Beti Bani Sahara – New Episode
Update 50:
दोनों बहने एक् दूसरे केँ नज़र सें हि आपस मे बातकर लिया। प्राची केँ नज़र मे एक् शर्मिंदगी दिखी, वही प्रज्ञा केँ नज़र मे एक् आश्वासन दिखा कि ठीक हैं दिदी, मै जानती हु कि यह कैसा औऱ कहा कां रस हैं जोँ आपके उंगलियों पे लगा थां। अगलेसमय हि प्रज्ञा बिस्तर पर्र बैठ गई।
प्रज्ञा : दिदी, आपको कैसालग रहा हैं। पिताजी केँ बच्चे कों अपनेपेट मे पालते हुए।
प्राची : मै बहोत खुशकिस्मत महसूस कररही हु प्रज्ञा, ओर थोड़ी सि डर भि लगरहा हैं कि आने वाले वक़्त मे सभी अच्छे सें होगा याँ नहि।
प्रज्ञा : सभीकुछ अच्छा होगा दिदी। आप् कों कोई चिंता नहि करना हैं। आपने हमारे घऱ केँ वंश कों आगे बढ़ाने कां फैसला लिया वोँ दादीमा कों बहोत अच्छा लगा। आपकीजब पिताजी सें विवाह हुईँ थि तौ मुझेपता नहि थां कि आप् इतनी जल्द प्रेग्नेंट होँ जाएगा।
प्राची : हां, अब क्याँ कर सकते हैं बेहन, कुछ चीजें हमारे बस मे नहि होती। दादीमा कां प्रेसर थां कि एक् किलकारी घऱ मे गूंजे। इसी चक्कर मे बापू औऱ मैनेयह फैसला लिया। मगर हमारे पिताजी बहोत अच्छे हैं प्रज्ञा। बहोत ख्याल करते हैं मेरा।
प्रज्ञा : क्याँ खयाल करते हैं ? उनको तोँ हर वक्त आपकेसंग रूम मे रहना हि मनपसंद आँ रहाआज कल, मेरे जीजाजी बनगए हैं औऱ मुझे सें उनकीबात भि नहि हुईँ हैं कितने दिनों सें। आपके पीछे हि लगे रहते थें नां वोँ अब तक। तभी उसका रिजल्ट आपकेपेट मे पलनेलगा हैं। हाहाहा.
प्राची : धत्, एक् नंबर कि शैतान लड़की हैं तु, ऐसी बातों सें मुझे छेड़ती हैं। मम्मी हु मे तेरीअब।
प्रज्ञा : ओके मां जी, आइए आपकी पैरों कि मालिश करदूं, दादीमा कां आदेशहुआ हैं।
प्राची : नहि मुझे नहि करानी अपने छोटी बेहन सें मालिश। तुँ कोई मेरी नौकरानी थोड़ी हैं।
प्रज्ञा : अरे दिदी, आप् मेरी मां भि तोँ हैं। बेटी मम्मी कि सेवा नहि करेगी तौ कौन करेगा। तुम् मुझे अपना बेटी नहि मानती क्याँ ?
