बड़ा परिवार सुखी परिवार - parivaar ka sex - Real Story Continue Part 1
स्टोरी केँ किरदार
राहुल - इस किस्सा कां मुख्या किरदार, ग्रेजुएशन मे पढता हैं, औऱ अपनी बापू (मनोज), मां (सरिता) औऱ बड़ी बेहेन (स्वीटी) केँ संग रहता हैं। सफ़ेद रंग, गठीला जिस्म औऱ ६फुट लंबाई हैं.
मनोज - राहुल केँ पिताजी जौ खानदानी बिज़नेस सँभालते हैं, उनकी उम्र लगभग४५ साल हैं। वोँ हमेशा बिज़नेस केँ सिलसिले मे बहार गाओं जाते रहते हैं। पर्र वोँ भि बहुत हैंडसम हैं, राहुल कों यह क्वालिटी उन्ही सें मिली हैं.
सरिता - राहुल केँ मम्मी, इनकी उम्र लगभग४२ साल हैं, पऱ वोँ दिखने मे उससेकाम उम्र कि लगती हैं। गोरारंग हैं औऱ भराहुआ बदन हैं। इनके बड़े बड़े बूब्स औऱ गांडदेख केँ किसी कां भि दिलमचल जायेगा। यहघऱ कां काम संभालती हैं।
स्वीटी - राहुल कि बड़ी बेहेन, इसकी उम्र२५ साल हैं। औऱ यह पूरीतरह सें मॉडर्न रहना मनपसंद करती हैं, पढाई ख़तमकर ली हैं औऱ अभि घऱ मे हि रहती हैं, इसकेलिए घरवाले नाताखोज रहे हैं। यह भि अपनी मां कि तरहभरे हुएबदन कि मालकिन हैं। गोरा चिटारंग, पतलीकमर औऱ बड़े बूब्स। कॉलेज मे इसकेकई बॉयफ्रेंड रह चुके हैं, औऱ नं जाने कितने पीछे पड़ेहुए होंगे.
इन लोगो केँ आलावा राहुल केँ दादाजी (कमलेश) औऱ दादीमा (विमला) भि पड़ोस केँ बंगले मे रहते हैं
कमलेश - बचपन सें घऱ कां बिज़नेस करतेहुए अब रिटायर हौ गये हैं, अब ज़िन्दगी कां पूरामजा लेने मे लगेहुए हैं। जोँ जवानी मे नहि करपाए वोँ अभि करना चाहते हैं.
विमला - इन कि उम्र लगभग५८ साल हैं, पऱ यह भि दिखने मे अभि भि बोहोत हॉट हैं, मॉडर्न लाइफस्टाइल मे रहती हैं, अक्सर उनके बंगले पे किटी पार्टीज होती रहती हैं। गोरारंग औऱ बड़े बड़े बूब्स औऱ गांड हैं, जौ जब वोँ चलती हैं तौ झूलते रहते हैं.
दादाजी औऱ दादीमा केँ घऱ मे एक् नौकरानी भि रहती हैं जिस केँ उम्र लगभग३५ साल होगी। उसके पति कां देहांत होँ गय़ा हैं, औऱ वोँ अब दादाजी औऱ दादीमा केँ घऱ मे रहती हैं औऱ घऱ कां साराकाम संभालती हैं। उसकानाम कांताबाई हैं.
बड़ा परिवार सुखी परिवार - parivaar ka sex – New Episode
कथा मेरी स्वयं कि नहीं हैं, इसलिये मैंने मात्र कॉपी कि हैं, जब तक तक ओरिजिनल राइटर एपसोड नहीं देगाये भि एपसोड नहीं आँ पाएगी।
राहुल औऱ उसका परिवार सूरत मे रहते थें। खानदानी बिज़नेस थां, आलीशान २ बंगले थें, २ गाड़िया थि औऱ साडीसुख सुविधाएं थि। किस्सा शुरुआत होती हैं जब राहुल 12th क्लास कि एग्जाम देने केँ बाद उसकी छुट्टिया चलरही थि। इस उम्र मे बाकि नौजवानो केँ तरह राहुल कों सेक्स केँ बारे मे जानकारी होँ गयीँ, थि। उसने ब्लू फिल्म वगेरा देख राखी थि, पर्र कभी लड़की केँ संग उसकाकुछ ज़्यादा सम्बन्ध नहि आया, कॉलेज मे भि उसकीकभी गिर्ल्फ्रिएड पटाने कि हिम्मत नहि हुई।
छुट्टियों कां आलम थां तो राहुल औऱ उसके दोस्तों नें मूवी देखने कां प्लान बनाया। उसदिन घऱ बापू मे हि थें औऱ उसकी बेहेन हमेशा कि तरह अपनेरूम मे अपनी सहेलियों सें फ़ोन पे गप्पे लड़ारही थि। राहुल सुभह रेडी हौ केँ रूम सें निचेआया, वहां उसके मम्मी किचेन मे नाश्ता कि तैयारी कररही थि, औऱ बापू टेलीविज़न पे न्यूज़ देखरहे थें।
राहुल सीधाआया औऱ किचेन मे घुस गय़ा। वहां सरिता पतला सां नाईट गाउन पेहेन केँ कामकर रही थि, गाउन पूरा शरीर सें चिपका हुआ थां औऱ सरिता हे गांड केँ उभर क्लियर दिखरहे थें। राहुल जोँ देखरहा थां उससे अच्छा तौ लगा पर्र, पऱ जल्दी उसकेमन मे ख्याल आया केँ वोँ मेरी मां हैं, ऐसी नज़र सें नहि देख्ना चाहिए औऱ उसे नें मन सें ख्याल निकाला औऱ बोला.
