Ek Chaat k Niche (Family Saga) – New Episode
मे नीचे मां केँ कमरे मे गय़ा। माँ बेड पर्र पूरीतरह नंगी पड़ीथीं औऱ फ़ोन पर्र दबी आवाज़ मे बातकर रहीथीं। जब मे अंदर दाख़िल हुआ, तौ मां नें इशारे सें चुप रहने कों कहा। मे चुपचाप अंदरचला गय़ा औऱ द्वार (दरवाज़ा) आहिस्ते सें बंदकर दिया।
मे माँ केँ संग जाकरलेट गय़ा औऱ उनका एक् boob मुँह मे डाल लिया, जैसेकोई छोटा बच्चा दूध पीता होँ, मगर मेरी चूसने कि गति औऱ पाग़लपन एक् बच्चे जैसा नहि थां।
माँ फ़ोन पर्र लगीथीं। मैंने इशारे सें फ़ोन काटने कों कहा, पऱ मां मज़े मे फ़ोन पर्र लगी रहीं। मैंने फ़ोन पकड़कर स्पीकर पे डाल दिया। दुसरी तरफ सें डैडी कि आवाज़ आई.
डैड: "आज सारीरात बात करूँगा तेरेसंग। तुँ भि ख़ुश हौ जाएगी, कहती रहती हैं मेरेसंग बात नहि करता। "
मे माँ केँ मुँह कि तरफ़देख रहा थां। फिन मैंने सोचा, आज माँ कों ऐसे हि चोदूँगा, डैडी सें बात करते-करते।
माँ: "आज केसे मिज़ाज बन गय़ा मेरेसंग बात करने कां? क्याँ बात, कोई मिली नहि आज घोड़ी बनणे कों?"
डैड: "नहि, आज अपनी पत्नि कों घोड़ी बनाना हैं। "
माँ: "अच्छा जी, करलो फिन। मे तौ नंगी हि पड़ी हूं। "
(इतना शुक्र हैं कि नीचेरूम मे नेटवर्क कि प्रॉब्लम हैं, नहि तौ डैडी वीडियो फोनकर लेते औऱ साराखेल ख़राब हौ जाता। )
डैड: "अच्छा मेरीजान, मे भि नंगा हि हूं। आँ जाफिन। "
मुझेयह गंदी बातें सुनकर पूरामजा आँ रहा थां। वक़्त भि बहोत होँ गय़ा थां। कहीं युवराज उठकरदेख न् लेँ औऱ नीचे नं आँ जाए। फिन गड़बड़ पड़ जानी थि।
माँ: "हाँजी, आँ गई मेरीजान। "
डैड:"अरे। मेरा लन्ड खड़ाहुआ पड़ा हैं। पकड़ केँ मुँह मे डाल लें। "
मैंने मां कों मेरे लन्ड कि तरफ़ इशारा किया। माँ मेरी टाँगों केँ पासबैठ गईं औऱ मेरा लन्ड पकड़ लिया। लन्ड पूरा तनकर खड़ा थां।
माँ: (फ़ोन पऱ) "हम्म। हाँजी। लन्ड पर्र किस करती हूं। आआहम्म। जान, कितना मोटा हैं तेरा। क्या बात है."
डैडी: "मुँह मे डाल लें मनजीत। हाय."
माँ मेरा लन्ड मुँह मे डालकर चूसने लगीं। मुझे भि पूरामजा आँ रहा थां। उनके मुँह कि गरमाहट महसूस होँ रही थि।
मां: (मेरा लन्ड चूसते हुए) "आआह्हम्म। ऊऊह्हम्म्म."
डैडी: (फ़ोन पर्र) "बड़ा ज़बरदस्त चूसती हैं सालिये! गोरों कां चूस-चूसकर एक्सपर्ट हौ गई हैं!"
मे सभीकुछ सुनरहा थां। मेरा पानी निकलने वाला थां। मैंने मां कों रोक दिया। मुझेमाल बुर मे हि निकालना थां।
मां उठकरबेड पर्र सीधीलेट गईं। औऱ डैड सें बात करने लगीं।
मां: "गोरों कां भि तोँ आपने हि चूसवाया थां."
मैंने मां कि टाँगें उठाकर अपने कंधों पर्र रखीं। बुर पऱ रखा औऱ एकदम सें अंदर धकेल दिया।
माँ कि चीख़ निकल गई।
माँ: "आआआह्ह। हायरे वे.मर गई."
डैड: (फ़ोन पर्र) "क्याँ हुआ?"
माँ: (आवाज़ कंट्रोल करती हुइ, मगर ज़ोर सें) ".धकेलदे बलदेव, लन्ड अपना मेरी बुर मे। आआआह्ह। अब सब्र नहि होता.हाय रे."
डैड: (फ़ोन पऱ) "आआआह्ह। अरेनी मेरी रंडी! लेँ। मुँह। आँ। डाल दिया तेरे बुर मे। ओह."
मे टाँगें उठाकर ज़ोर-ज़ोर सें धक्के मारने लगा। "आहम्म। आआह्ह."
बीस मिनट तक ज़ोरदार धक्के मारता रहा। औऱ सारामाल उनकी बुर मे निकाल दिया।
डैड कां भि फ़ोन पर्र बात करते-करते झड़ गय़ा थां। औऱ मां कां भि दोबार होँ गय़ा थां।
मां नें "गुड नाईट"कहा औऱ फ़ोनकाट दिया।
माँ नें उठकर बुर साफ़ कि औऱ एक् कुर्ती पहनली। मे मां केँ संगलेट गय़ा औऱ उन्हें किस करनेलगा।
मां: "दिलराज पुत्तर, जाअब अपनेरूम मे। कहीं युवराज उठकर नीचे नं आँ जाए। "
मैंने भि उठकरऊपर जानां हि सही समझा। मैंने मां कों प्रेम किया औऱ ऊपर अपनेरूम मे चला गय़ा, औऱ माँ भि सोगईं।
अगली सुभह मे थोडा देर सें उठा। कॉलेज तोँ जानां नहि थां। जबउठा तौ सुभह केँ दसबज चुके थें। उठकर नीचे गय़ा, मां रसोई मे कामकर रहीथीं। उन्होंने सलवार-कमीज़ पहनाहुआ थां, दुपट्टा रसोई केँ दरवाज़े पऱ टँगाहुआ थां। मैंने जाकर पीछे सें उन्हें कसकर जकड़ लिया।
माँ: "उठ गय़ा मेरा पुत्तर। "
मे: (उनकी गर्दन पर्र किस करतेहुए) "म्म्मुआआ। हाँजी मायलव। "
मां: "हम्म, सुभह-सुभह इतना प्रेम, अपनी मम्मी केँ संग?"
मे: "आप् होँ हि इतनी खूबसूरत, प्रेम करना तौ बनता हैं। "
माँ बर्तन धोरही थीं औऱ मे उन्हें पीछे सें जकड़े हुए खड़ारहा। मेरे दोनों हाथ उनकेपेट सें लिपटे हुए थें।
मे: "मां, युवराज गय़ा कॉलेज?"
माँ: "हाँ पुत्तर, गय़ा। औऱ तेरी बेहन भि गई। तूने नहि जानां थां?"
मे: "नहि, मैंने आज जानां नहि। मन नहि हैं मेराआज जाने कां। "
माँ: "अच्छा जी, मन क्यूं नहि हैं आज मेरे पुत्तर कां?"
मे: "बस। तुझेही छोड़कर जाने कों दिल नहि करता। "
मां: "ओह। अच्छा जी, येबात हैं। "
मे: "हाँजी। " (मैंने मां कां मुँह अपनी तरफ़ घुमा लिया। दोनों हाथों सें उनका चेहरा पकड़कर उनकी आँखों मे देखने लगा। ) "तूँ बहोत खूबसूरत हैं माँ। आईलवयू। "
माँ: "आईलवयू टू." (म्म्मुआआ। उन्होंने मेरे होंठों पर्र गरमकिस किया। )
मे: (उन्हें कमर सें पकड़कर अपनेसंग लगाते हुए)"आज पूरा खुशी लेना हैं मेरीजान। घऱ मे हम् दोनों हि हें, मां-बेटा। "
माँ: "ठीक हैं। जैसा मेरा पुत्तर कहे। "
मे: (उनके होंठों पऱ स्मूच (Smooch) करनेलगा.) "म्म्मुआआ." (मां भि पूरासंग देरही थीं। पाँच मिनट तक हम् किस करतेरहे। )
माँ: "चल, फ़्रेश होँ जा। मे भि काम निपटा लूँफिन। "
मे पीछे हटताहुआ मां कों छोड़ा औऱ बाथरूम कि तरफ़चला गय़ा।
फ़्रेश होकर बाथरूम सें बाहर् निकला। माँ नें गरमचाय बनाकर दि, हम् दोनों नें गरमचाय पी। माँ रसोई मे कप रखनेगईं। आज सलवार-कमीज़ मे वोँ बड़ी सेक्सी लगरही थीं। कमीज़ थोड़ी कसी हुईँ थि, जिससे नीचे उनकी गांड कि शेप बड़ी ज़बरदस्त लगरही थि।
माँ कप रखकर वापसआईं औऱ मेरेपास सोफ़े पऱ बैठगईं। मैंने माँ कों खड़ा करके अपनी जाँघों पर्र बिठा लिया। मां अपनी दोनों टाँगें खोलकर मेरी जाँघों पऱ बैठगईं। मे उनकी गर्दन पर्र किस करनेलगा। "आहम्म। माँ, तुम्हे पता हैं तुँ बड़ी सेक्सी हैं। "
मां: "अच्छा जी, औऱ कुछ?"