प्राची : अरे बाबू, ऐसामत बोल, तुँ मेरी सबसे अच्छी बेटी हैं। आजाकर दे मालिश।
प्रज्ञा : ह्म्म, यह हुईँ नां बात। चलिएलेट जाइए औऱ रिलेक्स करिए आंखेबंद कर केँ। अच्छी सि मालिश कर देतीहु मै।
प्राची नें वैसा हि किया औऱ प्रज्ञा उसके पैरों केँ पासबैठ गई। प्राची केँ पैरों कों अपने गोदी मे डाला, साड़ी कों पैरों सें ऊपर कि ओर सरकाया औऱ हल्का हल्का तेलडाल केँ प्राची केँ गोरे औऱ चिकनी पैरों कों रगड़ने लगी। प्राची अपने आंखेबंद कर चुकी थि औऱ उसे एक् चैन कि अनुभूति होनेलगी।
प्रज्ञा नें मालिश करते करते पूछा: दिदी, पता हैं, विवाह सें पहले आप् मेरी सबसे अच्छी सहेली थि। आपकेसंग हमेशा खेलती थि मै, आपकेसंग खानां, सोना, बाजार जानां। सभीसंग करते थें हम्। विवाह केँ बाद तौ आप् सें बहोत कम हि बात होती थि। मैने तोँ ठीक सें आपकाहाल चल भि नहि लिया थां।
प्राची : अब तौ हमेसंग मे हि समय गुजारना हैं। तुँ मेरी सेवा 9 महीने ऐसी हि करतीरह। औऱ हम् दोनों ऐसे हि मिलते रहेंगे औऱ लंबी गप्पे लड़ाएंगे। देख विवाह केँ बाद मेरा वक्त थोडा पिताजी पे खर्च होनेलगा थां। तूँ तौ जानती हैं बापू कितने डिमांडिंग हैं हरबात कों लेके। वोँ सेक्स.
इतना बोलते बोलते प्राची अचानक हि रुक गई। उसे अचानक एहसास हुआ कि प्रज्ञा उसकी बेहन हि नहि बेटी भि हैं औऱ बेटी केँ संग वोँ अपने औऱ उसके बापू केँ संग बिताए समय कि बात करेगी तौ अच्छा नहि होगा।
प्रज्ञा : दिदी, आप् चुप क्यूं होँ गई ? आप् सें बापू सेक्स डिमांड करते थें, यही नां। दादीमा नें इतना तोँ मुझे समझा हि दिया हैं।
प्राची : ह्म्म्म। अच्छा प्रज्ञा, मुझे तेरे बापू केँ बारे मे तेरेसंग ऐसे बाते नहि करनी चाहिए तोँ इस टॉपिक कों हटाते हैं।
प्रज्ञा : पऱ दिदी मुझेयह तौ जानना हि हैं आपसे कि सच मे पहलीबार बहोत दुखता हैं क्याँ ?
प्राची : पगली, तेरी विवाह करवानी पड़ेगी। मे पिताजी कों बोलती हु एक् लड़का देखे तेरेलिए, आजकल तुम कोहरचीज़ जननी हैं। विवाह केँ बाद तेरा पति तेरीसभी चीज़ बताएगे, उसी सें पूछना।
प्रज्ञा थोडा दुःखी होतेहुए : दिदी यह क्याँ बोलरही हौ, तुम् मुझेइस घऱ सें भगाने केँ प्रयास मे होँ, बापू सें विवाह केँ बाद तोँ आप् आहिस्ता अपनेघऱ मे हि रह गई औऱ मुझे पराये घऱ जाने केँ बातकर रहीहों। मे आप् सभी केँ बिना केसे रहूंगी।
प्रज्ञा थोड़ी रुआंसी सि होँ गई।
