Meri Jung (Restart) – New Episode
एपसोड 134 -
जब निशा नें इकराम कों बताया कि उसके ब्लड केँ कारण इकराम कि बॉडी मे कुछ चेंजआऐ हें औऱ अब वोँ एक् महिने केँ अंदर पूरीतरह सें ठीक होँ जाऐगा। तौ इकराम नें एक् राहत कि सांसली, जिसके बादउस कमरे मे एक् लम्बी खामोशी छा गई, जिसे आखिरकार इकराम नें भंग करतेहुए निशा सें सबाल किया
इकराम- आपने अपना ब्लड मेरी बॉडी केँ अंदर इंजेक्ट किया हैं, इस बारे मे कौनकौन जानता हैं….
निशा-बस तुम् औऱ मोनिका…। असल मे मे अकेले येसभी नहि कर सकती थि, इसलिये मुझे मोनिका कि हेल्प लेनीपडी। मगर उसने मुझसे वादा किया हैं कि वोँ इस बारे मे किसी कों कुछ भि नहि कहेगी, औऱ तुम् भि ध्यान रखना कि इस बारे मे किसी कों कुछ भि पता नां चले।
इकराम- आप् निश्चिंत रहो अप्पी मे खुदा कि शपथ खाता हूं कि मरतेदम तक येबात किसी सें नहि कहूँगा, बल्कि मे तौ स्वयं हि आपसेयही कहने बाला थां कि आप् इस बारे मे किसी सें कुछ भि मत बताना। क्योंकि अगर आपका ब्लड मुझेमौत केँ मूँह सें बाहर् निकाल सकता हैं तौ ये दूसरों केँ लिए भि उतना हि चमत्कारी होगा। अगर गलती सें भि येबात हमारे दुशमनों याँ फिन क्रिमनल्स कों पताचल गई तोँ वोँ अपने आप् कों औऱ भि ज़्यादा ताकतवर बनाने केँ लिए आपके पीछेपड जाऐंगे औऱ किसी बैम्पायर कि तरह आपकेबदन सें खून कि हर एक् बूंद कों चूस लेंगे।
इकराम कि बात सुनकर निशा मुस्कुराते हुए बोलि
निशा- मुझेपता हैं मेरे भइया… इसीलिए तोँ मैंने मोनिका सें वादा लिया हैं….
तभी अचानक सें इकराम कों कुछयाद आया औऱ वोँ बुरीतरह सें हैरान होतेहुए बोला
इकराम- एक् मिनट… अभि कुछदेर पहले आपनेकहा थां कि मेरा ऑपरेशन मोनिका औऱ जीजाजी नें किया थां
निशा-हाँ
इकराम- अब इसका क्याँ मतलब हैं…। क्याँ जीजाजी आपको ढूंडने केँ लिए अबतक बांधवगढ नहि गए।
निशा- नहि… शायद उन्हें अब धीरे-धीरे धीरे-धीरे अपनी गलतियों कां एहसास हौ रहा हैं, इसलिये वोँ य़हीं रुककर अपना फर्ज पूरा करना चाहते हें।
इकराम- अबयहा पऱ उनकाकौन सां काम अधूरा रह गय़ा हैं….
निशाा- उन्हें लगता हैं कि अभि मे पूरीतरह सें ठीक नहि हुई हूं। इसलिये जब तक मे पूरीतरह सें ठीक नहि हौ जाती, तब तक वोँ यहीँं रहकर मेरी सहायता करना चाहते हें।
इकराम- आपकी सहायता… पर्र क्यूं… क्याँ उन्होंने आपको पहचान लिया हैं….
निशा- नहि…। पहचाना मेरे भइया…। वोँ तौ बस मिशन पऱ नां जाने कां अपना गिल्ट दूर करने कि कोशिश कररहे हें, उन्हें लगता हैं कि अगर वोँ पहले हि इस ऑपरेशन पऱ चले जाते तोँ मेरे औऱ तुम्हारे संग वोँ सभी नहि होता।
इकराम- हुम्म तौ येबात हैं…। चलो अच्छा हि हैं… इस बहाने आप् दोनों केँ बीच कि दूरियाँ थोडी बहोत तौ कम होंगी
निशा-बस बसअब ज्याद बातें मतकरो…। तुम्हें अभि अभि तौ होशआया हैं…। औऱ तुम्हारे वार्ड केँ बाहर् तुमसे मिलने बालों कि एक् लम्बी लाईनलगी हैं, इसलिये फटाफट सबसे मिलकर थोडा रेस्ट कर लेना। मे साम कों फिन तुमसे मिलने आऊँगी….
इतना बोलकर निशा मुस्कुराते हुए इकराम केँ वार्ड सें बाहर् निकल गई। निशा केँ बाहर् आते हि बाकीलोग भि दो-दो, तीन-तीन केँ ग्रुप मे इकराम सें मिलने उसके वार्ड केँ अंदर जानेलगे, मगरउन लोगों नें इकराम कां अधिक टाइम नहि लिया, बस उसके हालचाल पूछकर बाहर् निकलआऐ, ताकि इकराम रेस्ट करसके। सब लोगों सें मिलने केँ दौरान इकराम भि बहुत थकान महसूस करनेलगा थां, जिस कारण सबसे मिलने केँ बाद उसने अपनी आँखें बंद कि औऱ सोने कि कोशिश करनेलगा। अगले एक् हफ्ते केँ अंदर इकराम बहुतहद तक रिकरवर होँ चुका थां औऱ उसकेजिद करने पर्र उसे निशा केँ एकदमबगल बाले वार्ड मे सिफ्ट कर दिया गय़ा थां।
ताकि वोँ जब चाहेतब निशा सें मिलसके औऱ हुआ भि ऐसा हि, निशा केँ बगल बाले वार्ड मे सिफ्ट होने केँ बाद तोँ जब भि इकराम कां मन करता वोँ निशा केँ वार्ड मे जाकर उससे बातें करने लगता, याँ फिन निशा स्वयं हि उसके वार्ड केँ अंदरचली जाती। इस बीच बाकीलोग भि उनकेपास आँ जाते थें, जिसके बाद वोँ लोग घंटो तक एक् दूसरे सें हंसी मजाक करते रहते। इसीबीच एक् दिनजब निशा अपने वार्ड मे अकेली बैठी हुइ थि, तभी हिना उसके कमरे मे आई, पर्र कमरे मे निशा कों अकेला देखकर उसने सबाल किया
हिना-मैम वोँ वोँ आज आपके वार्ड मे कोई दिखाई नहि देरहा हैं…। कहां गएसभी….
