झिलमिल ओढ़नी – New Episode
19th पन्ना
वीरान गालियों कों देखकर लगता हि नहि कि यह जोधपुर कि रात हैं। घने अँधेरे मे शहर कों देखने पऱ पता चलता हैं कि भानु केँ घऱ कां एरिया अभि तक पूरीतरह शहर मे मिला नहि हैं। कभी जिले कां एक् बड़ा गाँवहुआ करता थां हासिमगढ़, पर्र धीरे-धीरे धीरे-धीरे शहर मे मिलता गय़ा औऱ अब निगम नें इसे कॉलोनी घोषित कर दिया थां। थोड़ी थोड़ीदेर मे कुत्तों केँ भोंकने कि आवाज़ केँ अलावा एक् दो राहगीर गुजरते अन्यथा सन्नाटा हि फैलाहुआ थां।
रात केँ करीब 1 बजरहे थें। टुन्न होकरसोइ सुषमा कां गलाथार कि तरहसूख गय़ा थां। पता नहि किस प्रकार सें बनाई गयीँ, हैं यह शराब, नाँ पियो तोँ तन्हा औऱ पियो तौ प्यास। आखिर आँखेखुल हि गई, उसकी। ऐसा लगरहा थां कि अगर थोड़ीदेर औऱ पानी नाँ पिया तोँ प्राण पखेरू उड़ जायेंगे। नशा अभि भि हावी थां इसलिये मुश्किल सें स्वयं कों संभालते हुएबेड सें उठती हैं औऱ किचन कि औऱ चल पड़ती हैं। रात ठंडी थि पऱ पानीगरम नहि पियाजा सकता इसलिये फ्रिज सें बोतल निकालती हैं औऱ पूरी खालीकर देती हैं। वापिस भरने कां कौन सोचेजब खड़ा हि नां रहाजा रहा हौ।
पानी पीकर सुषमा अपने कक्ष कों चलती हैं कि अचानक भानु कां ख्याल मस्तिष्क मे प्रवेश कर जाता हैं। जौ घटनाये उसके परिवार केँ संग होँ रही थि वेवजह बन गई, थि कि एक् बार अपने बेटे कों देख लेवे दोबारा नींद कि आगोश मे जाने सें पहले। डर, चिंता औऱ भानु केँ लिए अथाह प्यार नें थोड़ी ऊर्जा कां संचार कर दिया उसकेतन शरीर मे। एक् केँ बाद एक् सीढ़ी चढ़तेहुए वो आखिर भानु केँ कमरे केँ सामने पहुँच जाती हैं। जल्द सें दरवाजा खोलकर रौशनी करती हैं पऱ देखती हैं कि भानु वंहा नहि हैं। सुषमा कां हृदय अधिकतम गति सें धढकने लगता हैं औऱ सांसे तेज हौ जाती हैं। अचानक विचार आता हैं कि वो कंहीऊपर हि तोँ नहि सो गय़ा? चलके देखा जाये औऱ चल भि पड़ी अपने लाडले कि तलाश मे। उसी ऊर्जा सें वो छत पऱ पहुँचती हैं तोँ भानु कों खुलीछत पऱ उस महाराजा चारपाई पर्र सोतेहुए पाती हैं।
हृदय कि लय थोड़ी संतुलित हौ जाती हैं, सांसे टिकने लगती हैं औऱ नशा जौ अभि अभि उतर हि गय़ा थां वापिस आने लगता हैं। सामने सोया थां उसका लल्ला, उसका लाडला, उसका भानु, जौ कि ठण्ड मे सोने केँ कारण सिमट गय़ा थां अपने मे तथा अर्धनिद्रा केँ आसन कों प्राप्त कर लिया थां। सुषमा उसकेपास पहुँचती हैं, अपनी नजरें नीची करके उसके सुन्दर मुखड़े कों देखती हैं, कितना प्यारा लगता