Adultery Nakhara chadhti jawani da (नखरा चढती जवानी दा ) - Desi kamuk kahani – New Episode
कड़ी_68
सतबीर केँ फ्री होने केँ बाद वोँ सुखजीत केँ नंगे जिश्म सें अलग होँ जाता हैं। औऱ सतबीर अपने कपड़े डालकर बाहर् आँ जाता हैं। बाहर् आता देखकर रंधावा सतबीर कि तरफ देखते हुए बोला।
रंधावा- “हाँ भइया, फिन कैसीलगी जट्टी?"
सतबीर- भइयाआग हैं पूरीआग, सच मे बहोत हि ज़्यादा मस्त हैं।
रंधावा अपनी मूछों कों ताव देतेहुए बोला-“चल अब मे भि हाथ सेंककर आता हूं, इसआग मे."
रंधावा अंदरचला जाता हैं, अंदर सुखजीत पूरी नंगी लंबी लेटी होती हैं। सुखजीत कां नंगा जिश्म देखकर रंधावा मस्त हौ जाता हैं। सुखजीत रंधावा कों देखकर हँसती हैं। इस वक्त सुखजीत कि हालत एक् बाजार कि गश्ती जैसी थि, जिसके संगदो बंदे पूरीरात चोदने मे लगेहुए थें। सुखजीत भि अब पूरी खुली होती हैं, वोँ रंधावा केँ सामने नंगी लेटी हुई, जरा सि भि लज्जा नहि करती।
रंधावा अपनी शर्ट केँ बटन खोलता हैं, औऱ अपनी पैंट कों ढीली करके वोँ सुखजीत केँ ऊपर आँ जाता हैं। फिन वोँ उसके होंठों कों चूसने लगता हैं। सुखजीत भि गरमी कि वजह सें उसका पूरासंग देरही होती हैं। सुखजीत कि बुर अबफिन सें अपना पानी निकालने लगती हैं।
रंधावा सुखजीत कि चूचियों पर्र दाँत मारकर बोला-"आज अच्छे सें एहसान उतार अपने पति कि तरक्की कां."
सुखजीत- “आहह-आहह। आss एहसान उतारने केँ लिए तौ आई हूं मे भाईजी। जौ भि आपने करना हैं करलो, यह जट्टी आपके नीचे लेटी हुईँ हैं.” कहकर सुखजीत रंधावा सें लिपट जाती हैं।
रंधावा कां लण्ड भि अब पूरा खड़ा होँ जाता हैं। रंधावा अबबेड केँ किनारे पऱ जाकर खड़ा होँ जाता हैं, औऱ सुखजीत कि दोनों टाँगें अपने कंधों पऱ रख लेता हैं। रंधावा नें हाथ सें सुखजीत केँ चूतड़ों कों पकड़ा हुआ थां,
औऱ दूसरे हाथ सें अपनी पैंट कों उतार देता हैं। पैंट उतारकर वोँ अपना खड़ाहुआ लण्ड बाहर् निकाल लेता हैं।
सुखजीत रंधावा केँ लंबे लण्ड कों देखकर हैरान हौ जाती हैं। क्योंकी उसनेआज सें पहले इतना बड़ा लण्डकभी भि नहि लिया थां। फिन रंधावा सुखजीत कि बुर मे अपना लण्ड रगड़ने लगता हैं, औऱ अचानक हि वोँ अपना पूरा 9” इंच कां लण्ड सुखजीत कि बुर मे उतार देता हैं। सुखजीत केँ मुँह सें हल्की सि चीख निकलती हैं, औऱ वोँ अपने दोनों हाथों सें बेड कि चादर कों कस लेती हैं।
रंधावा अभि भि आरामसे सुखजीत कों चोदरहा होता हैं। पऱ तभी रंधावा सुखजीत कों कसकर पकड़ता हैं, औऱ अपनी पूरी ताकत लगाकर वोँ एक् जोरदार धक्का मारता हैं। जिससे रंधावा कां लण्ड अबकीबार सीधा सुखजीत कि बच्चेदानी पर्र जाकर लगता हैं, जिससे सुखजीत चिल्लाते हुए बोलीं।
सुखजीत- “आहह-आहह। आहह-आहह। हाईमर गई मे."
