घरेलू जब रंडी बनी ( no pakkau only Vasna ) - Ghar Ki Randi – New Episode
इस सेक्स किस्सा मे अब तक आपनेपढ़ा कि गोपाल केँ दादाजी जी केँ मर जाने सें मोना कि चुत चुदाई सें वंचित रह गई थि औऱ दूसरी तरफ सुमन सें उसके ग्रुप केँ लोग क्रोध थें कि सुमन ग्रुप मे शामिल होकर भि बिंदास नहि हौ पारही हैं।
अबआगे.
सुमन- संजयजी, मे क्याँ करूँ? मुझेकुछ समझ हि नहि आँ रहा। केसे मे कुछ करूँ। आप् हि प्लीज़ कुछ बताओ मे क्याँ करूँ?
संजय- एक् तरीका हैं। मे तुम्हें जोँ करने कों कहूँ, वोँ चुपचाप बिना प्रश्न केँ करती जानां औऱ हाँअगर ‘नाँ’ कही। तौ उसीसमय तुम् हमारे ग्रुप सें बाहर् होँ जाओगी। उसकेबाद यहसभी मिलकर क्याँ करेंगे। मुझे नहि पता!
सुमन-जी संजयजी, जैसा आप् कहोगे, मे करने कों रेडी हूं, प्लीज़ आप् क्रोध मत हौ बस!
संजय-आज मे टीना कों सभीकुछ एक् बुक मे लिखकर दे दूँगा। वोँ तुम्हें रोज एक् टास्क देगी, तुमको उसे पूरा करना होगा औऱ जिसदिन तुम् सारे टास्क पूरेकर दोगी, समझो तुम् हमारी पक्की वाली फ्रेंड बन गई हौ।
सुमन नें भि मुस्कुरा केँ संजय कि बातमान ली औऱ ‘अभि केँ लिएकोई टास्क दो’ऐसा कहकर सबको चौंका दिया।
संजय-वाह यह हुइ नां बात। तौ चलो अभि केँ लिए तुम्हारा टास्क यह हैं कि यहा सें वोँ सामने तक तुम् किसी मॉडल कि तरह कैटवॉक करो।
वीरू- दोस्त, यह क्याँ टास्क हुआ?
वीरूआगे बोलता संजय नें गुस्से सें उसको देखा औऱ वोँ चुप होँ गय़ा।
टीना- क्यूं सुमनकर पाओगी यह?
सुमन नें बिनाकुछ बोले संजय कि तरफ़ देखा औऱ खड़ी होकर बड़ीअदा केँ संग टास्क पूरा करनेचल पड़ी, मगर वोँ कहते हैं नाँ शराफत कां नकाब इतनी आसानी सें नहि उतारा जा सकता, तोँ सुमन शुरुआत तौ बड़ेजोश मे हुइ मगरजब सबकी नज़रें उस पर्र गईं तोँ वोँ लज्जा सें पानी-पानी होँ गई औऱ स्पीड मे टास्क पूरा किया, सबकेसभी उस पर्र हंसने लगे।
सुमन- सॉरी मे घबरा गई थि मगर मैंने किया नाँ। औऱ अबकीबार अच्छे सें करूँगी।
संजय-गुड गर्ल.बस आज सें तुम्हारी ट्रेनिंग शुरुआत होँ गई हैं, अब तुम् जाओ, तुम्हारी क्लास कां समय हौ गय़ा हैं।
सुमन ख़ुशी-ख़ुशी वहा सें चली गई उसके जाने केँ बाद सबनेकहा कि कोई हार्ड काम करवाते उससे.यह क्याँ टुच्चा सां टास्क दे दिया?
