Meri Jung (Restart) – New Episode
सॉरीयार दफ़्तर केँ काम सें कुछ दिनों केँ लिएआउट ऑफ सिटी गय़ा हुआ थां। पूरे एक् हफ्ते सें रेगुलर सफर मे रहने केँ कारण एपसोड पोस्ट नहि करपया थां। कलरात कों हि घऱ बापिस आया हूं। इसलिये आजसाम तक पक्का एपसोड पोस्ट कर दूँगा।
Meri Jung (Restart) – New Episode
भाग 146 -
इसबार इकराम कि शॉपिंग मे उन लोगों कों ज़्यादा वक्त नहि लगा। इसी दौरान निशा केँ कहने पर्र दिव्या नें मोनू, औऱ पिताजी जी केँ लिए भि कुछ कपडे खरीदलिए थें। जिनकी पेमेंट निशा नें अपनीतरफ सें कि थि संग हि संग निशा नें अज्जू केँ लिए भि कुछ कपडे खरीदकर उसे तोहफा करदिए थें। मगरइस बार अज्जू नें निशा सें तोहफा लेने मे अधिक नाँ नकुर नहि कि, क्योंकि वोँ येबात अच्छी तरह सें समझ गय़ा थां कि जोया किसी नां किसीतरह उसे तोहफा लेने केँ लिएमना हि लेगी। आखिरकार सारी शॉपिंग होने केँ बाद वोँ लोग अपने अपनेघऱ पऱ चलेगए।
घऱ पहुँचकर दिव्या नें सब लोगों कों उनके तोहफा देदिए, हाँलाकि मम्मी कों दिव्या कि बॉस यानि जोया सें कोई भि तोहफा लेने मे लज्जा आँ रही थि, मगरजब पिताजी जी नें खुशी खुशी अपना तोहफा लें लिया, तौ मां कों भि तोहफा एक्सेप्ट करना हि पडा। वहीँ दूसरी तरफ जिया भि जोया कां तोहफा लेने मे थोडा हिचकिचा रही थि, पऱ जब उसने देखा कि जोया नें नाँ शिर्फ उसकेलिए बल्कि पूरी फैमली केँ लिए तोहफा खरीदे हें, खासकर राधा पर्र तौ जोया नें कुछ अधिक हि खर्चकर दिया हैं। तोँ उसकेपास भि जोया यानि निशा केँ दिए उपहार एक्सेप्ट करने केँ अलावा कोई दूसरा मार्ग नहि थां।
हाँलाकि सब लोगों केँ तोहफा देखने केँ बाद अज्जू कों अपनेऊपर कुछ अधिक हि लज्जा आँ रही थि। क्योंकि जोया नें सब लोगों केँ लिए बहुत हसीन औऱ ब्रांडेड कपडे खरीदे थें, जौ बहुत अधिक मंहगे भि थें। मगर दूसरी तरफ अज्जू नें चिढकर जोया केँ लिए जोँ साडी उपहार कि थि, वोँ नां तोँ देखने मे ज़्यादा अच्छी थि औऱ नां हि ब्रांडेड थि। वोँ तोँ बस शो-रूम बालों नें अपनी डिस्पिले कों भरने केँ लिए एक् साधारण साडी मैनेक्वीन कों पहनाकर रख दि थि। जिसे अज्जू नें जोया केँ लिए खरीदकर तोहफा कर दिया थां औऱ जिसकी कीमत केवल 500 रूपये थि।
उस वक़्त अज्जू कों यहीलगा थां कि इतनी घटिया साडी देखकर शायद जोया लेने सें मनाकर देगी, जिसके बादउसे भि जोया केँ उपहार बापिस करने कां एक्सक्यूज़ मिलजाऐ, पर्र हुआ इसका एकदम उल्टा। जोया नें अज्जू कि दि साडी खुशी खुशी एक्सेप्ट करली थि, इसलिये मजबूरी मे अज्जू कों भि जोया केँ दिए तोहफा एक्सेप्ट करनेपडे थें। पर्र अबउसे अपनेऊपर हि क्रोध आँ रहा थां। इसलिये अज्जू नें मन हि मनतय किया कि अगलीबार जब भि उसे मौका मिलेगा तोँ वोँ जोया केँ लिए जरूर एक् अच्छा तोहफा खरीदकर उसे देगा। अभि अज्जू येसभी सोच हि रहा थां कि तभी उसका मोबाईल रिंग होनेलगा। अज्जू नें देखा कि मोनूउसे क़ॉलकर रहा थां। इसलिये अज्जू नें जल्दी कॉलआई रिसीव करतेहुए कहा
अज्जू- अबे तेरी तोँ… हम् दोनों एक् हि घऱ मे रहरहे हें… फिनकॉल आई क्यूं किया… सीधे सीधे मेरेरूम मे आँ जाता….
अज्जू कि बात सुनकर मोनू नें रूखेपन सें कहा….
मोनू- मुझे तुझसे एक् जरूरी मैटर पर्र बात करनी हैं। इसलिये मे अपनेघऱ केँ पास बाले पार्क मे तुम्हारा प्रतीक्षा कररहा हूं। जितनी जल्द होँ सके आँ जा….
इतना बोलकर मोनू नें कॉलआई कटकर दि। मोनू कि फोनकट होने केँ जल्दी बाद अज्जू नहाने केँ लिए बाथरूम मे घुस गय़ा। लगभग 10 मिनटबाद हि अज्जू नहाकर औऱ कपडे चेंज करने केँ बाद अपनेघऱ केँ पासबने पार्क कि तरफचल पडा, जहाँ मोनू उसकाबेट कररहा थां। जब अज्जू पार्क मे पहुंचा तोँ उसने देखा कि मोनू पार्क केँ एक् कार्नर मे डली चेयर पऱ अकेला बैठाहुआ उसका प्रतीक्षा कररहा हैं। इसलिये अज्जू भि मोनू केँ पास जाकरबैठ गय़ा औऱ मोनू सें बोला….