राहुल - मां मे आज मूवी देखने जारहा हूं, वहां सें घूमघाम केँ साम मे हि आऊंगा। दोपहर मे खानां खाने केँ लिए नहि आऊंगा।
सरिता नें काम करते करते हि जवाबदे दिया।
सरिता - (टेढ़ा जवाब देतेहुए) हैं ठीक हैं चले जानां, पर्र अपने बापू कों बता केँ जानां वार्ना जब वोँ घऱ पे रहते हैं तौ मुझे पूछते रहते हैं कि राहुल कहाचला गय़ा घूमने.औऱ तुँ तेरा फ़ोन भि नहि उठता.अपने आवारा दोस्तों केँ संग घूमते टाइमघऱ वालो कों भूल जाता हैं.
राहुल - हैं मम्मी.बोल दूंगा बापू कों.
सरिता - (डटतेहुए) औऱ मेरा फ़ोन रिसीव कर लियाकर।
राहुल - हैं मां कर लूंगा.अब मे जाऊ.
सरिता - अरे नास्ता तोँ कर केँ जा.
पर्र राहुल नें बात सुनी नहि औऱ कीचन सें भागते हुए.
राहुल - नहि मां.बहार कर लूंगा.मुझे देर होँ रही हैं.
सरिता - (बाप नें बिगड़ रखा हैं.) - सोचते हुए.
राहुल वहां सें ड्राइंग रूम मे बापू केँ पास गय़ा औऱ बोला.
राहुल - बापू मे दोस्तों केँ संग मूवी देखने जारहा हूं.साम मे आऊंगा.
मनोज - ठीक हैं बेटा धीरे-धीरे जाओ.एन्जॉय करो.चाहिए तोँ गाडी लेकरचला जा.मेआज दिनभर घऱ मे हि हूं.मुझे कही नहि जानां.
राहुल - नहि बापू.हम् सारे मित्र कि गाडी सें जारहे हैं.
मनोज - ओके डिअर.बाए.
राहुल फिनघऱ सें चला गय़ा.औऱ उतने मे स्वीटी रूम सें निचे आयी.वोँ पूरीसज धज केँ आयी थि.पीला सलवार सूट पहना थां जोँ पुरा बॉडी स्लिम थां.उसके शरीर केँ सारेउभर दिखरहे थें.स्वीटी निचेआयी औऱ सीधे ड्राइंग रूम मे गई,। वहां अपने पिताजी सें बोलीं
स्वीटी - बापू मे सहेलियों केँ संग शॉपिंग करनेजा रही हूं.कुछ पैसे चाहिए.
मनोज - कितने चाहिए बेटा.
स्वीटी - दस हज़ार.
मनोज - इतने रुपये.क्याँ लेना हैं.
स्वीटी - पिताजी बहोत कुछ लेना हैं.कपडे, शूज, मेक उप.आप् कों नहि समजेगा.
मनोज - अच्छा अच्छा.
औऱ कहते मनोज नें जेब सें दस हज़ार निकल केँ देदिए
मनोज - अब इतनी खरीदारी करनी हैं तौ तुम् वक्त तौ बहोत लगेगा.
स्वीटी - हैं वोँ तौ हैं पिताजी.पर्र आप् भि घऱ पे अधिक नहि रहते.आज मौका मिला तौ मैंने सोचाआज हि आप् सें पैसे लेँ केँ शॉपिंग करआउ.
मनोज - वोँ सभीठीक हैं.पऱ साम तक घऱ आँ जानां.
स्वीटी - हैं पिताजी.साम केँ पहले तौ धीरे-धीरे आँ जाउंगी.
औऱ यह कहते हि घऱरे बहार निकली.
उतने मे सरिता किचेन सें नास्ता लेँ कर बहार निकली.औऱ बोलि.
सरिता - अबयहकहा जारही हैं.
मनोज - अरे जानेदो उससे.वोँ शॉपिंग करनेजा रही हैं अपने साहिलियो केँ संग.
सरिता - (नाराज होतेहुए) आप् नें दोनों कों बिगड़ रखा हैं.आप् तोँ घऱ पे रहते नहि मुझे हि इन्हे संभालना पड़ता हैं.
मनोजउठ केँ डाइनिंग टेबल पे आँ गय़ा औऱ सरिता नें नास्ता उसके सामने रख दिया.औऱ सरिता बगल वाले चेयर पे बैठ गयीँ,.
मनोज नें एक् निवाला उठाया औऱ सरिता कि औऱ करतेहुए कहा.
मनोज - इतना नाराज़ नं होँ मेरी जान.(औऱ उसे वोँ निवाला खिला दिया).आज तुम्हारी सारी शिकायतों कां समाधान कर दुनगा तुम् चिंता मतकरो.
सरिता - (नटखटनदज मे) आज बड़ा प्रेम आँ रहा हैं.क्याँ बात हैं.
मनोज नें सरिता कां हाथ पकड़ केँ उसकेतरफ खींच लिया औऱ अपनेगोद मे बैठा लिया.
सरिता - (अचंभित होतेहुए) अरेरे क्याँ कररहे हैं आप्.कोई देख आँ जायेगा.
मनोज - कोई नहि आयेगा मेरी जान.आज दोनों बच्चे साम तक बहार एन्जॉय करेंगे.औऱ हम् घऱ मे.
सरिता - (शरमाते हुए) क्याँ आप् भि.इसीलिए आप् नें दोनों बच्चो कों बहार जाने सें रोका नहि.
