Doctor मां – New Episode
Hello dear
This message iss sent on behalf of XF admin team.
You are one of the best writers of XFORUM। And your kahani iss also going very well। So we have got you an opportunity too win Prizes Worth upto 15000 Rupees। We are here request you too write a short kahani for USC।
I hope aapki prayaas और imagination iss contest में Char Chand laga degi और XFORUM के deewano की list दिन doguni और rath chauguni badhati rahegi, और हम XF ko एक next level tak लेकर jaayenge। Isiliye iss baar bi winners ke liye Exciting Prizes haen so make sure you write a masterpiece।
jaesa की ap sabhi Jante haen iss baar Hum USC contest chala rahe haen और Kuch Din pehle hi Humne Rules & Queries Thread kaa announce krr दिया thaa और अब Ultimate kahani Contest kaa Entry Thread air krr दिया h joo 2nd April ko open hoga और 25th April 2026, 11.59 PM ko बंद hu jaaega। All times are in IST.
Khair अब mein point पर आते haen, jaisa की entry thread aired hu chuka h इसलिए ap sabhi readers और writers से मेरी personally request h की iss contest में ap jarur participate kare और apni kalpnao ko shabdon kaa raah dikha के yaha pesh kare hu sakta h लोग use पसंद kare.
or joo readers नहीं likhna chahte woh bakiyo की kahani padhke review de sakte h muze बहुत khusii hongi अगर ap iss contest में participate लेकर अगर Review likhenge.
yeh ap sabhi के liye एक बहुत hi sunhara avsar h इसलिए aage bade और apni kalpanao ko shabdon में likhkar world ko dikha de.
yeh एक short kahani contest h jisme Minimum 700 words और maximum 7000 words tak allowed h itne hi words में apni kahani complete karni hongi, or एक hi post में complete krna h और Entry Thread में post krna h.
I hope you will not disappoint mai and participate in this ultimate kahani contest and write your kahani.
Apni kahani post karne के liye iss thread kaa use kare ~ Entry Thread
Rules check karne के liye iss thread ko dekho ~ Rules & Queries Thread
Kisi bi kahani पर अपना review post karne के liye iss thread kaa use kare ~ Review Thread
kahani से related कोई doubt h too iske liye iss thread kaa use kare ~ Chit Chat Thread
or aapne joo kahani likhi h उसके words count karne के liye iss tool kaa use kare ~ Characters Tool
Prizes
+
Reader Award + 3000 Likes
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On Behalf of Admin Team
Regards - XForum Staff।
anupam kamuk adhyay , phale lga kee story khatm hu jayegi par ap ne uskah ruk hi mod diya , abi yeh three sm lmba chlne vala h lg rah h . story k ny update k liye sadhuvad
Doctor मां – New Episode
हॉल केँ सन्नाटे मे अंजलि केँ सैंडल कि आवाज़ गूँजरही थि। "कंचन! आर्यन! कहां हौ तुम् दोनों?" अंजलि नें रसोई सें लेकर बालकनी तक देख लिया, मगर पूराघऱ खालीलग रहा थां। उसकेहाथ मे पेनकिलर कां पत्ता औऱ क्रीम कि ट्यूब थि। जबउसे कोई जवाब नहि मिला, तोँ उसका माथा ठनका। तभी उसे बेडरूम कि ओर सें पानी गिरने कि हल्की गूँज सुनाई दि।
बाथरूम केँ अंदर कां आलम हि कुछ औऱ थां। शावर कि तेज़ बौछार औऱ उत्तेजना केँ हंगामा नें आर्यन औऱ कंचन कों बाहरी दुनिया सें पूरीतरह काट दिया थां। उन्हें न् तौ मुख्य दरवाज़े केँ खुलने कि आहट सुनाई दि औऱ नं हि अंजलि कि पुकार।
आर्यन इस टाइम पूरीतरह अपनी मां अंजलि कि यादों मे खोकर कंचन कि सेवाकर रहा थां। उसने कंचन केँ 7 इंच केँ उस सख्त औऱ बनावटी अंग कों अपने दोनों हाथों सें थामरखा थां। वो बार-बार उसे अपनेगले कि गहराई तक उताररहा थां। उसका पूरा चेहरा गीला थां—कुछ शावर केँ पानी सें औऱ कुछउस कामुक लार सें जोँ कंचन केँ अंग सें रिसरही थि। वो बिल्कुल वैसे हि अपनेसिर कों हिलारहा थां जैसे अंजलि उसके सामने घुटनों पर्र बैठकर करती थि।
कंचन दीवार सें चिपकी हुईँ थीं, उनके दोनों हाथ आर्यन केँ बालों मे बुरीतरह फंसेहुए थें। वे दर्द औऱ सरम कि सीमापार कर चुकीथीं। "ओह्ह्ह। आर्यन। तुँ तौ अपनी मम्मी कां भि उस्ताद निकला। चूसउसे। औऱ गहराई सें!" कंचन कि आँखें ऊपरचढ़ी हुइ थीं औऱ वे पागलों कि तरह सिसकरही थीं। उन्हें अंदाज़ा भि नहि थां कि मौत औऱ बदनामी उनके दरवाज़े पऱ खड़ी हैं।
अंजलि आहिस्ता बेडरूम मे दाखिल हुई। उसने देखा कि बेड कि चादर बेतरतीब हैं, फर्श पऱ कंचन कि काली शिफॉन साड़ी औऱ पैंटी पड़ी हैं, औऱ पास हि आर्यन कां सफेद अंडरवियर। अंजलि कां दिल ज़ोर-ज़ोर सें धड़कने लगा। वो ठिठकते हुए बाथरूम केँ दरवाज़े तक पहुँची। दरवाज़ा आधा खुला थां, क्योंकि जलदबाज़ी मे वे कुंडी लगाना भूलगए थें।
जैसे हि अंजलि नें हाथ बढ़ाकर दरवाज़े कों धीरे-धीरे सें धक्का दिया, उसके सामने कां नज़ारा किसी ज्वालामुखी केँ फटने जैसा थां:
सामने शावर केँ नीचे उसका अपना बेटा, उसका जवानखून, नग्न अवस्था मे घुटनों केँ बल बैठा थां। औऱ उसका मुँह। उसकी अपनी छोटी बेहन कंचन केँ उस 'अनोखे मर्दाना अंग' पऱ लगाहुआ थां। अंजलि कि आँखें फटी कि फटीरह गईं। उसने देखा कि केसे कंचन कां वो सख्तअंग आर्यन केँ मुँह केँ अंदर-बाहर् हौ रहा हैं।
अंजलि केँ हाथ सें दवाइयों कां थैला फर्श पर्र गिर गय़ा। उसके कानों मे वही आवाज़ें गूँजरही थीं जोँ वो स्वयं आर्यन केँ संग अकेले मे करती थि। उसे यकीन नहि होँ रहा थां कि जिस बेहन कों उसने अपनेघऱ मे पनाह दि, वो उसके बेटे केँ संगइस 'अप्राकृतिक' खेल मे डूबी हुइ हैं।
आर्यन औऱ कंचन अभि भि अपनी हि धुन मे थें। आर्यन नें एक् बारफिन ज़ोरदार वैक्यूम बनाकर कंचन केँ अंग कों पूरीतरह अंदर लिया, जिससे कंचन कि एक् लंबी औऱ तीखी हल्की चीख निकली—"आह्ह्ह्ह। बस आर्यन। अब निकल जाएगा। मेरा लावा निकल जाएगा!"
अंजलि अब औऱ सहन नहि करसकी। उसकी ममता, उसकीहवस औऱ उसकी ईर्ष्या सभी एक् संगजाग उठे। उसनेज़ोर सें दरवाज़े कों दीवार पऱ दे मारा—धड़ाम!
बाथरूम कि भाप औऱ पानी केँ बीच अचानक हुएइस धमाके सें आर्यन औऱ कंचन जैसे नींद सें जागे। आर्यन नें झटके सें कंचन कां अंग अपने मुँह सें निकाला, उसके होंठों सें एक् तार जैसालार कां धागा नीचे गिरा। कंचन नें कांपते हुए अपनी आँखें खोलीं औऱ सामने अपनीबड़ी बेहन अंजलि कों खड़ा पाया।
"तौ यहचलरहा हैं मेरीपीठ पीछे?" अंजलि कि आवाज़ किसी घायल शेरनी जैसी थि। उसकी नज़रों मे क्रोध भि थां औऱ एक् अजीब सि तड़प भि। उसकी नज़रें सीधे कंचन केँ उस नग्न औऱ खड़ेअंग पऱ टिकीथीं, जौ अभि भि थरथरा रहा थां।
"जीजी। वोँ। मे." कंचन कि आवाज़गले मे हि फंस गई। आर्यन नग्न हालत मे घुटनों पर्र बैठा अपनी मम्मी कि ओरदेख रहा थां, उसकी आँखों मे डरकम औऱ एक् अजीब सि मर्दाना चुनौती ज़्यादा थि।
अंजलि धीरे धीरे उनके लगभगआई, शावर केँ पानी मे भीगते हुए। उसने नीचे गिरे आर्यन केँ ७इंच केँ फौलाद कों देखा औऱ फिन कंचन केँ उस बनावटी अंग कों। उसने एक् ठंडी हंसी हंसी।
"दवाइयां तौ मे बाद मे दूँगी कंचन। पहले मुझेयह देख्ना हैं कि मेरा बेटा तेरीइस 'चीज़' मे ऐसा क्याँ ढूंढरहा हैं जोँ उसे अपनी मां केँ पास नहि मिला!"