हैं उसका लल्ला सोतेहुए। घुटनो केँ बल, चारपाई केँ किनारे, भानु केँ चेहरे केँ पास बैठती हैं औऱ सर पर्र हाथ फेरते हुए पहले माथा चूमती हैं फिनकमी महसूस होने केँ कारणगाल पर्र भि एक् चुम्मी लें हि लेती हैं। सुषमा कों बहोत प्रेम आता हैं अपने लल्ला पऱ औऱ यंही सोने कां फैसला करती हैं। चारपाई बड़ी थि इसलिये दोनों धीरे-धीरे सो सकते थें, छोटी होती तौ यह नां होँ पाता। नां भानु कों चर्बी चढ़ी हुईँ थि नां हि सुषमा अधिक मोटी थि, पर्र जँहा भानु मांस केँ लोथड़ो सें भराहुआ दानव थां उसी प्रकार सुषमा भि गोल मटोल गुड़िया जैसी नारी थि। दोनों कां हाइट भि किसी प्रकार सें कम नहि थां। 99 फीसदी मर्द भानु सें छोटे थें औऱ सुषमा उसके कंधो तक आती थि।
होले सें वो उस चारपाई पऱ पहले अपने नितम्ब टिकाती हैं फिन अपनी काया कों भानु केँ समानंतर करकेलेट जाती हैं तथाहर समय ध्यान रखती हैं कि कंही उसके लाडले कि निद्रा नाँ भंग होँ जाये। आखिर वो सफल हौ जाती हैं तत्पश्चात भानु कि औऱ घूमकर उसके सीने पऱ अपनी बांह रखती हैं। उसी क्षण भानु केँ बदन मे भि हलचल होती हैं जिसपर सुषमा कों खुद पऱ गुस्स आता हैं कि उसने भानु कि निद्रा मे हलचल पैदाकर हि दि। मुंदी मुंदी आँखों सें भानु अपनेसंग चिपकी हुईँ उस काया कों पहचानने कि कोशिश करता हैं।
“मां तुँ.”जैसे किसी मरने वाले कों जिंदगी मिल जायेउसी प्रकार भानु कों भि नींद कि उस अवस्था मे अपनी मां कां यूं लगभग होना अच्छा लगरहा थां।
“तुम्हे देखने आयी थि, सोचायही सो जाऊँ तेरे पास”अपनी मम्मी कि आवाज़ सुनकर चैन महसूस होता हैं भानु कों औऱ वो ममतामई सुषमा कि नाजुक कमर कों अपनी मजबूत बांहो मे जकड़कर स्वयं सें चिकपा लेता हैं। जवाब मे सुषमा उसके सीने कों बांहो मे लेती हुइ अपनासर उसके सीने पऱ रख लेती हैं। सुषमा केँ होंठ भानु कि गर्दन पर्र छूरहे थें तथा उसकी सांसे ठुड्डी केँ निचले हिस्से पऱ टकरारही थि वंही भानु केँ होंठ सुषमा केँ माथे कों छूरहे थें।
“मेरी पियक्कड़ मां। ”बोलकर भानु अलसाया सां मुस्कुराता हैं।
“मेरा पियक्कड़ लल्ला। ”सुषमा भि जवाब देती हैं जिसपर भानु उसकेगाल पऱ चुम्मी लेता हैं। शरदहवा मे एक् दूजे कां संग जैसे स्वर्गीय खुशीदे रहा हौ। दोनों फिरसे नींद कि दुनिया मे खो जाते हैं।
