♡ एक् नया संसार ♡ (Full Storyd) – New Episode
Awsome UPDATE BRO
Zabardast क्या बात he
accha he के bhushn rana और ashu yeh dono friend ban gye jisse raj ko बहुत help milegi
or sabse sandar ishq nidhi kaa joo apne bhay के liye कुछ krne के teyyar he अब देखना nidhi kaise raj ko manati he
You are the best brother.
धन्यवाद भइया आपकीइस सुंदर प्रतिक्रिया केँ लिए,,,,,,,,,, एपसोड दे दिया हैं भइया,,,,,
धन्यवाद भइया आपकीइस हसीन प्रतिक्रिया केँ लिए,,,,,,,,,, भइयाकिन दोनो भइया कि बातकर रहे होँ आप्?????? भागदे दिया हैं भइया,,,,,
धन्यवाद भइया आपकीइस हसीन प्रतिक्रिया केँ लिए,,,,,,,,,,भाग दे दिया हैं भइया,,,,,
धन्यवाद भइया आपकीइस हसीन प्रतिक्रिया केँ लिए,,,,,,,,,, एपसोड दे दिया हैं भइया,,,,,
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♡ एक् नया संसार ♡ (Full Storyd) – New Episode
♡ एक् नया संसार ♡
भाग.《 39 》
अब तक,,,,,,,,
"मे चलूॅगा भइया। "आशू रानाकह उठा__"अब सें आपकोकोई शिकायत कां मौका नहि दूॅगा। इस भइया कि बात मेरीसमझ मे आँ गई हैं। मुझे एहसास हौ रहा हैं भइया कि इसने जोँ कुछ भि मेरे बारे मे कहा वोँ एक् कड़वा सच हैं। सच हि तोँ कहा हैं भइया नें कि सभीलोग मेरे बुरे आचरण कि वजह सें मुझसे दूर भागते हें। मगरअब ऐसा नहि होगा भइया। मे इसकेसंग रहकर एक् अच्छा इंसान बनूॅगा औऱ अवश्य बनूॅगा। "
"यह हुइ नं बात। " मैने कहा___"चल आजाइसी बात पऱ गलेलग जा मेरे। कितनी बड़ीबात हैं कि आज काॅलेज केँ पहले हि दिन मे पहले दुश्मनी हुइ औऱ फिन दोस्ती भि होँ गई। "
आशू मेरेगले लग गय़ा। मैने देखाबेड पऱ पड़े भूषण राना कि ऑखों मे खुशी केँ ऑसूॅ थें। कुछदेर औऱ वहाॅ पर्र रुकने केँ बाद मैने भूषण राना सें जाने कि इजाज़त माॅगी तौ उसने पहले मुझसे मेरा मोबाइल नंबर लिया औऱ मैने भि उसका लिया। फिन भूषण केँ कहने पर्र आशू मुझे भूषण कि गाड़ी सें काॅलेज तक छोंड़ा। पूरे रास्ते आशू राना कां चेहरा खिला खिला नज़रआया मुझे। मे समझ गय़ा कि यहअब अवश्य सुधर जाएगा।
काॅलेज केँ गेट केँ पास उतारकर आशू वापसलौट गय़ा जबकि मे पार्किंग कि तरफबढ़ गय़ा अपनी बाइक कों लेने केँ लिए। पार्किंग सें अपनी बाइक पऱ सवार होकर अभि मैने बाइक कों स्टार्ट करने केँ लिए सेल्फ पर्र अॅगूठा रखा हि थां कि मेराफोन मोबाइल बजउठा। मैने पैंट कि जेब सें फोन निकाल कर स्क्रीन पऱ फ्लैश कररहे नंबर कों देखा तौ मेरे चेहरे पऱ सोचने वालेभाव उजागर होँ गए।
____________________________
अबआगे,,,,,,,,
"हम् कुछ भि नहि सुनना जानते कमिश्नर हमारे बच्चे जहाॅ भि हों उन्हें ढूॅढ़ कर हमारे सामने जल्दी हाज़िर करो। " दिवाकर चौधरी मोबाइल पऱ गुस्से मे कहरहा थां___"वरना तुम् सोच भि नहि सकते कि हम् क्याँ कर सकते हें? हमेंपता चला हैं कि बच्चों नें किसी लड़की केँ संगरेप किया हैं। मगरयह सभी तौ चलता हि रहता हैं इसउमर मे। अगर हमेंपता चला कि इसरेप कि वजह सें हि हमारे बच्चे गायब हें तौ समझ लेना कमिश्नर इसशहर मे कोई इंसान ज़िदा नहि बचेगा। "
"."उधर सें कुछकहा गय़ा।
"तौ अगर पुलिस नें उस लड़की केँ रेप पऱ कोईकेस नहि बनाया तोँ कहाॅगए हमारे बच्चे?" दिवाकर चौधरी गर्जा___"आज दोदिन होँ गए कमिश्नर। अभि तक बच्चों कां कहींकोई अतापता नहि हैं। "
"." उधर सें फिनकुछ कहा गय़ा।
"तुम्हारे पास चौबीस घंटे कां समय हैं कमिश्नर। " दिवाकर चौधरी नें कहा___"अगर चौबीस घंटे केँ अंदर हमारे बच्चे हमारी ऑखों केँ सामने न् दिखे तौ समझ लेना कि हम् क्याँ करते हें फिन। "
कहने केँ संग हि दिवाकर चौधरी नें मोबाइल केँ रिसीवर कों केड्रिल पऱ पटक दिया। गुस्से सें तमतमाया हुआआया औऱ वहीं सोफे पऱ बैठ गय़ा। इस वक़्त वहाॅरखे बाॅकी सोफों पऱ उसकेसब यार दोस्त बैठेहुए थें। सबके चेहरों पऱ चिंता व तकलीफ़ साफ दिखाई देरही थि।
"क्याँ कहा कमिश्नर नें?" अशोक मेहरा नें उत्सुकता सें पूछा थां।
"क्याँ उसरेप कि वजह सें हमारे बच्चे गायब हें?" सुनीता वर्मा नें कहा___"अवश्य पुलिस वालों नें हि उन सबको गिरफ्तार किया होगा। "
"पुलिस कि इतनी हिम्मत नहि हैं सुनीता कि वोँ हमारे बच्चों कों छू भि सके। " दिवाकर चौधरी नें कहा___"मुझे लगता हैं कि हमारे बच्चे स्वयं हि अंडरग्राउण्ड हौ गए हें। उन्होंने सोचा होगा कि इस हादसे सें कहीं उनको पुलिस नं पकड़ लेँ। इसलिए वोँ कहींछुप गए होंगे। उन बेवकूफों कां इतना भि दिमाग़ नहि चला कि उनको किसी सें डरने कि कोई ज़रूरत हि नहि थि। ख़ैर, तुम् लोग चिन्ता मतकरो। हमारे बच्चे जहाॅ भि होंगे सही सलामत हि होंगे। "
"पर्र चौधरी साहब। " अवधेश श्रीवास्तव नें कहा___"उन लोगों कों हमें एक् बार मोबाइल तौ कर हि देना चाहिये थां। मगरदो दिन सें मोबाइल हि बंद हें उन सबका। समझ मे नहि आँ रहा कि कहाॅगए होंगे वोँ। आपके फार्महाउस पऱ भि नहि हें। हमारे व्यक्ति देखआए हें वहाॅ। मगर हैरानी कि बात हैं कि आपके फार्महाउस केँ वोँ दोनो गार्ड्स भि वहाॅ नहि हें। इसका क्याँ मतलब हौ सकता हैं?"