पर्र रंधावा सुखजीत पर्र जरा भि दया नहि करता, वोँ पूरेजोश सें सुखजीत कि बुर कों चोदने मे लगाहुआ थां। सुखजीत कों भि अब रंधावा केँ लण्ड सें चुदने कां आनंद आँ रहा थां। इसलिये वोँ रंधावा केँ हर धक्के कां जवाब अपनी गाण्ड कों हिलाकर देरही थि। इसीतरह लगभग 20 मिनट लगातार चुदाई केँ बाद अपना लण्ड बाहर् निकाल लेता हैं।
फिन वोँ सुखजीत कां हाथ पकड़कर उसे घसीटकर खड़ाकर देता हैं। सुखजीत इससे पहलेकुछ समझ पाती, वोँ सुखजीत कों दीवार सें लगा देता हैं। सुखजीत कां मुँह दीवार कि साइड होता हैं, औऱ उसके दोनों हाथ भि दीवार सें लगेहुए होते हें।
सुखजीत- भाईजी यह आप् क्याँ कररहे हौ?
रंधावा कुछ नहि बोलता, औऱ अपनीदो उंगलियां सुखजीत कि बुर मे डालकर अपनी उंगलियों कों गीलीकर देता हैं। औऱ फिन सुखजीत केँ चूतरों पर्र एक् जोरदार थप्पड़ मारकर, रंधावा अपनी गीली उंगलियां सुखजीत कि गाण्ड कि छेद पऱ रगड़ने लगता हैं। रंधावा सुखजीत कि गाण्ड केँ छेद कों गीलाकर रहा होता हैं। सुखजीत कों समझते देर नहि लगती, कि अबआगे उसकेसंग क्याँ होने वाला हैं।
कुछपलो मे सुखजीत कि गाण्ड केँ छेद गीला होँ जाता हैं। फिन रंधावा सुखजीत केँ चूतरों कों खोलकर अपने लण्ड कों उसकी गाण्ड केँ छेद पर्र लगाता हैं। इससे सुखजीत एकदम सें चौंक जाती हैं, औऱ वोँ पीछे होने लगती हैं। पऱ रंधावा उसे कसकर पकड़े हुए थें, जिसवजह सें वोँ चाहकर भि हिल नहि पारही थि। अब सुखजीत कि गाण्ड मे रंधावा केँ लण्ड कां टोपाफँस चुका थां।
सुखजीत दर्द सें तड़पते हुए बोलि- “हाईमर गई मे प्लीज़्ज़। भाईजी ऐसा नाँ करो.”
रंधावा थोडा सां लण्ड अंदर डालकर सुखजीत केँ चूतरों पऱ थप्पड़ मारते हुए बोला-“चुप कर बहनचोद कुट्टी साली गश्ती कहीं कि। बेहन कि लौड़ी तुँ बड़ा अपनी गाण्ड हिला-हिलाकर चलती थि नां। अबदेख आज तेरी गाण्ड मे केसे फाड़ता हूं। औऱ रंधावा किसी कों इतनी आसानी सें छोड़ता नहि समझी.”
इतने कहते हि रंधावा अपने लण्ड पर्र पूराजोर डालता हैं, औऱ फिन उसका लण्ड सुखजीत कि टाइट गाण्ड कों चीरता हुआ पूरा अंदरचला जाता हैं।
सुखजीत केँ साँसरुक जाती हैं औऱ वोँ गुस्से मे बोलीं- “हाए भाईजी। मे मर गई उफ्फ.आss निकालो प्लीज़्ज़। प्लीज़्ज़। वर्ना मे इस दर्द सें हि मर जाऊँगी."