मे: "सच मे! देखते हि साला लन्ड खड़ा हौ जाता हैं। गोरों नें पूरी मेहनत कि हैं." (मैंने उनके मोटे मम्मो कों दबाते हुए बोला। )
माँ: "ओहवे कंजर, धीरे-धीरे! तुम्हें किसने कहा गोरों नें मेहनत कि हैं? तेरे डैडी कि मेहनत हैं। "
मे: "अच्छा, बसकरअब। ऐसे हि झूठमत बोल। मैंने सुन लिया थां जब तूँ डैडी सें बातकर रही थि। "
माँ: "बड़ा कंजर हैं तूँ, अपनी मां कि बातें सुनता हैं। "
मे: "अच्छा, अगर लज्जा करता, तोँ तुम्हे आज लन्ड पर्र नहि बिठाना थां। "
माँ: "पूरा बेशरम हैं तुँ। तेरा लन्ड मेरी गांड मे जाने कों फिनरहा हैं। "
मे: "तोँ लें लें नं फिन, क्यूं शर्मा रही हैं?"
मैंने माँ कों खड़ा किया औऱ उनकी सलवार-कमीज़ उतारकर उन्हें नंगाकर दिया औऱ किस करनेलगा। "आजकसर निकाल दूँगा पूरी। "
मां: "निकाल देकसर। लूट लेँ मज़े तूँ भि अपनी मम्मी केँ। "
मैंने नंगी मां कों गोद मे उठाया औऱ बेडरूम मे लें गय़ा। जाकरबेड पऱ सीधा लिटाया औऱ उनकी बुर पऱ किस कि। "उम्म्म्माआह्ह। हायराम। गीली हुईँ पड़ी हैं माँ तेरी तोँ!"
मां: "औऱ क्याँ पुत्तर, चूसा जौ हैं अपनी मां कों, गीली हि होनी थि। चल, अबडाल दे अंदर, क्यूं तड़पा रहा हैं कंजर। "
मे: "अरेनी मां। क्याँ डालूँ? बता, बोल एक् बार, फिन डालूँगा। "
माँ: "कंजर न् होँ तोँ! बेशरम, नंगा करके पूछता हैं अपनी मम्मी सें कि क्याँ डालूँ?"
मे: "हाँ, तौ बताफिन, मेरी रंडी, क्याँ डालूँ?" (मैंने उनकी बुर केँ अंदरजीभ फेरते हुए बोला। ) "आआह्हम्म."
मां: "आआह्ह। क्या बात है वे पुत्तर। तड़परही हूं। डालदे वे लन्ड, कंजर, अपनी मम्मी कि बुर मे!"
मे: (बुर पर्र जीभ फेरना रोक दिया। खड़ा होकर लन्ड कां सुपड़ा बुर पर्र रखा औऱ रगड़ने लगा। ) "आहम्म। हाय मां, कितनी सेक्सी औऱ चिकनी बुर हैं तेरी। आआहम्म."
मां: "आआह्ह वे कंजर! धकेलदे अब! रगड़ता हि रहेगा खसम!"
इतना सुनते हि, मैंने एक् हि झटके मे लन्ड अंदर धकेल दिया।
माँ कि चीख़ निकल गई।
माँ: "आआआह्ह। वेमर गई कंजर! धीरे-धीरे धकेलता! एक् हि बार मे पूरा धकेल दिया! आआआआह्ह्ह। एक् तोँ तेरा मोटा भि कितना हैं। आआह्ह ओह."
मे: (ज़ोर-ज़ोर सें धक्के मारने लगा। मां केँ ऊपर लंबालेट गय़ा औऱ उनके होंठ चूसने लगा। ) "आआह्हम्म। उम्म्म्हाआआह्ह। अहह.ओह। आजआई रंडी लन्ड केँ नीचे। आआह्ह."
मां: "सचवे। तूँ भि घोड़ा हि हैं। औऱ लन्ड भि घोड़े जैसा हि हैं तेरा। "
मे: "सच मे मां? मनपसंद आया मेरा लन्ड?"
माँ: "हाय कंजर। चीख़ें निकलवा रहा हैं पूरी, तेरा लन्ड। आआआह्हम्म। रुकना मत! ज़ोर लगाकर चोद!आज बड़ेसमय बाद असली हथियार गय़ा हैं अंदर। आआह्ह्ह्ह!"
मे: (मैंने भि धक्के तेज़-तेज़ मारने शुरुआत करदिए। ) "आआआह्ह। लेँ फिन धक्के! आआआह्ह! तूँ भि याद रखेगी कि पुत्तर केँ नीचे लंबी पड़ी थि! आआआह्ह hmm." (मैंने उनका मम्मा मुँह मे डालकर चूसना शुरुआत कर दिया। )
आधे घंटेबाद पोजीशन बदलली। मां मेरेऊपर बैठगईं औऱ लन्ड पऱ उछलने लगीं।
मां: "आआआह्ह.आआआह्ह अरे। आआआह्ह्ह्ह। उम्म्म्म्ह्म्म्!"
एक् घंटा लगातार चोदा औऱ माल माँ केँ पेट पर्र झड गय़ा। औऱ हम् वहीं लम्बे लेटगए।
दस मिनटबाद माँ बाथरूम मे गईं, फ़्रेश होकरमाल साफ़ करकेआईं। उसकेबाद हमने एक् औऱ राऊंड लगाया। औऱ नंगे हि लेटेरहे औऱ बातें करनेलगे।
मे: "कैसालगा मां?"
माँ: "सचवे, मजा आँ गय़ा। बड़े वक्तबाद इतनामजा आया किसी केँ संग। "
मे: "अच्छा? अभि कल हि तोँ अनमोल कों दि थि। क्याँ बात, उसके लन्ड मे जान नहि थि?"
माँ: "जान तौ थि पुत्तर, पऱ ज्यादा खुलकर नहि हुआ उसकेसंग। आज तूने तसल्ली करवाई हैं पूरी, दो बार। "
मैंने 'हम्म'कहा औऱ उन्हें कसकर जकड़ लिया।
मां: "क्याँ बात, अभि मन नहि भरा?फिन सें खड़ाकर लिया? मेरी जाँघों मे छेद करने कों फिनरहा हैं। "
मे: "इतना सेक्सी मालसंग पड़ा होँ, तौ यह केसेबैठ जाएगा?"
"येबात तोँ तूनेसही कही हैं। भइया। "
यह शब्द मैंने नहि बोले। जब मैंने दरवाज़े कि तरफ़ देखा, तोँ अनमोल बोलता हुआ अंदर आँ रहा थां।
अनमोल: "बिल्कुल सहीबात कही हैं। ऐसामाल देखकर लन्ड केसेबैठ जाएगा। "
माँ: "तुँ क्याँ कररहा हैं यहा, अनमोल?"
अनमोल: "वही, जौ कल करके गय़ा थां अपनी सेक्सी चाची केँ संग। पर्र आज तोँ चाची, तूने बेटा भि चढ़ा लिया अपनेऊपर?"
मे: "क्याँ बोलेजा रहा हैं अनमोल? आया केसे तूँ? गेट तौ अंदर सें बंद हैं। "
अनमोल: "मे ऊपरछत सें आया। देखा साले, ड्राइंग रूम मे कपड़े बिखरे पड़े हें। औऱ इतने मे तुम्हारी आवाज़ें सुनीं, तौ अंदर आँ गय़ा। "
माँ: "अच्छा। चलठीक हैं, जाअब बीसी हूं अभि मे।
"
अनमोल: "अच्छा जी, ऐसे कहोगी अब? बेटे कां मिल गय़ा तौ.? भूल गई वोँ पुरानी रातें इतनी जल्द?जब रातों कों कॉलआई करके बुलाती थि कि 'अमनआजा, नींद नहि आँ रही'। मे अपनी मम्मी कि बुर मारना छोड़कर तेरेपास आँ जाता थां। तूने तोँ चाची, एक् मिनट मे पराया कर दिया। " (उसने थोडा इमोशनल सां होकरकहा। )
मां: "लें! तुँ तौ सीरियस हि होँ गय़ा। इधर आँ मेरेपास। " (वो नंगी हि उठीं औऱ अनमोल केँ पास जाकरउसे जकड़ लिया। )
मे नंगाबेड पर्र पड़ाये सभीदेख रहा थां। मां भि नंगीथीं औऱ वैसे हि अनमोल कों जफ़्फ़ी डाले खड़ीथीं।
माँ: "ऐसे हि बोलेजा रहा हैं। ऐसे पराया थोड़ी किया हैं तुझेही। " (उन्होंने अनमोल केँ होंठों पर्र किस करके बोला। )"चल, आँ जाबेड पर्र बैठ आँ केँ। "
मे: "हाँहाँ, बैठजा यहा। कैसी शक्लकर ली हैं। "
अनमोल: "अच्छा, तेरी बातें आती हें। मे तौ बताने आया थां कि मेरी टिकट हौ गई हैं अगले हफ़्ते कि कॅनडा कि। वही बताने आया थां औऱ सोचा, आख़िरी बारमजा लेँ आऊँ चाची कां। "
मे: "अच्छा? छोड़अब, कॅनडा जाकर लेनामजा अब। "
माँ: (थोडा हँसकर बोलीं) "अच्छा बच्चो, क्याँ बात? तेरी मां मजाकम देती हैं?"
