Meri Jung (Restart) – New Episode
Ab tak के saare Update एक saath padhe sabhi jabardast Jahan Nisha अब ghrr से baahar rahne के kaaran Ajju kaa उसके prati ishq और Family के logon kaa unke galti kaa pachtawa dhong lag raha h और har समय के prakaar wo ye सोच rahi h की उसके इस balidan से Ajju और उसकी family खुश honge और Nisha के chalte Ajju joh dubidha में h की दो patnion ko chalte wo jiya और उसकी beti radha kaa dhang से khayal नहीं रख paa raha h sayad usmein sudhaar hu और जैसे Ajju ko hadkake apne business में dhyaan dene और Daaru से dur rahne ko बोला waisa hoga.अब तो Ajju और Nisha के final confrontation dekhne में mazaa aayega जब dono apne apne paksh rakhenge। waiting for your next update.
Meri Jung (Restart) – New Episode
एपसोड 143 -
जब दिव्या कों निशा कि बातों कां सहीसही मतलबसमझ नहि आया तौ वोँ झल्लाते हुए बोलि
दिव्या- क्याँ…………। आरयू सीरियस निशा दि…। आप् जानती भि हौ कि आप् क्याँ कहरही होँ…। आखिर आप् अज्जू केँ संगऐसा केसेकर सकती होँ….
अभि निशा नें अपनीबात पूरी भि नहि कि थि कि तभी उसकेमन मे एक् नया ख्याल आया औऱ जैसे हि उसने निशा कां मुश्कुराता हुआ चेहरा औऱ उसकी आखों कि चमक देखी तौ वोँ सारा माजरा समझ गई। अगले हि समय दिव्या केँ चेहरे पर्र खुशी औऱ हैरानी केँ मिले जुलेभाव थें। वोँ बडी मुश्किल सें अपने इमोशन कों कंट्रोल करतेहुए बोलीं
दिव्या- हम् लोगजब आपको ढूंडते हुए गाँवगए थें, तब गाँव कि औरतों केँ बीच आपको लेकरकुछ अफवाहें चल रहीं थि। कहीँ वोँ सारी अफवाहें सच तौ नहि थि…। निशा दि बताईऐ नाँ। क्याँ मे जौ सोचरही हूं वो सच हैं…….
निशा दिव्या केँ मन मे चलरही बातों कों पहले हि पढ चुकी थि। इसलिये दिव्या कि पूरीबात सुनकर वोँ मुस्कुराते हुए बोलि
निशा-हाँ जौ तुम् सोचरही हौ वोँ सच हैं…
निशा केँ हाँ बोलते हि दिव्या करीब चीखते हुए बोलीं
दिव्या- व्हॉट…। ओहमाई गॉड निशा दि…। आखिर आप् अपनी जीवन कां इतनाबडा राज हम् लोगो सें केसे छिपा सकती हौ……
निशा- मैंने ये जानबूझकर नहि किया हैं। जोँ कुछ भि हुआ हैं वोँ बस हालातों केँ आगे मजबूर होकरहुआ हैं। पऱ अबजबइस बात कों इतना वक्तबीत गय़ा हैं तोँ मे नहि चाहती कि येराज किसी औऱ केँ सामने खुले। इसलिये तुम्हें मुझसे वादा करना होगा कि जब तक मे इसदेश कों छोडकर चली नहि जाती, तब तक तुम् मेरी जीवन कां येराज किसी सें भि नहि बताओगी।
दिव्या- नहि निशा दि नहि…। मे ऐसाकुछ भि नहि करने बाली…। मे आज हि मां औऱ अज्जू कों सभीकुछ सचसचबता दूँगी…। यहा तक कि आप् हि जोया होँ येबात भि मे सबकोबता दूँगी।