"भागगए होंगे साले कामचोर। " दिवाकर चौधरी नें कहा___"उस वक्तजब उनके हाॅथ मे बंदूखें थमाई थि तभीसमझ आँ गय़ा थां कि यहइसकाम केँ लिए बेहद कमज़ोर हें। ख़ैर छोड़ो। कमिश्नर कों हमनेडोज दे दि हैं। वोँ अवश्य पता करेगा बच्चों कां। "
"आप् तोँ ऐसे बेफिक्र हें चौधरी साहब जैसे आपको अपने बच्चों कि कोई चिंता हि नहि हैं। " सुनीता वर्मा नें कहा___"पऱ मुझे चिंता हैं। क्योंकि मुझ विधवा कां एक् वही तोँ सहारा हैं। अगरउसे कुछ हौ गय़ा तौ किसके लिए जियूॅगी मे?"
"ओफ्फो सुनीता। " दिवाकर चौधरी नें सहसाउसे अपनीतरफ खींच लिया। एक् हाॅथ सें उसकी ठुड्डी पकड़कर बोला___"वैसे तोँ उसेकुछ नहि होगा। औऱ अगर थोड़े लम्हा केँ लिएमान भि लियाजाए तौ चिंता क्यूं करती होँ? हम् हें नं तुम्हारे सहारे केँ लिए। अब तक भि तोँ सहारा हि बनेहुए थें हम् औऱ आगे भि बने हि रहेंगे। "
"आपको तौ बसहर वक़्त मस्ती हि सूझती रहती हैं चौधरी साहब। " सुनीता नें कहा__"जबकि इस वक़्त हालात किस क़दर गंभीर हें इसका आपको अंदाज़ा भि नहि हैं। "
"तुम् भूलरही हौ सुनीता डार्लिंग कि हम् कौन हें?" दिवाकर चौधरी नें कहा__"हम् इसशहर कि वोँ हस्ती हें जिसकी इजाज़त केँ बिना एक् पत्त भि नहि हिल सकता। इस लिए तुम् इसबात कि चिंता करना छोंड़ दो कि बच्चों केँ संगकोई बुरा करेगा। "
"चौधरी साहब बिलकुल ठीककह रहे हें सुनीता। " अशोक मेहरा नें कहा___"हमारे बच्चे अवश्य किसी दूसरे शहर मे मौज मस्ती कररहे होंगे। "
"मौज मस्ती हमें भि तौ करनी चाहिए नं अशोक?" दिवाकर नें कहा___"बहोत दिन हौ गए सुनीता केँ संग भरपूर मस्ती नहि कि हमने। "
"आपने तोँ मेरेमन कि बातकह दि चौधरी साहब। " अवधेश श्रीवास्तव नें मुस्कुराते हुए कहा___"आज होँ हि जाए मस्ती। "
"क्याँ कहती हौ डार्लिंग?" दिवाकर चौधरी नें सुनीता केँ एक् भारी बोबे कों ज़ोर सें मसलते हुए कहा___"हौ जाएवन टू कां फोर?"
"अरे मे तोँ चाहती हि हूॅ कि आप् सभी मुझेमसल कररखदो। " सुनीता नें अपने होठों कों दाॅतों तले दबाते हुए कहा___"मेरे शरीर मे तोँ हर वक़्त आगलगी रहती हैं। अलोक कां बाप तौ कमीना मुझेभरी जवानी मे छोंड़ करमर गय़ा। वोँ तौ ईश्वर कां शुकर थां कि आप् लोग मेरे जिंदगी मे आँ गए वरना जाने क्याँ होता मेरा?"
