Doctor मां – New Episode
आप् केँ कथानक कि जितनी प्रशंसा कि जाएकम हें। पटल पर्र अब तक जितनी भि कहानियां पढ़ी उनमें सबसे अनोखी हैं नित्य नया अध्याय खोलरहे हे। मानव केँ मनोविज्ञान कि नईसोच कों प्रस्तुत किया हैं।
शायदअब तक जितनी इस स्टोरी केँ अगले सोपान कि इंतज़ार रहती हैं उतनी किसीओर कि रहती होँ।
मुझेलग रहा हैं अभि इसमें कुछनए पात्र औऱ आने वाले हैं।
आखिर मम्मी डाक्टर जोँ हैं
Page 20 tak mai sab kuch hu gyaa. mgr chutiya righter ko. choot.land.chudayi.sabd. Likhne mai saram aa raha hain. gaand. too bhool hi jayo.
Doctor मां – New Episode
बेडरूम कि दीवारें अबउनदो जिस्मों केँ उन्माद कि गवाहबन चुकीथीं। चरमसुख कां वोँ लम्हा लगभग थां जहाँरूह औऱ शरीर केँ बीच कां अंतरमिट जाता हैं। आर्यन कां 7 इंच कां फौलाद कंचन केँ तंग औऱ गरम गुदा रास्ता मे अपनी आखिरी आहुति देने केँ लिए पूरीतरह सजधजकर थां।
आर्यन नें अपने हाथों सें कंचन कि कमर कों इतनीज़ोर सें जकड़ा कि उसकी उंगलियां गोरे मांस मे धंसगईं। उसने अपनी रफ्तार कों किसी मशीन कि तरहतेज़ कर दिया। कमरे मे लुब्रिकेंट कि 'चप-चप' औऱ धक्कों कि 'थप-थप' एक् हंगामा मे बदल गई थि।
आर्यन केँ लिएये अनुभव किसी दिव्य ज्ञान जैसा थां। कंचन केँ पिछले दरवाज़ा कि वोँ अकल्पनीय कसावट उसकेअंग कि नसों कों फाड़ देने पऱ उतारू थि।
उसेलगा कि उसका निचला हिस्सा अब उसके काबू मे नहि हैं। जैसे हि उसने कंचन केँ उस 'मर्दाना राज' कों अंतिम बार मुट्ठी मे भींचकर तेज़ी सें सहलाया, उसके अपनेअंग कि जड़ मे एक् भयानक हलचल हुई।
"आह्ह्ह। मासी। मे गय़ा। मे आँ रहा हूं!" आर्यन नें एक् गगनभेदी दहाड़ मारी औऱ अपना पूरावज़न कंचन केँ ऊपरडाल दिया। उसका 7 इंच कां मूसल कंचन कि अंतिम दीवार सें जा टकराया औऱ गर्म गाढ़ा लावा किसी फव्वारे कि तरह कंचन केँ उसतंग रास्ते कि गहराइयों मे फूटपड़ा। उसेलगा जैसे उसकी रीढ़ कि हड्डी सें बिजली कि लहरें निकलकर कंचन केँ अंदरसमा रहीहों।
कंचन केँ लिएये वो समय थां जिसने उनके वजूद कों हिलाकर रख दिया। जब उन्होंने आर्यन केँ गर्म लावे कों अपने अंदर कि दीवारों पऱ महसूस किया, तौ उनकेमन मे एक् धमाका हुआ।
ठीक उसीसमय, आर्यन केँ हाथ कि तेज़ हरकत औऱ उसके जिस्मानी दबाव नें कंचन केँ बनावटी अंग कों उसकी सीमा तक पहुंचा दिया। कंचन कि आँखें उलटगईं, उनका जिस्म धनुष कि तरहऊपर कि ओरतन गय़ा।
