Woh Sunahre Din (Mausi Ki Nanad Ke Saath Relationship Ki Kahani) (2020)
mausi ki nanad ki beti ke saath hot prem
WOH SUNAHRE DIN (MAUSI KI NANAD KE SAATH RELATIONSHIP KI KAHANI) Mausi Ki Nanad Ki Beti Ek ladke ki love story, jo apni mausi ke yahan rehne ke dauran shuru hui. Wahan uska prem sambandh mausi ki nanad ki beti ke saath shuru hua. Dono ek doosre ke karib aaye, aur ant mein kya hua? Yeh kahani padhkar aapko pata chalega. Hot prem, incest chudai, aur consensual fantasy ki yeh kahani aapko pasand ayegi.
Din ba din dono ek doosre ke karib aate hain, aur unke beech hot prem ki kahani shuru hoti hai. Mausi ki nanad ki beti ke saath ladke ka prem sambandh itna hot hota hai ki dono ek doosre ke bina reh nahi paate.
WOH SUNAHRE DIN (MAUSI KI NANAD KE SAATH RELATIONSHIP KI KAHANI) - Mausi Ki Nanad Ki Beti – New Episode
Part 10
"मणि मे शौपिंग केँ लिए जानां चाहता हूं। " एक् दिन उसने अचानक मुझे बोला औऱ उसके शब्द हमेशा मेरेलिए आदेश कि तरह थें। वो जाने केँ लिए सजधजकर थि औऱ मुझे सजधजकर होने मे करीब 15 मिनटलगे। रविवार थां औऱ दुकान बंद थि इसलिये मैंने गाड़ी कों स्टार्ट किया औऱ उससे पूछा कि वो कहां जानां चाहती हैं? "हम् चंडीगढ़ जारहे हें। " ये ड्राइवर (मेरे) केँ लिए मात्र एक् आदेश थां। मे बहोत तेज व्हीकल चलाता हूं। तौ एक् घंटे औऱ पंद्रह मिनट कां सफर केवल 45 मिनट मे पूरा हौ गय़ा। हम् एक् शॉपिंग कॉम्प्लेक्स मे पहुंचे; एक् ब्रांडेड शोरूम मे प्रवेश किया। उसने करीब 1 घंटा वहां बिताया औऱ उसने मात्र एक् ड्रेस खरीदी। फिन दूसरे मे औऱ वहा हमनेबस वक्त बिताया औऱ कुछ भि नहि खरीदारी कि।
आगे जूते कि दुकान थि। बहोत महंगे जूतों कों शोकेस मे रखा गय़ा थां। उसने कितनी हि वैरायटी केँ जूते देखेमगर उसे एक् भि मनपसंद नहि आया। तौ चार घंटे कि तपस्या कां परिणाम एक् पोशाक, एक् घड़ी औऱ कान कि बाली कि एक् जोड़ी थि। उसदिन मुझे एहसास हुआ कि गर्ल फ्रेंड कां मतलब क्याँ होता हैं। मे इतना ज़्यादा वक़्त बर्बाद करने केँ लिए एक् भि शब्द नहि कह सकता थां। मगर उसकेलिए ये मात्र मनोरंजन थां। चार घंटे वोँ भि मात्र तीन चीजें खरीदने केँ लिए इतना वक्त ख़राब करने मे किसे ख़ुशी महसूस होगी?मगर अगर आपको gf चाहिए तोँ आपकोइसे सहन करना होगा। मुझेअब बहोत भूखलगी थि। उसे इसका एहसास हुआ। उसने मुझेकुछ स्ट्रीट फूड खाने कों कहा। हमनेदो प्लेट कुल्चा लिए औऱ उसको खाने केँ बाद वो फिन सें एक् शोरूम मे दाखिल हुई, जहाँ बहोत सारे पर्स बहोत अच्छे तरीके सें रखेहुए थें। मैंने उससे पूछा कि क्याँ वो एक् लेना चाहती हैं।