संजय- सालो, तुम् सबको अक़ल हैं कि नहि। मुझेउसे बड़े प्रेम सें रंडी बनाना हैं। ऐसे जल्दबाज़ी मे काम बिगड़ सकता हैं। टीना तुम् सुनोसाम कों मे तुम्हें एक् बुक दूँगा, उसके हिसाब सें हि तुम् सुमन कों टास्क दोगी, अपनी तरफ़ सें कोई एक्सट्रा काम नाँ करना। वरना मेरा क्रोध तौ तुम्हें पता हि हैं।
टीना-ठीक हैं संजू.मगर मेरी एक् बातसमझ नहि आँ रही वोँ मेरे सामने तौ शायद वोँ सभीकर दे जोँ तुमने बताया हैं मगर तुम्हारे सामने केसे करेगी?
संजय- तेरीसमझ मेरीसमझ सें बहोत कम हैं। साम कों बुक मे देख लेनासभी समझ आँ जाएगा।
विक्की- दोस्त जब वोँ साली गांड कों मटकाकर चलरही थि। बड़ामजा आँ रहा थां। मेरामन तौ कररहा थां कि साली कि गांड मे लन्ड घुसादूँ, मगरयह हमारे संजय साहेब जौ हें, वोँ प्रेम सें इसको नंगी करेंगे। अब नां जाने वोँ दिनकब आएगा?
साहिल- अबेचुत केँ हब्शी। क्यूं उसके पीछे पड़ा हैं। अभि कली हैं थोड़ा खिलने दो, उसकेबाद उसकी खुशबू सबकोमिल जाएगी। हाहाहा हाहा।
घरेलू जब रंडी बनी ( no pakkau only Vasna ) - Ghar Ki Randi – New Episode
दोस्तो, यहाअब हमारे मतलब कां कुछ नहि, तोँ चलो वापस मोना केँ पासवहा शायदकुछ मिलजाए।
गोपाल जब वापसआया तौ मोना नें अपनामूड बदल लिया थां औऱ उसको सॉरी भि कहा। बस फिन क्याँ थां दोनों नें जल्द सें पैकिंग कि औऱ गाँव केँ लिए निकलगए।
दोस्तो, मे आपकोबता दूँ गोपाल केँ घऱ मे उसके मम्मी-बाप केँ अलावा एक् चाचा औऱ चाची हें, जिनकी कोई औलाद नहि हैं औऱ गोपाल भि इकलौता हि हैं। एक् दादाजी थें जोँ चलबसे।
साम कों गाँव मे जबयहलोग पहुँचे, वहादुख कां माहौल थां। सब रिश्तेदार जौ आएहुए थें, वोँ रोने मे लगेहुए थें। देररात तक सारी क्रिया ख़त्म हुई, उसकेबाद सबके सोने कां बंदोबस्त किया गय़ा। मोना औऱ गोपाल कों स्थान नहि मिली तौ गोपाल केँ चाचा नें गोपाल कों कहा कि तुम् छत पर्र चलेजाओ औऱ भि लोगवहा हैं औऱ बहूवहा बच्चों वाले कमरे मे सो जाएगी।
दोस्तो, वैसे तोँ यहाकोई बचा नहि हैं मगर इतने मेहमान आए हें तौ उनकेसंग कुछ बच्चे भि हें, जिनको एक् संग सुला दिया थां। अबयहा सबका इंट्रो देने कां कोई मतलब नहि, जौ खास हें उनके बारे मे जानलो।
राम ठाकुर गोपाल केँ पिता उम्र 53 साल, ठीक-ठाक सि कदकाठी हैं। इनकी वाइफ निर्मला देवी उम्र 45 साल, यह भि नॉर्मल हाउस वाइफ हें। उसकेबाद हरी ठाकुर यह गोपाल केँ चाचा हें, इनकी उम्र करीब-करीब 50 साल केँ आस-पास हैं, हट्टे-कट्टे जिस्म वाले हें। इनकी पत्नि गायत्री। उम्र 42 साल कि हैं, यह भि घरेलू टाइप कि स्त्री हें।
