झिलमिल ओढ़नी – New Episode
21st पन्ना
“बोल भोसड़ी केँ, वरना तेरी पत्नि औऱ बेटी कों नंगा करके बाजार मे दौड़ाऊंगा”आदिल केँ सर पऱ खून सवार थां। ईश्वर जानेकिस कदर उसकेपास खबरआयी कि आतिफ़मरा नहि, उसको मारा गय़ा हैं। जिस पहरेदार नें भानु कों आतिफ़ कों मारने कां सामान दिया थां उसे आदिल नें उठवा लिया थां।
“भइया भइया भइया। मुझे इतना हि पता हैं, मेराकाम थां उसे वोँ बैग देना”वो कांस्टेबल गिड़गिड़ा रहा थां जिसे सुनकर आदिल उसपर पिस्तौल तानता हैं औऱ 6 केँ 6 राउंड खालीकर देता हैं।
“उस ठाकुर केँ लड़के नें मारा हैं मेरे भइया कों बहनचोद। ”आदिल बहोत गुस्से मे थां। आदिल कां खास ज़ुबैर कमरे मे प्रवेश करता हैं तोँ देखता हैं कि वंहा पहले सें 6-7 व्यक्ति थें, आदिल केँ जिस्म पर्र खूनसना हुआ थां औऱ पास मे उस कांस्टेबल कि लाशपड़ी हुइ थि।
“आपकाशक सही हैं। भइया कां क़त्ल मुबीर नें करवाया हैं। औऱ उस लड़के सें सेखु मिला थां गली नंबर 4 कि एक् बिल्डिंग मे, वोँ किले केँ पीछे वाली”ज़ुबैर कहता हैं तोँ आदिल अपनी पिस्तौल कां चैम्बर दोबारा भरने लगता हैं।
“खुदाशपथ उस मुबीर औऱ सेखु कों कुत्ते कि मौत मारूंगा”आदिल चिल्लाता हैं औऱ दोबारा उस कांस्टेबल कि लाश पऱ फायरिंग करता हैं।
“औऱ वोँ लड़का भइया?”ज़ुबैर पूछता हैं।
“उसे जिन्दा लाओ यंहा”आदिल ज़ुबैर केँ पासआता हैं, “कौनकौन हैं उसके परिवार मे?”
“उसकी मां, दादीमा औऱ एक् बेहन हैं जौ ससुराल रहती हैं अपने”इस बात पऱ आदिलजोर सें हँसता हैं फिन कहता हैं
“फिन तौ औऱ आसान होगा, वोँ हि जरिया बनेगा बहनचोद मुबीर कि मौत कां”
“नहि भइया, अगर इस टाइमऐसा कुछ किया तौ उन्हें पतालग जायेगा कि वोँ 4 खून हमने हि कियें हैं”
“कोई परवाह नहि, अपने भइया कि मौत कां बदला लेना हैं मुझे”ज़ुबैर कों पताचल गय़ा थां कि आदिल केँ सर पऱ खून सवार हैं। पर्र वो कुछ नहि कर सकता।
“पता कर क्याँ रूटीन हैं उस लोंडे कां, फिन अच्छा मौका देखकर बिना ज़्यादा हंगामा मचाये उठा लेना उसे”आखिर अकल सें काम लेता हैं आदिल। इस काम कों लोगों केँ सामने नहि कियाजा सकता क्योंकि आदिल केँ हर एक् व्यक्ति कों जोधपुर कि जनता जानती हैं।
“जी भइया”औऱ ज़ुबैर तेजी सें बाहर् आता हैं, अपनीजेब सें फोन निकालता हैं औऱ किसी कों फ़ोन मिलाता हैं
“केसे हौ ज़ुबैर मियां?”