मे: "तेरे जैसामजा कौन देगा, मेरीजान!" (मैंने माँ कों होंठों पर्र किस किया। ) "म्म्मुआआआ!"
अनमोल: "हाँ, ये तौ हैं दिलराज, तेरी मां मजा पूरा देती हैं। "
मे: "चलफिन, होँ नंगा। लेते हें दोनों मजा। "
माँ: "सच मे, दिलराज पुत्तर? तुँ अनमोल केँ संग मिलकर लेगा मेरी?"
मे: "हाँ, क्यूं? तुम्हें पसन्द नहि दो जनों केँ संग?"
माँ: "मुझे तौ बहोत पसन्द हैं। कब सें करना चाहती थि, पर्र आज मौका मिला हैं। "
अनमोल नंगा होँ गय़ा। उसका लन्ड भि पूरा खड़ा थां।
मां: "हायरे! केसे खड़े करकेफिन रहे हें दोनों! आज फाड़ोगे मेरी लगता हैं। "
मे: (मे खड़ा होकर उन्हें अपनी तरफ़ खींचा औऱ किस करनेलगा। ) "उम्म्म्हाआआ!"
अनमोल भि पीछे सें आकर मां केँ संग चिपक गय़ा औऱ उनकी गर्दन पर्र किस करनेलगा। मां हम् दोनों केँ बीच खड़ीथीं, सैंडविच बनी हुईं।
अनमोल: "उम्म्म्हाआ। चाची, तेरा जिस्म पूराकसा पड़ा हैं अभि। मे अगर बाहर् नं जाता, रोज़ तसल्ली करवाता तेरी। अब तौ दिलराज कों भि पतालग गय़ा थां, कोई टेंशन भि नहि थि। "
मां: "हाँवे अनमोल, दोनों भइया मिलकर लेते मेरी, संग मे मुझे भि मजाआता।.हायराम वे दिलराज पुत्तर, धीरे-धीरे चूस। मम्मे भागे नहि जारहे, यहीं हें। आहम्म। आआह्ह!"
मे: "तूँ कहां भागेगी, मेरी रंडी! उम्म्म्। तेरे मम्मे हें हि इतने सेक्सी, कंट्रोल नहि होता। उम्म्म्माआह्ह!"
अनमोल: "टाँगें खोल चाची, तेरी बुर कां मजा तौ लूँ। आआह्हम्म। तेरी बुर चाची। ओह."
ऐसी हि गंदी बातें करतेहुए, हम् दोनों नें दो घंटे तक माँ कि बुर मारी।
हल्के होकर, हम् सभी बाहर् ड्राइंग रूम मे बैठगए औऱ कपड़े पहनने लगगए।
मां नें सलवार-कमीज़ पहनली औऱ पासबैठ गईं। हम् नें भि कपड़े पहनलिए औऱ बैठगए।
Ek Chaat k Niche (Family Saga) – New Episode
अमन: "4 दिनरुक कर हैं। "
मे: "अच्छा, अभि तौ हें 3 दिन.फिन तौ आँ जइयो। " (मैंने मां कि तरफ देखकर कहा। ) मां थोडा हँसकर"
मां: "क्याँ बात? तुम्हारी तरफ ज्यादा आग हैं मुझेअमन केँ नीचे लिटाने कि?"
अमन: "कहां दोस्त, कल मामों केँ पास जानां हैं मिलने, परसों मासी केँ। एक् रात बचनी हैं, वोँ मेरी मम्मी नें नहि छोड़ना मुझे। "
मे: "अच्छा, ताई मे भि आग बड़ी लगती हैं!"
अमन:"हाँ, औऱ क्याँ। वोँ तौ मुझे भेजकर खुश नहि थि। मैंने हि ज़िद कि बाहर् जाने कि, तब मानी। तुम को तोँ पता हि हैं दिलराज, यहा साले पैसे तौ बनते नहि। बाहर् जाकरचार पैसेकमा लेंगे, फिन मां कों भि बुला लूँगा। "
मे: "हाँ, ये तौ हैं। यहा सालाकुछ नहि बनता। हम् भि ग्रेजुएशन पूरी करके डॅडी केँ पास हि जाने वाले हें। "
माँ: "हाँअमन, औऱ क्याँ। यहा थोड़ी गाँव मे बैठे रहना हैं सारी उम्र।.मां तेरी अकेली केसे रहेगी फिन तेरे पीछे सें?"
अमन: "छोटी मासी कि लड़की कुलजीत आँ जाएगी रहने। "
माँ: "अच्छा? तेरी सुरिंदर मासी कि लड़की?"
अमन: "हाँजी। "
मां: "उसकी लड़की भि ब्याहने वाली हुईँ हैं। "
अमन: "हाँजी, नाता तौ होँ गय़ा हैं उसका। अगलेसाल करेंगे ब्याह। "
माँ: "अच्छा-अच्छा, ठीक हैं। "
मे: "अबदेख साले कों, केसे 'हाँजी-हाँजी' करनेलगा हैं! इतनी इज़्ज़त!" (थोडा हँसकर। )
अमन: "तोँ लेँ औऱ! चाची हें, इज़्ज़त तौ करनी पड़ेगी। "
मे: "आधा घंटा पहले चाची कों घोड़ी बनारखा थां। साला इज़्ज़तदार!.मां, इधरआओ आप् मेरेपास। "
मां उठकर मेरेपास सोफे पर्र बैठने लगीथीं, मैंने पकड़कर उन्हें अपनी जांघों पर्र बिठा लिया।
मां: "क्याँ कररहा हैं दिलराज! हटजा, बस करअब। "
मे: "क्याँ होँ गय़ा मेरीजान?" (मैंने उन्हें जांघों पर्र बिठाकर, उनकी चुन्नी उतारकर साइड पर्र रख दि, औऱ दोनों हाथों सें उनके मम्मे मसलने लगा। ) "आआह्हम्म। ब्रा केँ बिना हि रखाकर, ज्यादा मजाआता हैं मसलने कां, मां। "
माँ: "अच्छा? घऱ मे तेरी बेहन औऱ भइया भि रहते हें, भूलमत। "
अमन:"ओ दोस्त दिलराज, क्यूं मूडबना रहा हैं दोबारा! चाची कों देखकर तौ वैसे हि कंट्रोल नहि होता। "
मे: "अच्छा? आँ जाफिन, खोलदे नाड़ा सलवार कां। "
मां: "नहि अमन!चुप करकेबैठ जा, ये तोँ पागल हैं। अब हिम्मत नहि हैं मेरी.अब दर्दकर रही हैं। "
मे: "मज़ाक कररहा थां मे तोँ मां। " (मैंने उनके होंठों पर्र
किस किया। ) "उम्म्म्माआह्ह." (फिन कमीज़ केँ ऊपर सें हि उनके मम्मे मुँह मे डाललिए। ) "आआह्हम्म। उम्म्म्ह्म्म्। खा जाऊँदिल करता हैं। उम्म्म्."
मां: "खा लियो, यहीं हूं तेरेपास।.चल छोड़, जिसने जानां हैं, उसकेपास बैठने दे। " (वोँ उठकरअमन कि जांघों पऱ बैठगईं। ) "लेँ मेरा पुत्तर, तुँ चूस अपनी चाची केँ मम्मे। बाहर् जाकरयाद करेगा। "
अमन: "आआआह्हम्म। उम्म्म्माआह्ह। सच मे चाची, बड़ीयाद आएगी तेरी औऱ तेरी बुर कि। " (उसने मां केँ होंठों पऱ किस करतेहुए बोला। )
मे: "लें लें मजे 10-15 मिनट औऱ।.ताई कां केसे गुज़ारा होगा तेरे पीछे सें? केसे गुज़ारा करेंगी बिना लन्ड केँ?"
अमन:"सभी समझता हूं मे तेरी बातें। कोई न्, चढ़ जइयो तूँ अपनी ताई पर्र। कह जाऊँगा एक् बार मे। " (उसने मां कि कमीज़ उतारते हुए बोला। )
मे: "हाय!सच मे मजा आँ जाएगा अमन, तेरी माँ कि लेकर। साली तगड़ी भैंस हैं तेरी माँ। "
अमन:"हाँ, पर्र तेरी माँ सें मम्मे छोटे हें। " (उसने मां केँ नंगे मम्मे मुँह मे लेतेहुए बोला। )
माँ: "आआआह्हम्म। हायअमन। धीरे-धीरे। दाँतमत काटवे कंजर."
मे सामने बैठकर देखरहा थां। अमन कि माँ कों याद करके मेरा लन्ड भि पूरा खड़ा हौ गय़ा थां।
मे: "मुझेकह रही थि बुर देनी नहि, अब केसे नंगी होँ गई अमन केँ पास जाकर?"