हरी-बहू, वोँ सामने रूम हैं, वहाचली जाओ… सारे बच्चे वहीं हें, तुम् भि उनकेपास कहींलेट जानां। बस एक् दोदिन कि परेशानी हैं, फिन तोँ ज़्यादातर मेहमान चले हि जाएंगे।
मोना- वोँ चाचा जी। मे जब सें आई हूं इसी साड़ी मे हूं। पसीने केँ कारणयह कड़क हौ गई हैं। मुझे कपड़े बदलने हें।
हरी-अरे मुझेसभी काका बुलाते हैं तुँ भि काका हि बोल। औऱ कपड़े बदलने हैं तोँ वोँ बाहर् देख सामने गुसलखाना हैं, वहाबदल लेँ।
दोस्तो, गाँव कां माहौल तौ आपकोपता हि हैं वहा पक्के बाथरूम कम हि मिलते हें। तौ बाहर् आँगन मे एक् छोटा सां बाथरूम बना थां, जिसमें साइड मे पत्ते लगे थें औऱ उनमें बहोत सें छेद थें, यानि बाहर् वाला अन्दर कां नजारा कहीं सें भि धीरे-धीरे देख सकता थां।
मोना- काकाजी, काकी कहां हें, वोँ साम सें नज़र नहि आँ रही हें।
हरी-अरे यहा रिवाज हैं ससुरजी केँ मरने पर्र घऱ कि बहू कों रात दूसरे घऱ मे बितानी होती हैं। वोँ पास केँ घऱ मे सोई हें, कल आँ जाएगी।
मोना- अच्छा यहबात हैं। तब तौ मम्मी जी भि संग होंगी?
हरी-हाँ वोँ भि वहीं हें। अब तूँ अधिक बातें नां कर। सवेरे जल्द उठना हैं। जल्द कपड़े बदल औऱ सोजा।
मोना- बाहर् बहोत अंधेरा हैं काका, मुझेडर लगता हैं। आप् थोड़ासंग चलो नां!
मोना कां डराहुआ चेहरा देखकर काका कों हँसी आँ गई, वोँ उसकेसंग आँगन मे आँ गए। उसकेबाद मोना बाथरूम मे चली गई।
मोना नें पहले साड़ी कों उतार केँ साइड मे रख दिया उसकेबाद ब्लाउज औऱ पेटीकोट भि निकाल दिया। अब वोँ सिर्फ़ नीलेरंग कि ब्रा-पैंटी मे थि, उसकाकसा हुआबदन देखकर किसी कि भि नियत बिगड़ जाए औऱ मोना कों ऐसालगा भि कि शायद बाहर् सें उसेकोई देखरहा हैं। उसने जल्द सें दूसरी साड़ी पहनी औऱ बाहर् आँ गई।
काका पहले जहाँ खड़े थें। अभि भि वहीं थें। मोना नें सोचा कि काका केँ अलावा तौ यहाकोई हैं भि नहि। शायद उसका भ्रमरहा होगा.यह सोचकर वोँ अन्दर जाकरसो गई।
दोस्तो, टीना कों साम कों संजय नें एक् बुकदे दि थि, उसके हिसाब सें टीना कों आगे कां खेल खेलना थां, जिसकी शुरूआत उसनेकर दि।
वोँ सीधीरात कों सुमन केँ घऱचली गई।
सॉरी आपको मे बताना भूल गई अब इत्तफाक बोलो याँ कथा कि जरूरत, टीना कि मम्मी कों घऱ शिफ्ट करना पड़ा औऱ उनकानया घऱ सुमन केँ घऱ सें बसकुछ हि दूरी पे थां।
टीना- नमस्कार आंटीजी। मुझे सुमन सें थोड़ाकाम हैं। वोँ कहां हैं अभि?