हिना कि बात सुनकर निशा मुस्कुराते हुए बोलीं
निशा- कहीं नहि… सभीलोग अपने अपने दफ़्तर मे पेंडिंग काम निपटा रहे हें… इतने दिनों सें मेरेसंग टाईमपास करने केँ दौरान उन लोगों कां बहुत साराकाम पेंडिंग होँ गय़ा थां।
हिना- अच्छा तौ येबात हैं… बैसे इकराम भि दिखाई नहि देरहा…। मे उसके वार्ड मे भि गई थि, मगर वोँ वहां पऱ भि नहि थां
निशा-हाँ वोँ असल मे मोनिका केँ कहने पऱ मिस्टर अजय औऱ मिस्टर मनोज केँ संगवॉक पर्र गय़ा हैं। ताकि उसके आर्गन प्रॉपर तरीके सें कामकर सकें औऱ वोँ जल्द सें जल्द रिकवर होँ सके।
हिना-ओह अच्छा तौ येबात हैं…। तोँ फिनठीक हैं मैम मे भि कुछदेर बादआती हूं…
इतना बोलकर हिना जैसे हि जानेलगी तौ निशाउसे टोकते हुए बोलीं
निशा- मतलब कि अगर इकराम यहा नहि होगा तोँ तुम् भि मेरेपास नहि रुकोगी
निशा कि बात सुनकर हिना जल्दी अपनी स्थान पऱ फ्रिज होँ गई, ऐसालग रहा थां जैसे उसकीकोई चोरी पकडी गई होँ। इससे पहले वोँ अपनी सफाई मे कुछ कहती निशा मुस्कुराते हुऐ बोलि
निशा- इतना हैरान होने कि जरूरत नहि हैं…। मुझेसभी पता हैं कि जबसे वोँ हादशा हुआ हैं, तब सें ऐसाकोई दिन नहि बीता हैं जब तुम् इकराम सें मिलने उसके वार्ड मे नाँ गई होँ, मैंने क्वीन कि हेल्प सें अपने कमरे मे लगी टी.बी। मे साफसाफ देखा हैं कि इकराम केँ होश मे आने सें पहले तुम् घंटों तक इकराम केँ पास बैठकर उससे बातें करती रहती थि, ताकि इकराम केँ अंदर जिंदा रहने कि ख़्वाहिश बनीरहे…। इसलिये तुम्हारा ये एहसान मे कभी नहि भूल सकती…। औऱ इकराम केँ होश मे आने केँ बाद भि ऐसाकोई दिन नहि बीता हैं जब तुम् इकराम सें मिलने नहि आई होँ, फिनभले हि वोँ अपने वार्ड मे होँ याँ मेरे वार्ड मे।
अबजब हिना कां सारासच निशा केँ सामने आँ चुका थां, तौ हिना औऱ ज़्यादा अनजान बनने कां नाटक नहि कर सकती थि, मगरइस बारे मे निशा सें बात करने मे उसे लज्जा भि आँ रही थि, इसलिये जैसे तैसे अपनी फीलिंग्स कों कंट्रोल करतेहुए हिना नें कहा
हिना- नहि मैमऐसा कुछ भि नहि हैं औऱ नाँ हि आपको मेराकोई एहसान मानने कि जरूरत हैं। क्योंकि आपने हि तोँ कहा थां कि हम् सब एक् हि परिवार कां हिस्सा हें। तौ फिन वोँ सभी तोँ मेरा फर्ज थां, बैसे भि आपने इकराम केँ लिए जौ कुछ भि किया हैं उसकेआगे तोँ मेरे वोँ छोटे मोटे एफर्टस कोई मायने हि नहि रखते हें।
निशा- हुम्म तुम्हारी येबात भि सही हैं कि हम् एक् हि परिवार कां हिस्सा हें… मगरये भि सच हैं कि तुम्हारे इन छोटे मोटे एफर्टस केँ कारण हि इकराम अब तक सर्वाईब कर पाया हैं। इसलिये तुम्हारे वोँ छोटे मोटे एफर्सट मेरे औऱ इकराम केँ लिए बहोत कीमती हें। बैसेसच सच बताना क्याँ तुम् इकराम कों पसन्द करती होँ….
