मेरी चूत पसंद है complete - Desi sex story – New Episode
मेरी बुर पसन्द हैं पार्ट--1
करिश्मा अपने मा-बाप कि एकलौती लड़की हैं औऱ देल्ही मे रहती
हैं। करिश्मा केँ पापा, मिस्टर। सुन्दीप वेर्मा देल्ही मे हि एल.आइ.सि। मे
ऑफीसर थें औऱ पछलेचार साल पहले स्वरगवसी हौ गये थें औऱ
करिश्मा कि माताजी, स्म्ट। रजनी एक् हाउस वाइफ हैं। करिश्मा केँ औऱ
दो भइया भि हैं औऱ उनकी विवाह भि हौ गई, हैं। करिश्मा नें पीछले
साल हि एम.ए। (इंग्लीश) पास किया हैं। करिश्मा कां रंग बहोत गोरा
हैं औऱ उसकी फिगर 36-25-38 हैं। वोँ जब चलती हैं तौ उसकीकमर
एक् अजीब सि बल खाती हैं औऱ चलते वक्त उसके चूतर बहोत हिलते
हैं। उसके हिलते हुए चूतर कों देखकर परोस केँ कयी नवजवान,
औऱ बूढ़े व्यक्ति कां दिलमचल जाता हैं औऱ उनका लन्ड खड़ा होँ जाता
हैं। परोस केँ कई लड़को नें काफ़ी कोशिश कि मगर करिश्मा उनके
हाथ नहींआई। करिश्मा अपनी पढ़ाई औऱ यूनिवर्सिटी केँ सन्गी
दोस्त मे हि मुशगूल रहती थि। थोड़े दीनो केँ बाद करिश्मा कि
विवाह उसीसहर केँ रहने वाले एक् पोलीस ऑफीसर सें तय हौ
गई,.उस लड़के केँ नाम रमेश थां औऱ उसके पापा कां नाम
रसिकलाल थां औऱ सभी उनको रसिकलाल जी कहकर बुलाते थें। रसिकलाल
जी अपने जवानी केँ दिनो मे औऱ अपनी विवाह केँ बाद भि हर स्त्री कों
अपनी नज़र सें चोद्ते थें औऱ जबकभी मौका मिलता थां तौ उनको अपनी
लन्ड सें भि चोद्ते थें। रसिकलाल जी कि पत्नि कां नाम स्नेहलाता हैं
औऱ वोँ एक् लेखिका हैं। अबतब गिरिजा जी लगभग 8-10 किताबे लिख
चुकी हैं। रसिकलाल जी बहोत चोदु हैं औऱ अब तक वोँ अपनेघऱ
मे कई लड़की औऱ औरतो कों चोद चुके थें औऱ अबजब कि उनका काफ़ी
उमर होँ गय़ा थां मौका पाते हि कोई नाँ कोई महिला कों पटाकर अपनी
बिस्तेर गर्म करते थें। रसिकलाल जी कां लन्ड कि लंबाई लगभग 8 1/2"
लंबा औऱ मोटाई लगभग 3 ½" हैं औऱ वोँ जबकोई महिला कि बुर मे
अपना लन्ड डालते तोँ लगभग 25-30 मिनट केँ पहले वोँ झरते नहीं हैं.
इसीलिए जोँ स्त्री उनसे अपनी बुर चुदवा लेती हैं फिन दोबारा मौका
पाते हि उनका लन्ड अपनी बुर मे पिलवा लेती हें.आज करिश्मा कां
सुहागरात हैं। परसों हि उसकी विवाह रमेश केँ संग हुई थि.
करिश्मा इस टाइम अपने कमरे मे सजधजकर बैठी अपनी पति
कां इन्तिजार कररही हैं। उसका पति केसे उसकेसंग पेश आएगा, एह
सोचसोच कर करिश्मा कां दिल ज़ोर ज़ोर सें धड़करहा हैं। सुहागरात
मे क्याँ क्याँ होता हैं, यह उसको उसकी भाभी औऱ सहेलिओ नें सभी
बता दिया थां। करिश्मा कों मालूम हैं कि आजरात कों उसका पति कमरे
मे आँ कर उसको चूमेगा, उसकी चुचियो कों दबाएगा, मसलेगा औऱ
फिन उसके कपड़ो कों उतारकर उसको नंगी करेगा। फिन स्वयं अपने
कपरे उतारकर नंगा होँ जाएगा। इसकेबाद, उसका पति अपने खड़े लन्ड
सें उसकी बुर कि चटनी बनाते हुए उसको चोदेगा.वैसे तोँ
करिश्मा कों चुदवाने कां तजुर्बा विवाह केँ पहले सें हि हैं.