सुखजीत घोड़ी बनने कि पूरी कोशिश करती हैं, पऱ रंधावा उसेजरा सां भि हिलने नहि देता। औऱ ऊपर सें वोँ अपना पूरा लण्ड उसकी गाण्ड मे सें निकालकर एक् बारफिन सें बहोत जोर सें धक्का मारता हैं। औऱ उसके जोरदार धक्के सें फिन सें उसका
सका लण्ड सुखजीत कि गाण्ड कों फड़ता हुआ अंदरचला जाता हैं।
सुखजीत कि हालतऐसी होँ जाती हैं, जैसे किसी मछली कों पानी सें निकाल दिया होँ। सुखजीत केँ मुंह सें आवाज़ नहि निकलरही थि, औऱ उसकी आँखों सें आँसूबह रहे थें। पऱ रंधावा पर्र इसबात कां कोईअसर नहि पड़रहा थां। वोँ बिना रुकेहुए पूरी ताकत सें अपना लण्ड सुखजीत कि गाण्ड मे अंदर-बाहर् कररहा थां।
सुखजीत बस बेहोश होने वाली थि। रंधावा लगातार सुखजीत कि गाण्ड कों खड़ी करके चोदेजा रहा थां। लगभग 30 मिनट कि चुदाई केँ बाद रंधावा अपने लण्ड कां सारा पानी सुखजीत कि गाण्ड केँ अंदर हि निकाल देता हैं। रंधावा अब सुखजीत कों छोड़ देता हैं।
सुखजीत एक् बार तोँ नीचे जमीन पऱ गिरने वाली होती हैं। पऱ वोँ अपने आपको संभालते हुएबेड पर्र गिर जाती हैं। सुखजीत कि गाण्ड मे सें रंधावा केँ लण्ड कां पानी निकलरहा थां। फिन रंधावा बाहर् निकल जाता हैं।
सतबीर नें रंधावा कों बाहर् आते देखके बोला- “भइया पूरा एक् घंटा तुँ अंदररहा क्याँ बात हैं?"
रंधावा- भइया तेरीपता हि हैं रंधावा गाण्ड मारने कां शौकीन हैं। आज तक मे बिना गाण्ड मारेरह सका हूं।
सतबीर- हाएजरा मे भि देखकर आऊँ, कैसीफटी पड़ी हुइ हैं गाण्ड साली कि।
सतबीर यह कहकर अंदरचला जाता हैं। सुखजीत बेड पर्र बिनाकोई सुधबुध केँ उल्टी लेटी हुई थि। सुखजीत केँ खड़े चूतर देखकर सतबीर कां लण्ड एक् बारफिन सें खड़ा हौ जाता हैं। सतबीर देर नाँ करतेहुए अपने सारे कपड़े निकालकर अपना लण्ड बाहर् निकालता हैं।
सतबीर सुखजीत केँ ऊपरलेट जाता हैं, औऱ अपना लण्ड उसकी गाण्ड पर्र सेट करके वोँ भि उसकी गाण्ड कों मारने लगता हैं। सुखजीत कों कुछ भि पता नहि होता, कि उसकेसंग अब क्याँ हौ रहा हैं? वोँ वैसे हि बेसुध होकर अपनी गाण्ड कि चुदाई करवारही थि। थोड़ी देरबाद सतबीर अपने लण्ड कां सारा पानी सुखजीत कि कमरऊपर निकल देता हैं।
ऐसे हि सुभह केँ 4:00 बजे तक रंधावा औऱ सतबीर बेहोश हुइ सुखजीत कों खूब अच्छे सें चोदते हें। वोँ कभी उसका मुँह तोँ कभी उसकी बुर, तौ कभी गाण्ड मे लण्ड डालकर सुखजीत कों बहुत जमकर चोदते हें।
4:00 बजे सुखजीत कों होशआता हैं, औऱ उसकी नींद खुलती हैं। वोँ देखती हैं कि वोँ बेड पऱ पूरी नंगी लेटी हुइ थि। उसके दोनों ओर रंधावा औऱ सतबीर नंगे लेटेहुए थें। उसके पूरे जिश्म पऱ लण्ड कां पानी-पानी हौ रखा थां। तभी सुखजीत कि नजर घड़ी पर्र पड़ती हैं। वोँ वक्त देखकर एकदम उठने वाली होती हैं, पर्र उसकीफटी हुईँ गाण्ड कां दर्दउसे उठने नहि देता।
फिन सुखजीत बहुत हिम्मत करके उठती हैं, औऱ वोँ अपने कपड़े ढूँढकर बहोत मुश्किल सें डालती हैं। फिन
सुखजीत सीधा बाहर् जाकर गाड़ी केँ पास जाती हैं, गाड़ी मे वोँ भईया सोयाहुआ होता हैं।
सुखजीत उसे उठाते हुए बोलीं- “ओयेउठ अब."
भईया- क्याँ हैं सोनेदो मुझे।
सुखजीत- “ओ कंजरउठ। मुझेघऱ छोड़कर आँ अभि."