प्राची : अरेअरे मेरी बिट्टी, नहि मेराऐसा कोई मतलब नहि थां। मैनेऐसा थोड़ी कहा कि मे तुम्हे इसघऱ सें दौड़ना चाहती हु। मे तौ बस तुझेही विवाह कि बातबता रही थि। देख, मुझे विवाह सें पहलेकुछ भि पता नहि थां यहसभी। फिनपाप सें मेरी विवाह हुई औऱ बापू नें मुझे धीरे-धीरे धीरे-धीरे अबकुछ अच्छे सें बता दिया। तेरा भि पति होगा जौ तुम्हे यहसभी बता देगा। मेरा तौ पाप सें विवाह, उस वक्त कां सिचुएशन, कों संभालने केँ लिएहुआ थां। तुँ तौ जानती हैं घऱ कां माहौल कैसा थां मम्मी केँ जाने केँ बाद, इसलिये मुझेयह फैसला लेनापरे। पऱ तेरी विवाह ऐसी थोड़ी होगी, तेरी विवाह तौ धूमधाम सें होगी, मेरी प्रज्ञा रानी।
ऐसे हि नोक झोंक दोनों बेहन मे बहुतदेर तक होतीरही, औऱ प्राची कि मालिश भि प्रज्ञा करतीरही। प्राची कां मनअब थोडा मादक हौ गय़ा, क्योंकि उसके टांगों औऱ जांघों पे लगातार प्रज्ञा केँ नरम हाथों कि रगड़ सें गर्मी उत्पन्न होनेलगी थि। वोँ धीरे-धीरे धीरे-धीरे एकदम शांत होँ गई औऱ आंखे मूंदे प्रज्ञा केँ हाथों केँ कमाल कां मज़ा लेनेलगी। अब दोनों बहनों कां बातचित बंद हौ चुका थां औऱ प्राची कि चूचियां उसकी गहरी सांसो केँ कारणजोर सें ऊपर नीचे होनेलगी थि। प्राची कां मुंह भि खुलने लगा थां औऱ एक् आधअहह भि निकलरहा थां बीचबीच मे।
प्रज्ञा यहसभी ध्यान सें देखेजा रही थि। उसे अपने दिदी केँ चेहरे कां भाव बदलते दिखने लगा।
दरअसल प्राची सेक्स कि आदि होँ गई थि, औऱ जैसा कि आप् जानते हैं, उसेकई दिनों सें सेक्स मिला नहि थां, तोँ उसे अपनेऊपर काबू रखना मुश्किल होँ रहा थें। ऐसे मे प्रज्ञा कां उसकी अंदरूनी जांघों पे तेल मलाना उसे मदहोश कर गय़ा।
प्रज्ञा चुपचाप अब प्राची कि पैरों कों ऊपर सें नीच तक शख्ती सें रगड़ेजा रही थि। औऱ प्राची कां पारा बढ़ताजा रहा थां। उसकी सांसे तेज़ होतीजा रही थि। प्रज्ञा केँ लिए दिदी कां यहरूप एकदमनया थां। प्रज्ञा केँ हाथों केँ लगने सें प्राची कि साड़ी, ऊपरकमर तक चढ़ गई थि, औऱ प्राची कां पेर पूरा नंगा हौ चुका थां, प्रज्ञा केँ सामने। प्रज्ञा बिनाकुछ बोलेइस नए अनुभव कों देखती जारही थि। जैसे हि प्रज्ञा कां हाथ प्राची केँ घुटनों केँ ऊपर केँ जांघों कों मालिश करनेलगा, प्राची सातमे आसमान मे उड़ने लगी। ऐसालग रहा थां कि प्राची नें अपना कंट्रोल हि खो दिया हैं।
प्रज्ञा मन मे : हेराम, दिदी कों यह क्याँ हौ गय़ा हैं, ऊपर सें दिदी कां जिस्म भि कितना गर्म हैं। दिदी कि आंखें भि बंद होँ गई हैं। क्याँ करूं दादीमा कों बोलूं क्याँ ?