करिश्मा अपने कॉलेज केँ दिनो मे अपने क्लास केँ कई लड़को कां लन्ड
अपने बुर मे उतरवा चुकी हैं। एक् लड़के नें तौ करिश्मा कों उसकी
सहली केँ घऱ लें जाकर सहेली केँ सामने हि चोदा थां औऱ फिन
सहेली कि गंद भि मारी थि। एक् बार करिश्मा अपने एक् सहली केँ
घऱ पर्र विवाह मे गई, हुइ थि। वहाउस सहली केँ भइया, सुरेश,
नें उसको अकेले मे छेड़ दिया औऱ करिश्मा कि चूंची दबा दिया.
करिश्मा नें सिर्फ़ मुस्कुरा दिया.फिन सहली केँ भइया नें आगेबढ़ कर
करिश्मा कों पकड़ लिया औऱ चूम लिया.तब करिश्मा नें भि बढ़कर
सहेली केँ भइया कों चूम लिया.तब सुरेश करिश्मा केँ ब्लाउस केँ
अंदरहाथ डाल उसकी चूंची मसलने लगा औऱ करिश्मा भि गर्म
होँ कर अपनी चूंची मसलवाने लगी औऱ एक् हाथ उसके पॅंट केँ
उप्पेर सें उसके लन्ड पर्र रख दिया.तब सुरेश करिश्मा कों पकड़
कर छत पर्र लें गय़ा। छत पऱ कोई नहीं थां, क्योंकी सारेघऱ केँ
लोग नीचे विवाह मे ब्यस्त थें। छत पर्र जाकर सुरेश नें
करिश्मा कों छत कि दीवार सें खड़ाकर दिया औऱ करिश्मा सें लिपट
गय़ा। सुरेश एक् हाथ सें करिश्मा कि चूंची दबारहा थां औऱ
दूसरा हाथ सारी केँ अंदरडाल कर उसकी चूत कों सहलारहा थां.थोरी
देर मे हि करिश्मा गरमा गयीँ, औऱ उसकी मुँह सें तरहतरह कि
आवाज़ निकलने लगी.फिन जब सुरेश नें करिश्मा कि सारी कों उतारना
चाहा तौ करिश्मा नें मनाकर दिया औऱ बोलीं, "नहीं सुरेश हमको
एकदम सें नंगीमत करो। तुम् मेरी सारीउठा कर, पीछे सें
अपनागधे जैसा लन्ड मेरी बुर मे पेलकर मुझेचोद दो."मगर
सुरेश नाँ माना औऱ उसने करिश्मा कों पूरीतरह नंगी करके उसको
छत केँ मुंडेर सें खड़ा करके उसके पीछेजा कर अपना लन्ड उसकी
बुर मे पेलकर उसकोखूब रगड़ रगड़कर चोदा। चोदते टाइम
सुरेश अपने हाथों सें करिश्मा कि चुचियो कों भि मसलरहा
थां। करिश्मा अपनी बुर कि चुदाई सें बहोत मजा लेँ रही थि औऱ
सुरेश केँ हर धक्के केँ संगसंग अपनीकमर हिला हिलाकर सुरेश कां
लन्ड अपनी बुर सें खारही थि। थोरीदेर केँ बाद सुरेश
करिश्मा कि बुर चोद्ते चोद्ते झार गय़ा। सुरेश केँ झरते हि
करिश्मा नें अपनी बुर सें सुरेश कां लन्ड निकाल दिया औऱ स्वयं
सुरेश केँ सामने बैठकर उसका लन्ड अपने मुँह मे लेँ करचाट चाट
कर साफकर दिया। थोरीदेर केँ बाद करिश्मा औऱ सुरेश दोनोछत सें
नीचे आँ गये.आज करिश्मा अपनी सुहागरात कि सेज पर्र अपनीकई बार कि
चूदीहुए बुर लें कर अपने पति केँ लिए बैठी थि। उसकीदिल ज़ोर ज़ोर
सें धड़करही थि क्योंकी करिश्मा कों डर थां कि कहीं उसके
पति यह नां पताचल जाए कि करिश्मा पहले हि चुदाई कां खुशी लें
चुकी हैं। थोरीदेर केँ बाद कमरे कां दरवाजा खुला। करिश्मा नें
अपनीआँख तिरछी करके देखा कि उसकी ससुरजी, रसिकलाल जी,
कमरे मे आएहुए हें। करिश्मा कां माथा ठनका, कि सुहागरात केँ
दिन ससुरजी कां क्याँ काम आँ गय़ा हैं। खैर करिश्मा चुपचाप अपने