उस बनावटी अंग केँ मुहाने सें सफेद औऱ चिपचिपी फुहार किसी पिचकारी कि तरह निकली औऱ सीधे आर्यन कि छाती औऱ पेट पर्र जा गिरी। कंचन नें एक् लंबी, दर्दभरी औऱ सुखदायक चीख छोड़ी। उनकेलिए ये पहलीबार थां जब किसी मर्द केँ असली पौरुष नें उनकीइस कृत्रिम शक्ति कों 'झड़ने' पऱ मजबूर कर दिया थां। उन्हें महसूस हुआ कि वो अब पूरीतरह सें 'तृप्त' होँ चुकी हें।
विस्फोट केँ बाद कमरे मे मात्र दो लोगों केँ हाँफने कि आवाज़ें बचीथीं। आर्यन पूरीतरह खाली होकर कंचन कि पीठ पऱ ढह गय़ा। उसकाअंग अभि भि कंचन केँ अंदर हि थां, जौ आरामसे अपनी गर्मी वहाछोड़ रहा थां। कंचन कां वो बनावटी अंग भि अब शांत होकर आर्यन केँ पेट पर्र टिका थां, जिस पर्र सें अभि भि सफ़ेद बूंदें टपकरही थीं।
उसे आज असीम शांति मिली। उसे लगा कि उसने नं मात्र कंचन कि भूख मिटाई हैं, बल्कि उसकी चुनौती कों भि कुचल दिया हैं।
वो पसीने मे लथपथ, दर्द औऱ सुख केँ बीचझूल रही थि। उसे यकीन होँ गय़ा कि आर्यन हि वो शेर हैं जौ उसकेइस जटिलबदन कों संभाल सकता हैं।
साम केँ 6:30 बज चुके थें। कमरे मे दोपहर कां वोँ तूफ़ान अब एक् गहरी खामोशी मे बदल चुका थां। खिड़की केँ पर्दों सें ढलते सूरज कि नारंगी रोशनी छनकर आँ रही थि, जौ उन दोनों केँ नग्न औऱ पसीने सें सूखे शरीरों पर्र पड़रही थि। आर्यन औऱ कंचन दोनों ऐसे निढाल पड़े थें जैसे किसी भीषण युद्ध केँ बाददो सिपाही ज़मीन पर्र ढेर होँ जाते हें। उस असीम शांति औऱ थकान नें उन्हें ऐसी नींद मे सुलाया थां कि टाइम कां पता हि नहि चला।
जैसे हि कंचन नें अपनी आँखें खोलीं, उसेहोश आया कि वो कहां हैं। मगर जैसे हि उसने हिलने कि कोशिश कि, उसके मुँह सें एक् तीखीआह निकल गई।
कंचन कां पिछवाड़ा अब बुरीतरह सें सूज गय़ा थां औऱ आग कि तरहजल रहा थां। आर्यन केँ 7 इंच केँ फौलाद नें उसतंग रास्ते कि जोँ हालत कि थि, उसकाअसर अब शुरुआत हुआ थां। उसे महसूस हुआ कि वो खाट सें करवट लेने कि स्थिति मे भि नहि हैं।
कंचन कि कराह सुनकर आर्यन कि भि आँख खुली। उसने देखा कि कंचन कां चेहरा दर्द सें पीलापड़ रहा हैं। "क्याँ हुआ मासी?" उसने घबराकर पूछा।
"आर्यन। अहह। मेरा मोबाइल दे, " कंचन नें हाँफते हुएकहा। आर्यन नें मेज़ सें मोबाइल उठाकर दिया। कंचन नें कांपते हाथों सें अंजलि कों मैसेज टाइप किया:
"जीजी, आते टाइम एक् अच्छी वाली 'पेनकिलर' औऱ सूजन कि क्रीम लेँ आनां। तुम्हारे बेटे नें आज मेरी हालत खराबकर दि हैं। मे उठ भि नहि पारही हूं। "
कंचन नें बेबसी सें आर्यन कि ओर देखा। "बेटा, अब मुझसे हिला भि नहि जारहा। सारा लावा जिस्म पऱ सूख गय़ा हैं औऱ नीचे कां दर्दजान निकाल रहा हैं। मुझे नहाना पड़ेगा, वरनारात कों जीजी केँ सामने खड़ी भि नहि होँ पाऊंगी। "
आर्यन कों अपनी मासी कि हालत देखकर थोडा बुरा भि लगा औऱ अपनी मर्दानगी पर्र गर्व भि हुआ। उसने बिनाकुछ कहे अपनी मज़बूत बाहें कंचन केँ शरीर केँ नीचे डालीं औऱ उन्हें 'गोदी' मे उठा लिया।
कंचन कां भारी औऱ सुडौल बदन आर्यन कि बाहों मे झूलरहा थां। उनका वो 'बनावटी अंग'अब शांत होकर आर्यन कि कलाई सें सटाहुआ थां। बाथरूम कि ओर बढ़ते हुए आर्यन कों महसूस हुआ कि कंचनअब पूरीतरह उसके भरोसे हें।
बाथरूम मे पहुँचकर आर्यन नें कंचन कों शावर केँ नीचे एक् छोटे स्टूल पर्र बैठा दिया। जैसे हि ठंडा पानी कंचन केँ जलतेहुए शरीर पर्र पड़ा, उनके मुँह सें एक् राहतभरी अहह निकली।
आर्यन नें साबुन औऱ लूफा लिया औऱ धीरे धीरे कंचन केँ जिस्म सें सूखेहुए लावे औऱ पसीने कों साफ करना शुरुआत किया। जब उसकाहाथ कंचन केँ उस सूजेहुए पिछले हिस्से केँ लगभग पहुंचा, तौ कंचन नें दर्द केँ मारे आर्यन कां हाथ कसकर पकड़ लिया।
"आहिस्ता आर्यन। वहा बहोत ज़ख्म होंगे आज, " कंचन नें आँखें बंद करके दीवार कां सहारा लेतेहुए कहा।
बाथरूम कि भाप औऱ पानी कि बौछारों केँ बीच, आर्यन जिसतरह कंचन कि सफाईकर रहा थां, उसमें अबहवस नहि बल्कि एक् गहरा जुड़ाव थां। मगर जैसे-जैसे पानी उनके नग्न शरीरों पऱ गिररहा थां, ठंडे पानी केँ नीचे भि एक् नई गर्मी आरामसे जन्म लेनेलगी थि।
आर्यन कां हाथ सफाई करते-करते फिन सें कंचन केँ उन कठोर स्तनों औऱ फिनउस 'अनोखे अंग' पऱ पहुँच गय़ा जौ पानी मे भीगकर चमकरहा थां।
बाथरूम कि सफेद टाइलों पर्र गिरते पानी कि आवाज़ केँ बीच एक् अजीब सि मादकता छाई हुईँ थि। कंचन मासी शावर केँ नीचे स्टूल पऱ बैठीथीं, उनकी गर्दन पीछे कि ओर झुकी थि औऱ आँखें कसकरबंद थीं। शावर कि ठंडी बौछारें जब उनके तप्त शरीर सें टकरातीं, तौ भाप उठने लगती थि।
कंचनउस वक़्त एक् ऐसी मानसिक अवस्था मे थीं जहाँ पीड़ा औऱ परमानंद केँ बीच कि लकीरमिट चुकी थि।
