प्यास जोँ बढ़ती हि जाये – New Episode
Update 9
रिया एक् इंटर्न
अध्याय १: आकर्षण कि शुरुआत
औऱ गहरी करीबी – दफ़्तर कां सम्मोहक / कामुक दिन
सुभह कां सेशन – सोफे पऱ गहरी नज़दीकी
स्वाती कि केबिन मे सुभह कां सेशन शुरुआत हुआ। आज स्वाती नें रिया कों सोफा पर्र औऱ भि लगभग बिठाया। दोनों केँ बीच रत्ती भर कां गैप नहि थां। स्वाती कि मोटी, गरम जाँघ पूरीतरह रिया कि सॉफ्ट जाँघ सें सट गई थि।
“आज हम् पूरादिन इसीतरह काम करेंगे स्वीटहार्ट, ” स्वाती नें अपनी हस्की आवाज़ मे कहा।
रियाआज पिंक स्लीवलेस टॉप मे बेहद फ्रेश औऱ कामुक लगरही थि। उसके हल्के सें उभरेहुए सि-कप बूब्स औऱ स्मूद अंडरआर्म्स स्वाती कि नजरों कों खींचरहे थें। स्वाती नें मुस्कुराते हुएकहा, “तुम्हारी आर्मपिट्स बहोत खूबसूरत हें रिया। इतनी क्लीन औऱ सॉफ्ट। ”
बात करतेहुए स्वाती नें जानबूझकर अपना बायाँ हाथऊपर उठाया औऱ बालठीक किए। उनकी मेहरून स्लीवलेस टॉप मे नाइसली ट्रिम्ड आर्मपिट रिया केँ चेहरे केँ बिल्कुल पास आँ गई। हल्की पसीने कि नशीली स्मेल रिया केँ नथुनों मे घुस गई। रिया अनजाने मे हि गहरी साँस लेनेलगी।
स्वाती नें रिया कि कमर पऱ हाथरख दिया औऱ आरामसे सहलाने लगीं। उनकी उँगलियाँ रिया कि पतलीकमर पऱ सर्कल्स बनारही थीं। “तुम्हारी कमर कितनी नाजुक औऱ सॉफ्ट हैं। छूने मे बहोत अच्छा लगता हैं। ”
रिया कि साँसें भारी होँ गईं। वो शरमारही थि मगर स्वाती केँ टच सें हट भि नहि रही थि।
मिड-मॉर्निंग – लैपटॉप पर्र इंटीमेट वर्किंग
स्वाती नें रिया कों अपनेबगल मे बिठाकर लैपटॉप पऱ काम शुरुआत किया। जब भि कुछ एक्सप्लेन करना होता, स्वाती रिया केँ पीछे सें झुक जातीं। उनकी हेवी, सॉफ्ट बूब्स रिया कि पीठ औऱ कंधों कों दबातीं। स्वाती कि गरम साँसें रिया केँ कान औऱ गर्दन पर्र पड़रही थीं।
एक् बार स्वाती नें रिया कों कुछ दिखाने केँ लिए औऱ आगे झुका दिया। अब स्वाती कि पूरी ऊपरी शरीर रिया पर्र लद गई थि। उनकी भारी बूब्स रिया कि पीठ पर्र पूरीतरह दबरहे थें। स्वाती नें जानबूझकर रिया कि गर्दन केँ पास मुँह लेँ जाकर धीरे-धीरे सें साँसली।
“तुम्हारी खुशबू कितनी स्वीट हैं बेटा। फ्रेश फ्लावर जैसी, ” स्वाती फुसफुसाईं।
रिया कां चेहरा गरम होँ रहा थां। स्वाती नें रिया केँ एक् हाथ कों अपनेहाथ मे लें लिया औऱ उसकी उंगलियोमे अपनी उंगलिया फंसा दि। दोनों कि जाँघें पूरीतरह सटी हुईँ थीं। स्वाती कि ट्रिम्ड आर्मपिट रिया केँ बाएँ कंधे केँ पास लगातार टचकररही थि।
लञ्चसमय – प्राइवेट औऱ सेंसुअल
स्वाती नें फिन सें केबिन कां दरवाजा बंदकर लिया। “आज भि यहीं दोपहर का खाना करेंगे। ”
दोनों सोफा पऱ बैठीं। स्वाती नें रिया कों अपनीतरफ खींच लिया। अब रिया कि पूरी जाँघ स्वाती कि जाँघ पर्र रखी हुई थि। खाते-खाते स्वाती नें रिया केँ बालों कों कान केँ पीछे किया औऱ उसकेगाल कों हल्का सां छू लिया।
“तुम् आज औऱ भि अधिक सुंदर लगरही होँ। ये स्लीवलेस टॉप तुम्हारी सॉफ्ट आर्म्स औऱ ग्लोइंग स्किन कों परफेक्ट दिखारहा हैं, ” स्वाती नें कहा औऱ अपनी उँगली सें रिया केँ कॉलरबोन कों सहलाया।
रिया शरमाकर मुस्कुराई। स्वाती नें फिन सें हाथऊपर करके स्ट्रेच किया। उनकी दोनों आर्मपिट्स रिया केँ सामने एक्सपोज थीं। रियाइस बार बिना हिचकिचाए उन्हें देखरही थि। स्वाती नें रिया कां सिर हल्का सां अपनीतरफ खींचा औऱ अपनी आर्मपिट कों उसकेनाक केँ औऱ लगभगला दिया।
“अच्छी लगरही हैं नाँ स्मेल?” स्वाती नें नर्म स्वर मे पूछा।
रियाबस हल्के सें सिर हिला दि। उसका पूरा जिस्म गरम हौ चुका थां। स्वाती कि परिपक्व जिस्म कि गर्मजोशी, उनकी सम्मोहक / कामुक गंध औऱ लगातार होँ रहे इंटीमेट टचेस रिया कों पूरीतरह मंत्रमुग्ध कर चुके थें।
बाद दोपहर – इमोशनल औऱ फिजिकल नज़दीकी
दोपहर कां सेशन औऱ गहरा होँ गय़ा। स्वाती नें रिया कों अपनीगोद कि तरफ खींच लिया। रियाअब स्वाती केँ बहोत लगभग लीनिंग होकर बैठी थि। स्वाती कि एक् हैंड रिया कि कमर पऱ थि, दूसरी हैंड उसके कंधे पर्र।
स्वाती नें रिया केँ कान मे आहिस्ता फुसफुसाते हुएकहा, “मुझे तुम्हारे संग इतना अच्छा लगरहा हैं रिया। तुम्हारी प्रेजेंस मुझे फ्रेश फील कराती हैं। तुम्हारी सॉफ्ट जिस्म, तुम्हारी इनोसेंस। सभीकुछ मुझे आकर्षित करता हैं। ”
रिया नें धीरे-धीरे सें स्वाती कि तरफ देखा। स्वाती नें रिया कि फॉरहेड पर्र हल्का सां किस किया, फिन गाल पऱ, औऱ फिनकान केँ पास। मात्र हल्के, सेंसुअल टचेस। स्वाती कि भारी बूब्स रिया कि बूब्स सें हल्का-हल्का रगड़खा रहीथीं।
स्वाती नें रिया कों पूरीतरह अपनी बाहों मे लें लिया। दोनों कि शरीर एक्-दूसरे सें सटी हुई थीं। स्वाती कि ट्रिम्ड आर्मपिट रिया कि गर्दन औऱ चेहरे सें लगातार टचकररही थि। रियाअब खुलकर स्वाती कि गंध लेँ रही थि।
साम कां अंत – डीपहग औऱ प्रॉमिस