मनोज - हां मेरी जान.बहोत दिनों बादऐसा मौका मिला हैं तुम् सें खुलेहुए दिन मे तुम् सें इश्क करने कां.आज तुम्हारे दो महीनो कि प्यास मे बुझा दूंगा.
यह कहते हि.दोनों केँ होठ एक् दूसरे सें मिलगये औऱ वोँ किश करने लगे.सरिता भि पूरासंग देरही थि औऱ सिसकिया निकाल रही.फिन कुछ मिंटो केँ बाद उनकेहोठ जुदाहुए औऱ मनोज नें उसके हाथो सें सरिता केँ बूब्स दबाना शुरुआत किया.औऱ उसकइ गर्दन पे अपने होतो सें हमलाबोल दिया.इस सें सरिता पूरी गर्म होँ गई, औऱ लम्बी सिसकिया भरनेलगी.
सरिता - ओह्ह्ह। हम्म्म्म.आह्ह्ह्ह.रूम मे चलिए नहहहह.यहा कोई आँ जायेगा ओह्ह्ह्ह.
मनोज - डरोमत जानेमन कोई नहि आएगा.
औऱ उसने अपना हाथो सें गाउन केँ सामबे केँ बटनखोल दिए (सरिता नें अंदर ब्रा नहि पहना थां).औऱ सरिता केँ एक् मुम्मे कों बहार निकल केँ बेतहाशा चूसने लगा। सरिता केँ दोनों निप्पल एकदम सख्त होँ गये थें.
सरिता अब मनोज केँ गोद मे सें थोडा सां उठी.तौ मनोज भि उसकेसंग उठ जाया पर्र उसने उसके मुम्मे कों चूस नं बंद नहि किया.सरिता थोड़ी पीछेहटी औऱ मनोज कां हाथ पकड़ा औऱ आगे कि तरफ चलनेलगी.
सरिता - चलिए अब.आगे केँ प्रोग्राम रूम मे होगा.
सरिता नें फिन मनोज कां हाथ पकड़ केँ गेस्ट रूम केँ तरफचल दि जोँ ग्राउंड फ्लोर पे हि थां.मनोज उसके पीछे चलतेहुए दूसरे हाथ सें सरिता कि गांड सेहला रहा थां.औऱ पीछे सें गर्दन कों किसकर रहा थां.
रूम मे जाते हि.सरिता नें मनोज कों बेड पऱ ढाकामर दिया.औऱ अपना गाउन पूराउतर केँ फेक दिया.मनोज नें भि झट सें अपने कपडेउतर दिए.औऱ पुर नंगाहोक बेड पे लेट गय़ा उसका 7 इंच कां लन्ड फनफना रहा थां.फिन सरिता नें अपनी पैंटी उतरी औऱ उसे मनोज केँ लन्ड मे अटका दि.फिन सामने पड़ी चेयर पे बैठेहुए आगे कि तरगझुक गयीँ,.औऱ दोनों हटो सें अपनी गांड पहलाली.
मनोज कों सरिता केँ चुत केँ दर्शन हौ गये.औऱ वोँ झट सें उठा औऱ सरिता केँ गांड केँ सामने जा केँ घुटनो केँ बलबैठ गय़ा.उसने फिन सरिता कि गांड कों दोनों हाथो सें सहलाया.गांड पे दोनों तरफ चूमा औऱ फिन धीरे-धीरे सें अपनाहाथ रखा.औऱ धीरे-धीरे धीरे-धीरे चुत रगड़ने लगा.
मनोज कां हाथ लगते हि सरिता अचानक चहक उठी.औऱ उसकी मुँह सें उउउउउहहहह.कि सिसकी निकली.फिन मनोज नें अपनाहाथ हटाया औऱ चुत कों कुत्ते कि तरह चाटने लगा.वोँ निचे सें शुरुआत करता औऱ गांड केँ छेद तक चाटता.मनोजऐसे लम्बे लम्बे स्ट्रोक सें उसकीछूट चाटरहा थां.
उधर सरिता कों लगभगदो महीनो बादचुत मे हलचल हुईँ थि तोँ उससेचुत मे कपकपी महसूस होँ रही थि औऱ वोँ सिसकिया भररही थि.
सरिता - ऊह्ह्ह्ह.चाटो इसी तरहहहह.आअह्ह्ह्हह.बड़ा मजा आँ रहा हैं.
सरिता कां पानीअब निकलने वाला थां पर्र मनोज पीछे सें लम्बा लम्बा चाटरहा थां.तोँ सरिता पलट गयीँ, औऱ मनोज कां सर सीधेचुत मे धसा दिया.मनोज उसकी जबानचुत केँ अंदरदाल केँ हिलारहा थां.औऱ सरिता नें अपनेहाथ सें अपने क्लीट जौ जोरजोर सें रगड़ना शुरुआत किया.
कुछ हि देर मे सरिता झड़ गयीँ, औऱ मनोज उसका पूरा पानीचाट गय़ा.सरिता केँ चेहरे पे संतुष्टि केँ मुस्कान आँ आयी.
वोँ चायररे उत्तरी औऱ मनोज कों फिनबेड पे लिटा दिया.मनोज केँ लन्ड कों अपने हाथो सें हिला नें लगी.औऱ फिन अपने मुँह मे पूरा लन्ड दाल लिया.
मनोज कां पुरा लन्ड मुँह मे अंदर बहारकर केँ जम केँ चूसरही थि.मनोज लेट केँ मज़े लेँ रहा थां.लन्ड चाट केँ अपने मुँह केँ थूक सें पूरा लन्ड गिलाकर दिया.जब मुँह सें लन्ड निकला तोँ मुँह मे जमेहुए थूक कों लन्ड केँ ऊपरथूक दिया औऱ पुरे लन्ड केँ ऊपर फैला दिया.