उनके पिछले दरवाज़ा मे हौ रही वो टीस उन्हें बार-बार उस लम्हे कि याद दिलारही थि जब आर्यन कां 7 इंच कां विशाल मूसल उनके वजूद कों चीरता हुआ अंदर गय़ा थां। उनके पति नें कभी उन्हें ऐसा अहसास नहि कराया थां। आज पहलीबार उन्हें लगा कि किसी नें उनकेबदन केँ उस सबसे संकरे औऱ 'प्रतिबंधित' हिस्से कों पूरीतरह जीत लिया हैं। वो दर्द उन्हें एक् स्त्री होने कां ऐसा अहसास देरहा थां जौ अकल्पनीय थां।
आर्यन जब कंचन कों इसहाल मे देखरहा थां, तौ उसके सीने मे गर्व कि एक् लहरदौड़ गई। उसने न् मात्र अपनी मासी केँ उस 'बनावटी राज' कों स्वीकार किया थां, बल्कि अपनी कुदरती ताकत सें उन्हें पूरीतरह पस्त भि कर दिया थां। कंचन जैसी आत्मविश्वासी औऱ शक्तिशाली स्त्री कों अपने घुटनों पर्र लेँ आनां, आर्यन केँ लिए उसकी मर्दानगी कि सबसे बड़ीजीत थि।
आर्यन नें मग मे गर्म पानी औऱ शावरजेल मिलाया औऱ बहोत हि कोमलता सें कंचन केँ कंधों पऱ डालना शुरुआत किया।
वो अपनी हथेलियों मे झाग भरकर कंचन केँ गले, उनकेउन पत्थर जैसे सख्त स्तनों औऱ उनकीपीठ पऱ मलनेलगा। कंचन कां बदन पानी औऱ साबुन सें चमकरहा थां। आर्यन कां स्पर्श अब बहोत हि 'केयरिंग' थां, मगर उसमें एक् छुपी हुई कामुकता अभि भि बरकरार थि।
जब आर्यन कां हाथ सफाई करतेहुए कंचन केँ उस सूजेहुए औऱ लालपड़े पिछले हिस्से केँ लगभग पहुंचा, तौ कंचन केँ जिस्म मे एक् थरथराहट हुई। "आह्ह्ह। आर्यन। वहा बहोत जलन हैं, " उन्होंने दबी आवाज़ मे कहा। आर्यन नें बहोत हि हल्के हाथ सें पानी कि धारवहा डाली ताकि सूखाहुआ लावा औऱ खूनसाफ़ हौ सके।
कंचन केँ पैरों केँ बीच लटका उनका वो 'अनोखा अंग'अब पानी केँ नीचे सुस्त पड़ा थां, मगर शावर कि बूंदें उस पर्र गिरकर एक् म्यूज़िक रचरही थीं। आर्यन नें उसे भि साफ़ किया, जिससे कंचन केँ मुँह सें एक् हल्की आह निकली। "तुँ बहोत खतरनाक हैं बेटा। अंजलि नें सहीकहा थां, तूँ शेर हैं। "
आर्यन नें कंचन कों पीछे सें अपनी बाहों मे भर लिया। पानीउन दोनों केँ नग्न शरीरों केँ बीच सें बहरहा थां। कंचन नें अपनासिर पीछे आर्यन केँ मज़बूत कंधे पऱ टिका दिया। दर्द अपनी स्थान थां, मगर आर्यन कि बाहों कि गर्माहट उन्हें एक् सुरक्षा कां अहसास देरही थि।
"मासी। अभि तोँ केवल शुरुआत हैं, " आर्यन नें उनके गीलेकान केँ पास फुसफुसाया। "अभि तौ मां आने वाली हें"
कंचन नें आँखें खोलीं, जिनमें अब दर्द कि स्थान एक् शरारती चमक थि। "तोँ फिन जल्दहाथ चला। इससे पहले कि तेरी मां पेनकिलर लेकरआए, हमें साफ़-सुथरा होकर रहना होगा। "