“वोँ छोड़, उस ठाकुर रामकिशन केँ लड़के कां डेली रूटीन पताकर, क्याँ खाता हैं, कब हगता हैं औऱ कँहा जाता हैं”
“होँ जायेगा भइया”औऱ ज़ुबैर फ़ोनकाट देता हैं। इस किस्सा मे हररोज एक् नयामोड़ आँ रहा थां औऱ सबकुछ इतनी तीव्रता सें होँ रहा थां जिसकी कोई सीमा नहि। एक् तरफ मुबीर भानु कों मारना चाहता थां ताकि आतिफ़ कि हत्या कां अंतिम सबूत भि मिटाया जासके तौ दूसरी तरफ आदिल कों पतालग चूका थां कि उसका भइया हार्ट अटैक सें नहि मरा थां बल्कि मारा गय़ा थां एक् संगीन योजना केँ तहत, वंही डीएसपी प्रताप धीरे-धीरे धीरे-धीरे हर गुथी सुलझा रहे थें तोँ एक् तरफ सुचेता पर्र हमला हौ चूका थां। मंडोर मे बहोत हलचलमची हुईँ थि औऱ सेठ गिरिराज जैसे नामचीन व्यापारी मंडोर कों छोड़कर जारहे थें।
आदिल सें खतराअब इसलिये बढ़ गय़ा थां क्योंकि उसकेसर पर्र बदले कां भुत सवार होँ चूका थां औऱ ये इसलिये भि खतरे कि घंटी थि क्यूंकि आदिल अपने भइया आतिफ़ कि तरह ईमान सें नहि लदा थां। वो किसी भि हद तक जायेगा। फुल प्रूफ प्लान होने केँ बावजूद आतिफ़ कि हत्या कां राज सामने आँ रहा थां जिसमे किसकी गलती हैं यह कहना थोड़ा मुश्किल हैं। वंही मुबीर भानु कां घऱ सें निकलने कां इंतज़ार कररहा थां। अपनाडर बढ़ाने केँ लिए मुबीर भानु कों तब मारना चाहता थां जब वो लोगों केँ बीच मे होँ औऱ उन्हें पताचले कि मुबीर नें ठाकुर रामकिशन केँ बेटे कों मारा हैं। मुबीर जानता थां कि आतिफ़ केँ मरने केँ बाद आदिल कमज़ोर होँ चूका हैं ओर भानु सें पीछा छुड़वाने केँ बादउसे रोकने वालाकोई नहि होगा। इस प्रकार भानु चारों तरफ सें घिर चूका थां।
इधर भानुजब अपने कमरे मे होता तौ उसे अपने बाप कि यादआने लगतीफिर भी नफरत भि थि उसे अपने बाप सें पऱ इतनी भि नहि। जबतक आदिल कों नहि मारा जाता, उसका बदला अधूरा थां। अगर एक् पंक्ति मे समझा जाये तौ आदिल भानु कों मारकर अपने भइया कां बदला लेना चाहता हैं औऱ भानु आदिल कों मारकर अपने बाप कां। अपनी मम्मी केँ सामने भानु आंसू नहि बहा सकता पर्र अकेले मे दुख जरूर होता हैं। स्वयं कों संभाल कर भानु अपना चेहरा धोता हैं औऱ बाहर् आता हैं तोँ देखता हैं सुषमा वंहा नहि थि। वो दादीमा सें पूछता हैं तौ वो बताती हैं कि अपने कमरे मे हैं। भानु कमरे मे प्रवेश करता हैं तौ सुषमा बेड पऱ लेटकर छत कों घूरेजा रही थि, ऐसालग रहा थां जैसे किसी गहरी चिंता मे होँ। भानु उसकेपास जाके बैठता हैं तोँ सुषमा झटके सें अपने ख्यालो सें बाहर् आती हैं
“मेरी मम्मी दुःखी लगरही हैं”
सुषमा उठकर हेडबोर्ड सें पीठ लगाकर बैठ जाती हैं परन्तु कुछ बोलती नहि औऱ अपनी कलाई मे बाकीबची एक् केवल चूड़ी कों इधरउधर करने लगती हैं जिससे भानु कों एहसास होता हैं कि वो सच मे दुःखी हैं। वो सुषमा केँ पास सरकता हैं औऱ गाल पर्र हाथ रखता हैं। सुषमा उसकी आँखों मे देखती हैं औऱ फिनबोल पड़ती हैं
“तुम्हारी तरफपता हैं मेरी विवाह केँ वक़्त उम्र क्याँ थि?”सुषमा भानु सें पूछती हैं जिसका उत्तर उसने हि कईबार दिया थां भानु कों