अंजलि नें अपने सैंडल उतारे औऱ अपनी साड़ी कां पल्लू कमर मे खोंस लिया। माहौल अब 'थ्रीसम' (Trio) कि एक् ऐसीआग मे तब्दील होने वाला थां जहाँखून केँ रिश्ते खाक होने वाले थें।
अंजलि कां वो रौद्र रूप अचानक एक् मादक औऱ रहस्यमयी हंसी मे बदल गय़ा। बाथरूम कि धुंधली रोशनी मे उसकी सफेद साड़ी पानी कि बूंदों सें भीगकर उसके जिस्म सें चिपकने लगी थि। आर्यन, जौ अब तक थर-थर कांपरहा थां, अपनी मां कि इस अचानक बदली हुईँ फितरत कों समझ नहि पाया।
जैसे हि अंजलि हंसी, बाथरूम कां तनाव एक् अजीब सि 'कामुक चुप्पी' मे बदल गय़ा। उसने देखा कि उसकाशेर जैसा बेटा, जोँ अभि कुछदेर पहले कंचन कां 'शिकार' कररहा थां, अब अपनी मां केँ खौफ सें भीगी बिल्ली बनाहुआ थां।
अंजलि केँ गुस्से वाले नाटक नें आर्यन केँ दिमाग़ पर्र ऐसाअसर किया कि उसका 7 इंच कां फौलाद डर केँ मारे सिमटने लगा। जौ अंगकुछ देर पहले पत्थर कि तरह सख्त थां, वो अब अपनी मां कि नज़रों कि तपिशझेल नहि पाया औऱ छोटा होकर लटकने लगा। पुरुष मनोविज्ञान कां ये वो हिस्सा थां जहाँ 'मम्मी' कां दबदबा 'प्रेमी' केँ जुनून पर्र भारीपड़ गय़ा।
अंजलि कों अपने बेटे कि ये बेबसी औऱ अपनी बेहन कि घबराहट देखकर एक् अजब किस्म कां 'पावर-प्ले' महसूस हुआ। उसे मज़ाआने लगा कि केसे उसकी एक् आवाज़ नें इन दोनों 'शिकारियों' कों बेदमकर दिया हैं। उसने दीवार केँ पासपड़ा एक् छोटा स्टूल खींचा औऱ उस पर्र किसी रानी कि तरहबैठ गई।
अंजलि नें अपनी साड़ी कां पल्लू सही किया औऱ अपने पैरों पर्र पेर चढ़ाकर बैठ गई। उसकी नज़रें सीधे कंचन केँ उस 7 इंच केँ तनेहुए बनावटी अंग पर्र थीं, जौ अभि भि प्यासा खड़ा थां।
"डरोमत आर्यन। मे तोँ बसयहदेख रही थि कि मेरे पीछेइस घऱ मे कितनी तरक्की हुई हैं, " अंजलि नें अपनी आवाज़ मे शहद घोलते हुएकहा। फिन उसने कंचन कि ओर देखा, जिसकी सांसें अभि भि अटकी हुई थीं। "कंचन, तूँ तौ बड़ी छुपी रुस्तम निकली। औऱ तुँ रुक क्यूं गय़ा आर्यन? मैंने कहा न्। जारीरखो! मुझे भि तौ पताचले कि मेरी छोटी बेहन नें तुम्हें क्याँ नया सिखाया हैं। "
आर्यन अब एक् बहोत हि अजीब स्थिति मे थां। उसकी मां उसकेठीक सामने बैठीउसे अपनी मासी कां अंग चूसने कां हुक्म देरही थि। अंजलि कि आँखों मे एक् ऐसीचमक थि जौ आर्यन कों ये अहसास करारही थि कि आज वो केवल एक् दर्शक नहि, बल्कि इसखेल कि 'मास्टरमाइंड' हैं।
कंचन नें कांपते हुए अंजलि कि ओर देखा। "जीजी.यह। यहबस.""चुप!" अंजलि नें उसेटोक दिया। "बातें बहोत हौ गईं कंचन। मैंने सुना तूने बहोत दर्दसहा हैं आज। अबउस दर्द कों मज़े मे बदल। आर्यन। अपनी मम्मी कि बातमान औऱ वापस शुरुआत कर। अगर तेरायह हथियार खड़ा नहि हुआ, तौ समझ लेनाआज तेरीखैर नहि। "
अंजलि केँ उकसाने पर्र आर्यन केँ अंदर कां डरअब एक् नए किस्म कि उत्तेजना मे बदलने लगा। अपनी मम्मी केँ सामने अपनी मर्दानगी कां प्रदर्शन करना उसकेलिए सबसेबड़ा नशाबन गय़ा। उसनेफिन सें कंचन कि जांघों केँ बीच अपना चेहरा झुकाया।
वो स्टूल पऱ बैठी, अपनी ठुड्डी पर्र हाथरखे बड़ेगौर सें देखरही थि कि केसे आर्यन कि जीभ कंचन केँ उस बनावटी अंग कों सहलारही हैं। उसे ईर्ष्या तौ थि, मगर उससे कहीं ज़्यादा उसे कंचन केँ उस 'विशेष अंग' कों लगभग सें देखने कि भूख थि। वो देख्ना चाहती थि कि जब आर्यन उसे अपने मुँह मे लेता हैं, तोँ कंचन केँ चेहरे केँ भाव केसे बदलते हें।
बाथरूम मे अब शावर केँ पानी कि आवाज़ औऱ अंजलि कि मादक नज़रों केँ बीच आर्यन फिन सें कंचन कि 'सेवा' मे जुट गय़ा। अंजलि कां हाथ आहिस्ता अपनी हि साड़ी केँ नीचे सरकने लगा थां, क्योंकि ये नज़ारा अबउसे भि पिघला रहा थां।
बाथरूम कि उसउमस भरीहवा मे अब'पाप' कां एक् ऐसा त्रिकोण बन चुका थां, जिसकी कल्पना सिर्फ सें रूह कांपजाए। शावर सें गिरता पानीअब मात्र बदन नहि धोरहा थां, बल्कि नैतिकता कि अंतिम परत कों भि बहा लें गय़ा थां।
अंजलि स्टूल पर्र किसी महारानी कि तरह बैठी थि, उसकी आँखों मे अपने बेटे कों अपनी हि बेहन केँ अंग कि गुलामी करते देखने कां एक् विकृत खुशी थां। इस दृश्य मे जोँ मानसिक उथल-पुथल चलरही थि, वो किसी भि सामान्य अनुभव सें कोसों दूर थि।
आर्यन अब पूरीतरह सें एक् 'यौन कठपुतली' बन चुका थां। उसकी मम्मी कि उपस्थिति नें उसके भीतर एक् ऐसा मनोवैज्ञानिक दबाव पैदा किया जिसने उसकी कामुकता कों एक् नए, अंधेरे स्तर पर्र पहुंचा दिया।
आर्यन केँ लिएये स्थिति किसी दुःस्वप्न औऱ सबसे बड़ी फैंटेसी कां मिलन थि।
जब वो अपनी मम्मी कि नज़रों केँ सामने कंचन केँ उस 7 इंच केँ बनावटी फौलाद कों मुँह मे लेँ रहा थां, तोँ उसकेमन मे एक् अजीब सां विरोधाभास थां। उसेलग रहा थां कि वो अपनी मम्मी केँ सामने नंगा होँ चुका हैं। मगर अंजलि कि कामुक हंसी नें उसेये मेसेज दे दिया थां कि आजउसे 'मर्यादा' कि नहि, बल्कि 'परफॉरमेंस' कि ज़रूरत हैं।
अब वो कंचन कां अंग मात्र मज़े केँ लिए नहि चूसरहा थां, बल्कि अपनी मम्मी कों ये दिखाने केँ लिएचूस रहा थां कि वो कितना 'काबिल' हौ गय़ा हैं। वो जानबूझकर अपनीजीभ सें उसअंग पऱ ऐसी हरकतें कररहा थां जिससे कंचनतेज़ आवाज़ मे सिसकियाँ लें, ताकि अंजलि कों अपनी बेहन कि बेबसी पऱ मज़ाआए।
अंजलि स्टूल पऱ बैठी अपनी साड़ी केँ पल्लू कों उंगलियों मे लपेटरही थि।
वो देखरही थि कि उसका बेटा कंचन केँ उस 'विशेष अंग' कों ठीक वैसे हि चूसरहा हैं जैसे वो अंजलि केँ संग करता थां। उसे कंचन केँ उसअंग सें नफरत होनी चाहिए थि, मगर इसके बजायउसे एक् अजीब सां आकर्षण महसूस हौ रहा थां। वो सोचरही थि कि जिसअंग कों मेरा बेटा इतनी शिद्दत सें चखरहा हैं, उसमें ऐसी क्याँ बात हैं।
उसेइस बात कां घमंड हौ रहा थां कि उसके एक् आदेश पऱ उसका जवान बेटा अपनी मासी केँ चरणों मे पड़ा हैं। वो एक्-एक् बारीकी कों नोटकर रही थि—आर्यन केँ गालों कां खिंचाव, कंचन केँ थरथराते पेर औऱ उस बनावटी अंग कि चमक।
आर्यन नें अब अपनी रफ्तार बढ़ा दि। उसने कंचन केँ उस सख्तअंग कों गले केँ आखिरी छोर तक उतारा। कंचन नें दीवार पऱ अपनासिर दे मारा औऱ सिसकते हुए चिल्लाई—"आह्ह्ह। जीजी। देखोइसे। यह पागल हौ गय़ा हैं। यह मुझेमार डालेगा!"