निशा- पागलों बाली बातें मतकरो दिव्या… मैंने तुमपर भरोसा करके तुम्हें अपनी जीवन कां सबसेबडा राज बताया हैं औऱ अपनेदिल कि हर एक् बात तुमसे शेयर कि हैं। अगर तुमने मेरा भरोसा तोड दिया तोँ शायद मे भविष्य मे किसी औऱ इंशान पर्र कभी भि भरोसा नहि कर पाऊँगी। इसलिये तुम्हें मेरीशपथ हैं…। जब तक मे यहा हूं कम सें कमतब तक तुम् मेरेहर एक् राज कों बस अपनेदिल मे छिपाकर रखो।
निशा कि बात सुनकर दिव्या पूरीतरह सें निऱाश होतेहुए बोलि
दिव्या- ये आपनेठीक नहि किया हैं निशा दि… आपको मुझेशपथ नहि देनी चाहिए थि। मगरअब जब आपने मुझे अपनीशपथ दे दि हैं…। तोँ मे वादा करती हूं कि आपकाये राज मे किसी कों नहि बताऊँगी। मगरअगर आपकोये सभीराज हि रखना थां तोँ आपने मुझेइस बारे मे बताया हि क्यूं औऱ क्यूं आपने डायवोर्स बालीबात मुझसे कही।
दिव्या कि बात सुनकर निशा मुस्कुराते हुए बोलीं
निशा-असल मे मैंने बहुत पहले हि तयकर लिया थां थां कि हमेशा हमेशा केँ लिएइस देश कों छोडकर जाने सें पहले मे तुम् सबसे मिलकर औऱ सारे गिले शिकवे दूर करके जाऊँगी। संग हि संग अज्जू औऱ जिया कों छोडकर बाकी लोगों केँ लगातार कांटेक्ट मे भि रहूँगी। इसलिये आज नहि तौ कल मेराराज सबकोपता चलना हि थां। पऱ मे हर किसी केँ सबालों कां जबाब नहि दे सकती थि। इसलिये मैंने अपनेदिल कि हर एक् बाद तुम्हें बताई हैं। ताकि मेरे जाने केँ बाद तुम् मेरीतरफ सें सब लोगों केँ सबालों केँ जबाबदे सको। बैसे भि मुझे पूरा यकीन हैं कि इकराम कि इंगेज्मेंट केँ बाद अज्जू जरूर मुझे ढूंडने केँ लिए बांधवगढ जाऐगा। हाँलाकि मे चाहूँ तोँ बांधवगढ नां जाकर उसका प्लान बेकार कर सकती हूं। पर्र मे स्वयं भि अंतिम बार उससे मिलना चाहती हूं औऱ उसी स्थान पर्र मिलना चाहती हूं जहाँ हमने अपनी जीवन केँ सबसे खुशनुमा लम्हा बिताऐ थें।
इतना बोलकर निशा नें डायवोर्स पेपर औऱ न्यूज चैनल मे दिएगए इश्ताहर बगैरह कि फाईल दिव्या कि तरफ बडाते हुएकहा
निशा-मगर मे चाहती हूं कि अज्जू केँ बांधवगढ जाने सें पहले तुम् इन डायवोर्स पेपर औऱ इस फाईल कों उसेदे दो औऱ उसेयाद दिलाओ कि विवाह केँ बाद मैंने उससे क्याँ वादा किया थां औऱ क्यूं किया थां। ताकिजब हमारी अंतिम मुलाकात होँ तौ वोँ हमेशा हमेशा केँ लिए मुझसे अलग होने केँ लिए मैंटली सजधजकर रहे औऱ हाँ उससे कहना कि उसने मेरे अंदर अपना बनाया सीरम इंजेक्ट करके मुझे जोँ सुपर पावर दि हें। उसकेलिए मे सारी जीवन उसकी एहसानमंद रहूँगी, मगरसंग हि संग मुझेइस बात कां सारी जीवन अफसोस भि रहेगा। क्योंकि अगर वोँ मेरे अंदर सीरम इंजेक्ट नहि करता, तौ आज परिस्थितियाँ बहुतअलग होतीं।
निशा कि बात सुनकर दिव्या नें वोँ डायवोर्स पेपर लेकर अपने हैंडबैग मे रखतेहुए कहा