प्रज्ञा केँ लिए दिदी कां यहरूप बिल्कुल नया थां। पहलीबार उसने किसी इंसान कों काम अग्नि नें जलते देखा थां।
प्राची औऱ मदहोश होनेलगी। अनायास हि अब प्राची कि गान्ड मे हरकत होना स्टार्ट हौ गय़ा। वोँ काम उर्जा मे इतना मदहोश औऱ मादक महसूस करनेलगी कि प्रज्ञा कां हाथ लगाना भि उसेअलग मजा देनेलगा।
प्रज्ञा केँ सामने दिदी कि साड़ी कमर तक ऊपरचढ़ गई थि औऱ प्राची कि चुस्त पैंटी मे कैद बुर प्रज्ञा केँ नजरों केँ सामने थां। प्रज्ञा जैसे जैसे मालिश करतीजा रही थि वैसे वैसे प्राची कि पैंटी बुर केँ मुहाने पे गीली होतीजा रही थि।
प्रज्ञा कों शरमआने लगी थि। प्राची कि पैंटी गीली होँ केँ इतनातर हौ गई कि वोँ प्राची केँ चुत मे एकदम सें चिपक गई औऱ उसके योनि कां आकारउभर केँ पैंटी केँ ऊपर सें हि दिखाने लगा।
प्राची नें अब अपनाकमर ऐसे उचकने लगी कि जैसे वोँ किसी लिंग पे बैठीउसे चोदरही हौ। प्रज्ञा कुछबोल नाँ सकी। प्राची इतना बेकाबू होँ गई कि उसने प्रज्ञा कां एक् हाथ अपनेहाथ मे कस केँ पकड़ लिया औऱ उसके हथेली मे अपने हथेली कों भर लिया। प्रज्ञा जब तक सोच हि रही थि कि यह दिदी कों क्याँ हौ रहा हैं उतने मे होँ प्राची झटके खानेलगी औऱ उसकाचुत छलछला केँ पानी छोड़ने लगा। अब योनि सें इतना पानी निकला कि पूरा पैंटी भीगते हुएबेड पे बिछी चादर भि गीली हौ गई हल्की सि।
प्राची कां संयम कां बांध जवाबदे गय़ा थां। वोँ निढाल हौ केँ पड़ गई। प्रज्ञा कि नज़र अभि भि दिदी केँ गीली पैंटी सें झांकते योनि पे हौ टिका थां। प्राची कों २ मिनट तक तौ कोईहोश हि नहि थां कि वोँ हैं कहा, ओर किसके संग। यह कामअग्नि कां नशा नें उसे जैसे अंधाबना दिया औऱ इतना उतेजित केँ दिया कि उसके बुर पे बिना किसीचीज़ कां स्पर्श होतेहुए भि वोँ चरमसुख कों प्राप्त हौ गई।
प्रज्ञा कों लगा कि दिदी सें इस वक़्त बात करनासही नहि होगा। प्राची निढाल आंखे मूंदे पड़ीतेज़ साँसे लेँ रही थि। प्राची नें प्रज्ञा कां हाथअब छोड़ दिया थां।
प्रज्ञा दिदी कां यहहाल देख केँ उसे अकेला छोड़ देने कां फैसला किया औऱ दिदी कों रिलेक्स होने कां टाइम देने कां फैसला लिया।
प्रज्ञा : दिदी, आप् आराम करिए। आपकी तबीयत थोड़ी सही नहि लगरही।
प्राची इस हालत मे भि नहि थि, कि प्रज्ञा कों कुछ जवाब भि देपाए। वोँ बस एक् "हम्ममम" सें प्रज्ञा केँ बातों कां हामीभर दि।
प्रज्ञा प्राची कां साड़ी ठीक कि, औऱ मन मे हजारों प्रश्न लिएबेड सें उठ दरवाजे कि ओर जानेलगी।
उसकेमन मे कई प्रश्न एक् संगचल रहा थां: यह क्याँ हुआ अभि ? दिदी नें ऐसे व्यवहार क्यूं किया ? वोँ दिदी केँ गुगु सें इतना गाढ़ा पानी जैसा क्याँ निकलरहा थां ? क्याँ वोँ दिदी कां चुतरस थां जौ अक्सर मेरे योनि सें सबेरे सबेरे निकल जाता हैं कभीकभी ? दिदी ऐसे अपनेकमर कों क्यूं उछालरही थि ? क्याँ उसे पिताजी कि कमी महसूस हुइ ?