सुभह कि भागदौड़ सबको दौड़ाती हैं फिरभी यह नियमतब लागु नहि होताजब आप् सुचेता वर्मा होँ। वो न्यूज़ एंकर जरूर थि पऱ केवलतब जबकोई हाई प्रोफाइल न्यूज़ चलानी हौ अन्यथा वो एक् रिपोर्टर हि थि जिसे मैदान मे उतरकर मुजरिमो कों नंगा करना अच्छा लगता थां। फिरभी वो वक़्त कि पक्की हैं पर्र जब किसीबड़ी न्यूज़ कां पीछा करती हैं तौ बॉस कि तरफ सें वक़्त कि कोई बंदिश नहि रहती।
कुछ टाइम पहले हि फ्लैट लिया हैं सुचेता नें जिसमे वो अपनी तलाकसुदा मम्मी केँ संग रहती हैं। बालकनी मे लगी कुर्सीयों पऱ एक् तरफ मां सुभह कां अख़बार पढ़रही थि औऱ दूसरी तरफ सुचेता पन्ने पलटरही थि अपनी फ़ाइल केँ जोँ कि उनकी दिनचर्या मे शामिल हैं
“किसीदिन बावली होँ जाएगी”कप कॉफ़ी कि चुस्कीयाँ लेतेहुए सुचेता कि मां नंदिनी बोलि।
“झूठे मेडिकल समाचारों कों पढ़कर मे वैसे भि पागल होने वाली हूं मम्मी”ऐसा लगरहा थां जैसे नंदिनी उसे काफ़ीबार समझा चुकी हैं उसके ज़्यादा काम करने कि आदत केँ बारे मे।
“तूँ निडर हैं बेटा, मे नहि, जब तूँ इसतरह बिनाडरे इनबड़े बड़े लोगों केँ पीछे पड़ती हैं तोँ मेरा कलेजा बाहर् आने कों होता हैं”
“सुभह सुभह नहि मम्मी। ”बिना अपनी नजरें उठाये सुचेता बोलती हैं।
“हम्म, ठीक हैं, नहि कहतीकुछ, पऱ इसकेस कों तुँ कुछ अधिक हि सीरियसली नहि लें रही?”इस बात नें सुचेता कों मजबूर कर दिया कि वो अपनी मां कों समझा हि दे। वो फ़ाइल कों दोनों कुर्सीयों केँ बीचरखे गोलमेज पर्र रखती हैं।
“आपकोपता भि हैं क्याँ क्याँ हौ रहा हैं शहर मे याँ ऐसे हि अख़बार उठाये रखती हैं?” सुचेता नें मजाक मे कहा तौ नंदिनी कों हंसी आँ जाती हैं।
“अच्छा। चल तूँ हि बता”
“मेरीआज तक कि जीवन मे यह सबसेबड़ा केस हैं जिसपर मे कामकर रही हूं”
“मे बस इतनाकह। ”नंदिनी इतना हि बोल पाती हैं औऱ सुचेता उसके मुंह पऱ हाथरख देती हैं।
“वोँ छोड़िये, dsr लिया आपने?”डांटते हुए सुचेता अपनी मां कों उसकी दवाईयाद करवाती हैं जिसका जवाबउसे पहले सें हि पता हैं। नंदिनी कों high BP रहती हैं पर्र दवाइयां जहर हैं उसकेलिए। सुचेता दवाइयो कि थैली औऱ पानी लाती हैं फिनमेज पऱ रखती हैं।
“फिनभूल गई, नां, जबपता हैं dsr खालीपेट लेना होता हैं तौ इतनी क्याँ जल्द रहती हैं आपको कॉफ़ी कि”
“नाँ बाबा नाँ, कप कॉफ़ी बिना मेरी आँखे नहि खुलती। ”कुछ औऱ बोल पाती इससे पहले सुचेता नें एक् कैप्सूल निकालकर उसके मुंह मे डाल दिया। दोबारा कुर्सी पर्र बैठकर फ़ाइल कों उठा लेती हैं।
