुझे जल्द बाहर् निकाल, मुझे सांस लेने मे दिक्कत हौ रही हैं बहोत"
हरिया फिन सें चिल्लाता हैं.
"तुँ चिंता मतकर भइया, मे हूं नाँ, मे बचाता हूं तुम्हारी तरफ"
इतनाकहा औऱ वो पानी मे उतर गय़ा, पानी उसकीकमर तक आँ गय़ा, पर्र घुसते हि उसे अजीब सि चीज़ महसूस हुइ
"पानी गर्म, इस स्थान पे हे ईश्वर यह तुँ आज क्याँ खेल दिखारहा हैं"
इतना सोचते हुई वो कुछकदम आगेबढा.
पऱ वो क्याँ जाने कि यहखेल कोई ईश्वर नहि, बल्कि कुदरत मे जन्मा एक् पिशाच खेलरहा हैं.
मंगलू आगे बड़ा, दूसरी तरफ सें हरिया कां हाथउपर उठा मानो पकड़ने केँ लिएहाथ देरहा हौ, मंगलू कां दिमाग़ इस वक़्त उसकेसंग नहि थां, उसने भि अपनाहाथ उसतरफ बढ़ाया, उंगलीयो नें पानी कों छुआ, थोडा सां हाथ अंदर गय़ा कि तभी…….
उसकाहाथ फँस गय़ा, अचानक हि उसके जिस्म कों झटकालगा, उसे महसूस हुआ मानोउसे कोई खींचरहा हौ, इससभी सें मंगलू कां ध्यान पानी सें हट गय़ा औऱ वो अपनेहाथ कों बाहर् खींचने लगा, मगर वो हाथटस सें मस नां हुआ, मानो किसी पानी मे नहि बल्कि एक् गाढ़े कीचड़ मे फँस गय़ा होँ, वो कोशिश करनेलगा मगर उसकाहाथ नहि निकला
"हरिया मेराहाथ आँ, निकल नहि."
बस इतना हि कहता हैं औऱ पानी कि तरफ देखता हैं तोँ उसे एक् औऱ बडा झटका लगता हैं, पानी मे हरिया कि छाया याँ उसकाकोई भि अस्तित्व उसे नहि दिखा, उसकीरूह अंदर तक कांप गयीँ,, उसके जिस्म मे डर कि अकड़न पैदा हौ गयीँ,, वो चिल्लाया
"बचाओ"
बस इतना हि चिल्ला पाया कि उसकी आवाज़ घुट गई, औऱ तभी उसका जिस्म पानी केँ अंदरऐसे घुस गय़ा मानो किसी नें तेजी सें अंदरखिच लिया हौ.
स्टोरी जारी रहेगी.
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पिशाच की वापसी - body-focused teasing – New Episode
पिशाच कि वापसी – 15
कुछदेर पानी मे कोई हलचल नहि हुईँ, पर्र तभी अचानक सें, कुछ अजीब सि आवाजें आनेलगी पानी केँ अंदर सें, मानो हज़ारों किडेकुछ कुतररहे होँ तेजी सें, नाँ जाने क्याँ पऱ बहोत ज़ोर ज़ोर सें कुतरने कि आवाज़ आनेलगी मानोकोई चीज़ किसी मे सें खींची जारही होँ, पर्र तभी पानी मे बुलबुले सें बननेलगे औऱ फिनतेज आवाज़ करतेहुए, एक् फुव्वारा उपर कि बढ़ उड़ा, खून कां फुव्वारा, मानो किसी नें पानी केँ नीचेखून कां फुव्वारा बनारखा हौ, वो खून पूरे पानी मे फैल गय़ा औऱ कुछ हि पलों मे पानीलाल हौ गय़ा, कुछ मिनट तक ऐसे हि खून कां फुव्वारा निकलता रहा औऱ फिन वो शांत हौ गय़ा.
पऱ शायदइस बार कुदरत, याँ फिनयूँ कहूँ कि पिशाच केँ इरादे कुछ औऱ हि थें, तभी एक् बार पानी मे हलचल शुरुआत हुईँ, पानी मे ज़ोर ज़ोर सें बुलबुले उठनेलगे औऱ अचानक हि…
पानी मे सें एक् कंकाल हवा मे उड़ता हुआ बाहर् निकला औऱ सीधा पीछे वाले पेड़ केँ आगेजा गिरा, औऱ इधर गड्ढे मे एक् अजीब सि आवाज़ हुईँ औऱ सारा पानीकुछ हि लम्हा मे ज़मीन केँ अंदरचला गय़ा औऱ वो गढ़ासुख गय़ा.
पेड़ केँ सहारे वो कंकाल ऐसे हि पड़ारहा उसका चेहरा बतारहा थां कि कितनी दर्दनाक तरीके सें उस नोचा गय़ा हैं, हड्डियों पे भि बारे बारे निशान थें, कुछ स्थान बारे बारे गड्ढे हौ गये थें। मंगलू केँ शरीर कां एक् भि कतरामास उस कंकाल मे नहि बचा थां.
तभी वहां किसी केँ पैरों कि चलने कि आवाज़ आनेलगी,
"यह मंगलू कहां गय़ा, इसको मे बोला थां कि अकेले इस जंगल मे काममत करना, अगर करना तौ किसी कों संग लेकर करना थां, अबपता नहि"
वो इतना हि कह पाया कि उसकी नज़र सामने पड़े कंकाल पे गय़ा, वो वहींरुक गय़ा, मानो किसी नें उस खामोशी कि दवादे दि हौ, पऱ अचानक हि वो चिल्ला पडा.
"आआआआआआहह, भूत, भूत"
चील्लाते हुई वो वहां सें भाग गय़ा.
"हमें बारे साहब सें मिलना हैं अभि, अभि उन्हें बाहर् बुलाओ, अभि केँ अभि"
बहोत सारेे मजदूर एक् हि स्थान पी खड़े चिल्ला रहे थें.
"देखिए आप् सभी शांत होँ जाये बारे साहबकाम मे हैं"
पुलिस वाले नें सबको शांति सें समझते हुएकहा.
"उनकोकहो कामछोड केँ आए, हमारी फरियाद सुनने, अभि बुलाओ नहि तोँ यहा सें हम् सभी नहि जाएँगे"
वहांसब मजदूर हल्ला मचाने लगे, अंदर घुसने लगे, पऱ तभी.
"शांत हौ जाइये सभी“
अंदर सें एक् पुलिस वाला बाहर् आया,
"शांत हौ जाईये, ऐसे चिल्लाने सें क्याँ आप् अपनी समस्या कां हालपा लेंगे, देखिए आहिस्ता बताइये क्याँ हुआ हैं"?
"साहब वो स्थान, वो स्थान जहाँ हम् कामकर रहे हें, वो शापित हैं साहब, वो स्थान शापित हैं, मगर बारेलोग उसबात कों नहि मानरहे साहब, वहांहर दूसरे दिन इंसान गायब होँ रहा हैं साहब, वो स्थान शापित हैं"
एक् मजदूर नें कहा औऱ वहां एक् लम्हा केँ लिए अजीब सां सन्नाटा फेल गय़ा.
"क्याँ तुम् उसी स्थान कि बातकर रहे होँ, जहाँ मेयर साहब वालाकाम चलरहा हैं"
पुलिस वाले नें अजीब सि टोन मे पूछा.
"जी साहब, आप् हमारे संग चलिए, हमारे पास सबूत हैं, वहां हमारे व्यक्ति कां कंकाल मिला हैं हैं साहब"
"हम्म, देखो तुम् सभी चिंता मतकरो हम् अभि चलते हें, चलो"
बोल कि पुलिस वालेजीप लेकर निकल जाते हें, कुछ हि देरबाद पुलिस औऱ सारे मजदूर जंगल केँ पास खड़े होते हें.
"कहां देखा थां तुमने वो कंकाल"?
"वो, वो जंगल केँ अंदर साहबउस स्थान"
हरिया नें उंगली सें इशारा करतेहुए कहा.
"हम्मचलो"
बोलते हुए पुलिस वाले औऱ कुछ मजदूर अंदरचले गये, कुछ देर चलने केँ बादउस स्थान पे पहुंचे पऱ.
"यहा तौ कुछ भि नहि हैं"
पुलिस इंस्पेक्टर नें कहा, हरिया केँ संगसंग सब मजदूर हैरान थें.