फिन वोँ एकदम सें उठता हैं औऱ सुखजीत कों देखकर हँसते हुए बोला- “बीबीजी काम होँ गय़ा आपका पूरा?"
सुखजीत- तूँ चुपकर, औऱ मुझेघऱ छोड़कर आँ।
फिन वोँ भईया गाड़ी स्टार्ट करता हैं, औऱ सुखजीत गाड़ी मे बैठ जाती हैं। लगभग 30 मिनट मे भईया सुखजीत कों घऱ केँ बाहर् उतार देता हैं। सुखजीत वाहन कां दरवाजा खोलने हि लगती हैं। तभी वोँ भईया सुखजीत कि चूचियों कों मसल देता हैं, औऱ अपने दूसरे हाथ सें बुर औऱ चूतड़ों कों भि मसल देता हैं। सुखजीत पऱ एकदमहुए अचानक हमले सें वोँ विचल जाती हैं। औऱ वोँ एकदम भईया कों धक्का मारकर बोलीं।
jari rahegi
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सुखजीत- “यह.दूर हौ कंजर.” औऱ सुखजीत वाहन सें बाहर् निकल जाती हैं।
सुखजीत अपने चूतरआज कुछ ज़्यादा हि बाहर् निकालकर चलरही थि। क्योंकी उसकी गाण्ड अभि तक बहोत दर्दकर रही थि।
भईयायह देखकर वाहन कां शीशा खोलकर बोला-“वाउ क्याँ बात हैं बीबीजी, गाण्ड मरवा-मरवा कर बाहर् निकललिए आपने तोँ?"
सुखजीत यह सुनकर उसकीतरफ देखकर गुस्से बोलि- “ओ कुतेचल निकलयहा सें.” फिन सुखजीत धीरे-धीरे सें गेट खोलकर घऱ केँ अंदर जाती हैं।
उससेचला भि नहि जारहा थां, वोँ सबको देखती हैं कि सभी वैसे हि सोएहुए थें। फिन वोँ अपनेरूम मे आकर अपने कपड़े चेंज करती हैं। औऱ फिन वोँ बेड पर्र उल्टी लेटकर अपनीरात कि चुदाई केँ बारे मे सोचते हुएसो जाती हैं।
सुभह केँ 8:00 बजे जाते हैं, आजरीत कां एग्जाम होता हैं। इसलिये वोँ समय सें सजधजकर होकर एग्जाम देने केँ लिएघऱ सें निकल जाती हैं। हरपाल भि रेडी होँ जाता हैं। जब वोँ सुखजीत कों ब्रेकफास्ट केँ लिए उठाता हैं। तौ सुखजीत अपनी तबीयत खराब होने कां बहाने लगा देती हैं। औऱ वोँ शीला कों कहकर हरपाल कां ब्रेकफास्ट सजधजकर करवा देती हैं।
सोनू केँ दिमाग़ मे दीप कि भाभी कंवल अभि तक असरकर रही होती हैं। सोनू कालेज केँ बहाने सें दीप केँ घऱ कि ओर निकल जाता हैं। थोड़ी हि देर मे सोनू दि केँ घऱ पहुँच जाता हैं। वहां उसकेघऱ मे पूरी तैयारियां चलरही होती हें। आजदीप केँ घऱ अखंडपाठ रखाहुआ थां। सोनू जाकरदीप केँ मां बापू कों मिलता हैं, वोँ उनसेदीप केँ बारे मे पूछता हैं।
पऱ दीपकुछ सामान लेने केँ लिए बाहर् गय़ा हुआ थां। सोनू बाहर् जाकरबैठ जाता हैं, औऱ दीप केँ आने कां इंतेजार करने लगता हैं। सोनू कि नजर बार-बार ऊपर वालेरूम पऱ जारही थि। जहाँ पऱ कंवल कां रूम होता हैं। सोनू कि आँखें कंवल कों ढूँढ़ रही थि। इतने मे दीप कि माँ सोनू कों बोलती हैं।
माँ - “बेटा यह लाउड स्पीकर कि तारजरा ऊपर लगाकर आँ जा."