अंजलि नें अपनी स्थान सें उठकर लगभगआते हुएकहा, "उसे चूसने दे कंचन.आज यह तेरा दर्दचूस लेगा। आर्यन, रुकना मत! अपनी मम्मी कों दिखा कि तूने अपनी मासी कों पालतू केसे बनाया हैं। "
आर्यन कां अंग, जौ डर सें छोटा हौ गय़ा थां, अबइस 'थ्रीसम' माहौल औऱ अंजलि केँ प्रोत्साहन सें फिन सें धड़कने लगा। वो घुटनों पर्र बैठा थां, मुँह मे मासी कां अंग थां औऱ पीठ पर्र अपनी मां कि तपती हुइ नज़रें।
अंजलि कि अनुभवी आँखों नें भांप लिया थां कि बाथरूम कि इसउमस मे उत्तेजना अबउसमोड़ पऱ पहुँच गई हैं जहाँ सें सभीकुछ बेकाबू होँ सकता थां। उसेयाद आया कि कंचन अभि भि दर्द मे हैं औऱ आर्यन भि पूरीतरह थक चुका हैं। एक् चतुर खिलाड़ी कि तरह उसनेखेल कों थोड़ा विराम देने कां फैसला किया ताकि अगली पारी औऱ भि धमाकेदार होँ सके।
अंजलि नें अपनाहाथ आगे बढ़ाकर शावर कां नलबंद कर दिया। पानी कि गिरती आवाज़बंद होते हि बाथरूम मे एक् भारी सन्नाटा छा गय़ा, जिसमें केवलउन तीनों कि धड़कनों कि आवाज़ सुनाई देरही थि।
"अबबसकरो तुम् दोनों, " अंजलि नें अधिकारपूर्ण लहजे मे कहा, पऱ उसकी आवाज़ मे अब क्रोध नहि बल्कि एक् ठहरी हुईँ शरारत थि। "आर्यन, बाहर् निकल औऱ स्वयं कों साफ़कर। कंचन, तुँ भि अब बाहर् आँ। तेरे पिछले घाव कों दवा औऱ आराम कि ज़रूरत हैं। पहलेबदन सुखाओ, कुछ खाओ-पियो, फिन देखेंगे कि आगे क्याँ करना हैं। "
आर्यन सबसे पहले बाहर् निकला। शावर केँ नीचे कि वो आक्रामक मर्दानगी अब शांत थि। उसने एक् बड़ा तौलिया अपनीकमर पऱ लपेटा। अंजलि नें एक् दूसरा तौलिया हाथ मे लिया औऱ स्वयं कंचन केँ शरीर कों पोंछने लगी।
अंजलि जब कंचन केँ कंधों औऱ कमर कों सुखारही थि, तौ उसकी उंगलियां जानबूझकर कंचन केँ उस 'विशेष अंग' कों छूरही थीं जौ अभि भि ढीला नहि हुआ थां। कंचन नें थकावट औऱ दर्द केँ कारण अपनासिर अंजलि केँ कंधे पऱ टिका दिया।
बेडरूम मे आकर आर्यन नें कंचन कों धीरे-धीरे सें पलंग पर्र लिटाया। अंजलि नें बैग सें वो शक्तिशाली पेनकिलर निकाली औऱ पानी केँ संग कंचन कों दि।
"उल्टी लेटजा, " अंजलि नें आदेश दिया। कंचन केँ उल्टा लेटते हि अंजलि नें वो एंटीसेप्टिक क्रीम अपनी उंगलियों पऱ ली औऱ बहोत हि धीरे-धीरे सें कंचन केँ उस सूजेहुए औऱ लालपड़े पिछले दरवाज़ा पऱ लगाना शुरुआत किया। आर्यन दूरखड़ा येदेख रहा थां। उसे अपनी मां कि कोमलता औऱ कंचन केँ दर्द केँ बीच एक् अजीब सां जुड़ाव महसूस हुआ। क्रीम कि ठंडक सें कंचन केँ मुँह सें एक् राहतभरी अहह निकली।
तीनों नें अब अपने-अपने 'घऱ केँ कपड़े' पहनना शुरुआत किया। ये हिस्सा सबसे अजीब थां क्योंकि कुछदेर पहले तक वे एक्-दूसरे केँ नग्नसच सें रूबरू थें।
कंचन नें एक् ढीली-ढाली सूती मैक्सी पहनी ताकि नीचे केँ घाव पऱ दबाव नं पड़े। उसका वो 7 इंच कां राजअब उस मैक्सी केँ नीचे सुरक्षित औऱ छुपाहुआ थां।
आर्यन नें अपनी टी-शर्ट औऱ शॉर्ट्स पहनलिए, जबकि अंजलि नें अपनी भीगी हुइ साड़ी बदलकर एक् दूसरी हल्की शिफॉन कि साड़ी लपेटी।
कुछदेर बाद तीनों डाइनिंग टेबल पर्र थें। अंजलि नें जल्द सें कुछ हल्का ब्रेकफास्ट औऱ जूस सजधजकर किया थां।
टेबल पर्र सन्नाटा थां, मगरमेज़ केँ नीचे पैरों कां खेल शुरुआत होँ चुका थां। आर्यन जूस पीतेहुए अपनी मां अंजलि कों देखरहा थां, जिसने अभि-अभि उसे अपनी बेहन केँ संग रंगे हाथों पकड़ा थां। कंचनदवा केँ असर सें अब थोड़ा बेहतर महसूस कररही थि, मगर उसकी नज़रें अभि भि आर्यन केँ चेहरे पर्र टिकीथीं।
अंजलि नें जूस कां घूँट लिया औऱ धीरे-धीरे सें बोलीं, "दवा अपनाकाम आधे घंटे मे शुरुआत कर देगी कंचन।
पेटभर खानां औऱ कंचन केँ बदन मे दौड़रही पेनकिलर कि तेज़ खुराक नें अपनाअसर दिखाना शुरुआत कर दिया थां। बेडरूम कि पीली रोशनी मे एक् भारी सां औऱ मदहोश कर देने वाला सन्नाटा पसरा थां। दोपहर केँ उस भीषण तूफान केँ बादअब खाट पर्र जोँ दृश्य थां, वो जितना शांतलग रहा थां, उसके भीतर उतनी हि गहरी औऱ दबी हुई कामुकता फिन सें करवट लें रही थि।
पलंग पर्र आर्यन बीच मे लेटाहुआ थां। उसके एक् तरफ उसकी जन्म देने वाली मम्मी अंजलि थि औऱ दूसरी तरफ उसकी वोँ कामुक मासी कंचन, जिसका 'अनोखा राज'आज उसने पूरीतरह चख लिया थां।
कंचन केँ लिएये समय बहोत अजीब औऱ राहतभरा थां। पिछले दरवाज़ा कां वोँ तीखा दर्दअब पेनकिलर केँ असर सें सुन्न होनेलगा थां। पेटभरा होने कि वजह सें उसका जिस्म भारी हौ रहा थां औऱ ठंडीएसी (AC) कि हवाउसे नींद कि आगोश मे खींचरही थि। उसकी मैक्सी केँ अंदर उसकी जांघों केँ बीच वोँ 7 इंच कां बनावटी अंगअब सुस्त पड़ा थां, मगर उसकी मौजूदगी आर्यन कों अभि भि महसूस हौ रही थि। कंचन नें अपना एक् हाथ आर्यन केँ सीने पऱ रखा औऱ उसकी आँखें आहिस्ता मुंदने लगीं। वो अबआधे होश औऱ आधी नींद केँ उस मुकाम पर्र थि जहाँ मात्र चैन थां।
कंचन केँ विपरीत, अंजलि पूरीतरह सें जागरही थि। उसकी आँखों मे नींद कां नामो-निशान नहि थां। वो कोहनी केँ बल टिकी हुइ आर्यन केँ चेहरे कों देखरही थि। उसकेमन मे अभि भि बाथरूम वाला वोँ नज़ारा घूमरहा थां जब उसका बेटा अपनी मासी कि सेवा मे लगा थां। अंजलि केँ लिएये 'सहनशीलता' कां इम्तिहान थां। वो देखरही थि कि उसकी छोटी बेहन गहरी नींद मे जारही हैं, जिससे अब मार्ग साफ़ होँ रहा थां।
आर्यन सीधा लेटाछत कों देखरहा थां। उसकेबदन मे एक् अजीब सि ऊर्जा दौड़रही थि। उसे महसूस हौ रहा थां कि उसकी दाईंओर कंचन कि सांसें अब धीमी औऱ गहरी होँ गई हें—वो सो चुकी थि। मगर उसकी बाईंओर अंजलि कि तपती हुइ नज़रें उसेजला रहीथीं।
अंजलि नें चादर केँ नीचे सें धीरे-धीरे सें अपना पांव आर्यन केँ पांव पर्र रगड़ा। आर्यन सिहरउठा। अंजलि नें उसकेकान केँ पास झुककर बहोत हि धीमी आवाज़ मे फुसफुसाया, "सो गई वोँ। दवा नें कामकर दिया। "
आर्यन नें अपनी मम्मी कि ओर देखा। अंजलि कि आँखों मे वही पुरानी हवसफिन सें लौटआई थि, मगरइस बार उसमें एक् 'चुनौती' भि थि। जैसे वो पूछरही होँ कि 'मासी कां स्वाद लेने केँ बाद क्याँ अपनी मां कों भूलगए?'