दिव्या- ठीक हैं निशा दि…। जैसा आप् चाहती होँ, मे बैसा हि करूँगी…। पर्र आपको भि मुझसे वादा करना होगा कि यहा सें जाने केँ बाद आप् रैगुलर मेरे औऱ मां-पिताजी केँ कांटेक्ट मे रहोगी, संग हि संग आपको अपनी लोकेशन भि मुझे बतानी होगी। ताकिजब भि हमारा मनकरे, हम् आपसे मिलने आँ सकें।
दिव्या कि बात सुनकर निशा मुस्कुराते हुए बोलि
निशा-ठीक हैं बाबा………… मे जाने सें पहले तुम्हें अपनी लोकेशन जरूर बताकर जाऊंगी। अब तोँ खुश होँ जाओ…। मुझसे तुम्हारा ये उदाश चेहरा देखा नहि जारहा हैं। अगर तुमने अपना चेहरा ऐसे हि लटका केँ रखा तोँ मे दफ़्तर मे आनां बिल्कुल बंदकर दूँगी।
निशा कि बात सुनकर दिव्या मुस्कुराने कि कोशिश करनेलगी। थोडी बहोत कोशिश केँ बाद आखिरकार दिव्या केँ चेहरे पर्र एक् हल्कि सि मुस्कान आँ हि गई। जिसे देखकर निशा भि मुस्कुराते हुए बोलि
निशा-ऐ हुई नाँ बात….चलो अबइनसभी फालतू बातों कों छोडो औऱ अपनेआज केँ प्लान पर्र फोकसकरो।
निशा कि बात सुनकर दिव्या हैरान होतेहुए बोलि
दिव्या- आज कां प्लान….
निशा-अरे बाबा शॉपिंग पऱ जाने कां….
दिव्या- पऱ इकराम भइया कि होने बाली दुल्हन तोँ अह तक आई हि नहि…। औऱ इकराम भइया भि पता नहि कहां हें….
निशा-अरे बोलोग बसआते हि होंगे, तब तक हम् दोनों एक्-एक् कपकप कॉफ़ी औऱ पी लेते हें
दिव्या- हाँये सही रहेगा…। बैसे भि इतनासभी कुछ जानने केँ बाद मेरामूढ बहुत खराब हौ चुका हैं।
निशा-अरे जेठानी जी…। पहले पूजा कों फोन करकेदो कपकप कॉफ़ी केँ लिएबोल दूँ, उसकेबाद तुम्हारा मूढ भि ठीककर दूँगी।
इतना बोलकर निशा नें जैसे हि अपना मोबाईल उठाया, ठीकतभी निशा केँ दफ़्तर कां दरवाजा खुला औऱ इकराम एक् सुंदर लडकी केँ संग निशा केँ दफ़्तर केँ अंदरआया। उन दोनों नें अपने हाथों मे कप कॉफ़ी एवं स्नैक्स पकडेहुए थें। आंदरआते हि इकराम बोला
इकराम- टन टानाऐँ…। किसी कों भि फोन करने कि जरूरत नहि हैं… आदमी अपनी बंदी केँ संगकप कॉफ़ी औऱ स्नैक्स लेकर हाजिर हैं….
इकराम कि बात सुनकर निशाउसे डांटते हुए बोलीं
निशा- तुँ कुछ अधिक हि जल्द नहि आँ गय़ा…। तेरीपता भि हैं कि हम् लोगकब सें तुम्हारे आने कां प्रतीक्षा कररहे हें।
अब तक हिना औऱ इकराम अपने हाथों मे पकडा सारा सामान टेबिल पऱ रख चुके थें। इसलिये निशा कि बात सुनकर इकराम एक् कप कॉफ़ी कां कप उठाकर निशा केँ बगल मे बैठते हुए बोला
इकराम- अरे अप्पी हम् लोग तौ बहुतदेर पहले हि दफ़्तर केँ लिए निकलआऐ थें, मगरये दिल्ली कां ट्रेफिक भि नां…। क्याँ करूँ इसका….
निशा-अरे…। कितना बेशर्म इंशान हैं तूँ…। अपनेलिए कप कॉफ़ी लेकरबैठ गय़ा औऱ मेरी होने बाली भाभी अभि तक खडी हुइ हैं। नाँ तौ उसे बैठने केँ लिएकहा औऱ नां हि उसकीकोई आवभगत कि….
