फैंटेसी या षडयंत्र - बदला चुदाई – New Episode
अगलेदिन सुभह मेरी आंखेफिन सें साजिया कि सिसकियां सुनकर खुली औऱ देखा कि साजिया बेड केँ किनारे झुककर घोड़ी सि बनी हुईँ थि औऱ पीछे सें साहिल किसी सांड कि तरहकस कसकर उसकी बुर मे ताबड़तोड़ धक्के लगारहा थां औऱ साजिया अपना मुंह पूरा खोलकर जोरजोर सें आहभररही थि औऱ चेहरे पर्र दर्द औऱ मस्ती भरेभाव उसके चेहरे कों औऱ ज़्यादा कामुक बनारहे थें।
मे हैरान हौ गय़ा थां क्योंकि मुझेलगा थां कि पूरीरात जितनी बुरीतरह सें कठोरता सें साहिल नें साजिया कि चुदाई करी थि वोँ शायदअब कभीउसे हाथ भि नहि लगाने देगी औऱ मेरा बदला पूरा हौ जाएगा मगर यहां तौ साजिया स्वयं हि घोड़ी बनी हुईँ फिन सें चुदरही थि।
खैर मे साजिया कों चुदते हुए देखता रहा औऱ मुझे जितना अच्छा लगरहा थां उससे कहीं अधिक बुरा महसूस हौ रहा थां। हैरान करने वालीबात यह थि कि रात उसको तड़पते देखकर जहां मेरा लन्ड अकड़कर खड़ा थां जिसे मे हिलारहा थां औऱ अबवही मेरा लन्ड आहिस्ता पड़ाहुआ थां। लगभगआधे घंटे तक उनकी चुदाई चलतीरही औऱ एक् बार सें साहिल नें साजिया कि बुर कां अच्छे सें ढोल पीटा।
वोँ दोनो नंगे हि पड़ेहुए थें औऱ मे घऱ सें बाहर् निकल गय़ा औऱ बाहर् जाकर डोरबेल बजाई तोँ साजिया जल्द सें उठी औऱ साहिल अपनेरूम मे चला गय़ा औऱ साजिया नें कमरे कां दरवाजा खोल दिया औऱ मे अंदर आँ गय़ा। साजिया मुझे देखते हि मेरेगले लग गई औऱ बोलीं
" आँ गए आप्। बड़ी सुभह सुभह हि आँ हुए आप्।
नासिर:" हान मीटिंग ख़त्म होँ गई थि तौ आँ गय़ा। तुम्हे अच्छा नहींलगा क्याँ मेरा जल्द आनां ?
साजिया अपने होठों पर्र जबरदस्ती स्माइल लाई औऱ बोलीं:" कैसीबात कररहे होँ आप् ? भला मुझे क्यूं अच्छा नहीं लगेगा, आप् भि नां बस।
मे अंदर आँ गय़ा औऱ देखा कि बेड कि बेडशीट पूरीतरह सें अस्त व्यस्त थि औऱ उसमे बेतरकीब सलवटे पड़ी हुई थि औऱ इसबात कि साफ गवाही देरही थि कितनी कठोरता सें पूरीरात साजिया कों चोदा गय़ा थां औऱ मैने देखा कि मुझेबेड शीट कों ध्यान सें देखते हुए देखकर साजिया बोलि:"
"आप् आराम करेंगे याँ मे आपकेलिए नहाने केँ लिएगरम पानीकर दू ?
नासिर:" अभि तोँ आराम करने। कां वक्त नहि रहा। बेडशीट कों देखकर लगरहा हें कि रात तुम् पूरीरात इधरउधर करवट बदलती रही होँ।
साजिया केँ चेहरे पर्र एक् केँ बादकई रंगआए औऱ गए औऱ फिन अपने आपको संभालते हुए बोलि:"
" अरे आपकी बांहों केँ बिना नींद नहि आती मुझे। बस इसलिये हि बेचैन थि। अच्छा मे गीजर चालूकर देतीहु।
इतना कहकर वोँ बाहर् कों जानेलगी मगरठीक सें चल नहि पारहा हि थि औऱ बहुत लंगड़ा रही थि औऱ पैरो कों पूराखोल खोलकर चलरही थि तौ मैनेजान बूझकर उससे पूछा:"
" क्याँ हुआ साजिया ऐसे क्यूं चलरही होँ तुम् ?
साजिया फिन सें डर गई औऱ उसके मुंहलाल हौ गय़ा औऱ फिन बोलि:"
" गिर गई थि रात कों सोतेहुए बेड पर्र सें। बस इसलिये
इतना कहकर वोँ बाहर् निकल गई औऱ थोड़ी देर केँ बाद मे नहाने केँ लिए बाथरूम मे घुस गय़ा औऱ देखने लगा कि अब साजिया क्याँ करेगी। दूसरी तरफ साजिया सीधे साहिल केँ रूम मे गई जौ केवल अभि निक्कर पहनेहुए थां औऱ साहिल कों बोलीं:"
" एक् काम करना, दफ़्तर मत जानां आज, बोल देना कि पूरीतरह सें ठीक नहि हू।
साहिल::" ठीक हें मे कोशिश करताहु कि नाँ जानेआज दफ़्तर। मगर बदले मे मुझे क्याँ मिलेगा ?