साम होते-होते स्वाती नें रिया कों लंबा औऱ टाइटहग दिया। दोनों खड़ीथीं। स्वाती कि भारी बूब्स रिया कि बूब्स सें पूरीतरह दबरही थीं। स्वाती नें रिया कि कमर कों दोनों हाथों सें जकड़ लिया औऱ उसे अपनीतरफ खींच लिया।
“कल फिनयही। औऱ भि लगभग, ” स्वाती नें रिया केँ कान मे फुसफुसाया। “मे तुम्हें हरदिन औऱ ज़्यादा कम्फर्टेबल बनाऊँगी स्वीटहार्ट। ”
रिया नें भि स्वाती कों हल्का सां गले लगाया। उसकी साँसें पूरीतरह भारी हौ चुकीथीं। स्वाती कि शरीरहीट, गंध, टचेस औऱ सम्मोहक / कामुक प्रेजेंस नें रिया कों पूरीतरह अपने मे समा लिया थां।
रिया केबिन सें निकलते टाइम बार-बार पीछे मुड़कर स्वाती कों देखरही थि। उसके जिस्म मे एक् नई, मीठी बेचैनी थि।
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Update 10
रिया एक् इंटर्न
अध्याय १: आकर्षण कि शुरुआत
रिया कि रात – उत्तेजित यादें औऱ स्वयं कों छूना
रात केँ ११:२०बजे रिया अपने कमरे मे बेड पऱ लेटी हुईँ थि। लाइट्स बंदथीं। केवल बेडसाइड लैंप कि हल्की गुलाबी रोशनी थि। आज कां पूरादिन उसकेमन मे घूमरहा थां। उसने आँखें बंदकीं औऱ आरामसे अपनेबदन कों सहलाना शुरुआत कर दिया।
“स्वाती मैम.आज क्याँ हौ रहा थां मेरेसंग? पूरादिन उनकेसंग इतना क्लोज। उनकीगरम जाँघ मेरी जाँघ सें सटी हुईँ थि। उनकी भारी, सॉफ्ट बूब्स बार-बार मेरीपीठ औऱ कंधों कों दबारही थीं। जब उन्होंने हाथऊपर करके स्ट्रेच किया, उनकी वोँ सेक्सी आर्मपिट्स। नाइसली ट्रिम्ड बाल, गोरी स्किन औऱ वोँ वार्म, फेमिनिन स्मेल। मुझे बार-बार नाक सें अंदर लेने कां मनकररहा थां। ”
रिया नें धीरे-धीरे सें अपना पिंक स्लीवलेस टॉपऊपर किया। उसकी यूथफुल सि-कप बूब्स बाहर् आँ गईं। वो दोनों हाथों सें अपनी बूब्स कों हल्के-हल्के दबाने लगी।
“अहह। आजजब उनकी बूब्स मेरीपीठ सें रगड़खा रहीथीं, तोँ मुझे अजीब सां फीलिंग हुआ थां। मेरी निप्पल्स हार्ड होँ गए थें। उनकी उँगलियाँ मेरीकमर पऱ घूमरही थीं। कितना कोमलमगर सम्मोहक / कामुक टच थां। औऱ दोपहर का खाना वक्त मे जब उन्होंने मेरी गर्दन केँ पास साँसली। उनकीहॉट ब्रेथ। मम्म.”
रिया नें अपनी दाईं आर्मपिट कों नाक केँ पास लेँ जाकर गहरी साँसली। अपनी फ्रेश, यंग आर्मपिट कि हल्की नेचुरल स्मेल उसे अच्छी लगरही थि।
“मेरी आर्मपिट्स भि आज बहुत वार्म थीं। स्वाती मैम नें इन्हें देखा औऱ बोला कि बहोत हसीन हें। क्याँ उन्हें मेरी स्मेल पसन्द आएगी?आज जब उनकी आर्मपिट मेरे चेहरे केँ पासआई थि, तोँ मुझे नीचेकुछ गीला होता महसूस हुआ थां.”