सरिता अबउठी औऱ मनोज केँ ऊपर आँ केँ बैठ गई.मनोज नें दोनों हाथो सें उसके बूब्स पकड़ केँ मसलने लगा.सरिता नें अपनीचुत मनोज केँ लन्ड पे रगड़ने लगी.फिन मनोज थोडा सां ऊपरउठा औऱ दोनों नें एक् दूसरे कों चूमना शुरुआत करदिया.मनोज नें एक् हाथ पीछे लेकर सरिता कि गांड सहलाने लगा.फिन धीरे-धीरे धीरे-धीरे हाथआगे बढ़ा केँ गांड केँ छेद कों अपने ऊँगली सें सहलाने लगा.सरिता केँ सासेतेज हौ गई, थि.औऱ वोँ पुरे मज़े मे थि.
सरिता - जानू छोड़ो नं उससे.क्यूं बारबार मेरी गांड कों छेड़ते रहते होँ.
मनोज - कभी तोँ मानजा मेरीजान.एक् बार तोँ तेरे गांड मे मेरा लन्ड डालने दे.
सरिता - छी कैसी बातें करते होँ.वोँ भि कोई लन्ड डालने कि स्थान हैं.वहां चीज़े डाली नहि निकली जाती हैं.
औऱ खिलखिला केँ हसने लगी.फिन सरिता नें अपनी गांड थोड़ी उठाई औऱ धीरे-धीरे धीरे-धीरे लन्ड कों चुत मे दाल नें लगी.जैसे जैसे उसकी गांड निचेजा रही थि उसकी सिसकी निकलरही थि.
सरिता - आह्ह्ह्हह.जानू.तुम् इस लन्ड केँ लिए बड़ा तरसाते होँ.
अभि पूरा लन्ड एंड डाला नहि थां कि.मनोज नें निचे सें एक् जोर सें झटका लगाया.औऱ सरिता चहक उठी.उसकी जोर सें चेक निकली.
सरिता - उउउउइइइइइ माहहहहह.धिरहहहहह जनुआअह्ह्ह.
मनोज नें धका मरते हि सरिता कि एक् चुची कों मुँह मे भर लिया औऱ जोर सें चूस नें लगा.
सरिता अपनी गांड धीरे-धीरे धीरे-धीरे ऊपर निचेकर रही थि.रूम पूरा सिसकियों सें भर गय़ा थां.
सरिता - अह्ह्ह.अह्ह्ह.अह्ह्ह.उईईईमाआहहह.ओह्ह्ह्हह.
कुछदेर ऐसे हि सरिता अपनी गांड हिला केँ छोड़रही थि.फिन उसकी सांसे भरी होँ गई,.औऱ उसकी तेज़ी काम होगयी.फिन मनोज नें अपने दोनों हाथ उसके गांड केँ निचे सें दाल केँ सरिता कों थोडा ऊपरउठा लिया औऱ तेज़ी सें निचे सें झटके लगाने लगा.पुरे रूम मे फच्च फच्च कि आवाज़ आँ रही थि.
सरिता - हययययय.जनुआहहहहह.धीरे-धीरे करो नहहहहहह.
मनोज नें औऱ तेज़ी बढ़ा दि.फिन सरिता कां मुँह खुला हि रह गय़ा.औऱ सांसे बहोत तेज़ होगी.५-६ झटको केँ बाद सरिता जोर सें चीखी (ओह्ह्ह्हह माहहहहहह.) औऱ पूरा जिस्म उसका कापने लगा औऱ वोँ मनोज केँ ऊपरलेट गई, औऱ मनोज कों बेतहाशा किस करने गई,। सरिता झड़ गयीँ, थि.
मनोज नें धीरे-धीरे धीरे-धीरे झटके लग्न जारीरखा.
उधर दूसरी तरफ राहुल दोस्तों केँ संग मूवीहॉल मे पंहुचा औऱ वहांउसे औऱ उसके दोस्तों कों पताचला कि जोँ ऑनलाइन बुकिंग उन्होंने कि थि वोँ गलती सें अगलेडेट कि कर दि थि.तौ सभी दोस्तों नें फैसला किया केँ अभि निकल जाते हैं.धुप भि बढ़रही हैं.साम मे मिलते हैं उनकेरोज केँ अड्डे पे.
तोँ इसवजह सें राहुल घऱ कि तरफचल पड़ा.
इधर घऱ मे अब मनोज नें सरिता कों बेड पे लिटा दिया थां औऱ उसके साइड मे आँ केँ लेट गय़ा.उसने सरिता केँ एक् तंग अपने हाथो सें उठाई औऱ अपना लन्ड चुत मे घुसा दिया औऱ पीछे सें चोदने लगा.सरिता सिसकिया भरतेहुए पुरे मज़े लेँ रही थि.
इतने मे राहुल घऱ पहुंच गय़ा.उसने पाया केँ घऱ कां द्वार (दरवाज़ा) खुला हि हैं.तौ वोँ अंदर आँ केँ पानी पिने केँ लिए किचेन केँ तरफचल दिया.जैसे हि वोँ आगे बढ़ा तौ उसको सरिता कि आवाज़े आई.अब राहुल इतना नादाँ नहि थां कि उसकोयह मालूम न् होँ कि यह आवाज़े कहारे औऱ क्यूं आँ रही हैं.उसका मन ललचा गय़ा औऱ उसकामन मे आया केँ जाकरदेख लेते हैं शायदकुछ शोमिल जाये.राहुल कां नसीब अच्छा थां कि द्वार (दरवाज़ा) पूराबंद कियाहुआ नहि थां.बिच मे थोड़ी सि स्थान थि झाकने केँ लिए.वोँ अंदर कां खेल देखके एकदममचल उठा.उसने पहलीबार असलियत मे एक् नंगी महिला देखि थि औऱ सोने पे सुहागा वोँ कि भि चोदते हुए.
