झिलमिल ओढ़नी – New Episode
15th पन्ना
तारे निकल चुके थें औऱ चाँद अपने शबाब पर्र थां, पऱ भानु कि आँखों मे नींद नहि थि। सुषमा खानां बनारही थि औऱ भानु आरामदायक वस्त्र पहनकर अपने हवेली जैसेघऱ कि बड़ी औऱ खुली सि छत पर्र टहलरहा थां। साम कों उठने केँ बाद दादीमा केँ संग थोड़ी बहोत बातें कि औऱ फिनकमर सीधी करने केँ बहाने छत पऱ आँ गय़ा थां। ठंडीहवा बहरही थि। चुंकि गर्मी कां मौसम जाने वाला थां तौ साम कों थोड़ी ठंडी पड़ने लगती हैं। तभीउसे किसी केँ कदमो कि आहट सुनाई देती हैं।
“तूँ यंहा हैं? औऱ मे निचे ढूंढ़रही थि”सुषमा ऊपरआते हुए भानु केँ पासआती हैं। भानु कि नजर सुषमा केँ चेहरे पर्र पड़ती हैं तौ ध्यान सें देखता हैं कि उसकी मां कां चेहरा चाँद कि रौशनी मे चमकरहा थां।
“कमरअकड़ गयीँ, थि”भानु मुस्कुराते हुए कहता हैं।
“हम्म, खानां खांए लल्ला?”सुषमा बहोत प्रेम सें पूछती हैं। भानु उसकेपास आता हैं औऱ उसके चेहरे कों दोनों हाथो मे भर लेता हैं।
“मे भूल हि गय़ा थां मेरी मां कितनी सुंदर हैं”कहते हुए सुषमा केँ माथे कों चुम लेता हैं। जिसपर सुषमा कां चेहरा खिल उठता हैं।
“हर बेटे कों उसकी मां हसीन हि लगती हैं, अबचल, खानां ठंडा हौ रहा हैं”औऱ दोनों निचेआने लगते हैं। सीढ़ियों पर्र भानु पूछता हैं कि क्याँ उसकी दादीमा नें खानां खा लिया जिसपर सुषमा उनकी खाने कि कठिनाइयों कां जिक्र करती हैं।
“कल उनकेलिए बाजार सें दलिया ला दूंगा”
“ओमकार काका देहात सें ला देते हैं, तूँ चिंता नाँ कर”
डाइनिंग टेबल पर्र खानां जैसेसजा हुआ थां। भानु कों खीर मनपसंद थि तौ वो भि आज उपलब्ध थि। सुषमा भानु कों बैठाती हैं तौ भानु उसकाहाथ पकड़ लेता हैं
“तूँ भि बैठ मां, संग मे खाते हैं”औऱ सुषमा मुस्कुराते हुएबैठ जाती हैं।
“मां, आजछत पऱ हि सोऊंगा मे”भानु बड़ा सां निवाला मुंह मे डालता हुआ बोला।
“तेरा जँहामन करे सोजा, पऱ नींद आँ जाएगी तुम्हारी तरफ, इतनासो तौ लिया.?”कहतेहुए सुषमा हंसपड़ी। एक् अरसेबाद सुषमा केँ चेहरे पऱ यह खुशीआयी थि जिसे भानु भि समझरहा थां। अब वो अपनी मम्मी कों कभी दुःखी नहि होने देगा।
“नींद तौ नहि आएगी मां, पऱ मुझे बहोत सारी बातें करनी हैं तेरे संग”भानु नें एक् निवाला अपनी मम्मी कों खिलाया।
“मुझे भि लल्ला। छत वाले कमरे मे चारपाई रखी हैं, वोँ निकाल लेना” सुषमा भि भानु कों खिलाती हैं। कुछदेर केँ बाद बातें करतेहुए खानां हौ जाता हैं। नौकरानी आकर बर्तन उठाती हैं औऱ कामख़तम करने लगती हैं।
“तूँ चलऊपर, मेराफोन लेजा, मे आई थोड़ीदेर मे”बोलकर सुषमा काम सुलटाने मे व्यस्त हों जाती हैं औऱ भानुछत पऱ आँ जाता हैं। आतेहुए वो सुषमा कां फोन भि लेँ आता हैं। फिन चारपाई निकाल लेता हैं जिसे चारपाई नां कहके महाराजा बिस्तर कहाजा सकता हैं उसके आकार कि वजह सें। ज़्यादा खा लेने कि वजह सें उससे बैठा नहि जारहा थां तौ सोकरफोन चलाने लगा। सबसे पहले गैलरी खोलता हैं तोँ देखता हैं वंहा हजारों फोटोज थि उसकी मां कि पऱ करीब-करीब सब मे उसका