उसकी एक् हाथ नीचेसरक गय़ा। उसने अपनी पैंट्स कि जिप खोली औऱ हाथ अंदरडाल दिया। पैंटी पहले हि हल्की गीली हौ चुकी थि। रिया नें अपनी उँगलियों सें बुर केँ ऊपर वाले हिस्से कों हल्के-हल्के रगड़ना शुरुआत किया।
“ऊह्ह। स्वाती मैम.जब आप् मेरेकान मे फुसफुसाई थीं। ‘तुम्हारी खुशबू स्वीट हैं’। उस वक्त मेरी बुर मे सनसनी सि दौड़ गई थि। आपकी परिपक्व जिस्म, आपकी हेवी बूब्स, आपकी सॉफ्ट जाँघें। सभीकुछ मुझे आकर्षित कररहा हैं। मे आज पूरादिन आपकेपास चिपकी रहना चाहती थि। ”
रियाअब अपनी लेफ्ट ब्रेस्ट कों जोर सें दबारही थि। उँगलियों सें निप्पल कों ट्विस्ट कररही थि। दूसरा हाथ तेजी सें अपनी पैंटी केँ अंदर बुर कों सहलारहा थां। उसकी मिडिल फिंगर क्लिट पऱ सर्कल्स बनारही थि।
“मैम कि वोँ सम्मोहक स्माइल। उनकी हस्की आवाज़। जब उन्होंने मुझेहग किया थां, उनकी बूब्स मेरी बूब्स सें पूरीतरह दब गई थीं। मुझेलगा जैसे मेरी पूरी शरीर उनमें घुल गई होँ। उनकी आर्मपिट स्मेल। वोँ इंटॉक्सिकेटिंग गंध। मुझे औऱ चाहिए। मे कलफिन स्लीवलेस पहनूँगी। शायदवे मेरी आर्मपिट्स कों छुएँ। याँ। औऱ लगभगआएँ.”
रिया कि साँसें अब बहोत तेज हौ गई थीं। वो अपनी जाँघें फैलाकर बेड पऱ लेट गई। एक् हाथ सें बूब्स कों मसलरही थि, दूसरे हाथ सें दो उँगलियाँ अपनी टाइट, गीली बुर मे आरामसे अंदर-बाहर् कररही थीं।
“अहह। स्वाती मैम। आप् मुझे क्याँ कररही हें? मे कभी लड़कियों केँ बारे मे ऐसा नहि सोचती थि। मगर आप्। आपकी जिस्म, आपकाटच, आपकी स्मेल। मुझे पागलकर रही हैं। मे चाहती हूं कि आप् मुझेकिस करें। मेरी गर्दन चूसें। मेरी बूब्स कों दबाएँ। औऱ। मेरी बुर कों भि.”
रिया कि जिस्म काँपने लगी। वो अपनी क्लिट कों तेजी सें रगड़रही थि। यादों मे स्वाती कि आर्मपिट्स, बूब्स, जाँघें औऱ सम्मोहक / कामुक टचेसघूम रहे थें।
“हाँ.मैम। औऱ लगभग। मुझेछुओ। मुझे अपना बनाओ। आह्ह्ह.!”
रियाजोर सें काँपी औऱ एक् लंबीआह केँ संगझड़ गई। उसकेरस नें पैंटी कों पूरीतरह गीलाकर दिया। वो कुछदेर तक हाँफती रही, आँखें बंदकिए हुए।
थोड़ी देरबाद वो मुस्कुराई औऱ मन हि मन बोलीं, “कलफिन दफ़्तर जानां हैं। स्वाती मैम केँ पास। मे औऱ लगभग जानां चाहती हूं। बहोत लगभग.”