राहुल कां लन्ड झट सें खड़ा होँ गय़ा.एकदम लोहे केँ रोड जैसा होँ गय़ा.उसकी जीन्स मे समां नहि प्रहा थां.वोँ जीन्स पे सें हि अपना लन्ड रगड़रहा थां.
सरिता कां चेहरा दरवाजे केँ तरफ हि थां औऱ मनोज उसको पीछे सें छोड़रहा रहा इसलिये उसको दरवाजे कि तरफ कां कुछदिख नहि रहा थां.पऱ
अंदर सरिता जोरजोर सें आँखेबंद कर केँ सिसकिया भररही थि.इधर राहुल अपनी मम्मी कि चूचियों कों हिलता हुआदेख केँ अपना लन्ड सेहला रहा थां.फिन राहुल कों रहा नहि गय़ा औऱ उस नें अपनीपंत कि ज़िपखोल केँ लन्ड बहार निकल लिया औऱ जोरजोर सें हिलने लगा.
एकाएक सरिता नें आखे खोली तौ उसे सामने राहुल दिखाई दिया जोँ अपना लन्ड कों हाथ मे लेके खड़ा हैं.राहुल कों पता नहि चला कों उसके मम्मी नें उसेदेख लिया.
मनोज पीछे सें लगातार चोदरहा थां.सरिता नें उसे रोकने कि कोशिश कि.
सरिता - आअह्हह्ह्ह्ह.जानू.अह्ह्ह्हह.रुक जाओ ओह्ह्ह्हह्ह.रुक जाओ नाहहहह.जनऊहहहह.प्लीज़स्स्स आअह्ह्ह.जानू रुको नाहहहहहह.उउउइइइइइ माहहहहहह.
यहसुन केँ मनोज नें झटके एकदम तेज़कर दिए, अब मनोज झड़ने केँ लगभग आँ गय़ा थां तो वोँ रुकने वाला तोँ थां नहि।
राहुल यह नज़ारा देख लें अपना लन्ड जोरजोर सें हिलने लगा.अचानक सरिता औऱ राहुल कि आँखे मिली तोँ राहुल केँ पैरोटेल ज़मीं खिसक गई,.वोँ वहां सें ऐसाभगा जैसेकोई शेर उसके पीछेलगा होँ.सीधे भाग केँ अपने कमरे मे घुस गय़ा।
इधर मनोज भि झड़ गय़ा औऱ अपना पूरा पानी उसने सरिता केँ चुत मे चोद दिया.
मनोज नें अपना लन्ड जबचुत सें बहार निकला तोँ उसका वीर्य सरिता केँ चुत सें बहने लगा.सरिता मुस्कुराने लगी औऱ अपने हाथो सें वोँ वीर्य कों उंगलियों पे लिया औऱ चाटने लगी.
सरिता - बड़ा मीठा हैं आपका पानी.औऱ मुस्कुराने लगी.
मनोज - अच्छा.आज खानां खाने केँ बाद स्वीट डिश खिलाता हूं.
.दोनों वही हफ्ते हुएकुछ देर पड़े रहे.फिन मनोज साइड मे होकलेट गय़ा औऱ सरिता उसकेऊपर आकेलेट गयीँ, औऱ दोनों किस करने लगे.सरिता नें मनोज कों राहुल केँ बारे मे कुछ नहि बोला.वोँ मन हि मन मुस्कुरा रही थि.उसने राहुल कां हथिया देख लिया थां जोँ मनोज सें बड़ालग रहा थां.सरिता कों भि राहुल कां लन्ड फिन सें देखने कि ख़्वाहिश होँ रही थि.कुछ देरकिस करने केँ बाद सरिता बोलीं.
सरिता - जानूमुझ मे पानी क्यूं छोड दिया.मेरे वोँ वालेदिन चलरहे हैं.कुछ होँ गय़ा तोँ.
मनोज - अरेजान तोँ पहलेबता देती.कंडोम लगा लेता.
सरिता - नाँ बाबा वोँ कंडोम केँ संग मुझे अजीब सां लगता हैं.
दोनों जोरजोर सें हसने लगे.कुछ देरबाद दोनों उठे औऱ फ्रेश होक कपडे पेहेन केँ ड्राइंग रूम मे आँ केँ बैठगये.
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बड़ा परिवार सुखी परिवार - parivaar ka sex – New Episode
मनोज औऱ सरिता ड्राइंग रूम मे आकरबैठ गए थें। सरिता जानती थि केँ राहुल घऱ आँ गय़ा हैं औऱ वोँ यहीकही होगा पऱ उसने मनोज कों नहि बताया.क्युकी जबघऱ मे जब बच्चे होते तोँ मनोज सेक्स करने मे दिलचस्पी नहि दिखता थां.सरिता कि भूक अभि मिटी नहि थि.सरिता केँ मन मे कुछअलग हि थां.