कमरे मे मात्र एसी कि हल्की सि आवाज़ थि। कंचन कि गहरी नींद नें अब अंजलि औऱ आर्यन कों एक् ऐसा 'प्राइवेट स्पेस' दे दिया थां जहाँवे अपनीदबी हुईँ बातों कों अंजाम दे सकते थें।
अंजलि नें धीरे-धीरे सें कंचन कां हाथ आर्यन केँ सीने सें हटाया औऱ उसेबैड केँ दूसरी तरफरख दिया। अब आर्यन औऱ अंजलि केँ बीचकोई रुकावट नहि थि। कंचनसोई हुइ थि, बेखबर कि उसकेबगल मे अब उसकी अपनी बेहन उसके'शेर' कों फिन सें अपनीओर खींचरही हैं।
अंजलि नें अपनाहाथ आर्यन केँ लोअर केँ अंदर डाला औऱ उसके 7 इंच केँ फौलाद कों अपनीगरम मुट्ठी मे कैदकर लिया, जौ अबफिन सें सिर उठाने लगा थां।
"तौ अब बताओ साहबज़ादे। मासी केँ संग खेलकर दिलभर गय़ा, याँ अब अपनीइस प्यासी मां कि भि सुध लोगे?" अंजलि नें शरारत सें आर्यन कि गर्दन पर्र छोटा सां काटा।
अंजलि केँ भीतर कां संयमअब पूरीतरह टूट चुका थां। बाथरूम मे जौ नज़ारा उसने देखा थां—अपने बेटे केँ मुँह कों अपनी बेहन केँ उस अनोखे अंग पर्र—उसने अंजलि कि नसों मे ईर्ष्या औऱ हवस कां ऐसा कॉकटेल घोल दिया थां जिसेअब औऱ रोकना नामुमकिन थां। जैसे हि उसने सुनिश्चित किया कि कंचन गहरी नींद मे हैं, वो अपनी मर्यादा कि सारी जंजीरें तोड़कर एक् 'जंगली बिल्ली' कि तरह आर्यन पर्र झपटपड़ी।
अंजलि नें एक् झटके मे अपनी स्थिति बदली औऱ आर्यन केँ ऊपर चढ़करउसे खाट पऱ दबा दिया। उसकी सांसें धौंकनी कि तरहचल रहीथीं औऱ आँखों मे एक् ऐसी वहशीचमक थि जैसेकोई भूखा शिकारी अपने शिकार कों दबोचरहा हौ।
अंजलि नें बिना एक् समय गंवाए आर्यन केँ होंठों कों अपने होंठों केँ शिकंजे मे कस लिया। ये कोई सामान्य चुंबन नहि थां; ये एक् 'हिंसक आक्रमण' थां। उसने अपनीजीभ आर्यन केँ मुँह मे इतनी गहराई औऱ ताकत सें डाली जैसे वो कंचन केँ हर अहसास कों वहा सें मिटा देना चाहती हौ। उसके दांत आर्यन केँ होंठों कों काटरहे थें औऱ उसकेहाथ आर्यन कि गर्दन कों जकड़ेहुए थें।
अंजलि केँ मन मे बस एक् हि बातघूम रही थि—'ये मेरा बेटा हैं, मेरा प्रेमी हैं, औऱ इसने मेरी बेहन केँ संग वो सभी किया जौ उसे केवल मेरेसंग करना चाहिए थां। ' वो आर्यन कों चूमते हुए अपनी पूरीदेह कों उसकेऊपर रगड़रही थि। उसके भारी औऱ तप्त बूब्ज़ आर्यन कि छाती कों कुचलरहे थें।
बगल मे कंचनसोई हुईँ थि, जिससे इस स्थिति कां रोमांच हजार गुनाबढ़ गय़ा थां। अंजलि कि साड़ी केँ पल्ले इधर-बधर बिखरगए थें औऱ उसके खुलेबाल आर्यन केँ चेहरे पर्र एक् जाले कि तरहफैल चुके थें।
आर्यन अपनी मम्मी केँ इस 'जंगली रूप' कों देखकर सुन्न रह गय़ा थां। अंजलि केँ बदन कि गर्मी उसेजला रही थि। जैसे-जैसे अंजलि उसे पागलों कि तरहचूम रही थि, आर्यन कां 7 इंच कां फौलाद उसकी मम्मी कि जांघों केँ बीचफिन सें एक् पत्थर कि तरह सख्त होँ गय़ा। वो महसूस कररहा थां कि उसकी मम्मी आजउसे कच्चा चबा जाने केँ मूड मे हैं।
अंजलि कां हाथअब आर्यन केँ लोअर केँ अंदर पहुँच चुका थां। वो उसकेअंग कों इतनी बेदर्दी औऱ जुनून सें भींचरही थि जैसे वो उस पऱ अपना मालिकाना हकजता रही हौ। "आह्ह्ह। आर्यन। तुँ मेरा हैं। केवल मेरा!" अंजलि नें चुंबन केँ बीच हि भारी आवाज़ मे फुसफुसाया।
अंजलि कि सिसकारियां अब आरामसे तेज़ हौ रहीथीं। वो भूल चुकी थि कि बगल मे उसकी बेहन लेटी हैं। वो अपनीकमर कों आर्यन केँ ऊपर किसी पागलपन कि हद तक पटकरही थि, जिससे बैड केँ स्प्रिंग हल्की आवाज़ करनेलगे थें।
अंजलि नें अपना चेहरा आर्यन केँ गले मे गड़ा दिया औऱ वहाज़ोर सें 'लव बाइट' देतेहुए उसेनोच लिया। उसकी आवाज़ मे एक् ऐसीतड़प थि जोँ मात्र बरसों कि प्यास सें आती हैं। "आज मे तेरी वोँ सुख दूँगी जोँ कंचन अपनेउस बनावटी खिलौने सें कभी नहि दे पाएगी। देख.देख अपनी मां कि आग!"
अंजलि नें अपनी साड़ी कां ब्लाउज फाड़ने केँ अंदाज़ मे खोला औऱ अपने दोनों उफनते हुए स्तनों कों आर्यन केँ मुँह केँ पास लाकर रगड़ने लगी। वो चाहती थि कि आर्यन उसे अभि औऱ इसीसमय अपनी पूरी मर्दानगी सें शांतकरे।
खाट पऱ मचीउस खलबली औऱ पागलपन भरे चुंबनों केँ बीच, अब कपड़ों कां बोझ दोनों केँ लिए असहनीय हौ चुका थां। अंजलि कि 'जंगली' उत्तेजना औऱ आर्यन कि जवानभूख एक् ऐसे मुकाम पर्र थि जहाँखाल सें खाल कां मिलना अनिवार्य थां। बगल मे सोई कंचन केँ निश्चल बदन केँ ठीकपास, मर्यादाओं केँ चीथड़े उड़ने वाले थें।
आर्यन औऱ अंजलि एक्-दूसरे केँ होंठों कों बुरीतरह सें चूसरहे थें, औऱ उनकेहाथ एक्-दूसरे केँ बदन पर्र किसी भूखे शिकारी कि तरह लिबास कों तलाशरहे थें।
अंजलि नें चुंबन तोड़कर एक् गहरी सांसली, उसकी आँखें लालथीं। उसने झटके सें अपने साड़ी कां पल्लू कंधे सें नीचे गिरा दिया। उसकी हल्की शिफॉन कि साड़ी सरकती हुईँ फर्श पऱ जा गिरी। अब वो केवल अपने पेटीकोट औऱ भीगेहुए ब्लाउज मे थि। उसने आर्यन कां हाथ पकड़कर अपने भारी स्तनों पर्र रखा औऱ फुसफुसायी, "उतार इन्हें आर्यन। आज अपनी मम्मी कों पूरीतरह बेपर्दा करदे। "
आर्यन नें कांपते हुएमगर जुनून सें भरे हाथों सें अंजलि केँ ब्लाउज केँ हुक एक्-एक् करके खोलने शुरुआत किए। टक्। टक्.टक्। जैसे-जैसे हुकखुल रहे थें, अंजलि केँ 36 इंच केँ उफनते हुए बूब्ज़ कैद सें आजाद होनेलगे। जैसे हि ब्लाउज ढीलाहुआ, अंजलि नें उसे कंधे सें उतारकर पीछे फेंक दिया। अब उसकी दूधिया पीठ औऱ आगे कां भारी यौवन आर्यन कि आँखों केँ सामने पूरीतरह नग्न थां।
आर्यन नें अब अपना लोअर औऱ अंडरवियर एक् संग नीचे खिसका दिया। उसका 7 इंच कां फौलाद किसी कमान सें छूटेतीर कि तरह सीधा खड़ा होकर अंजलि केँ पेट सें जा टकराया।
अंजलि नें बिनादेर किए अपने पेटीकोट कि डोरी खींच दि। रेशमी कपड़ा उसकी जांघों सें होताहुआ बैड केँ नीचेढेर होँ गय़ा। अब अंजलि पूरीतरह सें 'निर्वस्त्र' थि। उसकी सुडौल जांघों, चौड़े कूल्हों औऱ बीच केँ उसघने काले जंगल कि गर्माहट आर्यन केँ होश उड़ाने केँ लिए बहुत थि।
आर्यन नें अपनी टी-शर्ट भि उतार फेंकी। अबबैड पर्र दो नग्न शरीर थें—एक् जवान, सख्त औऱ गठाहुआ आर्यन, औऱ दूसरी तरफ उसकी अपनी मम्मी, जौ ढलती उम्र कि ढलान पर्र भि किसी 'यौवन कि देवी' कि तरहरस सें भरी हुइ थि।
नग्न होने केँ बाद दोनों एक् लम्हा केँ लिए रुके। अंजलि नें नीचे झुककर आर्यन केँ खड़ेअंग कों देखा औऱ फिन उसकी आँखों मे झाँका। उसे गर्व थां कि ये विशाल अंग उसका अपनाखून हैं। वहीं आर्यन, अपनी मां केँ पूर्ण नग्न जिस्म कों देखकर मदहोश थां।
दोनों अब बिना किसी रुकावट केँ एक्-दूसरे सें चिपकगए। पसीने औऱ उत्तेजना कि गंध कमरे मे फैल गई थि। अंजलि नें अपनी टांगें आर्यन कि कमर पऱ कसलीं।
बगल मे सोई कंचन कि मैक्सी थोड़ी ऊपर खिसकी हुईँ थि औऱ उसका वो 'अनोखा अंग' बेजान सां पड़ा थां। अंजलि नें आर्यन केँ कान मे दांत गड़ाए औऱ धीरे-धीरे सें कहा, "देख लेँ अपनी मासी कों। सो गई हैं बेचारी। अब असली मर्द कि तरह अपनी मम्मी कों वोँ सुखदे जौ आज तक किसी नें नहि दिया। "