एक् प्रकार कां हि पोज़ थां औऱ हर फोटो मे मुस्कुराहट जरूर थि। किसी मे उसका पति संग होता तोँ किसी मे भानु कि दादीमा। उत्सुकतावश हि भानु आखिरी फोटो कि तारीख देखता हैं तौ पाता हैं कि जबसे उसके पिता कां कत्लहुआ थां उसकेबाद सें एक् भि फोटो नहि खींची गयीँ, थि। जाहिर हैं वो दुखो सें घिर गई, थि। इस बारे मे भानु ज़्यादा नहि सोचता। वो गौर करता हैं कि उसकी मम्मी फोटोज मे बहोत सुंदर लगती हैं। उसकेबाद वो फोनबंद करकेलेट जाता हैं औऱ तारों कों देखने लगता हैं।
अपनीजैल कि जीवन केँ बारे मे सोचते हुए वो महसूस करता हैं कि बंदिश मे जीना कितना कठिन होता हैं आजादी केँ जिंदगी सें। अपने जिंदगी केँ कितने लम्हा बर्बाद करदिए थें उसने पऱ क्याँ अब वो उनकी पूर्ति नहि कर सकता? क्याँ वो आज सें अपने जिंदगी कों एक् नए मुकाम पर्र नहि पहुँचा सकता? उसकेपास सबकुछ हैं, बेशुमार दौलत, मां, बेहन औऱ उसकी दादीमा। क्याँ इन सबके अलावा कोईकमी हैं उसके जिंदगी मे?
“क्याँ देखरहा हैं लल्ला?”सुषमा कि आवाज़ सें भानु कि तंद्रा भंग होती हैं। भानु एक् औऱ सरककर उसे बैठने कि स्थान देता हैं।
“कुछ नहि मां, तारों कों देखरहा थां। ऐसा लगता हैं जैसे सदियों बाददेख रहा हूं खुले आसमान कों”सुषमा दूध कां गिलास उसकी औऱ बढ़ाती हैं।
“बेवकूफ़!! ऐसी बातें करता हैं तौ मेरामन टूट जाता हैं”
“यह पीना जरूरी हैं? ”भानुदूध देखकर मुंह बनाता हैं।
“जरूरी हैं। देख केसेसुख गय़ा हैं चेहरा तेरा” सुषमा एक् भारतीय मम्मी कि तरह तुलना करती हैं। भानु हँसते हुएबैठ जाता हैं औऱ गिलास पकड़ लेता हैं।
“मां, मे चाहता हूं अब पिताजी कां काम संभाल लूँ”दूध ख़तम करके गिलास निचे रखतेहुए भानु बोला। यह सुनते हि सुषमा कों थोड़ाडर लगनेलगा।
“नहि! जब तक पुलिस उन मुजरिमो कों पकड़ नाँ लें मे तुम्हे बाहर् नहि जाने दूंगी”सुषमा द्वारा जिक्र करते हि भानु कों जैल कां दृश्य दीखता हैं।
“पुलिस सें मुझेकोई उम्मीद नहि हैं मम्मी, औऱ हम् डरडरकर कब तक जियेंगे”
“मे कुछ नहि जानती, अभि केँ लिए तुम्हें घऱ मे हि रहना होगा, वरना मे बात नहि करुँगी तुझसे”कहते हुए सुषमा दूसरी तरफ मुंहफेर लेती हैं। जिसपर भानु कों हंसी आँ जाती हैं। वो अपनी मम्मी केँ पास सरकता हैं औऱ उसे बांहो मे भर लेता हैं। फिन एक् हाथ सें उसका चेहरा अपनी औऱ करता हैं
“ठीक हैं, तूँ कहती हैं तोँ मान लेता हूं”सुषमा फिरसे मुस्कुराती हैं, “अब खुश?”इसपर सुषमा अपनासर भानु केँ सीने पऱ रखती हैं।
“हम्म, क्याँ करूँ लल्ला? डर लगता हैं तेरी खोने सें”भानु सुषमा केँ बालो कों सेहलाता हैं।
“मे यहीं हूं तेरे पास”अब बात टाले तौ केसे टाले?दिल नहि दुखा सकता भानु अपनी मम्मी कां, पऱ बाहर् तोँ निकलना होगा। करम किये बगैर किसकी गती हुईँ हैं आजतक। संसार चलता रहता हैं औऱ इंसान घिसता रहता हैं। चैन ढूंढ़ लिया थां मम्मी बेटे नें एक् दूसरे केँ संग औऱ मां डररही थि पर्र भानु कों आगे बढ़ना हि होगा। टाइमकम हैं औऱ लक्ष्य बड़ा। क्याँ भानुकर पायेगा?.