दूसरी तरफ राहुल अपनेरूम मे भागकर घुसा औऱ द्वार (दरवाज़ा) बंदकर दिया.राहुल बहोत घबरा गय़ा थां औऱ सोचरहा थां यह मैंने क्याँ कर दिया.ऐसा नहि करना चाहिए थां.मम्मी क्याँ सोचेगी औऱ वोँ बापू केँ यहबात बताएगी तौ वोँ क्याँ सोचेंगे.अब वोँ मां केँ सामने केसे मुँह दिखायेगा.
यह ख्याल तौ उसकेमन मे चल हि रहा थां पऱ फिन उसकेमन सें वोँ दृश्य नहि निकलरहा थां जौ उसने देखा थां.जैसे वोँ आँखेबंद करता तोँ उसको सरिता कि नंगी तरवीर दिमाग़ मे आँ जाती.उसका मनकररहा थां कि काश मम्मी नें मुझे देखा नं होता तौ मे उनके चुदाई कां पूरा खुशी लेँ पता.यह सोचते सोचते वोँ बेड पे लेट गय़ा औऱ मुठ मरने लगा.उसकी आँखेबंद थि औऱ वोँ अपनी मां कों चोदते हुआ दृश्य मन मे लाकरमुठ मररहा थां.कुछ देरबाद उसका सारा पानी निकल गय़ा.उसने पहलीबार अपनी मां केँ बारे मे सोचकर मुठमरी थि.
मनोज औऱ सरिता कुछदेर बैठकर इधरउधर कि गप्प मरतेरहे.फिन सरिता खानां बनाने केँ लिए किचेन मे चली गयीँ,.राहुल अपने कमरे सें निकलने कां कोई विचार थां नहि.वोँ इतना घबरा गय़ा थां.वोँ वैसे हि बेड पे लेटे लेटेसो गय़ा.उधर सरिता नें खानां बनाया औऱ दोनों नें खानां खा लेने केँ बाद अपनेरूम मे चले गए.राहुल कां रूम सरिता औऱ मनोज केँ रूम केँ बिलकुल अपोजिट मे थां.राहुल कां दरवाजा खोलने पे सीधे सरिता केँ रूम कां दरवाजा दिखाई देता थां.
सरिता तौ कों जब राहुल कमरे बहार सें देखरहा थां तो नं जाने क्यूं उसे अच्छा लगरहा थां.उसे चुदाई मे औऱ मजा आँ रहा थां.अपना हि बेटा अपनी हि मां कों चुदते हुएदेख रहा थां.सरिता केँ मन मे बहोत शरारत चलरही थि.वोँ जान गई, थि केँ राहुल अपने कमरे मे हि हैं.
दोनों जब कमरे मे गए तोँ मनोजजेक बेड पे बैठ गय़ा औऱ सरिता नें धीरे-धीरे धीरे-धीरे अपनेसरे कपडेउतर केँ फेक दिए.दोनों रूम मे दाखिल थें पऱ अपने पीछे दरवाजा खुला हि छोड़ दिया थां.मनोज तो समाजरहा थां कि घऱ मे कोई हैं हि नहि तौ किसबात कि चिंता.पर्र सरिता जानती थि कि राहुल अपने कमरे मे हि हैं.यह सरिता केँ दिमाग़ कि हि शरारत थि.उसने जानबुज केँ रूम खुला छोड़ दिया थां.वोँ चाहती थि कि राहुल इसबार पूरी फिल्म देखे.उधर मनोज नें भि अपनेसरे कपडेउतर दिए.कुछ हि देर मे दोनों कि कामक्रीड़ा पुरेजोश मे शुरुआत होँ गई,.
सरिता जोरजोर सें सिसकिया भररही थि औऱ चिल्ला रही थि। औऱ बारबार दरवाजे केँ तरफ देखती थि.कि सामने केँ दरवाजे मे कुछहल चल होती हैं केँ नहि.औऱ जोँ उसकी ख़्वाहिश थि वोँ पूरी हुईँ.सरिता केँ जोरजोर सें चीखने नें पे राहुल कि नींदखुल गई,.औऱ राहुल समाज गय़ा कि अब सरिता औऱ मनोज सामने वाले कमरे मे हि चुदाई कररहे हैं.
राहुल कि दरवाजा खोलने कि हिम्मत तोँ हौ रही थि नहि.पऱ उसके अंदर कि वासना उसकोकह रही थि कि एक् बारदेख लूखोल केँ दरवाजा.
औऱ बोहोत हिम्मत कर केँ राहुल नें धीरे-धीरे सें दरवाजा खोला औऱ छोटी सि सुराख़ मे सें देखा.तौ सामने देखा कि मनोज निचे लेताहुआ हैं औऱ सरिता उसकेऊपर चढ़ी हुईँ हैं औऱ अपनी गांड हिला हिला केँ पूरा लन्ड अपनेचुत मे लें रही हैं.यह देख केँ राहुल कां हथिया लोहे केँ रोड जैसातन गय़ा औऱ पंत मे हि झटकेमर नें लगा.अभि सरिता कां चेहरा दरवाजे कि तरफ नहि थां औऱ न् हि मनोज उसकोदेख पारहा थां.पीछे सें इस नज़ारे कों देख राहुल पुरे मज़े मे आँ गय़ा औऱ अपना लन्ड पैंट सें बहार निकल केँ मुठ मरने लगा.राहुल नें यहसन पहले केवल पोर्न मूवीज मे देखा थां.पऱ पहलीबार वोँ लाइवदेख रहा थां वोँ भि अपनी मां कों.औऱ सरिता कि बड़ी गांड जैसे हि ऊपर निचे होते तोँ उसके चुतर पुरे हरकत केँ संग हिलते थें.