निशा कि बात सुनकर इकराम लापरवाही सें बोला
इकराम- अरे तौ मैंने कौन सां उसेमना किया हैं। सोफा पहले सें हि डलाहुआ हैं औऱ बैठने केँ लिए भि पर्याप्त स्थान हैं। उसे जहाँठीक लगेबैठ जाऐ। रही बातआव भगत करने कि तोँ वोँ तौ आपको करनी चाहिए… क्योंकि हिना आपकी होने बाली भाभी हैं मेरी नहि….
आखिरकार निशा औऱ इकराम केँ बीच होँ रहीबहस कों बीच मे रोकते हुए दिव्या बोलीं
दिव्या- अरेबस बस निशा दि…। आप् दोनों अपनीबहस बाद मे करते रहना, पहले मेरा औऱ इकराम कि होने बाली बेगम कां परिचय तौ करवादो।
इतना बोलकर दिव्या नें एक् नजर हिना पर्र डाली, जौ इस वक़्त लाईट पिंककलर कि सलवार कुर्ती मे वोँ कुछ ज़्यादा हि हसीनलग रही थि। हाँलाकि दिव्या नें भि आजरेड एण्डयलो कॉम्बिनेशन मे सलवार कुर्ती पहनी हुई थि औऱ वोँ भि इससमय हिना सें कम हसीन नहि लगरही थि। वहीं दूसरी तरफ निशाआड डार्क ब्लूकलर केँ जींस औऱ व्हाईट कलर केँ टॉप मे थि औऱ उसनेकोई एक्सट्रा मेकअप भि नहि किया थां। मगरफिन भि वोँ हिना औऱ दिव्या सें ज़्यादा हसीनलग रही थि। जैसे हि निशा नें दिव्या कि बात सुनी तौ वोँ मुस्कुराते हुए बोलि
निशा- जोँ हुकुम जेठानी जी….
इतना बोलकर निशा हिना कों देखते हुए बोलीं
निशा- सॉरी हिना इकराम केँ चक्कर मे मे तुमसे बैठने केँ लिए कहना तौ भूल हि गई…। आओ मेरेपास आकर बैठो… पहले मे तुम्हारा औऱ दिव्या कां आपस मे परिचाय करवादूँ। बाकी बातें तोँ बाद मे होती रहेंगी।
निशा कि बात सुनकर हिना चुपचाप निशा केँ पास जाकरबैठ गई। हिना केँ बैठते हि निशा नें दिव्या औऱ हिना कों कप कॉफ़ी कां एक् एक् कप थमाया औऱ फिन एक् कप स्वयं उठाकर हिना कां परिचय दिव्या कों देतेहुए बोलि
निशा- तोँ मेरी प्यारी जेठानी जी… इनसे मिलिए ऐ हें मिस हिनाखान, जौ एक् आई.पी.एस। ऑफिसर हें। मगर एक् पुलिस बाली होने केँ बाबजूद हिना नें मेरे भइया इकराम कां दिला चुरा लिया हैं औऱ अब जल्द हि मेरी भाभी भि बनने बाली हें। इनकी फैमली मे इनके माँ-बाप औऱ एक् भइया हैं। हिना केँ अब्बू सलीमखान एक् जाने माने लॉयर हें औऱ अम्मी शावाना बेगम एक् हाऊस बाईफ हें। जवकि इनका भइया अनीशखान इस टाइमलॉ कि स्टडी कररहा हैं। ताकिआगे चलकर वोँ अपने पिता कि विरासत संभाल सके।
हिना कां परिचय दिव्या कों देेने केँ बाद निशा नें थोडी सि कप कॉफ़ी शिप कि औऱ फिन वोँ दिव्या कां परिचय हिना कों देतेहुए बोलीं
निशा- औऱ मेरी प्यारी होने बाली भाभीजी…। इनसे मिलिए ऐ हें मिसेज दिव्या दुबे…। तुम् मोनूओह सॉरी सॉरी आई.पी.एस। मनोज दुबे कों तोँ जानती हि होगी, असल मे दिव्या मनोज कि वाईफ हैं औऱ हमारी इस कंपनी TECS यानि थर्डआई कम्प्यूटर शॉलूशन कि एम.डी। भि हें। संग हि संग मेरी औऱ इकराम कि भाभी श्री भि हें।
निशा कि बात सुनकर हिना अपनीकप कॉफ़ी शिप करतेहुए बोलीं
हिना-वेट…। क्याँ कहा आपने भाभी…। पऱ आप् तोँ कुछदेर पहले इन्हें जेठानी जीबोल रहीथीं…। फिनऐ आपकी भाभी केसे हौ सकती हें….