शावर केँ नीचे गिरते पानी कि रिमझिम आवाज़ केँ बीचअब एक् नया औऱ गहरानशा घुलने लगा थां। आर्यन, जौ अब तक कंचन कि सिर्फ सेवाकर रहा थां, आहिस्ता उस 'अनोखी मर्दानगी' केँ आकर्षण मे फिन सें फंसने लगा जोँ कंचन कि जांघों केँ बीचलटक रही थि। उसे कंचन केँ उस बनावटी अंग केँ स्पर्श कां एक् अजीब सां चस्का लग गय़ा थां।
आर्यन नें साबुन कां झाग अपने हाथों मे लिया औऱ कंचन केँ पैरों केँ बीचहाथ लें जाकर उनकेउस 'विशेष अंग' कों अपनी मुट्ठी मे भर लिया। जैसे हि आर्यन कि गरम हथेली नें उस ठंडे औऱ गीलेअंग कों छुआ, कंचन केँ बदन मे एक् करंट सां दौड़ गय़ा।
आर्यन अब मात्र सफाई नहि कररहा थां। उसेउस अंग कि कठोरता औऱ उसकी बनावट कों फिन सें महसूस करने कि तलब हौ रही थि। उसेलग रहा थां कि वो किसी जादुई खिलौने केँ संगखेल रहा हैं जौ एक् स्त्री केँ जिस्म पर्र सजा हैं। वो अपनी उंगलियों सें उसअंग कि सुपारी औऱ उसकी जड़ों कों बहोत हि कामुक तरीके सें सहलाने लगा। उसकेलिए ये'नशा' बन चुका थां—एक् ऐसी चीज़ जिसे उसनेआज सें पहलेकभी नहि देखा थां।
कंचन, जौ अब तक पिछले दरवाज़ा केँ दर्द सें कराहरही थि, अचानक एक् नईलहर महसूस करनेलगी। जब आर्यन नें उनकेउस अंग कों सहलाना शुरुआत किया, तौ उनकेमन कां ध्यान दर्द सें हटकरउस तीव्र उत्तेजना कि ओर खिंच गय़ा।
"आह्ह्ह। आर्यन। यह तूँ क्याँ कररहा हैं। दर्द हौ रहा हैं पर्र। रुकना मत, " कंचन नें हांफते हुए दीवार पर्र अपनेहाथ टिकादिए।
आर्यन केँ हाथों कां चमत्कार औऱ शावर केँ गिरते पानी नें कमालकर दिया। धीरे धीरे वो अंग, जोँ स्खलन केँ बाद सुस्त पड़ा थां, फिन सें जीवित होनेलगा।
आर्यन नें महसूस किया कि कंचन कां वो अंग उसकी मुट्ठी केँ अंदर आरामसे बड़ा औऱ औऱ भि ज्यादा सख्त हौ रहा हैं। वो किसी लोहे कि रॉड कि तरहतन गय़ा। आर्यन उसे तेज़ी सें ऊपर-नीचे सहलाने लगा, जिससे शावर केँ पानी कि बूंदें उसअंग सें टकराकर चारों ओर छिटकने लगीं।
कंचन नें अपनी आँखें बंदकर लीं। उत्तेजना कां येनया ज्वार उनके पिछले दरवाज़ा केँ दर्द केँ लिए एक् 'एनेस्थीसिया' कां कामकर रहा थां। जैसे-जैसे उनकाअंग खड़ा हौ रहा थां, उनके अंदर कि कामुक आगफिन सें सुलगने लगी थि। "आह्ह्ह बेटा। तूँ तोँ मुझे सुकून सें मरने भि नहि देगा.देख, तूनेइसे फिन सें केसेजगा दिया, " उन्होंने सिसकते हुएकहा।