सोनूयह सुनकर खुश होँ जाता हैं, क्योंकी ऐसे उसकाकाम आसान हौ गय़ा थां कंवल केँ दर्शन करने कां। सोन्ऊपर जाता हैं, पर्र कंवल केँ रूम कां दरवाजा बंद हौ जाता हैं। पऱ साइड वाली खिड़की खुली होती हैं। जब सोनू अंदर देखता हैं, तोँ कंवल शीशे केँ सामने खड़ी होकर रेडी हौ रही थि।
सोनू कि आँखें कंवल कि मोटी-मोटी चूचियों पऱ जाती हें। उसकी चूचियां बाहर् निकलने वाली होँ रहीथीं। कंवल नें चुन्नी नहि ली हुईँ थि। इसलिये उसकी ब्रा कां डिजाइन भि कमीज केँ ऊपर सें हि नजर आँ रहा थां। सोनू कां लण्डअब झटके मारने लगता हैं। अचानक सें कंवल सोनू कों देख लेती हैं। आँखों सें आँखें टकराती हैं, सोनू मुश्कुराते हुएआँख मार देता हैं। कंवल भि अपने गुलाबी होंठ जौ आज लिपस्टिक सें औऱ भि सेक्सी लगरहे थें, पर्र जीभफेर कर शर्मा जाती हैं। औऱ अपनी चुन्नी लेकर अपना दरवाजा खोलकर वहां सें निकल जाती हैं।
जाती-जाती कंवलजब सीढ़ियों सें नीचेउतर रही होती हैं, तोँ सोनू उसके हिलते चूतरों कों देखकर अपना लण्ड मसलने लगता हैं। कंवल केँ जाने केँ बादसोन छत पर्र लाउड स्पीकर स्लिम कर देता हैं। औऱ तभीदीप घऱ वापिस आँ जाता हैं। दीप सोनू कों देखकर खुश हौ जाता हैं।
-1
दीप- क्याँ बात सोनू, रिंकू कहां हैं?
सोनू-पता नहि दोस्त, मे आज कालेज नहि गय़ा, मे सीधा यहीं पर्र आँ गय़ा।
दीप-चल अच्छी बात हैं अगर आँ गय़ा हैं तौ। अबआज तूँ यहीं पऱ रहियी आज अखंडपाठ हैं। मे तेरेघऱ पऱ बातकर लूँगा।
सोनू किचेन कि खिड़की मे सें दिखती कंवल कों देखकर बोला-"ठीक हैं भइया.”
फिन वोँ दोनों घऱ केँ काम करने लगते हें। सोन कंवल कों देखने कां कोई भि मोका नहि छोड़ता। कंवल भि
सबकी आँखों सें बचतेहुए सोनू केँ संगनैन मटक्का कररही होती हैं।
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कड़ी_69 दूसरी तरफरीत विद्यालय पहुँच जाती हैं, औऱ अपनी क्लास कि लड़कियों सें मिलती हैं। वहींपास मे ज्योति भि अपना मुँह लटकाकर खड़ी हुई थि। रीत अपनेमन मे ज्योति कि हालत देखकर अपनीजीत पर्र गर्व करती हैं। फिनरीत उसकेपास जाकर उससे मिलती हैं।
रीत- “औऱ ज्योति क्याँ हाल हैं, तैयारी हैं फिन एग्जाम कि?"
ज्योति- ठीक हैं बस औऱ तैयारी भि हैं।
इतने मे हरी आँ जाता हैं, ज्योति हरी कि तरफ देखती हैं। पर्र हरी उसकीतरफ देखकर अपना मुंह दूसरी तरफ करकेथूक देता हैं। यह देखकर ज्योति आँखें नीचे करती हैं, पर्र हरीरीत कि तरफ देखकर उसे पानी वाली टंकी कि तरफ इशारा करता हैं। रीत ज्योति केँ संग होने केँ कारणउसे कुछ नहि कहती।
रीतबस हल्की सि स्माइल करती औऱ आँखों सें उसेहाँ कां इशारा कर देती हैं। फिन एग्जाम 10:00 बजे शुरुआत होना थां, औऱ अभि 9:30 हि हुए थें, एग्जाम शुरुआत होने मे अभि वक्त थां। सभी लड़कियां बुक्स निकालकर पढ़रही होती हें। ज्योति भि बुक निकालकर पढ़रही होती हैं।
रीत- मे अभि आती हूं बाथरूम करके।
ज्योति- ठीक हैं।
फिनरीत पानी वाली टंकी कि तरफ निकल जाती हैं। सुभह होने केँ कारणवहा कोई भि नहि होता। रीत जाकर देखती हैं कि हरी वहां खड़ा उसका इंतेजार कररहा थां।
हरीरीत कों आते देखते हि उसे अपनी बाहों मे भर लेता हैं, औऱ रीत कि चूचियां अपने सीने केँ संगदबा देता हैं। आजहरी रीत कों बहुतसमय बाद मिला होता हैं। इसलिये वोँ रीत कों दीवार सें लगाकर उसके होंठ चूसकर बोला।
हरी- “क्याँ हाल हैं मेरीजान केँ?"