"ईश्वर सभी अच्छे केँ लिए हि करता हैं मेरी राॅड सुनीता। " दिवाकर चौधरी नें सुनीता केँ ब्लाउज केँ बटन खोलते हुए कहा___"औऱ आज तोँ हम् सभी तेरीआगे पीछे दोनो साइड सें अच्छे सें लेंगे। "
"हाॅ तोँ ठीक हैं न्। " सुनीता नें अपनाहाथ बढ़ाकर दिवाकर केँ पजामें केँ ऊपर सें हि उसके लौड़े कों पकड़ लिया___"मेरा कोई भि छेंद खाली न् रखना। "
"आज तौ साली तेरी चीखें निकालेंगे हम् तीनों। " दिवाकर चौधरी नें कहा___"चलो भइयालोग अंदर कमरे मे चलो। आज इस राॅड कों तबीयत सें पेलते हें। "
दिवाकर चौधरी कि बातसुन कर बाॅकी तीनो भि मुस्कुराते हुए सोफों सें उठ खड़ेहुए।
"चौधरी साहब आपकी बेटी तोँ नहि हैं नं बॅगले मे?" अशोक मेहरा नें पूछा__"वरना उसेपता चल जाएगा कि हम् सभी क्याँ कररहे हें। "
"नहि हैं दोस्त। " दिवाकर नें कहा___"शायद कहीं बाहर् गई हुइ हैं। "
अभि वेसभी कमरे कि तरफ बढ़े हि थें कि सहसा पीछे सें दिवाकर केँ पीए नें आवाज़ दि।
"चौधरी साहब, चौधरी साहब। "पीए नें बदहवास सें लहजे मे कहा थां।
"क्याँ बात हैं मनोहर लाल?" दिवाकर चौधरी केँ लहजे मे कठोरता थि__"क्यूं गला फाड़रहे तुम्? देख नहि रहे, हम् ज़रूरी काम सें कमरे मे जारहे हें?"
"अवश्य जाइये चौधरी साहब। " मनोहर लाल नें अजीबभाव सें कहा___"मगर उससे पहलेइसे तौ देख लीजिए। "
"क्याँ हैं यह?" दिवाकर चौधरी कि भृकुटी तन गई, बोला___"तुम् हमेंफोन देखने कां कहरहे होँ इस वक़्त? दिमाग़ तौ ठीक हैं न् तुम्हारा?"
"आप् एक् बारदेख लीजिए नं चौधरी साहब। " मनोहर लाल नें विनती भरेभाव सें कहा___"उसके बाद आपको जौ करना हैं करते रहिएगा। "
"दिखाओ क्याँ हैं यह?" दिवाकर चौधरी नें मनोहर लाल केँ हाथ सें फोन छींन लिया थां। फोन कि स्क्रीन पर्र कोई वीडियो पुशमोड पऱ नज़र आँ रहा थां।
"तुमने हमेंयह दिखाने केँ लिए रोंका हैं मनोहर लाल?" दिवाकर चौधरी नें गुस्से सें कहा।
"क्रोध मत कीजिए चौधरी साहब। " मनोहर लाल नें कहा___"एक् बारउस वीडिओ कों प्ले तौ कीजिए। "
दिवाकर चौधरी नें पहले तौ खा जाने वाली नज़रों सें मनोहर लाल कों देखाफिन फोन कि स्क्रीन पर्र देखते हुएउस वीडिओ कों प्लेकर दिया। बड़े सें स्क्रीन टचफोन मे वीडिओ केँ प्ले होते हि जौ कुछ नज़रआया उसेदेख कर दिवाकर चौधरी केँ होशउड़ गए। दिलो दिमाग़ सुन्न सां पड़ता चला गय़ा। यहसच हैं कि उसके हाॅथ सें फोन छूटते छूटते बचा थां। सिर पर्र एकाएक हि जैसे पूरा आसमान हि भरभरा करगिर पड़ा थां उसके।
चौधरी कि हालत एक् समय मे ऐसी होँ गई जैसे उसकासभी कुछलुट गय़ा होँ। चेहरा फक्कपड़ गय़ा थां उसका। बाॅकी दोनो औऱ सुनीता भि चौधरी कि यहदशा देखकर बुरीतरह चौंके। उन्हें समझ नं आया कि अचानक चौधरी साहब कों क्याँ हौ गय़ा हैं।
"क्याँ हुआ चौधरी साहब?" अवधेश श्रीवास्तव नें हैरानी सें कहा__"आप् इसतरह बुत सें क्यूं बनगए? क्याँ हैं उसफोन मे?"
"आंहा, लो तुम् भि देखलो। " दिवाकर चौधरी नें फोन पकड़ा दियाउसे।
अवधेश केँ संगसंग अशोकव सुनीता नें भि फोन मे चालू वीडियो कों देखा। औऱ अगले हि लम्हा उनकी भि हालत खराब हौ गई।
"यहसभी क्याँ हैं मनोहर लाल?" अशोक वर्मा नें गुस्से सें कहा___"चौधरी साहब कां ऐसा वीडियो इसफोन मे कहा सें आया?"
"यह वीडियो किसी अंजान नंबर सें भेजा गय़ा हैं सर। " मनोहर नें कहा___"अभि पाॅच मिनट पहले हि आया हैं। इतना हि नहि अलगअलग चार वीडियो औऱ भि हें। बाॅकियों कों भि प्ले करकेदेख लीजिए। "
अशोक नें वैसा हि किया। कहने कां मतलबयह कि चारो वीडियो अलगअलग ब्यक्तियों केँ थें। पहला दिवाकर चौधरी कां, दूसरा अशोक मेहरा कां, तीसरा सुनीता वर्मा कां औऱ चौथा अवधेश श्रीवास्तव कां।
चारो वीडियो देखने केँ बादउन चारों कि हालत बेहद खराब होँ गई। सबके पैरों तले सें ज़मीन कोसों दूर निकल गई थि।
"चौधरी साहबयह सभी वीडियो हम् लोगों केँ केसेबन गए?" अशोक मेहरा नें कहा__"औऱ इन वीडियोज मे जौ स्थान हैं वोँ तौ आपके फार्महाउस कि हि हैं। मतलबसाफ हैं कि वहीं पऱ हमारे ऐसे वीडियो बनाएगए। मगर प्रश्न हैं कि किसने बनाएऐसे वीडियो? क्याँ हमारे बच्चों नें? यकीनन चौधरी साहब, यह उन लोगों नें हि बनाया हैं। "
"अशोकसही कहरहे हें चौधरी साहब। " अवधेश श्रीवास्तव नें कहा___"हमारे बच्चों नें हि यह वीडियो बनाया। क्योंकि बाहरी कोई वहाॅजा हि नहि सकता। "
"यह सभी छोंड़ो औऱ यह सोचो कि यह वीडियो किसने भेजा हमारे मोबाइल पऱ?" दिवाकर चौधरी नें कहा___"हमारे बच्चे तौ ऐसा करेंगे नहि। क्योंकि ऐसा करने कि उनकेपास कोईवजह हि नहि हैं। उन्होंने यहसोच कर वीडियो बनाया कि हम् अपने बाप वोगों कि मौज मस्ती अपनी ऑखों सें देखेंगे। उनके दिमाग़ मे ऐसे वीडियोज हमारे पास भेजने कां कोई प्रश्न हि नहि हैं क्योंकि उनकीहर इच्छाओं कि पूर्ति हम् बखूबी करते हें। यह किसी औऱ कां हि काम हैं अवधेश। हमारे मोबाइल मे वीडियो भेजने कां मतलब हैं कि सामने वाला हमें बताना चाहता हैं कि उसकेपास हमारी इस करतूत कां सबूत हैं औऱ वोँ हमेंजब चाहे एक्सपोज कर सकता हैं। अब प्रश्न यह हैं कि वोँ कौन हैं जिसने यह वीडियो भेजा औऱ किस मकसद केँ तहत भेजा?"