बातयह थि कि बेचारी प्रज्ञा नें आज तक कभी अपने हाथों सें अपनेचुत कों रगड़ केँ मूठ भि नहि मारी थि। उसकेलिए यहसभी एकदमनया थां।
अब इतने सवालों कां जवाब एक् हि व्यक्ति उसेदे सकत थां, वोँ थि प्रज्ञा कि दादीमा, जहाँ वोँ अभि जानेलगी थि मालिश कराने। दादीमा हि अब प्रज्ञा केँ सारे सवालों कां जवाब थि।
प्रज्ञा इन्हीं ख्यालों केँ संग, दादीमा केँ रूम मे अपनी मालिश कराने चल पड़ी।
आगे स्टोरी मे बने रहियेगा औऱ अपनी प्रतिक्रिया कथा केँ ऊपर औऱ नए अपडेट्स पे देते रहियेगा।
Aplog yeh story kin kin sahro say padh rhe h. joo bi padh rhe h , ek comment jarur kariye aur apne sahar kaa naan bi bataiye. Dhanyawaad.
Beti Bani Sahara – New Episode
Update 51:
प्राची उन झटको केँ बादथकी हुई महसूस कररही थि औऱ अब वोँ थोडा सोना चाहती थि। प्रज्ञा नें यहभाप लिया थां कि दिदी कों अब थोडा अकेले रिलेक्स करने केँ लिए छोड़ देना चाहिए। औऱ प्राची प्रज्ञा केँ कमरे सें बाहर् निकल गई। प्रज्ञा केँ मालिश कां कमालयह थां कि प्राची मालिश कराते कराते हि झर गई थि औऱ अब धीरे-धीरे धीरे-धीरे नींद कि आगोश मे खो गई।
प्रज्ञा हाथ मे वोँ तेल कि सीसीलिए दादीमा केँ कमरे मे सोचते हुएजा रही थि : दिदी पता नहि वैसे झटके क्यूं खारही थि ? वोँ तोँ ऐसे अपनाकमर हिलारही थि जैसे किसी घोड़े पे बैठी होँ ? औऱ वोँ गाढ़ा पानी, वोँ तोँ मुझे नहि निकलता हैं सोतेहुए कभीकभी, पऱ दिदी कां तौ बहोत ज़्यादा हि निकल गय़ा ? क्याँ महसूस हुआ होगा दिदी कों उस टाइम? ह्म्म्म.दादीमा सें हि पूछना पड़ेगा अबयहसभी।
प्रज्ञा दादीमा केँ कमरे मे दाखिल हुई। दादीमा अपने कमरे मे एक् ऊन कां गोलालिए कुछ बुनने कि कोशिश कररही थि।
प्रज्ञा : अरे दादीमा, यह क्याँ कररही होँ आप्? यह अभि गर्मी मे ऊन कां क्याँ कररही हौ ?
दादीमा: अरे अभि गर्मी हैं तोँ ठंडी नहि आएगी क्याँ ? देख नहि रही, मै स्वेटर बुनने कि शुरुआत करने कां कोशिश कररही हु।
दादीमा काँटे पे ऊन केँ कुछ फंदों कों बांध चुकी थि।
प्रज्ञा : हाँ, पऱ दादीमा, यह स्वेटर तुम् किसके लिएबुन रही ?
दादीमा : मेरे होने वाले पोते याँ पोती केँ लिए।
प्रज्ञा : अच्छा तौ यह, प्राची दिदी केँ बच्चे केँ लिए हैं ? दादीमा आप् भि नाँ, अभि तौ उस केँ लिए 9 महीने बांकी हैं। आप् अभि सें हि शुरुआत होंगे। हाहाहा.
दादीमा एकदम किसी औऱ दादीमा याँ नानीमा कि तरह हि घऱ मे आने वालीनए बच्चे कां स्विटर बुनरही थि।
दादीमा : ठीक हैं, यह लें छोड़ दिया बुनना।
इतनाबोल केँ दादीमा नें ऊन औऱ काँटे कों बगल मे टेबल पे रख दिया।
दादीमा : औऱ प्राची कि मालिस अच्छे सें केँ दिया नां तुमने ?