निशा कि बात सुनकर हिना कां चेहरा लज्जा केँ कारण गुलाबी होँ गय़ा। जिसे देखकर निशा कों अपना जबाबमिल चुका थां। मगर निशा हिना केँ मूंह सें सारासच जानना चाहती थि। वहीं दूसरी तरफ हिना कि लज्जा केँ कारण हालत खराब हौ रही थि, संग हि संग वोँ इतनी जल्द अपनी फीलिंग्स किसी केँ सामने कन्फेस भि नहि करना चाहती थि। इसलिये उसने एक्सक्यूज़ बनाते हुएकहा
हिना- नहि मैम आप् जैसासोच रहीं हें, बैसाकुछ भि नहि हैं… हम् दोनों तोँ बस अच्छे साथी हें।
मगर निशा कहां हार मानने बाली थि, उसने हिना कों उक्साते हुएकहा
निशा- देखो हिना अच्छी तरह सें सोच समझकर अपना जबाब देना… कहींऐसा नां हौ कि अपने एक् गलत जबाब केँ कारण तुम्हें बाद मे पछताना पडे। क्योंकि अबजब इकराम तेजी सें रिकवर हौ रहा हैं तोँ मे चाहती हूं कि उसके पूरीतरह सें ठीक होने केँ बाद मे जल्द सें जल्द उसकी विवाह करके अपनेलिए एक् प्यारी सि भाभी लेँ आऊं। मगर अगर इकराम तुम्हें पसन्द नहि हैं तोँ कोईबात नहि, मे उसकेलिए कोई दूसरी लडकीढूड लूँगी।
निशा कि बात सुनकर हिना बुरीतरह सें डर गई औऱ जल्दी निशा केँ पासआकर एक् चेयर पर्र बैठते हुए बोलि बोलीं
हिना- नहि नहि मैम प्लीज ऐसामत करना…। वोँ वोँ मे उन्हें सच मे पसन्द करती हूं।
हिना कि बात सुनकर निशा थोडा इठलाते हुऐ बोलि
निशा- हूम्म तोँ अबआई नाँ लाईन पर्र…। चलोठीक हैं तुम् मुझे मेरी भाभी केँ रूप मे एक्सेप्ट हौ…। मगर एक् प्राब्लम हैं
निशा कि बात सुनकर हिना थोडा कन्फ्यूज होतेहुए बोलि
हिना-मगर क्याँ मैम
निशा-अगर तुम्हें मेरी भाभी बनना हैं तौ तुम्हें स्वयं सें हि पहल करनी होगी… क्योंकि मेरा भइया तौ इस प्रेम व्यार केँ मामले मे पूरीतरह सें लल्लू हैं…। औऱ हाँ जौ भि करना हैं जल्द करना होगा, क्योंकि इकराम केँ पीछे लडकियों कि एक् लम्बी लाईनलगी हुई हैं… पता नहि कबकौन सि लडकी मेरी भाभी बनकर आँ जाऐ……
निशा कि बात सुनकर हिना बुरीतरह सें परेशान होतेहुए बोलि
हिना- नहि नहि मैऐसा नहि होनेदे सकती….अगर इकराम कों कोई औऱ लडकी पसन्द आँ गई तोँ फिन मेरा क्याँ होगा…। जोयामैम प्लीज कुछ कीजिऐ नां….
हिना कों इसतरह परेशान देख निशा मुस्कुराते हुए बोलीं
निशा- रिलेक्स हिना…। अभि अभि तोँ भइया कों होशआया हैं…। अभि तौ उसे पूरीतरह सें ठीक होने मे अच्छा खासा टाइम लगेगा, तब तक तुम्हारे पास भि उसकेदिल मे स्थान बनाने केँ लिए पर्याप्त टाइम हैं। औऱ अगरफिन भि बात नाँ बने तोँ फिनमै तौ हूं हि… मगर मेरे एक् शर्त हैं….
निशा कि बात सुनकर हिना जल्दी बोलीं
हिना- क्याँ…। प्लीज मैम जल्द बताईऐ नाँ आपकी क्याँ शर्त हैं… मे आपकीहर शर्त मानने केँ लिए रेडी हूं।
हिना कि बात सुनकर निशा थोडा सोचने कां नाटक करतेहुए बोलीं
निशा- उम्म्ममम तोँ फिनठीक हैं… तुम्हें मेेरे लिएघऱ सें बना टेस्टी औऱ चटपटा खानां लाना होगा…। मे यहा कां फीका औऱ बेस्वाद खानां खाकरबोर होँ गई हूं….
निशा कि बात सुनकर हिना हैरान होतेहुए बोलीं
हिना-बस इतनी सि बात…। थैक्स गॉड आपने तौ मुझेडरा हि दिया थां… अगर आप् कहें तोँ मे हरदिन आपकेलिए घऱ कां बना खानां लाने केँ लिए सजधजकर हूं….
निशा- तौ फिनठीक हैं… आज सें तुम् मेरी मास्टर सेफ होँ…। औऱ हाँ तुम् चाहो तौ आज सें मुझेमैम कहने कि स्थान दिदी याँ फिन इकराम कि तरहआपा, अप्पी जोँ ठीकलगे बोल सकती हौ… मुझे अच्छा लगेगा…
हिना- थैंक्स मैम….ओह सॉरी सॉरी जोया अप्पी मे ध्यान रखूँगी…
अभि निशा औऱ हिनाआपस मे बातें कर हि रहे थें कि तभी उनके कमरे मे इकराम, अज्जू औऱ मोनू आँ गए। इकराम इस टाइम पहले सें बहुत बेहतर लगरहा थां। कमरे मे अंदरआते हि इकराम नें अपनेहाथ मे पकडाहुआ पैकेट निशा कि तरफ बडाते हुएकहा
इकराम- लो अप्पी आपके फेवरेट मसरूम नूडल्ट औऱ चीज सेंडविच बिद एक्ट्रा चिलीसॉस
इकराम कि बात सुनकर निशा कि आँखों मे चमक आँ गई औऱ उसने किसी छोटे बच्चे कि तरहखुश होतेहुए इकराम सें जल्दी वोँ पैकेट लें लिया। मगर अज्जू शायद निशा केँ इसतरह चुपके चुपके फास्ट फूड खानां खाने सें बिल्कुल भि खुश नहि थां। इसलिये वोँ निशा पर्र कमेंट्स करतेहुए बोला