रिया नें तकिए कों गले लगाया औऱ धीरे धीरेसो गई। उसके सपनों मे स्वाती मैम कि कामुक जिस्म औऱ टचेसघूम रहे थें।
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Update 11
रिया एक् इंटर्न
अध्याय २: नियंत्रण कि ओर
कैमरे कि नजर औऱ बेचैनी
इसीतरह दोदिन औऱ बित गुजरगए | स्वाति रोज थोड़ा थोड़ाडोज़ बढ़ारही थि | रियाअब करीब-करीब उसकी मुट्ठी मे आँ चुकी थि| आज स्वातिने एक् टेस्ट लेने कि सोची | स्वाती सुभह थोड़ी जल्द दफ़्तर पहुँच गईं। वोँ आज जानबूझके अपनी केबिन मे नहि बैठी। बल्कि सीधे दूसरी कॉन्फ्रेंस रूम मे चलीगईं, जहाँकोई डिस्टर्ब नहि कर सकता थां। रूम शांत औऱ एयर-कंडीशंड थां। स्वाती नें दरवाजा बंद किया, लॉक कर लिया औऱ अपनी लैपटॉप खोलली।
उन्होंने अपनी केबिन मे लगे हाई-क्वालिटी सिक्योरिटी कैमरे कों एक्टिवेट कर दिया। स्क्रीन पऱ उनकी पूरी केबिन साफ-साफ दिखने लगी — सोफा, स्वाती कि बड़ी एग्जीक्यूटिव कुर्सी, टेबल, औऱ वो खाली स्थान जहाँ रियारोज उनकीगोद मे बैठती थि।
स्वाती कुर्सी पऱ धीरे-धीरे पीछे टिककर बैठगईं। उनकी भारी छाती साँसों केँ संग हल्के-हल्के ऊपर-नीचे होँ रही थि। उसने अपनी जाँघें क्रॉस करके बैठते हुए रहस्य्मयी मुस्कान केँ संग फुसफुसाकर स्वयं सें बोलीं,
“देखते हें मेरी प्यासी रियाआज कितनी बेचैन होती हैं। कल मैंने उसे अपनीगोद मे, अपनी खुशबू मे, अपनी छाती मे इतना डुबो दिया थां। आज बिना मेरे एक् समय भि नहि रह पाएगी। ”
स्वाती कि आँखों मे शरारत औऱ वासना कि चमक थि। वे कैमरे कि फीड कों फुल स्क्रीन पर्र देखरही थीं, अपनी लोअरलिप कों हल्का सां काटते हुए।
करीबदस मिनटबाद रिया केबिन केँ बाहर् आई। वो आज एक् हल्के पीचकलर कि स्लीवलेस टॉप औऱ फॉर्मल स्कर्ट मे बेहद आकर्षक लगरही थि…। एकदम ताजामाल। उसके लंबेबाल खुलेहुए थें औऱ चेहरे पर्र एक् उम्मीद भरी मुस्कान थि।
रिया नें दरवाजा धीरे-धीरे सें खोला औऱ अंदरकदम रखा। स्वाती कों देखने कि उम्मीद मे उसकी आँखें चारों तरफघूम रहीथीं। मगर केबिन खाली थि। स्वाती कि कुर्सी खाली पड़ी थि, सोफा सूना थां, औऱ पूरारूम ठंडा औऱ निर्जीव महसूस होँ रहा थां।
रिया कां चेहरा जल्दी उतर गय़ा। उसकी आँखों मे निराशा छा गई। वो कुछसमय तक दरवाजे पर्र हि खड़ीरही, जैसे उम्मीद कररही होँ कि स्वाती कहीं सें निकल आएंगी। फिन आरामसे अंदरआई औऱ चारों तरफ देखने लगी।
“मैम.” रिया नें धीरे-धीरे सें पुकारा, मगरकोई जवाब नहि आया।
रिया सोफे केँ पास गई औऱ उस पर्र बैठ गई। उसकी जाँघें आपस मे सिकुड़ गईं। वो बार-बार घड़ीदेख रही थि। उसके चेहरे पऱ बेचैनी साफदिख रही थि। कुछदेर बाद वो उठी, स्वाती कि कुर्सी केँ पास गई औऱ उस पर्र बैठ गई। स्वाती कि कुर्सी पर्र अभि भि उनकी खुशबू बाकी थि।