माँ: "वे कंजर, मे कौन-सां देनेलगी हूं? ऊपर सें हि कमीज़ उतारी हैं। आँ जा, तूँ भि एक् मम्मा चूस लें। "
मे भि उठकर गय़ा औऱ एक् मम्मा मुँह मे डालकर चूसने लगा।
अमन: "आआह्हम्म। चाची, लन्ड कां बुराहाल हुआ पड़ा हैं नीचे। कर कुछ इसका। "
माँ: "हाँ। सलवार मे सें हि अंदर जाने कों फिनरहा हैं।.बुर मे हिम्मत हैं नहि अब मेरी तुम् दोनों कां लेने कि।
मे: "हाल मेरा भि बुरा हि हैं। " (मैंने नीचे सें नंगा होतेहुए बोला। )
मेरा लन्ड एकदम पूरा टाइट औऱ खड़ा थां। माँ उठकर खड़ी होँ गईं। माँ मात्र सलवार मे थीं(ऊपर सें नंगी)। अमन भि नीचे सें नंगा होँ गय़ा। अब हम् दोनों नीचे सें नंगे थें औऱ मां ऊपर सें नंगीथीं।
मां: "ओहवे कंजरो! लज्जा करो! अभि आधा घंटा पहले 3-4 बार बजाई हैं मेरी, अब फिन अपने लन्ड निकालकर खड़े होँ गए! रंडी नहि हूं कोई कि जितनी बार मर्ज़ी घोड़ी बनालो!"
मे: "हाय मेरी छम्मक छल्लो', क्रोध नं हौ। आँ जा, पास तोँ आँ। " (मैंने माँ कों अपनेपास बुलाकर किस कि। ) "ऐसाकर, मुँह सें निकाल दे। "
माँ कभी मेरे मुँह कि तरफ देखें, कभीअमन कि तरफ। फिन वोँ नीचेबैठ गईं। उन्हें पता थां कि हल्का तौ करना हि पड़ेगा।
हम् दोनों साइड मे खड़े हौ गए औऱ मां बीच मे बैठगईं। औऱ कभी मेरा लन्ड औऱ कभीअमन कां लन्ड मुँह मे डालकर चूसने लगीं।
5 मिनट मे हम् दोनों कां माल निकल गय़ा। मां उठकर बाथरूम मे गईं। मुँह साफ़ करके कमीज़ पहनली। हमने भि कपड़े पहनलिए।
इतने मे बाहर् सें गेट कि घंटीबजी।
मां: "तुम् बैठो यहीं सोफे पर्र, मे खोलती हूं। "
मां नें गेट खोला तौ सामने हरलीन खड़ीथीं।
हरलीन: "क्याँ होँ गय़ा? क्याँ कररहे थें? बड़ा वक्तलगा दिया। "
मां: "कुछ नहि, गरमचाय बनाने लगी थि, रसोई मे थि। "
ऐसे हि बोलते हुए मां औऱ हरलीन अंदर आँ गईं। अंदरआकर हरलीन नें अमन कों देखा।
हरलीन: "सत श्री अकाल वीरे आप् कबआए?"
अमन: "बस हरलीन, अभि आया। ऊपर घूमरहा थां, दीवार फांदकर इधर कों आँ गय़ा। "
हरलीन: "बढ़िया किया, बड़े वक्तबाद आए होँ आज। "
अमन: "बस थोडा बिज़ी थां। आँ जा, बैठ जापास। "
हरलीन नें जीन्स औऱ संग मे शर्ट पहनी हुई थि, जिसके ऊपर केँ 2 बटन खुले थें, जिसवजह सें क्लीवेज दिखरहे थें।
हरलीन: "बैठती हूं वीरे, कपड़े बदल करकेआती हूं।.माँ, कहां गए आप्?"
माँ: "रसोई मे हूं, गरमचाय बनारही हूं। "
हरलीन: "ठीक हैं, मेरेलिए भि बना लेना, मे चेंज करकेआती हूं। "
दिदी कपड़े बदलने केँ लिए कमरे मे चलीगईं। अमन दिदी कों जातेहुए पीछे सें देखता रहा। दिदी कि गांडआज जीन्स मे सें बड़ी सेक्सी लगरही थि।
मे: "बसकर, बस कर! आँ जा वापस! कमरे तक छोड़कर आनां हैं क्याँ अब?"
अमन: "क्याँ हौ गय़ा तेरी? क्याँ बोलेजा रहा हैं?"
मे: "सभी जानता हूं मे, क्याँ देखेजा रहा थां दिदी केँ पीछे। "
अमन: "अच्छा? तुम्हे कौन-सां नहि पता? तूँ तौ रोज़ देखता हैं। "
मे: "मे नहि देखता दिदी कों ऐसे। "
अमन: "अच्छा? क्याँ बात, किसी औऱ केँ लिएरखी हैं?"
मे: "क्याँ मतलब?"
अमन: "साले, माँ पर्र चढ़ गय़ा, बेहन पऱ चढ़ने मे लज्जा आती हैं?"
मे: "नहि दोस्त, वैसे हि। ट्राई हि नहि किया। "
अमन: "हम्म। मतलब चढ़ना तौ चाहता हैं। " (थोडा हँसकर। )
मे: "औऱ क्याँ! इतनी सेक्सी हैं, छोड़नी थोड़ी हैं। "
अमन:"बस फिन, चक्कदे फट्टे। "
मे: "हाँ, अवश्य। "
इतने मे माँ गरमचाय लेकरआईं औऱ हरलीन भि कपड़े बदलकर आँ गई। उसने सलवार-कमीज़ पहनली थि औऱ आकर सोफे पऱ बैठ गई।
सबनेगरम चायपी औऱ अमन नें कैनेडा जाने केँ बारे मे बताया। हरलीन भि खुश होँ गई। ऐसे हि बातचीत करते वक्त निकल गय़ा औऱ अमन अपनेघऱ चला गय़ा।
मे: "औऱ दिदी, कैसारहा कॉलेज?"
हरलीन: "ठीक थां, जैसे पहले निकलता हैं। तूँ नहि गय़ा कॉलेज आज?"
मे: "नहि, मेरी सेहत नहि ठीक थि आज। "
हरलीन: "अच्छा, अब कैसी हैं? ठीक हैं?"
मे: "हाँ, ठीक हैं अब। देखता हूं, कल भि रेस्ट लें लूँगा। "
मां: "कोई ज़रूरत नहि। ठीक हैं अब, कल कों कॉलेज जानां। "
(मे समझ गय़ा थां कि माँ ऐसा क्यूं कहरही हें। आज उनकी अच्छी रेलबनी थि, इसलिये। )
मे: "ठीक हैं जी। "। औऱ कुछसमय बाद युवराज भि आँ गय़ा।
माँ: "चलो, मे सब्ज़ी बनालूँ। हरलीन, तुँ रेस्ट कर लें, फिन रोटीबना देना तूँ। "
हरलीन: "ठीक हैं मां। " (वोँ उठकर कमरे मे चली जाती हैं। ) युवराज आकर अपने कमरे मे चला गय़ा, मे भि फोन पऱ लग गय़ा। हरलीन कमरे मे जाकरफोन पर्र लग गई। हरलीन फ़ोन पऱ रवनीत सें बात करने लगती हैं।
रवनीत: "हाँजी शोनेयो, क्याँ कररहे हौ?"
हरलीन: "कुछ नहि, बस बैठी थि कमरे मे अकेली। "
रवनीत: "अच्छा जी, मे आऊँफिन अगर अकेले होँ?"
हरलीन: "क्याँ बात, आज अकेले मे मिलकर मन नहि भरा?"
रवनीत: "तेरेसंग मिलकर कहां मन भरता हैं। दिल करता हैं सारादिन तुम को बाँहों मे रखूँ औऱ प्रेम करता रहूँ। "
हरलीन: "अच्छा जी, क्याँ बात.फिन मूडबन गय़ा मेरे जनाब कां?"
रवनीत: "मूड तोँ तेरी आवाज़ सुनकर हि बन जाता हैं। पजामा फटने वालाकर दिया। "
हरलीन: "अच्छा जी, फिन बाहर् निकाल लो, क्यूं तंगकर रहे हौ बेचारे कों। "
रवनीत: "तुम्हें यादकर रहा हैं। "
हरलीन: "मेरी तौ पहले हि बड़ी दर्दकर रही हैं। आज तूने बड़ा दर्द दिया। " (उसने पजामे मे हाथ डालते हुए बुर पर्र लगाया। ) "स्स्शश। हाय। सीस्स."
रवनीत: "स्वाद भि तोँ पूराआया। अब क्यूं 'सीसी'कर रही हैं?"
हरलीन: "स्वाद तौ बहोत आया मुझे भि। पर्र दर्दकर रही हैं अभि भि कुत्ते!"
रवनीत: "हाय। अच्छा, मे कुत्ता हुआ तौ तूँ मेरी कुत्ती। "
हरलीन: "औऱ क्याँ! आज तौ सच मे मार हि देना थां तूने कुत्ते, अपनी कुत्ती कों। "
रवनीत: "हाँ, तौ फिन.अब 1 महीना याद भि करेगी अपने कुत्ते कों, जब नहि मिलेगा तुम्हें। "
हरलीन: "हाँ दोस्त। मे मिस करूँगी तुम्हारी तरफ। 1 महीना केसे निकलेगा मेरा तेरे बिना। "
रवनीत: "मेरा भि मुश्किल निकलेगा, पऱ जानां ज़रूरी हैं। मासी बीमार हैं, इसलिये। "
हरलीन: "चलकोई नहि, गुज़ारा लूँगी। "
रवनीत: "हम्म, मेरा नहि गुज़ारा तेरे बिना। "
हरलीन: "अच्छा? कोई नहि, गुज़ारा लियोहाथ सें। " (थोडा हँसती हुइ। )
रवनीत: "अच्छा? दिल तौ मेरा अभि भि कररहा हैं तेरे अंदर डालने कों। "
हरलीन: "आँ जा, डाल दे मेरे कुत्ते! तेरी कुत्ती नंगी होके बैठी हैं। " (पजामा उतारते हुए बोलि। )
रवनीत: "अच्छा? चल आँ गय़ा मे चीखें निकलवाने.। "
हरलीन: "आँ जा." (बुर कों मसलते हुए बोलि। ) "निकलवाएगा पानी तूँ अबरवि?"
