Beti Bani Sahara – New Episode
Update 48:
सबेरे बापू कि नींद खुली तोँ प्राची जग चुकी थि। उन्होंने महसूस किया कि उनके लिंग मे आज एक् अलग हि सख़्ती थि। पिछले रात शायद महीनों बाद, लिंग कों बिना योनि केँ रहना पड़ा थां। प्राची कां प्रेग्नेंसी सभी केँ लिए खुशिया लाया थां पऱ बापू केँ लिए एक् सजासबन गय़ा थां।
फ्रेश होँ केँ पिताजी कमरे सें बाहर् आए। दादीमा किचेन मे खानां बनारही थि। प्राची कहीदिख नहि रही थि।
पिताजी: मां प्राची कहा हैं?
दादीमा : बेटा वोँ औऱ प्रज्ञा दोनों थोडा सुभह सुभह कि सैर करनेगए हैं। प्राची कों अभि थोडा एक्टिव रहना चाहिए।
बापूइन नियम औऱ कानून सें खीजरहे थें। खैर वोँ गरमचाय पीनेलगे।
बापू : अच्छा, मुझे तौ आदत हि हौ गई थि, जब जगता हूं तौ प्राची जब तक प्राची कों बगल मे सोयाहुआ नाँ देखलु चैन हि नहि मिलता।
दादीमा : ह्म्म्म। तुँ केवल देखता थोड़ी थां, सबेरे सबेरे भि शुरुआत हौ जाते हौ।
बापू थोडा झेपगये, दादीमा वोँ उसदिन कि बातकर रही थि जब वोँ प्राची कों चोदरहे थें औऱ दादीमा गेट पे थि।
बापू : ह्म्म्म। मां अपने तौ मुझ पे इतना पाबन्दी लगा दिया हैं। मे अभि सें नौ महीने तक प्राची सें दूर केसे रहूंगा। हाहाहा.
दादीमा : हाहाहा.अरे इतना तोँ करना हि पड़ेगा अपने बच्चे केँ लिए। देखमै कोई विलेन नहि हु कि तुम् दोनों पति - पत्नि कों दूरकर दूं। तूँ तौ जनता हैं प्राची अभि भि एक् नन्ही गुड़िया सि हैं। वोँ तौ बहु केँ जाने केँ बाद तेरी दुर्दशा देख केँ उससे विवाह करा दिया। तुझेही उस वक़्त कोई चाहिए थां जौ सम्भाल पाये। प्राची नें वोँ किया। उसका तोँ बॉडी भि अभि इतना मैच्योर नहि हुआ हैं जितना मैच्योर एक् २४-२५साल कि लड़की कां होता हैं प्रेग्नेंसी अच्छे सें झेलने केँ लिए। तोँ इसका ध्यान मे रखतेहुए तुझेही भि उसकेलिए इतना तौ करना हि पड़ेगा। उसको तेरी जरूरत हैं। आगेआने वाले महीनों मे तुम्हें भि उसका ख्याल रखना पड़ेगा। यह 9 महीने तोँ प्राची केँ ध्यान रखते रखते हि बीत जाएगा। तूँ टेंशन मत लें बेटा।
पिताजी : ठीक हैं मां। हां मुझे भि यहीबात सतारही थि जब सें आपने कंडोम कां इस्तेमाल नहि करने बोला थां। कि प्राची अगर प्रेग्नेंट हुई तौ उसकीउमर प्रेग्नेंसी केँ लिए थोड़ी कम होगी। आप् न् कहती तोँ शायद प्राची औऱ मैकुछ सालबाद हि बच्चा प्लान करते। खैर जोँ होता हैं, ठीक हैं।
दादीमा : बेटा मुझेगलत मतसमझ। मे बस तुम् दोनों केँ प्रेम कि निशानी कों जल्द सें जल्द देख्ना चाहती थि। एक् बेटे कि मां कां यही अरमान होता हैं कि जब वोँ उसकी विवाह कराए तौ एक् पोता याँ पोती कों अपने हाथों मे खिलाये।
बापू: ह्म्म्म.चलिए 9 महीने बाद तौ आपका अरमान पूरा होँ हि जाएगा.हा हा.