राहुल मज़े लेँ हि रहा थां कि सरिता फिन पीछे मुड़ गयीँ,.उसको भि राहुल कां इंतजार थां.
जब सरिता नें पीछे देखा तोँ वोँ समाज गई, कि उसका बेटा फिन उनकी चुदाई केँ मज़े लेँ रहा हैं.उसने दरवाजे कि औऱ देख एक् कामुक मुस्कराहट दि.औऱइस बार उसने मनोज कों रुकने केँ लिए नहि कहा पर्र औऱ जोर सें अपनी गांड लन्ड केँ ऊपर पटकने लगीइस सें पुरे कमरे मे फचकफचक फचक.कि आवाज़ गूंजने लगी.राहुल कों लगा कि मां नें फिनउसे देख लिया हैं.तो उस नें फिन अपना दरवाजा बंदकर दिया.उधर सरिता अबजोर जोर सें चीखे भरनेलगी थि.
सरिता - आअह्ह्ह्हह.अह्ह्ह्ह.अह्ह्ह.चोदो मुझे.ओह्ह्ह्हह.आअह्ह्ह्ह.
राहुल नें फिन सोचा केँ शायद मम्मी नें उसे नहि देखा नहि तोँ फिन पिछली बार कि तरह मनोज कों रुकने केँ लिए कहती.अब राहुल कि हिम्मत औऱ बढ़ गई,.फिन उसनेफिन दरवाजा खोलने कां सोचा.तौ अचानक सें आवाज़ बंद हौ गई,.राहुल कां मनबैठ गय़ा.उसे लगा कि फिनइस बार पूराखेल नहि देख पाया.औऱ वोँ बेड कि तरफबढ़ हि रहा थां कि फिन सरिता कि आवाज़ आयी.
सरिता - मुझेयह लन्ड देदो ओह्ह्ह्ह.डालो मेरीचुत मे तुम्हारा प्यारा लन्ड.आह्हः डालो नां.
सरिता अब कड़ी होँ गई, थि औऱ बेड पे झुककर अपनी गांडआगे कर दि थि.मनोज पीछे सें अपना लन्ड सरिता केँ चुत पे रगड़रहा थां औऱ उसे तैसेकर रहा थां.
इतने मे राहुल नें दरवाजा थोडसा फिन खोला.अब उसे पूरा नज़ारा क्लियर दिखरहा थां.अपनी मां कां पूरा चिकना जिस्म.उसकी लटकते हुईँ आम जैसी चूचिया.यह देख केँ राहुल कां लन्ड फिनजोश मे आँ गय़ा.
सरिता - (सीधे दरवाजे कि तरफदेख केँ) डालो न् अपना लन्ड मेरीचुत मे.इतना मत तरसाओ न्.आह्ह्ह्ह। डालो नं.छोड़ दो मुझे अपने प्यारे लन्ड सें.आह्हः.डालो न्.
अब सरिता मनोज कों जानूकह केँ नहि बुलारही थि.औऱ वोँ लगातार दरवाजे केँ तरफ हि देखरही थि.जैसे राहुल सें हि कहरही हौ.राहुल यहदेख केँ रोमांचित हौ गय़ा औऱ अपना लुंडजोर जोर सें हिलने लगा.उसे यहदेख केँ बहोत मजा आँ रहा थां.
मनोज नें फिन एक् झटके केँ संग पूरा लुंड सरिता केँ चुत मे दर दिया.वोँ जोर सें चीखी.
सरिता - आअह्ह्ह्ह.तुम्हारा लन्ड कितना बड़ा हैं.अह्ह्ह.चोदो अपने लन्ड सें मेरीचुत कों.ओह्ह्ह्हह.ओह्ह्ह्हह्ह.ओह्ह्ह्हह्हह माहहहहह.जोर सें चोदो ओह्ह्ह्हह.
सरिता यहसभी सामने राहुल कि तरफदेख केँ कहरही थि.राहुल भि अपनेमन मे सोचरहा थां कि मे हि अपने मम्मी कों चोदरहा हु.औऱमुठ मरतारहा.
फिन २०-२५ झटके लगाने केँ बाद सरिता पलट केँ बेड केँ कोने पे लेट गई,.अब तोँ राहुल कों पूरा व्यूदिख रहा थां.उसकी मां कां पूरा चिकना जिस्म वोँ निहारता नहि थकरहा थां.
मनोज नें फिन १०-१५ झटके लगाए तौ उसको महसूस हुआ केँ उसका पानी निकने वाला हैं.उसने अपना लन्ड बहार निकला औऱ सरिता झट सें अपने घुटनो पे बैठ गयीँ, औऱ अपना मुँहखोल दिया.मनोज नें फिन४-५ बार अपना लुंड हिलाया औऱ अपना पूरा पानी सरिता केँ मुँह मे चोद दिया.सरिता नें भि पूरा पानी अपने मुँह मे लेके जातक गई,.औऱ मनोज कों देख केँ मुस्कुराने लगी.यह देख केँ राहुल कां पानीछूठ गय़ा.औऱ वोँ जोरजोर सें हाफने लगा.
मनोज - कैसालगा स्वीट डिश.
सरिता नें मनोज केँ लन्ड कों पूराचाट केँ उसको पूरा साफ़कर दिया.फिन उसने दरवाजे कि तरफदेख एक् कामुक मुस्कान देतेहुए कहा.