साजिया आगे बढ़ी औऱ उसकेगले मे अपनी बांहों कां हार डालकर बोलि:"
" अभि नहींभरा क्याँ जनाब आपका ? सारीरात मे तोँ मुझे निचोड़ कररख दिया।
साहिल नें उसकी गांड़ कों जोर सें मसल दिया औऱ बोलीं:"
" यह तौ सिर शुरुवात हें। अभि तौ आपको असली आनंद मिलना शुरुआत होगा। बताओ नां क्याँ मिलेगा मुझेआज दिन मे ?
साजिया नें उसके होंठो कों चूम लिया औऱ बोलि:"
" साजिया मिलेगी तुम्हे। बसअब खुशी।
साहिल उसके मुंह सें यहसभी सुनकर मस्त हौ गय़ा औऱ उसकाहाथ पकड़कर अपने निक्कर मे घुसा दिया औऱ बोला:"
" इसका मतलब तुम्हे यह पसन्द आया बहोत। बताओ नां कैसालगा तुम्हे ?
साजिया उसकीबात सुनकर मस्ती सें उसके लन्ड कों सहला दिया औऱ साहिल कों अपनी बाईंआंख दबाकर कामुक इशारा किया तौ साहिल सभीसमझ गय़ा मगर बोला:
" मुंह सें कहो नां कैसालगा तुम्हे ?
साजिया नें खड़ेहुए पूरे लन्ड कों हाथ मे भर लियामगर अभि भि सुपाड़ा औऱ लगभगदो इंच लन्ड बाहर् होँ थां तौ साजिया पागल सि हुइ उसकेकान मे बोलीं:"
" अच्छा तौ हें मगर बहोत ज़्यादा बड़ा हैं। हाथ मे भि ठीक सें नहि आता मेरे।
नासिर नें उसकी एक् मम्मों कों जोर सें मसल दिया औऱ बोला:"
" हाथ कों छोड़ो, बुर मे तौ पूरा आँ जाता हें तुम्हारी।
साजिया अपनी मम्मों मसले जाने सें मस्ती सें सिसकउठी औऱ उससे पूरीतरह सें कसकर लिपट गई औऱ उसकेकान मे मदहोश होतेहुए बोलीं
" आँ जाता हें, बिलकुल पूरा कां पूरा आँ जाता हैं।
साहिल सें अब बर्दास्त नहींहुआ औऱ उसने साजिया कि नाइटी कों पलट दिया औऱ अपने होंठो कों सीधे उसकी बुर पऱ टिका दिया औऱ साजिया नें बिना मेरेघऱ मे होने कि परवाह किएहुए अपनी जांघो कों फैला दिया औऱ साहिल नें मुंहखोल कर उसकी बुर कों मुंह मे भर लिया औऱ जोरजोर सें चूसने लगा।
मुझे साजिया पऱ बहोत अधिक क्रोध आँ रहा थां कि कितनी आसानी सें एक् बारफिन वोँ बहक गई थीं। मे नहाने लगा औऱ जब बाहर् आया तौ साजिया रसोई मे थि औऱ साहिल प्लान केँ मुताबिक अभि भि सोरहा थां। साजिया नें मुझे ब्रेकफास्ट दिया औऱ मे बोल:"
" अरे साहिल क्यूं नहि उठाकभी तक ? दफ़्तर जानां होगाजाओ जल्द सें उठादो।
साजिया: अरे उसकी हालतठीक नहि हैं। रात भि बुखार थां उसे। आराम करनेदो नां उसेआज। कहीं ज़्यादा दिक्कत नाँ हौ जाएबाद मे उसे।
नासिर:" देखलो जैसे तुम्हे ठीकलगे। बसकाम ज़्यादा हैं आज। रात कुछ साइट्स कि डील औऱ मिल गई तोँ साहिल कां काम औऱ बढ़ जायेगा।
साजिया:" यह तौ अच्छी बात हैं। मगर तुम्हे औऱ व्यक्ति रखने चाहिए। क्यूं इस बेचारे अकेले कि जान लेने पऱ तुलेहुए होँ तुम् ?