इतने मे दोनों बहने वापस आँ गई। प्राची नें टीशर्ट औऱ लोअर पहनेहुए थें। औऱ प्रज्ञा नें ट्रैक सूट औऱ नीचे टाइट लेगिंग पहनी हुइ थि। लेगिंग एक् दम चुस्त थि जिसमें प्रज्ञा कि पैंटी कां लाइन भि एकदमसाफ दिखरहा थां।
बापू केँ दिल मे एक् अजब सि टिसउठी अपने छोटी बेटी कों देख केँ, ऊपर सें लिंग मे भि थोडा हलचल सां महसूस हुआ उन्हें।
प्रज्ञा नें देख लिया कि बापूउसे बहोत गौर सें देखरहे हैं। वोँ थोडा शर्मा सि गई। औऱ बापू कों टोक दिया।
प्रज्ञा : वाउ बापू आप् जगगये। मैने तौ आपकी प्यारी वाइफ कों मॉर्निंग वॉक भि करा दिया।
बापू: शाबाश, ऐसे हि ख्याल रखना हैं अपनी मम्मी कां।
प्राची पिताजी केँ पासआई : आपको उठाया नहि, आप् गहरी नींद मे लगरहे थें।
बापू:कोई बात नहि। चलोयह अच्छा काम किया तुमने कि वॉक शुरुआत कर दिया हैं, स्वास्थ्य केँ लिएसही होता हैं।
दादीमा : बेटी प्राची, तुँ अब फ्रेश हौ जा औऱ ब्रेकफास्ट कर लें। अब सें ज़्यादा देर भूखे नहि रहना हैं।
प्राची कों अचानक सभी रानी केँ जैसे ख्याल रखनेलगे थें। सभी हि अब उसकेलिए कोई भि काम करने कों रेडी थें।
प्राची : जी दादीमा अभि आती हूं, मुझे 15 मिनट दीजिए।
औऱ प्राची अपने कमरे मे चली गई।
प्रज्ञा : पिताजी मै भि आती हूं थोडा फ्रेश हौ केँ।
पिताजी: ठीक हैं बेटी, जल्द आँ, गरमचाय ठंडी होगी नहि तौ।
प्रज्ञा : जी पिताजी।
वोँ भि अपने कमरे मे जानेलगी। जैसे हि वोँ कमरे मे जाने केँ लिए मूडी, पिताजी केँ नाँ चाहते हुए भि उनकीनज़र प्रज्ञा कों जातेहुए उसका अवलोकन करनेलगा। पिताजी केँ दिल मे अपनी छोटी बेटी केँ लिए एक् अहह सि निकल गई थि। प्रज्ञा नें भि अचानक सें पलट केँ बापू कि ओर देखा औऱ बापू औऱ बेटी कि नज़रेआपस मे मिल गई। प्रज्ञा कों पताचल गय़ा थां कि पिताजी कि नज़रआज कुछअलग सि हैं इनमें। वोँ बस हल्का मुस्कुराते हुए अपने कमरे मे चली गई।
पिताजी नें अपने जज्बातों कों काबू मे किया : अरेअरे, यह क्याँ किया मैने। प्रज्ञा क्याँ सोचरही होगी मेरे बारे मे। उसने मुझे उसकोऐसे घूरते हुए भि देख लिया। धत्, मै भि अपने जज्बात काबू मे नहि रख पाया। लग हि वोँ बहोत अच्छी रही थि वोँ चुस्त कपड़ों मे। ओह, नहि नहि यह ग़लत हौ गय़ा मुझ सें।
पिताजी केँ दिल मे एक् द्वंद्व शुरुआत होँ गय़ा थां। बस एक् रात उन्हें बुर भोगने कों नहि मिला औऱ वोँ बहकने लगे थें। अभि 9 महीने कि बातथीं। आगे उनका जीवन क्याँ मोर लेती हैं यह उन्हें भि नहि पता थां।
Beti Bani Sahara – New Episode