प्रज्ञा : जी दादीमा बहोत अच्छे सें कर दिया। वोँ तौ सो भि गई लगरहा।
दादीमा : वाउ, ऐसा क्याँ चमत्कार कर दिया तेरे मालिश नें कि उसको नींद हि आँ गई ?
प्रज्ञा : पता नहि दादीमा, वहीमै आपसेबात करनेआई हूं।
दादीमा: अच्छा आजा मेरेपास मेरी बच्ची। तेरी भि चंपीकर दूंजरा।
प्रज्ञा : हां दादीमा, आपकी चंपी बहोत मजेदार होती हैं।
प्रज्ञा दादीमा केँ पासबैठ गई औऱ दादीमा केँ हाथों मे तेल कि शीशी पकड़ा दिया।
दादीमा नें अपनी अंजुलि मे थोडा तेल गिराया औऱ प्रज्ञा केँ खुले बालों मे तेल रगड़ना शुरुआत कर दिया। प्रज्ञा भि अब एक् चैन कि अनुभूति करनेलगी।
दादीमा : बोल मेरी बच्ची, क्याँ बात करनी थि तुम्हें ?
प्रज्ञा : दादीमा, वोँ मे दिदी कां मालिश कररही थि तौ कुछअलग सां बातहुआ आज।
दादीमा : क्याँ अलग सां हुआ ?
प्रज्ञा : दादीमा, जैसे हि मे दिदी कि मालिश शुरुआत कि नां। तौ वोँ एकदम आंखेबंद किएहुए थि। औऱ एंजॉय कररही थि।
दादीमा : इसमें नया क्याँ हैं ? सभीऐसा हि करते हैं मालिश केँ टाइम।
प्रज्ञा : अरेनया हैं दादीमा। देखोमै दिदी केँ पांव मे मालिश कररही थि औऱ मैने उसका साड़ी ऊपरकर दिया थां ताकि वोँ तेल सें खराब नाँ हौ। जब मे दिदी केँ पूरे टांगों पे मसाजदे रही थि तौ उसका साड़ी मुझेकमर तक उठाना पड़ा। पऱ फिनकुछ अजीबहुआ दादीमा।
दादीमा : अरे तोँ बताएगी क्याँ अजीबहुआ ?
दादीमा अपनेहाथ प्राची केँ सर पे अच्छे सें घुमा घुमाकर मालिश किएजा रही थि।
प्रज्ञा : दादीमा, मैने देखा कि, दिदी कि पैंटी नाँ, वोँ। वहां.सें पूरी गीली होनी शुरुआत होँ गई ?
दादीमा : वहा सें, कहां सें ? खुल केँ बता नां।
प्रज्ञा : अरे दादीमा, दिदी केँ वोँ, गुगु, वोँ च.चु.चुत सें। वोँ थोडा पैंटी गीला होँ गय़ा थां। फिन जैसे जैसेमै उनकी मालिश कररही थि। दिदी गीली औऱ गीली करतीजा रही थि अपने पैंटी मे। औऱ तोँ औऱ वोँ एकदम सें अपनेकमर कों ऊपरउठा केँ नाचने सि लगी औऱ ऐसा करनेलगी जैसे किसी घोड़े पे बैठी हिचकोले खारही होँ।
दादीमा अचंभित होतेहुए : अरेफिन क्याँ हुआ ?