आर्यन नें अंजलि केँ दोनों भारी स्तनों कों अपनी हथेलियों मे भींच लिया औऱ उन्हें ज़ोर-ज़ोर सें मसलने लगा। अंजलि केँ मुँह सें सिसकी निकली जिसे उसने आर्यन केँ कंधे मे मुँह गड़ाकर दबा लिया।
अंजलि कि आँखों मे इस टाइम जौ चमक थि, वो सिर्फ हवस कि नहि, बल्कि अपने बेटे पर्र अपनी सत्ता साबित करने कि थि। उसनेदेख लिया थां कि आर्यन नें कंचन केँ लिए क्याँ किया थां, औऱ अब वो उसेये दिखाना चाहती थि कि 'गुरु' आखिर गुरु हि होता हैं।
अंजलि आहिस्ता, किसी नागिन कि तरह सरकती हुईँ आर्यन केँ पेट केँ नीचे कि ओरबढ़ी। उसने अपनी नज़रों कों आर्यन कि आँखों सें एक् लम्हा केँ लिए भि नहि हटाया। बैड पर्र सोई हुई कंचन कि भारी सांसें उनकेबीच एक् 'थ्रिलर' पैदाकर रहीथीं।
अंजलि नें इसबार वोँ तरीका अपनाया जौ उसने बरसों केँ अनुभव औऱ आर्यन कि कमज़ोरियों कों जानकर विकसित किया थां। उसने सीधे मुँह नहि लगाया; इसके बजाय:
उसने पहले अपने भारी औऱ गरम स्तनों कों आर्यन केँ 7 इंच केँ फौलाद केँ दोनों तरफरख दिया। उसने अपने स्तनों केँ बीचउस अंग कों दबाकर उसे 'ब्रेस्ट-फक' जैसा अहसास दिया। आर्यन कि आँखों केँ सामने अंधेरा छानेलगा, उसकाअंग अंजलि केँ रसीले मांस केँ बीचपिस रहा थां।
जब आर्यन पूरीतरह सें उस मखमली दबाव मे पागल होनेलगा, तब अंजलि नें अपनीजीभ निकाली। उसनेअंग कि सुपारी कों छूने केँ बजाय, उसके निचले हिस्से औऱ अंग कि जड़ कि नसों कों चटाना शुरुआत किया। ये एक् ऐसा 'इरोटिक' अनुभव थां जिसने आर्यन केँ मन कि नसों कों हिला दिया।
अब अंजलि नें असली दांव खेला। उसने अपना मुँह पूरा खोला औऱ एक् हि झटके मे आर्यन केँ पूरेअंग कों 'डीप थ्रोट' केँ अंदाज़ मे गले केँ आखिरी छोर तक उतार लिया।
अंजलि नें अपने हाथों सें आर्यन कि जांघों कों कसकरपकड़ लिया औऱ अपने मुँह केँ भीतर एक् प्रचंड वैक्यूम पैदा किया। आर्यन कां बदनखाट पर्र ऊपर कि ओरउछल गय़ा। उसेऐसा लगा जैसेकोई बहोत शक्तिशाली मशीन उसके जिस्म सें सारा वीर्य खींच लेना चाहती हैं।
अंजलि नें कंचन कि तरह सिर्फ सिर नहि हिलाया; उसने अपनेगले कि मांसपेशियों कों आर्यन केँ अंग केँ चारों ओर सिकोड़ना शुरुआत किया। आर्यन कों महसूस हुआ कि उसकी मां कां मुँह किसीगरम, गीली औऱ मखमली गुफा कि तरहउसे निगलरहा हैं।
कमरे मे सन्नाटा थां, मगर आर्यन केँ मुँह सें निकलने वाली 'आह्ह्ह। उफ्फ्फ। मम्मी' कि दबी हुईँ सिसकारियां उस सन्नाटे कों चीररही थीं। अंजलि नें एक् हाथऊपर लें जाकर आर्यन केँ होंठों पर्र रख दिया, ताकि उसकी आवाज़ सें कंचन कि नींद नं खुले।
आर्यन कों लगा कि वो उड़रहा हैं। कंचन कां अंग चूसते वक़्त उसे जौ 'नशा' महसूस हुआ थां, अंजलि कि इसकला नें उसे 'मोक्ष' मे बदल दिया। उसकीरीढ़ कि हड्डी मे बिजली केँ झटकेलग रहे थें।
अंजलि ऊपर कि ओर देखकर आर्यन कि बेबसी कां लुत्फ उठारही थि। उसके मुँह केँ कोनों सें लार कि एक् पतली लकीर निकलकर आर्यन केँ अंडकोषों पऱ गिररही थि। वो आर्यन कों ये अहसास करारही थि कि वो चाहे जितनी 'मासियों' केँ संगखेल लें, पऱ अपनी मम्मी केँ इस जादुई मुँह कां विकल्प उसे पूरी कायनात मे नहि मिलेगा।
अंजलि नें अब अपनी रफ्तार कों किसी तूफ़ान कि तरहतेज़ कर दिया। उसकासिर अब बिजली कि गति सें आगे-पीछे होँ रहा थां। आर्यन कि जांघें कांपने लगीथीं औऱ उसकी मुट्ठियां चादर कों फाड़ने पर्र उतारू थीं। उसका 7 इंच कां फौलाद अब अपने जिंदगी केँ सबसेबड़े विसर्जन केँ लिए सजधजकर थां।
अंजलि नें एक् समय केँ लिएअंग कों बाहर् निकाला, उसे अपनी आँखों केँ सामने थरथराते हुए देखा औऱ फिन अपनी उंगली कों चूसते हुए एक् शरारती मुस्कान दि। "अभि तौ शुरुआत हैं मेरे बेटे। अभि तोँ तेरी अपनी मम्मी कि कोख कि प्यास बुझानी हैं। "
रात केँ सन्नाटे मे कामुकता कां जौ खेलचल रहा थां, वो अब एक् ऐसे मोड़ पऱ पहुँच गय़ा थां जहाँ सें वापसी कां कोई मार्ग नहि थां। अंजलि फिन सें आर्यन केँ 7 इंच केँ धधकते मूसल पऱ टूट पड़ी थि। उसने अपनी आँखें बंदकर लीथीं औऱ पूरी तन्मयता सें आर्यन केँ पौरुष कों अपनेगले कि गहराई तक उताररही थि। आर्यन भि अपनी मम्मी केँ मुँह कि उस मखमली गर्मी मे खोयाहुआ थां, उसका जिस्म सातवें आसमान पऱ थां।
मगरउन दोनों कों इसबात कां अंदाज़ा नहि थां कि उन्होंने एक् बहोत बड़ी गणितीय चूककर दि थि। कंचन नें केवल पेनकिलर ली थि, नींद कि दवा नहि। भारी खाने औऱ थकान कि वजह सें उसे एक् झपकी तौ लगी थि, मगर आर्यन औऱ अंजलि कि हरकतों सें बैड मे होने वाली हल्की हलचल औऱ अंजलि कि भारी सांसों नें कंचन कि चेतना कों जगा दिया थां।
अंजलि पूरीलय मे थि, उसकासिर बिजली कि गति सें आर्यन कि जाँघों केँ बीच ऊपर-नीचे हौ रहा थां। अचानक, उसे महसूस हुआ कि उसकी नग्न औऱ सुडौल भारी गाँड पऱ किसी केँ गरम हाथों कां स्पर्श हुआ।
पहले तौ अंजलि कों लगा कि शायद आर्यन कां हाथ फिसलकर वहा पहुँच गय़ा हैं, मगरजब उसने महसूस किया कि वो हाथ उसकी मोटी गाँड केँ दोनों हिस्सों कों बहोत हि अधिकार औऱ भूख केँ संग भींचरहा हैं, तोँ उसके जिस्म मे बिजली कां झटकालगा। उसकी आँखें फटी कि फटीरह गईं। उसने आर्यन केँ अंग कों मुँह सें बाहर् निकाला, उसके होंठों सें लार कां एक् धागा टूटकर आर्यन केँ पेट पऱ गिरा।
अंजलि नें झटके सें अपनी गर्दन पीछे घुमाई। कमरे कि मंद रोशनी मे उसने देखा कि कंचनजाग चुकी थि। कंचन पूरीतरह नहि उठी थि, वो करवट लेकर लेटी हुइ थि औऱ उसका एक् हाथ अंजलि कि नग्नपीठ सें होतेहुए उसकी रसीली गाँड कि गहराई कों टटोलरहा थां।
कंचन कि आँखों मे अब वो नींद याँ दर्द नहि थां, बल्कि एक् ऐसी 'शिकारी चमक' थि जिसे देखकर अंजलि कां खूनजम गय़ा।
कंचन नें अपनी उंगलियों कों अंजलि कि मोटी गाँड केँ छेद केँ पास लें जाकर हल्का सां दबाया। अंजलि केँ मुँह सें एक् दबी हुईँ आह निकली। कंचन नें अपनी भारी आवाज़ मे फुसफुसाते हुएकहा, "जीजी। अकेले-अकेले हि मेरेशेर कों चूस डालोगी क्याँ? मुझेलगा थां हम् बहनें हर चीज़ बाँटकर इस्तेमाल करती हें। "
अंजलि नग्न अवस्था मे घुटनों केँ बल बैठी थि, औऱ कंचनउसे पीछे सें टटोलरही थि। आर्यन, जिसकी आँखें अभि-अभि खुलीथीं, हक्का-बक्का रह गय़ा। उसने देखा कि उसकी मम्मी अंजलि औऱ उसकी मासी कंचनअब एक्-दूसरे केँ आमने-सामने थीं, औऱ वो स्वयं उन दोनों केँ बीच एक् प्यादे कि तरह फंसाहुआ थां।
अंजलि कां दिल ज़ोर-ज़ोर सें धड़करहा थां। उसने सोचा थां कि वो चोरी-छिपे आर्यन कां मजा लें लेगी, मगर अब कंचन नें उसे रंगे हाथों पकड़ लिया थां—औऱ वो भि उसकी अपनी नग्न भारी गाँड कों सहलाते हुए।
कंचन धीरे-धीरे सें बैड पऱ उठी औऱ अपनी मैक्सी केँ बटन खोलने लगी। "दवा नें अपनाकाम कर दिया हैं जीजी। दर्दअब मरहमबन गय़ा हैं। अब बताओ, तुम् आर्यन कां मजा लोगी याँ मे तुम्हारी इस गोरी रसीली गाँड कां हिसाब लूँ?"
अंजलि नें एक् गहरी सांसली। उसकाडर अब एक् नईतरह कि उत्तेजना मे बदल गय़ा। उसने देखा कि कंचन कि आँखों मे क्रोध नहि, बल्कि शामिल होने कि प्यास थि। अंजलि नें अपनीपीठ औऱ चौड़ी कि औऱ शरारत सें बोलि, "अगरजाग हि गई हैं, तोँ फिनदेर किसबात कि?"