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16th पन्ना
‘महजशक कि बिनाह पर्र गिरफ्तार तोँ नहि कर सकतेउसे’ विचारों मे खोये डीएसपी प्रताप अपने दफ़्तर मे बैठे आदिल कि फाइल्स खंगाल रहे थें। केसे सुलझाया जाये आतिफ़ औऱ आदिल कि कड़ियों कों? क्याँ जोधपुर गुंडाराज मे यह पहलीबार हुआ थां? नहि। मुनावर, राजा, कल्लू डॉनआदि कईनाम थें जौ इससे पहलेराज करकेगए थें। फिरभी अधिकतर कां अंत पुलिस कि गोलियों सें हि हुआ थां। अचानक डीएसपी कों कुछयाद आता हैं औऱ वो एक् नंबर डायल करता हैं
“बोलिये डीएसपी साहेब, आज केसेयाद किया? ”दूसरी तरफ सें एक् आवाज़आयी।
“शायद तुम्हे पता हैं कि यंहा क्याँ होँ रहा हैं”प्रताप जानते हैं कि इनफार्मेशन कँहा सें लेनी हैं।
“हमेंहर खबर रहती हैं। शहर मे रोज गोलिबारी, गैंगवार औऱ सेठों कां क़त्ल, पऱ जँहा तक हमेंयाद हैं डीएसपी प्रताप जँहा भि जाते हैं सफाई हौ जाती हैं। लगता हैं काम मे रूचि नहि रही आपकी”होशियार बनतेहुए बोला।
“जयपुर बम ब्लास्ट मामला होँ याँ पेपरलीक, मेनेकभी आराम नहि किया। प्रमोशन ठुकराया हैं लोगों कि सेवा केँ लिए। औऱ जँहा तक मुझेयाद हैं तुम्हे जैल जाने सें इसलिये बचाया थां क्यूंकि तूने पुलिस कां संग दिया थां उन्हें पकड़वाने मे”साहेब कँहाकम थें।
“आप् तौ नाराज होँ गएसर। बताइये, आदिल केँ बारे मे क्याँ जानना हैं आपको? ”आखिर लाइन पऱ आँ हि गय़ा।
“तुम्हे केसेपता मेने आदिल केँ लिए हि फ़ोन किया हैं?” आश्चर्य चकित प्रताप कों विश्वास नाँ हुआ।
“आप् आम खाइये जनाब, पेड़ नां गिनिये, आदिल नें हि मारा हैं उन चारों कों, औऱ उसके भइया आतिफ़ कों उस ठाकुर केँ लडके नें मारा हैं, मुझे यकीन हैं आप् सबूत ढूंढ़ लेंगे”अब यहबात थोड़ा चोंका देने वाली थि प्रताप केँ लिए। आदिल नें हि वोँ 4 क़त्ल कियें हैं इसबात कां पता तोँ प्रताप कों हैं पऱ भानु द्वारा आतिफ़ कों मारने वालीबात जच नहि रही थि।
“कुछ भि बकवास मतकरो, आतिफ़ कि मौतदिल केँ दौरे सें हुईँ हैं, पोस्टमार्टम कि रिपोर्ट यही कहती हैं”
“हाहाहा, क्याँ सर, आप् भि रिपोर्ट पऱ यकीन करेंगे सोचा नहि थां? उस लडके नें अपने बाप कि मौत कां बदला लिया हैं, जैल मे भि हमारे कान हैं, जौ योजना बनी थि वोँ तौ हमें नहि पता, पऱ आखिरी छणो मे क्याँ हुआ हम् जानते हैं, इससे अधिक मे नहि बता सकता, आगे आप् जानो.”औऱ फ़ोनकट जाता हैं। डीएसपी प्रताप कां दिमाग़ घूम जाता हैं। इतनेमोड़ तौ किसी फ़िल्म मे नहि होते जितने यंहा आँ रहें हैं।
“यह भि क्यूं करनासर? मे एक् काम करती हूं, आपकेलिए चूरन, आचारइन सभी केँ प्रमोशन लाती हूं। जब आपको इतना हि डर लगनेलगा हैं इन गुंडों सें तोँ क्यूं नां न्यूज़ रिपोर्टिंग छोड़कर मे ऐसेकाम हि करुं?”राज न्यूज़ कि रिपोर्टर औऱ सीनियर एंकर सुचेता वर्मा गुस्से मे जलरही थि औऱ अपनेबॉस कृष्ण स्वामी कों खरी सुनारही थि। बिना किसी दबाव केँ ईमानदारी सें हर एक् स्टोरी औऱ सुचना जनता तक पहुंचाना वो अपना धर्म मानती हैं औऱ कभीइस काम सें पीछे नहि हटती।