“हम्म.16 साल”भानु अपनी मां कां रोमरोम जानता थां इसलिये उसेपता थां कि उसकी मां उससेकुछ साझा करनाचाह रही हैं ऐसीबात पूछके
“तेरे पिताजी उससमय 22 साल केँ थें। एक् सालबाद तूँ हुआ औऱ 3 सालबाद राणो हौ गयीँ, ”हर समय जैसे अभि भि ताज़ा होँ सुषमा केँ दिमाग़ मे
“हम्म”भानु पलक भि नहि झपकारहा थां।
“तेरी बेहन केँ होते हि तेरे पिताजी मे एक् बदलाव आया जोँ हमेसा केँ लिए उनकेसंग रहा, वोँ थां पेसो सें प्रेम”, सुषमा आंहे भरती हैं, “नोटों कि एक् गड्डी वे अपने सिरहाने रखकर सोते थें, रात कों 11 बजेघऱ आते औऱ सुभह 7 बजे निकल जाते। मेने सोचाकाम कां दबाव होगा, जौ थां भि पऱ इतना। ”, पल जैसेठहर गय़ा थां औऱ भानुअब बिना बोलेसुन रहा थां, “1 साल बिता, फिन 5, फिन 10, मुझेआदत होँ गयीँ, थि फिन उनकेइस स्वभाव कि क्यूंकि मेरेपास तूँ औऱ राणो थि फिन तूँ मुझसे दूरचला गय़ा औऱ तेरी बेहन कि भि विवाह हौ गई, ”इसबार सुषमा कि आवाज़ बिलकुल धीमी होँ गयीँ, थि, “अबजब वोँ नहि रहें तौ फिरसे तुँ मेरेपास हैं, मगरकल तूँ उनकाकाम संभाल लेगा”अब भानु कों एहसास होता हैं कि बात क्याँ हैं औऱ कितनी गंभीर हैं, “इसकाम नें मेरा सबकुछ छीन लिया”सुषमा कि आँखों मे अश्रु नहि थें, थां तौ बस गुस्स अपनी क़िस्मत पऱ, “धीरे-धीरे धीरे-धीरे तुँ भि उनके जैसाबन जायेगा, हैं तोँ उनका हि खून”सुषमा कि गर्दन झुकी हुई थि क्यूंकि उसेपता थां ऐसाकभी नहि होगा इसलिये भानु सें नजरें नहि मिलारही थि पऱ अपनारोष जतारही थि। भानु केँ मन मे अपनी मम्मी केँ लिए अथाह प्यार उमड़पड़ा। उसने सुषमा केँ कंधेपकड़ करउसे अपने सीने सें लगा लिया। सुषमा भि बिनाकुछ बोले अपना मुंह उसकी बांहो मे छुपा लेती हैं।
“आज मे तुम्हें एक् वचन देता हूं। मेरेलिए काम तुझसे पहलेकभी नहि होगा। मेरी मां हमेसा प्राथमिकता रहेगी मेरी”, फिन भानु सुषमा कां चेहरा हाथों मे थामता हैं औऱ उसकी आँखों मे देखता हैं, “अगर तुम कोकभी लगे कि मे कुछ अधिक हि व्यस्त रहनेलगा हूं तौ एक् थप्पड़ मारकर यादकरा देना मुझे”, सुषमा शांतलग रही थि भानु कि बात सुनकर परन्तु बोलकुछ नहि रही थि, “मे हरदिन काम नहि करने वाला, नाँ हि पेसो कां लालच हैं मुझे, पऱ बना बनाया कारोबार उजड़ जायेगा अगरउसे नहि संभाला गय़ा”
“मे यह नहि कह रहीं कि कारोबार मत संभाल, बसडर लगता हैं”इस बात पऱ भानु मुस्कुराता हैं औऱ कहता हैं
“तुँ जीवन हैं मेरी, मुझे मेरी मम्मी सें बढ़करकुछ प्यारा नहि लगता, अब यंहा दुःखी होकर नहि बैठना, मे नहि चाहता मेरे दफ़्तर जाने केँ पहले तेरा मुंह लटका रहे”भानु कि बात मानकर सुषमा उसकेसंग बाहर् आँ जाती हैं। दोपहर कों घऱ कां कोईखास काम नहि होता तौ सुषमा कों सिलाई करना अच्छा लगता हैं। भानुउसे सिलाई मशीन पऱ बैठाकर किचन सें गरमचाय बना लाता हैं। पास हि दादीमा कि चारपाई थि। कपड़े सिलते सिलते वो अपनी सासू माँ केँ संग बातें करती रहती थि। तीनोजने गरमचाय पिने लगते हें.