Doctor मां – New Episode
कमरे कां तापमान अब सामान्य सें कहींऊपर जा चुका थां। बैड पर्र चलरहा ये दृश्य किसी पौराणिक कामुक गाथा जैसा थां, जहाँ मर्यादा कि हर ज़ंजीर पिघलकर बह चुकी थि। अंजलि, जोँ अब तक मात्र आर्यन पर्र अपना एकाधिकार जमाना चाहती थि, कंचन केँ जागते हि एक् नए अवतार मे आँ गई। उसनेसमझ लिया थां कि इस त्रिकोण मे अब जौ सुख मिलेगा, वो अकेलेपन सें कहीं ज्यादा होगा।
अंजलि नें एक् बारफिन अपनी गर्दन नीचे झुकाई औऱ आर्यन केँ 7 इंच केँ धधकते मूसल कों अपने मुँह केँ गरम घेरे मे लेँ लिया। मगर इसबार उसका अंदाज़ अलग थां। उसने घुटनों औऱ हाथों केँ बल झुकते हुए अपनी चौड़ी औऱ गोरी रसीली गाँड कों पीछे कि ओर पूराहवा मे उठा दिया।
जैसे हि अंजलि नें अपनीपीठ कों धनुष कि तरह मोड़ा, उसकी भारी गाँड केँ दोनों भारी हिस्से अलग हौ गए। कंचन कि नज़रों केँ सामने अब अंजलि कि गुलाबी औऱ रसीली बुर केँ साक्षात् दर्शन हौ रहे थें। वो हिस्सा जौ अब तक साड़ियों औऱ पेटीकोटों केँ नीचे छिपा थां, अब शावर केँ पानी सें धुलने केँ बाद कांच कि तरहचमक रहा थां।
अंजलि सामने सें अपने बेटे केँ पौरुष कों अपनी गहराई तक उताररही थि औऱ पीछे सें अपनी बेहन कों अपनी सबसे गोपनीय स्थान सौंपरही थि। उसकी सिसकारियां अब आर्यन केँ अंग केँ चारों ओर एक् गीली गूँज पैदाकर रहीथीं।
कंचन, जौ अब तक मात्र सहलारही थि, अंजलि कि बुर केँ उस नज़ारे कों देखकर अपनी सुध-बुध खो बैठी। उसने बिना एक् समय गंवाए अपना मुँह अंजलि कि गोल गाँड केँ बीच मे घुसा दिया। कंचन कि जीभ अंजलि कि बुर कि दरारों कों किसी प्यासे कि तरह चाटने लगी।
कंचन अंजलि कि जांघों कों जकड़कर उसेचूम रही थि। अंजलि कां शरीर झटकेमार रहा थां—सामने सें आर्यन कां सख्तअंग उसकेगले कों चीररहा थां औऱ पीछे सें कंचन कि शरारती जीभ उसकीरूह कों झकझोर रही थि।
आर्यन सीधा लेटाहुआ ऊपर कां ये अद्भुत नज़ारा देखरहा थां। उसकेलिए ये किसी 'फैंटेसी' केँ भि पार कि बात थि।
आर्यन देखरहा थां कि उसकी मां, जोँ समाज केँ सामने इतनी शालीन हैं, आज उसकेअंग कों मुँह मे लिए उसकी मासी केँ सामने अपनीगोल गाँड उठाए पड़ी हैं। ये दृश्य आर्यन कि पुरुष मानसिकता कों एक् प्रचंड अहंकार औऱ उत्तेजना सें भररहा थां। उसकाअंग अंजलि केँ मुँह केँ भीतर औऱ भि ज्यादा फौलादी होनेलगा।
ऊपर सें अंजलि कि सिसकारियां, नीचे कंचन कि जीभ केँ चप-चप कि आवाज़ औऱ उन दोनों केँ नग्न शरीरों केँ टकराने कि महक—आर्यन कां दिमाग़ सुन्न होँ चुका थां। उसेसमझ नहि आँ रहा थां कि वो अपनी मां केँ मुँह केँ मजे पऱ ध्यान दे याँ अपनी मासी औऱ मां केँ उस 'लेस्बियन मिलाप' कों देखे।
आर्यन कि जांघों कि नसें फटने कों सजधजकर थीं। अंजलि केँ मुँह कि सक्शन पावर औऱ कंचन कि हरकतों नें उसेउस बिंदु पऱ पहुंचा दिया थां जहाँ सें लावाबस फूटने हि वाला थां।
पूरा पलंगअब उन तीनों केँ भार औऱ हरकत सें चरमरा रहा थां। कंचनअब अंजलि कि बुर कों चूसते हुए अपनी मैक्सी केँ अंदर अपनेउस 7 इंच केँ राज कों अपनी जांघों सें रगड़रही थि, जिससे वो भि पूरीतरह सें अंगड़ाई लेनेलगा थां।
"आह्ह्ह। जीजी। कितनी मीठी होँ तुम्!" कंचन नें अंजलि कि मोटी गाँड पर्र एक् हल्का सां थप्पड़ मारते हुए फुसफुसाया।
पलंग पर्र बनीउस 'मानवीय कामुक मशीन' केँ केंद्र मे इससमय अंजलि थि। उसकीदेह एक् ऐसे मोड़ पऱ थि जहाँ वो एक् संग मां, प्रेमिका, बेहन औऱ एक् प्यासी महिला केँ अंतहीन द्वंद्व कों जीरही थि। अंजलि कि इस टाइम कि मानसिक स्थिति कों अगर गहराई सें कुरेदें, तौ वहाहवस केँ संग-संग सत्ता औऱ पूर्ण आत्मसमर्पण कां एक् अजीब मिश्रण थां।
अंजलि जिस स्थिति मे थि—सामने सें बेटे कां अंग मुँह मे औऱ पीछे सें छोटी बेहन कि जीभ उसकी बुर कि गहराई मे—वहा उसकी चेतना कई परतों मे बँटी हुई थि
अंजलि केँ मन मे इस टाइम एक् प्रचंड अहंकार हिलोरे लें रहा थां। वो ये सोचकर रोमांचित थि कि उसने अपनेघऱ केँ इनदो सबसे महत्वपूर्ण स्तंभों—अपने जवान बेटे औऱ अपनी रहस्यमयी बेहन—कों एक् हि खाट पर्र अपनीदेह कि सेवा मे लगा दिया हैं। उसकीउठी हुइ रसीली गाँड मात्र कामुक पोज़िशन नहि थि, बल्कि एक् 'सिंहासन' थां। उसेलग रहा थां कि वो इसखेल कि डायरेक्टर हैं। उसेमजा आँ रहा थां कि उसकी एक् कराह आर्यन कों पागलकर रही हैं औऱ उसकीदेह कां स्वाद कंचन कों उसकी गुलामी करने पर्र मजबूर कररहा हैं।
अंजलि कि मानसिकता मे 'नैतिकता कां पतन' हि उसकेपरम सुख कां सबसे बड़ा कारण थां।
उसेये सोचकर सिहरन होँ रही थि कि जौ अंग उसके मुँह केँ भीतर हैं, उसे उसने अपनीकोख सें जन्म दिया हैं।
पीछे कंचन कि जीभउसे वो याद दिलारही थि कि वो अब मात्र एक् 'मम्मी' नहि बची हैं, बल्कि एक् ऐसी 'वस्तु' बन गई हैं जिसे उसके अपनों नें हि पूरीतरह सें लूट लिया हैं। ये 'सामूहिक भोग' कि भावना उसे एक् ऐसी मानसिक तृप्ति देरही थि जौ उसनेआज तक कभी महसूस नहि कि थि।
शुरुआत मे अंजलि कों कंचन औऱ आर्यन केँ बीच केँ संबंधों सें जलन होँ रही थि। मगरअब, जब कंचन उसकी बुर चूसरही थि, तोँ अंजलि कि वो ईर्ष्या एक् 'विजय' मे बदल गई। उसेलगा कि कंचन चाहे कितनी भि ताकतवर क्यूं नं हौ, अंत मे वो अंजलि केँ जिस्म केँ रस कि हि प्यासी हैं। अंजलि कों महसूस हौ रहा थां कि वो अपनी बेहन केँ उस 'मर्दाना राज' कों भि अपनी स्त्रीत्व कि शक्ति सें वश मे कर चुकी हैं।
अंजलि कां मस्तिष्क इस वक़्त दो ध्रुवों केँ बीचझूल रहा थां
आर्यन कां ७इंच कां फौलाद जब उसकेगले कि गहराई कों छूता, तोँ अंजलि कां मातृत्व पूरीतरह हार जाता औऱ उसके भीतर कि एक् नग्न मादाजाग उठती जोँ अपने हि बच्चे केँ पौरुष कों निगल जानां चाहती थि।
कंचन कि गीलीजीभ जब उसके संवेदनशील अंगों कों सहलाती, तौ अंजलि कों अपने पिछले दरवाज़ा कां वो खालीपन महसूस होता जिसे भरने केँ लिए वो अब बेचैनी रही थि।
अंजलि नें आर्यन कां अंग मुँह सें निकाला औऱ उसकी आँखों मे आँखें डालकर देखा। उसकी पलकें भारीथीं औऱ आँखों मे पानीतैर रहा थां—ये पानीदुख कां नहि, बल्कि चरमसुख कि पराकाष्ठा कां थां।
उसने कांपती आवाज़ मे फुसफुसाया, "आर्यन। तूँ देखरहा हैं? तेरी मम्मी आज अपनी बेहन केँ सामने नंगी होकर तेरे पौरुष कि भीख मांगरही हैं। कंचन कि ज़बान मुझेमार डालेगी। तुँ अपनी प्यास बुझा। मुझेबीच मे सें चीरदे बेटा! आज मुझे वोँ दर्ददे जोँ मुझेफिन सें पैदा होने पऱ मजबूर करदे!"