अज्जू- हाँजी बोलो…। आखिर तुम्हें मुझसे ऐसी क्याँ बात करनी हैं, जोँ तुम् मुझसे घऱ पर्र नहि कर सकते होँ।
अज्जू कां सबाल सुनकर मोनू थोडा गुस्से मे झल्लाते हुए बोला
मोनू- अज्जू मुझेसच सचबता कि आखिर तेरे औऱ जोयामैम केँ बीचचल क्याँ रहा हैं….
मोनू कां सबाल सुनकर अज्जू बुरीतरह सें शॉक्ड होतेहुए बोला
अज्जू- अबे क्याँ बकरहा हैं… हमारे बीचऐसा बैसाकुछ भि नहि हैं… हम् बस अच्छे साथी हें।
मोनू- अच्छा… तोँ फिन एक् दूसरे कों तोहफा लेने देने कां क्याँ चक्कर हैं…। औऱ हाँ मुझसे झूठ बोलने कि गलती तौ करना हि मत। मैंने स्वयं अपनी आँखों सें देखा हैं कि तुमने मॉल मे एक् साडी खरीदकर जोयामैम कों तोहफा कि थि।
मोनू कि बात सुनकर अज्जू एक् गहरी सांस लेतेहुए बोला
अज्जू- अबे दोस्त बस इतनी सि बात पर्र तूँ लाल पीला क्यूं होँ रहा हैं। अगरये बात तूँ नॉर्मल तरीके सें भि पूछता, तौ मै तुम्हें सचसच हि बताता। बात दरअसल ये हैं कि मे जोयामैम सें अपने याँ फिन अपनी फैमली केँ लिएकोई भि तोहफा लेना नहि चाहता थां। तुमने तोँ देखा हि होगा कि जोयामैम नें राधा केँ लिए कितने सारे तोहफा खरीदकर देदिए हें। पर्र जोयामैम कि जिद केँ आगे मे उन्हें मना भि नहि करपारहा थां। तभी मेरे दिमाग़ मे एक् आईडिया आया, मैंने सोचा कि जोयामैम अलग मजहब कि हैं, तोँ वोँ साडी तौ पहनेंगी नहि, इसलिये मैंने एक् सस्ती औऱ बेकार दिखने बाली साडी खरीदकर उन्हें उपहार कर दि। मुझे पूरी उम्मीद थि कि वोँ मुझसे वोँ साडी लेने सें मनाकर देंगी, जिसके बाद मेरेपास भि उनकेदिए तोहफा लौटाने कां एक्सक्यूज़ होगा। पर्र….
मोनू- पर्र क्याँ…। क्याँ उन्होंने तुम्हारा वोँ घटिया तोहफा भि एक्सेप्ट कर लिया….
अज्जू- हाँ दोस्त…। इसलिये मेरेपास भि उनकेदिए उपहार एक्सेप्ट करने कां कोई कारण नहि बचा थां। बस इतनी सि बात हैं।
मोनू-ओह तौ येबात हैं…। पऱ तूँ आजकल जोयामैम केँ संगकुछ ज़्यादा हि टाईम स्पैण्ड नहि कररहा हैं…। पहले तौ तूनेकभी किसी औऱ लडकी केँ संगऐसा नहि किया…। कहीं तेरामन अब निशा दि औऱ जिया सें भर तौ नहि गय़ा… जोँ अब तुँ जोयामैम केँ पीछपड गय़ा हैं।
अज्जू- अबे क्याँ बकवास किएजा रहा हैं…। ऐसाकुछ भि नहि हैं…। पर्र तेरेमन मे ये फालतू बातें आखिर क्यूं आँ रही हें….
मोनू- वोँ इसलिये क्योंकि जोयामैम सें मिलने सें पहले तौ तुँ निशा दि केँ लिए पूरीतरह सें पागल हौ रखा थां औऱ किसी भि तरह उनकेपास पहुंचना चाहता थां। पऱ अबजब हमारे पास उनकीलीड हैं औऱ हमेंपता हैं कि वोँ हमें बांधवगढ मे मिल सकती हें… तोँ तुम्हारी तरफ उनकेपास पहुँचने कि कोई जल्द नहि होँ रही हैं….
अज्जू- वोँ इसलिये मेरे भइया… क्योंकि मे निशा सें मिलने सें पहले अपनी कमियों कों दूर करके अपने आपको उसके लायक बनाना चाहता हूं। बस इसीलिए मे बांधवगढ जाने कि जल्द नहि कररहा हूं।
मोनू- पऱ तुँ जोयामैम सें इतना अधिक क्यूं घुलमिल रहा हैं….