नासिर:" चलो देखता हुमगर फिन भि काम तोँ इसे करना हि पड़ेगा न्। नहींकम करेगा तोँ आगे केसे बढ़ेगा।
साजिया:" अरे अभि उसकी उम्र हि कितनी हें भला। कर लेगाकाम भि धीरे-धीरे धीरे-धीरे बस।
नासिर नें फिनकुछ नहीं बोलामगर अंदर हि अंदर वोँ साजिया कों गालीदे रहा थां कि वोँ किसतरह सें साहिल कां पक्ष लें रहीथीं। नासिर ब्रेकफास्ट करतारहा औऱ थोड़ी देरबाद वोँ गुस्से भरेमन सें दफ़्तर जानेलगा। वोँ बिलकुल अच्छे सें जानता थां कि साहिल ठीक हें औऱ अब पूरेदिन उसकी पत्नि साजिया कों चोदेगा मगर वोँ चाहकर भि कुछ नहि कर सकता थां औऱ दफ़्तर चला गय़ा। नासिर केँ जाते हि अब साजिया फिन सें साहिल केँ नीचे चुदने लगी औऱ नासिर पूरेदिन दफ़्तर मे बैठाहुआ उसकी चुदाई देखता रहा कि किसतरह सें पूरीतरह सें बेशर्म होकर साजिया स्वयं हि उसकेऊपर आँ आकार अपनी बुर चूदारही थि। जब साजिया झड़ जाती तौ फिन साहिल उसकेउपर चढ़ जाता औऱ उसे चोदता। साजिया दर्द सें कराह उठती, तड़प उठतीमगर सिसकियां लेतेहुए चुदती रहती। हर बार कि जोरदार चुदाई केँ बाद दोनोकुछ खाने केँ लिए रुकते ताकिफिन सें तरोताजा होकर औऱ चुदाई करसके एक् नई ताकत केँ संग एक् नए उत्साह केँ संग।
नासिर कां मुंह गुस्से सें लाल हौ रहा थां औऱ इसेसमझ नहि आँ रहा थां कि क्याँ करे। आखिर गाड़ी साम हुईँ औऱ नासिर दुःखी हताश परेशान अपनेघऱ चल पड़ा औऱ साहिल औऱ साजिया दोनोहॉल मे हि बैठेहुए थें। साजिया नें गेट खोला औऱ नासिर कों स्माइल दि तोँ नासिर भि फीकी सि स्माइल देकर बाथरूम मे घुस गय़ा औऱ रात कों खानां खाने केँ बाद साजिया औऱ नासिर दोनो लेटेहुए थें औऱ साजिया बोलि:"
" आप् आरामकरो, मे साहिल कों दूध देकरआती हु।
नासिर नें उसकीतरफ देखा औऱ बोला:"
" जाओ जल्द देकरआओ। मेरेसिर मे दर्द हें तोँ मालिश कर देना मेरी। आओ जल्द सें।
साजिया:" मालिश तौ मे कर हि दूंगी। मगर तुम् एक् गोलीखा लो तोँ ज़्यादा आराममिल जायेगा।
मुझेलगा थां कि सिर दर्द कि बात सुनकर साजिया नहीं जायेगी क्योंकि मेरे सें बढ़कर उसकेलिए साहिल नहीं हौ सकतामगर यह मात्र मेरावहम साबित हुआ औऱ साजिया चली गई।
दूध लेकर वोँ कमरे मे गई औऱ देखते हि देखते दोनोफिन सें चुदाई मे जुटगए। मुझेसमझ नहीं आँ रहा थां कि साजिया कों क्याँ हौ गय़ा हैं। रात सें लगभगअब तक 10 बारचुद चुकी थि औऱ फिन सें चुदरही थि। उसे मात्र अपनी बुर कि परवाह थि औऱ मेरीकोई फिक्र नहि। लगभग 15 मिनट तक जोरदार चुदाई करवाने केँ बाद साजिया वापस आँ गई औऱ मेरेसंग बेड पर्र लेट गई औऱ अभि दो मिनट हि मेरेसिर कि मालिश करी थि कि बोलि:"
" कुछ आराम मिला ? हाथ दुखने लगा मेरा, थक जातिहु पूरेदिन घऱ केँ काम करके।
सजिया कितनी बदल गई थि कि एक् हि दिन मे यह मुझेअब अच्छे सें समझ आँ रहा थां औऱ मे बोला:"
" कुछ आराममिल गय़ा हैं। तुम् चाहो तोँ आरामकर लो।
मेरे कहनेभर कि देर थि कि साजिया एक् दम सें मेरासिर छोड़कर सीधी होकरलेट गई औऱ थोड़ी देर मे गहरी नींद मे चली गई जबकि मेरी आंखो सें नींद पूरीतरह सें उड़ चुकी थि। नाँ साजिया रोज कि तरहआज मुझसे चिपकी हुई थि औऱ न् हि उसने मुझे सोने सें पहलेकिस किया जोँ वोँ हररोज करती थि। जौ कुछ हौ रहा थां औऱ साजिया मे आए बदलाव कि असलीजड़ मे हि थां औऱ यहसभी सोचकर मेरी आंखेभर आई औऱ मेरादिल अंदर हि अंदरटूट टूटकर रोरहा थां औऱ मुझे चारोतरफ अंधेरा हि अंधेरा नजर आँ रहा थां। मेरी आंखों सें आंसूबह चले औऱ मेरा पूरा मुंहभीग गय़ा थां औऱ मेरेगले सें सिसकियो केँ संग रोने कि रुंधी रुंधी सि आवाजे निकलरही थि औऱ साजिया मेरी पत्नि मेरी हमसफर इन सबसे पूरीतरह सें बेखबर अपनी टांगे फैलाकर मस्ती सें सोरही थि।
मैने आखिरकार स्वयं कों संयत किया औऱ बड़ी मुश्किल सें अपने आंसू रोकते हुए अपने चेहरे कों साफ किया औऱ एक् बारफिन सें गौर सें साजिया केँ चेहरे कों देखा औऱ न् जाने क्यूं प्रेम सें चूम लिया। जोँ कुछ भि साजिया औऱ साहिल केँ लिएहुआ उसका असली जिम्मेदार मे हि थां। मगर मुझेअब कुछ भि करके अपनी पत्नि कों वापिस इस दलदल सें बाहर् निकालना थां।
क्याँ साजिया साहिल कां संग छोड़ देगी याँ पूरीतरह सें उसकीतरफ झुक जायेगी ?