रवनीत: "हाँ, निकलवा दे। "
हरलीन: "तूँ पागल, आज मेरे अंदर हि कर दिया। प्रेग्नेंट नं हौ जाऊँ। "
रवनीत: "गोलीखा लेना। "
हरलीन: "कौन लाकर देगा? तुँ तौ सुभहचला जाएगा। "
रवनीत: "स्वयं लेँ लेना मेडिकल स्टोर सें जाकर, कौन-सि बच्ची हैं तुँ। "
हरलीन: "चल देखती हूं।.चलठीक हैं, अच्छा, सोजा तुँ। सुभह जानां भि हैं जल्द। "
रवनीत: "लेँ बता! बिना निकलवाए जाएगी अब?"
हरलीन: "अच्छा जी, कहो क्याँ करूँ अपनीजान केँ लिए?"
रवनीत: "वही, जौ पहले करती होती थि मेरीजान। " (उसने लन्ड कों पकड़कर हिलाना शुरुआत किया। )
हरलीन: "हम्म.लो। गीला करूँ पहले." (उसने एक् हाथ सें बुर कों मसलना शुरुआत किया। ) "उम्म्म्हाआ। मुँह मे डाल लियाजान तेरा लन्ड आआह्हम्म."
रवनीत: (आहें भरतेहुए) "आआह्हम्म। आआह्ह। चूस हरलीन। आआह्ह। जानचूस ज़ोर सें। आआह्ह."
हरलीन: "आआह्हम्म। हायराम। जानू। मेरी बुर भि गीलीकर दि। आआह्हम्म."
रवनीत: "आआह्हम्म। आआह्ह। जानचूस लेँ। आँ."
हरलीन: "आआह्हम्म। जानू.डाल दोअब मेरे अंदर। गीली हौ गई मेरी." (उसने एक् उंगली बुर मे डालली। ) "आआह्ह."
रवनीत: "आआह्ह। रख दिया बुर तेरी पर्र। आआआह्ह्ह। हाय। उम्म्म्ह्म्म्। गय़ा अंदर। आआआह्ह्ह."
हरलीन: "आआआह्ह। हायराम मर गई। आआह्ह्ह। मार धक्के कुत्ते। आआआह्ह। कुत्ती अपनी केँ। आआह्ह!"
रवनीत: "आआह्ह। कुत्तिये। हायरे। मजा आँ जाता हैं तेरी लेकर। आआआह्ह। उम्म्म्ह्म्म्। मेरा निकलने लगा हैं."
हरलीन: "आआह्ह। करदे अंदर हि कुत्ती अपनी केँ। आआआह्ह। प्रेग्नेंट करदे अपनी कुत्ती कों। आआह्ह वे। मेरा निकल गय़ा कंजर!"
हरलीन: "चलठीक हैं जानू, सुभह करियो जब निकलने लगोगे। "
रवनीत: "ओकेजान, बाय, लव यू। " (औऱ फ़ोनकाट दिया। )
हरलीन नें पजामा ऊपर किया औऱ बाथरूम मे जाकर बुर साफ़ कि औऱ हाथ धोकर। रसोई मे गई।
मां केँ संग रोटी पकाई औऱ रसोई कां काम करवाया। रात कों रोटी खाकरसो गए।
मुझे भि नींद आँ गई, दिन केँ समय मेहनत अधिक लगाई थि, इसलिये। युवराज सें भि कोईबात नहि हौ पाई कि केसे उसने भाभी केँ संगमजे लिए याँ नहि।
सुभहउठे औऱ रूटीन कि तरह सजधजकर होकर कॉलेज चलेगए। आधादिन गुज़र गय़ा, हरलीन दिदी मेरेपास आईं औऱ इधर-उधर कि बातें करने लगीं।
हरलीन: "औऱ फिन, लगा लिए लेक्चर सारे?"
मे: "हाँ, लग हि गए सारे। बस घऱ जाते हें अब। "
हरलीन: "अच्छा, एक् बात बतानी थि तुम्हे। "
मे: "कौन-सि बात? बताओ। "
हरलीन: "बता तोँ दूँ, पऱ मुझे क्याँ मिलेगा, येबता पहले?" (थोडा हँसकर। )
मे: "बात तौ बताओ। बढ़िया लगीबात, फिन जोँ मर्ज़ी लें लेना।
हरलीन: "अच्छा जी? तेरे बारे मे एक् लड़कीपूछ रही थि मुझसे। कहरही थि बड़ा खूबसूरत हैं तेरा भइया। " (थोडा हँसती हुईँ बोलीं। )
मे: "अच्छा? कौन हैं वोँ लड़की?"
हरलीन: "अभि नहि बताती। मेरा एक् काम करना पड़ेगा पहले। "
मे: "बताओ। "
हरलीन: "मेडिकल स्टोर सें प्रेगनेंसी रोकने वाली गोली लाकरदे। "
मे: "क्यूं? किसे चाहिए?"
हरलीन: "बस। चाहिए किसी कों। तूँ लाकर मेरेरूम मे दे जानां घऱ पे। तबनाम भि बता दूँगी कौनपूछ रही थि तेरे बारे मे। "
मे: "अच्छा, ठीक हैं। " (मुझेपता तोँ थां कि गोली दिदी नें हि खानी हैं, पर्र मे दिदी केँ मुँह सें सुनना चाहता थां एक् बार कि वोँ रवनीत सें प्रेग्नेंट हुईँ हैं। )
औऱ दिदी अपनी क्लास कि तरफचली गईं। मुझेलगा दिदी अपनाकाम करवाने केँ लिए लड़की वालीबात झूठबोल रही हें, इसलिये मैंने ज्यादा सोचा नहि उस बारे मे।
युवराज भि कैंटीन कि तरफ सें आँ रहा थां, फिन हम् दोनों घऱ कों निकलगए। रास्ते मे मेडिकल स्टोर पऱ दुकान (केँ आगे बाइक) रोकने कों कहा युवराज कों।
युवराज: "क्याँ होँ गय़ा? यहा क्यूं रोकी?"
मे: "दवाई लेनी हैं, सिर दर्दकर रहा हैं। " (मैंने बहाने-सां मार दिया। ) "तुँ रुक यहीं बाइक पर्र हि, मे लेकरआता हूं। "
युवराज बाइक पर्र बैठारहा। मैंने एक् सिर दर्द कि गोली लेँ ली औऱ एक् प्रेगनेंसी कि गोली लेकरजेब मे डालली औऱ घऱ आँ गए।
घऱआकर युवराज कमरे मे चला गय़ा। दिदी अपने कमरे केँ अंदर हि थीं औऱ माँ रसोई मे कामकर रहीथीं। मे भि कमरे मे गय़ा, कपड़े बदले। युवराज फ़ोन पऱ लग गय़ा।
इतने मे युवराज कों फ़ोनआया। औऱ मुझसे पूछने लगा।
युवराज: "जानां हैं मोटर कि तरफ घूमने?"
मे: "नहि दोस्त, तूँ जा आँ। "
युवराज: "ठीक हैं। "
युवराज कपड़े बदलकर बाहर् कों निकल गय़ा, मां कों बताकर।
Ek Chaat k Niche (Family Saga) – New Episode
मे नीचेआया, दिदी अपने कमरे मे थि औऱ मे रसोई मे चला गय़ा। माँ रसोई कां कामकर रहीथीं। मैंने पीछे सें जाकर उन्हें ज़ोर सें जकड़ लिया औऱ दोनों हाथों सें उनके बड़े-बड़े मम्मे दबादिए.
माँ- "आँ गय़ा मेरा पुत्तर."
मे- "हाँजी आह्म्म्म." मे उनकी गर्दन पर्र किस करनेलगा। "अरे मां। दिल करता हैं सारादिन चूसता रहूँ तुम्हें। मेरा लन्ड खड़ा होकर सलवार केँ ऊपर सें हि तेरी गांड मे जाने कों कररहा हैं."
मां- "श्श्श। हायरे वे। पुत्तर मेरा तौ स्वयं दिल करता हैं तेरे लन्ड पर्र बैठी रहूँ सारादिन। आह्म्म्म." वोँ अपनी गांड हिलाते हुए बोलि।
मैंने मां कों अपनीतरफ घुमाया औऱ उनके मुँह मे मुँहडाल दिया। आह्म्म्म उम्म्माह। औऱ पागलों कि तरह चूसने लगा। आह्म्म्म.
मां- "धीरे-धीरे कर। तेरी बेहन अंदर हि हैं। कहीसुन नं लेँ."