अज्जू- असल मे जोया नें हि मुझे मेरी गलतियों कां एहसास करवाया हैं, संग हि संग उसने मुझे अपनी कमियों कों दूर करने कां तरीका भि बताया हैं। इसके अलावा जोया केँ संग धुलने मिलने कां एक् कारणये हैं कि जोया औऱ निशा एक् दूसरे कि बेस्ट फ्रेंड हें। जोया जानती हैं कि निशाइस वक़्त कहां हैं औऱ क्याँ कररही हैं। शायदउन दोनों कि रेगुलर बातें भि होती रहती हें। बस इसीलिए मे जोया केँ संग ज़्यादा घुलमिल रहा हूं, ताकि मुझे जोया सें निशा केँ बारे मे कोई इन्फार्मेशन मिलसके।
मोनू- तूँ सचबोल रहा हैं नां… कहीं तूँ जिया औऱ निशा दि कों धोखा तोँ नहि देरहा हैं।
अज्जू- हाँ मेरे भइया मे सचबोल रहा हूं…। मे जिया औऱ निशा कों धोखा देने केँ बार मे ख्वाब मे भि नहि सोच सकता।
मोनू-अगर ऐसा हैं तौ मे आज केँ बादजोय मैम केँ बारे मे तुझसे कोईबात नहि करूँगा। पऱ अगर फ्यूचर मे मुझेकभी पताचला कि तूने जोयामैम केँ संग मिलकर जिया औऱ निशा दि कों धोखा दिया हैं। तोँ फिन मुझसे बुराकोई नहि होगा। मैंने अब तक हर सिचूऐशन मे तेरासंग दिया हैं। जिया केँ जाने केँ बादजब तुम्हें निशा दि सें प्रेम हुआ, तोँ वोँ मे थां जिसने तुझेही सबसे पहले सपोर्ट किया थां, क्योंकि उस टाइम तुँ सही थां। मे हमेशा तुम् दोनों कों खुश देख्ना चाहता थां, इसीलिए मैंने तुम् दोनोें कि विवाह कों भि सपोर्ट किया थां। हाँलाकि जब जिया केँ बापिस आने केँ बाद तूने जिया सें दूसरी विवाह कि, उससमय मुझे तेराये फैसला बिल्कुल भि मनपसंद नहि आया थां। पऱ फिन भि मैंने तुझसे कुछ नहीें कहा, उसकेबाद तूने धीरे-धीरे धीरे-धीरे निशा दि कों ध्यान न देना करना शुरुआत कर दिया, उस पऱ भि मैंने तुझसे कुछ नहि कहा, औऱ फिन तूने निशा दि कि बेइज्जति कर उन्हें अपनी जीवन सें दूर जाने केँ लिएकहा, मे तब भि खामोश रहा, औऱ जब निशा दि हम् सबसेदूर चलीगईं, मे तब भि तेरेसंग हि रहा। पऱ अबअगर मुझेपता चला कि तूने निशा दि कों एक् बारफिन धोखा दिया हैं, तोँ वोँ दिन हमारी दोस्ती कां अंतिम दिन होगा अज्जू…
मोनू कि बात सुनकर अज्जू नें एक् गहरी सांसली औऱ फिन उसकी आँखो मे आखें डालकर बोला
अज्जू- ऐसाकभी नहि होगा मेरे भइया… मेरी जीवन मे निशी कि स्थान कभीकोई न् हीं लें सकता। जिया भि नहि…। हाँ मे मानता हूं कि मैंने जिया सें दूसरी विवाह करकेगलत किया हैं…। पर्र जोँ बीत गय़ा उसे बदला तोँ नहि जा सकता हैं नाँ… तुम् तौ जानते हि होँ कि जिया नें मुझे राधा जैसी प्यारी बच्ची दि हैं…। इसलिये मे जिया कों अब अपने सें दूर नहि कर सकता… बैसे भि जोँ कुछ भि हुआ हैं उसमें जिया कि उतनीबडी भि गलती नहि हैं, जितनी बडी गलती मैंने कि थि… मुझेकभी भि मामाजी जी कि बात मानकर अपने औऱ निशा केँ रिश्ते कों जिया सें छिपाना हि नहि चाहिए थां। अगर मे पहले हि जिया कों सभीकुछ सचसचबता देता। तौ शायदआज सिचुऐशन कुछअलग होती…। औऱ सच कहूँ तोँ मुझेइस सभी मे मामाजी जी कि भि कोई गलतीनजर नहि आँ रही हैं।
अज्जू कि बात सुनकर मोनू थोडा हैरान होतेहुे बोला
मोनू- मतलब
अज्जू- मतलबये कि जब हमारी विवाह केँ बाद हम् लोगयहा दिल्ली मे छिपकर रहरहे थें औऱ अपनी ताकतबडा रहे थें। उसी दौरान जब निशा नें दफ़्तर ज्वाईन करने कि बातकही तौ मैंने उससे हमारे रिश्ते कों छिपाने केँ लिएकहा थां। हाँलाकि निशा हमारे रिश्ते कों छिपाने केँ लिए बिल्कुल भि सजधजकर नहि थि, मगर मेरे कहने पऱ वोँ मान गई थि। उस वक़्त ये सारी बातचीत मामाजी जी केँ सामने हि हुईँ थि। शायदउसी केँ बाद मामाजी जी केँ अंदर इतनी हिम्मत आई थि कि वोँ निशा कों मजबूर करके हमारे रिश्ते कों जिया सें छिपाने केँ लिए वादा लेँ सकें। अगर उससमय मे निशा कों हमारा नाता छिपाने सें नहि रोकता, तौ मेरे दफ़्तर केँ हर एक् इंप्लॉय कों हमारे रिश्ते केँ बारे मे पता होता… जिया कों भि, जोँ उस वक़्त याददास्त जाने केँ कारण पूनम बनकर मेरे दफ़्तर मे कामकर रही थि।
अज्जू कि बात सुनकर मोनूउसे समझाते हुए बोला
मोनू-अब जौ बीत गय़ा सोबीत गय़ा मेरे भइया….उसे हम् बदल तौ नहि सकते…मगर ये कोशिश जरूरकर सकते हें कि फ्यूचर मे हमसेऐसी कोई गलती नां हौ।
अज्जू- हाँ तुम् सहीकह रहे होँ…
मोनू- तौ फिनचलो, घऱ पऱ सबलोग डिनर केँ लिए हमारा प्रतीक्षा कररहे होंगे।
मोनू कि बात सुनकर अज्जू मुस्कुराया औऱ फिन वोँ दोनों हि घऱ कि तरफचल पडे। अगलेदिन जब इकराम औऱ हिनारॉ हेडक्वाटर पहुँचे तोँ उन्होंने देखा कि निशा अपने दफ़्तर केँ अंदरढेर सारी फाईलों औऱ न्यूज पेपर मे उलझी हुई हैं। हाँलाकि निशा कां प्लान इकराम औऱ हिना कि इंगेज्मेंट तक रॉ केँ काम सें छुट्टी लेना कां थां। पर्र जब सें इकराम नें ड्रैगन केँ इण्डिया आने केँ बारे मे उसे बताया थां। तब सें निशा बुरीतरह सें बेचैन थि औऱ उसे लगातार कुछगलत होने कां एहसास हौ रहा थां।
इसीलिए आज सुभह सुभह हि वोँ रॉ हेडक्वाटर आँ गई थि। ताकि ड्रेगन सें रिलेटेड सब फाईलों कों अच्छी तरह सें चैककर सके, संग हि संग न्यूज पेपर मे छपी करैंट न्यूज सें ड्रैगन कां कनेक्शन जोडसके। असल मे निशा कां दिलये मानने केँ लिए बिल्कुल भि रेडी हि नहि थां कि ड्रैगन सिर्फ हैकाथॉन काम्पटीशन मे हिस्सा लेने केँ लिए इण्डिया आँ रहा हैं। बल्कि निशा कों पूरा यकीन थां कि ड्रैगन केँ यहाआने केँ पीछे जरूरकोई बहोत बडा कारण हैं। जिसके बारे मे निशाहर हाल मे पता करना चाहती थि। निशा कों इसतरह फाईलों मे उलझाहुआ देखकर इकराम नें सबाल किया
इकराम- अप्पी आखिरये सभी क्याँ हैं…। आपने तौ कहा थां कि मेरी औऱ हिना कि इंगेज्मेंट तक आप् पूरीतरह सें फ्री रहोगी। फिनआज सुभह सुभह हि यहाआकर आप् किसकाम मे उलझ गई।
इकराम केँ चुप होते हि हिना नें भि उससे सबाल किया
हिना-हाँ अप्पी…। आप् कुछ परेशान दिखाई देरही हौ…। क्याँ कहीँकुछ बडा होने बाला हैं….