हिना कि बात सुनकर दिव्या हंसते हुए बोलि
दिव्या- सभीकुछ कनफ्यूजिंग लगरहा हैं नाँ…। मगर हैं नहि…। क्योंकि निशा दि सचबोल रही हें। मे इनकी भाभी हूं औऱ ऐ मेरी ननदी। असल मे मेरी सासू मां औऱ ससुरजी जी निशा दि कों अपनीसगी बेटी सें अधिक प्रेम करते हें औऱ मेरे पति औऱ मेरी ननदी भि निशा दि कों अपनीसगी बेहन हि मानते आऐ हें। इस नाते निशा दि मेरीबडी ननदी औऱ मे उनकी भाभी हुईँ। चूँकि इकराम निशा दि कां भइया हैं। इसलिये मे इकराम कि भि भाभी हूं औऱ तुम्हारी जेठानी।
दिव्या कि बात सुनकर हिना थोडा कनफ्यूज होतेहुए बोलीं
हिना- पर्र अप्पी आपको जेठानी जी क्यूं बोलरही थीं….
दिव्या- जब निशा दि कां मूढ अच्छा होता हैं औऱ उन्हें मेरी टांग खींचनी होती हैं तौ वोँ मुझे जेठानी जी कहकर बुलाने लगती हें। एक् तरह सें ये निशा दि कां मेरेलिए प्रेम दिखाने कां तरीका हैं। अगर तुम् चाहो तोँ इसे हमारा कोडवर्ड भि मान सकती होँ।
हिना- वोँ तोँ मे समझ गई… पर्र जेठानी जी बोलने केँ पीछे क्याँ कथा हैं….
इसबार हिना केँ सबालों कां जबाब निशा देतेहुए बोलि
निशा-कुछ खास नहि…। असल मे जब दिव्या औऱ मनोज एक् दूसरे कों डेटकर रहे थें। उसी दौरान एक् दिन मौका देखकर मे, मिस्टर अजय औऱ रीनू कबाब मे हड्डी बनकर इनकेपास जा पहुँचे औऱ वहा पर्र मैंने दिव्या कों जेठानी जी औऱ मोनू कों जेठ जी कहकर चिढाना शुरुआत कर दिया। बस तभी सें मेरामूढ जब भि अच्छा होता हैं तोँ मे दिव्या कों जेठानी जी बोलने लगती हूं।
निशा कि बात सुनकर हिना मुस्कुराते हुए बोलीं
हिना-ओह तौ येबात हैं…। मतलब कि आप् लोगों नें भि अपनी लाईफ मे पहले सें हि अच्छी खासी मस्ती कररखी हैं….
निशा- उम्मममम… सच कहूँ तोँ हाँं… हमारी कॉलेज लाईफ एकदम मस्त औऱ स्मूथ तरीके सें बीती हैं। मगर कॉलेज लाईफ ख़त्म होते हि हम् लोग एक् ऐसीजंग मे उलझकर रहगए हें। जिसका कोईअंत नहि हैं…… पर्र फिन भि हम् लोग छोटी छोटी बातों मे खुशियाँ तलाशकर हि लेते हें….
हिना- हु्म्म वोँ तोँ हैं…। पऱ अबजब मे भि आपके परिवार कां हिस्सा बनने बाली हूं तोँ आपको दिव्या दिदी सें जेठानी जी कहनाबंद कर देना चाहिए। क्योंकि सही मायने मे दिव्या दिदी अब मेरी जेठानी हें। जबकि मे औऱ दिव्या दिदी आपकी भाभी….
निशा-हां ये भि सही हैं…। तोँ क्याँ अब मुझे दिव्या सें भाभी कहना होगा….