मे उनकी कमीज़ ऊपर करनेलगा तोँ माँ नें रोक दिया।
माँ- "क्याँ कररहा हैं? पागल हौ गय़ा हैं? हरलीन नें देख लिया तौ बेवजह पंगापड़ जाएगा। ऐसे हि कर लें ऊपरऊपर सें। "
मे- "अच्छा? ऐसेमजा आँ जाएगा तुम्हें?" मैंने दोनों हाथों सें उनकी गांड मसलते हुए बोला।
माँ- "हायराम वे कंजरा। ऐसे कहां मजाआता हैं, जब तक अंदर नं लूँ तेरा लन्ड। ठंड नहि पड़ती."
मे- "चलफिन बनजा घोड़ी माँ, डालूँ तेरे अंदर। "
मां- "पर्र पुत्तर। हरलीन बाहर् आँ गई, फिन?"
मे- "नहि आती माँ, दरवाज़े कि आवाज़ आँ जाएगी। वैसे भि बस तेरी सलवार हि तोँ खोलनी हैं। चल, घोड़ी होँ जायहा स्लॅब पऱ। "
माँ- अपनी सलवार कां नाड़ा खोलते हुए, सलवार केँ संग अपनीकसी हुइ पैंटी कों भि नीचे घुटनों तक करती हुई घोड़ी बन गयीँ,। "आजा घोड़ेया। चढ़जा अपनी मां पर्र."
आह्म्म्म। मैंने उनकी गांड पर्र किस किया, फिन लन्ड पऱ थूक लगाकर उनकी गांड कि मोरी पर्र रगड़ने लगा। आह्म्म्म्म ओह। "गांड कों दोनों हाथों सें मसलते हुए। बड़ी सेक्सी लगती हैं तेरी गांड माँ। आह्म्म्म."
मे लन्ड कां टोपा उनकी गांड कि मोरी पर्र रगड़रहा थां।
माँ- "ओहवे कंजरा। निशाना किसी औऱ तरफ बनाईजा रहा हैं."
मे- "यहीं पे डालना हैं। यहीं तौ मजाआता हैं तेरे डालने कां, मेरी रांड"
मां- "आह्म्म्म। धीरे-धीरे बोलवे पुत्तर। तेरी बेहन नें सुन लिया तौ देखेगी केसे मां लगी हैं अपने पुत्त सें गांड मरवाने."
ये सुनते हि मेरे लन्ड मे पूराजोश आँ गय़ा औऱ एक् झटके सें पूरा लन्ड अंदरचला गय़ा। "ऐसे चोरी-चोरी लेने कां ज्यादा आनंदआता हैं तेरी। आआआह."
माँ- "श्श्श। आआआह.हाय रामवे धीरे-धीरे." उन्होंने अपने मुँह पऱ हाथरख लिया। "मार डालावे कंजरा। अरे.मजे केँ चक्कर मे पकड़े गए। आह्म्म्म। औऱ पंगापड़ जानां हैं। क्या बात है वे तेरा मोटा बड़ा हैं एक् तौ। फट गयीँ, मेरी। आह्म्म्म."
मे धीरे धीरे धक्के मारने लगा। आआआह। औऱ उनकी गांड मसलने लगा.
मां स्वयं आगे-पीछे होनेलगी। माँ- "आआआह.हाय राम। आनंद आँ रहा हैं कंजरा। ज़ोरलगा। हायराम। आह्म्म्म्म." वोँ अपनी बुर पऱ हाथ रगड़रही थीं। "आआआह.ओह दिलराज पुत्त। बुर भि पानी छोड़ी जारही हैं। आआआह." वोँ उंगली डालकर स्वयं कों चोदने लगीं।
मे- मैंने हाथआगे करके 3 उंगलियाँ उनकी बुर मे डालदीं औऱ गांड मे ज़ोर-ज़ोर सें धक्के मारने लगा.
10 मिनट धक्के मारने केँ बाद मैंने अपना सारामाल उनकी गांड मे हि निकाल दिया औऱ उनकी बुर सें भि पानी निकल गय़ा। माँ नें सलवार ऊपर कि औऱ मेरा लन्ड अपनी कमीज़ सें हि साफ़ किया। औऱ मे उन्हें किस करनेलगा.
मां- "आह्म्म्म। आनंद आँ जाता हैं पुत्त। जब तेरा लन्ड अंदर जाता हैं."
मे- "मुझे तोँ स्वयं बड़ा आनंदआता हैं तुम को चोदने कां मां."
माँ- "चलअब बाहर् बैठ, मे कामकर लूँ."
मे उन्हें किस करके रसोई सें बाहर् आया, तभी यादआया कि हरलीन दिदी कों प्रेग्नेंसी वाली मेडिसिन देनी थि। मे दिदी केँ रूम कि तरफचल पड़ा औऱ अंदर गय़ा। दिदी फ़ोन पर्र लगीथीं, मुझे देखकर फ़ोनकाट दिया।
मे- "कोई नाँ दिदी, आप् करलोबात। मे तोँ बस मेडिसिन देनेआया थां."
हरलीन- "कोई नां। आँ जाबैठ जा। वैसे भि काटने हि वाली थि."
मे जाकरबेड पऱ बैठ गय़ा औऱ। औऱ बातें करनेलगा। औऱ मैंने उन्हें मेडिसिन पकड़ा दि।
हरलीन- "थैंकयू दिलराज, तूने बहोत बड़ाकाम कर दियाआज मेरा। थैंकयू सोमच." वोँ मेराहाथ पकड़कर गाल पऱ किस करती हुई बोलीं।
मे- "कोईगल नहि दिदी। पर्र यह 72-घंटे वाली हैं?"
हरलीन- "हाँ, यही चाहिए थि."
मे समझ तौ गय़ा थां कि दिदी नें कल हि मरवाई हैं, पऱ मे दिदी केँ मुँह सें सुनकर आनंद लेना चाहता थां।
मे- "अच्छा, मतलब आप् नें कल हि किया थां?" औऱ मे चुपकर गय़ा।
हरलीन दिदी चुप रहीं औऱ फिनबस "हम्म." किया।
मैंने संग पड़े टेबल सें पानी कि बोतल उठाई औऱ दिदी कों पकड़ा दि।
मे- "यहलो औऱ खालो। औऱ कहीं मुझे मामाजी नां बनादो आप्." मे थोडा हँसकर बोला।
हरलीन- "हट पागल कहीका"
पानी कि बोतल पकड़कर उन्होंने गोलीखा ली औऱ हम् बातें करनेलगे।
मे- "दिदी, जब करकेआए थें आप्, तभी गोली लें लेते याँ रवनीत सें मंगवा लेते?" मैंने थोडा नार्मल होकरबात कि।
हरलीन- "उसी कों कहना थां, पऱ उसनेआज कहीं जानां थां, तौ मे रिस्क नहि लेना चाहती थि। इसलिये तुझेही कह दिया। तुम को बुरालगा मैंने तेरे सें मंगवा ली?" उन्होंने थोडा मुँह सां बनाकर कहा।
मे- "नहि नहि दिदी, ऐसीकोई बात नहि, वैसे हि पूछा। अपनेबीच कौन सां कोई पर्दा हैं। अच्छा एक् बात पूछूँ? क्रोध नाँ करना। "
हरलीन- "नहि करती। आज जोँ मर्ज़ी पूछ। तूने मेरा इतना ज़रूरी औऱ सीक्रेट काम किया हैं। जौ मर्ज़ी पूछ."
मे- "रवनीत नें कंडोम यूज़ नहि किया थां?"
बात सुनके हरलीन थोडा चुपकर गयीं.कुछ सेकंड बाद बोलीं,
हरलीन- "यूज़ किया होता तौ यह थोड़ी मंगवानी थि." थोडा हँसकर बोलीं। "यूज़ तोँ करता हैं, पऱ कल उतार दिया थां बीच मे हि करते करते। कहनेलगा कि मजा नहि आता। मज़े केँ चक्कर मे पंगापा दिया." वोँ थोडा औऱ हँसकर बोलीं।
दिदी मुझसे थोडा खुलने लग गयीँ, थीं, मे भि इस चीज़ कां फ़ायदा लेनेलगा.
मे- "हम्म। ख्याल रखाकरो। प्रोटेक्शन ज़रूरी हैं." मैंने स्माइल देतेहुए कहा।
हरलीन- "ठीक हैं जी। कोई औऱ हुकुम मेरे भइया कां?" औऱ दोनों हँस पड़े।
मे- "नहि जीबस। अब आप् बताओ, क्याँ बताना थां? कौन हैं वोँ लड़की जिसकी बातकर रहे थें आप्?"
हरलीन- "कौन सि लड़की?" उन्होंने थोडा अनजान बनतेहुए कहा।
मे- "अच्छा जी?अब अपनाकाम होँ गय़ा तोँ कौन लड़की?"
हरलीन- थोडा हँसती हुई बोलीं, बताती हूं। बताती हूं, रुकजा। "
इतने मे हरलीन केँ फ़ोन पर्र रमण कां फ़ोनबजा।
हरलीन- "लें, जिसकी बात करनी थि, उसी कां फ़ोन आँ गय़ा। बोलि नं कुछ, तुँ स्वयं हि सुन लेँ। "
दिदी नें फ़ोन उठाकर स्पीकर पऱ लगा दिया।
औऱ दूसरी तरफ सें रमन कुत्ती कि तरह हरलीन पऱ बरस पड़ी।
रमन- "कुतिये! कहां मर गयीँ, ? फ़ोन क्यू नहीं उठाती?"