उसने मुझे बोला कि वो अगलीबार इसे खरीदने वाली थि वो वहां केवल एक् बार देखने केँ लिएआयी थि। येसभी कुछ वास्तव मे मुझे परेशान कररहा थां। मैंने देखा कि दुकान केँ बाहर् एक् शख्स जमीन पर्र रखे उपन्यास बेचरहा हैं। क्याँ आप् वास्तव मे ऐसेदेश मे विकास कि उम्मीद करते हें जहांलोग जूते कीमती रैक मे रखते हें औऱ किताबें जमीन पर्र बेची जाती हें औऱ कुछलोग उन्हें देखते तक नहि। मैंने दो उपन्यास खरीदे। जब उसने मेरे हाथों मे दो उपन्यास देखे तौ वो भड़कउठी औऱ उसने पूछा, “ठीक हैं तोँ आप् उस वक़्त घऱ पर्र उपन्यास पढ़ने जारहे हें जौ सिर्फ मेरा हैं? तुम्हारी हिम्मत केसे हुईँ। मैंने बसहाथ जोड़कर कहा, "ओह मेरी मां, मे उस वक़्त इन उपन्यासों कों नहि पढ़ने जारहा हूं, जोँ सिर्फ तुम्हारा हें। मे दुकान पर्र अपने खाली टाइम मे इन उपन्यासों कों पढ़ूँगा। " वो खुश हौ गयीँ, औऱ मुझे धन्यवाद कहा। हम् औऱ 4-5 शोरूम मे गए, कुछ भि नहि खरीदने केँ लिए औऱ अबसाम 5 बजे थां। मैंने उससे पूछा, "मुझे मेरी गलती बताओ, मेरे धैर्य कि परीक्षा मतलो। "
वो जोर सें हंसी औऱ कहा, "तुम्हे यह बहोत पहले कहना चाहिए थां, केवल तुम् हि सहनकर रहे हौ यदि तुम् मुझेइस तरह कि चीजें करने सें नहि रोकेंगे औऱ यदि तुम् मुझे मेरी सीमा नहि दिखाते होँ तोँ तोँ मे एक् बहोत बुरी लड़की बन सकती हूं। ” वो लगातार हंसरही थि। "क्याँ हमेंअब वापस जानां चाहिए?", मैंने उसे विनम्रता सें पूछा। उसनेकहा, "मुझेपता हैं कि जब मेरामणि भूखा होता हैं तोँ वोँ चिढ़ जाता हैं, मुझे उसका स्वभाव पता हैं। अबबस दोपहर का खानाकम डिनर केँ लिए एक् अच्छे रेस्तरां कि ओर बढ़ें। ” ये मेराशहर थां इसलिये मे करीब-करीब सब अच्छे रेस्तरां जानता थां।
मे एक् रेस्तरां मे गय़ा जौ एक् बड़ेचार सितारा होटल कां हिस्सा थां। इसका भोजन मज़ेदार थां। मैंने उससे पूछा कि क्याँ वहा खानां खानां सही रहेगा। येसभी उसनेमुझ पऱ छोड़ दिया। मार्ग पऱ बहोत अधिक ट्रैफिक थां इसलिये हम् साम 5.30 बजेवहा पहुँचे। कभी-कभी वो एक् बच्चे जैसीबन जाती थि औऱ किसीचीज केँ लिएजिद करना शुरुआत कर देती। उसने मुझे होटल मे एक् रूम किराए पऱ लेने केँ लिएकहा क्योंकि वो मुझसे ढेर साड़ी बातें करना चाहती थि औऱ खानां एकदम आहिस्ता कमरे मे हि खानां चाहती थि। मैंने बहस नहि कि औऱ एक् रूमबुक कर लिया। काउंटर पर्र मौजूद आदमीकुछ अजीबसोच रहा थां क्योंकि उसने मुझसे पूछा कि मुझे पूरीरात याँ कुछ घंटों केँ लिए कमरे कि आवश्यकता हैं। मैंने सहजता सें कहा, "कुछ घंटों केँ लिए। "
मुझे उनके इरादे पता नहि थें। बाद मे मैंने उसका अर्थ समझा औऱ उसे कमरे मे बताया कि वो सोचरहा थां कि मैंने उसे वोँ सभी केँ लिएरूम लिया हैं। वो हँसने लगी औऱ अगले 5 मिनट तक नहि रुकी। उसने मुझसे पूछा, "क्याँ मे एस्कॉर्ट जैसी दिखती हूं?" मैंने कहा "तुम् केवल एक् साधारण हसीन लड़की हौ, हम् उसेकुछ बोल नहि सकते क्यूंकि वो मात्र अपनी जिम्मेदारी निभारहा थां औऱ वो वहीपूछ रहा थां जोँ वो हमेशा ऐसे जोड़ों कों पूछता हैं। " मुझे उसकीबात अच्छी नहि लगी, मगर मे क्याँ कर सकता थां। उसने मुझेइस मामले कों छोड़ने केँ लिएकहा औऱ वो टाइम बर्बाद नहि करना चाहती थि। उसने मुझे बताया कि एक् होटल केँ कमरे मे मेरेसंग टाइम बिताना उसकी ख़्वाहिश थि। वो कमरे कि हरचीज कों अजीबरूप देरही थि, क्योंकि उसने फिल्मों मे हि होटल केँ कमरे देखे थें। "अरे हम् अंकल केँ घऱ सुभहजा सकते हें?" ये मेरी ऑफिसियल गर्ल फ्रेंड कम रिंग एक्सचेंजिंग पार्टनर द्वारा कि गई एक् नई घोषणा थि।
"नहि शोनाये सही नहि हैं, अगर मासी कों पताचला तौ?" अगर किसी नें मासी कों बताया कि मे साम कों घऱ नहि आया तौ? मे इसबात कों लेकर चिंतित थां। मगर वो सुनने कों सजधजकर नहि थि इसलिये मुझे पूरीरात उसकेसंग होटल केँ कमरे मे गुजारनी पदरही थि। मैंने उसे आराम करने केँ लिएकहा औऱ खानां ऑर्डर किया। मैंने फिन सें उससेकहा "हमने इसकी योजना पहले नहि बनाई थि इसलिये हमेंइन कपड़ों केँ संग हि काम चलाना होगा औऱ हम् इन कपड़ों केँ संग केसे सोएंगे?" उसने जवाब दिया, "कपड़े हमारे बीच क्याँ करेंगे?" उसने पहलीबार आँख मारी औऱ कहा, "हम् आज पूरीतरह सें नग्न होकर सोनेजा रहे हें। " जल्द हि एक् व्यक्ति खानां लेकरआया।
WOH SUNAHRE DIN (MAUSI KI NANAD KE SAATH RELATIONSHIP KI KAHANI) - Mausi Ki Nanad Ki Beti – New Episode
Part 10 (a)
हमने खानां खानां थां औऱ एक् दूसरे सें बात करने केँ अलावा कुछ नहि करना थां। वोँ अब मेरेसंग बहोत शरारती ढंग सें बातें कररही थि, जैसे मुझे यहा-वहा छेड़ना औऱ गुदगुदी करना। इसने मुझे उत्तेजित कर दिया औऱ मैंने अपने होंठ उसके होंठों पर्र रखदिए औऱ उसके निचले होंठ पऱ काटने लगा। वो दर्द सें चीख पड़ी औऱ मुझसे पूछा कि मे कठोर नहि हौ रहा हूं। मे उसके कपड़े निकालना चाहता थां। मैंने उसे अपनी बाहें उठाने कां इशारा किया। उसने आज्ञा मानी औऱ मैंने उसकाटॉप निकाल दिया, फिन ब्रा। मैंने भि उसे शरारती ढंग सें कहा कि हमेंसब कपडे हटाने कि जरूरत हैं क्योंकि हमारे पास पहनने केँ लिए ज़्यादा कपड़े नहि हें। मैंने उसके कपडे निकले औऱ उसने मेरे। हम् अब बिल्कुल नंगे थें। मैंने उससे शॉवर केँ लिए बोला।
उसे भि इसकी जरूरत थि। उसेअब लज्जा नहि आँ रही थि। वो अब मेरेसंग बिल्कुल सहज थि। हम् शावर लेनेचले गए। मैंने इसे चालूकर दिया औऱ वो पहले सें हि मुझ मे समायजा रही थि। मैंने उसेगले सें लगा लिया। पहले हमने अपने कों पूरीतरह सें पानी पानी मे भीगने दिया, फिन मैंने उसके अंगों सें, होंठों सें, गर्दन सें पानी चूसना शुरुआत किया। मैंने इन हिस्सों सें पानी चाटना शुरुआत कर दिया। उसने मेरी आँखों मे देखा जैसे औऱ कुछ भि छहरही होँ। मे नीचेबैठ गय़ा औऱ उसकी बुर पर्र बहता पानीपी लिया। ये वाकई बहोत अनोखा थां। हम् होटल केँ कमरे मे बहोत अलग महसूस कररहे थें, तनाव मुक्त औऱ कुछ भि करने केँ लिए स्वतंत्र। शायदयह कमरे सिर्फ इन चीजों कों करने केँ लिए हें। ये एक् फर्स्ट क्लास होटल थां औऱ बाथरूम घऱ केँ बाथरूम सें भि बड़ा थां। इसमें हर जरूरी चीजलगी हुई थि। मैंने उसकी बुर केँ मुँह पऱ सें पानी चाटा। मेरेऐसा करते हि वो कराहने लगी। "मणि, प्लीज इसे अंदर करें। अपनीजीभ सें करो न्।