क्याँ नासिर अपनी पत्नि कों पहले कि तरहफिन सें नेकबना पाएगा ?
यहसभी क्याँ सच मे नासिर कि मर्जी सें हि हुआ याँ फिन साजिया केँ संगसंग नासिर किसी षडयंत्र कां शिकार हुआ ?
क्याँ दोनोफिन सें वापिस अपनी प्रेम भरी जीवन कों फिन सें शुरुआत कर पाएंगे याँ नासिर कि फैंटसी कि वजह सें उसकासभी कुछ बरबाद हौ जायेगा।
इनसभी सवालों केँ जवाब केँ लिएसंग जुड़े रहिए। अगले एपसोड मे क्याँ होगा साजिया कां ???
फैंटेसी या षडयंत्र - बदला चुदाई – New Episode
अगलेदिन सुभह मे रोज कि तरह सजधजकर हुआ औऱ दफ़्तर आँ गय़ा। चैन कि बातयह थि कि साहिल भि मेरेसंग औऱ वोँ मोबाइल पऱ किसी सें चैटिंग कररहा थां औऱ मुझे अच्छी तरहपता थां कि वोँ किससे बातकर रहा थां।
खैर दफ़्तर जाकर वोँ अब्दुल केँ संगकाम मे लग गय़ा औऱ मे बसइसी सोच मे डूब गय़ा कि किसतरह साजिया कों साहिल सें दूर कियाजाए। मुझे पूरी उम्मीद थि कि साजिया जल्द हि स्वयं हि उससेदूर होँ जायेगी क्योंकि सेक्स करतेहुए उसके चेहरे पर्र दर्द केँ भाव औऱ मुंह सें निकलती हुई कराहउसे स्वयं हि साहिल सें दूर होने पर्र मजबूर कर देगी। मैने आखिरकार बहोत सोचकर यही फैसला किया कि साजिया कों थोडा टाइम देना चाहिए ताकि वोँ स्वयं हि साहिल सें दूर होँ गई तोँ इससे बेहतर कुछ नहि हौ सकता। जिस तरह सें आज सुभह उसने साहिल कों घऱ पऱ रोकने कि कोशिश नहींकरी उससे मेरी उम्मीद जग गई थि। बस मुझेउसे यह एहसास दिलाना थां कि मुझसे बेहतर उसकेलिए कोई हौ नहि सकता हें।
खैरदिन भरकाम करने केँ बाद मे साम कों घऱ पहुंच गय़ा औऱ साजिया नें स्माइल केँ संग मेरा स्वागत किया तोँ मुझे अच्छा लगा। खानां खाने केँ बाद हम् तीनोहॉल मे हि बैठेहुए थें औऱ बाते होनेलगी।
साजिया:" साहिल तुम् ठीक सें कामकर रहे हौ नां ?
साहिल:" हानजी मे अपनीतरफ सें पूरी कोशिश कररहा हूं ताकि अपने आपको साबित करसकू।
साजिया:" हान देखो तुम् मेरी सबसे अच्छी सहेली केँ भइया हौ औऱ मे नहीं चाहती कि मेरेऊपर बाद मे कोई बुराई आए।
साहिल:आप् निश्चित रहिए। मे अपनीतरफ सें आपको याँ नासिर भइया कों कोई बुराई कां मौका नहीं दूंगा।
साजिया:" अच्छा फिन तौ ठीक हैं। रात भि बहुत होँ गई हैं तोँ अब तुम् जाकर आरामकरो।
साहिल स्माइल केँ संगउठा औऱ अपने कमरे मे चला गय़ा। मे भि अपने कमरे मे आँ गय़ा औऱ सोचने लगा कि क्याँ आज भि साजिया दूध देने केँ बहाने उसे बुर देकर आयेगी।
थोड़ी देर केँ बाद साजिया हाथ मे दूध कां ग्लास लिएआई औऱ मेरेपास बैठ गई। मे दूध पीनेलगा औऱ साजिया नें अपना एक् हाथ मेरेहाथ केँ उपररखा औऱ बोलीं
"आजकल आप् बड़े परेशान सें लगरहे होँ। सभीकुछ ठीक हैं नाँ ?