रिया नें कुर्सी कि पीठ कों अपनी छाती सें सटा लिया औऱ गहरी साँसली। स्वाती कि गंध उसके नथुनों मे घुस गई। रिया कि आँखें आधीबंद होँ गईं। वो कुर्सी कि पीठ कों औऱ भि मजबूती सें अपनी ब्रेस्ट्स सें दबाने लगी, जैसे स्वाती कि भारी छाती कों फीलकर रही होँ।
“मैम। आप् कहां हें.” रिया फुसफुसाई। उसकी एक् हाथ अनजाने मे अपनी जाँघ पर्र घूमने लगा। वो बार-बार स्वाती कि आर्मपिट कि याद मे अपनीनाक सूँघरही थि। उसकी साँसें थोड़ी भारी हौ गई थीं।
रियाअब पूरीतरह बेचैन नजर आँ रही थि। वो सोफे पऱ लेट गई, फिन उठकर खड़ी हुईँ, फिन स्वाती कि कुर्सी पऱ वापसबैठ गई। उसकी उँगलियाँ बार-बार अपनी आर्मपिट्स कों छूरही थीं, जैसे स्वाति केँ स्पर्श कों यादकर रही हौ।
स्वाती कॉन्फ्रेंस रूम मे स्क्रीन पऱ येसभी देखरही थीं। उनकी आँखें चमकरही थीं औऱ होंठों पर्र संतुष्ट मुस्कान थि। वे आहिस्ता अपनी जाँघें रगड़रही थीं।
“बहोत अच्छे। मेरी प्यासी लड़की.अब तुम् पूरीतरह मेरी होँ चुकी होँ, ” स्वाती नें स्वयं सें कहा।
वे जानबूझकर रिया कों औऱ बेचैन होने देना चाहती थीं।
रिया केबिन मे घुसते हि दरवाजा बंद करके खड़ीरह गई। स्वाती कों न् देख पाने कि निराशा उसके चेहरे पऱ साफदिख रही थि। वो धीरे धीरे सोफे कि तरफ गई औऱ उस पऱ बैठ गई। मगर धीरे-धीरे बैठने कि बजाय उसकी बॉडी तनाव सें भरी हुई थि।
वो बार-बार दरवाजे कि तरफ उम्मीद भरी नजरों सें देखरही थि। हरबार दरवाजे केँ बाहर् कोई आवाज़ सुनते हि उसकादिल जोर सें धड़क उठता, मगर हरबार निराशा होती। उसकी जाँघें आपस मे कसकर सिकुड़ रहीथीं। वो बार-बार अपनी जाँघों कों रगड़रही थि, जैसे नीचे होँ रही गर्माहट कों दबाने कि कोशिश कररही होँ।
रिया नें अपनी स्लीवलेस टॉप कों बार-बार ठीक किया। टॉप केँ नीचे उसकी यौवन सें भरपूर ब्रेस्ट्स हल्के-हल्के ऊपर-नीचे हौ रहीथीं। उसने अनजाने मे हि अपनी रसीले आर्मपिट्स कों छुआ, उँगलियों सें हल्का सां सहलाया औऱ स्वाती कि याद मे गहरी साँसली।
“मैमआज कहां हें.” रिया नें धीरे-धीरे सें बुदबुदाया, “कल तोँ पूरेदिन उन्होंने मुझे अपनीगोद मे बिठाए रखा थां। उनकी भारी, गरम औऱ नरम छाती मेरीपीठ सें लगातार दबरही थि। उनकी आर्मपिट कि वोँ मदहोश करनेवाली गंध……… उम्मम्मम्म। उनकी उँगलियाँ मेरी जाँघों केँ अंदरूनी हिस्से पऱ घूमरही थीं.”
रिया नें आँखें बंदकर लीं। उसकी एक् हाथ अपनीकमर पर्र घूमने लगा, फिन आरामसे ऊपर अपनी ब्रेस्ट्स केँ नीचे वाले हिस्से तक चला गय़ा। वो कल वाली यादों मे खो गई थि — स्वाती कि कामुक आवाज़, उनकीगरम साँसें उसकेकान पर्र, उनकी ट्रिम्ड आर्मपिट कि वोँ नशीली खुशबू.