आर्यन अब पीछे सें कंचन केँ शरीर सें पूरीतरह चिपक गय़ा। उसका अपना 7 इंच कां फौलाद कंचन कि गीली नितंबों केँ बीचफिन सें मार्ग खोजने लगा। शावर केँ नीचेउन दो अंगों कां नशाअब परवान चढ़रहा थां।
अंजलि अभि तक नहि आई थि, औऱ घऱ मे सन्नाटा थां। बाथरूम कि भाप मे अबदो प्यासे शरीरफिन सें एक्-दूसरे कों तलाशरहे थें। आर्यन कंचन केँ अंग कों सहलाते हुए उनके गीले कंधों कों चूमरहा थां। दर्द अभि भि थां, मगर कंचनअब उस दर्द कों भूलकर आर्यन केँ इसनए'नशे' मे डूबने कों सजधजकर थि।
"जल्दकर आर्यन। अंजलि आती हि होगी। हमेंइस हालत मे देख लिया तोँ वोँ स्वयं कों रोक नहि पाएगी, " कंचन नें अपनी गर्दन घुमाकर आर्यन केँ होंठों कों चूमते हुएकहा।
बाथरूम कि दीवारों पर्र गिरते पानी कि आवाज़ औऱ शावर कि भाप नें एक् ऐसा मायावी वातावरण बना दिया थां, जहाँ नैतिकता औऱ लोक-लाज कि सारी दीवारें ढह चुकीथीं। आर्यन इस वक्त एक् ऐसी 'अति-कामुक' मानसिक अवस्था मे थां, जहाँ पुरुष कि जिज्ञासा अपनीचरम सीमा कों लांघ जाती हैं।
आर्यन नें कंचन कों शावर कि ठंडी दीवार सें सटा दिया। कंचन कां गीला जिस्म दीवार कि ठंडक औऱ आर्यन कि बाहों कि गर्माहट केँ बीचपिस रहा थां। आर्यन कि नज़रें अब कंचन केँ पैरों केँ बीच तनकरखड़े उस 'अनोखे राज' पऱ टिकीथीं।
एक् मर्द केँ लिए अपनी श्रेष्ठता साबित करना सुखद होता हैं, मगरजब उसे किसीऐसी चीज़ कां सामना करना पड़ता हैं जोँ उसके अपने 'अस्तित्व' जैसी होँ पऱ एक् महिला केँ जिस्म पऱ सजी हौ, तौ उसके भीतर कि 'अन्वेषक' प्रवृत्ति जाग जाती हैं। आर्यन केँ मन मे अब नफरत याँ झेंप नहि थि; बल्कि एक् ऐसानशा थां जैसेकोई शिकारी अपने सबसे अनमोल शिकार कों पूरीतरह चखना चाहता होँ। उसेये जानने कि तीव्र उत्कंठा थि कि जिसअंग नें उसे इतनीदेर सें सम्मोहित कररखा हैं, उसका स्वाद औऱ स्पर्श उसके मुँह केँ भीतर कैसा महसूस होगा।
आर्यन आहिस्ता बाथरूम केँ गीले फर्श पऱ अपने घुटनों केँ बलबैठ गय़ा। शावर कां पानी सीधे उसकेसिर पऱ गिररहा थां, जिससे उसकेबाल चेहरे पर्र आँ रहे थें। सामने कंचन कां वो 7 इंच कां सख्त औऱ चिकना अंग किसी चुनौती कि तरहखड़ा थां।
कंचन नें अपनी टांगें थोड़ी औऱ फैलादीं औऱ दीवार कां सहारा लेकर अपनी आँखें बंदकर लीं। आर्यन नें पहलेउस अंग कि जड़ कों अपने हाथों सें सहलाया। शावरजेल औऱ पानी कि वजह सें वो अंग कांच कि तरहचमक रहा थां। आर्यन नें अपना चेहरा लगभग लाया;उसे कंचन केँ जिस्म कि गंध औऱ उस बनावटी अंग कि एक् विशिष्ट 'सर्द-कामुक' महक महसूस हुइ।