" उसने मुझसे ऐसा करने कां अनुरोध किया। मैंने अपनीजीभ उसके अंदरडाल दि औऱ उसे अंदर सें फक करनेलगा, उसकी बुर उभरी हुईँ थि, मुझे उसका जी-स्पॉट महसूस हुआ औऱ मे उसे वोँ खुशी देतारहा जिसकी वोँ उम्मीद कररही थि। मैंने उस स्थान पऱ अपनीजीभ कों जोर सें रगड़ा। मैंने ऐसा करतेहुए उसकी गांड पकड़रहा थां। उसने परमानंद मे अहहभरी औऱ अपनी टांगो कों फैला दिया क्योंकि उसे बहोत मज़ा आँ रहा थां। मैंने अपनीगति बढ़ा दि औऱ वो आहें भरती हि जारही थि। उसनेअब मुझसे कहा, "मे तुम्हें यहीमजा दूं। " मैंने कहा, "नहि हनी, मे येसभी खाट पर्र चाहता हूं, हम् पहले अपनेबदन कों सुखा लें औऱ फिनखाट पऱ चलते हें। " उसने मेरा औऱ अपनाबदन टॉवल सें सुखा दिया औऱ अब हम् पलंग पऱ थें। मे पलंग पऱ लेट गय़ा। उसने मुझे पूरी एक् भावपूर्ण अंदाज़ मे देखा औऱ चुंबन शुरुआत कर दिया। उसने मेरे गालों कों पकड़रखा थां औऱ अपने होंठ मेरे होंठों पऱ रखदिए। जब वोँ ऐसाकर रही थि तौ मेरा कड़क खड़ा लन्ड उसकी गीली बुर कों छूरहा थां। मैंने महसूस किया कि वो अपनी बुर कों नीचे सें मेरे लन्ड कों महसूस करने केँ लिए मजबूर कररही थि। वो होंठों सें मेरे मर्दाना भाग कि ओर नीचे कि ओर गयीँ, !
उसनेउसे हाथ मे पकड़ लिया औऱ उसे हिलाने लगी। उसनेअब तक येजान लिया थां कि मुझेइसे चुसवाना बहोत मनपसंद हैं। उसनेउसे जोश सें चूसा औऱ उसनेकुछ देरबाद उसेरोक दिया। मैंने उसे रास्ते मे छोड़ने कां कारण पूछा। वोँ मेरे पैरों पर्र बैठ गई औऱ अपनेहाथ मेरी छाती पऱ रखदिए। एक् हाथ सें वोँ मेरे लन्ड कों अपनी बुर केँ ऊपर रगड़ने लगी। मुझेपता थां कि वो अबये चाहती हैं। मगर मे शुरुआत नहि करना चाहता थां। हम् दोनों उलझन मे थें। मुझेलगा कि शायदउस दिनऐसा होने वाला थां। मुझेइसे शुरुआत करने कि जरूरत थि। मे उठा, उसे पकड़ा औऱ लेटा दिया। पहले मैंने अपने होंठ उसके उसके होंठो पऱ रखे औऱ उसे अपना लन्ड उसकी बुर केँ मुँह पर्र रगड़ने कों कहा। जैसा मैंने निर्देशित किया थां, उसने वैसा हि किया। मैंने उसके बाएं निप्पल पर्र जोर सें काट लिया।
वो तड़पउठी औऱ वास्तव मे वो मुझे अपने जिस्म मे प्रवेश करवाना चाहती हैं। मैंने भि उससे पूछा, "क्याँ तुम् मुझ सें करना चाहती हौ?" उसने अपनी आँखें बंदकर लीं औऱ बसहाँ मे सिर हिला दिया। मैंने अपना लण्ड बिल्कुल उसकी बुर पर्र लगाया औऱ जोर सें अन्दर पेल दिया। ये सभी बहोत जल्द होँ गय़ा। तौ वोँ थोडा चिल्लाई। ये गीला थां इसलिये मेरे लन्ड कां उसमें प्रवेश करना आसान हौ गय़ा। वो भि मजा लेँ रही थि, क्योंकि उसके चेहरे सें इसकापता चलरहा थां। मेरा लन्ड पूरीतरह सें अंदर नहि गय़ा थां, मे उसकेछेद केँ अंदर अपना गहराई तक लेँ काने केँ लिए जोर-शोर सें झटकेमार रहा थां, मे न् सिर्फ इसे औऱ गहराकर रहा थां, बल्कि मेरीगति भि बढ़रही थि। "तुम्हे ये मनपसंद आयाजान?" मैंने जोश सें पूछा। वो अपने पहले प्रेम केँ खेल केँ नशे मे थि, उसनेकहा, "हाँ, प्लीज हनीइसे करतेरहो, मे इसे गहराई तक चाहती हूं, मगर अभि ये मुझेचोट पहुंचा रहा हैं। " मैंने कहा, "चिंता मतकरो, जानू, तुम् जल्द हि इसका खुशी लेना शुरुआत कर दोगी। "
उसने मात्र सिर हिलाया औऱ कुछ नहि कहा। मुझेलगा कि वो बातचीत कि वजह सें अपनी खुशी कों कम नहि करना चाहती थि। मैंने बात करनाबंद कर दिया औऱ अपनेकाम कि ओर ध्यान केंद्रित किया। मे अब बहोत तेज थां। क्योंकि येआज मेरा पहला सहवास थां इसलिये मे इसका अधिक सें ज़्यादा मज़ा लेना चाहता थां। उसे इतनामजा आया कि उसने चुदाई केँ दौरान दोबार अपना पानी छोड़ा। मैंने अपना स्पर्म उसकी बुर मे निकाल दिया औऱ उस पऱ एक् मुर्दे कि तरहगिर गय़ा। उसके बूब्ज़ मेरे दबाव मे कुचलगए। मे कुछदेर तक उसी स्थिति मे रहा औऱ फिन मे उसकेपास लेट गय़ा औऱ उसकीतरफ मुड़ गय़ा। मे अपने बाएंहाथ कि उंगलियों सें उसके दायें निप्पल कों मसलरहा थां। उसे अभि भि आनंद आँ रहा थां। मैंने उससे पूछा, “क्याँ तुम्हें इसमें मजाआया? उसने मेरे बालों पऱ हाथ फेरा औऱ कहा, "मुझे इसमें बहोत मजाआया औऱ मे अपनी पूरी ज़िन्दगी तुम्हारे संग बिताना चाहती हूं। " उसके वाक्य मे बहोत प्रेम थां। "मे भि वही चाहता हूं, जानेमन। " मैंने उसी स्वर सें उत्तर दिया।
WOH SUNAHRE DIN (MAUSI KI NANAD KE SAATH RELATIONSHIP KI KAHANI) - Mausi Ki Nanad Ki Beti – New Episode
HAPPY DIWALI
Hello friends,
Sabse pahle ap sabhi ko Dhanteras, Deepawali, Govardhan Pooja और bhay dooj की shubhkamnayen। Bhagwan ap sabko dheron khushiyan den और aapki sabhi manokamnayen poori hon, bhagwan सेमेरी yahi prarthana h.
Doosri बात, yar in dino में mein बहुत busy rahunga, dosto और relatives केयहाँ diwali के gifts dene jana h, phir Sunday ko sisters केयहाँ bi jaana h, too Monday bhay dooj h, इसलिए Monday tak mein updates नहीं de paunga। Advance में sorry bol deta hoon.
Tuesday से regularly aapko updates milenge। or ha एक khushkhabri bi h के mein jald hi दो nayee kahanian shuru karne jaa raha hoon। Dono hi incest hogi, dono kaa theme bi different hoga। Un पर work out chl raha h। Hope के aapko पसंद ayengi.
ap sabhi behno और bhaiyon ko deepawali की dheron shubhkamnayen.
Aapka अपना
Manik Mittal
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manikmittalme07 bhay aapne is update ko thda jldi baazi mai likh diya h jisko ap thda lamba krke unn dono k pyar ko darsha sakte the jisse is update kee shobha or ache say aate halanki update bdiya thaa