हेमा-अरे आओआओ बेटी। वोँ अपने कमरे मे हैं, जाओमिल लोतब तक मे कुछ खाने कों लाती हूं।
टीना-अरे नहि आंटी। मे अभि खानां खाकर हि आई हूं, प्लीज़ आप् कोई परेशानी नां करें, ओ केँ!
इतना कहकर टीना सीधी सामने सुमन केँ कमरे मे चली गई जिसे देखकर सुमनखुश होँ गई।
सुमन-अरे टीना, आप् यहा केसे आनांहुआ आपका?
टीना- मैंने क्याँ समझाया थां मुझे आप् नहि तुम् कहो। इससे दोस्ती कां अहसास होता हैं औऱ मेरेआने कि वजह हैं तुम्हारा टास्क जोँ तुम्हें देनेआई हूं।
सुमन-इस समय वोँ भि मेरेघऱ मे। यहकौन सां टास्क हैं?
टीना- मेरीजान यह सिलसिला घऱ सें हि शुरुआत होगा, पहलेयह बता तेरे पिताजी कहां हें?
सुमन- वोँ तोँ दुकान पऱ हें, देर सें आएँगे। क्यूं?
टीना-तब ठीक हैं, अब शुरुआत होता हैं तेराआज कां टास्क। तौ सुन!
टीना बोलती रही औऱ सुमन आँखें फाड़े उसकी बातें सुनती रही। टीना नें अपनीबात पूरी करकेजब सुमन कों देखा तौ उसकोआँख मारकर शुरुआत होने कों कहा।
सुमन- नहि नहि। यह मेरे सें नहि हौ सकता टीना तुम् बात कों समझोयह उफ़फ्फ़ केसे होगायह?
टीना-ओके मतकरो। यह मे नहि कहरही, यहसभी संजय नें इसबुक मे लिखा हैं। अब लास्ट बारकहो करना हैं याँ मे वापस जाऊं…फिन तुम् हि कल संजय कों जवाबदे देना।
सुमन- नहि। जरा रूको, मगर मेरेयह करने सें क्याँ होगा?
टीना- तेरे अन्दर थोड़ी झिझक हैं। थोड़ाडर हैं, यह सारे टास्क उनको ख़तम करने केँ लिए हें। अब मे भि तौ लड़की हूं मेरे सामने तोँ तुम् नंगी हौ हि सकती होँ औऱ वैसे भि सिर्फ़ कपड़े निकालने हें, ब्रा औऱ पैंटी नहि। समझी!
सुमन- वोँ तोँ निकाल दूँमगर उसकेबाद जोँ करना हैं वोँ सोचकर हि डरलगरहा हैं। कही मम्मी कों पतालग गय़ा तोँ?
टीना-देख दोस्त मुझेयह सभी नहि पताअगर नहि करना तोँ मे जाती हूं, मेरेपास अधिक वक्त नहि हैं।
इतना कहकर टीनाउठ कर जानेलगी तौ सुमनडर गई औऱ उसने जल्द सें अपनी कमीज़ निकाल दि।
सुमन- दिदी रूको, देखो मैंने निकाल दियाअब कुछ नहि बोलूँगी। प्लीज़ आप् मतजाओ नां!
टीना-अरे क्याँ बात हैं दिदी.! चलठीक हैं अबयह भि निकाल दे।
सुमन नें सलवार भि निकाल दि। अब उसके 32″ केँ गोल चूचे सफ़ेद ब्रा मे सें निकल भागने कों मचलरहे थें। सफ़ेदपेट मक्खन कि तरह चिकना थां। उसकी पतलीकमर किसी कों भि दीवाना बनाने केँ लिए काफ़ी थि औऱ उसकी पैंटी कां उभारसाफ दर्शा रहा थां कि अन्दर चुत किसी डबलरोटी जैसी फूली हुईँ हैं।
टीना-वाह अबलगी नां हमारे टाइप कि। चलअबकोई चादरओढ़ औऱ मेरेसंग छत पऱ चल।
सुमन नें एक् बड़ी सि चादर अपनेबदन पर्र लपेटली औऱ डरतेहुए कमरे सें बाहर् निकली तौ उसकी मां सें उसका सामना होँ गय़ा।
अब सुमन कों संजय केँ मुताबिक़ करने कां सिलसिला शुरुआत होँ गय़ा थां। O
nice update . pr sumal ko uske friend kuch jyada hi dabake rakh rahe h ,,,friend banne k liye task pura krna or ghrr mai kapde nikalna .kya suman ko kuch akkal nahee h ?