नासिर सच मे परेशान थां औऱ अब वोँ साजिया कों केसे बताता कि उसकी तकलीफ़ कि असलीवजह वही हैं। नासिर नें एक् लंबी सांसली औऱ बोला:"
" परेशान नहींहू। बसनए प्रोजेक्ट मिलने सें कामबढ़ गय़ा हैं इसलिये थक जाताहू।
साजिया:" अच्छा आप् आरामकरो, मे साहिल कों दूध देकरआती हु। फिन धीरे-धीरे बात करते हें।
इतना कहकर साजिया चली गई औऱ साहिल नें फिन सें उसे अपनी बांहों मे भर लिया तौ साजिया कसमसाते हुए बोलीं
" आह तुम् भि नाँ, जब देखो शुरुआत होँ जाते होँ। बस मौका मिलना चाहिए जनाब कों।
साहिल उसकेगाल चूमकर बोला:"
" अब क्याँ करू ? तुम् चीज हैं हि इतनी शानदार होँ। तुम्हे देखते हि मे अपनेहोश खो देताहु।
इतना कहकर उसने साजिया कि सलवार मे हाथ घुसाया तौ साजिया एक् झटके केँ दोस्त उसकी पकड़ सें बाहर् निकल गई औऱ स्माइल करतेहुए दरवाजे कि तरफबढ़ गई तौ साहिल उसे दुःखी नजरो सें देखते हुए बोला:"
" मतजाओ नां साजिया। थोडा प्रेम करनेदो नां मुझे।
साजिया:" कामकरो अपना, मे किसी औऱ कि पत्नि हु। समझे तुम्।
इतना कहकर साजिया नें उसे कामुक इशारा किया औऱ एक् रहस्यमई स्माइल देकर बाहर् निकल गई।
साजिया थोड़ी देर केँ बाद वापिस आई तोँ उसके चेहरे केँ भावकुछ बदलगए थें। मेरीसमझ मे उसकी स्माइल कां मतलब बिलकुल भि नहि आया थां औऱ साजिया मेरेपास लेट गई औऱ बोलीं
:" अब बताए आप् क्यूं आजकल बदले बदले सें लगरहे हौ आप्।
मुझेसमझ नहि आया कि यह कैसा प्रश्न हैं क्योंकि बदल साजिया रही थि औऱ उसने सीधे सीधे इल्जाम मुझ पर्र लगा दिया थां। मे थोड़ी देर केँ लिएचुप रहा औऱ फिन बोला:"
" अरेऐसा कुछ नहि हें। बसथक जाताहू बताया तौ थां तुम्हे। तुम् बताओ क्याँ चलरहा हें आजकल ?
साजिया नें अपनेहाथ कों नासिर केँ सिर पर्र रख दिया औऱ मालिश करतेहुए बोलीं:"
" कुछखास नहींबस। घऱ केँ काम मे हि लगी रहतीहु। आप् तोँ आजकल बिलकुल भि प्रेम नहीं करते मुझे।
इतना कहकर साजिया नें मेरे होंठो कों चूम लिया तौ मैनेउसे अपनी बांहों मे समेट लिया औऱ देखते हि देखते हम् दोनों पूरीतरह सें नंगे होँ गए औऱ मेरे लन्ड मे तनावआता चला गय़ा औऱ साजिया उसेहाथ सें पकड़कर सहलाने लगी औऱ धीरे-धीरे सें मेरेकान मे बोलीं:"
" कितना सख्त हौ रहा हें आपका, उस दिन वाली वीडियो दिखाए नं आप् मुझे।
मैने नां चाहते हुए भि फोन मे वीडियो लगा दि औऱ इतना बड़ा लन्ड देखकर फिन सें साजिया कि आंखे बड़ी हौ गई औऱ अपनी टांगो कों खोलकर मेरे लन्ड कों अपनी बुर केँ मुंह पऱ रगड़ने लगी तौ मैने धक्कक लगाया औऱ लन्ड बिना किसी रुकावट केँ उसकी बुर मे घुस गय़ा औऱ साजिया बिना किसी दर्द केँ बिलकुल आसानी सें मेरा लन्ड अपनी बुर मे लेँ गई। इसका मतलबसाफ थां कि साहिल नें उसकी बुर कों ठीकठाक खोल दिया थां औऱ अब मेरा लन्ड लेना साजिया केँ लिएहाथ कि उंगली लेने केँ बराबर हौ गय़ा थां।
साजिया बुर मे लन्ड लेकर मुझसे कसकर लिपटी रही औऱ अपनी टांगो कों मेरी गांड़ पऱ कसकर मुझे भि धक्के लगाने सें रोक दिया औऱ मेरे होंठ चूसते हुए बोलि:"
" अहह कितना अच्छा लगरहा हैं नासिर। बसऐसे हि घुसाए रखो नं थोड़ी देर। म्म्म देखो नाँ इसका कितना बड़ा हैं। क्याँ सच मे इतने बड़े होते हें ?