गर्भावस्था कि खुशी केँ संग-संग नियम-कानूनों कां बोझ, बापू कां बेचैनी भरा संघर्ष औऱ परिवार कि नई परिस्थिति बहुत गहरी होतीजा रही हैं। येचरण रोचक तोँ हैं, पर्र थोडा धीमा भि लगरहा हैं जोँ बहुत उचित भि हैं। फिन भि समग्र माहौल अच्छा हैं औऱ आगे कि संभावनाएँ बहोत मजबूत दिखरही हें।
कथा मे भावनात्मक गहराई अच्छे सें बढ़ी हैं। गर्भवती होने कि घोषणा केँ बाद परिवार केँ रिश्तों कि गतिविधियाँ बदल गई हें। दादीमा कि सख्ती, बापू कि बेचैनी, प्राची कां डर औऱ अपराधबोध, सबको बहोत स्वाभाविक ढंग सें दिखाया गय़ा। खासकर प्राची औऱ बापू केँ बीच बेडरूम मे हुइ बातचीत भावुक भि थि औऱ थोड़ी कामुक भि। प्राची कां डॉक्टर केँ पास वाला दृश्य औऱ बाद मे पिताजी कों सभीकुछ बताना, ये हिस्सा बहुत छूने वाला औऱ थोडा दर्दभरा भि लगा। इससे गर्भावस्था कि असलियत अच्छे सें उभरकर आई।
पिताजी कां अंदरूनी द्वंद्व सबसे अधिक सच्चा लगरहा हैं। एक् तरफ उन्हें खुशी हैं कि उनकाबीज फल गय़ा, दूसरी तरफ शारीरिक ख़्वाहिश अभि भि बहोत तेज हैं। मात्र एक् रात बिना संभोग केँ उनका लिंग सख्त हौ रहा हैं औऱ मन अशांत हैं, ये ब्यौरा बहोत मानवीय लगा। दादीमा कां नौ महीने तक परहेज कां रवैया भि यथार्थपूर्ण हैं। वे पोता-पोती जल्द देखने केँ चक्कर मे बेटे-बहू कों काबू मे रखरही हें।
मगरइन सबसेइतर प्रज्ञा कां हिस्सा अब बहुत दिलचस्प हौ गय़ा हैं। बापू कि नजर उसकी चुस्त लेगिंग्स पऱ जानां, आँखें मिलना औऱ बापू कां स्वयं कों रोकने कि कोशिश, ये भविष्य केँ लिए अच्छा बीजबो रही हैं। छोटी बेटी कि ओर बढ़ता आकर्षण अब शुरुआत होँ चुका हैं, जोँ किस्सा कों औऱ जटिल औऱ उत्तेजक बना सकता हैं।
कुल मिलाकर किस्सा अभि भि बहुत चस्पा हैं। पिताजी कां नौ महीने कां ब्रह्मचर्य वाला संघर्ष औऱ उसकेसंग प्रज्ञा कि ओर बढ़ता आकर्षण, ये जोड़ी खतरनाक औऱ मजेदार दोनों हैं। अगरइस तनाव कों बिना जल्दबाजी केँ अच्छे सें बढ़ाया गय़ा तौ आगे बहोत शानदार होने वाली हैं। प्राची केँ संग बिना प्रवेश वाली निकटता याँ प्रज्ञा केँ संग औऱ ज़्यादा बातचीत अगलेभाग मे आए तौ औऱ मज़ा आएगा।
Beti Bani Sahara – New Episode
Update 49:
एक् इंसान कों जिंदगी व्यतीत करने केँ लिए क्याँ चाहिए, जोँ बहोत जरूरी हौ? आपका जवाब होगा, हवा, पानी औऱ खानां। मगर एक् औऱ भि चीज़ हैं जोँ इंसान कों जीने केँ लिएअगर नहि मिला तोँ याँ तोँ वोँ पागल होने लगता हैं याँ स्वयं सें अपने आप् कों संतुष्ट करता हैं, औऱ वोँ हैं सेक्स, जौ कि प्राची केँ केँ प्रेग्नेंट होने केँ बाद बापू केँ लिए दुर्लभ हौ गई थि। वक्त बीतने लगा थां। औऱ दोनों बाप बेटी संयम बनाएहुए