आखिरकार उन दोनों कि बात सुनकर निशा नें उन दोनों कि तरफ देखे बिना हि जबाब दिया
निशा-पता नहि…। पऱ जब सें मुझे ड्रैगन केँ इण्डिया आने केँ बारे मे पताचला हैं। तब सें मेरादिल मुझसे कहरहा हैं कि जरूरकुछ ऐसा होने बाला हैं जौ नहि होना चाहिए…। असल मे ड्रैगन जैसाबडा हैकर औऱ चाईना सीक्रेट सर्विस कां इतनाबडा ऐजेंट केवल एक् हैकिंग काम्पटीशन मे हिस्सा लेने तौ यहा नहि आऐगा। क्योंकि वोँ अच्छी तरह सें जानता हैं कि यहा यानि इण्डिया हिन्द कि शेरनी कां इलाका हैं।
निशा कि बात सुनकर इकराम अपनासिर खुजलाते हुए बोला
इकराम- हाँ वोँ बात तोँ सही हैं… मगर आप् इनढेर सारी फाईलों औऱ न्यूज पेपर मे आखिर ढूंड क्याँ रही होँ….
निशा-कुछ भि ऐसा जोँ ड्रैगन सें रिलेटेड होँ….
हिना- तोँ कुछ मिला आपको….
निशा- नहि…। नाँ तोँ इन फाईलों मे ड्रैगन केँ बारे मे कोईखास जानकारी मौजूद हैं औऱ नाँ हि न्यूज पेपर सें मुझेकुछ खास जानकारी मिली हैं। यहा तक कि अगलेकुछ दिनों तक हमारे देश मे हैकॉथान काम्पटीशन केँ अलावा कोई दूसरा बडा ईवेंट भि नहि हैं। फिन ड्रैगन केँ यहाआने कां असली मकसद क्याँ हैं…
निशा अभि इस बारे मे सोच हि रही थि कि तभीउसे कुछयाद आया औऱ वोँ करीब-करीब चीखते हुए हिना सें बोलीं
निशा- हिना…। तुम्हें याद हैं नाँ जब मे औऱ इकराम शालिमार दीप पऱ ऑपरेशन चक्रव्यू कों पूरा करनेगए थें, तब हमारे संगदो साईंटिस्ट प्रोफेसर प्रभाकर जैन औऱ प्रोफेसर अनिल वर्मा भि थें।
निशा कि बात सुनकर हिना हैरान होतेहुए जल्दी बोलि
हिना-हाँ…। मुझेयाद हैं… वोँ दोनों साईंटिस्ट पूरीतरह सें सुरक्षित हें…
निशा-इस वक़्त वोँ दोनों कहां हैं….
हिना-असल मे इकराम कों शक थां कि उन दोनों मे सें कोई एक् गद्दार हैं औऱ दुश्मनों सें मिलाहुआ हैं। इसलिये उन दोनों कों हि हमने यहीँ अपनेहैड दफ़्तर मे बने सीक्रेट कैदखाने मे रखाहुआ हैं। ताकिउन दोनों मे सें कौन गद्दार हैं, इसकापता लगाया जासके। मगरअब तक हमेंकुछ भि पता नहि चला हैं। हाँलाकि हमने उनकी सुविधाओं कां पूरा ध्यान रखाहुआ हैं औऱ उन्हें घऱ जैसा पूरा महौलदे रखा हैं। बस उनके कहीं भि आने जाने औऱ किसी सें कान्टेक्ट करने पऱ पावंदी हैं।
हिना कि बात सुनकर निशा जल्दी बोलि
निशा- बेकार मे इतने दिनों तक उन दोनों कों कैद करकेरखा हुआ हैं। कम सें कम मुझसे एक् बारपूछ तोँ लेना चाहिए थां…। औऱ फिनजब मे इतनेदिन पहले सें ठीक हौ गई हूं, तौ अब तक मुझेउन दोनों केँ बारे मे बताया क्यूं नहि…
निशा कि बात सुनकर इकराम औऱ हिना बुरीतरह सें डरगए थें। असल मे निशा कि तरह इकराम भि उन दोनों साईंटिस्ट केँ बारे मे करीब-करीब भूल हि गय़ा थां। जिस कारणउसे डर थां कि कहीं उसकी लापरवाही केँ कारण निशा उससे नाराज नाँ होँ जाऐ। जबकि हिना औऱ बाकी लोगों नें अब तक उन दोनों साईंटिस्ट केँ बारे मे नां तोँ निशा कों कुछ बताया थां औऱ नाँ हि याद दिलाया थां। जिस कारण हिना कां निशा सें डरना स्वभाविक थां। बैसे भि निशारॉ कि डिप्युटी चीफ जौ थि।
कथा जारी हैं.