“बात कों समझो बेटा”कई सालों सें कृष्ण केँ लिएकाम करने केँ कारण वो सुचेता कि किसी भि बात कां बुरा नहि मानता औऱ उसे बेटी कि तरह हि मानता हैं। “मे डर नहि रहा, पऱ बिना पूरीबात जाने हम् इसतरह किसी कों भि कढघरे मे खड़ा नहि कर सकते। तुम् प्रूफ लाओ, औऱ मैइसे ब्रेकिंग न्यूज़ बनाने कि इज़ाज़त दे दूंगा”
काफ़ीदेर सें सुचेता कृष्ण कों मनाने कि कोशिश कररही थि पर्र अबउसे मैदान मे उतरना हि होगा। वो जल्द हि अपने दफ़्तर मे जाती हैं औऱ एक् डायरी निकालती हैं जिसमे उसकेहर काम कां फ्रेमवर्क रहता हैं। 27 साल कि सुचेता कों न्यूज़ कि दुनिया मे 4 साल होँ गए हैं औऱ इन 4 सालों मे अपनी मेहनत केँ दम पऱ इस मुकाम पऱ पहुंची हैं। उसकी ब्रेकिंग न्यूज़ सें भरी हुइ यह डायरी इसबात कां सबूत हैं। जोधपुर केँ क़त्ले आम कि पहेली कों सुलझाने मे वो जीजान सें लगी हैं पर्र अभि तक निराशा हि हाथआयी थि। अचानक उसेयाद आता हैं कि ठाकुर रामकिशन कां बेटा जैल सें बाहर् आँ चूका हैं। उससेबात करने मे कोई हर्ज नहि होना चाहिए। क्यूं नाँ एक् मुलाक़ात कर हि ली जाये। बिजली कि फुर्ती सें वो दफ़्तर सें बाहर् निकलती हैं
“मे पूछ सकता हूं अब कँहाजा रही हों?”मीनी गोल्फ खेलते हुए उसकेबॉस कृष्ण नें पूछा।
“प्रूफ लाने। ”सुचेता इतना हि बोलीं औऱ गायब हौ गई,।
“सर, आप् इसे रोकते क्यूं नहि? ”कृष्ण केँ पासखड़े एक् चापलूस नें कहा। कृष्ण नें उसकीतरफ ध्यान सें देखा
“तुम् सुचेता सें पहले सें होँ नां यंहा? आजतक कितने स्टिंग कियें हैं तुमने? शायद एक् भि नहि। वोँ कम सें कम सच्चाई तक पहुंचना तोँ चाहती हैं”दोटूक जवाब कृष्ण कि आदत थि।
सुषमा कों घंटी सुनाई देती हैं तोँ वो गेट पर्र आती हैं औऱ दरवाजा खोलती हैं। सामने एक् नवयुवती खड़ी थि, चेहरे पऱ नूर थां औऱ आँखों पऱ चस्मा लगाहुआ थां। आज सें पहलेउसे कभी नहि देखा। नाँ तौ सुषमा कों समाचारों मे कोई दिलचस्पी थि औऱ नाँ भानु केँ जैल जाने केँ बाद वो किसी सें ज़्यादा मिलती थि। वो सुचेता कों पहचानने कि कोशिश करती हैं।
“नमस्कार आंटी, मे राज न्यूज़ सें सुचेता वर्मा”सुचेता सुषमा कों अपनाआई कार्ड दिखाती हैं। न्यूज़ कां नाम सुनते हि सुषमा कां चेहरा सफ़ेद हौ गय़ा थां। वो इतनी भोली थि कि उससेयह सभीसहन नहि होता थां।
“देखो बेटा, हम् पर्र पहले हि बहोत कुछबीत रही हैं। ऊपर सें तुम् मीडिया वाले। हमेंइस बारे मे कोईबात नहि करनी”सुषमा डरनेलगी थि अब किसी भि अनजान शख्स सें चाहे वो सड़क चलताकोई होँ याँ मीडिया सें हि सही। वो गेटबंद करने हि वाली होती हैं कि सुचेता उसेरोक लेती हैं
“जिन्होंने आपकेपती कों मारा हैं वे आजादघूम रहें हैं, क्यूंकि उन्हें पता हैं सभी उनसे डरते हैं। पऱ मे नहि डरती। सच जानकर रहुँगी। इस गुंडाराज मे नां जाने कितने परिवार उजड़गए हैं आंटी। अगर आपने हि संग नां दिया तौ औऱ भि उजड़ेंगे। ”सुचेता कि बातसही थि औऱ सुषमा केँ मन कों छू गई, थि। उसकी आँखों मे पानी आँ गय़ा थां औऱ हाथ वंहीरुक गए थें। सुचेता उसके कंधे पऱ हाथ रखती हैं
“मेरा मकसद आपकादिल दुखाना नहि थां। ”