जनाब क्याँ करेंसमझ नहि आता। जितना वक़्त मिल पाता हैं उसमे इतना हि लिख पाता हूं। बाकी मे कोशिश कररहा हूं बड़ा update देने कि
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22nd पन्ना
ज़ुबैर नें जिस व्यक्ति कों भानु पऱ नजर रखने केँ लिएकहा, वो उसी वक़्त सें काम पऱ लग गय़ा। दूसरी तरफ पर्वत सिंह भि लगातार ध्यान रखरहा थां कि भानु केँ घऱ पर्र अधिकलोग मिलने नां आँ पाए, फिर भीबीच बीच मे एक् आध आदमी आँ भि जाता थां। अपने मामाजी सें भानुफ़ोन पऱ लगातार संपर्क मे रहता थां। पर्वत सिंह कि खास हिदायत थि भानु कों कि किसी भि इंसान पऱ शक हौ तोँ जल्दी उसे बताये, बिना सुषमा कों पताचले। पर्वत सिंह नें उसे अपनेलिए एक् फोन खरीदने कि भि सलाह दि। सुभह सुषमा कों मनाने केँ बाद भानु नें पूरादिन घऱ पऱ रखे एक् लैपटॉप पर्र गुजारा, जिसका प्रयोग रामकिशन कभीकभी कर लेता थां, फिरभी भानु कों भि उसका प्रयोग उतना नहि आता थां पर्र उसकी खासियत थि कि वो कोई भि चीज बहोत जल्द सीखता थां।
भानु केँ जैल जाने केँ पीछे भि उसकीयही उत्सुकता रही थि। अपने बाप सें नफरत केँ चलते वो स्वयं कां साम्राज्य खड़ा करना चाहता थां वोँ भि तुरंत अति तुरंत। नकली मार्कशीट बनाने सें शुरुआत हुआ उसकासफर नकली स्टाम्प बनाने तक आया हि थां जब उसकोपकड़ लिया गय़ा, जिसमे उसके खिलाफ किसी ऊँचे ओहदे केँ सरकारी कर्मचारी कों बुरीतरह पीटने केँ सबूत भि थें।
आज पूरादिन इंटरनेट पर्र बिताकर राजस्थान केँ अमल केँ काले कारोबार कों भानु अच्छी तरहसमझ गय़ा थां। फिरभी सूक्ष्म कड़िया तोँ तभी खंगाली जा सकती हैं ज़ब आप् खुदइस धंधे मे उतरजाओ। इन सबकेबीच उसके दिमाग़ मे अपनी मम्मी कों लेकर भि चिंता थि। वो नहि चाहता थां कि सुषमा सारादिन इनसभी दुविधाओं मे गुजारे। क्यूं नाँ राणो कों कुछदिन बुला लिया जाये? सोचते हि भानु केँ चेहरे पऱ मुस्कुराहट आती हैं। अगर उसकी बेहन आँ जाती हैं तोँ सुषमा कां मनलगा रहेगा क्यूंकि दादीमा अधिकतर वक़्त सोकर गुजारती हैं।
“रामराम लाडो”भानु अपनी बेहन कों मोबाइल करता हैं, वो उसे प्रेम सें लाडो हि बुलाता हैं।
“रामराम भैया”दबी दबी सि आवाज़ मे राणो कहती हैं, जिससे भानु थोड़ा असहज हौ जाता हैं। वो जानता हैं उसका जीजा उसकी बेहन कों तंग करता हैं इसलिये बात नहि छेड़ना चाहता।
“केसी हैं तूँ? नमन केसा हैं?”
“मे ठीक हूं औऱ नमन भि ठीक हैं। आप् केसे हें?”
“मे भि ठीक हूं। क्याँ कररही हैं?”