Meri Jung (Restart) – New Episode
एपसोड 147 -
आखिरकार हिना नें जैसे तैसे अपनेडर पऱ काबू पाया औऱ हकलाते हुए निशा सें बोलि
हिना- वोँ वोँ चीफ नें उन दोनों कों अजयसर केँ हैंडओबर कर दिया थां। ताकिअजय सर उनसेसही तरीके सें पूछताछ कर सकें। पऱ उस वक़्त आप् औऱ इकराम बुरीतरह सें घायल थें। जिस कारणअजय सर कां पूरा फोकस आप् दोनों कों बचाने पर्र थां औऱ जब तक आप् ठीकहुए, शायदतब तक अजयसर उन दोनों साईंटिस्ट केँ बारेभूल हि गए होंगे।
हिना कि बात सुनकर निशा चिढते हुए बोलि
निशा-हाँ हाँ जोँ भि होँ… मगर असली गद्दार प्रोफेसर अनिल वर्मा हैं…। इसलिये प्रोफेसर प्रभाकर जैन कों कैद करने कि कोई जरूरत नहि थि।
निशा कि बात सुनकर इकराम हैरान होतेहुए बोला
इकराम- पर्र अप्पी आपको केसेपता कि असली गद्दार अनिल वर्मा हैं
निशा- वोँ इसलिये क्योंकि मे उस ऑपरेशन सें पहलेकभी भि उन दोनों साईंटिस्ट सें नहि मिली थि। मगरजब मे शालिमार दीप पर्र दुशमनों केँ अड्डे सें उन दोनों कों आजाद करवारही थि। तब प्रोफेशर अनिल वर्मा नें मुझे जल्दी पहचान लिया थां औऱ मुझे ऐजेंट जीरो कहकर बुलाया थां। इसका मतलबसमझ रहे होँ नाँ तुम्…
निशा कि बात सुनकर इकराम जल्दी बोला
इकराम- हाँ अप्पी… इसका मतलब हैं कि वोँ कमीना अनिल वर्मा दुशमनों सें मिलाहुआ थां, औऱ शायद दुशमनों नें उसे पहले हि आपके बारे मे सभीकुछ बता दिया होगा, इसलिये वोँ पहले सें हि आपको पहचानता थां औऱ आपकेवहा आने कां प्रतीक्षा भि कररहा थां। ताकि आपकेआते हि वोँ दुशमनों केँ पास सिंग्नल भेजकर आपको दुशमनों केँ हाथों पकडवा सके।
निशा- हुम्म…। अबलगरहा हैं कि हिना केँ संग रहते रहते तुम्हारा दिमाग़ भि थोडा बहोत चलनेलगा हैं। ठीक हैं तोँ अबचलो…। चलकर उससे पूछताछ करते हें। शायदउसे ड्रैगन केँ यहाआने केँ बारे मे कुछपता होँ।
इतना बोलकर निशा अपने दफ़्तर सें बाहर् निकल गई, निशा केँ पीछे पीछे इकराम औऱ हिना भि दफ़्तर सें बाहर् निकलगए। लगभगआधे घंटेबाद निशा इकराम औऱ हिना केँ संग प्रोफेशर अनिल वर्मा कि सेल मे थि। वहीं दूसरी तरफ प्रोफेसर प्रभाकर जैन सें माफी माँगकर निशा उन्हें पहले हि अपनेकुछ ऐजेंट्स कि निगरानी मे उनकेघऱ भेज चुकी थि। अबवसवहा पऱ प्रोफेसर अनिल वर्मा हि बचे थें, जिनसे पूछताछ करने कि निशा नें पहले हि पूरी तैयारी करली थि।
अब तक प्रोफेसर अनिल वर्मा सें निशा नें कोईबात नहि कि थि औऱ नां हि उनके किसी सबाल कां जबाब इकराम औऱ हिना नें दिया थां। वोँ लोग तोँ बस चुपचाप निशा केँ आर्डर पूरेकर रहे थें। निशा केँ इशारे पर्र उन लोगों नें प्रोफेसर अनिल वर्मा कों जबरदस्ती एक् लक़डी कि चेयर पऱ बैठाकर उनके अंग-अंग मजबूती केँ संगउस चेयर सें बांधदिए थें। ताकि प्रोफेसर अनिल वर्मा नाँ तोँ वहां सें भागसके औऱ नाँ हि हिल-डुल सकें। प्रोफेसर अनिल वर्मा एक् साईंटिस्ट थें, इसलिये निशा अच्छी तरह सें जानती थि कि थोडा बहोत टार्चर करने केँ बाद हि वोँ किसी रट्टू तोते केँ तरह सारासच उगलकर रख देगा।
हाँलाकि आज सें पहले भि प्रोफेसर अनिल वर्मा कों टार्चर करके सारासच जानां जा सकता थां। मगर निशा केँ टीम मेंबर्स कों येबात पता नहि थि कि प्रोफेसर प्रभाकर जैन औऱ प्रोफेसर अनिल वर्मा मे सें गद्दार आखिरकौन हैं। इसलिये वोँ किसी निर्दोष इंशान कों टार्चर नहि करना चाहते थें। पऱ अबजब उन्हें पताचल चुका हैं कि प्रोफेसर अनिल वर्मा हि असली गद्दार हैं, तोँ वोँ लोग उसपरकोई रहम नहि करने बाले थें। वहीं दूसरी तरफ प्रोफेसर अनिल वर्मा कां भि डर केँ कारण बुराहाल थां। वोँ लगातार चीख चिल्ला करउन लोगों सें सबालपूछ रहा थां
अनिल- तुम् लोग आखिर मेरेसंग करने क्याँ बाले होँ…। तुम् लोग शायद जानते नहि होँ कि मे कौन हूं। अगर मैंने तुम् लोगों कि कम्प्लेन कर दि तौ एक् झटके मे तुम् सबकीजॉब चली जाऐगी।
अनिल वर्मा कि बात कां जब किसी नें कोई जबाब नहि दिया तोँ वोँ फिन सें बोला
अनिल- आखिर तुम् लोग मेरेसंग हि येसभी क्यूं कररहे होँ… तुम् लोगों नें प्रभाकर कों क्यूं जाने दिया…वही असली गद्दार थां…
इस टाइम इकराम औऱ हिना प्रोफेसर अनिल वर्मा केँ ठीक पीछेखडे हुए थें, जबकि निशा अनिल वर्मा केँ ठीक सामने कुर्सी पर्र बैठी मुस्कुरा रही थि। वोँ इससमय अपने असलीरूप मे थि, ताकि वोँ अपनी सुपर पावर कां सही सें यूजकर सके औऱ जरूरत पडने पऱ प्रोफेसर अनिल वर्मा कां दिमाग़ भि पढसके। आखिरकार अनिल वर्मा कि बातें सुनकर निशा मुस्कुराते हुए बोलि
निशा-ठीक हैं मिस्टर अनिल तुम् बाद मे जिससे चाहो उससे हमारी शिकायत करते रहना। मे भि देख्ना चाहती हूं कि इसदेश मे आखिरऐसा कौन हैं जौ तेरे जैसे गद्दार कां संग देता हैं। रहीबात जॉब कि तोँ लगता हैं तेरेमन मे भूसाभरा हुआ हैं, पता नहि तूँ केसे साईंटिस्ट बन गय़ा। अबेगधे जब हम् लोग मरने सें नहि डरते तौ भलाजॉब कि किसे फिक्र होगी….