उसकी साँसें अब भारी हौ चुकीथीं। पैंटी केँ अंदर हल्की नमी महसूस हौ रही थि। रिया नें जाँघें औऱ कसकरबंद कीं औऱ कुर्सी पर्र अपने हिप्स कों हल्का सां आगे-पीछे किया, जैसे स्वाती कि जाँघों कों फीलकर रही होँ।
पंद्रह मिनटबीत गए।
रियाअब औऱ अधिक बेचैन होँ चुकी थि। उसका चेहरा लाल हौ गय़ा थां, आँखें नमथीं औऱ बदन मे एक् मीठी-सि बेचैनी फैल गई थि। वो अचानक उठकर खड़ी होँ गई, स्वाती कि बड़ी एग्जीक्यूटिव कुर्सी केँ पास गई औऱ उस पऱ बैठ गई।
स्वाती कि कुर्सी पर्र अभि भि उनकी मदहोश करनेवाली गंध बाकी थि। रिया नें कुर्सी कि पीठ कों अपनी छाती सें पूरी ताकत सें सटा लिया। स्वाती कि खुशबू उसके नथुनों मे गहरीघुस गई। रिया नें आँखें बंद करके बहोत लंबी औऱ गहरी साँसली, जैसे वोँ स्वाती कि छाती कि गर्माहट कों महसूस कररही हौ।
“मैम। आपकीगंध। आपकी तपिश.” रिया फुसफुसाई। उसकी आवाज़ काँपरही थि। “बिना आपको देखे। बिना आपकेटच केँ। मुझे इतना खाली-खाली लगरहा हैं। ”
रिया नें अपनी जाँघें जोर सें रगड़ीं। उसकी एक् हाथ अनजाने मे हि अपनी जाँघ केँ अंदरूनी हिस्से पऱ घूमने लगा। उसकी आँखें नम हौ चुकीथीं औऱ होंठ हल्के सें खुलेहुए थें। वो बार-बार घड़ीदेख रही थि औऱ अधीरता सें साँस लें रही थि।
“प्लीज मैम। जल्द आँ जाइए। मुझे आपकीगोद मे खीचिए। आपकी भारी छाती चाहिए। आपकी आर्मपिट कि वोँ खुशबू चाहिए। मे बिना आपको महसूस किए एक् समय भि नहि रह सकती.”
रियाअब पूरीतरह स्वाती कि यादों औऱ उनके नां होने कि बेचैनी मे डूब चुकी थि। वो स्वाती कि कुर्सी पऱ बैठकर बार-बार करवटबदल रही थि, अपनी ब्रेस्ट्स कों हल्का सां दबारही थि औऱ स्वाती कि वापसी कां प्रतीक्षा कररही थि।
डेढ़ घंटेबाद.
स्वाती कॉन्फ्रेंस रूम मे आहिस्ता बैठी हुइ स्क्रीन पऱ रिया कि हर हरकत कां पूरा मज़ा लेँ रहीथीं। पूरे डेढ़ घंटे तक उन्होंने रिया कि बेचैनी कों बहोत ध्यान सें देखा। स्क्रीन पऱ रिया बार-बार करवटबदल रही थि, कभी सोफे पर्र लेट जाती, कभी उठकर खड़ी हौ जाती, अपने कच्चे अमरूदों कों हल्का-हल्का दबाती, अपनी आर्मपिट्स कों बार-बार सूँघती औऱ स्वाती कां नाम बुदबुदाती हुईँ नजर आँ रही थि।
रिया कि बेचैनी देखकर स्वाती कि अपनी बुर पूरीतरह गीली औऱ चिपचिपी होँ चुकी थि। उनकी जाँघें आपस मे रगड़रही थीं। स्वाती नें अपने लोअरलिप कों काटते हुए मुस्कुराया औऱ फुसफुसाकर कहा, “बहोत अच्छे मेरी प्यासी लड़की.अब तुम् पूरीतरह मेरी होँ चुकी हौ। ”
स्वाती नें लैपटॉप बंद किया, अपनी स्लीवलेस टॉप कों ठीक किया, अपनी भारी छाती कों हल्का सां दबाया औऱ आहिस्ता, जानबूझकर रुक-रुककर अपनी केबिन कि तरफ बढ़ीं। वे रिया कों औऱ कुछ लम्हा बेचैनी मे रखना चाहती थीं।
जब स्वाती नें केबिन कां दरवाजा खोला, रिया जल्दी कुर्सी सें उठ खड़ी हुइ।