नाँ तौ सुचेता कों आजतककोई बड़ा सम्मान मिला थां बेहतरीन पत्रकारिकता केँ लिए, नां हि उसकी ज़िन्दगी मे कोईबड़ा बदलाव आया थां। धमकीभरे फ़ोन औऱ घऱ पर्र गुंडे जरूरआते थें उसे डराने पऱ इतनेबड़े चैनल कि मुख्य एंकर औऱ निडर स्वभाव केँ चलतेकोई कुछ नहि बिगाड़ पाया थां उसका पर्र इसबार सम्भलना आवश्यक थां क्यूंकि नाँ तोँ इसमें शामिल गुंडे सामान्य थें नाँ हि मरने वाले शख्स।
कुछ हि टाइम बिता होगा दोनों कों वहां बैठेहुए कि सुचेता कों अपनेघऱ केँ आगे किसीबड़ी सि गाड़ी केँ चिंगाढ़ते हुए ब्रेक लगने कि आवाज़ सुनाई देती हैं औऱ अगले हि लम्हा अत्यधिक तीव्र आवाज़ केँ संग बालकनी मे लगा शीशाटूट जाता हैं। रेलिंग पर्र रखे छोटे छोटे गमले जैसे किसी निशानची द्वारा उड़ाएजा रहें होँ। 10 सेकंड मे हि धुंए सें वो सारी स्थान भर गयीँ, औऱ मम्मी बेटी कों पताचल गय़ा कि उनपर गोलियां बरसाई जारही हैं निचे सें। नंदिनी चिल्लाने लगी पऱ सुचेता कों उतनाडर नहि लगा। वो अपनी मम्मी कों लेकरघऱ केँ अंदर आँ जाती हैं। नंदिनी उसेकस करपकड़ लेती हैं कि तभी गाड़ी कि वापिस जाने कि आवाज़ आती हैं। जाहिर थां यह गोलियां बस डराने केँ लिए थि। मम्मी बेटी संभलती हैं औऱ सुचेता थोड़ेडर केँ संग निचेआकर देखती हैं परन्तु अब वंहाकोई नहि थां। यहसभी इतना जल्दहुआ कि उसे स्वयं पऱ हमले होने कां एहसास भि नहि थां अबतक, थां तौ एक् डर अपनी मम्मी कों लेकर। जिस कॉलोनी मे वोँ रहती थि उसमे अधिकतर प्लॉट्स खाली थें 4 5 घरों कों छोड़कर जिनके मालिक बाहर् आँ गए थें गोलियों कि आवाज़ सुनकर।
सुचेता पुलिस कों मोबाइल करने हि वाली थि कि तभी उसकेफ़ोन पऱ घंटी बजती हैं प्राइवेट नंबर केँ नाम सें। सुचेता काँपते हाथों सें फ़ोन उठाती हैं
“हेलो.”
“केसी हें सुचेता जी?”
“कौन बोलरहा हैं?”
“वही जिसने अभि आपकोगुड़ मॉर्निंग बोला थां, हीहीही”
“ऐसा करके तुम् बच जाओगे तौ यह गलतफहमी हैं तुम्हारी”
“मानना पड़ेगा। इतनी हिम्मत। वाउ, अब ध्यान सें सुनिये, यह चेतावनी थि आपको, अगर खुदकी औऱ अपनी मम्मी कि सलामती चाहती हौ तौ इस ब्रेकिंग न्यूज़ केँ नाटक कों छोडो, बदले मे हम् तुम्हे मुंह मांगी रकम देंगे, सारी जीवनऐश करोगी, वरना बिना अपनी मां केँ देती रहना ब्रेकिंग न्यूज़। ”औऱ फ़ोनकट जाता हैं। सुचेता दोबारा कोशिश करती हैं उस नंबर पर्र, परन्तु निराशा हि हाथ लगती हैं। वो दोबारा ऊपर अपनी मम्मी केँ पास जाती हैं जौ डरीडरी सि एक् कोने मे बैठी थि। साफ थां कि उन्होंने कभीइस तरह कि कोई उम्मीद नहि कि होगी पऱ जँहा पेशे औऱ गुंडागर्दी कि चलती होँ वंहा सें क्याँ हि आशा रखना। फिलहाल अनहोनी टल गयीँ, थि जिसका भविष्य पऱ क्याँ असर होगायह वक्त हि बताएगा.