निशा कि बात सुनकर अनिल वर्मा बुरीतरह सें डरतेहुए बोला
अनिल- तुम्हारी मुझे गद्दार कहने कि हिम्मत केसे हुईँ… मैनेइस देश केँ लिए अपनी सारी जीवनलगा दि औऱ आज तुम् मुझे गद्दार कहकर बेइज्जत कररही हौ। आखिर तुम्हारे पास क्याँ सबूत हैं कि मे गद्दार हूं।
अनिल वर्मा कि बात सुनकर निशा मुस्कुराते हुए बोलीं
निशा- तुम्हें याद हैं नां जब मे तुम्हें छुडवाने केँ लिए शालिमार दीप पऱ गई थि, तब तुमने मुझे देखते हि मुझसे क्याँ कहा थां….
निशा कि बात सुनकर अनिल वर्मा हकलाते हुऐ बोला
अनिल- ऐजेंट जीरो…….
निशा- बिल्कुल सही… तौ अब बताओ मिस्टर अनिल वर्मा कि तुम्हें मेराकोड नेम केसेबता हैं…। मेरे डिपार्टमेंट औऱ मेरेकुछ खास दुशमनों केँ अलावा किसी कों भि मेरा कोडनेम नहि पता हैं औऱ नाँ हि मे उसदिन सें पहलेकभी तुमसे मिली थि। फिनभला तुम् मुझे केसे पहचानते थें…। वहीं दूसरी तरफ प्रोफेसर प्रभाकर जैन नें पूरीतरह सें नैचुरल व्यवहार किया थां औऱ मुझे नहि पहचाना थां। इसका मतलब हैं कि असली गद्दार तुम् होँ… बस इसीलिए हमने प्रोफेसर प्रभाकर जैन सें माफी मांगकर उन्हें यहा सें जाने दिया हैं।
निशा कि बात सुनकर अचानक सें अनिल वर्मा पागलों कि तरह हंसते हुए बोला
अनिल-हा हाहा… मे तुम्हें जितना चालाक समझता थां, तुम् उससे भि अधिक चालाक निकली ऐजेंट जीरो…मगर तुम् येबात कभी साबित नहि कर पाओगी कि मे गद्दार हूं। तुम् भले हि मुझे टार्चर करलो, पर्र मे तुम्हें कुछ भि नहि बताऊँगा औऱ आखिरकार तुम्हें मुझे छोडना हि होगा।
अनिल वर्मा कि बात सुनकर निशा एक् रहस्यमई मुस्कान केँ संग बोलीं
निशा-आई एम सॉरी प्रोफेसर…। बातदर असलये हैं कि हमारे डिपार्टमेंट कों छोडकर अभि तक किसी कों नहि पता हैं कि तुम् दोनों कों सुरक्षित बचा लियागाय थां। हमने प्रोफेसर प्रभाकर जैन कों अच्छी तरह समझा दिया हैं कि वोँ यहा सें अपनेघऱ जाकरसब लोगों कों यही बताऐंगे कि तुम्हें दुशमनों नें टार्चर करकेजान सें मार दिया हैं। मेरीबात समझरहे हौ नां मिस्टर अनिल वर्मा… तुम् अब सारी जीवन हमारी कैद मे रहने बाले हौ, यहा पर्र हम् तुम्हारे ऊपरहर दिननऐ नऐ एक्सपेरीमेंट करके तुम्हें टार्चर करेंगे….
निशा कि बात सुनकर अनिल वर्मा पागलों कि तरह हंसते हुए बोला
अनिल- तुम् जोँ चाहोकरो… पऱ मुझसे कुछ भि नहि जान पाओगे….
निशा-चलो देखते हें कि तुम् मेरे सामने कितनी देर टिकते होँ…
इतना बोलकर निशा नें इकराम कों इशारा किया, निशा कां इशारा मिलते हि इकराम एक् गंदा औऱ बडा सां कपडे कां टुकडा जबरदस्ती अनिल वर्मा केँ मूँह मे ठूंसते हुए बोला
इकराम- सॉरी मिस्टर अनिल….असल मे मेरीबडी बेहन कों ज़्यादा हंगामा शराब ापसंद नहि हैं। इसलिये मजबूरी मे तुम्हारा मूँहबंद करनापड रहा थां। ताकि तुम्हारी चीख सुनकर मेरीबडी बेहन केँ कान दर्द नां करने लगें। बैसे तुम्हें अधिक परेशान होने कि जरूरत नहि हैं। जौ कपडा मैंने तुम्हारे मूँह केँ अंदर ठूँसा हैं उससे हम् लोगबस अपने जूतेसाफ करते हें, बाकि कपडा एकदमठीक ठाक हैं….