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अब तक इस सेक्स किस्सा मे आपने जानां थां कि सुमन कों नंगी करके टीना उसके सुंदर खूबसूरती कि तारीफ़ करनेलगी थि औऱ उसकोऐसे नंगी हि एक् चादर सें ढककरछत कि तरफ लें जानेलगी थि तभी सुमन कां सामना अपनी मां सें हौ गय़ा।
अबआगे.
हेमा- हि हि। यह क्याँ हुआ। तुम् ऐसे चादर क्यूं ओढ़ेहुए होँ?
सुमन केँ तौ पसीने निकलगए, अब वोँ क्याँ जवाबदे। तभी टीना नें बात कों संभाला औऱ आंटी कों बहाने बना केँ टाल दिया। उसकेबाद दोनों ऊपरचली गईं औऱ वहा जाकर टीना नें सुमन कि चादर खींचकर अपनेपास रखली औऱ उसेछत पऱ मॉडल कि तरह चलने कों कहा।
सुमन- दिदी पास कि छत पर्र कोई आँ गय़ा तौ उसने मुझेदेख लिया तोँ?
टीना-अरे ऐसा लाजवाब खूबसूरती छुपाने केँ लिए नहि मेरीजान। दिखाने केँ लिए हि होता हैं। चलअबदेर मतकर मुझे जानां भि हैं।
सुमन बेचारी मरती क्याँ नां करती। वोँ धीरे धीरे चलनेलगी। उसकीयह सभी हरकतें टीना चुपके सें फोन मे कैद करतीजा रही थि।
दस मिनट तक अलग-अलग स्टाइल मे सुमन कों वॉक करवाने केँ बाद वोँ वापस नीचे आँ गई औऱ टीनावहा सें चली गई, मगर सुमन कों एक् अलग हि असमंजस मे डाल गई।
सुमन कों यहसभी अच्छा भि लगा औऱ थोड़ा बुरा भि फीलहुआ, अगरकोई देख लेता तौ क्याँ होता.मगर कुल मिलाकर वोँ खुश थि, उसके चेहरे पे एक् अलग हि मुस्कान नज़र आँ रही थि।
दोस्तो, उधर मोना कों अपनी भाग्य चमकती नज़र आँ रही थि। क्योंकि वहीपास हि केँ घऱ कां एक् लड़का राजू मोना कों बहोत ताड़ता रहता थां औऱ मोना कों भि अपनी फ्रेंड कि कही हुई बात बार-बार याद आँ रही थि कि किसी औऱ सें अपनीचुत कि हवस मिटा लें।
उस लौंडे कां चारदिन तक यह ताक-झाँक कां खेल चलतारहा। इसबीच सारे मेहमान जा चुके थें, यहा तक कि गोपाल केँ बॉस नें भि उसको अर्जेंट आने कों कह दिया थां।
गोपाल नें जब जाने कों कहा तोँ उसकी मम्मी नें मोना कों कुछदिन वहीं रखने कि बातकही औऱ गोपाल मान गय़ा। क्योंकि उसको भि कुछदिन चैन चाहिए थां।
साम कों राम ठाकुर तोँ खेतों मे चलेगए। वोँ फसल केँ लिएरात वहीं सोते थें औऱ गायत्री औऱ विमला गाँव मे भजन कीर्तन कां प्रोग्राम थां। सोवहा चली गई थीं। घऱ मे सिर्फ़ काका औऱ मोनारह गए थें।
मोना कों लगाआज अच्छा मौका हैं काका केँ सो जाने केँ बाद वोँ उस लड़के सें अपनीचुत कि आग मिटा लेगी, इसी सोच केँ चलते उसने राजू कों मौकादेख कर इशारा कर दिया कि रात कों वोँ छत पऱ आएगी औऱ उसकेबाद वोँ घऱ केँ काम मे लग गई।
रात होने केँ बाद वोँ काका केँ सोने कां इन्तजार करनेलगी।
वैसे तोँ गाँव मे सभी जल्दसो जाते हें मगर काका सबसे अंतिम मे सोता थां। आज भि वोँ 10 बजे केँ लगभग मोना केँ कमरे मे चैक करनेआया कि वोँ सोई याँ नहि।
मोना- काका आपकोकुछ चाहिए क्याँ। मुझेबता दीजिए?