करीब 6-7 दिन बिता चुके थें। बापू औऱ बेटी जोँ कि पति पत्नि हैं, वोँ सोते तौ संग मे थें, मगर एक् दूसरे केँ संग एक् खाट पे सो केँ भि एक् दूसरे केँ बहोत दूर हौ गए थें। प्राची कि देखभाल तोँ सभी अच्छे सें कररहे थें। प्रज्ञा भि आजकल अपना सारा खाली वक़्त प्राची केँ संग बिताने लगी थि। पूरादिन उसके कमरे मे बैठना, प्राची कि मालिश कर देना, उसको वक्त वक़्त पर्र फल औऱ पौष्टिक खाने कां ध्यान रखना। कुल मिलाकर प्रज्ञा कां यह निस्वार्थ एहसान प्राची केँ ऊपर बढ़ता हि जारहा थां। प्राची औऱ प्रज्ञा कां नाता हि इतना अनोखा थां। एक् तोँ सगी बहने, फिन एक् मां बेटी कां नाता। दोनों केँ रिश्ते औऱ गहरे होतेजा रहे थें।
एकदम प्राची दोपहर मे दोपहर का खानाकर केँ अपने कमरे मे लेती थि।
दादीमा प्रज्ञा सें : बेटी, प्राची नें अभि खानां खाया हैं, जाजरा उसके पैरों मे मालिश करदे, सबेरे वॉक पे गई थि तौ थकी होगी।
प्रज्ञा आज्ञाकारी शिष्या कि तरह दादीमा सें बोल पड़ी : जी दादीमा मां। ठीक हैं।
दादीमा : औऱ जब उसकी मालिश होँ जाए तौ मेरे कमरे मे आँ जानां, तुम्हे मे मालिश कर दूंगी। प्राची केँ संग तूँ भि तौ सबेरे थक जाती होगी।
प्रज्ञा : अरे दादीमा, मुझे नहि होती इतनी थकान, वैसे भि दिदी कां तौ अलग सिचुएशंस हें नां। वोँ पेट सें हैं तोँ उनको जायदा तकलीफ़ होती होगी।
दादीमा : अरे अभि जायदा तकलीफ़ नहि होगी, क्योंकि अभि तोँ कुछ हफ्ते हि हुए हैं। अभि प्राची कां पेट भि बाहर् नहि आया हैं। फिन भि थक तोँ गई होगी। तुम्हें अपनी दिदी कां ख्याल वैसे हि रखना हैं, जैसे तेरी दिदी तेरा ख्याल रखती हैं जब तुँ बीमार होती हैं।
प्रज्ञा : ओके दादीमा।
दादीमा : देख बेटा, प्राची कच्ची उम्र मे प्रेगनेंट हौ गई हैं, तोँ इसलिये उसका ख्याल हमें जितना होँ सके, रखना होगा। मे जानती हु, तूँ भि तोँ नन्ही सि गुड़िया हि हैं मेरी, पर्र प्राची नन्ही गुड़िया होने केँ संगसंग एक् नन्ही जान कों भि लाने वाली हैं इसघऱ मे।
प्रज्ञा : जी दादीमा, मै समझती हु। मे दिदी कां पूरा ख्याल रखने हि कोशिश कररही हु। अभि जातीहु उनकी हल्की मालिश कर केँ, पऱ बाद मे आऊंगी आपकेपास, आप् सें मुझे मालिश करनी हैं मुझे भि। बचपन मे जब भि खेल केँ आती थि तोँ आपकी मालिश मेरा सारा थकानदूर कर देती थि।
दादीमा : हाहा.अरे ठीक हैं बाबा।
प्रज्ञा फुदकते हुए प्राची केँ कमरे मे जानेलगी। तभी दादीमा बोल पड़ी : अरे, यहतेल कि सीसी तौ लेतीजा, बिनातेल केँ हि मालिश कर देगी क्याँ अपने दिदी कि।
प्राची : ओह सॉरी दादीमा मम्मी। मिस्टेक। हाहाहा।