मुझेबस साम कों हि वक्तमिल पाता हैं लिखने कां, मेरी विनती हैं कृपा करके थोड़ा adjust कीजिये, बहोत सारा प्रेम
झिलमिल ओढ़नी – New Episode
20th पन्ना
सुभह कि छाया अनबन लेकरआयी हैं औऱ मैदान ऐ मेहसर जंग केँ लिए सजधजकर होँ रहा हैं। कुदरत नें अजीब नुमाइश करके भेजा हैं व्यक्ति कों, जमीं पर्र जिसने वक़्त बेवक्त जनाजे उठा डालें हैं कभी अपनों केँ तौ कभी परायों केँ। फिजूल कि फ़िक्र करताहुआ इंसान धीमे कदमों सें बर्बादी औऱ नाफरमानी कि औऱ बढ़ता हैं। सुचेता पर्र हुए हमले कि खबरऐसे फैली जैसे ऑस्ट्रेलियन जंगलो कि आग फैलती हैं। जंग होने सें पहले विस्फोट नहि होता पऱ चिंगारी जरूरलग जाती हैं औऱ इसजंग कि चिंगारी यही थि।
किसी केँ घऱ गोलियां बरसाइ जा चुकी थि औऱ भानु अभि तक नींद सें भि नहि जागा थां। अंत मे उसकी आँखेखुल हि जाती हैं परन्तु सुषमा पहले हि जाग गई, थि। वो आँखे मलताहुआ नीचेआता हैं औऱ अपना मुंह धोता हैं। सुषमा उसकेलिए नाश्ते कि तैयारी कररही थि कि तभीउसे भानु दिखता हैं।
“उठ गय़ा लल्ला? तुँ बैठ मे गरमचाय लाती हूं”
भानु बिना जवाबदिए सोफे पऱ बैठता हैं तबतक सुषमा गरमचाय लें आती हैं। मुंह धोने केँ बाद भि भानु कि नींद पूरीतरह नहि खुली थि परन्तु यहकाम गरमचाय नें कर दिया। गरम चायख़तम करके भानु नित्यक्रम कों जाता हैं।
सुषमा कां चेहरा खिला खिलालग रहा थां। बहोत दिनों बाद सारेगम भुलाकर उसने अपनेमन कों मनोरंजीत किया थां औऱ शराब केँ नशे मे झूमी थि। उसके गालों मे खूनभरा हुआ थां जिससे लालिमा आयी हुइ थि। वो एक् नयी ऊर्जा केँ संगकाम कररही थि। नौकरानी नें आधे सें ज़्यादा कामकर दिया थां जब उसनेकहा कि वो आज जल्द जाएगी। सुषमा नें इज़ाज़त देदी थि क्योंकि कविता कभी कभार हि ऐसा करती हैं। दादीमा केँ लिए खिचड़ी औऱ दूध कटोरी मे डालकर सुषमा देने जाती हैं। भानु तबतक बाथरूम सें बाहर् आँ जाता हैं। उसे हड्डीयों मे जकड़न महसूस हौ रही थि तोँ नहाने कां मन बनाता हैं।
10 बज चुके थें औऱ भानुनहा धोकर रेडी थां जबकि सुषमा नें बाकीबचा कामकर लिया थां। अच्छी धुप निकली हुईँ थि औऱ दिन सुहाना लगरहा थां कि तभीघऱ कि घंटी बजती हैं। भानु सोफे पर्र बैठा अख़बार पढ़रहा थां औऱ सुषमा tv वाले एरिया कि सफाई मे लगी हुइ थि। घंटी बजने पऱ मां बेटे एक् दूसरे कि तरफ देखते हें औऱ सुषमा उसे वंही बैठे रहने कां इशारा करके दरवाजा खोलने जाती हैं। सामने रामकिशन कां PA चंद्रभान खड़ा थां।
“नमस्कार भाभी जी”चंद्रभान सुषमा कों भाभी हि कहता थां क्योंकि PA बनने सें पहले वो रामकिशन कां यार थां। रामकिशन नें हि उसकी गरीबी देखकर अपने यंहाजॉब दि थि फिरभी ऐसा नहि थां कि चंद्रभान केँ पास कौशल नहि थां। पिछले कई सालों सें वो रामकिशन कां PA थां।
“नमस्कार भैया, आइये”सुषमा उसे अंदर बुलाती हैं। भानु नें उसे बहोत टाइमबाद देखा थां पऱ जल्द हि पहचान जाता हैं इसलिये खड़ा होकरपेर छूता हैं।
“केसे होँ भानु?”
“ठीक हूं अंकल, आप् बताएं”
“मे भि ठीक हूं”दोनों बड़े सोफे पर्र बैठ जाते हें औऱ सुषमा उनकेलिए पानी लाती हैं।
“अपना भानु तौ बड़ा होँ गय़ा हैं भाभी जी”चंद्रभान भानु केँ कंधे पर्र हाथ रखतेहुए कहता हैं।
“जी भैया, ईश्वर कि कृपा हैं”
“माफ़ कीजियेगा मे ऐसे सुभह सुभह हि आँ गय़ा”
“इसमें माफ़ी कि क्याँ बात हैं भैया, घऱ पे सभीठीक हैं?”