आप् कों सिकोर बैठीरही। थोरीदेर केँ बाद रसिकलाल जी सुहाग कि
सेज केँ पासआए औऱ करिश्मा केँ तरफदेख कर बोला, "बेटी मे जानता
हूं कि तुम् अपने पति केँ लिए इन्तिजार कर रहीहो। आज कि सभी लड़किया अपने
पति कां इंतिज़ार करती हैं। इसदिन केँ लिएसभी लड़कियो कों बहोत दीनो सें
इंतिज़ार रहता हैं। मगर तुम्हारा पति, रमेश, आज तुमसे सुहागरात
मनाने नहीं आँ पाएगा। अभि अभि थाने सें मोबाइल आया थां औऱ
वोँ अपनी यूनिफॉर्म पहनकर थानेचला गय़ा। जाते जाते, रमेश
यह कह गय़ा कि सहर केँ किसीभाग मे डकैती पड़ी हैं औऱ वोँ
उसके छानबीन करनेजा रहा हैं।
मेरी चूत पसंद है complete - Desi sex story – New Episode
मगर बेटी तूँ बिल्कुल चिंता मत करना.
मे तेरा सुहागरात खाली नहीं जाने दूँगा." करिश्मा नें अपने
ससुरजी कि बातसुन तौ ली पऱ अपने ससुरजी कि बात उसकी दीमाग मे
नहीं घुसी, औऱ करिश्मा अपना चहेरा उठाकर अपने ससुरजी कों
देखने लगी। रसिकलाल जी नेआगे बढ़कर करिश्मा कों बिस्तर पर्र सें
उठा लिया औऱ ज़मीन पर्र खड़ाकर दिया.तब रसिकलाल जी मुस्कुरा
कर करिश्मा सें बोले, "घबराना नहीं, मे तुम्हारी सुहागरात बेकार
जाने नहीं दूँगा, कोईबात नहीं, रमेश नहीं तौ क्याँ हुआ मे तौ
हूं." इतनाकह कर रसिकलाल जीआगे बढ़कर करिश्मा कों अपनी
बाँहों मे भरकर उसकी होठों पर्र चुम्मा दे दिया.जैसे हि
रसिकलाल जी नें करिश्मा केँ होठों पर्र चुम्मा दिया, करिश्मा
चौंक गयीँ, औऱ अपने ससुरजी सें बोलीं, "यह आप् क्याँ कर रहें हैं.
मे आपके बेटे कि पत्नि हूं औऱ उस लिहाज सें मे आप् कि बेटी लगती हूं
औऱ मुझको चूम रहें हैं?" रसिकलाल जी नें तब करिश्मा सें कहा,
"पागल लड़की, अरे मे तोँ तुम्हारी सुहागरात बेकार नाँ जाए इसलिये तुमको
चूमा.अरे लड़किया जब विवाह केँ पहलेजब शिव लिंग पऱ पानी चढ़ाती
हैं तब वोँ क्याँ मांगती हैं? वोँ मांगती हैं कि विवाह केँ बाद उसका
पति उसको सुहागरात मे खूब रगड़े। समझी? करिश्मा नें अपना
चहेरा नीचे करके पूछा, "मे तोँ सभीसमझ गई,, मगर
सुहागरात औऱ रगड़ने वालीबात नहीं समझी." रसिकलाल जी
मुस्कुरा कर बोले, "अरे बेटी इसमे नाँ समझने कि क्याँ बात हैं? तूँ क्याँ
नहीं जानती कि सुहागरात मे पति औऱ पत्नि क्याँ क्याँ करते हैं? क्याँ
तुम्हे यह नहीं मालूम कि सुहागरात मे पति अपनी पत्नि कों केसे
रगड़ता हैं?" करिश्मा अपनासिर कों नीचे रखती हुई बोलीं, "हां,
मालूम तौ हैं कि पहलीरात कों पति औऱ पत्नि क्याँ क्याँ करते औऱ करवाते
हें। मगर, आप् ऐसा क्यूं कह रहें हैं?" तब रसिकलाल जीनेआगे
बढ़कर करिश्मा कों अपने बाहों मे भर लिया औऱ उसके होठों कों
चूमते हुए बोले, "अरे बहू, तेरी सुहागरात खाली नाँ जाए, इसलिये मे
तेरेसंग वोँ सभीकाम करूँगा जोँ एक् व्यक्ति औऱ स्त्री सुहागरात मे