"मामला बेहद गंभीर होँ गय़ा हैं चौधरी साहब। " सुनीता नें कहा___"हमारे बच्चों नें तौ हमें बड़ी भारी मुसीबत मे डाल दिया हैं। "
"मुसीबत तोँ अब होँ हि गई हैं मगर इससे निपटने कां मार्ग तोँ अब ढूढ़ना हि पड़ेगा न्?" दिवाकर चौधरी नें कहा__"सबसे पहलेयह पता करना होगा कि यह वीडियो उसकेपास केसेआए औऱ उसने हमेंकिस मकसद सें भेजा हैं?
"वीडियो आपके फार्महाउस केँ उसी कमरे मे बनाया गय़ा हैं चौधरी साहबजिस कमरे मे हम् लोग अक्सर शबाब कां मजा लूटा करते हें। " अशोक नें कहा___"मतलब साफ हैं वीडियो भेजने वाले कों यह वीडियो वहीं सें मिले होंगे। अब सबसे बड़ा प्रश्न यह हैं कि आपके फार्महाउस पऱ ऐसाकौन ब्यक्ति गय़ा औऱ यहसभी वीडियोज वहाॅ सें उठाकर चंपत हौ गय़ा? आपके फार्महाउस केँ वोँ गार्ड्स कहाॅ थें उस वक़्त जबकोई बाहरी वहाॅआकर यहसभी काण्ड कर गय़ा?"
अशोक मेहरा कि इन बातों सें सन्नाटा छा गय़ा हाल मे। सबका दिमाग़ मानो चकरघिन्नी बनकयरह गय़ा थां। किसी कों कुछसमझ मे नहि आँ रहा थां कि यहसभी अचानक कौन सि आफत आँ गई थि। जिसने उनसभी महारथियों कों अपंग सां बना दिया थां।
"मनोहर लालपता करो किसने यह हिमाकत कि हैं?" दिवाकर चौधरी नें कहा___"जिस नंबर सें यह वीडियोज आईं हें उस नंबर पऱ मोबाइल करो। "
"मैने बहुतों बार मोबाइल लगाया चौधरी साहबमगर नंबरबंद बतारहा हैं। " मनोहर लाल नें कहा___"आप् कहें तौ पुलिस कों यह नंबरदे दूॅ वोँ जल्द हि पताकर लेंगे कि यह नंबर किसका हैं औऱ किस स्थान सें इस नंबर केँ द्वारा यह वीडियोज भेजी गई हें?"
"तुम्हारा दिमाग़ तौ नहि ख़राब होँ गय़ा मनोहर लाल। " दिवाकर गुस्से सें बोला__"यह घटिया ख़याल आया केसे तुम्हारे ज़हन मे? सोचोअगर हमने पुलिस कों नंबर दिया तोँ उसका अंजाम क्याँ हौ सकता हैं? जिसने भि यह दुस्साहस किया हैं वोँ कोई मामूली ब्यक्ति नहि हौ सकता। उसे भि यहपता होगा कि हम् उसकापता लगाने केँ लिए उसका नंबर पुलिस कों दे सकते हें। उसने पुलिस कों नंबर न् देने कि कोई चेतावनी भले हि हमें नहि दि हैं मगर हमें तौ सोचना समझना चाहिए न्? अगर हमनेऐसा किया तौ संभव हैं कि वोँ हमारे यह वीडियो पुलिस कों देदे याँ सार्वजनिक करदे। उस सूरत मे हमारा सारा किस्सा हि ख़त्म हौ जाएगा। शहर कि जनता औऱ यह पुलिस प्रशासन सभी हमारे खिलाफ़ होँ जाएॅगे। इसलिए हमें ठंडे दिमाग़ सें इसके बारे मे सोचना होगा। बिना मतलब केँ याँ बिना मकसद केँ कोई किसी केँ संगऐसा नहि करता। उसनेऐसा किया हैं तौ देर सवेर अवश्य उसकाकोई मैसेज याँ मोबाइल भि आएगा। तब हम् उससे पूछेंगे कि वो क्याँ चाहता हैं हमसे?"