हरलीन- "उठा तौ लिया, औऱ केसे उठाऊँ?"
रमन-"आगे तौ पहली रिंग पऱ उठा लेती हैं। छोड़इस बात कों। यहबता, तूने दिलराज सें बात कि?"
मे- मैंने थोड़े तेवर सें दिदी कों देखा। पता तौ मुझे थां कि रमन मुझसे चुदवाना चाहती हैं, क्योंकि असदिन मैंने दिदी केँ फ़ोन पर्र रमन कां संदेश पढ़ लिया थां।
हरलीन- "कौन सि बात?"रमन कों माझक करतेहुए बोलीं।
रमन- "अच्छा। बताऊँ कौन सि बात?"
हरलीन- "हाँ, बता दे। "
रमन- "बड़ी कुत्ती हैं तूँ। साली मस्ती करती हैं। आगे सें मे रवनीत भइया कों कहूँगी तुम्हे चोदे हि नां। "
हरलीन- थोडा हँसते हुए, "अच्छा जी?फिन तेरेसंग हि गुज़ारा कर लेगा तेरा वीरा?"
रमन- "हाँ, गुज़ारा कर लेगा मेरेसंग हि। "
मे- मे थोडा कंफ्यूज सां हौ गय़ा कि क्याँ बात हौ रही हैं। हरलीन नें मेरेफेस कि तरफदेख कर स्माइल कि।
हरलीन- "कि हैं बात मैंने दिलराज सें, वोँ मान गय़ा हैं। "
रमन- "अच्छा? सच्ची हरलीन? अरे। मेरी तौ सुन केँ हि गीली होँ गई,."
हरलीन- "चल कुत्ती."
मे सभीसुन रहा थां। रमन इतनीतडप रही थि लन्ड पऱ चढ़ने कों। दिदी भि ज्यादा हि खुल केँ बोलने लग गयीँ, थीं। मुझेअब मज़ा आँ रहा थां सुनने कां। औऱ जौ मैंने आगे सुना, उसने तोँ मुझे पागलकर दिया।
रमन- "तौ औऱ क्याँ दोस्त हरलीन। जब सें तूने बताया हैं कि दिलराज कां रवनीत सें बहोत बड़ा औऱ मोटा हैं, मे तोँ पागल हुइ फिरती हूं उसका लेने कों."
मे येसुन करशॉक हौ गय़ा कि दिदी नें मेरा लन्ड देखाहुआ हैं। पऱ ये नहि समझआया कि रवनीत सें बड़ा हैं, येरमन कों केसेपता।
हरलीन- "चल कुत्ती। क्याँ भोकेजा रही हैं। "
रमन- "अच्छा? भौंकरही हूं मे? तूने हि तोँ कहा थां जितना आनंद मुझे रवनीत केँ लन्ड नें दिया, उससे अधिक मज़ा दिलराज कां देगा."
हरलीन चुप रहीं औऱ मेरीतरफ देखकर नीचे देखने लग गयीं।
हरलीन- "चलठीक हैं, अच्छा रमन। देख लें अब तुँ, कब आनां हैं दिलराज कां लेने। "
रमन- "मे तोँ आज हि आँ जाती हूं, तुँ बोलकब आऊँ?"
हरलीन- "आज नहि, फिन किसीदिन आँ जानां। "
रमन-"देख लें दोस्त। आज हि चढ़ादे दिलराज क लन्ड पऱ। रवनीत भि नहि हैं, किससे ठंडी करवाऊँ। तूँ भि चढ़जा मेरेसंग हि दिलराज केँ."
हरलीन- "हट कुत्ती। क्याँ भोकेजा रही हैं। अच्छा फ़ोनकाट। "
येकहकर दिदी नें फ़ोनकाट दिया। मे चुप थां औऱ हैरान भि थां। मुझेये तौ समझ आँ गय़ा थि कि रमन अपने भइया रवनीत कां लन्ड लेँ चुकी हैं। पर्र मे हैरान होतेहुए बोला.
मे- "दिदी, सच्ची। रमन नें अपने भइया रवनीत कां लिया हैं?"
दिदी कुछ सेकंड चुप रहींफिन बोलि।
हरलीन- "हाँ। पऱ दिलराज। बताना नाँ किसी कों। येबात किसी कों नहि पता। रवनीत कों भि नहि पताइस बारे मे कि येबात मुझेपता हैं। तुँ प्लीज़ जबरमन केँ संग करेगा, तब तुँ नाँ पूछना कुछ भि, जब तक रमन तेरी स्वयं नहि बताती। "
मे- "हम्म.ठीक हैं दिदी, नहि पूछता। " मे दिदी केँ बिलकुल नज़दीक बैठा थां औऱ दिदी चौकड़ी मारकर बैठीथीं बेड पऱ। "वैसे दिदी। आपनेकब देखा मेरा। इतना बड़ा हैं?" मैंने थोडा स्माइल देकर पूछा।
हरलीन- "बस.देख लिया थां। "
मे- "अच्छा? सच्ची रवनीत सें बड़ा हैं मेरा?"
रलीन- "हम्म। औऱ मोटा भि." वोँ थोडा शर्माते हुए बोलीं।
अपने लन्ड कि तारीफ़ सुनकर मेरा लन्ड फराटे मारने लगा। मैंने एक् हाथ दिदी केँ जांघ पर्र रख दिया।
मे- "अच्छा दिदी। कभीहाथ लगाने कां दिल नहि किया?" औऱ मैंने दिदी कां एक् हाथ उठाकर अपने पजामे केँ ऊपर सें लन्ड पर्र रख दिया।
हरलीन- "आह्म्म्म। दिलराज। क्याँ कररहा हैं। मां आँ जाएगी। "
मे- "नहि आतीं माँ। रमन तोँ कहरही हैं आप् भि चढ़ जानां उसकेसंग। आपकादिल नहि करता चढ़ने कों?" मे अपनाहाथ दिदी केँ जांघों पऱ फेरता हुआ पूछने लगा।
हरलीन- "आह्म्म्म्म। रमन तोँ पागल हैं। कुछ भि भौंकती रहती हैं। (ओह। कितना मोटालग रहा हैं पजामे केँ ऊपर सें दिलराज तेरा। )"
मे- दिदी नीचे कों देखरही थीं। मे आहिस्ता जांघों सें हाथऊपर कों लें गय़ा औऱ उनके चेहरे पऱ लें जाकर घुमाने लगा औऱ चेहरा अपनीतरफ किया। "पर्र मेरादिल भि कररहा हैं अब दिदी। आप् मेरे लन्ड पऱ बैठो। आपकादिल नहि करता हैं बैठने कों? बताओ?" वोँ मेरी आँखों मे देखरही थीं।
हरलीन- "आह्म्म्म। दिलराज। मेरा भि दिल करता हैं मे तेरे लन्ड पऱ बैठूँ। पर्र केसे बैठूँ। तुँ भइया हैं मेरा."
मे- "रमन भि तोँ बैठी हैं अपने भइया केँ लन्ड पऱ। औऱ हम् दोनों पहले लड़का-लड़की हें, फिन बेहन-भइया। " मैंने दोनों हाथों सें दिदी कां चेहरा पकड़ लिया औऱ उनके लिप्स पर्र किस करनेलगा। "आआआह्ह्म्म्म। उम्म्म्म्हाआआ."
हरलीन- "आआआह्ह्म्म्म। उम्म्माआआह." उन्होंने मुँह पीछे करकेकहा, "पर्र दिल.ये गलत हैं। हम् दोनों बेहन-भइया हें। ये केसे होँ सकता हैं?" एक् सेकंड दिलराज कि आँखों मे देखकर। "मे किस करनेलगी। उम्म्म्माआआह। आह्म्म्म्म। पऱ अबरहा नहि जातादिल। उम्म्म्हाआआ। मे पागल हौ रही हूं। उम्म्म्म्हाआआ। मेरीजीभ कभी दिलराज चूसरहा थां, कभी मे चूसती। आआआह्ह्म्म। दिल.खा जा अपनी बेहन कों। आह्म्म्म्म."
मे- "आह्म्म्म्म। उम्म्म्हाआआ। दिदी." मेरा एक् हाथ पजामे केँ ऊपर सें दिदी कि बुर पर्र चला गय़ा औऱ मे पजामे केँ ऊपर सें हि रगड़ने लगा।
दिदी भि लन्ड मसलरही थीं।
इतने मे माँ कि रसोई सें आवाज़ आई।
माँ- "हरलीन पुत्त। रसोई मे आकरकुछ हाथ बँटादे मेरा। "
हम् दोनों हिलगए। हरलीन नें 'हाँ' मे जवाब दिया।
मे- "मेरा छोड़ने कां दिल नहि कररहा दिदी." उम्म्म्हाआआ। मे कभी लिप्स पऱ, कभी चीक्स पर्र किस करतारहा।
हरलीन- "छोड़दे अबदिल। मां रूम मे नां आँ जाएँ देखने। "
दिदी उठ गयीं औऱ पजामा सेट करके बाहर् कों चली गयींरूम सें। मे बेड पऱ हि सीधा लंबालेट गय़ा औऱ दिदी केँ बारे मे सोचने लगा.