अंजलि नें अपनीगोल गाँड कों औऱ पीछे कि ओर झटका दिया, जैसे वो कंचन कों औऱ भि गहराई तक आमंत्रित कररही हौ औऱ संग हि आर्यन कों अपने भीतर समाने केँ लिए उकसारही हौ। उसका पूरा वजूदअब एक् विस्फोट कि इंतज़ार मे थां।
रात केँ उस सन्नाटे मे, जहाँ सिर्फ भारी सांसों औऱ गीले स्पर्शों कि आवाज़ें थीं, कंचन नें अचानक खेल कां रुख पूरीतरह बदल दिया। अंजलि, जौ अब तक कंचन कि जीभ केँ मखमली अहसास मे डूबी हुइ थि, इस 'अचानक हमले' केँ लिएकतई रेडी नहि थि।
कंचन नें अपनी मैक्सी केँ भीतर छुपेउस 7 इंच केँ फौलादी राज कों बाहर् निकाला, जौ अब पेनकिलर औऱ उत्तेजना केँ मेल सें पत्थर जैसा सख्त हौ चुका थां। उसने अंजलि कि उठी हुई औऱ नग्नगोल गाँड केँ नीचे अपनी स्थिति सेट कि औऱ बिना किसी चेतावनी केँ, अपनी पूरी ताकत केँ संग एक् प्रचंड धक्का अंजलि कि रसीली बुर केँ मुहाने पऱ जड़ दिया।
जैसे हि कंचन कां वो कठोर औऱ विशाल अंग अंजलि कि कोमल गहराइयों कों चीरता हुआ अंदर धंसा, अंजलि केँ जिस्म मे एक् बिजली कां कड़कना जैसा अहसास हुआ। उसकी आँखें झटके सें पूरीखुल गईं, जैसे वो किसी गहरे सम्मोहन सें जागी होँ।
अंजलि कां मनइस टाइम एक् 'शॉर्ट-सर्किट' कि स्थिति मे थां।
उसे उम्मीद थि कि कंचन मात्र उसे अपनीजीभ सें सहलाएगी, मगरजब उसने अपनी छोटी बेहन केँ उस 'मर्दाना अंग' कि असली गहराई औऱ कठोरता कों अपने भीतर महसूस किया, तोँ उसकीरूह कांप गई। उसे यकीन नहि हौ रहा थां कि एक् महिला उसे एक् मर्द कि तरह रौंदरही हैं।
इस अचानक हुए हमले नें अंजलि केँ भीतर कि सारी 'सभ्य' परतों कों उखाड़ फेंका। उसे अपनी बुर कि दीवारों पर्र जोँ खिंचाव महसूस हुआ, वो आर्यन केँ अंग सें भि कहीं ज़्यादा 'अजनबी' औऱ 'तीव्र' थां। ये अहसास कि उसेदो तरफ सें—उसका बेटा औऱ उसकी बेहन—घेरे हुए हें, उसे एक् परम-अपराध बोध केँ संग-संग एक् ऐसेसुख मे लेँ गय़ा जहाँ इंसान केवल जानवर रह जाता हैं।
नीचे सें कंचन केँ धक्के नें अंजलि केँ पूरेबदन कों आगे कि ओर धकेल दिया।
इस तीव्र उत्तेजना औऱ खिंचाव कों बर्दाश्त करने केँ लिए अंजलि केँ पास एक् हि मार्ग थां—उसने अपना मुँह औऱ भि बड़ा खोला औऱ आर्यन केँ 7 इंच केँ मूसल कों गले केँ आखिरी छोर तक निगल लिया। उसने आर्यन केँ अंग कों इतनी बेदर्दी सें चूसना शुरुआत किया जैसे वो अपनी सारी पीड़ा औऱ सारा खुशीउस एक् अंग मे उंडेल देना चाहती होँ।
वो अपनी आँखें बंद करकेये सोचरही थि कि वो कितनी 'पतित' हौ चुकी हैं। पीछे उसकी बेहनउसे चीररही हैं औऱ सामने वो अपने हि बेटे कां लावा निकालने पऱ उतारू हैं। ये दोहरा संभोग अंजलि कों सातवें क्याँ, चौदहवें आसमान पर्र लेँ जारहा थां।
अंजलि अब एक् 'जीवित सैंडविच' बन चुकी थि।
कंचन पीछे सें एक् कुशल शिकारी कि तरह धक्के माररही थि, उसकी मैक्सी अंजलि कि नग्न मोटी गाँड सें रगड़ खाकर एक् अजीब सि 'सराहट' पैदाकर रही थि।
आर्यन बैड पऱ लेटा अपनी मां केँ गले कि मांसपेशियों कां दबाव महसूस कररहा थां, जौ कंचन केँ हर धक्के केँ संग औऱ भि तेज़ हौ जाता थां।
अंजलि कां मस्तिष्क अब सिर्फ आवाज़ों औऱ स्पर्शों कां एक् संग्रह बन गय़ा थां। वो अपनेमन मे चीखरही थि—"हाँ! मुझेऐसे हि ख़त्म करदो! कंचन। औऱ ज़ोर सें! आर्यन। पूरा अंदरडाल दे!"उसे लगरहा थां कि उसका जिस्म अबइस दबाव कों झेल नहि पाएगा औऱ वो इसी पलंग पऱ दमतोड़ देगी।
अंजलि कि नाक सें तेज़ फुफकारें निकलरही थीं औऱ उसका पूरा सफ़ेद जिस्म पसीने सें नहा गय़ा थां। कंचन नें अब अंजलि केँ बालों कों पीछे सें कसकरपकड़ लिया औऱ उसकेकान केँ पास फुसफुसायी, "कैसालगा जीजी? मेरी मर्दानगी औऱ तेरे बेटे कां पौरुष। आज तुम कोकोई नहि बचा पाएगा!"
अंजलि नें आर्यन कां अंग मुँह मे लिए हि एक् दबी हुई, गले सें निकलने वालीचीख मारी। उसकी आँखों सें आँसू निकलकर आर्यन केँ पेट पर्र गिरने लगे। वो अबउस बिंदु पऱ थि जहाँ सें उसका सारा 'मातृत्व' औऱ 'नारीत्व' जलकरराख होने वाला थां।
खाट पऱ बिछेउस सफेद चादर केँ बीच, जहाँ उसकी मां औऱ मासी एक्-दूसरे मे गुंथी हुईँ थीं, आर्यन इस टाइम एक् ऐसी 'अति-मर्दानगी' केँ शिखर पर्र थां, जिसकी कल्पना उसनेकभी अपने सपनों मे भि नहि कि थि।
आर्यन केँ लिएये सिर्फ संभोग नहि थां; ये उसके अहंकार, उसकीहवस औऱ उसकी सत्ता कां चरम उत्सव थां।
आर्यन सीधा लेटाहुआ थां, मगर उसकी आँखों मे जोँ मंजर थां, उसने उसकेमन कि नसों कों पूरीतरह सें सुन्न कर दिया थां। उसकी मां अंजलि, जौ उसकेलिए सम्मान कां सर्वोच्च प्रतीक थि, आज उसके सामने घुटनों औऱ हाथों केँ बल झुककर उसके पौरुष कि गुलामी कररही थि। औऱ उसी मम्मी कि गोरी रसीली गाँड केँ पीछे उसकी मासी कंचन, अपनी पूरी 'मर्दाना' शक्ति केँ संग अंजलि कों रौंदरही थि।
आर्यन कों इस वक़्त स्वयं केँ एक् 'सम्राट' होने कां अहसास हौ रहा थां।
उसेलग रहा थां कि उसने अपने खानदान कि दो सबसे शक्तिशाली औऱ सुंदर औरतों कों अपने 7 इंच केँ फौलाद केँ दम पर्र पालतू बना लिया हैं।
जब अंजलि नें कंचन केँ धक्के केँ कारण उसकेअंग कों गले केँ आखिरी छोर तक निगला, तोँ आर्यन कों एक् ऐसा 'अंधेरा सुख' मिला जिसने उसेये अहसास कराया कि अब उसकी मम्मी मात्र उसकी मम्मी नहि रही, बल्कि उसकेसुख कां एक् जरिया केवल हैं। उसकी आँखों केँ सामने अपनी मां कां वो असहाय औऱ कामुक चेहरा देखकर उसके भीतर कां 'शिकारी' अट्टहास कररहा थां।
आर्यन महसूस कररहा थां कि अंजलि कां मुँहअब एक् 'उबलती हुईँ भट्टी' कि तरह गर्म हौ चुका हैं। कंचन केँ पीछे सें लगने वालेहर धक्के केँ संग अंजलि कां मुँह उसकेअंग पऱ औऱ भि कस जाता थां। वो खिंचाव इतना जबरदस्त थां कि आर्यन कि जांघों कि नसें पत्थर कि तरह सख्त होँ गई थीं।
वो देखरहा थां कि केसे कंचन कि जांघें अंजलि कि नग्न भारी गाँड सें टकराकर एक् गीली औऱ थपथपाहट भरी आवाज़ निकाल रही हें। अंजलि कि पीठ पऱ गिरते पसीने कि बूंदें औऱ कंचन केँ बालों कां अंजलि कि कमर पर्र बिखरना—ये दृश्य आर्यन केँ लिए किसी 'विजुअल ड्रग' कि तरहकाम कररहा थां।
आर्यन कां 7 इंच कां फौलाद अब अपनी सहनशक्ति कि आखिरी सीमा पऱ थां। उसेलग रहा थां कि अंजलि कां गला उसकेअंग सें सारा वीर्य निचोड़ लेना चाहता हैं।
आर्यन कां मनकररहा थां कि वो अंजलि केँ बालों कों अपनी मुट्ठियों मे जकड़ लेँ औऱ उसे औऱ भि गहराई तक धकेले। उसेमजा आँ रहा थां कि उसकी मां कंचन केँ प्रहारों केँ बीच फंसी हुई हैं औऱ राहत केँ लिए मात्र उसकेअंग कां सहारा लेँ रही हैं।
आर्यन नें अपनेहाथ ऊपर उठाए औऱ अंजलि केँ कंधों कों मज़बूती सें पकड़ लिया। उसने अपनीकमर कों ऊपर कि ओर झटका दिया, जिससे अंजलि केँ मुँह सें एक् दबी हुई सिसकी निकली। वो अब अपनी मम्मी कों ये अहसास कराना चाहता थां कि आजरात वो उसे छोड़ने वाला नहि हैं।
आर्यन कि मानसिकता मे इस वक्तकोई नैतिकता नहि थि। उसकेलिए कंचन कां वो ७इंच कां राज औऱ अंजलि कि प्यासी बुर, दोनों मिलकर एक् 'कामुक यज्ञ'कर रहे थें जिसमें वो स्वयं 'मुख्य देवता' थां। उसे अंजलि कि आँखों मे दिखरहे आँसू औऱ कंचन केँ चेहेरे पर्र दिखरही वहशी मुस्कान, दोनों हि उसे एक् गहरे औऱ नशेड़ी सुख कि ओर धकेलरहे थें।
"मां। औऱ गहराई सें। चूसडाल मुझेआज!" आर्यन नें पहलीबार अपनी आवाज़ मे एक् 'मालिक' जैसारौब लातेहुए कहा।