"इसका मतलबअब हम् उस ब्यक्ति केँ किसी मोबाइल याँ मैसेज कां इंतजार करें जिसने यह वीडियोज हमें भेजा हैं?" अवधेश श्रीवास्तव नें कहा।
"इसके अलावा हमारे पास दूसरा कोई मार्ग भि तौ नहि हैं। " दिवाकर नें कहा___"हमें एक् बार उससेबात तोँ करनी पड़ेगी। आख़िर पता तौ चले कि उसनेऐसा किस मकसद सें किया हैं? उसकेबाद हि हम् कोई अगला क़दमउठा सकते हें। "
"ठीक हैं चौधरी साहब। " अशोक मेहरा नें कहा___"जैसा आप् उचित समझें वैसा कीजिए। मगरयह मैटरऐसा हैं कि हम् सबकेहोश उड़ा देगा। सभी कुछ बरबाद कर देगा। "
"बस एक् बार उसकाकोई मोबाइल याँ मैसेज तौ आनेदो। " दिवाकर नें कहा___"उसके बाद हम् बताएॅगे उसे कि हमारे संगऐसी हरकत करने कां अंजाम कितना भयावह होता हैं। "
दिवाकर चौधरी कि इसबात सें एक् बारफिन हाल मे सन्नाटा छा गय़ा। लेकिन सबकेमन मे जौ तूफान उठ चुका थां उसे रोंकना उनकेबस मे न् थां।
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"चौधरी आज सें तेरे बुरेदिन शुरुआत हौ गए हें। मासूम औऱ मजलूमों पर्र तूने, तेरे साथियों नें औऱ तेरे हराम केँ पिल्लों नें जौ भि ज़ुल्म ढाए हें उनका हिसाब देने कां टाइम आँ गय़ा हैं। " रितू कि गाड़ी ऑधी तूफान बनी फार्महाउस कि तरफ दौड़ी जारही थि। संग हि मन हि मन वो यहसभी कहती भि जारही थि।
रितू नें ऐसी स्थान सें अपनेनये फोन मोबाइल द्वारा वोँ वीडियोज चौधरी केँ फोन पर्र भेजे थें जिस स्थान पर्र एक् नई बिल्डिंग कां निर्माण कार्य चलरहा थां। लेकिन इस वक़्त वहाॅ पऱ कोई नं थां। यहीं सें उसने चौधरी कों वोडियोज भेजे थें। वीडियो भेजने केँ बाद उसने मोबाइल कों स्विचऑफ कर दिया थां। उसका स्वयं कां जोँ आईफोन थां वोँ पहले सें हि स्विचऑफ थां। उसके दिमाग़ मे हर चीज़ सें बचने कि भि सोच थि।
ऑधी तूफान बनी उसकी जिप्सी उसके फार्महाउस पऱ रुकी। जिप्सी सें उतरकर वो तेज़ी सें अपने कमरे कि तरफबढ़ गई। बाहर् मेनगेट पऱ शंकर काका नज़रआया थां उसे लेकिन हरिया काका नज़र नहि आया थां। कमरे मे जाकर उसनेनया वाला मोबाइल आलमारी मे रखा औऱ उसे लाॅककर जल्दी पलटी।
जिप्सी मे बैठी रितू कां रुखअब अपने हवेली कि तरफ थां। उसके दिमाग़ मे बड़ी तेज़ी सें कई सारी चीज़ें चलरही थि। उसके ज़हन मे यहबात हरसमय बनी हुई थि कि उसने विधी सें वादा किया थां कि विराज कों उसकेपास अवश्य लाएगी।
रितू केँ पास विराज कां कोई काॅन्टैक्ट करने कां ज़रिया न् थां। इसलिए उसनेयह पता लगाने केँ लिए किसी व्यक्ति कों लगाया हुआ थां कि उसके किसी दोस्तों केँ पास विराज कां कोईअता पता होँ। दूसरे दिन सुभह हि उसके व्यक्ति नें उसे बताया थां कि विराज केँ दो हि लड़के खास मित्र हुआ करते थें। एक् कां नाम दिनेश सिंह थां जौ कि आजकलदेश केँ किसी दूसरे राज्य मे जॉबकर रहा हैं। दूसरे मित्र कां नाम हैं पवन सिंह चंदेल। यह विराज कां विद्यालय केँ वक़्त सें हि साथी थां। ग़रीब हैं, आजकल हल्दीपुर मे हि बस स्टैण्ड केँ पासपान कि दुकान खोलरखा हैं। घऱ मे विधवा माॅ केँ अलावा एक् बेहन हैं जौ ऊम्र मे उससे बड़ी हैं। मगर आर्थिक तकलीफ़ कि वजह सें वो अपनी बड़ी बेहन कि विवाह नहि करापा रहा हैं।
रितू केँ खबरी नें उसेपवन सिंह कां नंबर लाकर दिया थां। रितू नें पवन कों मोबाइल लगाकर उसे अपना परिचय दिया औऱ मिलने कां कहा थां। खैर, रातूजब पवन सें मिली तौ उससे विराज केँ बारे मे पूछा तोँ पवन नें बड़ा अजीब सां जवाब दिया थां उसे।
"आप् मेरेयार राज कि बड़ी बेहन हें इसलिए आप् मेरी भि बड़ी बेहन केँ समान हि हें। " पवन नें कहा थां___"आप् मेरेघऱ पऱ आई हें, आपकातहे दिल सें स्वागत हैं। मगरअगर आप् मुझसे मेरे जिगरी दोस्त कां पता याँ मोबाइल नंबर पूछने आई हें तौ क्षमा कीजिएगा दिदी। मे आपको नाँ तोँ उसकापता बताऊॅगा औऱ नाँ हि उसका मोबाइल नंबर दूॅगा। "
"मगर क्यूं पवन क्यूं?" रितू नें चकितभाव सें कहा थां___"तुम् एक् बेहन कों उसके भइया कां अतापता क्यूं नहि बताओगे?"