रीत कि बाजूहरी केँ गले मे होती हैं औऱ वोँ फिन बोलती हैं- “देखोलो क्याँ हाल हैं मेरे, आपके सामने हि हूं जैसी भि हूं.”
हरी-“बस मेरे सामने हि रह मेरीजान, अब तेरे बिना मेरा सरता नहि.” कहतेहये हरी अपने दोनों हाथरीत कि कसी हुइ चूचियों पर्र लेकर कमीज केँ ऊपर सें हि उसकी चूचियां मसलने लगता हैं। औऱ संग हि उसके होंठों कों चूसने लगता हैं।
रीत भि पूरी गर्म होकर उसकासंग देरही होती हैं। तभी वोँ धक्का देकरहरी कों दीवार सें लगाकर बोलती हैं “मेरा भि तेरे बिना नहि सरता मेरीजान, तभी मैंने तुझेही इस चुडैल सें छूटकारा दिलाया हैं."
हरीरीत केँ चूतरों कों कसकर पकड़कर दबा देता हैं औऱ रीत अपनी एंड़ियां उठा लेती हैं।
हरी बोला- “तूने किससे मुझे छूटकारा दिला दिया हैं मेरीजान?"
रीतहरी कि बाहों मे मचलती हैं औऱ उसके लण्ड कों मसलते हुए उसके होंठों कों चूसकर बोलीं- मैंने तेरी जानबूझ करउसदिन बुलाया थां, ताकी तेरे सामने सारी सचाई आँ सकेउस कुतिया कि."
हरीयह सुनकर हैरान होँ जाता हैं। वोँ सोचता हैं कि रीत नें उसे बचाने केँ लिएयह सभी किया थां। पर्र उसे क्याँ पता थां, कि यहसभी तोँ रीत नें ज्योति सें अपना बदला लेने केँ लिए किया थां।
फिन वोँ दोनों एक् दूसरे कों जमकर चूसते औऱ चूमते हें। इतने मे बेलबज जाती हैं, औऱ एग्जाम शुरुआत होँ जाता हैं। दोनों भागकर एग्जाम देने केँ लिए जाते हें। एग्जाम खतम होने वाला होता हैं, सारे एग्जाम देकरजा चुके
थें।
रीत थोड़ी लेटआई थि, इसलिये क्लास रूम मे एक्-दो लड़कियां औऱ उसकेसंग बैठी हुईँ थि। ज्योति भि एग्जाम देकर अपनेघऱ कि ओर निकल जाती हैं। स्कल सारा खाली होँ जाता हैं। रीतजब क्लास मे सें निकलती हैं तभी एक् क्लासरूम मे सें एक् हाथ बाहर् आता हैं, औऱ रीत कों पकड़कर वोँ क्लास रूम केँ अंदर खींच लेता हैं। रीत सीधी उसके सीने पऱ जाकर लगती हैं, रीतजब उसे देखती हैं तोँ वोँ हरी होता हैं।
रीत-हट पागल। तूने तोँ मुझेडरा हि दिया थां।
हरीरीत केँ दोनों चूचियां मसलते हुए बोला- “क्याँ करूँजान, सारे एग्जाम समय मुझे तोँ केवल तेरा हि खयाल
आँ रहा थां."
रीतहरी केँ हाथों मे हाथ रखतेहुए बोलि- “अह्ह। स्स्सीई। हरी इतना खयाल करना भि ठीक नहि हैं, काम खराब हौ सकता हैं."