"लेँ भइया। आनंद आँ जानां हैं। मां तोँ पहले हि मजेदे रही थि, अब बेहन भि दिया करेगी। फिनरमन कि भि टाँगें उठानी हें। " पजामे मे लन्ड सलामी देरहा थां। मैंने लन्ड कों मसलते हुए सोचा."हाय रेवे। तुँ नहि बैठता अबकभी." औऱ हँसता हुआउठ कर दिदी केँ रूम सें बाहर् निकला।
दिदी औऱ माँ रसोई मे कामकर रहीथीं। मे पानी पीने रसोई मे गय़ा। माँ सब्ज़ी बनारही थीं औऱ हरलीन बर्तन धोरही थि। मे पानी लेने सिंक केँ पास गय़ा औऱ एक् हाथ सें दिदी कि गांडमसल दि औऱ गांड कि लकीर मे उंगली फिरा दि। उन्होंने पैंटी नहि पहनी थि, जिसकी वजह सें उंगली बड़ी बढ़िया तरीके सें गांड कि दरार मे चली गई,। "आह्म्म्म। मज़ाआया?" मैंने दिदी केँ कान केँ पास जाकर धीरे-धीरे सें कहा। दिदी नें केवल स्माइल दि। मे पानी कां गिलास लेकर पीनेलगा।
मे- "क्याँ बनाया आज माँ?"
मां- "मटर पनीर बनाया हैं पुत्त। तेरे जीजाजी औऱ बड़ी बेहन आँ रही हैं। "
मे सुनकर खुश होँ गय़ा। बहोत समय होँ गय़ा थां बड़ी दिदी कों मिलेहुए।
पर्र एक् नुकसान थां मेरा। दिदी केँ आने सें नां तोँ मां केँ संगकुछ होना थां, नां हरलीन केँ संग। यही सोचता हुआ बाहर् जाकरबैठ गय़ा। इतने मे युवराज भि बाहर् सें घूमकर आँ गय़ा।
औऱ हम् आपस मे बातें करनेलग गए।
मैंने अपने औऱ रमन केँ बारे मे युवराज कों बताया। युवराज भि सुनकर खुश हौ गय़ा।
युवराज- "चल बढ़िया! तुँ भि मजे लेँ लेगाअब बुर केँ। तेरा भि उद्घाटन हौ जाएगा फिन जल्द."
मे- "औऱ दोस्त। सालाकब सें सूखा पड़ाहुआ हैं." मन मे थोडा हँसता हुआ बोला।
युवराज- "कबजारहा हैं फिनरमन केँ पास?"
मे- "अभि तौ कोई प्लान नहि। दिल तोँ कररहा हैं अभि चला जाऊँ। "
युवराज- "चलफिन मे भि चलता हूं। वैसे भि रवनीत घऱ पर्र नहि हैं, बढ़िया मौका हैं। मे भि भाभीठोक आऊँ। "
मे- "हाँ दोस्त। दोनों ठोक केँ आएँगे एक् हि घऱ कि रऺडिया पऱ दोस्त। आज मुश्किल हैं। आज तौ जीजाजी औऱ बड़ी दिदी आँ रही हैं."
युवराज- "कब?"
मे- "बसआने वाले हें। माँ कहरहे थें पहुँचने वाले हें। "
युवराज- "अच्छा दोस्त। सालामूड थां आज तौ पूरा। औऱ मौका भि थां। "
मे- "कोई नाँ। रवनीत नें अभि जल्द नहि आनां। हरलीन दिदी बतारहे थें पूरा महीना लग जानां हैं। अपना हि हैं महीना अब। "
युवराज- "हम्म.चल ठीक हैं। आज कां क्याँ प्लान हैं फिन? हैं मूड पेग-शेग कां जीजाजी केँ संग?"
मे- "जीजा तौ पिएगा हि। मां सें पूछ लेते हें, बोतल लेकरआनी हैं याँ नहि। "
मे रसोई मे गय़ा। औऱ माँ सें पूछा, "जीजाजी केँ लिए बोतल लेकरआनी हैं? केसे करें?"
मां- "देखलो अगर नहि गुज़ारा होता तोँ लें आओ। लेँ केँ तभी आनांअगर हिसाब सें पीनी हैं तो"
मे- "हाँ मां, हमने थोड़ी पीनी हैं। हम् तौ बीयर लेँ आएँगे अपनेलिए, कंपनी देने केँ लिए जीजाजी कों। "
मां- "हाँ हाँ.जानती हूं तुम्हारी कंपनी कों। चल। देती हूं पैसे। "
मां अपनेरूम मे चली गयीं। मे मां कि गांडदेख रहा थां पीछे सें औऱ मे भि पीछे हि रूम मे चला गय़ा मां केँ.
माँ पर्स सें पैसे निकाल रहीथीं, मैंने पीछे सें उन्हें ज़ोर सें पकड़ लिया। "उम्म्म्म मां। अब अपना क्याँ होगा? केसेलूँ तेरी?"
माँ- "वे छोड़ कंजरा। युवराज याँ हरलीन नां आँ जाएँ। "
मैंने उनके मम्मे मसलदिए दोनों हाथों सें। माँ नें पैसे निकाल लिए पर्स सें औऱ पर्स अलमारी मे रखकर मुड़ने लगीं। मैंने उन्हें सीधा करके उनके होंठों मे होंठडाल दिए। "उम्म्म्हाआआ आह्म्म्म." माँ नें 2 सेकंड संग दिया औऱ फिन धक्का दे दिया।
मां- "आँ लेँ पकड़ 5000। लें आओ जौ लाना हैं। "
पैसे देकर वोँ बाहर् जाने लगीं। मैंने उनकी गांड कों दबोच लिया पीछे सें। मां आगे कों चलने लगीं। "आह्म्म्म्म। हाय तेरी मोटी गांड। "
माँ- "आह्म्म्म्म। हायराम वे कंजरा। छोड़दे, देख लेगाकोई। "
मैंने हाथ सां फेरकर मज़ा लिया औऱ बाहर् आँ गय़ा। युवराज बाहर् बैठा थां।
मे औऱ युवी दोनों ठेकेगए। एक् *** कि बोतल, 5 बीयर औऱ चिकनपैक करवा लिया। बहुत वक्तबाद घऱ पहुँचे। अंदर एंटरहुए तोँ जीजाजी कि व्हीकल लगी हुइ थि।
अंदरसभी बैठेहुए थें। जीजाजी सें हाथ मिलाया औऱ दिदी कों गले मिला। दिदी नें ब्लू जीन्स औऱ संग मे टॉप पहनाहुआ थां, पूरीहॉट लगरही थीं।
गरम चाय-पानी पीकर इधर-उधर कि बातें करनेलगे। माँ नें फ्रेश होने कों कहा दिदी औऱ जीजाजी कों। बड़ी दिदी औऱ जीजाजी अपनेरूम मे चलेगए। कुछ वक्तबाद जीजाजी नार्मल टी-शर्ट औऱ पजामे मे बाहर् आए, औऱ दिदी नें चेंज करके सलवार-सूट पहन लिया।
जब वोँ बाहर् आयीं तौ मे देखता रह गय़ा। टॉप सें अधिक मोटे मम्मे लगरहे थें सूट मे। डीपकट गले कि वजह सें उनकी छाती कां ऊपरी हिस्सा नंगा थां औऱ वोँ औऱ भि सेक्सी लगरही थीं। उनके स्तनों केँ बीच कि गहरी लकीर थोड़ी-थोड़ी दिखरही थि। सालादेख केँ मज़ा हि आँ गय़ा। गांड तौ जीन्स मे हि कयामत लगरही थि औऱ अब सलवार मे भि बहोत सेक्सी लगरही थि। बेहन रसोई मे चली गयीँ, औऱ जीजाजी आकर हमारे पासबैठ गए। हमनेपेग कां पूछा तौ पहले जीजाजी नें मनाकर दिया। जब बताया कि सामान लेकरआए हें, तौ 'हाँ' कां इशारा कर दिया।
थोड़ी देरबाद हम् पेग लगाने लगगए। बड़ी दिदी नें चिकन गर्म करके लाकर दिया। एक्-दो बारजब भि बड़ी दिदी कोई सामान रखने कों झुकीं, तोँ उनके गहरेगले सें स्तन केँ बड़े शानदार दर्शन हुए।
ऐसे हि पेगशेग लगाते, बातें करतेरात होँ गई,। जीजा भि ठीक थें, अधिकपेग नहि लगाए थें। मैंने भि एक् बीयरपी थि पर्र युवराज दो बीयरपी केँ सेट होँ गय़ा थां। फिन सबने खानां खाया औऱ कुछसमय बातें कीं। फिन सोने केँ लिएचले गए। मां औऱ हरलीन अपनेरूम मे चलेगए, जीजाजी औऱ बड़ी दिदी भि रूम मे चलेगए। औऱ हम् दोनों भि अपनेरूम मे चलेगए। युवराज तोँ जाते हि सो गय़ा बेड पऱ। मे बाथरूम किया औऱ बेड पर्र लंबालेट गय़ा, पर्र नींद नहि आँ रही थि।
Ek Chaat k Niche (Family Saga) - Next part mein bada twist
bhay muze hindi pardna nahee ata pr firbhi translate kaeke parraha ho kahani mast he bro pr woh maa kee chudayi us ladke k sath keyse suru hua or maa or kis kis say chudayi krr chuki he jaanna he bro
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