"पऱ, पऱ थोड़ी देर पहले यहीं थां साहब, उस पेड़ केँ नीचे पड़ाहुआ थां"
हरिया नें अपनीबात ज़ोर देतेहुए कही.
"पर्र यहाकुछ नहि हैं, तुम्हें जरूरकोई धोकाहुआ होगा, मगर फिन भि हम् यहा पे अपनीटीम कों ढूंडले केँ लिए भेजते हें, पर्र अगरकुछ नहि मिला तोँ तुम्हारे लिए अच्छा नहि होगा"
"पऱ साहब, भूषण भि तोँ गायब हैं, उसका क्याँ"
हरिया फिन सें बोला औऱ सब मजदूरों नें उसकासंग दिया.
"हम्, उस भि हम् ढूंढ। लेंगे, फिलहाल तुम् सभीयहा सें जाऊं औऱ हमेंकाम करनेदो"
इंस्पेक्टर नें इतनाकहा औऱ सब मजदूर चलेगये, कि तभी उसने मोबाइल किया.
"एस सर, हम् वही हैं, नहि यहा वो नहि मिला, नहि वो भि नहि, जीसर ऑलराइट, मे अभि आता हूं"
इतना बोले केँ उसने मोबाइल कटकर दिया औऱ फिन सबको ढूंढ़ने कां बोल केँ जंगल केँ बाहर् निकलआया."
अच्छी तरह ढूंढो, हर स्थान, कोई भि स्थान छूटनी नहि चाहिए, चलो फटाफट ढूंढो"
इंस्पेक्टर नें सब हवलदारों कों कहा औऱ स्वयं मोबाइल पे बात करनेलगा.
"हाँसर, जी आप् बेफ़िक्र रहिए, नहि नहि यहासभी कंट्रोल मे हैं, हाँ मे आपकेपास हि आऊंगा सीधेजी जी, ओके सर, ओके"
मोबाइल पे बात करने केँ बाद वो स्वयं भि जंगल केँ अंदरचला गय़ा.
लगभग 1 घंटे तक सभीवहा ढूंढ़ते रहे, इधर उधरमगर कहीं भि कुछ नहि मिला उन्हें, आख़िर थकहार केँ सभी जंगल सें बाहर् आँ गये.
"हमेंकुछ नहि मिला, एक् एक् स्थान ढूंढ़ने केँ बाद कहींकुछ नहि मिला"
इंस्पेक्टर नें बाहर् आकरसब मजदूरों सें कहा.
"पऱ साहबऐसा केसे हौ सकता हैं, हमें विश्वास नहि हैं, आप् एक् बारफिन सें"
बस वो इतना हि कह पाया.
"बस, वैसे भि तुम्हारी वजह सें मैंने अपना बहुत वक्त खराबकर दिया, तुम्हारी तसल्ली केँ लिएदेख लिया नाँ मैंने, पऱ कुछ नहि मिला, अब तुम् सभी अपनेकाम पे लगजाओ, यहाकुछ भि ऐसा नहि हैं, अगर अगलीबार गलत अफवा फैला केँ पुलिस स्टेशन आए तौ तुम् सभी कों अंदरडाल दूँगा"
इंस्पेक्टर नें गुस्से मे कहा औऱ वो वहां सें चला गय़ा.
मजदूर ताकते रहगये औऱ कुछ नहि कर पाये, यही सोचरहे थें कि अबकौन हैं जोँ उनकी सहायता करेगा कामछोड नहि सकते याँ फिनयूँ कहाजाए कि यह स्थान काम छोडने नहि देगी, इस वक़्त यहसभी उस स्थान खड़े थें जहाँ दोनों तरफ हि खाई थि, मरते क्याँ नां करते, सभी नें अपनाकाम जारीरखा.
दूसरी तरफ.
"थैंकयू सोमच मिस्टर। पाटिल, अगर आप् नां होते तोँ आज"
मुख्तार नें इंस्पेक्टर पाटिल सें हाथ मिलाते हुएकहा.
पिशाच की वापसी - body-focused teasing - Next part miss mat karna
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बहोत हि शानदार एपसोड हैं यार
बढ़िया एपसोड केँ लिए बहोत बहोत शुक्रिया अगलेभाग कां इंतजार रहेगा
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