हरी-हाई आज तोँ काम खराबहुआ हि पड़ा हैं दोस्त।
हरीरीत केँ होंठों पऱ टूट पड़ता हैं, औऱ बार-बार रीत केँ होंठों कों चूसने लगता हैं। हरी अपने हाथों सें रीत कि चूचियों कों पकड़कर निचोड़ देता हैं। रीत भि समझ जाती हैं, कि आजहरी कुछ करके हि मानेगा। इतने दिनों सें रीत केँ अंदर भि आगमचल रही होती हैं।
रीत अपने होंठहरी केँ होंठों मे सें निकालकर बोलि- “आहह-आहह। हाएकोई बस आँ नां जाए."
हरीजोर सें चूचियां मसलकर बोला-“कोई नहि आता मेरीजान, आज मैंने ज्योति सें बचाने कां एहसान उतारना
रीतसमझ जाती हैं, पऱ आज उसकेदिल मे भि कुछ करने कि आगमची हुई हि, मस्त होकर बोलि- “अच्छा फिनआज चुका हि दे सारे एहसान."
यह कहते हि रीतहरी कि जिप खोलकर अपनाहाथ अंदरडाल देती हैं, औऱ अंडरवेर कों साइड मे करके उसका लण्ड बाहर् निकल लेती हैं। हरी कां लण्ड पूरा खड़ाहुआ होता हैं। गर्म-गर्म लण्ड कों हाथ मे पकड़कर रीत पूरी गर्म हौ जाती हैं, औऱ वोँ लण्ड कों हाथ सें मसलते हुएहरी केँ होंठों कों चूसने लगती हैं।
हरी भि रीत केँ चूतरों कों जोर-शोर सें मसलने लगता हैं। अबरीत इतनी गर्म होँ जाती हैं कि अब उससे औऱ बर्दाश्त नहि होता, वोँ अपने चूतरहरी कि तरफ करके अपने दोनों हाथ बेंच पऱ रखकर, हरी केँ आगे घोड़ी बन जाती हैं।
हरी उसका पल्ला उठाकर साइड मे कर देता हैं, औऱ हाथआगे कों डालकर हरीरीत कि सलवार कां नाड़ा खोल देता हैं। सलवार ढिली हौ जाती हैं औऱ सलवार सीधीरीत केँ पैरों मे गिर जाती हैं। हरीरीत कि पैंटी कों नीचे करके उसके चूतर नंगेकर देता हैं। रीत जैसी सेक्सी लड़की केँ मोटे रसीले गोरे नंगे चूतर कों देखकर हरी केँ मुँह सें उफ्फ। कि आवाज़ निकली, औऱ हरी उसके चूतर ज़ोर-ज़ोर सें मसलता हुआ बोला।
हरी-“हाए रीत। दोस्त तूँ तौ जनन्त हैं शपथ सें."
रीत-आssआss आँ जाफिन करले जन्नत कि सैरआज।
रीत कि उतावलापन देखकर हरी लण्ड कां सुपाड़ा रीत कि बुर पर्र सेट करता हैं, औऱ धक्का मारकर अपना लण्ड उसकी बुर मे सेटकर देता हैं।
रीत- “आहह-आहह। ओये जन्नत मेरी टाइट हैं थोडा धीरे-धीरे कर प्लीज़्ज़."
हरी एक् हल्का सां धक्का मारता हैं औऱ तभीरीत बोलि।
रीत- अह्ह.हाई बसफँस गय़ा।
हरी-हाय। आज तेरी जन्नत कि कस कसकर मे सैर करूँगा।
हरी अगला धक्का मारता हैं औऱ उसका लण्डरीत कि टाइट औऱ गीली बुर कों चीरता हुआ रगड़ खाताहुआ पूरा अंदरचला जाता हैं। रीत कि गीली औऱ गर्म बुर कि रगड़ सें हरी मदहोश होँ जाता हैं। उसके मुँह सें एक् शब्द तक नहि निकलता। रीत भि लण्ड कों महसूस करतेहुए मस्त हौ जाती हैं औऱ अपनी बुर बहोत हि मजे सें देरही होती हैं।
लगभग 15 मिनटउन दोनों कों चुदाई केँ मजे लेतेहुए होँ जाते हें। तभी अचानक हरी कां लण्ड एकदम अकड़ जाता हैं, औऱ वोँ अपना लण्ड बाहर् निकालकर अपने लण्ड कां सारा पानी उसकीकमर पर्र निकल देता हैं, औऱ बोला- “आहह-आहह। मेरीजान रीत तुँ सच मे दोस्त जन्नत हैं."