"बेहन.भइया???" पवन सिंह बड़े अजीबभाव सें हॅसा थां, उसकीउस हॅसी मे रितू नें साफसाफ दर्द महसूस किया____"कौन बेहन भइया दिदी? अरे मेरे दोस्त नें तौ सबको हमेशा अपना हि माना थां मगर उसके स्वयं केँ माॅ बाप औऱ बेहन केँ अलावा किसी भि परिवार वाले नें उसे अपना नहि माना। औऱ औऱ आप्???? आप् भि बताइये दिदी, आप् नें राज कों कब अपना भइया माना थां? अरेउसे तौ आपने बचपन सें लेकरआज तक मात्र दुत्कारा हैं दिदी। ख़ैर, जाने दीजिए। आपसेयह सभी कहने कां मुझेकोई हक़ नहि हैं। क्षमा करना दिदी, आपकोदेख कर जाने केसे क्रोध सां आँ गय़ा थां औऱ दिल कां गुबार मुख सें निकल गय़ा। मगर, जिस काम केँ लिए आप् यहाॅआई हें वोँ हर्गिज़ नहि होगा। मुझेसभी पता हैं दिदी, मेरे साथीराज औऱ उसकीमाॅ बेहन कों खोजने केँ लिए आपकेडैड नें अपने आदमियों कों जानेकब सें लगाया हुआ हैं। मगरकोई भि उनका व्यक्ति उसे ढूॅढ़ नहि पाएगा। "
"तुम् ग़लतसमझ रहे हौ पवन। " रितू नें बेचैनी भरेभाव सें कहा थां___"मे यह मानती हूॅ कि मैने अपनेउस भइया कों कभी अपना नहि माना थां मगरआज ऐसा नहि हैं भइया। आज तुम्हारी यह दिदी बहोत प्रेम करनेलगी हैं अपनेउस भइया सें। इससमय अगरराज मेरे सामने आँ जाए तोँ मे उसके पैरों मे पड़कर उससे अपने किये कि मुआफ़ी माॅग लूॅगी। यहसभी वक्त वक़्त कि बातें हें पवन। हम् जब बच्चे होते हें तौ बिलकुल कुम्हार केँ पासरखी हुइ उस गीली औऱ कच्ची मिट्टी कि तरह होते हें। हमारे माता पिता कुम्हार कि तरह हि होते हें। वोँ जैसे चाहें अपने बच्चों कों किसी मिट्टी केँ घड़े कि तरहढाल देते हें। कहने कां मतलबयह कि, मेरे माॅमडैड नें हम् बेहन भाइयों कों बचपन सें जोँ सिखाया पढ़ाया हम् उसी कों करतेचले गए। मगर समय हमेशा एक् जैसा नहि रहतापवन। हर सच्चाई कों एक् दिन पर्दे सें निकलकर बाहर् आनां हि पड़ता हैं। यही उसकी नियति होती हैं। औऱ सच्चाई क्याँ हैं क्याँ नहि यह मुझेसमझ आँ गय़ा हैं। मुझेपता हैं पवन कि मेरा भइयाराज वोँ कोहिनूर हैं जिसका कोईमोल हौ हि नहि सकता। "
"वाउ दिदी वाउ। "पवन कह उठा___"आज आपकेमुख सें यह अमृत वाणी केसे निकलरही हैं? हैरत कि बात हैं, खैर मुझे क्याँ हैं। मगर इतनाजान लीजिए कि मे आपकीइन मीठी बातों केँ जाल मे फॅसने वाला नहि हूॅ। मेरीवजह सें मेरे साथी कों कोई नुकसान नहि पहुॅचा सकता। अब आप् जाइये दिदी। मुझे आपसे औऱ कोईबात नहि करनी हैं। "
"केसे यकीन दिलाऊॅ पवन?" रितू कि ऑखों मे ऑसू आँ गए___"आखिर केसे तुम्हें यकीन दिलाऊॅ कि मे अब वैसी नहि रही? मे हनुमान जी कि तरह अपना सीनाचीर कर नहि दिखा सकतीमगर ईश्वर जानता हैं कि मेरे सीने मे मेरा भइया अवश्य मौजूद होँ गय़ा हैं। तुम् मुझे उसका गुनहगार समझते हौ तौ चलोठीक हैं पवन। तुम् मुझेराज कां अतापता भि नं दोमगर इतना तौ उसेबता हि सकते हौ नं वोँ कुछदेर केँ लिए अपनीउस विधी केँ पास आँ जाए जिससे वो आज भि उतना हि प्रेम करता होगा जितना पहले करता थां। "
"नाममत लीजिए उस बेवफ़ा कां। " पवन नें सहसा आवेशयुक्त लहजे मे कहा___"उसी कि बेवफ़ाई कि वजह सें मेरायार रातरात भर मेरेपास रोता रहता थां। कितना चाहता थां वोँ उसे। मगर उसदिन पताचला कि दुनियाॅ भर कि कसमें औऱ दलीलें देने वाली वोँ लड़की कितनी झूठी औऱ मक्कार थि जिसदिन आप् लोगों नें मेरेयार कों औऱ उसकेमाॅ बेहन कों हवेली सें बाहर् धकेल दिया थां। उधर आप् लोगों नें हवेली सें धकेला औऱ इधरउस कम्बख्त नें मेरेयार कों अपनेदिल सें धकेल दिया। एक् लम्हा मे गिरगिट कि तरहरंग बदल लिया थां उस लड़की नें। रुपये पैसे सें इश्क थि उसे नां कि मेरे साथी सें। "
"सच्चाई क्याँ हैं इसका तुम्हें पता नहि हैं पवन। " रितू नें दुखीभाव सें कहा__"तुम् औऱ विराज हि क्याँ बल्कि नहि समझ सकता कि उसनेऐसा क्यूं किया थां?"
"अरे दौलत केँ लिए दिदी दौलत केँ लिए। "पवन नें झट सें कहा___"उसने मेरेयार कि सच्ची इश्क कों अपने पैरों तले रौंदा थां। "
"यहसच नहि हैं पवन। " रितू नें कहा__"अगर सच्चाई जान लोगे न् तोँ पैरों तले सें ज़मीन गायब हौ जाएगी तुम्हारे। उसनेयह सभीइस लिए किया थां ताकि विराज उससे नफ़रत करनेलगे औऱ किसी दूसरी लड़की केँ संग प्रेम इश्क करने कां सोचे। माना कि यह आसान नहि थां मगरसमय औऱ हालात हर ज़ख्म भर देता औऱ एक् नया मोड़ भि जिंदगी मे लें आता हैं। "
"आप् कहना क्याँ चाहती हें दिदी?" पवन नें कहा___"औऱ इनसभी बातों कां आज कहने कां क्याँ मतलब हैं?"