इकारम कि बात सुनकर अनिल वर्मा बुरीतरह सें डर गय़ा औऱ उसकामन उल्टी करने जैसा होनेलगा…। पर्र कपडा मूँह केँ अंदर होने केँ कारण वोँ उल्टी भि नहि कर सकता थां। वहीं दूसरी तरफ निशा पऱ अनिल वर्मा कों इस हालत मे देखकर कोई फर्क नहि पडरहा थां। उनसे हिना कि तरह देखकर एक् इशारा किया। निशा कां इशारा मिलते हि हिनासेल केँ बाहर् चली गई औऱ करीब-करीब आधे मिनट केँ अंदर हि एक् सूटकेश केँ संग बापिस आँ गई। अंदरआते हि हिना नें वोँ सूटकेस निशा कों पकडा दिया। जिसके बाद निशा नें मुस्कुराते हुएउस सूटकेस कों खोलकर अनिल वर्मा केँ ठीक सामने नीचे जमीन पर्र रख दिया।
वोँ सूटकेस ढेर सारेअलग अलगतरह केँ टूल्स सें भराहुआ थां, उनमें सें अधिकतर टूल्स पऱ सूखाखून लगाहुआ थां। जिसका एक् हि मतलब थां कि निशा पहले भि उन टूल्स कां यूज दूसरों कों टार्चर करने मे कर चुकी हैं औऱ लोगों कों टार्चर करने केँ बाद निशा नें उन टूल्स कों साफ करना भि जरूरी नहि समझा। जिस कारण वोँ टूल्स अब औऱ भि अधिक डरावने लगरहे थें। अचानक सें अनिल वर्मा कों निशा एक् जल्लाद कि तरह दिखाई देनेलगी… कुछदेर पहलेजिस निशा कों देखकर उसकेमन मे निशा केँ लिए वासना जागरही थि। अबउसी निशा कों देखकर अनिल वर्मा केँ दिल मे मौत कां खौफबैठ चुका थां।
इससे पहले वोँ कुछ कहता। निशा नें एक् प्लायर उठाया औऱ एक् एक् करके अनिल वर्मा केँ दोनों हाथों केँ नाखूनों कों बेरहमी सें उखाड दिया। ये सभी निशा नें बसकुछ हि मिनटों मे ऐसेकर दिया थां, जैसे वोँ वर्षों सें यहीसभी करती आँ रही हौ। वहीं दूसरी तरफ अनिल वर्मा कां दर्द केँ कारण बुराहाल थां, मगर मूँह केँ अंदर कपडा होने केँ कारण वोँ चीख भि नहि सकता थां। जिसबजह सें लगातार उनकी आँखों सें आँशूबह रहे थें। अनिल वर्मा कि ऐसी हालत देखकर निशासमझ गई कि वोँ अहबसअब टूटने हि बाला हैं। इसलिये निशा नें उसे पूरीतरह सें तोडने केँ लिए सूटकेस मे सें एक् खंजर उठाया औऱ अनिल वर्मा कों डराने हुए बोलीं।
निशा- तुमने भिण्डी यानि लेडी फिंगर तोँ कईबार खई होंगी मिस्टर अनिल वर्मा…। मगरआज मे तुम्हें जेन्टस फिंगर कां स्वाद चखाती हूं
इतना बोलकर निशा नें बेरहमी केँ संग अनिल वर्मा केँ दाऐँहाथ कि उंगलियों कों लेडी फिंगर यानि भिण्डी कि तरहचॉप करना शुरुआत कर दिया। ये नजारा इतना ज़्यादा भयानक थां, जिसे देखकर हिना कां मन उल्टी करने कां करनेलगा थां। पऱ वोँ किसीतरह अपने आप् कों कंट्रोल किएहुए चुपचाप खडीरही… निशा कां येरूप देखकर हिना कि रीढ कि हड्डी मे सिहरन दौड गई थि। उसनेआज सें पहले इतना बेरहम इंशान नहि देखा थां। वहीं दूसरी तरफ इकराम पूरीतरह सें नॉर्मल खडाहुआ थां।
ऐसालग रहा थां जैसे वोँ पहले भि कईबार निशा कां येरूप देख चुका होँ। दाऐँहाथ कि उंगलियां चॉप करने केँ बाद निशा नें जैसे अपना खंजर अनिल वर्मा केँ बाँऐँ हाथ पर्र रखा, तौ वोँ बुरीतरह सें छटपटाने लगा। उसे देखकर ऐसालग रहा थां जैसे वोँ कुछ कहनाचाह रह होँ। इसलिये निशा नें इकराम कों इशारा किया। निशा कां इशारा मिलते हि इकराम नें अनिल वर्मा केँ मूँह सें कपडा निकाल दिया। मूँह केँ कपडा निकलते हि अनिल वर्मा करीब रोतेहुए बोला
अनिल- साली कमीनी… हारामजादी… तुँ इंशान नहि हौ सकती… पक्का तूँ इंशान केँ रूप मे कोई शैतान हैं….
अनिल वर्मा कि बात सुनकर निशा उसका मजाक उडाते हुए बोलीं
निशा- लगता हैं कि प्रोफेसर सहाब कि अक्कल अब तक ठिकाने पऱ नहि आई हैं। तभी तोँ बेमतलब कि बकवास कररहे हें…। इकराम इनका मूँहफिन सें बंदकर दो…। अभि तौ इनके बाऐंहाथ कि उंगलियाँ बची हुईँ हें, उसकेबाद दोनों पैरों कां नम्बर आऐगा।
निशा कि बात सुनकर डर केँ कारण अनिल वर्मा कां पेसाब छुट गय़ा औऱ उसने वहीं बैठे बैठे अपना पेंट गिलाकर दिया। इससे पहले इकराम उसका मूँहफिन सें बंदकर पाता, अनिल वर्मा बुरीतरह सें चीखते हुए बोला
अनिल- नहि रुको… मे सभी बताता हूं… प्लीज रुकजाओ….