अज्जू- अभि ठीकहुऐ जुम्मा जुम्मा चारदिन भि नहि हुऐ औऱ मैडमजी कों बाजार कां तीखा खानां खानां हैं… वाउभई वाउ। कमाल कि जोडी हैं दोनों भइया बहनों कि… अपने खाने पीने पऱ कोई कंट्रोल हि नहि हैं……
अज्जू कि बात सुनकर निशा नें उसे गुस्से सें घूरा औऱ फिन लापरवाही केँ संग बोलि
निशा- मिस्टर अजयअब मे पूरीतरह सें ठीक होँ चुकी हूं, इसलिये अब मे येसभी खा सकती हूं… बैसे भि मैंने मोनिका सें पहले हि परमीशन लें ली थि, औऱ हाँ फास्ट फूड कां भला मेरे बीमार होने सें क्याँ संबंध हैं…। बैसे भि जीवन कां असली मज़ा तोँ तीखा औऱ चटपटा खानां खाने मे हि हैं।
जोया कि बात सुनकर अचानक अज्जू कों एक् झटकालगा औऱ वोँ कुछ पलों केँ लिए अपनी पुरानी यादों मे खो गय़ा, उसेयाद आया कि केसेजब भि वोँ निशा केँ संग कहींबार घूमने याँ मार्केट जाता थां तोँ निशा उससे हमेशा जोया कि तरह हि तीखा औऱ चटपटा खानां खाने कि जिद्द करती थि, औऱ जब अज्जू उसे ज़्यादा तीखा खाने सें रोकता तौ निशा हमेशा अज्जू सें वहीबात कहती थि जौ ऐजेंट जीरो यानि जोया नें उससेकही हैं। यानि “जीवन कां असली आनंद तौ तीखा औऱ चटपटा खानां खाने मे हि हैं। ”
इसलिये जोया केँ मूँह सें निशा कां वही डायलॉग सुनकर अज्जू कों एक् समय केँ लिएउस पऱ शकहुआ, पऱ अगले हि लम्हा उसनेइसे एक् संयोग मानकर अपने दिमाग़ सें निकाल िदिया। क्योंकि निशा औऱ जोया दोनों केँ हि चेहरे एक् दूसरे सें बहुतअलग थें। तभी अज्जू कि नजर जोया यानि निशा पर्र पडी। जोँ पूरीतरह सें वेफिक्र होकर सेंडबिच खारही थि, उस टाइम निशा केँ चेहरे पर्र आऐ सेटिस्फेक्शन केँ एक्सप्रेशन देखकर अज्जू केँ चेहरे पर्र भि अपने आप् हि मुस्कान आँ गई थि, मगरपता नहि क्यूं उसेये सभी बहुत अधिक जानां पहचाना लगरहा थां, संग हि संगउसे निशा कि भि याद आँ रही थि। तभी एक् बारफिन कमरे कां दरवाजा खुला औऱ मोनिका कमरे केँ अंदरआई। मगर जैसे हि उसने देखा कि निशा सेंडबिच खारही हैं तौ वोँ थोडा क्रोध होतेहुए बोलि
मोनिका- येसभी क्याँ हैं जोयामैम
मोनिका कों अचानक वहा देखकर निशा नें जल्दी अपने नूडल्स अपने पीछे छिपालिए औऱ बोलि
निशा-क कुछ भि तौ नहि
इतना बोलकर निशा नें अपन हाथों मे बचाहुआ सेंडबिच एक् हि बार मे अपने मूँह मे ठूँस लिया। जिसके कारण उसके दोनों गालफूल गए थें। इसलिये निशाइस टाइम देखने मे बहुतफनी लगरही थि। निशा कों इस हालत मे देखकर सब केँ चेहरे पऱ मुस्कान आँ गई थि। तभी मोनू निशा केँ आनंद लेतेहुए बोला
मोनू-ओह माँ गॉड जोयामैम कों भि किसी सें डर लगता हैं….
मोनू कि बात सुनकर निशा नें गुस्से मे उसे घूरा औऱ जल्द जल्द अपना सेंडविच चबाते हुए बोलि
निशा- डरती तोँ मे किसी केँ बाप सें नहि हूं…। बो तौ बस मोनिका इस वक़्त मेरी डॉक्टर हैं तौ उसकीबात माननी पडती हैं।
मोनिका- अगरऐसा हैं तोँ आप् सेंडबिच क्यूं खा रहींथीं
निशा- सेंडबिच… कहां…। कौन सां सेंडबिच…। कैसा सैंडबिच…… मैंने तोँ कोई सेंडबिच नहि खाया
मोनिका- झूठमल बोलिऐ जोयामैम… मैंने अपनी आखों सें आपको सेंडविच खातेहुए देखा हैं।
मोनिका कि बात सुनकर निशायाद करने कां नाटक करतेहुए बोलीं
निशा- अच्छा बो…। वोँ तौ मिस्टर अजय मेरेलिए लेकरआऐ थें…। आज सुभह सुभह हि उन्होंने मेरा ब्लड टेस्ट करके मुझे बताया थां कि मेरेबदन मे चिली बिटामिन कि कमी हौ गई हैं। इसलिये मुझेढेर सारा तीखा औऱ चटपटा खानां खानां पडेगा। पर्र मैंने उन्हें साफसाफ मनाकर दिया थां कि मे मोनिका सें पूछे बगैरकुछ भि नहि खाऊँगी…। पऱ वोँ माने हि नहि औऱ मेरेलिए चीज सेंडबिच विद एक्सट्रा चिलीसॉस केँ संग लेकर आँ गए। अबकोई प्रेम सें कुछ खाने केँ लिए लाऐगा, तौ उसमना करना अच्छा नहि लगता। बैसे भि मेरा मानना हैं कि टेस्टी खाने कों कभी नाँ नहि कहना चाहिए वर्ना देवी अन्नपूर्ना नाराज हौ जाती हें।
निशा कि बात सुनकर अज्जू बुरीतरह सें हैरान रह गय़ा, उसेसमझ हि नहि आँ रहा थां कि वोँ कब जोया मैडम केँ लिए सेंडबिच लाया औऱ उसने जोया मैडम कां ब्लड टेस्ट आखिरकब किया। सबसेबडी बात जिसने अज्जू केँ मन कों हिलाकर रख दिया थां वोँ थि…। चिली बिटामिन…। अपनीअब तक कि जीवन मे अज्जू नें कभी भि चिली बिटामिन कां नाम नहि सुना थां।
कथा जारी हैं.