“हां भाभीजी, सभी बढ़िया हैं, कुछ जरूरी काम थां तोँ सोचायही सही वक्त हैं”
“क्याँ काम अंकल?”भानु तत्परता सें पूछता हैं।
“देखो बेटा, आपके पापा मेरेबॉस होने केँ संगसंग बहोत अच्छे साथी थें। उन्होंने मुझेकभी कोई आदेश नहि दिया पऱ काम केँ मामले मे वे संगीन थें। उनकी देखरेख मे कभीकोई अड़चन नहि आयी व्यापार मे पर्र अब जैसेसभी रुक सां गय़ा हैं। बीते दिनों मे 20 करोड़ सें भि अधिक कां घाटालगा हैं”इस बात सें सुषमा कि तरफ सें कोई प्रतिक्रिया नहि आयी पर्र भानु कों जैसे सदमालगा हौ
“क्याँ कहा? 20 करोड़?”
“हाँ बेटे, जौ क्लाइंट्स आपके पिता केँ संग वफादार थें, उन्होंने अब मुंहफेर लिया हैं। ज़मीन भि ठेके नहि चढ़रही”
“तोँ आप् कुछ कीजिये अंकल, ऐसे केसे चलेगा”काम मे भानु कि रूचि हैं इसबात कों जानकर चंद्रभान कों अच्छा लगा वंही सुषमा कों आश्चर्य हुआ।
“इसमें मेरी भूमिका उतनी नहि जितनी मालिक कि हैं। हमारे क्लाइंट्स मालिक सें हि व्यापार साझा करते हें नाँ कि किसी PA सें”
“पऱ कोई तोँ मार्ग होगा अंकल?”
“इसीलिए तौ मे आया हूं बेटे, अब टाइम आँ गय़ा हैं कि आप् कारोबार संभाल लें”इसबार सुषमा नें प्रतिक्रिया दि औऱ बिना किसी देरी केँ बोलि
“नहि भैया, लल्ला कों इनसब सें दूर रखिये”चंद्रभान जानता थां कि सुषमा यह क्यूं कहरही हैं इसलिये बिना विचलित हुए बोला
“भाभीजी, यदि आपको भानु कि सुरक्षा कि चिंता हैं तौ हम् सिक्योरिटी हायरकर लेंगे, पुलिस भि हमारा संग देगी”
“नहि, कोई जरूरत नहि हें। ”
“पर्र मुझेकभी नां कभी तोँ जिम्मेदारी लेनी होगी मम्मी”
“चुपकर, बच्चा हैं अभि तुँ”
“तोँ क्याँ इसतरह हाथ पे हाथ रखके बैठा रहुँ? क्याँ जीवनभर हमेंइस डर मे जीना होगा मां? तूँ हि बता, इतनी मेहनत सें बनाया गय़ा बिज़नेस गरत मे जानां सही हैं?”
भानु औऱ चंद्रभान लगातार सुषमा कों समझाने कि कोशिश करते हैं। जिससे सुषमा कों मानना पड़ता हैं पर्र मन सें वो इसबात सें सहमत नहि थि। वो कर भि क्याँ सकती थि। भानु बहोत जिद्दी थां औऱ नाँ हि वो किसीबात कि परवाह करता थां चाहे उसकीजान कों हि खतरा हौ।
“मे कल सें हि दफ़्तर आऊंगा अंकल”भानु दृढ निश्चय केँ संग बोलता हैं।
“भैया, कृपा इसका ध्यान रखियेगा”
“मां.”भानु जैसेचिढ रहा थां खुद कों बच्चे कि तरहलिए जाने सें।
जिसका सुषमा पऱ कोईखास असर नहि होता।
“आप् निश्चिंत रहिये भाभी जी”सारी बात हौ चुकी थि औऱ चंद्रभान अब जाने कां कहता हैं। भानुउसे दरवाजे तक छोड़ने जाता हैं।
“मुझेपता लगा कि वोँ न्यूज़ रिपोर्टर सुचेता वर्मा यंहाआयी थि”दरवाजे पऱ चंद्रभान भानु सें पूछता हें क्योंकि सुषमा केँ सामने ऐसीबात नहि कि जा सकती थि।
“हाँ अंकल, कल आयी थि वोँ यंहा”
“आज सुभह उसकेघऱ पऱ कुछ गुंडों नें हमला किया थां”चंद्रभान कि बात सुनकर भानु कि भोंहे तन जाती हैं
“क्याँ? हमला? किसने किया?”