"विधी कों ब्लड कैंसर थां पवन। " रितू नें मानो धमाका किया___"औऱ वोँ भि लास्ट स्टेज कां। इसीलिए उसनेयह सभी किया थां राज केँ संग। ताकि वो उसेभूल जाए औऱ दूर हौ जाए उससे। "
"क क्याँ?????" पवन बुरीतरह चौंका थां___"यह यह आप् क्याँ कहरही हें दिदी? विधी कों कैंसर?? नहि नहि ऐसा नहि हौ सकता। यह सभीझूठ हैं। "
"अगर तुम्हें मेरीबात कां यकीन नहि हैं तौ मेरेसंग चलकर स्वयं अपनी ऑखों सें देखलो तुम्। " रितू नें कहा___"इस समय भि वो हास्पिटल मे हि हैं। तुमने शायद सुना नहि होगाउस रेप केँ बारे मे जोँ अभि कुछ दिनों पहले हि हुआ थां। विधी केँ संगयह हादसा हुआ थां जिससे उसकी हालत बहोत खराब हौ गई थि। हास्पिटल मे जबउसे भर्ती किया गय़ा तभी उसके चेकअप सें डाक्टर कों यहपता चला कि विधी कों लास्ट स्टेज कां ब्लड कैंसर हैं। जबकि कैंसर वालीबात विधी कों पहले सें हि पता थि। "
पवन सिंह रितू कों अजीबभाव सें इसतरह देखने लगा थां जैसे रितू कां सिरधड़ सें अलग होकरऊपर हवा मे अचानक हि कत्थक करनेलग गय़ा हौ। अविश्वास सें फटी हुइ उसकी ऑखों मे एकाएक हि ऑसू आँ गए।
"हे ईश्वर! यह क्याँ होँ गय़ा?" पवन नें ऊपर कि तरफदेख कर दुखीभाव सें कहा__"एक् औऱ सच्चे प्यार कि यहदशा कर दि तूने। बहोत बेरहम औऱ बेदर्द हैं तुँ। दिदी, मुझेउस महान लड़की कों देख्ना हैं। उससे मुआफ़ी माॅगना हैं। हे ईश्वर कितना बुराभला कहा मैनेउसे औऱ आज तक बुराभला सोचता भि रहाहूॅ। "
रितूपवन कों लेकर हास्पिटल पहुॅची तौ पवन नें देखा विधी कों। विधी कि कुरुण हालतदेख करपवन कां कलेजा मुह कों आँ गय़ा। वो विधी केँ पैरों मे अपनासिर रख दिया औऱ माफ़ी माॅगने लगा। पवन बहोत हि भावुक किस्म कां लड़का थां, इसलिए अधिकदेर तक वो विधी केँ पास न् रहसका थां। उसेरह रहकर रोनाआने लगता थां।
हास्पिटल सें बाहर् आकर उसने स्वयं कों औऱ अपने अंदर केँ जज़्बातों कों शान्त किया। तभी पीछे सें रितू नें उसके कंधे पऱ हाथरखा। उसनेपलट कर देखाउसे।
"क्याँ अब भि तुम्हें लगता हैं पवन कि मे तुमसे झूॅठबोल रहीहूॅ?" रितू नें कहा थां।
"नहि दिदी, प्लीज क्षमा कर दीजिए। " पवन नें अपनेहाथ जोड़कर कहा थां।
"इसी विधी नें मुझे एहसास कराया कि मे कितना ग़लत सोचती थि अब तक अपने भइया विराज केँ लिए। " रितू नें कहा___"विधी कि कथा नें मुझेयह एहसास कराया भइया कि मेरा अपने भइया केँ लिएआज तक अनुचित ब्यौहार करना कितना ग़लत थां। इसको मैनेवचन दिया हैं पवन कि इसके महबूब कों इसकेपास अवश्य लाऊॅगी। मे इसीलिए तुम्हारे पासआई थि पवन। मैंने अपने भइया केँ संग क्याँ किया हैं अबतक उसकाफल मुझे अवश्य मिलेगा औऱ मिलना भि चाहिए। "
"ऐसामत कहिए दिदी। " पवन नें कहा__"यह सभी टाइम टाइम कि बातें हें। जौ बीत गय़ा उसेभूल जाइये औऱ एक् नया संसार बनाने कि सोचिये। मे अभि विराज कों मोबाइल करताहूॅ औऱ उसे विधी केँ बारे मे सभी बताता हूॅ। "
"नहि नहि पवन। " रितू नें झट सें कहा__"उसे यहमत बताना कि विधी कों क्याँ हुआ हैं। बल्कि कुछ औऱ कहो। कुछ ऐसा कि वोँ दूसरे दिन मुंबई सें यहाॅआने केँ लिएचल दे। "
"ठीक हैं दिदी। " पवन नें कहा थां__"मे ऐसा हि करताहूॅ। "
कहने केँ संग हि पवन नें विराज कों मोबाइल कों मोबाइल लगा दिया थां। उसकादिल बुरीतरह धड़के जारहा थां। रिंग जाने कि आवाज़ सुनाई देरही थि। औऱ तभी,
"हाॅ भइयाबोल केसेयाद किया?"उधर सें विराज नें कहा थां।
"भइयाअगर तेरेपास समय होँ तोँ तुँ जल्द सें गाॅव आँ जा। "पवन नें कहा थां।
"अरे क्याँ हुआ भइया?" विराज केँ चौंकने जैसी आवाज़ आई___"सभी ठीक तोँ हैं नां?"
"बस भइया तुँ कल हि आजा यहाॅ। "पवन नें गंभीरता सें कहा___"तुम्हारी तरफ मेरी क़सम हैं भइया। तूँ कल यहाॅ आएगा। "
"पर्र बात क्याँ हैं पवन?" विराज कां चिंतित स्वर उभरा___"देख तूँ मुझसे कुछ भि मत छुपाओके। चाची(पवन कि माॅ) कि तबीयत तौ ठीक हैं नां? पूजा दिदी ठीक तोँ हें नां मेरे भइया?सच सचबता न् क्याँ बात हैं?"
"भइया परेशान न् होँ। " पवन नें कहा__"बस तुँ कलआजा भइया। बाॅकी सभीकुछ तेरी यहाॅआने पऱ हि पता चलेगा। तूँ आएगा नं कल?"