Ajju nisha k karib ane k too koy chans hi drishti nahee arahe he plz der kitni bi hu halanki nisha k sath koy or durghatana mat karbana plz plz plx
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Ek tarf hina ekram ko पसंद karrahi he dusri tarf nisha के sabd ajju ko nisha की bate yad arhi he लेकिन pehchan नहीं paraha he
Kya ajju nisha ko pehchan payega kyo की कोई और family membar too es जगह nihi paravesh krr sakta dekhte he ange क्या hotha he
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भाग 135 -
इससे पहले अज्जू अपनी सफाई मे कुछ भि कहता मोनिका नें कहा
मोनिका- कमऑन जोयामैम झूठ भि तौ ऐसाकहो, जौ पकड मे नाँ आऐ… मुझे पूरा यकीन हैं कि अजयसर कभी भि आपको सेंडबिच लाकर नहि दे सकते औऱ ये चिली बिटामिन आखिरकिस बला कां नाम हैं… मैंने आज तक तोँ कभी चिली बिटामिन कां नाम नहि सुना।
मोनिका कि बात सुनकर निशा बुरीतरह सें हैरान होने कां नाटक करतेहुए बोलीं
निशा-अरे…………… तुम्हें नहि पता….सेम ऑनयू मोनिका…। क्याँ फायदा इसदेश कि टॉप डॉक्टर होने कां जब तुम्हें चिली बिटामिन कां नाम भि नहि पता। अरे बाबाजब किसी इंशान कों लम्बे टाइम तक कम मिर्च मसाले कां फीका खानां दिया जाता हैं। तोँ उसकी बॉडी मे चिली बिटामिन कि कमी हौ जाती हैं। जोँ बहोत डेंजरस होती हैं, इसलिये उस इंशान कों तीखा औऱ मिर्च मसाले बाला खानां दिया जाता हैं। ताकिबदन मे चिली यानि मिर्च मसाले कि मात्रा सहीबनी रहे।
निशा कि बात सुनते हि अचानक उस कमरे मे मौजूद सब लोगों कि हंसीछुट गई। क्योंकि निशा नें जोँ बहाने बनाया थां, वोँ किसी थर्ड ग्रेड केँ बच्चे सें भि अधिक बेकार थां। पऱ चूँकि निशा सबकी सीनियर थि, इसलिये कोई निशा सें अधिककुछ कह भि तोँ नहि सकता थां। मगरफिन भि मोनिका नें निशा सें कहा
मोनिका- ऐ तौ हद हैं जोयामैम………। कम सें कमकोई ढंग कां बहाने तौ सोच लिया होता…खैर जोँ भि होँ अबजब आपनेढेर सारा चिली बिटामिन खा हि लिया हैं तोँ मुझे लगता हैं कि आपकी बॉडी मे अब चिली बिटामिन कि ओबरडोज हौ गई हैं। जोँ आपकेलिए औऱ भि ज़्यादा डेंजरस हौ सकती हैं। इसलिये चिली बिटामिन कों आपकी बॉडी मे न्यूट्रलाईज करने केँ लिए मुझे आपको एक् इंजेक्शन लगाना होगा।
मोनिका कि बात सुनकर निशा नें अपने पीछे छिपाऐ नूडल्स निकाले औऱ बेफिक्र होकर उन्हें खातेहुए बोलि
निशा-हाँ हाँ तोँ फिनठीक हैं…। अबजब तुम् मुझे इंजेक्शन लगाने हि बाली हौ तोँ मे सोचरही हूं कि क्यूं नाँ ऐ नूडल्स भि खालूँ। तुम् चाहो तौ मुझेबाद मे एक् कि स्थान दो इंजेक्शन लगा देना।
इतना बोलकर निशामजे लेकर नूडल्स खानेलगी। निशा कों इसतरह बेफिक्र देखकर मोनिका नें कहा
मोनिका- ऐ तौ हद हि हौ गई…। बैसेअजय सरयेसभी आपकी गलती हैं… आपने जोयामैम कों सेंडबिच औऱ नूडल्स लाकर क्यूं दिए
मोनिका कि बात सुनकर अज्जू जल्दी अपनी सफाई देतेहुए बोला
अज्जू- अरे नहि नहि… मैंने जोयामैम कों कुछ भि लाकर नहि दिया….ये सभी तौ इकराम लाया हैं। बैसे भि जोया तोँ मुझसे बोल रहीं थि कि तुमने हि उसेये सभी खाने कि परमीशन दि हैं।
मोनिका- मैने…अरे मैंने कब परमीशन दि….
तभी मोनूबीच मे बोला
मोनू- इसका मतलब तोँ ये हैं कि जोयामैम झूठ भि बोलती हें… बो भि सफेदझूठ
मोनू कि बात सुनकर निशा चिढते हुए बोलीं
निशा-हाँ तौ क्याँ हुआ….अगर किसी केँ खाने पीने पर्र रोक लगाओगे तोँ वोँ भला औऱ क्याँ करेगा…। दो महिने होने कों हें औऱ मुझेवही बेस्वाद खानां दियाजा रहा हैं। अब तौ मे पूरीतरह सें ठीक भि हौ गई हूं।
मोनिका- हाँ बाबाहाँ आप् ठीक होँ गई हें। पर्र पूरीतरह सें नहि…। अभि आपको अपने खाने पीने पर्र थोडा ध्यान रखना होगा…… आपकेऊपर एसिड अटैकहुआ थां… जिसका थोडा बहोत असर लम्बें टाइम तक रहता हैं। इसलिये ज़्यादा तीखा खानां खाने सें आपको अपनी बॉडी मे जलन होँ सकती हैं।
निशा- पऱ मुझे तोँ अब तक ऐसाकुछ भि महसूस नहि होँ रहा हैं
मोनिका- ये तोँ अच्छी बात हैं… मगरफिन भि यूं अचानक सें इतना तीखा खानां आपकेलिए बिल्कुल भि ठीक नहि हैं। पहले आपकोकुछ दिनों तक घऱ कां बना नॉर्मल खानां हि खानां चाहिए…। उसकेबाद धीरे-धीरे धीरे-धीरे तीखा खानां शुरुआत करना चाहिए थां।
अब तक निशा केँ नूडल्स समाप्त होँ चुके थें, इसलिये वोँ खाली वॉक्स डस्टबिन मे डालते हुए बोलीं
निशा- अच्छा ठीक हैं मेरी मम्मी मे समझ गई…। कल सें मे घऱ कां बना सादा खानां हि खाऊंगी…। बैसे भि हिना नें मुझसे वादा किया हैं कि वोँ मेरेलिए घऱ कां बना खानां लाऐगी। हैं नाँ हिना….