“अभि तक कुछसाफ नहि हें। वो आपके पापा केँ कातिलों कों सबके सामने लाने कि कोशिश कररही थि, जाहिर हें उन्होंने हि किया होगा”औऱ भानु जानता थां कि कातिल कौन हैं, “मुझेडर हें कहीं आपकेसंग भि ऐसाकुछ नां होँ जाये”
“आप् चिंता नां करें अंकल, मे संभाल लूंगा, कल दफ़्तर मे मिलतें हें”भानु चंद्रभान कों विदा करके अंदरआता हैं परन्तु उसके मस्तिष्क मे बस हमले कि बात हि गूंजरही थि। कुछसूझ नहि रहा थां, नां हि किसी परिणाम पऱ पहुँचा जारहा थां तोँ क्यूं नाँ सुचेता सें हि बातकर ली जाये। सुषमा कां फोन वंहीपड़ा थां। भानु नें नजर दौड़ाई तोँ पाया कि उसकी मम्मी वंहा नहि हैं। वो जल्द सें फोन उठाता हैं औऱ अपने कमरे मे जाता हैं, फिन सुचेता द्वारा दिएगए नंबर कों डायल करता हैं। पहलीबार मे सुचेता फ़ोन नहि उठाती पर्र दूसरी बार मे भानुसफल होँ जाता हैं
“हेलो। ”एक् दबी हुइ सि आवाज़ आती हैं दूसरी तरफ सें।
“हाँजी मे भानु, सुचेता जीबोल रहीं हें?”भानु कां नाम सुनते हि सुचेता कों लगता हैं कि भानुउसे वो सुचना देना चाहता हैं जिसके लिए वो उसकेघऱ गयीँ, थि।
“देखिये भानुजी, अभि मे आपसेबात नहि कर सकती। ”
“आप् पऱ हमला हुआ?”भानु अंतर स्पष्ट करता हैं। सुचेता कों पता थां कि यहबात फैल चुकी हैं परन्तु भानुउसे क्यूं फ़ोन करनेलगा इसबात केँ लिए।
“जी, पऱ मारने केँ लिए नहि हुआ। मुझे डराना चाहते हें”भानु समझ चूका थां कि आदिलअब किसी भि हद तक जायेगा अपना पल्ला साफ रखने केँ लिए औऱ वो नहि चाहता थां कि इन सबमें किसी निर्दोष कि जान जाये।
“क्याँ हम् मिल सकते हें?”
“नहि, मे। ”सुचेता बोल हि रही थि कि भानु उसकीबात काट देता हैं
“मुझेपता हैं आप् पऱ किसने हमला करवाया हैं”भानु कि बात सुनकर सुचेता कों आश्चर्य होता हैं
“क्याँ?”
“जीहाँ, कल मे अपने दफ़्तर जाऊंगा। अगर आपकोठीक लगे तौ हम् वंहीमिल सकते हें साम कों”
“ठीक हैं। मे जरूर आउंगी”
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सच कहूँ तोँ अब तौ कलसाम कां इंतजार हैं जब भानु दफ़्तर जाएगा औऱ सुचेता सें मिलेगा। आदिल कि चालें अब भानु केँ सामने टिक पाएंगी याँ नहि, यह देख्ना बहोत दिलचस्प होगा। सस्पेंस एकदमपीक पर्र हैं
झिलमिल ओढ़नी - Next part miss mat karna
सभी मिलेगा, मेरीराय मे लेखक कों उसके अनुसार हि चलने देना चाहिए, मुझे उम्मीद हैं जोँ आप् चाहते हें जरूर होगा
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