“अंदर आँ जाओ बेटा। ”
सुचेता कों सोफे पर्र बैठाकर सुषमा उसकेलिए पानी लाती हैं, औऱ सामने बैठ जाती हैं
“मे समाचार नहि देखती, तुम् क्याँ काम करतीहों वहां?”सुषमा भोलेपन सें पूछती हैं तौ सुचेता केँ चेहरे पऱ मुस्कुराहट आँ जाती हैं
“मेराकाम बससच जानना हैं आंटी। फिन उसेसभी केँ सामने रखती हूं, वैसे रिपोर्टर औऱ एंकर हूं। जँहा जैसी जरूरत हैं वैसी हि बन जाती हूं ”सुचेता कां यह अंदाज सुषमा कों बहोत भाता हैं। उसने सुचेता सें प्यारी लड़की आजतक नहि देखी थि।
“बहोत नेककाम करती हौ बेटा, पूछो, क्याँ जानना हैं तुम्हे?”
“नहि आंटी, मे आपसेकुछ भि पूछकर आपकादिल नहि दुखाना चाहती, मुझे आपके बेटे सें बात करनी हैं”भानु कां जिक्र आते हि सुषमा कों फिरसे डर लगता हैं।
“वोँ 5 सालजैल मे रहकेआया हैं, उसे यंहा केँ बारे मे कुछ नहि पता, तुम् जोँ जानना चाहती हों मे बताऊगी”मनुष्य मन कों अच्छी तरहपढ़ लेने वाली सुचेता कों सुषमा केँ भोलेपन पर्र बहोत दयाआती हैं। उसकाये कोमल स्वभाव उसकेकाम केँ आड़े भि आता हैं कभीकभी पर्र इस बारे मे वो कुछ नहि कर सकती। तभी सीढ़ियों सें किसी केँ निचे उतरने कि आहट सुनाई देती हैं औऱ दोनों कि नजरउस तरफ जाती हैं।
“कौनआया हैं मां?”भानु सीढ़ियों सें हि पूछता हैं औऱ फिन उनकीतरफ आता हैं।
“मेने तुम्हारी तरफकहा थां नां निचेमत आनां”सुषमा भानु कों आंखे दिखाती हैं जिसका उसपरकोई खासअसर नहि होता। सुचेता आगे होकर भानु कि औऱ अपनाहाथ बढ़ाती हैं
“जी मे सुचेता वर्मा फ्रॉम राज न्यूज़”भानु संकोच वश उससेहाथ मिलाता हैं। “देखिये, मे यंहाकुछ सवालों केँ जवाब जानने आयी हूं, यहकाम हैं मेरा”सुचेता नें अटपटी स्थिति कों भंगूर करने केँ लिएकहा।
“कृपा मां कों इस विषय सें दूर रखिये, हम् अकेले मे बातकर सकते हैं”सुनते हि सुषमा वहां सें चली जाती हैं।
“जानकर खुशी हुईँ कि आप् मां बेटे एक् दूसरे कां कितना ख्याल रखते हैं”सुचेता फिरसे बैठ जाती हैं औऱ भानु सुषमा कि स्थान पऱ बैठ जाता हैं।
“मेरा ख्याल हैं कि आप् जौ जानना चाहती हैं वोँ पूछे”भानु नें थोड़ाअड़ब होकरकहा पऱ सुचेता कों फर्क नहि पड़ा। वो बस मुस्कुराती हैं औऱ अपनी डायरी औऱ पेन निकालती हैं
“क्याँ जैल सें आने केँ बाद आपको किसी प्रकार कि कोई धमकी मिली हैं?”अजीब प्रश्न थां पर्र भानु जैसे सजधजकर थां
“मुझेअब डर नहि लगता धमकियों सें”जवाब प्रश्न सें भि अधिक अजीब थां। भानु लगातार सुचेता कां चेहरा देखरहा थां जैसेपलक झपकाना भूल गय़ा हौ।
“यह मेरे प्रश्न कां जवाब नहि हैं”माहौल मे तन्मयता नहि थि। आखिर भानु स्वास छोड़ता हैं
“नहि, नां मुझेकोई धमकी मिली, नां हि किसी नें मुझसे इसतरह कि कोईबात कि”ऐसा लगरहा थां जैसेउसे कोई दिलचस्पी नहि थि इस पूछताछ मे। इसकेसंग हि वो सावधान थां कि कंही उसके मुंह सें जैल मे हुई घटना कां कोई जिक्र नाँ होँ जाये।
“जैल मे आपकेसंग हिस्ट्री सीटर आतिफ़ भि थां जिसने मंडोर मे आपके पिता औऱ बाकी जागीरदारों पर्र पहले भि कई हमले करवाए थें, क्याँ उसनेकभी आपसेकुछ कहा?”