हिना जोँ अब तक निशा कि नौटंकी देखकर मजे लें रही थि, उसने निशा कां ये बचपना पहलीबार देखा थां, जिसे देखकर हिना कों यकीन हि नहि होँ रहा थां कि निशा उसकी सीनियर औऱ रॉ कि डिप्युटी चीफ हैं। मगर जैसे हि निशा नें उसकानाम लिया तौ वोँ जल्दी होश मे आतेहुए बोलीं
हिना-ज जी जोया अप्पी मे कल सें हि आपकेलिए घऱ कां बना हेल्दी खानां लाऊँगी
निशा- औऱ हाँ मोनिका कि बातों पर्र अधिक ध्यान मत देना… तुम् खानां थोडा तीखा हि बनाना।
निशा कि बात सुनकर हिना नें एक् नजर मोनिका पऱ डाली जौ गुस्से मे उसेदेख रही थि, मोनिका कों यूँ घूरता हुआ देखकर हिना नें अपनी नजरें झुकालीँ औऱ बोलि
हिना-जी अप्पी मे पूरी कोशिश करूँगी खानां तीखा औऱ हेल्दी बनाने कि
तभी इकराम भि उनकी बातों मे सामिल होतेहुए बोला
इकराम- हाँहाँ बोसभी तोँ ठीक हैं…। तुम्हें जैसा खानां लाना होँ लें आनां, मेरी जोया अप्पी खाने मे ज्याद नखरे नहि करती हें। मगर एक् बात मुझेसमझ नहि आँ रही हैं कि तुम् मेरी जोया अप्पी कों अप्पी क्यूं बोलरही हौ
हिना- क्योंकि जोया अप्पी नें मुझसे ऐसाकहा हैं
इकाराम- पर्र क्यूं….
इकराम कां सबाल सुनकर निशा तपाक सें बोलीं
निशा- मेरी मर्जी… तुझेही क्याँ प्राब्लम हैं… बैसे हि हम् सब एक् हि परिवार कां हिस्सा हें
तभी मोनू भि बीच मे कुदपडा औऱ बोला
मोनू- तोँ क्याँ अब मुझे भि जोयामैम कों दिदी केहना पडेगा
इकराम जोँ हिना केँ निशा कों अप्पी बोलने सें चिढाहुआ थां, वोँ मोनू कि बात सुनकर जल्दी बोला
इकराम- तुम्हारी मर्जी हैं… चाहो तोँ बोल सकते होँ… क्यूं अप्पी मैंनसही कहा नाँ….
इकराम कि बात सुनकर निशा लापरवाही सें अपने कंधेऊपर करतेहुऐ बोलि
निशा- मुझेकोई प्राब्लम नहि हैं…। तुम् जोँ चाहो मुझेबोल सकते होँ… बैसे भि मेरेलिए तोँ तुम् औऱ इकराम दोनों हि एक् जैसे हौ…….
तभी अज्जू भि उनकी बातों मे सामिल होतेहुए बोला
अज्जू- अरे बाबाये सभी आखिरचल क्याँ रहा हैं… ऐरॉ दफ़्तर हैं याँ फैमली ड्रामा…
इकराम- तुम्हें क्याँ लगता हैं मिस्टर अजय….
अज्जू- मुझे तोँ फैमली ड्रामा हि लगरहा हैं…। यहांहर कोई एक् दूसरे सें अपनाकोई नां कोई नाता बनाने मे लगाहुआ हैं। तोँ क्याँ अब मुझे भि जोयामैम कों दिदी केहना पडेगा
निशा जौ इस वक़्त पानीपी रही थि, अज्जू कि बात सुनकर अचानक अपने मूँह कां सारा पानी उगलते हुए हैरानी सें अज्जू कों देखने लगी। वोँ तोँ अच्छा थां कि निशा कां रिऐक्शन देखकर मोनिका जल्दी निशा केँ सामने सें हट गई थि, बर्ना सारा पानी मोनिका केँ ऊपर हि गिरता। हाँलाकि निशा केँ इस रिऐक्शन कों देखकर हिना, मोनू औऱ अज्जू कों कुछ भि समझ नहि आया, मगर इकराम औऱ मोनिका निशा केँ रिऐक्शन कां कारण अच्छी तरहसमझ रहे थें। आखिरकार इकराम नें बात कों संभालते हुएकहा
इकराम- अरेअरे…। मिस्टर अजय मेरी जोया अप्पी उम्र मे आपसेकम सें कम 4-5 साल छोटी तोँ होंगी… इसलिये आपका उन्हें दिदी कहना बिल्कुल भि ठीक नहि हैं…। बैसे भि येरॉ दफ़्तर हैं… नां कि कोई फैमली ड्रामा कां सेट, जौ हरकोई मेरी जोया अप्पी कों दिदी बोलने लगे, औऱ फिनयहा कोई नाँ कोईऐसा भि तौ होना चाहिए जौ जोया अप्पी केँ यार कि तरह उनकानाम लेकर बुलाऐ, बर्ना जोया अप्पी सबके मूँह सें अपनेलिए दिदी अप्पी सुनकर बोर हौ जाऐंगी।
हाँलाकि इकराम कि बात केँ पीछे छिपा अर्थ अज्जू कों तोँ नहि आया थां, मगरफिन भि वोँ बोला
अज्जू- थैंक्स गॉड मे तौ डर हि गय़ा थाा…। तौ फिनठीक हैं मे जोया कों उनकेनाम सें हि बुलाऊँगा।
इसीतरह कुछदेर तक आपस मे बातें करने केँ बाद निशा औऱ इकराम कों छोडकर बाकीलोग एक् एक् करकेवहा सें चलेगए। सबके जाने केँ बाद इकराम नें निशा सें कहा
इकराम- अप्पी ऐगलतबात हैं… आपने हिना सें आपको अप्पी कहने केँ लिए क्यूं कहा
इकराम कां सबाल सुनकर निशा मुस्कुराते हुए बोलीं
निशा-बस ऐसे हि… वोँ एक् अच्छी लडकी हैं औऱ मुझे मनपसंद भि हैं
इकराम- ये तौ कोई जबाब नहि हुआ….