रीत भि दोआजदो बारचुद चुकी थि, उसकोआज जन्नत कां मज़ा आँ गय़ा थां। वोँ थककर बेंच पऱ लेट जाती हैं, इतने मे उसका मोबाइल रिंग करने लगता हैं। वोँ मोबाइल देखती हैं, तोँ मोबाइल उसके भइया सोनू कां आँ रहा होता हैं। रीत मोबाइल उठाकर बोलीं।
रीत- हेलो।
आगे सें सोनू कि घबराई हुईँ आवाज़ आती हैं- “रीत जल्दघऱ आँ जा, यहा बड़ा पंगा होँ गय़ा हैं."
यह सुनकर रीत भि हैरान हौ जाती हैं औऱ बोलीं- “क्याँ हुआबता मुझे."
सोनू रोतेहुए बोला- "तूँ जल्दघऱ आँ बस.” कहकर वोँ मोबाइल कटकर देता हैं।
रीत फटाफट खड़ी होती हैं औऱ कमर पऱ गिरे लण्ड केँ पानी कों रुमाल सें साफ करके सलवार डालती हैं औऱ घबराई हुइ वहां सें चली जाती हैं। जबरीत घऱआती हैं, तोँ देखती हैं कि घऱ केँ बाहर् बहोत सारी भीड़लगी होती हैं। औऱ वहां पोलिस भि बहोत आई हुईँ होती हैं। रीत थोड़ी आगे जाती हैं औऱ देखती हैं कि हरपाल कों पोलिस पकड़कर लें जारही होती हैं। औऱ संग हि सोनू खड़ाहुआ रोरहा होता हैं।
चारों तरफ हाहाकार मचाहुआ होता हैं, यहसीन देखकर रीत पागल होँ जाती हैं। औऱ भागी-भागी सोनू केँ पास जाती हैं औऱ बोलि।
रीत- सोनू क्याँ, हुआ क्याँ हुआबता मुझे?
सोनू रोतेहुए बोला- “बेहन पिताजी नें माँ कों."
रीत रोती हुइ बोलि- “क्याँ? क्याँ कहरहा हैं तुँ?"
सोनू- बेहन बापू नें माँ कों मार दिया हैं।
रीत- क्याँ?
यह सुनते हि रीत जोर-शोर सें चिल्ला-चिल्लाकर रोने लगती हैं। हरपाल पोलिस कि जीभ मे बैठा बातें कररहा होता हैं सुखजीत कि।
दर्शल बातयह होती हैं कि उसदिन सुखजीत कि चुदाई मे जब सुखजीत बेहोश होँ गई थि। तब सतबीर नें सुखजीत कि नंगी फोटोस लेँ ली थि, औऱ संग हि वीडियो भि बनाली थि। जोँ उसने सुभह होते हि पूरे आफिस मे फैला दि थि। हरपाल केँ चक्कर मे उसकी ट्रांसफर हौ रही थि। इसलिये उसने हरपाल सें बदला लिया थां। हरपाल कि बदनामी पूरे आफिस मे होँ चुकी थि। कोई सुखजीत कों गश्ती औऱ कोई तोँ उसे रंडी कहनेलगा थां। यहबात हरपाल कों बर्दाश्त नहि हुई औऱ उसने दारू पीकरसोई हुई सुखजीत कों घऱआते हि गोलीमार दि।
एक् मर्द कों कभी भि यह बर्दाश्त नहि होता, कि कोई उसकेघऱ कि इज्जत कां मजाक बनाए। पऱ सुखजीत नें रंधावा केँ ऊपर विश्वास करकेयह सभी किया थां। पर्र सतबीर नें इसकागलत फायदा उठा लिया थां। औऱ जिसका नतीजा बहोत हि दर्दनाक निकाला।
हरपाल कों अबजेल होँ गई थि, रीत औऱ सोनू दोनों गाँवचले गये थें। जब 10 सालबाद हरपाल वापिस आया तौ वोँ सोनू औऱ रीत कों लेकर इंडिया सें बाहर् चला गय़ा।
दोस्तों आपको मेरीयह सच्ची घटना कैसीलगी, प्लीज़्ज़। मुझे जरूर बताना।
Adultery Nakhara chadhti jawani da (नखरा चढती जवानी दा ) - Desi kamuk kahani - Next part mein bada twist
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