प्रज्ञा : फिनमत पूछो दादीमा। दिदी तोँ एकदम पागलो कि तरहऐसे कमर हिलाने लगी जैसे घोड़ा अब दौड़ने लगा होँ औऱ दिदी कि कमर भि स्पीड मे हिचकोले खानेलगी थि। दिदी कां पुराबदन काँपरहा थां। औऱ तौ औऱ दादीमा, उसकी पैंटी औऱ ज़्यादा सें ज़्यादा गीली होतीचली गई। पता नहि दिदी इतना थरथराने क्यूं लगी थि याँ उसेउस वक़्त क्याँ महसूस होँ रहा थां। वोँ तौ एकदम हि अलग सां कररही थि कुछ। मै मालिश छोड़ी नहि। पऱ अचानक हि दिदी 5-6 तेजतेज झटकेखाई औऱ उनका पैंटी औऱ गीला हौ गय़ा। इतना पानी एकसाथ निकला उनके गुगु सें कि पूरा पैंटी तोँ गीलाहुआ हि, ऊपर सें बेड पे भि गिर गई वोँ पानी। औऱ फिन जैसेकोई तूफ़ान थमने केँ बाद शान्ति होता हैं, दिदी उसीतरह एकदम आंखें मूंदे शांत सि हौ गई।
दादीमा समझ गई कि पूरा मामला क्याँ हैं, औऱ वोँ बोलीं : ओह, अच्छा।
प्रज्ञा : अच्छा क्याँ दादीमा ? यह क्याँ हौ गय़ा थां दिदी कों ?
दादीमा : अरेउस बेचारी कों थोडा कामाग्नि तीव्र हौ गय़ा होगा।
प्रज्ञा कों, दादीमा कां, इतना जटिल शब्दों मे दियेगये जवाबसमझ नहि आया।
प्रज्ञा : कामाग्नि तीव्र मतलब दादीमा ?
दादीमा : मतलब कि उसकामन वोँ, संभोग, करने कां हौ रहा थां। तुम्हारी तरफ भि कभी एक् बेचैनी सि होती होगी नां? जैसे तुम्हें भि कभी नां कभी तोँ होती होगीऐसी बेचैनी। जैसेजब तुँ सबेरे उठाती होगी तोँ तेरे शरीर मे एक् अलग अकड़न सि तौ रहती होगी ?
प्रज्ञा : जी दादीमा ऐसा तोँ होता हैं।
दादीमा : हां, फिन तेरा योनि मे भि थोडा गीला गीला लगता होगा तुम को ?
प्रज्ञा : हां दादीमा, कभीकभी तोँ मुझे अजीब सां झपट्टी सि तोँ महसूस होगी हैं। ओरहां, वहां पे थोडा गीला हौ जाता हैं। पऱ दादीमा, दिदी केँ जैसा नहि होता, उनका तौ केसअलग हि हैं, उनके तौ योनि सें इतना पानी निकला कि उनका पूरा पैंटी खराब हौ गय़ा औऱ फिन उनका गीलापन वहां बेडशीट कों भि थोडा भीगा दिया। वोँ क्याँ थां दादीमा ? ऐसा दिदी नें क्यूं किया ?
दादीमा तब तक प्राची कि चंपीकर चुकी थि। दादीमा नें प्राची कों मालिश करने केँ लिएउसे बोला : प्रज्ञा आजा, अब जरा तेरे टांगों मे भि मालिश करदूं। फिन बताती हूं।
प्रज्ञा नें दादीमा कि हाँ मे हाँ मिलते हैं हुए, उठ केँ दादीमा केँ सामने अपना पांव पसार दिया।
दादीमा : बेटी यह ज़रा अपना घाघरा ऊपर केँ लेँ नहि तोँ गंदे होँ जाएंगे।
प्रज्ञा दादीमा केँ कहे अनुसार वैसा हि किया औऱ दादीमा सें पूछा:हाँ दादीमा, अब बताइए।
too be continued।
Beti Bani Sahara – New Episode
भइया, मुझे आपका लिखने कां अंदाज़ बहोत पसन्द हैं, बहोत बढ़िया। मेरी आपसे एक् गुज़ारिश हैं। मैंने कुछ महीने पहले https://Xforum.com/ पर्र एक् किस्सा लिखी थि, मे चाहता हूं कि आप् उसे अपने शानदार अंदाज़ मे लिखें। क्याँ मे वो कथायहा पोस्ट कर सकता हूं?
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