सरिता - तुम्हारा यह पानी कितना मीठा हैं.काश मे इसेरोज पी सकती
फिन सरिता कड़ी होँ केँ मनोज कों किश करने लगी.२ मिनटकिश करनेके बाद मनोज अपने कपडे पेहेन केँ बेड पे लेट गय़ा औऱ सरिता नें भि अपने कपडे पेहेन लिए औऱ वोँ सीधाचल केँ दरवाजे केँ पासआयी औऱ दरवाजे कि तरगदेख केँ बड़ी कामुक स्वर मे बोलीं.
सरिता - तुम्हे मजाआया नां.
सरिता जानती थि केँ दरवाजे केँ उसपार सें राहुल झकरहा हैं.
उधर मनोजबोल पड़ा.
मनोज - तुम्हे चोदने कां सुख केँ सामने कुछ नहि मेरीजान.
सरिता खिल खिला केँ हस पड़ी.औऱ दरवाजा बंदकर दिया.
राहुल मुठमर केँ थक चूका थां.औऱ उसेभूक भि बहोत लगी थि.तोँ उसने mauke कां फ़ायदा उठा केँ रूम सें निकला औऱ चुपछप सें किचेन मे चला गय़ा.वो उसने फ्रिज मे सें केक निकल केँ खा लिया औऱ अपनेरूम मे आँ केँ सो गय़ा.
साम केँ ६बजरहे थें.मनोज ड्राइंग रूम मे आँ केँ बैठ गय़ा थां औऱ सरिता किचेन मे गरमचाय बनारही थि कि उतने मे स्वीटी घऱ मे आयी.औऱ लायाहुआ सामान दिखने लगी.सरिता भि गरमचाय बना केँ ड्राइंग रूम मे आँ गयीँ,.औऱ तीनो स्वीटी नें लायाहुआ सामान देखरहे थें कि उतने मे राहुल अपने कमरे सें निचे आया.मनोज नें पूछा
मनोज - अरे तूँ कबआया.??
राहुल हक्का बक्का रह गय़ा.उसके मेह सें आवाज़ नहि निकलरही थि.
राहुल - मे वोँ.मे वोँ.मे.
उतने मे सरिता मनोज सें बोल पड़ी.
सरिता - हम् सोरहे थें तबआया होगा.(राहुल केँ तरफ एक् मुस्कान देतेहुए) तेरेलिए कुछ खाने केँ लिए लाऊ.थक गय़ा होगा नं.औऱमंद मंद हसने लसतेहुए रसोई मे जानेलगी.
सरिता नें स्लीवलेस्स गाउन पहनाहुआ थां जौ वोँ रोज पहनती थि.पऱ राहुल कि नज़रअब उसमे भि अपने मम्मी कों देखरहा थां तोँ उसकादिल मचलने लगा थां.सरिता जब मुड़ केँ रसोई कि तरफजा रही थि तोँ.राहुल अपनी नज़रे सरिता कि लचकती हुई गांड सें नहि हटापा रहा थां.औऱ एकटक निहारता जारहा थां.
.उतने मे मनोज नें आवाज़ लगाई.
मनोज - अरे राहुल खड़ा क्यूं हैं.इधर आजा.बैठ जा.संग मे गरमचाय पिएंगे.सुभह तौ तूँ थां नहि.साम मे सही.वैसे भि ज़्यादा मौका मिलता नहि मुज़हे तुम् लोगो केँ संग वक्त बिताने कां.
राहुल - (सोफे पे बैठेहुआ) तोँ क्याँ हुआ बापूअब तोँ आप् घऱ पे हि हैं औऱ मे भि घऱ पे हि हु.औऱकल मैच भि हैं.संग मे देखते हैं.
मनोज - अरे कहा.मेरी आजरात हि फ्लाइट हैं यूरोप कि.इम्पोर्टेन्ट बिज़नेस डील हैं.काम सें कामदो मानिने लग जायेंगे आने मे.
राहुल - (मन मे सोचरहा थां.अब तौ दो महीने कां वक़्त हैं.मम्मी कों किसीतरह रिज़ा नें कां प्लान बनाना पड़ेगा.अब तौ मे मम्मी कों चोदे बिना नहि रह सकता.मेरे दिमाग़ मे अब मात्र मां कि नंगी तस्वीरी घूमरही हैं.क्याँ जिस्म हैं हहहाइए.)
मनोज - अरेकहा खो गय़ा फिन सें.
राहुल - कुछ नहि बापू.वोँ बसयु हि.वोँ आप् जारहे हैं फिन सें तौ अच्छा नहि लगरहा.
उधर किचेन मे सरिता सोचरही थि.
सरिता - (मेरेघऱ मे इतना जवान लन्ड हैं फिन भि मे इतनेदिन चुदाई केँ लिए तड़पती रही.नं जाने कितने गाजर मूली बर्बाद होँ गएइस चक्कर मे.पर्र राहुल कों मुझ मे इंट्रेस्ट हैं याँ बसदो लोगो कि चुदाई देख्ना चाहता थां.वैसे भि वोँ जवानखून.उसे तौ कॉलेज कि लड़किया मनपसंद होंगी.मुझ मे क्यूं इंट्रेस्ट होगा.पहले कभी वैसी नज़र सें देखा नहि उसने मुझे.औऱ नं हि मैंने सोचा कि.वैसे कोशिश करने मे क्याँ हर्ज हैं.शायद कुछकाम बन जाये.औऱ मुझे रोज़रात कों लन्ड कां इंतेज़ाम होँ जाये.)
दोनों मां बेटे केँ दिल मे व्यसना जग चुकी थि एक् दूसरे कों चोदने कि.पऱअब पहलकौन करेगा.सरिता याँ राहुल यह प्रश्न थां.
बड़ा परिवार सुखी परिवार - parivaar ka sex - Kahani ab aur interesting hogi
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