करते हें."करिश्मा अपने ससुरजी केँ मुँह सें उनकीबात सुनकर शर्मा
गयीँ, औऱ अपने हाथों सें अपना चहेरा ढँक लिया औऱ अपने ससुरजी
सें बोलीं, "हाई!यह क्याँ कह रहें हैं आप्। मे आपके बेटे कि पत्नि हूं
औऱ इस नाते सें मे आपकी बेटी समान हूं औऱ मुझसे क्याँ कह रहें
हैं?" तब रसिकलाल जी अपने हाथों सें करिश्मा कि चुन्चिओ कों
पकड़कर दबाते हुए बोले, "हाँ मे जानता हूं कि तूँ मेरी बेटी समान
हैं। मगर मे तुझेही अपनी सुहागरात मे तड़पते नहींदेख सकता औऱ
इसीलिए मे तेरेपास आयाहू." तब करिश्मा अपने चहेरे सें अपना
हाथ हटाकर बोलीं, "ठीक हैं बाबूजी, आप् मेरे सें उमर मे बड़े
हें। आप् जौ हि कह रहें हैं, ठीक हि कह रहें हें। मगरघऱ मे
आप् औऱ मेरे सिबा औऱ भि तौ लोग हें." करिश्मा कां इशारा अपनी
सासू केँ लिए थां। तब रसिकलाल जी नें करिश्मा कि चूंची कों
अपने हाथों सें ब्लाउस केँ उपर सें मलतेहुए कहा, "करिश्मा तुम्
चिंता मतकरो। तुम्हारी सासू कों सोने सें पहलेदूध पीने कि
आदत हैं, औऱ आज मैने उनकेदूध मे दो नींद कि गोली मिलाकर उनको
पीला दिया हैं। अबरात भर वोँ आहिस्ता सोती रहेंगी." तब करिश्मा
नें अपने हाथों सें अपने ससुरजी कि कमर पकड़ते हुए बोलि, "अब आपको
जौ भि करना हैं कीजिए, मे मना नहीं करूँगी."तब रसिकलाल जीने
करिश्मा कों अपनी बाहों मे भींच लिया औऱ उसकी मुँह कों बेतहाशा
चूमने लगे औऱ अपने दोनो हाथों सें उसकी चुन्चेओ कों पकड़कर
दबाने लगे। करिश्मा भि चुप नहीं थि। वोँ अपने हाथों सें
अपने ससुरजी कां लन्ड उनके कपड़े केँ उपर सें पकड़कर मुठिया रही
थि। रसिकलाल जीअब रुकने केँ मूड मे नहीं थें। उन्होने
करिश्मा कों अपने सें लग किया औऱ उसकी सारी कि पल्लू कों कंधे सें
नीचे गिरा दिया। पल्लू केँ नीचे गिरते हि करिश्मा कि दो बड़ी बड़ी
चूंची उसके ब्लाउस केँ उपर सें गोलगोल दिखने लगी.उन चूंचियो
कों देखते हि रसिकलाल जीउन पर्र टूटपरे औऱ अपना मुँहउस पऱ
रगड़ने लगे। करिश्मा कि मुँह सें ओह!ओह!अहह! क्याँ कररहे कि
आवाज़े आनेलगी। थोरीदेर केँ बाद रसिकलाल जी नें करिश्मा कि सारी
उतार दि औऱ तब करिश्मा अपने पेटिकोट पहने हि दौड़कर कमरे
कां दरवाजा बंदकर दिया.मगर जब करिश्मा कमरे कि लाइट बुझाना
चाही तौ रसिकलाल जी नें मनाकर दिया औऱ बोले, "नहीं बत्ती
मतबंद करो। पहलेदिन रोशनी मे तुम्हारी बुर चोदने मे बहोत
मजा आएगा." करिश्मा शर्मा कर बोलीं, "ठीक हैं मे बत्ती बंद
नहींकर ती, मगर आप् भि मुझको बिल्कुल नंगीमत कीजिएगा." "अरे
जब थोड़ी देर केँ बाद तुम् मेरा लन्ड अपनी बुर मे पिलवाओगी तब
नंगी होने मे शरम कैसी.चलो इधर मेरेपास आओ, मे अभि
तुमको नंगीकर देता हूं." करिश्मा चुपचाप अपनासर नीचे
किए अपने ससुरजी केँ पासचली आई.जैसे हि करिश्मा नज़दीक आई,
रसिकलाल जी नें उसको पकड़ लिया औऱ उसके ब्लाउस केँ बटन खोलने
लगे.बटन खुलते हि करिश्मा कि बड़ी बड़ीगोल गोल चूंचियाँ उसके