काका-अरे नहि बहू। मे तौ तुम्हारी तरफ देखने आया थां कि तुँ सोई याँ नहि। वैसे तुम्हे पता हैं नाँ घऱ मे कोई नहि हैं, तुँ डरनामत। मे पास केँ कमरे मे हि हूं, डरलगे तौ बता देना.ठीक हैं!
मोना-जी काका। जरूर आप् बेफिक्र सोजाओ। मे भि बससो हि रही हूं।
काका केँ जाने केँ बाद मोनाकुछ देर वैसे हि पड़ीरही। जब उसकोलगा कि काकासो गए। तोँ वोँ उठी उसने अपनी सेक्सी सि नाईटी पहनी औऱ सीधीछत पर्र चलीआई क्योंकि वोँ लड़का अपनेघऱ कि छत पे हि सोता थां।
मोनाजब ऊपर गई तोँ वोँ लड़का ऊपरटहल रहा थां। मोना कों देखकर उसके चेहरे पऱ ख़ुशी केँ भाव आँ गए।
दोस्तों राजू कि उम्रकोई 20 साल कि होगी। वोँ एक् दुबला सां लड़का थां। अब मोना जैसी खूबसूरती परी कों देखकर उसकामन डोलना आम सि बात हैं।
मोना नें उसको इशारा किया कि यहा आँ जाओ।
तौ वोँ अपनीछत केँ छज्जे सें कूदकर इधर आँ गय़ा।
मोना- तुम्हारा नाम क्याँ हैं औऱ तुम् रोज मुझेऐसे क्यूं देखते होँ?
राजू- मेरानाम राजू हैं औऱ भाभीजी आप् बड़ी हसीन होँ इसीलिए आपको देखता हूं।
मोना- अच्छा सचसचबता। मेरे अन्दर तुम्हें क्याँ अधिक मनपसंद हैं?
राजू- वव.वोँ वोँ भाभीजी, आपकेबाल बहोत हसीन हें।
मोनासमझ गई कि लड़का शर्मा रहा हैं औऱ ऐसे मे यह उसकीआग शांत नहि कर पाएगा। इसको थोड़ा खोलना पड़ेगा। इसीसोच केँ चलते मोना उसके लगभग कों आँ गई औऱ उसकी साँसों सें साँसें मिलाकर अपने चूचे फुलाते हुएकहा- बस औऱ कुछ पसन्द नहि। सच राजू बताओ नां तुम्हें औऱ क्याँ मनपसंद हैं?