नासिर वीडियो बंद करना चाहता थां मगरकर नहीं सकता थां। यह उसके हि किएगए पाप थें जोँ अब उसके सामने आँ रहे थें। नासिर बोला:"
" होता हैं। इसका हि देखो नां तुम् वीडियो मे। कुछ लोगो कां होता हें औऱ भि अधिक बड़ा होँ सकता।
साजिया नें अपनी बुर कों पहलीबार उसके लन्ड पर्र चलाया औऱ बोलि:"
" ओह इतना बड़ा केसे घुसता होगा नासिर।, मर जाएगी यह तोँ दर्द सें।
नासिर कां मन किया कि बोलदे कि तूँ तोँ कलरात सें बारबार इससे भि बड़ा लें रही थि तेरा तौ कुछ नहीं बिगड़ा। मगर नासिर नें स्वयं कों संयत किया औऱ बोला:"
" दर्द होता हें मगरबाद मे बहोत आनंदआता होगा। देखो नां इसको हि केसे गांड़ उछाल उछालकर चुदरही हें।
साजिया नासिर कि बात सुनकर पागल सि हौ गई औऱ नासिर केँ लन्ड पऱ चढ़ गई औऱ धीरे-धीरे धीरे-धीरे उपर नीचे होतेहुए बोलि:"
" अहह नासिर, सच मे कितना आनंदकर रही हैं यह तौ। खूबउछल उछलरही हैं।
नासिर एक् बारफिन सें साजिया कि बातो सें बहक गय़ा औऱ बोला:"
" हान मज़ाकर रही हें साजिया देखो नां केसे बड़े लन्ड सें चुदरही हें यहबार बार।
साजिया नें मुंह नीचे करके नासिर केँ निप्पल कों चूस लिया औऱ अपनीजीभ उसकीकान पर्र रगड़ते हुए सिसकी
" अहह नासिर, कितनी जोरजोर सें चुदरही हें म्म्म उसदिन तुम् कहरहे थें कि यह साजिया जैसीलग रही हैं बिलकुल मेरे जैसी।
नासिर साजिया कि हरकत पर्र बेकाबू होँ गय़ा औऱ नीचे सें अपने लन्ड कों जोरजोर सें उसकी बुर मे घुसाने लगा औऱ बोला:"
" अहहचुद रही हें मेरी साजिया चुदरही हें बड़े लन्ड सें। मेरी पत्नि साजिया चुदरही हें बता नाँ इसकीतरह चुदेगी बड़े लन्ड सें ?
साजिया नें लन्ड कों पूरा घुसाया औऱ अपनी बुर कों उस पर्र कस दिया औऱ बोलि:"
" अहहचुद जाऊंगी। उछलउछल करचुद जाऊंगी बड़े लन्ड सें तेरी साजिया पूरा बुर मे लेगी बड़ा सां लन्ड उससे भि बड़ा लन्ड।
नासिर साजिया कि बात सुनकर बहक सां गय़ा औऱ उसकी चूचियों कों जोरजोर सें निचोड़ने सां लगा तोँ मस्ती औऱ दर्द सें साजिया पागल सि हौ गई औऱ उसकाहाथ वीडियो सें जालगा औऱ वीडियो थोडा आगे खिसक गय़ा तोँ उसे देखते हि साजिया पागल सि होकरतेज तेज धक्के लगाने लगी। वीडियो मे लड़कीदो मर्दों केँ बीच पड़ी हुइ थि औऱ बुर गांड़ मे एक् संग लन्ड लें रही थि। साजिया कां चेहरा डर औऱ लज्जा सें लाल सां हौ गय़ा। नासिर नें वीडियो कों देखा औऱ समझ गय़ा कि साजिया दो लन्ड एक् संग देखकर मदहोश होँ गई हैं। नासिर नें साजिया कि एक् मम्मों कों मुंह मे भर लिया औऱ चूसकर बोला:"
"आह्ह्ह्ह देख नाँ साजिया केसेचुद रही हें। उफ्फदेख तुँ एक् संगदो दो लन्ड लेँ रही हैं।
साजिया नें नसीर केँ कहने पर्र फोन देखा औऱ लड़की कि हालतदेख कर वोँ तड़प सि गई, मचल सि गई औऱ जोरजोर सें धक्के मारने लगी। साजिया पूरीतरह सें जोश मे थि औऱ नासिर भि उसकेरंग मे रंगाहुआ थां औऱ बोला:"
" बड़ा न् साजिया क्याँ कररही हें ? उफ़्फ़ देख नां इसे ?
साजिया कि बुर मे उबालआने लगा थां तोँ उसका जिस्म कांपने लगा औऱ उत्तेजना सें बेकाबू होतेहुए बोलीं
" अहहचुद रही हें। दो लन्ड सें चुदरही हें।
नासिर कां लन्ड भि अपने आखरी धक्कों पर्र आँ गय़ा औऱ नासिर जोर सें धक्के मारने लगा औऱ बोला:"
" कौनचुद रही हें ? बता नाँ साजिया कौनचुद रही हें दो लन्ड सें ?