“कुछखास नहि भैया। यह विद्यालय सें आया हैं थोड़ीदेर पहले तोँ इसका होमवर्क करवारही थि”
“हम्म.”
“क्याँ हुआ? मम्मी, दादीमा ठीक हैं नाँ?”
“देख, मे तुझसे झूठ नहि बोलने वाला। दादीमा कां तौ तुम्हें पता हि हैं। भूलने कि बीमारी बढ़ गयीँ, हैं। पऱ मम्मी बहोत दुःखी रहती हैं, इसलिये मे सोचरहा थां कि तूँ कुछदिन यंहा आँ जाती तोँ अच्छा होता”
“फिन वहीबात। यह आप् लोगों नें क्याँ रटलगा रखी हैं। मेने मां सें कहा थां मे नहि आँ सकती। मुझे मेरा परिवार भि देख्ना हैं। अब आप् भि कहने लगे”राणो द्वारा इसतरह बेरुखी सें बात करना भानु कों बहोत अजीबलगा। उसनेआज सें पहले अपनी बेहन कों इसतरह कां बर्ताव करतेकभी नहि देखा थां। उसका माथाखनक रहा थां।
“तूँ ऐसेबात क्यूं कररही हैं?”
“जब आप् लोगों कों बातसमझ नहि आँ रही तौ केसेबात करुं? इनकेआने कां वक्त हौ गय़ा हैं। बाद मे बात करती हूं”औऱ मोबाइल कट जाता हैं। यह क्याँ थां? भानुसर खुजाता हुआ सोचने लगता हैं। उसे एहसास होता हैं कि जरूरकोई नाँ कोई समस्या थि जोँ राणो कों इसतरह बात करने पे मजबूर कररही हैं। अब क्याँ किया जाये?जब कोई औऱ मार्ग नहि सुझा तौ भानु नें सोचाअब उसे हि कुछ करना होगा अपनी मम्मी केँ लिए। बहोत दिमाग़ खपाने केँ बाद एक् विचार आता हैं कि क्यूं नां आज बाहर् सें खानां मंगवाया जाये क्यूंकि बाहर् जाने कों सुषमा कभी राजी नहि होगी। भानु निचेआता हैं औऱ ओमकार कों आवाज़ देता हैं। सारीबात समझाकर भानु फिरसे अपने कमरे मे आँ जाता हैं। कुछदेर वक़्त बिताने केँ बाद वोँ खिड़की सें देखता हैं कि सूरज डूबने वाला हैं। कविता आँ गयीँ, थि औऱ सुषमा खानां बनाने कि तैयारी कररही थि जब भानुउसे रोक लेता हैं। वो सुषमा कों अपनी योजना बता देता हैं जिससे उसे बहोत खुशी होती हैं। ओमकार भानु द्वारा बताया गय़ा सारा सामान लें आता हैं जिसमे आइसक्रीम भि होती हैं क्यूंकि सुषमा कों आइसक्रीम बहोत मनपसंद थि।
रात कों मम्मी बेटे नें संग मे खानां खाया जिससे सुषमा कां मन भि बहल गय़ा। वो आखिरख़ुश थि कि उसके बारे मे सोचने वालाकोई तौ हैं इस दुनिया मे। सोने सें पहले उसने अपने मामाजी सें बात करने केँ बारे मे सोचा
“रामराम मामू”
“राम राम बेटा, केसा हैं?”
“ठीक हूं मामू, आपकोकुछ बताना थां”
“हाँबोल”
“कल मे पिताजी कां दफ़्तर जॉइन करने वाला हूं”यह बात पर्वत सिंह कों पता नहि थि, जिससे उसको आश्चर्य होता हैं।
“यह क्याँ कहरहा हैं? दिमाग़ तोँ ठीक हैं? किसने कहा तुझेही ऐसा करने कों”साफ थां वो भानु कों खतरे सें बाहर् रखना चाहता हैं।
“कहा तौ चंद्रभान अंकल नें थां, पर्र मे स्वयं भि सोचरहा थां इस बारे मे”
“नहि, अभि तोँ बिलकुल नहि”
“मेने पूछने केँ लिए नहि बल्कि बताने केँ लिए मोबाइल किया हैं आपको”
“जब तूने फैसला कर हि लिया हैं तौ मुझे क्याँ बताना, तेरी जोँ मर्जी हौ कर”पर्वत सिंह नें नाराजगी जाहिर कि।
“अगर आप् हि नाराज होँ जाएंगे तोँ मेरा क्याँ होगा?”