ब्रा केँ उपर सें दिखने लगी। रसिकलाल जीअब अपनाहाथ करिश्मा केँ
पीछे लेँ जाकर करिश्मा कि ब्रा कि हुक भि खोल दि। हुक खुलते हि
करिश्मा कि चूंची बाहर् रसिकलाल जी केँ मुँह केँ सामने झूलने
लगी। रसिकलाल जी जल्दी उन चुन्चियो कों अपने मुँह मे भर लिया
औऱ उनको चूसने लगे। करिश्मा कि चुन्चियो कों चूस्ते चूस्ते उन्होने
करिश्मा कि पेटिकोट कां नाडा खींच दिया औऱ पेटिकोट करिश्मा केँ
पांव सें सरकते हुए करिश्मा केँ पांव केँ पासजा गिरा.अब करिश्मा अपने
ससुरजी केँ सामने सिर्फ़ अपने पॅंटी पहने खड़ी थि। रसिकलाल जी नें
झट सें करिश्मा कि पॅंटी भि उतार दि औऱ करिश्मा बिल्कुल नंगी हौ
गयीँ,। नंगी होते हि करिश्मा नें अपनी बुर अपने हाथों सें ढक
ली औऱ शरमाकर अपने ससुरजी कों कनखियो सें देखने लगी.
रसिकलाल जी नंगी करिश्मा केँ सामने ज़मीन पर्र बैठगये
औऱ करिश्मा कि बुर पऱ अपना मुँहलगा दिया। पहले रसिकलाल जीने
अपनेबहू कि बुर कों खूब सुघा। करिश्मा कि बुर सें निकलती
सौंधी सौंधी खुश्बू रसिकलाल जी केँ नाक मे भर गयीँ,.
वोँ बड़ेचाव सें करिश्मा कि बुर कों सूंघने लगे। थोरीदेर केँ
बाद उन्होने अपनाजीव निकाल कर करिश्मा कि बुर कों चाटना सुरू
कर दिया। जैसे हि उनकीजीव करिश्मा कि बुर मे घुसी, तौ करिश्मा
जोँ कि बिस्तर केँ सहारे खड़ी थि, बिस्तर पऱ अपने चूतर टीकादिए
औऱ अपनेपेर फैलाकर अपनी बुर अपने ससुरजी सें चटवाने लगी.
थोड़ी देर तक करिश्मा कि बुर चाटने केँ बाद रसिकलाल जीने अपनी
जीव करिश्मा कि बुर केँ अंदरडाल दि औऱ अपनीजीव कों घुमा
घुमाकर बुर कों चूसने लगे। अपनी बुर चटाई सें करिश्मा
बहोत गर्म हौ गयीँ, औऱ उसने अपने हाथों सें अपने ससुरजी कां सिर
पकड़कर अपनी बुर मे दबाने लगी औऱ उसकी मुँह सें सि सि कि
आवाज़े भि निकलने लगी.
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अब रसिकलाल जीनेउठ कर करिश्मा कों बिस्तर पर्र पीठ केँ बल लेटा दिया.
जैसे हि करिश्मा बिस्तर पऱ लेटी, रसिकलाल जीझपट कर करिश्मा
पर्र चढ़बैठ गये औऱ अपने दोनो हाथों सें करिश्मा कि चूंचियो
कों पकड़कर मसल्ने लगे। रसिकलाल जी अपने हाथों सें करिश्मा कि
चूंची कों मसलरहे थें औऱ मुँह सें बोलरहे थें, "मुझे
मालूम थां कि तेरी चूंची इतनी मस्त होगी। मे जब पहलीबार तुझको
देखने गय़ा थां तौ मेरा नज़र तेरी चूंची पऱ हि थि औऱ मैने
उसी दिनसोच लिया थां इन चूंचियो पर्र मे एक् नां एक् दिन अवश्य अपना
हाथ रखूँगा औऱ इनको रगड़ रगड़कर दाबुँगा। "हाई!अहह! ओह!एह
आप् क्याँ कह रहें हैं? एक् बाप होकर अपने लड़के केँ लिए लड़की
देखते समय आप् उसकी सिर्फ़ चुन्चिओ कों देखरहे थें.
क्रमशः.
मेरी चूत पसंद है complete - Desi sex story - Kahani ab aur interesting hogi
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