आर्यन नें अपनीजीभ निकाली औऱ उसअंग कि 'सुपारी' कों बहोत हि नज़ाकत सें छुआ। कंचन केँ मुँह सें एक् ऐसीचीख निकली जोँ दर्द औऱ सुख कां मिश्रण थि। "आह्ह्ह। आर्यन। यह तुँ क्याँ कररहा हैं। ओगॉड!" कंचन कां हाथ आर्यन केँ बालों मे जाकरकस गय़ा।
अब आर्यन नें अपनी झिझक पूरीतरह त्याग दि। उसने अपना मुँह पूरा खोला औऱ उस 7 इंच केँ भारीअंग कों आरामसे अंदर लेना शुरुआत किया। जैसे हि वो अंग उसकेगले कि गहराई कों छूनेलगा, आर्यन कों एक् ऐसा अहसास हुआ जिसे शब्दों मे बयान करना मुश्किल थां। वो अंग पत्थर जैसा सख्त थां, मगर उसका आकार औऱ उसकी बनावट आर्यन केँ मुँह कों पूरीतरह भररही थि।
आर्यन अब किसी माहिर प्रेमी कि तरहउस अंग कों अपनी ज़ुबान औऱ तालू केँ बीच भींचरहा थां।
कंचन केँ लिएये अनुभव सबसे ज़्यादा विस्फोटक थां। उनके पिछले दरवाज़ा कां दर्दअब पूरीतरह गायब हौ चुका थां। उन्हें ऐसालग रहा थां जैसे उनकी आत्मा उनकेउस अंग मे सिमटआई हैं। "आर्यन। अहह। तूँ तौ पागलकर देगा.चूस उसे। औऱ गहराई सें!" कंचन नें अपनीकमर कों आर्यन केँ मुँह कि ओर धकेलना शुरुआत किया।
आर्यन कों लगरहा थां कि वो एक् ऐसी 'देवी' कि पूजाकर रहा हैं जोँ ऊपर सें अप्सरा हैं औऱ नीचे सें एक् प्रचंड योद्धा। वो उसअंग कों चूसते हुए अपने हाथों सें कंचन कि भारी जांघों कों सहलारहा थां।
बाथरूम कि भाप औऱ पानी केँ हंगामा मे, ये दृश्य किसी पुराना कामुक गाथा जैसालग रहा थां, जहाँ एक् मर्द अपनी सारी 'मर्दानगी' कों भूलकर एक् 'अनोखी शक्ति' केँ सामने नतमस्तक थां।
बाथरूम कि दीवारों सें टकराकर गिरते पानी कां हंगामा अब आर्यन केँ कानों मे एक् म्यूज़िक कि तरह गूँजरहा थां। घुटनों केँ बल बैठे आर्यन केँ मन मे इससमय अपनी मां, अंजलि कि छवि कौंधरही थि। उसनेकई बार अपनी मम्मी कि आँखों मे झाँका थां जब वो उसके७ इंच केँ फौलाद कों अपने मुँह मे लेती थि; उसने देखा थां कि केसे उसकी मां अपनी पलकें मूँदकर, गालों कों अंदर कि ओर सिकोड़ते हुए उसकेअंग कि गहराई कों मापती थि।
आर्यन नें आजवही 'अदाकारी' औऱ वही 'समर्पण' स्वयं दोहराने कां फैसला किया। उसने सोचा कि अगर उसकी मम्मी उसकेलिए येसभी कर सकती हैं, तोँ वो अपनीइस 'अनोखी' मासी केँ लिए क्यूं नहि?