मेरीबात सुनकर दिव्या हंसते हुए बोलि…
दिव्या- जोँ आपकादिल कहे वोँ आप् कह सकती होँ….
निशा- तौ फिनठीक हैं… आज सें मे तुम्हें दिव्या भाभी कहकर हि बुलाऊँगी… बैसे भि जिसबजह सें मे तुम्हें जेठानी जी कहकर बुलाती थि, वोँ बजह तौ कबकि समाप्त होँ चुकी हैं।
इससे पहले कि निशा एक् बारफिन पुरानी यादों मे खोजाऐ, दिव्या उसेबीच मे हि टोकते हुए बोलि
दिव्या- अरे दोस्त निशा दि…। अब छोडो भि नाँ उन पुरानी बातों कों…। अबजब हम् नऐ शिरे सें अपनी जीवन शुरुआत कररहे हें तौ हमें अपनीनई नईं यादें भि तोँ बनानी चाहिए नाँ……
दिव्या कि बात सुनकर निशा एक् लम्बी सांस छोडते हुए बोलीं
निशा-हाँ वोँ तोँ हैं…। अच्छा ठीक हैं बाबा…अब जल्द सें अपनीकप कॉफ़ी औऱ स्नैक्स ख़त्म करो। उसकेबाद हमें शॉपिंग पर्र भि जानां हैं।
निशा कि बात सुनकर इकराम जल्दी बीच मे बोलपडा
इकराम- शॉपिगं…। तोँ क्याँ मे भि आप् लोगों केँ संगचल रहा हूं
दिव्या- नहि…। बिल्कुल भि नहि….
इकराम- पर्र भाभी मेरी भि तोँ शॉपिंग बाकी हैं अभि……
निशा- मैंने मोनू औऱ तुम्हारे जीजाजी सें बातकर ली हैं… वोँ दोनों तुम्हारे संग शॉपिंग पर्र जाऐंगे। इसलिये हमसेकुछ भि कहने कि स्थान उन दोनों कों कॉलआई करके परेशान करो।
निशा कि बात सुनकर इकराम हैरान होतेहुए बोला
इकराम- व्हॉट……। जीजाजी औऱ मनोज भइया केँ संग शॉपिंग…। नहि नहि नहि…। मे उन दोनों खडूँसों केँ संग शॉपिंग पर्र नहि जाने बाला।
निशा- तोँ फिनठीक हैं… बिना शॉपिंग केँ हि रहो….
इकराम- ऐ तौ गलतबात हैं अप्पी…। हिना कि शॉपिंग कि इतनी चिंता औऱ मेरी बिल्कुल भि नहि….
दिव्या- कुछ भि गलत नहि हैं…। बैसे भि शॉपिंग करना हम् लडकियों कां जन्म सिद्ध अधिकार हैं…। औऱ इसकाम मे हमें अच्छा खासा टाइम भि लगता हैं। तुम् लडकों कां क्याँ हैं…। बस 5-10 मिनट मे शॉपिंग करके फ्री होँ जाते हौ…
आखिरकार दिव्या कि बात सुनकर इकराम हार मानते हुए बोला
इकराम- अच्छा ठीक हैं बाबा मे मनोज भइया औऱ जीजाजी सें बातकर लेता हूं….
इतना बोलकर इकराम दफ़्तर केँ बाहर् निकल गय़ा, जबकि निशा, दिव्या औऱ हिना एक् दूसरे सें बातें करने मे बिजी होँ गईँ।
स्टोरी जारी हैं.
Meri Jung (Restart) – New Episode
iss update की कुछ bate
1 ajju के paas divorse fil pahuchne bali he
2 nisha kaa bachha he yeh sabit hu गया लेकिन कहा he yeh abi नहीं ptaa
3 nisha badhab gad mai ajju से milne bali he milne के bad क्या pratikiriya hongi yeh ptaa chalega
4 guruji के kahe anusar ajju ko nisha क्या kahane bali the yeh ptaa lagne पर nisha sath rahegi too ptaa lagega
Next update mai sayed sthiti और saf hu
Meri Jung (Restart) - Kahani ab aur interesting hogi
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