रात केँ उस सन्नाटे मे, बेडरूम कि हवाअब सिर्फ ऑक्सीजन नहि, बल्कि हवस औऱ पसीने कि महक सें भारी हौ चुकी थि। पलंग पऱ जोँ दृश्य बनरहा थां, वो कामुकता औऱ पाप कि उसचरम सीमा पऱ थां जहाँ पहुँचने केँ बाद इंसान केँ पास लौटने कां कोई मार्ग नहि बचता। आर्यन औऱ कंचन नें मिलकर अंजलि कों एक् 'जीवित खिलौने' कि तरहबीच मे जकड़ लिया थां।
अंजलि इस टाइम घुटनों औऱ हाथों केँ बलबैड पऱ टिकी थि। उसकीपीठ एक् धनुष कि तरह झुकी हुई थि, उसकी नग्न मोटी गाँड हवा मे उठी हुईँ थि औऱ उसका चेहरा आर्यन कि जाँघों केँ बीचदबा हुआ थां।
आर्यन अब सिर्फ लेटा नहि थां; उसने अपनीकमर कों ऊपर उठाया औऱ अंजलि केँ बालों कों अपनी दोनों मुट्ठियों मे मज़बूती सें जकड़ लिया। वो अंजलि केँ मुँह कों एक् 'योनि' कि तरह इस्तेमाल कररहा थां।
आर्यन केँ भीतर कां जानवर पूरीतरह जाग चुका थां। वो अपने 7 इंच केँ फौलाद कों अंजलि केँ गले कि गहराई तक झटके केँ संग उताररहा थां। अंजलि केँ मुँह केँ कोनों सें लारबह रही थि औऱ उसकेगले सें अजीब सि 'गप-गप' कि आवाज़ें आँ रहीथीं, मगर आर्यन कों कोईदया नहि थि। उसेमजा आँ रहा थां कि उसकी मां उसके धक्कों केँ आगे बेबस थि।
पीछे सें कंचन नें अंजलि कि चौड़ी रसीली गाँड कों अपने दोनों हाथों सें थाम लिया थां। कंचन कि मैक्सी कमर तक उठी हुईँ थि औऱ उसका वो 7 इंच कां सख्तराज अंजलि कि रसीली बुर केँ मुहाने पऱ सेट थां।
कंचन नें किसी भूखे भेड़िये कि तरह अंजलि कि बुर मे ज़ोरदार धक्के मारने शुरुआत किए। ये 'डॉगी स्टाइल' कां वो रूप थां जिसे देखकर कोई भि कांपजाए। कंचन कि जांघों केँ अंजलि केँ नितंबों सें टकराने कि आवाज़—'थप-थप-थप'—पूरे कमरे मे गूँजरही थि। जिससे अंजलि उत्तेजना केँ मारे औऱ भि अधिक पागल होँ रही थि।
अंजलि इस वक़्त एक् 'सैंडविच' कि तरहपिस रही थि। सामने सें उसका बेटा उसकेगले कों रौंदरहा थां औऱ पीछे सें उसकी बेहन उसकी बुर कि गहराई नापरही थि।
अंजलि कां बदनहर धक्के केँ संग आगे-पीछे डोलरहा थां। जब कंचन पीछे सें ज़ोरदार प्रहार करती, तोँ अंजलि कां चेहरा आर्यन केँ अंग पऱ औऱ भि गहराई सें धंस जाता। अंजलि कि आँखें ऊपरचढ़ गई थीं;उसे महसूस होँ रहा थां कि उसका जिस्म अबदो हिस्सों मे फटने वाला हैं।
अंजलि इस वक्त मम्मी याँ बेहन नहि थि, वो सिर्फ एक् 'भोग कि वस्तु' बन चुकी थि। उसे अपने बेटे कां स्वाद औऱ अपनी बेहन कि कठोरता एक् संग महसूस हौ रही थि। वो अपनीबंद मुट्ठियों सें चादर कों फाड़रही थि। उसके भीतर कां अहसास ये थां कि आज उसकी मर्यादा कां आखिरी कतरा भि इसखाट पऱ बह जाएगा।
कमरे मे मात्र तीन आवाज़ें थीं: आर्यन कि भारी सांसें, कंचन केँ धक्कों कि आवाज़, औऱ अंजलि केँ गले सें निकलने वाली रुंधी हुईँ सिसकारियां।
आर्यन कां अंगअब फटने कों सजधजकर थां। उसने अंजलि केँ सिर कों पकड़कर अपनीओर खींचा औऱ आखिरी कुछ प्रहार इतनी तेज़ी सें किए कि अंजलि कां गला पूरीतरह भर गय़ा।
कंचन भि अपनेचरम पऱ थि। वो अंजलि कि पीठ पर्र झुक गई औऱ उसके कानों मे फुसफुसाते हुए अपनी रफ्तार कों दोगुना कर दिया। "देख जीजी। तेरा बेटा तुझेही सामने सें माररहा हैं औऱ मे पीछे सें। आज हम् तुम्हे खाली नहि छोड़ेंगे!"
अंजलि कां पूरा शरीर पसीने सें लथपथ होकर कांपने लगा। वो इस 'दोहरे आक्रमण' केँ नीचे पूरीतरह टूट चुकी थि, औऱ उसका विसर्जन अब एक् ज्वालामुखी कि तरह फूटने कों सजधजकर थां।
उसरात केँ सन्नाटे कों चीरते हुए वो लम्हा आँ हि गय़ा, जहाँ मर्यादा औऱ लोक-लाज कि सारी सीमाएँ धुआं हौ गईं। बैड पर्र मचेउस 'पाशविक तांडव' कां अंतअब एक् ऐसे महा-विस्फोट केँ संग होने वाला थां, जिसकी गूँजउन तीनों कि रूह कों हमेशा केँ लिएबदल देने वाली थि।
कमरे मे सिर्फ थप-थप कि आवाज़ औऱ भारी होती सांसों कां हंगामा थां। अंजलि केँ शरीर कां एक्-एक् अंग थरथरा रहा थां। कंचन कि रफ्तार अब किसी बेकाबू इंजन कि तरह होँ चुकी थि औऱ आर्यन कि जाँघों कि नसें फटने कों सजधजकर थीं।
आर्यन कां 7 इंच कां फौलाद अब अपनीचरम सीमा कों पारकर चुका थां। उसने अपनी मम्मी अंजलि केँ बालों कों अंतिम बार पूरी ताकत सें अपनी मुट्ठी मे जकड़ा औऱ एक् लंबी, गहरी सिसकी भरी—"आह्ह्ह्ह। मां। लेँ इसे.खा जा अपने बेटे कि मर्दानगी कों!" जैसे हि आर्यन नें ये गाली औऱ हुंकार भरी, उसकेअंग सें वीर्य कि गरम धारें किसी फव्वारे कि तरह अंजलि केँ गले कि गहराई मे फूट पड़ीं। अंजलि कां मुँह पूरीतरह भर गय़ा, मगर आर्यन रुकने कों रेडी नहि थां; वो झटके मार-मार कर अपना सारा लावा अपनी हि जन्मदात्री केँ मुँह मे खालीकर रहा थां।
ठीकउसी सेकंड, पीछे सें कंचन भि अपनेअंत पर्र पहुँच गई। अंजलि कि बुर कि दीवारों नें कंचन केँ उस 7 इंच केँ राज कों इतनी बुरीतरह भींच लिया थां कि कंचन कां संयम जवाबदे गय़ा। कंचन नें अंजलि केँ कूल्हों पऱ अपने नाखून गड़ादिए औऱ एक् वहशीचीख मारी—"जीजी। राँडबना दूँगी आज तुम्हे। यह लेँ मेरीआग!" कंचन केँ उस बनावटी अंग केँ भीतर सें निकलता हुआ वो गरम लावा अंजलि कि कोमल गहराइयों मे सैलाब बनकरफैल गय़ा। अंजलि कों ऐसालगा जैसे उसके भीतरकोई ज्वालामुखी फट गय़ा हौ।
अंजलि, जौ बीच मे एक् सैंडविच कि तरहपिस रही थि, इस दोहरे प्रहार कों सह नहि पाई।
सामने सें बेटे कां गाढ़ा लावा औऱ पीछे सें बेहन कां प्रचंड धक्का—अंजलि कां बदन धनुष कि तरहऊपर कि ओर मुड़ा औऱ फिन पूरीतरह ढीलापड़ गय़ा। उसकी अपनी बुर सें काम-रस कि फुहारें चादर कों भिगोने लगीं।
अंजलि केँ मुँह सें आर्यन कां अंग निकला औऱ वो खाट पर्र औंधे मुँहगिर पड़ी। उसका पूरा चेहरा, होंठ औऱ ठोड़ी आर्यन केँ सफेद लावे सें लथपथ थें। उसकी आँखों मे एक् अजीब सि शून्यता थि—एक् ऐसा'परम सुख' जिसे दुनिया कि कोई भि नैतिकता बयान नहि कर सकती। उसने एक् ठंडीअहह भरी औऱ उसकी उंगलियां चादर कों मुट्ठी मे भींचे रही।
कुछ पलों केँ लिए कमरे मे मात्र तीन लोगों केँ हाँफने कि आवाज़ें थीं। पसीने औऱ कामुकता कि महक इतनी गहरी थि कि सांस लेना मुश्किल थां।
आर्यन निढाल होकर अंजलि केँ बगल मे गिरपड़ा। वो अपनी मां केँ चेहरे पऱ अपनी मर्दानगी केँ निशान देखकर एक् अजीब सें गर्व औऱ लज्जा केँ बीचझूल रहा थां। "साली। तूने तोँ आजजान हि निकाल दि थि मां, " आर्यन नें प्रेम केँ मिले-जुले अंदाज़ मे फुसफुसाया।
कंचन अंजलि कि पीठ पर्र हि ढेर होँ गई। उसकाबदन पसीने सें भीग चुका थां। उसने अंजलि केँ कान केँ पास अपना चेहरा लाया औऱ उसे चूमते हुएकहा, "आज तोँ तूँ सच मे मेरी पत्नि बन गई जीजी.देख, क्याँ हाल किया हैं हम् दोनों नें तेरा। "
अंजलि नें अपनी आँखें नहि खोलीं। उसनेबस अपनाहाथ पीछे लेँ जाकर कंचन केँ चेहरे कों छुआ औऱ धीरे-धीरे सें मुस्कुराई। वो जानती थि कि आजरात उन्होंने जौ किया हैं, वो उन्हें नर्क केँ सबसे गहरे कोने मे लें जाएगा, मगरउस नर्क कां सुख किसी भि स्वर्ग सें कहीं अधिक मीठा थां।
तीनों नग्नबदन एक्-दूसरे सें लिपटे, पसीने औऱ लावे मे लथपथ, खाट पऱ बेजान पड़े थें। अंजलि केँ चेहरे पर्र आर्यन केँ विसर्जन कि सफेदी अभि भि चमकरही थि, जौ इसबात कि गवाह थि कि आजइसघऱ मे 'मम्मी-बेटा' औऱ 'बहनों' केँ रिश्ते हमेशा केँ लिएहवस कि आग मे भस्म होँ चुके थें।
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