“बात नाराजगी कि नहि हैं भानु। सगा भइया नां होने पऱ भि बाई सां नें मुझेसगे सें भि बढ़कर माना हैं हमेसा, जीजाजी नें मेरी जीवन कों खुशहाल कर दिया, अब जब वोँ नहि रहे तोँ यह मेरा कर्तव्य हैं कि मुझसे तुम् लोगों कों सुरक्षित रखने केँ लिए जौ कियाजा सके मे करुं। जरा सोच, क्याँ तुँ पूरीतरह सुरक्षित हैं बाहर्?”
“आपकीबात जायज हैं, पर्र मेने फैसला कर लिया हैं मामू, अब नहि बदलने वाला, बस इतना बताइये आप् मेरेसंग हैं याँ नहि?”
“केसीबात कररहा हैं मेरेशेर। मे मरतेदम तक तेरेसंग हूं, पऱ शपथ दुर्गा कि, कुछ बातें तुम को माननी पड़ेगी मेरी”
“बताइये”
“बिल्डिंग केँ बाहर् सिक्योरिटी बढ़ानी पड़ेगी, जरूरत पड़े तौ 2 पुलिस कांस्टेबल कां इंतज़ाम मे कर दूंगा”
“ठीक हैं, मंजूर”
“हम्म, कितने बजे जायेगा?”
“पिताजी कि तरह मेरासमय निश्चित नहि होगा पऱ कल केँ लिए 10 बजे”
“ठीक हैं, उम्मीद हैं तूँ स्वयं कों नियंत्रित रखेगा, नां पुराने यार, नाँ पुरानी आदतें, वरनाराह वही हैं”
“ठीक हैं मामू, कोशिश करुँगा”
बात तोँ होँ गई, थि पऱ भानु कों नींद नहि आँ सकी। कल कि सम्भावनाओं नें उसके दिमाग़ कों व्यस्त रखा। भानु लगातार विचारों मे गुम थां, इतनीबड़ी सम्पति हैं, इतना रुपया हैं औऱ इतने सम्बन्ध हैं, क्याँ वो यहसभी संभाल पायेगा? स्वयं पऱ पूरा भरोसा हैं भानु कों, पर्र अनुभव कि कमीखल रही हैं। जैसे तैसे स्वयं कों शांत किया औऱ देररात कों थोड़ी बहोत नींद लेँ पाया। नाँ तोँ सुभहउसे जगाना पड़ा नाँ हि किसी अलार्म कि जरूरत पड़ी, वो 4:30 बजे वापिस उठ गय़ा। मुंह धोया औऱ नित्यक्रम सें निपट लिया। जैल मे बनी दिनचर्या मे सुभह सुभह दांतो कों साफ करना भि शामिल थां तोँ उन्हें भि करलिए। वक़्त देखा तोँ 4:50 होँ गए थें, सुषमा 5 बजेउठ जाती थि, भानु नें सोचा क्यूं नाँ आज अपनी मां कों अपनेहाथ सें बनीगरम चाय पिलाई जाये।
2 कपगरम चाय बनाकर वो सुषमा केँ कमरे मे पहुँचता हैं, सुषमा बिना चुनरी केँ सुकून कि नींदसोइ हुईँ थि। एक् पेर सीधा थां औऱ एक् घुटने सें मुड़ाहुआ। घाघरा घुटनो तक पहुंच चूका थां तथाकमर नंगी थि, ऐसालग रहा थां जैसेरति खुदसोइ हुइ हैं। गहरी नाभि औऱ दूधिया पेट कि रंगत पागलकर देने केँ लिए काफ़ी थि। चेहरे पऱ चैन औऱ बाल पूरीरात सोने पऱ भि एकदमसही स्थिति मे थें। भानुबेड केँ पासपड़ी स्टूल पर्र गरमचाय रखता हैं औऱ सुषमा कि कमर केँ पासबैठ जाता हैं फिरभी उसका ध्यान सुषमा केँ वस्त्रो पऱ नहि गय़ा थां जैसे प्रकृति कि सुंदरता मे उसकाकोई मौह हि नां हौ जोँ कि गलतबात हैं क्यूंकि इतनी खूबसूरत काया तोँ ऋषियों कि तपस्या भि भंगकर दे।