अनिल वर्मा कि बात सुनकर निशा मुस्कुराते हुए बोलि
निशा- तौ फिन जल्द सें बकना शुरुआत करो…
अनिल- मे तुम्हें सभीकुछ बता दूँगा…। मगर प्लीज पहले मुझे हॉस्पीटल लेँ चलो… देखो नां कितना अधिकखून निकलरहा हैं… औऱ मेरी उंगलियाँ…। हे ईश्वर ऐ तुमने क्याँ कर दिया….
अनिल वर्मा कि बात सुनकर निशा चिढते हुए बोलि
निशा- हुम्म तौ तुम्हें पहले हॉस्पीटल जानां हैं…। ठीक हैं… मे पहुँचाती हूं तुम्हें हॉस्पीटल….
इतना बोलकर निशा नें इकराम कों इशारा किया। इससे पहले कि अनिल वर्मा निशा केँ असली इरादों कों समझपता, इकराम नें नीचेडला हुआ कपडा उठाया। जोँ कुछदेर पहले उसने अनिल वर्मा केँ मूँह मे सें निकाला थां। उसकेबाद इकराम नें वोँ कपडा अनिल बर्मा मे मूँह पऱ रखकर अपने दोनों हाथों सें पूरी ताकत केँ संग अनिल वर्मा कां मूँहबंद कर दिया। जिस कारण अनिल वर्मा अब चाहकर भि कोई आवाज़ नहि कर सकता थां। ठीकतभी निशा नें सामने रखे सूटकेश मे सें प्लास्टिक कि एक् छोटी सि डिब्बी उठाई औऱ उसका ढक्कन खोलकर उसमें भराहुआ पाऊडर अनिल वर्मा केँ बाऐँहाथ कि उँगलियों पर्र डाल दिया, जहाँ सें खूनबह रहा थां।
जैसे हि वोँ पाऊडर अनिल वर्मा केँ घाव पर्र गिरा, तौ उसके पूरे जिस्म मे दर्द औऱ जलन कि तेजलहर दौड गई। असल मे वोँ पाऊडर कछ औऱ नहि बल्की नमक औऱ मिर्च कां मिश्रण थां। जिसका उपयोग निशा अपने दुशमनों कों दर्द देने केँ लिए करती थि। उसनमक मिर्च केँ पाऊडर केँ कारण अनिल वर्मा कि हालत पहले सें भि ज़्यादा खराब होँ गई थि। हाँलाकि वोँ चाहकर भि नां तोँ चीख सकता थां औऱ नां हि हिलडुल सकता थां। पऱ दर्द औऱ जलन केँ कारण उसकी आँखों सें लगातार आँशूबह रहे थें। आखिरकर 5 मिनटबाद इकराम नें अनिल वर्मा कों छोड दिया। जैसे हि वोँ आजादहुआ तोँ निशा उससे बोलीं।
निशा-अब जल्द सें बकना शुरुआत करो… क्योंकि मै नहि चाहती कि ज़्यादा खून बहने सें तेरीमौत होँ जाऐ… तुम् मेरे सबालों केँ जबाब देने मे जितनी देर करोगे। उतनी हि देरबाद तुम् हास्पीटल जा पाओगे औऱ तुम्हारे जिंदा बचनेक चांस उतने हि कम होते जाऐंगे।
अब तक अनिल वर्मा इतना तोँ समझ चुका थां कि वोँ जल्लादों केँ बीचफंस चुका हैं औऱ उसकीकोई भि चालाकी अबउन लोगों केँ सामने चलने बाली नहि हैं। इसलिये वोँ हथियार डालते हुए बोला
अनिल-हाँ हाँहाँ मे दुशमनों सें मिलाहुआ थां औऱ तुम्हारे शालिमार दीप पर्र आने कां प्रतीक्षा कररहा थां। ताकि मेरे दोस्त तुम्हें पकडकर अपनेसंग चाईना लेँ जाऐं।
निशा- पऱ क्यूं… आखिर तुमने येसभी क्यूं किया… मेरी तोँ तुमसे कोई दुशमनी नहि थि औऱ जहाँ तक मुझेयाद हैं मैंने कभी भि तुम्हारे संगकुछ भि गलत नहि किया हैं। फिन तुमने आखिरदेश केँ दुशमनों केँ संग मेरा सौदा क्यूं किया… आखिर तुम् इसदेश केँ गद्दार क्यूं बनगए…
निशा कि बात सुनकर अनिल वर्मा कुछदेर तक खामोश रहा औऱ फिन बोला
अनिल- नहि मेरी तुमसे कोई दुश्मनी नहि हैं… औऱ नाँ हि मे इसदेश केँ संग गद्दारी करना चाहता थां… मगर मे मजबूर थां….
निशा- कैसी मजबूरी…। क्याँ तुम्हें पैसों कि जरूरत थि….
अनिल- नहि मैंने वोँ सभी पैसों केँ लिए नहि किया थां…
निशा- तौ तुमने वोँ सभी किसके कहने पऱ किया थां…… आखिरकौन हैं तुम्हारा बॉस….
निशा कां सबाल सुनकर अनिल वर्मा नें एक् गहरी सांसली औऱ फिन निशा कि आँखों मे आँखें डालकर बोला
अनिल- किंग केँ कहने पर्र….
अनिल वर्मा कां जबाब सुनकर निशा केँ संगसंग इकराम औऱ हिना भि हैरानी केँ संग अनिल वर्मा कों देखने लगे थें… क्योंकि उन्हें अनिल वर्मा कि बातों पर्र रत्ति भर भि यकीन नहि होँ रहा थां।
स्टोरी जारी हैं.
Meri Jung (Restart) - Kahani ab aur interesting hogi
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