साजिया कि बुर मे एक् जोरदार कंपनहुआ औऱ उसने लन्ड कों जड़ तक घुसा लिया औऱ नासिर केँ उपरढेर होती हुइ बोलीं:"
" अहह मे चुद गई, साजिया तेरी पत्नि चुद गई दो लन्ड सें। अहह नासिर चुदवा मुझेदो लन्ड सें।
नासिर नें भि एक् जोरदार धक्का लगाया औऱ उसकी बुर मे वीर्य भरतेहुए कहा
" अहहचुद जा मेरीजान दो लन्ड सें चुदजा साजिया।
दोनो नें एक् दूसरे अपनी बांहों मे कस लिया औऱ एक् दूसरे कों चूमने लगे। जोश ठंडा होते हि नासिर कों अपनी गलती कां एहसास हुआ कि उसे साजिया सें ऐसीबात नहि करनी चाहिए थि मगरअब क्याँ तीर तौ कमान सें निकल गय़ा थां। मैने साजिया कों नंगे हि अपनी बांहों मे भर लिया औऱ दोनो सोनेलगे।
थोड़ी देर केँ बाद मे सोने कां नाटक करनेलगा औऱ जोरजोर सें खर्राटे लेनेलगा तोँ साजिया केँ शरीर मे हलचल हुइ औऱ उसने धीरे-धीरे सें अपनेपेर कों मेरे कूल्हे पर्र सें हटाया औऱ मुझसे अलग होँ गई। मेरादिल एक् बारफिन सें जोर सें धड़कउठा कि क्याँ यहआधी रात कों फिन सें साहिल सें चुदने जारही हैं। नहींइसे ऐसा नहि करना चाहिए।
मे सोच हि रहा थां कि साजिया बिलकुल नंगी हौ कमरे सें बाहर् निकल गई औऱ थोड़ी देर केँ बाद मुझेपास वाले कमरे केँ दरवाजे कि आवाज़ आई तौ मे खड़ाहुआ औऱ बाहर् निकल गय़ा औऱ देखा कि साहिल कां रूम पूरीतरह सें अंधेरे मे डूबाहुआ थां औऱ मे अंदरघुस गय़ा तौ मुझे हल्की हल्की सिसकियां औऱ जोरजोर सें सांस लेने कि आवाजे आई औऱ तभी साजिया केँ मुंह सें दर्दभरी कराह निकली जौ इसबात कां सुबूत थि कि एक् बारफिन सें साहिल कां मोटा लंबा लन्ड उसकी बुर मे घुस गय़ा थां औऱ साजिया दर्द सें कराहती हुई चुदने लगी। अंधेरा पूरा थां औऱ यह भि पता नहींचल रहा थां कि साजिया किस पॉजिशन मे चुदरही हें। बस उसकी दर्दभरी कराह औऱ चूड़ियों कि खनछन कि मधुर आवाज़ उसकी चुदाई कि गवाही देरही थि। तभी साजिया कि सिसकियां तेज औऱ तेज होतीचली गई औऱ बेड केँ चरमराने कि आवाजे, जांघो केँ जोरजोर सें थपथप टकराने कि आवाजे साजिया कि दमदार जोरदार चुदाई कि गवाही देरही थि। तभी पूरे कमरे मे साजिया कि बेकाबू होती मस्ती भरी सिसकियां गूंज औऱ मे समझ गय़ा कि साजिया एक् बारफिन सें झड़ गई हैं औऱ अगले हि समय उसकी मस्ती भरी सिसकियां दर्दभरी कराहो मे बदल गई औऱ साहिल अब पूरीतरह सें साजिया पऱ भारीपड़ रहा थां। थोड़ी देर केँ बाद दोनो एक् संगजोर सें सिसकउठे औऱ मे समझ गय़ा कि अब यहां सें निकल जाने मे हि भलाई हें। मे कमरे मे आया औऱ थोड़ी देरबाद हि नंगी साजिया बेड पर्र आँ गई औऱ मे अपनी हालत पर्र तरस खातेहुए सोने कि कोशिश करनेलगा।
अगलेदिन सुभहफिन सें मे दफ़्तर केँ लिए निकल गय़ा औऱ साहिल भि संग हि थां। मे दफ़्तर मे बैठाहुआ थां कि शमा कां मोबाइल आँ गय़ा औऱ मेरामूड खराब हौ गय़ा क्योंकि इसकीवजह सें हि सभीकुछ होँ रहा थां। मैंने न् चाहते हुए भि मोबाइल उठाया तौ शमा बोलीं:"
" अस्सलाम वालेकुम भइया। केसे हौ आप् ? साहिल ठीक सें कामकर रहा हैं नाँ।
नासिर:" वालेकुम अस्सलाम। अच्छा हु औऱ साहिल बहोत अच्छे सें अपनाकाम कररहा हैं।
शमा:"कोई दिक्कत हौ तोँ आप् मुझे बताना। ठीक हैं भइया। बाद मे बात करतीहु।
इतना कहकर उसने मोबाइल काट दिया औऱ धीरे-धीरे धीरे-धीरे साम हौ आई औऱ हम् घऱ कि तरफचल पड़े। रोज कि तरह खानां खाया औऱ सोगए। आज दिन मे काम ज़्यादा होने कि वजह सें थक गय़ा थां इसलिये रात कों क्याँ हुआपता नहींचला क्योंकि पूरीरात साहिल केँ कमरे केँ कमरे कि लाइटबंद रही।
धीरे-धीरे धीरे-धीरे एक् हफ्ता बीत गय़ा औऱ आज रविवार थां तोँ मैंने अपने एक् यार सें मिलने कां वादा किया थां औऱ घऱ सें निकल गय़ा। मेरे जाते हि साजिया साहिल सें चिपक गई तोँ साहिल दुःखी सां खड़ारहा तोँ साजिया बोलि:"
" क्याँ हुआ साहिल ? यह बेरुखी इसलिये मेरेसंग ?