रिया कि आँखें एकदमचमक उठीं। उसके पूरे चेहरे पऱ रिलीफ, खुशी, प्यास औऱ गहरी उत्तेजना कां मिला-जुला भाव थां। कुछ लम्हा केँ लिए वो स्तब्ध खड़ीरही, जैसे यकीन हि नहि होँ रहा थां कि स्वाती आखिरकार आँ गई हें। फिन उसकी आँखें नम होँ गईं औऱ वो बिना एक् समय गँवाए तेज कदमों सें स्वाती कि तरफ दौड़ी।
रिया नें बिनाकुछ कहे स्वाती कों जोर सें गलेलगा लिया। उसकाहग इतना टाईट थां कि स्वाती कि भारी, गरम औऱ नरम ३६डी ब्रेस्ट्स रिया कि जवान छाती औऱ चेहरे कों पूरीतरह कुचलरही थीं। रिया नें अपना चेहरा स्वाती कि गहरी क्लिवेज मे गाड़ दिया। उसकी साँसें तेज औऱ गरम होँ रहीथीं।
“मैम। आप् कहां थें। मे पूरे डेढ़ घंटे सें.” रिया कि आवाज़ काँपरही थि, करीब रोने जैसी हौ गई थि। “मुझे बहोत बुरालग रहा थां। बिना आपको देखे। बिना आपकेटच केँ। मे बिल्कुल अधूरी सि हौ गई थि। ”
रिया नें स्वाती कि कमर कों दोनों हाथों सें कसकर जकड़ लिया औऱ उन्हें औऱ भि लगभग खींच लिया। अब दोनों केँ जिस्म एक्-दूसरे सें पूरीतरह चिपकी हुए थें। रिया कि सॉफ्ट औऱ टाइट ब्रेस्ट्स स्वाती कि बड़ेबड़े औऱ जूसी ब्रेस्ट्स सें दबकर चपटी होँ रहीथीं। रिया नें स्वाती कि गर्दन मे अपनीनाक गाड़कर उनकीशिर कि मादक खुशबू कों गहरी-गहरी साँसों मे अंदर खींचा।
“मैम। आपकीगंध। आपकी बॉडी। आपकी गर्मी। मुझे बहोत मिसकर रही थि। बिना आपको महसूस किए एक् समय भि सहन नहि होँ रहा थां, ” रिया नें स्वाती कि छाती मे मुँह छिपाते हुए फुसफुसाया।
रिया कां पूरा जिस्म स्वाती सें चिपका हुआ थां। उसकी जाँघें स्वाती कि मोटी जाँघों सें सट गई थीं। रिया नें धीरे-धीरे सें अपना चेहरा ऊपर किया औऱ स्वाती कि आर्मपिट केँ पास लेँ जाकर बहोत गहरी साँसली। उसकी आँखें खुशी सें बंद होँ गईं।
“आपकी आर्मपिट। ये खुशबू। मुझे पागलकर देती हैं मैम.ये गंध। कितनी नशीली हैं.”
स्वाती नें मुस्कुराते हुए रिया कि पीठ पर्र हाथ फेरा, फिन उसके बालों मे उँगलियाँ फिराईं औऱ उसे औऱ भि मजबूती सें जकड़ लिया। रियाअब पूरीतरह स्वाती कि बाहों मे पिघल चुकी थि। उसकी साँसें भारी, गरम औऱ लंबी होँ रहीथीं।
रिया नें स्वाती कि छाती पर्र अपनासिर रख दिया औऱ नरम, प्यासी आवाज़ मे बोलि, “मैम। प्लीज आज मुझे अपनीगोद मे बिठाइए। मुझे अपनी बाहो मे जकड़लो। मुझे आपकेटच कि बहोत जरूरत हैं। मे बिना आपको महसूस किए, बिना आपकी खुशबू लिए, बिना आपकी उँगलियों केँ। एक् समय भि नहि रह सकती.”
स्वाती : रिया केँ गाल कों सहलाते हुए उसकेकान मे फुसफुसाया, “मेरी अच्छी लड़की.अब मे आँ गई हूं। आज तुम्हें पूरीतरह अपनीगोद मे रखूँगी। जितना चाहोगी, उतना चिपका केँ रखूँगी। ”
रिया नें बस स्वाती कि छाती सें औऱ चिपककर आँखें बंदकर लीं, जैसे वोँ स्वाती कि गर्माहट मे घुल जानां चाहती होँ।
स्वाती रिया कि इस पूर्ण समर्पण कों देखकर मन हि मन बहोत खुशथीं। उन्होंने रिया कों औऱ मजबूती सें जकड़ लिया औऱ संतुष्ट मुस्कान केँ संग सोचा — “अबये पूरीतरह मेरी हैं। ”
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