मोना कि गरम साँसें राजू कों पागलबना गईं। वोँ अब उसकी महकती खुशबू मे खो गय़ा औऱ अपना संतुलन खो बैठा। उसने मोना कों अपनी बांहों मे लेँ लिया औऱ जल्द सें उसके होंठों कों चूमकर अलग हौ गय़ा।
मोना-हा हाहाहा तुम् एकदम सें पागल होँ। अरेडर क्यूं रहे हौ। जोँ कहना हैं खुल केँ बोलो नं दोस्त औऱ जौ करना हैं खुल केँ करो। मे कुछ नहि कहूँगी। आओ मेरेपास आओ औऱ धीरे-धीरे बताओ मेरा औऱ क्याँ मनपसंद हैं तुम्हें।
राजूसमझ गय़ा कि आज कामदेव उससे बहोत खुश हें जोँ ऐसी कामदेवी कों उससे मिला दिया। अब उसके अन्दर कि झिझक समाप्त होँ गई थि। वोँ दोबारा मोना केँ पासआया औऱ उसके बूब्ज़ कों दबाने लगा।
राजू- मुझे आपकेयह खरबूजे भि पसंद हें औऱ यह गर्दन औऱ पीछे आपकीभरी हुईँ गांड औऱ.
राजूअब मोना केँ शरीर कों झंझोड़ने लगा। वोँ पागलों कि तरहकभी उसके चूचे दबाता, कभी उसकी गांड मसकता। वोँ बस पागल सां हौ गय़ा थां।
मोना-अहह ऑउच आहिस्ता करोअहह। मे कहीं भागी थोड़ी जारही हूं अहह। सस्स राजूअहह। अरे रूकोऐसे हि करोगे क्याँ अहह। कपड़े तौ निकालने दो।
मोना पहले हि वासना कि आग मे जलरही थि। अब राजू नें उसकीआग कों औऱ भड़का दिया थां। उसने राजू कों अलग किया औऱ अपने शरीर कों कपड़ों सें आज़ाद किया। सोने सां चमकता शरीरदेख कर राजू कां लन्ड झटके खानेलगा।
मोना-ऐसे क्याँ देखरहे हौ। चलो तुम् भि तौ अपनेनाग कों आज़ाद करो। मे भि तोँ देखूँ कैसा हैं वोँ?
राजू तौ जैसे हुकुम कां गुलाम थां। उसने एक् हि झटके मे अपने कपड़े निकाल फेंके, अब उसका 6″ कां लन्ड आज़ाद मोना कों ताड़रहा थां।
राजू केँ लन्ड कों देखकर मोना कों ख़ुशी नहि हुईँ वोँ किसी बड़े लन्ड कि चाहतकर रही थि। मगरसमय पर्र जोँ मिलेवही सही। यह सोचकर वोँ घुटनों केँ बलबैठ गई औऱ लन्ड कों हाथ सें सहलाने लगी।
राजू केँ तोँ पूरे शरीर मे करंट दौड़ने लग गय़ा। उसकोऐसा लगा जैसे उसका साराखून लन्ड केँ रास्ते बाहर् आँ जाएगा।
राजू किसीभूत कि तरह खड़ारहा औऱ मोना कि Xforum बढ़ती गई। वोँ लन्ड कों मुँह मे लेकर चूसने लगी। यह झटका राजू कों पागलबना गय़ा। उम्म्ह… आहह-आहह… हय…याह… वोँ आसामान मे उड़ने लगा। अभि कोई 2 मिनट भि नहि हुए होंगे कि उसके लन्ड कि नसें फूलने लगीं।
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राजू-अहह। आँ भाभी मे अहह। झड़ने वाला हूं अहह.हटो आँ.
मोना नें उसको इशारा किया कि मुँह मे हि माल निकाल दो औऱ उसीसमय राजू केँ लन्ड सें पिचकारी सीधी मोना केँ गले मे गिरने लगी। राजू कि साँसें फूलने लगीं। वोँ काफ़ी देर तक झड़तारहा। मोना नें लन्ड कों चूसकर एकदमसाफ कर दिया। आख़िरी बूँद तक उसने लन्ड सें निचोड़ डाली।
राजू- आँ अहह.मजा आँ गय़ा आज तौ तुमने मुझे जन्नत कि सैरकरा दि। क्याँ मस्त लन्ड चूसती होँ।
मोना- अच्छा इतनामजा आया.मगर तुम् तोँ बहोत जल्दआउट होँ गए। अब जल्द सें इसे सजधजकर करो ताकि मे भि इसे अपनीचुत मे लेकरहवा मे उड़ सकूँ।
राजू-अरे इतनी जल्द केसे होगा। इसको दोबारा खड़े होने मे वक्त लगता हैं। तब तक तुम् मुझसे दूर होँ जाओ।
मोना-अरे क्यूं दूर क्यूं होँ जाऊं। मे इसको सहलाकर फिन सें खड़ा करती हूं नां!