दादीमा : तूँ एक् दम चुलबुली कि चुलबुली हि रहेगी। चलजाअब नौटंकी बाज़कही कि। हाहा।
प्रज्ञा प्राची केँ कमरे मे दाखिल हुइ। उसने देखा प्राची कमरे केँ बीचों बीचलगे बिस्तर पे चित लेती हुई हैं। औऱ नाँ जानेकिस दुनिया मे कोई हुई थि। उसके चेहरे पे थोड़ी चिंता औऱ असंतुष्टि कां भाव आँ गय़ा थां। उसकीनजर कमरे सें बाहर् कां नज़ारा खिड़कियों सें देखरहे थें। उसकेहाथ उसकी साड़ी केँ अंदर घुसाहुआ थां, औऱ इसतरह सें साड़ी केँ अंदर थां, जैसे उसकाहाथ उसके गुप्तांग पे होँ, जाहिर हैं वोँ दिख तोँ नहि रहा थां कि उसकाहाथ असल नें हैं कहा पे। आँख मे कोईभूख सि होँ, ऐसालग रहा थां।
प्रज्ञा अपने दिदी कों आवाज़ लगाई : मम्मी, इतना सीरियस होँ केँ किससोच मे डूबी हौ आप्।
प्रज्ञा कभी प्राची कों मां कह केँ बुलाती थि, तौ कभी दिदी। दरअसल वोँ दोनों रिश्तों कों बनाए रखना चाहती थि। उसे अपने दिदी मे हि एक् मम्मी मिल गई थि। मगर वोँ अपने दिदी सें अपने रिश्ते कों भि भुलाना चाहती थि। वैसे एक् एकदम उसकेमूड पे थां कि कब उसको प्राची कों मम्मी बुलाना हैं औऱ कब दिदी।
प्राची एकदम सें झटका सां लगा। उसने जल्द सें अपनेहाथ साड़ी सें बाहर् खींच लिया औऱ थोडा उठाने कि कोशिश करनेलगी। प्रज्ञा तब तक बेड केँ पास आँ गई थि।
प्रज्ञा : अरे मम्मी इतना घबरा क्यूं गई। मै हि हुकोई पराया इंसान थोड़ी हैं कि एकदम सें चौक गई आप्।
प्राची, थोडा चकित होने केँ बाद वाली मुस्कुराहट केँ संग : अरे प्रज्ञा, ऐसाकुछ नहि, बस अचानक सें तूँ अंदरआई तौ थोडा चौक गई।
प्रज्ञा : आप् किसीसोच मे डूबी हुई थि मां बताइए नां क्याँ सोचरही थि कि मैने आपको डिस्टर्ब कर दिया ?
प्राची : अरे तौ कितना नौटंकी बाज़ हैं। कुछ नहि बसऐसे हि थोडा., कुछखास नहि, तुँ छोड़यह सभी, आँ बैठ।
प्राची प्रज्ञा कों कुछ भि बताना नहि चाहरही थि। दरअसल बातयह थि कि प्राची कों अबरात मे मिलन नाँ होना सताने लगा थां। जीहाँ, रात कि चूदाई कि आदत मात्र पिताजी कों नहि, प्राची कों भि लग चुकी थि। पिछले ३ महीनों मे, बापू नें उसकेसंग अनगिनत राउंड कि चुदाई कि थि। उससे केवल पिताजी हि नहि, प्राची भि उसकाआदि हौ चुकी थि। पिछले १-२ सप्ताह सें जौ उसे पिताजी कां सख्त लिंग नसीब होनाबंद होँ गय़ा थां, वोँ उसकेलिए भि सजा जैसा हौ गय़ा थां। पिताजी तोँ अपनाबात उसेबता भि देते थें पर्र वोँ अपनीबात पिताजी कों केसे बताए कि उसे भि मनकररहा हैं कि इन नियमों कों तोड़ दियाजाए जौ डॉक्टर ओर दादीमा नें उन दोनों केँ लिएबना दिया थां। उसने देखा कि बापू तौ पुराने खिलाड़ी हैं औऱ अपने