उससेकुछ बोला नहि जाता औऱ अपनी प्यारी मां केँ चेहरे कों देखने लग जाता हैं जैसे उसकी नींद मे खलल नाँ डालना चाहता हौ। सालों सें एक् टाइम पर्र उठने केँ कारण सुषमा केँ जिस्म मे हलचल होती हैं औऱ धीरे-धीरे सें वो अपनी आँखे खोलती हैं तौ सामने अपने लाडले, अपने भानु कों स्वयं कों निहारता हुआ पाती हैं, जल्दी हि होंठ दरकिनार होकर सुन्दर मुस्कुराहट कां रूप लें लेते हैं। अपनी बांहे फैलाकर वो भानु कों आमंत्रित करती हैं औऱ भानु भि स्वचालित सां समा जाता हैं सुषमा मे। फिनबेड पऱ सीधा होकर अपनी मम्मी सें पूर्णतः चिपक जाता हैं तथा सुषमा उसकासर अपनी छाती पर्र रख लेती हैं औऱ वापिस आँखेबंद कर लेती हैं जैसेआज उसका उठने कां मन हि नां हौ। भानु कों महसूस होता हैं कि आज उसकेसर केँ निचे कां जगह किसी भि तकिये कि कोमलता कों मातदे सकता हैं
“मम्मी गरमचाय। ”अपने हाथों सें अपनी मम्मी कि गोलगोल कमर कब्जे मे करताहुआ भानु कहता हैं जिससे सुषमा वापिस जागृत होती हैं औऱ उनिंदा हालत मे भानु कां सर सेहलाती हैं।
“इतनी जल्दउठ भि गय़ा?”सुषमा कां मन कहता हैं कि काशरोज सुभहइसी तरह उसका लाडला उसकी बांहो मे होँ। नींद मे वोँ थि पर्र सर भानु कां थपेड़रही थि।
“हम्म, सोचा मेरी प्यारी मां कों आज मे गरमचाय पिलाऊं”सुनते हि सुषमा आँखे खोलती हैं औऱ भानु कां चेहरा हाथों मे लेकरगाल पर्र चूमती हैं। भानु कां आधा जिस्म सुषमा केँ ऊपरचढ़ा हुआ थां औऱ जाँघ सें जाँघघिस रही थि। कोई इंसान जब नींद सें जागता हैं तोँ उनिंदा हालत मे थोड़ा हिलडुल रहा होता हैं, वही स्थिति सुषमा कि थि। अपनी मां कि चुम्मियों केँ जवाब मे भानु भि सुषमा केँ गाल पऱ 2 3 चुम्मी कर लेता हैं
“गरमचाय ठंडी हौ रही हैं मां”भानु मुस्कुराता हुआ कहता हैं तौ सुषमा भि मुस्कुरा पड़ती हैं, औऱ दोनों बैठ जाते हैं तथा सुषमा हेड बोर्ड सें टेकलगा लेती हैं। भानुकप उठाकर देता हैं औऱ दोनों गरमचाय कि चुस्कीयाँ लेने लगते हें.
आज update नहि आएगी दोस्तों, थोड़ाकाम आँ गय़ा हैं तोँ कृपा इंतज़ार नाँ करें। बहोत सारा प्रेम
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नमस्कार सब कों! मे आपका mani, आज मेरेफोन मे कुछ प्रॉब्लम हौ गयीँ, थि तौ मेनेउसे रिसेट किया, इसलिये xforum id लॉगआउट होँ गयीँ,। अब मुझे नाँ तौ password याद आँ रहा हैं, नां हि reset link email पर्र पहुंच रही हैं, spam folder भि चेककर लिया। समझ मे नहि आँ रहा क्याँ करू?अगर कोई सहायता कर सकता हैं तोँ जरूर बताइयेगा, वरनायह स्टोरी बीच मे हि रह जाएगी जौ मे नहि चाहता
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