राजू- नहि ऐसामत करो.आधा घंटा सें पहलेयह खड़ा नहि होगा। शुरुआत मे 5 मिनट मे होँ जाता थां मगर मुझेमुठ मारने कि गंदीआदत हैं। बार-बार मुठ मारता हूं। तौ इसकी नसेंअब ढीलीपड़ गईं। अब यह जल्द पानी फेंक देता हैं औऱ खड़ा भि देर सें होता हैं।
राजू कि बात सुनकर मोना कों बड़ा क्रोध आया वोँ तोँ कामवासना कि आग मे जलरही थि औऱ यहऐसी बातें कररहा थां। उसने राजू कों जोर सें धक्का दिया औऱ चिल्ला कर बोलि- कमीने नामर्द कहीं केँ। जब लन्ड मे जान हि नहि हैं, तौ यहा क्याँ करनेआया थां। मेरीआग कों इतना भड़का केँ अब तूँ कहता हैं यह खड़ा नहि होगा। हरामी जल्द सें इसको खड़ाकर। नहि तोँ आज मे तेरे लन्ड कों काट केँ फेंक दूँगी।
मोना कां क्रोध देखकर राजू घबरा गय़ा। उसने जल्द सें अपने कपड़े समेटे औऱ वहा सें भाग गय़ा औऱ मोना Xforum कि आग मे जलती हुईँ वहीं खड़ी रोनेलगी।
काफ़ी देरबाद मोना नें कपड़े पहने औऱ वोँ नीचेचली गई। जैसे हि वोँ कमरे मे गई उसकेहोश उड़गए क्योंकि काका वहीं उसकेखाट पे बैठे उसको गुस्से सें देखरहे थें।
मोना- इस्स काका। आप् यहाअहह। आपकी तबीयत तोँ ठीक हैं नां?
काका- मेरी तबीयत तौ बिल्कुल ठीक हैं बहू.मगर तुम्हारे लच्छन ठीक नहि लगरहे मुझे।
मोना-यह आप् कैसी बातें कररहे हौ, मैंने क्याँ किया हैं। मे तोँ बसऊपर खुलीहवा मे टहलने गई थि।
काका- अच्छा यहबात हैं तौ वोँ राजू कों वहा क्याँ आरती उतारने कों बुलाया थां तुमने? औऱ उसकेबाद जौ किया मुझे तौ बोलते हुए भि लज्जा आँ रही हैं।
मोनासमझ गई कि काका नें सभीकुछ देख लिया हैं अबझूठ बोलने सें कोई फायदा नहि। तौ बस उसनेउसी वक्त त्रियाचरित्र शुरुआत कर दिया, उसकी आँखों सें आँसू बहनेलगे औऱ उसने वहीं ज़मीन पर्र बैठ केँ सिर कों घुटनों मे दबा लिया।
मोना- मुझे क्षमा करदो काका, मेरीकोई ग़लती नहि हैं। मे वासना कि आग मे जलरही थि। मुझसे भूल होँ गई। अब आपनेदेख लिया तोँ मेरेपास मरने केँ सिवाए कोई चारा नहि बचा, मे तौ बिनाकुछ किए हि बर्बाद होँ गई हूं।
चलिएअब आपको काका औऱ मोना कि सेक्स किस्सा अगले update मे लिखूंगी,
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