आप् कों संभालना जानते थें। पऱ वोँ तौ अभि कच्ची खिलाड़ी थि सेक्स कि। उसे तौ अभि सेक्स करते३ महीने भि नहि हुए हैं। उसकेकाम कां उद्वेग कां कल्पना करना आसान नहि थां। उसको अपने पिताजी कि जिस्म कि खुशबू हररात कों आती थि। यह एक् ऐसी खुश्बू थि जैसे किसी भूखेशेर कों एक् हिरन कि खुशबू आई हैं। यह कैसी परीक्षा हौ रही थि प्राची कि, उसका पति उसकेबगल मे सोता हैं, कोई मनमुटाव भि नहि हुआ हैं, फिन भि उसे अपने पति कां प्रेम नहि मिलपा रहा हैं। वोँ बेचैन रहनेलगी थि। उसके साड़ी मे उसकाहाथ चला जानां एक् संयोग केवल नहि थां। उसकी तड़पती जवानी औऱ काम अग्नि मे जलती मनोदशा उससेऐसा करवारही थि।
प्रज्ञा समझ गई कि मामला "कुछ नहि " वाला नहि हैं। फिन भि दिदी बताना नहि चाहरही हैं।
तभी प्रज्ञा कि नज़र प्राची केँ उसहाथ केँ उँगली पे चली गई जिसे अभि कुछदेर पहले हि प्राची नें अपने साड़ी केँ अंदर घुसाया हुआ थां। प्रज्ञा नें गौर किया कि उंगलियों केँ कुछ गीला गीला सां द्रवलगा हुआ थां औऱ देखने सें लगरहा थां कि यह कि पानी याँ तेल नहि, एकदमगढ़ा सफेदरंग कां द्रव थां। प्रज्ञा नें अनुमान लगाया कि नाँ होँ यह दिदी केँ गूगू सें निकला हुआ पानी हैं। यहउस पानी कों पहचान गई क्योंकि आप् प्रज्ञा कों भि यह पानी आनां स्टार्ट हौ चुका थां जब वोँ थोड़ी काम उतेजना केँ बारे नें सोचती याँ महसूस करती।
प्रज्ञा : मम्मी, वोँ आपके हाथों पे कुछलगा हैं, साफकर लीजिए।
औऱ इतना बोलते हुए उसनेपास हि पड़ाहुआ एक् तौलिया प्राची कि ओर बढ़ा दिया।
प्राची नें अपने हाथों पे गौर किया औऱ मन हि मन शर्मिंदगी सें भर गई : अरे दोस्त, यहकबहुआ। ओह मेरे योनि तोँ बहनाबंद हि नहि कररही। यह मुझे क्याँ हौ गय़ा हैं आजकल, हर वक़्त मेरी योनि कां यहीहाल रहता हैं। रात कों तोँ पूरी पैंटी हि भींग गई थि कल मेरी तौ। हायरे प्रज्ञा नें तोँ सारादेख लिया कि मैनेहाथ कहारखा हुआ थां। ओह गड़बड़ हौ गई। मै इतनी शर्मिंदगी महसूस कररही हु कि मे अब प्रज्ञा कों क्याँ जवाबदूं।
प्राची : ओह, प्रज्ञा, यहकुछ नहि बस थोडा।
वोँ प्राची कों, उसकी उंगली पे लगेरस केँ बारे मे कोई भि एक्सप्लेनशन नहि देपाई। उसनेबस प्रज्ञा केँ हाथ सें तौलिया लिया औऱ अपने उंगलियों पे लगे बुर रस कों पोछने लगी। अगलेकुछ पलो तक दोनों बहनों केँ बीच एक् सन्नाटे कि दीवार बन गई थि। एक् हजारों सवालों वालामौन दोनों केँ तरफ सें थां औऱ यहमौन भि दोनों केँ मन नें हंगामा मचा रहीं थि।
कथाआगे चलती रहेगी।
Beti Bani Sahara - Next part miss mat karna
Relavant source : click here