"मे आज हि रात कि ट्रेन सें निकल लूॅगा यहाॅ सें। " विराज नें कहा___"कल दोपहर तक पहुॅच जाऊॅगा। "
"ठीक हैं भइया मे तुम कोबस स्टैण्ड पर्र हि मिलूॅगा। " पवन नें कहा___"मुझे पहुॅचते हि मोबाइल कर देना। "
"आखिरबात क्याँ हैं दोस्त?" विराज कि आवाज़ आई___"तुँ बता क्यूं नहि रहा हैं?"
"तुँ आजाबस। " पवन नें कहा___"चल रखताहूॅ मोबाइल। "
पवन नें मोबाइल काट दिया। एक् गहरी साॅसली उसने औऱ फिन रितू कि तरफ देखते हुए कहा___"लीजिए दिदी। मेरा दोस्त कल दोपहर कों आँ जाएगा यहाॅ। "
"तुमने मेरेवचन कों झूठा होने सें बचा लिया मेरे भइया। " रितू नें कि ऑखेंभर आई। उसनेझपट करपवन कों अपनेगले सें लगा लिया।
"आपने भि तोँ मुझेपाप करने सें बचाया दिदी। " पवन नें कहा___"आज तक मे अपनेमन मे उस विधी कों जाने कितना बुराभला कहता थां जिस विधी कों मुझे प्रणाम करना चाहिए थां। "
"ऐसी बातें मेरे भइया विराज कां एक् अच्छा मित्र हि कह सकता हैं। " रितू नें पवन सें अलग होकर कहा___"इतने ऊॅचे संस्कार उसके हि दोस्तों मे हौ सकते हें। मुझे अपने भइया औऱ उसकेऐसे दोस्तों पर्र नाज़ हैं। चलोअब मे चलतीहूॅ भइया। मगर एक् विनती हैं तुमसे, विराज सें यहमत कहना कि यहसभी मैनेकहा थां तुमसे। "
"अरेमगर क्यूं दिदी?" पवन चौंका थां__"आप् ऐसा क्यूं चाहती हें? अब तौ आप् उसे अपनेगले सें लगा लीजिए दिदी। क्यूं अपनी बेरुखी औऱ बेदर्दी सें उसकादिल दुखाना चाहती हें? याँ फिन मे यह समझूॅ कि आपने वोँ सभी जोँ कहा थां वोँ सभी एक् झूठ थां?"
"नहि मेरे भइया। " रितू नें कहा___"मे तोँ चाहती हूॅ कि अपने भइया कों मे अपने कलेजे सें लगालूॅ मगर मुझेयह भि पता हैं कि उसकीजान कों खतरा भि हैं। अगर मेरेडैड कों पताचल जाए कि विराज गाॅवआया हुआ हैं तोँ सोचो क्याँ होगा?इस लिए मे सबसे पहले उसकी सेफ्टी कां ख़याल रखूॅगी। "
"ओह दिदी सचमुच। " पवन नें कहा__"यह तोँ मे भूल हि गय़ा थां। तौ आप् उसकी सेफ्टी केँ लिए क्याँ करेंगी दिदी?"
"वोँ तुम् मुझ पर्र छोंड़ दो भइया। " रितू नें कहा___"मेरे रहते मेरे भइया कों कोईछू भि नहि सकेगा। "
रितू केँ चेहरे पर्र एकाएक हि कठोरता आँ गई थि। पलक झपकते हि शेरनी कि भाॅति ज़लज़ला नज़रआने लगा थां उसके चेहरे पऱ। पवन सिंह एक् बार कों तोँ काॅप हि गय़ा थां उसेइस रूप मे देखकर।
रितू केँ मन मे यहीसभी फिल्म कि तरहचल रहा थां। उसकी जिप्सी ऑधी तूफान बनी हवेली कि तरफ दौड़ी जारही थि। उसेपता थां कि उसका बाप विराज कों खोजने केँ लिए अपने आदमियों कों लगाया हुआ हैं। संभव हैं कि अजय सिंह नें अपने आदमियों कों गाॅव हल्दीपुर औऱ शहर गुनगुन मे भि फैलारखा हौ। रितू केँ मन मे केवल एक् हि विचार थां कि विराज कों किसी भि हालत मे अपने बाप औऱ उसके आदमियों कि नज़र मे नहि आने देना हैं। यह उसकी जिम्मेदारी थि कि विराज पऱ किसीतरह कां कोई संकट नं आँ पाए। क्योंकि वास्तविकता तोँ यही थि नं कि विराज कों उसने हि पवन सिंह केँ द्वारा बुलवाया हैं।
रितू कि जिप्सी हवेली केँ गेट सें अंदर दाखिल होतेहुए पोर्च मे जाकर रुकी। जिप्सी सें उतरकर वो अंदर कि तरफबढ़ गई।
दोस्तो भाग हाज़िर हैं,,,,,,,,
मैने आप् लोगों कों अपनी दूसरी कथा केँ भाग मे बताया थां कि मेरे रिलेटिव मे विवाह हैं इसलिए मुझे वापसघऱ जानां हैं। मे उसीदिन घऱ केँ लिए निकल गय़ा थां दोस्तो। इसीलिए भाग नहि दे पाया। आप् लोग तौ जानते हें इस वक़्त शादियों कां सीजनचल रहा हैं। तौ दोस्तो उसी केँ लिए वापस छुट्टी लेकरआया हूॅघऱ।
यह एपसोड मैने जल्द जल्द मे लिखा हैं ताकि आप् लोगों कों इरिटेट नं होना पड़े। मगर इसकेबाद भागआने मे देर हौ सकती हैं दोस्तो इसलिए नाराज़ नं होना।
शुक्रिया,,,,,
♡ एक् नया संसार ♡ (Full Storyd) - Aage kya hua? Next part padhiye
धन्यवाद भइया आपकीइस सुंदर प्रतिक्रिया केँ लिए,,,,,,,,,, एपसोड दे दिया हैं भइया,,,,,
धन्यवाद भइया आपकीइस हसीन प्रतिक्रिया केँ लिए,,,,,,,,,, एपसोड दे दिया हैं भइया,,,,,
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