साहिल:" बसमन नहीं हैं मेरा। अपने आपसे हि परेशान हुमै दोस्त बहोत अधिक।
साजिया:" मुझे बताओ क्याँ पता हें मे कोई सहायता करसकू ?
साहिल:" रहने दीजिए आप्। शायद मेरे बारे मे आप् गलतसमझ लेगी।
साजिया नें उसका मुंहचूम लिया औऱ बोलि:"
" कैसी बातेकर रहे होँ ? साफसाफ बोलो क्यूं इतना परेशान होँ तुम् ?
साहिल:" वोँ घऱ सें मोबाइल आया थां। मैने पढ़ाई केँ लिएदो लाख रुपएलिए थें उधार औऱ कल उनकी अंतिम तारीख हैं। बस इसलिये दुखीहु।
साजिया थोड़ी देर केँ लिए सोचती रही औऱ फिन उसने अपनाबैग खोला औऱ उसमे सें दोलाख रुपएकैश निकालकर साहिल केँ हाथ पऱ रखदिए औऱ बोलीं:"
" चलोअब जल्द सें स्माइल करो। घऱ जाओ औऱ साम तक वापिस आँ जाओ।
साहिल नें खुशी खुशी साजिया कों अपनी बांहों मे कस लिया औऱ दीवाने कि तरह उसका मुंहचूम लिया औऱ बोला:"
" आप् सच मे बहोत अच्छी हैं। मे अभि गय़ा औऱ साम तक आँ जाऊंगा।
इतना कहकर साहिल घऱ सें निकल गय़ा औऱ मे हैरान सां साजिया कों देखता रहा जिसने कितनी आसानी सें मेरी कमाई कों ऐसे हि साहिल पर्र लूटा दिया थां। मेरेतन शरीर मे आगलगी हुई थि औऱ मे घऱ केँ तरफ वापिस लौटआया।
अपनी इज्जत केँ संगसंग साजिया नें घऱ कि दौलत कों भि लुटाना शुरुआत कर दिया थां जोँ मेरेलिए नाकाबिले बर्दाश्त थां।
Badhiya shaandaar update bhay Ab nasir fas tow gyaa hain ya phir shajid aur uski behna kee shajish kaa shikar ban rehe hain dekhte hain kiya hotha hain
Kamal kaa plot bnaa k kahani likhte hu tm, pichla kahani mai muze laga thaa 1-2 or update de sakte the, dekhta ho iss kahani ko kis prakaar say acche say end karte hu tm
फैंटेसी या षडयंत्र - बदला चुदाई – New Episode
आप् सब कां दिल सें शुक्रिया। आजकल एक्सफोर्म पर्र लेखकऐसी कहानियां लिखरहे हें जिनमे पति अपनी पत्नि कों दूसरे मर्द सें सेक्स केँ लिए उकसाता हें औऱ मेरा अपना मानना हें कि इसके पीछे लेखक कां उद्देश्य यह हौ सकता हैं कि शायदकुछ लोग प्रभावित होकर उसने अपनी स्वयं कि पत्नि कों सेक्स केँ लिएबोल सकते हें। शुरुआत मे कुछ लोगो नें मेरीकथा कों लेकर अपनी नाराजगी जाहिर करीमगर मैंने इसे पूरी करने कां फैसला किया क्योंकि यह स्टोरी ऐसे लोगो केँ लिए एक् सबक होगी कि केसेलोग फैंटसी केँ चक्कर मे अपनासभी कुछ बरबाद कर सकते हैं औऱ उनकी हालतअंत मे ऐसी होँ सकती हें अर्ज किया हें:"
" बांध लिया हें मैने अपना सामान गालिब
अबबता कहां रहते हें वोँ लोग जौ कहीं केँ नहीं रहते।
फैंटेसी या षडयंत्र - बदला चुदाई - Aage kya hua? Next part padhiye
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