आर्यन नें कंचन केँ उस७इंच केँ सख्तअंग कों अपनी मुट्ठी मे जड़ सें पकड़ा, बिल्कुल वैसे हि जैसे अंजलि उसकेअंग कों पकड़ती थि। उसने अपनी आँखों कों आधाबंद किया औऱ अपनीजीभ सें उसअंग कि सुपारी पऱ एक् गीला घेरा बनाया। उसने महसूस किया कि कंचन कां वो अंगअब पूरीतरह सें लोहे कि छड़ कि तरहतप रहा हैं।
अंजलि जब आर्यन कां अंग चूसती थि, तौ वो एक् खासतरह कि लय कां इस्तेमाल करती थि। आर्यन नें ठीकवही किया; उसने एक् गहरी सांसली औऱ कंचन केँ उस भारीअंग कों आरामसे, इंच-दर-इंच अपनेगले कि गहराई मे उतारना शुरुआत किया।
जैसे-जैसे वो अंग उसके मुँह केँ अंदर समाता गय़ा, आर्यन कों अपनी मम्मी कि उस मेहनत कां अहसास हुआ जोँ वो उसकेलिए करती थि। उसकेगाल पूरीतरह खिंच चुके थें औऱ उसकी आँखों सें पानीआने लगा थां, मगर वो रुकना नहि चाहता थां।
कंचन नें जब आर्यन कों इसतरह अपनी 'सेवा' मे लीन देखा, तौ उनकी चीखें बाथरूम कि छत सें टकराने लगीं। शावर कां पानी उनके चेहरे पऱ गिररहा थां, मगर उनका सारा ध्यान नीचेउस अद्भुत खिंचाव पर्र थां।
"आह्ह्ह। आर्यन। तूँ तौ अपनी मां सें भि बढ़कर निकला!" कंचन नें सिसकते हुए अपने दोनों हाथ आर्यन केँ गीले बालों मे फंसादिए। उन्हें यकीन नहि होँ रहा थां कि येवही झेंपने वाला आर्यन हैं। आर्यन कां मुँह उनकेअंग केँ चारों ओर एक् 'गरम औऱ गीला वैक्यूम' बनारहा थां, जोँ उनके बनावटी अंग कि एक्-एक् नस कों झकझोर रहा थां।
आर्यन अब अंजलि कि तरह अपनेसिर कों आगे-पीछे हिलारहा थां। वो कभीअंग कों चूसता, तौ कभी अपनीजीभ सें उसकी रगों कों सहलाता। इस प्रक्रिया मे कंचन कां पिछवाड़े कां दर्द पूरीतरह गायब हौ गय़ा थां; अब मात्र एक् हि धुन थि—चरम सुख कि धुन।
शावर कां सफेदझाग, कंचन केँ सुडौल पांव, औऱ उनकेबीच झुकाहुआ आर्यन—ये नज़ारा किसी कामुक पेंटिंग जैसा थां। आर्यन कां अपना७ इंच कां अंग भि इस क्रिया कों देखते हुएहवा मे बार-बार उछलरहा थां।
ठीकउसी समय, जब आर्यन कंचन केँ अंग कों पूरीतरह अपनेगले मे उतार चुका थां औऱ कंचन झड़ने केँ लगभगथीं, घऱ केँ मुख्य दरवाज़े पर्र चाभी घूमने कि आवाज़ सुनाई दि।
कड़क। कड़क। अंजलि घऱ केँ अंदर दाखिल हौ चुकी थि। उसनेहॉल मे बैगरखा औऱ ज़ोर सें आवाज़ दि, "कंचन? आर्यन? कहां हौ तुम् दोनों? लाइटें क्यूं बंद हें?"
बाथरूम मे सन्नाटा छा गय़ा। आर्यन नें कंचन केँ अंग कों मुँह सें बाहर् निकाला, उसके होंठों सें कंचन कि कामुक लार औऱ पानी कि बूंदें टपकरही थीं। दोनों कि आँखें फटी कि फटीरह गईं। अंजलि केँ कदमों कि आहटअब बेडरूम कि ओरबढ़ रही थि।
Doctor मां – New Episode
आर्यन नें जहां एक् तरफ कंचन केँ " आवरण" कों उतारा ओर उसको वर्जित रास्ता कां सुख दिया, हौ सकता कंचन केँ मन मे लिंग परिवर्तन कां मलाल भि हुआ होँ जोँ लेखक कों हि पता हौ।
आर्यन नें दूसरा काम उसकोमुख मैथुन कां सुख देके कंचन कि मन केँ जख्मों कों भराहे।
साधुवाद
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