निशा- जबाब तोँ मैंने सही दिया हैं मेरे भइया….मगर तुम्हें समझ नहि आयाये अलगबात हैं।
इकराम- सच कहूँ तौ मुझे आपकीऐ गोलमोल बातें कभीसमझ हि नहि आती हें।
निशा- तोँ फिन तुँ मेरी बातें समझने केँ लिए अपना छोटा सां दिमाग़ आखिर लगाता क्यूं हैं। तुँ बसवही कियाकर जोँ तेरा दिला कहता हैं…। बाकीसभी मुझपर छोड दियाकर।
निशा कि बात सुनकर इकराम एक् लम्बी सांस छोडते हुए बोला
इकराम- वही तोँ करता हूं अप्पी… खैर छोडोइन बातों कों औऱ ये बताओ कि अबआगे कां क्याँ प्लान हैं।
निशा-कुछ खास नहि बस तेरी विवाह केँ बारे मे सोचरही हूं
निशा कि बात सुनकर इकराम चिढते हुए बोला
इकराम- अरे दोस्त आप् फिन सें शूरू हौ गई…। अभि अभि तौ मे इतनेबडे हादशे केँ बादहोश मे आया हूं औऱ पूरीतरह सें ठीक भि नहि हुआ। कम सें कमकुछ दिनों तक तोँ मुझे सुकून कि सांस लेनेदो…। क्यूं बेबजह मुझ गरीब केँ पीछेपडी होँ। बैसे भि मे आपसे पहले हि कह चुका हूं कि जब तक आपकी लाईफ मे सभीकुछ ठीक नहि हौ जाता। तब तक मे विवाह नहि करूँगा
निशा-अरे मेरे भइया…। मेरे लाईफ मे सभीकुछ पहले सें हि ठीक हैं….
इकराम- मे आपके औऱ जीजाजी केँ एक् संग होने कि बातकर रहा हूं अप्पी…
निशा- मेरे भइयाअगर इस चक्कर मे पडेरहे तोँ तुम्हें सारी जीवन कुंवारा हि रहना पडेगा।
इकराम- हाँ तोँ ठीक हैं। मुझेकोई प्राब्लम नहि हैं…
निशा-मगर मुझे हैं…। मे नहि चाहती कि मेरा भइया सारी जीवन कुंवारा रहे
निशा कि बात सुनकर इकराम एक् बारफिन चिढते हुए बोला
इकराम- अरे दोस्त आपसे तौ बात करना हि बेकार हैं… मे जारहा हूं अपने वार्ड मे रेस्ट करने….साम कों आकर आपसेबात करूँगा…। तब तक शायद आपके दिमाग़ सें मेरी विवाह कां भूत भि उतरजाऐ।
इतना बोलकर जैसे हि इकराम वहा सें जानेलगा तौ निशा नें उसे पीछे सें टोकते हुएकहा
निशा-हाँ हाँचले जानां पहले मेरी पूरीबात तोँ सुनता जा
निशा कि बात सुनकर इकराम नें जैसे हि पलटकर निशा कों देखा तौ निशा नें मुस्कुरात ेहुए उससेकहा
निशा- वोँ क्याँ हैं कि मे तुम्हें एक् जरूरी बात बताना तोँ भूल हि गई थि।
इकराम- कौन सि बात…….
निशा-बात दरअसल ये हैं कि जब सें तुम् घायलहुऐ होँ, हिनाहर दिन तुमसे मिलने तुम्हारे वार्ड मे जाती थि औऱ बहुतदेर तक तुम्हारे पास बैठकर तुमसे बातें करने कि कोशिश करती थि। सच कहूं तौ उस दौरान हिना नें तुम्हारा बहोत ध्यान रखा हैं।
निशा कि बात सुनकर इकराम बुरीतरह सें हैरान होतेहुए बोला
इकराम- पऱ क्यूं… आखिर हिनाऐसा क्यूं कररही थि…
निशा- शायद वोँ तुम्हें पसन्द करती हौ.
इकराम- ब्हॉट…। पर्र ऐकबहुआ
निशा- मुझे क्याँ पता…। तुम् उससे स्वयं हि पूछ लेना…
निशा कि बात सुनकर इकराम निशा केँ पासआकर बैठते हुए बोला
इकराम- पऱ अप्पी मैंने कभी भि हिना कों उसनजर सें नहि देखा हैं
निशा- तौ अबदेख लें मेरे भइया…। बैसे वोँ एक् अच्छी लडकी हैं…। अगर वोँ मेरी भाभी बनेगी तौ मुझे बहोत खुशी होगी…मगर बस मेरे कहने पऱ हि उसेहाँ मत कहना, बल्कि अगर वोँ तुम्हें दिल सें मनपसंद आऐतभी बातआगे बडाना।
निशा कि बात सुनकर इकराम अपनासिर खुजलाते हुए बोला
इकराम- समझ गय़ा अप्पी… आप् पिछले एक्-ढे़ड महिने सें बस मेरी विवाह कि प्लानिंग कररही हौ….
निशा-हाँ तोँ क्याँ हुआ…। तुम्हारी उम्र हौ गई हैं…। अब विवाह नहि करोगे तोँ कब करोगे।
इकराम- ठीक हैं अप्पी अगर आप् यही चाहती हें तौ यहीसही, मगर पहले मे हिना सें बात करकेउसे अच्छी तरहसमझ तौ लूँ… उसकेबाद हम् इस बारे मे बात करेंगे।
निशा-ठीक हैं…। बैसे भि मुझेकोई जल्द नहि हैं….