“आपको पुलिस मे होना चाहिए थां। हम्म। नहि, ऐसाकुछ नहि हुआ थां”इस बार सुचेता भानु कि औऱ देखती हैं क्यूंकि उसे उम्मीद नहि थि कि भानुयह जवाब देगा। इतने टाइम तक वोँ दोनों एक् हि जैल मे थें औऱ कभीबात नां हुईँ होँ, ऐसा केसे हौ सकता हैं?
“क्याँ आप् मानते हैं कि आतिफ़ गैंग नें हि आपके पिता कि हत्या कि हैं?”अब सामने कि लड़ाई थि। लॉबी मे जहा सोफेरखे हुए थें उनके विपरीत दिशा मे हि सुषमा कां रूम थां, जिसके गेट केँ पीछे छुपकर सुषमा सारी बातें सुनरही थि। भानु कां इसतरह सुचेता केँ चेहरे कों लगातार देख्ना उसे थोड़ा अजीबलग रहा थां।
“कह नहि सकता। उम्मीद हैं पुलिस पतालगा लेगी”भानु द्वारा इसतरह केँ जवाब देना सुचेता कों आश्चर्य मे डालरहे थें। ऐसालग रहा थां जैसे भानु नें किस प्रश्न कां क्याँ जवाब देना हैं इसका अभ्यास कररखा होँ। वो हर जवाब कों अपनी डायरी मे लिखरही थि। एक् केँ बाद एक् उसने सवालों कि झड़ीलगा दि थि परन्तु भानु सें उसेकुछ पता नहि चला। उसे एहसास हुआ कि उसका यंहा आनां व्यर्थ रहा थां परन्तु हरतरह कि कोशिश करना नियम थां उसका, चाहेमन वांछित परिणाम मिले याँ नां मिले। जब तक सवालों कां सिलसिला चला सुषमा भि चुपके चुपके सभी सुनती रही, फिन जबउसे एहसास हुआ कि अब भानुइस तरफदेख सकता हैं तौ बेड पऱ आकरबैठ गयीँ,। औऱ आखिर विराम लग हि गय़ा प्रश्नों पऱ। सुचेता केँ चेहरे पऱ संतुष्टि नहि दिखरही थि। उसने एक् पेज पऱ अपने नंबर लिखें
“मेरेकाम नें मुझे इतना सीखा दिया हैं कि जबकोई झूठ बोले तौ मुझेपता चल जाता हैं। पर्र आंटी कि खातिर मे आपको अधिक परेशान नहि करुँगी, अगर आपकामन करे मुझेकुछ बताने कों तौ यह मेरा नंबर हैं”सुचेता बिनाकुछ औऱ बोले वहां सें चल पड़ती हैं औऱ भानुउस पेज कों पकडे बहकाहुआ सां वंहाखड़ा रह जाता हैं.
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Bhaiya अब apki story की bhumika sabko samajh mai aa chuki so please अब story aage badhao ya phir ap isko incest par na likhte isko crime thriller par likhte क्या angle देना chahte hu ap kahani ko abi tak samjh nahii paya ho जब dekho तब har update mai bus vahi maar kaat gundai action thriller drama bus incest par कुछ likh hi nahii rahe hu
झिलमिल ओढ़नी - Next part miss mat karna
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