इकराम- तोँ फिन मे भि चलता हूं, कुछदेर अच्छी तरह सें रेस्ट करने केँ बादइस बारे मे सोचूंगा।
इतना बोलकर इकराम निशा केँ कमरे सें बाहर् निकल गय़ा। इकराम केँ जाने केँ बाद निशा अपने लैपटॉप मे बिजी होँ गई। देखते हि देखते एक् महिने सें ऊपर कां वक्तबीत गय़ा। निशा तौ पहले हि पूरीतरह सें ठीक हौ चुकी थि, इसबीच इकराम भि अब पूरीतरह सें रिकवर हौ गय़ा थां। जिसके बाद वोँ दोनों अपनेघऱ मे सिफ्ट होँ गए औऱ मात्र जरूरी काम करने केँ लिए हि रॉ हेडक्वाटर आते थें। इस एक् महिने मे हिना औऱ इकराम भि एक् दूसरे केँ बहुत नजदीक आँ गए थें। इसलिये आखिरकार हिना नें इकराम सें अपनेदिल कि बातकह दि। जिसे इकराम नें भि खुशी खुशी एक्सेप्ट कर लिया।
जिसके बाद तौ उन दोनों केँ बीच प्रेम कि रेलगाडी अपनीफुल स्पीड मे दौडने लगी थि। इसी दौरान एक् दिनरॉ हेडक्वाटर मे इकराम केँ दफ़्तर मे जब इकराम औऱ हिना एक् दूसरे केँ कुछ ज़्यादा हि नजदीक आँ गए थें औऱ जैसे हि वोँ दोनों एक् दूसरे कों किस करने बाले थें, ठीकतभी अचानक सें इकराम केँ दफ़्तर कां दरवाजा खुला औऱ निशा अंदरआते हुए बोलि
निशा-अरे दोस्त इकराम आखिर तुम् कर क्याँ रहे हौ मे कब सें तुम्हें कॉलआई कररही……
इससे पहले निशा अपनीबात पूरीकर पाती उसकीनजर इकराम औऱ हिना पऱ पड चुकी थि। जिसे देखकर निशा नें जल्दी अपना चेहरा दूसरी तरफकर लिया, वहीं हिना औऱ इकराम भि शर्मिंदा होतेहुए एक् दूसरे अगल होँ चुके थें। तभी निशाउन दोनों कि टांग खींचते हुए बोलीं
निशा-अरे नालायकों अगर तुम्हें दफ़्तर मे यहीसभी करना हैं तौ कम सें कम दफ़्तर कां डोर तौ लॉककर लियाकरो।
निशा कि बात सुनकर इकराम हकलाते हुए बोला
इकराम- अरे नहि अप्पी हम् दोनों ऐसा बैसाकुछ नहि कररहे थें, वोँ तोँ हिना कि आँख मे कचडाचला गय़ा थां, इसलिये मे बसउसे साफकर रहा थां।
अब तक निशा कों भि अंदाजा होँ गय़ा थां कि वोँ दोनों अलग होँ चुके हें। इसलिये वोँ पलटकर उन दोनों कां चेहरा देखते हुए बोलि
निशा- अच्छा जी….ओहहां यादआया अभि कुछदेर पहले हि तौ यहां पऱ बहोत तेज आँधीआई थि… शायदतब हिना कि आँख मे कचडाचला गय़ा होगा… हैं नाँ हिना…
हिना-हाँ हाँ अप्पी तभी कचडाचला गय़ा थां
निशा-अरे ओ नालायकों कम सें कम एक्सक्यूज़ तौ ठीकठाक बना लियाकरो… हमारा येरॉ कां हेडक्वाटर दिल्ली शहर केँ कई किलोमीटर नीचेबना हुआ हैं। यहाभला आँधी तूफान कहां सें आऐगा, यहा केँ हर एक् कमरे मे एयर कंडीशनर लगाहुआ हैं औऱ हरदिन सुभह सुभह हि यहा कि अच्छी खासीसाफ सफाई भि होती हैं। यहा कचडा क्याँ धूल कां एक् छोटा सां कण भि मौजूद नहि हैं। फिनभला हिना कि आँख मे कचडा कहां सें चला गय़ा। हुम्म्ममम कहोकहो…
निशा कि बात सुनकर इकराम औऱ हिना सें कुछ कहते नहि बनरहा थां। इसलिये वोँ सिर झुकाऐ खडेहुए थें, आखिरकार इकराम नें हिम्मत करकेकुछ कहने कि कोशिश कि
इकराम- वोँ अप्पी वोँ बातअसल मे ऐसी हैं कि वोँ….
इससे पहले इकराम अपनीबात पूरीकर पाता, निशाउसे बीच मे हि रोकते हुए बोलि
निशा- रहनेदो रहनेदो…। तुमसे नहि होगा मेरे भइया…। मे सभी समझती हूं…। बैसे भि तुम् दोनों कां चेहरा जौ लज्जा सें लाल पीला होँ रखा हैं, उसने मुझेसभी कुछबता दिया हैं। इसलिये मेरे सामने ऐ फालतू केँ बहाने बनाना बंदकरो। मे अभि अपने दफ़्तर मे बापिस जारही हूं, जब तुम् दोनों कां ये प्रोग्राम पूरा होँ जाऐ तोँ मुझसे मेरे दफ़्तर मे आकर मिलो, मुझे तुम् दोनों सें कुछ जरूरी बात करनी हैं, औऱ हाँ दरवाजा अंदर सें लॉक करनामत भूलना।
इतना बोलकर इकराम औऱ हिना कां जबाब सुने बिना हि निशावहा सें चली गई।
स्टोरी जारी हैं.
Meri Jung (Restart) - Kahani ab aur interesting hogi
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